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टीनएज लड़कियां ऐसे करें अपना मेकअप

क्या आप टीनएज हैं और आपको भी मेकअप करना पसंद है? अगर हां, तो आज की ये खबर हम खास आपके लिए लेकर आए हैं. टीनएज लड़कियों का मेकअप कुछ हट कर होता है, उनका मेकअप ना ज्‍यादा भड़कीला होना चाहिये और न देखने में आर्टिफीशिल लगना चाहिये. मेकअप ऐसा लगाएं जो नेचुरल लगे. आज हम आपको कुछ आसान से मेकअप टिप्‍स देगें, जिससे आप और भी ज्‍यादा खूबसूरत दिख सकती हैं.

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  • यंग लड़कियां बिना फाउंडेशन के भी काम चला सकती हैं. लेकिन अगर आपको किसी खास मौके पर मेकअप करना अच्‍छा लगता है तो आप फाउंडेशन का लाइटर शेड प्रयोग कर सकती हैं. याद रखें कि फाउंडेशन त्‍वचा में अच्‍छी तरह से समा जाना चाहिये. फाउंडेशन लगाने के लिये ब्रश का प्रयोग करें.
  • कंपैक्‍ट या लूज पाउडर का प्रयोग फाउंडेशन लगाने के बाद करें, इससे फाउंडेशन ज्‍यादा देर टिका रहेगा और आपका चेहरा देखने में काफी सुंदर और आकर्षक दिखाई पड़ेगा.

  • अगर चेहरे पर दाग-धब्‍बे हैं तो आप कंसीलर का प्रयोग कर सकती हैं.
  • अपनी आई ब्रश को शेप देने के लिये टूथब्रश या फिर आई ब्रश का प्रयोग करें.
  • अपनी पलकों पर चमकीला आईशेडो लगाएं. आज कल ट्रेंड में रोज, पीच, गोल्‍ड और ब्रौन्ज कलर हैं.
  • अगर आप बहुत गोरी हैं तो, पीच या फिर पिंक ब्‍लश गालों पर लगाएं. अगर आपका रंग दबा हुआ है तो ब्रौन्ज कलर आप पर सूट करेगा.

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  • आई लैश पर मस्‍कारा लगाएं आई लाइनर से आंखों का बार्डर बनाएं.
  • लिप लाइनर से अपने होठों को शेप दें. लिप ग्‍लौस लगा कर होठों को थेाड़ा सा टच-अप दें. आज कल टीनेज के लिये पिंक, बैरी, कोरल, बिंज, पीच और ब्रौन्‍ज कलर ज्‍यादा चलन में है.

अजय देवगन  ने ट्रोलर्स को क्यों सुनाई खरी-खोटी, जाने यहां

सोशल मीडिया पर अक्सर बौलीवुड सेलेब्स ट्रोल होते रहते हैं. पर सेलेब्स भी ट्रोलर्स को खूब खरी खोटी सुनाते हैं. हाल ही में काजोल और अजय देवगन की बेटी न्यासा भी ट्रोल हुई. आपको बता दें, न्यासा देवगन अक्सर अपने कपड़ो को लेकर ट्रोल होती नजर आती हैं.

सोशल मीडिया पर कुछ फैंस ने उनकी ड्रेस की बहुत तारिफ की तो कुछ फैंस ने उनके ड्रेस को लेकर  भद्दे कमेंट किए. अजय देवगन ने इस बारे में बात करते हुए एक इंटरव्यू में कहा, लोग ये भूल जाते हैं कि न्यासा सिर्फ 14 साल की है और इसके बावजूद भी वो बकवास बातें सोशल मीडिया पर लिखते हैं.

अजय देवगन ने न्यासा के कपड़ों के बारे में बात करते हुए कहा कि ‘जिन कपड़ों के लिए न्यासा ट्रोल हुई. उस दौरान उसने लंबी शर्ट पहन रखा था. लौन्ग शर्ट के साथ उसने शौर्ट्स भी पहने थे. लेकिन लौन्ग शर्ट के कारण शौर्ट्स पहना हुआ नहीं दिखा. मेरी बेटी इस वजह से ट्रोल हुई थी. इस पर बात करते हुए अजय देवगन ने आगे कहा- ‘किसी भी बच्चे पर इस तरह से कमेंट्स करना ठीक नहीं है.

मैं इनसे अनुरोध करता हूं कि कृपा करके आप बच्चों के साथ इस तरह से पेश ना आए. उनको अकेला छोड़ दें. अगर किसी बच्चे के मां-बाप सेलेब्स है तो क्या उनके बच्चों को आप शांति से जीने नहीं देंगे. अजय देवगन ने ये भी कहा कि इस तरह की फोटोग्राफी बच्चों के लिए ठीक नहीं है.

हेट स्टोरी बनाने वाले विवेक अग्निहोत्री के लिए वेब सीरीज का मतलब सेक्स

12 अप्रैल को प्रदर्शित होने वाली देश के दूसरे प्रधानमंत्री स्व.लाल बहादुर शास्त्री की रहस्यमय परिस्थितियों में हुई मृत्यु पर बात करने वाली फिल्म ‘‘द ताश्कंद फाइल्स’’ के लेखक व निर्देशक विवेक अग्निहोत्री से इस फिल्म के सिलसिले में जब हमारी मुलाकात हुई, तो बात वेब सीरीज तक पहुंच गयी. इन दिनों वेब सीरीज काफी बन रही हैं. तो एक्सक्लूसिब बातचीत के दौरान वेब सीरीज की चर्चा चलने पर विवेक अग्निहोत्री ने कहा- ‘‘वेब सीरीज बहुत अच्छा माध्यम है. जिन कहानियों पर फिल्म नहीं बना सकते,  उन पर आप वेब सीरीज बना सकते हैं. वेब सीरीज के रूप में रवींद्रनाथ टैगोर का पूरा साहित्य आ सकता है. प्रेमचंद के साहित्य को वेब सीरीज में ला सकते हैं.रामायण, महाभारत, महाराणा प्रताप सब कुछ बन सकता है. मगर अफसोस की बात यह है कि अब तक हमारे देश में वेब सीरीज को सेक्स, गाली गलौज परोसने के लिए ही ज्यादा उपयोग किया जा रहा है. देश का दुर्भाग्य है कि सेंसर बोर्ड से बचने के लिए सारी गंदगी वेब सीरीज में परोस दो. यह पाप भी है. समाज को ऐसी चीज परोस रहे हैं, जिसकी जरुरत नहीं है.’’

मजेदार बात यह है कि यह वही विवेक अग्निहोत्री हैं, जो पत्रकारों से स्वीकार कर चुके हैं कि 2012 में जब उन्होने फिल्म ‘हेट स्टोरी’ का निर्देशन किया था, तब फिल्म उद्योग से जुड़े तमाम लोग उन्हे गंदा इंसान समझने लगे थे. खुद विवेक अग्निहोत्री ने कहा है- ‘‘मुझे पैसों की जरुरत थी और मैं भी एक व्यावसायिक फिल्म बनाना चाहता था. इसलिए जब मुझे ‘हेट स्टोरी’ बनाने का औफर मिला, तो मैंने बनाई. पर अपने आपको उदार बोलने वाले व मेरे साथ उठने बैठने वाले लोगों ने ही मेरी आलोचना करना शुरू कर दी थी. मैंने कइयों की मदद की थी.पर जब मैने ‘हेट स्टोरी’ बनाई, तो वह मेरे साथ इस तरह व्यवहार करते थे, जैसे कि मैं गंदा इंसान हूं. मैने कोई गुनाह कर दिया है.’’

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अब बौलीवुड का एक तबका सवाल उठा रहा है कि यदि पैसे की जरुरत के चलते विवेक अग्निहोत्री सात  वर्ष पहले ‘हेट स्टोरी’ बना सकते हैं, तो फिर आज उन्हे वेब सीरीज में जो लोग सेक्स व गाली गलौज परोस रहे हैं, उसे वह पाप क्यों मान रहे हैं?

वर्लपूल : पेट भरने के की मजबूरी

गंदी बस्ती में रहने वाला मैं एक गरीब कवि था. रोज के 50-100 रुपए भी मिल जाएं तो मेरे लिए बहुत थे. उस के लिए मैं रेडियो केंद्र तक रेकौर्डिंग के लिए जाता था.

मैं कर्ज में डूबा हुआ था. मन में बुरेबुरे खयाल आने लगे थे. यहां से कुछ ही दूरी पर समुद्र था, लेकिन मैं वहां कभी नहीं जा पाता था. पूरा दिन लेखन कर के मैं ऊब रहा था. बेरोजगारी तनमन में कांटे की तरह चुभ रही थी.

2 महीने का बिजली का बिल भरना बाकी था. अपना खाना तो मैं बना लूंगा, लेकिन उस के लिए गैस तो चाहिए, जो खत्म होने के कगार पर थी.

अच्छा है कि घरसंसार का बोझ नहीं है. अगर मर भी गया तो कोई बात नहीं है. जब भी आईने में खुद को देखता हूं, एक लाचार, बेढंगा और बुझा हुआ शख्स नजर आता है. किसी को मेरी जरूरत नहीं है और पैसों की इस दुनिया में रहने की मेरी कोई औकात नहीं है, इस बात का अब मुझे भरोसा हो गया है.

क्लासमेट हेमू मेरी गरीबी का पता लगाते हुए एक दिन अचानक से मेरे दरवाजे पर आ धमका. उस ने बड़ी तसल्ली से मेरा हालचाल पूछा. उस के शब्द सुन कर मुझे थोड़ी हिम्मत मिली.

हेमू को लगता था कि खानदानी जायदाद का क्या करोगे. आराम भी करोगे तो कितना? लेकिन मैं रोज रेडियो पर कार्यक्रम करता, फिर भी हेमू के गले में मोटी सोने की चेन जैसी चेन खरीदना मेरे लिए नामुमकिन था.

मुझे पता है कि हेमू औरतों के बजाय मर्दों की तरफ ज्यादा खिंचता है, इसलिए उस से थोड़ा डर भी लगता था. लेकिन मैं बदहाली में जी रहा हूं, यह जान कर वह आजकल बारिश में टपकने वाले घर में आने लगा था. उस की कार मेरे बदहाल घर के सामने बिलकुल शोभा नहीं देती थी.

‘‘ऐसे क्या देख रहे हो तुम? तबीयत ठीक नहीं है क्या? पैसों की जरूरत है क्या?’’ हेमू ने यह पूछ कर मेरी दुखती रग पर हाथ रखा था.

‘‘है तो, लेकिन…’’

‘‘कितना चाहिए?’’ यह सवाल उस ने ऐसे पूछा कि एक कवि मांग कर भी कितना मांगेगा? बड़ी रकम मांगने की तुम्हारे पास हिम्मत नहीं है.

‘‘फिलहाल तो हजार रुपए से काम हो जाएगा. नौकरी लगने के बाद सौदो सौ कर के वापस कर दूंगा. सच बोल रहा हूं.’’

यह सुन कर हेमू जोरजोर से हंसने लगा. जैसे भालू शहद को देख कर ललचाता है, वैसे ही वह मेरी तरफ देखते हुए उस ने अपना इरादा बताया, ‘‘वापस क्यों करना, ये लो पैसे… अब मेरे लिए एक काम करो… थोड़ी देर… आंधा घंटे के लिए तुम मुझे अपनी पत्नी समझना. तुम मर्द हो, यही मेरे लिए काफी है…’’

मेरी धड़कनें बढ़ गईं. उस वक्त पैसा मेरी जरूरत थी, पर उस तरह का काम करने के लिए मेरा मन तैयार नहीं था.

तभी हेमू कड़क आवाज में बोला, ‘‘तुम मिडिल क्लास वाले केवल सोचते रहते हो. इतना सोचना छोड़ दे. यहां आ, मेरे पास…’’ इस के बाद उस ने मुझे कुछ बोलने नहीं दिया. वह मेरे बिलकुल पास आ चुका था. अब इस बात को मैं कैसे बताऊं? यह कोई प्यार नहीं, बल्कि मजबूरी थी.

हेमू को जो करना था, उस ने किया. उस ने पैसे दिए और चला गया.

इस के बाद मैं रोने लगा. मेरे मांबाप की मौत काफी समय पहले हो चुकी है. मेरा कोई सगासंबंधी भी नहीं बचा था. हम जैसे लोग फुटपाथ पर सोते हैं, जहां कोई भी हमारा इस्तेमाल कर सकता है.

हालात किसी को कुछ भी करने को मजबूर कर सकते हैं, यह मुझे आज समझ आ गया. यह ह्वर्लपूल बहुत भयानक हादसे की तरह है. नहाने के बाद भी मैं खुद को माफ नहीं कर पा रहा था.

बाद में मुझे पार्टटाइम नौकरी मिल गई और पैसे की तंगी कम हो गई. लेकिन इस देश में अमीर लोग बड़ी आसानी से हम जैसे गरीबों की मर्दानगी छीन सकते हैं और हम पर मुहर लग जाती है कि गरीब अपना पेट भरने के लिए यह सब करते हैं.

कुछ लोग इसे हमारे ऊपर दाग समझते हैं. इसे कलंक बताने के बजाय गरीबों की मजबूरी और लाचारी को समझना होगा…

स्मोकिंग करने वालों को है सोराइसिस का खतरा

दुनियाभर में जानकारों का मानना है कि धूम्रपान सेहत के लिए हानिकारक होता है. इससे सांस संबंधित कई गंभीर बीमारियां होती हैं. कई बार इसका बिगड़ा स्वरूप कैंसर का कारण बन जाता है. इसी क्रम में धूम्रपान से होने वाले एक और खतरे के बारे में पता चला है, जो इसकी गंभीरता को और अधिक बढ़ा देता है. हाल ही में सामने आई एक स्टडी में इस बात का खुलासा हुआ कि कि धूम्रपान से सोराइसिस का खतरा दोगुना हो जाता है. दरअसल, निकोटिन के चलते स्किन की निचली परत में रक्त संचार बाधित हो जाता है और स्किन में औक्सीजन की कमी हो जाती है. सोराइसिस पर हुए एक सर्वे के अनुसार, दुनिया में 12.5 करोड़ लोग इस रोग से पीड़ित हैं.

हाल ही में हुए एक अध्ययन से ये स्पष्ट हुआ कि भारत में करीब चार से पांच फीसदी लोग सोराइसिस से पीड़ित हैं. हेल्थ एक्सपर्ट का मानना है कि सोराइसिस का कोई एक कारण नहीं है, लेकिन यदि आपके परिवार के किसी सदस्य को सोराइसिस है, तो आपको भी इसका खतरा हो सकता है.

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इंडियन एसोसिएशन औफ डर्मेटोलौजिस्ट वेनेरीयोलौजिस्ट्स लेप्रोलौजिस्ट्स (आईएडीवीएल) के एक जानकार का कहना है कि निकोटिन खून को स्किन की निचली परत में जाने से रोकता है, इसलिए स्किन को कम औक्सीजन मिलता है. इससे कोशिका उत्पादन की गुणवत्ता प्रभावित होती है, जिससे सोराइसिस जैसे रोग होते हैं.

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हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, तनाव से सोराइसिस नहीं होता है, लेकिन स्थिति गंभीर हो सकती है. जबकि, सोराइसिस से तनाव हो सकता है. शोध में ये बात भी सामने आई कि मोटापे और सोराइसिस के बीच गहरा संबंध है. ज्यादा वजन वाले लोगों की त्वचा में पसीने से घाव होने से सोराइसिस हो सकता है. वहीं, जिन्हें पहले से सोराइसिस है, उनकी त्वचा कटने या छिलने से स्थिति बिगड़ सकती है.

बेरोजगारी बेलगाम

राष्ट्रीय सैंपल सर्वे औफिस आजकल विवादों के तूफान में घिरा है क्योंकि उस की रिपोर्ट, जिसे मोदी सरकार जारी करने से कतरा रही है, कहती है कि युवाओं में 2011-12 के मुकाबले 2017-18 तक बेरोजगारी में 3 गुना वृद्धि हो गई है. करोड़ों नौकरियां पैदा कर के देश में सब का विकास करने का वादा कर के जीती भाजपा के लिए ये आंकड़े शर्मिंदगी पैदा करने वाले हैं, इसलिए वह इन्हें जारी करने में हिचकिचा रही है. सर्वे औफिस कहता है कि ये आंकड़े सरकार की अनुमति के बिना जारी किए जा सकते हैं.

देश में युवाओं में बेकारी तेजी से बढ़ रही है. गांवों में युवाओं की तादाद बहुत ज्यादा है. वे थोड़ाबहुत पढ़ कर बेरोजगार बने हुए हैं. वे सब सरकारी नौकरी चाहते हैं क्योंकि उन्होंने और उन के मातापिताओं ने देखा है कि पढ़लिख कर सरकारी बाबू बन कर लोग दिनभर मौज उड़ाते हैं और शाम को रिश्वत का पैसा घर लाते हैं. गांवों के आज के युवा न खेतों में काम करना चाहते हैं न कारखानों में.

खेतों और कारखानों में काम भी अब कम हो गया है. पहले नोटबंदी ने मारा, फिर जीएसटी ने. ऊपर से चाइनीज सामान बाजार में छा गया, क्योंकि उस के लिए विदेशी मुद्रा विदेशों में काम कर रहे भारतीय मजदूर अपने डौलर व दिरहम हवाई जहाज भरभर कर भेज रहे हैं. नई तकनीकों की वजह से खेतों और कारखानों में नौकरियां कम होने लगी हैं.

रिपोर्ट कहती है कि बेकारी का आंकड़ा जो अब है वह 45 सालों में सब से ज्यादा है. रेलवे क्लर्कों या पटवारियों की कुछ ही नौकरियों के लिए लाखों आवेदन मिलते हैं. सरकार के लिए तो आवेदन सिर्फ कागज भर होता है पर जिस ने आवेदन किया होता है वह रात दिन इसी का सपना देखता रहता है और उस का किसी और काम में मन नहीं लगता. वह परिवार व देश पर बोझ होता है और सरकार के लिए मात्र एक गिनती.

देश में बढ़ते अपराधों, गौरक्षकों, मंदिरों में पूजापाठ के पीछे यही बेकारी है. बैठे ठाले युवा कहीं से भी पैसा जुटाना चाहते हैं और वे कुछ भी कर लेते हैं. शिक्षा ने उन्हें थोड़ा समझदार बना दिया है, लेकिन इतना नहीं कि वे खुद अपने बल पर कारखाने खड़े कर सकें.

सरकार सफाई दे रही है कि नौकरियां हैं पर कम पैसे वाली हैं. यह बड़ी लचर दलील है. नौकरी वह होती है जो संतोष दे, घर चलाने के लायक हो और नौकरी पाने के बाद युवा किसी और सपने की आरे न भटके. सरकार इन युवाओं को नौकरी नहीं दे सकती क्योंकि उस ने तो मान लिया है कि नौकरी भाग्य से मिलती है, पूजापाठ से मिलती है, हिंदू धर्म की रक्षा से मिलती है, गांधी परिवार को दोष देने से मिलती है. अमित शाह और नरेंद्र मोदी के बयानों को सुन लें, तो कहीं काम की कहानी नहीं मिलेगी, सिर्फ मंदिर, कुंभ, नर्मदा यात्रा, संतोंमहंतों की बातें मिलेंगी.

चुनाव से एकदम पहले आए आंकड़े विपक्षियों के लिए सुखद हैं पर बेकारी की समस्या का हल उन के पास भी नहीं है.

भारत भूमि युगे युगे

जूता है हिंदुस्तानी

सदियों से दलित और पिछड़े ब्राह्मणों के जूते खाते आ रहे हैं. एक बार फिर उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर में ब्राह्मण के होते हुए एक गैरब्राह्मण ने सरकारी पैसा खा लिया तो खामखां बात का बतंगड़ बन गया जिस से याद आया कि वे भी क्या दिन थे जब दबेकुचले लोग बाभन देवता के जूते की मार भी भगवान का प्रसाद समझते श्रद्धा से ग्रहण कर लेते थे. धोखे से दौर अब लोकतंत्र का है, फिर भी ऊंची जाति वालों का जूता नीची जाति वालों पर सरेआम चल रहा है, तो इस कथित लोकतंत्र पर पुनर्विचार किया जाना जरूरी है.

हादसा बेहद छोटा और आम राजनीति के लिहाज से है कि भाजपा सांसद शरद त्रिपाठी ने अपनी ही पार्टी के विधायक राकेश सिंह बघेल पर एक मीटिंग में जूतों की बौछार कर दी, तुरंत ही इसे पुरानी दुश्मनी और राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई से जोड़ दिया गया. इस से भी ज्यादा मनोरंजक बात शरद त्रिपाठी के जूता बरसाने की गति रही जिस पर अभी तक शोध हो रहे हैं कि क्या 6 सैकंड में 7 जूते मारे जा सकते हैं, जबकि शोध इस तथ्य पर होना चाहिए कि हमेशा जूता खाने वाला गैरब्राह्मण ही क्यों होता है.

पवार का पलायन

नेताओं के लिए उम्र बीजगणित की संख्या की तरह एक मजबूरी होती है, वरना हमारे देश के नेता कभी बूढे़ नहीं होते, जिस का गहरा ताल्लुक चुनाव लड़ने और न लड़ने से भी होता है. एनसीपी प्रमुख, कद्दावर मराठा नेता, 14 बार लोकसभा चुनाव लड़ चुके शरद पवार की चुनाव न लड़ने की घोषणा त्याग है, मजबूरी है या फिर कोई राजनीतिक चाल, यह तय कर पाना मुश्किल काम नहीं कि 78 साल के हो चुके शरद पवार अब थक चले हैं और उन्होंने मान लिया है कि अब वे कभी प्रधानमंत्री नहीं बन पाएंगे.

शरद पवार की राजनीतिक विरासत कोई भी संभाले, लेकिन वह उन के जैसा जमीनी और सर्वमान्य शायद ही साबित हो. जिन खास बातों और घटनाओं के लिए शरद पवार जाने जाते हैं उन में से एक सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मुद्दे पर 1999 में उन का कांग्रेस छोड़ देना भी है. अब यह और बात है कि उन के भीतर का देसी मराठा कभी इस भूल पर कुछ कहेगा.

नायिकाओं के भरोसे दीदी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद भले ही देखने में सादगी की प्रतिमूर्ति लगती हों लेकिन इस चुनाव में ग्लैमर के जरिए वोट बटोरने के वास्ते उन्होंने थोक में 4 ऐक्ट्रैस को मैदान में उतार कर अपने इरादे जता दिए हैं कि वे अपने राज्य में भगवा घुसपैठ रोकने को कोई कसर नहीं छोड़ेंगी. टीएमसी की तरफ से चुनावी ताल ठोक रहीं ये अभिनेत्रियां हैं मुनमुन सेन, मिमी चक्रवर्ती, नुसरत जहां और घुंघराले बालों वाली शताब्दी राय.

अगर ममता का फैसला सही साबित हुआ तो लोकसभा की रौनक देखते ही बनेगी. ममता बनर्जी पहले भी कुछ खिलाडि़यों, कलाकारों और पत्रकारों को संसद में पहुंचा चुकी हैं. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को शायद इस चाल का अंदाजा था, इसलिए उन्होंने वरिष्ठ अभिनेत्री मौसमी चटर्जी को भाजपा में भरती कर लिया था. लोगों की दिलचस्पी अब इस बात में ज्यादा रहेगी कि कुल कितनी अभिनेत्रियां लोकसभा में जलवे बिखेरती दिखेंगी.

गुरुमंत्र 

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने चुनाव की घोषणा के पहले ग्वालियर में डेरा डाला तो अमित शाह सहित भाजपा के तमाम छोटेबड़े नेताओं ने जा कर उन के दर्शन किए और लोकसभा चुनाव जीतने के तौरतरीकों की टिप्स लीं. चूंकि ऐसे गुरुमंत्र कान में दिए जाते हैं, इसलिए बात सार्वजनिक नहीं हो पाई कि

मोहन भागवत ने उन्हें किस तरह का आशीर्वाद दिया. जाहिर तौर पर जरूर उन्होंने हिंदुओं की अनदेखी की बात कही. वहीं उम्मीदवारों की लिस्ट भी थमा दी. अंदरखाने की सुगबुगाहट यह है कि इस बार आरएसएस के इस चिंतनमंथन में हीरेमोती कम, कंकरपत्थर ज्यादा निकल रहे हैं जिस से मोहन भागवत व्यथित भी हैं.

मसाज के नाम पर ब्लैकमेलिंग

नीरज नारंग जिस समय दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के डीसीपी राम गोपाल नाइक के औफिस में पहुंचे तो उन के चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थीं. क्योंकि वह यह नहीं समझ पा रहे थे कि उन के साथ जो हुआ था, उसे डीसीपी को किस तरह बताएं. औफिस में घुसने के बाद उन्होंने जैसे ही डीसीपी का अभिवादन किया तो डीसीपी ने उन्हें सामने पड़ी चेयर पर बैठने का इशारा किया. नीरज नारंग की तरफ देखने के बाद डीसीपी ने उन से पूछा, ‘‘क्या बात है, आप बड़े परेशान लग रहे हो. बताओ क्या समस्या है.’’

‘‘सर, मैं अपनी गलती के कारण कुछ बदमाशों के चक्कर में फंस गया हूं. मुझे उन से बचा लीजिए. वो लोग मुझे ब्लैकमेल कर के मुझ से 3 लाख रुपए ऐंठ चुके हैं और साढ़े 4 लाख रुपए के पोस्ट डेटेड चेक ले चुके हैं. अब वो मुझ से फिर एक बड़ी रकम की डिमांड कर रहे हैं. सर, इस तरह से तो मैं बरबाद हो जाऊंगा.’’ नीरज नारंग ने बताया.

‘‘कौन हैं वो लोग. आप घटना विस्तार से बताइए.’’ डीसीपी ने उन से कहा.

इस के बाद नीरज नारंग ने उन्हें एक लिखित शिकायत देते हुए अपने साथ घटी घटना बता दी. उसे सुन कर डीसीपी राम गोपाल नाइक को मामला गंभीर लगा. उन्होंने इस मामले की जांच क्राइम ब्रांच की शाखा शकरपुर के इंसपेक्टर विनय त्यागी को सौंप दी और उन्होंने पीडि़त नीरज नारंग को शकरपुर क्राइम ब्रांच औफिस भेज दिया. यह बात 19 सितंबर, 2018 की है.

नीरज नारंग क्राइम ब्रांच इंसपेक्टर विनय त्यागी के औफिस पहुंच गए. उन्होंने उन्हें अपने साथ घटी जो कहानी बताई वह इस प्रकार थी.

नीरज नारंग दिल्ली के एक बिजनैसमैन हैं. पटपड़गंज इंडस्ट्रियल एरिया में उन की अपनी फैक्ट्री है. एक दिन वह अपने औफिस में लैपटौप पर नेट सर्फिंग कर रहे थे. इस दौरान वह एक गे वेबसाइट देखने लगे. उस साइट को देखने में उन की रुचि बढ़ने लगी. साइट पर उन्होंने एक फोन नंबर देखा.

नीरज की उत्सुकता बढ़ी तो उन्होंने उसी समय वह नंबर अपने फोन से मिलाया. कुछ देर घंटी बजने के बाद दूसरी तरफ से एक युवक की आवाज आई. उस युवक ने अपना नाम अरमान शर्मा बताया.

उस से कुछ देर बात कर ने के बाद नीरज नारंग ने उस से उसी दिन शाम को पूर्वी दिल्ली के निर्माण विहार में स्थित वीथ्रीएस मौल में मिलने का कार्यक्रम निश्चित कर लिया. निर्धारित समय पर नीरज नारंग वहां पहुंच गए. कुछ देर में अरमान शर्मा भी वहां पहुंच गया.

वहां स्थित मैकडोनाल्ड रेस्टोरेंट में दोनों की मुलाकात हुई. उस ने नीरज को बताया कि वह आधुनिक तरीके की मसाज सर्विस चलता है. उस के पास अलगअलग कैटेगरी की मसाज करने के पैकेज हैं और यह सुविधा अच्छे होटल में उपलब्ध कराई जाती है. नीरज नारंग एक अलग ही मिजाज वाले थे. इसलिए उन्होंने 8 हजार रुपए के पैकेज का चयन कर लिया.

मसाज कराने के लिए वह वैशाली में स्थित एक होटल में पहुंच गए. अरमान शर्मा भी वहां पहुंच गया. अरमान ने जिस तरह से नीरज की मसाज की थी वह तरीका नीरज को बहुत पसंद आया. जिस से उन्होंने होटल के खर्च के अलावा 8 हजार रुपए अरमान को खुशीखुशी दे दिए. अरमान शर्मा ने अपनी कुछ मजबूरियां उन्हें बताईं. फिर अरमान के आग्रह करने पर नीरज नारंग ने उसे 3 हजार रुपए अलग से दे दिए.

इस के 10 दिन बाद नीरज नारंग का मन फिर से मसाज कराने का हुआ. वह अरमान को फोन करने के मूड में थे. तभी उन के मोबाइल की घंटी बजी. फोन स्क्रीन पर जो नंबर उभरा उसे देख कर उन की आंखों में अनोखी चमक उभर आई. यह नंबर अरमान शर्मा का था. अरमान ने उन्हें मसाज के लिए उसी होटल में आने के लिए कहा तो शाम के 5 बजे नीरज नारंग वहां पहुंच गए.

करीब आधे घंटे के बाद जब होटल के बंद कमरे में नीरज नारंग निर्वस्त्र हो कर अरमान से मसाज करवा रहे थे तभी कमरे के दरवाजे पर जोर से दस्तक हुई. दस्तक के बाद अरमान ने नीरज को कपड़े पहनने का मौका दिए बिना झट से कमरे का दरवाजा खोल दिया.

दरवाजा खुलते ही धड़धड़ाते हुए 2 युवतियां कमरे में घुस गईं. उन में से एक ने सोफे पर रखे नीरज नारंग के सभी कपड़े अपने कब्जे में ले लिए तो दूसरी अपने मोबाइल फोन से उन का वीडियो बनाने लगी. अरमान शर्मा जो कुछ देर पहले नीरज नारंग की इच्छा के अनुसार तरहतरह से उन की मसाज कर रहा था. उस ने गिरगिट की तरह रंग बदला और वह भी उन युवतियों के पास जा कर खड़ा हो गया.

उन में से एक युवती नीरज नारंग को गालियां बकते हुए उन के नग्न वीडियो को सोशल साइट्स पर सार्वजनिक करने की धमकी देने लगी और कहने लगी कि यदि ऐसा नहीं चाहते तो बदले में 10 लाख रुपए देने होंगे.

कहां तो नीरज नारंग अरमान शर्मा के हाथों से मसाज लेते हुए आनंद के सागर में गोते लगा रहे थे और कहां पलक झपकते ही परिस्थितियां उन के विपरीत हो गईं.

खुद को इस तरह बेबस पा कर नीरज नारंग सकते में रह गए. उस समय उन के पर्स में एक लाख रुपए थे, जो उन्होंने उस युवती को सौंप दिए और गिड़गिड़ाते हुए अपने कपड़े लौटा देने की गुहार करने लगे. मगर दोनों युवतियां उन्हें प्रताडि़त करते हुए 10 लाख रुपए देने का दबाव बनाती रहीं. उसी समय अरमान ने कमरे में रखी लोहे की रौड से नीरज नारंग को बुरी तरह पीटना शुरू कर दिया.

मरता क्या नहीं करता. बचने का कोई चारा नहीं देख कर नीरज नारंग ने युवती को बताया कि उन की कार पार्किंग में खड़ी है. उन्होंने युवती को कार का नंबर बताते हुए उसे कार की चाबी सौंपी और उस में रखा ब्रीफकेस लाने के लिए कहा.

युवती कार की चाबी ले कर होटल की पार्किंग में पहुंची और उस में रखा उन का ब्रीफकेस ले कर कमरे में लौट आई. नीरज नारंग ने उस में रखे 2 लाख रुपए निकाल कर उसे सौंपे तथा साढ़े 4 लाख रुपए के 3 पोस्ट डेटेड चेक उसे दे दिए.

नीरज ने इंसपेक्टर विनय त्यागी को बताया कि वह लोग अब फिर से पैसों की डिमांड कर रहे हैं.

इंसपेक्टर विनय त्यागी ने बुरी तरह परेशान दिख रहे नीरज नारंग को ढांढस बंधाया फिर उन का मसाज करने वाले अरमान शर्मा और दोनों युवतियों का हुलिया वगैरह पूछ कर अपनी डायरी में दर्ज कर लिया. इस घटना के बारे में पूरी बात जान लेने के बाद उन्होंने उन्हें सतर्क रहने की हिदायत दे कर घर जाने की इजाजत दे दी. इस के बाद नीरज नारंग अपने औफिस की ओर निकल गया.

इंसपेक्टर विनय त्यागी ने इस केस के बारे में एसीपी अरविंद कुमार मिश्रा को बताया. एसीपी ने इस रैकेट का परदाफाश करने के लिए इंसपेक्टर विनय त्यागी के नेतृत्व में एक पुलिस टीम बनाई. टीम में एसआई बलविंदर, दिनेश, हवा सिंह, अर्जुन, एएसआई रमेश कुमार, सत्यवान, राजकुमार, मो. सलीम, सतीश पाटिल, हैड कांस्टेबल श्यामलाल, शशिकांत, सुनील कुमार, बाबूराम, दिग्विजय, कांस्टेबल कुलदीप, समीर आदि को शामिल किया गया.

इंसपेक्टर त्यागी ने अपनी टीम के साथ केस के सभी पहलुओं पर विस्तार पूर्वक विचारविमर्श करने के बाद आरोपियों को पकड़ने की एक फूलप्रूफ योजना तैयार की. उन्होंने नीरज नारंग को एक बार फिर अपने औफिस में बुला कर पूरी योजना समझा दी. उन्होंने उन से यह भी कहा कि उन के पास ब्लैकमेलर का जब भी कोई फोन आए तो वह उन्हें सूचित कर दें.

इत्तेफाक से अगले ही दिन नीरज नारंग के पास ब्लैकमेलर अरमान शर्मा का फोन आया. उस ने 2 लाख रुपए मांगे थे. उस ने पैसे ले कर दक्षिणी दिल्ली के साकेत में स्थित सेलेक्ट सिटी वाक मौल में शाम को बुलाया था. ऐसा नहीं करने पर उस ने परिणाम भुगतने को धमकी दी थी. नीरज ने इंसपेक्टर विनय त्यागी को फोन कर के यह सूचना दे दी.

नीरज नारंग की बात सुन कर विनय त्यागी ने एसीपी अरविंद मिश्रा को इस जानकारी से अवगत करा दिया. इस के बाद वह उन से आगे की योजना पर विचार करने लगे. थोड़ी देर बाद इंसपेक्टर विनय त्यागी ने नीरज नारंग को फोन कर के आगे की पूरी योजना समझा दी. निर्धारित समय पर नीरज नारंग एक बैग में 2 लाख रुपए ले कर साकेत सेलेक्ट वाक सिटी मौल पहुंच गए और अरमान के वहां आने का इंतजार करने गले.

थोड़ी देर बाद अरमान अपनी एक गर्लफ्रैंड के साथ नीरज नारंग के पास पहुंच गया. बातचीत होने के बाद नीरज ने उसे पैसों वाला बैग सौंप दिया. जैसे ही अरमान ने नीरज नारंग से पैसों का बैग लिया सादे वेश में वहां मौजूद क्राइम ब्रांच की टीम ने अरमान और उस की गर्लफ्रैंड को अपने काबू में कर लिया.

उन्होंने उन के पास बैग से 2 लाख रुपए भी बरामद कर लिए. इस के बाद क्राइम ब्रांच टीम उन दोनों को ले कर शकरपुर स्थित औफिस लौट आई. यह बात 20 सितंबर, 2018 की है.

हिरासत में लिए गए युवक से पूछताछ की गई तो पता चला कि उस का असली नाम अरमान शर्मा नहीं बल्कि शादाब गौहर है. उस के साथ वाली युवती ने अपना नाम मनजीत कौर बताया. दोनों ने पूछताछ के दौरान अपना अपराध स्वीकार करते हुए ब्लैकमेलिंग के धंधे की जो कहानी बताई, वह इस प्रकार निकली.

25 साल का शादाब गौहर उर्फ अरमान शर्मा मूलरूप से श्रीनगर, कश्मीर के कुमो पदशेनी बाग का रहने वाला था. वहां से 12वीं तक की पढ़ाई करने के बाद उस का रुझान बौडी बिल्डिंग की तरफ हो गया. वह बेहद फैशनेबल युवक था इसलिए खुद के मैनटेन पर बहुत ध्यान देता था.

उस ने जिम जाना शुरू कर दिया. एकदो साल तक तो घर वालों ने उस की बौडी फिटनेस पर पैसे खर्च किए लेकिन बाद में उन्होंने कह दिया कि वह खुद कमाकर अपने ऊपर खर्च करे.

शादाब ऐसा कोई काम नहीं जानता था जिस के बूते वह कमाई कर सके. लिहाजा उस ने मोबाइल रिपेयरिंग का काम सीखना शुरू कर दिया. यह काम सीखने के बाद उस ने श्रीनगर में ही मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान खोल ली. थोड़े ही दिनों में उस का काम चल निकला और इस काम में उसे अच्छी कमाई होने लगी.

जेब में पैसे आए तो वह खुद की फिटनैस पर और ज्यादा ध्यान देने लगा. शादाब बहुत खूबसूरत था. अच्छे खानपान और ब्रांडेड कपड़ों के कारण उस की पर्सनैलिटी और भी निखर गई. लेकिन जब कश्मीर के हालात ज्यादा बिगड़े और घाटी में आए दिन उस की दुकान बंद रहने लगी तो वह परेशान हो उठा. दुकान बंद रहने के कारण उस की आमदनी बंद हो जाती. यानी उसे फिर से रुपयों की किल्लत रहने लगी.

वह परेशान चल रहा था कि एक दिन पत्थरबाजी के दौरान लोगों ने उस की दुकान को आग लगा दी. दुकान के उजड़ जाने के कारण उस की माली हालत बेहद खराब हो गई तो वह काम की तलाश में चंडीगढ़ आ गया और वहां के एक जिम में ट्रेनर की नौकरी कर ली.

चंडीगढ़ के जिम में काम करने के दौरान उस की बहुत से ऐसे लड़केलड़कियों से जानपहचान हो गई जो रोजाना वहां एक्सरसाइज के लिए आया करते थे. चूंकि शादाब गौहर एक हैंडसम युवक था इसलिए खूबसूरत लड़कियों से दोस्ती होते देर नहीं लगती थी. मनजीत कौर नाम की एक युवती से उस की अच्छी दोस्ती थी.

गोरीचिट्टी और आकर्षक मनजीत कौर बेहद खूबसूरत युवती थी. वह मूलरूप से दिल्ली की रहने वाली थी और उन दिनों चंडीगढ़ में रह कर पढ़ाई कर रही थी. शादाब मनजीत को अपने साथ चंडीगढ़ के महंगे रेस्टोरेंट में ले जाने लगा. कुछ दिनों में उन के बीच का फासला खत्म हो गया और फिर वह दोनों लिव इन रिलेशन में रहने लगे.

शादाब गौहर ने चंडीगढ़ के सेक्टर-56 में एक फ्लैट किराए पर ले रखा था. अब मनजीत कौर उस के साथ बतौर उस की पत्नी बन कर रहने लगी. अभी दोनों को साथ रहते हुए ज्यादा दिन नहीं गुजरे थे कि इसी बीच उन्हें महसूस होने लगा कि केवल जिम की कमाई भर से उन के वे सपने पूरे नहीं हो सकते जिन की ख्वाहिश वे अपने दिलों में पाले हुए थे.

इस के लिए उन्होंने नएनए उपाय खोजने शुरू कर दिए. दोनों यही योजना बनाते कि कम समय में अमीर कैसे हुआ जाए. इसी बीच एक शाम मनजीत कौर की मुलाकात जिम में आने वाली एक अन्य लड़की शीबा से हुई. जो न केवल उस की ही तरह खूबसूरत और आजाद खयालों वाली थी, बल्कि उस की हसरतें भी जल्द अमीर बनने की थीं.

बातों के दौरान मनजीत ने शीबा के मन की बात जानी तो उस के चेहरे पर रौनक आ गई. उस ने शीबा को अपने लिव इन पार्टनर शादाब गौहर उर्फ अरमान शर्मा से मिलवाया और अपनी योजनाओं के बारे में बता कर उसे अपने रैकेट में शामिल कर लिया.

अब ये तीनों मुसाफिर एक ही कश्ती में सवार थे. जिस की मंजिल एक थी. जिसे पाने के लिए वे किसी भी हद से गुजरने के लिए तैयार थे. तीनों ने चंडीगढ़ के बजाए दिल्ली चल कर अपनी योजना को अंजाम देने का फैसला किया.

2018 के जुलाई महीने में वे तीनों दिल्ली आ गए और पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मीनगर के जवाहर पार्क में एक मकान किराए पर ले कर रहने लगे. यहां के मकान मालिक को शादाब ने बताया कि वे एक इंटरनैशनल काल सेंटर में नौकरी करते हैं. मकान मालिक को अपने किराए से मतलब था. दूसरे इन तीनों की पर्सनेलिटी इतनी प्रभावशाली थी कि उस ने इन से ज्यादा कुछ पूछ ने की जरूरत ही नहीं समझी.

दिल्ली आ कर शादाब गौहर ने एक गे वेबसाइट पर अपना प्रोफाइल अरमान शर्मा के नाम से अपलोड कर के मसाज सर्विस उपलब्ध कराने का विज्ञापन देना शुरू कर दिया. उस की नजर मालदार क्लाइंट पर रहती थी. जिस से वह अधिक से अधिक रुपए ऐंठ सके.

इस के अलावा उस ने अपने रैकेट में 8 कमसिन लड़कों और एक लड़की को भी शामिल कर लिया, जो उस के कहने पर क्लाइंट को मसाज सर्विस देने के लिए दिल्ली और एनसीआर में बताए गए ठिकानों पर जाते थे.

ये लड़के अपनेअपने क्लाइंट को मसाज सर्विस दे कर जो भी कमाते थे उन में प्रत्येक सर्विस पर शादाब गौहर अपना कमीशन वसूल करता था. और बीचबीच में मनजीत कौर और शीबा मसाज के दौरान क्लाइंट की वीडियो बना कर उस से मोटी रकम वसूल करती थीं.

सितंबर के पहले हफ्ते में नीरज नारंग वेबसाइट पर दिए गए नंबर पर फोन कर के शादाब उर्फ अरमान के संपर्क में आए और मसाज करवाने के चक्कर में उस के जाल में फंस गए.

3 लाख रुपए नकद और साढ़े 4 लाख रुपए के पोस्ट डेटेड चेक लेने के बावजूद भी शादाब ने नीरज नारंग का पीछा नहीं छोड़ा. वह उन से 2 लाख रुपए की और मांग करने लगा. फिर मजबूर हो कर नारंग ने इस की शिकायत क्राइम ब्रांच के डीसीपी से कर दी.

शादाब गौहर उर्फ अरमान शर्मा और मनजीत कौर से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर 2 दिनों के पुलिस रिमांड पर लिया. इस दौरान दोनों आरोपियों के कब्जे से नीरज नारंग से लिए गए पौने 2 लाख रुपए तथा साढ़े 4 लाख रुपए के पोस्ट डेटेड चेक बरामद कर लिए.

रिमांड अवधि खत्म होने के बाद पुलिस ने शादाब गौहर और मनजीत कौर को कोर्ट में पेश किया और वहां से दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. गिरोह में शामिल तीसरी शातिर लड़की शीबा कथा लिखे जाने तक फरार थी.

-कथा में दिए गए कुछ पात्रों के नाम काल्पनिक हैं.

बनाना शेक बनाने की आसान विधि

बनाना मिल्‍क शेक  आपके हेल्थ के लिए बेहद फायदेमंद होता है. और बनाना मिल्‍क बनाना भी बेहद आसान है तो आप भी बनाना शेक बनाने की विधि ट्राई जरूर करें. तो आइए बनाना मिल्‍क शेक बनाने की विधि बताते हैं.

सामग्री :

केला  1/2 कप

शक्कर  03 बड़े चम्मच

वनीला एसेंस  1/2 छोटा चम्मच

दही  01 कप

दूध  01 कप

दालचीनी पाउडर  01 चुटकी

घर पर ही बनाएं चिली चिकन ड्राई

बनाना शेक बनाने की विधि :

सबसे पहले केला को छील लें और उसके गूदे को एक बाउल में मैश कर लें.

इसके बाद केला के गूदा के साथ बाकी की सारी सामग्री को मिक्सर में डालें और अच्छी तरह से ब्लेंड करें.

सामग्री को तब तक ब्लेंड करें, जब तक वह एकसार न हो जाए और उसमें झाग न बन जाए.

आपकी बनाना शेक बनाने की विधि कम्प्लीट हुई.

गर्मी के मौसम में पिएं इस औरेंज लेमोनेेड ड्रिंक को

आपकी खूबसूरती को बढ़ाएंगे ये 5 ग्रीन टी प्रौडक्ट्स

सालों से ग्रीन टी को न केवल एक हेल्दी ड्रिंक के लिए जाना जाता है, बल्कि इसे स्किन के लिए भी एक बेहतरीन ब्यूटी प्रोडक्ट माना जाता है. कई इंडियन और इंटरनेशनल ब्यूटी ब्रांड्स जो स्किन केयर प्रौडक्ट बनाते हैं, वह ग्रीन टी का इस्तेमाल करते हैं. जो चेहरे पर काले धब्बे को कम करने, औयली स्किन को कंट्रोल करने करती है. आज हम आपको ऐसे 5 ग्रीन टी प्रौडक्ट्स के बारे में बताएंगे, जिनका इस्तेमाल आप रोजाना मेकअप के दौरान या स्किन को सुंदर रखने के लिए कर सकते हैं.

1.ग्रीन टी और जैस्मीन शीट मास्क
ग्रीन टी का फायदा पाने के लिए आप बाजार से ग्रीन टी शीट मास्क खरीद सकते हैं. इन शीट मास्क में जैस्मीन के भी गुण होते हैं जो एक साथ स्किन नौर्मल करने और औयल को बैलेंस करने में मदद करते हैं. साथ ही, क्विक शीट मास्क आपको 30 मिनट में स्पा ट्रीट दे देता है.
 
2. ग्रीन टी बौडी स्क्रब
ग्रीन टी केवल आपके चेहरे के लिए नहीं है? ग्रीन टी वाले स्क्रब को आप अपनी बौडी पर भी इस्तेमाल कर सकतीं हैं. अगर आपकी स्किन रूखी हो, तो ग्रीन टी जेल स्क्रब एक अच्छा औप्शन होगा. क्योंकि ग्रीन टी गंदगी और स्किन के डेड सैल को खत्म करने के लिए अच्छी है.
 
3. ग्रीन टी स्किन क्लेरीफाइंग कौन्सेंट्रेट
तैलीय और मुंहासे वाली स्किन के लिए ग्रीन टी एक अच्छा औप्शन है. यह लाइट होता है, जो स्किन में आसानी से मिक्स हो जाता है.
 
4. खीरा और ग्रीन टी सेंट
किसने सोचा होगा कि खीरे और ग्रीन टी की खुशबू सेंट में भी होगी. जी हां, खीरे और ग्रीन टी का सेंट बौडी को ताजी खुशबू देने के साथ-साथ अंडरआर्म्स की बदबू को भी खत्म करने में मदद करता है.
 
5. ग्रीन टी सीड सीरम
ग्रीन टी के बीज और औयल प्रोड्क्ट बाजार भी मिलते हैं. जो स्किन को हाइड्रेट करने के साथ-साथ लंबे समय तक मौइस्चराइज भी करते हैं.

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