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Sridevi Death Anniversary: जान्हवी की मां और नाना की मौत के बीच है ये अजीब कनेक्शन

24 फरवरी को बॉलीवुड की मशहूर एक्ट्रेस श्रीदेवी दूसरी डेथ एनिवर्सरी है. इस मौके पर हम आपको बता रहे हैं उनकी जिंदगी से जुड़ा हुआ एक ऐसा इत्तेफाक जिसके बारे में जानकर आप भी हैरान हो जाएंगे.

श्रीदेवी ने अभिनय के क्षेत्र में अपने पिता की अनिच्छा के बावजूद एक अजीबोगरीब इत्तेफाक के साथ कदम रखा था और जिस दिन उनके पिता की मौत हुई थी. उस दिन वह अपनी एक फिल्म की शूटिंग में व्यस्त थीं.

पिता के आखिरी वक्त में नहीं थीं साथ…

खुद श्रीदेवी ने हमारी मैगजीन को दिए एक इंटरव्यू में बताया था. ‘‘मैं अपने पिता की मौत को कभी नहीं भुला सकती. जिस दिन मेरे पिता की मौत हुई, उस दिन मैं फिल्म‘‘लम्हें’’ की शूटिंग कर रही थी. मैंने उनसे कुछ समय पहले ही फोन पर लंबी चौड़ी बात की थी, पर मुझे यह दुःख हमेशा सताता रहता है कि जिस वक्त उनकी मौत हुई, उस वक्त मैं उनके पास नहीं थी. काश! मैं उस वक्त उनके पास होती.

अब इसे भी हम तकदीर की बात कह सकते हैं. मेरे पिता ने मुझे बहुत प्यार दिया. मैं पूरी जिंदगी उनके बहुत करीब थी. उन्होंने मुझे बहुत सिखाया था. मेरे पिता कि मेरे दिलों दिमाग में बहुत खूबसूरत यादें हैं. जिन्हें कोई छीन नहीं सकता. मैं उन्हें कभी भुला नहीं सकती.’’

 

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बेटी जाहन्वी के साथ भी हुआ हादसा…

अब इसे इत्तेफाक कहें या इतिहास का दोहराव कहें कि श्रीदेवी ने अपनी बेटी जान्हवी कपूर को अनिच्छा के साथ बौलीवुड से जुड़ने की इजाजत दी थी और जब दुबई में श्रीदेवी का हृदय गति रूकने से निधन हुआ, तो श्रीदेवी की बेटी जान्हवी कपूर भी उनके पास नहीं थी, बल्कि जान्हवी कपूर मुंबई में अपनी फिल्म धड़क की शूटिंग में व्यस्त थीं.

बता दें जान्हवी कपूर आज बॉलीवुड की पौपुलर एक्ट्रेसेस की लिस्ट में शामिल हो चुकी है और जल्द ही ‘दोस्ताना-2’ और ‘कारगिल गर्ल-गुंजन सक्सेना’ की बायोपिक में नजर आएंगी. जान्हवी अपनी मां के बेहद करीब थी और आज भी हर खास मौके पर वो श्रीदेवी को याद करती हैं.

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मैं रोजाना अपनी बीवी के साथ संबंध बनाता हूं, क्या ऐसा करना सेहत के लिए ठीक नहीं है?

सवाल
मैं 21 साल का हूं और रोजाना अपनी बीवी से हमबिस्तरी करता हूं. क्या ऐसा करना सेहत के लिए ठीक नहीं है?

जवाब
इस से सेहत पर कोई असर नहीं पड़ता है, लिहाजा आप बेखौफ ऐसा कर सकते हैं.

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सैक्स बोरिंग लगने लगे तो अपनाएं ये नुसखे

विवाह के कुछ वर्ष बाद न सिर्फ जीवन में बल्कि सैक्स लाइफ में भी एकरसता आ जाती है. कई बार कुछ दंपती इस की तरफ से उदासीन भी हो जाते हैं और इस में कुछ नया न होने के कारण यह रूटीन जैसा भी हो जाता है. रिसर्च कहती है कि दांपत्य जीवन को खुशहाल व तरोताजा बनाए रखने में सैक्स का महत्त्वपूर्ण योगदान है. लेकिन यदि यही बोरिंग हो जाए तो क्या किया जाए?

पसंद का परफ्यूम लगाएं

अकसर महिलाएं सैक्स के लिए तैयार होने में पुरुषों से ज्यादा समय लेती हैं और कई बार इस वजह से पति को पूरा सहयोग भी नहीं दे पातीं. इसलिए यदि आज आप का मूड अच्छा है तो आप वक्त मिलने का या बच्चों के सो जाने का इंतजार न करें. अपने पति के आफिस से घर लौटने से पहले ही या सुबह आफिस जाते समय कानों के पीछे या गले के पास उन की पसंद का कोलोन, परफ्यूम लगाएं, वही खुशबू, जो वे रोज लगाते हैं. किन्से इंस्टिट्यूट फौर रिसर्च इन सैक्स, जेंडर एंड रिप्रोडक्शन के रिसर्चरों का कहना है कि पुरुषों के परफ्यूम की महक महिलाओं की उत्तेजना बढ़ाती है और सैक्स के लिए उन का मूड बनाती है.

साइक्लिंग करें

अमेरिकन हार्ट फाउंडेशन द्वारा जारी एक अध्ययन में स्पष्ट हुआ कि नियमित साइक्लिंग जैसे व्यायाम करने वाले पुरुषों का हृदय बेहतर तरीके से काम करता है और हृदय व यौनांगों की धमनियों व शिराओं में रक्त के बढ़े हुए प्रवाह के कारण वे बेडरूम में अच्छे प्रेमी साबित होते हैं. महिलाओं पर भी साइक्लिंग का यही प्रभाव पड़ता है. तो क्यों न सप्ताह में 1 बार आप साइक्लिंग का प्रोग्राम बनाएं. हालांकि साइक्लिंग को सैक्स विज्ञानी हमेशा से शक के दायरे में रखते हैं, क्योंकि ज्यादा साइक्लिंग करने से साइकिल की सीट पर पड़ने वाले दबाव के कारण नपुंसकता हो सकती है. लेकिन कभीकभी साइक्लिंग करने वाले लोगों को ऐसी कोई समस्या नहीं होती.

स्वस्थ रहें

वर्जिनिया की प्रसिद्ध सैक्स काउंसलर एनेट ओंस का कहना है कि कोई भी शारीरिक क्रिया, जिस के द्वारा आप के शरीर के रक्तप्रवाह की मात्रा कम होती है, सैक्स से जुड़ी उत्तेजना को कम करती है. सिगरेट या शराब पीना, अधिक वसायुक्त भोजन लेना, कोई शारीरिक श्रम न करना शरीर के रक्तप्रवाह में गतिरोध उत्पन्न कर के सैक्स की उत्तेजना को कम करता है. एक स्वस्थ दिनचर्या ही आप की सैक्स प्रक्रिया को बेहतर बना सकती है.

दवाइयां

वे दवाइयां, जिन्हें हम स्वस्थ रहने के लिए खाते हैं, हमारी सैक्स लाइफ का स्विच औफ कर सकती हैं. इन में से सब से ज्यादा बदनाम ब्लडप्रेशर के लिए ली जाने वाली दवाइयां और एंटीडिप्रेसेंट्स हैं. इन के अलावा गर्भनिरोधक गोलियां और कई गैरहानिकारक दवाइयां भी सैक्स की दुश्मन हैं. इसलिए कोई नई दवा लेने के कारण यदि आप को सैक्स के प्रति रुचि में कोई कमी महसूस हो रही हो तो अपने डाक्टर से बात करें.

सोने से पहले ब्रश

बेशक आप अपने साथी से बेइंतहा प्रेम करती हों, लेकिन अपने शरीर की साफसफाई का ध्यान अवश्य रखें. ओरल हाइजीन का तो सैक्स क्रीडा में महत्त्वपूर्ण स्थान है. यदि आप के मुंह से दुर्गंध आती हो तो आप का साथी आप से दूर भागेगा. इसलिए रात को सोने से पहले किसी अच्छे फ्लेवर वाले टूथपेस्ट से ब्रश जरूर करें.

स्पर्श की चाहत को जगाएं

आमतौर पर लोगों को गलतफहमी होती है कि अच्छी सैक्स क्रीडा के लिए पहले से मूड होना या उत्तेजित होना आवश्यक है, लेकिन यह सत्य नहीं है. एकसाथ समय बिताएं, बीते समय को याद करें, एकदूसरे को बांहों में भरें. कभीकभी घर वालों व बच्चों की नजर बचा कर एकदूसरे का स्पर्श करें, फुट मसाज करें. ऐसी छोटीछोटी चुहलबाजी भी आप का मूड फ्रेश करेगी और फोरप्ले का काम भी.

थ्रिलर मूवी देखें

वैज्ञानिकों का मानना है कि डर और रोमांस जैसी अनुभूतियां मस्तिष्क के एक ही हिस्से से उत्पन्न होती हैं, इसलिए कभीकभी कोई डरावनी या रोमांचक मूवी एकसाथ देख कर आप स्वयं को सैक्स के लिए तैयार कर सकती हैं.

फ्लर्ट करें

वैज्ञानिकों का मानना है कि फ्लर्टिंग से महिलाओं के शरीर में आक्सीटोसिन नामक हारमोन का स्राव होता है, जो रोमांटिक अनुभूतियां उत्पन्न करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसलिए दोस्तों व सहेलियों के बीच सैक्सी जोक्स का आदानप्रदान करें, कभीकभी किसी हैंडसम कुलीग, दोस्त के साथ फ्लर्ट भी कर लें. अपने पति के साथ भी फ्लर्टिंग का कोई मौका न छोड़ें. आप स्वयं सैक्स के प्रति अपनी बदली रुचि को देख कर हैरान हो जाएंगी.

मोहजाल: भाग-1

श्यामाजी ने जैसे ही अपनी अलमारी खोली तो एक बार फिर उन की त्योरियां चढ़ गईं. अपने कमरे से ही जोर से पुकार उठीं, ‘‘मंजरी, मंजरी.’’

‘‘जी, दादी.’’

‘‘कहां थी? पुकारतेपुकारते मेरा गला सूख गया, लेकिन तुम लोगों को तो बातों से फुरसत नहीं है. कान से मोबाइल चिपका ही रहता है.’’

‘‘क्या काम है, जल्दी बताइए. कल मेरा पेपर है.’’

‘‘तुम से कितनी बार कह चुकी हूं, मेरी अलमारी की सफाई कर के ठीक से लगा दो. नहीं करना है तो साफ मना कर दो. हम रोजरोज तुम से क्यों कहें?

‘‘मुझे आंखों से दिखाई नहीं देता, इसलिए कहना पड़ता है, नहीं तो मुझे तुम लोगों से भला क्या काम?’’

मंजरी भुनभुनाते हुए मन ही मन बोली, ‘हो गया छुट्टी का कबाड़ा, एकएक रुपया गिनवाएंगी. एकएक डब्बी और रेशमी थैली से जेवर निकालनिकाल कर देखेंगी. घंटों का राग हो गया. उस के बाद मोहिनी बूआ की तारीफ के कसीदे काढ़ेंगी.’

‘‘क्या बड़बड़ा रही हो? मुझे ऊंचा सुनाई पड़ने लगा है न इसीलिए. तुम रहने दो. तुम्हारे बस का नहीं है, मैं खुद ही, जैसे बनेगा वैसे ठीक कर लूंगी.

‘‘पढ़े होते, तो आज तुम लोगों का मुंह न देखना पड़ता. क्या करूं? गिनती ही भूल जाती हूं. मोहिनी ने कितना तो सिखाने की कोशिश की, लेकिन मैं ही अच्छी तरह सीख नहीं पाई.’’

‘‘दादी, बूआ आने वाली हैं. उन्हीं से ठीक करवा लेना.’’

‘‘कब आ रही है मोहिनी? मुझे कौन बताने वाला है. यहां आ कर ठीक से बताओ.’’

‘‘पापा, मम्मी से कुछ बात कर रहे थे. मुझे ठीकठीक नहीं मालूम.’’

मानसी रसोई में नाश्ता बना रही थी साथ ही दादीपोती की बातें भी सुन रही थी. वह अम्माजी की आदत से परिचित थी.

श्यामाजी उम्रदराज महिला हैं. 85 वर्ष के आसपास उन की उम्र होगी. जमींदार परिवार से ताल्लुक रखती थीं. अपनी जवानी में सोने के जेवरों से लदी रहती थीं. पति असमय अकेला छोड़ गए थे. जमीनजायदाद सब परिवार के लोगों ने हड़प ली थी, तब उसी सोने की मदद से अपने दोनों बच्चों को पढ़ायालिखाया, फिर बेटी की शादी निबटाई. बेटे मनोहर को साडि़यों का कारोबार करने के लिए पूंजी दी. अब भी 2-4 पुराने कलात्मक जेवर उन की अलमारी के अंदर ताले में बंद हैं.

पहले राजकुमारी फिर रानी जैसा जीवन बिताने वाली श्यामाजी ने बहुत तंगहाली के दिन भी देखे हैं, इसलिए उन के मन में पैसे के लिए जरूरत से ज्यादा मोह हो गया है. वे शरीर से काफी कमजोर हो चुकी हैं. कमर झुक गई है, छड़ी ले कर भी दूसरों के सहारे से ही चल पाती हैं. अपने दैनिक कार्यों के लिए बहू मानसी या आया पर आश्रित हैं. अपनी मजबूर अवस्था के कारण मन ही मन कुंठित रहती हैं. इसलिए बातबात पर चिड़चिड़ाती रहती हैं. उम्र बढ़ने के साथसाथ मन में वहम पाल बैठी हैं कि बहू मानसी उन का जेवर, रुपया चुरा लेगी, इसलिए हर समय खीझती रहती हैं.

बेटी मोहिनी के पति मदनजी शादी के समय शिक्षा विभाग में क्लर्क थे. अब वे अफसर बन गए हैं. परंतु नौकरी में आमदनी तो सीमित ही होती है. चीना व नीना 2 बेटियां हैं. दोनों उच्च शिक्षा प्राप्त कर चुकी हैं. भाईबहन आपस में एकदूसरे से बहुत प्यार करते हैं. मनोहर यथासंभव बहन को उपहार आदि देता रहता है. परंतु श्यामाजी बहू मानसी की खुशहाली और समृद्धि देख कर मन ही मन कुढ़ती रहती हैं.

बेटा मनोहर बचपन से ही दोहरे बदन का था. छोटा था, तभी पोलियो ने उस का 1 पैर खराब कर दिया था. इसलिए वह हलका लंगड़ा कर चलता था. इसी कारण से उस की शादी नहीं हो पा रही थी. उस समय श्यामाजी की आर्थिक स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं थी. अंत में मजबूरीवश श्यामाजी ने अपने दिल पर पत्थर रख कर पक्के सांवले रंग की मानसी के साथ बेटे का रिश्ता पक्का कर दिया था. परंतु उसे बहू का सम्मान आज तक न दे पाई थीं.

अब मनोहर साडि़यों का सफल व्यापारी है. उस की वाक्पटुता और कड़ी मेहनत से कारोबार दिनदूना रातचौगुना बढ़ता जा रहा है.

बहू मानसी साधारण मध्यम परिवार से है. वह संस्कारसंपन्न कुशल गृहिणी है. वह श्यामाजी की सुखसुविधा का पूरा ध्यान रखती है. उन का पूरा सम्मान करती है. सब ठीक सा ही रहता है लेकिन बेटी मोहिनी के आते ही सब गड़बड़ हो जाता है.

श्यामाजी का मोतियाबिंद का औपरेशन हुआ था. लगभग 20 दिन बाद बेटी मोहिनी उन से मिलने आई थी. बेटी को देख कर श्यामाजी का दिमाग सातवें आसमान पर था.

मानसी ने नाश्ते में चीला बनाया था.

‘‘देख लिया मोहिनी, बहू ने कितना मोटा चीला बनाया है? मैं ऐसा बनाती तो मेरी सास मेरे मुंह पर मार देती. हमें तो पेट भरना है. कच्चापक्का जो मिले, वही चुपचाप खा लेती हूं.’’

‘‘अम्मा, इतना करारा तो चीला है. लीजिए, आप मेरे वाला ले लीजिए. चटनी कितनी टेस्टी बनाई है भाभी ने,’’ फिर वह अम्मा की बात को दबाने के लिए बोली, ‘‘वाह भाभी, मजा आ गया.’’

‘‘अम्मा, आप धीरे बोलिए. भाभी सुनेंगी तो उन्हें कितना खराब लगेगा.’’

‘‘मुझे तुम्हारी भाभी का डर थोडे़ ही है. तू क्या समझे? मैं तो जानबूझ कर चिल्ला कर बोलती हूं, जिस से उस के मन में मेरा डर बना रहे.’’

‘‘अम्मा, आप तो जाने किस जमाने में जी रही हैं. बहू को भी बेटी की ही तरह बल्कि उस से भी ज्यादा प्यार की जरूरत रहती है. क्योंकि वह तो अपनों को छोड़ कर दूसरे घर में आई होती है.’’

‘‘रहने दे मुझे मत सिखा. मैं तो वैसे ही मुंह बंद कर के रहती हूं.’’

‘‘मोहिनी, तुम भी बदल गई हो, अब तुम्हें भी हर समय अम्मा में ही खोट नजर आती है.’’

मोहिनी अपनी अम्मा के क्रोध को जानती हुई चुप हो गई. वह मानसी भाभी का हाथ बंटाने रसोई में चली गई.

मानसी के लिए कुछ नया नहीं था. वह अम्माजी के स्वभाव से अच्छी तरह परिचित थी. जब तक मोहिनी जीजी रहेंगी, अम्माजी इसी तरह बातबात में उस पर तीर चलाती रहेंगी.

वह रोज की तरह आईड्रौप ले कर अम्माजी की आंखों में डालने के लिए आई.

‘‘अम्माजी, आंख खोलिए, दवा डाल दूं.’’

‘‘तुम बेकार ही परेशान होती हो. तुम्हें तो दस काम हैं. लल्ली डाल देती,’’ प्यार से वे मोहिनी को लल्ली कहती थीं.

आगे पढ़ें- शाम को मनोहर को जल्दी आया हुआ देख श्यामाजी बोलीं…

मोहजाल: भाग-3

मोहिनी झुंझला कर बोली, ‘‘अरे अम्मा, सारा दिन पड़ा है, मैं कर दूंगी न. आप अभी सो जाओ और मुझे भी सोने दो.’’

श्यामाजी रजाई से मुंह ढंक कर जाप करने लगीं.

उनींदी मोहिनी अपनी अम्मा के बारे में सोचने लगी कि एक समय अम्मा कितनी सुंदर और सक्रिय थीं. अब झुर्रीदार चेहरा, झुकी हुई कमर, छड़ी का सहारा, उन की जर्जर काया, कान से ऊंचा सुनना, आंखों से कम दिखाई देना, लेकिन इस हालत में भी अपनी अलमारी के लिए आज भी उसी मोहजाल में फंसी हुई हैं. यह भी क्या विडंबना है? शरीर तो साथ छोड़ता जाता है, परंतु मन संसार की छोटीछोटी चीजों में उलझा और जकड़ा रहता है.

वह अलसाई सी बिस्तर पर लेटी थी तभी मंजरी आई और बोली, ‘‘बूआ, आज शाम को थिएटर में बहुत बढि़या नाटक है, मैं ने 2 टिकटें मंगा ली हैं. शाम 5 बजे का शो है. आप तैयार रहना, मैं और आप चलेंगे.’’

‘‘मंजरी, छोड़ो भी थिएटर वगैरह, थोड़ी देर तुम सब के साथ बैठूंगी, कल तो मुझे जाना ही है.’’

मंजरी, बूआ के गले से लिपट कर बोली, ‘‘बूआ प्लीज, चलो न, मेरा एक बार थिएटर देखने का बहुत मन है. मम्मीपापा तो कभी जाते नहीं.’’

मोहिनी चुप ही रही.

‘‘मेरी अच्छी बूआ. तो फिर शाम का प्रोग्राम पक्का रहा न,’’ वह बाहर से दौड़ती हुई फिर लौट कर आई और फुसफुसा कर बोली, ‘‘बूआ, दादी की अलमारी दोपहर में जरूर ठीक कर देना, मुझ से बहुत दिन से कह रही हैं. मुझे यह काम बहुत बोरिंग लगता है.’’

मोहिनी, मंजरी को प्यार से निहारती रही. आज मंजरी में उसे अपना बचपन दिखाई पड़ रहा था.

मानसी सुबह श्यामाजी को नहला रही थीं, तभी उन की निगाह उस के मेहंदी रचे हाथों पर पड़ी. वे चौंक कर बोलीं, ‘‘अरे, यह मेहंदी कब रचा ली? बड़ा गहरा रंग आया है.’’

‘‘कल रात बिग बाजार में मेहंदी लगाने वाली बैठी थी. जीजी का मन था तो उन्हीं की जिद पर हम ने भी लगवा ली.’’

सुबह का नाश्तापानी निबट गया था. मनोहर अपनी दुकान चले गए थे. मंजरी सुबह ही कालेज जा चुकी थी. मानसी किचन में लंच की तैयारी में लगी थी.

तभी मोहिनी अम्मा के पास आई, बोली, ‘‘चलो अम्मा, आप की अलमारी की सफाई कर के ठीक से सैट कर दूं.’’

‘‘कर दो तो बहुत ही अच्छा है. हम से तो अब कुछ होता नहीं है. न जाने कब बुलावा आ जाए.’’

‘‘अम्मा, हर समय इस तरह की बातें मत किया करिए. अच्छा नहीं लगता.’’

7 परतों वाले पर्स से एक के बाद एक, कई जेबों के अंदर से उन्होंने चाबी निकाल कर दी.

अलमारी खोलते ही मोहिनी चौंक उठी, आज भी अम्मा, मानसी भाभी की शादी वाले जेवर अपनी अलमारी में ही रखे हुए थीं.

सबकुछ व्यवस्थित और साफसुथरे ढंग से रखा हुआ था. अम्मा हमेशा से सफाईपसंद स्वभाव की थीं.

कई डब्बों में नोटों की गड्डियां रखे हुए थीं जिन पर चिट लगी हुई थीं परंतु फिर भी उन्हें फिर से गिनवा कर मंजरी की विश्वसनीयता को परखना चाह रही थीं.

अम्मा की इस हरकत से मोहिनी का मन भी खट्टा हो गया था.

‘‘अम्मा, भाभी के जेवर आप के पास आज भी रखे हुए हैं. आप उन की चीज उन्हें देती क्यों नहीं?’’

‘‘क्या हम पहन लेंगे?’’

उन्होंने एक मखमली डब्बे से हथफूल निकाले. पुराने जमाने के कुंदन के हथफूल बहुत ही खूबसूरत थे.

मोहिनी बोल पड़ी, ‘‘अम्मा, ये हथफूल आप किस को देंगी?’’

‘‘लल्ली, तुम चुपचाप इसे आज ही अपने साथ ले जाओ. मेरे मरने के बाद ये लोग तुम्हें कुछ भी नहीं देंगे.’’

तभी हड़बड़ी में एक डब्बा उठा कर बोलीं, ‘‘लल्ली, पहले हमारे इस डब्बे के रुपए गिन कर बताओ, हमें लग रहा है कि मंजरी ने इस में से कुछ रुपए निकाल लिए हैं. हमें खूब याद है कि मनोहर ने हमें पूरे 8 हजार रुपए गिन कर दिए थे.’’

‘‘अम्मा, आप भी गजब करती हैं, मंजरी पर शक करती हैं. इस में तो 8,500 रुपए हैं.’’

‘‘लल्ली, हम तो गिन नहीं पाते. जब मंजरी से गिनवाते हैं तो लगता है कि उस ने 2-4 नोट निकाल लिए होंगे.’’

मोहिनी गुस्से से फट पड़ी थी, ‘‘अम्मा, आप का तो दिमाग खराब हो गया है. अपनी ही पोती पर चोरी का शक कर रही हो. रुपए भी भैया के ही दिए हुए हैं तो भी आप ऐसा कैसे सोच सकती हैं? लो संभालो, अपनी अलमारी. अब आप मुझ पर भी शक करना कि मोहिनी ने मेरा कोई जेवर और रुपया चुरा लिया है.’’

श्यामाजी सिटपिटा कर बोलीं, ‘‘न बिटिया न, तुम नाराज न हो. लो, ये चंपाकली, तुम चुपचाप अपने पास संभाल कर रख लो. न भैया को बताना न अपनी भाभी को. इस के बारे में तो मनोहर को भी नहीं मालूम है. बड़े चाव से रखा हुआ था कि मनोहर की बहू को दूंगी, लेकिन इस से तो मेरा मन नहीं मिलता. इस की तो सूरत से ही मुझे चिढ़ है. लो, ये 10 हजार रुपए भी तुम रख लो. मेरा अब क्या भरोसा कि मैं कितने दिन रहूं. मैं इन सब को जानती हूं, सब दिखावा करते हैं. मेरे मरने के बाद तुम्हें कोई एक चुटकी नमक भी न देगा.’’

‘‘अम्मा, आप अच्छी तरह समझ लीजिए. मुझे कोई कुछ दे या न दे, मैं अपनी दुनिया में बहुत खुश हूं. मुझे केवल भैया और भाभी का प्यार चाहिए. वही मेरे लिए सबकुछ है.’’

उसी समय मानसी भाभी की परछाईं दिखी और आहट हुई, मानो वे कमरे के बाहर से उन लोगों की बातें सुन रही थीं.

‘‘अम्मा, मेरी बात ध्यान से सुन लो कि यदि आप चाहती हैं कि मैं आप के पास आती रहूं तो आज आप को मेरी एक बात माननी ही होगी. आज और अभी मानसी भाभी को अपनी अलमारी की चाबी सौंपनी होगी.’’

‘‘तुम तो मुझे धमकी सी दे रही हो.’’

‘‘वे आप को बच्चों की तरह नहलातीधुलाती हैं, कपड़े पहनाती हैं. समयसमय पर आप को शौच, दवादारू, खानापीना, वे क्या नहीं करतीं और आप हैं कि उन को जलील करने का कोई मौका नहीं छोड़ती हैं. गैरों की तरह अंटशंट बोलती हैं, मेरे बक्से से रुपए निकाल लिए. मेरे चांदी के बरतन चुरा लिए. आप की ऊलजलूल बातों से मैं 2 दिन में ही तंग हो जाती हूं. भाभी जाने कैसे बरदाश्त करती हैं. आप को तो याद ही होगा जब मेरी सास ने मुझे जेवर नहीं दिए थे तो आप कैसे चीखचीख कर लड़ने को तैयार थीं, ‘मेरी बेटी के जेवर वे कैसे अपने पास रख सकती हैं? मैं समधनजी से बात करूंगी.’

‘‘वह तो मैं ने मना न किया होता तो अवश्य ही उसी दिन से आप लोगों से मेरा नाता टूट गया होता. वह तो भाभी सीधी और समझदार हैं, इसीलिए सब सह लेती हैं. मैं तो शायद कभी न कर पाती,’’ यह कह कर मोहिनी तेजी से कमरे से बाहर निकल गई थी.

श्यामाजी की तो बोलती ही बंद हो गई थी. उन को मोहिनी की बातें अक्षरश: सच लग रही थीं. उन की बेटी ने आज उन्हें ही आईना दिखा दिया था. वे पसोपेश में थीं, परंतु उन का अहं उन के आड़े आ रहा था. आज मन ही मन वे सोचने को मजबूर हो गई थीं कि क्या वे अपनी सास के द्वारा किए हुए दुर्व्यवहार का अपनी बहू से बदला ले रही थीं. अपने व्यवहार से वे इतिहास की पुनरावृत्ति कर रही थीं.

ड्राइंगरूम से बहू मानसी, मोहिनी और मंजरी की हंसीमजाक की आवाजें, बीचबीच में ठहाके उन के कानों से टकरा रहे थे. घंटों वे अनिश्चय की स्थिति में सन्न सी बैठी रहीं, फिर उन की आंखों के सामने मानसी बहू की प्यारभरी सहमी सी चितवन घूमने लगी. उन्होंने चाहे कितना भी डांटाफटकारा हो, परंतु मानसी के चेहरे पर कभी भी शिकन नहीं आई थी. हर क्षण ‘जी, अम्माजी’ कह कर हाजिर रहती थी.

वेस्वयं कितनी मूढ़ थीं. अपने खुशनुमा पलों को कुढ़कुढ़ कर गुजारती रहीं. यह तो अच्छा हुआ कि मोहिनी की धमकी से उन की आंखें खुल गईं. आज वे अपनी गलतियों का प्रतिकार तो कर सकती हैं. उन की आंखों में उन के निश्चय की अनोखी चमक थी.

उत्तेजनावश वे स्वयं छड़ी के सहारे उठ खड़ी हुईं. 2-4 कदम वे चल भी ली थीं. छड़ी की खटखट सुनते ही मानसी भागती हुई आई, मोहिनी और मंजरी उस के पीछेपीछे आ गईं.

‘‘अम्माजी, क्या बात है? आप घंटी बजा देतीं.’’

‘‘कमरे में पड़ीपड़ी उदास हो रही थी तो सोचा सब के साथ टीवी देखूं. अकेले देखने में कहां अच्छा लगता है,’’

फिर रुक कर बोलीं, ‘‘और आज सब्जी क्या बनाएगी?’’

‘‘अम्माजी, आलू और हरा सीताफल बना रही हूं.’’

‘‘अच्छा. तो यहीं चाकू के साथ दे दे. टीवी देखतेदेखते जितना हो सकेगा, छीलकाट दूंगी. ठीक कर लेना अगर छोटेबड़े टुकड़े हो जाएं. तू ने तो वर्षों से काम ही नहीं करने दिया.’’

मानसी भौचक्की सी खड़ी थी कि अम्मा ने फिर आवाज दी, ‘‘और सुन बहू, यह अलमारी की चाबी तू रख. इतने पैसेजेवर मुझ से नहीं संभाले जाते. तू जाने और तेरा काम जाने.’’

फिर मोहिनी की ओर मुंह कर के बोलीं, ‘‘और लल्ली, जरा वे साडि़यां तो दिखा जो बहू ने तुझे दिलाईं. उस की पसंद तो लाजवाब है. मुझे भी तो देखने दे. अब पहन तो नहीं सकती पर…’’

अम्मा बोलती रहीं और मानसी व मोहिनी मुंह खोले उन्हें देखती रहीं.

मोहजाल: भाग-2

‘‘अम्माजी, उन्हें क्या पता कि किस समय कौन सी दवा डालनी है.’’

‘‘तुम से तो कुछ कहना ही बेकार है. लो, डालो.’’

शाम को मनोहर को जल्दी आया हुआ देख श्यामाजी बोलीं, ‘‘आज तो तुम बहुत जल्दी आ गए. क्या बात है?’’

‘‘हां, अम्मा. हम ने सोचा, मोहिनी आई है, इन्हें अमीनाबाद की चाट खिला दें और हजरतगंज से शौपिंग करवा दें.

‘‘और अम्मा, आप को आंख से अब साफ दिख रहा है? अब तो चश्मा भी आप का बन कर कल आ जाएगा.’’

‘‘नहीं बेटा. धुंधलाधुंधला ही दिखता है.’’

‘‘डाक्टर साहब तो कह रहे थे कि माताजी की आंख की रोशनी बहुत अच्छी आई है.’’

‘‘तुम उन्हीं की बात मानो. हमारा क्या है?’’ श्यामाजी ने नाराजगी दिखाते हुए मुंह फेर कर करवट ले ली.

मनोहर लडि़याते हुए अम्मा का पैर दबाते हुए बोला, ‘‘मेरी अच्छी अम्मा, आप नाराज मत हुआ करो.’’

मनोहर ने बहन मोहिनी को आवाज दी, ‘‘मोहिनी, जल्दी आओ.’’

मोहिनी और मानसी दोनों तैयार हो कर आ गईं. श्यामाजी ने कनखियों से उन लोगों पर निगाह मार ली थी.

‘‘मंजरी कहां है?’’

मानसी बोली, ‘‘वह कह रही है मुझे पढ़ना है.’’

‘‘ठीक है, वह अम्मा के पास रहेगी. इसी कमरे में पढ़ेगी.’’

‘‘जी, अच्छा.’’

मानसी बोली, ‘‘अम्मा, आप के लिए कुछ लाना है तो बता दीजिए.’’

‘‘न, मुझे कुछ नहीं चाहिए.’’

उन लोगों के जाते ही मंजरी दादी के कमरे में आ गई. श्यामाजी ने मंजरी से टीवी चलाने को कहा और आराम से सीरियल का आनंद उठाने लगीं.

‘‘दादी, आप तो कह रही थीं कि मुझे धुंधला दिखता है, फिर टीवी कैसे देख रही हैं?’’

मंजरी की बात अनसुनी कर के श्यामाजी दत्तचित्त हो कर टीवी में मग्न रहीं.

थोड़े समय बाद बाहर से हंसतीखिलखिलाती मोहिनी मानसी के आने की आहट सुनते ही उन्होंने आंख लग जाने का अभिनय किया.

जम्हाई लेते हुए घड़ी पर निगाह डालते हुए बोलीं, ‘‘कितने बज गए. बड़ी जल्दी आ गईं. सारा बाजार ही खरीद लाईं क्या?’’

मोहिनी प्रसन्न मन से बोली, ‘‘भैयाभाभी माने ही नहीं. 5 साडि़यां तो मुझे ही दिला दीं. चीनानीना के लिए जींसटौप और मदनजी के लिए भी सूट दिलवा दिया.’’

श्यामाजी धीरे से बोलीं, ‘‘महारानीजी अपने लिए कितनी साडि़यां लाई हैं.’’

‘‘अम्मा, तुम भी, भाभी ने तो अपने लिए एक भी नहीं ली है. भैया इतना कहते रहे, लेकिन उन्होंने कह दिया कि मेरे पास बहुत सारी नई रखी हैं. मैं अभी नहीं लूंगी.’’

‘‘कुछ नहीं, तुम्हारे सामने दिखावा कर रही थी.’’

‘‘अम्मा, तुम कब समझोगी कि भाभी बहुत अच्छी हैं.’’

‘‘तुम्हें क्या मालूम? रोज एक नई साड़ी पहनती है.’’

‘‘अम्मा, तुम्हें तो खुश होना चाहिए कि तुम्हारी बहू अच्छे कपड़े पहन कर सजधज कर रहती है.’’

‘‘मोहिनी, अब बस भी करो. आज तुम्हारा भाभीपुराण कुछ ज्यादा ही हो रहा है. हम देख रहे हैं कि अब तुम्हें मेरी कोई परवा नहीं है. मेरी आंखों का औपरेशन हुए पूरे 20 दिन हो गए. तुम मुझे देखने तक नहीं आईं.’’

‘‘अम्मा, हम तो आ रहे थे लेकिन भैया ने कहा कि मोहिनी, हफ्तेभर बाद आना. तब मंजरी के सैमैस्टर हो चुकेंगे. औपरेशन जैसा कुछ नहीं है. केवल लैंस बदल दिया गया है. अम्मा बिलकुल ठीक हैं.’’

‘‘हांहां, मनोहर को तो अम्मा ठीक ही लगती है. सुबहशाम तुम्हारा इंतजार करती रही कि मोहिनी अब आ रही है, अब आ रही है. मन की बात कहती तो कहती किस से?’’

‘‘अम्मा, कोई परेशानी हो तो बताओ. क्या भाभी आप का ध्यान नहीं रखतीं?’’

‘‘कुछ नहीं बिटिया, तुम से चार घड़ी दिल की बात कर लेते हैं तो मन हलका हो जाता है.

‘‘बहू को दिनभर घर के कामों से और फिर घूमनाफिरना व किट्टी पार्टियों से भला फुरसत कहां रहती है. मैं उस से ज्यादा बात नहीं करती. मुझे वह शुरू से पसंद नहीं है. मंजरी का पढ़ाई, ट्यूशन, कालेज, मोबाइल और लैपटौप से समय ही नहीं बचता. मनोहर कभी घड़ी दो घड़ी पास में खड़ा हो जाता है.

‘‘‘अम्मा कैसी हो? कोई चीज की जरूरत हो तो बताओ.’ 5-10 हजार की गड्डी हाथ में पकड़ा देता है. इस से ज्यादा कुछ नहीं. अब हम रुपयों का क्या करेंगे. ज्यादा से ज्यादा तुम्हारे हाथ पर रख देंगे और सब खर्च ये लोग करते ही हैं. इसीलिए अकेलापन बहुत लगता है. इतना बड़ा दिन काटे नहीं कटता.’’

‘‘हां, अम्मा. आप सही कह रही हो. मैं भी दिनभर घर में अकेली ही रहती हूं. ये दिनभर औफिस में रहते हैं. चीना और नीना को कालेज और औफिस से फुरसत ही नहीं रहती. घर में रहती हैं तो लैपटौप और मोबाइल से चिपकी रहती हैं. बस, यह है कि घर के कामों में मेरा दिन बीत जाता है.’’

‘‘मोहिनी, जब मेरा शरीर चलता था तो मुझे भी पता नहीं चलता था. महीनों से मंजरी से कह रही हूं, मेरी अलमारी की साफसफाई कर के ठीक से लगा दो. लेकिन वह क्यों सुने? बहू ने ही सिखापढ़ा दिया होगा, नहीं तो वह पहले ऐसी नहीं थी, एक बार कहने में ही तुरंत कर देती थी. एकएक काम के लिए सब की खुशामद करनी पड़ती है.’’

‘‘अम्मा, कल सुबह हम आप की अलमारी की सफाई कर देंगे. आप छोटीछोटी बातों के लिए परेशान मत हुआ करो. आप को अब क्या करना है? सबकुछ मानसी भाभी को सौंप दो और निश्ंिचत हो कर रहो. भैया अच्छा कमा रहे हैं, भाभी आप का पूरा ध्यान रखती ही हैं. मंजरी तो बच्ची है. मेरी भी बेटियां हर काम से जान बचाती हैं.’’

‘‘देखो लल्ली, हर समय भैयाभाभी, भैयाभाभी मत किया करो, अभी जाने कितनी लंबी जिंदगी बाकी है. इन जेवरों के लालच में कम से कम दो वक्त इज्जत से 2 रोटी तो मिल जाती हैं.’’

मन ही मन मोहिनी ने सोचा, इन को समझाना बहुत कठिन है, ‘‘छोड़ो अम्मा, सो जाओ, मुझे बहुत जोर से नींद आ रही है.’’

‘‘लल्ली बिटिया, तुम 2 दिन के लिए ही क्यों आईं? कल भर रहोगी, परसों सुबह जाने को कह रही हो.’’

‘‘अम्मा, बेटियों को घर पर अकेले छोड़ने में डर लगता है न.’’

‘‘हां, यह बात तो है. आजकल जमाना बहुत खराब है.’’

अगली सुबह श्यामाजी मुंह अंधेरे ही मोहिनी के जागने का इंतजार कर रही थीं.

‘‘लल्ली, लल्ली, मेरी अलमारी अभी ठीक करोगी?’’

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हेल्दी रहने के लिए इन 6 बातों का करें फौलो

अनहेल्दी खानपान, खराब लाइफस्टाइल और काम के टेंशन से लोग शारीरिक और मानसिक रूप से बीमार होते जा रहे हैं. एक ओर खराब खानपान और लाइफस्टाइल से लोगों के शरीर पर बुरा असर होता है तो वहीं काम के स्ट्रेस और आम जीवन की परेशानियों से होने वाला स्ट्रेस हमारे मेंटल हेल्थ का काफी नुकसान करता है.

डाइट में चीनी और नमक की मात्रा कम करें

डाइट में अधिक मात्रा में नमक या चीनी का सेवन करने से ब्लड प्रेशर की परेशानी होती है. इसके साथ ही दिल की बीमारी होने का खतरा भी अधिक बना रहता है. वहीं, चीनी खाने का स्वाद तो बढ़ाती है लेकिन सेहत को काफी नुकसान पहुंचाती है. कई स्टडी में भी इस बात की पुष्टि हो चुकी है. इसलिए डाइट में चीनी और नमक का कम से कम इस्तेमाल करें.

फल और सब्जियों का अधिक सेवन करें

फल और सब्जियों में भरपूर मात्रा में विटामिन, मिनरल्स और फाइबर मौजूद होते हैं. हेल्दी रहने के लिए जरूरी है कि आप दिनभर में 5 फलों का सेवन करें. सुबह के नाश्ते में फलों का जूस लेना फायदेमंद होता है. वहीं, स्नैक्स के रूप में सेब और तरबूज आदि फल ले सकते हैं.

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नींद भरपूर लें

हेल्द रहने के लिए नींद का पूरा होना बेहद जरूरी है. अच्छी सेहत के लिए जरूरी है कि आप 7-8 घंटे सोएं. अगर नींद पूरी ना हो तो कई तरह की बीमारियां होने लगती हैं. नींद पूरी ना होने से डायबिटीज, स्ट्रोक और मोटापा जैसी गंभीर बीमारियों के होने की संभावना अधिक हो जाती है. हेल्थ एक्सपर्ट का मानना है कि, भरपूर नींद लेने से दिमाग को शांति मिलती है, पाचन क्रिया दुरुस्त रहती है. साथ ही इम्यून सिस्टम की क्षमता भी तेज होती है.

वजन को रखें कंट्रोल में

हेल्दी लाइफस्टाइल के लिए वजन का कंट्रोल में रखना बेहद जरूरी है. वजन के बढ़ने से कई तरह की गंभीर बीमारियां होती हैं. इनमें डायबिटीज, हार्ट अटैक और कैंसर जैसी घातक बीमारियां शामिल हैं.

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पिएं अधिक पानी

अच्छी सेहत के लिए जरूरी है कि आप पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं. सेहतमंद रहने के लिए शरीर में पर्याप्त मात्रा में पानी का रहना अनिवार्य है. व्यक्ति को दिनभर में कम से कम तीन लीटर पानी जरूर पीना चाहिए. पानी पीने से शरीर हाइड्रेटेड रहता है और शरीर से टौक्सिंस बाहर निकल जाते हैं.

एक्सरसाइज करें

फिजिकली फिट रहने के लिए एक्सरसाइज करते रहना जरूरी है. इससे कैलोरीज बर्न होती हैं. दिल सेहतमंद रहता है साथ ही शरीर का सर्कुलेटरी सिस्टम ठीक तरीके से काम करता है. एक्सरसाइज करने से मांसपेशियां भी मजबूत होती हैं. दिनभर में कम से कम 150 मिनट एक्सरसाइज करने की आदत को अपने रूटीन का हिस्सा बना लें.

पेरिस में ये कारनामा करने वाली पहली बॉलीवुड एक्ट्रेस बनीं नोरा फतेही

​हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि किसी बॉलीवुड स्टार ने ओलंपिया में परफॉर्म किया है. जी हां, बॉलीवुड एक्ट्रेस नोरा फतेही जिन्होंने परदे पर अपने धमाकेदार डांस से लोगों के दिलों को चुराया और फिर पेरिस में ओलंपिया में प्रदर्शन किया.​

पेरिस में है ओलंपिया…

ओलंपिया, पेरिस दशकों से सबसे प्रतिष्ठित कॉन्सर्ट स्थल है. मैडोना, द बीटल्स, जेनेट जैक्सन, पिंक फ्लोयड, बेयॉन्से, टैलिओर स्विफ्ट और कई अन्य हस्तियों जैसे कई प्रतिष्ठित हॉलीवुड के लोगों ने वहां परफॉर्म किया है. यहां अब तक केवल विदेशी ए-लिस्टर कलाकारों ने ओलंपिया में प्रदर्शन किया है और यह पहली बार है की नोरा के रूप में किसी बॉलीवुड कलाकार परफॉर्म किया.

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इन गानों से हुई फेमस…

​नोरा ने यहां दिलबर, साकी साकी, कमरिया, एक तो कम  जिंदगानी और गरमी जैसी सुपर हिट गानों पर परफॉर्म किया . अपने बॉलीवुड गानों के अलावा, नोरा ओलंपिया में दर्शकों के लिए अपने पेप्पी हिट अंतर्राष्ट्रीय नंबर ‘पेपेटा’ को लाइव गाया.​

शो के समापन पर, नोरा प्रसिद्ध कलाकार फनेर के साथ भी परफॉर्म करते हुए दिखाई दीं, जिसके साथ उन्होंने दिलबर के अरबी संस्करण के लिए सहयोग किया था, जो अभी भी हमारे दिमाग में ताजा है. यह अब तक का सबसे पावर पैक्ड प्रदर्शन था.

नोरा ने ही प्लान किया था सब…

यह पहली बार था जब पूरे कॉन्सर्ट की योजना 2 अलग-अलग देशों भारत और मोरक्को की टीमों द्वारा बनाई जा रही है और इस कॉन्सर्ट के पीछे का कांसेप्ट मोरक्कन-कनाडाई सुंदरी नोरा फतेही के दिमाग की उपज है. वह पिछले चार महीनों से इस कार्यक्रम के लिए हर छोटी आवश्यकता और हर छोटी से बड़ी चीज के पीछे लगातार काम कर रही है, जिसमें वेशभूषा से लेकर संपूर्ण मेकअप लुक और स्टेज सेटअप शामिल हैं.

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‘सिर्फ अदालत ही नहीं, हर इंसान के दिमाग में 377 को मान्यता मिले’- शुभ मंगल ज्यादा सावधान

18 वर्ष की उम्र से लेखन की शुरूआत करने वाले हितेश केवल्या ने अपनी जिंदगी में काफी पापड़ बेले हैं. कुछ दिन ऑल इंडिया रेडियों पर काम करने, नाटकों में अभिनय करने के बाद वो दस वर्ष तक विभिन्न टीवी सीरियलों के संवाद लिखते रहे. उसके बाद फिल्म ‘‘शुभ मंगल सावधान’’ की पटकथा व संवाद लिखे. अब उसी फिल्म का सीक्वअल ‘‘शुभ मंगल ज्यादा सावधान’’ का लेखन करने के साथ साथ निर्देशन किया है. ये फिल्म दो ‘‘गे’’ लड़कों की प्रेम कहानी है जिसमें आयुष्मान खुराना, जीतेंद्र कुमार, नीना गुप्ता,  गजराज राव जैसे कलाकारों के अहम किरदार हैं.

अपनी अब तक की यात्रा को किस तरह रेखांकित करेंगे?

मैं राजस्थानी हूं, मगर मेरी परवरिश दिल्ली में हुई है. मां गृहिणी हैं. पापा नौकरी करते थे. घर पर लिखने पढ़ने का माहौल रहा है. बचपन से मुझे थिएटर का शौक था, जो कि मैं स्कूल में करता रहा. मेरे नाना के छोटे भाई रवि ओझा फिल्में व सीरियल बनाते थे. मुझे कहानियों का शौक भी है. इंजीनियर वगैरह बनने की बात मेरे दिमाग में कभी नहीं रही. मैने ऑल इंडिया रेडियो में काम किया है. 18 वर्ष की उम्र से लिखना शुरू कर दिया था. नाटकों में अभिनय करने के अलावा बैक स्टेज भी किया. फिर मैने अहमदाबाद के इंडियन इंस्टीट्यूट आफ डिजाइन से फिल्म विधा की शिक्षा ग्रहण की. फिर मुंबई आकर विज्ञापन जगत से जुड़ गया. लिखने के शौक के चलते कुछ समय बाद टीवी के प्रोमों लिखने लगा. फिर दस साल तक सीरियलों के संवाद लिखता रहा. तो वहीं मैंने बतौर लेखक, निर्माता व निर्देशक ‘इस मोड़ पर कुछ नहीं होता’ सहित अपनी कुछ लघु फिल्में बनायी.

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‘‘इस मोड़ पर कुछ नही होता’’ को 2006 में राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था. इसके अलावा फिल्मों की पटकथा लिखकर रखता चला गया. करीबन सात फिल्मों की पटकथा लिख डाली, पर पर यह फिल्में किसी न किसी वजह से नहीं बन पायी. 2016 में आनंद एल राय से मुलाकात हुई और उन्होंने मुझे फिल्म ‘‘शुभ मंगल सावधान’’ की पटकथा व संवाद लिखने का मौका दिया. फिल्म को सफलता मिली. मेरे लेखन की तारीफ हुई. उसके बाद उन्हंने मुझे ‘‘शुभ मंगल ज्यादा सावधान’’ लिखने व निर्देशन करने की जिम्मेदारी दे दी.

फिल्म ‘‘शुभ मंगल ज्यादा सावधान’’ के बारे में बताइए?

-यह दो समलैंगिक पुरूषों कार्तिक सिंह (आयुष्मान खुराना) और अमन त्रिपाठी (जीतेंद्र कुमार) की प्रेम कहानी है. इसमें से एक लड़के अमन त्रिपाठी का परिवार है, जब परिवार के सदस्यों को पता चलता है कि उनका बेटा ‘गे’ है तो वह किस तरह से रिएक्ट करते हैं, ये उसी की कहानी है.

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फिल्म ‘‘शुभ मंगल ज्यादा सावधान’’ के लिए रिसर्च करने की जरुरत पड़ी…?

-जी हां! यह काफी लंबा प्रोसेस रहा. इस फिल्म को लिखने से पहले काफी पढ़ा. कई लोगों से मिला, उनसे बातचीत की. कुछ लोगों को आब्जर्व करता रहा. ‘एलजीबीटी’ संगठन में मेरे कई दोस्त हैं. कुछ कालेज के दोस्त हैं, तो इन्हे समझने का प्रोसेस तो कालेज के दिनों से ही शुरू हो गया था. किसी भी इंसान के संघर्ष को समझना बहुत जरुरी होता है, उसके संघर्ष की वजह चाहे जो हो. एक इंसान को समाज में खुद को जीवित रखने/सर्वावाइब करने के लिए जिन तकलीफों से गुजरना पड़ता है, उसे समझना भी आवश्यक था. फिर जब ऐसे लोग आपके दोस्त हो, तो एक सेंसीटीविटी आपके अंदर आ जाती है. आप किसी अन्य की कहानी सुनकर उससे जुड़ते नहीं हैं, पर यदि वह आपका करीबी हो, आपके आसपास का हो या आपका दोस्त हो, उसके संग आप बहुत जल्द जुड़ जाते हैं. तो ‘गे’ लोगों की समझ मेरे अंदर लंबे समय से एक रूप ले ही रही थी. तो इस कहानी में मैने अपने कालेज के जमाने के दोस्तों व एलजीबीटी के अपने कुछ साथियों की उन सभी बातों का निचोड़ पेश किया है. इंटरनेट पर कुछ लेख पढे़ं, कुछ किताबे पढ़ीं.

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क्या रिसर्च के दौरान आपने इस विषय पर बनी फिल्में भी देखी?

इस विषय पर भारत में कुछ ज्यादा फिल्में नहीं बनी हैं, इसलिए फिल्में नहीं देखी. फिर हमारे दिमाग में यह साफ था कि हमें इस विषय पर मेनस्ट्रीम वाली फिल्म बनानी है, हमें ऐसी फिल्म नहीं बनानी थी, जो कि फिल्म फेस्टिवल तक सीमित होकर रह जाए. हमने  कुछ विदेशी फिल्में जरुर देखीं, मगर उनका कल्चर व हमारा कल्चर बहुत अलग है, इसलिए वह हमारे लिए उपयोगी नहीं रही. इसके अलावा एलजीबीटी समुदाय के मेरे कुछ दोस्तों ने कुछ फिल्में बनायी हुई हैं, तो उनकी फिल्में मैने देखी हुई हैं. मेरी पत्नी एनीमेशन डायरेक्टर हैं. ‘शुभ मंगल सावधान’ से भी पहले ‘‘सिक्स पैक म्यूजिक बैंड’’ बना था. जिसमें ट्रांसजेंडर लोगों को लिया गया था. उनकी अपनी संगीत की समझ थी. पर फिर उन्हें थोड़ी सी ट्रेनिंग देकर उनका यह म्यूजिक बैंड लॉन्च किया गया था. तब हमने इसके लिए दो म्यूजिक वीडियो बनाए थे. एक म्यूजिक वीडियो में गेस्ट अपियरेंस के रूप में रितिक रोशन भी थे.

यह एक कैम्पेन था, जिसे अच्छा प्रोत्साहन भारत व पूरे विश्ल में मिला था. कान्स में एडवरटाइजिंग सेशन में तो पूरे कैम्पेन को पुरस्कृत किया गया था. तो उस दौरान भी मैने ट्रांसजेंडरों को बहुत बारीकी से हर दिन आब्जर्व किया था, जो कि कहीं न कहीं मेरे दिमाग में अंकित था, उसका भी उपयोग लेखन के वक्त हुआ. मेरी कोशिश यही रही है कि पूरी संजीदगी के साथ इस कहानी को पूरे परिवार के दर्शकों को ध्यान में रखकर लिखा जाए.

आपने क्या कहने की कोशिश की है?

-देखिए,हमारे समाज में सेक्स ऐसा टैबू विषय है, जिस पर लोग बात करना पसंद नहीं करते. हमने सेक्स विषय पर इतना ताले लगा रखे हैं कि क्या कहूं. अब इन तालों पर भी जाले लग गए हैं. तो अब समाज ऐसे मुकाम पर पहुंच गया है कि वह इस विषय पर नया नरेशन सुनना चाहती है. जिन चीजों पर जाले पड़ जाते हैं, वह बेकार हो जाती हैं. उस पर नए सिरे से बात करना, सोचना आवश्यक हो जाता है.

अब हम हमने इस सेक्स के विषय को इतने उंचे पायदान पर पहुंचा दिया है कि लोग खुलकर बात करने लगे हैं. कहानी का मकसद यही है कि हम अपनी फिल्म के विषय, संवाद और किरदारों के जरिए सेक्स जैसे विषय के टैबू को तोड़ें और इसे बातचीत के स्तर तक लेकर आएं. किसी भी बात को स्वीकार करना या न करना, किसी पर उंगली उठाना हमारा काम नही है. मेरी राय में फिल्में समाज को नहीं बदल सकता. सिनेमा लोगों व समाज को सिर्फ उनका आइना दिखाता है. बाकी हर इंसान अपनी जिंदगी की जरुरत के अनुसार काम करे. अब आप किस दौर से गुजरे हैं, किस तरह के अनुभव रहे हैं, आपकी सोच क्या है, उस आधार पर निर्णय लेने का हक आपको है. मेरी राय में ‘च्वॉइस ऑफ सेक्सुआलिटी’ नहीं होती, बल्कि प्राकृतिक है.

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हमने यह कहने का प्रयास किया है कि जिस तरह से हम किसी पेड़ से नहीं पूछते कि वह इस तरफ क्यों झुका हुआ है या सीधा क्यों खड़ा हुआ है, वह जैसे भी रहता है, हम पेड़ को उसी रूप में स्वीकार कर लेते हैं. जिस तरह हम नदी से नहीं कहते कि वह किस दिशा में बह रही है. तो हम यानी कि हर इंसान भी प्रकृति का हिस्सा है. तो फिर हमने ‘सेक्सुएलिटी’ को अलग क्यों कर दिया. सेक्सुएलिटी भी नेचर/प्रकृति का ही हिस्सा है. हमें पुरूष और औरत के बीच के स्पेक्ट्रम में रहने वालों को भी स्वीकार करने की जरुरत है.

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एलजीबीटी समुदाय ने कई आंदोलन किए. अब जबकि उच्च न्यायालय व सरकार द्वारा इसे मान्यता दी जा चुकी है. तो अब आपकी फिल्म कितनी महत्वपूर्ण है?

-देखिए, हमारी फिल्म अभी भी अति महत्वपूर्ण है. अदालत का इसे कानूनी जामा पहनाना एक महत्वपूर्ण कदम है. परिणामतः अब इस समुदाय को लेकर खुलकर बात हो रही है. जरुरी यह है कि हम फिल्म के माध्यम से ऐसी कहानी तैयार करें, जिससे अदालत का 377 नहीं,हर इंसान के अंदर के 377 को मान्यता मिल जाए.

प्यार को लेकर आपकी सोच क्या है?

-प्यार हम सभी का बेसिक इमोशन है. यह किसी भी तरह से उमड़ सकता है. मैं प्यार को महज रोमांटिक तरीके से नहीं देखता. मां बेटी, पिता पुत्र और दो दोस्तों में भी प्यार होता है. प्यार हर तरह का होता है. मेरी राय में प्यार ही सबसे बड़ा इमोशन है. यही इमोशन हमारे समाज को आगे बढ़ाता है. हमें एक दूसरे से जुड़ने का मौका देता है.

महंगाई रानी को नमन है !

एक इंडियन- “आज गैस सिलेंडर  के दाम तुम्हारे प्रकोप से सीधे एक सौ पचास रूपये  बढ़ गए.”
दूसरा इंडियन- देखते ही देखते टमाटर 5 रूपये से 30 रूपये केजी हो गए .”
तीसरा इंडियन- “आलू 10 से 20 रूपये  किलो हो गए .”
चौथा इंडियन-” खाने का तेल भी महंगा हो गया.”
पांचवा इंडियन- ” बीच बीच में रेल यात्रा भी महंगी हो रही है .”
सैकड़ों इंडियन महंगाई रानी के समक्ष, उनके सिहांसन के  सामने हाथ जोड़ कर खड़े हैं । किसी के चेहरे पर बारह बज रहे हैं, तो किसी के एक और किसी के चेहरे पर दो बजे हैं.
महंगाई रानी की मुस्कुराहट और मादक हो गई है. वह मधुर स्वर में बोली,- “तुम इंडियन, मेरी पूजा अर्चना नहीं करते, मुझसे घृणा करते हो. मेरी और देखना भी पसंद नहीं करते.यह अब और बर्दाश्त नहीं करूंगी. देखो, मेरी अक्षुण्ण  शक्ति को पहचानो, और मेरी देवी! की भांति, पूजा करना प्रारंभ करो.
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एक इंडियन-” हमने तो सदैव देवी- देवताओं की पूजा की है.”
दूसरा इंडियन- “हमारे किसी धार्मिक ग्रंथ में तुम्हारी पूजा के संदर्भ में कोई संकेत नहीं मिलता”
तीसरा इंडियन- “हमारे किसी ऋषि महर्षि ने कभी कोई स्तुति तुम्हारी नहीं गायी है”
चौथा इंडियन- “हे देवी ! हम विवश ह. हम लकीर के फकीर हैं…”
 महंगाई रानी हंसती है.उसकी कल- कलकाती हंसी सभी के कानों में  गूंज रही है . महंगाई रानी कह रही है-” देखो ! तुम सभी की पूजा करते हो, सांप हो या उल्लू, कुत्ता हो या हाथी, बकरी हो या गाय, आकाश हो या धरती… फिर मेरा अपमान क्यों करते रहते हो!”
 सभी इंडियन के चेहरे पर अनेक भाव आ जा रहे हैं.
एक इंडियन- “मगर हम भी क्या करें, हमारे पूर्वजों ने कभी तुम्हारा महत्व हमें बताया ही नहीं… हम क्या करें.”
महंगाई रानी-” तुम बहुत भोले हो, मेरी शक्ति और महाशक्ति का आभास तुम्हें निरंतर हो रहा है, की नहीं.
सभी इंडियंस हाथ जोड़ कर समवेत – “हम तो आपकी महाशक्ति के  मर्मांतक  पीड़ा से आहत हैं त्राहि  त्राहि कर रहे हैं.”
महंगाई रानी-( जोर से हंस कर ) -“मेरी चमत्कारी  ताकत से, देश की सरकार, सत्ता, जन-जन कांपते हैं.”
इंडियंस हाथ जोड़कर- “सचमुच ! हम यह अपनी आंखों से देख रहे हैं.”
 महंगाई रानी- “तो मूर्खों की तरह गुटूर- गुटूर क्या देख  रहे हो,क्यों नहीं, श्रद्धा और भक्ति का चोला ओढ़कर मेरे समक्ष पंक्तिबद्ध खड़े हो जाते. क्यों नहीं घंट बजाते, मेरी स्तुतिका गान करते.”
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इंडियन एक-“हमें सोचने का वक्त दो… हम निरीह गरीब इंडियन पर रहम करो.”
महंगाई रानी- “मैं लगातार, अपनी शक्ति का प्रकोप दिखा रही हूं.”
इंडियंस दो-“हम देख रहे हैं.”
महंगाई रानी-” मैं अपनी ताकत से, तुम्हारा कचूमर निकाल रहीं हूं.”
 इंडियन तीन-” हम लोग खून के आंसू रो रहे हैं.”
महंगाई रानी- “देखो ! जब तक तुम श्रद्धा भक्ति के आवेग का प्रदर्शन करते हुए, मेरी अर्चना नहीं करोगे, मैं तुम्हें इसी तरह प्रताड़ित करती रहूंगी. देखो… तुम भ्रम में मत रहना,तुम्हें मुझसे कोई नहीं बचा सकता. मुझे तुम्हारी एक-एक हरकत की, आहट का पता चल जाता है.”
इंडियन चौथा- “वह कैसे महंगाई रानी !”
 महंगाई हंसकर- “मुझे पता है,मुझसे बचने तुम सरकार के पास जाकर रोते गिड़गिड़ाते हो… हा… हा… हा .”
इंडियन पांचवा- “सरकार हमारी माई बाप है, महंगाई रानी .”
महंगाई रानी-( हंसकर ) “सरकार, जब तुम्हारी और ध्यान नहीं देती तब तुम विपक्ष के पास जाते हो… हा हा हा मगर विपक्ष मेरी राई रत्ती नहीं बिगाड़ सकता, तुम्हारी रक्षा वह नहीं कर सकता । वह ढोंग करता है देश  बंद कराने का ढोंग, मगर क्या उससे मुझसे मुक्ति मिलती है.”
सभी इंडियन समवेत स्वर में- “त्राहिमाम… त्राहिमाम । हमारी रक्षा अब तुम ही करो । हमें रास्ता बताओ । ऐसा रास्ता जिससे हमारा धर्म भी बच जाए और जान भी.”
महंगाई रानी”-एक ही रास्ता है, जो मैं बता चुकी हूं । तुम श्रद्धा भक्ति के साथ जैसे अन्य देवी-देवताओं की पूजा अर्चना करते हो मेरी भी करो.”
सभी इंडियन आंखें फाड़ महंगाई रानी की ओर देख रहे हैं । आंखों में विराट शून्य है ।
महंगाई रानी- “तुम इंडियंस बेहद समझदार हो. खुश हो जाओ. देखो, मेरा प्रकोप त्रेता मे भी था, सतयुग में, भी द्वापर में भी.मगर आज कलयुग में मैं अपने उध्दाम स्वरूप में हूं हा हा हा…”
 सभी इंडियन- “हमें सोचने का वक्त दो, किसी सहृदय  से मशविरा कर ले.”
 महंगाई रानी-” ठीक है,मैं फिर आऊंगी । हा हा हा…”
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