Download App

गया जमाना जीरो साइज का, अब है भरेपूरे शरीर को सलाम

फैशन के बारे में कहा जाता है कि वह हर 6 माह में बदल जाता है. मगर इस बार फैशन की ग्लैमरस दुनिया में क्रांति हो रही है. पिछले कुछ अरसे से दुनिया पर जीरो साइज का एकछत्र राज चल रहा था यानी मौडल जितनी दुबलीपतली, उतनी ही अच्छी. किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि ग्लैमरस फैशन उद्योग जीरो साइज की सनक को अलविदा कह भरेपूरे शरीर और उभारों को सलाम करने लगेगा.

जीरो साइज अब फैशन नहीं रह गया है. अब लड़कियां अपने शरीर, अपने उभारों को ले कर शर्मसार नहीं होंगी. हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय फैशन की दुनिया के कांगलोमरेट एलवीएमएच और केरिंग ने एक चार्टर जारी किया है, जिस के जरीए वे दुनियाभर में उन मौडलों की भरती बंद करेंगे जो बहुत दुबलीपतली होंगी. उन के चार्टर के मुताबिक उन के सभी ब्रैंड उन मौडलों पर पाबंदी लगाएंगे जो फ्रैंच साइज 34 से कम होंगी. यहां उल्लेखनीय है कि फ्रैंच साइज 32 अमेरिकी साइज 0 के बराबर होता है. इसराइल ने तो 2013 में ही पतली मौडलों पर पाबंदी लगा दी थी.

lifestyle

बड़ा फैसला

फैशन की दुनिया में फ्रांस पूरे विश्व का नेतृत्व करता है. लेकिन फ्रैंच सरकार ने कुछ समय पहले एक ऐसा फैसला किया, जिस के कारण अब जल्द ही फैशन की दुनिया में खूबसूरती के पैमाने बदल जाएंगे. दरअसल, फ्रांस में साइज जीरो मौडल और मौडलिंग पर प्रतिबंध लग गया. फैशन और खूबसूरती को केंद्र में रख कर दुनिया में चलने वाले उद्योग के लिए अपनेआप में यह बहुत बड़ा फैसला है. हालांकि इस से पहले 2006 में इटली और स्पेन में साइज जीरो पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है. अब जब फ्रांस ने यह फैसला किया है तो हर तरफ चर्चा हो रही है. इस की वजह यह है कि फ्रांस या कहें पैरिस ही फैशन का पैमाना तय करता रहा है. इसी कारण दुनिया की फैशन इंडस्ट्री इस फैसले से भौंचक्क रह गई.

सेहत के लिए सरकारी जांच

दरअसल, प्रतिबंध लगाते हुए फ्रांस की सरकार ने संसद में इस सिलसिले में एक कानून भी पास किया कि जिन मौडल्स का बौडी मास इंडैक्स एक तय पैमाने से कम है, उन के जरीए अपने उत्पाद का प्रचार नहीं किया जा सकेगा और न ही उन्हें फैशन शो का हिस्सा बनाया जा सकता.

इस कानून का उल्लंघन होने पर 6 महीने तक की सजा का प्रावधान किया गया है. इतना ही नहीं सजा के साथसाथ जुर्माना भी हो सकता है.

मौडलों के लिए सरकारी निर्देश में साफतौर पर कहा गया है कि मौडलिंग कैरियर शुरू करने से पहले सेहत के लिए सरकारी जांच से गुजरना होगा. जांच में मौडल की लंबाई और लंबाई के अनुपात में वजन और चेहरे के गठन की जांच करानी होगी. इस के बाद एक फिटनैस सर्टिफिकेट दिया जाएगा. इस के बगैर कैरियर की शुरुआत नहीं हो सकती. इस का अनुकरण जानेमाने फैशन हाउसेज ने किया है.

भारतीयों का अलग है पैमाना

क्रिश्चियन डिओर, दिवेंचे, सैंट लृरंट और गुक्की में किसी साइज पर पाबंदी नहीं लगाई है. मगर मौडलों के स्वस्थ होने की गारंटी दी गई है. यह तय किया है कि 16 वर्ष से कम उम्र की लडकियों को बालिक की तरह पोज नहीं किया जाएगा. दरअसल, पिछले काफी समय से यह आरोप लगता रहा है कि फैशन उद्योग खानपान में डिसऔर्डर को बढ़ावा दे रहा है.

भारत में अंतर्राष्ट्रीय फैशन कंपनियों के फैसलों का अनुकूल असर पड़ा है. वे उस का समर्थन करते हुए सफाई देते हैं. कई भारतीय फैशन शो निर्माता इस बारे में कहते हैं, ‘‘दुनियाभर में भले ही साइज जीरो फैशनेबल माना जाता हो, मगर हमारे देश में हमेशा भरेपूरे शरीर और उभारों वाली मौडल रही हैं. यह इस बात का प्रतीक है कि भारत के लोगों का सौंदर्यबोध फैशन उद्योग से प्रभावित नहीं होता, वह फिल्म उद्योग से प्रभावित होता है. बौलीवुड का लोगों पर जबरदस्त असर है. दशकों से वह भरेपूरे शरीर और उभारों वाली अभिनेत्रियों को ही महत्त्व देता रहा है. पिछले कुछ वर्षों में ही कुछ छरहरी अभिनेत्रियों को उस ने महत्त्व दिया है. वह भी इसलिए क्योंकि ये मौडल फैशन उद्योग से आई हुई थीं.’’

भरेपूरे मौडलों की अलग है पहचान

भारतीय मौडल सानिया शेख कहती हैं, ‘‘अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य पर हुआ यह परिवर्तन महत्त्वपूर्ण है. मेरा मानना है कि साइज जीरो सैद्घांतिक तौर पर ही होता है. हमारे देश में जीरो साइज कभी नहीं रहा. उद्योग भरेपूरे शरीर वाली मौडलों को ही पसंद करता है. हमारे उद्योग में भी भरेपूरे शरीर की मौडलों को ही पसंद किया जाता है, क्योंकि हमारे यहां बौडी टाइप ऐंगुलर नहीं उभारों वाला है. हमारे यहां रनवे पर कुछ भारी कंधों वाली होती हैं, तो कुछ भारी नितंबों वाली तो कुछ चौड़ी कमर वाली. उद्योग से किसी तरह का दबाव नहीं होता. फिर भारतीय परिधान भी भरेपूरे बदन पर ज्यादा अच्छे लगते हैं.’’

स्वीकारा जा रहा प्लस साइज

डिजाइनर जोड़ी फाल्गुनी ऐंड शेन का कहना है, ‘‘हमारे देश में 50 फीसदी से अधिक महिलाओं का साइज 12 या इस से अधिक है. परिधान उद्योग इस पर ध्यान दे रहा है. आज रनवे से ले कर फैशन स्टोर्स और पत्रिकाओं के पन्नों पर भी प्लस साइज वाली महिलाओं की मौजूदगी नजर आ रही है. यह इसलिए नहीं है, क्योंकि उद्योग ने मान लिया है कि भारी भरकम शरीर होना सही है, बल्कि इसलिए कि उद्योग व्यावसायिक तौर पर इन्हें नजरअंदाज नहीं कर सकता.’’

‘‘एक समुदाय के तौर पर फैशन उद्योग बौडी इमेज को ले कर सकारात्मक रुख अपना रहा है और यह शानदार है, क्योंकि अब समय आ गया है. जब हमें महिलाओं को खुद को उसी स्वरूप में स्वीकार करने में मदद करनी होगी जैसी वे हैं, न कि फैशन पत्रिकाओं में फोटोशौप की मदद से खूबसूरत दिखती दुबलीपतली मौडलों जैसे अडेल, एमी शूमर, एशले ग्राहम, स्टेफनिया फरेरो जैसी वैश्विक हस्तियां और विद्या बालन व हुमा कुरैशी जैसी भारतीय सैलिब्रिटीज अपने कर्वी फिगर के साथ खुद को साबित कर रही हैं. इन्हें देख कर आम महिलाएं आत्मविश्वास के साथ अपने प्लस साइज को खुशी से स्वीकार रही हैं.’’

समय बदल चुका है

डिजाइनर मोनिषा जयसिंह का कहना है, ‘‘फैशन उद्योग अब प्लस साइज ग्राहकों पर ध्यान दे रहा है, जिन्हें लंबे अरसे से नजरअंदाज किया जाता रहा है. प्लस साइज फैशन ब्लौगर्स भी इस मामले में बदलाव लाने में जुटे हैं. दुनियाभर के प्लस साइज मौडल्स और ब्लौगर्स फैशन के भविष्य का नया चेहरा हैं.’’

मुंबई में रहने वाली अमेरिकी मौडल लीजा गोल्डन भोजवानी का कहना है, ‘‘अब समय बदल चुका है. अब प्लस साइज फिगर होना बुरा नहीं समझा जाता है.’’

स्पेन, इटली और ईसराइल के बाद अब फ्रांस में भी साइज जीरो पर पाबंदी लगा दी गई है. इस से अब उम्मीद की जा रही है कि फीमेल मौडल्स के बीच छरहरी काया बनाने की सनक थोड़ी कम होगी.

बौलीवुड में भी धमक है

70 से 80 दशक के सिनेमा में मोटी अदाकाराओं को सिर्फ हंसोड़ पात्र के रूप में देखा जाता था. उमा देवी खत्री ‘टुनटुन’ को बौलीवुड की पहली महिला हास्य अभिनेत्री माना जाता है. जैसेजैसे सिनेमा में बदलाव आया रंगरूप की परिभाषा ही बदल गई. आज का सिनेमा छरहरी जीरो फीगर की अभिनेत्रियों का नहीं है. भूमी पेडरेकर, जरीन खान, ईशा गुप्ता, स्वरा भास्कर, हुमा खान ने अपने भरेपूरे बदन का जलवा दिखा कर खूब वाहवाही लूटी है.

दबंग गर्ल सोनाक्षी सिन्हा और हरदिल अजीज सोनम भी ऐक्टिंग में आने से पहले काफी मोटी थीं. जब ये फिल्मों में ऐंट्री कर रही थीं उस समय करीना कपूर ने इंडस्ट्री में जीरो फीगर का फीवर फैला दिया था. जिस को देखो सभी जीरो फीगर बनाने को आतुर थीं. सोनाक्षी, सोनम ने भी अपनी काया को जीरो के अनुरूप, बनाया क्योंकि उन्हें फिल्मों में टिकना था.

लेकिन जब भरेपूरे बदन वाली हुमा ने ‘गैंग्स औफ वासेपुर’ में अपनी अदायगी के जलवे दिखाए तो एक बार फिर यह साबित हो गया कि यहां फीगर नहीं ऐक्टिंग का जलवा रहता है.

अभिनेता से नेता बनना हमारे देश के लिए त्रासदी है : प्रकाश राज

नोटबंदी को सरकार की बड़ी भूल बताकर हाल ही में विवादों में आएं फिल्मी दुनिया के मशहूर खलनायक प्रकाश राज तीखे कमेंट करने से बाज नहीं आ रहे हैं. वे आए दिन समाज से जुड़े हर मुद्दे पर कमेंट करते रहते हैं और उनसे हंगामा हो जाता है.

अब एक बार फिर प्रकाश राज ट्विटर पर एक्टिव हुए हैं और उन्होंने फिल्मी दुनिया से राजनीति में कदम रखने वाले ऐक्टर्स पर तंज कसा है.

प्रकाश राज ने राजनीति में आने वाले फिल्म स्टार्स पर को निशाना बनाते हुए कहा, अभिनेता से नेता बनना हमारे देश के लिए त्रासदी है. एक्टर्स को सिर्फ इसलिए राजनीति में नहीं जाना चाहिए कि वे पौपुलर हैं. उनका कहना है कि देश जिन मुद्दों का सामना कर रहा है, कलाकारों को उसके प्रति स्पष्ट नजरिए के साथ आना चाहिए और लोगों का भरोसा जीतना चाहिए.

प्रकाश राज ने यह भी कहा कि प्रशंसकों को बतौर प्रशंसक नहीं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक के रूप में वोट देना चाहिए.

रविवार को बेंगलुरु में फिल्म अभिनेता ने पौलिटिक्स ज्वाइन करने के सवाल पर कहा, ‘मैं कोई राजनीतिक पार्टी में शामिल नहीं हो रहा. मुझे अभिनेताओं का राजनीतिक पार्टियों में शामिल होना अच्छा नहीं लगता क्योंकि वे अभिनेता हैं और उनके फैन्स होते हैं. उन्हें अपनी जिम्मेदारियों के बारे में पता होना चाहिए.

प्रकाश राज ने सिनेमा हाल में राष्ट्रगान बजाने के मुद्दे पर भी बेबाकी से अपनी राय रखी. उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं लगता किसी को अपनी देशभक्ति दिखाने के लिए सिनेमा हाल में खड़े होने की जरूरत है.

गौरतलब है साउथ और बौलीवुड दोनों ही जगह समान रूप से पौपुलर हैं और वे राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता भी हैं. वो आएं दिन समाज से जुड़े मुद्दों पर खुलकर सामनें आते हैं और अपने विचार रखते हैं. उन्होंने पत्रकार गौरी लंकेश हत्याकांड में भी अपने विचार खुलकर रखे थे. ऐसे में जब सुपरस्टार रजनीकांत और कमल हसन के भी राजनीति में कदम रखने की चर्चा हो रही है, तब प्रकाश राज का यह बयान अप्रत्यक्ष रूप से उनपर निशाना ही निशाना साध रहा है.

हत्या की एक अनसुलझी कहानी पर यह कैसा पागलपन है

आरुषि हत्याकांड पर जिस तरह से मीडिया बौराया है वह  दर्शाता है कि हमारा यह शक्तिशाली टूल केवल क्रिकेट के बैट या हौकी स्टिक की तरह मारने लायक रह गया है, कुछ स्कोर करने लायक नहीं. पतिपत्नी के घर में रहते 13 साल की इकलौती बेटी की हत्या हो जाए और उसी घर में अगले दिन एक नौकर की लाश मिले, यह आश्चर्य की बात तो है पर घंटों उस पर चैनल दर चैनल 4-5 लोग अपने खयाली पुलाव पकाते रहें और देश के खाली बैठे लोग कयास लगाते रहें कि किस ने मारा और डाक्टर दंपती निर्दोष है या दोषी, पागलपन की निशानी है.

किसी हत्या पर जिज्ञासा होनी स्वाभाविक है पर उस के लिए पागलपन छा जाए और अखबारों के पन्ने भर जाएं, फिल्म बन जाए, सुप्रीम कोर्ट तक मामला जाए और फिर कभी इसे पकड़ा जाए कभी उसे, एक देश की दिमागी हालत दर्शाता है कि हम तुच्छ बातों पर इतना समय लगा देते हैं कि गंभीर मुद्दे ही रह जाते हैं.

अगर तलवार दंपती बेटी के बारे में कुछ राज नहीं बताना चाहते तो यह उन का हक है. वे समझदार हैं, अतियोग्य हैं और ऊंचनीच समझते हैं, उन्हें उन पर छोड़ दें. अगर तथ्य व सुबूत नहीं हैं, तो मामला बंद कर दें न कि मातापिता को बेबात की कैद में डाल दें. यह देश की कानून व्यवस्था से ज्यादा जनमन के थोथेपन की पोल खोलता है. आरुषि को न्याय कब मिलेगा यह सवाल उठाने वाले टीवी चैनल कौन होते हैं जब उस के मातापिता हैं और कठघरे में खड़े हैं पर उन के खिलाफ सुबूत ही नहीं हैं.

समाज के पास बहुत गंभीर मामले हैं. हमारी अर्थव्यवस्था लड़खड़ा रही है. हम 18वीं सदी के अंधविश्वासों में डूबे हैं. हमारी सरकारें निकम्मी हैं. हम गंदगी के महासागर में डूबे हैं. गाडि़यों की भरमार है पर ट्रैफिक जाम की भी मुसीबत है.

घरों का ढांचा चरमरा रहा है. बच्चे अनुशासनहीन हो रहे हैं. बूढ़े त्रस्त हैं और जनता एक हत्या को ले कर बेचैन ही नहीं, पागल भी हो रही है.

आरुषि की हत्या को इतना तूल देना हमारी भूल है और यह हमारी कमजोरी जाहिर करता है. हम अगर गुलाम रहे हैं और आज भी अगर बढ़ रहे हैं तो सिर्फ इसलिए कि हमारे कामगार दूसरे देशों में जा कर गुलामी का पैसा भेज रहे हैं, जो टैक्सों की मारफत छीन कर जनता में बंट रहा है. हम इन गंभीर मुद्दों को छोड़ कर निरर्थक मामले में आखिर क्यों दिमाग खराब कर रहे हैं? हमें यह मामला एक अफसोस करने के साथ छोड़ देना चाहिए था, कब का!

लोकतंत्र के हक में है सोशल मीडिया प्रोवाइडर्स की ये पहल

साल 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में रूस को हस्तक्षेप करने की इजाजत देने को लेकर अमेरिकी कांग्रेस द्वारा पूछताछ किए जाने के बाद अमेरिका के बड़े सोशल मीडिया प्रोवाइडर अब अपने प्लेटफॉर्म में बदलाव करने जा रहे हैं. जहां ट्विटर रूस की सरकारी न्यूज एजेंसियों को प्रतिबंधित करेगा, तो फेसबुक तथ्यों की बेहतर जांच की योजना बना रहा है, और साथ ही वह राजनीतिक विज्ञापनों के स्रोत को भी उजागर करेगा.

संक्षेप में, सोशल मीडिया से जुड़ी दिग्गज कंपनियां अब अपनी बड़ी जिम्मेदारी स्वीकार कर रही हैं, ताकि लोगों को सच और झूठ में फर्क करने में मदद कर सकें और शिष्टाचार कायम रख पाएं. पूर्व में ‘फेक न्यूज’ और आक्रामक प्रचार के प्रति इन प्रोवाइडर्स ने जो उदासीनता बरती, उससे लोकतंत्र कमजोर हुआ, जो एक खुले समाज की आजादी की हिफाजत करता है, और इसमें इंटरनेट भी शामिल है.

गूगल ने यह कहा है कि अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान उसने अपनी यू-ट्यूब साइट पर रूस से जुड़े 1,108 वीडियो चलाने की इजाजत दी थी. फेसबुक ने भी माना है कि यह संभव है कि करीब 12 करोड़, 60 लाख लोगों ने उसकी साइट पर रूस की गलत सूचनाएं देखी-पढ़ी हों. इन नंबरों का आकार बताता है कि किस कदर सोशल मीडिया सूचनाओं को प्रसारित कर सकता है, चाहे वे सही हों या गलत. सिर्फ इन निजी कंपनियों को ही ऐसे लोगों के खिलाफ कदम नहीं उठाने चाहिए, जिनका असली मकसद अमेरिकियों को आपस में लड़ाना और भय का माहौल खड़ा करना है.

रूस के इंटरनेट ट्रोल्स ने आखिर यही तो करने की कोशिश की. पिउ रिसर्च सेंटर ने अपने ताजा सर्वेक्षण में पाया है कि 1994 के बाद आज अमेरिकी अपने विरोधी को लेकर सबसे ज्यादा बंटे हुए हैं. रिपब्लिकनों और डेमोक्रेट्स के बीच की खाई और चौड़ी हो गई है, क्योंकि दोनों पक्षों का एक-दूसरे को लेकर काफी नकारात्मक नजरिया है. इस खाई पर पुल बनाने के लिए अमेरिका के नागरिकों को भी वही करना होगा, जो अब ट्विटर, गूगल व फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्रोवाइडर करने जा रहे हैं. विवेकशील विचारकों के बिना लोकतंत्र टिक ही नहीं सकता.

जियो का नया धमाका, रिचार्ज कराने से पहले जरूर पढ़ लें ये खबर

अगस्त में जिन जियो यूजर्स ने रिचार्ज कराया था, उनकी वैधता अब धीरे-धीरे खत्म हो रही है. आने वाले दिनों के अंदर लगभग सभी यूजर्स के प्लान के 84 दिन पूरे हो जाएंगे. ऐसे में उन्हें जियो की सर्विस का फायदा लेने के लिए रिचार्ज करना होगा.

अपने ग्राहकों को ध्यान में रखते हुए रिलायंस जियो ने एक शानदार औफर पेश किया है. जियो अब अपने रिचार्ज वाउचर्स पर कैशबैक दे रहा है. यह कैशबैक औनलाइन रिचार्ज पर दिया जा रहा है. मतलब अगर आप पेटीएम, अमेजन पे, मोबिक्विक और एक्सिस पे आदि से रिचार्ज करते हैं तो आपको जियो के रिचार्ज पर कैशबैक मिलेगा. जानें कहां मिलेगा कितना कैशबैक.

अमेजन पे

अमेजन पे से 399 रुपये का रिचार्ज करने पर नए ग्राहंको को 99 रुपये का कैशबैक मिलेगा और पुराने उपभोक्ताओं को 20 रुपये का कैशबैक मिलेगा.

मोबिक्विक

जियो के 399 रुपये के रिचार्ज पर 300 रुपये का कैशबैक मिल रहा है. यह कैशबैक मोबिक्विक से रिचार्ज करने पर दिया जा रहा है. यह कैशबैक नए और पुराने दोनों तरह के यूजर्स के लिए है. मोबिक्विक से जियो के नए यूजर्स 399 रुपये का रिचार्ज करते वक्त NEWJIO कोड डालेंगे तो 300 रुपये का कैशबैक मिल जाएगा. वहीं पुराने यूजर्स को JIO149 कोड डालना है. पुराने यूजर्स को 124 रुपये का कैशबैक मिलेगा.

पेटीएम

वहीं पेटीएम से जियो का 399 रुपये का रिचार्ज करते वक्त नए यूजर NEWJIO कोड डालेंगे तो उन्हें 50 रुपये का कैशबैक मिलेगा. इसके अलावा पुराने यूजर्स PAYTMJIO कोड डालेंगे तो उन्हें 15 रुपये का कैशबैक मिलेगा.

फ्लिपकार्ट फोन पे

फ्लिपकार्ट के फोनपे से रिचार्ज करने पर जियो के नए यूजर्स को 75 रुपये का कैशबैक मिलेगा और पुराने यूजर्स को 30 रुपये का कैशबैक मिलेगा.

एक्सिस पे

एक्स्सि पे से रिचार्ज करने पर जियो के नए यूजर्स को 100 रुपये का कैशबैक मिलेगा. अगर आप पुराने यूजर हैं तो आपको 35 रुपये का कैशबैक मिलेगा.

फ्रीचार्ज

वहीं फ्रीचार्ज से रिचार्ज करने पर जियो के पुराने यूजर्स को JIO50 कोड डालकर 50 रुपये का कैशबैक मिलेगा. वहीं फ्रीचार्ज पर जियो के पुराने यूजर्स के लिए कोई औफर नहीं है.

मेरे परिवार में किडनी से संबंधित बीमारियों का इतिहास रहा है. बताएं कि कैसे मैं इस से बचा रह सकता हूं.

सवाल
मैं 38 वर्षीय वकील हूं. मेरे परिवार में किडनी से संबंधित बीमारियों का इतिहास रहा है. कृपया बताएं कि कौन सी सावधानियां रख कर मैं इस से बचा रह सकता हूं?

जवाब
जीवनशैली में कुछ परिवर्तन कर गुरदों के रोग के खतरे को कम किया जा सकता है. संतुलित और पोषक भोजन का सेवन करें. अलकोहल का सेवन न करें. नियमित ऐक्सरसाइज करें. उन दवाओं के सेवन से बचें जो किडनी को नुकसान पहुंचाती हैं. शारीरिक रूप से सक्रिय रहें. रक्त में शुगर के स्तर को नियंत्रित रखें. नमक का सेवन कम करें. वजन नियंत्रित रखें. धूम्रपान न करें.

आज ही के दिन सचिन को पछाड़ रोहित ने बनाया था वर्ल्ड रिकार्ड

भारत और श्रीलंका के बीच तीन टेस्ट मैचों की सीरीज का पहला टेस्ट मैच 16 नवंबर, 2017 को कोलकाता के ईडन गार्डन में खेला जाएगा. इस मैदान ने क्रिकेट इतिहास में कई रिकार्ड बनते और टूटते देखा है. आज ही के दिन ठीक तीन साल पहले (13 नवंबर, 2014) भारतीय टीम के हिटमैन रोहित शर्मा ने श्रीलंका के खिलाफ ईडन गर्डन में ही विश्व क्रिकेट में एक नया इतिहास रचा था.

रोहिन ने 264 रनों की पारी खेलते हुए एक खास रिकार्ड बना लिया था, जिसे अभी तक कोई खिलाड़ी नहीं तोड़ पाया है. रोहित शर्मा की यह अनोखी पारी आज तक सभी को याद है.

रोहित की इस पारी के बाद उनकी फैन फौलोइंग और बढ़ गई. 264 रन बनाने के बाद ही रोहित शर्मा वनडे क्रिकेट में 250 से ज्यादा रन बनाने वाले दुनिया के अकेले खिलाड़ी बन गए. हालांकि, रोहित जब मैदान में उतरे थे तो 4 रन पर श्रीलंका के थिसारा परेरा ने थर्ड मैन पर उनका कैच छोड़ दिया था, जो उन्हें बाद तक भारी पड़ती रही. इस दौरान रोहित ने 33 चौके और 9 छक्के जड़े थे.

यहां गौर करने वाली बात ये है कि पहले 100 रन रोहित ने 100 गेद में ही बनाए. लेकिन उसके बाद 164 रन उन्होंने सिर्फ 73 गेंद में पूरे कर लिए. इस मैच में रोहित उंगली की चोट के बाद लौटे थे.

रोहित के इस रिकार्ड से पहले टीम के पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने इंदौर में वेस्टइंडीज के खिलाफ 200 रन बनाए थे. साल 2010 के इस मैच में वनडे का पहला शतक लगाने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी सचिन ही थे. इसके बाद साल 2011 में इंदौर में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेले गए मैच वनडे में वीरेंद्र सहवाग ने 219 रनों की पारी खेली और सचिन को पीछे छोड़ दिया. हालांकि महिला क्रिकेट में बेलिंडा क्लार्क ने 229 रन 1997 में बनाए थे. लेकिन इन दोनों को पीछे छोड़ते हुए 2013 में रोहित ने इस रिकार्ड को अपने नाम कर लिया.

आपको बता दें कि इस मैच में श्रीलंका की पूरी टीम रोहित शर्मा के बराबर भी रन नहीं बना पाई और 251 रन पर ढेर हो गई.

बेहतर बैटरी लाइफ पाने का आसान तरीका

आज के समय में स्मार्ट फोन हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया है. ऐसे में इसकी बैटरी लाइफ एक बड़ी समस्या है. जैसे-जैसे इसकी बैटरी पुरानी होती जाती है, बार-बार चार्जर इस्तेमाल करने की जरूरत भी बढ़ती जाती है. हमारे द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले ज्यादातर इलेक्ट्रानिक्स डिवाइस लिथियम इयान और लिथियम पाली बैटरी के साथ आते हैं. ये क्विक चार्ज फीचर से तो लैस होते हैं लेकिन जरूरी नहीं है कि आपको लंबी बैटरी लाइफ मिले. इसीलिए बैटरी की उम्र को ध्यान में रखते हुए आज हम आपके लिए कुछ उपाय लेकर आएं हैं जिसका इस्तेमाल कर आप अपने फोन की बैटरी की समस्या से निजात पा सकते हैं.

मुफ्त ऐप से बचें, ऐप्स खरीदना शुरू करें

अमेरिकी शोधकर्ताओं का यह दावा है कि विज्ञापन के साथ आने वाले ऐप्स आपके डिवाइस की बैटरी लाइफ औसतन 2.5 से 2.1 घंटे तक कम कर सकते हैं. अध्ययन के मुताबिक, फोन का प्रोसेसर उसके दिमाग की तरह होता है. विज्ञापन भी इस दिमाग के कुछ हिस्सों का इस्तेमाल करता है जिस कारण से यह धीमा पड़ जाता है.

लेकिन ऐसा नहीं है कि सभी फ्री ऐप्स आपके फोन की बैटरी पर असर डाल रहे हैं, लेकिन अगर आपको उस पर कोई विज्ञापन नजर आए तो समझ लीजिए कि यह आपके फोन के लिए सही नहीं है.

अगर आप इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं कर कर रहे हैं तो वाई-फाई का कनेक्शन आफ कर दें.

लोकेशन ट्रैकिंग बंद कर दें

हाल ही में आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि फेसबुक ऐप आईफोन की बैटरी को जल्दी खत्म कर देता है क्योंकि यह बार-बार जीपीएस माड्यूल का इस्तेमाल करके यूजर की लोकेशन जानता रहता है. ऐसे में जिन ऐप को आपके लोकेशन की जरूरत नहीं है, उनके लोकेशन ट्रैकिंग को आफ कर देने से आपको जरूर मदद मिलेगी.

15% बैटरी होने पर उसे पूरी तरह से चार्ज करें

बैटरी को 100 फीसदी से सीधे ले जाकर शून्य पर खत्म करने से बेहतर है कि आप इसे 15 फीसदी तक ही डिस्चार्ज करें. पूरी तरह से उसकी बैटरी को खत्म न होने दें. हो सकें तो हफ्ते में 2 बार फोन को आफ कर पूरी तरह से चार्ज करें, 100% चार्ज होने के बाद ही फोन आन करें ऐसा करने से आपके बैटरी की डिस्चार्ज साइकिल तीन गुनी बढ़ जाएगी.

फ्लाइट मोड का इस्तेमाल करें

अगर आप ऐसी जगह पर हैं जहां कोई नेटवर्क नहीं है तो बेहतर होगा कि फोन में एयरप्लेन मोड (फ्लाइट मोड) एक्टिव कर लें. आपका फोन ऐसी जगहों पर बार-बार नेटवर्क तलाश करेगा जिसका असर बैटरी लाइफ पर पड़ेगा.

डिस्प्ले की ब्राइटनेस कम करें

यह सुझाव लैपटाप और मोबाइल डिवाइस पर लागू होता है. लैपटाप और मोबाइल का ब्राइटनेस कम करके उसकी बैटरी का पावर बचाया जा सकता है. डिवाइस के इनएक्टिव रहने पर आपका डिस्प्ले कितनी देर तक आन रहे, यह कम करके भी आप थोड़ी बैटरी बचा सकते हैं. एंड्रायड पर आप सेटिंग्स के बाद डिस्प्ले में जाकर यह तय कर सकते हैं. यह उपाय अपना कर आप 20% तक बैटरी लाइफ बचा सकते हैं.

वाई-फाई पर ऐप अपडेट करें या बैटरी चार्ज करते वक्त

सबसे बेहतर यही होगा कि यह अपडेटिंग का यह एक्शन आम तौर पर स्थिर रहे और जब भी आपको अपने फोन पर ऐप्स को अपडेट करने की आवश्यकता हो तो आप मोबाइल डेटा इंटरनेट के बजाय वाई-फाई का इस्तेमाल करे. अगर आपके डिवाइस में विकल्प मौजूद है तो सिर्फ चार्ज होते वक्त इसे शेड्यूल कर सकते हैं.

एंड्रायड पर प्ले स्टोर ऐप में इस सेटिंग तक पहुंच सकते हैं. ऐप को लान्च करें. स्क्रीन पर बाएं तरफ से स्वैप करके मेन्यू खोलें. इसके बाद सेटिंग्स मे जाएं, फिर आटो-अपडेट ऐप्स में. इसके बाद वाई-फाई आन्ली मोड को ही चुनें.

लो पावर मोड को आन करें

सभी एंड्रायड फोन में बैटरी सेवर मोड मौजूद नहीं है. अगर आप एंड्रायड 5.0 या उसके बाद के वर्जन को इस्तेमाल कर रहें तो आपके डिवाइस पर इस मोड के मौजूद रहने की संभावना ज्यादा है. जैसे ही आपके फोन की बैटरी 15 फीसदी पर पहुंचती है, यह अपने आप एक्टिव हो जाता है. यह बैकग्राउंड ऐप रिफ्रेश, लोकेशन ट्रैकिंग और सिंक एक्टिविटी को बंद कर देता है, ताकि बैटरी लाइफ बचाई जा सके.

इन सुझावों का पालन करने पर आप पाएंगे कि आपका फोन पहले की तुलना में ज्यादा बेहतर बैटरी लाइफ दे रहा है.

सलमान खान ने यह फोटो शेयर कर किया “रेस 3” के सितारों का खुलासा

बौलीवुड सुपरस्टार सलमान खान ने जब से “रेस 3” में कदम रखा है तब से यह फिल्म सुर्खियों में बनी हुई है, पर इसकी वजह सलमान खान नहीं बल्कि इस फिल्म में शामिल होने वाले बाकी के स्टार्स रहे हैं.

इस फिल्म में कभी किसी सितारे के शामिल होने की तो कभी किसी के फिल्म से बाहर होने की खबरें आती रही हैं, पर रेमो डीसूजा की इस फिल्म में वाकई कौन कौन से सितारें शामिल होंगे इसका खुलासा खुद सलमाल खान ने कर दिया है.

जी हां, सलमान खान ने इसका खुलासा सोशल मीडिया पर “रेस 3” की पूरी कास्ट टीम का एक फोटो शेयर कर किया है.

इस फोटो में सलमान खान के अलावा “रेस 3” में जैकलीन फर्नांडिस, साकीब सलीम, बौबी देओल, फ्रेडी दारुवाला, और डेजी शाह नजर आ रहे हैं. इस फिल्म को रमेश तोरानी प्रोड्यूज कर रहे हैं. इस तस्वीर को शेयर कर सलमान खान ने कैप्शन भी दिया है, ‘बाकी सब तो ठीक है, लेकिन हाट, कूल, सेक्सी, स्वीट, चार्मिंग रमेश जी “रेस 3” की टीम की इस तस्वीर में कैसे लग रहे हैं.’

खबरे हैं कि “रेस 3” साल 2018 में ईद के मौके पर रिलीज होगी.

बता दें, “रेस 3” से पहले इस फिल्म के दो पार्ट पहले भी आए थे. साल 2008 में अब्बास मस्तान की ‘रेस’ में सैफ अली खान, अक्षय खन्ना, कैटरीना कैफ और बिपाशा बासु थे. ‘रेस 2’ आई, जिसमें सैफ अली खान, दीपिका पादुकोण, अनिल कपूर, जैकलीन फर्नांडिस, नील नितिन मुकेश थें.

जहां फिल्मरेस’ 2008 की ब्लौकबस्टर साबित हुई वहीं इसके फिल्म का दूसरा पार्ट बौक्स आफिस पर कुछ खास कमाल न दिखा सका. अब ये देखना बहुत ही दिलचस्प होगा कि सलमान खान की फिल्म ‘रेस 3’ एक बार फिर से दर्शकों को लुभाने में कितना सफल होगी.

जन्मदिन पर शाहरुख ने की ऐसी हरकत की नेता ने लगाई फटकार, देखें वीडियो

इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है. इसमें महाराष्ट्र के एमएलसी जयंत पाटिल बौलीवुड अभिनेता शाहरुख खान को खरी-खोटी सुनाते नजर आ रहे हैं. वीडियो शाहरुख के जन्मदिन से एक दिन पहले का है जब वह अपने प्राइवेट यौट से अपना जन्मदिन मनाने अलीबाग पहुंचे थे.

पार्टी के बाद अलीबाग से मुंबई लौटते समय शाहरुख इस मुसीबत में फंस गए. दरअसल अलीबाग में शाहरुख का फार्महाउस है. जैसे ही लोगों को खबर मिली कि वो अपना जन्मदिन मनाने अलीबाग आए हैं तो उनके फैन्स उनकी एक झलक पाने के लिए वहां पहुंच गए.

जब शाहरुख का प्राइवेट यौट अलीबाग के किनारे पर पहुंचा शाहरुख भीड़ देखकर कुछ देर अंदर ही बैठे रहे. ठीक उसी समय अलीबाग के एमएलसी जयंत पाटिल भी मुंबई जाने के लिए अपने यौट में चढ़ने का इंतजार कर रहे थे.

लेकिन शाहरुख के प्राइवेट यौट के वहां होने से पाटिल का यौट किनारे पर नहीं लग पा रहा था. जब पाटिल को काफी देर हो गई तो उन्होंने अपना टेम्पर लूज कर दिया और शाहरुख के यौट पर चढ़कर अपने यौट पर चले गए.

इसी दौरान जब पाटिल उनके यौट पर जाने लगे तो शाहरुख का पर्सनल स्टाफ उनसे भिड़ गया. उसके बाद पाटिल गुस्से में आ गए और शाहरुख पर चिल्लाने लगे. उन्होंने शाहरुख को कहा कि आपने अलीबाग खरीद लिया है क्या?

हालांकि शाहरुख ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और थोड़ी देर में उतर कर चले गए. शाहरुख की इस बर्थडे पार्टी में बौलीवुड के जाने माने चेहरे पहुंचे थे.

यहां देखें वीडियो जिसमें पाटिल शाहरुख पर नाराज हो रहे हैं.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें