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अगले 48 घंटों तक दुनिया भर में ठप हो सकता है इंटरनेट

स्मार्टफोन, कंप्यूटर, इंटरनेट जैसी तकनीक के बिना आप अपने जीवन की उम्मीद कर सकते हैं? क्या होगा अगर आपसे आपका स्मर्टफोन 2 दिनों के लिए ले लिया जाए? क्या होगा अगर आपके फेसबुक, वाह्टस्ऐप, ट्विटर जैसे सोशल प्लैटफार्मों का ऐक्सेस दो दिनों के लिए रोक दिया जाए? क्या होगा अगर दो दिनों के लिए आप इंटरनेट ही ना चला सकें? ये सवाल ख्याली नहीं हैं. बल्कि ये वो स्थिति है जिससे आपका सामना हो सकता है. दरअसल, दुनियाभर में अगले 48 घंटों के लिए इंटरनेट कनेक्टिविटी बंद होने की खबरें हैं.

दुनिया भर के इंटरनेट यूर्जस को अगले 48 घंटों तक दौरान इंटरनेट कनेक्टिविटी में परेशानी आ सकती है. मुख्य डोमेन सर्वर्स अगले कुछ घंटों तक रुटीन मेंटनेंस पर रहेंगे. रूस के एक अखबार के मुताबिक अगले कुछ घंटों तक इंटरनेट यूजर्स को नेटवर्क फेलियर का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि मुख्य डोमेन सर्वर्स और इससे जुड़े नेटवर्क इन्फ्रास्ट्रक्चर कुछ समय के लिए डाउन रहेंगे. हालांकि इंटरनेट का बंद होना काफी हद तक यूजर्स के नेटवर्क और इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स पर भी निर्भर करेगा. खबर है कि इस दौरान ‘इंटरनेट कौरपोरेशन औफ असाइंड नेम्स एंड नंबर्स ‘क्रिप्टोग्राफिक की’ पर कुछ काम करेगी. इससे इंटरनेट की अड्रेस बुक या डोमेन नेम सिस्टम (DNS) की सिक्योरिटी में मदद मिलेगी. वहीं ICANN ने कहा कि लगातार हो रहे साइबर हमलों की वजह से ये काम करना बेहद जरूरी था.

कम्युनिकेशन्स रेगुलेटरी अथौरिटी (CRA) ने कहा कि ग्लोबल इंटरनेट शटडाउन  सुरक्षा कारणों के लिहाज से बेहद जरूरी है. अथौरिटी ने आगे बताया, ‘ अगर यूजर्स के नेटवर्क औपरेटर्स या इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स (ISPs) इस बदलाव के लिए तैयार नहीं हैं तो कुछ इंटरनेट यूजर्स को इससे परेशानी हो सकती है.’ इंटरनेट यूजर्स को अगले 48 घंटों के दौरान वेब पेज ऐक्सेस करने या किसी ट्रांज़ेक्शन करने में दिक्कतें हो सकती हैं.

स्वामी सानंद की मौत से स्वच्छ गंगा अभियान पर घिरी भाजपा

गंगा नदी को लेकर 2014 में भाजपा नेता नरेंद्र मोदी और उमा भारती सहित नेताओं के भावुक भाषण अभी भी लोगों को याद हैं. ‘गंगा मां ने बुलाया है’ नरेंद्र मोदी का यह भाषण भाजपा के प्रचार का प्रमुख हिस्सा बन गया था. नरेंद्र मोदी ने गुजरात को छोडकर उत्तर प्रदेश की पवित्र गंगा नगरी वाराणसी से लोकसभा चुनाव लड़ने का फैसला किया. उस समय गंगा को न केवल निर्मल बनाने की बात हुई बल्कि गंगा को परिवहन का साधान बनाने और उसको हुगली बंदरगाह तक जोड़ने की बात हुई. कहा गया कि गंगा के माध्यम से नदी परिवहन को बढ़ावा दिया जायेगा. जिससे लोग इलाहाबाद और वाराणसी से पटना और हुगली तक का सफर स्टीमर से तय हो सकें. गंगा पर भावुक प्रचार ने भाजपा को केवल उत्तर प्रदेश में ही 73 सांसद दे दिये. केन्द्र में भाजपा की सरकार बनी नरेंद्र मोदी पहली बार भाजपा कर बहुमत वाली सरकार के मुखिया बन गये. लोकसभा चुनाव के बाद भी भाजपा का विजय रथ चलता रहा. देश के इतिहास में पहली बार भाजपा ने पूरे देश में अपना परचम लहरा दिया.

गंगा को लेकर ‘नमामि गंगे‘ नाम से एक महत्वाकांक्षी योजना बनी. गंगा की दूसरी बड़ी पुजारी, पूर्व मुख्यमंत्री और केन्द्रीय मंत्री का पद संभाल चुकी अनुभवी उमा भारती को गंगा विकास से जुडे विभाग का मंत्री बनाया गया. मंत्री बनने के बाद उमा भारती ने कहा कि अगर वह 5 साल में गंगा को निर्मल नहीं कर पाई तो गंगा में ही जल समाधि ले लेंगी. 2014 से 2018 के बीच गंगा में बहुत सारा पानी बह गया. गंगा निर्मल न हो सकी. उमा भारती का विभाग बदल दिया गया. उमा भारती गंगा को निर्मल नहीं कर पाई.

गंगा को निर्मल करने के लिये हरिद्वार में स्वामी सानंद उर्फ प्रो. जेडी अग्रवाल ने अनशन शुरू कर दिया. स्वामी सानंद की मांग थी कि ‘गंगा एक्ट’ बनाया जाये. अपनी मांग को लेकर स्वामी सानंद ने 22 जून 2018 से हरिद्वार के मातृ सदन में गंगा तप शुरू किया. 112 दिनो के बीच 2 बार उनकी तबीयत बिगड़ी जिससे उनको एम्स में भरती कराना पड़ा. स्वामी सानंद को मनाने उमा भारती और नितिन गडकरी गये तो स्वामी सानंद ने कहा कि जब तक गंगा एक्ट नही बनता अनशन खत्म नहीं होगा. स्वामी सानंद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने पत्र में भी लिखा. गंगा को निर्मल बनाने का दावा करने वाली भाजपा सरकार गंगा पर एक कानून नहीं दे सके. अपने अनशन ने 112 दिन बाद स्वामी सानंद का 86 साल की आयु में निधन हो गया.

स्वामी सानंद कोई बाबा या संत नहीं थे. उत्तर प्रदेश के कांधला कस्बे के रहने वाले थे. रूडकी से अपनी सिविल इंजीनियिंरंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद 1950 में उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग में नौकरी शुरू की. उच्च शिक्षा के लिये वह आईआईटी कानपुर चले गये. उसके बाद विदेश से पीएचडी की. वहां से वापस आकर आईआईटी कानपुर में प्रोफेसर पद पर काम करने लगे. इसके बाद वह गंगा के विकास पर काम करने लगे. वह गंगा को अपनी मां के समान मानते थे. 2013 में जब उन्होने गंगा को लेकर अनशन किया तो हरिद्वार प्रशासन ने इसको आत्महत्या का प्रयास मानकर उनको जेल भी भेज दिया था. भाजपा की सरकार ने उनको बहुत उम्मीदें थी. जब धीरे धीरे उनकी उम्मीदें टूटने लगी तो उन्होने फिर से 22 जून 2018 अनशन शुरू किया. वह कहते थे कि गंगा के लिये जान दे देंगे.

अतं में उनकी मौत हो गई. उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि ‘स्वच्छ गंगा और गंगा खनन को रोकने के लिये अनशन कर रहे स्वामी सानंद की अनदेखी और उपेक्षा की गई. इससे साफ दिख रहा है कि केन्द्र सरकार गंगा को लेकर केवल दिखावटी नीति बना रही है.’ 2018 के अंत में 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव हैं. स्वामी सानंद का अनशन कहीं इन चुनावो में मुद्दा न बन जाये इस भय से अनशन को जबरिया तुड़वाने का प्रयास किया गया. जिस क्रम में स्वामी सानंद की मौत हुई. स्वामी सानंद की मौत ने केंद्र सरकार के गंगा प्रेम को कठघरे में खड़ा कर दिया है.

#MeToo : ‘तुमको रोल दूंगा, तो टौप तो उतारना ही पड़ेगा’

आलोकनाथ पर रेप का आरोप लगानेवाली राइटर-फिल्ममेकर महिला के साथ-साथ उनके साथी कलाकारों ने भी उनपर यौन शोषण का आरोप लगाया, जिसमें तारा फेम नवनीत निशान और अमिता नांगिया सामने आई हैं. हमने दूसरे टीवी कलाकारों से भी मीटू के बारे में बातचीत की.

कॉम्प्रोमाइज नहीं किया, तो प्रोजेक्ट से बाहर

धारवाहिक तारा में शीना की भूमिका करनेवाली अभिनेत्री अमीता नांगिया भी आलोकनाथ के खिलाफ राइटर-फिल्ममेकर के सपोर्ट में आगे आई हैं. उन्होंने बताया, ‘ये सच है कि मुझे रेप केस की कोई जानकारी नहीं थी, मगर मैंने शराब पीकर गाली-गलौच करते हुए आलोकनाथ को कई बार देखा था. नवनीत निशान के साथ किए गए अभद्र व्यवहार की तो मैं गवाह रही हूं. ये सच है कि शराब पीने के बाद वह आदमी अपनी असलियत पर आ जाता था.’

अपने साथ इस तरह के किसी अनुभव के बारे में वह बोलीं, ‘कई बार. मैं नई-नई आई थी और उन दिनों हीरोइन के लिए ट्राई कर रही थी. उस दिन मैं सातवें आसमान में थी, जब मुझे गोविंदा जैसे सुपर स्टार के साथ फिल्म मिली. मैं अक्सर सेट पर अपनी मम्मी को ले जाया करती थी. फिल्म का निर्माता बार-बार मुझसे पूछता कि मैं अपनी मम्मी को सेट पर क्यों लाती हूं/ एक दिन तो हद हो गई. उन्होंने मुझे डिनर पर मिलकर ‘कॉम्प्रोमाइज’ करने को कहा, मैं जब नहीं गई, तो मुझे फिल्म से बाहर निकाल दिया गया. बाद में वह फिल्म गोविंदा के साथ किसी और नई लड़की ने की थी. मैं उस निर्माता का नाम नहीं लेना चाहूंगी, क्योंकि आज वह इस दुनिया में नहीं हैं.’

मुझे कपड़े उतारने के लिए कहा गया

कास्टिंग के बहाने ऐक्ट्रेसेज के कपड़े उतरवाना कोई बड़ी बात नहीं है. सोफी चौधरी ने बताया कि एक नामी निर्देशक ने कैसे बेहयाई से कहा था कि मैंने अगर आपको कास्ट कर लिया, तो आपको टॉप तो उतारना ही पड़ेगा. कुछ इसी तरह के हालात का शिकार टश्न-ऐ-इश्क, दिल से दिल तक और बिग बॉस फेम तस्नीम भसीन को होना पड़ा. वह कहती हैं, ‘शो बिज का कुरूप पहलू है कास्टिंग काउच. पहले मैं इस पर यकीन नहीं करती थी, मगर जब मुझे निजी तौर पर अनुभव हुआ, तब मैं इसकी कड़वी सचाई से वाकिफ हुई. मैं जानती थी कि अगर मुझे एक अभिनेत्री के रूप में आत्मसम्मान और अपनी प्रतिभा के बल पर आगे बढ़ना होगा, तो इससे लड़ना होगा. जब भी किसी मीटिंग में मुझे इस तरह के सिग्नल या असहजता होती है, मैं पहले ही एक लक्ष्मण रेखा खींच लेती हूं. बात नहीं बनती, तो या तो निर्माता मुझे प्रोजेक्ट से निकाल देता है या मैं खुद निकल जाती हूं. एक नामी टीवी प्रोड्यूसर ने मुझसे ऑडिशन के दौरान कपड़े उतारने को कहा था.’

मुझे उसके गुप्तांग पर वार करना पड़ा

टीवी की जानी-मानी ऐक्ट्रेस अचिंत कौर ने बताया, ‘मेरी पर्सनैलिटी और एटिट्यूड कुछ ऐसा सख्त है कि लोग मेरे साथ ऐसी-वैसी हरकत करते हुए घबराते हैं, मगर शुरू में तो मुझे भी इसका सामना करना पड़ा. जुहू के एक होटल में टीवी शो की एक पार्टी में मैं अपनी मॉम के साथ गई हुई थी. मैं टॉयलेट गई, तो सामने के जेंट्स टॉयलेट से आदमी निकला, जिसने खुद को प्रोड्यूसर बताते हुए मुझे अपना कार्ड दिया. मैंने जब हाथ बढ़ाया, तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे अपनी तरफ खींचने लगा. मैं भले कमउम्र की और नई थी, मगर तब भी बहुत दबंग थी. मैंने भी उसके गुप्तांग पर वार करते हुए उसके टेस्टिकल्स जोर से पकड़ लिए. वह बिलबिला गया और नीचे गिर पड़ा. तभी एक गर्भवती महिला वॉशरूम से निकली और उस वक्त मैं हैरान रह गई, जब मुझे पता चला कि वह महिला उस तथाकथित प्रोड्यूसर की बीवी है. वह भी अपने पति की इस हरकत पर हिल गई थी. इसी तरह मुझे एक बार कॉल आई और पूछा गया ‘आपका रेट क्या है?’

असहनीय दर्द की साक्षी रही हूं

तारा फेम नवनीत निशान ने आलोकनाथ के खिलाफ एक राइटर-फिल्ममेकर के आरोपों का समर्थन करते हुए खुलासा किया कि उन्हें भी अभिनेता के यौन उत्पीड़न का शिकार होना पड़ा था. निशान ने कहा कि वह जिस ‘असहनीय दर्द’ से गुजरी हैं, उसे देखते हुए वह उनके साथ सहानुभूति रखती हैं. आलोक नाथ का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि वह भी इस शख्स के पावर से पीड़ित रही हैं.

उन्होंने कहा, ‘वह जिस असहनीय दर्द से गुजरी, उसे देखते हुए मुझे उनसे सहानुभूति है. आप सोच भी नहीं सकते. उसकी हरकत के जवाब में उस व्यक्ति को थप्पड़ मारकर मैंने चार साल तक उत्पीड़न बर्दाश्त किया और लोगों ने इसे भुला दिया. उन्होंने कहा, ‘मेरे हाथ से सीरियल चला गया और मैंने इसकी कीमत चुकाई और बाद में इस व्यक्ति ने मीडिया के जरिए मुझे बेइज्जत किया और मैंने यह सहा. मीटू कैंपेन के बाद महिलाओं के प्रति इंडस्ट्री का रवैया बदलेगा.’

कैसे दिए जाते हैं अभद्र प्रस्ताव…

टीवी ऐक्ट्रेस सुलग्ना ने बताया कि कैसे एक अभिनेत्री को टीवी इंडस्ट्री में भी इस तरह के अभद्र प्रस्तावों से गुजरना पड़ता है. बकौल सुलग्ना, मुझसे जब पहली बार इस तरह की मांग की गई, तो मैं सकते में आ गई. मुझे लगा कि क्या मैं ऐसी दिखती हूं, जो कोई मुझसे इस तरह की मांग कर सके / वह सदमा मेरे लिए बहुत गहरा था. फिर मुझे समझ में आया कि ये आम है. हर कोई ट्राई मारता है, दाना डालता है कि चिड़िया जाल में फंस जाएगी. मैं तो डिप्रेशन में चली गई थी.’

सुलग्ना का समर्थन करते हुए शर्लिन चोपड़ा कहती हैं, ‘कई बार शुरुआत डिनर पर मिलने की बात को लेकर होती है, तो आपको उनका इशारा समझ जाना चाहिए. मैं स्क्रीन पर हॉट इमेज रखती हूं, तो लोगों को लगता है कि मैं आसानी से उपलब्ध हूं, मगर ऐसा नहीं है. मैं एक सेल्फ रिस्पेक्ट वाली अभिनेत्री और निर्मात्री हूं, जिसका रियल इस्टेट का बिजनेस है. मैं जब बॉलिवुड में आई थी, तब मुझे भी ऐसे कई प्रस्ताव मिलते थे. अब मैं गड़े मुर्दे क्या उखाडूं?’

सावधान : आपके फोन की बैटरी को नुकसान पहुंचा रहे हैं ये 8 ऐप

आजकल अधिकतर स्मार्टफोन में बड़ी बैटरी या फिर बैटरी औप्टिमाइज करने का फीचर मिल रहे हैं. बावजूद इसके मोबाइल की बैटरी लोगों को काफी परेशान कर रही है. अब सवाल यह है कि आखिर फोन की बैटरी की लाइफ क्यों खराब हो रही है. दरअसल इसके पीछे मोबाइल ऐप का बड़ा हाथ है.

आइए जानें उन 8 एंड्रायड ऐप के बारे में जो मोबाइल की बैटरी सबसे ज्यादा बर्बाद करते हैं.

पहला : कैंडी क्रश सागा

इस लिस्ट में पहला नाम मशहूर गेम कैंडी क्रश सागा का है. सिक्योरिटी और एंटी वायरस साफ्टवेयर तैयार करने वाली कंपनी AVG के मुताबिक यह ऐप सबसे ज्यादा बैटरी खपत करता है. अगर आप भी इस ऐप का इस्तेमाल करते हैं तो इसे तुरंत अपने फोन से हटा दें.

दूसरा : पेट रेस्क्यू सागा

इस लिस्ट में दूसरा नाम पेट रेस्क्यू सागा का है. यह ऐप बैटरी के साथ-साथ स्टोरेज और डाटा को लेकर भी दिक्कत पैदा करता है.

तीसरा : क्लैश आफ क्लैंस

तीसरा ऐप ‘Clash of Clans’ है. यह एक मशहूर वार गेम ऐप है जो बैटरी की जान ले लेता है.

चौथा : गूगल प्ले-सर्विस

इस लिस्ट में चौथे नंबर पर गूगल प्ले-सर्विस का भी नाम है. AVG के मुताबिक यह ऐप बैटरी, डाटा और स्टोरेज को खत्म करता है.

पांचवा : ओएलएक्स

लिस्ट में 5वें नंबर देश का सबसे बड़ा फ्री क्लासिफाइड ऐप ओएलएक्स है और शापिंग ऐप का है.

छठा : फेसुबक

छठे नंबर पर दुनिया का सबसे बड़ा नेटवर्किंग ऐप फेसुबक है. यह कभी-कभी आपका लोकेशन ट्रैश करता है जिसमें बैटरी खपत होती है.

सातवा : व्हाट्सऐप

इस लिस्ट में व्हाट्सऐप का भी 7वें नंबर पर नाम है.

आठवां : सिक्योरिटी और एंटीवायरस वाले ऐप

8वें नंबर पर सिक्योरिटी और एंटीवायरस वाले ऐप हैं जो आपके फोन के जंक फाइल हटाने और फोन को सिक्योर करने का दावा करते हैं.

क्या आपको भी डोनाल्ड ट्रंप की स्टेच्यू पर पेशाब करने का न्योता आया है?

सुनने में अजीब लगेगा लेकिन अमेरिका के ब्रुकलिन शहर में यूएस प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रंप की एक स्टेच्यू लगी है. जिस पर मोटे-मोटे अक्षरों में लिखा है Pee On Me. यानी मुझ पर पेशाब करो. पहली नजर में यह खबर फेक सी लगती है. मानो सोशल मीडिया के फोटोशोप और कोरलबाजों ने किसी स्टेच्यू को मॉर्फ करके वायरलबाजी की चाह में यह खुराफात की हो. लेकिन जब इस बाबत खबर खंगाली तो पता चला कि अमेरिका के हर मीडिया प्लेटफोर्म पर इस बात के चर्चे हैं कि ट्रंप की स्टेच्यू खुद पर पेशाब करने के लिए लोगों को आमंत्रण दे रही है.

क्या है माजरा

दरअसल फिल गैबिल जो एक एडवरटाइजिंग एक्जूक्यूटिव हैं, ने यह पुतला बनाया है. इस पुतले को बनाकर उन्होंने न्यूयॉर्क के बूकलिन में एक सड़क के किनारे लगा दिया. जिस पर पीली पट्टी लगाकर बाकायदा लिख दिया कि पी ओन मी. ऐसा करने के पीछे उनका मकसद अपनी निजी और लोगों की भावनाओं को इस पुतले के माध्यम से व्यक्त करना है. उनके मुताबिक यह डोनाल्ड के इंसान और प्रेसीडेंट के तौर पर उनकी अस्वीकृति या तिरस्कार जाहिर करने का जरिया है.

गैबिल चाहते हैं कि यह स्टेच्यू कुत्तों को अन्य मूर्तियों पर पेशाब या पोटी करने से रोके और उनकी इस पर प्रेक्टिस भी हो जाए. वे कहते हैं कि उन्हें उम्मीद है कि कुत्ते अब किसी पड़ोस के गार्डन या कॉर्नर को गंदा करने बजाए इस स्टेच्यू पर पेशाब करेंगे. वैसे तस्वीर देखकर अंदाजा हो जाता है कि इस पुतले में ट्रम्प का लुक 80-90 के दौर का है.

अभिव्यक्ति की आजादी का नमूना

फिल का कहना है कि यह पर्सनल एक्सप्रेशन है और इसे जाहिर करने का उनको पूरा हक है. लोगों का भी इस पर पॉजिटिव रिएक्शन आ रहा है. एक तरह से यह मामला फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन यानी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का है. जहां अगर आपको किसी भी इंसान, भले ही वो राष्ट्रपति क्यों न हो, के प्रति अपना गुस्सा या असंतोष जाहिर करना है तो यह कटाक्ष भरा रचनात्मक माध्यम अपना सकते हैं.

अमेरिका में जब से डोनाल्ड प्रेसीडेंट के तौर पर चुने गए हैं, उनका लगातार विरोध हुआ है. हॉलीवुड सेलेब्रिटीज से लेकर पोर्न स्टार्स तक और मॉडल्स से लेकर उनके अपने जानने वालों तक ने उन्हें घटिया मानिसकता का रेसिस्ट इंसान बताया है. और अपने अपने तरीके से अपना गुस्सा भी जाहिर किया है.

डोनाल्ड ट्रम्प अक्सर अपने भाषणों या इंटरव्यू में प्रवासी लोगों और महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां करते रहते हैं. कई दफा तो वे फिजिकली चैलेंज्ड लोगों का मजाक भी उड़ाने से बाज नहीं आते. उनके ज्यादातर बयान बेहद गैरजिम्मेदाराना होते हैं. इसीलिए अमेरिकी जनता ने कभी उन्हें पूरी तरह से प्रेसीडेंट नहीं माना है. उनकी जीत आज भी वहां के लोगों को हजम नहीं होती.

क्या हम में है दम ?

ऐसे में यह उनको करार जवाब है. जरा सोचिये जहां भारत में अभिव्यक्ति की आजादी को कभी नक्सल रैकेट के बहाने तो कभी देशद्रोह के लेबल तले दबाकर बुद्धजीवियों की हत्या तक कर दी जाती है, वहीं अमेरिका में खुलेआम एक व्यक्ति बाकायदा अपनी पहचान उजागर कर प्रेसीडेंट का विरोध कर रहा है.

सवाल यह है कि क्या हम अपने मंत्रियों या नेताओं का इस तरह से खुलकर विरोध या आलोचना कर सकते हैं?

क्रिकेटर उस्मान ख्वाजा की इस मैराथन को याद रखेगी दुनिया

जल्दी ही सैफ अली खान  की फिल्म ‘बाजार’ बड़े परदे पर आने वाली है जिस के बनाए गए ट्रेलर के एक सीन में सैफ कहता है कि दुनिया किसी मैराथन एथलीट के बजाय 100 मीटर की स्प्रिंट मारने वाले उसैन बोल्ट को याद रखती है.

लगता है दुबई में पाकिस्तान और औस्ट्रेलिया के बीच हुए पहले टेस्ट मैच में खेल रहे औस्ट्रेलिया के सलामी बल्लेबाज उस्मान ख्वाजा को सैफ अली खान की यह बात खल गई और उन्होंने एक शानदार मैराथन पारी खेल कर अपनी हार को ड्रा में तब्दील कर दिया.

उस्मान ख्वाजा की इस संघर्षपूर्ण शतकीय पारी के साथ बल्लेबाज ट्रैविस हेड और कप्तान टिम पेन की अर्धशतकीय पारियों के दम पर औस्ट्रेलिया ने दुबई में पाकिस्तान के खिलाफ पहले टेस्ट मैच के आखिरी दिन गुरुवार को 8 विकेट पर 362 रन बना कर मैच ड्रा कराया और पाकिस्तान के मुंह से जीत का निवाला छीन लिया.

उस्मान ख्वाजा 302 गेंदों में 141 रनों की बेहतरीन पारी खेल कर जब पाकिस्तानी गेंदबाज यासिर शाह की गेंद पर आउट हुए तब 14.3 ओवर का खेल बाकी था.

यासिर शाह यहीं पर नहीं रुके. उन्होंने इस के बाद मिशेल स्टार्क को 1 रन पर और पीटर सिडल को भी जीरो पर जल्दीजल्दी चलता किया, तो लगा कि उस्मान ख्वाजा की उम्मीदों पर पानी फिर जाएगा लेकिन इस के बाद टिम पेन और 10वें नंबर पर बल्लेबाजी करने आए नाथन लियोन, जिन्होंने नाबाद 5 रन बनाए, ने अगले 12.1 ओवरों तक पाकिस्तान के गेंदबाजों का डट कर सामना किया और मैच ड्रा करने में कामयाबी पाई. टिम पेन ने 194 गेंदों का सामना कर नाबाद 61 रन बनाए.

दूसरी पारी में पाकिस्तान के लिए यासिर शाह सब से कामयाब गेंदबाज रहे, जिन्होंने 114 रन दे कर 4 विकेट लिए.

मैच के आखिरी और 5वें दिन औस्ट्रेलिया ने पाकिस्तान द्वारा दिए गए 462 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए दिन की शुरुआत 3 विकेट पर 136 रन से की. उस्मान ख्वाजा ने चौथे विकेट के लिए ट्रैविस हेड के साथ 132 रनों की साझेदारी की. ट्रैविस हेड ने 72 रन बनाए.

उस्मान ख्वाजा ने मोहम्मद हफीज की गेंद पर 1 रन ले कर अपना 7वां टेस्ट शतक पूरा किया. इस दौरान उन्होंने 11 बार चौके मार कर गेंद को सीमा रेखा के पार भेजा था.

उस्मान ख्वाजा ने 524 मिनट तक बल्लेबाजी की, जो समय के हिसाब से चौथी पारी में दूसरी सब से बड़ी पारी है. यह रिकौर्ड इंग्लैंड के माइकल एथर्टन के नाम है, जिन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ साल 1995 में जोहानिसबर्ग में 645 मिनट में 185 रन बनाए थे. उस्मान ख्वाजा इस के साथ ही एशिया का दौरा करने वाली टीम के खिलाड़ियों में चौथी पारी में सब से ज्यादा रन बनने वाले बल्लेबाज बन गए हैं. उन्होंने न्यूजीलैंड के डेनियल विटोरी को पछाड़ा जिन्होंने 9 साल पहले श्रीलंका के खिलाफ 140 रन बनाए थे.

पाकिस्तान को उम्मीद थी कि आखिरी दिन उस के गेंदबाजों को मदद मिलेगी और टीम ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को जल्दी आउट कर के पवेलियन भेज देगी, लेकिन उस्मान ख्वाजा और टिम हेड की संयमित पारी से उन्हें निराशा हाथ लगी.

वैसे, पाकिस्तान के पास टिम हेड को आउट करने का एक मौका आया था, लेकिन उस के कप्तान सरफराज अहमद ने डीआरएस नहीं लिया. हुआ यों कि टिम हेड जब 44 रन पर खेल रहे थे तब यासिर शाह की गेंद पर पगबाधा की अपील को मैदानी अंपायर ने नकार दिया था. सरफराज अहमद के पास रिव्यू का मौका था, लेकिन उन्होंने नहीं लिया, हालांकि रीप्ले से लगा था कि गेंद विकेट पर लग रही थी.

इस सीरीज का दूसरा और अंतिम मैच अबुधाबी में 16 अक्टूबर से शुरू होगा. परेशानी की बात यह है कि इस मैच में पाकिस्तान के सलामी बल्लेबाज इमाम उल हक नहीं खेल पाएंगे. पहले मैच के आखिरी दिन फील्डिंग करने के दौरान उन की उंगली पर चोट लग गई थी.

इस तरह एक हारा हुआ मैच ड्रा करा कर औस्ट्रेलिया का हौसला बढ़ा है और अब दूसरा टेस्ट मैच देखना रोमांचक रहेगा. इस का सारा श्रेय उस्मान ख्वाजा की यादगार पारी को जाता है.

म्यूचुअल फंड निवेशक ना करें यह 5 बड़ी गलतियां

लंबे अरसे से म्यूचुअल फंड्स ने निवेशकों के बीच एक पसंदीदा निवेश विकल्प के रूप में लोकप्रियता हासिल की है. हालांकि, कुछ म्यूचुअल फंड निवेशक अपने फंड के प्रदर्शन से पूरी तरह से संतुष्ट नहीं हैं. वे सोच रहे हैं कि क्या गलत हुआ और क्यों पोर्टफोलियो उनकी अपेक्षित लाइन पर रिटर्न नहीं दे पा रहा है. यह संभव है कि उन्होंने कुछ गलतियां की होंगी जो उनके निवेश पर पूरी क्षमता के साथ रिटर्न रोक रही है.

आइये हम ऐसी ही 5 सामान्य गलतियों पर नजर डालें, जिनसे आपको बचने की आवश्यकता है:

बिना लक्ष्य के निवेश

म्यूचुअल फंड वास्तव में सोफिस्टिकेटेड निवेश उत्पाद हैं. जब तक आप किसी फंड का चुनाव एक लक्ष्य सामने रखकर नहीं करते हैं, तब तक आपके गलत फंड में निवेश करने की संभावना ज्यादा होती है. कई निवेशक प्रोडक्ट के काम करने के तरीके की गहराई को समझने से पहले ही निवेश करने की गलती भी करते हैं.

आपको यह जानना होगा कि म्यूचुअल फंड में निवेश में जोखिम रहता है. यहां रिटर्न की गारंटी नहीं है. सुनिश्चित करें कि फंड का उद्देश्य और निवेश का दर्शन आपके लक्ष्यों के अनुरूप हैं. इस प्रकार, आपको सभी इन और आउट से गुजरने के बाद एक विकल्प चुनना होगा.

बाजार के गिरने पर एसआईपी रोक देना

ऐसे कई निवेशक हैं जो बाजार की टाइमिंग को देखकर निवेश करते हैं. बाजार नीचे आने पर वे एसआईपी को रोकते हैं. बाजार बढ़ते समय निवेश शुरू करते हैं. यह निवेश के बुनियादी सिद्धांत के बिल्कुल विपरीत है यानी “बाय लो एंड सेल हाई”. इस तरह, वे अपने सभी लाभ एक ही झटके में गंवा देते हैं, जिन्हें उन्होंने अपने पूरे निवेश कालखंड में अर्जित किया था.

आप अपने निवेश कालखंड पर कायम रहकर इस गलती से बच सकते हैं. बाजार की चाल का आकलन करने के बजाय, आपको अपने निवेश कालखंड के साथ मेल खाते फंड्स की कैटेगरी में निवेश करना चाहिए. इस तरह, आप निवेश की गई पूंजी को खोए बिना सही फंड चुन सकते हैं. इसके अलावा एसआईपी बाजार के टाइमिंग के भ्रम से बचने में मदद करता है और निवेश की आपकी कुल लागत को कम करता है.

कई सारे फंड्स के साथ पोर्टफोलियो

यह सुझाव दिया जाता है कि आपको हमेशा अपने म्यूचुअल फंड निवेश में विविधता रखना चाहिए. लेकिन यदि आप अपने पोर्टफोलियो में बहुत सारे फंड्स को शामिल करते हैं तो यह विविधीकरण के सिद्धांत के खिलाफ काम करने लगता है. यह पोर्टफोलियो होल्डिंग्स में नकल की वजह से है.

आपको पता होना चाहिए कि प्रत्येक योजना के फंड मैनेजर फंड के उद्देश्य के अनुसार सिक्योरिटी के एक निश्चित सेट में निवेश करते हैं. ऐसे में संभव है कि आपके पोर्टफोलियो में समान स्टाक होल्डिंग वाले दो बड़े-कैप इक्विटी फंड शामिल हो. इस तरह के परिदृश्य में विविधीकरण के नाम पर बहुत से बड़े-कैप इक्विटी फंड आपके पास होंगे और वे मिलकर इसके सकारात्मक प्रभाव को कम कर देंगे. इस प्रकार, आप 7 से 9 फंड के लिए अपना निवेश सीमित कर सकते हैं.

बीस साल में प्राकृतिक आपदा में भारत ने गंवाए 59 खरब रुपये

संयुक्त राष्ट्र ने प्राकृतिक आपदा से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर एक रिपोर्ट जारी की है. इसके मुताबिक भारत प्राकृतिक आपदा से आर्थिक नुकसान झेलने वाले शीर्ष दस देशों में चौथे स्थान पर है. 1998 से 2017 के बीच पिछले 20 सालों में भारत को प्राकृतिक आपदा से 79.5 अरब डौलर (तकरीबन 59 खरब रुपये) का नुकसान हुआ है. इस सूची में शीर्ष पर अमेरिका और अंतिम पायदान पर मेक्सिको है जिन्हें क्रमश: 944.8 और 46.5 अरब डौलर का आर्थिक नुकसान हुआ है.

बढ़ता वैश्विक नुकसान

इकौनमिक लौसेस पौवर्टी एंड डिजास्टर 1998-2017 नामक इस रिपोर्ट को यूएन औफिस फौर डिजास्टर रिस्क रिडक्शन ने जारी किया है. 1978 से 1997 के बीच विश्व में प्राकृतिक आपदाओं से हुए 895 बिलियन डौलर के प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान की तुलना में पिछले 20 सालों में 151 फीसद तक बढ़ोत्तरी हुई है.

अमीर देशों पर ज्यादा मार

अमीर देशों को निम्न और मध्यम आय वाले देशों की तुलना में अधिक आर्थिक खामियाजा उठाना पड़ता है. 20 सालों में उच्च आय वाले देशों को 53 फीसद और निम्न आय वाले देशों को सिर्फ 10 फीसद आर्थिक नुकसान हुआ.

बाढ़-तूफान से भयंकर नुकसान

20 सालों में मुख्य वैश्विक घटनाओं में से 91 फीसद प्राकृतिक आपदा थीं जिनमें 43.3% बाढ़, 28.2% तूफान की भागीदारी थी. रिपोर्ट के मुताबिक ये दोनों आपदाएं जन-धन के नुकसान से सबसे ज्यादा प्रभावित करती हैं. वहीं 563 भूकंप और सुनामी की घटनाओं से 7.5 लाख लोगों की मौत हुई जो कुल प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली मौतों का 56 फीसद है.

अमीर देशों पर अधिक मार

पिछले 20 सालों में प्राकृतिक आपदा से प्रभावित देशों को तकरीबन 2908 टिलियन डौलर का नुकसान हुआ है जो पिछले दशकों की तुलना में दोगुना है. रिपोर्ट के मुताबिक निम्न और मध्य आय वाले देशों की तुलना में अमीर देशों को इन आपदाओं में अधिक आर्थिक मार झेलनी पड़ती है.

जलवायु परिवर्तन के प्रभाव

  • 91% मुख्य वैश्विक घटनाओं में से प्राकृतिक आपदाओं की घटनाएं
  • 77% कुल वैश्विक आर्थिक नुकसान (245 लाख करोड़ डौलर) में से प्राकृतिक आपदा का हिस्सा
  • 13 लाख मृतकों की संख्या
  • 7255 विश्व में घटी प्रमुख घटनाएं
  • 151% वैश्विक प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान में बढ़ोत्तरी
  • 4 अरब घायलों, बेघर, विस्थापितों की संख्या
  • 6602 प्राकृतिक आपदा की घटनाएं

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गटर्स के अनुसार सरकारों को इस कहर को भांपकर पूरी व्यवस्था के साथ तैयार रहना होगा ताकि 2030 तक प्राकृतिक आपदाओं से जानमाल के नुकसान को कम किया जा सके.

पुरुषों पर भारी पड़ता मी टू अभियान

मी टू अभियान के ताजा मामले में लेखक चेतन भगत पर गाज गिरी है. एक महिला ने चेतन भगत के साथ हुई ऐसी चैट के स्क्रीनशौट सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिए, जिसमें चेतन उस महिला से अंतरंग बातें करते हुए नजर आ रहे हैं. स्क्रीनशौट के वायरल होते ही लोगों के गुस्से से बचने के लिए चेतन ने सोशल मीडिया पर एक सफाईनामा जारी किया.  उन्होंने फेसबुक पर एक लंबा पोस्ट लिखा. उन्होंने स्क्रीनशौट को सच बताते हुए अपनी गलतियों को स्वीकार किया और अपनी पत्नी समेत उस महिला से भी माफी मांगी.

उन्होंने ये भी लिखा है कि उन के और उस महिला के बीच कुछ भी शारीरिक या आपत्तिजनक नहीं था.  न ही कोई अश्लील फोटो या शब्दों के आदानप्रदान हुए. उन्होंने उस महिला का नंबर भी डिलीट कर दिया था और बरसों से उनकी कोई मुलाकात नहीं हुई है.

मी टू अभियान के तहत महिलाओं का इस तरह अपने खिलाफ हो रहे यौन शोषण का खुलासा करना और पूरी दुनिया के आगे प्रतिष्ठित पुरुषों पर आरोप लगा कर अपनी अपनी कहानियां सुनाना एक अच्छी पहल है. महिलाओं को हौसला मिल रहा है कि वे अपना दर्द बांटे और समाज की आंखें खोलें.

पर सोचने वाली बात यह भी है कि क्या वास्तव में यह एक सकारात्मक पहल है?
क्या सचमुच शिकायत कर रही सभी महिलाएं सच बोल रही हैं?

हर मसले के दो पहलू होते हैं.  यदि कोई महिला किसी पुरुष पर यौन शोषण के आरोप लगा रही है तो ऐसा हो भी सकता है और नहीं भी. यदि 90% महिलाएं सच बोल रही हैं तो हो सकता है कि 10% महिलाएं किसी पुरुष को जानबूझकर बदनाम कर अपना बदला ले रही हों या किसी पुराने विवाद का गुस्सा निकाल रही हों. या फिर इस सच से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि महिलाओं द्वारा पहले भी लोगों की संवेदनाओं और सहानुभूतिओं का बेजा इस्तेमाल किया गया है.

महिलाओं के हित में बने कानून जैसे धारा 498 ए आदि का उपयोग कर पुरुषों को बेवजह पूरे परिवार के साथ जेल भिजवाने का मसला हो या हनीट्रैप के मामलों में पुरुषों को फंसा कर रुपए उगाहने का षड्यंत्र.  कई बार यह  भी देखा गया है कि स्त्रीपुरुष दोनों रजामंदी से रिश्ते बनाते हैं मगर बाद में स्त्री इस बात से मुकर जाती है कि मामला आपसी सहमति का था. वह पुरुष पर बलात्कार का आरोप लगाकर उसे जलील करती नजर आती है.

कुछ महिलाएं ऐसी भी हो सकती हैं जो किसी भी तरह अपनी पब्लिसिटी चाहती हैं या चर्चा में रहना चाहती हैं. कहने का अर्थ यह नहीं है कि सभी महिलाएं ऐसी ही होती हैं मगर हम इस बात से भी इंकार नहीं कर सकते कि कभीकभी ऐसा हो भी सकता है. इसलिए सीधे तौर पर पुरुष को दोषी मान लेना उचित नहीं है. मामले की तह तक जाने के बाद ही हम किसी के प्रति कोई राय बना सकते हैं. सवाल यह भी उठता है कि 10 – 20 साल बाद की जा रही यौन शोषण की शिकायतों का औचित्य क्या है.

यदि किसी महिला के साथ कुछ गलत होता है तो उसे उसी समय कानून का सहारा लेना चाहिए या अपनी तकलीफ उजागर करनी चाहिए. तभी सत्य की जांच हो सकेगी और दोषी को आवश्यक सजा मिल सकेगी.

सालों पहले क्या हुआ था इस का पता नहीं लग सकता. हो सकता है कि उस समय खास परिस्थिति पैदा हुई हो. जो ऐसे हालात बने. उन परिस्थितिओं का आकलन इतने साल बाद करना संभव नहीं.

मी टू की आंधी ने निर्देशक विकास बहल, कौमेडियन उत्सव चक्रवर्ती, तन्मय भट्ट  एक्टर फिल्ममेकर रजत कपूर,  मशहूर लेखक चेतन भगत, सीनियर जर्नलिस्ट प्रशांत कुमार झा, एक्टर आलोक नाथ,  कैलाश खेर समेत कई नामचीनों को अपने लपेटे में ले लिया है.

इस आंधी ने विकास बहल की कंपनी बंद करा दी.  वे अपनी आने वाली फिल्म सुपर 30 के प्रमोशन से दूर हो गए.  वेब सीरीज से भी हटा दिए गए. तो वहीं कौमेडियन उत्सव चक्रवर्ती के वीडियो हटा दिए गए.  रजत कपूर और चेतन भगत ने सोशल मीडिया पर माफी मांगी. नाना पाटेकर तनुश्री के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने को विवश हुए. रेप का आरोप लगने पर आलोक नाथ को ऐसा शौक लगा की उनकी तबीयत ही बिगड़ गई.

बौलीवुड और टीवी एक ग्लैमर वर्ल्ड है जहां काम कर रहे लोगों को काफी बिंदास और आजाद मिजाज माना जाता है. ऐसे में गुड और बैड टच के नाम पर कोई महिला किसी पुरुष पर आरोप लगाती है तो यह तय करना कठिन है कि उस वक्त किस माहौल में क्या घटना हुई थी. हो सकता है तथाकथित दोषी पुरुष ने जिस एक्टिविटी को सहजता से लिया वही मामला आज मीडिया में इतना तूल पकड़ रहा
है.

#MeToo : मलिंगा पर लगा यौन शोषण का आरोप

इन दिनों दुनिया भर में महिलाओँ के शोषण के खिलाफ ‘मी टू’ कैंपेन चल रहा है और इसकी लपट श्रीलंका क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज लसिथ मलिंगा तक पहुंच चुकी है. मलिंगा पर एक महिला ने यौन शोषण का आरोप लगाया है. इससे पहले श्रीलंका क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी अर्जुन रणतुंगा पर भी ऐसा आरोप लगा था.

लसिथ मलिंगा के उपर आरोप लगाने वाली महिला ने अपना नाम गुप्त रखते हुए आइपीएल के दौरान मुंबई के एक होटल में घटी घटना का जिक्र किया. इस घटना को भारतीय महिला प्लेबैक गायिका चिनमई श्रीपदा ने अपने ट्विटर हैंडल पर साझा किया. श्रीपदा ने घटना को उस महिला की तरफ से साझा किया.

श्रीपदा ने अपने ट्विटर पर लिखा कि मैं अपना नाम जाहिर नहीं करना चाहती. ये घटना कुछ वर्ष पहले की है जब मैं मुंबई में थी. वहां एक होटल में मैं अपनी दोस्त से मिलने गई थी जों वहीं पर ठहरी हुई थी. उस वक्त आइपीएल चल रहा था और होटल में मेरा सामना श्रीलंका के एक मशहूर क्रिकेटर से हुआ. उस क्रिकेटर ने मुझे बताया कि उसकी दोस्त उनके कमरे में है. ये बात जानने के बाद मैं उनके कमरे में चली गई जहां मेरी दोस्त नहीं थी. कमरे में पहुंचने के बाद उस क्रिकेटर ने मुझे बिस्तर पर धकेल दिया और मेरे चेहरे के करीब आ गया. उनके शरीर और ताकत के आगे मेरी कुछ नहीं चली. इसके बाद मैंने अपनी आंखें और मुंह बंद कर लिया और उन्होंने मेरे चेहरे का उपयोग किया. इसी दौरान होटल के एक कर्मचारी ने कमरे का दरवाजा खटखटाया जो कमरे के बार को सही करने आया था. मैं मौका पाकर बाथरूम में चली गई और वहां अपना चेहरा धोया और होटल का कर्मचारी जैसे ही कमरे से बाहर गया मैं भी वहां से चली गई. वहां पर मेरा अपमान हुआ. शायद लोग यही करेंगे की मैं जान बूझकर उस कमरे में गई थी क्योंकि वो एक फेमस व्यक्ति था. या तुम ऐसा चाहती थीं या तुम्हारे साथ ऐसा ही होना चाहिए था.

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