Download App

इन 6 कारणों की वजह से होता है ‘एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर’

अक्सर देखा गया है कि नई-नई शादी होने पर पति-पत्नी में नजदीकियां बनी रहती है. समय के साथ ये नजदीकियां कम होती जाती हैं और दोनों में से किसी एक पार्टनर का बाहर एक्सट्रा अफेयर शुरू हो जाता है. हांलाकि इसके पीछे कई कारण होते हैं. आज हम आपको उन्हीं कारणों के बारे में बताने जा रहे हैं जो एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर का कारण बनते हैं. तो आइये जानते हैं इन कारणों के बारे में.

बहुत कम उम्र में शादी होना

लड़का हो या लड़की, लाइफ में सेट होने के बाद पेरेंट्स बच्चों की शादी कर देते हैं. ऐसे में लोग जब जिंदगी के अगले पड़ाव पर पहुंचते हैं तो उन्हें लगता है कि उन्होंने काफी कुछ मिस कर दिया. ऐसे में वह एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर की ओर कदम बढ़ाने लगते हैं.

सेक्सुअल सेटिस्फेकशन न मिलना

एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर का यह सबसे मुख्य कारण है. अपने पार्टनर से शारीरिक सुख न मिल पाने के कारण वह अक्सर दूसरों की तरह आकर्षित हो जाते हैं.

किसी की तरफ अट्रैक्ट होना

अचानक से किसी का अच्छा या सुदंर लगना आपको उस व्यक्ति की तरफ अट्रैक्ट करता है. ऐसे में आपको अपने पार्टनर की खूबियां दिखाई नहीं देती और दूसरों की हर छोटी-बड़ी बात भी अच्छी लगने लगती है.

बच्चे हो जाने के बाद

किसी भी कपल के पेरेंट्स बनने के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल जाती है, जोकि एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर का कारण बनता है. क्योंकि पत्नी ज्यादा वक्त अपने बच्चे के साथ ही बिताने लगती है और इसी कारण पति का मोह भंग हो जाता है.

रोक-टोक

लड़का हो या लड़की, हर कोई अपनी मर्जी से जीना पसंद करता हैं. उन्हें किसी का रोकना-टोकना अच्छा नहीं लगता. ऐसे में पार्टनर का हर बात के लिए रोक-टोक करना और सवाल पूछना उन्हें परेशान कर देते हैं. इसी कारण वह अपने पार्टनर की बजाए किसी और की तरफ अट्रैक्ट होने लगते हैं.

घरेलू प्रौब्लम्स

घर में रोजाना की किच-किच भी पति-पत्नी के अफेयर का कारण बन सकती है. कपल्स घरेलू परेशानियों की वजह से होने वाले तनाव को बर्दाश्त नहीं कर पाते. ऐसे में वह तनाव को दूर करने और मानसिक शांति पाने के लिए बाहर प्यार की तलाश करने लगते हैं.

जहरीला आदमी : कौशल किशोर जैसे लोगों की कोई कमी नहीं

लगभग 40-45 साल की थुलथुल जिस्म की सुमित्रा पिछले 15-20 मिनट से राजकंवर के फ्लैट की कालबेल बजा रही थी. जब दरवाजा नहीं खुला तो वह परेशान हो गई. फिर थकहार कर वहीं बैठ गई. वह झल्लाते हुए आश्चर्य से दरवाजे की तरफ देख रही थी. उसे समझ नहीं आ रहा था कि एक बार कालबेल बजाने पर दरवाजा खोल देने वाली राजकंवर मेमसाहब दरवाजा क्यों नहीं खोल रहीं. जबकि फ्लैट के अंदर गूंजती कालबेल की आवाज उसे बाहर भी सुनाई दे रही थी.

बमुश्किल कमर पर हाथ रख कर खड़ी हुई सुमित्रा ने एक बार फिर दरवाजा खुलवाने की कोशिश में दरवाजे को हाथ से जोर से पीटा. इतना ही नहीं, उस ने मेमसाहब का नाम ले कर भी दरवाजा खोलने को कहा. लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला. सुमित्रा राजकंवर नागर के यहां खाना बनाने, कपड़े धोने से ले कर सभी घरेलू कामकाज करती थी.

जिस फ्लैट की हम बात कर रहे हैं, वह कोटा से लगभग 100 किलोमीटर दूर शहरनुमा कस्बे इटावा की सरोवर कालोनी में स्थित स्थानीय राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल की व्याख्याता राजकंवर नागर का था, जहां वह अपने पति कौशल किशोर और 6 वर्षीय बेटे उदित के साथ किराए पर रह रही थीं.

उस दिन मंगलवार था और तारीख थी 4 सितंबर. सुबह के करीब 8 बज चुके थे. जब सुमित्रा रोजाना की तरह राजकंवर के फ्लैट पर पहुंची थी. उस तिमंजिला इमारत में राजकंवर दूसरी मंजिल के आखिरी ब्लौक में रहती थीं. सुमित्रा राजकंवर की रोजमर्रा की दिनचर्या से भलीभांति वाकिफ थी.

सुबह जिस समय सुमित्रा काम करने के लिए फ्लैट पर पहुंचती थी, राजकंवर ब्रेकफास्ट कर चुकी होती थीं और स्कूल जाने के लिए तैयार मिलती थीं. बेटे उदित को भी स्कूल जाना होता था, इसलिए वह भी उन के साथ जाने को तैयार हो चुका होता था. आमतौर पर दरवाजा राजकंवर ही खोलती थीं.

कभीकभार ही ऐसा हुआ होगा कि उबासियां और अंगड़ाइयां लेते हुए उन के पति ने दरवाजा खोला हो. जब फ्लैट का दरवाजा नहीं खुला तो सुमित्रा को किसी अनहोनी का अंदेशा सताने लगा था. इतनी देर तक राजकंवर मेमसाहब के सोते रहने का तो कोई सवाल ही नहीं था.

राजकंवर के बगल वाले फ्लैट में रहने वाले कुंदनलाल रहेजा (परिवर्तित नाम) को न सिर्फ घंटी की आवाज सुनाई दे रही थी, बल्कि वह कामवाली बाई सुमित्रा की आवाजें भी सुन रहे थे. सब कुछ इतना संदेहास्पद था कि उन से रहा नहीं गया. रहेजा कारोबारी थे. लिहाजा उस समय वह दुकान पर जाने की तैयारी में थे.

उन्हें भी समझ नहीं आ रहा था कि राजकंवर या उन के पति दरवाजा क्यों नहीं खोल रहे. आखिरकार जब रहेजा से रहा नहीं गया तो वह अपने फ्लैट का दरवाजा खोल कर बाहर आए, जहां उन की नजरें सामने खड़ी सुमित्रा पर पड़ीं.

रहेजा ने सुमित्रा से पूछा, ‘‘क्या बात है सुमित्रा?’’

खून से लथपथ मिलीं राजकंवर

अब तक अनहोनी के अंदेशे से सांस ऊपरनीचे करती सुमित्रा को जैसे राहत मिल गई. उस ने शिकायती लहजे में कहा, ‘‘देखिए सेठजी, कितनी देर से मैं घंटी बजा रही हूं, दरवाजा भी खटखटा चुकी हूं, लेकिन कोई दरवाजा खोल ही नहीं रहा.’’

अनहोनी की आशंका में डूबतेउतराते रहेजा ने भी कालबेल बजाई, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई. उन्होंने सुमित्रा से पूछा, ‘‘मैडम का बेटा उदित भी तो होगा अंदर, उसे दरवाजा खोल देना चाहिए था.’’

‘‘साहबजी, वो तो 3-4 दिन से अपने नाना के घर गया है. वह 6 साल का ही तो है, यहां होता भी तो दरवाजा खोलना उस के वश की बात नहीं थी.’’ सुमित्रा ने बताया.

आखिर थकहार कर रहेजा ने मोबाइल पर राजकंवर का मोबाइल नंबर डायल किया. लेकिन कुछ देर रिंग जाने के बाद एक घिसीपिटी रिकौर्डिंग सुनाने के साथ ही मोबाइल बंद हो गया.

रहेजा के कानों में जैसे खतरे की घंटियां बजने लगीं. कुछ सोच कर उन्होंने सुमित्रा को वहीं रुकने को कहा और फिर अपने फ्लैट के पिछवाड़े की बालकनी की तरफ बढ़े. तब तक आवाज सुन कर इमारत के कुछ और लोग भी वहां आ गए थे.

रहेजा ने अपने नेपाली नौकर को बालकनी की परछत्ती पर चढ़ कर राजकंवर के कमरे में झांकने को कहा. बहादुर सब कुछ सुन चुका था, इसलिए वह भी घबराया हुआ था. लेकिन लोगों के हौसला दिलाने पर ऊपर चढ़ कर उस ने जो कुछ देखा, बुरी तरह सहम कर रह गया. वह घबरा कर नीचे कूदा और हांफते हुए बोला, ‘‘शाब…शाब…मेमशाब नीचे फर्श पर पड़ा है. आसपास खून फैला है.’’

बहादुर ने जो कुछ बताया, उस से वहां के माहौल में सन्नाटा खिंच गया. आगे की काररवाई की पहल भी रहेजा ने ही की. उन्होंने तुरंत पुलिस को फोन कर दिया.

आधे घंटे के अंदर थानाप्रभारी संजय राय की अगुवाई में पुलिस टीम वहां पहुंच गई. पुलिस ने वहां मौजूद रहेजा और अन्य लोगों से पूछताछ की. चूंकि फ्लैट का दरवाजा बंद था, इसलिए लोगों की मौजूदगी में दरवाजा तोड़ कर थानाप्रभारी फ्लैट में घुसे तो सामने का दृश्य देख कर भौंचक रह गए. राजकंवर जमीन पर बेसुध पड़ी हुई थीं और उन के कपड़े खून से सने हुए थे.

एक बार जान बचाई पुलिस ने

थानाप्रभारी ने चैक किया तो राजकंवर की सांस फंसफंस कर आ रही थीं. यानी कि वह जीवित थीं, लेकिन जिस तरह उन की कनपटी और कलाइयों से खून रिस रहा था और साड़ीब्लाउज खून से सने थे, लगता था उन के साथ बड़ी निर्दयता से मारपीट की गई थी. संजय राय ने राजकंवर को अस्पताल भेजने का बंदोबस्त किया.

इस के बाद उन्होंने पूरे कमरे का निरीक्षण किया. सब कुछ उलटापुलटा पड़ा था. लगता था, हमलावर ने कमरे में रखे सामान पर भी अपना गुस्सा उतारा था. थानाप्रभारी ने पूछा, ‘‘क्या राजकंवर यहां अकेली रहती थीं?’’

‘‘नहीं सर,’’ रहेजा ने बताया, ‘‘इन का पति कौशल किशोर और करीब 6 साल का बेटा उदित भी रहता है.’’

‘‘…तो वे दोनों कहां हैं?’’ राय ने रहेजा से ही पूछा.

‘‘सर, बेटा तो 3-4 दिन पहले ही ननिहाल गया है. लेकिन पति कौशल किशोर को तो यहीं होना चाहिए था.’’ इस के साथ ही रहेजा ने इधरउधर नजरें दौड़ाने के बाद कहा, ‘‘वह तो कहीं नजर नहीं आ रहे. पता नहीं कहां हैं?’’

थानाप्रभारी ने रहेजा से ही पूछा, ‘‘आप के पड़ोस के फ्लैट में इतना घमासान मचा और आप को भनक तक नहीं लगी.’’

पति नहीं, कसाई था वो

त्रहेजा ने कुछ पल चुप्पी साधे रहने के बाद कहना शुरू किया, ‘‘साहब, पतिपत्नी के बीच झगड़ाफसाद होना रोज की बात थी. मैडम के पति का तो स्वभाव ही बेसुरा था. किसी से बोलचाल तक नहीं थी. कोई बात करता भी और समझाता भी तो कैसे, वह तो बातबात पर खाने को दौड़ता था.

‘‘पता नहीं कोई काम करता भी था या नहीं. हम ने तो उसे कभी काम पर जाते नहीं देखा. अगर वह गायब है तो सीधा मतलब है कि मैडम की ऐसी दुर्गति उसी ने की होगी.’’

थानाप्रभारी घटनास्थल की जरूरी काररवाई कर के थाने लौट आए. फिर वह अस्पताल में राजकंवर को देखने पहुंचे. उन की हालत में सुधार हो रहा था. घटना के 2 दिन बाद यानी 6 सितंबर को राजकंवर बयान देने लायक हो गईं. उन्होंने बताया कि उन पर जानलेवा हमला किसी और ने नहीं, उन के पति ने ही किया था. राजकंवर ने पति के खिलाफ शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न की रिपोर्ट दर्ज कराई. उन्होंने अपनी जो कहानी थानाप्रभारी संजय राय को सुनाई, उस का एकएक शब्द चौंकाने वाला था.

राजस्थान के जिला कोटा के कस्बा दीगोद के रमेशचंद नागर संपन्न व्यक्ति हैं. उन के पास अच्छीखासी खेतीबाड़ी है. करीब 8 साल पहले सन 2010 में उन्होंने अपनी इकलौती बेटी राजकंवर का विवाह करीबी कस्बे अयाना के कौशल किशोर नागर से कर दिया था.

कौशल किशोर के पिता भी किसान थे. राजकंवर पढ़ाईलिखाई में काफी होशियार थी, उस ने शादी के बाद भी अपनी पढ़ाई जारी रखी और एमएड की डिग्री हासिल कर ली. नतीजतन उन्हें लेक्चरर की प्रतिष्ठित नौकरी मिल गई.

राजकंवर की पोस्टिंग नजदीक के कस्बा इटावा के राजकीय सीनियर सैकेंडरी स्कूल में हुई थी. वह पिछले डेढ़ साल से इटावा में तैनात थीं, इसलिए घर से स्कूल आनेजाने में कोई दिक्कत नहीं थी. शादी के 2 साल बाद ही राजकंवर को बेटा हुआ, जिस का नाम उन्होंने उदित रखा. उदित अब 6 साल का हो गया था. उन्होंने अपने बेटे का दाखिला इटावा के एक निजी स्कूल में करा दिया था.

राजकंवर के जीवन की सब से दुर्भाग्यपूर्ण त्रासदी यह थी कि विवाह के कुछ ही सालों में पति कौशल किशोर और उन के दांपत्य संबंधों में तनाव आ गया था. यह तनाव दिनोंदिन बढ़ता जा रहा था. पूरा परिवार खेती पर आश्रित था, इसलिए नियमित आमदनी के लिए कौशल किशोर क्या करता है, उस ने कभी पत्नी को नहीं बताया. उस के स्वभाव को देखते हुए राजकंवर ने उस से पूछताछ नहीं की.

बेटे के जन्म पर तो लोग खुशी से दोहरे हो जाते हैं, लेकिन उदित के पैदा होने पर कौशल के चेहरे पर खुशी नहीं दिखी. इतना ही नहीं, पत्नी के प्रति कौशल की नफरत में इजाफा होता रहा. राजकंवर तीन पाटों में फंसी हुई थी. एक तरफ पति की रोजरोज की मार और दुत्कार थी तो दूसरी तरफ पारिवारिक मर्यादा और अपने पिता से सब कुछ छिपाए रखने की मजबूरी थी. और तीसरी थी पति के तौरतरीके देख कर अपने भविष्य की चिंता.

पति के जुल्म पर ससुर की खामोशी भी उसे हैरान करती थी. रोजरोज की कलह तब और ज्यादा बढ़ गई, जब कौशल ने राजकंवर के चरित्र पर लांछन लगाना शुरू कर दिया. पढ़ाई के दौरान वह किसी व्यक्ति या टीचर से बात कर लेतीं तो राजकंवर पर कौशल के लातघूंसों का कहर टूट पड़ता था.

राजकंवर जब कभी मायके में अपने मातापिता से मिलने जातीं तो चुपचाप ही रहती थीं. उन के चेहरे पर हमेशा उदासी छाई रहती थी. पिता रमेशचंद  को उड़तेउड़ते कुछ भनक लगी थी, इसलिए उन्होंने ससुरालियों के व्यवहार को ले कर बेटी से पूछताछ भी की, लेकिन राजकंवर ने उन्हें अपने दिल का दर्द कभी नहीं बताया.

पत्नी पर लगाता था निराधार आरोप

शराब के नशे में धुत पत्नी से मारपीट पर उतारू होते कौशल का यह रटारटाया इलजाम होता था कि पढ़ाई के बहाने न जाने किसकिस से पेंच लड़ाती है. राजकंवर के दिल पर ये गंदे आरोप तीर की तरह चुभते थे. नतीजतन कलह की कड़वाहट का परनाला पूरे गलीमोहल्ले में फूट पड़ता था. यह राजकंवर का दुर्भाग्य था कि उसे जुल्म से बचाने के लिए न ससुर खड़े हुए और न ही पासपड़ोस के लोग.

राजकंवर चुप्पी साधे रहीं, लेकिन जब सहनशक्ति जवाब दे गई तो रहने के लिए वह इटावा आ गईं. पति को वह साथ नहीं रखना चाहती थीं, लेकिन यह सोच कर साथ रखा कि लोगों के तानों से भी बची रहेंगी और यहां रह कर पति भी शायद सुधर जाए. लेकिन सुधरना तो दूर, पति और दरिंदा हो गया. वह यहां भी उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताडि़त करता.

थानाप्रभारी ने राजकंवर के पति कौशल किशोर नागर को उसी दिन गिरफ्तार कर लिया. उसे सबडिवीजनल मजिस्ट्रैट के समक्ष पेश किया गया तो उस ने अपनी गलती की क्षमा मांगी.

मामला पारिवारिक था, इसलिए अदालत ने उसे पत्नी से अलग रहने की ताकीद करते हुए कहा कि अगर भविष्य में वह पत्नी राजकंवर के पास गया, उसे धमकाया, मारपीट या अभद्रता की तो उस के खिलाफ सख्त कानूनी काररवाई की जाएगी.

कौशल किशोर के लिए यह फैसला अंगारों पर लोटने जैसा था. कानूनी ताकीद के बावजूद अपमान से तिलमिलाता कौशल घर छोड़ कर जाती राजकंवर को धमकाने से बाज नहीं आया. उस ने कहा, ‘‘देखता हूं, तुझे मेरे पंजों से कौन सा कानून बचाता है.’’

इस घटना के बाद राजकंवर पति कौशल किशोर से अपना रिश्ता खत्म कर के अपने बेटे उदित को ले कर कोटा आ गईं और किराए का मकान ले कर रहना शुरू कर दिया. वह कोटा से ही रोजाना ड्यूटी के लिए अपडाउन करती थीं.

लेकिन राजकंवर के सिर से दुर्भाग्य की छाया अभी छंटी नहीं थी.

संजय राय अनुभवी पुलिस अधिकारी थे. राजकंवर के पति कौशल किशोर को जिस समय मजिस्ट्रैट के सामने पाबंद किया जा रहा था, संजय राय ने उस की अंगार सी सुलगती आंखों में छिपा लावा देख लिया था. वह अपने सहयोगी से अपने मन की बात कहे बिना नहीं रहे, ‘इस की आंखों में भेडि़ए की सी मक्कारी है. मैं दावे से कह सकता हूं कि इस में इंसानी जज्बा कतई नहीं है. यह शख्स कब क्या कर जाए, कुछ नहीं कहा जा सकता.’

राय का सहयोगी पता नहीं उन की बात की गहराई समझा या नहीं, यह तो पता नहीं लेकिन राय ने जो अंदेशा जताया था, घटना के ठीक 10 दिन बाद 17 सितंबर को हो गया.

सोमवार की दोपहर जिस समय थानाप्रभारी संजय राय अपने औफिस में बैठे थे, तभी फोन की घंटी बजी. उन्होंने अनमने मन से फोन उठाया, ‘‘यस, इटावा पुलिस स्टेशन.’’

दूसरी तरफ से हड़बड़ाती सी आवाज सुनाई दी, ‘‘साहब, पीपल्दा रोड पर स्थित एक निजी स्कूल के गेट पर अभीअभी एक टीचर की गला रेत कर हत्या कर दी गई है.’’

‘‘कौन? किस की?’’ पूछते हुए थानाप्रभारी चिल्लाते ही रह गए. लेकिन दूसरी से फोट कट चुका था.

काल बन गया कौशल किशोर

थानाप्रभारी तुरंत बताए गए पते की ओर रवाना हो गए. साथ ही उन्होंने एसपी (ग्रामीण) राजीव पचार को भी घटना की जानकारी दे दी.

घटनास्थल पर खासी भीड़ जुटी हुई थी. स्कूल का पूरा स्टाफ वहां मौजूद था. उन्हें जब बताया गया कि मरने वाली सीनियर सैकेंडरी स्कूल की व्याख्याता राजकंवर थीं तो संजय राय सन्न रह गए. राय ने पूछा, ‘‘लेकिन राजकंवर का इस स्कूल में क्या काम?’’

स्कूल स्टाफ ने पूरा वाकया बयान करते हुए कहा, ‘‘राजकंवर का बेटा उदित यहीं पढ़ता था. अब वह कोटा रहने लगी थीं तो बेटे का दाखिला कोटा के किसी स्कूल में कराने के लिए बेटे की टीसी लेने आई थीं.’’

‘‘…फिर?’’ राय ने बेसब्री से पूछा.

‘‘दोपहर करीब 12 बजे राजकंवर अपने स्कूल के छात्र गोलू बैरवा की मोटरसाइकिल पर यहां पहुंची थीं.’’ स्टाफ के एक व्यक्ति ने बताया.

गोलू बैरवा वहीं मौजूद था. उस ने बात पूरी करते हुए कहा, ‘‘मैडम, टीसी लेने स्कूल के भीतर चली गई थीं. लेकिन मैं ने बाहर ही इंतजार करना ठीक समझा. जैसे ही बाहर आ कर वह मेरे पास पहुंची, अचानक कोई पीछे से आया और मेरी और मैडम की आंखों में मिर्ची झोंक दी. मैं ने आंखें मलते हुए मैडम की तरफ देखा तो वह खून से लथपथ नीचे पड़ी थीं. लगता था उन का गला काट दिया गया था. गले और सीने से खून बह रहा था. मैं जोर से चिल्लाया तो लोग इकट्ठा हो गए.’’

‘‘तुम ने देखा, कौन था वो?’’ राय ने पूछा.

‘‘नहीं साहब, मिर्ची की जलन और दर्द के मारे चेहरा तो दूर आदमी को ही नहीं देख पाया.’’ गोलू ने बताया.

थानाप्रभारी राय ने तुरंत घायल राजकंवर को अस्पताल पहुंचाया. तब तक एसपी राजीव पचार भी मौके पर आ गए थे. छात्र गोलू बैरवा से की गई पूछताछ की बाबत राय ने एसपी साहब को जानकारी दी तो उन्होंने भी गोलू से पूछताछ की.

एसपी पचार ने गोलू को भी तुरंत अस्पताल भिजवा दिया. उसी समय उन की नजर धूप से चमकते चाकू पर पड़ी. उन्होंने राय की तरफ देख कर कहा, ‘‘यह मर्डर वेपन लगता है. जल्दी में हमलावर इसे यहीं छोड़ कर भाग गया होगा. कोटा के एसपी भार्गव को घटना की जानकारी दे कर एफएसएल टीम भिजवाने का आग्रह किया. साथ ही उन्होंने सीओ भोपाल सिंह और थानाप्रभारी राय को निर्देश दिया कि अभी हमलावर ज्यादा दूर नहीं जा पाया होगा, शहर की नाकेबंदी का बंदोबस्त करो.’’

राजकंवर ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया था. चिकित्सा प्रभारी डा. के.सी. शर्मा ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि मृतका के शरीर पर एक दरजन से ज्यादा घाव थे, जो किसी नुकीले हथियार से किए गए थे. लगता था ताबड़तोड़ वार किए गए थे.

पिता ने बताई हकीकत

बेटी की नृशंस हत्या की खबर पा कर इटावा पहुंचे पिता रमेशचंद नागर ने इस मामले में राजकंवर के पति कौशल किशोर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाई. थानाप्रभारी राय उस समय हैरान रह गए, जब रमेशचंद नागर ने बिलखते हुए बताया कि अदालत के पाबंद करने के बावजूद कौशल किशोर राजकंवर के पीछे पड़ा हुआ था. वह मोबाइल पर उसे जान से मारने की धमकियां देता था.

केस दर्ज होने के बाद पुलिस आरोपी की तलाश में जुट गई. मुखबिर से मिली सूचना पर कौशल किशोर को तीसरे दिन इटावा के गणेशगंज चौराहे से गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस पूछताछ में वह जल्दी ही टूट गया.

एसपी (देहात) राजीव पचार, सीओ भोपाल सिंह की मौजूदगी में थानाप्रभारी राय द्वारा की गई पूछताछ में उस ने बताया कि उस ने पत्नी की आवाजाही पर नजर रखने के लिए 2 दिन तक रेकी की थी. बेटे उदित को स्कूल ले जाने वाले वैन ड्राइवर से भी जानकारी जुटाई थी.

घटना वाले दिन उस ने नकाब पहन कर उस का पीछा किया था. फिर मौका पा कर उस की आंखों में मिर्ची झोंक कर उस पर चाकू से हमला कर दिया. उस ने बताया कि पत्नी ने पुलिस से पाबंद करा कर उस का अपमान किया था, इसलिए उस ने उस के साथ ऐसा किया.

पुलिस ने कौशल किशोर नागर से पूछताछ के बाद उसे न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

  —कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

अब चमचमाएंगे आपके भी घर के फर्श

आपके घर में अक्सर लोगों को आना-जाना लगा रहता हैं, ऐसे में फर्श पर गंदगी पड़ना लाजिमी है. लेकिन कई बार फर्श पर ऐसे दाग पड़ जाते है कि जिन्हें घंटों मेहनत लगाकर साफ करने पर भी चमकाया नहीं जा सकता. ऐसे में फर्श मैला नजर आने लगता है. अगर आप भी अपने घर के फर्श को चमकाएं रखना चाहती हैं तो आज हम आपको कुछ घरेलू उपाय बताएंगे, जो घर के फर्श को चमका सकते हैं.

नींबू– फर्श को चमकाने में नींबू सबसे अच्छा तरीका है. थोड़े से पानी में नींबू का रस मिलाएं और इस पानी से फर्श को साफ करें. इससे फर्श पर मौजूद सारे दाग आसानी से साफ हो जाएंगे.

सिरका– अगर घर में लाइट कलर की टाइल्स लगी है तो 1 कप सिरके में पानी डालें. अब उसी पानी के साथ फर्श को साफ करें. इससे फ्लोर चमकता दिखाई देगा. इसे रोजाना करें, तभी अच्छा परिणाम मिलेगा.

साबुन और गर्म पानी– एक बाल्टी में गर्म पानी और साबुन या सर्फ मिला लें. फिर इस पानी में पोछा लगाएं. इससे फर्श अच्छे से साफ होगा और उसका कालापन भी गायब हो जाएगा.

स्ट्रोक से बचने का ये है बेहद आसान उपाय

आज स्ट्रोक की परेशानी लोगों में तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में लोगों के पास डौक्टर से मशवरा लेने के अलावा कोई और उपाय नहीं सूझता. पर हम आपके लिए लाएं है स्ट्रोक से बचने के लिए बेहद आसान और घरेलू उपाय.

एक बड़े अंडे के सेवन से शरीर में 6 ग्राम प्रोटीन की मात्रा में बढ़ोत्‍तरी हो जाती है और एंटीऔक्‍सीडेंट ल्‍यूटिन और जियाक्‍साथिन भी बढ़ जाता है, अंडे के अंदर वाले हिस्‍से में ये सबसे ज्यादा पाया जाता है. उससे स्ट्रोक का खतरा काफी कम होता है.

prevention from stroke

इसके अलावा अंडे में विटामिन ई, डी और ए प्रचूर मात्रा में होता है. हाल ही में हुए एक शोध में ये बात सामने आई कि इसके सेवन से तनाव और चींता में कमी आती है. ये प्रटीन का तो प्रमुख स्रोत है इसके साथ ही शरीर के रक्तचाप को संतुलित बनाने में भी अंडे का काफी बड़ा रोल होता है.

आपको बता दें कि ये सारी जानकारी अमेरिका में हुए एक शोध के बाद सामने आई. इस अध्ययन में दिल के रोगियों और स्‍ट्रोक के रोगियों की क्रमश: 2,76,000 और 3,08,000 लोगों को शामिल किया गया था और उन पर किए गए सर्वे के आधार पर ये निष्‍कर्ष निकाला गया है. साथ ही इसमें सभी शोधकर्ताओं के द्वारा दी गई जानकारियों को भी शामिल किया गया.

मासूम के हत्यारों को फांसी : युग गुप्ता हत्याकांड की कहानी

शिमला के जिला एवं सत्र न्यायाधीश वीरेंदर सिंह की अदालत में अंदर और बाहर 6 अगस्त, 2018 को लोगों की भीड़ को देख ऐसा लग रहा था जैसे पूरा शिमला शहर ही कचहरी में उमड़ आया हो. अदालत परिसर के अंदर व बाहर सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किया गया था.

दरअसल, उस दिन 4 वर्षीय युग गुप्ता के अपहरण और हत्या का फैसला सुनाया जाना था. युग का अपहरण 4 करोड़ रुपए की फिरौती के लिए किया गया था. लेकिन फिरौती की रकम न मिलने के कारण अपहर्त्ताओं ने मासूम की हत्या कर दी थी.

युग के परिजनों के अलावा पूरे राज्य को करीब पौने 2 साल से अदालत के इस फैसले का इंतजार था. यह शायद देश का एकमात्र ऐसा ऐतिहासिक फैसला था, जिसे सुनने के लिए राज्य के मुख्यमंत्री भी अदालत पहुंचे थे.

अपहर्त्ता कौन थे और उन्होंने युग का अपहरण कर उसे कितनी दर्दनाक मौत दी, जानने के लिए पूरी कहानी समझनी होगी.

अचानक युग हुआ गायब

बात 14 जून, 2014 की है. राजधानी शिमला के रामबाजार से एक व्यापारी विनोद कुमार गुप्ता का 4 वर्षीय बेटा युग लापता हो गया था. विनोद गुप्ता शहर के जानेमाने व्यापारी थे. शहर में उन की किराने की थोक दुकानें और गारमेंट का बिजनैस था. स्थानीय सदर थाना पुलिस ने मामले की जांच शुरू की, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली. बाद में नगरवासियों का आक्रोश देखते हुए यह मामला सीबीसीआईडी को सौंप दिया गया था.

युग 14 जून को अचानक लापता हुआ था. इस के 13 दिन बाद 27 जून को युग का जन्मदिन था. उसी दिन विनोद गुप्ता के घर डाक से एक बड़ा पैकेट आया, जिस में युग के कपड़े थे. ये वही कपड़े थे, जो वह लापता होने वाले दिन पहने हुए था. पैकेट में एक पत्र भी था, जिस में युग को वापस लौटाने के बदले 3 करोड़ 60 लाख रुपए की मांग की गई थी. ये पैसे विनोद गुप्ता के नौकर हरिओम के माध्यम से अंबाला में देने को कहा गया था. इस पैकेट के मिलने से यह बात साफ हो गई थी कि किसी ने युग का अपहरण फिरौती के लिए किया है.

इस के एक हफ्ते बाद विनोद गुप्ता के नाम फिर एक पत्र आया, उस में 4 करोड़ रुपए की मांग की गई थी. उस के बाद फिर एक और पत्र आया, जिस में 10 करोड़ रुपए मांगे गए थे. लेकिन जब उन्होंने पैसे नहीं दिए तो घटना के 3 महीने बाद एक और पत्र आया, जिस में दोबारा 4 करोड़ की मांग की गई थी.

यह आखिरी पत्र था. इस के बाद यह मामला जब सीबीसीआईडी को ट्रांसफर हो गया तो विनोद के पास पत्र आने बंद हो गए.

सीबीसीआईडी की जांच भी लगभग 2 साल तक चलती रही, लेकिन ऐसा कोई सुराग हाथ नहीं लगा, जिस से वह अपहर्त्ताओं तक पहुंच पाती. पहले इस मामले की जांच सीबीसीआईडी के डीएसपी भूपिंदर बरागटा के नेतृत्व में गठित टीम द्वारा की जा रही थी.

लेकिन जब शहर में जनता का आक्रोश भड़का और मामले की गूंज विधानसभा से होते हुए संसद तक पहुंची तो सीबीसीआईडी के डीआईजी विनोद धवन ने इस मामले में हस्तक्षेप किया. डीआईजी विनोद धवन की निगरानी में युग मामले ने रफ्तार पकड़ी और यहीं से एकएक अनसुलझी कड़ी को जोड़ कर अपराध की तह तक पहुंचा जा सका.

डीआईजी के हस्तक्षेप के बाद बढ़ी उम्मीदें

एसपी (क्राइम) अशोक कुमार, डीएसपी भूपिंदर बरागटा, एसआई सुरेश कुमार, एएसआई राजेश कुमार, अनिल, हैडकांस्टेबल रवि, उमेश्वर सिंह, कांस्टेबल दीपक के अलावा एफएसएल के डायरेक्टर डा. अरुण शर्मा, डा. जगजीत सिंह, डा. संजीव कुमार और डा. बी. पटियाल ने क्राइम सीन विजिट में वैज्ञानिक तरीके से सबूतों को एकत्रित करना शुरू किया.

सीबीसीआईडी ने कई संदिग्ध लोगों के नारको टेस्ट भी करवाए, जिन में से एक विनोद गुप्ता का नौकर हरिओम भी था. चूंकि अपहर्त्ताओं ने जब पहली बार फिरौती की मांग की थी तो अंबाला में रकम पहुंचाने के लिए उन्होंने नौकर हरिओम को ही चुना था. इस का मतलब यह था कि अपहर्त्ता हरिओम को जानते थे.

नारको टेस्ट के दौरान नौकर हरिओम बारबार चंद्र शर्मा का नाम ले रहा था. इस से जांच टीम को संदेह हो गया कि इस मामले से किसी चंद्र शर्मा का जरूर कोई वास्ता है. लेकिन चंद्र शर्मा कौन है, कहां रहता है, यह टीम को पता नहीं था.

जांच टीम ने इस के बाद चंद्र शर्मा की तलाश शुरू कर दी. इत्तफाक से उन्हीं दिनों अगस्त 2016 में न्यू शिमला में एक चोरी के मामले में चंद्र शर्मा का नाम आया. उस के साथ 2 और लोगों तेजिंदरपाल सिंह और विक्रांत बख्शी के भी नाम थे. जब तीनों आरोपियों का नाम सामने आया तो जांच टीम का शक यकीन में बदल गया.

तीनों के मोबाइल खंगाले गए. इस बीच विक्रांत बख्शी के मोबाइल से युग की 60 सैकेंड की एक वीडियो क्लिप और फोटो बरामद हुई. इस से पुष्टि हो गई कि युग के अपहरण में इन लोगों का हाथ है. इस के बाद पुलिस ने 22 अगस्त को तेजिंदर और चंद्र शर्मा को हिरासत में ले लिया.

चंद्र शर्मा, तेजिंदरपाल सिंह व विक्रांत से बरामद मोबाइल फोन सीबीसीआईडी ने कोर्ट के माध्यम से अपने कब्जे में ले लिए. फोरैंसिक टीम ने सभी फोन नंबरों का डिलीट किया गया डाटा रिकवर कर लिया. इस से युग के अपहरण का एक बड़ा सबूत जांच टीम के हाथ आ गया.

पता चला कि वे लोग बच्चे के वीडियो व औडियो दोनों बनाते थे, जो मोबाइल फोन में मिले. पकड़े जाने के डर से उन्होंने विनोद को वीडियो नहीं भेजे थे. दोषियों की निशानदेही पर टीम ने उस जगह भी छापा मारा, जहां युग को अपहरण के बाद रखा गया था. उस कमरे की तलाशी ली गई. सीबीसीआईडी की विशेष जांच के साथ फोरैंसिक टीम भी मौजूद रही.

वहां से ट्रेसिंग पेपर, अन्य पेपर, कोल्डड्रिंक व बैड के बौक्स में निशान पाए गए. इसी आधार पर दोषियों की गिरफ्तारी हुई. 20 अगस्त, 2016 को विक्रांत और 22 अगस्त को तेजिंदर और चंद्र शर्मा को पकड़ा गया.

2 साल तक लोग उस टैंक का पानी पीते रहे, जिस में युग की लाश पड़ी थी. 4 वर्षीय युग गुप्ता हत्याकांड का सब से दर्दनाक पहलू अपराधियों द्वारा वारदात को अंजाम देने का रहा. रामबाजार स्थित घर से करीब 3 किलोमीटर दूर युग को शराब पिलाने के बाद पत्थरों से बांध दिया गया था, फिर उसे केलेस्टन क्षेत्र स्थित नगर निगम के पानी के टैंक में जिंदा फेंक दिया गया.

हत्यारों ने फिरौती न मिलने का गुस्सा मासूम युग पर निकाला था. टैंक में युग की किस तरह तड़पतड़प कर मौत हुई होगी, इस की कल्पना मात्र से ही दिल दहल जाता है. उस का शव टैंक में ही पड़ा सड़ता रहा था.

इस वाटर टैंक से शिमला के कई हिस्सों केलेस्टन और भराड़ी को पेयजल सप्लाई किया जाता है. मतलब करीब 25 हजार लोगों ने 2 साल तक इस टैंक का पानी पीया था. उन्हें पता ही नहीं था कि टैंक में बच्चे का शव है. ऐसा सरकारी तंत्र की लापरवाही से हुआ. बाद में नगर निगम कर्मियों ने टैंक की सफाई की तो युग का कंकाल बरामद हुआ.

युग की हत्या ने सरकारी तंत्र के मुंह पर जोरदार तमाचा मारा था. कागजों में टैंकों की सफाई हर 6 महीने में होती थी, मगर बच्चे का शव बरामद नहीं हुआ.

नगर निगम के कनिष्ठ अभियंता की मौजूदगी में टैंक की सफाई की जाती है, लेकिन नगर निगम अधिकारियों की हकीकत युग का कंकाल बरामद होने के बाद सामने आई. बहरहाल, सीबीसीआईडी ने केलेस्टन टैंक के अंदर और बाहर से युग के अवशेष बरामद कर इस केस को सुलझा दिया था.

22 अगस्त, 2016 को भराड़ी टैंक से युग का कंकाल निकाला गया था. इस के बाद अवशेषों को आईजीएमसी भेजा गया, जहां डाक्टरों ने इसे इंसानी बच्चे का कंकाल होने की पुष्टि की. इस के बाद युग के मातापिता के डीएनए से मिलान करा कर इस बात की तसदीक की गई कि बरामद कंकाल युग का ही है. इस केस की सुनवाई के दौरान अदालत में भी वैज्ञानिक सबूतों के आधार पर यह साबित कर दिया गया कि टैंक से मिला कंकाल युग का ही था. युग के अवशेषों को बतौर सबूत मालखाने में जमा करवा दिया गया था. युग के परिजनों को अपने बेटे की अस्थियां अंतिम संस्कार के लिए अदालत के आदेश पर ही मिलनी थीं.

अपहर्त्ताओं ने युग का 7 दिनों तक उत्पीड़न किया था. उसे जहां रखा गया था, वहां ट्रेसिंग पेपर व दूसरे कागजात भी रखे गए थे. इस केस के मास्टरमाइंड और मुख्य आरोपी चंद्र शर्मा ने फोरैंसिक साइंस का कोर्स किया हुआ था. उसे पता था कि अगर ट्रेसिंग पेपर पर फिरौती का पत्र लिखेंगे तो हैंडराइटिंग मैच नहीं होगी. लेकिन फोरैंसिक एक्सपर्ट्स ने विनोद को फिरौती के लिए लिखे गए पत्रों से हैंडराइटिंग के नमूनों को मैच कराया तो वह चंद्र शर्मा की निकली.

आखिर हत्यारे आ ही गए पकड़ में

मासूम युग की गुमशुदगी के रहस्य को सुलझाने और आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने के लिए डीआईजी (सीबीसीआईडी) की टीम ने रातदिन एक किया था. कई बार ऐसा भी हुआ, जब जांच अधिकारियों के हौसले पस्त हो गए. लेकिन टीम ने हिम्मत नहीं हारी. इस स्थिति में वह बारबार 4 साल के मासूम युग की फोटो देख कर प्रण लेते रहे कि इस के पीछे जो कोई भी हों और कहीं पर भी हों, उसे पकड़ कर ही दम लेंगे.

आखिरकार टीम ने कत्ल के तीनों आरोपियों को पकड़ कर ही दम लिया था. इन सब के पीछे एडीजीपी बी.एन.एस. नेगी, डीआईजी सिक्योरिटी क्राइम रहे दलजीत ठाकुर का भी अहम रोल रहा, जिन्होंने टीम के हौसले को कम नहीं होने दिया और हरसंभव मदद दी थी.

25 अक्तूबर, 2016 को जांच टीम ने जिला एवं सत्र न्यायालय में आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट पेश कर दी. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सीबीसीआईडी ने चालान पेश करने के साथ ही अदालत में अरजी दाखिल करते हुए अनुरोध किया कि इस केस को फास्टट्रैक कोर्ट में सुना जाए, ताकि सुनवाई जल्द पूरी हो सके.

करीब पौने 2 साल तक चले इस केस के ट्रायल में कुल 135 गवाह बनाए गए थे, जिन में से 105 गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे. 13 अगस्त और 21 अगस्त को सुनवाइयों के दौरान अदालत ने दोषियों के मातापिता को भी तलब किया था.

न्यायाधीश के समक्ष अपने बयान में घर वालों ने अपनी बीमारी का हवाला दिया और दोषियों की सजा कम करने की गुहार लगाई. इस हत्याकांड को अंजाम देने वाले तीनों आरोपी संपन्न परिवारों से ताल्लुक रखते थे. 2 आरोपियों के घर वालों की शिमला के रामबाजार में किराने और गारमेंट्स की दुकानें हैं और वे युग के पिता विनोद गुप्ता के पड़ोसी थे.

अदालत में जज वीरेंदर सिंह ने 4 वर्षीय मासूम के हत्यारों को खड़े हो कर सजा सुनाई. एकएक कर तीनों दोषियों की सजा का ऐलान करने में जज ने मात्र 10 मिनट का वक्त लिया. सजा पर फैसला सुनाने के बाद जज वीरेंदर सिंह ने कलम तोड़ कर पीछे की ओर फेंक दी और सीधे अपने चैंबर में चले गए.

तीनों दोषियों को जब अदालत के सामने पेश किया गया तो उस समय अदालत का माहौल बिलकुल शांत था. अदालत ने एकएक कर तीनों को फांसी की सजा सुनाने की प्रक्रिया शुरू की. सब से पहले चंद्र शर्मा को फांसी की सजा सुनाई गई. इस के बाद तेजिंदर पाल और फिर विक्रांत बख्शी की सजा का ऐलान किया गया.

सजा सुन कर तीनों के चेहरे पीले पड़ गए. उन के चेहरों पर खौफ झलक रहा था. अदालत में मौजूद सभी की नजरें उस समय जज और हत्यारों पर टिकी थीं.

हत्याकांड में दोषियों की सजा पर 6 अगस्त, 2018 को सुनवाई हुई. जिला एवं सत्र न्यायालय में युग हत्याकांड के दोषियों की सजा पर एक घंटे तक बहस हुई. कोर्टरूम के बंद दरवाजे के भीतर बहस प्रक्रिया पूरी हुई. सजा पर हुई बहस की वीडियो रिकौर्डिंग भी की गई थी.

सुनवाई में तीनों आरोपियों को दोषी करार देने के बाद अदालत ने 800 पन्नों का अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. बहस के दौरान तीनों दोषियों के अलावा युग के पिता विनोद गुप्ता भी वहां मौजूद रहे.

अदालत ने फांसी की सजा दे कर किया न्याय

न्यायाधीश वीरेंदर सिंह की अदालत ने इस अपराध को रेयरेस्ट औफ रेयर श्रेणी का करार दिया था. युग हत्याकांड में अदालत ने आईपीसी की धारा 302, 120बी हत्या और हत्या का षडयंत्र रचने, 364ए में फिरौती की मांग करने का दोषी करार देते हुए तीनों दोषियों को मौत की सजा सुनाई.

वहीं धारा 347 में बंधक बनाने का दोषी पाए जाने पर एक साल की सजा और 20 हजार रुपए जुरमाने की अलग सजा सुनाई गई. जुरमाना अदा न करने की सूरत में 3 माह की अतिरिक्त सजा सुनाई गई थी.

अदालत ने तीनों को धारा 201 और 120बी के तहत सबूत नष्ट करने और षडयंत्र रचने का दोषी होने पर 7 साल के कठोर कारावास, 50 हजार रुपए के जुरमाने की सजा सुनाई और कहा कि जुरमाना अदा न करने पर 6 माह के अतिरिक्त कारावास की सजा होगी.

अदालत ने इन दोषियों को आईपीसी की धारा 506 और 120बी के तहत धमकियां देने और षडयंत्र रचने पर एक साल के कठोर कारावास और 10 हजार रुपए के जुरमाने की सजा सुनाई. इस में जुरमाना अदा न करने की सूरत में एक महीने की अतिरिक्त जेल का प्रावधान था.

फैसला आने पर 4 साल से न्याय का इंतजार कर रहे युग की मां पिंकी, पिता विनोद कुमार और दादी चंद्रलेखा की आंखों से आंसू छलक पड़े. कोर्ट ने मौत की सजा के आदेशों को कन्फरमेशन के लिए उच्च न्यायालय भेज दिया. वहीं दोषियों को हाइकोर्ट में फैसले को ले कर अपील करने के लिए 30 दिन का समय दिया था.

भीड़ कम होने तक सुरक्षा कारणों और फैसले की प्रति देने के लिए दोषियों को कुछ देर के लिए कोर्ट में रोका गया. इस के बाद पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच तीनों को अदालत परिसर से शाम को फिर से कंडा जेल ले जाया गया. अदालत का यह फैसला लगभग पौने 2 साल बाद आया था.

4 साल के युग के लिए मांबाप ने सैकड़ों सपने देखे थे. एक दिन आंगन में खेलते हुए युग लापता हो गया था. किसी ने नहीं सोचा था कि वह कभी लौट कर नहीं आएगा. जिस दिन युग लापता हुआ, उस की मां उसी दिन से बेसुध सी हो गई थी. जिस दिन मां ने सुना कि युग इस दुनिया में नहीं है तो वह गुमसुम रहने लगी.

युग की मां भी अपने बच्चे की एक झलक देखना चाहती थी. लेकिन दरिंदों ने उसे बेरहमी से मार दिया था. मां की आंखें सिर्फ आंसुओं से भरी रहती थीं. घर में युग की एक छोटी सी फोटो को मां हमेशा सीने से लगाए रखती थी. वह हर रोज यही प्रार्थना करती थी कि उस के बेटे को मुक्ति देनी है तो हत्यारों को फांसी की सजा होनी चाहिए.

जब भी कोर्ट में पेशी होती तो पूरे परिवार को उम्मीद होती कि हत्यारों को फांसी होगी. जब कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई तो बेटे की हत्या करने वाले तीनों दरिंदे अदालत में उन के सामने थे. मां की आंखों से एकदम आंसू निकल आए. उन्होंने कहा कि दोषियों को मृत्युदंड सुना कर युग के साथ इंसाफ हुआ है लेकिन वह दोषियों को कभी माफ नहीं करेंगी.

ढीली त्वचा में लाएं कसाव : पढ़ें ये 5 नुस्खे

प्रेगनेंसी के बाद या जब आप अपना वजन कम करती हैं तो, पेट या फिर जांघों के आस पास की त्‍वचा में ढीलापन आ जाता है जिससे वह जगह देखने में बड़ी ही भद्दी नजर आती है. प्रेगनेंसी में वजन बढ़ जाता है और जब आप बहुत तेजी से वजन कम करती हैं तो त्‍वचा में जो लचीलापन होता है वह भी चला जाता है और काफी वक्‍त के बाद वापस आता है या फिर आता ही नहीं है. अगर आप धीरे धीरे वजन कम करती हैं तो यह आपके लिये फायदेमंद रहेगा क्‍योंकि इससे आपकी त्‍वचा एक दम से ढीली नहीं होगी.

इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसे आसान घरेलू उपचार बताएंगे जिन्‍हें आजमाने से आप दुबारा अपनी त्‍वचा का खोया हुआ लचीलापन और कसाव वापस पा सकती हैं.

हमेशा हाइड्रेट रहें

दिन में कम से कम 8 गिलास पानी पियें. इससे आपको अपनी त्‍वचा में बदलाव महसूस होगा. अगर त्‍वचा में पानी की कमी रहती है तो त्‍वचा रूखी और झुर्रियों से भरी दिखती है.

प्रोटीन युक्‍त आहार

खाएं प्रोटीन खाने से मसल्‍स दुबारा बनने शुरु हो जाते हैं और त्‍वचा का लचीलापन वापस आ जाता है. अपने आहार में दालें, बींस, चिकन और मछली आदि शामिल करें.

लचीलापन वापस लाने वाले आहार खाएं

अपने आहार में विटामिन ए, सी, ई और के शामिल करें. इससे त्‍वचा के अंदर कोलाजेन बनने की प्रक्रिया शुरु होगी जो कि त्‍वचा में लचीलापन लाता है. इसलिये आपको ढेर सारे मेवे खाने चाहिये जिसमें जिंक और सीलियम होता है.

अपनी स्‍किन को ब्रश करें

त्‍वचा पर स्‍क्रब और ब्रशिंग करने से डेड स्‍किन निकल जाती है. ऐसा हर रोज करें जिससे खून का सर्कुलेशन बढ़े और नई सेल्‍स की ग्रोथ हो.

कच्‍चे फल और सब्‍जियां खाएं

अपनी डाइट में ढेर सारे फल और सब्‍जियां शामिल करें क्‍योंकि इनमें विटामिन्‍स और मिनलल्‍स होते हैं जो स्‍किन को टाइट बनाते हैं.

आज रात 9 बजे से कलर्स चैनल पर होगा ‘शुभारंभ’ का शुभ आरंभ 

हर कोई एक जैसा नहीं होता, हम सब एकदूसरे से अलग होते हैं. हमारा पहनावा, रहन सहन, सोचने का तरीका सब कुछ अलग होता है और हम सब में कोई एक ऐसी खुबी होती है, जो अपने आप में अनोखी होती है. कोई मासूम होता है, कोई ज्यादा होशियार होता है, तो कोई बहुत समझदार होता है. पर जब मासूमियत और समझदारी की मिलन होती है तो एक कहानी बनती है. जी हां, “मासूमियत और समझदारी” की एक ऐसी ही दिलचस्प कहानी ‘शुभारंभ’ कलर्स लेकर आ रहा है. जो दर्शकों को काफी पसंद आएगा. अक्सर हमारे समाज में लोग किसी के भोलेपन का फायदा उठाते हैं और उसे अपने काम के लिए भरपूर इस्तेमाल करते हैं. लेकिन उसके जीवन में किसी समझदार व्यक्ती की एंट्री होती है तो उसके जीवन में एक नई मोड़ आती है. कुछ ऐसी ही कहानी है ‘शुभारंभ’ की… इस सीरियल को आप कलर्स चैनल पर 2 दिसंबर यानी आज से सोमवार से शुक्रवार रात 9 बजे से देख सकते हैं.

‘शुभारंभ’ में की कहानी दो किरदार ‘राजा और रानी’ की है जो एक छोटे शहर से है. राजा बिजनेश घराने का लड़का है. वो बहुत ही मेहनती है पर स्वभाव से काफी भोला है. इसलिए सब उसके व्यवहार को पसंद करते हैं. राजा के पिता बचपन में ही उसे छोड़कर चले जाते हैं.  पिता के जाने के बाद उसके रिश्तेदार  उनके बिजनेस और जायजाद पर कब्जा कर लेते हैं. पर राजा अपने भोलेपन की वजह से इससे अनजान बना रहता है और वे लोग अपने मन मुताबिक उसका इस्तेमाल करते रहते हैं.

https://www.instagram.com/p/B5bzOTVhkYq/?utm_source=ig_web_copy_link

तो उधर राजा के जिंदगी में एक समझदार और खूबसूरत लड़की की एंट्री होती है. उसका नाम रानी है और उसके पापा शराबी है. उसके घर का खर्चा उसकी मां की मेहनत और मजदूरी से होती है.  रानी बचपन से ही गरीबी का सामना करती है और वो दुनिया को बखूबी समझती है. रानी का बिजनेस सेन्स काफी अच्छा है तो राजा को  पेंटिंग करने का शौक है.

https://www.instagram.com/p/B5aOdzABUAo/?utm_source=ig_web_copy_link

रानी वक्त के साथ साथ राजा के इस हुनर को भी पहचान लेती है. राजा भी अपने हुनर में रानी से मिले हौसले के पंख लगाता है,  और शुरू होती है सपनों की नई उड़ान.

जब राजा के हुनर पर चढ़ेगा रानी के हौंसले का रंग, दुनिया देखेगी कैसे होगा जीवन का शुभारंभ!

राजा और रानी के जीवन का कैसे होगा शुभारंभ

 हम सब का स्वभाव एक दूसरे से अलग होता है और हम सबमें कोई न कोई खूबी जरूर होती है यही हम सब के व्यक्तित्व की खूबसूरती और पहचान दोनों है जब दो अलग स्वभाव औरमिजाज के लोग एकसाथ आते हैं और एक दूसरे की खूबियों को पहचानने में भी सफल होते हैं तो सफलता उनके कदम चूमती है अगर किस्मत ऐसे दो लोगों को करीब लाती है तो वे मिलकरएक और एक दो नहीं पूरे ग्यारह हो जाते हैं कलर्स लेकर आ रहा है, एक ऐसी ही साझेदारी की अनोखी कहानी- ‘शुभारंभ’

शुभारंभ की कहानी दो किरदार ‘राजा और रानी’ की है जो गुजरात के एक छोटे शहर, सिद्धपुर से हैं राजा एक मेहनती और स्वभाव से भोला लड़का है जिसके व्यवहार को सभी पसंद करते हैं एक अमीर गुजराती बिजनेस घराने का लड़का राजा अपने पिता को बचपन में ही खो देता है उस के पिता की मौत के बाद उसके रिश्तेदार धीरे धीरे उसके पिता के बिजनेस और जायजाद पर कब्जा कर लेते हैं पर राजा अपने भोलेपन की वजह से इससे अनजान बना रहता है और वे लोग अपने मन मुताबिक उसका इस्तेमाल करते रहते हैं.

रानी होशियार और कौन्फिडेंट लड़की है वो गरीब घर की लड़की है जिसके पिता शराबी हैं और मां मेहनत मजदूरी कर के घर का पालन पोषण करती है बचपन से ही गरीबी से लड़ते लड़ते रानी उम्र से पहले बड़ी हो जाती है और उसे जमाने से निपटना बखूबी आता है एक ओर रानी का बिजनेस सेन्स काफी अच्छा है तो दूसरी तरफ राजा में पेंटिंग करने का हुनर है राजा को घर-दुकान के काम से जब भी वक्त मिलता है, वो पेंटिंग करने में मशगूल हो जाता है रानी वक्त के साथ राजा के व्यक्तित्व में छुपे हुनर को पहचान लेती है राजा भी अपने हुनर में रानी से मिले हौसले के पंख लगाता है, और शुरू होती है सपनों की नई उड़ान

कलर्स पर आने वाले इस नए धारावाहिक का दर्शकों को बेसब्री से इंतजार है. माना जा रहा है कि ‘राजा-रानी’ का किरदार और उनकी कहानी सिर्फ दर्शकों का भरपूर मनोरंजन ही नहीं करेगी बल्कि अपने रिश्ते को नए नजरिये से देखने को प्रेरित भी करेगी लोगों के दिलों में उत्सुकता है कि जब किस्मत राजा -रानी को करीब लाएगातो दोनों एक दूसरे की जिंदगी में बदलाव कैसे लाएंगे

राजा रानी अपने नए जीवन का शुभारंभ कैसे करते हैं, साथ मिलकर साझेदारी की अनोखी

कहानी कैसे लिखते हैं, जानने के लिए देखिये – ‘शुभारंभ’ 02 दिसंबर, सोमवारसे शुक्रवार,

रात 9 बजे, सिर्फ कलर्स पर…

https://www.instagram.com/p/B49_hupgu81/?utm_source=ig_web_copy_link

हौकी विश्व कप: भारत का पहला बीड़ा मिठास भरा

जब किसी खेल की विश्वस्तरीय प्रतियोगिता होती है तो उस का रोमांच दोगुना हो जाता है. और जब हौकी की बात हो और वह भी भारत में इस का वर्ल्ड कप खेला जाए तो कहने ही क्या. यह इस प्रतियोगिता का 14वां संस्करण है जो ओडिशा में खेला जा रहा है और जैसी उम्मीद थी भारत ने अपने पहले मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका को 5-0 से शानदार मात दी.

इस से पहले क्रिकेटर रह चुके सचिन तेंदुलकर ने ट्विटर पर भारतीय हौकी टीम का हौसला बढ़ाते हुए मैच से पहले बुधवार को लिखा था, ‘हौकी वर्ल्ड कप के लिए टीम इंडिया को शुभकामनाएं. आज से ओडिशा, भुवनेश्वर में शुरू हो रहे इस टूर्नामेंट के लिए शुभकामनाएं. मुझे आप पर भरोसा है, पूरे देश को आप पर भरोसा है. चक दे, इंडिया.’

जब सचिन जैसा महान खिलाड़ी टीम का हौसला बढ़ाए तो उस का असर तुरंत ही दिख जाता है. कलिंगा स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में भारत ने उम्दा खेल दिखाते हुए मैच अपने नाम कर लिया. भारत द्वारा किए गए कुल 5 गोल में से सिमरनजीत सिंह ने 2 गोल किए. वहीं, आकाशदीप, ललित उपाध्याय और मनदीप सिंह ने 1-1 गोल दागा. सिमरनजीत सिंह को अपने शानदार प्रदर्शन के लिए ‘मैन औफ द मैच’ चुना गया.

भारत ने मैच की शुरुआत से ही दक्षिण अफ्रीका की टीम पर दबाव बनाए रखा. खेल के पहले 8 मिनट में हमारी टीम 4 बार दक्षिण अफ्रीका के गोल पर अटैक कर चुकी थी पर कामयाबी नहीं हाथ लगी थी. 9वें मिनट में एक बार फिर विरोधी टीम पर हमला बोला तो उस के एक खिलाड़ी ने गेंद को गलत ढंग से रोका जिससे भारत ने रैफरल मांग लिया.

उस रैफरल का रिव्यू भारत के पक्ष में गया और भारत को मैच का पहला पेनल्टी कौर्नर मिला. दक्षिण अफ्रीकी टीम के गोलकीपर ने उस पेनल्टी कौर्नर का शानदार बचाव किया, लेकिन गेंद मनदीप सिंह के पास चली गई और उन्होंने गेंद को गोल में भेज दिया. इस के 2 मिनट बाद ही 12वें मिनट में आकाशदीप सिंह ने फील्ड गोल कर के भारत को 2-0 की बढ़त दिला दी.

मैच के दूसरे क्वार्टर में भारत ने फिर तेज शुरुआत की. 19वें मिनट में भारत को एक और पेनल्टी कौर्नर मिल गया पर टीम इंडिया इसे गोल में नहीं बदल पाई. हाफ टाइम तक टीम इंडिया दक्षिण अफ्रीका से 2-0 से आगे थी.

हाफ टाइम के बाद भारतीय टीम का तीसरे क्वार्टर में भी दबदबा बरकरार रहा. मनदीप सिंह ने 43वें मिनट में गोल कर स्कोर 3-0 कर दिया. इस के 2 मिनट बाद ही ललित उपाध्याय ने टीम का चौथा गोल किया. सिमरनजीत सिंह ने टीम का 5वां गोल पेनल्टी कॉर्नर से 46वें मिनट में किया.

इस तरह मैच ख़त्म होने तक भारतीय टीम ने 5-0 से मुकाबला अपने नाम कर लिया. पहले मैच में जीत के बीड़े का मीठा स्वाद चखने वाली टीम इंडिया इस टूर्नामेंट का अपना दूसरा मैच 2 दिसंबर को बेल्जियम की ताकतवर टीम के खिलाफ खेलेगी. जानकारी के लिए बता दें कि यह तीसरी बार है जब भारत में हौकी वर्ल्ड कप का आयोजन हो रहा है. इस से पहले साल 1982 और साल 2010 में भी हौकी वर्ल्ड कप भारत में हो चुका है.

दीपिका-रणवीर की इन 5 तस्वीरों को देख हर कोई कह उठा…

दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह के मुंबई रिसेप्शन की पहली फोटोज सामने आ चुकी हैं. इन फोटोज में दीपवीर का रौयल लुक देखने को मिला. दोनों ने यहां एक बार फिर मैचिंग ड्रेस में एंट्री की. व्हाइट एंड गोल्डन कलर के कौम्बीनेशन के कपड़े पहने हुए दोनों बेहद खूबसूरत लग रहे थे. दोनों की केमिस्ट्री ने भी लोगों का दिल जीता.

रणवीर-दीपिका यहां हाथों में हाथ डाले नजर आए. दोनों कभी खुलकर मुस्कुराते तो कभी एक-दूसरे की आंखों में ही डूब जाते. कैमरामैन्स ने भी इस मौके का खूब फायदा उठाया और दोनों की ढेर सारी फोटोज क्लिक की.

Deepika-ranveer

दीपिका-रणवीर ने इस बार सब्यसाची को छोड़कर डिजाइन अबू जानी और संदीप खोसला की डिजाइनर ड्रेस पहनी. जो इन पर खूब जंच रही थी. दीपिका ने आइवरी और गोल्‍ड कौम्‍ब‍िनेशन में चिकनकारी वर्क वाली साड़ी कैरी की थी. इसके साथ उन्‍होंने भारी जूलरी मैच की थी.

Deepika-ranveer

वहीं रणवीर सिंह ने भी इसी कलर कौम्‍बो को कैरी किया था. उन्‍होंने शेरवानी के साथ स्‍कर्ट पहनी थी, जिस पर फैन्सके काफी मजेदार कमेंट्स भी आए हैं.

Deepika-Ranveer

इस पार्टी में रणवीर-दीपिका ने अपने करीबी दोस्तों, फैमिली मेंबर्स और कुछ खास मीडिया पर्सन को इनवाइट किया है. ये पार्टी भी पिछली पार्टी की ही तरह काफी पर्सनल होगी.

Deepika-Ranveer

रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण ने 14 नवंबर को इटली के लोम्बार्डी में लेक कोमो पर बने शानदार विला में विवाह रचाया. दोनों की शादी में उनके करीबी लोग ही शामिल हुए.

Deepika-Ranveer

दोनों की शादी 14-15 नवंबर को इटली के लेक कोमो में हुई थी. शादी के बाद दीपिका के पैरेंट्स (DeepVeer Wedding) ने बेंगलुरू में अपने करीबी रिश्तेदारों के लिए रिसेप्शन पार्टी दी है. जिसमें खेल जगत, बिजनेसमैन और टौलीवुड की कई हस्तियां शामिल हुई थीं.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें