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बटर चिकन रेसिपी

सामग्री:

– चिकन (800 ग्राम)

– 4 टमाटर

– 4 हरी मिर्च

– लहसुन 10-12 पीस

– अदरक (1/2 इंच)

– मैदा (25 ग्राम)

– कर्नफ्लोर( 2 चम्मच)

– दही (100 ग्राम)

– नमक (स्वादानुसार)

– हल्दी पाउडर(1 चम्मच)

– मिर्च पाउडर(1 चम्मच)

– धनिया पत्ता (1 चम्मच)

– जीरा पाउडर (1 चम्मच)

– चिकन मशाला(2 चम्मच)

– जीरा पाउडर (आधा चम्मच)

– कसूरी मेथी(1 चम्मच)

– बटर( 50 ग्राम)

बनाने की विधि:

– सबसे पहले चिकन को अच्छे से धो कर एक बड़े कटोरे में रख ले और उसमे कर्नफ्लोर, मैदा, हल्दी,मिर्च,धनिया पाउडर, नमक डालकर उसे अच्छे से मिला लें और उसे 5 मिनट के लिए ढक कर रख दे.

– और तब तक गैस पे पैन चढ़ाये और उसमे तेल डालें.

– फिर उसमे जीरा डालें और थोड़ा सा जीरा जल जाने पे लहसुन और अदरख के टुकड़े को डालकर थोड़ी देर    पकायें.

– फिर टमाटर के टुकड़े को डालकर उसमे हल्का फ्राई कर लें.

– और फिर से मिक्सर में पीस कर पेस्ट बना लें.

– अब गैस पे फिर से पैन/तवा रखे और उसमे थोड़ा सा तेल डालकर चिकन को फ्राई कर लें.

– फिर बचे हुए तेल में थोड़ा सा और तेल मिला के और हल्दी, मिर्च,धनिया पाउडर डालकर उसे भुनें.

– फिर उसमे टमाटर के पेस्ट को डाल दे और उसे भुनें.

– फिर उसमे चिकन फ्राई डालकर चिकन मशाला डाल दें और उसे 10 मिनट के लिए उसे ढक के पकाए.

– फिर कस्तूरी मेथी को धीमी आंच पे हल्का भून लें.

– और उसे हाथ पे मसलकर चिकन में डाल दे और उसमे बटर डाल को भी चारो तरफ से डाल दें.

अब आपकी बटर चिकन तैयार है.

चिकन मोमोज रेसिपी

सामग्री:

– चिकन 250 ग्राम (बोनलेस)

– मैदा (100 ग्राम)

– मक्के का आटा (50 ग्राम)

– हरा प्याज (1/2 कटोरा)

– प्याज 1 (बारीक़)

– हरी मिर्च (4 बारीक़)

– धनिया पत्ता

– काली मिर्च ( 1/4 चम्मच)

– अदरक पेस्ट

– लहसुन पेस्ट ( 1 चम्मच)

– गरम मशाला

– नमक (स्वादानुसार)

– तेल (1 चम्मच)

बनाने की विधि:

– सबसे पहले मैदा और मक्के के आटे को मिला कर रोटी के आटे के जैसा गूंथ लें.

– फिर चिकन के पीसेस को अच्छे से धो ले और उसको मिक्सर में पिस ले.

– और उसे किसी बाउल में निकाल लें.

– फिर उसमे हरे प्याज, मिर्च, प्याज,काली मिर्च, अदरख लहसुन पेस्ट, धनिया के पत्ते,गरम मशाला, नमक और तेल डालकर उसको मिला लें.

– फिर उसे एक तरफ रख दें और आटे तो एक बार और हाथ से मिला दें और उसे एकदम साइज का लोई काट लें.

– फिर उसे गोल गोल बेल लें (आटे को रोटी के जैसा बारे बेल ले और उसे किसी छोटे ग्लास से काट लें.

– फिर उसमे चिकन के मिक्सचर को को दाल दें और उसे बंद कर दें.

– यहां पे हमारी मोमोस पकने के लिए बन गयी.

– अब गैस पे कढ़ाई में पानी गरम करे और उसमे स्टैंड रख दें.

– फिर मोमोस को कांच में रख दें और उसे उस कढ़ाई में रख दें.

फिर ढक्कन हटाए और आपका मोमोस पककर बिलकुल तैयार हो गया होगा और अब उसे चटनी के साथ परोसें.

औफिस जाने वाली महिलाएं ऐसे करें मेकअप

औफिस जाने वाली महिलाओं को घर के कामकाज और दूसरी जिम्मेदारियों से भी दो चार होना पड़ता है. ऐसे में उन्हें मेकअप के लिए ज्यादा समय नहीं मिल पाता. लेकिन ये बहुत जरूरी है कि आप इन व्यस्तताओं में भी खूबसूरत और आकर्षक दिखें. आप खुद को थोड़ा संवार कर औफिस जाएं, क्योंकि यह भी प्रोफेशनल डिकौरम का ही एक हिस्सा है. तो आइए जाने कि औफिस जाने वाली महिलाएं कैसे करें मेकअप.

अच्छा दिखने के लिए क्या करें

जब आप औफिस जा रही हों तो अपनी त्वचा और चेहरे पर ज्यादा कुछ न करें. डार्क आईलाइनर, डार्क शेड लिपस्टिक और आई शैडो के इस्तेमाल से बचें. हल्का और लाइट मोकअप ही करें. आपका तरोताजा और चमकता हुआ चेहरा निश्चित रूप से औफिस के माहौल के लिए सबसे अच्छा रहेगा.

फ्रेश लुक

जब भी औफिस में प्रवेश करें तो आपका एकदम फ्रेश नजर आना बेहद जरूरी है. अगर आप सुस्त और थकी-थकी दिखेंगी तो इससे लोगों पर गलत प्रभाव पड़ेगा. इसलिए आप अपने लुक को लेकर गंभीर रहें.

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किस तरह का हो मेकअप

ज्यादातर औफिस में कौर्नर पर फ्लोरेसंट लाइट और बाकी जगहों पर हल्की हरी लाइट लगी होती है. ऐसे में औफिस के अंदर का माहौल ग्रीनिश डार्क होता है. इसलिए आप ऐसा मेकअप करें, जो इस रोशनी में नजर आए. इसके लिए आप हल्के रंग का ब्लश इस्तेमाल कर सकती हैं. लाल और गुलाबी रंग का इस्तेमाल बिल्कुल न करें. ये आपके स्किन पर काफी भद्दा नजर आएगा.

लिपस्टिक का शेड

कभी भी मिट्टी के रंग का लिपस्टिक न लगाएं. कम रोशनी में यह बहुत ही गंदा दिखेगा. इस मामले में शिमरी लिपस्टिक सबसे अच्छा रहेगा. यह कम रोशनी में चमकदार दिखेगा और आपकी खूबसूरती में भी निखार लाएगा. टाउप और बैगी शेड का भी इस्तेमाल न करें. इसे भी औफिस के लिए ठीक नहीं माना जाता है.

आखों को कैसे बनाएं खास

इसके लिए आप वार्म और लाइट टोन का इस्तेमाल कर सकते हैं. इन रंगों से आखें चमकदार और खूबसूरत नजर आती हैं. आप लाइट वार्म ग्रे, ब्राउन करल और डस्टी रोज शेड्स जैसे रंगों का चुनाव कर सकते हैं.

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अच्छी नींद चाहते हैं तो भूल कर भी ना खाएं ये

सर्दी हो या गर्मी लोग खीरा बड़े ही चाव से खाते हैं. आम तौर पर लोग इसका सेवन सलाद के तौर पर करते हैं. इसमें भरपूर मात्रा में  विटामिन के, एंटीऔक्सीडेंट्स और दिमाग को सेहतमंद रखने वाले पदार्थ पाए जाते हैं. कई घरों में खाने के साथ खीरे का सेवन जरूर किया जाता है. पर रात में खीरा हमारी सेहत के लिए काफी हानिकारक होता है. इस खबर में हम आपको बताएंगे कि रात में खीरा का सेवन क्यों नहीं करना चाहिए.

जानकारों की माने तो रात में खीरे का सेवन नहीं करना चाहिए. ऐसा इसलिए क्योंकि जब आप रात के समय भारी चीजों का सेवन करते हैं तो उन्हें डाइजेस्ट होने में काफी समय लगता है, जिससे नींद का पैटर्न डिस्टर्ब होता है. आमतौर पर लोगों को लगता है कि खीरा आसानी से पच जाता होगा, पर ऐसा है नहीं. खीरा के पाचन में काफी वक्त लगता है. खीरे में पानी की मात्रा बहुत अधिक होती है. खीरा खाने पेट तो जल्दी भर जाता है, लेकिन इससे आपकी नींद डिस्टर्ब होती है.

खासतौर पर जिन लोगों को डाइजेशन की परेशानी होती है उन्हें खीरा के सेवन से बचना चाहिए. ऐसा इसलिए क्योंकि खीरे में एक पावरफुल इंग्रेडिएंट कुकुरबिटा सीन पाया जाता है, जो इनडाइजेशन की समस्या को बढ़ाता है.

आइए अब जाने कि इसे खाने का सही तरीका है क्या

  • रात में खाने के बजाए दिन में इसका सेवन करें. चूंकि इसमें पानी की मात्रा काफी अधिक होती है, खीरा खाने के तुरंत बाद पानी ना पिएं. खीरा खाने के बाद अधिक पानी पीने से खीरे से मिलने वाले न्यूट्रिएंट्स पानी में डाइल्यूट हो जाते हैं और शरीर को इससे अधिक लाभ नहीं पहुंचता है.
  • खाना खाने से करीब 20-30 मिनट पहले खीरा खाना ज्यादा लाभकारी होता है.

कांग्रेस का मास्टर स्ट्रोक ‘प्रियंका गांधी’

राजनीति की रणभेरी अब बज चुकी है. 2019 का आम चुनाव कांग्रेस और भाजपा दोनो के लिये ही जीने मरने का सवाल बन गया है. 3 राज्यों में मिली जीत से कांग्रेस में उत्साह है. वह इस उत्साह को पार्टी और वोटर दोनो के लिये प्रयोग करना चाहती है. यही वजह है कि कांग्रेस ने भी प्रियंका गांधी को मैदान में उतार कर अपना सबसे अहम किरदार सामने कर दिया है. कांग्रेस के पक्ष में बन रही हवा को इस ‘मास्टर स्ट्रोक’ से केवल चुनावी लाभ ही नहीं मिलेगा बल्कि चुनाव के बाद उपजे हालात में नये तालमेल बनाने में भी सहायता मिलेगी. ‘शाहमोदी’ खेमे में भी इससे बेचैनी हो गई है. ऐसे में एक बार फिर से प्रियंका गांधी को लेकर नयेनये मैसेज वायरल होने लगे हैं.

12 जनवरी को जन्मी प्रियंका गांधी 47 साल की हो चुकी हैं. जनता उनमें पूर्व प्रधनमंत्री इंदिरा गांधी की छवि देखती है. इसी वजह से वह हमेशा ही कांग्रेस की स्टार प्रचारक मानी जाती रही हैं. समय समय पर कांग्रेसी नेता और कार्यकर्ता प्रियंका के राजनीति में आने को लेकर मांग भी करते रहे हैं. कई चुनावों में प्रियंका ने अपनी मां सोनिया गांधी और भाई राहुल गांधी के चुनाव प्रचार में हिस्सा भी लिया है. अभी तक प्रियंका गांधी अमेठी और रायबरेली सीटों पर ही प्रचार अभियान को संभालती रही या फिर पर्दे के पीछे रहकर काम करती रही हैं. 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने प्रियंका को राष्ट्रीय महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया है. पहली बार प्रियंका गांधी अमेठी और रायबरेली से बाहर निकल कर चुनाव प्रचार करेंगी.

आकर्षक व्यक्तित्व की धनी

लोकसभा में सबसे ज्यादा सीटे होने के कारण उत्तर प्रदेश बहुत अहम हो जाता है. उम्मीद की जा रही है कि प्रियंका अपनी मां की संसदीय सीट रायबरेली से चुनाव भी लड़ेंगी. प्रियंका का लम्बा छरहरा कद छोटे बाल और साड़ी पहनने का लुक उन्हें दादी इंदिरा के करीब लाता है. वह 5 फिट 7 इंच लंबी हैं. अपने परिवार में वह सबसे लंबी महिला हैं. प्रियंका के अंदर संगठन की क्षमता, राजनीतिक चतुराई और वाकपटुता सबसे अलग है. लोगों से बात करते समय खिलखिला कर हंसना और अपनी बात बच्चों की तरह जिद करके मनवाने की कला प्रियंका को दूसरों से अलग करती है.

सौम्य सहज और आत्मीय दिखने वाली प्रियंका जरूरत पडने पर अपने तेवर तल्ख करना भी जानती हैं. इससे कार्यकर्ता अनुशासन में रहते हैं. वह देश के सबसे बड़े सियासी परिवार की होने के बाद भी सियासी बातें कम करती हैं. विरोधी दल के नेता उनके बारें में कुछ भी कहे पर वह कभी इन नेताओं पर कमेंट नहीं करती. कभी मीडिया कमेंट के लिये कहती भी है तो वह मुस्कुराकर बात को टाल जाती हैं.

उत्साह में है टीम कांग्रेस

प्रियंका को लेकर कई तरह के नारे कार्यकताओं के बीच बहुत मशहूर हैं. इनमें ‘अमेठी का डंका बेटी प्रियंका’ और ‘प्रियंका नहीं यह आंधी है नये युग की इंदिरा गांधी है’ सबसे खास है. 2009 के लोकसभा चुनाव के बाद प्रियंका जब 2012 के विधनसभा चुनाव में प्रचार के लिये आईं तो सबसे पहले इतने दिन बाद आने के लिये माफी मांगी. वह महिलाओं और बच्चों से बेहद करीब से बात करती हैं. उम्रदराज महिलायें जब उनका पैर छूने के लिये आगे बढती हैं तो वह रोक लेती हैं. उनका हाथ अपने सिर पर रख लेती हैं. प्रियंका गांधी के इस प्यार भरे व्यवहार से गांव की महिलायें निहाल हो जाती हैं कई कई दिन तक वह प्रियंका की बातें करती नहीं थकती हैं.

अमेठी रायबरेली में खूब चला जादू

2007 के विधनसभा चुनाव में प्रियंका गांधी ने अमेठी-रायबरेली क्षेत्र में चुनाव प्रचार किया था. उत्तर प्रदेश के इन विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने पूरे प्रदेश की 402 विधानसभा सीटों में से 22 सीटें जीती थीं. अमेठी-रायबरेली क्षेत्र में कुल 10 विधानसभा की सीटे थीं. इनमें से 7 सीटें कांग्रेस ने जीत ली थी. इनमें बछरांवा से राजाराम, संताव से शिव गणेश लोधी, सरेनी से अशोक सिंह, डलमऊ से अजय पाल सिंह, सलोन से शिवबालक पासी, अमेठी से रानी अमिता सिंह और जगदीशपुर से रामसेवक कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुने गये. 10 में से 7 सीटें जीतना कांग्रेस के लिये चमत्कार जैसा था कांग्रेस के लिये यह चमत्कार प्रियंका गांधी वढेरा ने किया था.

प्रियंका गांधी ने इसके पहले 2004 के लोकसभा चुनाव में रायबरेली संसदीय सीट पर चुनाव लड़ रही अपनी मां सोनिया गांधी के चुनाव संचालन को संभाला था. 2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी प्रियंका ने रायबरेली और अमेठी तक अपने को सीमित रखा था. प्रियंका के इस सहयोग से राहुल और सोनिया को पूरे प्रदेश में पार्टी के प्रचार का मौका मिला. इससे कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में 22 सीटों पर जीत हासिल हुई थी. प्रियंका गांधी को कांग्रेस का स्टार प्रचारक माना जाता है. इसी कारण उनको राजनीति में सीधेतौर पर उतरने की मांग कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के द्वारा होती रहती है. चुनावी राजनीति से दूर रहते हुये प्रियंका कांग्रेस का प्रचार करती रही हैं. प्रियंका गांधी की नजरे जनता से सम्पर्क का एक माध्यम है रायबरेली-अमेठी क्षेत्र के कई विधायक प्रियंका को राजनीति में लाने अपनी सीट छोडने की पेशकश कई बार कर चुके हैं कांग्रेस के बड़े नेता कहते हैं प्रियंका के सक्रिय राजनीति में आने का फैसला खुद उनको करना है.

परिवार है सपफलता की धुरी

प्रियंका गांधी की शादी राबर्ट वढेरा के साथ हुई है. उनके एक बेटा रेयान वढेरा और बेटी मिरिया वढेरा है. प्रियंका जब चुनाव प्रचार में जाती हैं तो आमतौर पर बच्चे उनके साथ होते हैं प्रियंका पौलिटिक्स के साथ अपने परिवार का पूरा ध्यान रखती हैं. वह अपनी मां और भाई के सहयोगी की भूमिका में अपने को रखती रही हैं. कई बार प्रियंका बिना कहे ही सारी बात कह जाती हैं. उनका यही अंदाज राहुल से जुदा लगता है. राहुल अपनी बात कहने के लिये भाषण का सहारा लेते हैं. वहीं प्रियंका गांधी जब नाराज होती हैं यह बात से सहमत नहीं होती तो उनके हावभाव से पता चल जाता है गुस्से में प्रियंका का चेहरा तमतमाकर लाल हो जाता है जानकार लोग कहते हैं ऐसे मौके कम ही आते है कार्यकताओं का गुस्सा कम करने के लिये प्रियंका अपनी मुस्कान का सहारा लेती हैं. अपने उपर भी गुस्सा हो जाती हैं. उनकी यह अदा देखकर कार्यकर्ता सबकुछ भूल कर वापस प्रियंका की बात सुनने लगते हैं. प्रियंका की यही सफलता विरोधी दलो के लिये सोचने का विषय बन जाता है. सभी दलों को लगता है कि अगर प्रियंका ने चुनाव प्रचार की कमान संभाल ली तो उनके सामने मुश्किल खड़ी हो जाएगी.

एप्पल मास्क के सौंदर्य लाभ

क्या आप अपनी त्वचा के बारे में दिनभर सोचती रहती हैं? क्या आपकी त्‍वचा थकी हुई और बेजान सी लगने लगी है तो एप्‍पल मास्‍क आपके लिए काफी फायदेमंद हो सकता है. सेब में विटामिन ए, बी, सी और एंटीऔक्‍सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो कि आपकी त्‍वचा को तुरंत ही गंदगी से राहत दिलाने में कारगर होते हैं. अपनी त्वचा पर तुरंत निखार लाने के लिये आप एप्‍पल मास्‍क बना कर लगा सकती हैं. आइये जानते हैं एप्‍पल मास्‍क और उससे मिलने वाले सौंदर्य लाभ के बारे में.

ऐसे बनाएं एप्‍पल मास्‍क

एक सेब लीजिये और उसके गूदे को चेहरे पर पीस कर 20 मिनट लगाइये. इसके बाद चेहरे को पानी से धो लीजिये. धोने के बाद चेहरे पर क्रीम लगा लीजिये. यह मास्‍क हर तरह कि स्‍किन पर काम करता है और लाभ भी पहुंचाता है.

चेहरे से काले धब्‍बे और झाइयां मिटाने के लिये आप आधा सेब काट कर उसका पेस्‍ट बना कर क्रीम वाले दूध के साथ मिक्‍स कर के चेहरे पर लगा सकती हैं.

एप्‍पल मास्‍क के सौंदर्य लाभ

  • एप्‍पल मास्‍क सनबर्न से निजात दिलाते हैं. इसमें ग्‍लाईकोलिक एसिड होता है जो कि त्‍वचा के पोर्स को अंदर से साफ करता है. साथ ही ये त्‍वचा से डेड स्‍किन को साफ कर के त्‍वचा को गोरा बनाता है.
  • झाइयां मिटाने मे इसका कोई जवाब नहीं. साथ ही अगर त्‍वचा पर मुंहासों ने परेशान कर रखा है तो भी एप्‍पल मास्‍क बहुत लाभदायक होता है.
  • रोजाना सेब खाने से झुर्रियां नहीं पड़ती.
  • आंखों के डार्क सर्कल कम करने के लिये आप एप्‍पल का स्‍लाइस काट कर उसे आंखों पर लगा सकती हैं.
  • यह त्वचा पर तेल को भी कम करता है. मुंहासों के लिये एप्‍पल मास्‍क बहुत ही फायदेमंद है. यह त्‍वचा को नमी प्रदान करता है.

नींबू लगाएं बालों को स्वस्थ बनाएं

नींबू न केवल बालों को झड़ने से बचाता बल्कि यह उससे संबंधित कई समस्‍याओं को भी दूर करता है. इसके अलावा नींबू के और भी कई फायदे हैं जैसे नींबू सिर से रूसी साफ करता है, बालों को मजबूत बनाता है. नींबू में विटामिन सी, बी और फास्‍फोरस भरे होते हैं, जिससे बालों को कोई नुकसान नहीं होता और बाल घने बनते हैं. आइये जानते हैं नींबू कैसे बनाते हैं बालों को स्‍वस्‍थ.

  • जब इसे नारियल के तेल में मिला कर लगाया जाए तो यह बालों का झड़ना रोक देता है.
  • अगर आपके बाल ड्राय और बेजान हैं तो, उस पर दही और नींबू का रस मिला कर लगाएं, इससे बालों में चमक आ जाएगी.
  • यदि सिर में खुजली हो रही हो तो नींबू का रस लगाएं, इससे इंफेक्‍शन दूर हो जाएगा.
  • नींबू के रस को कैस्‍टर औयल या औलिव औयल के साथ मिला कर बालों की मसाज करें. फिर 1 घंटे के बाद हल्‍के शैंपू से सिर धो लें. इससे आपको बालों की कई समस्याओं से राहत मिलेगी.
  • अगर बालों को जड़ से मजबूत बनाना है तो उसमें नींबू, शहद और दही मिला कर सिर पर लगा कर मसाज करें.
  • इसे सिर पर लगाने से सिर से अत्‍यधिक तेल निकलना बंद हो जाएगा और स्‍कैल्‍प हमेशा ड्राई रहेगी.
  • नींबू का रस सिर से रूसी कि समस्‍या को भी दूर करता है.
  • अगर बाल मोटे और घने चाहिये तो नींबू के रस के साथ नारियल पानी मिला कर बालों को धोएं.
  • बालों के आखिरी छोर पर नींबू और औलिव औयल लगाइये. इससे आपको दो मुंहे बालों से छुटकारा मिलेगा.
  • अगर आपको अपने बालों को हाईलाइट करना हो, तो भी आप नींबू को उस पर रगड़ कर उसका कलर चेंज कर सकती हैं. अपने बालों के कुछ पट्टियों को कलर करने के लिये नींबू का रस लगाएं. यह एक ब्‍लीचिंग एजेंट है जो बालों का रंग बदल देगा.

ऐसे बनाएं दाल पालक भाजी

सामग्री

– पालक (15-20 पत्‍तियां बारीकी से कटी हुई)

– धुली मूंग दाल (3/4 कप)

– हल्दी पाउडर (1/2 चम्मच)

– हींग (एक चुटकी)

– तेल (2 चम्मच)

– जीरा (1 चम्मच)

– लहसुन (6-8 कलियां  कटी हुई)

– अदरक (1 इंच टुकड़ा)

– ग्रीन मिर्च (2 कटा हुआ)

– प्याज (1 मध्यम कटा हुआ)

– नमक (स्वादानुसार)

– नींबू का रस (1 चम्मच)

बनाने की विधि –

– मूंग दाल को कुकर में हल्‍दी और हींग डाल कर पकाएं.

– फिर एक पैन्‍ में घी या तेल गरम करें.

– एक मिनट के लिए जीरा, लहसुन, अदरक और हरी मिर्च डाल कर सौटे करें.

– फिर प्याज डाल कर हल्का भूरा होने तक पकाएं.

– अब इसमें पालक डाल कर आधा मिनट पकाएं.

– बाद में बची हल्दी पाउडर डाल कर चलाएं.

– दाल डाल कर अच्छी तरह मिक्स करें.

– एक कप पानी और नमक डाल कर चलाएं.

– ऊपर से नींबू का रस निचोड़ कर गरमा गरम सर्व करें.

फिल्म रिव्यू : मनसुख चतुर्वेदी की आत्मकथा

छोटे शहर की मानसिकता और वहां की स्थानीय भाषा के पुट के साथ फिल्मकार सचिन गुप्ता ने एक हास्य फिल्म बनाने का असफल प्रयास किया है. कमजोर पटकथा के चलते एक जानी पहचानी कहानी भी असर नही छोड़ती.

हास्य फिल्म ‘‘मनसुख चतुर्वेदी की आत्मकथा’’ की कहानी  उत्तर प्रदेश के इटावा शहर की है. जहां एक पंडित (सिकंदर खान) के घर जन्में मनसुख चतुर्वेदी (संदीप सिंह) अपने आपको सिनेमा जगत का सुपर स्टार समझते हैं. वह अब तक मुंबई यानी कि बौलीवुड पहुंचे भी नहीं हैं, मगर ईटावा वालों के बीच वह काफी लोकप्रिय हैं. वह वहां स्थानीय थिएटर के साथ जुड़े हुए हैं. उनकी हरकतों से उनके पिता (सिकंदर खान) भी परेशान रहते हैं.

मनसुख मुंबई जाना चाहते हैं, जबकि उनके पिता चाहते हैं कि वह इटावा में रहकर उनका हाथ बटाएं. यहां तक कि मनसुख चतुर्वेदी अपनी प्रेमिका मुनिया पर भी ध्यान नहीं देते. मुनिया (मोनिका) के लिए मनसुख बेकार प्रेमी ही साबित हो रहे हैं. मुनिया एक स्कूल में शिक्षक है और गणित पढ़ाती है. पर मनसुख तो बौलीवुड के सुपर स्टार बनने के सपनों में ही जी रहे हैं.

एक दिन मनसुख के पिता मुनिया को धमकी दे देते हैं कि यदि वह 15 दिन के अंदर मनसुख को सुधारने में सफल नहीं हुई, तो वह मनसुख का विवाह जबरन अपनी पसंद की लड़की से करा देंगे. उसके बाद मुनिया, मनसुख की भगवान कृष्ण के प्रति भक्ति का फायदा उठाते हुए उन्हे सही व गलत का अहसास कराने में सफल हो जाती है.

लेखक व निर्देशक की अपनी कमजोरियों के चलते फिल्म स्तरहीन बनकर रह जाती है. फिल्म की कहानी का आइडिया अच्छा है, मगर पटकथा गड़बड़ा गई. सचिन गुप्ता का निर्देशन भी ठीक नहीं है. फिल्म में तमाम तकनीकी कमियां हैं.

जहां तक अभिनय का सवाल है तो मनसुख के किरदार में संदीप सिंह कहीं से भी फिट नहीं बैठते. महज इटावा की बोलचाल की भाषा के लहजे को पकड़ने के अलावा उनके अभिनय में कुछ भी नहीं है. उनका रूदन व हास्य सब कुछ बहुत ही ज्यादा मेलोड्रामैटिक और लाउड है. शालिनी चौहान की अभिनय प्रतिभा में कोई दम नजर नहीं आता.

डेढ़ घंटे की अवधि वाली फिल्म ‘‘मनसुख चतुर्वेदी की आत्मकथा’’ का निर्माण सचिन गुप्ता व सुषमा गुप्ता ने ‘‘चिलसाग पिक्चर्स’’ के बैनर तले किया है. फिल्म के लेखक व निर्देशक सचिन गुप्ता, कैमरामैन नवीन कुमार व अनुभव कबीर, संगीतकार शिवांग माथुर, गीतकार शयारा अपूर्वा व सुमित त्यागी तथा फिल्म को अभिनय से संवारने वाले कलाकार हैं – संदीप सिंह, अनामिका शुक्ला, शालिनी चौहान, मोनिका, सिकंदर खान, विशाल, अनुष्का, मेघा, सुब्रतो व अन्य.

ठाकरे : नवाजुद्दीन सिद्दिकी का शानदार अभिनय

रेटिंग : दो स्टार

इन दिनों बौलीवुड में बायोपिक फिल्मों का दौर जारी है. इसी दौर में महाराष्ट्र के राजनीतिक दल ‘‘शिवसेना’’ के नेता व सांसद संजय राउत शिवसेना प्रमुख रहे बाल केशव ठाकरे यानी कि बाला साहेब ठाकरे के कृतित्व पर आधारित फिल्म ‘‘ठाकरे’’ लेकर आए हैं, जिसका पहला भाग 25 जनवरी को सिनेमाघरों में पहुंचा है.

बाल केशव ठाकरे अपने समय के सर्वाधिक विवादास्पद इंसान थे. वह महाराष्ट्रियन के लिए समान अधिकार की लड़ाई लड़ने वाले सम्मानजनक इंसान थे. मगर यह फिल्म एक निष्पक्ष व बेहतरीन बायोपिक फिल्म की श्रेणी में नहीं गिनी जा सकती.

फिल्म की शुरुआत होती है लखनऊ में बाबरी विध्वंस केस की सुनवाई के लिए अदालत के अंदर बाला साहेब ठाकरे के आगमन के साथ. अदालत में वकील के सवालों के जवाब के साथ ही कहानी अतीत में जाती है. बाला साहेब ठाकरे मुंबई के एक अखबार मेंकार्टूनिस्ट के रूप में नौकरी कर रहे हैं. ठाकरे अपने कार्टून में सच को व्यंग के साथ पेश करते हैं, पर इससे अखबार के मालिक के सामने समस्या पैदा होती है और बाला साहेब ठाकरे नौकरी से त्यागपत्र देकर मुंबई के ‘ईरोज’ थिएटर में महाराष्ट्यिन यानी कि मराठी भाषी लोगों का अपमान करने वाली फिल्म देखकर वह मराठियों के लिए क्रांति लाने का मन बनाते हैं.

Thackrey

उन्हे लगता है कि मुंबई व महाराष्ट्र पर गैर मराठियों, गुजराती, दक्षिण भारतीयों व गैर महाराष्ट्रिट्यन का ही शासन है. इसलिए वह मराठियों की लड़ाई लड़ने के लिए  ‘मार्मिक’ नामक मराठी भाषा में साप्ताहिक पत्र निकालने का ऐलान करते हैं, जिसका सर्मथन उनके पिता प्रबोधन ठाकरे भी करते हैं. ‘मार्मिक’ के पहले अंक का विमोचन महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री यशवंतरावचौहाण करते हुए बाला साहेब ठाकरे की काफी तारीफ करते हैं. मार्मिक में समाज के सच का चित्रण होता है.

मार्मिक की लोकप्रियता के बाद वह आम लोगों की समस्याओं का निवारण करने लगते हैं. फिर अपने पिता के कहने पर ‘शिवसेना’का गठन करते हैं. राजनीति के साथ समाज सेवा के कार्य शुरू होते हैं. गैर मराठी भाषियों के खिलाफ आंदोलन करवाते हैं.शिवसैनिक हिंसा का सहारा लेते हैं, जिसका बाला साहेब ठाकरे पूरा समर्थन करते हैं. पुलिस विभाग में भी तमाम लोग बाला साहेब ठाकरे का समर्थन करने के साथ साथ उनके साथ हो जाते हैं.

बेलगाम व करवार को महाराष्ट्र में शामिल करने के आंदोलन के दौरान प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के मुंबई आगमन पर उनसे मिलने का बाला साहेब ठाकरे असफल प्रयास करते हैं, पर शिवसैनिक व पुलिस के बीच मुठभेड़ और फिर शिवसैनिकों द्वारा मुंबईशहर में जमकर तोड़फोड़ और आगजनी की जाती है. उस वक्त महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री वसंत राव नाइक का उन्हे मौन समर्थन प्राप्त रहता है. केंद्र सरकार के सख्त रवैये के चलते बाला साहेब ठाकरे को गिरफ्तार किया जाता है, पर मुंबई बंद रहती है.

जार्ज फर्नांडिस जेल में ठाकरे से मिलकर उनकी तारीफ करते हैं कि उन्होंने मुंबई को बंद किया. बीच में एक बार वह मुस्लिम लीग के मंच पर जाकर भाषण देते हैं कि उन्हे किसी के धर्म से परहेज नहीं है, पर उन्हे मिलकर काम करना रहना चाहिए और ईद के साथ शिवाजी जयंती भी मनानी चाहिए. पर बात नहीं बनती. 1966 से शिवसेना की गतिविधियों, आपातकाल के दौरान मुंबई आने पर प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी से मिलकर बाला साहेब ठाकरे अनुशासन के नाम पर आपातकाल का समर्थन कर‘शिवसेना’ पर बैन लगाने के प्रस्ताव को खारिज कराने में सफल हो जाते हैं. मुंबई महानगर पालिका और फिर महाराष्ट्र मेंशिवसेना की सरकार बनने पर मनोहर जोशी द्वारा मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने तक की कहानी है. इसके आगे की कहानी फिल्म के दूसरे भाग में दिखायी जाएगी.

Nawazuddin-Siddiqui

यूं तो बाला साहेब ठाकरे के जीवन व कृतित्व को ढाई घंटे की फिल्म में समेटना असंभव है, मगर संजय राउत की कहानी पर लेखक व निर्देशक अभिजीत पनसे ने एक बेहतरीन प्रचारात्मक फिल्म बनायी है. उन्होंने फिल्म में बाला साहेब ठाकरे के व्यक्तित्व व सोच को सही ढंग से चित्रित करने का सफल प्रयास किया है. पर यह फिल्म बाला साहेब ठाकरे का महिमा मंडन है, इससे इंकार नहीं किया जा सकता.

यूं तो राजनीतिक व्यक्ति पर बनने वाली फिल्म में सच व कूटनीति के बीच रेखा खींचना आसान नहीं होता. पर इस फिल्म में फिल्मकार अभिजीत पनसे ने सच की बजाय कूटनीति को ही महत्व देते हुए बाला साहेब के प्रशंसकों को खुश करने का प्रयास किया है. फिल्म में इसी हिसाब से राजनीतिक घटनाक्रमों को भी पिरोया गया है. फिल्म में लोकतंत्र व राजनीति को लेकर उनकी सोच व पसंद को भी सही ढंग से उकेरा गया है. मगर यह निष्पक्ष व बेहतरीन बायोपिक फिल्म की बजाय प्रचारात्मक फिल्म बनकर उभरती है.

राष्ट्रवाद के नाम पर फिल्म में दक्षिण भारतीयों के खिलाफ ‘‘उठाओ लुंगी बजाओ पुंगी’ जैसा संवाद प्रमुखता से है, तो वहींशिवसैनिकों द्वारा मार्क्सवादी नेता कृष्णा देसाई की हत्या को मील के पत्थर के रूप में चित्रित किया गया है. तो वहीं बाबरी मस्जिद को गिराना व जय श्रीराम के नारों का भी उपयोग है.

फिल्म की विडंबना यह है कि बाला साहेब ठाकरे ने गैर महाराष्ट्यिन के खिलाफ अपनी राजनीतिक पार्टी शुरू की थी और वह इनके खिलाफ आवाज उठाते रहे, पर यह फिल्म ऐसे ही गैर महाराष्ट्रियन लोगों के सहयोग से बनी है, जिस तरह मुंबई के विकास में इन गैर महाराष्ट्यिन का योगदान रहा है.

जहां तक अभिनय का सवाल है तो एक निडर और कुछ भी कर सकने वाले इंसान की छवि वाले बाला साहेब ठाकरे को परदे पर जिस तरह से नवाजुद्दीन सिद्दिकी ने अपने अभिनय से जीवंतता प्रदान की है, उसके लिए वह बधाई के पात्र हैं. नवाजुद्दीन की अभिनय प्रतिभा के बल पर बाला साहेब ठाकरे एक सशक्त चरित्र बनकर उभरते हैं. मीनाताई के किरदार में अमृता राव ने काफी सधा हुआ अभिनय किया है. इंदिरा गांधी का किरदार निभाने वाली अदाकारा पूरी तरह से मात खा गयी हैं. फिल्म में इंदिरागांधी का किरदार महज रोबोट बनकर रह गया है.

लगभग ढाई घंटे की अवधी वाली फिल्म ‘‘ठाकरे’’ का निर्माण ‘वायकौम 18 मोशन पिक्चर्स’, डा श्रीकांत भासी, वर्षा संजय राउत, पुर्वशी संजय राउत व विधिता संजय राउत ने किया है. फिल्म के निर्देशक अभिजीत पनसे, कहानीकार संजय राउत,पटकथा लेखक अभिजीत पनसे, संवाद लेखक अरविंद जगताप व मनोज यादव, संगीतकार रोहन रोहन, संदीप शिरोड़कर,पार्श्वसंगीत अमर मोहिले, कैमरामैन सुदीप चटर्जी तथा फिल्म को अभिनय से संवारने वाले कलाकार हैं – नवाजुद्दीन सिद्दिकी,अमृता राव, सुधीर मिश्रा, अब्दुल कादिर अमीन, लक्ष्मण सिंह राजपूत, अनुष्का जाधव, निरंजन जवीर, डा. सचिन ए जयंत,विशाल सुदर्शनवार, राधा सागर, सतीश अलेकर, आनंद विकास पोटदुखे व अन्य.

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