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अखिलेश यादव ने साधा राज्यपाल पर निशाना

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के राज्यपाल पर निशाना साधते हुए कहा कि “उत्तर प्रदेश की हालत बेहद खराब है. आज राज्यपाल जी कुछ नही बोल रहे हैं. ऐसा लग रहा है जैसे मौसम बदल गया हो. इसलिए उनकी बोलती बंद है”.

जिस समय समाजवादी पार्टी की प्रदेश में सरकार थी और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे उस समय राज्यपाल राम नाइक सपा सरकार पर अपनी टिप्पणी कर देते थे. अखिलेश यादव को लग रहा है कि अब भजपा की सरकार होने के नाते राज्यपाल चुप हैं. योगी सरकार पर उनकी टिप्पणी नहीं आ रही है. अखिलेश यादव ने यह बात समाजवादी पार्टी कार्यालय में शिक्षक सम्मेलन के दौरान मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए कही.

अखिलेश यादव ने शिक्षक सम्मेलन में अपनी पार्टी की उम्मीदों और योगी सरकार पर अलग अलग तरह से टिप्पणी की. अखिलेश यादव ने कहा “अगर वरिष्ठ लोगों का आशीर्वाद रहा तो जरूर दोबारा पार्टी एक बार फिर विकास की ओर बढ़ेगी. सरकार बनाने के बाद सबसे पहले प्राइमरी विद्यालयों में बदलाव लाने का काम समाजवादी पार्टी ने किया. लेकिन आज प्रदेश में विद्यालयों का स्तर बहुत गिरा हुआ है.”

अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार की नीतियों पर टिप्पणी करते हुए कहा “मेक इन इंडिया की बात करने वाले चाइना का सामान खुद लगा रहे हैं. सरकार विकास के बारे में ना सोचकर सिर्फ वोट बैंक के बारे में विचार कर रही है. देश में बीमारियां बढ़ती जा रही हैं. कई समस्याएं हैं जो आम जनता के बीच में हैं. इन समस्याओं का निराकरण कौन करेगा. इस विषय में भाजपा सरकार कुछ नही सोच रही है.”

अखिलेश यादव ने कहा “अगर हमें शिक्षकों का साथ मिलेगा तो हम विकास के कार्य को और दूर तक ले जा सकते हैं. आज युवा वर्ग, छात्र वर्ग सब समाजवादी विचारधारा से जुड़े हैं. हम इलाहाबाद में जीते हुए सभी पदाधिकारियों को बधाई देते हैं.”

अखिलेश ने सरकारी कर्मचारियों में बढ़ रहे तनाव का जिक्र करते हुए कहा “पिछले दिनों एसडीएम ने खुद आत्महत्या कर ली. भाजपा सरकार ने बेरोजगारों किसानों से जो वादा किया था उसे पूरा नहीं कर रही है . जनता शिकायत करने पहुंचती है तो उसे लाठी का सामना करना पड़ता है.” अखिलेश यादव ने कहा “आज राज्यपाल जी कुछ नहीं बोल रहे हैं लग रहा है मौसम बदल गया है इसलिए उनकी बोलती बंद है.”

आखिरकार बंद हुआ ‘फैंटम’, दोस्त न रहे दोस्त

अंततः एक साल पहले लिखी गयी हमारी बात को लोगों ने कबूल कर ही लिया. लगभग डेढ़ वर्ष पहले हमने यहीं पर लिखा था कि विकास बहल पर यौन शोषण के आरोप लगने के बाद अनुराग कश्यप, विक्रमादित्य मोटावनी, मधु मंटेना व विकास बहल की फिल्म प्रोडक्शन कंपनी ‘फैंटम’ बंद हो गयी है. मगर इस बात को उस वक्त इन चारों में से किसी ने भी कबूल नहीं किया था. क्योंकि उस वक्त ‘फैंटम’ ‘नेटफ्लिक्स’ के लिए ‘सेक्रेड गेम्स’ बना रहा था, जिसे अनुराग कश्यप और विक्रमादित्य मोटावनी संयुक्त रूप से निर्देशित कर रहे थे. तो ह्रितिक रोशन के अभिनय वाली फिल्म ‘सुपर 30’ का निर्देशन विकास बहल कर रहे थे. अतः ‘फैंटम’ के बंद होने की खबर को छिपाना इनके लिए जरुरी हो गया था.

पिछले डेढ़ वर्ष से ‘फैंटम’ का आफिस वीरान चल रहा था. अनुराग कश्यप ने आनंद एल राय का साथ पकड़ लिया था. वह आनंद एल राय के लिए ‘मनमर्जियां’ निर्देशित करने के बाद तीन और फिल्में निर्देशित करने जा रहे हैं. इसी के चलते जब ‘सेक्रेड गेम्स’ का प्रसारण हुआ तो अनुराग कश्यप व विक्रमादित्य मोटावनी एक साथ नजर नहीं आए. अब इसका दूसरा भाग विक्रमादित्य मोटावनी अकेले ही निर्देशित कर रहे हैं. जबकि विकास बहल ने रिलायंस इंटरटेनमेंट का साथ पकड़ लिया है. मधु मंटेना पिछले डेढ़ वर्ष से अपने वैवाहिक जीवन की गाड़ी को पटरी पर लाने के लिए प्रयासरत थे, पर अब दो माह पहले ही मधु मंटेना व उनकी पत्नी मासाबा गुप्ता अलग हो चुके हैं. वैवाहिक जीवन में बिखराव के बाद से मधु मंटेना काफी डिप्रेशन में चल रहे हैं. किसी वक्त बौलीवुड में जिन चार दोस्तों की दोस्ती की कहानियां प्रचलित थीं, वह चारों दोस्त जिन्हें इस वक्त एक दूसरे का संबल बनना चाहिए, उस वक्त संबल बनने की बजाय अलग हो चुके हैं.

बहरहाल, चारों द्वारा अपने लिए अलग राह तलाशने के बाद ‘फैंटम’ के बंद होने की घोषण कर दी गयी. आज रात डेढ़ बजे मधु मंटेना ने अपने ट्वीटर एकाउंट पर इस बात की जानकारी दी. मधु मंटेना ने लिखा है- ‘‘हम घोषणा करना चाहते हैं कि मैं, विकास, विक्रम व अनुराग ने ‘फैंटम’ में अपनी भागीदारी खत्म कर अलग राह पर चलने का निर्णय लिया है. हमारा साथ सात वर्ष का रहा. हमें पता है कि एक वक्त पर शादियां भी टूट जाती हैं. मैं मानता हूं कि मेरे फिल्म निर्माण के करियर में ‘फैंटम’ सर्वश्रेष्ठ घटनाक्रम रहा, जो कि घटित हुआ. मैं विक्रम, विकास और अनुराग का धन्यवाद अदा करता हूं कि उन्होंने मेरे सबसे कठिन वक्त में मेरा साथ दिया और बेहतरीन भागीदार व मेंटर बने रहे. उम्मीद है कि हमारी मित्रता बनी रहेगी.’’

सूत्र बताते है कि ‘फैंटम’ में मधु मंटेना तो महज निर्माता की हैसियत से जुड़े हुए थे. जबकि विक्रमादित्य मोटावनी, विकास बहल व अनुराग कश्यप ‘फैंटम’ के अंतर्गत बनने वाली फिल्मों का निर्देशन करते थे. विकास बहल पर जब डेढ़ वर्ष पहले एक सहकर्मी ने यौन शोषण का आरोप लगाया था, तब ‘फैंटम’ में भूचाल आ गया था. उस वक्त विकास को लेकर बाकी तीन एकमत नहीं थे. इसी के चलते उस वक्त इनके बीच झगडे़ हुए. उसी वक्त से अनुराग कश्यप व विकास बहल के बीच बातचीत बंद चल रही है.

इसके बाद ‘सेक्रेड गेम्स’ के दौरान अनुराग कश्यप व विक्रमादित्य मोटावनी के बीच मतभेद गहरा गए. फिर मधु मंटेना की निजी जिंदगी में तूफान आया. बहरहाल, अब फैंटम बंद हो गया है. देखना ये है कि इन की दोस्ती बनी रहती है या नहीं.

एस-400 मिसाइल समझौता : रक्षा सामग्री पर विदेशी निर्भरता कब तक

रक्षा संबंधी हथियारों के मामले में भारत आज भी दूसरे देशों पर निर्भर है. एनडीए सरकार ने मेक इन इंडिया का नारा दिया था पर पिछले साढे चार साल के दौरान देश में कितनी कंपनियों ने आ कर उत्पादन शुरू किया, इस सवाल का जवाब नहीं होगा. हां, इस दौरान सरकार ने विदेशों से अनगिनत सौदे किए हैं. रूस के साथ एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली का सौदा भी उसी कड़ी का एक हिस्सा है.

अमेरिकी प्रतिबंध की धमकी के बावजूद भारत ने 5 अरब डौलर यानी 37 हजार करोड़ रुपए के इस सौदे पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए. यह सौदा ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका हथियार खरीद पर काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सरीज थ्रू सेक्शन ऐक्ट के तहत प्रतिबंध लगा सकता है.

पुतिन 19वें भारत रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में भारत आए हैं. सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पुतिन के बीच द्विपक्षीय, क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई.

दोनों देशों ने साझा बयान में कहा कि दोनों पक्ष लंबी दूरी की क्षमता वाली एस-400 मिसाइल प्रणाली पर हुए समझौते का स्वागत करते हैं. दोनों देशों के बीच हुए समझौते का असर भारत और अमेरिका संबंधों पर नहीं पड़ेगा.

हालांकि समझौते के बाद अमेरिका ने कहा कि  प्रतिबंध रूस को दंडित करने के लिए लगाए गए हैं. इस का मकसद हमारे सहयोगी देशों की सैन्य क्षमता को नुकसान पहुंचाना नहीं है.

रूस से एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली चीन पहले ही खरीद चुका है. रूस से यह प्रणाली खरीदने वाला चीन पहला देश है. चीन और रूस के बीच 2014 में यह समझौता हुआ था. रूस ने चीन को एस-400 मिसाइल प्रणाली देना शुरू भी कर दिया है. भारत को यह प्रणाली अगले 24 महीने में मिलेगी.

6 सौ किलोमीटर की दूरी तक निगरानी करने की क्षमता वाली यह मिसाइल प्रणाली 36 लक्ष्यों पर एक साथ निशाना साध सकती है. यह बैलेस्टिक मिसाइलों से बचाव करती है. लंबी दूरी तक मार करने वाला यह सब से आधुनिकतम सिस्टम है.

दुश्मन की मिसाइलों का पता लगा कर उन्हें हवा में मार गिराने में सक्षम है. इस से पाकिस्तान के चप्पेचप्पे पर नजर रखी जा सकती है. भारत 4000 किलोमीटर लंबी भारतचीन सीमा के मद्देनजर सुरक्षा प्रणाली पुख्ता करना चाहता है.

एस-400 मिसाइल सुरक्षा प्रणाली के अलावा रूस के साथ 8 अन्य समझौतों पर भी हस्ताक्षर हुए हैं. इन में अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, रेलवे समेत अन्य क्षेत्रों में सहयोग शामिल हैं. दोनों देश आतंकवाद के खिलाफ भी लड़ेंगे.

भारत को आजादी के करीब 70 साल बाद भी हथियारों के मामले में दूसरे देशों का मुंह ताकना पड़ना है. छोटेमोटे हथियार तक विदेशों से मंगवाने पड़ते हैं. इन सौदों को ले कर भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना करना पड़ता है. आखिर यह विदेशी निर्भरता कब तक रहेगी.

15 साल के लिए जेल गया इस देश का पूर्व राष्ट्रपति, क्या होता अगर वो भारत में होता?

किसी भी देश की सामाजिक, राजनीतिक व्यवस्था  और न्याय क्षमता अक्सर वहां के नामी और प्रभावशाली लोगों के मामलों में अदालती फैसलों के दौरान दिखती है. हमारे यहां तो लगभग हर नेता दागी है और ये नेता-मंत्री खुद पर चल रहे अपराधिक मामलों को अपनी बहादुरी का तमगा बताकर चलते हैं. क्योंकि इन्हें पता है कि तारीख पर तारीख के सिद्धांत पर चलने वाली हमारी कानूनी प्रक्रिया में इन्हें सजा तो मिलनी नहीं है. उल्टा जेल से चुनाव लड़ने की सुविधा अलग से मिलती है.

ली म्यूंग बाक हैं दोषी 

लेकिन हर देश में ऐसा नहीं है. दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति ली म्यूंग बाक को भ्रष्टाचार के मामले में 15 साल के कारावास की सजा सुनाई गई. उन्हें रिश्वतखोरी और धन के गबन समेत अन्य आरोपों में दोषी पाया गया था लिहाजा उन्हें यह सजा सुनाई गयी. इतना ही नहीं उन्होंने अपनी अमेरिकी यात्रा के दौरान वर्ष 2011 में उसने खुद ली की पत्नी को एक लाख डौलर की रकम सौंपी थी. इस मामले में उन्हें सिओल की एक जिला अदालत ने 13 अरब वौन का जुर्माना देने का आदेश भी दिया गया है.

बता दें कि पूर्व राष्ट्रपति महोदय हमारे देसी नेताओं की तर्ज पर रिश्तेदारों और सहयोगियों की जेबें भी भरते थे. वहां की स्थानीय न्यूज एजेंसी के मुताबिक़, राष्ट्रपति ली ने कई आरोपों से इनकार किया. लेकिन उन्होंने कुछ तथ्यों को स्वीकार किया है. उदाहरण के लिए उन्होंने एक लाख डौलर की रकम लेने की बात कबूली है. इसे उन्होंने कथित रूप से एनआईएस से लिया था. उन्होंने इस धन का क्या किया इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी और बाकी की रकम लेने की बात भी खारिज की.

आजीवन कारावास भी मिला है

इस से पहले चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के पूर्व शीर्ष अधिकारी सुन झेंगकई को भी रिश्वत लेने के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी. तिआनजिन की फर्स्ट इंटरमीडिएट पीपुल्स कोर्ट ने इस सजा का ऐलान किया था. इस सजा के तहत उन्हें सभी राजनीतिक अधिकारों से वंचित किया गया साथ ही साथ उनकी सारी प्रापर्टी जब्त कर ली गयी.

यहां तो सब चलता है…

बात अगर भारत की करें तो यहां भी नेताओं पर लंबे मुकदमे चलते हैं और वे जमानत पर बाहर आकर अपनी सियासी दुकान चलाते रहते हैं. सजा पाने वाले भारतीय नेताओं का नाम लें तो पहला ताजा वाकया लालू प्रसाद यादव का आता है. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को चाईबासा कोषागार से 37 करोड़ 68 लाख रुपये के गबन के आरोप 5 साल की सजा सुनाई गयी थी. हालांकि वे कभी हेल्थ इश्यू के चलते तो कभी बेटे की शादी के नाम पर जमानत पर आते जाते रहते हैं. उनके अलावा जयललिता को भी आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले सजा सुनाई गयी थी.

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला को शिक्षकों की गैरकानूनी रूप से भर्ती करने का दोषी करार दिया. जबकि पूर्व दूरसंचार मंत्री सुखराम को पांच साल की कैद और चार लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई. सुखराम ने नरसिंह राव सरकार में संचार मंत्री रहते हुए हरियाणा टेलीकौम लिमिटेड कंपनी को 30 करोड़ रुपये के अवैध ठेके दिए थे. कांग्रेस सांसद रशीद मसूद को सीबीआइ की विशेष अदालत ने एमबीबीएस सीट आवंटन मामले में भ्रष्टाचार पर चार साल जेल की सजा सुनाई.

इनके अलावा और भी कई नाम है लेकिन इन को किसी भी केस में ऐसी सजा नहीं हुई कि देश भर में यह सन्देश जाए कि नेताओं को करप्शन से दूर रखने और उन पर अंकुश लगाने के लिए अदालतें सख्त हैं. ज्यादातर मामलों में बड़े नेता और मंत्री जमानत ले ही ले लेते हैं. अगर चीन या दक्षिण कोरिया की तरह अदालते सख्त रख अपनाएं तो शायद राजनीति में अपराध और भ्रष्टाचार के मामले कम होते दिखें.

मौब लिंचिंग से ही प्रेरित है पुलिस का काली पट्टी प्रकरण

अगर आप भीड़ की शक्ल बनाने में सफल हैं तो कानून कुछ भी नहीं कर सकता है. यह मानसिकता अब जनता की भीड़ से निकल कर पुलिस फोर्स में घर कर रही है. भीड़ की शक्ल में एकत्र होकर न्याय और उसकी प्रक्रिया को प्रभावित किया जा सकता है.

जनता में व्याप्त यह चलन अब पुलिस फोर्स में भी फैल रहा है. हत्या के आरोप में जेल भेजे गये अपने साथी सिपाहियों ने जब काली पट्टी बांध कर घटना का विरोध किया तो साफ लगने लगा कि भीड़तंत्र की प्रेरणा पुलिस फोर्स के अंदर भी घर कर गई है. भीड़ के रूप में सिपाहियों का एक वर्ग न केवल काली पट्टी बांध कर विरोध प्रदर्शन कर रहा है बल्कि सोशल मीडिया पर उसका प्रचार भी कर रहे हैं.

सिपाहियों के भीड़तंत्र में बदल जाने का प्रभाव मरने वाले के परिवार पर भी पड़ रहा है. इस घटना के बाद उसे मीडिया के सामने आकर कहना पड़ा कि उनको सिपाहियों से कोई दुश्मनी नहीं है. वह तो केवल न्याय की गुहार लगा रहे हैं. यह परिवार क्या सुरक्षा के लिये उत्तर प्रदेश के पुलिस विभाग पर भरोसा कर सकता है ?

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मल्टीनेशनल कंपनी एप्पल में काम करने वाले विवेक तिवारी की हत्या हो जाती है. घटनाक्रम के अनुसार विवेक तिवारी कंपनी के एक समारोह से रात को वापस लौट रहे थे. उनके साथ कंपनी की महिलाकर्मी सना भी थी. विवेक तिवारी सना को घर छोड़ कर अपने घर जाने वाले थे.

आधी रात का वक्त था. गश्त कर रहे पुलिस के दो सिपाहियों ने विवेक तिवारी की चार पहिया गाड़ी को रोकने की कोशिश की. विवेक ने रात का वक्त और साथ में महिला सहकर्मी होने की वजह से गाड़ी नही रोकने का प्रयास किया. सिपाहियों ने कार को जबरन रोकने की कोशिश की. ऐसे में कार से सिपाही की बाइक पर रगड़ लग गई. सिपाही बाइक से उतरा उसने अपनी रिवाल्वर निकाली और विवेक तिवारी के सिर पर गोली मार दी. गोली मारने के बाद दोनों सिपाही भाग गये.

कुछ देर बाद गोमतीनगर थाने की पुलिस ने विवेक को अस्पताल पहुंचाया जहां डाक्टरों ने उनको मृतक घोषित कर दिया. इन दोनो सिपाहियों की पहचान प्रशांत चौधरी और संदीप कुमार के रूप में हुई. घटना का पता चलने के बाद पुलिस ने अपने दोनों सिपाहियों को निर्दोष साबित करने के लिये हर संभव प्रयास किया.

सामाजिक और राजनीतिक दबाव पड़ने के बाद दोनों सिपाहियों को जेल भेजना पड़ा. सिपाही प्रशांत चौधरी का तर्क था कि उसने आत्मरक्षा में गोली चलाई. प्रशांत के पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि गोली सीधे सिर पर क्यों मारी? विवेक तिवारी को भागने से रोकने के लिये उनकी गाड़ी के हर पहिये पर गोली मारी जा सकती थी? उनके पैर पर गोली मारी जा सकती थी? पुलिस विभाग ने जिस तरह से घटना होने के बाद से ही प्रशांत चौधरी को बचाने का काम शुरू किया उससे प्रशांत के हौसले बढ़ गये.

जिस गोमती नगर थाने में वह और उसकी सिपाही पत्नी तैनात थे वहां घटना की मनमानी एफआईआर लिखी गई. बड़े पुलिस अधिकारियों की घोषणा के बाद भी सिपाही को काफी समय तक पकड़ा नहीं गया था. प्रशांत की पत्नी हंगामा करने पुलिस औफिस तक आ गई थी.

हत्या के आरोप में फंसने के बाद भी पुलिस महकमे ने जिस तरह से सिपाही प्रशांत का पक्ष लिया उससे एक मैसेज गया और बाकी सिपाही भी समर्थन में काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन का साहस कर बैठे. उत्तर प्रदेश में यह पहली घटना है. असल में देखा जाये तो इसमें दोष सिपाहियों का नहीं है. यह दोष राजनीतिक और सामाजिक परिवेश का है. जहां संविधान और कानून की जगह भीड़तंत्र का न्याय चलता है. किसी को प्रेम विवाह करने के नाम पर भीड़ मार दे रही है. किसी को गौरक्षा के नाम पर मार दिया जा रहा है. कहीं डायन समझ कर पीटपीट कर मारा जा रहा है.

पुलिस विभाग के सिपाहियों को भी लग रहा कि वह भीड़तंत्र बनाकर न्याय को प्रभावित कर लेंगे. तब तक देश में कानून और संविधान का राज नहीं होगा ‘भीड़तंत्र’ या ‘मौब लिंचिंग’ ऐसे मनमाने फैसले करती रहेगी.

राजकोट टेस्ट : मेहमानों की हालत हुई पतली

जले पर नमक छिड़कना किसे कहते हैं यह आप को राजकोट में खेला जा रहा पहला टेस्ट मैच बता देगा. वेस्टइंडीज ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि पहले उस के गेंदबाजों की धुलाई होगी और बाद में बल्लेबाज निराश करेंगे.

भारतीय खिलाड़ियों ने राजकोट में खेले जा रहे पहले टेस्ट मैच में वेस्टइंडीज के गेंदबाजों की बखिया उधेड़ते हुए मैच के दूसरे दिन पहली पारी में 9 विकेट खो कर 649 रन बनाए और चायकाल पर पारी की  घोषणा कर दी. इस पारी में पृथ्वी शौ, विराट कोहली और रविंद्र जडेजा ने शानदार शतक लगाए.

इस के जवाब में दूसरे दिन चायकाल के बाद वेस्टइंडीज की टीम अच्छी शुरुआत नहीं कर सकी और उस के विकेट फटाफट गिरते रहे. तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी और फिर स्पिनरों ने कैरेबियाई बल्लेबाजों पर लगभग न उबरने वाला दबाव बनाया. लिहाजा अब भी मेहमान टीम भारत से 555 रन पीछे है और भारत की नजरें उसे पारी के अंतर से हराने पर लगी हुई हैं.

मोहम्मद शमी ने पहले 4 ओवरों में सिर्फ 5 रन दे कर वेस्टइंडीज के कार्यवाहक कप्तान क्रेग ब्रैथवेट और पौवेल को आउट किया. शमी की सीधी गेंद को ब्रैथवेट पढ़ नहीं पाए और गेंद औफ स्टंप पर जा लगी. तब तक उन्होंने महज 2 रन बनाए थे. इस के बाद दूसरे ओपनर कायरन पौवेल भी ज्यादा देर संघर्ष नहीं कर सके और शमी की ही गेंद पर पगबाधा आउट हो गए. उन्होंने सिर्फ 1 रन ही बनाया था.

वेस्टइंडीज की टीम संभल पाती, इस से पहले ही स्पिनर आर. अश्विन ने शाई होप को बोल्ड करते हुए भारत को तीसरी सफलता दिला दी. उन्होंने 10 रन बनाए थे. कुछ ही देर बाद शिमरन हेटमायर भी 10 के निजी स्कोर पर रन आउट हो गए.

इस के बाद सुनील एम्ब्रिस को रविंद्र जडेजा ने अपना शिकार बनाया. उन्होंने भी 12 रन ही अपने खाते में जोड़े थे. उन्हें रहाणे ने लपका था जिस के साथ ही वेस्टइंडीज की आधी टीम पैवेलियन लौट गई. फिर शेन डौरिच को 10 के निजी स्कोर पर कुलदीप यादव ने बोल्ड कर दिया.

अभी मैच में 3 दिन बाकी हैं और वेस्टइंडीज के 100 रन भी नहीं बन पाए हैं. पहली नजर में यह मैच उस के हाथ से फिसलता दिख रहा है. पर क्रिकेट को अनिश्चितताओं का खेल कहा जाता है और वेस्टइंडीज को हार से पहले हार नहीं माननी चाहिए.

आपके ईमेल से सूचनाएं चोरी तो नहीं हो रहीं? ऐसे करें पता

मौजूदा हालात में डिजिटल सुरक्षा का मुद्दा दुनिया भर के लोगों के लिए सिरदर्द बना हुआ है. सोशल मीडिया हो या ईमेल, आपकी दर्ज जानकारी पूरी तरह से सुरक्षित है इसका दावा खुद वो कंपनी भी नहीं कर सकती जो आपको वो सेवा दे रही है. ऐसे में सूचनाओं की सुरक्षा सबके लिए एक अहम मुद्दा बना हुआ है. आपके ईमेल की जानकारियां कहीं चोरी तो नहीं की जा रहीं हैं, इस बात को पता लगाने के लिए मोजिल्ला फायरफौक्स ने औस्ट्रेलिया के वेब सिक्योरिटी एक्सपर्ट ट्रौय हंट के साथ पार्टनरशिप में एक सर्विस लौंच की है.

इसके लिए आपको मोजिल्ला और ट्रौय हंट के तैयार किए वेबसाइट ‘Have I Been Pwned’  पर जाना होगा. शुरुआती टेस्टिंग के लिए मोजिल्ला ने कई लोगों को इनवाइट किया. लोगों ने इस टेस्टिंग पर सकारात्मक रवैया दिखाया.

फायरफौक्स में दिया गया मौनिटर, Have I Been Pwned का API इस्तेमाल करता है, जो डेटा ब्रीच होने पर यूजर को जानकारी देता है. इसके अलावा अपने यूजर्स को सुरक्षित महसूस कराने के लिए मोजिल्ला ने अपने ब्लौग में लिखा है कि वो ईमेल से जुड़ी कोई भी जानकारी स्टोर नहीं करेंगे.

वेबसाइट पर एक सर्च बार है जिसमें हमें अपनी ईमेल आईडी लिखनी होगी. मोजिल्ला का दावा है कि बेसिक स्कैन के लिए दर्ज किए गए ईमेल स्टोर नहीं किए जाएंगे. हालांकि ब्रीच की पूरी जानकारी के लिए आपको अपनी ईमेल आईडी से साइनअप करना होगा.

भारत रूस के बीच हुई S-400 डिफेंस मिसाइल डील, अमेरिका के सुर बदले

रूस से डील करने वाले देशों पर कड़ा रुख दिखा रहे अमेरिका ने भारत रूस के बीच एस-400 मिसाइल समझौते को लेकर एक बयान जारी किया है.

अमेरिकी दूतावास ने कहा, “हमारे प्रतिबंधों का उद्देश्य रूस को दंडित करना है, उसके घातक बर्ताव और डिफेंस सिस्टम की फंडिंग को रोकना है न कि अपने सहयोगी देशों की सैनिक क्षमता को प्रभावित करना.”

उधर भारत ने शुक्रवार को अमेरिकी धमकी के बावजूद 5.43 बिलियन डालर यानी करीब 40,000 करोड़ रुपए के 5 एस-400 ट्रंफ सर्फेस एअर स्वाड्रोन को रूस से खरीदने के सौदे पर हस्ताक्षर किए. इसके साथ ही भारत और रूस के बीच अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, रेलवे सहित कुल 8 समझौतों पर मुहर लगी है.

साझा बयान में क्या बोले पुतिन

नई दिल्ली में साझा बयान जारी करते हुए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा, “मुझे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक बार फिर से अगले व्लादिवोस्तोक फोरम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होने के लिए निमंत्रण देते हुए अपार खुशी हो रही है.”

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुए वार्षिक सालाना सम्मेलन के बाद नई दिल्ली और रूस ने इस मिसाइल सौदे पर हस्ताक्षर किए.

भारत रूस संबंधों को प्राथमिकता : मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत, रूस के साथ अपने संबंधों को प्राथमिकता देता है. रूस हमेशा से भारत की प्रगतिशीलता का हिस्सा रहा है.

पीएम मोदी ने कहा कि हम दोनों ही देशों का आंतकवाद के खिलाफ संघर्ष, अफगानिस्तान और हिंद प्रशांत की घटनाएं, जलवायु परिवर्तन और संगठन जैसे एससीओ, ब्रिक्स, जी 20, आसियान इन सभी में आपसी हित निहित हैं. उन्होंने कहा कि इन अंतरराष्ट्रीय संगठनों में सहयोग जारी रहेगा.

मोदी ने कहा, ‘‘हम अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में अपने लाभप्रद सहयोग को जारी रखने पर सहमत हुए हैं.’’

प्रधानमंत्री ने भारत के अंतरिक्ष मिशन गगनयान में पूर्ण सहयोग देने के अश्वासन पर रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन को धन्यवाद दिया .

अमेरिका को क्यों नहीं आ रहा रास

शक्तिशाली देश अमेरिका भारत को रक्षा सौदों व व्यापार का प्रमुख साझेदार देश मानता है. अमेरिका नहीं चाहता कि भारत और रूस में रक्षा संबंधी समझौते हों और भारत अमेरिका से अधिक तवज्जो रूस को दे. ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध लगाने को लेकर भी अमेरिका चाहता है कि भारत ईरान से तेल आयात न करे.

भारत ने दिया कूटनीतिक जवाब

रूस से रक्षा सौदे पर डील कर भारत ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि अमेरिका भले ही भारत का मित्र देश है पर भारत अपनी संप्रभुता के लिए अपने पुराने दोस्त रूस को दरकिनार नहीं कर सकता.

मालूम हो कि रूस भारत का व्यापारिक साझेदार देश भी रहा है और दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण चीजों का आयात निर्यात भी होता है.

एस 400 मिसाल की खासीयत

* 36 निशाने एकसाथ लगाने की क्षमता.

* 600 किलोमीटर दूर से दुश्मन मिसाइल अथवा विमान का पता लगा सकती हैं ये मिसाइलें.

* 380 किलोमीटर के दायरे में 30 किलोमीटर ऊंचाई तक मार गिराने की क्षमता.

बढ़ रही शोषण की घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट हुआ सख्त, दिए नीति बनाने के आदेश

देश भर में जहां भी बालिका आश्रय गृह हैं वो यौन शोषण से मुक्त नहीं हैं. ये आश्रय स्थल सरकारी हो या गैर सरकारी, आए दिन किसी न किसी बालिका आश्रय स्थल में लड़कियों के साथ यौन शोषण की खबरें आती रहती हैं. ऐसा दशकों से होता आ रहा है मगर हालात सुधर नहीं रहें.

अब सुप्रीम कोर्ट ने आश्रय गृहों में लड़कियों के यौन शोषण की घटनाओं पर अंकुश के लिए मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उसे अपर्याप्त करार दिया और सरकार को आदेश दिया है कि वह संरक्षण के लिए नीति तैयार करने के बारे में अवगत कराए.

न्यायाधीश मदन लोकुर, अब्दुल नजीर और दीपक गुप्ता की पीठ ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव को 8 अक्तूबर को उपस्थित हो कर ऐसे पीड़ितों की काउंसलिंग और उन के पुनर्वास बच्चों की देखभाल करने वाली संस्थाओं की मौजूदा स्थिति और बाल संरक्षण नीति तैयार करने से जुड़े मुद्दों को समझने में न्यायालय की मदद करने को कहा है.

पीठ ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था पर्याप्त नहीं है यदि यह पर्याप्त होती तो मुजफ्फरपुर में जो कुछ भी हुआ वह नहीं होता.

पीठ मुजफ्फरपुर मामले की सुनवाई कर रही है बिहार के मुजफ्फरपुर के बालिका आश्रय गृह में लड़कियों के यौन शोषण का मामला सुरर्खियों में है इस में आश्रय का संचालकए सरकार के मंत्री और कई अधिकारियों की लिप्तता सामने आई है.

आश्रय से कुछ लड़कियां गायब भी हैं. जांच में आश्रय स्थल में हुई खुदाई में मानव अस्थियां मिली हैं. आरोप है कि आश्रय का संचालक लड़कियों को यौन शोषण के लिए बाहर भेजता था तथा कई लोग आश्रय गृह में भी लगातार आते थे.

पीठ ने सुनवाई के दौरान बाल संरक्षण नीति के बारे में सरकार से जानकारी मांगी थी पर इस संबंध में कुछ भी नहीं बताया गया मंत्रालय की ओर से कहा गया कि बच्चों के साथ अपराध की रोकथाम के लिए शीर्ष अदालत के सुझाव के अनुरूप बाल संरक्षण नीति तैयार करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सभी राज्यों के साथ परामर्श चल रहा है.

केंद्र ने कहा कि ऐसे मामलों में की जाने वाली कार्रवाई के अनेक बिंदु राज्यों को भेजे गए हैं और मंत्रालय शीघ्र ही इस मुद्दे पर एक बैठक आयोजित करेगी.

पीठ ने कहा कि कुछ राज्यों ने इस तरह की घटनाओं को होना स्वीकार किया है और अगर ऐसा हुआ है तो इसे दुरुस्त करने के लिए कदम उठाने होंगे.

सरकारी और गैर सरकारी संगठनों द्वारा चलाए जा रहे बालिका आश्रय गृहों में यौन शोषण कोई नई बात नहीं है. पिछले साल गुड़गांव में एक एनजीओ द्वारा चलाए जा रहे आश्रय गृह में लड़कियों के साथ यौन शोषण का मामला सामने आया था.

आंध्रप्रदेश के एक आश्रय गृह में रहने वाले 26 बच्चों के यौन शोषण की घटना पर शोर मचा था. इस तरह की अनगिनत घटनाओं के बावजूद सरकारों के कान पर जूं तक नहीं रेंगती. सरकारें ऐसी वारदातें रोकने के लिए कोई ठोस नीति नहीं बना पातीं, जो काम सरकारों को करना चाहिए उस के लिए अदालतों को उन्हें बारबार कहना पड़ता है.

बालिका आश्रय गृहों में यौन शोषण की घटनाओं को रोक पाना मुश्किल है. सरकार अदालत के आदेश पर कैसी भी नीति तैयार कर लें पर नीतियों को लागू करने वाले लोग तो वही होंगे जो व्यवस्था में बैठे हैं. यौन शोषण के लिए कितने ही कड़े कानून बना दिए जाएं, कितनी ही ठोस नीतियां तैयार कर दी जाएं, यौन शोषण रोक पाना असंभव है क्योंकि जब तक लड़कियों के प्रति हमारे समाज की रूढ़िवादी सोच नहीं बदलेगी अपराध रुक नहीं सकते.

लड़कियों को समाज सिर्फ उपभोग की वस्तु समझता हैं, आश्रय गृहों में आने वाली लड़कियां उस तबके से आती हैं जिनकी नियति ही औरों की सेवा करनी है. उन्हें आवाज उठाने को हक भी नहीं है, फिर भी उम्मीद की जानी चाहिए शायद सुप्रीम कोर्ट के डंडे से कोई जादू हो जाए.

लवयात्री : बेसिर पैर की कहानी के साथ कलाकारों का घटिया अभिनय

जब जब बौलीवुड में भाई भतीजे व रिश्तेदारों को चमकाने के लिए फिल्में बनी हैं, उन फिल्मों का बंटाधार ही हुआ है. सलमान खान के बहनोई आयुष शर्मा को फिल्म ‘‘लव यात्री’’ में बतौर हीरो पेश किया गया, मगर अफसोस की बात यह रही कि दो घंटे उन्नीस मिनट की अवधि में आयुष एक भी दृश्य में खुद को अभिनेता साबित नहीं कर पाए. वह दर्शकों की सहानुभूति बटोरने में पूर्णरूपेण असफल रहे हैं. पूरी फिल्म सिरदर्द ही है.

फिल्म की कहानी वडोदरा में नवरात्रि से एक दिन पहले शुरू होती है. अहमदाबाद में रह रहे सुश्रुत उर्फ सुसु (आयुष शर्मा) पढ़ाई पर कम और बच्चों को गरबा सिखाने पर ज्यादा ध्यान देते हैं. इस बात से सुश्रुत के पिता काफी नाराज रहते हैं. मगर सुश्रुत को उनकी मां और मामा रसिक (राम कपूर) का पूरा साथ मिलता है. सुसु की जिंदगी में कोई आकांक्षाएं नहीं हैं. वह अपने नाच गाने की दुनिया में ही खुश है. सुसु वडोदरा में ही डांस अकादमी खोलना चाहता है.

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उधर लंदन में रह रहे और लौंडरी के व्यवसाय में संलग्न उद्योगपति समीर पटेल (रोनित रौय) अपने बड़े भाई के बीमार होने की खबर सुनकर अपनी बेटी मिशेल उर्फ मनिषा (वरीना हुसैन) के साथ बड़ोदरा आते हैं और फिर परिवार के दबाव के चलते नवरात्रि मनाने के लिए बड़ोदरा में रूक जाते हैं. मिशेल की तमन्ना लंदन से वापस आकर बड़ोदरा में अपनी मां के एनजीओ को पुनः शुरू करना है.

नवरात्रि में गरबा के मैदान पर सुसु के मामा रसिक गरबा गीत गाते हैं. उसी गरबा के मैदान पर गरबा खेलते हुए पहले ही दिन सुसु और मिशेल मिलते हैं और सुसु को मिशेल से प्यार हो जाता है. फिर सुसु मिशेल को बड़ोदरा घुमाता है. मिषेल उसे अपनी मां के बंद पड़े एनजीओ के बारे में बताती है. जब मिषेल के पिता समीर पटेल को मिषेल व सुसु के बढ़ते संबंधों के बारे में पता चलता है, तो समीर सुसू को कह देता है कि मिषेल तो लंदन में कृष से प्यार करती है. अब इसी बात पर सुसु को गुस्सा आता है और मिषेल से उसका झगड़ा हो जाता है. पहले से तयषुदा दिन यानी कि दशहरे के दिन मिषेल व समीर लंदन वापस चले जाते हैं.

सुसु के मामा रसिक उसे समझाते हैं, तो सुसु मिषेल से मिलने के लिए मामा के गरबा दल के साथ लंदन जाता है. जहां कई घटनाक्रम तेजी से बदलते हैं और फिर प्यार की जीत होती है.

बेसिर पैर की कहानी व अति कमजोर पटकथा वाली फिल्म ‘लवयात्री’ का निर्देशक अभिराज मीनावाला ने और भी बंटाधार कर दिया है. निर्देशक अभिराज मीनावाला ने पुरानी फिल्मों के कई दृश्यों व मसाले को चुराकर इस फिल्म में रख दिया है. काश सलमान खान ने अपने बहनोई आयुष शर्मा को कलाकार के रूप में स्थापित करने के लिए एक बेहतरीन पटकथा व कहानी का चयन किया होता. पूरी फिल्म शुरू से अंत तक उलझन व सिरदर्द के अलावा कुछ नही है.

फिल्म की कहानी का केंद्र प्यार के अलावा गरबा है. मगर फिल्म में नवरात्रि या गरबा को सही ढंग से चित्रित ही नहीं किया गया. फिल्म देखकर लगता है कि फिल्म के लेखक व निर्देशक को गुजरात के मशहूर गरबा नृत्य की एबीसीडी ही नहीं पता है. नृत्य निर्देशक वैभवी मर्चेंट भी गरबा नृत्य को फिल्माने में असफल रही हैं.

जहां तक अभिनय का सवाल है तो सुश्रुत उर्फ सुसु के किरदार मेंं आयुष शर्मा कहीं से भी एक कलाकार दिखने की बजाय सिर्फ घटिया स्तर की सलमान खान की मिमिक्री करते हुए नजर आते हैं. वह अभिव्यक्ति व प्रतिक्रिया के स्तर पर शून्य है. नृत्य के हर स्टेप में वह सलमान खान के ही स्टेप्स की नकल करते हैं. वरीना हुसैन पूरी फिल्म में सिर्फ सुंदर लगी हैं. उनमें भी अभिनय के गुण नदारद ही लगे. अफसोस की बात यह है कि फिल्म में राम कपूर व रोनित रौय सहित कई बेहतरीन कलाकार हैं, पर इनमें से एक भी कलाकार अपने अभिनय से प्रभावित नहीं करता. राम कपूर ने ‘लव यात्री’ क्यों की, यह समझ से परे है.

सलमान खान के अंधभक्त प्रशंसक जरुर इस फिल्म को देखने जा सकते हैं, पर फिल्म देखकर वह भी ठगा हुआ महसूस करेंगे. दो घंटे उन्नीस मिनट की अवधि वाली फिल्म ‘‘लव यात्री’’ का निर्माण ‘‘सलमान खान फिल्म्स’’ ने किया है. फिल्म के निर्देशक अभिराज मीनावाला, निर्देशक निरेन भट्ट, नृत्य निर्देशक वैभवी मर्चेंंट, कैमरामैन जिश्नु भट्टाचार्यजी, संगीतकार तनिष्क बागची तथा कलाकार हैं – आयुष शर्मा, वरीना हुसैन, रोनित रौय, राम कपूर, प्राची शाह, प्रतीक गांधी, मोहिनी शर्मा, अरनब शाह,अमिताभ शाह, सलमान खान, अरबाज खान व सोहेल खान व अन्य.

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