Download App

पूजा ढांडा ने डेन को लियो इंटरनेशनल कुश्ती प्रतियोगिता में जीता गोल्ड मेडल

शुक्रवार, 1 मार्च को भारत की पूजा ढांडा बुल्गारिया में चल रही डेन को लियो इंटरनेशनल 2019  कुश्ती प्रतियोगिता में  गोल्ड मैडल जीत कर भारतीय खेल प्रेमियों को खुश होने का एक और मौका दिया. उन्होंने राउंड-रौबिन मुकाबलों में बेहतरीन प्रदर्शन के बाद यह मेडल जीता है.

पूजा ढांडा 59 किलोग्राम भारवर्ग में गोल्ड मैडल जीतने में कामयाब रहीं. इस के अलावा भारत की तरफ से ओलिंपिक खेलों में ब्रौन्ज़ मैडल जीत चुकी पहलवान साक्षी मलिक ने गुरुवार, 28 फरवरी को मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन फिनलैंड की महिला पहलवान पेत्रा ओली को हरा कर महिलाओं के 65 किलोग्राम भारवर्ग में फाइनल में जगह बनाई थी.

उन्होंने पेत्रा ओली को सेमीफाइनल मुकाबले में 4-1 से करारी शिकस्त दी थी. लेकिन गोल्ड मैडल के फाइनल मुकाबले में साक्षी मालिक को 8-3 से वह मुकाबला खोना पड़ा. वे शुक्रवार, 1 मार्च को फाइनल मुकाबले में स्वीडन की हेना योहानसन से हार गई और उन्हें सिल्वर मैडल से ही संतोष करना पड़ा.

जीरा बिस्कुट रेसिपी

 सामग्री:

– बटर(75 ग्राम)

– चीनी पाउडर (1 चम्मच)

– तेल (100 ग्राम)

– मैदा (200 ग्राम)

– बेकिंग सोडा (1/2 चम्मच)

– बेकिंग पाउडर (1 चम्मच)

– नमक (स्वादानुशार)

– जीरा(1 चम्मच)

– दूध(150 ग्राम)

जीरा बिस्कुट बनाने की विधी:-

– सबसे पहले एक कटोरे लें और उसमे बटर और चीनी को डाल दें.

-फिर उसे 2 मिनट तक अच्छे से मिलायें

– फिर चम्मच की मदद से सबको इक्कठा कर लें.

– फिर उसमे मैदा, बेकिंग पाउडर, बेकिंग सोडा, नमक और जीरा डालकर दें.

– फिर उसे अच्छे से मिलायें.

–  उसमे थोड़ा थोड़ा दूध डालकर उसे गूंथें.

– अब इसे 8-10 मिनट के लिए ढक कर छोड़ दें.

– 10 मिनट बाद आटे को एक बार और गूंथ लें और उसका एक छोटा लोई काट लें.

– फिर उसपे थोड़ा सा सूखा आटा लगा कर उसे 1/2 इंच मोटा रोटी बेलें.

– फिर उसे बिस्कुट के साइज का काट लें.

– फिर उसे चाकू की मदद से निकल ले और उसे प्लेट में रख दें.

– फिर उसे 180 डिग्री सेल्सियस पे 15 मिनट तक पकायें.

– फिर उसे निकाल लें और ठंढा होने के बाद उसे प्लेट में निकाल लें.

– अब बिस्कुट बनकर तैयार है.

ये पांच फायदे जो केवल एक्सरसाइज करने से होते हैं

एक्सरसाइज बौडी फिटनेस के लिए बेहद जरूरी है. इससे हम फिजिकली फिट तो रहते ही हैं साथ में मेंटल हेल्थ के लिए भी ये काफी अहम होता है. एक उम्र के पड़ाव के बाद लोगों में याद्दाश्त की शिकायत आने लगती है. बढ़ती उम्र के साथ लोगों की मानसिक सेहत भी कमजोर होती है. ऐसे में एक्सरसाइज बेहद जरूरी हो जाता है. इससे दिमाग पर काफी अच्छा असर होता है. अगर आप अच्छी सेहत और तनाव से दूर रहना चाहते हैं तो आज से ही एक्सरसाइज शुरू कर दें.

इस खबर में हम आपको एक्सरसाइज से होने वाले फायदों के बारे में बताएंगे.

अच्छी होती है एकाग्रता

एक स्टडी की माने तो जो लोग दिन में कम से कम 20 मिनट एक्सरसाइज करते हैं उनकी मानसिक सेहत अन्य लोगों के मुकाबले बेहतर होती है. दिमाग की एकाग्रता के लिए एक्सरसाइज जरूर करें.

आपको बनाए स्मार्ट

एक रिसर्च की माने तो एक्सरसाइज से ब्रेन डिराइव्ड न्यूरोट्रोफिक फैक्टर (BDNF) प्रोटीन दिमाग में निकलता है. प्रोटीन दिमाग की नई कोशिकाओं को बनाने में अहम योगदान देते हैं. इससे याद करने की क्षमता भी बढ़ती है.

मूड होता है अच्छा

किसी भी तरह के एक्सरसाइज के करने से मूड अच्छा रहता है. एक्सरसाइज करने से दिमाग में एंडोर्फिन हार्मोन निकलता है. इससे आपको फील गुड होता है.

अच्छी रहती है याद्दाश्त

कई स्टडीज में ये बात साफी हुई है कि एक्सरसाइज से याद्दाश्त पर सकारात्मक असर होता है. याददाश्त को तेज करने में कार्डियो या एरोबिक एक्सरसाइज सबसे अहम हैं.

दूर होता है तनाव

रोज एक्सरसाइज करने से आप तनाव से दूर रहते हैं. जब भी आपको लगे कि आप तनाव में हैं, एक्सरसाइज करें. आपको राहत मिलेगी.

वजन कम करने के लिए पिएं ये खास ड्रिंक

सुबह जागते ही आप क्या खाते पीते हैं इसका सीधा असर आपकी सेहत पर होता है. आमतौर पर लोग सुबह जागते ही चाय या कौफी पीने के आधी होते हैं. सेहत के लिए ये आदत काफी नुकसानदायक होती है. चाय या कौफी में पाए जाने वाले तत्व सेहत के लिए काफी हानिकारक होते हैं.

अच्छी सेहत चाहिए तो सुबह जागते ही पानी पीने की आदत डाल लें. ये पेट के लिए काफी लाभकारी होता है. इस खबर में हम आपको एक ऐसे ड्रिंक की जाकनकारी देने वाले हैं जिसका नियमित रूप से सेवन आपकी सेहत के लिए काफी लाभकारी होता है.

रात में आप सोने से पहले पानी पीते हैं और फिर सीधे जाग कर. इस बीच एक लंबा वक्त बीत जाता है. इस दौरान हमारे शरीर को पानी की जरूरत होती है पर नींद में हम पी नहीं पाते. ऐसे में सुबह जाग कर कुछ ऐसा पीने की जरूरत होती है जो इस दौरान हुई कमियों को पूरी करे.ऐसे में पानी में नींबू और अदरक का इस्तेमाल पानी को बेहद खास बना देता है. इससे पानी की पौष्टिकता अधिक हो जाती है.

इसके सेवन से कब्ज, अपच जैसी समस्याएं खत्म हो जाती है. इसके अलावा इसे पीने से इम्युनिटी सिस्टम मजबूत होता है और लीवर की कार्यक्षमता भी बढ़ जाती है. आप इस ड्रिंक को घर पर भी बना सकते हैं.

इसको बनाने के लिए एक ग्लास पानी में 2 चम्मच नींबू का रस  डालें. अब इसमें कूटी हुई अदरक मिलाएं और मिश्रण को अच्छे से हिलाकर मिलाएं. इस ड्रिंक को रोजाना सुबह उठते ही पिएं. इससे शरीर की बहुत सी परेशानियां खत्म होंगी और आपका वजन कम होगा और आप हेल्दी रहेंगे.

वेज सैंडविच  रेसिपी

सामग्री

– ब्रेड(2)

– बेसन(100 ग्राम)

– जीरा(1/2 चम्मच)

– लाल मिर्च पाउडर(1/2 चम्मच)

– हल्दी पाउडर(1/2 चम्मच)

– नमक (स्वादानुशार)

– पानी(1/2 कप)

– टमाटर(1/2 कप)

– प्याज(1/2 कप)

– हरी मिर्च(2)

– धनिया पत्ता(1/2 कप)

– तेल(2 चम्मच)

बनाने की विधि:

– सबसे पहले एक बड़ा कटोरे में बेसन लें.

– फिर उसमे जीरा, लाल मिर्च पाउडर, हल्दी पाउडर, और थोड़ा सा नमक डाल देंगे.

– और उसे अच्छे से मिला दें.

– फिर उसे थोड़ा सा पानी डालकर उसका घोल बना लें.

– उसमे टमाटर, प्याज, हरी मिर्च और धनिया के पत्ते को डाल दें और उसे मिला दें.

– अब पैन को गरम होने के लिए रख दें और ब्रेड को दोनों तरफ से घोल में डुबो दें.

– फिर पैन पे थोड़ा सा ताल डालकर उसे फैला दें और ब्रेड को डाल दें.

– उसे 2 मिनट तक पकने दें फिर ऊपर से थोड़ा सा तेल डाल दें और उसे पलट दें.

– दोनों तरफ से अच्छे से पका लें और उसे किसी प्लेट में निकाल लें.

– और हमारी ब्रेड सैंडविच बनकर तैयार हो गयी है.

लुका छुपी : समसामायिक मुद्दे पर सतही फिल्म

रेटिंग : दो स्टार

‘‘लिव इन रिलेशनशिप’’ की आड़ में विवादास्पद ‘‘लव जेहाद’’ के मुद्दे पर कटाक्ष करने वाली रोमांटिक कौमेडी फिल्म ‘‘लुका छुपी’’ पूर्णतः निराश करने वाली फिल्म है. सामाजिक स्वीकृत रिश्तों व धार्मिक कट्टरता पर धार्मिक अनुष्ठानों पर हास्य व्यंगात्मक कटाक्ष करने वाली यह फिल्म कमजोर पटकथा व निर्देशन के चलते पूरी तरह से बिखरी व अति सतही फिल्म बनकर रह गयी है. हास्य के नाम पर फिल्म में अस्वाभाविक व अविश्वसनीय दृश्यों की भरमार है.

Kartik-Aaryan-and-Kriti-Sanon-21

फिल्म की कहानी उत्तर प्रदेश के छोटे शहर मथुरा से शुरू होती है. जहां विनोद उर्फ गुड्डू शुक्ला (कार्तिक आर्यन) अपने पिता व दो बड़े भाईयों के साथ रहता है. गुड्डू के पिता शुक्लाजी (अतुल श्रीवास्तव) की साड़ियों की दुकान है, जहां गुड्डू के दोनों बड़े भाई बैठते हैं. जबकि गुड्डू स्वयं एक स्थानीय केबल चैनल का टीवी रिपोर्टर है. उसका दोस्त अब्बास (अपारशक्ति खुराना) इसी चैनल में कैमरामैन हैं. जबकि मथुरा शहर के पूर्व सांसद और संस्कृति रक्षा मंच के नेता विष्णु प्रसाद त्रिवेदी (विनय पाठक) ने गुंडो की फौज पाल रखी है. विष्णु प्रसाद त्रिवेदी शहर में लिव इन रिलेशनशिप के खिलाफ मुहीम चलाते हुए अपने गुंडो के मार्फत प्रेमी जोड़ा को पकड़कर उनके मुंह पर कालिख पोतकर शहर में घुमवाते हैं. त्रिवेदी की संस्था ‘‘संस्कृति रक्षा मंच’’तो अभिनेता नाजिम खान के ‘लिव इन रिलेशनशिप में रहने का विरोध कर रहे हैं. त्रिवेदी की इकलौती बेटी रश्मी त्रिवेदी (कृति सैनन) दिल्ली से मास कम्यूनीकेशन की पढ़ाई कर मथुरा आती है, तो त्रिवेदी अपने प्रयासो से पांडे के इसी केबल चैनल में गुड्डू के साथ रिपोर्टर बनवा देते हैं. धीरे धीरे दोनों में प्यार हो जाता है.

kartik aryan

गुड्डू का मानना है कि यदि आप प्यार में हैं, तो प्यार को मजबूती प्रदान करने के लिए शादी क्यों न कर ली जाए? जबकि रश्मी का मानना है कि भले प्यार हो, पर शादी से पहले लिव इन में रहकर प्रेमी को समझना चाहिए. मगर रश्मी के पिता ने तो लिव इन के खिलाफ कहर बरपा रखा है. इसलिए अब्बास की सलाह पर रश्मी और गुड्डू चैनल के लिए एक स्टोरी करने के बहाने ग्वालियर जाते हैं, जहां वह एक किराए के मकान में लिव इन रिलेशनशिप में रहते हैं, मगर मोहल्ले के लोगों को बताते हैं कि वह दोनों शादीशुदा हैं. पर गुड्डू के भाई का साला बाबूलाल (पंकज त्रिपाठी) ग्वालियार आता है और वह गुड्डू के बारे में जानकर मथुरा से गुड्डू के पूरे परिवार को ले आता है. फिर वह सपरिवार मथुरा पहुंचते हैं.

मथुरा में गुड्डू के माता पिता रश्मी के पिता त्रिवेदी से मिलते हैं और अंत में त्रिवेदी जी अपने सम्मान के लिए एक छोटा सा समारोह कर चैनल के माध्यम से सूचना देते हैं कि उनकी बेटी की शादी गुड्डू से हो गयी. इधर रश्मी उदास रहती है कि गुड्डू के माता पिता उसे इज्जत दे रहे हैं और वह उन्हें धोखा दे रही है. इसलिए अब वह व गुड्डू दोनों शादी करना चाहते हैं. अब्बास की सलाह पर जब भी परिवार से छिपकर गुड्डू व रश्मी शादी करने मंदिर पहुंचते हैं, मामला बिगड़ जाता है. अंततः वह दोनों अग्रवाल सामूहिक विवाह में शादी करने पहुंचते हैं, जहां त्रिवेदी के पहुंचने से सच सामने आ जाता है. पर वहीं पर दोनों की शादी हो जाती है. पर उससे पहले गुड्डू, विष्णु प्रसाद त्रिवेदी को लंबा चौड़ा भाषण सुनाता है जो कि वर्तमान सरकार को फायदा पहुंचाने वाला राजनीतिक बयानबाजी के अलावा कुछ नहीं.

Kartik-Aaryan-and-Kriti-Sanon-21

कैमरामैन से निर्देशक बने लक्ष्मण उतेकर ने अपनी फिल्म के लिए एक बेहतरीन विषय उठाया, मगर इसे वह सिनेमा के परदे पर सही ढंग से उतारने में विफल रहे. यदि फिल्म की पटकथा पर ध्यान दिया गया होता, तो यह एक तेज तर्रार हास्यपूर्ण बेहतर फिल्म बन सकती थी. फिल्म में गुड्डू व रश्मी के बीच कुछ सुंदर सेंसुअल दृश्य भी हैं. पर कथानक व पटकथा लेखन के स्तर पर लेखक व निर्देशक इस कदर भटक गए कि मूल विषय पर ध्यान केंद्रित करने की बजाय पड़ोसियों की चुहुलबाजी, प्रपंच आदि भर दिया, जिसके चलते एक गंभीर विषय महज लोगों के शोरगुल व ठहाकों के बीच गुम होकर रह गया. पंकज त्रिपाठी का बाबूलाल का किरदार सही रखा गया, मगर महज हास्य के लिए बाबूलाल को कुछ ऐसे संवाद दे दिए गए, जिससे फिल्म बहुत ही सस्ती व घटिया स्तर की बन कर रह गयी.

जहां तक अभिनय का सवाल है, तो बाबूलाल के किरदार में पंकज त्रिपाठी ने अपनी तरफ से  सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास किया, मगर लेखक की तरफ से उन्हें दिए गए संवादों ने सारा बेड़ा गर्क कर दिया. अब्बास के किरदार में अपारशक्ति खुराना जरुर अपने अभिनय की छाप छोड़ने में कामयाब हुए हैं. कार्तिक आर्यन व कृति सैनन कुछ दृश्यों में जरुर अच्छे लगते हैं, मगर पूरी फिल्म के परिप्रेक्ष्य में निराशा होती है.

Kartik-Aaryan-and-Kriti-Sanon-21

दो घंटे छह मिनट की अवधि वाली फिल्म ‘‘लुका छुपी’’ का निर्माण दिनेश वीजन ने ‘मैडौक फिल्मस’’ के बैनर तले किया है. फिल्म के निर्देशक लक्ष्मण उतेकर, लेखक रोहण शंकर, संगीतकार तनिष्क बागची, व्हाइट नौयजव अभिजीत वघाणी, कैमरामैन मिलिंद जोग तथा कलकार हैं- कार्तिक आर्यन, कृति सैनन, अपारशक्ति खुराना, पंकज त्रिपाठी, अतुल श्रीवास्तव, विनय पाठक, अरूण सिंह व अन्य.

सोन चिडियाः चंबल घाटी के निर्दयी संसार का यथार्थ चित्रण करने में विफल

रेटिंग : दो स्टार 

‘इश्किया’, ‘डेढ़ इश्किया’, ‘उड़ता पंजाब’ जैसी गाली गलौज और हिंसा प्रधान फिल्मों के निर्देशक अभिषेक चौबे इस बार सत्तर के दशक के चंबल के बीहड़ की पृष्ठभूमि पर डाकुओं की कहानी लेकर आए हैं, जिसमें उन्होंने श्राप, अंतर आत्मा की आवाज को सुनने से लेकर जातिवाद यानी कि गुर्जर बनाम ठाकुर की लड़ाई पेश की है. मगर पूरी फिल्म कहीं से भी प्रभावित नहीं करती.

फिल्म की कहानी के केंद्र में डाकू मान सिंह (मनोज बाजपेयी) का गिरोह है, जो कि ठाकुरों का गिरोह है. यह गिरोह औरतों पर हाथ नहीं उठाता. मगर इन पर गुर्जर जाति को समूल नष्ट करने के लिए एक पांच वर्ष की लड़की का श्राप है. इस गैंग में लखना (सुशांत सिंह राजपूत),वकील सिंह (रणवीर शौरी) जैसे कई डाकुओं का समावेश है. मगर इस डाकुओं के इस गिरोह को समूल नष्ट करने के लिए मध्य प्रदेश पुलिस के इंस्पेक्टर वीरेंद्र सिंह गुज्जर (आषुतोश राणा) ने कसम खा रखी है. इधर मान सिंह का गिरोह ईश्वर में आस्था रखने के साथ ही अपने वजूद को लेकर सवाल उठाने के अलावा अपने जीने की वजहें भी तलाशता रहता है. डाकू लखना सहित कुछ के मन में यह विचार आ रहा है कि वह सरकार के सामने आत्मसमर्पण करके नई जिंदगी जिए. बीहड़ के जंगलों में भटकते हुए एक दिन अचानक इस गिरोह को रास्ते में मरा हुआ सांप मिलता है, जिसके कुछ हिस्से गिद्ध नोंच चुके हैं, गिरोह के सदस्य चाहते हैं कि रास्ता बदल दिया जाए,मगर मान सिंह अपनी बंदूक से उस सांप को उठाकर एक किनारे पर रखकर गिरोह को आगे बढ़ने का आदेश देते हैं.उसके बाद लच्छू आकर उन्हे सूचना देता है कि ब्राम्हणपुरी के गांव में सुनार की बेटी की शादी है. इसे यह गिरोह लूटने जाता है, जबकि लच्छू ने मानसिंह को बताया था कि वह पुलिस के कहने पर ही सूचना देने आया है और लच्छू के पिता को पुलिस ने बंदी बना रखा है. मानसिंह अपने गिरोह के साथ सुनार के यहां पहुंचते हैं, जहां पुलिस इंस्पेक्टर वीरेंद्र सिंह गुज्जर अपने साथी पुलिस वालों की मदद से मान सिंह सहित कई डाकुओं को मौत के घाट उतार देते हैं. जबकि लखना व वकील सिंह जैसे कुछ डाकू सुरक्षित भागने में कामयाब हो जाते हैं. उधर रास्ते में मजबूर  इंदूमती तोमर (भूमि पेडणेकर) व बलात्कार की शिकार अछूत जाति की छोटी लड़की सोन चिड़िया मिलती है, जिसकी मदद करने के लिए लखना तैयार हो जाता है. मगर यहीं से लखना व वकील के बीच दूरी हो जाती है. अब यह गिरोह दो भागां में विभाजित हो जाता है. कहानी कई मोड़ों से गुजरती है. अंततः वकील सिंह व लखना सहित तमाम डाकू मारे जाते हैं. पर अंत में एक ठाकुर जाति का पुलिस सिपाही, पुलिस इंस्पेक्टर वीरेंद्र सिंह गुज्जर को मौत दे देता है.

movie review of son chidiya

फिल्म में प्रकृति के नियम का उल्लेख है कि ‘सांप, चूहे का शिकार करता है और बाज सांप का. यानी कि नियम है कि मारने वाला भी एक दिन मारा जाएगा. प्रकृति के इसी नियम को ढाल बनाकर फिल्मकार अभिषेक चौबे ने बीहड़ के डाकुओं की कहानी के साथ साथ जातिप्रथा, पितृसत्तात्मक सोच, लिंग भेद, अंधविश्वास का चित्रण करने के साथ ही न्याय करने और बदला लेने के बीच के अंतर का जिक्र करते हुए पूरी फिल्म को चूं चूं का मुरब्बा बनाकर रख दिया है. फिल्म में गंदी गालियों, बंदूकों की आवाज, खूनखराबे की ही भरमार है. फिल्म 70 के दशक कें डाकुओं के जीवन को सही परिप्रेक्ष्य में चित्रित करने में भी बुरी तरह से असफल रहती है. फिल्मकार पूरी तरह से भटके हुए नजर आते हैं. काश फिल्मकार अभिषेक चौबे ने 1996 की निर्देशक शेखर कपूर की फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’ और 2012 में तिग्मांशु धुलिया की फिल्म ‘पान सिंह तोमर’ देखकर कुछ सीखा होता, तो वह तमाम गलतियां करने से बच जाते. बीहड़ में भटक रहे डाकुओं को अपने माथे पर तिलक लगाने की फुर्सत नही होती है. पूरी फिल्म यथार्थ से कोसों दूर है. फिल्म में संवादों की भरमार है.

फिल्म का नाम सोन चिड़िया है यानी कि सोने की चिड़िया की तलाश. मगर फिल्मकार इसके साथ भी न्याय नहीं कर पाए. फिल्म में एक अछूत बलात्कार की शिकार छोटी लड़की के हाथ पर उसका नाम सोन चिड़िया लिखा हुआ है, मगर इसे ठीक से फिल्म की कहानी का हिस्सा बना पाने में अभिषेक चौबे असफल रहे हैं.

इतना ही नहीं 21वीं सदी में यह फिल्म बनाते हुए अभिषेक चौबे ने फिल्म में दो महिला पात्र खास तौर पर रखे हैं और इन पात्रों को महज ‘संपत्ति’ के रूप में ही उपयोग किया है. जातिगत संघर्ष पर रोशनी डालते हुए फिल्म में एक संवाद है- ‘‘औरत की जाति अलग होती है’’ अपने आप में गाल पर तमाचा है. क्या इस तरह के संवाद होने चाहिए? यह सवाल तमाम दर्शक पूछते नजर आए.

movie review of son chidiya

जहां तक अभिनय का सवाल है, तो मान सिंह के छोटे से किरदार में मनोज बाजपेयी को छोड़कर सभी कलाकार अपने किरदारों के साथ न्याय करने में पूरी तरह से विफल रहे हैं. भूमि पेडणेकर के करियर की यह चौथी, मगर सबसे कमतर अभिनय वाली फिल्म रही. गुर्जर जाति के पुलिस इंस्पेक्टर वीरेंद्र सिंह के किरदार में आशुतोष राणा जरुर याद रह जाते हैं.

फिल्म के कैमरामैन अनुज राकेश धवन की जितनी तारीफ की जाए, उतनी कम है. उन्होने अपने कैमरे के माध्यम से वीरान चंबल की घाटी को बहुत ही उत्कृष्ट तरीके से परदे पर उकेरा है. फिल्म का गीत संगीत भी प्रभावित नहीं करता.

दो घंटे 23 मिनट की अवधि वाली फिल्म ‘‘सोन चिड़ैया’’ का निर्माण रौनी स्क्रूवाला ने ‘‘आरएसवीपी मूवीज’’के बैनर तले किया गया है. फिल्म के निर्देशक अभिषेक चौबे, लेखक अभिषेक चौबे व सुदीप शर्मा, संगीतकार विशाल भारद्वाज, कैमरामैन अनुज राकेश धवन तथा कलाकार हैं- सुशांत सिंह राजपूत,भूमि पेडणेकर, मनोज बाजपेयी,रणवीर शौरी,आशुतोष राणा,अमित सियाल, महेश बलराज, श्रीधर दुबे, मंजोत सिंह, सुहेल नायर, शाहबाज खान, अंशुमन झा, जतिन समा, जितेन समीन, अब्दुल कादिर अमीन, भौमिक रंजन,देव उपाध्याय, नवदीप तोमर, विवेक सिंह, धीरज सिंह व अन्य.

ब्राइडल आई मेकअप

शादी के मेकअप में सबसे ज्‍यादा अहम मेकअप आंखों का मेकअप होता है. पूरा मेकअप कितना भी अच्छा कर दिया जाएं लेकिन आंखों का मेकअप परफेक्‍ट न हों, तो बहुत बेकार लगता है. शादी के दिन तैयार होने से पहले ही सारी बातें अपनी पार्लर वाली से क्‍लीयर कर लें. तो आइए जानते है शादी के दिन आंखों के मेकअप के लिए खास टिप्‍स:

कंसीलर लगाएं : आंखों के मेकअप की शुरूआत कंसीलर से की जानी चाहिए. सबसे पहले कंसीलर को उचित मात्रा में आंखों की ऊपरी आईलिड पर लगाएं. इससे आंखों की ऊपरी त्‍वचा पर चमक आएगी.

आईशैडो एप्‍लाई करें : कंसीलर लगाने के बाद हल्‍के हाथों से आईशैडो को लगाएं जो कि आपकी ड्रेस के साथ मैंचिंग करता हुआ होना चाहिए. आप डार्क शैडो लगाना चाहती है या लाइट, यह आप पर निर्भर करता है.

अब लाइनर लगाएं: आईशैडो के बाद लाइनर लगाएं. लाइनर का डार्क शेड यूज करें ताकि आपकी आंखों की खूबसूरती निखरकर सामने आएं. आप चाहें तो इसे काजल से भी कर सकते हैं लेकिन काजल फैलने वाला नहीं होना चाहिए.

मस्‍कारा लगाएं: आंखों का पूरा मेकअप हो जाने के बाद ही मस्‍कारा लगाना चाहिए. सारे मेकअप प्रोडक्‍ट वाटरप्रूफ होने चाहिए. पलकें कम हों तो आईलैशेश का इस्‍तेमाल कर सकती हैं. मस्‍कारा के तीन कोट्स लगाने चाहिए.

गुलाबी होठ चाहिए तो घर पर ही बनाएं लिप स्क्रब

कई लोग फटे और खुरदुरे होठों से हमेशा ही परेशान रहते हैं. पर यह कोई जरुरी नहीं है कि आपके फटे और रूखे होंठ कभी ठीक नहीं हो सकते. अगर आप भी गुलाबी और मुलायम होठों की चाहत रखती हैं तो हफ्ते में एक दिन उन्हें स्‍क्रब करें. गुलाबी होठ पाने के लिए आप घर पर ही लिप स्‍क्रब बना सकती हैं. लिप स्‍क्रब बनाने की विधि नीचे दी जा रही है.

सामग्री- पिसी हुई शक्‍कर, शहद, ग्‍लीसरीन

स्‍क्रब बनाने की विधि- लिप स्‍क्रब बनाने के लिये कैस्‍टर शुगर ज्‍यादा अच्‍छी मानी जाती है. लिप स्‍क्रब बनाने के लिये आपको एक कटोरे में पिसी हुई शक्‍कर, कुछ बूंद ग्‍लीसरीन और शहद की चाहिये. बारीक पिसी हुई शक्‍कर बहुत ज्‍यादा पावडर के फार्म में नहीं होनी चाहिये. इनकी मात्रा इस बात पर निर्भर करती है कि आप कितनी ज्‍यादा मात्रा में स्‍क्रब बनाना चाह रही हैं. वैसे इसे ज्‍यादा मात्रा में बना कर रखने की आवश्‍यकता नहीं है. अगर आप 1 चम्‍मच लिप स्‍क्रब भी बनाती हैं तो भी यह एक या दो महीने आराम से चल सकता है. इस स्क्रब को आप इस्तेमाल कर गुलाबी और मुलायम होठ पा सकती हैं.

मैंगो पैन केक रेसिपी

सामग्री :

– आम 02 (छिले और कटे हुए)

– वनीला आइसक्रीम ( 02 स्कूप)

– शहद (02 छोटे चम्मच)

– आटा (150 ग्राम)

– दूध (250 मिली)

– शक्कर (03 छोटे चम्मच)

– मक्खन (01 छोटा चम्मच)

– बेकिंग पाउडर (1/4 छोटा चम्मच)

बनाने की विधि :

– सबसे पहले पैन केक के लिए बताई गयी सामग्री को आपस में अच्छी तरह से मिला कर पेस्ट बना लें.

– अब एक नौन स्टिक पैन में मक्खन डाल कर उसे गर्म करें.

– मक्खन के गर्म होने पर पैनकेक का मिश्रण उसमें डाल दें और इसे सुनहरा होने तक भूनें.

– मिश्रण के भुन जाने पर आंच बंद कर दें और मिश्रण को ठंडा होने दें.

– मिश्रण के ठंडा होने पर उसपर आधी आइसक्रीम, आम का गूदा और शहद मिला दें.

– अब आपका मैंगो पैन केक्स रोल तैयार है, इसे सर्विंग बाउल में निकालें और ऊपर से आइसक्रीम डाल     कर मैंगो पैन केक विद आइसक्रीम टेस्ट करें.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें