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भाजपा नेता प्रत्यूषमणि हत्याकांड : खुद बुलाई मौत

36 साल के प्रत्यूषमणि त्रिपाठी उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के कैसरबाग कोतवाली स्थित गगनी शुक्ला मोहल्ले के रहने वाले थे. 8 साल पहले उन की शादी प्रतिभा त्रिपाठी के साथ हुई थी.

उन का एक बेटा और 2 बेटियां हैं. सब से छोटी बेटी 2 महीने की है. प्रत्यूषमणि त्रिपाठी भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के पूर्व प्रदेश मंत्री थे. वह मध्यमवर्गीय परिवार से थे. राजनीतिक कारणों से जमीनी नेताओं के तमाम दुश्मन भी बन जाते हैं.

प्रत्यूषमणि त्रिपाठी के घर से कुछ दूरी पर मौडल हाउस है. वहां रहने वाले एक मुसलिम परिवार से प्रत्यूष की कुछ अनबन हो गई थी. पुलिस के मुताबिक अनबन की वजह यह थी कि प्रत्यूष ने उस परिवार की एक लड़की को फेसबुक पर फ्रैंड रिक्वेस्ट भेजी थी. लड़की ने उन की फ्रैंडशिप कबूल नहीं की, इस बात को ले कर विवाद हुआ. लड़की के परिवार के लोग प्रत्यूष से झगड़ा करने उन के घर आए और लड़ेभिड़े.

कैसरबाग थाने में दोनों तरफ से मुकदमा दर्ज कराया गया. पुलिस ने मामले को रफादफा करने के लिए कोई बड़ा कदम नहीं उठाया. प्रत्यूषमणि त्रिपाठी के लिए यह शर्मनाक बात थी कि उन की पार्टी सत्ता में थी और वह अपनी धमक कायम नहीं कर पा रहे थे.

अगर नेता ही अपने काम नहीं करा पाए तो उस के साथ रहने वाले कार्यकर्ता ज्यादा देर नहीं टिकते. उन को भी लगता है कि जब नेता ही अपना काम नहीं करा पा रहा तो उन का काम क्या कराएगा. विरोधी पक्ष भी पुलिस पर दबाव बना कर प्रत्यूष के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग कर रहा था.

प्रत्यूष ने इसे प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया

प्रत्यूषमणि त्रिपाठी ने थाने से ले कर एसपी औफिस तक दौड़ लगाई लेकिन उन की सुनवाई नहीं हो पा रही थी. उन्हें विरोधी पक्ष से अपने ऊपर हमला किए जाने का डर था. प्रत्यूष ने सोचा कि अगर उन्हें गनर मिल जाए तो सुरक्षा भी हो जाएगी और मोहल्ले में हनक भी बन जाएगी.

गनर मिलने की भी एक प्रक्रिया होती है. स्थानीय थाने की जांच रिपोर्ट के बाद ही आगे की काररवाई चलती है, पर थाना पुलिस ने उन की गनर वाली जांच में आख्या लगाने से मना कर दिया. पुलिस ने कहा कि तुम 6 फुट के हट्टाकट्टा जवान हो, तुम्हें सुरक्षा की क्या जरूरत.

पुलिस की इस बात से प्रत्यूषमणि त्रिपाठी के सामने शर्मनाक हालात बन गए थे. वह समझ नहीं पा रहे थे कि क्या करें. अपनी सिफारिश ले कर वह अपने नेताओं तक भी गए पर किसी ने उन की मदद नहीं की. चारों तरफ से हार कर वह नई योजना बनाने लगे.

3 दिसंबर, 2018 की रात करीब 9 बजे प्रत्यूष ने अपनी पत्नी प्रतिभा त्रिपाठी को बताया कि वह कुछ काम से शहर जा रहे हैं. प्रत्यूष के साथ उन का मित्र आशीष अवस्थी भी था. रात में करीब साढ़े 10 बजे प्रतिभा त्रिपाठी के मोबाइल पर फोन से सूचना दी गई कि प्रत्यूष घायल हैं, उन्हें मैडिकल कालेज ले जाया जा रहा है.

पुलिस को प्रत्यूष के घायल होने की जानकारी मिली तो पुलिस घटनास्थल बादशाहनगर के पास पहुंच गई. पुलिस के पहुंचने पर घायल प्रत्यूष के पास उन की बाइक भी गिरी पड़ी थी. पुलिस ने प्रत्यूष को मैडिकल कालेज पहुंचाया. उन की पत्नी को भी पुलिस ने ही सूचना दी.

भाजपा नेता पर चाकू से हमले की खबर तेजी से पूरे शहर में फैल गई. तमाम कार्यकर्ता मैडिकल कालेज पहुंचने लगे. प्रत्यूष को चाकू का घाव गहरा लगा था, जिस से खून ज्यादा बह गया था. इलाज के दौरान ही प्रत्यूष की मौत हो गई.

प्रशासन पर उठ रहे थे सवाल

प्रत्यूष की मौत होते ही भाजपा कार्यकर्ताओं का गुस्सा मैडिकल कालेज से ले कर मोहल्ले के अंदर तक फैलने लगा. प्रत्यूषमणि की पत्नी प्रतिभा और भाई अशोकमणि ने हत्या का आरोप उन लोगों पर लगाया, जिन से प्रत्यूष का 25 नवंबर को झगड़ा हुआ था. मसला हिंदूमुसलिम का था, ऐसे में प्रशासन की चुनौतियां बढ़ गई थीं.

उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार की कानून व्यवस्था पर सवाल उठने लगे थे. ऐसे में पूरा पुलिस और प्रशासन हाई अलर्ट पर आ गया. एडीजी राजीव कृष्ण, एसएसपी कलानिधि नैथानी, एसपीटीजी हरेंद्र कुमार और लखनऊ के डीएम कौशलराज शर्मा मैडिकल कालेज से ले कर प्रत्यूष के माहेल्ले तक कड़ी निगरानी रखने लगे.

भारतीय जनता पार्टी के तमाम नेता और मंत्री अस्पताल से ले कर घर तक शोक प्रकट करने पहुंचने लगे. इन में डिप्टी सीएम डा. दिनेश शर्मा, मेयर संयुक्ता भाटिया, मंत्री ब्रजेश पाठक, रीता बहुगुणा जोशी सहित तमाम लोग शामिल थे. सभी ने प्रत्यूष के परिवार को दिलासा दी कि उन के साथ न्याय होगा. सभी लोग उन की मदद को तैयार हैं. कुछ लोगों ने परिवार की अपने स्तर से भी मदद का भरोसा दिलाया.

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से प्रत्यूष के परिवार की मदद के लिए 10 लाख रुपए सहायता देने की घोषणा भी कर दी गई. पुलिस ने नामजद लोगों के खिलाफ मुकदमा कायम किया और आननफानन में उस परिवार के सलमान और अदनान नामक 2 युवकों को पकड़ भी लिया.

प्रत्यूष की शवयात्रा के साथ हुजूम उमड़ पड़ा. विरोधी पक्ष के घर तोड़फोड़ न हो, इस से बचने के लिए पुलिस ने बैरीकेडिंग कराई. शवयात्रा के रास्ते में उत्तेजक भीड़ ने कई लोगों पर हमले भी किए.

पुलिस पर अब हत्यारों को पकड़ने का दबाव था. पुलिस ने हत्या वाली जगह का बारीकी से मुआयना किया तो वहां एक जगह सीसीटीवी कैमरा लगा मिला.

पुलिस ने उस कैमरे की फुटेज निकलवाई लेकिन वह साफ नहीं थी. जो बातें प्रत्यूष के घर वाले बता रहे थे, वह घटना से मेल नहीं खा रही थीं. जिन लोगों पर हत्या की आशंका जताई थी. जांच में पता चला कि वह घटना के समय लखनऊ में थे ही नहीं. ऐसे में पुलिस ने घटना के दिन प्रत्यूष के साथ गए उन के दोस्त आशीष अवस्थी से पूछताछ की तो वह सही बात नहीं बता पाया. पुलिस ने प्रत्यूष के मोबाइल की काल डिटेल्स निकलवाई. जिन लोगों से उस की बात हुई, उन के फोन की भी काल डिटेल्स निकलवाई.

पता चला कि दोस्तों के फोन की लोकेशन शहर में प्रत्यूष के आसपास ही थी. जांच के लिए पुलिस ने प्रत्यूष के दोस्तों अनिल कुमार, आशीष अवस्थी, महेंद्र गुप्ता, प्रभात कुमार और अमित अवस्थी को थाने बुला लिया.

जब घटना के समय उन की लोकेशन पूछी तो सभी ने अपनी अलगअलग लोकेशन बताई. जबकि सब की मोबाइल लोकेशन प्रत्यूष के आसपास ही थी. पुलिस यह नहीं समझ पा रही थी कि जब सभी दोस्त साथ थे तो अपनी अलगअलग लोकेशन बता कर वह झूठ क्यों बोल रहे हैं.

पुलिस की शक करने वाली दूसरी बात यह थी कि घटना के बाद ये लोग एकदूसरे से बात भी कर रहे थे. पुलिस ने सभी दोस्तों के फोन नंबरों की काल डिटेल्स उन के सामने रखते हुए पूछा कि जब तुम लोग अलग थे तो लोकेशन एक क्यों आ रही है?

पुलिस को इस बात के और भी सबूत मिले थे, जिस से यह बात सही साबित हो रही थी कि सभी दोस्त आखिरी समय तक प्रत्यूष के साथ थे. सीसीटीवी में जो लोग आतेजाते दिख रहे थे, उन में 2 का हुलिया प्रत्यूष के दोस्त अनिल राणा से मेल खा रहा था.

उस दिन उस ने काले रंग के कपड़े पहने थे. पुलिस पूछताछ में प्रत्यूष के दोस्त टूट गए और उन्होंने सच्चाई पुलिस को बता दी. पता चला कि प्रत्यूष ने गनर लेने के लिए अपने ऊपर हमला अपने ही दोस्तों से कराया था.

दोस्तों ने पुलिस को बताया कि प्रत्यूष को डर था कि उस के विरोधी उसे जान से मार डालेंगे. इस से बचने के लिए वह लिए पुलिस प्रशासन से बारबार अपनी सुरक्षा के लिए गनर की मांग कर रहा था. जबकि पुलिस उसे गनर नहीं दे रही थी. पुलिस का तर्क था कि प्रत्यूष को ऐसा कोई खतरा नहीं है, जिस के लिए उसे गनर दिया जाए.

कोई रास्ता न देख प्रत्यूष ने योजना बनाई कि अगर उस पर कोई जानलेवा हमला हो, जिस से लगे कि उस की जान को खतरा है तो गनर भी मिल जाएगा और उस के विरोधियों पर कड़ी काररवाई भी हो जाएगी. यही सोच कर उस ने अपने ऊपर हमले की योजना बनाई. इस में उस ने अपने दोस्तों को शामिल किया. दोस्त इस के लिए राजी नहीं हो रहे थे पर प्रत्यूष ने दोस्तों को इमोशनल कर के अपने पर हमला करने के लिए तैयार कर लिया.

खुद बुलाई मौत

योजना के मुताबिक प्रत्यूष ने अपने साथियों को बुलाया और खुद पर हमला करने के लिए कहा. हमला करने के लिए दोस्तों ने चाकू खरीदने के साथसाथ मैडिकल स्टोर से दस्ताने भी खरीद लिए.

बादशाहनगर के पास सुनसान जगह पर मौका देख कर उन्होंने प्रत्यूष पर हमला किया. दोस्त पर हमला करना सरल नहीं होता, इसलिए डर कर उन्होंने पहला वार बांह पर किया. इस में कम खून निकला. इस पर प्रत्यूष ने कहा कि वार गहरा नहीं होगा तो पुलिस मामले को हलके में निपटा देगी. वार ऐसा हो जिस से लगे कि जान जा सकती थी.

इस के बाद आशीष राणा ने चाकू से प्रत्यूष के सीने के पास वार किया. इस बार वार तेज था और चाकू सीने के पास करीब 9 इंच तक अंदर घुस गया. दर्द से प्रत्यूष की चीख निकल गई पर उस ने खुद को संयमित कर लिया. प्रत्यूष ने दोस्तों को वहां से जाने के लिए कह दिया और खुद पर हमले की सूचना पुलिस को दे दी.

प्रत्यूष को जब मैडिकल कालेज ले जाया गया तब तक ज्यादा खून बह चुका था. अस्पताल में प्रत्यूष ने अपने साथियों से बात की थी. पर इलाज के दौरान अस्पताल में प्रत्यूष की मौत हो गई. डाक्टरों ने मौत का कारण ज्यादा खून बहना बताया.

पुलिस ने 10 दिसंबर को प्रत्यूष के दोस्तों अनिल राणा, महेंद्र गुप्ता, आशीष अवस्थी, अमित अवस्थी और ऋषि सिंह को हिरासत में ले लिया. सभी ने कहा कि उन से गलती हो गई और प्रत्यूष के बहुत दबाव डालने पर वे मजबूरी में हमला करने को तैयार हुए थे. यही वजह थी कि दोस्तों ने पहला हमला हलके से किया था.

पुलिस को इस बात की जानकारी घटना के 2 दिन बाद ही हो गई थी. मामला सत्ता पक्ष के नेता का था, ऐसे में वह हर कदम फूंकफूंक कर रख रही थी. उसे पता था कि यह बड़ा खुलासा है, इसलिए पक्के सबूतों के साथ यकीन दिलाना होगा.

पुलिस ने अमीनाबाद के उस मैडिकल स्टोर से सीसीटीवी फुटेज भी हासिल कर ली, जहां से दस्ताने खरीदे गए थे. फुटेज में प्रत्यूष का दोस्त महेंद्र दस्ताने खरीदते दिखाई दे रहा था.

जब पुलिस ने पूरी तरह से हर सबूत को पक्का कर लिया, तब हत्याकांड का खुलासा किया. हालांकि इस के बाद भी प्रत्यूष का परिवार यह मानने को तैयार नहीं था कि प्रत्यूष ने खुद पर हमला करवाया, जिस से उस की जान गई.

उधर प्रत्यूष का परिवार घटना की सीबीआई जांच की मांग कर रहा था. पुलिस ने प्रत्यूष पर हमला करने वाले उस के दोस्तों को गैरइरादतन हत्या के आरोप में जेल भेज दिया. लखनऊ के एसएसपी कलानिधि नैथानी ने जिस संयम के साथ घटना की विवेचना की और पूरे मामले को हल किया, वह काबिलेतारीफ है. यह एक ऐसी घटना थी, जिस में वर्ग संघर्ष हो सकता था.

भीड़ के दबाव में पुलिस ने बेकसूर अदनान और सलमान को जेल ही नहीं भेजा बल्कि अपने एक इंसपेक्टर को निलंबित भी कर दिया था. प्रत्यूष का विरोधी परिवार एक सप्ताह तक दहशत में जीता रहा.

पुलिस उस के घर कुर्की का और्डर लगाती रही और विरोधी लोग उन को परेशान करते रहे. जब पुलिस ने घटना में प्रत्यूष के दोस्तों को पकड़ कर हमले की कहानी खोली, तब कहीं जा कर लोगों को चैन आया.

अब प्रत्यूष के दोस्त और उन के परिवार वाले परेशान हैं. दोस्त गैरइरादतन हत्या के आरोप में जेल में हैं. परिवार अपने बच्चों को बचाने के लिए कचहरी और वकीलों के चक्कर लगा रहे हैं. जिस परिवार की सुरक्षा के लिए प्रत्यूष ने यह कदम उठाया, उस परिवार के सिर से प्रत्यूष का साया उठ गया है. पत्नी प्रतिभा को अभी भी इस बात का भरोसा नहीं है कि प्रत्यूष ने ऐसा किया होगा.

हांगझू में होगा ट्वेंटी20 का जलवा

भारतीय ओलिंपिक संघ के महासचिव राजीव मेहता ने जानकारी दी है कि अगले एशियाई खेलों में ट्वेंटी20 क्रिकेट को शामिल कर लिया गया है, मतलब साल 2022 में हांगझू, चीन में होने वाले इन खेलों में एशिया महाद्वीप की क्रिकेट टीमें ट्वेंटी20 क्रिकेट में हिस्सा लेंगी.

आप की जानकारी के लिए बता दें कि इस से पहले क्रिकेट को साल 2010 और साल 2014 में हुए एशियाई खेलों में भी जगह मिली थी लेकिन बाद में इंडोनेशिया में साल 2018 में हुए खेलों में क्रिकेट को हटा दिया गया था.

भारतीय ओलिंपिक संघ ने बताया कि अगले एशियाई खेलों में महिलापुरुष के ट्वेंटी20 फॉर्मेट को शामिल कर लिया गया है और अब भारतीय ओलिंपिक संघ इस सिलसिले में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को चिट्ठी लिखेगा.

अब यह देखना होगा कि भारतीय क्रिकेट टीम इन खेलों में हिस्सा लेगी या नहीं क्योंकि इस पर बीसीसीआई की ओर से स्पष्टीकरण आना बाकी है. वैसे, जब साल 2010 और साल 2014 के एशियाई खेलों में जब क्रिकेट को शामिल किया गया था, तब बीसीसीआई ने बिजी शेड्यूल होने की बात कह कर अपनी टीम इन खेलों में नहीं भेजी थी.

भारत को छोड़ कर श्रीलंका, बंगलादेश और पाकिस्तान की क्रिकेट टीमें इन खेलों में हिस्सा ले चुकी हैं. श्रीलंका और पाकिस्तान ने साल 2014 में क्रमश: पुरुष और महिला वर्ग में गोल्ड मैडल जीते थे, जबकि साल 2010 में बंगलादेश और पाकिस्तान ने क्रमश: पुरुष और महिला वर्ग में बाजी मारी थी.

आज की तारीख में दुनिया में जितने भी देश क्रिकेट खेलते हैं वे सब चाहते हैं कि यह खेल और भी देशों में मशहूर हो और इंटरनेशनल लेवल पर उन की तादाद बढ़े लेकिन जब एशियाई खेलों में इसे शामिल किया जाता है तो इन में शामिल होने वाले दिग्गज देश अपनी वर्ल्ड क्लास टीम वहां भेजने से कतराते हैं, बीसीसीआई ने तो अपनी टीम ही नहीं भेजी थी.

दरअसल, भारत में क्रिकेट का खेल सोने के अंडे देने वाली मुरगी बन चुका है. एक गोल्ड मैडल के लिए अपनी टीम को वहां भेजना उसे घाटे का सौदा लगता है. सरकार भी इस मसले पर कुछ ज्यादा नहीं कर पाती है या अनदेखी कर देती है जबकि दर्शक तो चाहते हैं कि भारतीय टीम एशियाई खेलों में गोल्ड मैडल जीत कर देश का नाम रोशन करे. और वह ऐसा कर भी सकती है. अब तो यही उम्मीद की जाती है कि भारत की क्रिकेट टीम अगले एशियाई खेलों में हिस्सा ले कर रोमांच को और ज्यादा बढ़ा देगी.

टोमैटो सालसा रेसिपी

सामग्री-

– 4 पके टमाटर (कटे हुए)

– हरी धनिया के गुच्‍छे (6 – 8 बारीक कटी)

– प्याज (1/2 कटी हुई)

– 2 हरी मिर्च (बारीक कटी)

– नींबू का रस

– नमक(स्वादानुसार)

– पिसी काली मिर्च

बनाने की विधि

– सबसे पहले प्‍याज को बिना छीले गैस की आंच पर भून लें.

– जब प्‍याज फूट जाए, तब इसे 15 मिनट के लिये रख दें और फिर छील कर महीन काटा लें.

– प्‍याज और अन्‍य सभी सामग्रियों को एक साथ मिक्‍स कर के 10 मिनट के लिये रख दें फ्रिज में रख दें.

– अब आप इसे आराम से टौर्टिला चिप्‍स के साथ सर्व कर सकती हैं.

क्या आप भी हमेशा यंग दिखने की चाहत रखते हैं?

शरीर को चुस्‍त रखने के लिए व्‍यायाम करें, मन को चुस्‍त रखने के लिए ध्‍यान लगाएं और स्‍मार्ट व गुड लुकिंग दिखने के लिए खुद पर ध्‍यान दें. स्‍वयं को हमेशा यंग रखने के लिए कुछ खास टिप्‍स पर विशेष ध्‍यान दें:

एंटी-औक्‍सीडेंट

एंटी-औक्‍सीडेंट से हमारे शरीर की क्षतिग्रस्‍त कोशिकाएं, सही हो जाती है और हमारी त्‍वचा में निखार आ जाता है. आप चाहें तो एंटी-औक्‍सीडेंट युक्‍त दवाईयां या क्रीम का इस्‍तेमाल कर सकते हैं.

धूप से बचें

हमेशा यंग दिखने के लिए त्‍वचा का यंग होना जरूरी है. इसलिए कड़ी धूप में निकलने से बचें. धूप में निकलने से पहले सनस्‍क्रीन लगा लें. इससे चेहरे पर दाग, झुर्रियां आदि दूर हो जाते हैं.

मृत त्‍वचामृत त्‍वचा हटाएं

शरीर मे मृत त्‍वचा को समय-समय पर स्‍क्रब करके निकालते रहें. अपने हाथों, पैरों और चेहरे पर महीने में दो से तीन बार स्‍क्रब करवाएं. इससे त्‍वचा में अंदर से निखार आएगा.

मौश्‍चराइजर

नियमित रूप से नहाने के बाद मौश्‍चराइजर लगाएं. इससे त्‍वचा का रूखापन दूर हो जाएगा और स्‍कीन में ग्‍लो आएगा.

हेयरस्‍टाइल

बालों को बनाने का तरीका लेटेस्‍ट और डीसेंट रखें. इससे आप यंग दिखेगें और आपको खुद में भी यूथ एनर्जी फील होगी.

पानी पिएं

दिन में कम से कम 7 गिलास पानी पिएं. इससे शरीर में डिहाईड्रेशन नहीं होगा और आप ज्‍यादा यंग लगेंगे.

भरपूर नींद लें

कम से कम 7 घंटे की भरपूर नींद लेनी चाहिए. इससे आपके शरीर को स्‍फूर्ति मिलेगी और आप खुद में ताजगी का एहसास पाएंगे.

नियमित व्‍यायाम

हमेशा युवा रहने का एक ही फंडा है – व्‍यायाम. अगर आप नियमित रूप से व्‍यायाम करते है तो आपके शरीर में लचक बनी रहेगी और आप स्‍वस्‍थ रहेगें.

एंटी-एजिंग फूड

अंडे और फिश जैसे फूड, एंटी-एजिंग फूड कहलाते है जिनमें प्रोटीन और विटामिन भरपूर मात्रा में होते हैं. ये आपकी त्‍वचा को नुकसान नहीं पहुंचाते है और उसमें चमक लाते हैं. वैसे आप बेरी, चेरी, टमाटर, लहसुन आदि का सेवन भी कर सकते हैं.

त्‍वचा की देखभाल

यंग दिखने के लिए त्‍वचा की देखभाल करना आवश्‍यक होता है. विटामिन लेने से ये आसानी से संभव होता है. हर दिन कम से कम 20 मिनट के लिए एलोवेरा लगाएं. खीरे के जूस से भी लाभ मिलता है.

लाइफस्‍टाइल बदलें

यंग दिखने के लिए यंगर्स जैसी लाइफस्‍टाइल भी रखें. हमेशा फ्रेश फील करें और खुश रहें.

बालों के लिये चुने सही हेयर ब्रश

आपका हेयर ब्रश आपके बालों को अच्‍छा हेयरस्‍टाइल देकर आपकी पर्सनालिटी में निखार लाता है. आज कल बाजार में कई सारे हेयर ब्रश उपलब्‍ध हैं, जिसका चुनाव आपको अपने बालों के हिसाब से करना चाहिये. हेयर ब्रश काफी रेंज और मटीरियल में आते हैं. आपको ब्रश के ब्रिस्‍टल के बारे में अच्‍छी जानकारी होना जरुरी है. ज्‍यादा जानकारी के लिये आइये पढ़ते हैं बालों के लिये कैसे चुने अच्‍छा हेयर ब्रश.

वेंटिड ब्रश

इस तरह के ब्रश चौड़े मुंह वाले होते हैं, जिन्‍हें आराम से प्रयोग किया जा सकता है. ऐसे ब्रश तब प्रयोग किये जाते हैं जब आपको बाल सुखाने हों. तो अगर आपको बालों में ब्‍लो ड्रायर करना हो तो इस ब्रश का प्रयोग करें.

कुशन वाले ब्रश

बालों के लिये ब्रश खरीदना हो, तो बालों की लंबाई का ध्‍यान रखें. अगर आपके बाल लंबे हैं तो आपके लिये कुशन वाले ब्रश अच्‍छे रहेंगे. इससे आपके बाल कंघी करते वक्‍त ना तो टूटेंगे और ना ही खिचेगें.

गोलाकार ब्रश

यह ब्रश लकड़ी और प्‍लास्‍टिक के हैंडल के साथ आता है, जिसमें गोलाई से काटें लगे होते हैं. अगर आपको बालों में कर्ल चाहिये तो उसके लिये यह अच्‍छा है.

क्‍लासिक स्‍टाइलिंग ब्रश

यह हाफ राउंड ब्रश होते हैं. इनमें पांच, सात या नौं बिस्‍टल की पंक्‍तियां होती हैं. ब्रश का सिरा गोलाई में होता है, जो कि सिर पर हल्‍का सा दबाव देता है. यह ब्रश उनके लिये बिल्‍कुल भी नहीं है जिन्‍हें अपने बालों को स्‍ट्रेट लुक देना है.

रेक्‍टैंगल ब्रश

हर घर में इस तरह का साधारण ब्रश पाया जाता है. अगर आपको अपने बालों को खास डीटेलिंग में झाड़ना है तो यह आपके बड़े काम आ सकता है. इससे गीले बाल आसानी से झाड़े जा सकते हैं

सेब की चटनी

सामग्री:

–  1 किलो सेब (छिले और घिसे हुए)

–  3 चम्‍मच घी

– नमक (स्‍वादानुसार)

– शक्‍कर (500 ग्राम)

– दालचीनी पाउडर (1 चम्‍मच)

– जायफल  (1/2 चम्‍मच)

– नींबू का रस (3 चम्‍मच)

– घिसी अदरक (2 चम्‍मच)

– 4 हरी मिर्च

– हल्‍दी पाउडर (1 चम्‍मच)

चटनी बनाने की विधि

– एक कढाई में घी गरम करें, उसमें अदरक डाल कर कुछ मिनट चलाएं.

– फिर हरी मिर्च डालें और 30 सेकेंड के लिये सौते करें.

– फिर सेब, शक्‍कर, नमक और हल्‍दी पावडर डाल कर अच्‍छी तरह से पकाएं.

– उसके बाद इसमें दालचीनी और जायफल पाइडर डाल कर कुछ मिनट पकाएं.

– अब इसमें नींबू का रस मिलाएं.

– फिर इसे आंच से उतारे और ठंडा करें.

– उसके बाद इसे फ्रिज में रखें और सर्व करें.

अच्छी नींद के लिए इससे आसान उपाय नहीं मिलेगा आपको

खानपान, जीवनशैली, मानसिक स्थिति जैसी जरूरी चीजें नींद के जरूरी कारक होते हैं. इन चीजों में जब गड़बड़ी होती है तो हमारी नींद बुरी तरह से प्रभावित होती है. नींद पूरी ना होने की सूरत में सेहत पर नकारात्मक असर होता है. ऐसे में हम आपको अच्छी नींद लाने की एक बेहतरीन टिप्स देने वाले हैं. अपनी डाइट में बादाम को शामिल कर के आप सुकून की नींद ले सकते हैं.

नींद ना पूरी होने से लोगों को दिल की बीमारी, मोटापा, डायबिटीज जैसी बीमारियों के होने की संभावना अधिक होती है, ऐसे में अपनी डाइट में बादाम को शामिल करना सेहत और नींद के लिए काफी असरदार साबित होगा. ऐसा इस लिए क्योंकि बादाम में भरपूर मात्रा में मैग्निशियम पाया जाता है, जो शरीर की मैग्निशियम की कमी को 19 फीसदी पूरी करता है. भरपूर मात्रा में मैग्निशियम के सेवन से नींद अच्छी आती है, खास कर के इंसोमनिया के पीड़ित लोगों को.

स्टडी में ये भी सामने आया कि बादाम के सेवन से नींद में दखल देने वाला स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल का स्तर भी कम होता है. इसके अलावा आप अच्छी नींद के लिए सोने से पहले गुनगुने पानी से नहा सकते हैं. इससे शरीर को गर्माहट मिलेगी और आपको अच्छी नींद आएगी.

क्रिश्चिन रीति रिवाज से एक होंगे मलाइका और अर्जुन कपूर

टीवी के एक कार्यक्रम में मलाइका अरोड़ा द्वारा अर्जुन कपूर के संग अपने रिश्ते को स्वीकार करने के बाद से इनकी शादी की चर्चाएं शुरू हो चुकी है. सूत्रों की माने तो अर्जुन कपूर और मलाइका अरोड़ा अप्रैल माह में शादी के बंधन में बंधने वाली हैं.

सूत्र दावा कर रहे हैं कि यह शादी हिंदू रीति रिवाज या पंजाबी रीति रिवाज की बजाए क्रिश्चिन रीति रिवाज के साथ होगी. इतना ही नहीं बौलीवुड में चर्चांएं गर्म हैं कि अर्जुन कपूर और मलाइका ने संयुक्त रूप से मुंबई के अंधेरी इलाके के लोखंडवाला में एक आलीशान फ्लैट भी खरीदा है, जिसका इंटीरियर किया जा रहा है. सूत्रों की माने तो अर्जुन कपूर के पास फिलहाल आशुतोष गोवारीकर निर्देशित फिल्म ‘पानीपत’ ही है, जिसकी शूटिंग वह मार्च माह में पूरी कर लेंगे.

“फोटोग्राफ” में दिखेगी सान्या और नवाज की अनोखी जोड़ी !

रितेश बत्रा की फिल्म “फोटोग्राफ” इस महीने के मध्यम में रिलीज होने के लिए तैयार है. फिल्म के ट्रेलर, पोस्टर और अब तक रिलीज हुए कंटेंट ने फिल्म के प्रति दर्शकों की रुचि बढ़ा दी है. तो वहीं प्रशंसक सान्या और नवाज की जोड़ी को पहली बार एक साथ बड़े पर्दे पर देखने के लिए उत्सुक हैं.

“फोटोग्राफ” में नवाजुद्दीन सिद्दीकी और सान्या मल्होत्रा पहली बार एक साथ स्क्रीन स्पेस साझा करते हुए नजर आएंगे. नवाज अपनी पिछली कई फिल्मों में युवा अभिनेत्रियों के साथ नजर आ चुके हैं और अब नवाजुद्दीन अपनी इस आगामी फिल्म में सान्या के साथ प्यार के फूल खिलाने के लिए तैयार हैं.

इस फिल्म में दोनों के किरदार एक दूसरे से काफी अलग है और असल जिंदगी में भी दोनों बहुत अलग हैं. ऐसे में दोनों की इस रोमांचक जोड़ी को एक साथ बड़े पर्दे पर देखना मजेदार अनुभव होगा.

रितेश बत्रा की फिल्म “फोटोग्राफ” में एक संघर्षरत सड़क फोटोग्राफर की कहानी दिखाई जाएगी जो अपनी दादी द्वारा शादी करने के दबाव में है, और इसिलए वह एक शर्मीली अजनबी लड़की को अपनी मंगेतर के रूप में पेश आने के लिए मना लेता है. इस सफर में जाने अनजाने में इस जोड़ी के बीच कनेक्शन विकसित हो जाता है जो दोनों को अप्रत्याशित तरीके से बदल देती है.

मुम्बई की धारावी की पृष्ठभूमि में स्थापित फिल्म में नवाज एक फोटोग्राफर का किरदार निभाते हुए नजर आएंगे और सान्या मल्होत्रा फिल्म में एक अंतर्मुखी कौलेज गर्ल की भूमिका निभाते हुए दिखाई देंगी जो अपनी पढ़ाई में अव्वल है.

पुरस्कार विजेता निर्देशक की इस आगामी फिल्म का प्रतिष्ठित सनडांस फिल्म फेस्टिवल में प्रीमियर किया गया था और हाल ही में बर्लिन फिल्म फेस्टिवल में भी प्रदर्शित की गया था.

रितेश बत्रा द्वारा लिखित और निर्देशित, फोटोग्राफ को अमेजन स्टडियस द्वारा द मैच फैक्ट्री के साथ मिलकर प्रस्तुत किया गया है और यह फिल्म 15 मार्च 2019 को भारत में रिलीज होने के लिए तैयार है.

एयर स्ट्राइक पर ममता ने मोदी से पूछा बड़ा सवाल

14 फरवरी से पहले नरेन्द्र मोदी चुनावी विकेट पर कमजोर दिख रहे थे. विपक्षी पार्टियों की एकजुटता ने उनकी धुकधुकी बढ़ा रखी थी. कांग्रेस महासचिव का पद ग्रहण करके प्रियंका गांधी वाड्रा के सक्रिय राजनीति में पदार्पण ने आसन्न चुनावों में अपनी जीत को लेकर भाजपा खेमे में, और खासतौर पर शाह-मोदी गैंग में खलबलाहट पैदा कर रखी थी. चिन्ता इस बात को लेकर थी कि अब वह कौन सा मुद्दा हो सकता है, कि मोदी को एक बार फिर देश के गौरव, देश के हीरो के रूप में प्रोजेक्ट किया जा सके. भाजपा के पक्ष मेंं जनता का धु्रवीकरण भाजपा की सबसे बड़ी चिन्ता थी. मोदी-राज में लगातार बढ़ती मंहगाई, नोटबंदी के तानाशाही फरमान के कारण निम्न और मध्यम वर्ग की बेहिसाब बढ़ी परेशानियां, 45 साल में सबसे ज्यादा बेरोजगारी-दर, सबसे ज्यादा भुखमरी-कुपोषण से आम जनता का मोदी से मोहभंग हो रहा था. व्यापारी वर्ग जीएसटी से परेशान था. अधिकारी वर्ग आरबीआई से सरकार की टक्कर, राफेल घोटाला, देश की बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई में शीर्ष अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का कलंक और जांच एजेंसियों पर सत्ता का दबाव देख-देश कर खिन्न था. देश भर में किसान-मजदूर अपनी बढ़ती समस्याओं को लेकर आन्दोलनरत था. हिन्दुत्व के नाम पर गुण्डागर्दी, गौ-रक्षा के नाम पर नफरत फैलाने और कत्लो-गारत की खुली छूट से अल्पसंख्यक समुदाय भाजपा से दूरी बना चुका था. छात्रों-युवाओं-किसानों-मजदूरों के आन्दोलनों के दमन तथा विरोध में बोलने वाले बुद्धिजीवियों का गला घोंटने की हरकतें मोदी-सरकार के जनविरोधी चरित्र को नंगा कर चुकी थीं और राम मन्दिर मामले में साम्प्रदायिक जुनून पैदा करने के सारे दांव भी फुस्स पटाखा साबित हो चुके थे. मोदी-शाह के कारनामों के चलते संघ भी उखड़ा-उखड़ा नजर आ रहा था, तो नितिन गडकरी भी गाहे-बगाहे तंज कसने और बातों के बाण छोड़ने से बाज नहीं आ रहे थे. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उग्र तेवरों ने मोदी की नींद उड़ा रखी थी, तो इधर प्रियंका गांधी वाड्रा के प्रचार-कार्यक्रमों से मोदी-शाह घबराये हुए थे. इन तमाम घटनाओं और आरोपों में घिरी मोदी-सरकार के आगे लोकसभा चुनाव में सीटें बचाना मुश्किल प्रतीत हो रहा था कि इसी दौरान 14  फरवरी को पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकी हमला हो गया और इसके बाद के घटनाक्रम ने मोदी-शाह की चुनावी चिन्ताओं को लगभग दूर कर दिया. कहना गलत न होगा कि 14 फरवरी से लेकर 1 मार्च तक के घटनाक्रम से लोकसभा चुनाव में अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए मोदी के हाथ तुरुप का पत्ता लग गया है, मगर साथ ही यह डर भी बना हुआ है कि कहीं ममता बनर्जी की वजह से यह पत्ता उनके हाथ से फिसल न जाये.

पुलवामा हमले में देश ने 40 सीआरपीएफ जवानों को खो दिया. इस घटना के बाद से पूरा देश सकते में है. शहीद जवानों के परिजनों को सूझ नहीं रहा है कि वे अपने जांबाज बेटे, पति या भाई की शहादत पर गर्व करें या सरकारी लापरवाही पर गुस्सा व्यक्त करें. सवाल उठायें और कारण पूछें या पाकिस्तान पर मोदी-सरकार की एयर स्ट्राइक से संतोष कर लें. एक आतंकी बहुत आराम से अपनी गाड़ी में विस्फोटक भर कर पुलवामा पहुंचा और उसने सीआरपीएफ के काफिले के साथ चलते हुए अपनी गाड़ी जवानों से भरी एक बस से टकरा दी. जहां आप शराब की एक बोतल गाड़ी में लेकर नहीं जा सकते, पुलिस आपको पकड़ लेती है, वहां पुलवामा का ही एक फरार व्यक्ति गाड़ी में सैकड़ों किलो विस्फोटक लेकर सीआरपीएफ के काफिले के साथ रवाना हो गया, तो जांच एजेंसियों, पुलिस और खुफिया एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह क्यों न लगे?

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तो सीधे पूछ लिया कि पुलवामा हमला ऐन चुनाव से पहले क्यों हुआ? पुलवामा में जवानों पर हमले के बाद बदले की भावना से पूरा देश आन्दोलित हो उठा. जवानों की शहादत ने आक्रोश पैदा कर दिया था. देशप्रेम का जज्बा उबाल मारने लगा और पाकिस्तान को दोटूक सबक सिखाने के लिए निगाहें प्रधानमंत्री मोदी पर टिक गयी. विपक्षी पार्टियों ने भी ऐलान किया कि देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने और जवानों की शहादत का बदला लेने के लिए सारा विपक्ष मोदी के पीछे एकजुट है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि देश मोदी के साथ है, पुलवामा पर हमला करने वालों को मोदी सबक सिखायें. मोदी ने भी देश का नायक होने का फर्ज निभाया और रातोंरात पाकिस्तान पर एयर स्ट्राइक कर दी. इस एयर स्ट्राइक में जैश के ठिकानों पर बम वर्षा करके तीन सौ या साढ़े तीन सौ (गिनती न तो पक्की है और न ही विदेश मंत्रालय की प्रेस कॉन्फ्रेस में मारे गये आतंकियों का कोई आंकड़ा जारी किया गया) जैश आतंकियों का पूरी तरह सफाया कर दिया गया. इस एयर स्ट्राइक के बाद हमारा उत्साह जबरदस्त था. बदला पूरा हुआ और फिजा में ‘मोदी है तो मुमकिन है’ जैसे नारे गूंज उठे. जज्बातों की आग में मोदी ने भी खूब घी डाला –  ‘सौगन्ध मुझे इस मिट्टी की, मैं देश नहीं झुकने दूंगा, मैं देश नहीं रुकने दूंगा..’. राजस्थान के चुरु में चुनावी रैली के दौरान वे बोले – ‘मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि देश सुरक्षित हाथों में है…’. इस तरह मोदी हीरो बने, संघ भी खुश हुआ और भंवर में फंसी भाजपा की चुनावी नय्या को भी अब किनारा नजर आने लगा है. इस एयर स्ट्राइक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की पहली सार्वजनिक प्रतिक्रिया एक ट्वीट थी, जिसमें उन्होंने भारतीय वायुसेना के पायलटों को सलाम किया. मगर चिंता इसके बाद शुरू होती है. मोदी की बराबरी करने और पुलवामा से पहले वाले मोमेन्टम को हासिल करने में अब विपक्ष को काफी संघर्ष करना होगा. हालांकि इस एयर स्ट्राइक को लेकर तृणमूल कांग्रेस की मुखिया ममता बनर्जी के सवालों ने जहां विपक्ष को थोड़ा सहारा दिया है, वहीं उनके सवालों से अब मोदी की पेशानी पर बल पड़ने लगे हैं.

ममता बंगाल की शेरनी हैं मगर वेवजह दहाड़ती नहीं हैं. वे दहाड़ती हैं तो उसके पीछे कोई गहरी वजह होती है. ऐसे नाजुक वक्त में जो बात राहुल गांधी से लेकर विपक्ष का कोई नेता नहीं पूछ सका (मन में होने पर भी नहीं पूछ सका), वह ममता ने खुल्लम-खुल्ला पूछ लिया. हक के साथ पूछ लिया और जनता अब प्रधानमंत्री मोदी से उम्मीद कर रही है कि ममता को उनके सवालों के जवाब वे उसी दृढ़ता और स्पष्टता से दें, जैसी दृढ़ता और स्पष्टता उन्होंने पुलवामा के शहीदों को न्याय देने में दिखायी है!

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मोदी सरकार से भारतीय वायुसेना द्वारा पाकिस्तान में की गयी एयर स्ट्राइक को लेकर सुबूत मांग लिया है. उन्होंने मोदी से सेना के इस अभियान की जानकारी साझा करने के लिए कहा है. उन्होंने कहा है कि इस आॅपरेशन में कितने चरमपंथी मारे गये हैं इस बात का कोई तो प्रमाण सामने आना चाहिए. ममता ने कहा है कि पाकिस्तान पर एयर स्ट्राइक के बाद प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों की कोई सर्वदलीय बैठक क्यों नहीं बुलायी? इस पूरे घटनाक्रम से विपक्ष को दूर क्यों रखा गया? उन्होंने यह कहते हुए सरकार से औपरेशन की जानकारी साझा करने के लिए कहा है.

ममता की मांग जायज है. देश की जनता जिसने अपने 40 जवानों की शहादत को देखा है, भीगी आंखों से उन्हें विदायी दी है, वह जनता उन तीन सौ चरमपंथियों के शवों को भी देखना चाहती है. तीन सौ न सही, अगर चार आतंकियों के शव ही दिख जाएं तो दिल को सुकून मिल जाए कि हमारे 40 जवानों की शहादत का बदला ले लिया गया. यह मांग आखिर क्यों उठ रही है? ममता बनर्जी ने एयर स्ट्राइक और आतंकियों के मारे जाने का सबूत क्यों मांगा है, क्योंकि पाकिस्तान और अन्तरराष्ट्रीय मीडिया इस बात से साफ इन्कार कर रहा है कि भारत के एयर स्ट्राइक में कोई चरमपंथीं मारा गया है. गौरतलब है कि पुलवामा में सीआरपीएफ जवानों पर हमले की जिम्मेदारी मसूद अजहर के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी, जिसकी इस घिनौनी करतूत का जवाब देने के लिए ही 26  फरवरी की देर रात भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तानी सीमा में घुसकर जैश के ठिकानों को नेस्तनाबूत किया था. 27 फरवरी को देश भर के अखबार और चैनल इस खबर से रंगे हुए थे कि भारत ने पुलवामा अटैक का बदला ले लिया और जैश के ठिकानों को नेस्तनाबूत करके तीन सौ आतंकियों को मौत की नींद सुला दिया. इस एयर स्ट्राइक के बाद देश में तमाम राजनीतिक दलों और देश की जनता ने भारतीय वायुसेना के पराक्रम को सलाम किया था. लेकिन जब विदेश मंत्रालय ने अपनी आधिकारिक प्रेस वार्ता की तो उसमें चरमपंथियों की मौत का कोई आंकड़ा नहीं दिया गया. मंत्रालय की तरफ से ये जरूर कहा गया कि जैश के कैम्प पर जो एयर स्ट्राइक की गयी है, उसमें आतंकी समूह के कमांडरों समेत बड़ी तादाद में आतंकियों को मारा गया है.

जब विदेश मंत्रालय या भारतीय सेना की ओर से मारे गये आतंकियों की संख्या के बारे में कोई बात ही साझा नहीं की गयी तो फिर तीन सौ या साढ़े तीन सौ आतंकियों के मारे जाने की खबर एयर स्ट्राइक के ठीक बाद मीडिया में क्यों आयी? कैसे आयी?  किसके हवाले से आयी? आखिर आतंकियों के शवों की गिनती कब हुई? उनकी यह तादात कैसे  पता चली? अगर यह संख्या ठीक है तो उन तीन-साढ़े तीन सौ शवों का क्या हुआ? उन्हें कौन ले गया? उनका अन्तिम संस्कार क्या पाकिस्तानी सरकार ने किया, जो यह बात मानने को ही तैयार नहीं है कि उनकी धरती पर कोई आतंकी मारा गया है? इस बात की पड़ताल और इन तमाम सवालों के जवाब जरूरी हैं. इस एयर स्ट्राइक और मारे गये आतंकियों की संख्या को लेकर अगर तृणमूल कांग्रेस की मुखिया ममता बनर्जी मोदी सरकार से सवाल कर रही हैं, तो यह माना जाना चाहिए कि उनका यह सवाल देश की एक अरब तैंतीस करोड़ लोगों का सवाल है.

ममता बनर्जी कहती हैं, ‘विपक्ष होने के नाते हम औपरेशन और एयर स्ट्राइक की पूरी जानकारी चाहते हैं. सरकार बताए कि कहां बम गिराये गये, कितने लोग उसमें मारे गये?’ उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए कहा, ‘मैं न्यूयौर्क टाइम्स पढ़ रही थी और उसमें लिखा था कि इस औपरेशन में कोई नहीं मारा गया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में सिर्फ एक मौत की बात कही गयी है. इसलिए हम इसकी पूरी जानकारी चाहते हैं.’

ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि वह देश के सुरक्षाबलों के साथ हैं. बात अगर राष्ट्रीय सुरक्षा की हो तो हम राष्ट्र के साथ हैं, लेकिन राजनीतिक विवशता के लिए हम युद्ध नहीं चाहते हैं. चुनाव जीतने के लिए किसी युद्ध का हम समर्थन नहीं करते हैं, हम शान्ति चाहते हैं. ममता ने साफ तौर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर चुनाव से पहले जवानों के खून पर राजनीति करने का आरोप लगाया है और सवाल उठाया है कि जवानों के साथ ऐसा कोई कैसे कर सकता है? उन्होंने यह भी कहा कि एयर स्ट्राइक के बाद पड़ोसी देश के साथ युद्ध जैसे हालात पैदा होने के बाद भी मोदी ने विपक्ष की कोई सर्वदलीय बैठक अब तक क्यों नहीं बुलायी?

दूसरी बात यह है कि तीन या साढ़े तीन सौ आतंकियों का सफाया अगर हुआ है तो यह कारनामा हमारी वायुसेना के जांबाजों ने किया है, इसका पूरा श्रेय उन्हें जाता है, मगर इसके लिए मोदी-सरकार सिर्फ अपनी पीठ थपथपा रही है. यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि आने वाले चंद दिनों में लोकसभा चुनाव में प्रचार कार्यक्रम अपने चरम पर होगा, तो कहीं ऐसा न हो कि जो जांबाजी देश की सेना ने दिखायी है, उसको कोई एक राजनीतिक पार्टी भुनाने में जुट जाये.

क्या फौसिस्टवादियों की राह पर हैं मोदी

मुश्किल वक्त में युद्धोन्माद भड़काना फौसिस्टों का पुराना और आजमाया हुआ नुस्खा है. अनेक लोग ऐसा अन्देशा प्रकट कर रहे हैं कि चुनाव के पहले युद्धोन्माद पैदा करने की कोशिश मोदी सरकार और संघ परिवार का आखिरी हथकण्डा हो सकता है. इस घटना के तुरन्त बाद इसे चुनाव में भुनाने की कोशिश होगी और मोदी-सरकार की नाकामी और देश की बुनियादी समस्याएं इसके नीचे दफन हो जाएंगी. हैरानी की बात है कि पुलवामा हमले में चालीस जवानों की शहादत की खबर आने के बाद भी मोदी अपने चुनावी रैलियों और शूटिंग कार्यक्रमों में लगे रहे. सीमा पर तनाव पैदा होने, बम वर्षा होने, विमानों के ध्वस्त होने और एयरफोर्स के वीर पायलटों की शहादत के बीच भी प्रधानमंत्री कहीं उद्घाटन, कहीं भाषण तो कहीं चुनावी रैलियां करते ही रहे. पूरा देश जब शोक में था, हर आंख अपने शहीदों को तिरंगें में लिपटा देख नम थी, वहीं भाजपाईयों के चेहरों पर शोक का नामोनिशान नहीं था, कईयों के हंसते चेहरे तो मीडिया के कैमरों में उस वक्त बंद हुए जब वे जवानों के ताबूतों के पास मौजूद थे. पुलवामा में जवानों की शहादत का बदला लेने के लिए हुई एयर स्ट्राइक निश्चित तौर पर वायु सेना और जवानों का एक बहुत बड़ा काम है, और  इसका श्रेय राजनीतिक नेतृत्व को जाता है, मगर इस वक्त यह ध्यान देने वाली बात है कि देश में लोकसभा चुनाव होने हैं और इस वक्त में ऐसी घटना का होना निश्चित तौर पर मोदी के पक्ष में बेहतरी करता है. इसका पूरा फायदा भाजपा को मिलेगा इसमें कोई शक नहीं है. यह घटना भाजपा के लिए संजीवनी बूटी की तरह है. भाजपा के प्रचार तन्त्र की ओर से यह सब ‘एक के बाद एक उपलब्धि’ के तौर पर सामने लाया जाएगा. हालांकि ममता के सवालों ने इस मंशा में थोड़ा अड़ंगा जरूर डाल दिया है और आने वाले समय में कोई भी घटना पूरा परिदृश्य बदल सकती है.

चुनाव के दौरान युद्ध से किसको फायदा

वर्ष 1999 में आईसी 814 के अपहरण के बाद से दो दशकों के लम्बे अंतराल में संसद पर हमला, मुम्बई में आतंकी हमले, पठानकोट एयर बेस पर हमले, उरी कैम्प और सीआरपीएफ के काफिले पर हमले कुछेक उदाहरण हैं, जिसने पाकिस्तान के खिलाफ लोगों के गुस्से को भड़काया और राष्ट्रवाद की भावना को मजबूत किया. इसका नेतृत्व एक पार्टी ने किया, जिसने देश के ज्यादातर हिस्सों में दूसरे मुद्दों को पीछे कर दिया. मगर हालिया एयर स्ट्राइक से मोदी को चुनावी जंग में भारी लाभ मिलेगा, यह कहना अभी जल्दबाजी होगा. क्योंकि यह भी एक सच है कि कारगिल में जीत के बावजूद अटल बिहारी वाजपेयी को अपनी पार्टी की टैली सुधारने में कोई मदद नहीं मिली. पार्टी 1999 में 182 पर रुक गयी. वास्तव में उत्तर प्रदेश में भाजपा की टैली 1998 में 57 से गिरकर 1999 में 29 पर आ गयी थी और वोट शेयर में करीब 9 फीसदी की गिरावट हुई थी. महत्वपूर्ण बात ये थी कि यह नुकसान भाजपा विरोधी पार्टियों की वजह से नहीं हुआ था, क्योंकि दोनों ही चुनावों में भाजपा, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच चतुष्कोणीय मुकाबला हुआ था. बिना गठबंधन के ये पार्टियां चुनाव मैदान में उतरी थीं. मगर अबकी बार मैदान में गठबंधन सरकारें उतर रही हैं. इसके अलावा अब मोदी पर एक चुनौती यह भी बनी रहेगी कि देश के किसी कोने में कोई आतंकी हमला न हो, खासतौर पर पूरी चुनावी प्रक्रिया के दौरान क्योंकि फिर यह उनकी सरकार के लिए बेहद शर्म की बात होगी कि इतने बड़े एयर स्ट्राइक और इतने आतंकियों को मारने के बाद भी वे आतंकवाद पर रत्ती भर काबू नहीं पा सके. उन्हें इस औपरेशन से हुए फायदे भी बताने होंगे और उन्हें आगे ले जाना होगा, ताकि अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में भारत की स्थिति मजबूत हो सके. अगर इन तमाम मोर्चों पर मोदी सफल होते हैं और विपक्ष एकजुट होने और जवाबी रणनीति बनाने में विफल रहता है, तो मोदी इतिहास में अपना नाम दर्ज कराने में सफल होंगे कि देश की सुरक्षा को आंच आने की स्थिति में भारत के पास जवाब देने की क्षमता और राजनीतिक इच्छाशक्ति दोनों है.

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