Download App

कच्ची धूप

‘‘सुनिए, केशव का फोन आया था, शालिनी की शादी है अगले महीने. सब को आने को कह रहा था,’’ देररात फैक्टरी से लौटे राघव को खाना परोसते हुए सुधा ने औपचारिक सूचना दी.

‘‘ठीक है, तुम और सौम्या हो आना. मेरा जाना तो जरा मुश्किल होगा. कुछ रुपएपैसे की जरूरत हो तो पूछ लेना, आखिर छोटा भाई है तुम्हारा,’’ राघव ने डाइनिंग टेबल पर बैठते हुए कहा.

‘‘रुपएपैसे की जरूरत होगी, तभी इतने दिन पहले फोन किया है, वरना लड़का देखने से पहले तो राय नहीं ली,’’ सुधा ने मुंह बिचकाते हुए कहा.

सुधा का अपने मायके में भरापूरा परिवार था. उस के पापा और चाचा दोनों ही सरकारी सेवा में थे. बहुत अमीर तो वे लोग नहीं थे मगर हां, दालरोटी में कोई कमी नहीं थी. सुधा दोनों परिवारों में एकलौती बेटी थी, इसलिए पूरे परिवार का लाड़प्यार उसे दिल खोल कर मिलता था. चाचाचाची भी उसे सगी बेटी सा स्नेह देते थे. उस का छोटा भाई केशव और बड़ा चचेरा भाई लोकेश दोनों ही बहन पर जान छिड़कते थे.

सुधा देखने में बहुत ही सुंदर थी. साथ ही, डांस भी बहुत अच्छा करती थी. कालेज के फाइनल ईयर में ऐनुअल फंक्शन में उसे डांस करते हुए मुख्य अतिथि के रूप में पधारे बीकानेर के बहुत बड़े उद्योगपति और समाजसेवक रूपचंद ने देखा तो उसी क्षण अपने बेटे राघव के लिए उसे पसंद कर लिया.

रूपचंद का मारवाड़ी समाज में बहुत नाम था. वे यों तो मूलरूप से बीकानेर के रहने वाले थे मगर व्यापार के सिलसिले में कोलकाता जा कर बस गए थे. हालांकि, अपने शहर से उन का नाता आज भी टूटा नहीं था. वे साल में एक महीना यहां जरूर आया करते थे और अपने प्रवास के दौरान बीकानेर ही नहीं, बल्कि उस के आसपास के कसबों में भी होने वाली सामाजिक व सांस्कृतिक गतिविधियों में शामिल हुआ करते थे. इसी सिलसिले में वे नोखा के बागड़ी कालेज में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित थे.

‘सुधा की मां, तुम्हारी बेटी के तो भाग ही खुल गए. खुद रूपचंद ने मांगा है इसे अपने बेटे के लिए,’ पवन ने औफिस से आ कर शर्ट खूंटी पर टांगते हुए कहा.

‘मेरी प्यारी बहनिया बनेगी दुलहनिया…’ कह कर केशव ने सुधा को चिढ़ाया तो सुधा ने लोकेश की तरफ मदद के लिए देखा.

‘सज के आएंगे दूल्हे राजा, भैया राजा, बजाएगा बाजा…’ लोकेश ने हंसते हुए गाने को पूरा किया तो सुधा शर्म के मारे चाची के पीछे जा कर छिप गई. मां ने बेटी को गले लगा लिया. और पूरे परिवार ने एकसाथ मिल कर शादी की तैयारियों पर चर्चा करते हुए रात का खाना खाया.

2 कमरों के छोटे से घर की बेटी सुधा जब आलीशान बंगले की बहू बन कर आई तो कोठी की चकाचौंध देख कर उस की आंखें चौंधिया गईं. उस के घर जितनी बड़ी तो बंगले की लौबी थी. हौल की तो शान ही निराली थी. महंगे सजावटी सामान घर के कोनेकोने की शोभा बढ़ा रहे थे. सुधा हर आइटम को छूछू कर देख रही थी. हर चीज उसे अजूबा लग रही थी. ससुराल के बंगले के सामने सुधा को अपना घर ‘दीन की बालिका’ सा नजर आ रहा था.

पवन ने बेटी की शादी अपने समधी की हैसियत को देखते हुए शहर के सब से महंगे मैरिज गार्डन में की थी, मगर पगफेरे के लिए तो सुधा को अपने घर पर ही जाना था. उसे बहुत ही शर्म आ रही थी राघव को उस में ले जाते हुए.

सुधा जैसी सुंदर लड़की को पत्नी के रूप में पा कर राघव तो निहाल ही हो गया. उस के साथ कश्मीर में हनीमून के 15 दिन कैसे बीत गए, उसे पता ही नहीं चला. रूपचंद ने जब कामधंधे के बारे में याद दिलाया तब कहीं जा कर उसे होश आया. वहीं अपने मायके के परिवार में हवाईयात्रा कर हनीमून पर जाने वाली सुधा पहली लड़की थी. यह बात आज भी उसे गर्व का एहसास करा जाती है.

खूबसूरत तो सुधा थी ही, पैसे की पावर ने उस का दिमाग सातवें आसमान पर पहुंचा दिया. रूपचंद की बहू बन कर वह अपनेआप को अतिविशिष्ट समझने लगी थी. सुधा अपनी ससुराल के ऐशोआराम और रुतबे की ऐसी आदी हुई कि अब उस का नोखा जाने का मन ही नहीं करता था. उसे मायके के लोग और वहां का घर बहुत ही हीन लगने लगे. उस ने धीरेधीरे उन से दूरी बनानी शुरू कर दी.

जब भी नोखा से किसी का फोन आता, तो उसे लगता था जैसे किसी तरह की मदद के लिए ही आया है और वह बहुत ही रुखाई से उन से बात करती थी. केशव भी सब समझने लगा था, वह बहुत जरूरी हो, तो ही बहन को फोन करता था. लोकेश तो उस के बदले रवैये से इतना आहत हुआ कि उस ने सुधा से बात करनी ही बंद कर दी.

शादी के बाद 1-2 बार तो मां के बुलाने पर सुधा राखी बांधने नोखा गई मगर उस का व्यवहार ऐसा होता था मानो वहां आ कर उस ने मायके वालों पर एहसान किया हो. बातबात में अपनी ससुराल की मायके से तुलना करना मां को भी कमतरी का एहसास करा जाता था. एक बार सुधा अपनी रौ में कह बैठी, ‘मेरा जितना पैसा यहां राखी बांधने आने पर खर्च होता है उतने में तो केशव के सालभर के कपड़ों और जूतों की व्यवस्था हो जाए. नाहक मेरा टाइम भी खराब होता है और तुम जो साड़ी और नकद मुझे देते हो, उसे तो ससुराल में दिखाते हुए भी शर्म आती है. अपनी तरफ से पैसे मिला कर कहना पड़ता है कि मां ने दिया है.’ यह सुन कर मां अवाक रह गईं. इस के बाद उन्होंने कभी सुधा को राखी पर बुलाने की जिद नहीं की.

ये भी पढ़ें- किसको कहे कोई अपना

लोकेश की शादी में पहली बार सुधा राघव के साथ नोखा आई थी. उस के चाचा अपने एकलौते दामाद की खातिरदारी में पलकपांवड़े बिछाए बैठे थे. वे जब उन्हें लेने स्टेशन पर पहुंचे तो उन्हें यह जान कर धक्का सा लगा कि सुधा ने नोखा के बजाय बीकानेर का टिकट बनवाया है. कारण था मायके के घर में एसी का न होना. उन्होंने कहा भी कि आज ही नया एसी लगवा देंगे मगर अब सुधा को तो वह घर ही छोटा लगने लगा था. अब घर तो रातोंरात बड़ा हो नहीं सकता था, इसलिए अपमानित से चाचा ने माफी मांगते हुए राघव से कहा, ‘दामाद जी, घर बेशक छोटा है हमारा, मगर दिल में बहुत जगह है. आप एक बार रुक कर तो देखते.’ राघव कुछ कहता इस से पहले ही ट्रेन स्टेशन से रवाना हो चुकी थी.

सुधा ठीक शादी वाले दिन सुबह अपनी लग्जरी कार से नोखा आई और किसी तरह बरात रवाना होने तक रुकी. जितनी देर वह वहां रुकी, सारा वक्त अपनी कीमती साड़ी और महंगे गहनों का ही बखान करती रही. बारबार गरमी से होने वाली तकलीफ की तरफ इशारा करती और एसी न होने का ही रोना रोती रही. सुधा की मां को बेटी का यह व्यवहार बहुत अखर रहा था.

हद तो तब हो गई जब सौम्या पैदा होने वाली थी. सामाजिक रीतिरिवाजों के चलते सुधा की मां ने उसे पहले प्रसव के लिए मायके बुला भेजा. कोलकाता जैसे महानगर की आधुनिक सुविधाएं छोड़ कर नोखा जैसे छोटे कसबे में अपने बच्चे को जन्म देना नईनई करोड़पति बनी सुधा को बिलकुल भी गवारा नहीं था, मगर मां के बारबार आग्रह करने पर, सामाजिक रीतिरिवाज निभाने के लिए, उसे आखिरकार नोखा जाना ही पड़ा.

ये भी पढ़ेें- भेडि़या और भेड़

सुधा की डिलीवरी का अनुमानित समय जून के महीने का था. उस ने पापा से जिद कर के, आखिर एक कमरे में ही सही, एसी लगवा ही लिया. सौम्या के जन्म के बाद घरभर में खुशी की लहर दौड़ गई. हर कोई गोलमटोल सी सौम्या को गोदी में ले कर दुलारना चाहता था मगर सुधा ने सब की खुशियों पर पानी फेर दिया. यहां भी उस का अपनेआप को अतिविशिष्ट समझने का दर्प आड़े आ जाता. वह किसी को भी सौम्या को छूने नहीं देती थी, कहती थी, ‘गंदे हाथों से छूने पर बच्ची को इन्फैक्शन हो जाएगा.’

सौम्या के महीनेभर की होते ही सुधा उसे ले कर कोलकाता आ गई. इस के बाद केशव की शादी पर ही सुधा अपने मायके गई थी.

सुधा ने सौम्या को बहुत ही नाजों से पाला था. वह उसे न तो कहीं अकेले भेजती थी और न ही किसी से मेलजोल रखने देती थी. स्कूल जाने के लिए भी अलग से गाड़ी की व्यवस्था कर रखी थी सौम्या के लिए.

यों अकेले पलती सौम्या साथी के लिए तरसने लगी. वह सोने के पिंजरे में कैद चिडि़या की तरह थी जिस के लिए खुला आसमान केवल एक सपना ही था. वह उड़ना चाहती थी, खुली हवा में सांस लेना चाहती थी मगर सुधा ने उसे पंख खोलने ही नहीं दिए थे. उसे बेटी का साधारण लोगों से मेलजोल अपने स्टेटस के खिलाफ लगता था. हां, सौम्या के लिए खिलौनों और कपड़ों की कोई कमी नहीं रखी थी सुधा ने.

धीरेधीरे वक्त के पायदान चढ़ती सौम्या ने अपने 16वें साल में कदम रखा. इसी बीच केशव एक प्रतिष्ठित डाक्टर बन चुका था. वह नोखा छोड़ कर अब बीकानेर शिफ्ट हो गया था, वहीं लोकेश एक पुलिस अधिकारी बन कर क्राइम ब्रांच में अपनी सेवाएं दे रहा था. दोनों भाइयों की आर्थिक स्थिति सुधरने से अब सुधा के मन में उन के लिए थोड़ी सी जगह बनी थी, मगर इतनी भी नहीं कि वह हर वक्त मायके के ही गुण गाती रहे. जबजब सुधा को कोई जरूरत आन पड़ती थी, वह अपने भाइयों से मदद अवश्य लेती थी. मगर काम निकलने के बाद वह उन्हें मक्खी की तरह बाहर निकाल फेंकती थी. लोकेश और केशव उस के स्वभाव को जान चुके थे, इसलिए वे उस का बुरा भी नहीं मानते थे और जरूरत पड़ने पर बहन के साथ खड़े होते थे.

अपनी ममेरी बहन शालिनी की शादी में जाने के लिए सौम्या का उत्साह देखते ही बनता था. उसे याद ही नहीं कि वह पिछली बार ननिहाल साइड के भाईबहनों से कब मिली थी. उन के साथ बचपन में की गई किसी भी शरारत या चुहलबाजी की कोई धुंधली सी भी याद उस के जेहन में नहीं आ रही थी. बड़े होने पर भी मां कहां उसे किसी से भी कौन्टैक्ट रखने देती हैं. हां, सभी रिश्तेदारों ने व्हाट्सऐप पर ‘हमारा प्यारा परिवार’ नाम से एक फैमिली गु्रप बना रखा था, उसी पर वह सब को देखदेख कर अपडेट होती रहती थी. ‘पता नहीं वहां जा कर सब को पहचान पाऊंगी या नहीं, सब के साथ ऐडजस्ट कर पाऊंगी या नहीं, क्याक्या बातें करूंगी’ आदि सोचसोच कर ही सौम्या रोमांचित हुई जा रही थी.

सौम्या को यह देख कर आश्चर्य हो रहा था कि अपनी एकलौती भतीजी की शादी में जाने को ले कर उस की मां बिलकुल भी उत्साहित नहीं है. जहां सौम्या ने महीनेभर पहले से ही शादी में पहने जाने वाले कपड़ों, फुटवियर और मैचिंग ज्वैलरी की शौपिंग करनी शुरू कर दी थी, वहीं सुधा अभी तक उदासीन बैठी थी. उस ने मां से कहा भी, मगर सुधा ने यह कह कर उस के उत्साह पर पानी फेर दिया कि अभी तो बहुत दिन बाकी हैं, कर लेंगे तैयारी. शादी ही तो हो रही है इस में क्या अनोखी बात है. मगर यौवन की दहलीज पर खड़ी सौम्या के लिए शादी होना सचमुच ही अनोखी बात थी.

सौम्या बचपन से ही देखती आई है कि मां उस के लोकेश और केशव मामा से ज्यादा नजदीकियां नहीं रखतीं. मगर अब तो उन की एकलौती भतीजी की शादी थी. मां कैसे इतनी उदासीन हो सकती हैं?

खैर, शादी के दिन नजदीक आए तो सुधा ने शालिनी को शादी में देने के लिए सोने के कंगन खरीदे, साथ ही 4 महंगी साडि़यां भी. सौम्या खुश हो गई कि आखिर मां का अपनी भतीजी के लिए प्रेम जागा तो सही मगर जब उस ने सुधा को एक बड़े बैग में उस के पुराने कपड़े भरते देखा तो उस से रहा नहीं गया. उस ने पूछ ही लिया, ‘‘मां, मेरे पुराने कपड़े कहां ले कर जा रही हो?’’

‘‘बीकानेर ले जा रही हूं, तुम तो पहनती नहीं हो, वहां किसी के काम आ जाएंगे,’’ सुधा ने थोड़ी लापरवाही और थोड़े घमंड से कहा.

‘‘मगर मां किसी को बुरा लगा तो?’’ सौम्या ने पूछा.

‘‘अरे, जिसे भी दूंगी, वह खुश हो जाएगा. इतने महंगे कपड़े खरीदने की हैसियत नहीं है किसी की,’’ सुधा अपने रुतबे पर इठलाई.

‘‘और ये आप की ड्राईक्लीन करवाई हुई पुरानी साडि़यां? ये किसलिए?’’ सौम्या ने फिर पूछा.

‘‘अरे, मैं ने पहनी ही कितनी बार हैं? इतनी महंगी साडि़यां भाभी ने तो कभी देखी भी नहीं होंगी. बेचारी पहन कर खुश हो जाएगी,’’ सुधा एक बार फिर इठलाई. वह अपनेआप को बहुत ही महान और दरियादिल समझे जा रही थी, मगर सौम्या को यह सब बिलकुल भी अच्छा नहीं लग रहा था. वह पुराने कपड़ों को बीकानेर न ले जाने की जिद पर अड़ी रही. आखिरकार उस की जिद पर वह पुराने कपड़ों से भरा बैग सुधा को वहीं कोलकाता में ही छोड़ना पड़ा.

शालिनी की शादी में सौम्या ने अपने ममेरे भाईबहनों के साथ बहुत मस्ती की. उस ने पहली बार प्यार और स्नेह के माने जाने थे. उस ने जाना कि परिवार क्या होता है और फैमिली बौंडिंग किसे कहते हैं. दिल के एक कोने में प्यार की कसक लिए सौम्या लौट आई अपनी मां के साथ फिर से उसी सोने के पिंजरे में जहां उस के लिए सुविधाएं तो मौजूद हैं मगर उसे अपने पंख अपनी इच्छा से फड़फड़ाने की इजाजत नहीं थी.

सौम्या का दिल अब इन बंधनों को तोड़ने के लिए मचलने लगा. जितना सुधा उसे आम लोगों से दूर रखने की कोशिश करती, सौम्या उतनी ही उन की तरफ खिंचती चली जाती. उस के मन में सुधा और उस के लगाए बंधनों के प्रति बगावत जन्म लेने लगी.

सौम्या ने अपनी स्कूल की पढ़ाई खत्म कर के कालेज में ऐडमिशन ले लिया था. सुधा ने बेटी को कालेज आनेजाने के लिए नई कार खरीद दी. मगर जब तक सौम्या ठीक से गाड़ी चलाना नहीं सीख लेती, उस के लिए किशोर को ड्राइवर के रूप में रखा गया. किशोर लगभग 30 वर्षीय युवक था. वह शादीशुदा और एक बेटे का पिता था. मगर देखने में बहुत ही आकर्षक और बातचीत में बेहद स्मार्ट था. रोज साथ आतेजाते सौम्या का किशोरमन किशोर की तरफ झुकने लगा. वह उस की लच्छेदार बातों के भंवरजाल में उलझने लगी.

एक रोज बातोंबातों में सौम्या को पता चला कि 4 दिनों बाद किशोर का जन्मदिन है. सौम्या ने सुधा से कह कर उस के लिए नए कपड़ों की मांग की. 4 दिनों बाद जब किशोर सौम्या को कालेज ले जाने के लिए आया तो सुधा ने उसे जन्मदिन की बधाई देते हुए राघव के पुराने कपड़ों से भरा बैग थमा दिया. किशोर ने बिना कुछ कहे वह बैग सुधा के हाथ से ले लिया, मगर सौम्या को किशोर की यह बेइज्जती जरा भी रास नहीं आई. उस ने कालेज जाते समय रास्ते में ही किशोर से गाड़ी मार्केट की तरफ मोड़ने को कहा और एक ब्रैंडेड शोरूम से किशोर के लिए शर्ट खरीदी. शायद वह अपनी मां द्वारा किए गए उस के अपमान के एहसास को कम करना चाहती थी. किशोर ने उस की यह कमजोरी भांप ली और वक्तबेवक्त उस के सामने खुद को खुद्दार साबित करने की जुगत में रहने लगा.

धीरेधीरे किशोर उस के दिल में जगह बनाता चला गया और प्यार की प्यासी सौम्या उस प्यार के सैलाब में बहती चली गई. अब अकसर ही सौम्या अपना कालेज बंक कर के किशोर से साथ लौंग ड्राइव पर निकल जाती थी. कई बार दोनों कईकई घंटे शहर से दूर निर्जन रिसोर्ट पर एकसाथ अकेले बिताने लगे थे. किशोर का जादू सौम्या के सिर चढ़ कर बोलने लगा था. मगर सुधा इस तरफ से बिलकुल लापरवाह थी. उस ने सौम्या के बहकने के अंदेशे के कारण ही उस से लगभग दोगुनी उम्र के किशोर को ड्राइवर रखा था, मगर यहीं वह गलत निकली. वह भूल गई थी कि स्त्रीपुरुष का रिश्ता हर जाति, धर्म और उम्र से परे होता है और फिर सौम्या जैसी लड़की के लिए तो फिसलना और भी आसान था क्योंकि उस ने तो पहली बार ही किसी पुरुष का संसर्ग पाया था.

किशोर अब सौम्या के लिए ‘किस्सू’ बन चुका था. एक दिन सौम्या ने किशोर के साथ अपने अंतरंग लमहों की कुछ सैल्फियां लीं. चलती गाड़ी में सौम्या वे सैल्फियां किशोर को व्हाट्सऐप पर भेज रही थी, मगर जल्दबाजी में कौन्टैक्ट नेम किस्सू की जगह केशव सिलैक्ट हो गया. जब तक सौम्या को अपनी इस ब्लंडर मिस्टेक का एहसास हुआ, एक फोटो केशव मामा को सैंड हो चुका था. उस ने हड़बड़ाहट में उसे कैंसिल करने की कोशिश की, मगर लेटैस्ट मोबाइल हैंडसैट और इंटरनैट पर 4जी की स्पीड, भला फोटो को अपलोड होते कोई देर लगती है.

और फिर वही हुआ जिस का डर था. सौम्या की फोटो देखते ही केशव का माथा ठनक गया. उस ने तुरंत सुधा को फोन कर के सौम्या की इस हरकत की जानकारी दी. मगर सुधा ने भाई को ही डांट दिया. वह मान ही नहीं सकती थी कि सौम्या जैसी हाई क्लास लड़की का एक ड्राइवर के साथ कोई संबंध हो सकता है. जब केशव ने उसे सौम्या की फोटो भेजी तब जा कर सुधा को मानना पड़ा कि पानी शायद सिर के ऊपर से गुजर चुका है. केशव ने उसे मामले की नजाकत और सौम्या की किशोरवय को देखते हुए अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी. मगर सुधा अपना आपा खो चुकी थी. उसे सौम्या का यह भटकाव अपनी परवरिश का अपमान लग रहा था. वह यह सोच कर तिलमिला उठी थी कि उस के रुतबे के सामने किशोर ने यह हिमाकत कर के उसे आईना दिखा दिया है.

तैश में आ कर सुधा ने किशोर को नौकरी से निकाल दिया. सुधा की इस हरकत ने सौम्या को और भी अधिक बागी बना दिया. उस ने घर में तांडव मचा दिया और खानापीना बंद कर दिया. राघव ने भी उसे किशोर के शादीशुदा और बालबच्चेदार होने का हवाला देते हुए समझाने की बहुत कोशिश की, मगर कहते हैं कि प्यार अंधा होता है. सौम्या ने किसी की एक न सुनी और एक दिन चुपचाप घर से कुछ रुपएगहने चुरा कर किशोर के साथ भाग गई.

सुधा को जब पता चला तो उस के पैरों तले जमीन खिसक गई. उस ने आननफानन भाई लोकेश को फोन लगा कर सारी बात बताई. लोकेश ने सौम्या को तलाश करने में अपनी पूरी ताकत झोंक दी. उस ने कोलकाता के संबंधित थानाधिकारी से संपर्क कर के किशोर के फोटो हर थानाक्षेत्र में भिजवा दिए. साथ ही, दोनों को उन के मोबाइल नंबर की लोकेशन के आधार पर ढूंढ़ने की भी कोशिश की, मगर दोनों के मोबाइल स्विच औफ आ रहे थे. तब केशव की टीम ने किशोर के परिवार पर नजर रखनी शुरू की. किशोर की पत्नी से संपर्क करने पर पता चला कि वह स्वयं भी कभी इसी तरह उस के हनी ट्रैप का शिकार हुई थी.

पुलिस द्वारा किशोर की पत्नी और उस के मांबाप के फोन लगातार ट्रैस किए जा रहे थे. सौम्या के नाम को इस सारे घटनाक्रम में गुप्त ही रखा गया था. आखिरकार पुलिस की मेहनत रंग लाई और लगभग एक महीने की भागदौड़ के बाद सौम्या को किशोर के साथ भोपाल के रेलवेस्टेशन से गिरफ्तार कर लिया गया. सौम्या के साथ लाए पैसे जब खत्म हो गए तो किशोर ने उस के सारे गहने बेच दिए. सबकुछ खत्म होने के बाद अब वह सौम्या को ही बेचने की जुगाड़ में था कि पकड़ा गया. मामा को देखते ही घबराई हुई सौम्या दौड़ कर उस से लिपट गई. अब तक उस के सिर से भी किशोर के प्यार का बुखार उतर चुका था.

लोकेश सौम्या को ले कर कोलकाता पहुंचा और उसे सहीसलामत सुधा को सौंप दिया. बेटी को इतनी दयनीय हालत में देख कर सुधा को अपने मां होने पर शर्म आ रही थी. वह सौम्या की इस हालत की जिम्मेदार खुद को ही मान रही थी. बेटी तो सकुशल घर लौट आई मगर सुधा की मुसीबत खत्म नहीं हुई थी. उस ने अपना सिर पीट लिया जब उसे पता चला कि कुंआरी सौम्या किशोर के बच्चे की मां बनने वाली है.

सुधा को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करे. अगर यहां सोसाइटी में किसी को पता चल गया कि रूपचंदजी की पोती ने ये गुल खिलाए हैं तो बहुत बदनामी होगी. कहीं भी मुंह दिखाने के काबिल नहीं रहेंगे. उस ने राघव से मशवरा कर के केशव से अपनी परेशानी साझा की. केशव ने उसे तुरंत सौम्या को बीकानेर लाने के लिए कहा. ज्यादा देर करना उचित न समझ कर सुधा दूसरे ही दिन सौम्या को ले कर बीकानेर रवाना हो गई.

केशव को आश्चर्य हुआ जब उस ने सुधा को स्लीपर क्लास के डब्बे से उतरते हुए देखा. सुधा ने अपनी झेंप मिटाते हुए कहा, ‘‘क्या करूं? मजबूरी थी. एसी में रिवर्जेशन मिला ही नहीं और आना कितना जरूरी था, यह तुम से बेहतर कौन समझ सकता है.’’

सौम्या मामा से नजरें भी नहीं मिला पा रही थी. केशव ने सुधा से कहा, ‘‘आप दोनों के रहने का बंदोबस्त मैं ने होटल में कर दिया है. घर जाने पर बेकार में ही बात खुलेगी और बच्ची की बदनामी होगी.’’ भाई की बात सुन कर सुधा ग्लानि से भर उठी. वह सोचने लगी, यही केशव है जिसे मैं ने सदा ही अपने से कमतर समझ कर दुत्कारा और इस का अपमान किया. आज यही मेरी बेटी की इज्जत का रखवाला बना है. सौम्या भी नजरें नीची किए अपनी गलती पर पछतावा करती आंसू बहा रही थी.

केशव उन्हें होटल में छोड़ कर घर चला गया. दूसरे दिन उस ने सौम्या को एक लेडी डाक्टर से मिलवाया और उस के सभी आवश्यक टैस्ट करवाए. दोपहर बाद रिपोर्ट आने पर शाम तक लेडी डाक्टर ने सौम्या को अनचाहे गर्भ से छुटकारा दिला दिया. 2 दिनों तक डाक्टर की देखरेख में रहने के बाद केशव ने होटल से ही सुधा और सौम्या को कोलकाता के लिए रवाना कर दिया. किसी को कानोंकान खबर भी नहीं हुई उन के बीकानेर आने और वापस जाने की.

ये भी पढ़ें- मौन स्वीकृति

सौम्या अभी तक इस सदमे से बाहर नहीं निकल सकी थी. केशव ने जब टूटी हुई सौम्या का हौसला बढ़ाने के लिए स्नेह से उसे अपने सीने से लगाया तो उस के भीतर जमी हुई सारी पीड़ा प्यार की गर्माहट पा कर पिघल गई. उस ने रोतेरोते केशव से कहा, ‘‘मैं भटक गई थी मामा. जिसे मैं प्यार की कच्ची धूप समझ रही थी वह जलता हुआ सूरज निकला. मैं उस में झुलस गई.’’

केशव ने सौम्या के सिर पर हाथ रखते हुए कहा, ‘‘बेटा, हीरा अगर गलती से कीचड़ में गिर जाए तो भी उस की कीमत कम नहीं होती. जो कुछ हुआ उसे एक ऐक्सिडैंट या बुरा सपना समझ कर भूल जाना. यह बात सिर्फ हम तीनों तक ही सीमित रहेगी, मैं तुम्हें इस का भरोसा दिलाता हूं. तुम बेफिक्र हो कर अपने आगे की जिंदगी जियो.’’

ट्रेन जब प्लेटफौर्म छोड़ने लगी तो सुधा से रहा नहीं गया. वह केशव से लिपट कर रो पड़ी. कहना तो बहुत कुछ चाह रही थी मगर गला अवरुद्ध हो गया. शब्द आंसुओं के साथ बहने लगे. केशव ने भी बहन को गले से लगा लिया. कुछ भी न कह कर दोनों ने सबकुछ कहसुन लिया. सारे गिलेशिकवे धुल गए. बादलों के बरसने के बाद जैसे आसमान साफ और धुलाधुला सा हो जाता है वैसे ही आज सुधा का दिल एकदम साफ हो गया था. उसे समझ आ गया था कि दुनिया में पैसा ही नहीं, बल्कि सच्चे रिश्ते और अपनों का प्यार भी खरी कमाई हैं.

मुरादाबाद पुलिस की पहुंच से दूर हैं सोनाक्षी सिन्हा

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद पुलिस स्टेशन में अभिनेता व पूर्व सांसद शत्रुघ्न सिन्हा की बेटी और ‘दबंग गर्ल’ यानी कि अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा के खिलाफ दर्ज 24 लाख रूपए की धोखाधड़ी केस के सिलसिले में सोनाक्षी सिन्हा का बयान लेने पहुंची मुरादाबाद पुलिस को सोनाक्षी सिन्हा के बंगले से बैरंग वापस लौटना पड़ा.

सूत्र बताते हैं कि मुरादाबाद की पुलिस कल, गुरूवार की शाम को सोनाक्षी सिन्हा के बंगले पहुंची थी. पर सोनाक्षी सिन्हा उस वक्त घर पर नहीं थी. अब पुलिस आज, शुक्रवार को एक बार फिर सोनाक्षी से मिलने की कोशिश करेगी. मुंबई में जुहू पुलिस स्टेशन के अधिकारी इस बात की पुष्टि कर रहे हैं. मगर ‘रामायण’’ बंगले के सिक्यूरिटी गार्ड मुरादाबाद पुलिस के आने की खबर से इंकार कर रहे हैं.

वास्तव में सोनाक्षी सिन्हा के खिलाफ मुरादाबाद निवासी प्रमोद शर्मा की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया था,जिसकी तफ्तीश के सिलेसिले में मुरादाबाद पुलिस सोनाक्षी सिन्हा का बयान लेना चाहती है. पुलिस सूत्रों की माने तो मुरादबाद जिले में कटघर इलाके के शिवपुरी गांव निवासी प्रमोद शर्मा ने सबसे पहले 24 नवंबर को मुरादाबाद के एसएसपी से सोनाक्षी सिन्हा के खिलाफ शिकायत की थी.

ये भी पढ़ें- सेक्स संबंधी किसी भी बात पर लोग खुलकर बात नहीं करते: सोनाक्षी सिन्हा 

पूरा ममला:

सूत्रों के अनुसार प्रमोद शर्मा ने शिकायत की है 30 सितंबर 2018 को दिल्ली में ‘‘इंडिया फैशन एंड ब्यूटी अवार्ड’’ कार्यक्रम का आयोजन किया था. इस समारोह में अवार्ड बांटने के लिए सोनाक्षी सिन्हा ने हामी भरी थी. और वे वहां पर नहीं पहुंची थी. जबकि प्रमोद शर्मा  ने सितंबर माह की शुरूआत में ही सोनाक्षी सिन्हा की निजी सचिव मालविका पंजाबी के कहने पर सोनाक्षी सिन्हा के बैंक खाते में औनलाइन 24 लाख रूपए ट्रांसफर कर दिए थे.

सूत्रों की माने तो एसएसपी से मुलाकात के बाद प्रमोद शर्मा ने लिखित शिकायत दी थी. लेकिन क्षेत्रीय पुलिस जांच अधिकारी इस मसले पर टालमटोल करते रहे. उसके बाद प्रमेाद ने 13 फरवरी को जहर खाकर आत्महत्या का प्रयास किया. तब 23 फरवरी को थाना मुरादाबाद जिले के कटघर में धारा 420, 120बी, 406, 34 आईपीसी के तहत सेानाक्षी सिन्हा,अभिषेक सिन्हा, मालविका पंजाबी, धूमिल कक्कड़ व एडगर साकरिया के खिलाफ नामजद एफआई आर दर्ज की गई. इस एफआईआर के खिलाफ सोनाक्षी सिन्हा ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और उच्च न्यायालय ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए जांच जारी रखने का आदेश दिया था.

24 फरवरी की मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एफआरआई दर्ज होने के बाद सोनाक्षी सिन्हा का काम देख रही कंपनी ‘‘टैलेट फुल औन कंपनी’’ ने बयान जारी किया था कि कई बार याद दिलाने के बावजूद प्रमोद शर्मा ने पैसे जमा नहीं किए थे. एयर टिकट भी नही भेजी थी, जिसके चलते सोनाक्षी को अपनी टीम के साथ मंबई एयरपोर्ट से वापस अपने घर जाना पड़ा था.

ये भी पढ़ें- स्वरा भास्कर के साथ ट्विटर पर हुई बदसलूकी

‘कसौटी जिंदगी 2’ में इस ट्विस्ट को देखकर बौखलाएं फैंस

सीरियल कसौटी जिंदगी 2 में नए-नए ट्विस्ट देखने को मिल रहे है. इस सीरियल में मिस्टर बजाज की एंट्री हुई है और करन सिंह ग्रोवर ने इस रोल में रोनित रौय की तरह ही जान भरने की तमाम कोशिश की है. हाल ही में निर्माताओं ने इस सीरियल के लेटेस्ट प्रोमो को साझा किया था, जिसमें प्रेरणा शादी के मंडप में अनुराग को छोड़ मिस्टर बजाज का हाथ थामती हुई नजर आई थी.

इस प्रोमो को देखने के बाद निर्माताओं पर फैंस का गुस्सा टूट पड़ा था. लोगों ने निर्माताओं से गुजारिश की थी कि अनुराग और प्रेरणा की लव-स्टोरी को कुछ और दिन दिखाए. इसी के साथ-साथ लोगों ने ये भी कहा था कि अगर अगले ट्रैक में ही प्रेरणा और अनुराग अलग हो जाएंगे तो वह इस शो को देखना बंद कर देंगे.

 

View this post on Instagram

 

A post shared by Multi Fandom☁ (@tellytreat) on

 

बीते एपिसोड में ही दिखाया गया है कि प्रेरणा ना चाहते हुए भी मिस्टर बजाज के साथ मंडप में बैठ चुकी है. एक ओर अनुराग घर पर प्रेरणा का इंतजार कर रहा है तो वहीं दूसरी ओर प्रेरणा और मिस्टरर बजाज की शादी की रस्में शुरु हो चुकी है. रोनित के जरिए अनुराग को प्रेरणा और मिस्टर बजाज की शादी की भनक लग चुकी है, ऐसे में वह इस शादी को रुकवाने के लिए घर से निकल चुका है.

दबंग गर्ल के घर पहुंची यूपी पुलिस, जानें क्या था मामला

हाल ही में बौलीवुड एक्टर सोनाक्षी सिन्हा के घर यूपी पुलिस पहुंची थी. दरअसल साल 2018 में कथित तौर पर धोखाधड़ी के मामले में सोनाक्षी पर एक केस दर्ज हुआ था. यह मामला उत्तर प्रदेश का था. इसी सिलसिले में यूपी पुलिस सोनाक्षी के घर पहुंची थी.

मीडिया रिपोर्टस के  मुताबिक  शिकायतकर्ता के अनुसार सोनाक्षी को दिल्ली में एक कार्यक्रम में परफौर्म करना था. हालांकि, वह ऐसा नहीं कर सकीं. इस शो के एक आयोजक की तरफ से एफआईआर दर्ज की गई थी.

ये भी पढ़ें- सेक्स संबंधी किसी भी बात पर लोग खुलकर बात नहीं करते: सोनाक्षी सिन्हा 

जुहू पुलिस ने भी इस खबर की पुष्टि की और कहा कि मुरादाबाद पुलिस ने उनसे मदद मांगी थी. पुलिस बयान दर्ज करना चाहती है. हालांकि, अभिनेत्री घर पर नहीं थी और इसलिए पुलिस फिर से सोनाक्षी के घर का दौरा कर सकती है.

बेस्ट सनराइज पौइंटस इन इंडिया

प्रकृति अपने आप में बहुत खूबसूरत है और इसकी खूबसूरती देखने के लिए हमें अपने बंद घरों से बाहर आना होगा और अपने व्यस्त दिनचर्या से थोड़ा समय निकालना होगा. अगर आप घूमने के शौकीन हैं तो सनराइज देखना आपके सफर का एक अहम हिस्सा हो सकता है. भारत में कई सनराइज पौइंट्स हैं जहां पहुंचकर आपको ऐसा महसूस होगा कि इतना खूबसूरत सूर्योदय आपने पहले कभी नहीं देखा. आइए बताते हैं आपको इन सनराइज पौइंट्स के बारे में-

उमियम लेक, मेघालय

भारत के उत्तर पूर्व में स्थित यह झील भारत के खूबसूरत स्पौट्स में से एक है. यहां की अद्भुत खूबसूरती भारत के हर कोने के लोगों को खींचकर यहां लाती है. यह झील शिलौन्ग से 15 किलोमीटर की दूरी पर है. सूरज की पहली किरण जब झील के पानी को छूती है तो इसे देखकर ऐसा अहसास होता है कि सच में खूबसूरती में प्रकृति का कोई जवाब नहीं है.

ये भी पढ़ें- एडवेंचर ट्रिप: कम खर्च में घूमे ऋषिकेश

टाइगर हिल, दार्जिलिंग

पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में स्थित टाइगर हिल सनराइज देखने के लिए सबसे अच्छी जगह है. जितने भी टूरिस्ट दार्जिलिंग घूमने आते हैं सभी सनराइज देखने टाइगर हिल जरूर जाते हैं. आप चाहें तो दार्जिलिंग से पहले स्थित घूम स्टेशन से पैदल या कार से भी टाइगर हिल जा सकते हैं.

कोवलम बीच, केरल

केरल को ‘गौड्स ओन कंट्री’ यानी भगवान का अपना देश भी कहा जाता है और इस शानदार जगह पर सनराइज देखना अपने आप में बहुत स्पेशल है. केरल में कई बीच हैं. केरल का कोवलम बीच अपनी नैचरल ब्यूटी और अरब सागर के नीले पानी के लिए मशहूर है. यहां से सनराइज देखना एक शानदार अनुभव है.

नंदी हिल्स, कर्नाटक

दक्षिण भारत के नंदी टाउन के पास स्थित नंदी हिल्स आपको शहरों के भीड़ भाड़ से निकालकर एक दूसरी दुनिया की सैर कराएगी. आप पहाड़ों और पुराने मंदिरों की खूबसूरती में खो जाएंगें. हल्की धुंध के बीच सनराइज देखने के लिए आपको यहां सुबह-सुबह जाना होगा. इस खूबसूरती को आप अपने कैमरे में भी कैद कर सकते हैं.

ये भी पढ़ें- ये हैं दुनिया की अजीबोगरीब इमारतें

ऐसे बनाएं आलू का रायता

आज आपको आलू के रायते की रेसिपी बताते हैं, जो काफी स्वादिष्ट है. आप इसे लंच या डिनर के साथ सर्व कर सकते हैं. और इसे बनाना भी बिलकुल आसान है.

सामग्री

आलू (उबालकर, छीलकर टुकड़ों में कटे हुए, 2 कप)

दही (2 कप)

नमक (2 टी स्पून)

कालीमिर्च पाउडर (1/4 टी स्पून)

जीरा पाउडर (2 टी स्पून)

लाल मिर्च पाउडर (1/4 टी स्पून)

हरा धनिया  (टुकड़ों में कटा हुआ, 2 टेबल स्पून)

ये भी पढ़ें- घर पर बनाएं सब्जियों की तहरी

बनाने की वि​धि

दही को स्मूद होने तक फेंटे.

इसमें काला नमक, कालीमिर्च, जीरा पाउडर, हरा धनिया और आलू डालकर मिक्स करें.

इसे सर्विंग बाउल में मिक्स करें और बचें हुए जीरे, लाल मिर्च पाउडर और हरे धनिए से गार्निश करें.

ठंडा करके आलू के रायते को सर्व करें.

ये भी पढ़ें- आइसबर्ग सैंडविच: स्वाद भी और सेहत भी

5 टिप्स: रिश्तों में ऐसे कम करें तनाव

तनाव किसी भी रिश्ते को बिगाड़ सकता है,  इसलिए आपको किसी भी रिश्ते में तनाव से बचने का हर संभव कोशिश करना चाहिए.  वैसे तो तनाव किसी भी रिश्ते में आ सकता है लेकिन अगर पार्टनर के बीच तनाव हो तो इसका असर पूरी फैमिली पर पड़ता है. तो आइए जानते हैं रिश्तों में तनाव किन तरीकों से कम कर सकते हैं.

  1. सप्ताह में साथ में एक बार आप अपने पार्टनर के साथ बाहर धूमने जरूर जाएं. शारीरिक संबंध के लिए दबाव न डालें. एक-दूसरे का आदर करें.

2. आपके बीच क्यों तनाव है, इसका कारण खोजें और उसका हल निकालें. जब भी तनाव महसूस करें तो अपने पार्टनर से कुतर्क करने की बजाय म्यूजिक सुनें और अपना तनाव दूर करें.

ये भी पढ़ें- जानें क्यों, हंसमुख लड़कों को डेट करती हैं लड़कियां

3. जिस काम में आपकी रुची हो, वही काम करें. ऐसा करने से आपको सुकून मिलेगा और आप तनाव मुक्त रहेंगे.

4. परिवार के साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताने की कोशिश करें. ऐसे में तनाव से मुक्ति मिलती है. अगर आप अपने साथी के साथ एक्सट्रा एक्टीविटीज करेंगे तो आप तनाव को दूर कर पाएंगे और आपके रिश्ते भी मधुर होंगे.

5. खानपान पर ज्यादा ध्यान दें, इससे आप फूर्ति महसूस करेंगे. सोने और उठने का समय निश्चित करें. परिवार के अन्य सदस्यों को भी अपनी प्रतिदिन की गतिविधियों में शामिल करें.

ये भी पढ़ें- फैमिली: मां की डांट, बेटी का गुस्सा

5 टिप्स: शेविंग के दौरान अपनाएं ये टिप्स

खूबसूरत दिखना हर कोई चाहता है, चाहे वो महिला हो या पुरुष. पुरुष को  अपनी त्‍वचा का ख्याल रखना चाहिए, जिससे वे भी हैंडसम दिखें. अगर आप भी स्मार्ट और हैंडसम दिखना चाहते हैं तो इन टिप्स के जरूर आपनाएं. तो चलिए आपको बताते हैं, आप कैसे स्मार्ट और हैंडसम दिख सकते हैं.

प्री-शेविंग औयल

यह एक प्रकार का तेल होता है जो दाढ़ी के बालों को नरम कर देता है और त्वचा को मौइस्चराइज करता है. इसको शेविंग के कुछ मिनट पहले लगाना होता है.

शेविंग क्रीम

अगर आपको शेविंग के बाद जलन होती है तो आप एलो-वेरा वाली शेविंग क्रीम का इस्तेमाल कर सकते हैं. जिनको चेहरे पे दाने हो जाते हैं वो ऐसी शेविंग क्रीम का इस्तेमाल कर सकते हैं जिसमें सेलिसिलिक एसिड या ग्लाइकोलिक एसिड होता है. इससे त्वचा के ऊपर की मृत कोशिकाएं निकल जाती हैं.

ये भी पढ़ें- ये फेशियल मसाज आपको कर देगी तरोताजा

शेविंग के दौरान

दाढ़ी के बालों को नरम करने के लिए आपको शेविंग क्रीम लगाके, अच्छे से झाग बनाके 1 मिनट तक छोड़ दें. इससे बाल और त्वचा मुलायम हो जाएगी और शेविंग करने में आसानी होगी.

रेजर

इलेक्ट्रिक रेजर  त्वचा को कम नुकसान पहुचाते हैं. शेविंग करने के बाद आफ्टर्शेव लोशन लगाना चाहिए और उसके बाद कोई मौइस्चराइज़र लगाएं. ऐसा करने से त्वचा मुलायम हो जाती है और जलन नहीं होती है.

ये भी पढ़ें- 5 टिप्स: ढीली त्वचा में ऐसे लाएं कसाव

प्रश्नचिह्न

निविदा को चंडीगढ़ के मशहूर गर्ल्स कालेज में प्रवेश मिल गया था. उस की खुशी का ठिकाना न था. उज्ज्वल भविष्य की एक उम्मीद तो पक्की हो ही गईर् थी, पर सब से बड़ी बात यह थी कि वह अपने घर से भाग जाना चाहती थी. घुटन होती थी उसे यहां रहने में. नफरत हो गई थी उसे पिता की दबंगता व मम्मी की भीरुता से.

निविदा उठ कर अपनी स्टडी टेबल पर बैठ गई. मन में पिता के रौद्र रूप का कुछ ऐसा डर बैठा कि वह अपनी सहेलियों के पिताओं से भी डरने लगी. कोई उस से ऊंची आवाज में कुछ पूछ लेता तो उस के मुंह से शब्द नहीं निकल पाते. ऐसी स्थिति उस के साथ अकसर आती.

उस की सहेलियां अकसर उस का मजाक उड़ातीं, ‘‘कब तक बच्ची बनी रहेगी?’’

मम्मी का कभी सिर फूटा होता, कभी गालों पर थप्पड़ों के निशान होते, तो कभी पीठ पर नील पड़े होते. मम्मी को तो लंबे समय तक नाराज रहने या बोलचाल बंद रखने का भी अधिकार नहीं था. पापा से अधिक मुंह फुला कर बात करना भी उन्हें भारी पड़ जाता. वे और पिट जातीं. अगर पिटतीं नहीं तो खाने की थाली फिंकती या घर की कोई अन्य चीज टूटती. घर का वातावरण हमेशा तनावपूर्ण बना रहता. उस में सांस लेना दूभर हो जाता.

बचपन की याद आते ही निविदा का मन कड़वाहट से भर गया. उसे याद आया कि

क्लास में टीचर अचानक खड़ा कर के कोई

प्रश्न पूछते तो उत्तर आते हुए भी वह बता नहीं पाती थी और अगर टीचर ने डांट दिया तो उस की बोलती अगले कई दिनों के लिए बंद हो

जाती थी. वह चाहते हुए भी बातचीत शुरू नहीं कर पाती थी.

निविदा की ऐसी कई स्थितियां देख कर प्रिंसिपल जबतब उस की मम्मी को बुला लेती थीं पर मम्मी बेचारी भी क्या करतीं. वे इतनी परेशान हो गईं कि उस का स्कूल बदलने का सोचने लगीं. तब मम्मी की एक फ्रैंड ने उसे किसी मनोचिकित्सक को दिखाने की सलाह दी. मम्मी पिता से छिप कर उसे मनोचिकित्सक के पास ले गईं.

डाक्टर ने सबकुछ विस्तार से जानना चाहा तो मम्मी ने सबकुछ बता दिया.

पूरी बात सुन कर डाक्टर ने कहा, ‘‘मैं दवा तो दूंगा, लेकिन सब से पहला इलाज तो आप दोनों पतिपत्नी के हाथों में है. इस तरह लड़ते पतिपत्नी, एक कोने में खड़े बच्चों को बिलकुल भूल जाते हैं कि उन के कोमल मन पर इस का कितना खतरनाक असर पड़ता है.

‘‘आज की आप लोगों की  गलतियां आप की बेटी को मानसिक रूप से उम्रभर के लिए पंगु बना देंगी. वह अपना आत्मविश्वास खो देगी. मानसिक रूप से बीमार हो जाएगी.’’

‘‘आप ही बताएं, क्या करूं डाक्टर?’’

‘‘मेरे खयाल से बच्ची के भविष्य के लिए आप को अपने पति से अलग हो जाना चाहिए.’’

‘‘यह कैसे होगा डाक्टर… बच्ची का भविष्य बनाने के लिए पैसा भी तो चाहिए? मायके से भी कोई सहारा नहीं है मुझे,’’ मम्मी हताश हो कर बोलीं तो डाक्टर हार कर चुप हो गए.

डाक्टर से दवा लिखवा कर मम्मी उसे घर ले आई थीं. उस के बाद मम्मी उस का अतिरिक्त खयाल रखने लगी थीं.

बड़ी होतेहोते निविदा समझने लगी थी कि उसे अतिरिक्त भावनात्मक सुरक्षा देने में मम्मी भी किस कशमकश व अंतर्द्वंद्व के दौर से गुजरती थीं.

एक तरफ गुस्से से दहाड़ता पति, दूसरी तरफ कांपती बेटी… मम्मी को खुद को कितना जोड़ना पड़ता था उसे टूटने से बचाने के लिए.

मम्मी बस उसे उठतेबैठते पढ़ाई पर ध्यान लगाने के लिए समझातीं, कुछ बड़ा करने के लिए प्रेरित करतीं, ‘‘देख बेटा, बहुत कुछ हासिल कर सकती है तू अपनी शिक्षा के बल पर… अपने पैरों पर खड़ा होना और वह भी इतनी मजबूती से कि कोई तुझे धक्का न दे सके… बस तू पढ़ाई में अपना तनमन लगा दे.’’

और निविदा ने खुद को किताबों में डुबो दिया. जबजब घर की स्थिति कटुपूर्ण होती, वह अपने कमरे का दरवाजा बंद कर देती, क्योंकि पिता का विरोध करने की उस में हिम्मत नहीं थी. ‘पिता का मजबूती से विरोध करने के लिए उसे मजबूती से अपने पैरों पर खड़ा होना पड़ेगा,’ इसी सोच ने उसे किताबी कीड़ा बना दिया.

12वीं कक्षा में उस ने 97% मार्क्स लिए. मम्मी काफी खुश हुईं. पापा ने भी बहुत शाबाशी दी. बेटी की प्रगति से वे खुश तो होते थे पर वे उस का खो क्या रहे हैं, यह नहीं समझते थे.

लड़कियों के मामले में उस के पिता आज भी दकियानूसी विचारों के थे. लड़कों से दोस्ती, खुली या छोटी पोषाक पहनना, बातचीत में खुलापन, बड़ों से हर विषय पर बातचीत, लड़की का मुंह उठा कर कुछ भी जोर से बोल देना, देर तक सहेली के घर रुकना, उन की नजरों में आज के जमाने में भी संस्कारहीन रवैया था. ऐसे ही बहुत से कारण थे जिन से वह इस बंदीगृह से भाग कर खुली हवा में सांस लेना चाहती थी.

आखिर उस का प्रवेश चंडीगढ़ के एक कालेज में हो गया. लेकिन उस की मुश्किलें यहां भी कम नहीं हुईं. पीजी होस्टल में उसे रूममेट के नाम पर जिस लड़की का साथ मिला, वह उस से बिलकुल उलट थी. मालिनी अति आत्मविश्वासी, बिंदास, टौमबौय टाइप की, पढ़ने में औसत, एक हाकी प्लेयर थी जिस का प्रवेश इस कालेज में स्पोर्ट्स कोटे से हुआ था.

ये भी पढ़ें- विनविन सिचुएशन

निविदा ने कमरे में पहले अपना सामान रखा, बाद में मालिनी आई थी. 5 फुट 7 इंच लंबी पैंटशर्ट पहने, बौय कट हेयर और लड़कों जैसे बेबाक हावभाव व बातचीत देख कर निविदा पहले ही दिन घबरा गई कि कहां फंस गई… यह तो पढ़ने भी नहीं देगी. उस ने अपना कमरा बदलवाने की कोशिश भी की पर सफल न हो सकी.

‘‘क्या बात है कमरा बदलवाने गईर् थी? मुझ से डर लगता है… खा जाऊंगी क्या?’’

‘‘न… नहीं तो…’’ निविदा उस की बेबाक बात से सूखे पत्ते सी कांप गई.

‘‘तो फिर?’’ वह एक पैर कुरसी पर रखती हुई बोली.

‘‘नहीं, बस मैं तो ऐसे ही…’’

‘‘क्या कमरा बदलना है?’’ वह उस के कंधे पर हाथ रखते हुए, देख लेने वाले अंदाज में बोली, ‘‘तो बदलवा देती हूं.’’

‘‘न… नहीं तो…’’

‘‘ठीक है तो फिर फिक्र मत कर…’’ वह कंधा थपथपाते हुए बोली, ‘‘अब चल जरा मेरा सामान खोल और मेरी अलमारी में लगा दे..’’

‘‘मैं?’’

‘‘हां तो और कौन? पिघल जाएगी क्या

मेरा सामान लगाने में?’’ वह धमकाने वाले अंदाज में बोली.

निविदा आगे कुछ नहीं बोली. चुपचाप मालिनी का सामान निकाल कर अलमारी में लगाने लगी. कमरा छोड़ कर जाए भी तो कहां. यहां होस्टल में यह दबंग लड़की उसे रहने नहीं देगी और घर जाना नहीं चाहती.

मालिनी का बिस्तर ठीक करना, कपड़े धोना, प्रैस करना, मतलब कि उस के सभी जरूरी कार्य करना उस की दिनचर्या में शामिल होने लगा. तिस पर भी मालिनी उसे चैन से रहने दे तब तो. कभी वह कमरे में दोस्तों का जमघट लगा लेती, कभी फोन पर जोरजोर से बातें करती, कभी मोबाइल पर गाने सुनती. और कुछ नहीं तो जबरदस्ती उस से फालतू की बातें करती. वह तभी चैन से पढ़ पाती जब मालिनी कहीं खेलने गई होती.

मालिनी क्लास में भी उस की दोस्ती किसी दूसरे से नहीं होने देती. उस की दबंगता की वजह से दूसरी लड़कियां निविदा के आसपास भी नहीं फटकतीं. मालिनी उस से मनचाहा व्यवहार करती. उस का दब्बूपन उस के लिए कुतूहल का विषय था. ऐसी लड़की पढ़ने में इतनी होशियार कैसे थी कि उसे इस कालेज में प्रवेश मिल गया.

मालिनी की हरकतों की वजह से निविदा भी कई बार डांट खा जाती थी.

एक दिन मालिनी टीचर्स के जाने के बाद क्लास में अपने गु्रप की लड़कियों के साथ टीचर्स की नकल कर उन का मजाक उड़ा रही थी. बाकी विद्यार्थी चले गए थे. लेकिन वह तो मालिनी की आज्ञा के बिना खिसक भी नहीं सकती. उस दिन मालिनी व उन लड़कियों की शिकायत चपरासी के जरीए टीचर्स तक पहुंच गई.

उन सब के साथ निविदा को भी खूब डांट पड़ी. कालेज में उस पूरे ग्रुप की तो छवि खराब थी ही, निविदा भी उस में शामिल हो गईर् थी. उन के क्लासरूम के आगे स्टाफरूम था जहां से निकल कर जाते समय टीचर्स की नजर विद्यार्थियों पर पड़ जाती थी.

दूसरे दिन मालिनी व उस की गु्रप की लड़कियां क्लासरूम की पीछे की खिड़की से कूद कर एडल्ट मूवी देखने की योजना बना रही थीं.

मालिनी ने उसे भी पकड़ लिया, ‘‘तू भी चल हमारे साथ.’’

‘‘नहीं, मैं नहीं जाऊंगी… मुझे क्लास अटैंड करनी है,’’ वह भीख मांगने वाले अंदाज में बोली.

‘‘एक दिन नहीं करेगी तो क्या आईएएस बनने से रह जाएगी?’’ चुपचाप चल हमारे साथ.

‘‘तुम मेरे साथ इतनी जबरदस्ती क्यों करती हो मालिनी?’’ वह घिघियाती हुई बोली, ‘‘तुम्हें जाना है तो तुम जाओ.’’

‘‘ताकि तू टीचर्स से हमारी खासकर मेरी शिकायत कर दे.’’

‘‘मैं किसी से कुछ नहीं कहूंगी.’’

मगर मालिनी ने उस की एक न सुनी और उस के डर से वह भी पीछे की खिड़की से कूद कर मालिनी के साथ चली गई. उस में इतनी हिम्मत नहीं थी कि मालिनी की दबंगता के खिलाफ बगावत कर उस की शिकायत कर उस से दुश्मनी मोल लेती. मूवी में उस का मन बिलकुल नहीं लगा.

घर के घुटनभरे वातावरण से भाग कर यहां आईर् थी पर मालिनी पता नहीं कहां से अभिशाप बन उस के जीवन के साथ लग गईर् थी. मालिनी के गु्रप के साथ उसे जबरदस्ती रहना पड़ता था, जिस से क्लास में, कालेज में उस की छवि खराब हो रही थी.

यों मालिनी उसे कई मुसीबतों से बचाती भी थी. तबीयत खराब होने पर उसे डाक्टर को भी दिखा लाती. दवा भी ला देती. उस की तरफ उस का रवैया सुरक्षात्मक तो रहता पर वैसा ही जैसा किसी का अपने गुलाम के प्रति रहता है.

उस दिन उन के पूरे ग्रुप के गायब होने की शिकायत प्रिंसिपल तक चली गई और अगले दिन प्रिंसिपल के सामने उन का जवाब तलब हो गया. सब को खूब डांट पड़ी. सभी को अपनेअपने अभिभावकों को बुला लाने का फरमान सुना दिया गया. प्रिंसिपल के इस फरमान के बाद तो निविदा के लिए जैसे दुनिया खत्म हो गई और भविष्य चौपट.

पापा का डरावना चेहरा, मम्मी का रोनासिसकना, गिड़गिड़ाना, घर का घुटन भरा वातावरण सबकुछ याद आ गया. इस हरकत के बाद तो पापा उसे यहां कभी नहीं रहने देंगे. उस दिन कमरे में आ कर वह फूटफूट कर रो पड़ी. पर मालिनी को कोई फर्क नहीं पड़ा. वह मस्त थी.

‘‘इतना स्यापा क्यों कर रही है ऐसा क्या हो गया भई? मूवी ही तो गए थे किसी का मर्डर तो नहीं किया. प्रिंसिपल ने डांटा ही तो है… कालेज लाइफ में तो ये सब चलता ही रहता है.’’

‘‘तुम्हारे लिए यह साधारण बात होगी,’’ अचानक निविदा ने अपना आंसुओं भरा चेहरा उठाया, ‘‘पर मेरे लिए तो मेरा पूरा भविष्य खत्म हो गया. मुझे तो अब कालेज छोड़ना पड़ेगा… मेरे पापा अब मुझे यहां किसी कीमत पर नहीं रहने देंगे… जिन मुश्किलों से घबरा कर यहां आई थी, तुम्हारी हरकतों व ज्यादतियों ने मुझे फिर वहीं धकेल दिया. तुम्हारा क्या, तुम तो खेल की दुनिया में भी अपना कैरियर बना लोगी, पर मैं क्या करूंगी,’’ कहतेकहते निविदा फिर फूटफूट कर रोने लगी.

शांत और हर समय घबराई सी निविदा को इतने गुस्से से बोलते देख मालिनी एकाएक संजीदा हो गई. टेबल पर सिर रख कर फूटफूट कर रोती निविदा के सिर पर स्नेह से हाथ फेरने लगी, ‘‘चुप हो जाओ निविदा… लगता है कुछ गलती हो गई मुझ से… मैं कोशिश करूंगी स्थिति को संभालने की… कम से कम तुम पर आंच न आए… पर ऐसा क्या है तुम्हारे मन में जो तुम इतनी डरी और घुटी हुई रहती हो हर वक्त? क्या कमी है तुम में? तुम्हारे जैसा दिमाग, खूबसूरती, जिन के पास हो उन का व्यक्तित्व तो आत्मविश्वास से वैसे ही छलक जाएगा. सबकुछ होते हुए भी तुम इतनी डरपोक क्यों हो? आत्मविश्वास नाम की चीज नहीं है तुम्हारे अंदर.’’

निविदा ने कोई जवाब नहीं दिया.

मालिनी उस के सिर पर हाथ फेरती रही, ‘‘बताओ मुझे… शायद मैं तुम्हारी कुछ मदद

कर सकूं.’’

‘‘तुम क्या मदद करोगी मेरी… इतनी बड़ी मुसीबत में फंसा दिया मुझे.’’

‘‘बोल कर तो देखो निविदा… खोटा सिक्का भी काम आता है कभीकभी… मैं जिंदगी को बहुत गंभीरता से कभी नहीं लेती, इसलिए बिंदास रहती हूं… पर तुम्हारी बातों ने आज सोचने पर मजबूर कर दिया है.’’

और निविदा ने धीरेधीरे सुबकसुबक कर पहली बार किसी गैर के सामने अपना पूरा मन खोल कर रख दिया. पूरा बचपन, पूरा अतीत बयां करते हुए मालिनी को न जाने कितनी बार निविदा को गले लगा कर चुप करा कर सांत्वना देनी पड़ी.

‘‘इतना कुछ निविदा… काश, तुम मुझे पहले बताती. आई एम सौरी… गलती हो गई मुझ से… पर मैं ही सुधारूंगी इसे. चाहे इस के लिए मुझे सारा इलजाम खुद पर क्यों न लेना पड़े. तुम फिक्र मत करो.’’

दूसरे दिन मालिनी प्रिंसिपल से व्यक्तिगत तौर पर मिलने उन के औफिस पहुंच गई

और उन्हें सारी बात कह सुनाई, ‘‘बस एक मौका और दे दीजिए मैम. पूरे ग्रुप से आप को कभी शिकायत का मौका नहीं मिलेगा… अगर शिकायत मिली तो आप सब से पहले मुझे रैस्टिकेट कर दीजिएगा…’’

प्रिंसिपल पिघल गईं और उन्होंने पूरे ग्रुप को माफी दे दी.

निविदा मालिनी की मुरीद हो गई. उस के बिंदास, लापरवाह, दबंग स्वभाव के पीछे एक संजीदा व सहृदय दोस्त के दर्शन हुए. जिस मालिनी की वजह से निविदा को कालेज की भी जिंदगी दमघोटू महसूस हो रही थी वही जिंदगी उसी मालिनी के सान्निध्य में खुशगवार लगने लगी थी. वह पढ़ाई करती तो मालिनी अपना ही नहीं उस का भी काम कर देती.

ये भी पढ़ें- मौन स्वीकृति

‘‘तू अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे… मैं तेरे जैसी लायक नहीं… पर मेरी सखी जिस दिन आईएएस बनेगी गर्व से कौलर मैं ही अप करूंगी.’’

‘‘वह मौका तो मुझे भी मिलेगा मालिनी जिस दिन खेल की दुनिया में तू नाम रोशन करेगी.’’

दोनों सहेलियां दिल से एकदूसरे के नजदीक आ गईर् थीं. प्रथम वर्ष के इम्तिहान के बाद विद्यार्थी छुट्टियों में अपनेअपने घर चले गए. निविदा भी दुखी मन से अटैची पैक करने लगी. अपने घर जाने का मन मालिनी का भी नहीं हो रहा था.

‘‘मैं भी तेरे साथ तेरे घर चलती हूं निविदा… कुछ दिन तेरे साथ रहूंगी. फिर कुछ दिनों के लिए घर चली जाऊंगी या फिर तू मेरे साथ चले चलना कुछ दिनों के लिए…’’

निविदा घबरा गई. मालिनी की बेबाकी घर में क्या गुल खिला सकती है, वह जानती थी. उस ने कई तरह के बहाने बनाए और फिर सुबह की बस से अपने घर चली गई.

घर पहुंचे निविदा को 2-3 दिन ही हुए थे कि एक दिन शाम को बिना किसी पूर्व सूचना के मालिनी उस के घर पहुंच गई.

‘‘कौन हो तुम?’’ एक अजनबी लड़की को दरवाजे पर बैग और अटैची के साथ खड़े देख कर मालिनी के पापा ने पूछा.

‘‘नमस्ते अंकल… नमस्ते आंटी… मैं मालिनी हूं… निविदा की बैस्ट फ्रैंड और उस की रूममेट.’’

इसी बीच निविदा बाहर आ गई. मालिनी को देख कर बुरी तरह चौंक गई, ‘‘मालिनी तू?’’

‘‘तू मुझ से बोल कर आई थी कि मम्मीपापा के साथ साउथ घूमने जाना है पर मैं समझ गई थी तू झूठ बोल रही है. इसलिए आ गई,’’ मालिनी बेबाकी से बोली.

उस की बोलचाल, चालढाल, उस के व्यक्तित्व से लग रहा था जैसे घर में तूफान आ गया है. उस की हरकतें देख कर निविदा व उस की मम्मी सुलेखा अपनेआप में सिमट रही थीं और निविदा के पापा उस संस्कारहीन लड़की को आश्चर्य से त्योरियां चढ़ाए देख रहे थे.

‘‘मालिनी तू क्यों… मेरा मतलब तू कैसे आ गई?’’ सकपकाई सी निविदा बोली.

‘‘अरे, ऐसे क्यों घबरा रही है… तेरे साथ छुट्टियां बिताने आई हूं…’’ वह उस की पीठ पर हाथ मारती हुई बोली, ‘‘चल, मेरा सामान अंदर रख और बाथरूम स्लीपर ले कर आ… आंटीजी, कुछ खानेपीने का इंतजाम कर दीजिए. बहुत भूख लगी है.’’

सुलेखा किचन में घुस गईं. निविदा उस का सामान अंदर रख बाथरूम स्लीपर उठा लाई. मालिनी ने आराम से जूते खोल स्लीपर पहन कहा, ‘‘जा मेरे जूते भी कमरे में रख. मेरी अटैची से तौलिया निकाल लाना.’’ निविदा के तौलिया लाने पर मालिनी वाशरूम में घुस गई.

निविदा के पापा को निविदा के साथ उस का नौकरों जैसा व्यवहार अखर गया. सुलेखा पकौड़े बना लाईं.

मालिनी फ्रैश हो कर टेबल पर आ गई. पूछा, ‘‘क्या बनाया आंटी? वाह पकौड़े… तू भी खा निविदा. क्या स्वादिष्ठ पकौड़े बनाए हैं आंटी… इस निविदा को भी सिखा दीजिए… कभीकभी पीजी होस्टल के रूम में ऐसे ही पकौड़े बना कर खिला दिया करना.’’

‘‘निविदा तुम्हारी नौकरानी है न,’’ एकाएक निविदा के पापा बुदबुदाए.

‘‘अंकल कुछ कहा आप ने?’’

मगर उन्होंने कोईर् जवाब नहीं दिया. रात को मालिनी कमरे में निविदा से अपने व्यवहार के लिए माफी मांग रही थी.

‘‘पर तू ऐसा कर क्यों रही है… मेरे पापा के मन में मेरी बैस्ट फ्रैंड की इमेज खराब हो जाएगी.’’

‘‘तू देखती जा कि मैं क्या करती हूं.’’

दूसरे दिन नाश्ते की टेबल पर सब चुपचाप नाश्ता कर रहे थे. लेकिन मालिनी का घमासान जारी था. वह निविदा को किसी न किसी चीज के लिए किचन में दौड़ा रही थी.

‘‘अच्छा, वह अखबार भी उठा कर देना तो जरा निविदा,’’ वह इतमीनान से टोस्ट के ऊपर आमलेट रख कर खाते हुए बोली.

निविदा ने अखबार ला कर उसे दे दिया. फ्रंट पेज पर समाचार समलैंगिक संबंधों पर कोर्ट की मुहर लगने को ले कर था.

‘‘तुझे पता है निविदा, समलैंगिकता क्या होती है?’’ एकाएक मालिनी बोली.

निविदा के पापा के हाथ से टोस्ट छूटतेछूटते बचा. उन्होंने गुस्से से भरी नजरों से निविदा की तरफ देखा. निविदा को काटो तो खून नहीं.

‘‘चुप मालिनी बाद में बात करेंगे,’’ वह किसी तरह बोली.

‘‘अरे बाद में क्या… देख न अंदर क्या समाचार छपा है… एक पिता ने अपनी तीनों बेटियों से रेप किया… कितने वहशी होते हैं ये पुरुष… अपनी शारीरिक क्षमता पर बहुत घमंड है इन्हें… औरत को कमजोर समझते हैं… औरत इन के लिए एक शरीर मात्र है… 2 टांगों के बीच कुदरत ने इन्हें जो दिया है न उस के बल पर दुनिया रौंदने चले हैं… न रिश्ता देखते हैं, न उम्र… न समय देखते हैं न परिस्थिति… हर तरह से औरत का इस्तेमाल करना, फायदा उठाना शगल है इन का… बीवी के रूप में भी औरत का शोषण करते हैं. कमजोर मानसिकता के खुद होते हैं और मारतेपीटते, सताते बीवियों को हैं… मेरा पति ऐसा करेगा तो हाथपैर तोड़ कर रख दूंगी…’’

निविदा और सुलेखा सन्न बैठी रह गईं. पापा के सामने मालिनी की ऐसी बेबाकी से निविदा की टांगें कांपने लगीं. हाथ से दूध का गिलास छूट गया. गिलास तो फूटा ही, नाश्ते की प्लेट भी नीचे गिर कर टूट गई.

‘‘निविदा,’’ पापा की कु्रद्ध दहाड़ गूंजी, ‘‘तमीज नहीं है तुम्हें… इसीलिए भेजा है तुम्हें घर से बाहर पढ़ने कि तुम समय देखो न जगह… कुछ भी डिसकस करने लग जाओ.’’

निविदा को लगा कि पापा का गुस्सा आज या तो उस की मम्मी को हलाल करेगा या फिर उसे.

लेकिन मालिनी इतमीनान से बोली, ‘‘यह क्या निविदा… दूध पीती बच्ची है क्या अभी… चीजें गिराती रहती है… और तू कांप क्यों रही है… हर वक्त कांपती रहती है, क्लास में… कालेज में टीचर्स के सामने, लड़कियों के सामने. मैं सोचती थी तू वहीं कांपती है. डरपोक कहीं की. अंकल इसे किसी मनोचिकित्सक को दिखाइए… मानसिक रूप से बीमार है आप की बेटी.’’

निविदा के पापा गुस्से में नाश्ता पटक कर बाहर चले गए. निविदा खुद को संयत नहीं कर पा रही थी. मालिनी के सामने तो पापा ने किसी तरह खुद को नियंत्रित कर लिया पर इस का खमियाजा उसे बाद में भुगतना पड़ेगा.

पापा के जाने के बाद मालिनी निविदा को खींच कर कमरे में ले गई और छाती से चिपका लिया, ‘‘डर मत निविदा, तेरा डर ही तेरा दुश्मन है. अकसर हमारे अंदर के डर का दूसरे फायदा उठाते हैं. तेरे घर का वातावरण और तेरे पापा के व्यवहार, क्रोध व ज्यादतियों ने तेरे अंदर डर भर दिया है और मैं तेरा यह डर दूर कर के रहूंगी.’’

निविदा देर तक मालिनी के कंधे पर सिर रख कर रोती रही. उस के पापा इस कुसंस्कारी, दिशाहीन, वाचाल लड़की को जितना अपनी नजरों से दूर रखना चाहते, वह उतना ही उन के आसपास मंडराती. निविदा मन ही मन कामना कर रही थी कि मालिनी के रहते हुए घर में कोई अप्रिय स्थिति न खड़ी हो… कहीं पापा मम्मी की धुनाई कर के अपना गुस्सा न निकाल दें या फिर मालिनी को ही कुछ उलटासीधा बोल दें.

मालिनी को आए 1 हफ्ता होने वाला था. एक दिन एकाएक निविदा के

फोन पर किसी लड़के के दोस्ताना मैसेज आने लगे. वह कोई गलत बात तो नहीं करता पर उस के प्रोफाइल फोटो पर बड़े प्यारे कमैंट करता. उसे दोस्त बनाने को उत्सुक दिखता.

निविदा बहुत परेशान हो रही थी कि न जाने कौन लड़का है. प्रोफाइल पिक्चर देखी तो काफी आकर्षक लगा. फिर मालिनी से अपनी परेशानी कही, ‘‘पता नहीं इस के पास मेरा नंबर कहां से आ गया… कहीं पापा को पता चल गया तो…’’

‘‘अरे, तू इतना डरती क्यों है? कोई ऐसीवैसी बात तो नहीं लिख रहा न… इस उम्र में दोस्ती, थोड़ीबहुत ऐसी हलकीफुलकी बातें जायज हैं. लड़केलड़की की दोस्ती कोई बुरी बात नहीं. जब तक कुछ बुरा नहीं कह रहा चुप रह.’’

यह सुन कर निविदा नहाने चली गई.

मालिनी ने निविदा का मोबाइल उठा कर चुपचाप लौबी में अखबार पढ़ते उस के पापा के सामने टेबल पर रख दिया. मैसेज लगातार आ रहे थे. लगातार बजती मैसेज टोन से परेशान उस के पापा ने निविदा का मोबाइल उठाया और चैक करने लगे. किसी लड़के के मैसेज निविदा के मोबाइल पर और वे भी ऐसे दिलकश अंदाज में, साथ ही उस ने अपने कई फोटो भी भेजे थे. उन्हें समझ नहीं आया कि पहले मोबाइल पटकें या निविदा को या फिर मालिनी को घर से निकालें… बस बहुत हो गई बाहर रह कर पढ़ाई.

‘‘निविदा… सुलेखा…’’ वे बहुत जोर से चिल्लाए.

सुलेखा किचन से गिरतीपड़ती बाहर निकल आईं. अपने कमरे में बैठी निविदा को अपने पापा की इतनी ऊंची दहाड़ का कारण समझ नहीं आया पर मालिनी को सब समझ आ रहा था. वह अपना सामान पैक कर चुकी थी. आज वह निर्णय ले चुकी थी कि नाटक से परदा उठाना है.

‘‘जा तेरे पापा बुला रहे हैं,’’ मालिनी बोली.

‘‘पर क्यों… इतना गुस्सा?’’ निविदा डर के कारण थरथर कांप रही थी, ‘‘तूने फिर कुछ कर दिया क्या?’’

‘‘कुछ नहीं किया मैं ने… तू जा तो सही,’’ उस ने निविदा को कमरे से बाहर धकेल दिया.

‘‘जी पापा,’’ निविदा हकलाते हुए बोली.

‘‘कौन है यह?’’

‘‘क… कौन?’’

‘‘यह लड़का. इसीलिए भेजा है तुझे चंडीगढ़ कि तू लड़कों के साथ गुलछर्रे उड़ाए? ऐसी बिगड़ैल, संस्कारहीन आवारा लड़कियों के साथ दोस्ती करे?’’

‘‘कौन लड़का पापा? मुझे नहीं पता आप किस की बात कर रहे?’’ पर फिर

पापा के हाथ अपना मोबाइल देख कर निविदा का सिर चकरा गया.

‘‘बुला अपनी उस सहेली को बाहर. बहुत हो गई बाहर रह कर पढ़ाई. अब तू यहीं रह कर पढ़ेगी. तेरी मम्मी के उलटेसीधे अरमान हैं ये. यहां कालेज नहीं हैं क्या?’’

पापा का गुस्सा देख कर निविदा थरथर कांप रही थी. सबकुछ समझ गई थी…

मालिनी ने उस का भविष्य खत्म कर दिया…

‘‘मैं इस लड़के की अभी पुलिस में रिपोर्ट करता हूं,’’ निविदा के पापा बोले.

‘‘ऐसा क्यों कर रहे हैं आप? पहले निविदा को आराम से बैठा कर पूछ तो लीजिए कि कौन है यह,’’ सुलेखा बोलीं.

‘‘तू चुप रह. तेरी सह पर ही बिगड़ी है,’’ एकाएक निविदा के पापा का एक झन्नाटेदार थप्पड़ सुलेखा के गाल पर पड़ गया.

अब तक मालिनी भी लौबी में आ चुकी थी. वह बोली, ‘‘यह क्या कर रहे हैं अंकल आप… शर्म आनी चाहिए आप को.’’

‘‘तुम चुप रहो. मेरे परिवार के बीच में बोलने का तुम्हें कोई हक नहीं है. मेरी बेटी को बिगाड़ कर रख दिया है तुम ने. नौकर बना कर रखा है इसे इतने दिनों से,’’ निविदा के पापा भी उतने ही गुस्से में चिल्लाए.

‘‘नीचे सुर में बात कीजिए अंकल मुझ से. निविदा की तरह दहाड़ सुनने की

आदत नहीं है मुझे,’’ मालिनी तैश में बोली, ‘‘अभी आप मुझे संस्कारहीन कह रहे थे. आप में कौन से संस्कार हैं. निविदा को मैं ने नहीं बिगाड़ा है, बल्कि मैं तो उसे मजबूत बनाना चाहती हूं. बिगाड़ा तो आप ने है उस का भविष्य. कभी सोचा है जिस बेटी के मनमस्तिष्क में इतना डर भर दिया है, जो अपने ही घर में हर कदम पर हारती रहती है वह घर से बाहर की दुनिया से कैसे जीतेगी? आज मेरा उस से नौकरों जैसा व्यवहार आप को चुभ रहा है, लेकिन आप ने उसे जितना आत्महीन व डरपोक बना दिया है, कल जमाना दबाएगा उसे.

ये भी पढ़ें- मजाक: छुट्टी राग

‘‘विवाह के बाद आप जैसा ही कोई पुरुष उस का फायदा उठाएगा. कैसे लड़ेगी निविदा? अपने जीवन की छोटी सी भी कठिनाई से, परेशानी से… हर जगह आप खुद तो नहीं खड़े रहेंगे न उस के साथ. आंटी का जीवन नर्क बना दिया आप ने. आप की पत्नी हैं ये. क्या कुसूर है इन का? शरीर पर पड़ी आप की मार, इन के मनमस्तिष्क को उस से भी ज्यादा घायल कर देती होगी? बेटी के सामने और कर गई होगी… आज बेटी की सहेली के सामने. अगर इतना ही जोर से आंटी मार दे आप को इस समय तो कैसा लगेगा आप को?

‘‘सिर्फ पुरुष हैं. शारीरिक ताकत है. इस ताकत पर कूद रहे हैं आप? घर का माहौल इतना दमघोटू बना रखा है आप ने. मैं 2 ही दिनों में उकता गईर्. ये दोनों जिंदगी कैसे बिता रही होंगी? किसी विषय पर बात नहीं कर सकती निविदा आप के सामने. कहां जाए वह किसी विषय पर बात करने? इकलौती बेटी. पहले भरेपूरे परिवार होते थे अंकल, आजकल 1-2 बच्चे, मातापिता ही सरपरस्त, मातापिता ही दोस्त. अगर मातापिता दोस्त नहीं बनेंगे तो बच्चे बाहर भटकेंगे… इतनी अकल 20 साल की उम्र में मुझे भी है, फिर आप को क्यों नहीं है… सैक्स, समलैंगिकता, लिव इन रिलेशन, लड़कों से दोस्ती… क्या है इन बातों में ऐसा, जो आप से बात नहीं कर सकती निविदा? किसी लड़के से दोस्ती कोई गुनाह क्यों है आप की नजरों में? कौन सी सदी में जी रहे हैं आप?

‘‘और मुझे क्या निकालेंगे आप घर से. मैं खुद यहां रहना नहीं चाहती पर निविदा को समेट लीजिए अंकल, हर जगह मालिनी नहीं मिलेगी इसे… यहां पर तो मैं इस के साथ ऐक्टिंग कर रही थी… पर कालेज में जब मुझे यह पहली बार मिली थी तब ऐक्टिंग नहीं की थी मैं ने. इसे मिलने वाला हर इंसान मालिनी नहीं होगा, जो इस की असलियत जान कर गलत फायदा न उठाए और जिस लड़के के मैसेज निविदा के लिए आ रहे हैं वह मेरा भाई है. मैं ने ही कहा था उसे. स्वस्थ दोस्ती कोई गुनाह नहीं होती. अब नहीं आएंगे मैसेज… इतना मत दबाइए निविदा को कि उबरने में उस की पूरी जिंदगी खप जाए.

‘‘कमजोर पुरुष हैं आप… जिस बात का समाधान नहीं सूझा, आप ने आंटी को पीट कर निकाला और आप की मारपीट व झगड़े ने निविदा को मानसिक रोगी बना दिया था. आंटी ने छिपछिप कर इस का इलाज कराया… ऐसा न हो आप की ये हरकतें से फिर मानसिक रोगी बना दें और इस बार शायद हमेशा के लिए…’’ कहतेकहते मालिनी की आंखों में आंसू आ गए. कंठ अवरुद्ध हो गया. उस ने निविदा को एक बार गले लगाया और फिर भरी आंखों से एक प्रश्नचिह्न मालिनी के पापा की तरफ उछालती हुए अपना बैग कंधे पर डाल अटैची ड्रैग करती हुए बाहर निकल गई. रोती हुई निविदा अपने कमरे में चली गई.

निविदा के पापा हारे हुए खिलाड़ी की तरह अपनी जगह खड़़े रह गए. सुलेखा भी एक घृणित नजर उन पर डालती हुईं निविदा के पीछे चली गईं. मालिनी वह सब कह गई थी जो वे दोनों वर्षों से कहना चाहती थीं.

निविदा के पापा काफी देर हताश से वैसे ही खड़े रहे. इतने कड़े और स्पष्ट शब्दों में उन्हें आईना कोई नहीं दिखा पाया था. फिर अचानक उन की आंखों से आंसू निकले कि सचमुच बड़ी गलती कर गए जीवन में. उन की फूल सी बच्ची मनोचिकित्सक के चक्कर काट चुकी है नन्ही सी उम्र में और उन्हें पता ही नहीं. मालिनी उन के सामने एक प्रश्नचिह्न टांग गई थी. वे उठे और मालिनी के कमरे की तरफ चल दिए… जो कुछ बचा था उसे समेटने के लिए… मालिनी के प्रश्नचिह्न का जवाब लिखने के लिए.

बेवफाई रास न आई: भाग 2

वह जान चुकी थी कि संतोष उस से बेपनाह मोहब्बत करता है. इस के बाद ज्योति के दिल में भी संतोष के प्रति चाहत पैदा हो गई.

ज्योति और संतोष दोनों एकदूसरे को चाहने जरूर लगे थे, लेकिन अपनी मोहब्बत का इजहार नहीं कर पा रहे थे. एक दिन ज्योति घर से स्कूल के लिए अकेली निकली. संतोष पहले से ही गांव के बाहर एक सुनसान जगह पर खड़ा उस का इंतजार कर रहा था.

जब उस ने देखा कि ज्योति अकेली है तो उस ने पक्का मन बना लिया कि कुछ भी हो जाए, आज उस से अपने दिल की बात कह कर ही रहेगा. ज्योति उस के नजदीक पहुंची तो संतोष उस के सामने आ कर खड़ा हो गया.

ज्योति के दिल की धड़कनें भी तेज हो गईं. जब वह रिलैक्स हुई तो संतोष बोला, ‘‘ज्योति, मैं तुम से कुछ कहना चाहता हूं.’’

ज्योति कुछ बोले बिना साइड से निकल कर आगे बढ़ गई.

‘‘रुक जाओ ज्योति, एक बार मेरी बात सुन लो, फिर चली जाना.’’ वह बोला.

‘‘जल्दी बताओ, क्या कहना चाहते हो. किसी ने देख लिया तो जान पर बन आएगी.’’ ज्योति घबराई हुई थी.

‘‘नहीं, मैं तुम्हारी जान पर आफत नहीं आने दूंगा.’’ संतोष ने कहा.

‘‘क्या मतलब?’’ ज्योति चौंक कर बोली.

‘‘यही कि आज से इस जान पर मेरा अधिकार है.’’

‘‘होश में तो हो तुम, क्या बक रहे हो, कुछ पता भी है.’’ ज्योति ने हलके गुस्से में कहा.

society

‘‘मुझे पता है कि तुम पड़ोस के गांव छितौना के रामकिशोर यादव की बेटी हो,’’ संतोष कहता गया, ‘‘जानती हो, जिस दिन से मैं ने तुम्हें देखा है, अपनी सुधबुध खो बैठा हूं. न दिन में चैन मिलता है और रात को नींद आती है. बस तुम्हारा खूबसूरत चेहरा मेरी आंखों के सामने घूमता रहता है. मैं तुम से इतना प्यार करता हूं कि अब मैं तुम्हारे बिना नहीं जी पाऊंगा.’’

‘‘लेकिन मैं तो तुम से प्यार नहीं करती.’’ ज्योति ने तुरंत कहा.

‘‘ऐसा मत कहो ज्योति, वरना मैं सचमुच मर जाऊंगा.’’ संतोष गिड़गिड़ाया.

‘‘ठीक है तो मर जाओ, किस ने रोका है.’’ कहती हुई ज्योति होंठ दबा कर मुसकराती हुई स्कूल की ओर बढ़ गई. संतोष तब तक उसे निहारता रहा, जब तक वह उस की आंखों से ओझल नहीं हो गई. ज्योति की तरफ से कोई सकारात्मक उत्तर न पा कर वह मायूस हो कर घर लौट आया.

ज्योति ने संतोष के मन की टोह लेने के लिए अपने मन की बात जाहिर नहीं की थी, जबकि वह संतोष से दिल की गहराई से प्रेम करने लगी थी. ज्योति का नहीं में उत्तर सुन कर संतोष को रात भर नींद नहीं आई, इसलिए अगले दिन वह फिर उसी जगह जा कर खड़ा हो गया था, जहां उस की ज्योति से मुलाकात हुई थी.

ज्योति नियत समय पर घर से निकली. उस दिन उस के साथ उस की कई सहेलियां भी थीं. जैसे ही ज्योति संतोष के करीब आई, उस ने चुपके से एक कागज गिरा दिया और आगे बढ़ गई. संतोष ने जल्दी से कागज उठा कर अपनी कमीज की जेब में रख लिया. फिर ज्योति को वह तब तक निहारता रहा, जब तक उस की आंखों से ओझल नहीं हो गई.

इस के बाद वह जल्दी में जेब से कागज निकाल कर पढ़ने लगा. वह प्रेमपत्र था. ज्योति का प्रेमपत्र पढ़ने के बाद संतोष ऐसे उछला, जैसे उसे दुनिया का सब से बड़ा खजाना मिल गया हो. उस दिन के बाद से संतोष की हिम्मत और बढ़ गई. स्कूल की छुट्टी के बाद अकसर दोनों रास्ते में ही मिल जाया करते थे.

उन दिनों संतोष कोई काम नहीं करता था, लेकिन उस की ख्वाहिश थी कि उसे पुलिस विभाग में नौकरी मिल जाए. इसलिए वह तैयारी में जुट गया. साथ ही ज्योति के साथ उस की प्यार की उड़ान भी जारी रही. प्यार की बातें चाहे कोई कितनी भी छिपाने की कोशिश करें, छिपती नहीं हैं. लिहाजा इन दोनों के प्रेम के चर्चे दोनों के गांवों में होने लगे. उड़ती हुई यह खबर जब ज्योति के पिता रामकिशोर यादव तक पहुंची तो वह गुस्से से उबल पड़े. उन्होंने ज्योति का घर से बाहर निकलना बंद कर दिया.

इतना ही नहीं रामकिशोर ने शंभूपुर दमदियावन पहुंच कर संतोष के पिता हरिप्रसाद से शिकायत की. उन्होंने कहा, ‘‘आप अपने बेटे संतोष को संभाल लें. वह मेरी बेटी का स्कूल आतेजाते पीछा करता है. याद रखो, भविष्य में अगर उस ने मेरी बेटी से मिलने की कोशिश की तो इस का अंजाम बहुत बुरा होगा. ठीक से समझ लो, मैं अपनी मानमर्यादा और इज्जत से किसी को भी खिलवाड़ नहीं करने दूंगा.’’

हरिप्रसाद को बेटे की करतूतों के बारे में पता चला तो उन्हें बड़ा दुख हुआ. उन्होंने जब संतोष से यह बात पूछी तो उस ने सब सचसच बता दिया. हरिप्रसाद ने उसे समझाया कि पहले वह अपने भविष्य को देखे, नौकरी की तैयारी करे. समय आने पर वह किसी अच्छी लड़की से उस की शादी करा देंगे.

पिता ने संतोष को ठीक से समझाया तो उस पर उन की बातों का गहरा असर हुआ. लिहाजा वह अपने भविष्य की तैयारी में जुट गया. उस की मेहनत रंग लाई और उस की नौकरी उत्तर प्रदेश पुलिस में सिपाही के पद पर लग गई.

सन 2015 में उस की चंदौली जिले के चकिया थाने में पहली पोस्टिंग हुई. ये बात उस ने सब से पहले ज्योति को बताई. यहां यह बताना जरूरी है कि रामकिशोर ने भले ही संतोष के पिता को धमकी दी थी. लेकिन संतोष और ज्योति पर इस का कोई खास असर नहीं हुआ.

वे दोनों फोन के जरिए एकदूसरे के करीब बने रहे. संतोष ने ज्योति को विश्वास दिलाया कि कुछ भी हो जाए, लेकिन वह शादी उसी से करेगा. यह सुन कर ज्योति काफी खुश थी. उस ने मां के जरिए यह बात अपने पिता और परिवार वालों तक पहुंचा दी. उस की यह कोशिश रंग लाई और उस का परिवार संतोष से उस की शादी कराने के लिए राजी हो गया.

एक तो संतोष को सरकारी नौकरी मिल चुकी थी, दूसरे दोनों एक ही जातिबिरादरी के थे. जब पूरा परिवार एकमत हो गया तो रामकिशोर बेटी का रिश्ता ले कर हरिप्रसाद के पास गए और कहा कि पुरानी बातें भूल कर नए रिश्ते जोड़ते हैं.

हरिप्रसाद रामकिशोर की धमकी को भूले नहीं थे. दूसरे संतोष भी पिता के पक्ष में आ गया था, इसलिए हरिप्रसाद ने रिश्ते से इनकार कर दिया. उस ने पिता से कह दिया कि वह उसी लड़की से शादी करेगा, जिस से वह चाहेंगे. रामकिशोर शादी का प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद घर लौट गए.

संतोष 2 साल तक ज्योति का दैहिक शोषण करता रहा था, उसे धोखे में रखे रहा था. अंत में उस ने ज्योति से शादी करने से साफ मना कर दिया था. उस ने ज्योति से साफ कह दिया था कि घर वालों के दबाव में उसे कहीं और शादी करनी पड़ रही है. वह भी किसी अच्छे से लड़के से शादी कर ले.

यह बात ज्योति से बरदाश्त नहीं हुई. उस ने रोरो कर मां के सामने सारी सच्चाई खोल दी. यह बात जब रामकिशोर और उस के बेटे सर्वेश को पता चली तो गुस्से के मारे उन के तनबदन में आग सी लग गई. दोनों ने फैसला किया कि जिस ने ज्योति की जिंदगी बरबाद की है, उसे किसी और लड़की से शादी नहीं करने देंगे. उस ने जो गुनाह किया है, उसे उस की सजा जरूर मिलनी चाहिए.

इस बीच सर्वेश को सूचना मिल गई थी कि 29 दिसंबर, 2017 को संतोष का बरच्छा होने वाला है. इस कार्यक्रम में वह गांव आएगा. संतोष 28 दिसंबर को एक सप्ताह की छुट्टी ले कर घर आया.

तय कार्यक्रम के मुताबिक 29 दिसंबर की शाम को संतोष का बरच्छा का कार्यक्रम संपन्न हुआ. वह बहुत खुश था. 30 दिसंबर की सुबह संतोष दोस्तों के साथ गांव के बाहर निकला, तभी उस के फोन पर ज्योति का फोन आ गया. उस ने संतोष को फोन कर के छितौना गांव के अरहर के एक खेत में मिलने को बुलाया. वहां पहले से ही ज्योति के अलावा उस के पिता रामकिशोर, भाई सर्वेश के साथ गांव के मनोज यादव, संजय यादव और आनंद मौजूद थे.

संतोष के पहुंचते ही रामकिशोर यादव, संजय यादव और आनंद ने संतोष को दबोच लिया. ज्योति को उन लोगों ने वहां से हटा दिया. गुस्से में सर्वेश ने कुल्हाड़ी से संतोष के चेहरे और गरदन पर वार कर के उसे मौत के घाट उतार दिया. संतोष की हत्या करने के बाद वहां से भागते समय सर्वेश ने कुल्हाड़ी एक झाड़ी में छिपा दी. सर्वेश संतोष का फोन भी अपने साथ ले गया. रास्ते में उस ने फोन से सिम निकाल कर कहीं फेंक दी.

ज्योति के गिरफ्तार होने के 15 दिनों के भीतर गांव से एकएक कर के सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया. सभी आरोपियों ने अपनेअपने जुर्म कबूल कर लिए थे. सर्वेश की निशानदेही पर पुलिस ने झाड़ी से कुल्हाड़ी भी बरामद कर ली. कथा लिखे जाने तक किसी भी आरोपी की जमानत नहीं हुई थी. पुलिस ने अदालत में सभी आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर दिया था.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें