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क्या आप भी शेयर करते हैं अपने निजी पलों को, तो हो जाएं सावधान

हिमाचल प्रदेश की महिला नेता के बाथरूम का बना वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो उनको इसका खामियाजा भुगतना पड़ा. पार्टी ने उनको बाहर का रास्ता दिखा दिया. इसके अलावा समाज में उनकी बदनामी अलग से हुई. पूरे वीडियो को देखने के बाद साफ लगता है कि यह वीडियो दोनो की मर्जी से बना था और उनका कोई गलत उद्देश्य भी नहीं था. ना कोई एक दूसरे को ब्लैकमेल करने के इरादे से इसको बना ही रहा था. अचानक सोशल मीडिया पर इसके आने से यह वीडियो उनके लिये हर तरह से नुकसान दायक साबित हो रहा है. यह कोई पहला मामला नहीं है. जिसमें अंतरंग पलों के बने फोटो और वीडियो गले की हड्डी बन गये.

कुछ समय पहले ऐसा ही मामला मथुरा के एक कथावाचक का भी समाने आया था. कथावचाक का अपनी विदेशी शिष्या के साथ अंतरग पलो के कई वीडियो थे. यह सब उनके अपने लैपटौप पर थे. एक दिन लैपटौप खराब हो गया. कथावाचक ने जब लैपटौप बनने के लिये दिया तो वहां से वह वीडियो सीडी के जरीये बाजार में पहुंच गये. उस समय वाट्सएप प्रयोग में नहीं था. इस वजह से मथुरा की वह घटना सीडी के जरीये ही चर्चा में आई थी.

सोशल मीडिया के सक्रिय होने के बाद ऐसे कई मामले सामने आ चुके है जिनमें नेताओं सहित कई प्रमुख लोगों के अंतरंग पलों में बने वीडियो वायरल होकर चर्चा में आ चुके है. जिनका प्रभाव लोगों की अपनी जिदंगी पर पड़ चुका है. कई लोगों ने ऐसे वीडियो या फोटो के वायरल होने के बाद खुद को नुकसान पंहुचाने का प्रयास भी किया है. सोशल मीडिया के जानकार राजीव कुमार बताते हैं कि पतिपत्नी के बीच बनने वाले ऐसे वीडियो वायरल होने के बाद आपकी छवि को नुकसान पहुंचा सकते है ऐसे में जरूरी है कि ऐसे वीडियो या फोटो ना ही बनाये जाये.

ब्लैकमेलिंग का साधन:

20 साल की रेखा ने अपने बौयफ्रेंड विशाल के साथ ‘किस’ करते हुये एक वीडियो बना लिया था. खेल खेल में बना यह वीडियो केवल आपसी रिश्तों की गहराई को दिखाने के लिये दोनो ने बनाया था. कुछ समय के बाद वह वीडियो डिलीट भी कर दिया. रेखा की एक सहेली पूनम ने रेखा का मेमोरी कार्ड ले लिया था. उसमें से पूनम का आपना कोई डेटा डिलीट हो गया. जो बहुत जरूरी था. उसने अपने एक साथी दीपक से पूछा तो उसने बताया कि एक ऐसा साफ्टवेयर है जिसमें से डिलीट डेटा भी रिकवर किया जा सकता है. दीपक ने पूनम से मेमोरी कार्ड लेकर उसका डेटा रिकवर किया. उसमें रेखा और उसके बौयफ्रेंड विशाल का ‘किस’ वाला वीडियो भी रिकवर हो गया. अब दीपक ने रेखा को ब्लैकमेल करना शुरू किया. ऐसे अंतरंग पलों के वीडियों से इस तरह की परेशानियों के भी उदाहरण मिलते है.

साफ्रटवेयर इंजीनियर दीपक रस्तोगी बताते हैं कि अब ऐसे ऐसे साफ्रटवेयर जो मेमोरी कार्ड या कंप्यूटर लैपटौप से वह फोटो या वीडियो भी रिकवर कर सकते हैं जो काफी लंबे समय पहले डिलीट किये जा चुके हो. ऐसे में एक ही रास्ता होता है कि ऐसे अंतरंग पलों के फोटो या वीडियो बनाने से बचे. भले ही आपके आपस में कैसे ही गहरे रिश्ते क्यों ना हो?  कई बार यह देखा गया है कि जब आपस में रिश्ते टूटते है तो लोग ऐसे फोटो या वीडियों वायरल कर देते है. सोशल मीडिया अब ऐसा माध्यम बन गया है कि देश दुनिया के एक कोने से ऐसी चीजों का दूसरे कोने तक पहुंचने में समय नहीं लगता है. ऐसी घटनायें जीवन के बहुत महत्वपूर्ण समय पर सामने आते है. उस समय लोग यही सोचते है कि ऐसा काम किया ही क्यों था ?

कैरियर की तबाही:

अंतरंग पलों के यह फोटो और वीडियों कई बार ऐसे समय पर सामने आते है जब कैरियर में कुछ बेहतर हासिल करना होता है. कई नेताओं के हाल में ऐसे वीडियो वायरल हुए है. अब तो साफ्टवेयर के जरीये वीडियो में भी चेहरे को बदला जा सकता है. पिछले दिनो गुजरात के नेता हार्दिक पटेल का ऐसा ही वीडियो वायरल हुआ जब वह वहां की सरकार खिलाफ बड़ी लड़ाई लड़ रहे थे. ऐसे नेताओं, अफसरों, फिल्म और समाजसेवियों की तादाद कम नहीं है.

सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो वायरल होना कोई बडी अचंभे वाली बात नहीं रह गई है. ऐसी घटनाएं भले ही कानूनी रूप से गलत मानी जाती हो. वायरल करने वालों के खिलाफ आईटी एक्ट में मुकदमा भी हो सकता है पर यह काफी कठिन काम होता है. सजा के पहले ही जिसका वीडियो फोटो वायरल होता है वह टूट कर तबाह हो जाता है.

सोशल मीडिया का माध्यम होने के बाद ऐसे वीडियो और फोटो बहुत तेजी से वायरल होने लगे है. जिनका प्रभाव समाज पर खराब पड़ने लगा है. हाल के कुछ दिनों में लोगो का हौसला इतना बढ़ गया कि बलात्कार जैसी घटनाओं के वीडियो उसमें शामिल लोगों ने सोशल मीडिया पर अपनी धाक जमाने के लिये वायरल कर दिये पर यही वीडियो उनके खुद के गले ही फांस बन गए.

पुलिस ने उसी वीडियों को आधार बनाकर पहले उनकी पहचान की बाद में उनको जेल भेज दिया. ऐसे में यह वीडियो अपराधी को जेल भेजने का साधन भी बन गये. अपराधी प्रवृत्ति के लोग ऐसे वीडियों बना कर पोर्न साइडों को बेचने का धंधा भी करते है. यह लोग लड़कियों को प्रेम के झांसे लेकर यह लोग पहले उनके साथ पोर्न वीडियों शूट करते है. इसके बाद पोर्न साइड पर इसको बेच भी देते है.

ऐसे में अंतरंग पलों के बने ये वीडियो कितने घातक हो सकते है. इसका अदाजा लगाना भी सरल नहीं होता है. इनसे बचने का एक ही तरीका होता है कि अंतरंग पलों के ऐसे वीडियो को बनाने से बचे. कई बार भावुकता और प्रेम की गहराई को जताने के लिये बने वीडियों कब वायरल हो कर गले की हड्डी बन जायेगे यह पता ही नहीं चलेगा. ऐसी शर्मनाक हालत से बचने के लिये जरूरी है कि अंतरंग पलों के वीडियो और फोटो लेने से बचे. अंतरंग पल आपके अपने होते है, उनको अपने तक ही रखने के लिये फोटो और वीडियों से उनको दूर रखे.

निर्णय : वक्त के दोराहे पर खड़ी मां की कहानी

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जिंदगी न मिलेगी दोबारा: भाग 3

शोभित के जाने के बाद अकसर हमारे रहनसहन और खर्चों को देख कर नातेरिश्तेदारों, मित्रों और परिचितों की इस तरह की बातें हमारे कानों में पड़ ही जाती थीं. मसलन, ‘इन की किस्मत में तो बच्चा है ही नहीं. खुद का हुआ नहीं और जिसे गोद लिया उसे कुदरत ने ले लिया. कोई खर्चा तो है नहीं, आगे नाथ न पीछे पगहा… किस के लिए छोड़ कर जाएंगे…’

जिसे देखो वही हमारे पैसे पर नजर गङाए दिखता था. कभीकभी मन भी करता था कि उन की हर बात का जबाब दूं. पर अनुज मुझे हमेशा यह कह कर रोक देते कि शुभी, कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना…और इसलिए किसी की बातों पर जरा भी ध्यान देने की जरूरत नहीं है. हमारी जिंदगी, हमारा पैसा हम चाहे खर्च करें या आग लगाएं हमारी मरजी. और सच कहूं तो अब हम दोनों इस के आदि हो चले थे पर हां, कभीकभी भविष्य का सोच कर घबराहट अवश्य होती थी और लाख संभालने के बाद भी मन निराशा से भर उठता था.

आज स्कूल में नई प्रिंसिपल पदभार ग्रहण करने वाली थीं…इसलिए पूरे स्कूल में उत्साह था. अकसर लेटलतीफ स्कूल पहुंचने वाले टीचर्स भी आज अप टू डेट हो कर टाइम से पहले ही कक्षाओं में पहुंच गए थे. आखिर नई प्रिंसिपल को इंप्रैस जो करना था. इंग्लिश में पीएचडी, नई प्रिंसिपल डाक्टर कोमल बेहद काबिल, कर्मठ और खुशमिजाज थीं. बेहद सलीके से पहनी गई प्योर सिल्क की बौर्डर पल्ले वाली साड़ी, माथे पर छोटी सी लाल बिंदी, शैंपू किए खुले बाल, मैरून लिपस्टिक और हील वाले सैंडल पहने वे बेहद आकर्षक व्यक्तित्व की स्वामिनी लग रही थीं. आते ही उन्होंने पूरे स्टाफ की मीटिंग ली.

उन्हें देख कर मुझे अपने पर तो शर्म ही आने लगी थी क्योंकि शोभित के जाने के बाद से मेरा तो कुछ करने का मन ही नहीं करता था. यहां तक कि कुकिंग की बेहद शौकीन मैं ने शोभित के जाने के बाद से पूरी किचन ही मेड के हवाले कर दी थी. कवर्ड में ढेरों साड़ियां पड़ी थीं पर मेरा सजनेसंवरने और पहनने का मन ही नहीं करता था. बस, किसी तरह सूट डाल कर स्कूल आ जाती थी. संगीत की शिक्षिका होने के कारण अनेक कार्यक्रमों में संगीत के प्रोग्राम देने वाली और हर दिन हारमोनियम पर रियाज करने वाली मैं ने शोभित के जाने के बाद से न तो कोई प्रस्तुति दी थी और न ही हारमोनियम को हाथ लगाया था.

कोमल मैम को जौइन किए 15 दिन हो गए थे और अपने जोशीले और हंसमुख स्वभाव, स्टाफ के साथ सरलसहज व्यवहार और बच्चों के साथ आत्मीयता के साथ बातचीत कर उन्होंने 15 दिनों में ही सब का दिल जीत लिया था. उन्हें देख कर मैं हमेशा सोचती कि वाह, क्या जिंदगी है. जीना तो कोई इन से सीखे. कोई कमी नहीं है तभी तो इतनी खुशमिजाज रह पाती हैं.

टीचर्सडे आने वाला था. उन्होंने इस अवसर पर स्कूल की टीचर्स के लिए एक अच्छीखासी पार्टी का आयोजन किया था. डाउन पल्ले में पहनी बनारसी साड़ी, मैचिंग ज्वैलरी और खुले बालों में वे किसी अप्सरा जैसी लग रहीं थीं. पूरे दिन ऐंजौय करने के बाद शाम को जब सब घर जाने लगे तो स्कूल गेट पर उन्होंने मुझे देख कर अपनी कार रुकवाई और बोलीं,
“क्या हुआ आज कार नहीं लाईं?”

“आज गाडी सर्विसिंग में है. मैं कैब से निकल जाउंगी.”

“अरे, कैब क्यों…आओ, मेरा ड्राइवर आप को छोड़ देगा,” अपनी कार का गेट खोलते हुए वे बोलीं. उनका आग्रह इतना प्यारा था कि मैं मना नहीं कर पाई और झट से उन की गाड़ी में बैठ गई.

“आप काफी कुछ मैनेज कर लेतीं हैं. आप की साड़ियां तो बहुत ही सुंदर होती हैं, साथ ही आप उन्हें बांधतीं भी बहुत अच्छे से हैं. मेरी तो कब से अनछुई ऐसे ही कवर्ड में पड़ी हैं,” कार में बैठ कर मैं ने उन की तरफ मुखातिब होते हुए कहा.

“मुझे बहुत शौक है साड़ी पहनने का….और अप टू डेट रहने का,” वे बोलीं.

बातें करते कब उन का घर आ गया पता ही न चला. गाङी से उतर कर वे बोलीं,”आओ न शुभी, चाय पी कर जाना. मैं चाय बहुत अच्छी बनाती हूं. अदरक वाली एकदम मस्त…” यों भी कौन मेरा घर में इंतजार कर रहा है. अनुज को आने में भी 2 घंटे शेष हैं और इस बहाने मैडम के घर के लोगों से भी मुलाकात हो जाएगी, यह सोच कर उन के पीछेपीछे घर में प्रवेश कर गई. सलीके से सजे, हर चीज करीने से रखी, आधुनिक सुखसुविधाओं से सुसज्जित उन के घर को देख कर मैं दंग रह गई.

मैं ने अचानक ही पूछ लिया,”मैम, आप के हसबैंड और बच्चे…”
अब तक वे चाय बना कर ले आई थीं. चाय की चुसकी लेते हुए बोलीं,” शुभी मैं यहां अकेली रहती हूं. बिलकुल अकेली.”

“क्यों आप के पति… बच्चे…’’मैं ने अचकचाते हुए कहा क्योंकि मैडम के हंसमुख और बिंदास स्वभाव को देख कर यह कोई सोच भी नहीं सकता था कि वे अकेली रहती हैं.

“शुभी मेरे पति की एक बीमारी से उस समय मौत हो गई थी जब मेरा बेटा रोहित केवल 12 वर्ष का था. बेटे को पढ़ानेलिखाने में मैं ने कोई कसर नहीं छोड़ी…आईआईटी, दिल्ली से मैकेनिकल में इंजीनियरिंग करने के बाद उस की यूएस में जौब लगी तो उस ने इंडिया में ही कोई दूसरी नौकरी करनी चाही ताकि मेरे साथ रह सके पर मैं ने उसे कहा कि मेरे कारण तुम अपनी प्रोग्रैस मत रोको…तुम इंडिया में रह कर भी क्या हमेशा मेरे पास रह पाओगे? बेहतर है कि तुम अपनी जिंदगी अपने तरीके से जिओ.

“फिर…वह अभी अमेरिका में है. अपनी कंपनी में बहुत अच्छी पोजीशन पर है. अपनी पसंद की लड़की से ही वहां उस ने शादी कर ली है और उस ने साफ कर दिया है कि वह अब इंडिया नहीं आएगा. मुझ से बहुत कहा कि वीआरएस ले कर मेरे साथ रहो. पर मैं ने भी कहा कि मैं अपनी नौकरी और इंडिया नहीं छोडूंगी और अपने तरीके से रहूंगी…”

“पर आप को कभी अकेलापन नहीं लगता. मैं तो शोभित के जाने के बाद से ही सब त्याग बैठी हूं मन ही नहीं करता कुछ करने का. जीवन ही निरुद्देश्य सा लगता है.” और आंखों में आंसू भरे मैं ने जब उन्हें शोभित के बारे में बताया तो वे बोलीं,”शुभी, किसी का जाना तो हम रोक नहीं सकते पर अपने जीने का तरीका तो तय कर सकते हैं न. तुम्हारा बेटा तो इस दुनिया में है ही नहीं पर मेरा बेटा तो हो कर भी मेरे पास नहीं है. यदि मुझे कुछ होगा तो तुम्हें क्या लगता है कि सात समुंदर पार बैठा वह आ पाएगा? और फिर मेरे जाने के बाद वह आए या न आए मैं देखने तो नहीं आऊंगी न. तुम्हारे साथ तो तुम्हारे पति हैं, सासूमां हैं. मेरे साथ तो वह भी नहीं. मैं तो निपट अकेली हूं. तुम जानती हो, मेरे पति के जाने के साथ ही पति के घर वालों ने मुझ से नाता ही तोड़ लिया था. अब तुम ही बताओ, क्या मैं जीना छोड़ दूं या फिर हरदम अकेलेपन का रोना रोती रहूं? सब की दया की पात्र बनी रहूं? नहीं इस तरह की जिंदगी मुझे मंजूर नहीं. मेरी जिंदगी मुझे एक बार ही मिली है और मैं इसे भरपूर जीना चाहती हूं. अपने तरीके से और वैसे ही जी भी रही हूं और अंतिम समय तक ऐसे ही जीती भी रहूंगी.”

“पर कभी आप को नहीं लगता कि बुढ़ापे में हर इंसान को एक सहारा चाहिए होता है….कभी इस बारे में सोच कर घबराहट नहीं होती? मैं कभीकभी इस बात को ले कर बहुत परेशान भी हो जाया करती हूं,” मैं ने उत्सुकतावश कहा.

“कभी नहीं लगता शुभी, क्योंकि मेरा मानना है कि इंसान खुद अपना सब से बड़ा सहारा होता है. कोई भी किसी का सहारा नहीं बन सकता. हमें खुद को ही अंदर से इतना मजबूत बनाना होगा कि कभी किसी के सहारे की जरूरत न पड़े. और उस के लिए सब से जरूरी है खुश रहना, अपने मन का ओढ़नापहनना और मन का करना. यह तभी हो पाएगा जब हम अपनेआप पर भरोसा रखेंगे, बिना लोगों की परवाह करे अपनी मरजी से जीएंगे.”

उन की बातें सुन कर तो मानों मेरी आंखें ही खुल गई थी. सच कहूं तो कोमल मैम की सोच ने मुझे खुद पर सोचने पर मजबूर कर दिया. उन्होंने अपने ड्राइवर से मुझे घर छोड़ने के लिए कहा और गेट पर आ कर कहने लगीं,”तुम तो संगीत की टीचर हो, बस उसे ही अपना सहारा बनाओ और खुश रहो डियर. यह जिंदगी दोबारा न मिलेगी…”

“जी… आप से मिल कर, बातें कर के बहुत अच्छा लगा,” कह कर मैं अपने घर की तरफ प्रफुल्लित मन से रवाना हो गई.

अगले दिन अवकाश था. इसलिए सुबहसुबह ही मैं ने डबलबैड के बौक्स में धूल खा रहे अपने हारमोनियम को निकाला और रियाज करना शुरू कर दिया. इस के बाद तो मेरी सोच पर से निराशा का कोहरा पूरी तरह छंट गया. मैं ने अपने साथसाथ अनुज को भी गाना सिखा दिया. यही नहीं, भविष्य में शोभित संगीत ऐकेडमी खोलने तक की प्लानिंग कर डाली थी और अब हम दोनों इतने व्यस्त रहने लगे कि किसी और की बातें सुनने और कुछ उलटापुलटा सोचने का तक भी हमारे पास समय नहीं था.

चारों पीठों के शंकराचार्य नाराज, राम सब के हैं तो मंदिर किस का है, सवाल क्यों?

राम सबके होते तो इन शंकराचार्यों को प्राणप्रतिष्ठा समारोह का बहिष्कार न करना पड़ता. विवाद क्या है, इसे जानने से पहले हिंदू धर्म की संरचना को मौटेतौर पर समझना होगा कि वह प्रमुख रूप से 2 मतों में बंटा है. उन में से पहला है शैव और दूसरा है वैष्णव संप्रदाय. शैव संप्रदाय को मानने वाले शिव की पूजा, उपासना और आराधना करते हैं जबकि वैष्णव अनुयायी विष्णु और उस के अवतारों को मानते हैं.
हालांकि, धर्मग्रंथों के मुताबिक हिंदू प्रमुख रूप से 4 संप्रदायों में बंटे हुए हैं. तीसरा शाक्त संप्रदाय है जो देवी को परमशक्ति मानता है, चौथा स्मार्त संप्रदाय है जो ईश्वर के विभिन्न रूपों को एकसामान मानता है. इन के अलावा और भी कई संप्रदायों का उल्लेख धर्मग्रंथों में मिलता है, मसलन वैदिक, गणपत्य, कौमारम, नाथ और तांत्रिक सहित चार्वाक संप्रदाय वगैरह जो अप्रासंगिक तो नहीं हुए हैं लेकिन महत्त्व खो रहे हैं.

यह है नया विवाद ?

ऐसा कहा जाता है कि एक वक्त में शैव और वैष्णवों के आपसी झगड़ों के चलते समाज में हिंसा बढ़ गई तो शाक्त संप्रदाय का उदय हुआ जो इन दोनों में सुलह या मध्यस्थता कराता था. यह स्त्री को आदिशक्ति मानता है. इस के ज्यादतर मंदिर और उपासक देश के बाहरी इलाकों में मिलते हैं. पश्चिम बंगाल, असम, कश्मीर और दक्षिणी राज्य इन में प्रमुख हैं.

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय ने 2 दिनों पहले ही एक बयान दिया था कि राम मंदिर रामानंद संप्रदाय का है, शैव शाक्त और संन्यासियों का नहीं. न कोई मौका था न कोई मौसम था. इस के बाद भी चंपत राय को यह बयान देने का दस्तूर निभाना पड़ा तो इस के अपने अलग माने भी हैं.

असल में शंकराचार्यों की उजागर नाराजगी से हिंदुओं में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही थी और धर्म के जानकारों में यह मैसेज गया था कि शैव लोग वैष्णव मंदिर में नहीं जाते. इसलिए शंकराचार्य लोग ड्रामा कर रहे हैं. गोवर्धन पीठ जगन्नाथपुरी के शंकराचार्य निश्चलानंद ने दोटूक कहा था कि, ‘मैं कार्यक्रम में ताली बजाने नहीं जाऊंगा क्योंकि प्राण प्रतिष्ठा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आगे कर संत समाज को नजरंदाज किया जा रहा है. मेरी एक मर्यादा है वहां जा कर मैं अपनी प्रतिष्ठा को कम नहीं करूंगा.’

चंपत राय के बयान से कई हिंदुओं ने पहली बार रामानंद संप्रदाय के बारे में जाना कि यह वैष्णवों का है और इस का एक नाम वैरागी संप्रदाय भी है. इस का एक और नाम श्री संप्रदाय भी प्रचलित है. लेकिन यहां श्री से मतलब लक्ष्मी न हो कर सीता होता है. इस के जनक रामानंद स्त्रियों और शूद्रों को भी शिष्य बना लिया करते थे.

मशहूर सूफी कवि कबीर से उन का लिंक मिलता है. कुछ ब्राह्मणवादी लोग तो कबीर को उन का शिष्य बताते हैं, लेकिन यह संदिग्ध है. वैरागी संप्रदाय के लोग मुख्यतया उत्तर प्रदेश, गुजरात और राजस्थान में प्रमुखता से मिलते हैं. ये लोग खुद को योद्धा ब्राह्मण और राम के बेटों लव-कुश का वंशज मानते हैं.

क्यों आक्रामक हो रहे शंकराचार्य ?

चंपत राय ने एक दीर्घकालिक योजना के तहत एक तरह से स्पष्ट कर दिया कि राम मंदिर वैष्णवों का है, शैवों का नहीं. तो एक और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विफर कर बोले, ‘अगर राम मंदिर रामानंद संप्रदाय का है तो उसे उन्हें सौंप देना चाहिए. संत समाज को इस पर कोई आपत्ति नहीं.’

उन्होंने सनातनी ज्ञान जताते यह भी कहा कि चारों पीठों के शंकराचार्यों को कोई रागद्वेष नहीं है लेकिन उन का मानना है कि शास्त्र सम्मत विधि का पालन किए बिना मूर्ति स्थापित किया जाना सनातनी जनता के लिए उचित नहीं है. उन्होंने रामानंद संप्रदाय को मंदिर व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपने के साथसाथ निर्मोही अखाड़े को पूजा का अधिकार देने की बात भी कही.

इस के पहले निश्चलानंद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राम लला की मूर्ति छूने को भी एक खास अंदाज में बयान किया था जिस का आम लोगों ने मतलब यही निकाला था कि चूंकि वर्ण व्यवस्था के मुताबिक नरेंद्र मोदी शूद्र हैं, इसलिए उन्हें राम की मूर्ति छूने का अधिकार नहीं. एक न्यूज चैनल को दिए गए इंटरव्यू में इन शंकराचार्य ने विधानों की बात करते यह भी कहा था कि आंबेडकर की मूर्ति लगाने और रामलला की मूर्ति लगाने के विधान में तो अंतर है ही. यदि इन का पालन नहीं होगा तो भगवान का वास होने के बजाय भूतप्रेतों का वास हो जाएगा.

वर्चस्व और दक्षिणा की है लड़ाई

इन बयानों से हिंदू धर्म की वास्तविकता एक बार फिर उधड कर बाहर आ गई कि इस पर दबदबा तो पंडेपुजारियों और पेशवाओं का ही है. बाकी लोग तो हल्ला मचाने, भीड़ बढ़ाने और शोबाजी के अलावा दानदक्षिणा देने के लिए हैं. अब चंपत राय के बयान के बाद तो और स्पष्ट हो गया है कि राम मंदिर शैव अनुयायियों के लिए नहीं, वैष्णवों के लिए है.

और ये वैष्णव और कोई नहीं बल्कि ऊंची जाति वाले हिंदू हैं जो 22 जनवरी को ले कर ज्यादा उत्साहित हैं और धूमधड़ाका कर रहे हैं. इन के पूजाघरों में हालांकि राम, कृष्ण, शंकर, हनुमान, काली, दुर्गा, गणेश सहित साईं बाबा से ले कर लोकल देवीदेवता सब पूजे जाते हैं लेकिन मन से ये वैष्णव हैं जो शूद्रों से परहेज ही करते हैं क्योंकि उन के देवीदेवता अलग हैं.

झुग्गी, गरीब और दलित बस्तियों में राम और कृष्ण के नहीं बल्कि शिव, हनुमान और देवी के मंदिर ज्यादा होते हैं. और यही चंपत राय कह रहे हैं, जो एक तीर से दो निशाने साधने जैसी बात है. अब भाजपा गलीगली जा कर कहेगी कि राम तो सबके हैं और उन का मंदिर भी उस रामानंदी संप्रदाय का है जिस के गुरु रामानंद जी महाराज जो दलितों को भी गले लगाते थे और औरतें भी उन की शिष्य होती थीं.

दूसरी लड़ाई पैसों की है. हर कोई देख रहा है कि राम मंदिर अब अरबोंखरबों का हो गया है और जिस के हिस्से में यह जाएगा उस की 7 पीढ़ियां तर जाएंगी. अयोध्या अब भाजपा का अघोषित कार्यालय हो गया है और अभी लोकसभा चुनाव तक रहेगा. इस के बाद उस का हाल भी सोमनाथ मंदिर जैसा होना तय दिख रहा है.

हैरानी नहीं होनी चाहिए अगर आने वाले दिनों में राम मंदिर को ले कर शैव और वैष्णव अदालत का रुख करें. रही बात नरेंद्र मोदी की, तो उन्हें भी धर्म का शिकार होना पड़ा है कि वे मूर्ति स्पर्श नहीं कर सकते. यही अपमान कभी पुरी के जगन्नाथ मंदिर में प्रधानमंत्री रहते इंदिरा गांधी को भी सहना पड़ा था लेकिन उन का स्वाभिमान भी सत्ता के आगे बौना पड़ गया था.

सपा और कांग्रेस बीच विलेन बनी बसपा

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी ही लोकसभा चुनाव की नजर से सब से प्रमुख विपक्षी दल हैं. 2019 में सपा 5, बसपा 10 और कांग्रेस को 1 सीट मिली थी. बीतें 5 सालों में हुए उपचुनावों में सपा 2 सीटें भारतीय जनता पार्टी से हार गई. इस से अब उस के पास केवल 3 सांसद हैं. 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश में 2022 में विधानसभा चुनाव भी हुए, उन में भी सपा को छोड़ कांग्रेस और बसपा मुकाबले में कहीं नजर नहीं आईं. सभी दलों को अपनी राजनीतिक जमीन का पूरा अंदाजा है.

2019 का लोकसभा चुनाव सपा और बसपा मिल कर लड़ी थीं. कांग्रेस गठबंधन में शामिल नहीं थी लेकिन अमेठी और रायबरेली सीट पर सपा फ्रैंडली समर्थन दे रही थी. मोटामोटा देखें तो सपा, बसपा, कांग्रेस और लोकदल पिछले चुनाव में एकसाथ थे. बसपा अभी बाहर है पर उस की लड़ाई भी भाजपा से अधिक है. इंडिया गठबंधन में भले ही बसपा न हो पर कांग्रेस की सोच यह है कि बसपा साथ आए. बसपा को साथ लेने से सपा को एतराज है. कांग्रेस उम्मीद कर रही है कि वह सपा-बसपा को एक मंच ले आएगी.

मोदीविरोधी मोरचे की शुरुआत भले ही बिहार के मुख्यमंत्री जनता दल युनाइटेड नीतीश कुमार ने की हो पर उस को आगे बढ़ाने का काम कांग्रेस ने किया. उस की वजह यह है कि कांग्रेस इंडिया गठबंधन का सब से बड़ा पार्टनर है. वह इस भूमिका को अदा करने का काम भी कर रही है. ‘दक्षिणापंथी’ हर संभव इस कोशिश में थे कि सीट बंटवारे के मसले पर इंडिया गठबंधन बिखर जाए. सपा, टीएमसी और आप इस झांसे में आ कर सीट बंटवारे पर तूतू मैंमैं करने भी लगीं. कांग्रेस ने धैर्य दिखाया, जिस से बंटवारा नहीं हो सका.

बड़ी कुर्बानी को तैयार कांग्रेस

कांग्रेस की तरफ से यह कह दिया गया कि उस का फोकस लोकसभा की उन 128 सीटों पर है जहां लड़ाई कांग्रेस और भाजपा के बीच है. 308 सीटें ऐसी हैं जहां पर इंडिया गठबंधन के दल भी मुकाबले में हैं. कांग्रेस इन समीकरणों को देख कर कुल 255 सीटों पर फोकस कर रही है. ऐसे में उस के और सहयोगी दलों के बीच बहुत ज्यादा दिक्कत नहीं है. कांग्रेस अपने से ज्यादा सहयोगी दलों को ले कर परेशान है. पश्चिम बंगाल में टीएमसी और सीपीआईएम, उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा एकसाथ नहीं जुट रहे.

कांग्रेस इंडिया गठबंधन को एकजुट रखने के लिए हर कुर्बानी देने को तैयार है. वह सीट बंटवारे को नाक का सवाल नहीं बनाने जा रही. इस के साथ ही साथ कांग्रेस अपना प्रधानमंत्री भी नहीं बनाना चाहती. कांग्रेस इस के लिए मायावती के नाम पर विचार कर रही है. इस के सब से मुखर विरोधी सपा और टीएमसी हैं. कांग्रेस इन दलों को विश्वास में ले कर ही कोई निणर्य लेना चाहती है.

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ने सीट फामूर्ला 2 तरह के प्लान के साथ तैयार किया है. पहला प्लान जिस में कांग्रेस, सपा और लोकदल है. उस में कांग्रेस अपने लिए 12 से 15 सीटें चाहती है. दूसरे प्लान में कांग्रेस सपा के साथ बसपा को जोड़ कर चल रही है. इस में कांग्रेस 10 सीटों पर तैयार हो जाएगी. बची 70 सीटों पर बसपा और सपा व लोकदल होंगे. 2019 के लोकसभा में सपा 36 और बसपा 37 पर चुनाव लड़ी थीं. कुछ इसी तरह के बंटवारे की राह निकलने की उम्मीद है.

सत्ता नहीं, मुद्दे हैं खास

15 जनवरी को मायावती का जन्मदिन है. राजनीतिक हलकों में यह कयास लगाया जा रहा है कि इस दिन कुछ बड़ा हो सकता है. बसपा और सपा के बीच कांग्रेस सीटों की कुर्बानी देने का तैयार है. कांग्रेस के लिए सत्ता से अधिक मुद्दे खास हैं. केंद्र की सरकार को हटाना जरूरी है. अगर भाजपा को नहीं हटाया गया तो सभी दलों पर खतरा मंडरा रहा है. यह बात कांग्रेस ही नहीं, इंडिया गठबंधन के दूसरे दल भी जानते हैं. इसलिए आपस में सीट बंटवारे को ले कर कोई दिक्कत नहीं है. इन सब का एक ही फामूर्ला है कि जहां जो दल भाजपा को हरा सकता है वह हराए. आपस में टकराव न करें.

बारबार ‘दक्षिणापंथी’ मीडिया के समर्थक इस बात को दिखाते रहते हैं कि इंडिया गठबंधन सीट बंटवारा कैसे करेगी? उन के बीच लड़ाई है. असल में आपस में कोई लड़ाई नहीं है. गठबंधन की लड़ाई केवल भाजपा से होगी. जो भी दिक्कतें आएंगी, कांग्रेस बड़े पार्टनर के रूप में उन की कांउसलिंग करती है, अपने को दो कदम पीछे हटाती है.

राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे की जोड़ी अलग तरह की राजनीति देश के सामने पेश करने के रोडमैप पर चल रही है. अब छोटे दल भी इस बात को समझ रहे हैं. इंडिया गठबंधन की मीटिग न होने की एक वजह यह होती है कि हर मीटिंग के बाद कोई न कोई नेता कोई ऐसी बात बोल देता है जिस को दक्षिणपंथी समर्थक मीडिया तिल का ताड़ बना देती है. जिस से खटास बढ़ रही है. अब सभी दलों के नेता आपस में बात कर के मसले सुलझा रहे हैं.

Saras Salil Cine Award : भोजपुरी कलाकारों ने जीता दर्शकों का दिल, देखें Photos

Saras Salil Cine Award 2024 : भोजपुरी सिनेमा में सब से बड़े ‘सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड’ का 5वां साल कई माने में काफी खास रहा. इस साल भी इस का आयोजन उत्तर प्रदेश में ‘अयोध्या महोत्सव’ मंच पर 4 जनवरी, 2024 को किया गया.

विमल और माही की जोड़ी छाई रही

हीरो विमल पांडेय और हीरोइन माही खान ने इस अवार्ड शो के होस्ट की जिम्मेदारी संभाली. इन की जोड़ी पिंक और ब्लैक ड्रैस में बेहद खूबसूरत नजर आ रही थी. इन दोनों ने भोजपुरिया बोली में बेहद खास अंदाज से शुरुआत कर पूरे समय अपने चुलबुले और फनी मूमैंट्स द्वारा लोगों को आखिर तक बांधे रखा और बीचबीच में हलकेफुलके अंदाज में हंसीमजाक से लोगों का मनोरंजन करते रहे.

खूब खिंची सैल्फी

‘सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड’ के प्रति दीवानगी केवल दर्शकों में ही नहीं, बल्कि भोजपुरी के तमाम बड़े हीरोहीरोइनों और टैक्निशियनों में भी दिखी. कलाकार अवार्ड पाने के बाद एकदूसरे के साथ खूब सैल्फी ले रहे थे.

कार्यक्रम को होस्ट कर रहे विमल पांडेय और माही खान की जोड़ी के साथ कई ऐक्टरों ने उन के शानदार अंदाज में ऐंकरिंग के लिए बधाई देते हुए सैल्फी ली. बहुत से ऐक्टरों ने उसे अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा भी किया.

दर्शकों को नहीं किया निराश

‘सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड’ के दौरान एक ओर दर्शक भोजपुरी के सुपर स्टार हीरो और हीरोइनों को सामने पा कर गदगद थे, वहीं दूसरी ओर उन के साथ सैल्फी लेने की होड़ मची थी. दिनेशलाल यादव ‘निरहुआ’ के साथ दर्शक सैल्फी लेते रहे, लेकिन एक बार भी ‘निरहुआ’ के चेहरे पर गुस्सा और झल्लाहट नहीं दिखी. कुछ यही हाल आम्रपाली दुबे, अनारा गुप्ता, रक्षा गुप्ता, सपना चैहान, पल्लवी गिरि के साथ हुआ. इन हसीनाओं ने अपने फैंस को खूब सैल्फी दी. अंजना सिंह और देव सिंह के साथ ही फिल्मों में विलेन का किरदार निभा कर पौपुलर हुए संजय पांडेय और अयाज खान के साथ भी सैल्फी लेने वालों की होड़ मची रही.

आर्यन बाबू ने हीरोइनों को स्टेज पर नचाया

भोजपुरी फिल्मों में चाइल्ड ऐक्टर के तौर पर अपने हुनर और ऐक्टिंग की बदौलत मशहूर हुए आर्यन बाबू ने कड़ाके की ठंड में लोगों में एनर्जी भर दी और अपने निराले अंदाज में उन्हें खूब हंसाया. आर्यन बाबू यहीं नहीं रुके और उन्होंने माइक थाम कर जब गाना शुरू किया, तो दिनेशलाल यादव ‘निरहुआ’ और आम्रपाली दुबे सहित सभी ऐक्टर दर्शकों के साथ तालियां बजाने लगे.

आर्यन बाबू ने अपने डांस में तब और ज्यादा ट्विस्ट ला दिया, जब उन्होंने ‘मिस जम्मू’ और फेमस ऐक्ट्रैस अनारा गुप्ता, रक्षा गुप्ता, सपना चैहान को स्टेज पर थिरकने को मजबूर कर दिया. चाइल्ड ऐक्टर आयुषी मिश्र ने भी लोगों को खूब गुदगुदाया.

देसी नाच ‘कहरवा’ में झूमे ऐक्टर

‘अयोध्या महोत्सव मंच’ पर आयोजित हुए ‘5वें सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड’ में जो सब से खास रहा, वह था ‘कहरवा’. अवधी बोली में गाए जाने वाले गीत के साथ जब अवधी कलाकार राजेश गौड़ की अगुआई में तकरीबन 3 दर्जन लड़केलड़कियों की टीम स्टेज पर चढ़ी, तो लोगों की सांसें थम सी गईं. इन युवा कलाकारों ने खतरनाक स्टंट के साथ देसी अंदाज में जो डांस पेश किया, उस ने लोगों में रोमांच भर दिया.

भारतीय पर्यटकों के न जाने से मालदीव पर क्या होगा असर?

खूबसूरत भौगोलिक दृश्य रखने वाले हिंद महासागर में स्थित मालदीव देश इन दिनों चर्चा में है. मालदीव पानी के नीचे के दृश्यों और साफ पानी के कारण दुनिया के सर्वश्रेष्ठ मनोरंजक गोताखोरी स्थलों में से एक माना जाता है. पूरे द्वीपों में 60 से अधिक गोतास्थल हैं. एक वैश्विक सर्वेक्षण के अनुसार, इसे दुनिया का सब से वांछित हनीमून स्थल भी बताया गया है.
मालदीव में लगभग 1,190 मोंगिया द्वीप शामिल हैं, जो उतरदक्षिण दिशा के बराबर 26 प्रवाल द्वीपों की दोहरी चेन में संगठित हैं. यह लगभग 90,000 वर्ग किलोमीटर में फैला है.

पर्यटन प्रेमियों की पसंद

मालदीव का मुद्दा इन दिनों चर्चा में है. इस की खूबसूरती को ले कर भी बातें हो रही हैं. वहीं, मालदीव की टैंशन भी बढ़ने लगी है, दरअसल, वहां का पर्यटन भारतीय पयर्टकों से गुलजार होता है लेकिन कुछ वादविवाद की वजह से सैलिब्रिटीज से ले कर टूरिज्म डिपार्टमैंट सभी ने मिल कर मालदीव का बहिष्कार किया है.

इस से भारत के टूरिज्म को कुछ फर्क नहीं पड़ेगा. लेकिन दावा किया गया है कि मालदीव जैसे छोटे देश को फर्क अवश्य पड़ेगा क्योंकि भारत की अधिकतर आबादी वर्किंग क्लास युवाओं की है, जिस की एक बड़ी संख्या पर्यटन के लिए विदेश जाने में आज समर्थ और उत्सुक रहती है.

व्यस्त जीवनशैली से निकल कर वे सुकून के कुछ पल बिताने में विश्वास रखती है, यही वजह है कि सिंगल टूरिज्म, लेडी ग्रुप टूरिज्म, सीनियर सिटीजन टूरिज्म, ग्रुप टूरिज्म आदि को पिछले कुछ सालों में बढ़ावा मिला है.

पर्यटन पर नहीं पड़ेगा असर

मीडिया के हल्ले की तर्ज पर इस बारे में झेलम अमित चौबल केसरी टूर्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरैक्टर झेलम केसरी कहती हैं कि कोविड-19 महामारी के बाद मालदीव के लिए पर्यटन प्रमुख बाजार के रूप में भारत उभरा है. उस समय जब सभी देशों के दरवाजे पर्यटन के लिए बंद थे, उस समय भारत से अधिकतर पर्यटक मालदीव गए.

दिसंबर 2020 और जून 2023 के बीच मालदीव के लिए भारत दुनिया का सब से बड़ा पर्यटक बाजार रहा है. झेलम केसरी आगे कहती हैं, “ऐसे में इस चर्चा में साथ देते हुए मालदीव में टूरिज्म पर मैं ने भी रोक लगा दी है. अभी तक करीब 200 लोगों के मालदीव जाने का प्लान था, जिसे मैं ने कैंसिल कर दिया है.” हालांकि, वे यह अभी छिपा रही हैं कि जिन्होंने एयर टिकट खरीद लिए हैं और होटलों का पूरा भुगतान कर दिया है, क्या वे पैसे स्वाह होने देंगे.

वे कहती हैं, “मेरा मानना है कि केवल मालदीव न जाने से भारत की टूरिज्म इंडस्ट्री को कुछ फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन मालदीव को अवश्य पड़ेगा, क्योंकि मेरे यहां से काफी लोग वहां जाते हैं. मालदीव के अलावा पूरा विश्व पर्यटन के लिए खुला है और हमारे देश की एक बड़ी संख्या आज बाहर घूमना पसंद करती है. साथ ही, वे आर्थिक रूप से मजबूत भी हैं. समवेत रूप में लिया गया बहिष्कार का निर्णय हमेशा अच्छा ही होता है. भारत आज एक बड़ी कामकाजी जनसंख्या के साथ आगे बढ़ रहा है. ऐसे में सभी उस की बात सुनते हैं, जबकि पहले ऐसा नहीं था. पहले भारत के किसी भी निर्णय पर दूसरे देश अनदेखा या मज़ाक बना लिया करते थे, जो अब संभव नहीं हो सकेगा, क्योंकि हमारे युवा जागरूक हैं.”

क्या कहते हैं आंकड़े ?

मालदीव के पर्यटन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2023 में मालदीव में कुल पर्यटकों के आगमन में भारतीयों की हिस्सेदारी सिर्फ 11.2 प्रतिशत (18.42 लाख) थी, जबकि 11.1 फीसदी हिस्सेदारी के साथ रूस दूसरे स्थान पर था. वहीं, 5 साल पहले के आंकड़ों को देखें तो 2018 में मालदीव में भारतीय यात्रियों की हिस्सेदारी सिर्फ 6.1 प्रतिशत थी, लेकिन अगले कुछ वर्षों में इस में वृद्धि हुई.

कोविड महामारी के दौरान और उस के बाद भारतीय पर्यटकों से मालदीव में बहार रही है. 2020, 2021 और 2022 में मालदीव के लिए भारतीय पर्यटक सोर्स मार्केट की सूची में शीर्ष पर रहे हैं. भारतीय पर्यटकों की हिस्सेदारी की बात करें तो 2020 में 11.3 प्रतिशत, 2021 में 22.1 प्रतिशत और 2022 में 14.4 प्रतिशत थी.

बुकिंग हुई रद्द

कई नामचीन टूर्स एंड ट्रैवल्स ने भी मालदीव की बुकिंग रद्द कर दी है, ताकि इस का असर मालदीव पर पड़े. मालदीव पर्यटन मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि 2018 में 90 हजार 474 (6.10 फीसदी), 2019 में 1 लाख 66 हजार 30 (9.75 फीसदी), 2020 में 62 हजार 960 (11.33 फीसदी), 2021 में 2 लाख 91 हजार 787 (22.07 फीसदी), 2022 में 2 लाख 41 हजार 382 (14.41 फीसदी), 2 लाख 6 हजार 26 (11.18 फीसदी) भारतीय पर्यटक मालदीव पहुंचे हैं. यहां पर जो आंकड़े प्रतिशत में दिए गए हैं वे मालदीव पहुंचने वाले कुल पर्यटकों में से भारतीय टूरिस्ट्स की हिस्सेदारी को दर्शा रहे हैं.

भारतीय नहीं आएंगे तो मालदीव में दूसरे देशों के पर्यटक आने लगेंगे. हो सकता है होटलों के किराए 2-4 फीसदी कम हो जाएं पर इस वजह से मालदीव सरकार अपनी नीति नहीं बदलेगी. मालदीव के राष्ट्रपति के तुर्की और चीन के दौरे के बाद मालदीव के हौसले अभी पस्त नहीं हुए हैं, जैसा भारत में कहा जा रहा है.

एक नजर इधर भी

भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक, मालदीव के पर्यटन उद्योग को सपोर्ट करने के लिए 34 द्वीपों पर कई तरह के वाटर सैनिटाइजेशन प्रोग्राम चल रहे हैं. इंडियन एयरपोर्ट अथौरिटी ने हनीमाधू और गण अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डा पुनर्विकास परियोजनाओं के लिए डीपीआर भी तैयार कर लिया है.

वहीं, भारतीय स्टेट बैंक ने साल 1974 से मालदीव की द्वीप रिजौर्ट्स के विकास और समुद्री उत्पादों के निर्यात में महत्त्वपूर्ण सहायता की है. चीन द्वारा दी गई आर्थिक सहायता भी मालदीव के लिए बहुत जरूरी है.

बच्चे की छोटी हाइट से हैं परेशान, तो खिलाएं ये फूड्स

Foods To Increase Height : खानपान हर किसी की जिंदगी में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है. खासतौर पर बच्चों के विकास में. अगर पेरैंट्स अपने बच्चों को बचपन से ही हेल्दी चीजें नहीं खिलाते हैं, तो इस का सीधा असर उन की सेहत और हाइट पर पड़ता है. इस के अलावा जेनेटिक कारणों की वजह से भी कई बच्चों की हाइट नहीं बढ़ पाती है. ऐसे में जरूरी है कि मातापिता अपने बच्चों की डाइट का विशेष ध्यान रखें.

अगर आप भी इस बात से परेशान हैं कि आप के बच्चे की हाइट कम न रह जाए. तो उन की डाइट में कुछ खास फूड्स को जरूर शामिल करें. आइए जानते है उन फूड्स (Foods To Increase Height) के बारे में, जिन्हें खाने से बच्चों की हाइट में सुधार हो सकता है.

डेयरी प्रोडक्ट्स

बच्चों की लंबाई बढ़ाने के लिए आप बचपन से ही उन्हें दूध, दही, पनीर आदि चीजें खिलाएं. डेयरी प्रोडक्ट्स में विटामिन ए, विटामिन बी, विटामिन डी, विटामिन ई, प्रोटीन और कैल्शियम की उच्च मात्रा होती है. जो बच्चों की ग्रोथ में मदद करते हैं.

हरी पत्तेदार सब्जियां

बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए उन्हें हरी सब्जियां जरूर खिलाएं. ज्यादातार हरी सब्जियों (Foods To Increase Height) में विटामिन, मैग्नीशियम, पोटैशियम, कैल्शियम, फाइबर, आयरन और फोलेट जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं.

केला

अगर आप अपने बच्चों की हाइट बढ़ाना चाहते हैं, तो बचपन से ही उन्हें पौष्टिक गुणों से भरपूर केला खिलाएं. केले में सभी जरूरी पोष्क तत्व होते हैं. जो हाइट बढ़ने में मदद करते है.

अंडे

आप को बता दें कि जब बच्चों के शरीर में पोषक तत्वों की कमी होती है, तो भी कई बार उन की हाइट नहीं बढ़ती है. इसलिए बचपन से ही उन की डाइट में विटामिन बी2 और प्रोटीन युक्त चीजें जैसे कि अंडे (Foods To Increase Height) शामिल करें. जो बच्चों की लंबाई बढ़ाने में सहायक होते हैं.

अधिक जानकारी के लिए आप हमेशा डाक्टर से परामर्श लें.

एक्स पति से बदला लेने के लिए 4 साल के बेटे के कत्ल की सनसनीखेज दास्तां

आईने के सामने की सतह जितनी साफ और चमकदार नजर आती है, उस के पीछे का हिस्सा उतना ही बदरंग, काला और खुरदरा होता है. आर्टिफिशियल इंटैलिजैंस स्टार्टअप माइंडफुल एआई लैब की को-फाउंडर और सीईओ सूचना सेठ की जिंदगी भी उसी आईने की तरह थी, आगे से चमकदार और पीछे भयावह कालिमा समेटे हुए.

सूचना सेठ इस कदर तनाव, घृणा, जलन, सबक सिखाने और बदला लेने की भावना से भरी हुई थी कि अपने 4 साल के मासूम बेटे को अपने हाथों से कत्ल करते समय उस के हाथ नहीं कांपे. अपने बेटे के कत्ल की साजिश रचते हुए उस के भीतर की मां ने उसे एक बार भी नहीं झकझोरा.

क्या एक उच्च दर्जे की पढ़ीलिखी औरत, जो समाज को नेतृत्व देने की क्षमता रखती है, बदले की भावना में इतनी अंधी हो सकती है कि ह्त्या जैसा जघन्य कृत्य कर जाए, वह भी अपने ही बच्चे की ह्त्या!

39 साल की सूचना सेठ 6 जनवरी को गोवा के सोल बनयान ग्रांडे होटल में अपने 4 साल के बेटे के साथ आई थी. 8 जनवरी को जब उस ने होटल से चैकआउट किया तब उस का बेटा उस के साथ नहीं था. होटल स्टाफ ने बेटे के बारे में पूछा तो सूचना सेठ ने कहा कि वह गोवा के फातोर्डा में एक रिश्तेदार के घर पर है. उस ने रिसैप्शनिस्ट से कहा कि वह उस के बेंगलुरु जाने के लिए कोई टैक्सी बुक करवा दे.

रिसैप्शनिस्ट ने कहा कि टैक्सी एक्सपैंसिव पड़ेगी, आप फ्लाइट ले कर चली जाइए, वह सस्ती होगी. मगर सूचना सेठ ने बाईरोड जाने पर ही जोर दिया तो उस के लिए एक कैब बुक करा दी गई. सूचना अपना सामान ले कर निकली. उधर हाउसकीपिंग स्टाफ जब उस का छोड़ा गया रूम साफ करने पहुंचा तो उस को वहां खून के धब्बे मिले. स्टाफ ने इस की सूचना होटल के मालिक को दी और मालिक ने तुरंत पुलिस को इन्फौर्म के दिया.

पुलिस ने तुरंत उस कैब ड्राइवर को फोन लगाया और कोंकणी भाषा में बात करते हुए उस से कहा कि जिस मैडम को वह ले कर जा रहा है उस को बताए बिना वह कैब को कर्नाटक के चित्रदुर्ग पुलिस स्टेशन ले जाए. ड्राइवर ने पुलिस के इंस्ट्रक्शन के अनुसार गाड़ी पुलिस स्टेशन पर ला कर खड़ी कर दी, जहां सूचना सेठ को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. सूचना सेठ के सामान की तलाशी लेने पर उस के बच्चे की लाश पुलिस को उस के एक बैग में मिली.

सूचना सेठ ने अपने बच्चे की हत्या क्यों की? इस सवाल के जवाब में जो कहानी निकल कर आई वह एक ऐसी औरत को सामने लाती है जो एक तरफ बहुत पढ़ीलिखी, मेहनती, सैल्फमेड, नेतृत्व क्षमता से भरपूर, उद्योग जगत की अति महत्त्वाकांक्षी और समाज में अपनी हैसियत रखने वाली निर्भीक औरत है तो वहीं दूसरी तरफ वह सामाजिक और पारिवारिक चक्रव्यूह में फंसी, टूटन, तनाव, गुस्से, अपमान, नफरत, झगड़े, कानूनी पचड़े में घिरी औरत, जिस के अंदर अपने पति से बदला लेने का लावा उबाल मार रहा था जिस के चलते उस ने अपने बेटे को मौत की नींद सुला दिया.

हत्या की वजह जानने से पहले सूचना सेठ की शैक्षिक योग्यताओं पर एक नजर डालते हैं. सूचना सेठ एक एथिक एक्सपर्ट (नैतिकता विशेषज्ञ) और डेटा वैज्ञानिक है, जिस के पास डेटा विज्ञान टीमों को सलाह देने और स्टार्टअप व उद्योग अनुसंधान प्रयोगशालाओं में मशीन लर्निंग समाधानों को स्केल करने का 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वह एआई एथिक्स सूची में 100 प्रतिभाशाली महिलाओं में से एक है. वह डेटा एंड सोसाइटी में मोजिला फैलो, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के बर्कमैन क्लेन सैंटर में फैलो और रमन रिसर्च इंस्टिट्यूट में रिसर्च फैलो रही है और उस के पास प्राकृतिक भाषा (नेचुरल लैंग्वेज) प्रसंस्करण में पेटेंट भी है. ऐसी प्रतिभाशाली लड़की की शादी वर्ष 2010 में वेंकटरमन से हुई जो एक एआई डैवलपर है.

शादी के बाद दोनों में वैसी ही नोकझोंक चलती रही जैसी आमतौर पर भारतीय घरों में होती है. शादी के 9 साल बाद वर्ष 2019 में सूचना ने एक बेटे को जन्म दिया. मगर बेटे के जन्म के बाद से पतिपत्नी में झगड़े काफी बढ़ गए. 2020 से सूचना और उस के पति के वेंकटरमन के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों ने तलाक ले लिया.

कोर्ट ने बच्चे की कस्टडी सूचना सेठ को दी और आदेश दिया था कि वेंकटरमन अपने बच्चे से हर रविवार को मिल सकता है. मगर सूचना अपने पति वेंकटरमन से इतनी नफरत करने लगी थी कि वह नहीं चाहती थी कि वह अपने बेटे से मिलने आए और उस की नजरों के सामने पड़े. इस नफरत ने उस की बुद्धि कुंद कर दी और वह एक ऐसे जघन्य अपराध की तरफ बढ़ गई जिस को सुन कर एकदम मुंह से यही निकलता है- यह कैसी मां?

न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी कहावत को चरितार्थ करते हुए सूचना सेठ ने बच्चे को ही खत्म करने का भयावह प्लान बना डाला. उस ने अपने बेटे को गोवा घुमाने का प्रलोभन दिया. 4 वर्ष का मासूम बालक घूमने की बात सुन कर आह्लादित हो उठा. सूचना बेटे को साथ ले कर गोवा गई और वहां होटल के कमरे में उस का कत्ल कर के लाश ठिकाने लगाने के उद्देश्य से बैग में भर कर टैक्सी से बेंगलुरु के लिए रवाना हो गई. यह तो होटल स्टाफ की तेजतर्रारी काम आ गई और सूचना को बीच राह में ही पुलिस ने लाश के साथ दबोच लिया.

यह आपराधिक घटना भारतीय समाज में विवाह संस्था में भर चुकी सड़ांध, मनुष्य के नैतिक पतन, मानवीय गुणों और सहनशीलता के ह्रास और महत्त्वाकांक्षाओं के टकराव को उजागर करती है. ऐसी तमाम कहानियां भारतीय समाज में बहुत तेजी से बढ़ रही हैं जहां मांबाप के बीच चल रहे झगड़े का खमियाजा उन के मासूम बच्चों को उठाना पड़ रहा है. मांबाप की रोजरोज की लड़ाइयों का ही असर है कि उन के बच्चे उग्र स्वभाव के और आपराधिक गतिविधियों में लिप्त हो जाते हैं. घर के सदस्यों के बीच तनाव बच्चों को शराब और ड्रग्स की तरफ धकेल रहा है.

Weight Loss: सर्दियों में भी वजन कम करना है आसान, इन फलों को बनाएं अपनी डाइट का हिस्सा

Winter Fruits For Weight Loss : सर्दियों में आलस तो बढ़ता ही है. साथ ही मौसमी बीमारियों के होने का खतरा भी बढ़ जाता है. इस के अलावा इस मौसम में ज्यादातर लोगों का कुछ भी काम करने का भी मन नहीं करता है. ऐसे में वजन बढ़ना तो आम बात है. हालांकि हेल्दी डाइट और रोजाना एक्सरसाइज करने से बहुत हद तक वजन को कंट्रोल किया जा सकता है. वहीं इस के अलावा अपनी डाइट में कुछ फलों को शामिल करने से भी वेट लौस में मदद मिलती है.

दरअसल, फलों में कई तरह के पोषक तत्वों और एंटीऔक्सीडेंट गुणों की भरपूर मात्रा होती है. जो पेट की चर्बी कम करन में काफी मददगार होते हैं. इसी के साथ इन के सेवन से विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से भी छुटकारा मिलता है. तो आइए जानते हैं, वजन कम करने के लिए आप अपनी डाइट में किन फलों को शामिल कर सकते हैं.

सर्दियों में वेट कंट्रोल करने के लिए खाएं ये फल

संतरे

ठंड के मौसम में संतरे खाना शरीर के लिए काफी फायदेमंद होता है. इसमें विटामिन सी, पोटैशियम, फाइबर और मिनरल की उच्च मात्रा होती है. जो शरीर को डीटोक्स करने का काम करते है, जिससे धीरेधीरे वजन कम करने में भी मदद मिलती है. इस के अलावा संतरे में कैलोरी की भी कम मात्रा होती है.

कस्टर्ड सेब

कस्टर्ड सेब (Winter Fruits For Weight Loss) को विटामिन और मिनरल दोनों का बेहतरीन स्त्रोत माना जाता है. इसी वजह से सर्दियों के मौसम में इसे खाने की सलाह दी जाती है. इस के अलावा इस में मैग्नीशियम, पोटैशियम, आयरन, कापर, फाइबर, विटामिन ए और सी की भी उच्च मात्रा होती है. जिस से कब्ज की समस्या से तो छुटकारा मिलता ही है. साथ ही वेट लौस में भी मदद मिलती है.

अनार

जिन लोगों को अपना वजन कम करना है. उन्हें तो अपनी डाइट में अनार को शामिल करना चाहिए. इस फल में कैलोरी की बहुत कम मात्रा होती है, जिस के नियमित सेवन से वजन नियंत्रण में रहता है. वहीं दूसरी तरफ अनार में मिनरल और फाइबर आदि एंटीऔक्सीडेंट गुणों की भी भरपूर मात्रा होती है. इसलिए इसे प्री और पोस्ट वर्कआउट के दौरान खाने की सलाह दी जाती हैं.

अमरूद

सर्दियों के मौसम में सबसे ज्यादा अमरूद का ही सेवन किया जाता है. क्योंकि इस मौसम में इस का स्वाद बढ़ जाता है. इस के अलावा विंटर में अमरूद (Winter Fruits For Weight Loss) खाना हेल्दी भी होता है. आप को बता दें कि अमरूद में प्रोटीन और फाइबर दोनों की उच्च मात्रा होती है. जिस से पेट लंबे समय तक भरा-भरा रहता है और बारबार भूख नहीं लगती है. इसी वजह से ये फल तेजी से वजन कम करने में सहायक है.

अधिक जानकारी के लिए आप हमेशा डॉक्टर से परामर्श लें.

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