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सलमान खान ने सेल्फ प्रोटेक्शन के लिए किया गन लाइसेंस का अप्लाई, पढ़ें खबर

बॉलीवुड के दबंग स्टार  सलमान खान (Salman Khan) को कुछ दिन पहले ही धमकी से भरा लेटर मिला था. इसके बाद एक्टर की सुरक्षा बढ़ा दी गई थी. अब इस मामले को लेकर सलमान खान मुंबई के पुलिस कमिश्नर से मिले हैं. आइए बताते है, क्या है पूरा मामला…

दरअसल 5 जून को सलमान खान और उनके पिता सलीम खान को धमकी भरा लेटर मिला था. धमकी भरा लेटर बांद्रा के बैंडस्टैंड प्रोमेनाड में सलीम खान के गार्ड को मिल था. यहां पर सलीम खान मॉर्निंग वॉक करने के बाद बैठते हैं.

 

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रिपोर्ट्स के मुताबिक, सलमान खान और सलीम खान को जो धमकी भरा लेटर मिला था, उसमें लिखा था कि उनका सिद्धू मूसेवाला जैसा हाल कर दिया जाएगा.

 

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इस मामले को लेकर सलमान खान पुलिस कमिश्नर से मिले हैं और उन्होंने सेल्फ प्रोटेक्शन में गन की लाइसेंस के लिए अप्लाई किया है. सलमान खान ने शुक्रवार को मुंबई के पुलिस कमिश्नर विवेक फणसालकर से साउथ मुंबई में उनके ऑफिस में मुलाकात की.

 

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खबरों के मुताबिक, मुंबई पुलिस ने बताया है कि सलमान खान ने हाल ही में धमकी भरा लेटर मिलने के बाद मुंबई पुलिस कमिश्नर ऑफिस में सेल्फ प्रोटेक्शन के लिए वीपन लाइसेंस के लिए अप्लाई किया है.

 

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बताया जा रहा है कि वहां के एक अधिकारी ने बताया कि सलमान खान शाम करीब चार बजे मुंबई पुलिस मुख्यालय पहुंचे और विवेक फणसालकर से मिले. सलमान खान ने संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून व्यवस्था) विश्वास नांगरे पाटिल से भी मुलाकात की.

Senco Teej Special: सेन्को के साथ बनाएं तीज को और भी खास, लीजिए इस कॉन्टेस्ट में हिस्सा

तीज का त्यौहार हर साल सावन महीने में धूमधाम से मनाया जाता है. ये त्यौहार न सिर्फ महिलाओं के लिए खास है बल्कि पति पत्नी के रिश्ते के लिए भी बेहद अहम है.

इस दिन महिलाएं दुल्हन की तरह सोलह श्रृंगार करती है और अपने मनपसंद जेवर पहनती है. लेकिन क्योंकि ये त्यौहार सबसे खास है और हर कोई इस मौके पर सबसे खूबसूरत लगना चाहता है. इसीलिए सेन्को लाया है तीज के मौके पर लेटेस्ट गोल्ड एंड डायमंड्स सेट का कलेक्शन.

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सेन्को तीज स्पेशल कॉन्टेस्ट…

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मेरी बहू और मेरी पत्नी में 36 का आंकड़ा है, किसे और कैसे समझाऊं बताइए?

सवाल

मेरे एकमात्र बेटे का विवाह साल भर पहले हुआ है. बहू भी अपने मां बाप की इकलौती संतान है. हम ने सोचा था कि वह घर में आ कर रच बस जाएगी. बेटे की शादी को ले कर जितने उत्साहित थे शादी के बाद उतने ही मायूस हो गए हैं.

बहू मायके में कोई काम नहीं करती थी, यह बात उस के घर वालों ने साफसाफ बताई थी. इस बात को मेरी पत्नी ने बड़ी सहजता से लिया था और कहा था कि वह उसे सब सिखा देगी, पर शादी के बाद सास बहू में 36 का आंकड़ा है. बहू बहुत ही बेस्वाद खाना बनाती है, जबकि मेरी पत्नी कुकिंग में काफी माहिर है, इसलिए बहू का बनाया खाना उस के गले नहीं उतरता.

इसीलिए वह चाहती है कि वही खाना बनाए. यह बात बहू को नागवार गुजरती है. बस इसी बात पर दोनों में तनातनी रहती है. बहू बिना खाए दफ्तर निकल जाती है. अब तो बहू साफसाफ कहने लगी है कि उसे अलग फ्लैट ले कर रहना है. बताएं, क्या करूं?

जवाब

आप स्वयं स्वीकारते हैं कि आप की बहू के घर वालों ने आप को पहले ही बता दिया था कि उन की बेटी गृहकार्य में दक्ष नहीं है, बावजूद इस के ससुराल में आ कर वह घर के कामों में दिलचस्पी ले रही है. यही बड़ी बात है. रही उस के खाने में स्वाद की कमी तो स्वाद भी बनाते बनाते आ ही जाएगा. आप की पत्नी को उसे हतोत्साहित नहीं करना चाहिए. बहू के नौकरी पर चले जाने के बाद वह अपनी पसंद की दाल सब्जी बना सकती हैं या बनी सब्जी में ऊपर से नमक या मिर्च मसाला डाल कर ठीक कर सकती है.

आप की पत्नी मैच्योर है इसलिए उसे थोड़ा धैर्य से काम लेना चाहिए. धीरेधीरे बहू भी नए माहौल में रच बस जाएगी. यदि तनातनी बनी रहती है और दोनों में सारे प्रयासों के बावजूद तालमेल नहीं बैठता, तब बेटे को घर के पास ही कोई फ्लैट किराए पर ले दें.

अगर आप भी इस समस्या पर अपने सुझाव देना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में जाकर कमेंट करें और अपनी राय हमारे पाठकों तक पहुंचाएं.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz

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‘मीका सिंह के स्वयंवर’ में अनुपमा ने सुनाया अपना किस्सा, कहा- 15 मिनट में हो गई थी शादी

टीवी शो ‘अनुपमा’ घर-घर में मशहूर है. शो के हर किरदार को फैंस कॉफी पसंद करते हैं. शो की लीड एक्ट्रेस रुपाली गांगुली अपने किरदार की वजह से दर्शकों के दिल पर राज करती हैं. इसी बीच वह मीका सिंह के ‘स्वयंवर’ में हल्दी और मेहंदी सेरेमनी में शामिल हुईं तो उन्होंने अपनी शादी से जुड़े कई किस्से शेयर किए.

अनुपमा ने बताया कि  उनकी शादी रीति-रिवाजों से नहीं हुई थी. मुझे अपने पति का 12 साल इंतजार करना पड़ा था. वह अमेरिका में थे और मैं इंडिया में रहना चाहती थी. वह 4 फरवरी को आए और बोले परसों शादी कर लेते हैं. मैं उस दौरान डेली सोप कर रही थी.

 

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एक्ट्रेस ने आगे बताया कि उन्होंने शादी के लिए दो दिन की छुट्टी ली थी. जब उन्होंने प्रोड्यूसर को बताया कि उन्हें छुट्टी लेनी है तो प्रोड्यूसर ने कहा कि तुम्हारा तो ट्रैक चल रहा है, तुम ऐसे कैसे छुट्टी ले सकत हो? और तुमको छुट्टी की जरूरत है क्यों? फिर एक्ट्रेस ने बताया कि वह शादी करने जा रही है.

 

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दरअसल, ‘स्वयंवर: मीका दी वोटी’ में मीका को अपनी टॉप 3 दुल्हनिया मिल गई हैं. इसमें नीत महल, आकांक्षा पुरी और प्रांतिका दास शामिल है. ऐसे में जब रूपाली गांगुली ने इन तीनों के साथ शादी की रस्में कीं, तो उन्होंने अपनी शादी याद आ गई.

 

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राष्ट्रपति का पद: कोई “पिकनिक” है?

देश की गरीबी और जमीनी हालात देश के हर नागरिक के सामने प्रत्यक्ष है, छुपी हुई नहीं है. ऐसे में 5 साल के लिए चुने जाने वाले राष्ट्रपति का पद – विदेश पर जाने और टूर का पर्याय अथवा पिकनिक में जाने का पर्याय नहीं होना चाहिए. राष्ट्रपति चुनाव के इस समय हमें एक चिंतन करना चाहिए कि जिस संविधानिक पद पर बैठे हुए शख्सियत पर पूरे देश का दारोमदार होता है जिसकी पोजीशन पर देश के करोड़ों करोड़ रुपए खर्च होते हैं, वह सिर्फ पिकनिक मनाने का पर्याय नहीं होना चाहिए और ऐसी शक्तियां निहित होनी चाहिए जिससे देश मजबूत बने आगे बढ़े.

इसलिए भी जरूरी है क्योंकि प्रथम राष्ट्रपति राधाकृष्णन से लेकर के चाहे जेल सिंह हों अथवा मिसाइल मैन कहे जाने वाले अब्दुल कलाम साहब ने इस पद की गरिमा को बढ़ाया है.

हाल ही में राष्ट्रपति पद का लगातार अवमूल्यन होता चला जा रहा है. राष्ट्रपति बनने से पूर्व  मुर्मू राज्यपाल थीं, मंत्री भी बनीं मगर दुर्भाग्य देखिए उनके गांव में बिजली नहीं आ पाई थी. क्या यह विचारणीय नहीं है.

दरअसल, यह व्यवस्था होनी चाहिए कि देश में संविधानिक पदों पर ऐसे निष्पक्ष लोगों की पदस्थापना हो जिन पर कोई उंगली न उठा सके. पद की गरिमा बनी रहे कोई यह न कर सके, यह तो फलां के रबड़ स्टैंप हैं.

राम की मर्यादा का गुणगान करने वाली भारतीय जनता पार्टी और उसके नेताओं को शायद यह पता ही नहीं है या कान में उन्होंने रूई डाली हुई है कि महामहिम राष्ट्रपति के संदर्भ में देश के चौक चौराहे पर जो चर्चा है उसे तो यहां लिखना उचित नहीं होगा मगर अगर आप जागरूक नागरिक हैं तो अपने शहर गांव के चौराहे पर अगर कहीं चर्चा चल रही हो तो उसमें भाग लें और सुने कि लोग क्या कर रहे हैं. हम इस लेख के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति महोदया से यह भी आग्रह करना चाहते हैं कि जिस तरह उन्हें रबड़ स्टैंप कहा जा रहा है वे इस भ्रम को अवश्य तोड़ेंगी . देश दुनिया को यह जला देंगी कि जिस शख्सियत को राष्ट्रपति बनाया गया है वह इस देश की भावना को समझता है और की परंपराओं मूल्यों, महान विरासत को आगे बढ़ाने का माद्दा भी रखता है.

आगे हम आपको ले चलते हैं नवनिर्वाचित राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के गांव अपरबेड़ा में जहां जश्न का माहौल है. घर-घर में रसगुल्ले बांट रहे हैं हर आदमी मुंह मीठा कर रहा है क्योंकि उनके गांव का सम्मान एकाएक बढ़ गया है.

एक ओर पारंपरिक नाच-गाने का आयोजन हो रहा है तो दूसरी ओर पूरे इलाके के लोगों के लिए दावते आम का सरंजाम गया है.

द्रौपदी मुर्मू के छोटे भाई तारणीसेन टुडू ने मीडिया से कहा, दीदी के शपथ लेने के बाद हम सब राष्ट्रपति भवन देखने आएंगे.

ओड़ीशा की राजधानी भुवनेश्वर से करीबन ढाई सौ किलोमीटर दूर मयूरभंज जिला है . इसी जिले में एक गांव है अपरबेड़ा. और नव निर्वाचित महामहिम राष्ट्रपति किसी गांव में जन्मी है गांव के लोग उन्हें बचपन से जानते हैं और घर घर में उनके व्यक्तित्व की चर्चा हो रही है.

पारंप टुडू कहते हैं कि बीते दो दिनों से गांव और आसपास  के लोग लगातार उनके घर पर आकर बधाइयां दे रहे हैं.  उनके गांव में पारंपरिक नृत्य और खुशी के गीत गाए जा रहे हैं . गांव वालों की खुशी प्रतीक है संपूर्ण देश की खुशी का ऐसे में कहा जा सकता है कि राष्ट्रपति बनकर द्रोपदी मुर्मू सच्चे अर्थों में देश की कि तरक्की में अपनी भूमिका निभाएंगी.

देश की राष्ट्रपति से उम्मीदें

द्रौपदी मुर्मू देश की पंद्रहवीं राष्ट्रपति होंगी. द्रोपदी मुर्मू राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की उम्मीदवार थीं और 21 जुलाई 2022 को मतों की गणना के बाद उन्होंने विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को भारी मतों से हराया है.

द्रौपदी मुर्मू को कुल 64.03 फीसद मत मिले हैं, जबकि यशवंत सिन्हा का मत फीसद 35.97 रहा. कुल 53 मत अमान्य रहे, जिनमें सांसदों के 15 मत शामिल हैं. महत्वपूर्ण  बात यह कही जा रही है कि

द्रौपदी मुर्मू देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति हैं. दरअसल, शिगुफे भी नरेंद्र दामोदरदास मोदी के प्रधानमंत्री के बाद उनके एक काम की कार्यशैली का हिस्सा रहे हैं. उनकी टीम जो भी काम करती है उसे पहला अथवा ऐतिहासिक बताने से गुरेज नहीं करती और उसका प्रचार प्रसार देशभर में जोर शोर से किया जाता है. यह आप उनके हर एक काम की समीक्षा करके देख सकते हैं.

अच्छा यह रहा कि द्रोपदी मुर्मू की‌ जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा उनके आवास पर पहुंचे और उन्हें जीत की बधाई दी. इसी तरह सोनिया गांधी सहित सभी पार्टियों के नेताओं ने उन्हें जीत के लिए बधाई दी.

कुल जमा राष्ट्रपति का पद संविधानिक पद है जो संपूर्ण देश राजनीति को शांत भाव से देखता है और समय-समय पर अपने निर्णय केंद्र सरकार की मंशा के अनुरूप लेता है मगर सविधान में इसके बावजूद कुछ शक्तियां राष्ट्रपति को प्रदत्त की गई है जिनके माध्यम से वह देश को एक नई दिशा दे सकता है. यह विकासशील भारत देश के लिएअच्छा ही रहेगा कि जो शख्स राष्ट्रपति बनता है वह यह न समझे कि वह विदेश प्रवास पर मौज मस्ती के लिए निकला है 5 सालों  तो आनंद की गोते लगाने हैं अथवा वह पिकनिक में है.

‘उड़ारियां’ की तेजो असल जिंदगी में भी फतेह को कर रही हैं डेट! पढ़ें खबर

कलर्स टीवी का सीरियल ‘उड़ारियां’  में  इन दिनों धमाकेदार ट्विस्ट देखने को मिल रहा है. जिससे दर्शकों का फुल एंटरटेनमेंट हो रहा है. शो में तेजो और फतेह की जोड़ी को काफी पसंद किया जाता है. दोनों की केमिस्ट्री को दर्शक खूब पसंद करते हैं. अब खबर आ रही है कि दोनों असल जिंदगी में भी एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं. आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला…

शो में प्रियंका चहर चौधरी और अंकित गुप्ता यानी तेजो और फतेह की जोड़ी को खूब पसंद किया जाता है. साथ ही उनकी केमिस्ट्री को भी इतना ज्यादा पसंद किया गया है कि अब दोनों के डेटिंग की अफवाहें भी सामने आने लगी हैं. प्रियंका चहर चौधरी यानी तेजो ने इस मामले पर खुद चुप्पी तोड़ी है.

 

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एक इंटरव्यू  के अनुसार, प्रियंका चहर चौधरी  ने अपने और अंकित गुप्ता के रिश्ते को लेकर कहा है कि वह सिर्फ मेरे अच्छे दोस्त हैं. जो हमेशा मुझे अच्छी परफॉर्मेंस देने के लिये प्रेरित करते हैं. उन्हें जीवन में पाकर मैं बहुत खुश हूं.

 

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रिपोर्ट के अनुसार, एक्ट्रेस ने डेटिंग की अफवाहों को लेकर भी कहा, ‘’मैं अपना ज्यादातर वक्त अंकित गुप्ता के साथ ही बिताती हूं, लेकिन इसका मतलब यह तो बिल्कुल नहीं है कि हम एक-दूसरे से प्यार करते हैं.”

 

प्रियंका चहर चौधरी ने बताया कि डेटिंग की खबरों से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता है, क्योंकि लिंकअप फैंस के प्यार जताने का तरीका है. उन्होंने इस बारे में आगे कहा  कि फैंस का हमें एक-दूसरे से लिंक करना प्यार जताने का तरीका है  जो कि हमें बहुत खुश करता है.

बच्चे के खानपान में क्या-क्या शामिल करना चाहिए?

सवाल

मेरा बेबी अगले महीने एक साल का हो जाएगा. मेरे पति की पोस्ंिटग चेन्नई में है. मैं उन्हीं के साथ रहती हूं. सारा दिन बेबी की देखभाल में निकल जाता है. मायके और ससुराल में कोई बड़ा बुजुर्ग ऐसा नहीं जो हमारे पास आ कर रह सके. न मेरे मातापिता जीवित हैं और सासससुर की मृत्यु 2 वर्ष पहले हो चुकी है. कोई समझने देखने वाला नहीं है. आप ही बताएं कि मु?ो अपने बेबी के खानपान में क्याक्या शामिल करना चाहिए?

जवाब

बड़े बुजुर्गों का अनुभव बच्चों की देखभाल में बहुत काम आता है. खैर, आप के पास पूरा वक्त है अपने बेबी की देखभाल के लिए. शारीरिक और मानसिक विकास के लिए 6 महीने के बाद बेबी को पौष्टिक आहार देना शुरू कर देना चाहिए. केवल मदर फीड से बच्चे का पेट नहीं भरता.

आप अपने बेबी, जो एक साल का होने वाला है, के खानपान को ले कर चिंतित हैं तो आप को बताते हैं कुछ

हैल्दी डाइट-

अच्छी तरह से पकाई गई वैजिटेबल खिचड़ी बेबी को खिलाएं. खिचड़ी में प्रोटीन, विटामिन और खनिज पाया जाता है जो बच्चे के विकास के लिए फायदेमंद होता है.

एक साल के बच्चे के लिए आलू का मैश बेहद पौष्टिक होता है. इस में पोटैशियम और कार्बोहाइ्रेट पाया जाता है.

एप्पल पाई बनाएं. सेब को छील कर कद्दूकस कर दूध में उबाल लें, चीनी डालें, ठंडा होने पर बेबी को खिलाएं.

दाल को अच्छी तरह पका कर उस में थोड़ा देशी घी मिला कर बच्चे को खिलाएं.

बच्चे की ग्रोथ के लिए डेयरी प्रोडक्ट बहुत ही अच्छे होते हैं. पनीर उस की डाइट में जरूर शामिल करें. पीने के लिए प्लेन दूध दें.

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz

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Monsoon Special: मच्छर हैं कि भागते नहीं

बारिश का मौसम भले ही गरमी से राहत दिलाता हो लेकिन इस की दूसरी कई समस्याएं भी हैं. इन दिनों मच्छरों से होने वाली बीमारियां डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया आदि का प्रकोप बढ़ जाता है. आज बाजार में तरहतरह के मौस्क्यूटो रिपलैंट जैसे कौइल से ले कर कार्ड तक, स्प्रे से ले कर क्रीम तक उपलब्ध हैं. इन के अलावा इलैक्ट्रौनिक मच्छर मार डिवाइस और ऐप भी उपलब्ध हैं. अल्ट्रासाउंड पैदा करने वाले ऐंटीमौस्क्यूटो डिवाइस भी बाजार में आ चुके हैं. इन्हें बनाने वाली कंपनियों का दावा है कि ये डिवाइस हाई फ्रिक्वैंसी पर एक विशेष तरह का साउंड निकालते हैं. यह अल्ट्रासोनिक साउंड मच्छरों को पास फटकने से रोकता है.

इन के अलावा मच्छर भगाने का दावा करने वाले कुछ मोबाइल ऐप भी आ चुके हैं. कहने का मतलब यह कि आज मच्छरों से निबटने के लिए बाजार में इतना कुछ मौजूद है, लेकिन मच्छर हैं कि भागते नहीं. घरघर में विभिन्न कंपनियों के कौइल, स्प्रे, क्रीम आदि का इस्तेमाल हो रहा है. नित नए रिपलैंट बाजार में आ रहे हैं. मगर इस के प्रयोग से मच्छर भागते नहीं. इस से साफ हो जाता है कि यह मुनाफे का कारोबार है. भारत में यह क्व5-6 सौ करोड़ का कारोबार है. इतना ही नहीं, इस कारोबार में हर साल 7 से ले कर 10% तक वृद्धि भी हो रही है. मगर रिपलैंट का कारोबार जितना फूलफल रहा है, मच्छरों का प्रकोप भी उतना ही बढ़ रहा है.

वैसे वैज्ञानिक तथ्य यह भी बताते हैं कि जितना दमदार रिपलैंट बाजार में आता है, मच्छर अपने भीतर उस से लड़ने की उतनी ही ताकत पैदा कर लेते हैं. अगर ऐसा ही है तो इस का मतलब साफ है कि जितना ऐडवांस रिपलैंट बाजार में आता है इनसानों के लिए वह उतना ही बड़ा खतरा बन जाता है, क्योंकि मच्छर उस से निबट लेते हैं.

स्वास्थ्य पर रिपलैंट का प्रभाव

हालांकि रिपलैंट बनाने वाली सभी कंपनियों को केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अधीन केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड में पंजीकरण करवाना पड़ता है. पर बोर्ड का काम इतना ही है. एक बार पंजीकरण की प्रक्रिया खत्म हो जाने के बाद कीटनाशकों के सेहत पर होने वाले नकारात्मक प्रभाव की निगरानी करने की कोई मशीनरी नहीं है. रिपलैंट समेत आजकल बाजार में पाए जाने वाले पर्सनल केयर उत्पाद, रूम फ्रैशनर से ले कर सुगंधित साबुन और डिटर्जैंट पाउडर या लौंड्री उत्पाद तक उपलब्ध हैं.यूनिवर्सिटी औफ वाशिंगटन में वैज्ञानिकों के शोध से पता चलता है कि चाहे वे किसी भी नामीगिरामी कंपनी के बने क्यों न हों उन में रासायनिक खुशबू का इस्तेमाल होता है, जिस का सेहत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता ही है.

दअसल, इन में खुशबू पैदा करने के लिए ऐसिटोन, लाईमोनेन, ऐसिटल्डिहाइड, बैंजीन, ब्यूटाडाइन, बैंजो पाइरेन आदि विभिन्न तरह के रासायनों का इस्तेमाल किया जाता है. इन का सब से बुरा असर स्नायुतंत्र पर पड़ता है. दमा, फेफड़ों की बीमारी, जेनेटिक विकृतियां, ब्लड कैंसर आदि का भी इन से खतरा होता है. इस के अलावा कुछ लोगों में ऐलर्जी, आंखों में जलन की भी शिकायत हो जाती है.

उम्मीद की किरण

मच्छरों से पनपने वाली बीमारियों और उन से होने वाली मौतों के बीच एक उम्मीद जगाने वाली खबर भी है. कोलकाता राजभवन में मच्छरमार और रोकथाम अभियान के दौरान कोलकाता नगर निगम के कीटपतंग विभाग के देवाशीष विश्वास को कुछ ऐसे मच्छरों का पता चला, जो इनसानों को नुकसान पहुंचाने के बजाय उलटा जानलेवा मच्छरों का सफाया करते हैं. सामान्य तौर पर इस मच्छर का नाम ऐलिफैंट मौस्क्यूटो है. इस प्रजाति के मच्छर इनसानी खून के प्यासे होने के बजाय डेंगू के ऐडिस एजिप्टाई लार्वा चट कर जाते हैं.

बताया जाता है कि चीन मच्छर नियंत्रण के लिए मच्छरों का ही इस्तेमाल कर रहा है. दक्षिण चीन में वैज्ञानिकों का एक दल इंजैक्शन के सहारे मच्छरों के अंडों में ओलवाचिया नामक बैक्टीरिया का प्रवेश कर बैक्टीरिया से संक्रमित मच्छर को छोड़ देता है. चीनी वैज्ञानिकों का मानना है कि ये संक्रमित नर मच्छर जब किसी असंक्रमित मादा मच्छर के साथ मिलन करते हैं तो यह बैक्टीरिया मादा मच्छर में प्रवेश कर जाता है और मच्छरजनित बीमारियों के जीवाणुओं का खात्मा कर देता है. वहीं सिंगापुर और थाईलैंड में हाथी मच्छर नाम की विशेष प्रजाति के मच्छरों का इस्तेमाल मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया के मच्छरों पर नियंत्रण करने में किया जाता है. इसीलिए निगम इस उपकारी मच्छर के लार्वा को डेंगू और चिकनगुनिया के मच्छरों के उत्पात से त्रस्त इलाकों में फैलाने की तोड़जोड़ कर रहा है.

गौरतलब है कि कोलकाता डेंगू के ऐडिस मच्छरों की राजधानी बन गया है. इस से पहले ऐडिस मच्छरों का स्वर्ग दिल्ली थी. अगर श्रीलंका मच्छरजनित बीमारियों पर विजय प्राप्त कर सकता है, चीन, सिंगापुर और थाईलैंड मच्छरों पर नियंत्रण कर सकते हैं, तो भारत क्यों नहीं? पूरे देश में हाथी मच्छर के जरीए जानलेवा मच्छरों पर नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम तैयार किया जाना चाहिए.

मच्छर के काटने पर अपनाएं कुछ घरेलू उपाय

– नीबू के रस को मच्छर द्वारा काटे गए स्थान पर रगड़ लें. मच्छर के काटने से होने वाली खुजली में तुरंत आराम मिलेगा, साथ ही संक्रमण का खतरा भी जाता रहेगा.

– नीबू के रस में तुलसी का मसला पत्ता मिला कर लगाया जा सकता है.

– ऐलोवेरा जैल को 10-15 मिनट फ्रिज में रख कर काटे गए स्थान पर लगाने से भी आराम मिलता है.

– लहसुन या प्याज का पेस्ट सीधे प्रभावित स्थान पर मल लें. कुछ देर तक पेस्ट को लगा रहने दें. फिर अच्छी तरह धो लें. लहसुन या प्याज की गंध से भी मच्छर भागते हैं.

– बेकिंग सोडा को पानी में घोल रुई का फाहा उस में भिगो कर प्रभावित स्थान पर लगा कर 10-12 मिनट छोड़ दें. फिर कुनकुने पानी से धो लें आराम मिलेगा.

– बर्फ के टुकड़े को 10-12 मिनट तक कुछकुछ समय के अंतराल पर काटे गए स्थान पर रखें. बर्फ न होने पर ठंडे पानी की धार को कुछ देर तक प्रभावित जगह पर डालें.

– टूथपेस्ट भी खुजली पर असरदार होता है. थोड़ा सा पेस्ट उंगली में ले कर मच्छर द्वारा काटे गए स्थान पर मलें. आराम मिलेगा.

– प्रभावित स्थान पर कैलामाइन लोशन का भी इस्तेमाल किया जा सकता है. दरअसल, कैलामाइन लोशन में जिंक औक्साइड और फेरिक औक्साइड जैसे तत्त्व होते हैं, जो खुजली के साथसाथ संक्रमण रोकने में भी कारगर होते हैं

Manohar Kahaniya: आनंदलोक की सैर का हर्जाना

राजस्थान के नागौर जिले का मकराना कस्बा संगमरमर पत्थर के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है. इसी मकराना कस्बे में तमाम ऐसे व्यवसायी हैं, जो मार्बल व्यवसाय कर के हर साल करोड़ों रुपए कमाते हैं.  मकराना के दीपक भी मार्बल व्यवसायी हैं. घरपरिवार से संपन्न दीपक हैंडसम ही नहीं दिल के भी भले आदमी हैं. गरीबों की वह अकसर मदद किया करते थे. उन के पास रुपएपैसों की कमी नहीं थी. दीपक को मार्बल व्यवसाय से लाखों रुपए की कमाई हर महीने होती थी. वह बनठन कर रहते थे.

दीपक की हर रोज कई लोगों से मुलाकात होती रहती थी. कभी किसी व्यक्ति को रुपएपैसे की जरूरत पड़ती थी तो वह दीपक से अपना दुखड़ा कह देता. दीपक से उस का दुख देखा नहीं जाता था. वह मांगने वाले की मदद कर के दिल में सुकून महसूस करते थे.

दीपक का अपना खुशहाल परिवार था. मातापिता, भाईबहन, पत्नी और बच्चे. सभी खुशहाल और इज्जत से जीवन जी रहे थे.

यह बात आज से 3 साल पहले की है. दीपक के मोबाइल पर एक काल आई. उन्होंने काल रिसीव कर कहा, ‘‘हैलो, दीपक बोल रहा हूं. आप कौन बोल रहे हैं?’’

‘‘दीपकजी, नमस्कार. मैं गुणावती गांव से रेखा कंवर बोल रही हूं. पहचाना मुझे?’’ फोन करने वाली युवती ने कहा.

तब दीपक बोले, ‘‘रेखा कंवर! मुझे कुछ याद नहीं आ रहा. बोलिए, मैं आप की क्या सेवा कर सकता हूं?’’

‘‘दीपकजी, गुणावती गांव के जनरल स्टोर पर और ब्यूटीपार्लर में आप से कई बार मुलाकात हो चुकी है. अब पहचाना?’’ युवती बोली.

दीपक को अब कुछकुछ याद आया. वह बोले, ‘‘अच्छा, तो आप जनरल स्टोर की मालकिन रेखाजी बोल रही हैं. पहचान लिया. कहिए, कैसे याद किया?’’

‘‘दीपकजी, मैं बहुत परेशान हूं और इसी वक्त आप से मिलना चाहती हूं. मैं इस समय जनरल स्टोर पर आप का इंतजार कर रही हूं. मुझे आप पर पूरा भरोसा है कि आप अवश्य आ कर मेरा दुख और परेशानी दूर करेंगे.’’

‘‘ऐसी क्या परेशानी है, जिस से आप दुखी हैं. जरा बताएंगी?’’ दीपक ने पूछा.

‘‘आप यहां आ जाएं, फिर सब बता दूंगी. प्लीज दीपकजी, जल्दी आइएगा. मैं इंतजार कर रही हूं.’’ रेखा कंवर ने विनती भरे स्वर में कहा.

दीपक को लगा कि रेखा को जरूर कोई परेशानी है. दीपक से किसी की परेशानी या दुख देखा नहीं जाता था. वह बिना कुछ सोचेविचारे गाड़ी ले कर उसी वक्त मकराना से गांव गुणावती के लिए चल दिए.

थोड़ी देर बाद दीपक रेखा कंवर के जनरल स्टोर पर पहुंच गए. उस वक्त जनरल स्टोर पर रेखा कंवर अकेली थी. दीपक के आते ही रेखा ने दुकान बंद की. वह दीपक की गाड़ी में बैठ कर अपने घर आ गई. उस का घर पास में ही था.

दीपक भी उस के साथ उस के घर में आ गया. दोनों जब कमरे में पहुंचे तो रेखा कंवर ने कमरे का दरवाजा बंद कर अंदर से कुंडी लगा दी. दीपक ने रेखा को कुंडी लगाते देखा तो वह बोला, ‘‘कुंडी क्यों लगाई? दरवाजा खोल कर बात करना ठीक नहीं रहेगा क्या?’’

सुन कर रेखा बोली, ‘‘ऐसी बातें बंद दरवाजों के पीछे ही ठीक हैं.’’

कहने के साथ रेखा कंवर ने अपने सारे कपड़े उतार दिए. रेखा को कपड़े उतारते देख दीपक डरते हुए बोला, ‘‘रेखाजी, यह क्या कर रही हैं? मैं जा रहा हूं.’’

कहने के साथ ही दीपक कुंडी खोलने लगा. तभी रेखा ने उस का कुंडी वाला हाथ पकड़ कर अपने शरीर पर रखते हुए कहा, ‘‘अगर मेरा कहना नहीं मानोगे तो मैं हल्ला मचा कर लोगों को इकट्ठा कर के बताऊंगी कि तुम मेरे साथ रेप कर रहे थे. बेहतर होगा कि मेरा साथ दो. मेरा दिल तुम पर आ गया था.

‘‘मेरी जैसी गोरी व खूबसूरत युवती को इस हालत में देख कर भी तुम ऐसे भाग रहे हो जैसे मैं मर्द हूं और तुम औरत और मैं तुम्हारे साथ रेप करने वाली हूं. सोचना छोड़ो और आओ आनंदलोक की सैर करो.’’

कहने के साथ ही रेखा ने दीपक की कमीज भी उतार दी. दीपक इज्जतदार था. वह सोच रहा था कि अगर कोई ऐसे वक्त पर यहां आ गया और उस ने रेखा के साथ बंद कमरे में देख लिया तो इज्जत का जनाजा निकल जाएगा.

दीपक जान छुड़ाने की कोशिश कर रहा था. वहीं रेखा कंवर उस के साथ शारीरिक संबंध बनाने को उतावली हो रही थी. दीपक के न…न करने पर भी रेखा नहीं मानी और उस ने दीपक को भी कपड़ों से मुक्त कर दिया.

दीपक समझ गया था कि वह गलत युवती के पास आ गया है. अब जान छुड़ानी है तो इस के साथ शारीरिक संबंध बनाने ही पडें़गे.

दीपक ने लोकलाज छोड़ कर रेखा कंवर को बांहों में भरा और बिस्तर पर आ गया. इस के बाद दोनों के तन एकदूसरे से रगड़ने लगे. सांसों का तूफान उठा और कमरे का तापमान बढ़ गया.

रेखा गोरी रंगत की सुंदर युवती थी. उस समय रेखा 29 वर्ष की और दीपक 50 साल का था. रेखा के तन में काफी देर बाद दीपक ने अपने तन की गरमी उड़ेल कर रेखा को चूमते हुए कहा, ‘‘सच में आनंदलोक की सैर करा दी. बड़ा मजा आया.’’

सुन कर रेखा मंदमंद मुसकरा कर बोली, ‘‘मुझे तो तुम से भी ज्यादा मजा आया. आज के बाद मैं जब भी फोन करूं या तुम्हारा मन हो फोन कर के आ जाना. दोनों इसी तरह खूब मौजमस्ती किया करेंगे. आज से हम दोनों दोस्त नहीं प्रेमी हैं.’’

सुन कर दीपक बोला, ‘‘मैं डर रहा था कि कोई आ जाएगा तो मेरी इज्जत चली जाएगी. आगे से हम पूरी सावधानी से प्रेमिल संबंध जारी रखेंगे डार्लिंग.’’

उस दिन दोनों ने शारीरिक संबंध बनाने के बाद एकदूजे से विदा ली. दीपक बहुत खुश था. उस ने कभी सोचा भी न था कि एक दिन हूर जैसी युवती उस पर इस तरह फिदा हो कर पके आम सी उस के पहलू में आ गिरेगी.

3 साल पहले शुरू हुआ यह शारीरिक संबंधों का खेल अकसर दीपक और रेखा दोहराने लगे. रेखा का जब मन होता, वह दीपक के मोबाइल पर फोन कर के उसे अपने जनरल स्टोर या घर पर बुला लेती. फिर दोनों रेखा के घर में बंद कमरे में कपड़ों से मुक्त हो कर एकदूजे में समा जाते.

अधेड़ उम्र में दीपक उस का ऐसा दीवाना हुआ कि वह रुपएपैसे से रेखा की दिल खोल कर मदद करने लगा. रेखा का बचपन से सपना था कि वह किसी अमीर युवक से शादी कर के मौजमस्ती की जिंदगी बिताए. मगर गरीब मातापिता के लिए जब रोटी का जुगाड़ करना ही मुश्किल था तो ऐसे में महत्त्वाकांक्षी बेटी के लिए धनवान युवक से शादी करना सपने जैसा था.

रेखा जब जवान हुई, तब उस के मातापिता ने उस के योग्य वर की खोज शुरू की. उन की मेहनत रंग लाई और रेखा कंवर की शादी नागौर जिले के मकराना थानांतर्गत गुणावती गांव के विक्रम सिंह के साथ आज से करीब 8-9 साल पहले हो गई थी.

रेखा कंवर दुलहन बन कर जब ससुराल पहुंची तो उस के सारे अरमान बिखर गए. जैसा स्मार्ट व धनवान जीवनसाथी रेखा को चाहिए था, विक्रम वैसा नहीं था.

विक्रम सिंह गरीब था. वह कच्चे घर में रहता था और मार्बल फैक्ट्री में मार्बल कटिंग का काम करता था. कहने का मतलब यह कि विक्रम सिंह मजदूरी कर के परिवार का पालनपोषण करता था.

रेखा ने अपनी किस्मत को कोसा और पति विक्रम सिंह के साथ किसी तरह जीवन गुजारने लगी. रेखा जब अपना कच्चा मकान देखती तो उसे बहुत दर्द होता. वह चाहती थी कि उस का मार्बल का पक्का मकान हो. घर में वे सब सुखसुविधाएं हों जो एक साधनसंपन्न व्यक्ति के घर में होती हैं.

जैसी सोच थी रेखा की, उसी के अनुसार वह योजना बना रही थी. रेखा अब तक यह समझ गई थी कि अगर वह पति के भरोसे बैठी रही तो उस की इच्छाएं अधूरी ही रहेंगी. विक्रम को मजदूरी के इतने पैसे मिलते थे कि उस से बड़ी मुश्किल से रोटी का ही जुगाड़ हो पाता था.

विक्रम और रेखा अपने संयुक्त परिवार से अलग हो कर कच्चा मकान बना कर रहने लगे. रेखा का ख्वाब था पैसों में खेलना और ऐशोआराम से जीवन जीना. जब उस के ख्वाब अधूरे ही रहे तो उस ने गुणावती गांव में फैंसी जनरल स्टोर व ब्यूटीपार्लर खोल लिया. इस से थोड़ी आर्थिक स्थिति जरूर सुधरी, मगर वह जैसा चाहती थी वैसा कुछ नहीं हुआ.

रेखा कंवर सोशल मीडिया पर एक्टिव रहती थी. उस ने सोशल मीडिया के जरिए दीपक से बात करनी शुरू की और फिर चंद मुलाकातों में ही रेखा जान गई कि अगर उस के ख्वाब पूरे होने हैं तो दीपक से दोस्ती करनी होगी.

दीपक से जानपहचान बढ़ा कर उसे तकलीफ में होने की बात कह कर गांव गुणावती बुला कर अपने घर में ले जा कर शारीरिक संबंध बना लिए. उस के बाद रेखा कंवर अकसर दीपक को फोन कर के अपने घर बुला कर शारीरिक संबंध बनाती थी.

दीपक सोचता था कि रेखा का दिल उस पर आया है, इस कारण वह उस से शारीरिक संबंध बनाती है. दीपक की रेखा से गहरी छनने लगी. रेखा जबतब बहाने बना कर उस से रुपए भी ऐंठती रहती थी.

रेखा ने अपने पति विक्रम सिंह और गांव के लोगों से दीपक का परिचय अपने धर्मभाई के रूप में कराया था. रेखा कहती थी कि दीपक उस का धर्मभाई है, जो सगे भाई से भी बढ़ कर है. वह रुपएपैसे से उस की मदद करता है.

रेखा जब पैसा घर लाती तब पति पूछता, ‘‘रेखा, ये रुपए कहां से आए?’’

सुन कर रेखा कहती, ‘‘दीपक भैया ने दिए हैं. वह कहते हैं कि मैं ऐश करूं और बहन मुसीबत में दिन गुजारे. यह उन्हें अच्छा नहीं लगता है. दीपक भैया हालचाल पूछते रहते हैं. हमारी आर्थिक स्थिति देख कर मेरे लाख मना करने के बाद भी कसम दिला कर रुपएपैसे देते हैं.’’

सुन कर बेचारा पति विक्रम इसे ही सच मान लेता था. उसे भनक तक नहीं लगी थी कि उस की बीवी दीपक के साथ क्या खेल कर रही है. वह समझता था कि दीपक अच्छाभला आदमी है.

पिछले साल रेखा कंवर ने अपना कच्चा घर तोड़ कर मार्बल का मकान बनवाना शुरू कर दिया था. तब भी रेखा ने विक्रम से कहा कि उस का धर्मभाई दीपक मकान बनाने में दिल खोल कर मदद कर रहा है.

विक्रम को और क्या चाहिए था. वह आंखें मूंद कर पत्नी पर विश्वास करता था. वहीं रेखा अपने पति से विश्वासघात कर रही थी. वह धर्मभाई बने दीपक की बांहों में झूला तो झूलती ही थी, विदेशी पोर्न फिल्मों की नायिका की तरह दीपक से कई पोजीशन में शारीरिक संबंध बना कर उस की तबीयत खुश कर देती थी.

दीपक पिछले काफी समय से चिंतित व गुमसुम सा रहने लगा था. उस के घर वालों ने पूछा भी कि वह गुमसुम सा क्यों लग रहा है. मगर दीपक यह कह देता कि मुझे किस बात की चिंता होगी. आप लोगों का वहम है.

मगर परिजन व मित्रों को लगता था कि दीपक डराडरा सा रहता है. उस के माथे पर चिंता की लकीरें स्पष्ट दिख रही थीं. वह 16 अप्रैल, 2022 के बाद से एकदम गुमसुम व चिंतित हो गया. उस की जीने की इच्छा खत्म हो गई थी. उस के मन में आत्महत्या करने के विचार आ रहे थे.

दीपक ने आत्महत्या करने की ठान ली. उस ने इस बात की चर्चा किसी से नहीं की. दीपक ने सुसाइड करने से पहले एक बार अपनी बहन से मिल कर आने के बाद सुसाइड करने का मन में पक्का विचार कर लिया.

वह 22 अप्रैल, 2022 को मकराना से अपनी बहन से मिलने जयपुर पहुंचा. बहन ने भाई की हालत व गुमसुम सा देखा. तब उस ने पूछा, ‘‘क्या बात है भाईसाहब, आप बहुत दुखी लग रहे हैं. जो भी बात हो कह दो. शायद मैं कुछ मदद कर सकूं.’’

सुन कर दीपक सुबकने लगा. बहन ने सांत्वना दे कर चुप कराया. तब दीपक बोला, ‘‘मुझे एक औरत और 2 आदमी मिल कर हनीट्रैप में फंसा कर ब्लैकमेल कर रहे हैं. उन लोगों ने मुझ से 31 लाख रुपए ले लिए हैं. एक हफ्ते पहले उन लोगों ने मेरा उस महिला के साथ अश्लील वीडियो भेज कर 50 लाख रुपए मांगे हैं. रुपए नहीं देने पर अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दे रहे हैं. मैं उन के जाल में बुरी तरह फंस गया हूं. मैं रुपए दूंगा तब वे और डिमांड करेंगे और नहीं दूंगा तो वे लोग वीडियो वायरल कर देंगे. इज्जत जाए उस से पहले मैं सुसाइड कर रहा हूं.’’

सुन कर बहन बोली, ‘‘वह औरत कौन है उस के साथ जो 2 लोग हैं, वे कौन हैं?’’

इस के बाद दीपक ने रेखा कंवर से मिलने के बाद से अब तक की पूरी कहानी विस्तार से सुना दी. सुन कर बहन बोली, ‘‘योजना के तहत रेखा ने तकलीफ में होने का नाटक कर तुम्हें घर बुलाया. इस के बाद कमरे का दरवाजा बंद कर कपड़े उतार कर तुम्हें डराधमका कर शारीरिक संबंध बनाए. उस की वीडियो बना ली ताकि भविष्य में तुम्हें ब्लैकमेल कर के रुपए ऐंठ सके. तुम मेरे साथ मकराना थाने चलो. वहां हम रिपोर्ट कर के इस गैंग को गिरफ्तार करा देंगे.’’

दीपक ने भी थाने जा कर रिपोर्ट दर्ज कराने का मन बना लिया. दोनों भाईबहन 24 अप्रैल, 2022 को मकराना थाने पहुंच गए और थानाप्रभारी प्रमोद कुमार शर्मा को सारी बात बता दी. इस के बाद रेखा कंवर, विक्रम सिंह और शैतान सिंह के खिलाफ हनीट्रैप में फंसा कर ब्लैकमेल करने की रिपोर्ट दर्ज करा दी.

थानाप्रभारी प्रमोद कुमार शर्मा को दीपक ने बताया कि रेखा ने उस के अश्लील वीडियो बना रखे थे. इस के बाद उस ने वीडियो शेयर करने की धमकी दे कर 8 लाख रुपए ले लिए. डेढ़ महीने पहले वह रेखा के पास गया तो वहां पहले से रेखा कंवर का भांजा शैतान सिंह व विक्रम सिंह मौजूद था. दोनों ने उन के पुराने वीडियो दिखा कर दबाव बनाया और रेखा से फिर से संबंध बनाने को कहा. इस का भी उस ने वीडियो बना लिया.

दीपक ने बताया कि 10 दिन पहले शैतान सिंह ने उस के मोबाइल पर वह वीडियो भेज कर धमकाया और 23 लाख रुपए ले लिए. इस के बाद वे 50 लाख रुपए देने का दबाव बनाने लगे.

23 लाख रुपए लेने के बाद शैतान सिंह ने अप्रैल के दूसरे हफ्ते में उसे धमकाया कि मामला निपटाना है तो 50 लाख रुपए लगेंगे. रुपए नहीं देने पर उस ने वीडियो वायरल करने की धमकी दी.

थानाप्रभारी प्रमोद कुमार शर्मा ने मामला दर्ज करने के बाद काररवाई करते हुए उसी दिन 24 अप्रैल, 2022 को रेखा कंवर, विक्रम सिंह व शैतान सिंह को कस्टडी में ले लिया. तीनों आरोपियों को थाने ला कर पूछताछ की.

पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने जुर्म कुबूल कर लिया. मार्बल व्यापारी दीपक को हनीट्रैप में फंसाने वाली रेखा लग्जरी लाइफ जीना चाहती थी. पति महंगे शौक पूरे नहीं कर पा रहा था. वह चाहती थी कि उस का एक आलीशान घर हो.

इस बीच दीपक के संपर्क में आई. दोनों के बीच 3 साल से रिलेशन थे लेकिन बढ़ते लालच के चलते वह व्यापारी से 50 लाख रुपए मांगने लगी, जिस से ये सारी कहानी सामने आ गई.

नागौर एसपी राममूर्ति जोशी, कुचामन सिटी एएसपी गशेराम के सुपरविजन में डीएसपी मकराना रविराज सिंह और थानाप्रभारी प्रमोद कुमार शर्मा की टीम ने आरोपी रेखा कंवर, शैतान सिंह और विक्रम सिंह को गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल जब्त कर जांच के लिए भेज दिए. खैर, जो भी हो रेखा का लालच उसे ले डूबा. पूछताछ पूरी कर तीनों आरोपियों को कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.द्य

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. कथा में दीपक नाम परिवर्तित है.

डॉलर और नरेंद्र दामोदरदास मोदी

जिस डॉलर के मसले पर प्रधानमंत्री बनने से पूर्व नरेंद्र दामोदरदास मोदी डॉ मनमोहन सिंह कि केंद्र सरकार, और श्रीमती सोनिया गांधी को घेरते थे, देश की जनता को भयाक्रांत करते थे, लाख टके का सवाल है कि आज उसी सवाल पर नरेंद्र मोदी मौन क्यों है…?

डॉलर, जैसा कि सभी जानते हैं अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले भारत का रुपया गिरता चला जा रहा है और यह आंकड़े आज हमारे सामने है कि जब  प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र दामोदरदास मोदी ने शपथ ली थी उसके पश्चात भी डालर निरंतर मजबूत होता चला गया है, महंगाई अपनी सीमाओं को तोड़ रही है. यही कारण है कि डालर कीमत बढ़ती चली जा रही है और भारतीय रुपया का अवमूल्यन जारी है.

यह प्रश्न है कि क्या इसके पीछे सरकार की नीतियां दोषी नहीं है? निसंदेह अगर सरकार जिम्मेदारी और इमानदारी से काम करें तो रुपए का अवमूल्यन ऐसा या आगे चलकर इससे बदतर नहीं हो पाएगा.

यहां यह भी एक बड़ा सवाल है कि जब देश पर अंग्रेजों की हुकूमत थी आजादी के समय है डॉलर और रुपए की कीमत बराबर बराबर थी. आजादी के बाद ऐसा क्या हुआ है की भारतीय मुद्रा का अवमूल्यन लगातार जारी है क्या इसका भी चिंतन और संसद में चर्चा नहीं होनी चाहिए.

दरअसल,आज श्रीलंका की हालात हमारे सामने है, वहां त्राहि-त्राहि मची हुई है और  मंहगाई  बेलगाम हो चुकी है. परिणाम स्वरूप देश में हाहाकार मचा हुआ है, सरकारें बदल गई मंत्रियों और प्रधानमंत्री के घर को जला दिया गया. इस सब का सबक तो भारत को लेना ही चाहिए जिस तरह श्रीलंका में डॉलर के मुकाबले श्रीलंका की मुद्रा 300 की स्थिति में पहुंच गई त्राहि-त्राहि हो गई ऐसी ही स्थिति धीरे-धीरे भारत की बनती चली जा रही है. जीएसटी आदि की नकेल के कारण संपूर्ण देश में अफसरशाही हावी है और महंगाई बढ़ती चली जा रही है. जीएसटी का जो नए प्रावधान लागू हुआ है उसके कारण भले ही सरकार के पास करोड़ों, अरबों रुपए का लाभ सामने दिखाई देता है मगर आम जनता छोटी छोटी चीजों पर जीएसटी कर देकर के महंगाई को झेल रही है, आंसू बहा रही है.

घरेलू बाजार, सुधार अपरिहार्य

भारतीय बाजार के जैसे हालात हैं उन पर अब काबू पाने के लिए जाने माने  अर्थ शास्त्रीयों से चिंतन मनन कर रूपए की कीमत सुधारना केंद्र सरकार की आज पहली प्राथमिकता होना चाहिए.

बीते दिनों अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया -91 प्रति डालर पर खुला और कारोबार के दौरान 80.05 के निचले स्तर को छू गया. कारोबार के  रुपए में 79.91 से 80.05 रुपए के दायरे में बढ़ोतरी हुई. कारोबार के अंत में रुपया अपने लेबल भाव के मुकाबले 13 पैसे की गिरावट साथ दिन के निम्नतम स्तर 80.05 (अस्थायी ) डालर पर बंद हुआ. इस एक दृश्य को देखकर के अनुमान लगाया जा सकता है कि डॉलर और रुपए में क्या चल रहा है.

19 जुलाई 2022को रुपया दिन के कारोबार के निचले = 80.05 से उबरकर डालर के मुकाबले छह पैसे तेजी दर्शाता 79.92 रुपए प्रति डालर पर बंद था. बाजार सूत्रों ने कहा कि तेल आयातक नियों की भारी डालर मांग, कच्चे तेल कीमतों के मजबूत होने के साथ-साथ व्यापार घाटा ने की चिंताओं के कारण निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई जो गिरावट का मुख्य कारण बना।

कुल मिलाकर के रुपया और डॉलर की यह भागम भाग देश भर को चिंता में डूबोये हुए हैं अगर स्थितियां नहीं सुधरी तो देश कहां पहुंचेगा इसकी सहज कल्पना की जा सकती है.

यह सबसे महत्वपूर्ण बात है कि जब आजादी के पहले रुपया  मजबूत स्थिति में था तो अब आजादी के बाद आखिर ऐसी क्या गलतियां हो रही है जो डॉलर मजबूत होता चला जा रहा है और रुपया का अवमूल्यन हो रहा है. इस पर संसद में  विस्तृत  चर्चा अपरिहार्य है.

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