मनसे प्रमुख राज ठाकरे के बेटे अमित की शादी साल 2019 की पहली शाही और चर्चित शादी थी जिसमें राजनीति फिल्म खेल और कौरपोरेट की वे तमाम हस्तियां शामिल हुईं जिनके नाम ही काफी होते हैं मसलन महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस एनसीपी नेता अजीत पवार, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी अमिताभ बच्चन और बोलीबुड के तीनों खान सहित सचिन तेंदुलकर और मुकेश अंबानी के अलावा रतन टाटा. हस्तियों की इस सूची में वे तमाम नाम और चेहरे शामिल हैं जिनके होने भर से किसी भी महफिल में रौनक आ जाती है. इस शादी की एक और खास बात शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे की परिवार सहित मौजूदगी थी जिसने एहसास करा दिया कि इन दोनों ठाकरे के मतभेद राजनैतिक हैं पारिवारिक नहीं.

अमित की शादी मुंबई की उभरती फेशन डिजाइनर मिताली बोरुदे से हुई है जो उनकी दोस्त भी हैं और दोनों लंबे वक्त से डेट पर थे. लोअर परेल के एक नामी होटल में हुई इस शादी के एक और खास मेहमान बाबासाहेब पुरंदर थे जिन्हें हाल ही में पद्म विभूषण के खिताब से नवाजा गया है. गौरतलब है कि मिताली के पिता संजय बोरुदेमुंबई के जाने माने सर्जन हैं.

इस शादी और जमावड़े के अपने सियासी माने भी हैं. ठाकरे बंधुओं ने लोकसभा चुनाव के पहले अपनी ताकत, रसूख और पहुंच का भी एहसास करा दिया है कि उन्हें कमतर आंकने की भूल न की जाये. महाराष्ट्र की राजनीति का यह वह दौर जिसमें भाजपा शिवसेना के 2014 की तरह साथ लड़ने में सस्पेंस बना हुआ है. इससे कहा जा रहा है कि दोनों ही पार्टियों को नुकसान होगा और कांग्रेस – एनसीपी गठबंधन हाट लूट ले जाएगा. हालांकि हाल ही में महाराष्ट्र सरकार द्वारा शिवसेना के संस्थापक बाला साहेब ठाकरे का स्मारक बनाने के फैसले से उद्धव और राज के तेवर थोड़े नर्म पड़े हैं लेकिन वे इतने नर्म नहीं कहे जा सकते कि दोनों शाह – मोदी की जोड़ी के आगे नतमस्तक हो जाएंगे. ये दोनों ही भाजपा और मोदी पर लगातार हमलावर रहे हैं.

राज ठाकरे ने अपने बेटे की शादी में लगभग सभी सियासी हस्तियों को आमंत्रित किया था. मोदी मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों सहित लाल कृष्ण आडवाणी के अलावा राहुल गांधी को हल्दी चावल देने राज ठाकरे ने अपने दो खास दूतों को भेजा था लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उन्होने आमंत्रित करना जरूरी नहीं समझा तो सहज समझा सकता है कि वे मोदी पर इतनी खार खाये बैठे हैं कि राजनैतिक शिष्टाचार निभाना भी उन्होने जरूरी नहीं समझा. जब एक पत्रकार ने उनसे यह पूछा था कि आप मोदी जी को अपने बेटे की शादी में क्यों नहीं बुला रहे तो बिना अचकचाए राज ठाकरे ने तल्ख लहजे में बड़ा दिलचस्प जबाब सवाल करने के अंदाज में यह दिया था कि क्या वे (मोदी) विवाह बंधन में विश्वास करते हैं.

राज ठाकरे की इस हाजिर जबाबी पर मौजूदा पत्रकार चौंके थे और लाजबाब भी हो गए थे जो यह मानकर चल रहे थे कि इस नाजुक सवाल पर वे घिर गए हैं. लेकिन इस जबाब से उन्हें याद आया कि मौका ताड़ते राज ठाकरे ने नरेंद्र मोदी की कमजोरी या दुखती नस जो भी कह लें पर हाथ रख दिया है जिन्होने अपनी पत्नी जसोदा बेन को शादी के कुछ दिनों बाद ही त्याग दिया था और गुजरात का मुख्यमंत्री और फिर देश का प्रधानमंत्री बनने के बाद भी कभी उनकी सुध लेने की भी मानवयीता नहीं निभाई जिसे आम बोलचाल की भाषा में इंसानियत कहा जाता है.

आमतौर पर शादी विवाह जैसे शुभ अवसरों पर विधवाओं और परित्यक्ताओं को बुलाना शुभ नहीं समझा जाता उसी रिवाज को पत्नी त्यागने बाले पति को न बुलाकर राज ठाकरे ने एक नया रिवाज गढ़ दिया है. वैसे भी राज ठाकरे जोखिम उठाने से चूकते नहीं हैं और अक्सर कामयाब भी रहते हैं. जब वे चचेरे भाई उद्धव से अलग हुये थे तो मानने बालों ने मान लिया था कि राज ठाकरे ने सियासी ख़ुदकुशी कर ली है और साथ ही शिवसेना का भी वजूद खतरे में डाल दिया है लेकिन जल्द ही उन्होने ये कयास झुठला दिये. उनकी पार्टी महाराष्ट्र नव निर्माण सेना एक संतोषजनक स्थिति में है और शिवसेना का अस्तित्व भी बरकरार है और अब तो दोनों भाजपा की नाक में दम किए हुये हैं.

अमित की शादी से ठाकरे परिवार की एकता साबित हुई है और राज ठाकरे की ठसक भी कायम है जो पूरी शादी में हर किसी से विनम्रता से पेश आए. बेटे की शानदार शादी किसी भी पिता का सपना होती है जिसके जरिये वह अपनी किए धरे को दिखाता और भुनाता है यही राज ठाकरे ने किया और देश की सबसे बड़ी हस्ती को नजरंदाज करते यह भी साबित कर दिया कि कोई भी महफिल, जलसा या समारोह बिना उनके भी रंगीन हो सकता है.

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