अयोध्या में गैर विवादित जमीन पर मंदिर निर्माण की पहल मोदी सरकार की कोई अपनी मूल योजना नहीं है. गैर विवादित जगह पर ‘मंदिर शिलान्यास’ के प्रयास पहले भी तमाम बार हो चुके हैं. अंतर यह है कि पहले राम जन्मभूमि न्यास और विश्व हिन्दू परिषद ‘रामजन्म भूमि’ के अलावा किसी जगह पर शिलान्यास को राजी नहीं थी अब वह मोदी सरकार के इस के साथ खडी नजर आ रही है. अगर विवादित स्थल से अलग मंदिर की बात पर राम जन्मभूमि न्यास और विश्व हिन्दू परिषद पहले तैयार होती तो यह मसला पहले हल हो गया होता.

1989 में विवादित स्थल से दूर राममंदिर शिलान्यास के लिये उस समय की केन्द्र की राजीव गांधी सरकार ने इजाजत दे दी थी. यह जगह 313 एकड विवादित भूमि से अलग थी. राम जन्मभूमि न्यास, विश्व हिन्दू परिषद और भाजपा के कुछ नेता राजीव गांधी की बात से सहमत नहीं थे. उनका तर्क था कि हिन्दू समाज को राममंदिर निर्माण केवल रामजन्म भूमि की जगह पर ही स्वीकार होगा. वह चुनाव का साल था. भाजपा राममंदिर के आंदोलन को लेकर आगे चल रही थी. राजीव गांधी की चुनाव में हार हुई. सरकार के सत्ता से बाहर होने के कारण राजीव गांधी उस दिशा में आगे प्रयास नहीं कर पाये.

1989 के लोकसभा चुनाव में बाद में केन्द्र में वीपी सिंह की सरकार बनी. 1991 में चन्द्रशेखर के प्रधनमंत्री कार्यकाल में भी इस योजना पर काम हुआ पर सफलता नहीं मिली. उस समय भी रामजन्मभूमि न्यास और विश्व हिन्दू परिषद अपनी इस बात पर अडी थी कि विवादित स्थल से अलग शिलान्यास का कोई मतलब नहीं है.

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