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तकनीक का करिश्मा : अब खड़ी हो कर बाथरूम कर सकेंगी महिलाएं

आज के तकनीकी दौर में लेडीज हर जगह मौजूद हैं. वे जेंट्स से अब तकरीबन किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं. जिस्म के मामले में वे कुदरती तौर पर जेंट्स से जरा सा मार खा जाती हैं.

खूबसूरती की मल्लिका औरतों का जिस्म बहुत सौफ्ट होता है, इसलिए उन्हें उस की बहुत ज्यादा केयर करनी पड़ती है. सो, वे मर्दों की तरह खुले में या किसी के सामने न तो कपड़े उतार सकती हैं और न ही टौयलेट वगैरह कर सकती हैं.

हम अपने देश की बात करें, तो यहां फीमेल्स के लिए साफसुथरा टौयलेट मिलना मुश्किल ही है. पब्लिक टौयलेट गंदे रहते हैं, सीट खासतौर पर गंदी रहती हैं, जिन का इस्तेमाल इन्फेक्शन के खतरे को दावत देना होता है. और लेडीज बिना बैठे यूरिन कर नहीं सकतीं.  तकनीक ने उन की इस समस्या को अब दूर कर दिया है.

स्टार्टअप के तहत तकनीक के विद्यार्थियों ने एक ऐसा डिवाइस तैयार किया है जिस में लेडीज खड़ी हो कर यूरिन कर सकती हैं. इस फीमेल यूरीनल डिवाइस का नाम सैनिटेशन फौर वीमेन (sanFe) है. इस डिवाइस यानी यंत्र में खास बात यह भी है कि यह मेन्स्त्रुअल फ्रेंडली भी है. इसे ग्रिप से इस्तेमाल किया जा सकता है. विद्यार्थियों का कहना है कि यह इसलिए है ताकि साड़ी पहनने वाली लेडीज को भी दिक्कत न आए.

वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन (डब्लू एच ओ) के मुताबिक, भारत में हर 2 में से 1 महिला को उस की जिंदगी में कम से कम एक बार यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (यूटीआई) होता है. मालूम हो कि यह डिवाइस साधारण से फनल डिजाईन पर आधारित है. इस तरीके से पब्लिक वाशरूम में टौयलेट की सीट के इस्तेमाल की जरुरत नहीं पड़ती.  यह प्रेग्नेंट लेडीज के लिए खासतौर से राहत है क्योंकि इन्फेक्शन उन के लिए ज्यादा ही खतरनाक है. मेट्रो स्टेशन, एअरपोर्ट, औफिस, कौलेज, रेस्तरां, सिनेमाहाल कहीं भी पब्लिक वाशरूम में इस का इस्तेमाल किया जा सकता है.

यह डिवाइस लीकप्रूफ, वाटरप्रूफ और बायोडिग्रेडेबल है. एक इस्तेमाल के बाद इसे फेंका जा सकता है. इस की कीमत सिर्फ 10 रुपए है. यह औनलाइन उपलब्ध है.

इस डिवाइस की खासियतें

–      यह सोच कर यह डिवाइस तैयार की गई है कि जो जेंट्स की तरह लेडीज को भी इस बात की सहूलियत दे कि वे भी खड़ी हो कर यूरिन कर सकें.

–       इस की सहायता से महिलाओं को गंदे पब्लिक औयलेट की सीट यूज नहीं करनी पड़ेगी जोकि गंभीर बीमारियों की जड़ होती हैं.

–      इंडियन लेडीज जेंट्स से ज्यादा यूरिन इन्फेक्शन से ग्रसित होती हैं, ऐसे में अगर इस यंत्र को वे उसे करती हैं तो डौक्टरों का दावा है कि निश्चित तौर पर उन के रोग में कमी आएगी.

–       जिन लेडीज को झुकने में मुश्किल होती हैं, उन के लिए तो यह डिवाइस मददगार साबित हो सकती है.

–       यह हैंडी-डिवाइस है जो कि प्रेग्नेंट और ओल्ड लेडीज के लिए वरदान साबित हो सकती है.

–       यह डिवाइस ज्यादा महंगी भी नहीं हैं और न ही बहुत भारी है.

–       लेडीज इसे आसानी से अपने बैग में कैरी कर सकती हैं.

लेते हैं ज्यादा प्रोटीन तो हो सकती हैं आपको ये गंभीर बीमारियां

अपने स्वास्थ को ले कर हम कई बार कुछ ज्यादा ही सजग हो जाते हैं. इस चक्कर में हम कुछ ज्यादा ही पोषक तत्व खाना पीना शुरू कर देते हैं. इससे कई नुकसान भी हैं. तुरंत भूख शांत करने के लिए हाई प्रोटीन काफी लाभकारी होता है. पर इसके रोज के इस्तेमाल से कई तरह की परेशानियां आ सकती हैं.

प्रोटीन का अत्यधिक इस्तेमाल के कई साइट इफेक्ट्स होते हैं. लंबे समय तक इसका इस्तेमाल कई तरह की समस्याओं को जन्म देता है. इसके स्वास्थ को भी काफी नुकसान होता है.

कब्‍ज

ज्यादा प्रोटीन के सेवन से कब्ज की समस्या हो सकती है. ऐसा इसलिए क्योंकि इसके ज्यादा सेवन करने से शरीर में फाइबर की कमी होने की संभावना बढ़ जाती है.

कमजोर होती है हड्डियां

ज्यादा प्रोटीन के सेवन से आपकी हड्डियां कमजोर हो सकती हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि हड्डियों को प्रचूर मात्रा में कैल्शियम नहीं मिल पाता.

बढ़ जाता है दिल की बीमारी का खतरा

ज्यादा प्रोटीन के सेवन से दिल की बीमारी का खतरा काफी बढ़ जाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि प्रोटीन के अत्यधिक सेवन से शरीर में अत्यधिक फैट और कोलेस्ट्रौल की मात्रा बढ़ जाती है. इससे शरीर में एलडीएल कोलेस्ट्रौल का लेवल काफी बढ़ जाता है.

होता है कैंसर का खतरा

हाई प्रोटीन लेने से कैंसर का खतरा काफी बढ़ जाता है. ज्यादा प्रोटीन लेने से शरीर में ऐसी कोशिकाएं ज्यादा पैदा होती हैं जो कैंसर के लिए जिम्मेदार होती हैं. फाइबर और कार्बोहाइड्रेट की कमी होने के कारण शरीर में इस रोग की संभावना काफी बढ़ जाती है.

किडनी स्‍टोन या गुर्दे की पथरी  

ज्‍यादा मात्रा में प्रोटीन लेने के कारण गुर्दे में पथरी की समस्‍या हो जाती है. मांस खाने वाले लोगों में ये समस्‍या अधिक होती है क्‍योंकि मांस में प्‍यूरिन नाम प्रोटीन होता है तो पथरी बनाने में सहायक होती है.

राजस्थान : कौन बनेगा मुख्यमंत्री, अशोक गहलोत या सचिन पायलट

राजस्थान में भाजपा के तमाम बड़े केंद्रीय नेताओं द्वारा चुनाव प्रचार के आखिरी दिनों में पूरी ताकत झोंक देने के बावजूद मतदाताओं का गुस्सा वसुंधरा राजे के प्रति कम होता दिखाई नहीं दे रहा है. वोट मांगने जा रहे भाजपा उम्मीदवारों को कई जगहों पर खरीखोटी सुनने को मिल रही है. ऐसे में प्रदेश में एंटी इंकमबेंसी का पूरा फायदा कांग्रेस को मिलने की संभावना है.

अनुमान है कि राज्य के कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों की बारीबारी से 5-5 साल शासन करने की परंपरा एक बार फिर कायम रह सकती है.

कांग्रेस भाजपा के खिलाफ एंटी इंकंबेंसी फैक्टर से खासी उत्साहित है. पार्टी की ओर से मुख्य तौर पर चुनावी प्रचार में केंद्रीय संगठन महासचिव अशोक गहलोत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट उतरे हुए हैं. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी राज्य के कई विधानसभा क्षेत्रों में प्रचार में जुटे हुए हैं. कांग्रेस की चुनावी प्रचार मीटिंगों और रैलियों में भारी भीड़ उमड़ रही है.

इस बीच पहले दिन से ही प्रदेश में कांग्रेस के मुख्यमंत्री के चेहरे को ले कर खासी चर्चा चल रही है. भाजपा ने कांग्रेस से पूछा कि वह राज्य में अपने मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान करे लेकिन कांग्रेस ने कहा कि उन के यहां मुख्यमंत्री का नाम पहले से घोषित करने की रीत नहीं है.

मतदान की तारीख ज्योंज्यों नजदीक आ रही है,अशोक गहलोत और सचिन पायलट तथा उन के समर्थकों के बीच अंदरूनी तौर पर ‘कौन बनेगा मुख्यमंत्री’ के सवाल पर जबरदस्त रस्साकशी चल रही है.

दोनों ही नेता मुख्यमंत्री के सवाल पर स्पष्ट जवाब देने से बच रहे हैं पर अपनीअपनी दावेदारी के संकेत जरूर दे रहे हैं. दोनों ही नेताओं का कहना हैं कि विधायक ही इस बात का फैसला करेंगे. हमारा काम पहले पार्टी को जिताने का है.

अशोक गहलोत राज्य में दो बार मुख्यमंत्री और केंद्र में कई बार मंत्री रह चुके हैं. इस समय वह अखिल भारतीय कांग्रेस पार्टी में संगठन महासचिव जैसे महत्वपूर्ण पद पर हैं. गहलोत को पार्टी संगठन का गहरा अनुभव है. 1974 में गहलोत पहली बार प्रदेश में एनएसयूआई के अध्यक्ष बने थे. 1985 में उन्हें राजीव गांधी ने जब राजस्थान प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बना कर भेजा तो उन्होंने पार्टी को संगठन स्तर पर मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई थी.

उस समय उन्होंने हजारों युवाओं को पार्टी में शामिल कर गांव, ब्लाक स्तर पर संगठन को मजबूत किया. ऐसा प्रदेश में पहली बार हुआ था. गहलोत के इस कार्य की गूंज दिल्ली तक रही.

गहलोत की पार्टी संगठन, कार्यकर्ताओं और प्रशासन पर गहरी पकड़ रही है. पार्टी ने उन के सांगठनिक अनुभव और इसी खासीयत की वजह से संगठन महासचिव जैसा महत्वपूर्ण पद सौंपा.

राज्य में अशोक गहलोत कांग्रेस का सब से प्रमुख चेहरा माना जाता हैं. वह जमीनी नेता, ईमानदार और सादगी पसंद गांधीवादी नेता के रूप में गिने जाते हैं. प्रदेश की जनता में उन के प्रभाव के कारण टिकट बंटवारे में उन की खुले हाथ छूट मिली और उन्होंने अपने समर्थकों को बड़ी संख्या में टिकटें दिलवाई हैं.

गहलोत अभी जोधपुर जिले के सरदारपुरा क्षेत्र से विधायक हैं. उधर मुख्यमंत्री पद के दूसरे दावेदार सचिन पायलट प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद पर हैं और करीब 5 साल से वह प्रदेश में संघर्ष कर रहे हैं. उन्हें लगता है कि उन की इस मेहनत का उन्हें अच्छा फल मिलेगा.

मतदाताओं से जुड़ाव को ले कर तुलना की जाए तो सचिन पायलट से अशोक गहलोत का पलड़ा भारी पड़ता है. वह प्रदेश में सब से लोकप्रिय नेताओं में गिने जाते हैं. साथ ही पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी के भी विश्वस्ततम माने जाते हैं. युवा होते हुए भी सचिन पायलट प्रदेश के युवाओं को आकर्षित कर पाने में ज्यादा कामयाब नहीं समझे गए.

पिछले लोकसभा चुनाव में वह हार गए तो उन्हें प्रदेश में संगठन की जिम्मेदारी दी गई. हालांकि पिछले साल अजमेर और अलवर दो लोकसभा के चुनाव में जीत की कामयाबी का सेहरा पायलट के सिर पर ही बांधा गया.

कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत राजेश पायलट के बेटे होने के कारण सचिन पायलट का रहनसहन, व्यवहार अहंकारी नेता जैसा माना जाता है जबकि गहलोत अमीर, गरीब सब के साथ हिलमिल कर बात, व्यवहार करने वाले जमीनी नेता हैं.

राज्य में हर जातियों को साधने में गहलोत माहिर समझे जाते हैं. खासतौर से जाट, राजपूत और ब्राह्मण नेताओं को. केंद्र और राज्य दोनों की जगहों पर मजबूत स्थिति होने की वजह से इन जातियों के नेता हमेशा से गहलोत के नेतृत्व को मानते आए हैं. प्रदेश में मतदाताओं पर मजबूत पकड़ और लोकप्रियता तथा केंद्र से नजदीकी की वजह से मुख्यमंत्री पद पर अशोक गहलोत भारी पड़ रहे हैं.

न्यू ईयर पार्टी के लिए ऐसे बनाएं माहौल

नए साल में आप जल्द ही प्रवेश करने वाली है. और इसका जश्न बिना हंगामे का हो तो भला ऐसा कैसे हो सकता है. इसके स्वागत के लिए आप अपने घर पर भी पार्टी का आयोजन कर सकती हैं. आइए आज हम आपको बेहद शानदार तरीके बताते है, जिससे आप अपने पार्टी को सफल बनाने के लिए अपना सकती हैं.

आप कितने भी मेहमान बुलाएं लेकिन उनके खाने की व्यवस्था में दिमाग लगाना आपके लिए जरूरी है. ऐसे में बुफे सिस्टम सबसे आसान तरीका हो सकता है. घर में जगह कम हो तो टैरेस या गार्डन में डीजे के साथ बुफे अरेंज कर सकती हैं. ठंड से बचाव के लिए अंगीठी या अलाव जैसे उपाय सोने पर सुहागा होंगे.

नया साल आपके लिए जोश और उमंग से भरपूर हो,  इसकी शुरुआत नए साल की पार्टी से ही होनी चाहिए. घर में कलरफुल लैंपशेड्स हैं तो उनसे लाइट्स में रंग भर सकती हैं. आपकी कलरफुल क्रौकरी भी आज तो निकलनी ही चाहिए. इसके अलावा  कलरफुल रिबन, गुब्बारे और फूलों से घर की सजावट स्पेशल एफेक्ट देगी.

घर के लिविंग एरिया या टैरेस पर आप छोटा डिस्क बना सकती हैं. कदम थिरके इसके लिए डिस्क की मौड्यूलर लाइट जरूर नहीं, आप घर पर अपने म्यूजिक सिस्टम और अच्छे गानों के कलेक्शन से माहौल बना सकती हैं. होम थिएटर है तो बेहतर है वरना आप अपने म्यूजिक सिस्टम को बड़े स्पीकर से अटैच करके भी डांस का माहैल बना सकती हैं.

छोटे किचन को बड़ा दिखाने के ये हैं 4 बेहतरीन उपाय

छोटे किचन को भी आप बड़े आकार का बना सकती हैं पर इसके लिए ये आप पर निर्भर करता हैं कि आप अपने किचन को कैसे व्यवस्थित करेंगी. तो आज हम आपको किचन को बड़ा लुक देने के लिए बेहतरीन आइडियाज बताते हैं, जिसे आप आजमा सकती हैं.

–  आजकल किचन में स्लाइडर और पुलआउट ड्रावर का काफी चलन है जिसमें किवाड़ खोलने के बजाय स्लाइड सरकाकर सामान रखना और निकालना संभव हो. ऐसे ड्रावर जगह भी कम घेरते हैं और इनमें सामान भी अधिक आता है.

–  यहां बात किचन में पर्दा लगाने कि नहीं बल्कि सामान को इस करीने से छिपाने की है कि किचन के स्लैब से लेकर सबकुछ खाली और साफ-सुथरा दिखे. आपका किचन अगर माड्यूलर नहीं है तो दरवाजे के पीछे से लेकर स्लैब तक में आप बर्तनों और डिब्बों के लिए स्टैंड फिट करा सकती हैं.

–  किचन छोटा है तो दीवारों पर हैंगर या बर्तन स्टैंड लगाना समझदारी भरा उपाय है. इनपर कोई टूटने वाली चीज रखने के बजाय स्टील के बर्तन आदि रख सकते हैं. कोशिश करें कि इनकी हाइट कम से कम उतनी हो जहां तक आपका हाथ आसानी से पहुंच सके.

–  किचन छोटा है पर उसके साथ डाइनिंग स्पेस है तो एक बेहतर ट्रिक है. आप डाइनिंग टेबल में बौक्स या स्टैंड बनवा सकते हैं जिसमें क्रौकरी या रोजाना इस्तेमाल होने वाले बर्तनों को रख सकें. लाइट पर दें. कमरे की लाइटिंग उसके आकार को प्रभावित करने में बेहद मददगार है. किचन में हमेशा हल्की लाइटिंग का इस्तेमाल करें. कबर्ड में मौड्यूलर लाइट भी किचन को बड़ा लुक देने में मददगार साबित हो सकता है.

इन 6 विचित्र कारणों से होते हैं चेहरे पर पिंपल

चेहरे पर पिंपल होना आम बात है, लेकिन चेहरे पर हमेशा पिंपल और उसके दाग धब्बे का बने रहना कोई आम बात नहीं है. इसके लिए आप खुद जिम्मेदार हो सकते हैं. पिंपल या एक्ने होने पर हम अक्सर अपनी त्वचा या फिर अपनी डाइट को कोसते हैं. लेकिन एक्ने होने के पीछे केवल यही दो समस्याएं नहीं हैं बल्कि इसके पीछे कई अजीबो गरीब चीजे जिम्मेदार हैं, जिनके बारे में हम आज आपको बताएंगे.

यहां जानिए क्‍या है वो 6 कारण जिनकी वजह से आपके चेहरे पर पिंपल होते हैं.

मोबाइल फोन

phone

क्या आप घंटो तक अपने दोस्तों से फोन पर चिपके रहते हैं? और क्या आपको जरा सा भी एहसास है कि लंबे समय तक फोन को अपनी त्वचा से चिपकाए रखने से तेल निकलता है, जो फोन में पनप रहे बैक्टीरिया के संपर्क में आ के त्वचा पर जम जाते हैं और इन्हीं से पैदा होते हैं एक्ने. इसलिये फोन को प्रयोग करने के बाद टिशू पेपर से अपना फेस पोछना कभी ना भूलें.

हेयर स्टाइलिंग

Hair-styling

ज्यादातर हेयर प्रोडक्ट गाढे और तैलिय होते हैं. इसलिये जब हम सो रहे होते हैं, तब यह हमारी त्वचा के सम्पर्क में आ जाते हैं और स्किन के पोर्स को ब्लौक कर देते हैं. यह इसी तरह होता है जैसे किसी ने त्वचा पर तेल लगा दिया हो. इसलिये हमेशा औयल फ्री हेयर प्रोडक्ट का ही प्रयोग करना चाहिये. साथ ही एक्ने पैदा करने में हेयर स्टाइल का भी काफी रोल होता है. लंबे बाल जो मुंह को छूते हों, वह स्किन के पोर्स को ब्लौक कर देते हैं.

हाथों से चेहरा रगड़ना

blackheads

यह एक आम चीज है जो लगभग हर दूसरा इंसान करता है. हमारे हाथ गंदगी और कीटाणुओं से भरे हुए होते हैं. जब भी हम अपनी हथेलियों को चेहरे पर रखते हैं तो कीटाणु का हमला सीधे हमारी स्किन पोर्स पर होता है. जिससे पिंपल जैसी समस्या पैदा हो जाती है.

हार्ड वाटर

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जी हां, आपको यह जानकर थोड़ा अजीब लगेगा लेकिन पानी भी पिंपल पैदा करने के लिये बहुत हद तक जिम्मेदार होता है. अगर आप हार्ड वाटर का प्रयोग कर रहे हैं, तो वह चेहरे पर कैमिकल रेसीड़यू छोड़ देता है जिससे पिंपल बनने लगता है.

टूथपेस्ट

toothpaste

कई लोगों को ध्यान ही नहीं होता है कि उनके मुंह से टूथब्रश करते वक्‍त झाग निकलता रहता है. कई टूथपेस्ट में फलोराइड होता है, जो एक्ने पैदा करता है. इसके अलावा सोडियम लौरियल सल्फेट भी स्किन में जलन पैदा करता है.

यात्रा

travel

क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि हमेश यात्रा करने के ही बाद हमारे चेहरे पर एक्ने क्यों आते हैं. दरअसल यह मौसम, पानी और खाने के बदलाव की वजह से होता है. अगर आप फ्लाइट द्वारा यात्रा कर रहीं हैं तो आप की त्वचा बहुत ही कम आर्द्र वातावरण के संपर्क में आती है. जिससे आयल ग्रंथी से ज्यादा तेल निकलता है और यह समस्या पैदा हो जाती है.

सर्दियों में आप पर खूब जमेगी यह क्लासिक हेयर स्टाइल

सर्दी आ गई है. इस समय आप स्टाइलिश स्वेटर और जैकेट पहनने के साथ अपने बालों पर खूब सारा एक्‍सपेरिमेंट कर सकती हैं. आज हम आपको कुछ ऐसे हेयरस्‍टाइल बताएंगे जिन्हें सर्दियों के मौसम में बेहद आराम और कम समय में बनाये जा सकते हैं.

जूड़ा

hair style

यह हेयरस्‍टाइल काफी क्‍लासी लुक देती है. इस हेयर स्टाइल के साथ आप चंद मिनटों में बोल्‍ड लुक पा सकती हैं. इस जूडे को बनाने के लिये पतले हेयर बैंड का प्रयोग करें और मुंह पर कुछ लटों को खुला छोड़ दें.

खुले बाल

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अगर आपको सहेलियों के बीच सनसनी फैलानी है तो यह हेयरस्‍टाइल आपके लिये ही है. इस हेयरस्‍टाइल को किसी भी ड्रेस के साथ आजमाया जा सकता है. हां, आपको केवल इसको मैनेज करना आना चाहिये. इसको और निखारने के लिये हेयर बैंड लगाएं.

साइड पोनी

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यह हेयरस्‍टाइल काफी ट्रेंड में है और आसान भी. अगर आप अपनी बारिंग हेयरस्‍टाइल से बोर हो चुकी हैं तो साइड पोनीटेल बांध कर आपको एक नया लुक मिल सकता है. इसको बनाने में भी बिल्‍कुल समय नहीं लगता. इसको बिल्‍कुल ढीला बांधे, जिससे साइड में आपके बाल लंबे दिखेगे.

हाई पोनीटेल

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इस हेयरस्‍टाइल को ज्‍यादातर हर लड़की पसंद करती है. बिना कुछ सोंचे समझे घर से निकलते वक्‍त आप हाई या लो पोनीटेल बांध कर आराम से निकल सकती हैं. यह आराम से मैनेज भी हो जाती है और उधर उधर फैलती भी नहीं है. चाहें तो पोनीटेल बांध कर सामने से सेमी-बीहाईव हेयरस्‍टाइल रखें, यह इन दिनों काफी इन है.

वेव

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अपने बालों को वेवी लुक दीजिये. इसको अगर बांधना हो तो आप केवल एक पोनी बना लीजिये बस आपका काम हो जाएगा.

हर लड़की को देखने आते हैं ये 6 तरह के लड़के

शादी हर इंसान के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला होता हैं, क्योंकि इसके बाद उस इंसान की पूरी जिंदगी बदल जाती हैं. भारत में तो शादी अधिकतर अरेंज मैरिज ही होती हैं, जिसमें कई समय से चली आ रहे रिवाजों को माना जाता हैं और लड़का, लड़की को देखने के लिए जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि जब लड़का किसी लड़की को देखने जाता हैं तो उस समय वह किस तरह व्यवहार करता है.

आज हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ ऐसे ही लड़कों के टाइप के बारे में जो लड़की देखने जाते हैं.

हर चीज को तोलमोल करने वाले

जिन लड़कों को अपनी होने वाली पत्नी से कुछ ज्यादा ही उम्मीदें होती हैं, वह मैरिज मीटिंग के दौरान उनसे कई सवाल पूछते हैं. ऐसे लड़के मैरिज मीटिंग के दौरान लड़की से जुड़ी हर चीज को बारीकी से देखते हैं. आपको भी कभी न कभी ऐसा लड़का देखने के लिए जरूर आया होगा या आ सकता है.

इंटरव्यू लेने वाले

अरेंज मैरिज मीटिंग में लड़का और लड़की दोनों को सवाल पूछने का हक बराबर होता है. मगर कुछ लड़के तो मानो लड़की देखने नहीं बल्कि इंटरव्यू लेने की नियत से आए होते हैं. ऐसे लड़के बेमतलब की बातों को भी डिटेल में पूछते हैं.

धोखेबाज

ऐसे लड़के शुरू में तो आप में बहुत ज्यादा दिलचस्पी दिखाएंगे और उन्हें लगेगा कि आप उनके लिए परफेक्ट हो. ऐसे में वह आपके सामने इम्प्रैशन जमाने के लिए झूठी शानों शौकत और कई तरह के झूठ बोलेंगे. अगर आपको भी ऐसा कोई लड़का देखने के लिए आए तो उनसे बचकर ही रहें.

डिमांडिंग लड़के

मैरिज मीटिंग के दौरान इस तरह के लड़के तो हर लड़की से टकराते होंगे. डिमांडिग लड़के शादी के बाद अपनी वाइफ को अपने हिसाब से रखना चाहते हैं. यह शुरू में तो आपकी हर बात मान लेते हैं लेकिन बाद में अपनी डिमांड करने लग जाते हैं. वहीं, कुछ लड़के ऐसे भी होते हैं जो पहली मीटिंग में लड़कियों को अपनी डिमांड बता देते हैं कि वह आपसे क्या चाहते हैं.

टाइम खराब करने वाले

कुछ लड़के ऐसे होते हैं जो दोस्तो, पेरेंट्स और रिश्तेदारों के कहने पर शादी के लिए हां कर देते हैं लेकिन असल में वह शादी नहीं करना चाहते. ऐसे लड़के न तो आपमें दिलचस्पी लेते हैं और न ही आपसे इस बारे में कुछ कहते हैं. इस तरह के लड़कों को टाइम खराब करने के बाद पीछे छुड़ाने में बिल्कुल समय नहीं लगता.

गोल्ड डिगर और लुटेरा दूल्हा

शादी की बात हो और कोई दहेज की डिमांड न करें, ऐसा तो हो ही नहीं सकता. अरेंज मैरिज मीटिंग के दौरान आप अपनी जिंदगी में ऐसे लड़के से कभी-न-कभी तो जरूर मिलेंगी. ऐसे लड़के सिर्फ पैसों के लिए ही शादी करना चाहते हैं.

हाइवे का हत्यारा : आखिर कैसे फंसा 34 हत्याएं करने वाला आदेश

आदेश ने अब तक 34 हत्याएं करने का जुर्म कबूला है. मुमकिन है कि उस की लिस्ट में और नाम बढ़ें. लेकिन अब किसी को उतनी हैरानी नहीं होगी, जितनी सितंबर के दूसरे हफ्ते में हुई थी. इस सनकी हत्यारे ने एक के बाद एक ट्रक ड्राइवरों और क्लीनरों की हत्याओं की बात कबूली थी और यह भी बताया था कि उस ने कब कहां किस की हत्या की थी.

आदेश जब भोपाल में पकड़ा गया था, तब पुलिस को जरा भी अंदाजा नहीं था कि उस के हत्थे कोई मामूली मुलजिम नहीं, बल्कि एक ऐसा सीरियल किलर चढ़ा है, जिस का कत्ल करने का अपना एक अलग स्टाइल और अंदाज है. जब 34 हत्याओं की बात उस ने स्वीकारी थी तो इस स्वीकारोक्ति की गूंज न केवल देश बल्कि विदेशों तक भी पहुंच गई थी.

हर किसी की दिलचस्पी आदेश खांबरा में है, खासतौर से मनोविज्ञानियों की, जिन के लिए यह कातिल शोध का विषय हो सकता है. मध्य प्रदेश पुलिस उस के द्वारा की गई हत्याओं में सिर खपा रही है कि कैसे इस दुर्दांत और बेरहम हत्यारे द्वारा की गई हत्याओं को सूचीबद्ध कर के ऐसी चार्जशीट तैयार करे कि उस के फांसी के फंदे से बचने की रत्तीभर भी गुंजाइश न रहे.

कौन है आदेश खांबरा

लगभग 50 वर्षीय आदेश खांबरा मामूली शक्तसूरत वाला अधेड़ आदमी है. उस के चेहरे से अगर अपने जुर्मों के अनुपात में क्रूरता नहीं टपकती तो मासूमियत भी नहीं दिखती. वह बेहद सपाट चेहरे वाला तटस्थ और लगभग भावशून्य व्यक्ति है. मामूली पढ़ेलिखे आदेश खांबरा की बातों में दर्शन जरूर झलकता है. पकड़े जाने के बाद वह शायद खुद की अहमियत समझने लगा है, इसीलिए वह और भी ज्यादा लापरवाह दिखने की कोशिश करता है.

भोपाल के नजदीक औद्योगिक इलाका है मंडीदीप जो एक छोटा सा कस्बा है. यहां की फैक्ट्रियों में काम करने आए देश भर के लोग रहते हैं. इन में से अधिकांश पेशे से मजदूर हैं, जो मंडीदीप में स्थाई रूप से बस गए हैं, खांबरा परिवार उन में से एक है.

आदेश खांबरा के पूर्वज भारत पाकिस्तान के बंटवारे के वक्त भोपाल आ गए थे. उस के पिता गुलाब खांबरा सेना से नायक सूबेदार के पद से रिटायर हुए थे. अपना पेट पालने के लिए आदेश मंडीदीप में दरजी की छोटी सी दुकान चलाता था. उस की शादी हो चुकी है और उस के 5 बच्चे भी हैं जिन्हें वह बेहद प्यार करता है.

पुलिस इस से ज्यादा जानकारी आदेश के बारे में हासिल नहीं कर पाई है या फिर वह किन्हीं वजहों के चलते मीडिया को नहीं दे रही है. हां, पुलिस ने यह बात जरूर प्रमुखता से बताई कि आदेश के अपने पिता से बेहद कटु संबंध थे. खुद आदेश ने भी स्वीकारा कि वह इतना बेरहम हत्यारा इसलिए बना क्योंकि उसे परिवार में कभी किसी का प्यार नहीं मिला.

पिता ने तो उसे कभी चाहा ही नहीं और न ही किसी और ने उस की परवाह की. मां की मौत बचपन में ही हो चुकी थी. पिता सैन्य अनुशासन अपने घर में भी चलाते थे और जराजरा सी बात पर उसे मारते, डांटते थे. कभीकभी तो वह उसे घर से निकाल देते थे, इसलिए अपनी उम्र का बड़ा हिस्सा उस ने अभावों में रहते रिश्तेदारों के यहां गुजारा था.

किशोर उम्र बड़ी नाजुक होती है आदेश का मासूम मन इन हालात को बरदाश्त नहीं कर पाया. लिहाजा एक गुस्सा उस के अंदर जमा होता गया, जिस का अहसास उसे नहीं हुआ और वह एक बेरहम हत्यारा बन गया.

ऐसे बना हत्यारा

इन दिनों आदेश को ले कर देश भर में जगहजगह घूम रही पुलिस को यह भी नहीं मालूम कि आदेश ने जुर्म की दुनिया में पहला कदम कब रखा था. लेकिन उस ने जो कबूला उस के मुताबिक साल 2010 के बाद से वह लगातार एक नियमित अंतराल से हत्याएं कर रहा था और हिम्मत बढ़ती गई.

आदेश के निशाने पर ट्रक ड्राइवर और क्लीनर ही क्यों होते थे, इस सवाल का जवाब भी उस के बयानों से मिलता है कि ये लोग सौफ्ट टारगेट होते थे. हत्याओं की शुरुआत भी उस ने भोपाल और मंडीदीप के बीच 11 मील नाम के इलाके से की थी, जो होशंगाबाद रोड पर स्थित है. यहां से एक रास्ता प्रसिद्ध भोजपुर के शंकर मंदिर की तरफ जाता है. इस इलाके में रिहायशी मकान और अपार्टमेंट बन रहे हैं, लेकिन इस के बाद भी वह इलाका सुनसान रहता है. खासतौर से रात के वक्त तो आवाजाही न के बराबर रहती है.

पैसों की तंगी दूर करने के लिए आदेश ने मेहनत करने के बजाय जुर्म का रास्ता चुना. मंडीदीप में रहने वाले आपराधिक प्रवृत्ति के कई लोगों से उस के संबंध थे. संगत रंग लाई और एक दिन उस ने 11 मील इलाके में एक ट्रक लूट लिया. अपनी पहली वारदात की वह तारीख नहीं बता पाया, लेकिन उस की बातों से लगता है कि यह बात सन 2007 की रही होगी.

पहले जुर्म में उस ने ट्रक ड्राइवर की हत्या नहीं की थी, बल्कि उसे लूट कर छोड़ दिया था. इस लूट से उस के हाथ काफी माल लगा था. मोटा माल आसानी से हाथ लगने के बाद उसे टेलरिंग बेहद घाटे वाला और बेकार का काम लगा, क्योंकि जितना पैसा वह 3-4 साल मेहनत कर के कमा पाता था, उतना एक रात में उस ने ट्रक की लूट से कमा लिया था. हालांकि लोगों को दिखाने के लिए वह अपने टेलरिंग के पेशे से चिपका रहा.

पहली बार जुर्म करने वालों की हालत अजीब होती है, कुछ दिन वे पुलिस के डर और राज खुल जाने से सहमे रहते हैं लेकिन जब 10-15 दिन गुजर जाते हैं तो फिर बेफिक्र हो जाते हैं. इसी बीच किसी तरह वे चोरीछिपे घटनास्थल का चक्कर जरूर लगाते हैं, इस के कई मनोवैज्ञानिक कारण अपनी जगह हैं.

पहली लूट पर जब कुछ नहीं बिगड़ा तो आदेश के हौसले बढ़े और दूसरी वारदात को अंजाम देने के लिए उस ने गुना जिले के राघौगढ़ कस्बे को चुना जो पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का चुनाव क्षेत्र होने के चलते मशहूर है.

यह भी साल 2007-2008 के दरम्यान की बात है. राघौगढ़ में ट्रक लूट कर उस ने सबूत मिटाने की गरज से ट्रक ड्राइवर की हत्या कर दी थी. इस के बाद उस ने लगभग हर वारदात में ऐसा ही किया, जिस से पकड़ा न जाए. लगातार हत्याएं करने के बाद वह अपनी अपराध शैली में बेहद ऐहतियात बरतने लगा था.

दूसरी वारदात में भी उसे खासी रकम मिली थी. इस के बाद तो ट्रक ड्राइवरों और क्लीनरों की हत्या को उस ने अपना फुलटाइम जौब बना लिया. लंबी दूरी तक जाने वाले ट्रक ड्राइवरों के पास तो खासी नगदी होती ही है, लेकिन उसे असल आमदनी होती थी ट्रक का माल लूटने से और फिर ट्रक को भी बेच देने से. यह आदेश खांबरा के लिए बाएं हाथ का खेल बनता जा रहा था.

एक राह पकड़ी तो उसे पेशा समझ लिया

सन 2010 से ले कर 2014 तक उस ने 5 ट्रक लूटे और 8 ड्राइवरों और क्लीनरों की हत्या की. लेकिन उस की हिम्मत उस समय और बढ़ गई थी, जब वह तीसरी वारदात को अंजाम देने के लिए महाराष्ट्र के अमरावती जिले में गया था. यहां वारदात के बाद वह पकड़ा गया था और उसे डेढ़ साल की सजा भी हुई थी. जेल से रिहा होने के बाद उस ने जुर्म की दुनिया से किनारा कर लेने का इरादा भी बनाया था, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया. इस की 2 ही वजहें थीं. पहली यह कि जुर्म से कम समय में बहुत ज्यादा पैसा मिलता था और दूसरी बात संगत की थी.

एक बार जो अपराधी जेल हो आता है, उस के भीतर का डर मिट जाता है. वह पुलिसिया कामकाज के तौरतरीकों से भी वाकिफ हो जाता है. यही आदेश के साथ हुआ. सजा होने के कुछ दिन बाद तक उस ने भी जुर्म न करने की बात सोची, लेकिन जल्द ही जुर्म का कीड़ा उस के दिमाग में कुलबुलाने लगा. 2010 से 2014 के बीच वह एक दफा और पकड़ा गया था. इस बार जेल में रहते उस की दोस्ती तुकाराम बंजारा नाम के शख्स से हुई. दोनों ने जेल में तय कर लिया कि अब बाहर जा कर वे मिलजुल कर ट्रक लूटने और ड्राइवरों व क्लीनरों की हत्या का काम करेंगे.

इन दोनों ने जेल में रहते ही हाइवे क्राइम्स पर जैसे पीएचडी कर डाली थी. इस बात पर दोनों की राय एक थी कि मंडीदीप की फैक्ट्रियों में ट्रक ड्राइवर चोरी का माल बेच कर लाखों बनाते हैं तो हम तो उन्हें लूट कर और ज्यादा कमा सकते हैं.

महाराष्ट्र का रहने वाला तुकाराम भी कम खुराफाती और शातिर दिमाग का नहीं था. उसे आदेश जैसे किसी जोखिम उठाने वाले सहयोगी की जरूरत थी. जेल में रहते दोनों ने तरहतरह की योजनाएं बनाईं और बाहर आ कर उन पर अमल भी शुरू कर दिया.

योजनानुसार दोनों ने वारदातों को अंजाम देना शुरू कर दिया. अब ये ट्रक ड्राइवरों को हथियारों की नोंक पर नहीं लूटते थे, बल्कि उन्हें मीठीमीठी बातों में फंसाते थे. फंसने के बाद उन्हें शराब पिलाते या फिर किसी खानेपीने की चीज में नशे की गोलियां मिला कर दे देते थे.

ड्राइवर के बेसुध हो जाने के बाद ये उसे या तो कहीं पानी में डुबो कर मार देते थे या फिर उसे रेल की पटरियों पर सुला देते थे, जिस से मामला हादसे या खुदकुशी का लगे. इन तरीकों को अपनाने के पीछे इन का मकसद पुलिस जांच का दायरा सीमित रखना था, जिस में वे कामयाब भी रहे.

जुर्म की राह की तिकड़ी

इसी दौरान जयकरण प्रजापति नाम का शख्स भी इन के गिरोह में शामिल हो गया. जयकरण मध्य प्रदेश के ही टीकमगढ़ जिले के एक गांव का रहने वाला था, जिस का मुख्य काम ट्रक ड्राइवरों से दोस्ती बढ़ाना था. ट्रक ड्राइवरों को शीशे में उतारने के बाद वह कोड वर्ड में आदेश को बताता था कि अब आगे क्या करना है.

मसलन जब वह फोन पर यह कहता था कि कुछ मीठा लाओ तो इस का सीधा सा मतलब होता था कि शिकार जाल में फंस चुका है, इसलिए उसे ठिकाने लगाने के लिए तैयार रहो. जो ड्राइवर इन का दावतनामा कबूल कर लेते थे, उन्हें ये छक कर शराब पिलाते थे और फिर कहीं सुनसान जगह ले जा कर निर्वस्त्र कर उसे रेल की पटरियों पर फेंक देते थे या फिर किसी तालाब में.

इस तिकड़ी ने 3 साल में 20 से भी ज्यादा वारदातों को अंजाम दिया था. अधिकांश हत्याएं आदेश ने ही की थीं. ऐसा लगता है कि हत्या करते वक्त उस की सनक शवाब पर होती थी और वह अब यह जुर्म लूट के लिए कम बल्कि अपना शौक पूरा करने के लिए ज्यादा करता था. ट्रक ड्राइवरों की हत्या करने में माहिर हो चले आदेश खांबरा ने एकएक कर अपने जुर्म कबूले तो देश भर में सनाका खिंच गया.

अपने द्वारा की गई हत्याओं का राज्यवार हिसाब भी उस ने दिया कि उस ने मध्य प्रदेश में सब से ज्यादा 20 कत्ल किए. इन में से सब से ज्यादा कत्ल चंदेरी के नजदीक किए थे. चंदेरी साड़ी की देश भर में अलग पहचान है, जिसे हालिया प्रदर्शित फिल्म ‘स्त्री’ में दिखाया भी गया है.

दरअसल, गुना, चंदेरी और राजगढ़, आगरामुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े हुए हैं. यहां हत्याएं करना और लूटपाट करना अपेक्षाकृत आसान काम है. महाराष्ट्र के अमरावती में आदेश ने 2 कत्ल किए तो छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में 3 और रायपुर में 2 कत्लों की बात उस ने कबूली है.

एक हत्या उस ने मशहूर देवस्थल शिरडी के संगमनेर जंगल में करने की बात स्वीकारी. उस ने महाराष्ट्र के ही वर्धा में 2 हत्याएं की थीं. ओडिशा के संबलपुर में भी आदेश ने 2 हत्याओं की बात कबूली.

कभी मंडीदीप से शुरू हुआ एक ट्रक की लूट का सिलसिला अंतरराज्यीय बन चुका था. जिस में खास बात यह थी कि आदेश की तरफ किसी का ध्यान नहीं था क्योंकि हाइवे पर हादसे और हत्याएं आम बातें हैं. सुनसान होने के चलते ऐसी जगहों पर पुलिस को गवाह और सबूत नहीं मिलते इसलिए वह भी जांच जल्द बंद कर मामला क्लोज कर देती है.

दूसरे आमतौर पर ड्राइवरों और क्लीनरों की परवाह ट्रक मालिक भी नहीं करते, क्योंकि उन की दिलचस्पी अपने माल और ट्रक में ज्यादा रहती है, जो न मिलें तो वे पुलिस में औपचारिक रिपोर्ट दर्ज करा कर अपने काम में ऐसे लग जाते हैं कि मानो कुछ हुआ ही न हो. ट्रक ड्राइवरों के परिजन भी ज्यादा भागदौड़ नहीं कर पाते. इस सिस्टम और मानसिकता का पूरा फायदा आदेश खांबरा, जयकरण प्रजापति और तुकाराम बंजारा उठा रहे थे.

ऐसे धरा गया बेरहम हत्यारा

आदेश खांबरा यूं ही पुलिस के फंदे में नहीं आ गया, बल्कि उसे अपना दायां हाथ कहे जाने वाले जयकरण की एक भूल काफी महंगी पड़ी. महत्त्वाकांक्षी जयकरण की इच्छा खुद का अपना अलग गिरोह बना कर काम करने की थी. जयकरण के जेहन में यह खयाल आया कि क्यों न एक दफा अपने दम पर ऐसी किसी वारदात को अंजाम दे कर देखा जाए कि कितनी कामयाबी हाथ लगती है. बस इसी को हकीकत में बदलने की कोशिश में वह तो पकड़ा गया, साथ में अपने बौस आदेश खांबरा और साथी तुकाराम को भी ले डूबा.

हुआ यूं था कि अगस्त के पहले ही हफ्ते में भोपाल के बिलखिरिया थाने में बंसल कंपनी के मालिक ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उन का एक ट्रक मंडीदीप से सरिए ले कर रवाना तो हुआ है लेकिन मंजिल तक नहीं पहुंचा है. बिलखिरिया थाने के टीआई लोकेंद्र सिंह के जरिए यह बात एसपी राहुल लोढ़ा और उन से होती हुई आईजी जयदीप प्रसाद तक पहुंची तो पुलिस महकमे ने इस पर गंभीरता से काररवाई शुरू कर दी.

दरअसल, भोपाल पुलिस के आला अफसर लगातार मिल रही ऐसी रिपोर्टों और शिकायतों से परेशान हो चले थे, जिन में ट्रक रवाना तो हुआ था लेकिन अपने गंतव्य तक नहीं पहुंचा था. हैरानी की बात यह थी कि ट्रक के साथसाथ उस के ड्राइवर और क्लीनरों का भी अतापता नहीं लग रहा था.

आईजी जयदीप प्रसाद ने एसपी राहुल लोढ़ा के नेतृत्व में एक जांच टीम गठित कर दी, जिस में एएसपी दिनेश कौशल और तेजतर्रार सीएसपी सुश्री बिट्टू शर्मा को शामिल किया गया. इस टीम ने बंसल कंपनी के लापता हुए ट्रक को लक्ष्य बना कर जांच शुरू की तो जल्द ही सुराग भी हाथ लग गया.

तब पुलिस को इस बात का कतई अंदाजा नहीं था कि उस के हत्थे कौन चढ़ने वाला है. जांच में भोपाल के ही आनंद नगर इलाके के एक जगह लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज में जब यह दिखा कि एक ट्रक से सरिए उतार कर दूसरे ट्रक में रखे जा रहे हैं तो पुलिस टीम को लगा कि हो न हो यह ट्रक बंसल कंपनी का ही हो.

कोशिश की गई तो भोपाल के अयोध्या नगर इलाके में एक लावारिस ट्रक खड़ा मिला. साथ ही मिल गई ट्रक ड्राइवर लखन की लाश. इस के बाद तो पुलिस वालों की बांछें खिल उठीं.

उत्साहित पुलिस वालों ने सीसीटीवी फुटेज में चोरी के सरिए खरीदने वाले को तलाश लिया. उस की मदद से असली खरीदार महेश को अपनी गिरफ्त में ले लिया. मंडीदीप निवासी महेश से जब पुलिस ने पूछताछ की तो उस ने जयकरण का नाम लिया.

जयकरण को भी उठाने में पुलिस ने देर नहीं की. पूछताछ में वह जल्दी ही टूट गया और उस ने अपना गुनाह स्वीकार भी कर लिया कि ट्रक को उसी ने लूटा है. उस ने यह भी बताया कि हत्या करने के बाद ड्राइवर की लाश फेंक दी. जयकरण ने बताया कि यह ट्रक उस ने 11 मील इलाके में लूटा था और सरिया दूसरे को बेच दिए थे.

यहां जयकरण ने वह गलती की थी जो उस का उस्ताद आदेश खांबरा कभी नहीं करता था. वह गलती यह थी कि लूटे गए ट्रक को लावारिस छोड़ देना. जयकरण का इरादा पहले ट्रक बेचने का था, लेकिन उस ने बाद में अपना इरादा बदल दिया था.

जब जयकरण से पूछताछ चल रही थी, तभी इत्तफाक से मंडीदीप के ही एक ट्रांसपोर्टर मनोज शर्मा भी मिसरोद थाने पहुंच गए थे. मनोज ने पुलिस को बताया कि उन्होंने अपने ट्रक में चावल भर कर पुणे भेजे थे. ट्रक पुणे तक पहुंचा भी और वहां से चीनी ले कर वापस भोपाल के लिए रवाना भी हुआ लेकिन अभी तक यहां नहीं पहुंचा. मनोज के मुताबिक उस ट्रक में लगभग 10 लाख रुपए कीमत की चीनी थी.

जैसे ही मनोज ने ड्राइवर का नाम जयकरण बताया तो पुलिस वालों के चेहरे चमक उठे क्योंकि जयकरण पहले से ही उस की गिरफ्त में था. लेकिन नई समस्या यह थी कि बिलखिरिया थाने में बैठा जयकरण शक्कर का ट्रक कैसे उड़ा सकता था. इस बाबत जब उस से पूछताछ की गई तो उस ने बताया कि मनोज वाला ट्रक जिस का नंबर एमएच18बी ए 3560 है, वह तो उस ने आदेश खांबरा के हवाले कर दिया था.

जीपीएस से लगा ट्रक का सुराग

अब तसवीर साफ हो गई कि आदेश 10 लाख रुपए की शक्कर कहीं न कहीं तो जरूर बेचेगा, लेकिन इस का अंदाजा न तो पुलिस लगा पाई और न ही जयकरण कुछ बता पाया. इस वक्त ट्रक कहां होगा, यह भी पुलिस को नहीं मालूम था.

यह समस्या भी बैठेबिठाए हल हो गई, जब मनोज ने यह बताया कि उन्होंने ट्रक में एक गोपनीय जगह जीपीएस फिट कर रखा है. यह ट्रक जिस किसी टोल नाके से गुजरता था तो उस की लोकेशन उन के मोबाइल पर आ जाती थी. मनोज को अपने ट्रक की आखिरी लोकेशन झांसी की मिली थी.

उस के बाद से मैसेज आने बंद हो गए थे. इस के बाद भी उम्मीदें जिंदा थीं, इसलिए बिट्टू शर्मा हैडकांस्टेबल सचिन, आरक्षक अरुण और देवेश को ले कर रवाना हो गईं. मोबाइल फोन के जरिए अब ट्रक की लोकेशन मिलने लगी थी, लेकिन वह पलपल बदल भी रही थी.

बिट्टू शर्मा ने 10 दिन लगातार इस ट्रक का पीछा किया और आखिरकार ट्रक को उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर स्थित एक ढाबे पर देख भी लिया. इस ढाबे पर पुलिस वाले आधी रात को पहुंचे तो वहां का नजारा बेहद रंगीन था. ढाबे पर शराब सहित मौजमस्ती के तमाम इंतजाम थे जो आमतौर पर हाइवे पर होते हैं.

पर इस टीम का मकसद और निशाना आदेश खांबरा था, जिसे अंतत: सुबह तक पकड़ ही लिया गया और भोपाल ले आए. तुकाराम भी उस के साथ था. बिलखिरिया थाने में जैसे ही आदेश ने जयकरण को देखा तो उसे समझ आ गया कि खेल खत्म हो चुका है. इस के बाद भी उस ने पुलिस को बरगलाने की पूरी कोशिश की, लेकिन कामयाब नहीं हो पाया.

बेटे के मोह में उलझा

आदेश का मुंह खुलवाने के लिए पुलिस ने उस पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया और उस के बेटे का हवाला दिया कि जिन ड्राइवरों और क्लीनरों की हत्याएं उस ने की हैं, उन की आत्माएं बदला ले रही हैं. दरअसल, पिछले कुछ दिनों से आदेश के बेटे का 3 बार एक्सीडेंट हुआ था.

डर कह लें या मजबूरी कि आदेश ने एकएक कर सारे गुनाह स्वीकार लिए तो हड़कंप मच गया. आदेश से संबंधित जानकारियां टुकड़ों में ही सही, सामने आने लगीं. उस ने बताया कि वह अपने बेटे और परिवार को बहुत चाहता है.

हैरानी की बात तो यह थी कि उस के घर वालों को नहीं मालूम था कि वह इतना खतरनाक और दुर्दांत हत्यारा है. आदेश अकसर घर से गायब रहता था और कहां और क्यों रहता है, यह सच किसी को नहीं बताता था. हां, अपने गायब रहने के बाबत बहाने बनाने में वह माहिर हो गया था. बयानों में उस ने यह बात कही भी कि अपने गुनाहों की परछाईं उस ने घर वालों पर नहीं पड़ने दी थी.

लेकिन सच यह है कि आदेश के दोनों बेटे शुभम और सुगंध अपने पिता की वास्तविकता जानते थे. नगर पालिका में काम करने वाले शुभम को अपने पिता की गिरफ्तारी की जानकारी 9 सितंबर के अखबारों से मिली थी. शुभम को यह भी मालूम था कि आदेश पर मध्य प्रदेश के गुना के अलावा महाराष्ट्र के अमरावती और संगमनेर में भी मुकदमे चल रहे हैं.

आखिरी बार आदेश 15 अगस्त के दिन घर से निकला था, क्योंकि 16 अगस्त को नागपुर अदालत में उस की पेशी थी. उस का दूसरा बेटा सुगंध एक कार मैकेनिक की दुकान पर काम करता है.

गिरफ्तारी के बाद मंडीदीप में स्वाभाविक तौर पर आदेश की चर्चा रही. जिस ने भी सुना दांतों तले अंगुली दबा ली. इस कस्बे के लोग बताते हैं कि आदेश को टेलरिंग में इतनी महारत हासिल थी कि वह ग्राहक का नाप इंचीटेप से नहीं बल्कि ‘स्त्री’ फिल्म के हीरो राजकुमार राव की तरह अपनी आंखों से ले लेता था और उसी के आधार पर एकदम फिटिंग के कपड़े सिल कर देता था.

मंडीदीप से पहले आदेश रेहटी और शाहगंज के अलावा महाराष्ट के भंडारा में भी टेलरिंग की दुकानें खोल चुका था. यहां कुछ गुंडों से झगड़ा होने के चलते उस ने पुलिस वालों पर ही हमला कर दिया था.

कोई 6 साल पहले आदेश ने भंडारा में जेडेक्स टेलर्स के नाम से अपनी दुकान खोली थी, लेकिन वहां उस का मन नहीं लगा तो वापस मंडीदीप आ गया था. हैरत की बात यह भी है कि मंडीदीप थाने में उस के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं है.

मंडीदीप के पुराने लोग ही जानते हैं कि आदेश खांबरा के दादा नारायणदास खांबरा यहां के जानेमाने और प्रतिष्ठित नागरिक हुआ करते थे. वह एक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और गांधीवादी नेता थे और पेशे से ठेकेदार थे. उन्हें बरखेड़ा से ले कर ओबैदुल्लागंज तक रेलवे लाइन बिछाने के लिए भी लोग जानते हैं और दाहोद बांध बनाने के लिए भी.

साल 1965 में नारायणदास का नाम तब पूरे मध्य प्रदेश में गूंजा था, जब उन्होंने भोजपुर विधानसभा से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था और महज 3 वोटों के मामूली अंतर से हार गए थे.

उस जमाने में इस इलाके में कांग्रेस के अलावा हिंदू महासभा का अच्छा प्रभाव था. गुजरे कल की इन बातों और प्रतिष्ठा से कोई संबंध न रखने वाले आदेश खांबरा अपने परिवार और पूर्वजों का नाम इस तरह यानी कई घरों के चिराग बुझा कर रोशन करेगा, इस का अंदाजा किसी को नहीं था.

गिरफ्तारी के बाद

पुलिस आदेश से काफी कुछ उगलवा चुकी है, जिस से यह तो साफ हुआ कि उस के प्रत्यक्ष सहयोगी जयकरण और तुकाराम ही थे, लेकिन जाने क्यों यह बात हर किसी को हजम नहीं हो रही थी क्योंकि मामला एकदो नहीं बल्कि 34 हत्याओं का था.

ट्रक और लूट का माल बेचने में आदेश का मददगार ग्वालियर निवासी साहबजी था. मिसरोद थाने में पुलिस वाले उसे तोड़ने में तो सफल रहे, साथ ही यह जानने की भी कोशिश करते रहे कि आदेश के संबंध किन और कैसे लोगों से थे.

आदेश ने अपने बयान में पुलिस को बताया कि ट्रक ड्राइवरों की जिंदगी कष्टों से भरी होती है, मैं इन्हें मुक्ति दे रहा था. उस ने स्वीकारा कि उस के संबंध दोनों प्रमुख राजनैतिक दलों भाजपा और कांग्रेस के नेताओं से थे. रायसेन जिले के एक भाजपा नेता का संपत्ति विवाद सुलझाने में उस ने कथित तौर पर सुपारी ले कर हत्या भी की थी. यह कहानी लिखे जाने तक इस बात की भी जांच चल रही थी.

सबूतों के नाम पर पुलिस को उस के पास से एक अहम डायरी मिली, जिस में ज्यादा नहीं सिर्फ 50 लोगों के नाम व मोबाइल नंबर दर्ज थे. इन में से अधिकतर ट्रक ड्राइवरों के हैं या फिर उन लोगों के, जो आदेश के लूटे ट्रकों और उन का माल ठिकाने लगाने में उस के सहयोगी थे.

खास अड्डे थे शिकार फांसने के

पुलिस आदेश को ले कर वहांवहां गई, जहांजहां उस ने हत्याएं करने की बात कबूली थी. कई जगह लाशें मिलीं तो कई जगह से पुलिस को खाली हाथ लौटना पड़ा, क्योंकि आदेश ठीकठीक जगह नहीं बता पाया कि उस ने लाश को कहां ठिकाने लगाया था.

अब से करीब 3 महीने पहले गायब हुए सीहोर के ड्राइवर राजेश पवार की लाश पुलिस ने उस की निशानदेही पर चंदेरी के निकट एक पुलिया से बरामद की, जिसे राजेश की पत्नी ने कपड़ों से पहचाना. इस रास्ते पर आदेश ने 2 ट्रक लूट कर 6 लोगों की हत्या की थी और सभी की लाशें पुलिया के नीचे पानी में फेंक दी थीं.

इन तीनों के 11 मील इलाके के कुछ ढाबे खास अड्डे थे, जहां से ये शिकार फांसते थे. आदेश की गिरफ्तारी के बाद देश भर के पुलिस थानों से भोपाल फोन आए कि कहीं उन के इलाकों में अज्ञात हत्याओं के आरोपी ये तीनों तो नहीं. यह बात भी पूछताछ में उजागर हुई कि महाराष्ट्र की तरफ की गई कुछ वारदातों को तुकाराम ने अपने दम पर अंजाम दिया था.

पुलिस हिरासत में आदेश की रंगीनमिजाज शख्सियत भी सामने आई. उस की एक प्रेमिका ग्वालियर में है तो दूसरी भिंड में. इन दोनों के नाम लिली हैं, जो अपने आशिक के पैसों पर लग्जरी जिंदगी जी रही थीं. लिली इन के असली नाम नहीं हैं, बल्कि ये नाम इन्हें आदेश ने अपनी सहूलियत के लिए दिए थे.

आदेश अपना खाली वक्त इन दोनों के साथ लेकिन अलगअलग गुजारता था. उस का कहना है कि उस की दोनों माशूकाओं को भी उस के गुनाहों की जानकारी नहीं थी. एक लिली के बारे में उस ने बताया कि वह कालेज गर्ल है जिस के बारे में चर्चा है कि वह उसे अपने धंधे में शामिल कर हाइवे क्वीन बनाने की मंशा पाले बैठा था.

पुलिस ने उस के ठिकाने पर दबिश दी लेकिन वह गायब हो चुकी थी. इसी तरह जयकरण की भी एक माशूका थी, जिस के बारे में उसे शक था कि उस के संबंध एक रिश्तेदार से हैं, जयकरण ने उस रिश्तेदार की ही हत्या कर डाली थी.

कहानी अभी बाकी है

अक्तूबर के पहले हफ्ते में मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव की गतिविधियां शुरू हुईं और आचार संहिता लगी तो आदेश की चर्चा भी कम हो गई. लेकिन अब तक पुलिस साहिबजी को गिरफ्तार कर भोपाल ले आई थी, जो गाजीपुर जेल में बंद था. इधर एक दूसरे पेशेवर अपराधी बिल्ला का कहना है कि वह दरअसल आदेश का गुरू है. बिल्ला का परिवार भी सालों पहले पाकिस्तान से आ कर झारखंड में बस गया था. सन 1989 में वह पंजाब से होता हुआ ग्वालियर आ गया और यहीं से आपराधिक वारदातों को अंजाम देने लगा.

बिल्ला भी ट्रक लूटता था. उस ने पहली वारदात साल 1992 में की थी. साल 2002 में वह राजगढ़ में गिरफ्तार हुआ था और सन 2007 में उस की मुलाकात आदेश से हुई थी. इस के बाद दोनों ने मिल कर हाइवे गैंग बना लिया था..

आदेश के जुर्मों की दास्तान बेहद उलझी हुई है, जिसे सुलझाने में पुलिस को पसीने आ रहे हैं. घटनाओं और पात्रों को सिलसिलेवार जमाना आसान काम नहीं रह गया है. इसी सिलसिले में 7 अक्तूबर को आदेश के मुंहबोले चाचा अशोक खांबरा का भी जिक्र हुआ, जिस की कहानी आदेश से कहीं ज्यादा दिलचस्प है. हिरासत में आदेश ने अपने मुंहबोले चाचा अशोक की बात कर के उसे अपना आदर्श बताया था.

अशोक खांबरा पर 70 हत्याएं कर ट्रक लूटने के आरोप हैं. उस की कहानी भी एकदम फिल्मी है. सन 2000 में वह बिलासपुर जेल में बंद था. पुलिस जब उसे पेशी के लिए ले जा रही थी, तब उस के गुर्गों ने फ्रूटी में नशीला पदार्थ मिला कर पुलिस वालों को पिला दी थी और अशोक फरार हो गया था.

इस के कुछ साल बाद अशोक के घर वालों ने अशोक की लाश नैनीताल के जंगलों में होने का दावा पेश कर उस का मृत्यु प्रमाणपत्र हासिल कर लिया था. जब पुलिस रिकौर्ड में वह मर गया तो उस के खिलाफ चल रहे मामलों पर भी विराम लग गया. शक इस बात का है कि वह मरा नहीं बल्कि जिंदा है यानी नैनीताल के जंगलों में जो लाश मिली थी, वह अशोक की नहीं बल्कि किसी और की थी.

अब अशोक खांबरा की फाइलें भी खुल रही हैं और पुलिस उस का और आदेश का कनेक्शन भी ढूंढ रही है. अंदाजा है कि अशोक उत्तर प्रदेश में कहीं हो सकता है. इधर आदेश ने अशोक के बाबत चुप्पी साध रखी है. यानी मामला सुलझने के बजाय और उलझता जा रहा है.

अब नएनए किरदार आदेश से जुड़ रहे हैं, इस से पुलिस की मुश्किलें बढ़ रही हैं. इस के बाद भी वह जुटी हुई है कि बिखरी हुई कडि़यां जोड़ कर मामले को सुलझाए. अब यह सब चुनाव हो जाने के बाद ही संभव हो पाएगा, तब तक नएनए खुलासे होते रहेंगे कि आदेश के कहां, किस से, कैसे ताल्लुकात थे?

ससुराल की इन बातों को मायके में कभी ना बताएं

शादी के बाद लड़की अपना घर छोड़कर अपने ससुराल चली जाती है और उसे ही अपना घर बना लेती है. शादी के बाद लड़की एक घर की बहू बन जाती है और उस पर कई जिम्मेदारियां भी आ जाती हैं.

ऐसे में हर बहू को कई बातों को ध्यान में रखने की जरूरत होती हैं और अपने ससुराल के सीक्रेट को छुपाकर रखने की जरूरत होती है. जिनकी मदद से घर में खुशियां बनी रहती हैं.

तो आइये आज हम बताते हैं आपको ससुराल के उन सीक्रेट के बारे में जो हर बहू को अपने मायके में भी नहीं बताने चाहिए.

पति की आदतें

हर इंसान की आदतें अलग-अलग होती हैं. आपको अपने पति की कुछ आदतें पसंद न हो तो सहेलियों के सामने उनकी बुराई करने की बजाय प्यार से उसे सुधारने की कोशिश करें. लोग तो सिर्फ मजाक उड़ाएंगे लेकिन आपकी जीवनसाथी ही आपकी पहचान है. एक-दूसरे की कद्र करें,बुराई नहीं.

फैमिली प्लानिंग

शादी के बाद अकसर दूसरी औरतें यह जानने के लिए उत्सुक होती हैं कि आप बच्चा कब पैदा कर रही हैं. इस बात का ध्यान रखें की परिवार को आगे बढ़ाने की सलाह पति-पत्नी का खास सीक्रेट है. दूसरों की राय मानने की बजाए अपनी बात की आपस में ही रहने दें.

आर्थिक स्थिति

अपनी सहेलियों या फिर रिश्तेदारों के सामने ससुराल की आर्थिक स्थिति का रोना न रोएं. इस बात को हमेशा याद रखें कि पीठ पीछे वह आपकी बुराई करेंगे. मदद के लिए कोई आगे नहीं आएगा. घर का बजट अपनी आय के हिसाब से ही बनाएं. पहले ही खर्च को कम करें और इंवेस्टमेंट की तरफ ध्यान दें.

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