Download App

अब WhatsApp करेगा नया बिजनेस ढूंढने में मदद

आधुनिक युग में सोशल मीडिया एक बहुत उपयोगी साधन है इस सोशल मीडिया में कई प्लेटफार्म हैं जिनसे या यूं कहें जिनकी मदद से आप अपने या किसी अनजान व्यक्ति से भी बातचीत कर सकते हैं.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स में सबसे प्रचलित जो प्लेटफॉर्म है या एप्लीकेशन है वह है व्हाट्सएप. जी हां व्हाट्सएप हमारे जीवन की एक महत्वपूर्ण कड़ी बन चुका है. व्हाट्सएप के बिना ना तो हमारे दिन की शुरुआत होती है ना ही हमारा दिन इसके बिना खत्म होता है.

इसमें कोई दोराय वाली बात नहीं कि आज के समय में मैसेजिंग ऐप WhatsApp सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाला ऐप है. और शायद यही वजह है कि कंपनी अपने ग्राहकों के लिए समय-समय पर नए ऑफर एवं नए फीचर लाती रहती है.

अब कंपनी अपने ऐप में एक ऐसा फीचर ला रही है जिससे आपके लिए बिजनेस के मौके ढूंढना आसान हो जाएगा.

बता दें कि इस बात की जानकारी WhatsApp से जुड़े अपडेट्स देने वाली WABetaInfo ने एक ट्वीट के जरिए दी है. उसके मुताबिक वॉट्सऐप नए फीचर पर काम कर रही है जिससे यूजर्स डायरेक्टली ऐप के जरिए अपने पसंद का बिजनेस सर्च कर सकेंगे. हालांकि अभी इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है कि यह कैसे काम करेगा.

जानकारी के लिए बता दें कि इस फीचर के बारे में बताते हुए WABetaInfo ने एक स्क्रीनशॉट भी शेयर किया है जिसमें New Contact के नीचे थर्ड ऑप्शन ‘Find Business’ का ऑप्शन दिया गया है.

जी हां, दरअसल इसके जरिए बिजनेस को कैटेगरी या फिर नाम के जरिए सर्च करना आसान हो जाएगा. मालूम हो कि यह नया अपडेट Android 2.19.47 बीटा वर्जन में दिया जाएगा.

बता दें कि वॉट्सऐप ‘ग्रुप इन्विटेशन’ नाम के भी एक फीचर पर काम कर रहा है. इस फीचर के लॉन्च होने के बाद आप जिस ग्रुप में ऐड होना चाहते हैं उसी ग्रुप में ऐड हो सकते हैं. अगर आप इस फीचर को अपने WhatsApp अकाउंट में अनेबल करना चाहते हैं तो इसके लिए आपको पहले WhatsApp सेटिंग में जाना होगा, इसके बाद अकाउंट में जाना होगा, जिसके बाद आपको प्राइवेसी में जाना होगा.

इसके बाद आपके सामने लास्ट सीन, प्रोफाइल फोटो, अबाउट, स्टेटस और ग्रुप्स का ऑप्शन मिलेगा, जहां आपको 3 ऑप्शन – Everyone, My contact, Nobody दिखाई देगा. इसमें आप अपने अनुसार प्राइवेसी सिलेक्ट कर सकते हैं.

इस फीचर की सबसे खास बात ये है कि जब भी आपका कोई दोस्त आपको किसी ग्रुप में ऐड करेगा तो आपको उसका नोटिफिकेशन आएगा. बता दें कि यह नोटिफिकेशन एक इन्विटेशन रिक्वेस्ट होगी जिसे आपको 72 घंटे के भीतर एक्सेप्ट या रिजेक्ट कर सकते हैं.

डेल स्टेन ने तोड़ा कपिल देव का रिकौर्ड, ये हैं दुनिया के टौप-10 टेस्ट गेंदबाज

दक्षिण अफ्रीका के स्टार तेज गेंदबाज डेल स्टेन क्रिकेट इतिहास के सबसे खतरनाक गेंदबाजों में से एक रहे हैं. 35 वर्षीय स्टेन ने गुरुवार को श्रीलंका के खिलाफ डरबन टेस्ट में चार विकेट झटकते हुए भारत के महान तेज गेंदबाज कपिल देव का रिकॉर्ड तोड़ दिया है.

स्टेन के इस प्रदर्शन की मदद से पहले टेस्ट के दूसरे दिन श्रीलंकाई टीम दक्षिण अफ्रीका के 235 रन के जवाब में 191 रन पर सिमट गई. इसके बाद दक्षिण अफ्रीका ने दूसरी पारी में 126/4 के साथ दूसरे दिन तक 170 रन की बढ़त ले ली थी.

डरबन टेस्ट शुरू होने से पहले स्टेन के नाम 433 विकेट दर्ज थे और वह कपिल देव (434 विकेट) का रिकॉर्ड तोड़ने से सिर्फ दो विकेट दूर थे. स्टेन ने पहली पारी में शानदार प्रदर्शन करते हुए 20 ओवर में 48 रन देकर 4 विकेट लिए और 437 विकेट के साथ कपिल देव को पीछे छोड़ते हुए स्टुअर्ट ब्रॉड की बराबरी कर ली और दुनिया में सर्वाधिक विकेट लेने वाले सातवें गेंदबाज बन गए. कपिल देव ने जहां 434 विकेट के लिए 131 टेस्ट खेले थे तो वहीं स्टेन ने 92 मैचों में ही 437 विकेट ले लिए हैं.

टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा विकेट लेने का रिकॉर्ड श्रीलंका के मुथैया मुरलीधरन के नाम है, जिन्होंने 800 विकेट लिए हैं. इसके बाद 708 विकेट के साथ शेन वॉर्न, 619 विकेट के साथ अनिल कुंबले, 575 विकेट के साथ जेम्स एंडरसन, 563 विकेट के साथ ग्लैन मैक्ग्रा और 519 विकेट के साथ कोर्टनी वॉल्श का नंबर है, जिन्होंने डेल स्टेन से ज्यादा टेस्ट विकेट लिए हैं.

टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले टॉप-10 गेंदबाज

मुथैया मुरलीधरन-800 विकेट

शेन वॉर्न-708 विकेट

अनिल कुंबले-619 विकेट

जेम्स एंडरसन-575 विकेट

ग्लैन मैक्ग्रा-563 विकेट

कोर्टनी वॉल्श-519 विकेट

डेल स्टेन-437 विकेट

स्टुअर्ट ब्रॉड-437 विकेट

कपिल देव-434 विकेट

रंगना हेराथ-433 विकेट

सर रिचर्ड हैडली-431 विकेट

डेल स्टेन ने इस उपलब्धि पर दी ये प्रतिक्रिया

अपनी इस उपलब्धि के बाद पिछले दो सालों से चोटों से जूझ रहे डेल स्टेन ने कहा कि चोटों से वापसी के बाद उन्हें 430 विकेट वाले गेंदबाज की जगह 20 विकेट लेने वाले गेंदबाज की तरह अहसास हो रहा था. लेकिन वह खुशकिस्मत हैं कि वह चोट से वापसी कर सके.

स्टेन ने कहा, ‘दो साल तक नहीं खेलने के बाद, फिर से खेलना मेरे लिए एक वरदान जैसा अहसास है. मुझे लगभग फिर से शुरुआत करनी पड़ी. मैं 430 विकेटों पर नहीं, बल्कि शॉन पोलाक का रिकॉर्ड तोड़ने के बाद से 20 विकेट पर था. पाकिस्तान के खिलाफ तीन टेस्ट मैचों की सीरीज खत्म करना शानदार रहा और किसी ने ये नहीं लिखा, ‘वह रिटायरमेंट से सिर्फ एक चोट दूर हैं. फिर से योगदान देकर अच्छा लगा. उम्मीद है कि मैं इसे आगे भी जारी रह सकूं.’

ईकौमर्स कंपनियों में खलबली : औफर्स और कैशबैक अब नहीं..!

बदलते जमाने में ईकौमर्स की रूपरेखा बदल रही है. बदलाव से कोई खुश होगा तो कोई  दुखी. ऐसा हर बदलाव से होता भी है. जमाना बदला है तो जमाने संग लोगों की सोच भी बदली. तौरतरीके, रंगढंग भी बदले. इसी बदली सोच का परिणाम है औनलाइन शौपिंग. ईकौमर्स या ई व्यवसाय इंटरनैट के जरिए व्यापार का संचालन है. न केवल खरीदना व बेचना, बल्कि ग्राहकों के लिए सेवाएं और व्यापार के भागीदारों के साथ सहयोग भी इस में शामिल है.

पहले लोग बाजार जाते थे, चीजें देखतेपरखते थे, मोलभाव करते थे. उस के बाद पसंद आने पर खरीदते थे. मगर अब दुनिया बदल गई है. मोबाइल हाथ में क्या आया, हर आदमी यही समझता है कि मोबाइल हाथ में, तो दुनिया मुट्ठी में.

पहले कुछ भी खरीदना हो, बाजार की सैर करनी ही पड़ती थी. कंप्यूटर और मोबाइल आने के बाद दुनिया बदल गई है. अब बाजार खुद उठ कर घर चला आता है. बिलकुल, जो मांगोगे वही मिलेगा वाला आलम है. इस को कहते हैं औनलाइन शौपिंग. इस से खरीदारों के मजे हैं, मगर औफलाइन दुकानदारों की नींद हराम है.

यदि ग्राहक घर बैठे खरीदारी करेंगे, मोटा डिस्काउंट पाएंगे और कैशबैक भी तो बाजार में दुकान खोल कर बैठे व्यापारी की तो शामत आनी ही है. यही हो रहा है. हर ग्राहक कहता है कि औनलाइन का जमाना है. क्यों न कहे? पहले बहुत मोलभाव करने पर व्यापारी थोड़ा सा डिस्काउंट देता था, अब औनलाइन कंपनियां बिना मांगे ही मोटा डिस्काउंट देती हैं. यदि कोई त्योहार वगैरह हो तो ये कंपनियां इतना डिस्काउंट दे देती हैं कि ग्राहक की आंखें चुंधिया सी जाती हैं. तब उसे वह कहावत याद आती है, ‘आम के आम गुठलियों के दाम,’ वह भी घर बैठे.

online-shopping

औनलाइन शौपिंग का क्रेज

औनलाइन शौपिंग से ग्राहकों को जब संतुष्टि मिल रही हो तो शौपिंग भला क्यों न फलेफूलेगी. 21वीं सदी के युवा मिलेनियम मानते हैं कि उन पर तो सनक सवार है औनलाइन शौपिंग का.

औनलाइन शौपिंग करने वाले से पूछा जाए कि इस का सब से बड़ा फायदा क्या है, तो शायद हर औनलाइन शौपिंग करने वाले उपभोक्ता का यही जवाब होगा कि इस का सब से बड़ा फायदा होता है

हैवी डिस्काउंट और कैशबैक. किसी फैस्टिवल सेल के दौरान तो यह सारी हदें पार कर देता है क्योंकि 80 प्रतिशत तक डिस्काउंट पर चीजें मिलने लगती हैं. यह अलग बात है कि छूट के तहत मिलता सामान पुराने स्टौक्स का क्लियरैंस माल है, जो सस्ते में नहीं बेचा गया तो एक्सपायर हो जाएगा. राशन सप्लायर ईकौमर्स प्लैटफौर्म ग्रोफर्स, बिग बास्केट इसी मौडल पर काम कर रहे हैं. इन के उत्पाद सस्ते हैं मगर एक्सपायरी डेट नजदीक होती है. लूट की छूट का असली खेल लोग नहीं समझ रहे हैं.

मगर औनलाइन शौपिंग के दीवानों के लिए बुरी खबर यह है कि सरकार ने ऐसे नियम बनाए हैं जो औनलाइन शौपिंग के फायदे काफी कम कर देंगे. मोटा डिस्काउंट मिलना इतिहास की बात बन जाएगी. सरकार ने ईकौमर्स सैक्टर के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के नियमों में बदलाव किए हैं. जिस के तहत निश्चित कीमत से बहुत ज्यादा डिस्काउंट देने की पौलिसी खत्म हो जाएगी. डिस्काउंट और कैशबैक इतिहास की बात हो जाएगी. ये नियम पहली फरवरी से लागू होंगे. देश के 2 सब से बड़े औनलाइन मार्केटप्लेस, एमेजौन और वौलमार्ट के स्वामित्व वाली फ्लिपकार्ट को नए नियमों के तहत रैगुलेट किया जाएगा.

जाहिर है इस से इन के सदस्य उपभोक्ता पर चोट होगी, व्यापार में ग्राहक भगवान होता है. मोदी सरकार उसी को नाराज कर रही है. आखिर, उसे खुदरा और औफलाइन व्यापारियों के वोट जो चाहिए. औनलाइन शौपिंग का मोटा डिस्काउंट उन का व्यापार चौपट कर रहा है.

online-shopping

एमेजौन व फ्लिपकार्ट की मंशा

औनलाइन शौपिंग में हैवी छूट की हकीकत कुछ और भी है. यह भ्रम है कि एमेजौन और फ्लिपकार्ट कंपनियां सही दाम ले कर ही उपभोक्ता को लाभ पहुंचा रही हैं. असल में यह नुकसान अमेरिकी कंपनी भारतीय ग्राहकों को लुभाने के लिए उठा रही हैं, ताकि छोटे भारतीय व्यापारी हमेशा के लिए समाप्त हो जाएं. 2017-18 में मार्च 31 तक एमेजौन का नुकसान वर्ष में 6,287 करोड़ रुपए था जबकि बिक्री मात्र 4,928 करोड़ रुपए थी. लागत से ज्यादा नुकसान कौन व क्यों सहेगा? इसलिए कि वे भारत के खुदरा व्यापार पर कब्जा कर के पूरा बाजार समाप्त कर देना चाहती हैं. एमेजौन अब तक 25,090 करोड़ रुपए विदेशों से ला कर भारत में लगा चुकी है, जिस का अधिकांश हिस्सा उस ने ग्राहकों को छूट देने, डिलीवरी की सुविधा देने और विज्ञापन पर खर्च किया है.

यह एक तरह से ऐसा ही है जैसे अमेरिका ने अपनी फौज इराक भेज कर उस देश को नष्ट कर दिया था. यह आक्रमण, दरअसल, व्यापारिक है.

ईकौमर्स सैक्टर में एफडीआई के नए नियमों से फिलहाल सब से बड़ा घाटा उपभोक्ताओं को होगा. आज के दौर में अगर एक फोन भी खरीदना है तो रिटेल स्टोर्स पर कीमत की जानकारी लेने के बाद औनलाइन शौपिंग की जाती है, ताकि हम छूट के साथ सस्ता सामान पा सकें. लेकिन अगर यह छूट बंद हो गई तो औनलाइन शौपिंग का कोई फायदा ही नहीं रह जाएगा. चाहे होटल बुक करवाना हो, घर पर किराना सामान मंगवाना हो, किसी को फिल्म का टिकट बुक करवाना हो हर काम के लिए औनलाइन ऐप्स का इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन इस का अंदाजा लगाया जा सकता है कि अगर नए नियम लागू हो गए तो उपभोक्ताओं को कितना नुकसान होगा.

लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि यदि खुदरा बाजार में केवल एमेजौन और फ्लिपकार्ट अमेरिकी पैसे के बलबूते पर बचीं तो आज नहीं तो कल वे इस की वसूली महंगा सामान बेच कर करेंगी ही. जब छोटे व्यापारी खत्म हो जाएंगे तो ये दोनों कंपनियां छूट देना बंद कर देंगी.

इतिहास का दोहराव

चीन में 2 सदी पहले जब अफीम का व्यापार शुरू किया गया था तो ईस्ट इंडिया कंपनी ने वहां सस्ती अफीम बेची, क्योंकि अंगरेजों की कंपनी ने भारत के व्यापार पर पूरा कब्जा कर लिया था. जब अफीम की वजह से चीन की कानूनव्यवस्था चरमराने लगी तो अंगरेजों ने जबरन पानी के लड़ाकू जहाज भेज कर वहां के सम्राट को मजबूर किया कि व्यापार होने दे. बाद में चीनी सेनाओं ने अंगरेजों का मुकाबला किया.

आज अमेरिकी पूंजी से भारत के व्यापार और खुदरा बाजार पर हमला हो रहा है. यह चोट अभी छोटे व्यापारियों को लग रही है, पर जल्दी ही उत्पादकों को चूसा जाएगा. यदि एमेजौन और वौलमार्ट की कंपनी फ्लिपकार्ट किसी कंपनी का बौयकाट कर दें तो चारदिनों में उस का दिवाला निकल जाएगा.

ईस्ट इंडिया कंपनी ने चीन में अफीम बेचने का नायाब तरीका अपनाया था. उस ने अफीम खुद तो उगाई नहीं, पर उगाने वालों पर हर तरह कंट्रोल कर लिया. परमिट ले कर अफीम उगाई जाती और सस्ते में ईस्ट इंडिया कंपनी खरीदती. फिर उसे ऐसे प्रोसैस करती जिस से कि चीन तक जाने में वह खराब न हो. चीन में कई गुना ज्यादा दामों में वह बेची जाती. अंगरेजों की कंपनी बिना कुछ बनाए ऐसे ही पैसा बना रही थी, जैसे अब एमेजौन और फ्लिपकार्ट बिना कुछ तैयार किए पैसा कमा रही हैं. न तो वे सामान की प्रोडक्शन वैल्यू कम करती हैं न कुछ उत्पादित करती हैं.

online-shopping

ग्राहकों को झटका

छोटे व्यापारियों के दबाव में जो परिवर्तन होने वाला है, उस से औनलाइन शौपिंग करने वालों को झटका लग सकता है. अब एमेजौन, फ्लिपकार्ट, पेटीएम मौल और स्नैपडील जैसी वैबसाइट््स के डिस्काउंट पर नजर रखने के लिए नियम बन रहे हैं. सरकार ने हाल ही में ईकौमर्स क्षेत्र के लिए राष्ट्रीय नीति का मसौदा जारी किया है. इस में यह कहा गया है कि इस तरह की छूट की सीमा होनी चाहिए. इस में स्विगी, अर्बन क्लैप, पेटीएम और पौलिसी बाजार जैसी वैबसाइट्स को भी शामिल किया जाएगा.

मसौदे में ईकौमर्स सैक्टर के लिए एक रैगुलेटर बनाने का भी प्रस्ताव है. यह रैगुलेटर ईकौमर्स कंपनियों के कारोबार पर नजर रखेगा. भारत में ईकौमर्स कारोबार तेजी से बढ़ रहा है. भारत के बाजार पर कब्जे के लिए फ्लिपकार्ट (वौलमार्ट), एमेजौन और रिलायंस रिटेल में मार्केट वार हो रही है. कहा जा रहा है कि ऐेसे में इस सैक्टर के लिए नियम बहुत जरूरी हैं.

सरकार की तुगलकी नीतियां

जब ईकौमर्स सैक्टर शुरू हुआ था तब सरकार इस के जरिए विदेशी पूंजी को आकर्षित करना चाहती थी. अब इस सैक्टर के फलनेफूलने से सरकार को खुदरा दुकानदारों को चिंता सताने लगी है जिन की संख्या करोड़ों में है. ऐसे में उसे नियम बदलने की घोषणा करनी पड़ी. अब इस क्षेत्र के पुराने खिलाडि़यों में खलबली मच गई है.

बड़े उद्योगपतियों की हिमायती मोदी सरकार ने चूंकि विदेशी निवेश वाली ईकौमर्स कंपनियों के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी फौरेन डाइरैक्ट इन्वैस्टमैंट (एफडीआई) के नियमों में बदलाव किया है, इसलिए इस का असर देश में एमेजौन और फ्लिपकार्ट के कामकाज के तरीके पर पड़ेगा. उद्योगपति मुकेश अंबानी की आने वाली ईकौमर्स कंपनी पर इन नियमों का कोई असर नहीं होगा.

बाजार पर एमेजौन और फ्लिपकार्ट का कब्जा है. लेकिन रिलायंस के इस क्षेत्र में उतरने के बाद अब लड़ाई दिलचस्प हो गई है. नए नियमों के चलते भारत में फौरेन फंडिंग प्राप्त करने वाली कंपनियों के लिए हालात अब बदलने वाले हैं. जिन कंपनियों ने विदेशी निवेशकों से फंडिंग प्राप्त की है उन्हें भारत में वेयरहाउस खोलने की इजाजत नहीं होगी. कंपनियां अपने सेलर्स के जरिए भी वेयरहाउस का संचालन नहीं कर पाएंगी. वेयरहाउस के नहीं होने का सीधा असर कंपनियों की सप्लाई चेन पर पड़ेगा. ऐसे में कंपनियों के लिए डिस्काउंट और भारी सेल लगाना मुश्किल हो जाएगा.

सब से बड़ी डील

भारत का ईकौमर्स बाजार मुख्यरूप से एमेजौन और फ्लिपकार्ट के बीच बंटा हुआ है. वौलमार्ट ने हाल ही में ईकौमर्स की सब से बड़ी स्वदेशी कंपनी फ्लिपकार्ट में 77 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी जिसे देश की अब तक की सब से बड़ी ईकौमर्स डील कहा जा रहा है.

16 अरब डौलर की डील पर इठलाने के बाद फ्लिपकार्ट की मुश्किलें अब बढ़ेंगी.

इस के बाद लगातार आशंका जताई जा रही थी कि वौलमार्ट इस के जरिए भारतीय औनलाइन बाजार में अपने उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश करेगी. लगभग यही स्थिति एमेजौन के साथ है जो इनहाउस उत्पादों की बिक्री करती है.

ईकौमर्स मार्केटप्लेस के लिए संशोधित एफडीआई नीति में वैंडर्स से भेदभाव की गुंजाइश भी खत्म कर दी गई है. संशोधित नीति में कहा गया है कि जिन रिटेल कंपनियों में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से किसी ईकौमर्स मार्केटप्लेस की हिस्सेदारी है या जिन वैंडर्स पर उन का नियंत्रण है, उन्हें सभी वैंडर्स से गैरभेदभावपूर्ण तथा तटस्थता के साथ सेवा प्रदान करनी होगी. यह प्रावधान बहुत अजीब है, क्योंकि कोई व्यापारी अपना माल न बेचे, यह कहां का न्याय है.

फिलहाल, कई ब्रैंड्स ऐसे हैं जो अपने उत्पाद सिर्फ औनलाइन ईकौमर्स कंपनियों के लिए ही उपलब्ध कराते हैं. नए नियमों के तहत अब कोई भी वैंडर 25 फीसदी से ज्यादा इन्वैंटरी एक ही मार्केटप्लेस में नहीं रख सकेगा. यह नियम इसलिए है कि एमेजौन या फ्लिपकार्ट किसी कंपनी को बंधक न बना सके.

‘सिर्फ हमारे पास’ अब नहीं

ईकौमर्स कंपनियों के लिए ‘यह प्रोडक्ट सिर्फ हमारे पास’ जैसे लुभावने स्लोगन के दिन अब लद गए हैं. आम चुनाव से पहले खुदरा व्यापारियों को रिझाने के लिए सरकार ईकौमर्स कंपनियों पर नकेल कसने में जुट गई है. इसी के तहत सरकार ने औनलाइन मार्केटप्लेस मुहैया कराने वाली फ्लिपकार्ट, एमेजौन या इस तरह की दूसरी सभी कंपनियों को किसी भी प्रोडक्ट की एक्सक्लूसिव बिक्री संबंधी करार करने से रोक दिया है. ये सभी पाबंदियां पहली फरवरी से लागू होंगी. ईकौमर्स कंपनियों के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) संबंधी नियमों को संशोधित करते हुए वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने यह कदम उठाया है.

नए नियमों के तहत किसी औनलाइन रिटेलर की गु्रप कंपनी को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कीमतों को प्रभावित करने की अनुमति नहीं मिलेगी. इस कदम से ईकौमर्स कंपनियों द्वारा भारीभरकम डिस्काउंट का औफर देने पर रोक लग जाएगी. इस से खुदरा दुकानदारों को राहत मिलने की उम्मीद है. ये व्यापारी लंबे समय से ईकौमर्स कंपनियों द्वारा दिए जा रहे भारी डिस्काउंट पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं.

वर्ष 2014 के आम चुनावों में नरेंद्र मोदी ने विदेशी कंपनियों के खुदरा बाजार में आने से रोक लगाने और घरेलू छोटे कारोबारियों के संरक्षण का वादा किया था. देश में खुदरा बाजार बहुत बड़ा है. एक अनुमान के मुताबिक, देश में लगभग 4 करोड़ खुदरा दुकानें हैं. इन के माध्यम से लगभग 14 करोड़ लोगों की रोजीरोटी जुड़ी हुई है. जीएसटी के कारण पहले ही सरकार से नाराज चल रहे व्यापारी औनलाइन कंपनियों पर कोई लगाम न लगाए जाने से भी नाराज चल रहे थे. सरकार ने जीएसटी की दर घटा कर व्यापारियों को मनाने का काम किया था पर वह काफी नहीं है, क्योंकि ज्यादातर बहुत महंगी चीजों पर ही जीएसटी की दर कम की गई है.

चुनावी हार का असर भी

यह सच है कि दिसंबर 2018 में आए 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजों में हार मिलने से भाजपा आम चुनावों को ले कर डर गई. मजबूर हो कर वह ईकौमर्स के नियमों में बदलाव ला रही है. आने वाले चुनाव को ध्यान में रखते हुए सरकार को नीतियां बदलने को मजबूर होना पड़ा, क्योंकि इन खुदरा व्यापारियों की संख्या करोड़ों में है और वे भाजपा का जनाधार रहे हैं. जबकि, मोदी और अरुण जेटली इन्हें कालाबाजारिए मानते हैं जिन से वसूलने का मौलिक हक हर पंडा सरकार को है. लेकिन यह चोर के घर चोरी करने वाली नीति है. इस से जनता को दूरगामी नुकसान नहीं होंगे.

औनलाइन बाजार के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए सरकार द्वारा तैयार की जा रही नई ईकौमर्स नीति खुदरा व्यापारियों को लुभाने में नाकाम रह सकती है. इस कदम के बावजूद सरकार को आगामी आम चुनावों में छोटे कारोबारियों का वोट पाने की उम्मीदों को झटका लग सकता है. चुनाव के कुछ समय पहले किए गए बदलाव मतदाताओं तक पहुंच नहीं सकते, इसलिए उन का लाभ सत्ताधारी पार्टी को नहीं मिल पाता.

प्राइस वाटरहाउस कूपर की सितंबर की रिपोर्ट में अनुमान व्यक्त किया गया है कि औनलाइन कौमर्स अगले 5 वर्ष 25 प्रतिशत की दर से बढे़गा और 2022 तक 100 अरब डौलर तक पहुंच जाएगा. निवेश विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार जो अंकुश लगाने जा रही है उस से विकास की इन संभावनाओं को नुकसान पहुंचेगा.

वजीर एडविजर के रिटेल कंसल्टैंट हरमिंदर सहानी के मुताबिक, नई ईकौमर्स नीति कहती है कि औनलाइन रिटेल व्यापार को भारतीयों को ही चलाना चाहिए.

नियमों में बदलाव पर तर्कवितर्क

यह ठीक है कि ईकौमर्स क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं की संख्या एक वर्ष में दोगुनी हो गई है और वर्तमान में यह संख्या 40 हजार है, लेकिन सरकार द्वारा हाल ही में अपनी नीति में किए गए बदलाव की घोषणा का ईकौमर्स क्षेत्र पर दीर्घकालिक असर पड़ेगा, ऐसा फ्लिपकार्ट का कहना है. पर वह यह छिपा जाती है कि ईकौमर्स के चलते खुदरा बाजार में कितनी दुकानों के बंद होने से कितने रोजगार कम होंगे. इस के आंकड़े कहीं नहीं मिलेंगे. एफडीआई नीति में किए गए बदलाव से ईकौमर्स और औफलाइन व्यापारियों के लिए एकजैसा मौका दिए जाने की मंशा है. देश के खुदरा बाजार में 90 फीसदी हिस्सेदारी औफलाइन ट्रेडर्स की है.

ग्रोथ पर नकारात्मक प्रभाव

हालांकि, आर्थिक जानकारों ने ईकौमर्स के पहली फरवरी से लागू होने वाले नए नियमों को पीछे की ओर जाने वाला कदम बताया है. भारत में औनलाइन रिटेल कारोबार की ग्रोथ पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. वे कहते हैं कि कारोबारी गतिविधियों को माइक्रो मैनेज करना सरकार का काम नहीं है. नियम में बदलाव बिना किसी सलाहमशवरे के किया गया है. नए नियम के मुताबिक, विदेशी निवेश वाले औनलाइन प्लेटफौर्म्स द्वारा दिए जा रहे डिस्काउंट और कैशबैक औफर्स पर रोक लग जाएगी.

इस से कंज्यूमर को नुकसान होता है या दूरगामी लाभ, यह अभी नहीं कह सकते, पर यह भाजपा विरोधियों की जीत जरूर है. किसी भी रिटेल बाजार में ग्राहक ही किंग होता है. यह बदलाव भारतीय उत्पादकों और विक्रेताओं को ग्लोबल औनलाइन मार्केटप्लेस में प्रतिस्पर्धा करने से भी रोकता है. आर्थिकविदों ने यह भी कहा कि इस से पारदर्शिता में कमी झलकती है.

ईकौमर्स समर्थकों का कहना है कि मौजूदा जिन ईकौमर्स नियमों से देश में विदेशी पूंजी आ रही है, रोजगार बढ़ा है और ग्राहक भी खुश हैं, उन्हें सरकार अपने चुनावी फायदे के लिए बदलना चाहती है. जहां तक खुदरा व्यापारियों का सवाल है, उन्हें प्रतियोगी बाजार में जीने और तरक्की करने की आदत डालनी चाहिए. सरकारी संरक्षण के सहारे वे आज की दुनिया में फलफूल नहीं सकते.

लेकिन ये समर्थक क्या यह बता रहे हैं कि अमेरिकी कंपनियां आखिर क्यों अरबों रुपया लगा कर भारत में आना चाहती हैं. वे न उत्पादन तकनीक ला रही हैं, न व्यापार करने का सही तरीका बता रही हैं. वे तो भारत के व्यापार क्षेत्र में लंबे समय तक राज करने की मंशा के चलते भारतवासियों को हैवी डिस्काउंट, औफर्स और कैशबैक का लौलीपौप देने के साथ यहां के खुदरा कारोबारियों की कमर तोड़ रही हैं. इस के लिए वे टंपरेरी तौर पर रिस्क जरूर ले रही हैं.

पुलवामा हमला : 40 जवान शहीद, क्यों नाकाम हो रही हैं खुफिया एजेंसियां

पुलवामा हमले के बाद देश की इंटेलीजेंस एजेंसियों पर सवाल उठने लगे हैं. आखिर हम कहां चूक रहे हैं, क्यों चूक रहे हैं? आतंकी 350 किलो विस्फोटक ले कर सीआरपीएफ की गाड़ियों के साथ चल रहा था और हमारी खुफिया एजेंसियां सो रही थीं? पुलिस चेकपोस्ट पर गाड़ियों की जांच क्यों नहीं हो रही थी? राज्य की पुलिस क्या कर रही थी? आतंकी बेखौफ 350 किलो विस्फोटक ले कर सीआरपीएफ बस के साथ चल रहा था और किसी को इस बात की भनक तक नहीं थी? ये चिंता और समीक्षा का विषय है. सर्जिकल स्ट्राइक का इतना शोर मचाने वाली सरकार के काम पर सवालिया निशान लगाता है ये हमला.

सर्जिकल स्ट्राइक और उरी विजय का जश्न मनाने वाली मोदी सरकार के 5 साल में देश में ये 12वां बड़ा आतंकी हमला है. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार देश की सुरक्षा की चिंता छोड़ के एक विशेष राजनितिक पार्टी के सलाहकार बने हुए हैं और हमारे जवान बेवजह जान गवां रहे हैं. पुलवामा हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हुए हैं और 40 से ज्यादा घायल हैं. हमला इतना भयानक था कि कई गाड़ियों के परखच्चे उड़ गए. सीआरपीएफ का ये काफिला जम्मू से श्रीनगर की ओर जा रहा था और इसमें 78 वाहनों में 2,547 जवान बैठे थे.

आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है. पुलवामा हमले के लिए जैश पिछले एक साल से तैयारी कर रहा था. यहां तक कि जैश-ए-मोहम्मद ने प्राइवेट ट्विटर अकाउंट पर एक वीडियो भी जारी किया था, जिसमें आतंकी हमले की संभावना जताई गई थी. इसमें सुरक्षा बलों पर हमले की चेतावनी दी गई थी. फिर भी हमारी खुफिया एजेंसियां इस हमले को रोक पाने में नाकाम हुईं. शर्मनाक!

कश्मीर में हमले की चेतावनी देता वीडियो जिस ट्विटर अकाउंट से अपलोड किया गया था, वो 33 सेकेंड का है, जिसमें सोमालिया का एक आतंकी ग्रुप बिल्कुल इसी अंदाज में सेना पर हमला करता नजर आ रहा है, जैसा कि पुलवामा में किया गया. इस ट्विटर हैंडल का नाम है ‘313_get’, जिसके आखिर में धमकी भरे अंदाज में बाकायदा कश्मीर का नाम लेते हुए कहा जा रहा है कि ‘इंशाअल्लाह, यही कश्मीर में होगा. जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने भी माना है कि कहीं न कहीं सुरक्षा में बड़ी चूक हुई है. खासकर इस मामले में कि एक स्कॉर्पियो में बारूद भरा था और उसे पकड़ा नहीं जा सका.

पुलवामा में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस यानी आईईडी ब्लास्ट के जरिये हमले को अंजाम दिया है. देश में यह पहला आईईडी हमला नहीं है. आतंकियों ने इससे पहले भी कई आईईडी हमले किये हैं. दरअसल, आतंकी बड़े पैमाने पर नुकसान के लिए आईईडी ब्लास्ट को अंजाम देते हैं. 2016 में पठानकोट एयरबेस में आतंकियों ने आईईडी ब्लास्ट के जरिये ही वारदात को अंजाम दिया था, जिसमें बड़े पैमाने पर लोग घायल हुए थे.

जम्मू-कश्मीर में आतंक की शुरुआत 90 के दशक में हुई थी. 1990 से लेकर अब तक राज्य में आतंकी हमलों में 5,777 से ज्यादा जवान शहीद हो चुके हैं. सुरक्षाबलों की कार्रवाई में 21,562 आतंकी मारे गए हैं. इसके अलावा आतंकी हमलों में 16,757 नागरिकों की जानें जा चुकी हैं. वहीं, खुफिया एजेंसियों ने पहले ही संसद भवन पर हमले के दोषी अफजल गुरु और मकबूल भट की बरसी (9 फरवरी) को लेकर अलर्ट जारी किया था. साथ ही कहा था कि आतंकी काफिले पर आईईडी ब्लास्ट कर सकते हैं. बावजूद इसके आतंकी को पहचानने और विस्फोटक से भरी गाड़ी को रोक पाने में हम नाकाम रहे, ये भारी चिंता की बात है. कश्मीर में 90 के दशक में आईईडी हमले सबसे ज्यादा होते थे. एक बार फिर वह दौर लौटा है.

कितना खतरनाक है आईईडी ब्लास्ट?

आईईडी भी एक तरह का बम ही होता है, लेकिन यह मिलिट्री के बमों से कुछ अलग होता है. आतंकी आईईडी का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर नुकसान के लिए करते हैं. आईईडी ब्लास्ट होते ही मौके पर अक्सर आग लग जाती है, क्योंकि इसमें घातक और आग लगाने वाले केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है. खासकर आतंकी सड़क के किनारे आईईडी को लगाते हैं, ताकि इस पर पांव पड़ते ही या गाड़ी का पहिया चढ़ते ही ब्लास्ट हो जाता है. आईईडी ब्लास्ट में धुंआ भी बड़ी तेजी से निकलता है.

आईईडी को ट्रिगर करने के लिए आतंकी रिमोट कंट्रोल, इंफ्रारेड या मैग्नेटिक ट्रिगर्स, प्रेशर-सेंसिटिव बार्स या ट्रिप वायर जैसे तरीकों का इस्तेमाल भी करते हैं. कई बार इन्हें सड़क के किनारे तार की मदद से बिछाया जाता है. भारत में नक्सलियों द्वारा भी कई वारदातों को आईईडी ब्लास्ट के द्वारा अंजाम दिया गया है.

12वीं बार आईईडी से विस्फोट

री-मोहरा में हमला : दिसंबर 2014

बारामूला के उरी सेक्टर के मोहरा में सैन्य रेजीमेंट पर आतंकी हमला. 12 जवान शहीद हुए. 6 आतंकी भी मारे गए.

ख्वाजा बाग अटैक : 17 अगस्त 2016

हिजबुल का श्रीनगर बारामूला हाईवे पर सैन्य काफिले पर हमला. इस हमले में 8 जवान शहीद हुए. कई घायल भी हुए थे.

मणिपुर में सेना पर हमला : 4 जून, 2015

मणिपुर के चंदेल जिले में सेना के काफिले पर आतंकियों ने बारूदी सुरंग बिछा कर हमला किया. इनमें 18 जवान शहीद हुए थे.

पुंछ आतंकी हमला : 11 सितंबर 2016

पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमला. मुठभेड़ 3 दिन चली. हमले में 6 जवान शहीद हुए. लश्कर के 4 आतंकी भी मारे गए.

गुरुदासपुर में हमला : जुलाई 2015

पंजाब के गुरुदासपुर में आर्मी ड्रेस पहने आतंकियों ने दीनानगर पुलिस स्टेशन पर हमला किया. 4 जवान और 3 लोग मारे गए.

पठानकोट हमला : 2 जनवरी 2016

जैश-ए-मोहम्मद के 6 आतंकियों ने पठानकोट एयरबेस पर हमला किया. मिशन छह दिन चला. इसमें 7 जवान शहीद हुए.

उरी अटैक : 18 सितंबर 2016

सेना के कैंप में तड़के साढ़े 5 बजे सोते हुए जवानों पर 4 आतंकियों ने हमला किया. इस हमले में 19 जवान शहीद हुए.

अनंतनाग हमला : 4 जून, 2016

अनंतनाग में चेकपोस्ट पर हमला. 2 जवान शहीद. एक दिन पहले ही बीएसएफ काफिले को निशाना बना 3 जवानों की जान ली.

अमरनाथ यात्रियों पर हमला : 11 जुलाई 2017

अमरनाथ यात्रा पर जा रही बस पर आतंकियों ने घात लगाकर हमला किया. 7 श्रद्धालुओं की मौत हुई. बस में 56 यात्री सवार थे.

पंपोर हमला : 26 जून 2016

पंपोर के पास श्रीनगर-जम्मू हाईवे पर सीआरपीएफ काफिले पर हमला. इसमें 8 जवान शहीद, 20 जख्मी हुए.

कैंप पर अटैक : 31 दिसंबर 2017

पुलवामा में सीआरपीएफ के ट्रैनिंग कैंप में 185वीं बटालियन पर हमला. 5 जवान शहीद हुए. दो आतंकी मारे गए.

डिलीवरी से पहले अपनी हौट तस्वीरों से सुरवीन ने मचाया तहलका

बौलीवुड और पंजाबी एक्ट्रेस सुरवीन चावला के घर में किलकारी गूंजने वाली है. इन दिनों सुरवीन चावला अपनी प्रेग्नेंसी को खूब एंजौय कर रही हैं. सुरवीन ने अपनी प्रेग्नेंसी के बारे में कुछ वक्त पहले ही खुलासा किया था.

सुरवीन चावला अक्सर अपने बेबी बंप की फोटोज शेयर करती रहती हैं. हाल ही में सुरवीन चावला ने Tea Valley Filmfare Glamour and Style Award के दौरान बेबी बंप के साथ रेड कारपेड पर अपनी अदाओं का जलवा बिखेरा.

ग्रीन कलर की डिजाइनर ड्रेस पहनी बेबी बंप के साथ सुरवीन अवार्ड फंक्शन में काफी स्टाइलिश दिखी. आपको बता दे की सुरवीन ने अपने बॉयफ्रेंड अक्षय ठक्कर से इटली में 2015 में शादी की थी उन्होंने अपनी शादी को 2017 तक सीक्रेट रखा.

सुरवीन ने फिल्मों में आने से पहले छोटे पर्दे पर काम किया है. वह ‘कहीं तो होगा’, ‘कसौटी जिंदगी की’ और ‘काजल’ जैसे लोकप्रिय धारावाहिकों में नजर आ चुकी हैं.

सुरवीन फिल्मों के अलावा आपके हौट लुक को लेकर काफी सुर्खियों में रहती हैं.

आलू भिंडी रेसिपी

सामग्री :

– भिंडी (1/2 किलो)

– आलू ( 01 बड़ा )

– प्याज़ (01 बड़ी)

– लहसुन (01 छोटा चम्मच बारीक कटा हुआ)

– लाल मिर्च पाउडर ( 02 छोटा चम्मच)

– धनिया पाउडर (01 बड़ा चम्मच)

– हल्दी पाउडर ( 01 छोटा चम्मच)

– सौंफ पाउडर  (01 बड़ा चम्मच)

– अमचूर (01 छोटा चम्मच)

– नींबू का रस (01 बड़ा चम्मच)

– तेल (02 बड़े चम्मच)

– नमक (स्वादानुसार)

आलू भिंडी बनाने की विधि 

– सबसे पहले भिंडी धोकर उसका पानी सुखा लें.

– फिर उन्हें लम्बाई में काट लें, इसके बाद आलूओं को छीलकर धो लें.

– और उन्हें भी लम्बाई में काट लें.

– अब कढ़ाई में तेल गरम करें.

– तेल गर्म होने पर लहसुन को गुलाबी भून लें.

– उसके बाद कढ़ाई में प्याज़ डालें और उसे भी सुनहरा भून लें.

– अब हल्दी, मिर्च, धनिया, नमक डालें और दो मिनट भूनने के बाद उसमें आलू डाल दें.

– उसके बाद कढ़ाई में एक बड़ा चम्मच पानी डालें और ढक्कन लगा कर धीमी आंच पर आलूओं के हल्का गलने तक पका लें.

– जब आलू हल्के गल जाएं, तब कढ़ाई में भिंडी डालें और अच्छी तरह से मसालों के साथ मिला कर       ढककर  गल जाने तक पका लें.

– अब इसमें सौंफ पाउडर, अमचूर पाउडर और नींबू का रस डालें.

– उसके बाद गैस बंद कर दें.

– अब आपकी आलू भिंडी तैयार है.

ऐसे हटाएं ब्लैकहेड्स

क्‍या आपके नाक या नाक के आस पास की त्वचा पर ब्लैकहेड हो गया है और आप सचमुच उसे हटा कर ग्‍लोइंग स्‍किन पाना चाहती हैं. अगर हां तो अपनाइये हमारे कुछ टिप्‍स, जिसमें सरसों के दानों से स्‍क्रबिंग की जाती है. यह एक अच्‍छा प्राकृतिक स्‍क्रब माना जाता है. तो फिर देर किस बात की आइये देखते हैं सरसों को त्‍वचा के लिये कैसे प्रयोग कर सकते हैं.

सरसों और तेल

1 चम्‍मच सरसों लीजिये और 2 चम्‍मच बादाम या कोई अन्‍य तेल ले कर मिला लीजिये. इस मिक्‍सचर को अपने चेहरे पर पहले क्लौकवाइज घुमाइये और फिर एंटी क्लौकवाइज दिशा में रगड़िये. इसको 3 से 4 बार करने के बाद चेहरे को पानी से धो लीजिये. ब्‍लैकहेड गायब हो जाएंगे.

सरसों और मलाई

अपने चेहरे को सुंदर और आकर्षक बनाने के लिये सरसों और मलाई का प्रयोग कीजिये. 1 चम्‍मच दूध की मलाई और 1 चम्‍मच राई लेकर अपने चेहरे पर 3-4 मिनट तक के लिये रगडिये. जब आप अपना चेहरा धोएंगी तो आप पाएंगी की चेहरा गोरा हो गया होगा और ग्‍लो करने लग गया होगा.

सरसों और कार्नफ्लोर

1 चम्‍मच सरसों का दाना, 1 चम्‍मच पानी और 1 चम्‍मच कार्नफ्लोर मिलाइये और 3 मिनट तक के लिये रगडिये. अपने चेहरे को पानी से धो लीजिये और फिर देखिये अंतर.

सरसों, नींबू और शहद

इस स्‍क्रब से चेहरे के डेड सेल हटेंगे, ब्‍लैकहेड हटेंगे, जिससे मिलेगा ग्‍लो करता हुआ चेहरा. 1 चम्‍मच राई, 1 चम्‍मच शहद और 1 चम्‍मच नींबू का रस ले कर मिला लीजिये और 2-3 मिनट तक चेहरे पर रगडिये.

सरसों और एलो वेरा

मसटर्ड और एलोवेरा जेल चेहरे के लिये एक बहुत ही अच्‍छा कौम्‍बिनेशन है, जो चेहरे को साफ करता है और गंदगी को निकाल फेकता है. 1 चम्‍मच सरसों और 2 चम्‍मच एलोवेरा जेल मिला कर अपने चेहरे पर स्‍क्रब कीजिये.

गली ब्वाय : आलिया भट्ट और सिद्धांत चतुर्वेदी का शानदार अभिनय

मुंबई के धरावी इलाके के स्ट्रीट रैपर्स के संघर्ष की कहानी के साथ उनकी प्रेम कहानी को उकेरने वाली फिल्म ‘‘गली ब्वाय’’ में फिल्मकार जोया अख्तर ने मुस्लिम समाज व युवाओं को लेकर कुछ मुद्दे भी उठाए हैं, मगर फिल्म अपना असर छोड़ने में विफल रहती है. पश्चिमी सभ्यता में रचे बसे, क्लब संस्कृति का हिस्सा बन चुके अंग्रेजीदां दर्शकों को छोड़ इस फिल्म के साथ अन्य दर्शक खुद को जोड़ नहीं सकता. कहानी के स्तर पर भी फिल्म काफी कमतर है. फिल्म मुंबई के एक रैपर की सत्यकथा है, मगर फिल्मकार यह भूल गए कि रैपर्स संस्कृति से आम इंसान वाकिफ नही है.

gully boy

फिल्म‘‘गली ब्वाय’’की कहानी के केंद्र में मुंबई का धारावी इलाका और धरावी में रहने वाले एक मुस्लिम परिवार का युवक मुराद (रणवीर सिंह) है. गरीबी और सामाजिक बहिष्कार से जूझते मुराद का सपना एक मशहूर रैपर बनने का है. वह अपने विचारों को कागज पर उतारता रहता है. पर वह अपनी पढ़ाई पर भी पूरा ध्यान देता है. उसे धरावी के ही एक अन्य मुस्लिम परिवार की जिंदा दिल लड़की सफीना (आलिया भट्ट) से प्यार है. सफीना के पिता डाक्टर हैं और सफीना भी डाक्टरी की पढ़ाई कर रही है. सफीना का मानना है कि उसके लिए उसकी जिंदगी में सब कुछ सिर्फ मुराद है. इसी बीच मुराद के पिता आफताब (विजय राज) अपना दूसरा व्याह कर मुराद के लिए नई मां (अमृता सुभाष) भी ले आते हैं. फिर मुराद के पिता एक हादसे में चोटिल हो जाते हैं,तब मजबूरन मुराद को अपने पिता की जगह एक ड्रायवर के रूप में नौकरी करनी पड़ती है. मुराद और उसके पिता के बीच जमती ही नही है. मुराद की जिंदगी में बदलाव तब आता है, जब एक दिन वह एमसी शेर उर्फ श्रीकांत (सिद्धांत चतुर्वेदी) को कौलेज के लड़कों के साथ रैप करते देखता है. फिर मुराद,एमसी शेर से मिलता है. एमसी शेर, मुराद से कहता है-‘‘अगर दुनिया में सब कम्फर्टेबल होते तो रैप कौन करता.’’ उसके बाद मुराद व एमसी शेर एक साथ टीम बनाकर रैप करने लगते हैं. मुराद को रैपर के रूप में नया नाम ‘गली ब्वाय’मिलता है. फिर अमरीका से आई साई नामक म्यूजिक प्रोग्रामर मुराद से मिलती है और उसके साथ एक अलबम बनाने पर काम करती है, जिसके चलते मुराद व सफीना के बीच गलत फहमी भी पैदा होती है. अंततः मशहूर रैपर ‘नैस’भारत आने वाले होते हैं और तब एक प्रतिस्पर्धा होती है, जिसमें अंततः गली ब्वाय उर्फ मुराद विजेता बनते हैं.

कमजोर कहानी के साथ साथ भारत में संगीत के ‘रैप’फार्म के प्रचलित न होने की वजह से फिल्म उम्मीद नही जगाती है. पटकथा के स्तर पर भी फिल्म काफी भटकी हुई है. फिल्म का ट्रेलर देखकर अहसास होता था कि फिल्म की कहानी रैपर मुराद यानी कि रणवीर सिंह के इर्दगिर्द होगी, मगर ऐसा नहीं है. फिल्म में बेवजह मुस्लिम समुदाय में दो दो शादियों का मुद्दा बहुत ही स्तर हीन ढंग से उठाया गया है. इसी तरह मोईन (विजय वर्मा) की कहानी को जोड़कर फिल्म बार बार दर्शकों को अलग मोड़ पर ले जाती है. फिल्म में मोईन को मुराद का दोस्त भी बताया गया है. मोईन ड्रग्स के धंधे में लिप्त है. मोईन कम उम्र के बच्चों से ड्रग्स की सप्लाई कराता है. मुराद भी कभी कभी ड्रग्स लेता है. मोईन कार चुराकर बेचने में माहिर है और जब भी मोईन कार चुराता है, तो उस वक्त मुराद उसका जोड़ीदार होता है, पर फिल्म में अंततः मोईन को कार चोर के रूप में सजा मिलती है, जबकि मुराद पर आंच नहीं आती. यानी कि फिल्म की सबसे बड़ी कमजोर कड़ी इसका कथानक व पटकथा है. इतना ही नही इंटरवल से पहले फिल्म काफी बोर करती है.

gully boy

रैपर बनने के मुराद के जुनून, संघर्ष व उसके दर्द को बेहतर तरीके से नहीं उकेरा गया. जबकि गरीबी और सामाजिक उपेक्षाओं से जूझ रहे मुराद के दर्द और जुनून को कहानी में उचित स्थान नही दिया गया. यह लेखक व निर्देशक दोनों की कमजोरी है. फिल्म का क्लायमेक्स भी बहुत ग़डबड़ है. फिल्म को क्लासी बनाने के चक्कर में जोया अख्तर ने काफी गलतियां कर डाली.

जहां तक अभिनय का सवाल है तो अल्हड़, जिंदादिल, हठेली सफीना के किरदार में एक बार फिर आलिया भट्ट ने अपने अभिनय का जादू चला दिया है. एम सी शेर के किरदार में सिद्धांत चतुर्वेदी ने भी बेहतरीन अभिनय किया है. डरे व सहमे से रहने वाले मुराद के किरदार में रणवीर सिंह ने भी अच्छा अभिनय किया है, मगर कई दृश्यों में रणवीर सिंह पर आलिया भट्ट व सिद्धांत चतुर्वेदी भारी पड़े हैं. अफताब के किरदार में विजय राज निराश करते हैं. साई के छोटे किरदार में कल्की ठीक ठाक अभिनय कर गयी हैं.

दो घंटे 35 मिनट की अवधि वाली फिल्म ‘‘गली ब्वाय’’ का निर्माण फरहान अख्तर, जोया अख्तर और रितेश सिद्धवानी ने किया है. फिल्म की निर्देशक जोया अख्तर, पटकथा लेखक रीमा कागटी व जोया अख्तर, संवाद लेखक विजय मौर्या तथा फिल्म के कलाकार हैं- रणवीर सिंह, आलिया भट्ट, कलकी कोचलीन, सिद्धांत चतुर्वेदी, विजय राज, विजय वर्मा, अमृता सुभाष, शीबा चढ्ढा, नकुल सहदेव, श्रुति चौहाण व अन्य.

लेंटील ब्रैड स्लाइस बर्गर

सामग्री

– मसूर की दाल (1 कप)

–  साबूत उबली

– प्याज (कटी हुई)

–  टमाटर (कटी हुई)

– हरीमिर्चें (2 कटी हुई)

–  ब्रैडस्लाइस (5-6)

– चम्मच तेल(1 बड़ा चम्मच तेल)

बनाने की विधि

– थोड़े से टमाटर (कटे हुए)

– थोड़ा सा प्याज( गोल कटी हुई)

– टोमैटो सौस (2 बड़े चम्मच)

– चीज (2 बड़े चम्मच)

– नमक (स्वादानुसार)

बनाने की विधि

– मसूर की दाल में टमाटर, हरीमिर्च, प्याज और नमक मिलाएं.

– इस की छोटीछोटी टिकियां बनाएं.

– फिर गरम तवे पर थोड़ा सा तेल डाल कर दोनों तरफ से सेंक लें.

– स्लाइस को गोल काट कर एक स्लाइस पर सौस, टमाटर और प्याज की टिक्की व चीज लगा कर दूसरे   स्लाइस से बंद कर गरम तवे पर ग्रिल करें.

– सौस के साथ गरमगरम परोसें.

जुकिनी चिला

सामग्री

– 1 कप बेसन

– 1 कप जुकीनी कसी हुई

– 1 प्याज कटा

– हरीमिर्चें (2 कटी हुई)

–  पनीर (1/2 कप कसा हुआ)

– 1 टमाटर

–  तेल (2 बड़े चम्मच)

– नमक  (स्वादानुसार)

बनाने की विधि

– प्याज, हरी मिर्चें, पनीर, जुकीनी, स्वादानुसार नमक और बेसन को एक बरतन में ले कर पानी के साथ     घोल बनाएं.

– फिर गरम तवे पर बड़े चम्मच से चीला बनाएं.

– हलकी आंच पर दोनों तरफ से तेल लगा कर सेंकें.

– चटनी के साथ गरमगरम परोसें.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें