दादी का भुनभुनाना जारी था, ‘अरे, लड़कियां तो निखालिस भूसा होती हैं, हवा लगते ही फुर्र से उड़ जाएंगी, पर वजनदार अनाज की तरह परिवार का रखवाला तो लड़का ही होता है. बेटे वाले घर की तो बात ही कुछ और है.’

यह सुनने के हम अब आदी हो गए थे. मुझ से 2 बड़ी और 3 छोटी बहनें थीं. मैं तीसरे नंबर की बड़ी चंचल व भावुक थी. मुझ से 2 बड़ी बहनें अकसर गुमसुम रहतीं.

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