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3 डी फिल्मों का जमाना

कुछ साल पहले हौलीवुड ने अपने ‘3 डी’ वर्जन की फिल्मों को भारतीय सिनेमाघरों में रिलीज किया. उस दौरान 3 डी वर्जन में ‘स्पाई किड्स’ शृंखला बड़ी हिट साबित हुई थी. लिहाजा 3 डी फिल्मों के बढ़ते बाजार के मद्देनजर हिंदी में भी 3 डी फिल्मों का चलन शुरू हो गया. हालिया रिलीज ‘शोले 3 डी’ की पहले हफ्ते में 15 करोड़ रुपए से ज्यादा की हुई कमाई से उत्साहित कई निर्माताओं ने अपनी पुरानी फिल्मों का 3 डी वर्जन रिलीज करने की ठानी है. इस क्रम में ‘मुगल ए आजम’, ‘लावारिस’, ‘मुकद्दर का सिकंदर’ जैसी कई फिल्मों को 3 डी में कन्वर्ट किए जाने की चर्चा है.

अब देखना है कि 3 डी का तकनीकी तड़का पुरानी फिल्मों को किस अंदाज में पेश करता है.

 

 

बड़बोले कपिल का मजाक

कौमेडी की दुनिया में बड़ा नाम बन चुके कपिल शर्मा आजकल कुछ ज्यादा ही बड़बोले होते जा रहे हैं. हंसीमजाक में किसी की भी बेइज्जती करने से गुरेज न करने वाले कपिल इस बार महिला आयोग के शिकंजे में फंस गए हैं.

दरअसल, हाल ही में अपने शो ‘कौमेडी नाइट्स विद कपिल’ के एक एपिसोड में कपिल ने गर्भवती महिलाओं पर एक अभद्र टिप्पणी कर दी जिस को ले कर अब वे कानूनी झमेले में फंसते जा रहे हैं. महाराष्ट्र महिला आयोग की ओर से उन्हें कारण बताओ नोटिस भी भेजा गया.

गौरतलब है कि उक्त एपिसोड में हेमा मालिनी बतौर गेस्ट मौजूद थीं. अब अगर किसी महिला के सामने ही कपिल महिलाओं पर अभद्र बयानबाजी करेेंगे तो फंसेंगे ही. कपिलजी, जरा संभल जाइए. स्टारडम का नशा बड़ा खराब होता है.

 

बिपाशा की शादी

बौलीवुड में इन दिनों लगता है सैलिब्रिटीज पर शादी का बुखार चढ़ा है. तभी तो पहले 2 बड़ी अभिनेत्रियों फिर कुछ टीवी कलाकारों के बाद अभिनेता जौन अब्राहम ने भी गुपचुप तरीके से प्रिया रुंचल से विदेश में शादी रचा ली. अब सुनने में आ रहा है कि जौन की ऐक्स गर्लफ्रैंड बिपाशा बसु भी शादी करने की फिराक में हैं.

इसे संयोग कहें या बिपाशा का जौन को जवाब कि जौन की शादी की खबरों के सप्ताह में ही बिपाशा ने भी अपनी शादी की खबर जगजाहिर कर दी. बिपाशा काफी अरसे से हरमन बावेजा के साथ डेटिंग कर रही थीं. हरमन की फिल्म ‘ढिश्कियाऊ’ के रिलीज होने के बाद वे शादी कर लेंगी. फिल्म के अगस्त में रिलीज होने की संभावना है. यानी बिपाशा भी अगस्त तक मिसेज बावेजा हो जाएंगी.

 

यारियां

यारियां’ कालेज लाइफ की मस्ती पर बनी फिल्म है, जिस में ढेर सारे चुंबन दृश्य हैं, शराब के पैग पर पैग चढ़ाती तंग टौप्स और हौट पैंट पहने लड़कियां हैं, अंग प्रदर्शन है और साथ में है बेहद भद्दी कौमेडी. फिल्म में एक ऐसा कालेज दिखाया गया है जहां सारे के सारे छात्रछात्राएं इश्क के रंग में रंगे हैं, साथ ही अध्यापक और अध्यापिकाएं भी खुलेआम एकदूसरे को लिपटतेचूमते हैं.

कौमेडी का आलम तो यह है कि स्टेज पर दिखाए जा रहे देशभक्ति के प्रोग्राम में एक छात्र जबरन मां का रोल कर रही एक छात्रा के सीने लगना चाहता है और उस से कहता है, मां, लोरी सुना दो. वह छात्रा तुरंत खड़ी हो कर ‘माई नेम इज शीला… शीला की जवानी’ पर नाचने लगती है. इस तरह की फिल्में युवाओं के कैरेक्टर को लूज ही करती हैं.

फिल्म की कहानी कालेज में छात्रों की मस्ती से शुरू होती है. कालेज का पिं्रसिपल लक्ष्य (हिमांशु कोहली) स्वयं सहित अपने 4 साथियों को एक लक्ष्य के लिए चुनता है. उन सब को एक विदेशी व्यापारी से कालेज को बचाना होता है क्योंकि वह विदेशी व्यापारी कालेज की जगह पर होटल व बार बनाना चाहता है. लक्ष्य और उस के साथी बौलीवुडिया तरीके से उस विदेशी के छक्के छुड़ा देते हैं और अपने कालेज को बचा लेते हैं.

फिल्म में पढ़ाईलिखाई का मजाक उड़ाया गया है. प्यार मोहब्बत, चीटिंग को प्रमुखता से दिखाया गया है. छात्र कालेज में पढ़ाई के अलावा सबकुछ करते नजर आते हैं.

फिल्म में 2 मांएं हैं – दीप्ती नवल और स्मिता जयकर. यही कुछ गंभीर लगी हैं. बाकी सभी कलाकार नए हैं. सभी ने उछलकूद ही की है. फिल्म में आस्टे्रलिया में भारतीयों पर होने वाले हमलों को भी दिखाया गया है. फिल्म में पैसा पानी की तरह बहाया गया है. गीतसंगीत कुछ अच्छा है. एक गीत ‘आज तू है पानी पानी…’ अच्छा बन पड़ा है. आस्ट्रेलिया की लोकेशनों पर खूबसूरत फोटोग्राफी की गई है.

मि. जो बी कारवाल्हो

इस फिल्म का टाइटल भले ही ‘जो भी करवा (कारवाल्हो) लो’ हो लेकिन किसी भी कलाकार ने कुछ कर के नहीं दिखाया है. अरशद वारसी की पिछली फिल्मों पर नजर डालें तो उस ने अलगअलग तरह की भूमिकाएं कर बौलीवुड में एक मुकाम बनाया है. लेकिन इस कारवाल्हो ने इतना ज्यादा बोर किया कि हौल में बैठना तक मुश्किल हो गया.

फिल्म की कहानी एकदम फूहड़ है. रहीसही कसर निर्देशक ने पूरी कर दी है. लगता है शूटिंग के दौरान निर्देशक हाथ बांध कर बैठा रहा और उस ने कलाकारों को पूरी छूट दे दी थी कि भैया, जो तुम्हें आता है, कर लो बस. फिल्म पूरी कर लो.

कहानी एक जासूस जो बी कारवाल्हो (अरशद वारसी) की है. एक अंतर्राष्ट्रीय डौन एक किलर कार्लोस (जावेद जाफरी) को अपनी पूर्व प्रेमिका की शादी तोड़ने की सुपारी देता है. दूसरी तरफ एक बिजनैसमैन खुराना (शक्ति कपूर) जो बी कारवाल्हो को अपने प्रेमी के साथ भागी अपनी बेटी की शादी रुकवाने का कौंटै्रक्ट देता है. उधर एक लेडी पुलिस अफसर शांतिप्रिया (सोहा अली खान) कार्लोस को पकड़ने निकलती है. वह जो बी कारवाल्हो की पूर्व प्रेमिका है. वह कारवाल्हो को ही कार्लोस समझ बैठती है. घटनाएं इस तरह घटती हैं कि सभी किरदार गोआ में इकट्ठे होते हैं. कौमेडी स्टाइल में घमासान होता है और सभी भाग जाते हैं. कारवाल्हो को उस की प्रेमिका फिर से मिल जाती है.

फिल्म की इस कहानी में सभी कलाकारों ने ओवरऐक्ंिटग की है. जावेद जाफरी ने जोकरनुमा हरकतें की हैं तो सोहा अली खान ने बिकनी पहन कर अपनी हंसी ही उड़वाई है. शक्ति कपूर चिल्लाता रहा है. कौमेडी के नाम पर कुछ भी नहीं है. गीतसंगीत, निर्देशन, संपादन सभी कुछ बेकार है. छायांकन कुछ अच्छा है. जो बी कारवाल्हो से कह दीजिए, भैया हमें कुछ नहीं करवाना. आप जाइए, हमारा वक्त खराब मत करिए.

 

डेढ़ इश्किया

जिन दर्शकों ने माधुरी दीक्षित को ‘धकधक करने लगा… जिया…’ और ‘एक दो तीन… चार पांच छ: सात…’ गानों पर थिरकते देखा होगा या ‘हम आप के हैं कौन’ फिल्म में ‘दीदी तेरा देवर दीवाना…’ गाने पर मचलते देखा होगा, उन्हें इस फिल्म में एक नई माधुरी दिखाई देगी, जो अब प्रौढ़ावस्था की ओर बढ़ चली है. आज की युवा पीढ़ी को ‘हमरी अटरिया पे आ जा रे सांवरिया…’ जैसे शमशाद बेगम के गाए गाने पर क्लासिकल डांस करती माधुरी दीक्षित कुछ अजीब ही लगेगी. हां, प्रौढ़ हो चली पीढ़ी के दर्शक जिन्हें क्लासिकल ऐक्टिंग ज्यादा पसंद आती है, उर्दू जबान अच्छी तरह समझ लेते हैं और जिन्हें उर्दू की शेरोशायरी में मजा आता है उन्हें इस फिल्म में माधुरी का अंदाज अच्छा लगेगा.

निर्देशक अभिषेक चौबे की ‘डेढ़ इश्किया’ उस की पिछली फिल्म ‘इश्किया’ की सीक्वल है. उस की पिछली फिल्म में चालू मसाले थे, विद्या बालन के गरमागरम सैक्स सीन थे. सब से बड़ी बात फिल्म आम दर्शकों के मतलब की थी जबकि ‘डेढ़ इश्किया’ एक खास वर्ग के लिए है, उन के लिए है जिन्हें क्लासिकल मूवी देखना पसंद है. हालांकि निर्देशक ने इस फिल्म में भी अरशद वारसी और हुमा कुरैशी पर लंबे लिप टू लिप किस सीन फिल्माए हैं, फिर भी उस ने फिल्म में नवाबी माहौल बनाए रखते हुए जबरदस्ती चालू मसाले ठूंसने की कोशिश नहीं की है. उस ने माधुरी दीक्षित को 20-25 साल की युवती दिखाने की कोशिश नहीं की है, बल्कि 30-40 साल की विधवा बेगम के किरदार में दिखाया है. बड़ी उम्र की दिखाते हुए भी उस ने माधुरी को गे्रसफुल दिखाया है. उस ने माधुरी से क्लासिकल डांस भी कराए हैं.

‘डेढ़ इश्किया’ में निर्देशक ने नवाबी कल्चर को दिखाया है. बहुत से दर्शकों को किरदारों द्वारा उर्दू में बोले गए संवाद भले ही अटपटे लगे जैसे ‘इंतजारी टिकट’ यानी वेटिंग लिस्ट, फिर भी सुनने में ये संवाद अच्छे लगते हैं.

पिछली ‘इश्किया’ में नसीरुद्दीन शाह और अरशद वारसी के किरदार खालू और बब्बन छोटेमोटे चोर थे, इस फिल्म में भी ये दोनों किरदार छोटेमोटे चोर हैं. दोनों का लुक वैसा ही है जैसा पिछली फिल्म में था. इस के बावजूद नसीर का किरदार अलग अंदाज लिए है. वह नवाब जैसा दिखता है और उस का लिबास मिर्जा गालिब सा है.

कहानी पुराने दौर की है परंतु चलती आज के दौर में है. खालूजान (नसीरुद्दीन शाह) और बब्बन (अरशद वारसी) चोर हैं. इस बार खालूजान एक जौहरी से बेशकीमती हार चुरा कर भाग कर महमूदाबाद पहुंचता है. वहां की विधवा बेगम पारा (माधुरी दीक्षित) ने अपने स्वयंवर के लिए एक मुशायरा आयोजित किया है. खालूजान एक नकली नवाब बन कर वहां पहुंचता है. वह बेगम से प्यार करने लगता है. उस का मकसद बेगम की तिजोरी से दौलत हथियाना है.

उधर, बब्बन खालूजान को ढूंढ़ता हुआ महमूदाबाद पहुंचता है. उसे वहां बेगम की खास सेविका मुनिया (हुमा कुरैशी) से इश्क हो जाता है. बेगम के स्वयंवर में कई नवाब पहुंचते हैं जिन में जौन मोहम्मद (विजयराज) भी है. उस का लक्ष्य बेगम का शौहर बन कर नवाबी पदवी पाना है. स्वयंवर में बेगम जान मोहम्मद को विजयी घोषित करती है. तभी बब्बन बेगम का किडनैप कर लेता है. खालूजान भी पीछेपीछे पहुंच जाता है. तभी रहस्य खुलता है कि बेगम ने ही खुद को किडनैप कराया था ताकि वह जौन मोहम्मद से मोटी रकम ऐंठ सके. खूब घमासान होता है. खालूजान को बेगम नहीं मिल पाती. इसलिए वह बब्बन के साथ फिर से चोरी की दुनिया में लौट जाता है.

पूरी फिल्म नसीरुद्दीन शाह और माधुरी दीक्षित पर टिकी है, परंतु जो बढि़या ऐक्टिंग विजयराज ने की है, उस का मुकाबला नहीं. फिल्म की पटकथा अच्छी है. मध्यांतर से पहले का भाग कुछ अच्छा है. फिल्म का आखिरी हिस्सा बोझिल बन गया है.

अरशद वारसी और नसीरुद्दीन शाह के किरदारों में अच्छा तालमेल है. मनोज पाहवा भी प्रभावशाली है. फिल्म में बस एक ही कमी है और वह है इस की भाषा. संवादों में उर्दू और फारसी के शब्द काफी हैं, जो आज की युवा पीढ़ी को शायद समझ नहीं आएंगे.

मैं बिकनी नहीं पहन सकती कविता कौशिक

 
एक निजी टीवी चैनल पर प्रसारित ‘एफआईआर’ धारावाहिक में चंद्रमुखी चौटाला का दबंग किरदार निभाने वाली अभिनेत्री कविता कौशिक ने अपने कैरियर की शुरुआत ‘कुटुंब’ धारावाहिक से की थी. मुंबई आने से पहले कविता कालेज के दिनों में दिल्ली में मौडलिंग, एंकरिंग और इवैंट होस्ट किया करती थीं. वर्ष 2001 में वे ‘कुटुंब’ धारावाहिक के औडिशन के लिए मुंबई आईं. इस के बाद ‘कहानी घरघर की’, ‘कुमकुम’, ‘सीआईडी’ आदि कई धारावाहिकों में काम किया.
स्वभाव से दृढ़, धैर्यवान और हंसमुख कविता ने कई धारावाहिकों में काम किया पर ‘एफआईआर’ उन के जीवन का टर्निंग पौइंट था. लगातार 8 साल एक ही किरदार की भूमिका करते हुए उन्होंने ‘एफआईआर’ छोड़ ‘तोता वैड्स मैना’ नामक धारावाहिक में सीधीसादी लड़की मैना की भूमिका निभाई पर वह ज्यादा नहीं चला. वे फिर पुराने धारावाहिक ‘एफआईआर’ में वापस लौट चुकी हैं. पेश हैं उन से हुई बातचीत के अंश.
 
वापसी की वजह क्या है?
मैं ने धारावाहिक ‘तोता वैड्स मैना’ के दौरान ‘एफआईआर’ सीरियल छोड़ा था, क्योंकि दोनों एकसाथ करना मुश्किल हो रहा था. जब वह बंद हो गया तो चैनल ने मु?ो वापस बुलाया क्योंकि लोग मेरे अभिनय को पसंद करते हैं. इस बार चंद्रमुखी के कुछ और नए रूप दिखाए जाएंगे.
 
‘एफआईआर’ की लोकप्रियता की वजह इस में आप की बोली का हरियाणवी टच है. आप ने हरियाणवी कहां से सीखी?
हरियाणवी भाषा मैं ने अपने पिता से सीखी. दिल्ली पुलिस में काम करने वाले मेरे पिता को कई भाषाओं की अच्छी जानकारी थी. उन की संगत में मैं ने यह भाषा सीखी.
 
आप ने फिल्मों में काम करने के बारे में कभी सोचा?
मैं धारावाहिक ‘एफआईआर’ को फिल्म से बड़ा मानती हूं. इसे देखने वाले करोड़ों दर्शक हैं. इस से मु?ो नाम, शोहरत, पैसा सबकुछ मिला है. आज मेरा पूरा परिवार मुंबई शिफ्ट हो चुका है. मैं ने 2 फ्लैट खरीदे हैं. मु?ो और अधिक इच्छा नहीं है. और फिर मैं फिल्मों में ‘बिकनी’ नहीं पहन सकती.
 
आप का नाम कई लोगों के साथ जुड़ा, पर आप ने अभी तक शादी नहीं की?
नाम तो जुड़ते रहते हैं पर अभी तक शादी लायक कोई नहीं मिला. मेरी जिंदगी में हर काम अचानक होते हैं. शादी कर के कभी किसी लड़की का भला हुआ है क्या? पुरुष लड़कियों को ऐश की वस्तु सम?ाते हैं. मैं अपना जीवन अपने तरीके से जीना पसंद करती हूं.
 
आप के सपनों का राजकुमार कैसा होना चाहिए?
मैं चाहती हूं कि वह मेहनती व अपने काम के प्रति फोकस्ड हो.
 
रील लाइफ और रियल लाइफ में आप सामंजस्य कैसे बनाती हैं?
‘एफआईआर’ में मेरी जो चंद्रमुखी की भूमिका है उसे करने में बहुत एनर्जी लगती है. रोज 12 घंटे उसी भूमिका में जीना मुश्किल होता है. उस की बौडी लैंग्वेज अलग है. रियल लाइफ में मेरी इंगलिश स्ट्रौंग है, जबकि चंद्रमुखी टूटीफूटी अंगरेजी बोलती है. लेकिन इतने साल तक काम करने के बाद अब उतनी परेशानी नहीं होती.
 
आप कितनी फैशनेबल हैं?
मैं अवसर के आधार पर फैशन करती हूं. मैं अधिक फैशनेबल नहीं हूं पर जितना जरूरी है उतना अवश्य करती हूं.

खेल खिलाड़ी

भारतरत्न के हकदार 
हौकी के पुरोधा कहे जाने वाले मेजर ध्यानचंद को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारतरत्न’ दिलाने के लिए एक तरफ जहां भारतीय टीम के खिलाडि़यों ने दिल्ली की सड़कों पर मार्च किया, वहीं दूसरी तरफ एक पांच सितारा होटल में वर्तमान हौकी के पदाधिकारी और हौकी टीम के कप्तान सरदार सिंह समेत कुछ खिलाड़ी वर्ल्ड हौकी लीग की ट्रौफी के अनावरण समारोह में व्यस्त थे.
वर्षों से ध्यानचंद को भारतरत्न देने की मांग हो रही है पर भारत सरकार हर बार इसे टाल देती है. इस बार तो लग रहा था कि ध्यानचंद को यह रत्न मिल जाएगा लेकिन क्रिकेट के बेताज बादशाह सचिन तेंदुलकर को भारत रत्न रिटायरमैंट के तोहफे के रूप में दे दिया गया.
सब की नाराजगी इस बात को ले कर थी कि सचिन को पुरस्कार देने के लिए अभी जल्दबाजी करने की क्या जरूरत थी जबकि उस खिलाड़ी को नजरअंदाज कर दिया गया, जिस ने हमारे राष्ट्रीय खेल हौकी को सुनहरे दौर से रूबरू करवाया था.
सचिन को भारतरत्न दिए जाने पर भारतीय टीम के पूर्व कप्तान धनराज पिल्लै ने भी खुशी जाहिर की थी पर उन्होंने यह भी कहा था कि सरकार ने किसी खिलाड़ी को भारतरत्न देने का फैसला 20 साल पहले लिया होता तो हौकी को बुलंदियों तक पहुंचाने वाले मेजर ध्यानचंद को भी यह रत्न मिल जाता जिस के वे हकदार थे. धनराज पिल्लै के अलावा महान ट्रैक व फील्ड धावक मिल्खा सिंह ने भी कहा था कि ध्यानचंद किसी अन्य से पहले भारतरत्न के हकदार थे. 
कई और खेलों से जुड़े खिलाड़ी भी ध्यानचंद को भारतरत्न दिए जाने के पक्ष में हैं. वहीं अगर बात हौकी के ही पूर्व खिलाडि़यों की करें तो उन के मुताबिक ध्यानचंद को इस सम्मान से वंचित रखना उस महान खिलाड़ी का अपमान है जिस ने देश को गुलामी के दौर में खेल के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाई थी. ध्यानचंद  वर्ष 1928 में एम्सटर्डम, वर्ष 1932 में लास एंजिल्स और वर्ष 1936 में बर्लिन ओलिंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली हौकी टीमों का हिस्सा रहे थे.
 
टी-20 के बाद अब 7 पीएल
एक समय था जब टैस्ट क्रिकेट खेलने  के लिए खिलाड़ी बेताब रहते थे. उस के बाद एकदिवसीय मैच आया तो उस ने खिलाडि़यों और खेलप्रेमियों को रोमांचित कर दिया लेकिन तब भी टैस्ट क्रिकेट
का क्रेज कम नहीं हुआ. लेकिन टी-20 क्रिकेट ने जब पूरी दुनिया में धूम मचाई तो पूरा क्रिकेट का फौर्मेट ही बदल गया. टैस्ट क्रिकेट के भविष्य को ले कर बहस छिड़ गई. लेकिन लगता है अब टैस्ट क्रिकेट को बचाने की गुहार के दिन लद गए क्योंकि अब टी-20 के बाद ‘7 पीएल’ की शुरुआत होने वाली है. ‘7 पीएल’ में 7-7 खिलाडि़यों की टीम होगी. दुबई में धमाकेदार आयोजन से इस की शुरुआत होगी जिस में यूनाइटेड अरब अमीरात की कुल 7 टीमें भी हिस्सा लेंगी.
भले ही अभी इस लीग के लिए आईसीसी ने इसे विधिवत रूप से मान्यता नहीं दी है पर माना जा रहा है कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई और आईसीसी का पूरा समर्थन इस लीग को मिला हुआ है. कहा यह जा रहा है कि इस लीग में भारत, पाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका, इंगलैंड, आस्ट्रेलिया और श्रीलंका जैसे देशों के खिलाड़ी खेलेंगे. जिस तरह कारोबारियों के लिए आईपीएल दुधारू गाय साबित हुआ, ठीक उसी तरह इस लीग में भी खूब पैसा बरसेगा और खिलाडि़यों की खरीदफरोख्त होगी. अब तो खेल को खेल की तरह देखना भी बेमानी होगा. वैसे भी आईपीएल आने के बाद खेल रहा कहां, वह तो पैसे के लिए खेला जाने लगा. बड़ेबड़े नेता, अभिनेता, कारोबारी खिलाडि़यों को खरीद कर अपने हिसाब से उन्हें खिलाने लगे और खिलाडि़यों को पैसा कमाने की मशीन समझने लगे. खिलाड़ी भी खुशीखुशी बिकने लगे और खेल को पैसा कमाने का माध्यम समझने लगे. बहरहाल, खेलप्रेमी अब इसे खेल भावना से न देखें क्योंकि 7 देश, 7 टीम, 7 ओवर और 7 खिलाडि़यों से आप क्या उम्मीद करेंगे. मजा तो जरूर आएगा पर खेल का नहीं.
 
बोल्ट के ट्रैक पर अमिय
पिछले वर्ष झारखंड की राजधानी रांची में आयोजित नैशनल ओपन ऐथलैटिक्स चैंपियनशिप में 200 मीटर की रेस में ओडिशा के अमिय कुमार ने गोल्ड मैडल जीता था. अब अमिय का सपना साकार होने जा रहा है क्योंकि उन्हें 4 महीने की प्रैक्टिस के लिए जमैका की राजधानी किंग्सटन जाने का मौका मिला है.
अमिय रेसर्स ट्रैक क्लब में प्रैक्टिस करेंगे. गौरतलब है कि सुपर स्टार धावक उसैन बोल्ट यहीं प्रैक्टिस करते हैं. कई ऐथलीटों को ट्रेंड करने वाले ग्लेन मिल्स ने जब अमिय को बुलावा भेजा तो उन के पास सब से बड़ी समस्या थी फंड की. किंग्सटन जाने और ट्रेनिंग लेने के लिए भारीभरकम रकम की जरूरत पड़ती है, इसलिए अमिय के लिए यह मुमकिन नहीं था पर ओडिशा सरकार और  टाटा स्टील्स ने अमिय के सपने को साकार करने का बीड़ा उठाया है.
फिलहाल अमिय का उत्साहित होना लाजिमी है और उन का इरादा एशिया गेम और कौमनवैल्थ गेम में गोल्ड मैडल जीतने का है. दरअसल, सरकार और प्रबंधन यदि खेल और खिलाडि़यों को ट्रेंड करने के लिए विदेशों जैसी सुविधा अपने ही देश में मुहैया कराएं तो शायद ऐसे सैकड़ों अमिय जैसे धावक देश का नाम रोशन करने में अहम भूमिका अदा कर सकते हैं.

पाठकों की समस्याएं

मैं 35 वर्षीय विवाहित पुरुष हूं. मैं पत्नी की एक आदत से बड़ा परेशान हूं. वह रात को उठ कर बारबार गैस की नौब चैक करती रहती है कि गैस ठीक से बंद है या नहीं. ऐसा वह अनचाही दुर्घटना के डर से करती है. उस की इस आदत से उस की नींद पूरी नहीं हो पाती और वह परेशान रहती है. मुझे समझ नहीं आता मैं उस की इस परेशानी और डर को कैसे दूर करूं?
आप की पत्नी की समस्या ओसीडी यानी औब्सैसिव कंपलसिव डिसऔर्डर की है. यह एक मानसिक समस्या है जो शंका व डर के कारण होती है. इस समस्या से ग्रस्त व्यक्ति में बारबार हाथ धोने, दरवाजा बंद है या नहीं जैसे अन्य कई लक्षण होते हैं. जब यह आदत किसी की दैनिक जिंदगी को प्रभावित करने लगे तो समझ जाइए कि आप को इलाज की जरूरत है. अपनी पत्नी की इस समस्या के समाधान के लिए आप किसी मनोचिकित्सक से मिलें और इस दौरान पत्नी से किसी तरह की नकारात्मक बात न करें और न ही उस की इस आदत की आलोचना करें व मजाक बनाएं.
मैं 40 वर्षीय विवाहित महिला हूं. मेरी 5 और 11 वर्ष की 2 बेटियां हैं. कुछ दिनों से मेरी बड़ी बेटी अपनी छोटी बहन से बहुत लड़नेझगड़ने लगी है. लड़ते वक्त वह कहती है कि मम्मीपापा तुझ से ज्यादा प्यार करते हैं, तू ही मम्मीपापा की लाडली है. ऐसा कह कर वह रोने लगती है. मुझे समझ नहीं आता वह ऐसा क्यों करती है. मैं चाहती हूं दोनों बेटियां आपस में प्यार से रहें. पता नहीं उस के मन में यह कैसे घर कर गया है कि हम अपनी छोटी बेटी से ज्यादा प्यार करते हैं. मैं उस की इस सोच को कैसे दूर करूं?
आप की समस्या ज्यादातर परिवारों में देखी जाती है. इसे ‘सिबलिंग राइवैलरी’ कहा जाता है जहां एक बच्चे को हमेशा लगता है कि मम्मीपापा उसे ज्यादा प्यार करते हैं, खासकर बड़े बच्चे को, क्योंकि बड़े को हमेशा जिम्मेदार होने के लिए कहा जाता है, अपनी सभी चीजें छोटे भाईबहनों से बांटने के लिए कहा जाता है.
आप की बड़ी बेटी को 6 साल तक आप का इकलौता प्यारदुलार मिला है. ऐसे में आप का बंटता प्यार उस के मन में छोटी बहन के प्रति दुर्भावना को जन्म दे रहा है. और वह उस से लड़नेझगड़ने लगी है. आप अपनी बड़ी बेटी को प्यार से अपने पास बिठाएं और समझाएं. साथ ही, अच्छा या बुरा काम करने पर दोनों बेटियों के लिए एकजैसे ही नियम बनाएं ताकि उस के मन से यह भावना मिट सके कि आप छोटी बेटी को ज्यादा प्यार करती हैं.
मैं 28 वर्षीय युवती हूं. अपने ही कालेज के एक लड़के से 3 साल की दोस्ती और प्यार के बाद मैं ने उस से शादी कर ली. लेकिन जब से हमारी शादी हुई है, मेरे पति का व्यवहार बदल गया है. वे मुझे पहले जैसा प्यार नहीं करते, पहले की तरह नाराज हो जाने पर मनाते नहीं. मुझे विश्वास नहीं होता कि क्या यह वही मेरा प्यार है. मुझे लगता है जैसे मेरे सारे सपने टूट गए हैं. मैं क्या करूं?
आप शायद अभी भी सपनों की दुनिया में हैं. आप यह भूल रही हैं कि तब आप प्रेमीप्रेमिका थे, आज पतिपत्नी हैं. तब आप कभीकभार मिलते थे, एकदूसरे को खुश रखने की भरपूर कोशिश करते थे. आज आप के पति की जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं. ऐसे में आप का यह अपेक्षा करना कि वे पहले की तरह प्रेमी जैसा व्यवहार करेंगे, गलत है.
आप ही सोचिए, क्या आप का व्यवहार पत्नी जैसा नहीं हो गया है. हालांकि अगर आप चाहें तो, अभी भी अपने पति के दिल में अपनी कोशिशों द्वारा थोड़े से बचे समय में भी प्यार व मनुहार से वही पुराना प्रेमी पा सकती हैं. इस के लिए आप को बस अपने व्यवहार में तबदीली करनी होगी.
मैं एक सामान्य शक्ल की 28 वर्षीय युवती हूं. मेरी हाल ही में सगाई हुई है. मेरे होने वाले पति अत्यंत स्मार्ट हैं. मैं डरती हूं कि कहीं मेरी सामान्य शक्ल की वजह से हमारे वैवाहिक जीवन में कोई समस्या तो नहीं आएगी. वैसे मैं एक प्राइवेट स्कूल में टीचर की नौकरी करती हूं. मेरे आसपास के सभी लोग मुझे बहुत चाहते हैं. मैं अपनी शंका का समाधान कैसे करूं?
आप के मन में ऐसा खयाल आना स्वाभाविक है. कई बार जब एक पार्टनर अधिक स्मार्ट व खूबसूरत होता है तो दूसरे का आत्मविश्वास डगमगा जाता है. लेकिन आप इसे सकारात्मक नजरिए से देखें और स्वयं को ग्रूम करें. अपनी ड्रैसिंग सैंस, अपने हेयरस्टाइल व चालढाल से अपने अंदर आत्मविश्वास लाएं. साथ ही, विवाह के बाद अपने व्यवहार व गुणों से पति का दिल जीतें. वैसे भी आप के होने वाले पार्टनर ने आप के अंदर छिपी काबिलीयत को देख कर ही आप को पसंद किया होगा. इसलिए अपने मन से हर शंका को निकाल दें.
मैं अपने 8 वर्षीय बेटे को ले कर बहुत परेशान हूं. वह जब देखो, टीवी पर कार्टून चैनल्स देखता रहता है. एक ही एपिसोड को कईकई बार देखता है. इस शौक के चक्कर में वह खानापीना और अपना होमवर्क तक करना भूल जाता है. मैं चाहती हूं कि वह पढ़ाई पर ध्यान दे. लेकिन वह कुछ समझता ही नहीं. मैं क्या करूं?
आप को अपने बच्चे के भविष्य के लिए थोड़ा अनुशासित होना पड़ेगा. आप अपने बेटे को कार्टून चैनल देखने दें लेकिन उस का समय निश्चित कर दें. अगर वह पढ़ने में आनाकानी करता है तो टीवी पर कार्टून चैनल पर चाइल्ड लौक लगा दें. जब वह चैनल आएगा ही नहीं तो वह कुछ नहीं कर पाएगा. उसे आउटडोर एक्टिविटीज में शामिल करें, उसे किताबें ला कर दें. जब उस का इन सब में मन लगेगा तो धीरेधीरे टीवी से उस का ध्यान भी हट जाएगा. –
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