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GHKKPM: शो में होगी नई एंट्री, विराट से होगा मुकाबला

सीरियल गुम है किसी के प्यार में की कहानी में लगातार ट्विस्ट एंड टर्न दिखाया जा रहा है. शो में हाईवोल्टेज ड्रामा चल रहा है. इसी बीच पाखी की प्रेग्नेंसी रिस्क के बारे में सई भी जान चुकी है.

शो में आपने देखा कि पाखी गुंडों के सामने इमोशनल होकर विराट के करीब जाने की कोशिश कर रही है. इस बीच बताया जा रहा है कि सीरियल में एक नए किरदार की एंट्री होने वाली है. जी हां, रिपोर्ट के अनुसार शो में जल्द ही नई एंट्री होगी. जिसका मुकबला विराट से होगा.

 

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शो के मेकर्स दर्शकों को बांधे रखने के लिए कहानी में बड़ा  ट्विस्ट लाते रहते हैं. एक रिपोर्ट के अनुसार शो में रिभू मेहरा की एंट्री होने वाली है.  इस एंट्री के बाद सीरियल में धमाकेदार ट्विस्ट दिखाया जाएगा.

 

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शो में इन दिनों दिखाया जा रहा है कि सई के हाथ पाखी की प्रेग्नेंसी रिपोर्ट लगी है. सई को पता चल जाता है कि पाखी ने प्रेग्नेंसी रिस्क की बात छिपाई है तो वह सई को धमकी देती है कि कुछ गड़बड़ हुआ तो वह उसे छोड़ेगी नहीं.

 

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बॉलीवुड के इन 3 सेलेब्स को ‘अनुपमा’ है बेहद पसंद, पढ़ें खबर

टीवी सीरियल ‘अनुपमा’ (Anupamaa) दर्शकों का फेवरेट शो है. शो के ट्विस्ट एंड टर्न से दर्शकों का फुल एंटरटेनमेंट होता है. दर्शकों को इस शो के हर एपिसोड का बेसब्री से इंतजार रहता है. शो के मेकर्स भी शो को ज्यादा से ज्यादा एंटरटेनिंग बनाने के लिए कॉफी मेहनत करते हैं. कुछ समय पहले ही सीरियल अनुपमा ने 2 साल का सफर पूरा किया है. 2 साल में अनुपमा ने दर्शकों के साथ-साथ बॉलीवुड  सेलेब्स का भी  दिल जीत लिया है. तो आइए बताते हैं, बॉलीवुड के किन सितारों का फेवरेट शो ‘अनुपमा’ है.

रणबीर कपूर

रिएलिटी शो रविवार विद स्टार परिवार के सेट पर रणबीर कपूर अपने फिल्म का प्रमोशन करने पहुंचे थे. एक्टर ने इस शो पर अनुपमा यानी रुपाली गांगुली के साथ खूब मस्ती की. रणबीर कपूर ने ये भी बताया कि उनके परिवार के लोग ‘अनुपमा’ सीरियल को कॉफी पसंद करते हैं.

 

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सारा अली खान

बॉलीवुड एक्ट्रेस सारा अली खान अपनी फिल्म अतरंगी रे का प्रमोशन करने के लिए ‘अनुपमा’के सेट पर पहुंची थीं. रिपोर्ट के अनुसार सारा अली खान ने बताया था कि उनकी मां ‘अनुपमा’ की बहुत बड़ी फैन है. वह इस शो का एक भी एपिसोड मिस नहीं करती है.

 

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मिथुन चक्रवर्ती

बॉलीवुड एक्टर मिथुन चक्रवर्ती की बहू मदालसा शर्मा सीरियल अनुपमा में काव्या का किरदार निभाती है. ऐसे में मिथुन चक्रवर्ती का परिवार भी इस शो को देखना मिस नहीं करता. एक इंटरव्यू के अनुसार मदालसा शर्मा ने बताया था कि मिथुन उनके काम को पूरा सपोर्ट करते हैं.  एक्टर अपने पूरे परिवार के साथ इस शो को देखते हैं.

 

गर्भपात का हक सिर्फ औरत का है

अमेरिका में चर्च का दबाव इसी तरह बढ़ रहा है जैसे भारत में भगवा गैंग का बढ़ रहा है. चर्च का बिजनैस तभी चलता है जब चर्च किसी न किसी मामले को ले कर अपने शिष्यों को लगातार भडक़ाऊ हालत में रख सकें. औरतें के गर्भपात के हक पर चर्च ने खूब हल्ला मचाया है और अपने शिष्यों को कुछ करने की छूट दे कर अपना धंधा बढ़ाया है. नतीजा यह है कि 1973 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने जिस गर्भपात के अधिकार के संवैधानिक माना था, चर्च जाने वाले कट्टरपंथी सुप्रीम कोर्ट के जजों ने जून 2022 में फैसले को उलट दिया और गर्भपात का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं रह गया.

राज्यों को अधिकार है कि वे चाहें तो गर्भपात को अवैध कर दें. गर्भपात पर बहस चर्च में शुरू होती है जहां धाॢमक कट्टर हर सप्ताह संडे को जमा होते हैं और बाइबल के चुने हुए अंशों को ईश्वर वाणी मान कर प्रवचन देते पादरी के आगे नतमस्तक हो कर हां में हां मिलाते हैं. राज्यों के अधिकांश राजनीतिबाज भारत की तरह चर्च में मत्था टेके बिना जीत नहीं सकते. क्योंकि धर्म के धंधें की खासियत यह है कि इस में इकट्ठा होने की एक जगह बनवा दी जाती है और बचपन से ही धर्म का पाठ घोटघोट कर पढ़ा दिया जाता है.

चर्च की बातों में आए पोलिटिशयनों की हिम्मत नहीं होती कि वे काल्पनिक, अनाॢभक व भ्रमित बातें जो धर्मग्रंथों में लिखी हैं, का विरोध कर सकें. बाइबल में सैंकड़ों कहानियां ऐसी है जिन्हें किसी भी युंग में सत्य नहीं माना जा सकता था फिर भी उन्हें सुनने वाले मस्ते हो जाते थे और उन का इस्तेमाल घर की औरतों, बच्चों और पड़ोसियों व दोस्तों के साथसाथ दुश्मनों पर भी करते रहे है.

इन्हीं लोगों की सेना ने आज चर्च का एजेंडा चला रही हैं और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का नया फैसला इसी का नतीजा है. जज भी बेहद धाॢमक होते हैं क्योंकि धर्म की चाश्नी में डूबे राजनीतिबाज उन्हें पहले छोटा जज बनवाते हैं और फिर सुप्रीम कोर्ट तक ले जाते हैं. हमारे यहां भी ऐसे सुप्रीम कोर्ट जज रहे है और अभी हैं जो सत्ता में बैठे लोगों को लगभग ईश्वर का सा सम्मान देते रहे हैं क्योंकि उन्होंने ही यह पद दिलाया.

गर्भपात का हक औरत का और सिर्फ औरत का है और यह फैसला कि गर्भपात होना चाहिए या नहीं, डाक्टर और पेशेट के बिना का है, इस में न चर्च बीच में आता है न और कोई धर्म. पर अगर बच्चें नहीं हुए तो दान कौन देगा, कौन धर्म के नाम पर दूसरों की जान लेगा, अपनी जान देगा.

बच्चे औरतों को घर की गुलाम बनाने में भी बड़ा योगदान देते हैं. बच्चों की खातिर औरतें पतियों की गुलामी करती हैं, पिटती है, रातदिन खटती हैं और बेसमय बूढ़ी हो जाती हैं. उन्हें भी लगने लगता है कि उन को कहीं सकून मिलेगा तो ईश्वर की दुकान पर जहां धर्म का दुकानदार जो चिकनी चुपड़ी बातें कहतने का एक्सपर्ट है, उन्हें पति या पिता के आधीन रहने का आदेश भी देता है और श्रणिक सुख के लिए अपने साथ भी सुला लेता है. अगर बच्चों का जबरन बोझ न हो तो औरतें स्वतंत्र रह कर अपना कैरियर बना सकती हैं, ऊंचाइयों पर जा सकती हैं.

बच्चों की चाहत हर औरत में प्राकृतिक है. वह गर्भपात जब कराती है जब उसे होने वाला बच्चा बोझ लगने लगे. ङ्क्षजदा बच्चे को वह मार नहीं सकती पर जो अभी पैदा ही नहीं हुआ उस पर उस का पूरा हक है और होना चाहिए. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने उलटा फैसला दे कर अमेरिका को पश्चिमी एशिया के इराक, ईरान, सऊदी और अफगानिस्तान जैसे मुसलिम कट्टरपंथी देशों में खड़ा कर दिया है.

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट अब लोगों के शांति व हक के साथ जीने की छत नहीं दे रहा, वह तो एकएक कर के पिछले 200-300 सालों में मिले मौलिक अधिकारों को छीन कर चर्च या चर्च समर्थक नेताओं के हाथों में दे रहा है. रेन बर्सेस बेड के उलटना वैसा ही है जैसे भारत में आपातकाल को सही ठहराना या राम मंदिर को बनाने की जगह देने के फैसले थे. ये ऐसे खंजर हैं जो पूरे समाज को गहरा घाव देते हैं, दिखते नहीं, खून नहीं बहता, पर शरीर अधमरा हो जाता है.

अमेरिका अब लोकतांत्रिक मूल्यों के रक्षक होने का दावा नहीं कर सकता. वह रूस व चीन की तरह कट्टरपंथी देश है जो फिलहाल आॢथक तौर पर उन्नत है पर उस का पतन निश्चित है.

मां- बाप से बेरुखी, आखिर क्यों

फिल्म इंगलिशविंगलिश में श्रीदेवी (शशि) ने एक समर्पित मां का किरदार निभाया है. वे अपने बच्चों से आदर और सम्मान की अपेक्षा रखती हैं. लेकिन उन के बच्चे उन के साथ बेहद रूखा व्यवहार करते हैं. बच्चे बातबात पर मां का मजाक बनाते हैं क्योंकि उन्हें अंगरेजी बोलनी नहीं आती. जब वे ‘जैज’ डांस फौर्म को ‘जहाज’ कहती हैं तो बच्चे उन का मजाक बनाते हैं. इस फिल्म द्वारा उन विद्रोही बच्चों पर अच्छा कटाक्ष किया गया है जो अंगरेजी जानने व टैक्नोसेवी होने के नाम पर स्वयं को सुपर समझते हैं और मांबाप की इज्जत नहीं करते.

आजकल के बच्चे

पता नहीं क्या हो गया है आजकल के बच्चों को, मांबाप की इज्जत करना तो जैसे वे भूल ही गए हैं. हर समय फोन पर, फेसबुक पर लगे रहना, दोस्तों को ही सबकुछ समझना, उन से ही हर बात शेयर करना, कुछ भी पूछो तो पहले तो जवाब ही नहीं देते और अगर दिया भी तो सिर्फ हां या ना में, और अगर कुछ और ज्यादा पूछ लिया तो जवाब मिलता है, ‘आप को क्या मतलब’, ‘जब आप को कुछ पता नहीं तो बोलते ही क्यों हो,’ बातबात पर चीखनाचिल्लाना, गुस्सा करना, गलत भाषा का प्रयोग करना उन के व्यवहार में शामिल हो गया है. रिश्तों का सम्मान और मानमर्यादा जैसे शब्द तो मानो उन की डिक्शनरी में हैं ही नहीं. हाल ही में अमेरिका में हुई एक रिसर्च में भी पाया गया कि पिछले 30-40 वर्षों की अपेक्षा आज के बच्चे अधिक उपद्रवी हो गए हैं.

बच्चों का रूखा व्यवहार

श्रेया (मां) : युक्ति बेटा, बहुत देर हो गई कंप्यूटर पर गेम खेलतेखेलते. अब पढ़ लो. कल आप का टैस्ट है न.

युक्ति (बेटी) : (कंप्यूटर पर नजरें गड़ाए हुए) जस्ट चिल, मौम, क्यों हमेशा मेरे पीछे पड़ी रहती हो. मुझे पढ़ना है न, मैं पढ़ लूंगी. जब आप को कुछ पता नहीं तो बोलती क्यों हो?

मां : बेटा, मैं तुम्हारे भले के लिए बोल रही हूं.

युक्ति : मुझे अपना भलाबुरा पता है. आप मेरे मामले में इंटरफियर मत किया करो.

अशिष्ट भाषा का प्रयोग

आजकल 7-8 साल के बच्चे वह भाषा बोलते हैं जो फिल्मों में बोली जाती है. फिल्म ‘राउडी राठौर’, ‘गैंग्स औफ वासेपुर’, ‘चमेली’, ‘जब वी मेट’, ‘गोलमाल-3’ में अपशब्दों की भरमार है, जिन का प्रयोग आज के बच्चे पियर ग्रुप में बखूबी करते देखे जा रहे हैं. जब भी बच्चों के मनमुताबिक बात नहीं होती वे गुस्से में ‘शटअप’, ‘डौंट बी स्टुपिड’, ‘डैम’ जैसे अपशब्दों का प्रयोग आम करते हैं.

बच्चों का सोशल नैटवर्किंग साइट्स पर अधिक समय बिताना भी उन की भाषा व व्यवहार पर गलत प्रभाव डाल रहा है. औनलाइन चैटिंग में वे ऐसी भाषा का प्रयोग करते हैं जो गलत तो होती ही है मातापिता की समझ से भी बाहर होती है. मसलन, जब वे ‘एमडब्लूआई’ लिखते हैं तो उस का अर्थ होता है ‘गैटिंग मेड विद’ जिस का प्रयोग वे यह बताने के लिए करते हैं कि वे किसी रिश्ते से जुड़े हैं.

कंप्यूटर एडिक्शन

ब्रिटिश एसोसिएशन औफ एंगर मैनेजमैंट की एक हालिया रिसर्च में पाया गया है कि बच्चों के उद्दंड और असहयोगात्मक रवैये का एक मुख्य कारण कंप्यूटर एडिक्शन है. वे प्रति सप्ताह 16 या उस से अधिक घंटे कंप्यूटर पर बिताते हैं. इस रिसर्च में उन अभिभावकों को चेतावनी दी गई है जो घर में बच्चों के साथ होने वाले विवाद से बचने के लिए उन्हें कंप्यूटर पर अधिक समय बिताने की आजादी देते हैं. ऐसा करने से जहां एक ओर बच्चों का परिवार के सदस्यों से जुड़ाव टूटता है वहीं वे अपनी एक अलग दुनिया बसा लेते हैं.

जब भी बच्चों से अपना कमरा साफ करने, होमवर्क करने, खाना खाने के लिए कहा जाता है वे नकारात्मक व उद्दंडता भरा व्यवहार करते हैं. इस रिसर्च में 9 से 18 साल के कंप्यूटर पर अधिक समय बिताने वाले बच्चों के 206 अभिभावकों में से 46 प्रतिशत ने माना कि उन के बच्चे घर के कार्यों में सहयोग करने से कतराते हैं. 44 प्रतिशत ने माना कि उन के बच्चे जवाब देने लगे हैं और असहनशील हो गए हैं. शेष ने माना कि उन के बच्चों का व्यवहार पहले से अधिक रूखा हो गया है.

मनोवैज्ञानिक पहलू

बच्चों में बढ़ते बेरुखे व्यवहार, गुस्सा व चिड़चिड़ेपन के बारे में क्लिनिकल साइकोलौजिस्ट अरुणा ब्रूटा कहती हैं, ‘‘जो बच्चे ऐसा गलत व्यवहार करते हैं वे आगे चल कर बड़ी समस्या खड़ी कर सकते हैं. वे अधिक आक्रामक हो कर समाज को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं. आजकल के बच्चों के लिए लैपटौप व फोन फैमिली मैंबर बन गए हैं. और जब उन्हें इन के प्रयोग से रोका जाता है तो वे आक्रामक व उद्दंड हो जाते हैं. वे इन गैजेट्स को अपने अधिक नजदीक पाते हैं, अपने सभी सवालों और समस्याओं के हल वहीं ढूंढ़ते हैं. इसलिए बच्चों के लैपटौप, मोबाइल प्रयोग की सीमा निर्धारित करें और बच्चों के साथ अधिक से अधिक समय बिताएं. पियर ग्रुप के प्रभाव की उपेक्षा न करें क्योंकि जब भी बच्चों की अभिभावकों से अनबन होती है वे सभी बातें दोस्तों के साथ बांटते हैं.’’

पेरैंट्स की भूमिका

बच्चों के बिगड़ने या सुधरने में अभिभावकों की भूमिका अहम होती है. इस का उदाहरण सामने है. जनवरी 1990 के बीएमडब्लू हिट एंड रन केस में 6 लोग मारे गए. 10 जनवरी की उस रात को संजीव नंदा अपने 2 दोस्तों, माणिक कपूर और सिद्धार्थ गुप्ता के साथ गुड़गांव से एक लेटनाइट पार्टी से लौट रहे थे. पार्टी और पैसे के नशे में चूर उच्च व्यापारी वर्ग के इन बिगड़ैलों ने 6 मासूमों की जान ले ली.

अभिभावकों द्वारा बच्चों को दी गई निरंकुश आजादी, अधिक सुविधाएं व कम जिम्मेदारी बच्चों के उद्दंड व आक्रामक होने के लिए जिम्मेदार है. ‘बीएमडब्लू हिट ऐंड रन’ इस का जीताजागता उदाहरण है.

कैसे निबटें इन बच्चों से

जब भी बच्चा अशिष्ट भाषा बोले, चीखेचिल्लाए उसे इग्नोर न करें. आप ने बच्चे के रूखेपन व असहयोग के व्यवहार को जब भी स्वीकार किया तो वह समझने लगेगा कि आप को उस का ऐसा व्यवहार स्वीकार्य है. दृढ़ हो कर प्यार से कहें कि गलत भाषा व व्यवहार स्वीकार नहीं किया जाएगा.

बच्चा कुछ भी गलत बोले तो आराम से पूछें, ‘अभी आप ने क्या कहा?’ वह समझ जाएगा कि उस ने कुछ गलत कहा है.

बच्चे से जानने की कोशिश करें कि उसे ऐसा रूखा व्यवहार करने की जरूरत क्यों पड़ी? उस से बात करें, जानें कि उस के दिमाग में क्या चल रहा है? उसे बताएं कि हर परिवार दूसरे से अलग होता है. कई बार आप का बच्चा अन्य बच्चों के गलत व्यवहार का कारण नहीं जान पाता और आप के साथ गलत व्यवहार कर देता है.

बच्चों की गतिविधियों की जानकारी रखें पर ज्यादा दखल भी न दें. उन्हें स्पेस दें. उन्हें समय दें. उन के साथ समझदारी से पेश आएं. उन की हर मांग को बिना सोचेसमझें पूरा न करें. उन्हें उन के गलत व्यवहार के लिए जिम्मेदार बनाएं.

बच्चों को संवेदनशील बनाएं ताकि वे घर के कार्यों के प्रति, आप के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझें, आप के साथ सम्मानजनक तरीके से पेश आएं. कुछ बच्चे अपने लुक, फैशन के प्रति इतने अधिक जागरूक होते हैं कि घरेलू कार्यों को करना उन्हें अपनी छवि पर बट्टा लगना लगता है, इसलिए उन्हें प्रारंभ से ही घर के कार्य करने के लिए प्रेरित करें.

बरसात में इनसे बचें

बरसात के मौसम में घर के बाहर पैर रखते ही कीचड़, नालों का गंदा पानी, कूड़े के ढेर से उठती सड़ांध से दिमाग खराब हो जाता है. बारिश की बूंदों से गरमी से राहत मिलती है लेकिन इस मौसम में पनपने वाली कई बीमारियों से बचना बेहद जरूरी है. आइए, जानते हैं दिल्ली के वरिष्ठ फिजिशियन व कार्डियोलौजिस्ट डा. के के अग्रवाल से कि इन बीमारियों से कैसे बचें.

लेप्टोस्पायरोसिस

इस बीमारी में बुखार आता है और आंखों में सूजन आती है. यह बीमारी जानवरों के मलमूत्र से फैलने वाले लेप्टोस्पाइश नामक बैक्टीरिया के कारण होती है. खासकर यह चूहों से होती है. चूहे जब पानी में या अन्य जगह पेशाब करते हैं तो आप के पैरों के माध्यम से, विशेषकर यदि आप के पैरों में घाव हैं तो, उस पेशाब के कीटाणु जिस्म में घुस जाते हैं. इस मौसम में जलभराव व बहते पानी के कारण यह संक्रमण पानी में मिल कर उसे दूषित कर देता है. इस वजह से इस बीमारी की आशंका अधिक रहती है.

बारिश के मौसम में नंगेपैर चलना ठीक नहीं रहता, हमेशा जूते, चप्पल, दस्ताने, चश्मा, मास्क आदि लगाएं. तालाबों, पूलों व नदियों आदि के  पास जाने, मृत जानवरों को छूने से बचें. घावों की नियमित साफसफाई करते रहें.

मलेरिया

बारिश की वजह से जगहजगह सड़कों व नालों में पानी जमा हो जाता है और गंदे पानी में मच्छर पनपने शुरू हो जाते हैं, जिन में से कुछ मलेरिया के भी मच्छर होते हैं. इस मौसम में दिल्ली में डेंगू व चिकनगुनिया, गुजरात में जिका और पूर्वोत्तर में मलेरिया का जबरदस्त आतंक रहता है.

मच्छर को घर में या बाहर पनपने न दें. छोटे व बड़े बरतन में पानी को ढक कर रखें. पानी की टंकी को बराबर साफ करते रहें. मांसपेशियों में दर्द और कंपकंपी के साथ बुखार आना मलेरिया के लक्षण हो सकते हैं.

डायरिया, टायफायड व जौंडिस

ये तीनों बीमारियां दूषित पानी पीने से होती हैं. इस मौसम में उबला पानी पिएं. अच्छी तरह पका हुआ खाना खाएं. सब्जी को छील कर या अच्छी तरह धो कर पकाएं और ठंडा खाना हमेशा गरम कर के ही खाएं.

सर्दीजुकाम, गले में खराश या बुखार हो तो टायफायड के लक्षण हो सकते हैं. उलटी, कमजोरी या फिर आंखों व हाथ के नाखूनों में पीलापन आना जौडिंस के लक्षण हैं.

स्नेक पौयजनिंग

बरसात में बिलों में पानी घुसने से अकसर सांप बाहर निकल आते हैं. यदि सांप काट ले तो तुरंत अस्पताल जाएं नजदीकी डाक्टर को दिखाएं. फिल्मों में जो दिखाया जाता है कि सांप काटने से मुंह से जहर खींच लेते हैं, ऐसा कतई न करें.

पति-पत्नी प्रबंधन कोचिंग सेंटर

आपके शहर में पति-पत्नी प्रबंधन कोचिंग सेंटर खुल गया है. कोचिंग सेंटर में आएं और अपनी-अपनी पत्नियों का प्रभावपूर्ण तरीके से प्रबंधन करें. जिन-जिन पत्नियों ने इस कोचिंग सेंटर में भागीदारी की है, उन्होंने अपने पति लोगों की नाक में नकेल कस रखी है. पाठ्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय पति-पत्नी प्रबंधन आयोग की मान्यता है. इससे कोई भी लड़का पति बनने की निर्धारित योग्यता पूरी कर पाएगा. इस पाठ्यक्रम को पूरा करने वाली लड़की ब्रांडेड पत्नी बन जाएगी. पति लोगों को अपनी पत्नियों को हर हाल में खुश रखना ही होता है. हालांकि आज तक कोई भी पति अपनी पत्नी को खुश नहीं रख पाया है, फिर भी हर एक पति पर पत्नी को खुश रखने की टेंशन 24 घंटे रहती है. कोर्स सफलतापूर्वक पूरा करने पर हम एक प्रामाणिक पति व ब्रांडेड पत्नी देने का वादा करते हैं.

पति लोगों के लिए आकर्षक पाठ्यक्रम- कैप्सूल 1- चश्मा, चाबी, रिमोट आदि दुर्लभ वस्तुएं बिना चीख-चिल्लाहट के कैसे ढूंढ़ें? खामोश रहकर बेल्ट, मौजे, बनियान ढूंढ़ने के खास तरीके. कैप्सूल 2- पत्नी का जन्मदिन, विवाह की तारीख, वार, समय के साथ हिंदी कैलेंडर के अनुसार संपूर्ण कथा, सगाई की तारीख आदि याद रखने की विधियां. कैप्सूल 3- बर्तन मांजने के तरीके, आकर्षक झाड़ू-पोंछा कैसे लगाएं, फ्रीज में रखी सब्जियों की सुरक्षा कैसे करें, बाजार जाते समय सब्जियां कैसे लाएं, भरे बाजार कचोरी पकौड़ी कैसे खिलाएं, साड़ी महाभारत से सुरक्षित कैसे निकल जाएं जैसे विषयों में महान बनाया जाएगा. कैप्सूल 4- टीवी रिमोट पर किसका अधिकार हो? आंगन में पड़ा अखबार उठाकर कौन लाएगा? पानी की भरी बोतल फ्रिज में कैसे रखें, आदि राष्ट्रव्यापी समस्याओं पर गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा. कैप्सूल 5- लड़ाई के समय मुंह कैसे लटका कर बैठें? घर में प्रवेश करते समय कैसे मुंह लटकाएं? पत्नी के तानों, बहानों, बातों को कैसे घट-घट पी जाएं आदि महत्वपूर्ण विषयों पर समूह चर्चा की जाएगी.

पत्नियों के लिए विशेष प्रशिक्षण पैकेज- कैप्सूल 1- मॉर्निंग वॉक पर क्यों नहीं गए? ये पेट आगे क्यों निकल रहा है? आज अनुलोम-विलोम किया कि नहीं! रोज 2 घंटे दौड़ लगाया करो जैसे राष्ट्रीय मुद्दों पर रोज ही झगड़ना चाहिए. कैप्सूल 2- भूले बिसरे वादों को याद करने के तरीके. गड़े मुर्दे उखाड़ने की जोरदार विधियां. बात-बात पर रोने-मचलने और पीहर जाने की 1000 धमकियां, पीहर पक्ष को लेकर युद्ध करने की तिकड़में. पत्नियों को बड़े प्राइवेट फाइव स्टार हॉस्पिटल के बजाय मरियल सरकारी हॉस्पिटल में दिखाने संबंधी युद्ध कौशल पर अनुभवी पत्नियों का प्रेजेंटेशन किया जाएगा. कैप्सूल 3- पति की छाती पर मूंग दलने की 1001 विधियां, पति से झगड़ने के 501 बहाने, बस में बैठे-बैठे लड़ने के उपाय व सड़क पर चलते हुए कैसे लड़ें आदि पर पीपीटी प्रेजेंटेशन किया जाएगा. कैप्सूल 4- ये न्यूज़ बंद करो. कल तक. अब तक. बक-बक जाने क्या कब तक? व्हाट्सएप में ही घुसे रहते हो? इसमें पलंग लगा लिया करो. अब फेसबुक के साथ ही सो जाना.

GHKKPM: सई देखेगी पाखी का प्रेग्नेंसी रिपोर्ट, आएगा ये ट्विस्ट

टीवी सीरियल ‘गुम है किसी के प्यार में’ इन दिनों  सेरोगेसी ट्रैक दिखाया जा रहा है. शो में पाखी विराट और सई के बच्चे की सेरोगेसी मां बनने वाली है. इसी बीच शो में सबके सामने पाखी का खुलासा होने वाला है.

शो में आप देखेंगे कि  निनाद विराट को अपने साथ बाहर लेकर जाएगा. निनाद विराट से बात करने की कोशिश करेगा. विराट निनाद को बताएगा कि मिसकैरेज के बाद से उसके और सई के बीच कुछ ठीक नहीं चल रहा है.

 

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शो में दिखाया जाएगा कि पाखी विराट और सई के रिश्ते के बारे में जानने की कोशिश करेगी. पाखी जान जाएगी कि विराट और सई के बीच अनबन चल रही है. घर आकर पाखी अपनी मां पर भड़केगी. पाखी दावा करेगी कि वो अब अपने कदम पीछे नहीं हटाएगी.

 

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शो में आप देखेंगे कि सई विराट को पाने के लिए मास्टर प्लान बनाएगी. जल्द ही सई के सामने पाखी की टेस्ट रिपोर्ट आ जाएंगी. रिपोर्ट देखकर सई समझ जाएगी कि पाखी की प्रेग्नेंसी में बहुत रिस्क है. पाखी का भी मिसकैरेज हो सकता है. शो में अब ये देखना होगा कि सई ये बात जानने के बात पाखी के साथ कैसे बिहेव करती है.

 

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Anupamaa: छोटी अनु के साथ होगा हादसा, क्या बेटी को खो देगा अनुज?

टीवी सीरियल ‘अनुपमा’ में  इन दिनों लगातार ट्विस्ट देखने को मिल रहा है.   टीआरपी की लिस्ट में यह शो टॉप पर बना हुआ है. शो के बिते एपिसोड में दिखाया गया कि अनुपमा और अनुज को छोटी अनु को गोद लेते हैं. और उसे अपने घर लाते है. जिससे बरखा और अंकुश नाराज हो जाते हैं. तो दूसरी तरफ शाह परिवार भी रिएक्ट करता है. शो के अपकमिंग एपिसोड में बड़ा ट्विस्ट आने वाला है. आइए बताते हैं, शो के नए एपिसोड के बारे में…

शो के अपकमिंग एपिसोड में दिखाया जाएगा कि बरखा और अंकुश, अनुज से बिजनेस के बारे में सवाल-जवाब करते हैं. बरखा, अनुज से कुछ प्रोजेक्ट शेयर करने के लिए कहती है और कहती है कि अंकुश अमेरिका में भी सभी चीजें हैंडल करते थे. इस बात पर अनुज रिएक्ट करता है और कहता है कि “जब अमेरिका में सबकुछ इतना अच्छा चल रहा था तो आप लोग यहां आए ही क्यों?” अनुज की यह बात सुनते ही बरखा और अंकुश हैरान हो जाते हैं.

 

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शो के अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि अनुपमा छोटी अनु के साथ बाजार जाती है, लेकिन तभी अनु भागते हुए बाइक के सामने आ जाती है, जिससे अनुपमा बुरी तरह डर जाती है.

 

दूसरी ओर किंजल सोनोग्राफी करवाने के लिए अनुपमा का इंतजार करती है, लेकिन छोटी अनु की वजह से  अनुपमा वहां नहीं पहुंच पाती. ऐसे में वनराज सबके सामने अनुपमा को ताना मारता है और बापूजी से कहता है, आपकी बेटी मां बनते ही सास की जिम्मेदारी भूल गई है.

 

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नौर्डिक डाइट क्या है?

सवाल

मेरी उम्र 34 वर्ष है और मैं हाउसवाइफ हूं. मेरी दिनचर्या घड़ी की सुइयों पर चलती है.  रैगुलर वौक पर जाती हूं. पौष्टिक खाना खाती हूं. किसी भी बीमारी से ग्रस्त नहीं हूं. लेकिन मैं आगे भी ऐसी ही हैल्दी रहूं, इसलिए अपनी डाइट पर विशेष ध्यान देती हूं. आजकल मैं नौर्डिक डाइट के बारे में काफी सुन रही हूं. क्या आप मु?ो इस के बारे में कुछ जानकारी देंगी?

जवाब

नौर्डिक डाइट यानी नौर्डिक देशों में खाया जाने वाला खाना जिन में नौर्वे, डेनमार्क, स्वीडन, फिनलैंड और आइसलैंड शामिल हैं. इस डाइट में स्थानीय रूप से मिलने वाले खानेपीने की चीजों को शामिल किया जाता है.

नौर्डिक डाइट में कम चीनी और कम फैट होता है, लेकिन फाइबर और सीफूड दोगुना होता है. इसे ईकोफ्रैंड डाइट के तौर पर भी जाना जाता है. कोई प्रिजर्वेटिव इस्तेमाल नहीं होता है. यह पूरी तरह से हैल्दी और बहुत आसानी से फौलो करने योग्य होती है. यही वजह है कि भारत में भी नौर्डिक डाइट का क्रेज बढ़ रहा है.

इस डाइट में मूलरूप से राई, जौ और जई जैसे साबुत अनाज शामिल होते हैं. इस के अलावा बेरी और दूसरे फलसब्जियों में विशेष रूप से गोभी और जड़ वाली सब्जियां जैसे आलू और गाजर, फैटी मछली जैसे सैमन, सार्डाइन, हिलसा मछली और फलियों में सेम व मटर भी शामिल होते हैं.

नौर्डिक डाइट की खास बात यह है कि इस में हाइड्रेशन को अहमियत दी जाती है. यह डाइट कैनोला और रेपसीड तेल (सफेद सरसों) के उपयोग को बढ़ावा देती है.

नौर्डिक डाइट क्रोनिक बीमारियों के खतरे कम करती है. न्यूट्रिशनिस्ट इस में शामिल बहुत सारे फायदेमंद तत्त्वों को इस की वजह मानते हैं.

स्वास्थ्य के लिहाज से बात करें तो नौर्डिक डाइट में उच्च गुणवत्ता वाले कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें शामिल होती हैं, जैसे अनाज, नट्स, बारली, होलग्रेन ब्रैड, जौ और राई. होल ग्रेन से बने फूड में फाइबर, विटामिन, मिनरल और एंटी औक्सिडैंट होते हैं जो दिल को किसी भी तरह की बीमारी से बचाते हैं.

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सब्जेक्ट में लिखें- सरिता व्यक्तिगत समस्याएं/ personal problem 

आधारशिला- भाग 3: किस के साथ सफलता बांटनी चाहती थी श्वेता

‘जी, मैं तो सिर्फ चाय बना सकती हूं.’

‘जी हां, मैं तो भूल ही गया था, आप तो छोटी सी बच्ची हैं, आप को भला क्या बनाना आता होगा.’

श्वेता को हंसते देख उसे गुस्सा आ रहा था.

मैं रसोई में जा कर नमकीन, मठरी और गुलाबजामुन ले आई.

‘अरे, आप तो बहुत कुछ ले आईं,’ पुनीत शिष्टता से बोले.

‘कहां बहुत कुछ है सर, आप यह लीजिए. मैं आप के लिए पकौडि़यां तल कर लाती हूं.’

‘ नहीं भई, इतना काफी है,’ कहते हुए पुनीत अपने बारे में बताने लगे कि वे एक गरीब परिवार से हैं. पिता रिटायर्ड हैं, 2 छोटी बहनें और 1 भाई अभी पढ़ रहे हैं, जिन की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर है.

हमारी योजना के मुताबिक ही वे अपने परिवार के हालात के बारे में जानबूझ कर बता रहे थे. यह वास्तविकता भी थी और कुछ बढ़ाचढ़ा कर भी बताई जा रही थी, ताकि इस कठोर धरातल की ओर बढ़ते हुए श्वेता के नाजुक पांव अपनेआप कांप उठें.

इस घटना के 2-3 दिनों बाद मैं पुनीत से मिलने स्कूल गई. इस बार हम ने स्कूल के बाहर एक स्थान और समय निश्चित कर लिया था. वे आए और मेरे हाथ में एक कागज का टुकड़ा पकड़ा कर चले गए. डर था कि कहीं श्वेता हमें न देख ले. पत्र कुछ इस प्रकार था :

आदरणीय सर,

आप मेरे पत्रों के उत्तर क्यों नहीं देते? क्या मैं आप को सुंदर नहीं लगती या अपनी गरीबी की वजह से ही आप आगे बढ़ने में डर रहे हैं? सर, जब से मुझे आप की आर्थिक स्थिति का पता चला है, आप की कर्तव्यभावना देख कर मेरे मन में आप के प्रति सम्मान और अधिक बढ़ गया है. कृपया मुझे अपना लें. मैं आप का पूरापूरा साथ दूंगी. नमक के साथ सूखी रोटी खा कर भी दिन गुजार लूंगी. आप का परिवार मेरा परिवार है. हम मिलजुल कर यह जिम्मेदारी उठाएंगे.

आप की,

श्वेता.

पत्र पढ़ कर मैं ने सिर पीट लिया कि सारी योजना बेकार चली गई. नमक के साथ रोटी वाली बात पढ़ कर तो बेहद हंसी आई. खाने में पचासों नुक्स निकालने वाली श्वेता को मैं कल्पना में भी सूखी रोटी खाते हुए नहीं देख सकती थी. गरीबी उस के लिए सिर्फ फिल्मी अनुभव के समान थी. गरीबी का फिल्मीरूप जितना लुभावना होता है, असलियत उतनी ही जानलेवा. काश, श्वेता यह सब जान पाती.

2-3 दिन श्वेता अनमनी सी रही, फिर कुछ सहज हो गई. 10-15 दिनों से पुनीत का भी कोई फोन नहीं आया था. हम ने तय कर लिया था कि श्वेता यदि उन्हें कोई पत्र लिखती है तो वे पहले मुझे फोन से खबर देंगे. मुझे लगने लगा कि पुनीत की बेरुखी या गरीबी की वजह से श्वेता अपनेआप ही संभल गई है.

उस रात मैं कई दिनों बाद निश्चिंत हो कर सोई. सुबह उठी तो सब से पहले श्वेता के कमरे की ओर गई. श्वेता गहरी नींद में थी, लेकिन उस के गोरे गालों पर आंसुओं के निशान थे. लगता था, जैसे वह देररात तक रोती रही थी. मेज पर कैमेस्ट्री की कौपी रखी थी. मैं ने खोल कर देखा तो उस में से एक पत्र गिरा. सलीमअनारकली, हीररांझा आदि के उदाहरण सहित उस में अनेक फिल्मी बातें लिखी हुई थीं.

लेकिन उस पत्र की अंतिम पंक्ति मुझे धराशायी कर देने के लिए काफी थी. ‘सर, यदि आप ने मेरा प्यार स्वीकार न किया तो मैं आत्महत्या कर लूंगी.’

मैं भाग कर श्वेता के निकट पहुंची. उस की लयबद्ध सांसों ने मुझे आश्वस्त किया. फिर मैं ने उस की अलमारी की एकएक चीज की छानबीन की कि कहीं कोई जहर की शीशी तो उस ने छिपा कर नहीं रखी है, लेकिन ऐसी कोई चीज वहां नहीं मिली. मेरा धड़धड़ धड़कता हुआ कलेजा कुछ शांत हुआ. लेकिन चिंता अब भी थी.

मेरी नजरों के सामने अखबारी खबरें घूम गईं. एकतरफा प्रेम के कारण या प्रेम सफल न होने के कारण आत्महत्या की कितनी ही खबरें मैं ने तटस्थ मन से पढ़ी, सुनी थीं. लेकिन अब जब अपने ऊपर बीत रही थी, तभी उन खबरों का मर्मभेदी दुख अनुभव कर पा रही थी.

मुझे बरसों पहले की वह घटना याद आई जब कमरे में घुस आई एक नन्ही चिडि़या को उड़ाने के प्रयत्न में मैं पंखा बंद करना भूल गई थी. चिडि़या पंखे से टकरा कर मर गईर् थी. उस की क्षतविक्षत देह और कमरे में चारों ओर बिखरे कोमल पंख मुझे अकसर अतीत के गलियारों में खींच ले जाते, और तब मन में एक टीस पैदा होती.

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