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स्मौल किचन को दें स्मार्ट लुक

रसोई, आपके घर का एक ऐसा हिस्सा है जहां सब का आना-जाना लगा रहता है. लेकिन जब बात हो छोटी रसोई की तो यह काम थोड़ा सा मुश्किल हो जाता है. क्योंकि लोगों की कम जगह में आने-जाने की वजह से रसोई बिखरी-बिखरी ज़्यादा रहती है. ऐसे में किचन को साफ सुथरा रखने के लिए आपको ध्यान देने की आवश्यकता होती है.

एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि कम बर्तन हो, ताकि बर्तनों को आसानी से व्यवस्थित किया जा सके जिससे आपकी रसोई विशाल दिखे. तो आइए बताते है आपको कुछ ऐसी तरकीब जिससे आप रसोईघर के बर्तनों को एक छोटे स्पेस में भी आसानी से रख सकती हैं.

जब आप बहुत सारे बर्तनों को स्लेब पर या फिर फर्श पर रखते हैं तो जगह ज़्यादा घिरती है। ऐसे में आपके लिए बेस्ट औप्शन है, बर्तनों को दीवार पर लटकाना, ऐसा करने के लिए आप S शेप के हुक्स का इस्तेमाल कर सकती हैं. इससे रसोई की जगह भी कम इस्तेमाल होगी. साथ ही आप आसानी से बर्तनों तक पहुंच सकती हैं.

यदि आपके रसोईघर में दराज हैं तो उनमें से केवल एक चाकू और चम्मच के लिए रखें. केवल आवश्यकता होने पर उन्हें बाहर निकालें. इससे रसोई की स्पेस की बर्बादी नहीं होगी. आप मानें या न मानें यह निश्चित रूप से एक छोटी रसोई में बर्तनों की व्यवस्था करने के लिए सबसे अच्छे औप्शन है.

यदि आप सच में छोटी रसोई में बर्तनों को ढंग से जमाना चाहते हैं तो, सबसे बढ़िया आइडिया है रसोई में बनी दराजों को भरने के बजाए, उन्हें विभाजित कर लें. इसके लिए आप लकड़ी के खूंटी का प्रयोग कर, हर एक खंड में विशिष्ट बर्तन रख सकते हैं.

अगर आप रोज़ काम आने वाले बर्तनों को जमाकर रखना चाहते हैं तो आप रसोई काउंटर के टाप पर इन्सेट बर्तनों का स्टोरेज बनवा सकते हैं. इन्सेट बर्तनों से यहां अर्थ है काउंटर के टाप पर दीवार पर ही छोटी-छोटी अलमारियां बनवा लें, जिनमें बर्तन रखे जा सकें.

किसी भी रसोईघर में बर्तनों को व्यवस्थित करने के लिए सबसे सुविधाजनक तरीकों में से एक है दीवार पर शेल्फ लगवाना. साथ ही महत्वपूर्ण बर्तन पाने के लिए ट्रे निकाल सकते हैं. इस तरीके से आप मसालों और कम महत्वपूर्ण चीज़ों को बेहतर ढंग से रख सकती हैं.

मैं घर से भाग कर एक लड़के से शादी करना चाहती हूं, क्या मेरा निर्णय सही है?

सवाल
मेरी उम्र 18 साल है, मुझे अपने कालेज के एक लड़के से प्यार हो गया है. वह भी मुझ से बहुत प्यार करता है और शादी भी करना चाहता है. यहां तक कि उस ने अपने घर में भी इस बारे में जिक्र किया है. लेकिन दोनों की फैमिली वाले मानने को तैयार नहीं हैं. लेकिन मैं उस के बिना नहीं रह सकती, चाहे मुझे घर से भागना ही क्यों न पड़े. बताएं कि क्या मेरा निर्णय सही है?

जवाब
देखिए अभी आप की उम्र पढ़ाई लिखाई व लोगों को जाननेसमझने की है क्योंकि अभी न ही आप और न ही वह युवक इतना मैच्योर हुआ है कि आप शादी जैसे जिम्मेदारीभरे रिश्ते में बंध जाएं. आप के परिवार वाले आप के हितैषी हैं तभी तो वे इस रिश्ते के लिए अभी इनकार कर रहे हैं ताकि आप को बाद में पछताना न पड़े. आप दोनों मिल कर परिवार वालों को समझाएं कि हम दोनों एकदूसरे से बहुत प्यार करते हैं और शादी करना चाहते हैं लेकिन कैरियर बनने के बाद.

इस से वे भी आप को जरूर समझेंगे और इस रिश्ते को समय आने पर स्वीकार भी करेंगे. और आप भूल कर भी घर से भागने की बात मन से निकाल दीजिए वरना बाद में पछतावे के सिवा कुछ हाथ नहीं लगेगा क्योंकि जल्दबाजी में कुछ नहीं रखा. आप ही सोचिए जब आर्थिकरूप से आप दोनों सशक्त होंगे तो आप को जिंदगी जीने का अलग ही आनंद आएगा वरना पैसों की कमी के कारण आप जीवनभर इस निर्णय पर पछताएंगी ही.

वायरल हो रही दिशा पटानी की ये तस्वीर

बौलीवुड एक्ट्रेस दिशा पटानी अपने लुक्स और स्टाइल को लेकर हमेशा चर्चा में रहती हैं. और ये सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं. हाल ही में एक्ट्रेस दिशा पटानी की एक फोटो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है. इस फोटो को एक्ट्रेस ने अपने इंस्टाग्राम एकाउंट से शेयर किया है.

दिशा पटानी की इस तस्वीर पर फैन्स के खूब कमेंट आ रहे हैं. फैन्स उनकी खूब तारीफ भी कर रहे हैं. दिशा इस तस्वीर में बेड पर लेटी हुई नजर आ रही हैं. इस तस्वीर को शेयर करते हुए दिशा ने कैप्शन लिखा,  किटी की तरह दिखने की कोशिश कर रही हूं.

 

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आपको बता दें एक्ट्रेस दिशा पटानी ने अपने बर्थडे पर एक बिल्ली को अपना पैट बनाया था, जिसका उन्होंने नाम किटी रखा था. उसके बाद से ही दिशा हर दिन किटी की तस्वीरें अपने सोशल मीडिया पर शेयर करती रहती हैं.

18 साल की फैन ने आर माधवन को शादी के लिए किया प्रपोज

 

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दिशा पटानी ने सलमान खान) की फिल्म ‘भारत’  में शानदार अंदाज में अपना किरदार निभाया था. फिल्म में सबने उनकी एक्टिंग की खूब तारीफ की थी. भारत में दिशा पटानी की भूमिका ने दर्शकों का भी खूब दिल जीता था. अब दिशा पटानी जल्द ही फिल्म मलंग में नजर आने वाली हैं.

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18 साल की फैन ने आर माधवन को शादी के लिए किया प्रपोज

एक्टर आर माधवन के लुक्स और एक्टिंग की वजह से काफी पसंद किया जाता है. ये फीमेल फैंस के बीच काफी पौपुलर हैं. हाल ही में इसका एक सबूत देखने को मिला जब एक 18 साल की  फैन ने एक्टर को शादी के लिए प्रपोज किया.

दरअसल,  फैन ने माधवन की एक फोटो पर लिखा- ”क्या ये गलत है कि मैं 18 साल की हूं और आपसे शादी करना चाहती हूं.  इसके बाद आर माधवन ने इस मासूम से सवाल का क्यूट सा जवाब दिया.

माधवन ने लिखा- “हाहाहाहा,  भगवान आपका भला करे,  तुम मुझसे ज्यादा किसी बेहतर शख्स को खोज लोगी.

 

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माधवन ने इंस्टा पर अपनी जो तस्वीर शेयर की है,  सब उसकी तारीफ  कर रहे हैं. फोटो में एक्टर सौल्ट एंड पेपर लुक में दिख रहे हैं. ये तस्वीर हर किसी का ध्यान खींच रही है. फिल्म इंडस्ट्री से माधवन के करीबी दोस्तों ने तस्वीर पर कमेंट किए हैं. शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंद्रा ने लिखा- क्या तुम फेयर एंड हैंडसम यूज करे रहे हो?

फैंस माधवन की इस फोटो पर चार्मिंग, हैंडसम, चौकलेटी बाय जैसे कमेंट्स कर रहे हैं. आपको बता दें, माधवन इन दिनों साइंटिस्ट नंबी नारायणन की बायोपिक में काम कर रहे हैं. फिल्म का टाइटल रौकेट्री: द नंबी इफेक्ट है. इसमें एक्टर का कभी ना देखा गया अवतार देखने को मिलेगा. यह फिल्म तमिल,  तेलुगू,  इंग्लिश, मलयालम,  रौकेट्री, हिंदी भाषा में रिलीज होगी.

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द सिटी औफ लाइट्स पैरिस

पैरिस की रंगीन शामों के बारे में सुना तो बहुत था लेकिन पैरिस जा कर फैशन व ग्लैमर की इस राजधानी के अनेक अनजाने रंग देखने को मिले. साहित्य, कला व संस्कृति के अद्भुत नजारों को देखना हो तो पैरिस से खूबसूरत शहर और कोई नहीं.

कुछ समय पहले पति सेवानिवृत्त हुए थे. बच्चे भी अपनेअपने घरपरिवार में व्यस्त थे. हम दोनों पतिपत्नी ने 2 सप्ताह के लिए पैरिस देखने का प्रोग्राम बनाया. एअर फ्रांस से रिटर्न टिकट और इंटरनैट पर पैरिस में होटल मेरियर में बुकिंग करवा दी थी.

निश्चित दिन एअर फ्रांस के विमान ने ‘ओरले’ एअरपोर्ट पर उतार दिया. बिजली के प्रकाश में जगमगाता एअरपोर्ट. शांत, स्वच्छ, सुव्यवस्थित. एअरपोर्ट से बाहर आ कर टैक्सी को रोका और ड्राइवर से होटल चलने के लिए कहा. सड़क के दोनों ओर प्रकाश ही प्रकाश था. टैक्सी चालक ने रास्ते में बताया, ‘‘सर, यहां के लोग अपनी राष्ट्रभाषा फ्रैंच से अत्यधिक प्रेम करते हैं. अंगरेजी व किसी दूसरी भाषा को फ्रैंच की तुलना में हेय समझते हैं. केवल फ्रैंच भाषा में ही बात करते हैं.’’

‘‘परंतु अधिकांश पर्यटक तो फ्रैंच भाषा नहीं जानते होंगे. यहां पर उन को घूमनेफिरने में कठिनाई का सामना करना पड़ता होगा?’’

‘‘ऐसी कोई बात नहीं है. होटलों में अंगरेजी जानने वाले गाइडों की व्यवस्था है. वे सहज सरल भाषा में रोचक ढंग से शहर के सभी दर्शनीय स्थलों का इतिहास बताते हैं और सैर भी करवाते हैं.’’

होटल पहुंच कर कमरे में अपना सामान रखवाया. लंबे सफर से थक गए थे. खानेपीने की इच्छा नहीं थी. कपड़े बदल कर लेटते ही गहरी नींद आ गई.

अगली सुबह उठे, नहाधो कर तैयार हुए, ब्रेकफास्ट किया. रिसैप्शन पर जा कर गाइड के बारे में पूछा. तुरंत उन्होंने अंगरेजी भाषी गाइड की व्यवस्था कर दी. गाइड का नाम था फिलिप. फिलिप के साथ निकल पड़े पैरिस की रंगीन दुनिया की सैर करने के लिए.

फिलिप ने सब से पहले हमें 15 दिन के लिए मल्टी-डे पास दिलवाया. उस से बारबार ट्रेन या बस का टिकट खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती. आसानी से शहर में कहीं भी घूमाफिरा जा सकता है.

फिलिप बता रहा था, ‘‘पैरिस पूरी दुनिया में आधुनिकतम शहर है. यहां पर 3 सुविधासंपन्न अत्याधुनिक हवाई अड्डे और 8 रेलवे स्टेशन हैं. सब से पहले आप को पैरिस की विशिष्ट पहचान ‘एफिल टावर’ की सैर करवाता हूं.’’

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एफिल टावर : नजरें ऊपर उठा कर देखा तो एफिल टावर को देखती ही रह गई. टावर की ऊंचाई है 1 हजार फुट और वजन 7,300 टन. फिलिप ने बताया कि इस का डिजाइन गुस्ताव एफिल ने बार्सिलोना में आयोजित होने वाले वर्ल्ड ट्रेड फेयर के प्रवेशद्वार के रूप में आयोजित किया था.

31 मार्च, 1889 को यह बन कर तैयार हुआ था. उस समय यह दुनिया का सर्वोच्च टावर था. टावर की पहली मंजिल पर स्थित रैस्टोरैंट में बैठ कौफी पी, स्नैक्स खाए. उस के बाद लिफ्ट से ऊपर पहुंच गए. वहां से रोशनी में आलोकित पैरिस का मनोरम दृश्य देखा. टावर के दोनों तरफ संग्रहालय हैं. बेसमैंट में थिएटर है. 3 हजार दर्शकों के बैठने की व्यवस्था है.

सेन नदी : पैरिस में शहर के बीच बहती है सेन नदी. फिलिप ने बताया कि सेन नदी पैरिस की जीवनरेखा है. 776 किलोमीटर लंबी सेन नदी पैरिस के मध्य से होती हुई इंगलिश चैनल तक जाती है. नदी के दोनों तटों पर अनेक भव्य ऐतिहासिक स्मारक स्थित हैं. पैरिस को जोड़ने के लिए नदी पर चौड़ी सड़कों वाले 37 पुल बने हैं. इन में दर्शनीय हैं लुई फिलिप पुल और वर्ष 1607 में निर्मित नौंवा पुल. शहर से बाहर नार्मंडी पुल लोहे के तारों से बना दुनिया का सब से लंबा पुल है. एफिल टावर देखने के बाद शानदार क्रूज में बैठ कर सेन नदी की सैर की.

लुव्रे संग्रहालय : अब हमें फिलिप ले गया विश्व के विशालतम, ऐतिहासिक लुवे्र संग्रहालय में. यह ऐतिहासिक संग्रहालय पैरिस का सर्वोत्कृष्ट दर्शनीय स्थल है. संग्रहालय लुवे्र राजप्रासाद में स्थित है. 12वीं सदी में फिलिप द्वितीय ने यहां पर किला बनवाया था. संग्रहालय के बेसमैंट में आज भी किले के अवशेष विद्यमान हैं. वर्ष 1682 तक अनेक बार किले का विस्तार, नवनिर्माण हुआ. वर्ष 1682 में सम्राट लुई (चौदहवें) ने अपना निवास वर्सेल्स राजप्रासाद में कर लिया था तथा वर्ष 1692 में उन्होंने लुवे्र राजप्रासाद को शाही सामान व पुरातन कलाकृतियों का संग्रहालय बना दिया था.

10 अगस्त, 1793 को इसे जनता के लिए खोल दिया गया. उस समय यहां पर 537 पेंटिंग्स तथा 184 अन्य कलाकृतियां प्रदर्शित की गई थीं. नेपोलियन के शासनकाल में प्रदर्शित पेंटिंग्स तथा कलाकृतियों में वृद्धि हो गई. संग्रहालय का नाम बदल कर नेपोलियन संग्रहालय रखा गया. लुई (अठारहवें) तथा चार्ल्स (दसवें) के शासनकाल में 20 हजार हस्तशिल्प की व अन्य कलाकृतियां जमा हो गई थीं. विशाल संख्या देख कर 2008 ई. में इन को 8 खंडों में विभक्त कर दिया गया. यहीं पर रखी है लियोनार्दो द विन्ची की अमूल्य, मूल कृति- मोनालिसा. उस को हम दोनों देखते रह गए. विश्वास नहीं हो रहा था कि वास्तव में हम ‘मोनालिसा’ की पेंटिंग के सामने खड़े हैं.

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कैथेड्रल औफ नाटरडस: 10वीं सदी में यह कैथेड्रल ‘अवर लेडी औफ पेरिस’ के नाम से प्रख्यात था. कैथेड्रल औफ नाटरडस फ्रैंच गोथिक स्थापत्य कला का विशिष्ट नमूना है. इस का निर्माण कार्य वर्ष 1163 में शुरू हो कर वर्ष 1205 में पूरा हुआ था. 1492 के आसपास यह फ्रैंच संस्कृति का केंद्र रहा. पत्थर की भव्य प्रतिमाएं तथा गोथिक कला इस के सौंदर्य में चारचांद लगा देती हैं.

पैरिस के आर्कबिशप का यही आधिकारिक स्थल है. अपनी भव्य स्थापत्यकला के लिए यह पर्यटकों का लोकप्रिय दर्शनीय स्थल है.

विजय द्वार : पैरिस के सर्वाधिक प्रसिद्ध स्मारकों में से एक है ‘विजय द्वार’. यह चार्ल्स-द-गाल चौराहे पर निर्मित है. विजयों तथा युद्ध में वीरगति प्राप्त सैनिकों की स्मृति में निर्मित यह प्रथम विजय द्वार है. नेपोलियन कालीन युद्धों तथा फ्रांस की राज्यक्रांति के शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलिस्वरूप खड़ा यह प्रवेशद्वार भव्य तथा विशाल है. भीतरी तथा बाहरी दीवारों पर अंकित हैं फ्रांस की विजय गाथाएं तथा जनरलों के नाम. दीवारों पर उत्कीर्ण हैं युद्ध संबंधी चित्र. यह 50 मीटर ऊंचे, 45 मीटर चौड़े तथा

22 मीटर गहरे गुंबद के नीचे प्रथम विश्व युद्ध के अज्ञात शहीदों की समाधि है.

इन्वेल्डिस : शहीदों, युद्धों का स्मारक दिखाते हुए फिलिप बोला, ‘‘चलिए, आप को युद्धकाल में हताहत तथा सेवानिवृत्त वृद्ध सैनिकों के लिए निर्मित विशाल परिसर व अस्पताल भी दिखाता हूं.’’

फिलिप हमें ‘इन्वेल्डिस’ ले गया. बताने लगा, ‘‘यहां पर फ्रांस की राज्यक्रांति में वीरगति को प्राप्त हुए शहीदों की समाधि फ्रैंच व जनता के नायक नेपोलियन की भी समाधि है.’’

स्थानस्थान पर नेपोलियन की प्रस्तर प्रतिमाएं देख कर थोड़ा आश्चर्य हुआ. फिलिप ने बताया, ‘‘सर, नेपोलियन आप को पैरिस की जनता के दिलों में विद्यमान मिलेगा.’’ नेपोलियन का घर, उस का कार्यालय, अस्त्रशस्त्र का संग्रहालय, नेपोलियन की प्रस्तर प्रतिमाएं उस की जीवंतता का आभास दिला रही थीं.

वर्सेल्स राजप्रासाद : वर्सेल्स के राजप्रासाद में प्रवेश करने से पहले बाहर विशाल रंगबिरंगे, मनोरम फूलों से सजे उद्यान को देख कर ही मन आनंदित हो उठा. इतनी मनमोहक दृश्यावली देखने का मौका पहली बार मिला था. फौआरे, प्रस्तर प्रतिमाएं उद्यान की शोभा को द्विगुणित कर रही थीं. राजप्रासाद में विशाल सभागार, निजी कक्षों में बिखरा अपार वैभव सौंदर्य देखा. एक ओपेरा हौल तथा विश्वप्रसिद्ध ‘हौल औफ मिरर्स’ है. हौल में चारों ओर दर्पण ही दर्पण हैं.

पैरिस में रचाबसा है कलासाहित्य, संगीत का अनुपम संसार. रोदां, भोगा, पिकासो को कौन नहीं जानता. फ्रांस में इन का नाम सुन कर आम आदमी के चेहरे खुशी से खिल उठते हैं. स्वयं को वे गौरवान्वित समझते हैं. लियोनार्दो-द-विन्ची यहीं के वासी थे. विश्वविख्यात लेखक मोंपासा, अर्नेस्ट हेमिंग्वे की कर्मभूमि थी यह. यहीं पर देखा एक उद्यान में स्थित ‘स्टेच्यू औफ लिबर्टी’ का मौडल. मौडल पहले बना था, मूर्ति बाद में.

चैंपस एलिसैस एवैन्यू : पैरिस ने हमें पूरी तरह से अपने साथ बांध लिया था. शानदार चौड़ी सड़कों के साथसाथ संकरी गलियां भी थीं. परंतु एक शानदार, मशहूर एवैन्यू है- चैंपस एलीसीस. फिलिप ने बताया कि ग्रीक पौराणिक कथाओं में वर्णित देवात्माओं के वास स्थान ‘एलिसियन फील्ड्स पर फ्रैंच भाषा में यह नाम रखा गया है. यहां पर हैं- सिनेमाघर, कैफे, बड़ेबड़े शानदार स्टोर. दुनिया में सब से ज्यादा महंगी है यहां की संपत्ति. वास्तव में यह दुनिया की सब से सुंदर गली मानी जाती है. गली कांकोर्ड से शुरू हो कर चार्ल्स-द-गाल चौराहे तक जाती है. यहां पर बड़ीबड़ी कंपनियों के बड़ेबड़े स्टोर हैं. हम ने भी यहां पर कपड़ों, जूतों की खरीदारी की.

प्लेस-द-ला-कांकोर्ड : 21.3 एकड़ भूमि पर फैले प्लेस-द-ला-कांकोर्ड के एक ओर घोड़े पर सवार सम्राट लुई (15वें) की प्रतिमा है. यह स्थल अष्टकोणीय है. इस स्थल के पश्चिम में है ‘चैंपस एलिसैस एवैन्यू’, पूर्व में है ट्यूलेरिस गार्डन, उत्तर में है 2 समरूप इमारतें और दक्षिण में है सेन नदी पर बना कान्कोर्ड पुल. इस स्थल के मध्य में मिस्र द्वारा प्रदत्त उपहार, लाल ग्रेनाइट का 23 मीटर ऊंचा और 280 टन वजन वाला प्राचीन शिलास्तंभ स्थित है. 2 खूबसूरत फौआरे इस स्थल की शोभा बढ़ा रहे हैं.

डिजनी लैंड : पैरिस से 32 किलोमीटर दूर बना है यूरोप का सर्वाधिक लोकप्रिय दर्शनीय स्थल डिजनीलैंड.  डिजनीलैंड थीम पार्क के 5 खंड मेनस्ट्रीट यूएसए, फ्रंटियर लैंड, फैंटेसीलैंड, एडवैंचर लैंड व डिस्कवरी लैंड है. यहां के प्रमुख आकर्षण हैं- लीजैंड्स औफ द वाइल्ड वैस्ट, वुर्डीस राउंड अप विलेज, कैरीबियन पिरेट्स, अलादीन का जादुई रास्ता, स्लीपिंग ब्यूटी का किला, स्नोव्हाइट और सात बौने, पीटर पैन की फ्लाइट, बैक स्टेज मैजिक विद मिकी माउस. डिजनीवर्ल्ड स्टूडियो पार्क में डिजनी की प्रख्यात फिल्में फिल्मायी जाती हैं. डिजनीलैंड पार्क में घूमने के लिए एक दिन का समय भी कम है. पर्यटकों के रहने, खानेपीने का अच्छाखासा प्रबंध है.

लिडो शो

पैरिस शहर में दुनिया का आधुनिकतम कैबरे थियेटर ‘लिडो’ है. बहुत चर्चा सुनी थी परंतु टिकट के दाम देख कर भीतर जाने का साहस नहीं कर पाए. वैसे भी कैबरे डांस देखने में रुचि नहीं. कहते हैं कि यहां के कलात्मक कैबरे नृत्य को देख कर दर्शक मंत्रमुग्ध रह जाते हैं.

इतना सब कुछ देख पाने के बाद भी पैरिस देखने की इच्छा बढ़ती ही जा रही थी. वापसी का समय आ गया था. बच्चों के लिए थोड़ीबहुत खरीदारी भी करनी थी. सो, गाइड से कहा कि वह हमें अब खरीदारी करवा दे. उस के साथ जा कर र्यू सैंट हौनर व प्लेस वेंडोस से कुछ आभूषण व परफ्यूम खरीदे. मोंटमार्ट में पुरानी कलाकृतियां व स्मृतिचिह्न मिल गए. मेरेस के डिपार्टमैंटल स्टोर्स पर उचित मूल्य पर कपड़े व अन्य सामान मिल गया.

आखिरकार जाने का दिन आ गया. अपने गाइड फिलिप का बहुतबहुत धन्यवाद कहा. उस के सहयोग के बिना इतने कम समय में इतना कुछ देख पाना, वह भी विस्तारपूर्वक देख पाना संभव न था. भारत से लाए संगमरमर का ताजमहल उस को आभारस्वरूप भेंट किया जिसे ले कर वह अत्यधिक प्रसन्न हुआ. निसंदेह पैरिस बहुत खूबसूरत है. यहां पर सर्वत्र समृद्धि, संपन्नता दिखाई देती है.  फ्रांसवासी अपनी राष्ट्र- भाषा, अपने देश के प्रति पूर्णरूप से समर्पित हैं. साहित्य, कला व संस्कृति की अनूठी दीप ज्योति प्रज्वलित है यहां. रंगीन दुनिया और पुरातन संस्कृति को देखना हो तो पैरिस से श्रेष्ठ स्थान दुनिया में शायद ही कोई हो. लौट आए थे भारत परंतु वहां की अविस्मरणीय स्मृतियां आज भी मन में जीवंत हैं.

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कैसे जाएं  

दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु व चेन्नई से एअरफ्रांस की विमानसेवा उपलब्ध है. एअर की फ्लाइट इंडिया भी दिल्ली, मुंबई से पैरिस जाती है.

कब जाएं

बसंत तथा ग्रीष्म ऋतु में. अगस्त में पैरिसवासी अवकाश पर घूमनेफिरने चले जाते हैं तथा पर्यटक निश्चिंत हो सैर का आनंद ले सकते हैं.
आवास

पैरिस में सस्ते, महंगे सभी प्रकार के आवासीय स्थान, होटल उपलब्ध हैं. ट्रैवल एजेंट व इंटरनैट पर इस संबंध में विस्तृत जानकारी ली जा सकती है.

शौपिंग 

चैंपस एलिलैस एवेन्यू, र्यू-सैंट-हौनर, प्लेस वेंडोस, दी मरेस, सैंट रजमेन, मोन्टामार्टे शौपिंग के लिए उपयुक्त स्थान हैं. दुकानें सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे या 7 बजे तक खुली रहती हैं. बड़े शौपिंग सेंटर व डिपार्टमैंटल स्टोर सुबह 9 बजे से शाम 9.30 बजे तक खुले रहते हैं.

भोजन 

यों तो विविध प्रकार का भोजन मिलता है परंतु शाकाहारियों के लिए पिज्जा, बर्गर और सलाद जैसे सीमित विकल्प ही उपलब्ध होते हैं.

मैडम जी

‘‘प्रमोदजी, मैं यह क्या सुन रही हूं…’’ गीता मैडम पार्टी के इलाकाई प्रभारी प्रमोदजी के दफ्तर में कदम रखते हुए बोली.

‘‘क्या हुआ मैडमजी… इतना गुस्सा क्यों हो?’’ प्रमोदजी के चेहरे से साफ पता चल रहा था कि वे मैडमजी के गुस्से की वजह जानते हैं.

‘‘प्रमोदजी, बताएं कि पार्टी ने आने वाले इलैक्शन में मेरी जगह उस कल की आई लड़की सारिका को टिकट देने का फैसला किया है. कल की आई वह लड़की आज आप के लिए इतनी खास हो गई है कि उस को मेरी जगह दी जा रही है?’’

‘‘अरे मैडमजी, आप कहां सब की बातों में आ रही हैं. आप तो पार्टी की पुरानी कार्यकर्ता हैं. आप ने तो पार्टी के लिए बहुतकुछ किया है. हम भी आप के बारे में सोचते, पर नेताजी के निर्वाचन समिति को आदेश हैं कि इस बार सब नए लोगों को ही आगे करना है…

‘‘दूसरी पार्टियां रोज नएनए चेहरों के साथ अखबारों में बने रहना चाहती हैं. बस, जनता को दिखाने के लिए हमारी पार्टी भी खूबसूरत चेहरों को आगे लाना चाहती है. ये कल के आए बच्चे हमारी और आप की जगह थोड़े ही ले सकते हैं,’’ बात करतेकरते प्रमोदजी ने अपना हाथ मैडमजी के हाथ पर रख दिया, ‘‘मैडमजी, हमारी नजर से देखो, तो उस सारिका से लाख गुना खूबसूरत हैं आप. पर नेताजी को कौन समझाए.’’

प्रमोदजी के चेहरे की मुसकान उन के इरादे साफ बता रही थी, पर छोटू की चाय ने उन को अपना हाथ मैडमजी के हाथ से हटाने पर मजबूर कर दिया.

छोटू चाय रख कर चला गया, तो मैडमजी ने फिर अपनी नाराजगी जताई, ‘‘प्रमोदजी, आप इन बातों से मुझे बहलाने की कोशिश मत कीजिए. आप के कहने पर मैं ने पिछली बार भी परचा नहीं भरा, क्योंकि आप चाहते थे कि आप की भाभी इलैक्शन लड़े. तब मैं भी नई थी और आप की बात मान गई थी.

‘‘पर अब क्या? सारिका 2 साल पहले पार्टी से जुड़ी है और उस को टिकट मिल रहा है. यह गलत है.

‘‘आप एक बार मेरी मुलाकात नेताजी से तो कराइए.

‘‘प्रमोदजी, मैं ने हमेशा वही किया है, जो आप ने कहा. कितनी बार आप के कहने पर झूठ भी बोला…यहां तक कि आप के कहने पर उस मनोहर पर गलत आरोप भी लगाए, ताकि आप इस कुरसी पर बने रहें. पर मुझे क्या मिला?

‘‘प्रमोदजी, आप जो कहेंगे, मैं करूंगी. बस, एक बार टिकट दिलवा दीजिए, फिर देखिए जीत तो मेरी पक्की है. आप समझ रहे हैं न,’’ इस बार मैडमजी ने प्रमोदजी का हाथ पकड़ लिया.

जब मैडमजी ने खुद प्रमोदजी का हाथ पकड़ लिया, तो उन की तो मानो मुंहमांगी मुराद पूरी हो गई. उन्होंने मैडमजी को भरोसा दिया कि वे आज ही नेताजी से उन के लिए बात करेंगे.

मैडमजी अपना धूप का चश्मा सिर से वापस आंखों पर लगा कर दफ्तर से घर चली आईं.

‘‘क्या बात है गीता, आज जल्दी घर आ गईं? कोई पार्टी या मीटिंगविटिंग नहीं थी आज?’’

घर में आते ही मैडमजी सिर्फ गीता बन जाती थीं, जो मैडमजी को बिलकुल पसंद नहीं था.

अपने पति की यह बात सुन कर वे एकदम चिढ़ गईं और बिना जवाब दिए अपने कमरे में चली गईं.

मैडमजी को पैसों की कोई कमी नहीं थी. उन को कमी थी तो एक पहचान की. मैडमजी सुनने की आदत हो गई थी उन को. उन का यही सपना था कि लोग सलाम करें, हाथ जोड़ कर आगेपीछे घूमें. वे सत्ता का नशा चखना चाहती थीं और इस के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार थीं.

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‘‘क्या बात है गीता, बहुत परेशान दिख रही हो?’’ कहते हुए समीर ने कमरे की बत्ती जलाई, तो मैडमजी को एहसास हुआ कि रात हो गई है.

‘‘नहीं, कुछ नहीं. बस, सिरदर्द कर रहा है. दवा ली है. ठीक हो जाऊंगी. आप कहीं जा रहे हैं क्या?’’

‘‘हां… तुम को कल रात को बताया तो था कि मैं आज रात को 3 दिन के लिए बाहर जा रहा हूं. अगर ज्यादा तबीयत खराब हो, तो डाक्टर बुला लेना,’’ समीर इतना कह कर कमरे से बाहर चला गया.

समीर के जाते ही गीता ने फोन उठा कर प्रमोदजी को मिला दिया, ‘‘हैलो प्रमोदजी, मैं बोल रही हूं. क्या आप ने नेताजी से बात की?’’

‘‘अरे मैडमजी, मैं आप के बारे में ही सोच रहा था. आज आप गजब की लग रही थीं. क्या मदहोश खुशबू आती है…अभी तो घर पर हूं, कल दफ्तर जा कर आप से बात करता हूं,’’ प्रमोदजी के पास से शायद उन की पत्नी की आवाज आ रही थी, इसलिए उन्होंने फोन जल्दी रख दिया.

मैडमजी भी कच्ची खिलाड़ी नहीं थी. सारी रात जाग कर उन्होंने सोच लिया था कि आगे क्या करना है, जिस से सारिका को टिकट न मिले और प्रमोद को भी सबक मिल जाए.

अगले दिन अपनी अलमारी से नोटों की 3 गड्डियां पर्स में डाल कर मैडमजी जल्दी ही घर से निकल गईं. सीधे कौफी हाउस पहुुंच कर वे पत्रकारों से मिलीं. उन्हें कुछ समझाया और एक नोट की गड्डी उन्हें दी.

फिर वे एक सुनसान जगह पर 6-7 लड़कों से मिलीं. नोटों की बाकी गड्डी और एक फोटो उन को दी. थोड़ी देर बात की और तेजी से निकल गईं. वहां से वे सीधे प्रमोदजी के दफ्तर पहुंच गईं.

वहां अभी कोई नहीं आया था. बस, छोटू सफाई कर रहा था. वे चुपचाप छोटू के पास गईं, उसे कुछ समझाया. उस के हाथ में सौ रुपए का एक नोट रख दिया.

अब इंतजार था प्रमोदजी का. बाथरूम में जा कर मैडमजी ने पर्स से लिपस्टिक निकाल कर दोबारा लगाई और प्रमोदजी का इंतजार करने लगीं.

दफ्तर में मैडमजी को देख कर प्रमोदजी पहले थोड़ा हैरान हुए, पर वे मुसकराते हुए बोले, ‘‘मैडमजी, आप इतनी सुबहसुबह?’’

‘‘बस, क्या बताऊं प्रमोदजी, सारी रात सो नहीं पाई,’’ इतना कह कर मैडमजी ने साड़ी का पल्लू सरका दिया और बोलीं, ‘‘अरे, यह पल्लू भी न… माफ कीजिए,’’ फिर उन्होंने अदा से अलग पल्लू ठीक कर लिया.

‘‘मैडमजी, आज तो आप कहर बरपा रही हैं. यह रंग बहुत जंचता है आप पर,’’ प्रमोदजी मैडमजी के पास आ कर बोले.

‘‘आप भी न प्रमोदजी, बस कुछ भी…’’ मैडमजी ने अपना सिर प्रमोदजी के कंधे पर रख दिया.

उन्होंने मैडमजी की कमर पर हाथ रखना चाहा, पर उसी वक्त छोटू चाय ले कर आ गया और वे सकपका कर मैडमजी से दूर हो गए और बोले, ‘‘मैं ने तो चाय नहीं मंगवाई. चल, भाग यहां से.’’

‘‘प्रमोदजी, चाय मैं ने मंगवाई थी. रख दे यहां. चल, तू जा,’’ मैडमजी ने फिर अदा से प्रमोदजी की ओर देखा, पर प्रमोदजी को एहसास हो गया था कि वे पार्टी दफ्तर में हैं, इसलिए अपनी कुरसी पर जा कर बैठ गए.

मैडमजी खुश थीं कि छोटू एकदम सही वक्त पर आया.

‘‘प्रमोदजी, बातें तो होती ही रहेंगी. आप यह बताओ कि नेताजी से बात कब करोगे?’’

‘‘मैडमजी, बस आज ही… रैली के बारे में बात करने मैं आज ही पार्टी दफ्तर जा रहा हूं. आप के बारे में भी बात कर लूंगा.’’

‘‘पर आप को लगता है कि वे मानेंगे?’’ मैडमजी ने चिंता जताई.

‘‘अरे, वह सब आप मुझ पर छोड़ दो,’’ प्रमोदजी ने मुसकराते हुए कहा.

‘‘नहीं, आप ही कह रहे थे न कल कि नए चहरे… बस, इसलिए पूछा… और नेताजी अपना फैसला बदलेंगे,’’ मैडमजी फिर अदा से बोलीं.

‘‘इतने सालों में आप हमें ठीक से जान नहीं पाई हैं. पार्टी में अच्छी पकड़ है हमारी. हाईकमान के फैसले को बदलना मेरे लिए कोई मुश्किल बात नहीं,’’ प्रमोदजी अपने मुंह मियां मिट्ठू बन रहे थे और मैडमजी कुरसी पर टेक लगा कर उन की बातें अपने फोन पर रिकौर्ड कर रही थीं.

प्रमोदजी आगे बोले, ‘‘मैडमजी, इतने साल तक पार्टी में झक नहीं मारी है मैं ने. हर किसी की कमजोरी जानता हूं. हर किसी को बोतल में उतार कर ही यहां तक पहुंचा हूं. आप ने तो देखा ही है कि जो मेरी बात नहीं मानता, उस का हाल उस मनोहर जैसा होता है.

‘‘बेचारा कुछ किए बिना ही जेल की हवा खा रहा है. और नेताजी के भी कई किस्से इस दिल में कैद हैं,’’ मैडमजी के सामने अपनी शान दिखाने के चक्कर में प्रमोदजी न जाने क्याक्या बोल गए.

मैडमजी का काम हो चुका था. वे किसी काम का बहाना कर के वहां से निकल गईं. अब उन्हें अगले काम के पूरा होने का इंतजार था. घर जाने का उन का मन नहीं था, इसलिए वे पास की कौफी शौप में जा कर बैठ गईं. समय देखा… अब तक तो खबर आ जानी चाहिए थी.

मैडमजी कौफी पी कर पैसे देने ही वाली थीं कि उन की नजर टैलीविजन पर गई. चेहरे पर हलकी मुसकान आ गई. पर्स उठा कर वापस प्रमोदजी के दफ्तर आ गईं.

प्रमोदजी फोन पर थे. वे काफी परेशान थे, ‘‘नहीं नेताजी, मुझे तो कुछ भी नहीं पता. यह खबर सच्ची है या नहीं… आप यकीन कीजिए, मुझे नहीं पता था कि सारिका कालेज में दाखिले के नाम पर छात्रों से पैसे लेती है…

‘‘पर नेताजी, आप मेरी बात तो सुनो. आप मुझे… ठीक है, जैसा आप कहो,’’ प्रमोदजी ने पलट कर के देखा, ‘‘अरे मैडमजी, अच्छा हुआ आप आ गईं.’’

‘‘क्या हुआ प्रमोदजी?’’ मैडमजी ने झूठी चिंता जताई.

‘‘हां मैडमजी, पार्टी दफ्तर से फोन था. कुछ लड़कों ने किसी टैलीविजन रिपोर्टर को इंटरव्यू दिया है कि कालेज में दाखिला करवाने के नाम पर सारिका ने उन से मोटी रकम ली है. अब देखो, इतना बड़ा कांड कर दिया और हमें कानोंकान खबर तक नहीं…’’

प्रमोदजी कुरसी पर बैठते हुए बोले, ‘‘नेताजी ने फिर हमें जिम्मेदारी दे दी है. उन का मानना है कि इस बार किसी भी बदनाम आदमी को टिकट तो क्या, पार्टी में भी जगह न दी जाए,’’ कहते हुए प्रमोदजी के चेहरे से एकदम चिंता के भाव गायब हो गए, जैसे उन के शैतानी दिमाग में कुछ आया हो.

‘‘मैडमजी, इस से पहले कि फिर कोई नया चेहरा सामने आए, मैं आप का नाम आगे कर देता हूं… कल नेताजी से मिलने जा रहा हूं, तो आज शाम को पहले आप से एक छोटी सी मुलाकात हो जाए… दफ्तर के पीछे वाले मेरे फ्लैट पर.’’

प्रमोदजी की बात सुन कर मैडमजी फिर मुसकारा दीं और बोलीं, ‘‘प्रमोदजी, नाम तो आप को मेरा ही लेना होगा और कान खोल कर सुन लो, अगर मेरे बारे में कोई गलत खयाल मन में भी लाए, तो आप भी इस पार्टी में नजर नहीं आएंगे.

‘‘…अब ध्यान से मेरी बात सुनो. जिन लड़कों ने सारिका पर इलजाम लगाया है, वे सारिका के साथसाथ आप का नाम भी ले सकते थे, पर मुझे इस पार्टी में लाने वाले आप थे, मैं ने हमेशा आप को अपने पिता जैसा माना, इसलिए अपनी परेशानी ले कर मैं आप के पास आई और आप मुझ पर ही गंदी नजर रखे हुए हैं. शर्म नहीं आई आप को…’’

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इतना कह कर मैडमजी ने अपने मोबाइल फोन से अपनी और प्रमोदजी के बीच हुई सारी बातों की रिकौर्डिंग उन्हें सुना दी. प्रमोदजी को पसीने आ गए.

‘‘अब आप के लिए बेहतर होगा कि नेताजी को अभी फोन कर के मेरे नाम पर मुहर लगवा दीजिए, वरना कल आप की यह आवाज हर टैलीविजन चैनल पर सुनने को मिलेगी,’’ मैडमजी पर्स संभालते हुए तेज कदमों से कमरे से बाहर निकल गईं.

शाम होतेहोते मैडमजी के खास कार्यकर्ताओं के उन्हें टिकट मिलने की बधाई देने के फोन आने भी शुरू हो गए थे.

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मौनसून में क्यों बचना चाहिए हरी सब्जियों से?

मौनसून में हरी सब्जियों को गृहिणियों को त्याग देना चाहिए, मगर आधुनिक महिलाएं रसोई से इतनी अधिक अनभिज्ञ  हैं, कि वे इस मौसम में भी धड़ाधड़ पालक, लालभाजी ,चौलाई इत्यादि  सब्जियां खरीदती रहती हैं. आज मैंने  बाज़ार में एक  पत्रकार की  बाईक चलाने में निपुण धर्म पत्नी को देखा, वे बोलीं कि बालक  कहता है, कि इससे खून बढ़ता है. बस खून बढ़ने और नासमझी में हम हरिदार पत्ती पत्तेदार सब्जियों को सेवंथ करते रहते हैं और अनेक प्रकार की बीमारियों से घिर जाते हैं. आइए आज आपको बताते हैं मौनसून में हरी पत्तेदार सब्जियों से परहेज क्यों करना चाहिए और क्या लाभ है.

मौनसून में पत्तेदार सब्जी की ज्ञान जरूरी

देश के सुप्रसिद्ध पत्रकार शंभू नाथ शुक्ल हरी पत्तेदार सब्जियों पर लिखते हैं आज सुबह मैंने अपने मित्र और उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी श्री सुलखान सिंह की एक पोस्ट देखी थी, कि बरसात में छाछ और हरी पत्तीदार सब्जियों को छोड़ देना चाहिए. खुद किसानों का संचित अनुभव है, कि- ‘सावन सुकसा न भादों दही!’ अर्थात सावन में हरी सब्जियाँ न खाएं और भादों में दही. यह ज्ञान पूर्ण थे उन्होंने अपने फेसबुक अकाउंट पर लिखी है निसंदेह यही परम सत्य है इसे हमें आत्मसात करना होगा अन्यथा सावन में जो बीमारियां गिरेगी उससे हमारा यह महीना बर्बाद हो जाने की पूरी संभावना है. इसकी वजह यह है कि हरे पत्तेदार सब्जियां इस मौसम में बाजार में बहुत ज्यादा उपलब्ध हो जाती हैं सस्ते दर पर भी मिलने लगती है रामस्वरूप जब हमें नौलेज नहीं होता तो हम इन्हें खुशी खुशी खरीदकर ले आते हैं हम यह नहीं जानते कि यह एक तरह से बीमारी का घर है.

ब्लड बढ़ाने का और भी जरिया

दरअसल हमें घर परिवार में बच्चों को बताना चाहिए कि स्वास्थ्य और खून बढ़ाने के लिए हरी सब्जियों के अलावा और भी बहुत कुछ उपलब्ध है अगर हम थोड़ा सामान्य ज्ञान अपना बढ़ाने तो यह आराम से संभव है, आप अपने  अपने बच्चों से से कहो कि सावन में खून ही बढ़ाना है, तो मिथौरी, अमृतसरी बड़ी, या गट्टे की सब्जियां खायी जा सकती हैं और बनाकर खिलाइए भी. दरअसल ऐसी बहुत सी सब्जियां हैं जिनके नाम भी आज की ग्रहणी नहीं जानती.

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पूर्व महानिदेशक पुलिस सुलखान सिंह लिखते हैं-

“चौमासे में साग, मट्ठा आदि क्यों नहीं खाना चाहिए, इसका औचित्य लोग तरह तरह के कारण देते हैं. एक कारण अकसर बताया जाता है कि बरसात में पत्तों पर कीट-पतिंगे अण्डे देते हैं जो खाने के साथ पेट में चले जायेंगे. मेरे मत में यह सही कारण नहीं है.  अण्डे अगर होंगे तो साग के उबालने,छौंकने से पक जायेंगे और प्रोटीन ही देंगे. तो फिर क्या ये प्राचीन भारतीय कहावतें गलत हैं? तो उत्तर है कि कहावतें पूरी तरह सटीक हैं. तो फिर सही कारण क्या है?  कारण आयुर्वेद बताता है, परन्तु एलोपैथी इसे नहीं समझती.इसीलिये वैज्ञानिक से प्रतीत होने वाले कारण दिये जाते हैं. वर्षा ऋतु में गैस की प्रधानता होती है.पत्ते वाले शाग तथा मट्ठा वात प्रधान हैं अर्थात गैस बढ़ाते हैं. इसलिये इनसे बचना चाहिए. मानव शरीर वात, पित्त और कफ के संतुलन से स्वस्थ रहता है और असन्तुलन होने पर रोगी हो जाता है. हमारी ऋतुयें इन त्रिदोषों को प्रभावित करती हैं. वर्षा ऋतु में वात (Gas), जाड़े में कफ (mucus/ sticky matter) और गर्मी में पित्त (bile/acidic juices) प्रधान होने लगते हैं. अतः इन ऋतुओं में त्रिदोषों का साम्य बनाये रखने के उद्देश्य से आहार व्यवहार ऐसा होना चाहिये जो ऋतु के प्रभाव को जज्ब (adjust/balance) कर सके.

ध्यान रखें ये बातें

  1. जाड़े में घृत, खट्टे फल, सन्तरा, प्रोटीन इत्यादि युक्त भोजन और कठोर परिश्रम/व्यायाम अपेक्षित हैं.
  2. गर्मी में हल्की सब्जियां, अधिक जलयुक्त फल/ तरकारी अर्थात् क्षारीय भोजन और हल्के काम/ व्यायाम तथा सूर्य से बचाव अपेक्षित है.
  3. बरसात में पत्तियों वाले साग (वात प्रधान/गैस करने वाले), प्रोटीन युक्त पदार्थ, दही/मट्ठा आदि गैस बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल न्यूनतम रखें. साथ ही व्यायाम खूब कर सकते हैं. गीले कपड़ों तथा रात्रि में बाहर ओस में सोने से बचा जाये.

आहार-विहार के प्राचीन पथ-प्रदर्शक सिद्धांत यही हैं  अपनी सुविधा और सामर्थ्य के अनुसार यथासंभव व्यवहृत करना चाहिए. याद रखने योग्य- “हित भुक् ऋत भुक् मित भुक्”.बरसात के मौसम में  खानपान में विशेष सावधानी अनिवार्य है.

यह भी  जनमानस में मान्यता है कि हरी पत्तेदार सब्जियां सेहत के लिए सबसे अधिक लाभकारी मानी जाती है, लेकिन बारिश के मौसम में यही सब्जियां कई तरह के बीमारियों को न्यौता देती है .कहा जाता है कि इस मौसम में पत्तेदार सब्जियां बीमार बना सकती है, खासतौर पर सलाद या कच्ची सब्जियां बारिश में बिलकुल नहीं या कम खानी चाहिए. बरसात के मौसम में बीमारियों का प्रकोप सबसे ज्यादा देखा जाता है . हमे इस मौसम में बीमार होने का सबसे बड़ा कारण है हमारे आहार का तौर तरीका  हमे अपने खाने-पीने का विशेष ध्यान देना होगा. बता दें कि पत्तेदार सब्जियों के सेवन से बारिश के दिनों में पेट संक्रमण होने का खतरा सबसे अधिक होता है.

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 पत्तेदार सब्जियों से परहेज करना क्यों जरूरी है

मौसम में अधिकतर बादल छाये रहते हैं जिससे पौधों को पर्याप्त मात्रा मे धूप नही मिल पाता है. जिसके कारण पत्तों में कीटाणु और बैक्टीरिया पनपने की आशंका ज्यादा रहती है . पत्तेदार सब्जियों का सेवन करने से ये बैक्टीरिया हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं जिससे कई प्रकार की संक्रामक रोग हो जाते हैं . इसके साथ ही हमारी शारीरिक ऊर्जा का स्तर बहुत कम हो जाता है और पाचन तंत्र में अत्यंत बाधायें उत्पन्न हो जाती हैं. इस संबंध में डा. बीएल कमल बताते हैं परिणामस्वरूप दस्त, बुखार, पेट में दर्द, बदहजमी, उल्टी और अन्य पेट सम्बन्धी रोग हो जाते हैं .मौनसून के दौरान पत्तेदार सब्जियों में कीड़े-मकोड़े अपना घर बना लेते हैं .पत्तागोभी, फुलगोभी, ब्रोकली, बैंगन, पालक, धनिया मेथी भाजी, मुनगा भाजी, करेले, अरबी के पत्ते, हरी भाजीयां और शाक इत्यादि में कीड़े लगे रहते हैं. ज्यादातर ये कीड़े हरे रंग के होते हैं और पत्तियों और हरे सब्जियों रंग से मिल जाते हैं, इसलिए ठीक से दिखाई भी नहीं देते. जरा सी लापरवाही के कारण ये खाने के माध्यम से हमारे पेट में चले जाते हैं . जहां तक हो सके तो हमे ऐसे सब्जियों और पत्तों का सेवन नहीं करना चाहिए.

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पत्तेदार सब्जियां पानी वाले क्षेत्र या दलदली भूमि में उगते हैं. जबकि बरसाती पानी कई जगह के पानी का मिश्रण होता है और कई  तरह  कीटाणु को जन्म देते है .जिसके कारण इन पानी में उत्पन्न सब्जियों में भी संक्रमण का खतरा उत्पन्न हो जाता है.

ऐसे बनाएं रोस्टेड बैंगन

रोस्टेड बैंगन की रेसिपी भी बहुत आसान है, इसे आसानी से कम समय में तैयार कर सकते हैं. आप रोस्टेड बैंगन को सैलेड के साथ सर्व कर सकते हैं.

सामग्री

1 टी स्पून साबुत धनिया

1 टी स्पून लाल मिर्च पाउडर

1 नींबू

हरा धनिया, टुकड़ों में कटा हुआ

100 ग्राम दही

1 खीरा

1 प्याज, बारीक कटा हुआ

3 लहसुन की कलियां, बारीक कटा हुआ

1 हरी मिर्च, बारीक कटा हुआ

जैतून का तेल

1 बैंगन, रोस्टेड

स्वादानुसार नमक और कालीमिर्च

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बनाने की वि​धि

एक पैन को गर्म करें, इसमें 6 छोटे चम्मच जैतून का तेल, लहसुन, प्याज और हरी मिर्च डालें और इसी के साथ इसमें नमक डालें.

एक रोस्टेड बैंगन लें, इसका छिड़का उतार लें और इसे काट लें.

इस बैंगन को अब पैन में डालें और इसमें नमक और साबुत धनिया डालें.

इसे मैश करें और इसमें लाल मिर्च डालें और कुछ देर के लिए पकाएं.

इसमें आधा नींबू का रस डालें और इसे ठंडा होने दें.

अब एक बाउल में हरा धनिया और दही लेकर अच्छे से मिक्स करें.

इसमें अब बैंगन का मिश्रण डालकर अच्छे से मिलाएं.

एक खीरे को ​छीलकर इसके बीज निकाल लें.

खीरे की इस बोट में बैंगन की डिप भरें.

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मिस्टर बेचारा

लेखक: श्रीधराचारी धप्पू

वह नींद में उठ कर आई थी. आंखों में नींद की खुमारी थी. उस के ब्लाउज से उभार दिख रहे थे. साड़ी का पल्लू नीचे गिरा जा रहा था.

उस का पल्लू हाथ में था. साड़ी फिसल गई. इस से उस की नाभि दिखने लगी. उस की पतली कमर मानो रस से भरी थी.

थोड़ी देर में चंद्रम संभल गया, मगर आंखों के सामने खुली पड़ी खूबसूरती को देखे बिना कैसे छोड़ेगा? उस की उम्र 25 साल से ऊपर थी. वह कुंआरा था. उस के दिल में गुदगुदी सी पैदा हुई.

वह साड़ी का पल्लू कंधे पर डालते हुए बोली, ‘‘आइए, आप अंदर आइए.’’

इतना कह कर वह पलट कर आगे बढ़ी. पीछे से भी वह वाकई खूबसूरत थी. पीठ पूरी नंगी थी.

उस की चाल में मादकता थी, जिस ने चंद्रम को और लुभा दिया था.

उस औरत को देखने में खोया चंद्रम बहुत मुश्किल से आ कर सोफे पर बैठ गया. उस का गला सूखा जा रहा था.

उस ने बहुत कोशिश के बाद कहा, ‘‘मैडम, यह ब्रीफकेस सेठजी ने आप को देने को कहा है.’’

चंदम ने ब्रीफकेस आगे बढ़ाया.

‘‘आप इसे मेज पर रख दीजिए. हां, आप तेज धूप में आए हैं. थोड़ा ठंडा हो जाइएगा,’’ कहते हुए वह साथ वाले कमरे में गई और कुछ देर बाद पानी

की बोतल, 2 कोल्ड ड्रिंक ले आई और चंद्रम के सामने वाले सोफे पर बैठ गई.

चंद्रम पानी की बोतल उठा कर सारा पानी गटागट पी गया.

वह औरत कोल्ड ड्रिंक की बोतल खोलने के लिए मेज के नीचे रखे ओपनर को लेने के लिए झुकी, तो फिर उस का पल्लू गिर गया और उभार दिख गए. चंद्रम की नजर वहीं अटक गई.

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उस औरत ने ओपनर से कोल्ड ड्रिंक खोलीं. उन में स्ट्रा डाल कर चंद्रम की ओर एक कोल्ड ड्रिंक बढ़ाई.

चंद्रम ने बोतल पकड़ी. उस की उंगलियां उस औरत की नाजुक उंगलियों से छू गईं. चंद्रम को जैसे करंट सा लगा.

उस औरत के जादू और मादकता ने चंद्रम को घायल कर दिया था. वह खुद को काबू में न रख सका और उस औरत यानी अपनी सेठानी से लिपट गया.

इस के बाद चंद्रम का सेठ उसे रोजाना दोपहर को अपने घर ब्रीफकेस दे कर भेजता था. चंद्रम मालकिन को ब्रीफकेस सौंपता और उस के साथ खुशीखुशी हमबिस्तरी करता. बाद में कुछ खापी कर दुकान पर लौट आता. इस तरह 4 महीने बीत गए.

एक दोपहर को चंद्रम ब्रीफकेस ले कर सेठ के घर आया और कालबेल बजाई, पर घर का दरवाजा नहीं खुला. वह घंटी बजाता रहा. 10 मिनट के बाद दरवाजा खुला.

दरवाजे पर उस की सेठानी खड़ी थी, पर एक आम घरेलू औरत जैसी. आंचल ओढ़ कर, घूंघट डाल कर.

उस ने चंद्रम को बाहर ही खड़े रखा और कहा, ‘‘चंद्रम, मुझे माफ करो. हमारे संबंध बनाने की बात सेठजी तक पहुंच गई है. वे रंगे हाथ पकड़ेंगे,

तो हम दोनों की जिंदगी बरबाद हो जाएगी.

‘‘हमारी भलाई अब इसी में है कि हम चुपचाप अलग हो जाएं. आज के बाद तुम कभी इस घर में मत आना,’’ इतना कह कर सेठानी ने दरवाजा बंद कर दिया.

चंद्रम मानो किसी खाई में गिर गया. वह तो यह सपना देख रहा था कि करोड़पति सेठ की तीसरी पत्नी बांहों में होगी. बूढ़े सेठ की मौत के बाद वह इस घर का मालिक बनेगा. मगर उस का सपना ताश के पत्तों के महल की तरह तेज हवा से उड़ गया. ऊपर से यह डर सता रहा था कि कहीं सेठ उसे नौकरी से तो नहीं निकाल देगा. वह दुकान की ओर चल दिया.

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सेठानी ने मन ही मन कहा, ‘चंद्रम, तुम्हें नहीं मालूम कि सेठ मुझे डांस बार से लाया था. उस ने मुझ से शादी की और इस घर की मालकिन बनाया. पर हमारे कोई औलाद नहीं थी. मैं सेठ को उपहार के तौर पर बच्चा देना चाहती थी. सेठ ने भी मेरी बात मानी. हम ने तुम्हारे साथ नाटक किया. हो सके, तो मुझे माफ कर देना.’

इस के बाद सेठानी ने एक हाथ अपने बढ़ते पेट पर फेरा. दूसरे हाथ से वह अपने आंसू पोंछ रही थी.

क्या आप जानते हैं, उंगलियां चटकाने पर आवाज क्‍यों आती है?

आज हम आपको  इस खबर से ये जानकारी देंगे कि उंगलियां चटकाने पर आवाज क्यों आती है, तो आइए इस रोचक जानकारी के बारे में जानते हैं.

उंगलियां चटकाने पर क्‍यों आती है आवाज

इस बारे में अमेरिका और फ्रांस और शोधकर्ताओं का कहना है कि इसकी वजह गणित के तीन समीकरणों से पता लगाई जा सकती है. उनके मौडल की मानें तो ये आवाज़ हड्डियों के जोड़ में मौजूद तरल पदार्थ में बुलबुले फूटने की वजह से आती है. आपको जानकर हैरानी होगी कि इस मुद्दे को लेकर पूरी एक सदी से बहस चली आ रही है.

फ्रांस में विज्ञान के एक छात्र को क्‍लास में उंगलियां चटकाते हुए इस बात का ख्‍याल आया कि इस दौरान आवाज आने का क्‍या कारण है. बस तभी उन्‍होंने अपने टीवर के साथ मिलकर गणितीय समीकरणों की एक सीरीज़ तैयार की जिसकी मदद से बताया जा सके कि उंगलियों और कलाई के जोड़ों को चटकाने पर आवाज़ क्‍यों आती है और कैसे ये सब होता है.

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इस छात्र का कहना है कि

पहले समीकरण के अनुसार जब हम उंगलियों को चटकाते हैं तो हमारी हड्डियों के जोड़ों में अलग-अलग दबाव होता है

जबकि दूसरे समीकरण के अनुसार अलग दबाव से बुलबुलों का साइज भी अलग ही होता है.

तीसरे समीकरण में अलग-अलग साइज़ वाले बुलबुलों को आवाज़ करने वाले बुलबुलों के साइज के साथ जोड़ा.

इन तीनों समीकरणों से एक पूरा गणित का मौडल बन गया जोकि उंगलियां चटकाने पर आने वाली आवाज के कारण के बारे में बताता है.

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