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कहीं देखे हैं पेड़ों पर झूलते हुए ऐसे घर!

आज हम आपको दुनिया के कुछ अजीबो गरीब घरों के बारे में बताने जा रहे हैं, क्या आपको पता है किसी ऐसे घर के बारे में जो पेड़ पर बना हो और वो भी लग्जरी हो. नहीं पता ना तो चलिये हम आपको दुनिया में मौजूद कुछ ऐसे ही घरों के बारे में बताएंगे, जो चिड़िया के घोंसले की तरह ही पेड़ों पर बने हैं, लेकिन उसमें इंसान रहते हैं.

द वुड्समैन ट्री हाउस

इंग्‍लैंड के डोरसेट में बने द वुड्समैन ट्री हाउस औक्‍स के पेड़ों पर बने हुए हैं. ये पेंड़ प्रचीन काल से यहां पर हैं. इन ट्री हाउस को गाय मेलिंसन ने बनाया है. इस ट्री हाउस को लग्‍जरी बनाया गया है. यहां आपको एक डबल बैड के साथ शानदार हौट बाथ टब मिलेगा. यहां आप खुली हवा में भी शौवर का मजा भी ले सकती हैं.

ट्री होटल, स्‍वीडन

स्‍वीडन के नौर्बोटेन में बना ट्री होटल दुनिया की सबसे खूबसूरत जगहों में से एक हैं. यहां ऊंचे-ऊंचे पेड़ों पर शानदार तरीके से लग्‍जरी होटल रूम को तैयार किया गया है. यहां द कैबिन, द मिररक्‍यूब, द ड्रेगन फ्लाई, द ब्‍लू कोन, द यूएफओ, द बर्ड नेस्‍ट और सेवेंथ रूम मिलेगा. यहां से आप नौर्दर्न लाइट को देख सकते हैं.

ट्री टौप्‍स ट्री हाउस, इंग्‍लैंड

इंग्‍लैंड के डीवोन में बना ट्री टौप्‍स ट्री हाउस 250 साल पुराने औक के पेड़ों पर बना हुआ है. यहां रहना आपके लिए एक अनोखा एहसास होगा. यहां पर आपको लिविंग रूम, किचेन, बाथरूम और लग्‍जरी कौपर बाथटब मिलेगा. इस जगह को बहुत ही खूबसूरती के साथ बनाया गया है.

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इको फ्रेंडली ट्री हाउस, फ्रांस

फ्रांस कैबैने डे सलाग्नैक में क्रिस्‍टेला और सिबेस्टियन इको फ्रेंडली ट्री हाउस ने यहां पर 6 बनाए हैं. ये ट्री हाउस कोरेजे के जंगलों में बने हुए हैं. लिविंग रूम में बहुत ही खूबसूरती के साथ ग्‍लास का प्रयोग किया गया है. ट्री हाउस की बालकनी में खड़े होकर आपको हर ओर हरियाली ही नजर आएगी.

केसा बार्थल ट्री हाउस, इटली

इटली के फ्लोरेंस में केसा बार्थल ट्री हाउस बहुत ही खूबसूरती के साथ बनाया गया है. यहां बगीचे में बना हुआ ट्री हाउस आपको बहुत सुकून के पल देगा. इसे एलेना बार्थल ने डिजाइन किया है. यहां एक छोटी स्‍वीमिंग पूल, टेनिस कोर्ट और शानदार बाथरूम दिया गया है. बैड रूम से आपको बाहर का खूबसूरत नजारा देखने को मिलेगा.

ट्री हाउस, जमाइका

जमाइका के गीजाम में बना ट्री हाउस दुनिया की सबसे खूबसूरत जगहों में से एक है. इस ट्री हाउस को जंगलों के बीचोबीच बनाया गया है. पेड़ की चोटी से इस ट्री हाउस का व्‍यू देखने में शानदार नजर आता है. यहां ट्री हाउस एवोकाडो पेड़ों पर बनाया गया है. यह पेड़ सौ सालों से भी अधिक पुराने हैं. ट्री हाउस में आपको रिसौर्ट के साथ बालकनी से बेहतरीन व्‍यू मिलेगा.

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आखिर मोदी ने क्यों दोहराई राहुल गांधी की बात?

बात 5 अगस्त 2013 की है. इस दिन इलाहाबाद के गोविंद बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान ने दावा किया था कि राहुल गांधी ने उनके एक समारोह में यह बयान दिया है कि गरीबी सिर्फ एक मानसिक अवस्था है. बक़ौल राहुल गांधी, जब तक कोई शख्स खुद में आत्मविश्वास नहीं लाएगा तब तक वह गरीबी के मकड़जाल से बाहर नहीं निकल पाएगा. कोई शक न करें इसलिए तब उक्त संस्थान ने बाकायदा प्रेस नोट जारी भी किया था जिसकी लोकतन्त्र में अहमियत किसी हलफनामे से कम नहीं होती.

तब तमाम भाजपाई नेताओं, जिनमें नरेंद्र मोदी का नाम प्रमुखता से शुमार है. उन्होंने राहुल गांधी की जमकर खिल्ली उड़ाई थी और तरह तरह से उड़ाई थी. राहुल गांधी ने किस संदर्भ प्रसंग में यह बात कही थी उससे पहले यह जान लेना जरूरी और दिलचस्प है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब कहीं जाकर उनसे सहमत क्यों हुये हैं. काशी में भाजपा सदस्यता अभियान की शुरुआत करते हुये उन्होंने भी कहा कि गरीबी एक मानसिक अवस्था है. अब अगर इन दोनों नेताओं की मानसिक अवस्था देखें तो लगता क्या है, बल्कि साफ साफ साबित होता है कि 5  साल 11 महीने बाद  मोदी जी ने हूबहू अपने प्रबल प्रतिद्वंदी नेता के बयान में शाब्दिक फेरबदल कर उसे दोहरा दिए हैं. इस पर कोई कापी राइट कानून लागू नहीं होता.

राहुल गांधी तब गोविंद बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान के दलित रिसोर्स सेंटर द्वारा आयोजित एक संगोष्ठी में बोल रहे थे. इस कार्यक्रम का नाम ही संस्कृत नुमा था– संस्कृति – जनतंत्र का प्रसार और अति उपेक्षित समूह. इसमें अति उपेक्षित जातियों कंजर, सपेरा, नट – मुसहर, धरिकार, चमरमंगता और बांसफोड़ आदि के प्रतिनिधि मौजूद थे .

राहुल गांधी ने लोगों से कुछ बड़ी बड़ी बातें कह दी थीं मसलन गरीबी को तब तक खत्म नहीं किया जा सकता जब तक कि गरीब लोग  अपने आत्मविश्वास और आत्मबल के जरिये इससे बाहर नहीं निकलना चाहेंगे. इसी बात को मोदी ने इन शब्दों में कहा कि हम जब तक कम आय और कम खर्च के चक्र में फंसे रहते हैं तब तक यह यानि प्रति व्यक्ति आय न  बढ़ने की स्थिति बनी रहती है. हमारे दिलो दिमाग में गरीबी गर्व का विषय और मानसिक अवस्था बन गई है .

राहुल गांधी का कहना यह भी था कि सिर्फ खाना और पैसा मुहैया हो जाने से लोग गरीबी से उबर नहीं सकते हैं. इस बात को विस्तार देते मोदी का कहना यह है कि ज्यादातर विकासशील देशों के इतिहास को देखें तो वहां भी एक समय में प्रति व्यक्ति आय बहुत अधिक नहीं होती थी लेकिन एक दौर ऐसा भी आया जब प्रति व्यक्ति आय ने जबरजस्त छलांग लगाई. यह और बात है कि उन्होंने ऐसे किसी देश का नाम सहित उदाहरण नहीं दिया और न ही प्रति व्यक्ति व्यय की बात की.

नरेंद्र मोदी दरअसल में अपनी महत्वाकांक्षी 5 लाख करोड़ रु वाली अर्थव्यवस्था की बात करते बेवजह ही विरोधियों खासतौर पर कांग्रेस पर निशाना साध रहे थे कि कुछ लोग पेशेवर निराशावादी होते हैं और भारतीयों की सामर्थ पर शक करते हैं. अपनी जानी पहचानी शैली में उन्होने ज्योमेट्री का सा फार्मूला सुझाया कि परिवार की आमदनी जितनी ज्यादा होगी उसी अनुपात में सदस्यों की आय भी अधिक होगी .

फर्क यह है

इसमें कोई शक नहीं कि राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी दोनों यह मानते हैं कि गरीबी हटाने जरूरी है कि गरीब लोग ज्यादा से ज्यादा मेहनत करें लेकिन दोनों के आइडिये और फलसफे में बड़ा फर्क है. इलाहाबाद में राहुल छोटी जाति वाले मेहनतकश लोगों को एकोनामी की रीढ़ बता रहे थे तो नरेंद्र मोदी ने सत्यनारायन की कथा बाले ब्राह्मण का उदाहरण पेश किया. क्या सत्यनारायन की कथा जैसे चमत्कारों से गरीबी दूर हो सकती है. कम से कम नरेंद्र मोदी तो यह स्वीकारते हैं शायद इसलिए कि उनका राजनैतिक जीवन ऐसे ही चमत्कारों से भरा पड़ा है. 2014 में उनका प्रधानमंत्री बन जाना किसी चमत्कार से कम नहीं था और न ही 2019 में उसका दोहराब साधारण बात थी.

अगर 5 लाख करोड़ वाली अर्थव्यवस्था का लक्ष्य यज्ञ, हवन और कथाओं से छुआ जा सकता है तो फिर गरीबों को उपदेश देना और निराशावाद को पेशेवर बताना एक फिजूल की बात है. यह सच है कि ब्राह्मण तो कथा बांचकर अपनी दरिद्रता दूर कर लेता है लेकिन दलित बेचारा कैसे अमीर बने यह नरेंद्र मोदी शायद ही कभी बता पाएं. हां एक रास्ता है कि सभी पुरोहितयाई करने लगें लेकिन फिर यजमान कौन होगा इस सवाल का जबाब ही निराशा दूर कर सकता है.

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जिस देश में गरीब अपने पिछले और इस जन्म के पापों का फल भोग रहा हो उसे और ज्यादा  मेहनत कर पंडे पुजारियों को दक्षिणा चढ़ाने का मशवरा नरेंद्र मोदी ही दे सकते हैं आखिरकार लोगों ने उन्हें प्रचंड बहुमत से यूं ही नहीं चुन लिया है.

लोग चूंकि 5 लाख करोड़ बाली अर्थव्यवस्था के बाबत सवाल कर रहे हैं इसलिए नरेंद्र मोदी को तकलीफ हो रही है कि आखिर सवाल करने बालों में यह हिम्मत आई तो आई कैसे क्या उनका कह देना ही काफी नहीं क्या.

जबाब 130 करोड़ देशवासियों को देना है कि वे कौन सी अर्थ या अनर्थव्यवस्था चाहते हैं यज्ञ- हवन, पूजा पाठ, आरती और सत्यनारायन की कथा वाली या फिर सड़क, कारखानें, उदद्योग धंधों और रोजगार वाली, लेकिन हैरत वाली बात यह है कि अर्थव्यवस्था को 5 लाख करोड़ के नामुमकिन लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए क्यों नरेंद्र मोदी को राहुल गांधी का बयान या दर्शन चुराना पड़ा और इसी तरह वे इस भूतपूर्व पप्पू के नक्शे कदम पर चलते रहे तो कल को क्या प्रेम की राजनीति की भी बात करेंगे या फिर दिलोदिमाग में पसरी नफरत को जिंदा रखेंगे जिसमें हालफिलहाल उनका ज्यादा फायदा है क्योंकि धर्म, रंग, जाति कुल और गोत्र के आधार पर घृणा भी तो एक आदिम मानसिक अवस्था है.

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मजाक: छुट्टी राग

एक दूसरे ‘टुन्न’ बाबू ने बड़े बाबू के टैंशन की वजह जानने की कोशिश की तो बड़े बाबू उन पर ऐसे फट पड़े जैसे कोई सरकारी पाइप फटता है. अपनी मेज पर पड़ी पैंडिंग फाइल और कागजों के बीच से नए साल का कलैंडर निकाल कर दिखाते हुए वे बोले, ‘‘क्या तुम में से किसी ने नए साल का कलैंडर देखा है? कितनी कम छुट्टियां हैं इस साल…’’

एक छोटे बाबू ने उन के हाथ से कलैंडर लिया और पन्ने पलटा कर शनिवार और रविवार की छुट्टियां गिनने लगे. पूरी गिनती होने के वे बाद बोले, ‘‘ठीक तो है बड़े बाबू. शनिवार और रविवार मिला कर पूरे 104 दिन की छुट्टियां हैं.’’

बड़े बाबू का गुस्सा अब पूरे दफ्तर में वैसे ही बहने लगा जैसे सरकारी पाइप फटने के बाद उस का पानी सरकारी सड़कों पर बहने लगता है. उन्होंने कलैंडर के पहले पन्ने की 26 तारीख पर जोर से बारबार उंगली रखते हुए कहा, ‘‘पहले ही महीने में एक छुट्टी मारी गई है. 26 जनवरी शनिवार को है.’’

अब तक दफ्तर के सारे छोटेबड़े मुलाजिम बड़े बाबू के कलैंडर के इर्दगिर्द जमा हो चुके थे. साल की छुट्टियों का हिसाबकिताब अब दफ्तर का सब से जरूरी काम था.

कलैंडर के अगले पन्ने पलटते हुए बड़े बाबू ने बोलना जारी रखा, ‘‘मार्च में रंग खेलने वाली होली गुरुवार को है. अगर 4 छुट्टियां एकसाथ लेनी होंगी तो एक सीएल बरबाद होगी न.’’

‘‘वैसे भी होली के दूसरे दिन भांग कहां उतरती है. मैं तो अभी से मैडिकल लीव डाल दूंगा,’’ एक और बाबू ने कहा.

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बड़े बाबू ने फिर मोरचा संभाला, ‘‘15 अगस्त पर फिर अपनी एक सीएल शहीद होगी. 15 अगस्त गुरुवार को है और 4 छुट्टियां एकसाथ चाहिए तो शुक्रवार की एक छुट्टी लेनी पड़ेगी.’’

बड़े बाबू कलैंडर के पन्ने पलटते रहे और कहते रहे, ‘‘अक्तूबर में दीवाली रविवार को ही है. फिर एक छुट्टी मारी गई. दिसंबर में 25 तारीख तो ऐसी फंसी है कि न इधर के रहे और न उधर के. सिर्फ एक दिन की छुट्टी मिल पाएगी, वह भी बुधवार को.

‘‘मेरी तो कुछ समझ में ही नहीं आ रहा कि इतनी कम छुट्टियों में कैसे काम चलेगा. ऐसे हालात में आज मैं अब और काम नहीं कर पाऊंगा,’’ इतना कह कर बड़े बाबू दफ्तर से बाहर निकल गए.पर उन के इस ज्ञान गणित से दफ्तर के बाकी मुलाजिम भी अब छुट्टियों के जोड़तोड़ में लग गए थे.

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सावधान! विटामिन की कमी हो सकती है जानलेवा

देश के नागरिकों में विटामिन डी की कमी महामारी का रूप लेती प्रतीत हो रही है. तकरीबन 90 फीसदी आबादी विटामिन डी की कमी से पीडि़त है. देश के सभी हिस्सों में भरपूर मात्रा में धूप होने के बावजूद इतनी अधिक आबादी में विटामिन डी की कमी पाई जाना हैरानी का विषय है. विटामिन डी, जिसे विटामिन धूप भी कहा जाता है, धूप में बैठने से प्राप्त हो जाता है. यह शरीर में होमियोस्टेसिस को संतुलित रख कर हड्डियों को अच्छी सेहत देता है और कई बीमारियों से बचाने में मदद करता है. इस की कमी के प्रतिकूल प्रभावों के साथसाथ इस के हमारी सेहत पर दूरगामी प्रभाव भी होते हैं. विटामिन डी की कमी होने के चलते दिल के रोग, डायबिटीज और कैंसर जैसे रोग भी हो सकते हैं. देश में इस की कमी नवजात बच्चों से ले कर किशोरों, बालिगों, बड़ी उम्र के लोगों और महिला व पुरुषों में एकसमान पाईर् जा रही है. इस के साथ ही, अब गर्भवती महिलाओं और कामकाजी युवाओं में भी यह कमी पाईर् जाने लगी है.

लक्षण

भारतीयों में इस की कमी के कई कारण पाए जाते हैं, जैसे : 

भारतीय चमड़ी की टोन :  मिलेनिन की कमी से चमड़ी की धूप सोखने की क्षमता कम हो जाती है, इसलिए गहरे रंग के भारतीयों को गोरे लोगों के मुकाबले 20 से 40 गुना ज्यादा धूप सेंकनी पड़ती है.

धूप से बचने की सोच :  बहुत से लोग ऐसे हैं जिन का रंग साफ है, वे यह सोचते हैं कि वे ज्यादा सुंदर दिखते हैं. इस मानसिकता के चलते लोग तीव्र धूप के समय बाहर निकलने से कतराते हैं या अत्यधिक एसपीएफ वाले सनस्क्रीन लोशन लगाते हैं. लोग बच्चों को बाहर धूप में खेलने के लिए भी नहीं भेजते, घर के अंदर ही खेलने के लिए उत्साहित करते हैं. फिर भी अगर किसी को बाहर जाना पड़े तो वह अपनेआप को पूरी तरह से ढक लेता है. इस तरह धूप से कतराने की वजह से शरीर में विटामिन डी की अत्यधिक कमी हो जाती है.

शाकाहारी भोजन को प्राथमिकता :  विटामिन डी आमतौर पर पशुओं से मिलने वाले खाद्य पदार्थों में पाया जाता है, जिन में डेयरी उत्पाद, अंडे, मछली आदि शामिल हैं. लेकिन ज्यादातर भारतीय शाकाहारी भोजन को प्राथमिकता देते हैं, जिस वजह से विटामिन डी की कमी होने की संभावना रहती है.

तनावपूर्ण कामकाजी माहौल :  बढ़ते कामकाजी दबाव और प्रतिस्पर्धा के माहौल में युवा पीढ़ी में विटामिन डी की कमी पाई जाती है. इस का मुख्य कारण बंद केबिनों में पूरा दिन बैठ के घंटों काम करना है, जिस वजह से वे लंबे समय तक धूप से दूर रहते हैं.

तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता : तकनीक के फायदों के साथ इस के नुकसान भी होते हैं. युवा अपने दोस्तों के साथ धूप में फुटबाल के मैदान में खेलने का मजा नहीं ले पाते. या तो वे पूरे दिन घर के अंदर बैठ कर वीडियो गेम खेलते हैं या फिर पूरे दिन टीवी के सामने बैठे रहते हैं. मनोरंजन के लिए तकनीक पर इतनी अधिक निर्भरता बच्चों को धूप से दूर रखती है और उन में विटामिन डी की कमी होने की संभावना बढ़ जाती है.

विटामिन डी फोर्टिफिकेशन के लिए राष्ट्रीय नीति न होना :  पश्चिमी देशों के मुकाबले भारत में फूड फोर्टिफिकेशन की कोई नीति नहीं है. अमेरिका और कनाडा में लागू फोर्टिफिकेशन कार्यक्रम को काफी सफलता मिली है. यूएसए में दूध की फोर्टिफिकेशन 1930 से लागू है, जबकि विटामिन डी की फोर्टिफिकेशन स्वैच्छिक है. फोर्टिफिकेशन का अर्थ किसी उपचार में मौजूद तत्वों की मात्रा से है. जरूरत से ज्यादा फोर्टिफिकेशन न हो, इसलिए इस पर सख्ती से नियंत्रण किया जाता है. यूएस में बिकने वाले ज्यादातर दूध में विटामिन डी मिलाया जाता है. पनीर और पनीरयुक्त उत्पादों को भी फोर्टिफिकेशन की मान्यता प्राप्त है. कुछ कंपनियां नाश्ते के उत्पादों दलिया, सोया दूध, राइस मिल्क और संतरे के जूस में विटामिन डी कैल्शियम के साथ डालती हैं. इस तर्ज पर अगर भारत में राष्ट्रीय नीति लागू की जाए तो यह इस महामारी को काबू करने में मदद कर सकती है.

अस्वस्थ खानपान आदतें :  औद्योगिकीकरण की वजह से लोगों में माइक्रोन्यूट्रिंएंट्स ग्रहण करने में कमी आ गई है, क्योंकि खाद्य उद्योग पूरी तरह से नमक, चीनी, सब्जियों की वसा और रिफाइंड अनाज पर निर्भर करता है, जो विटामिन और खनिज पदार्थों के बहुत ही कम गुणवत्ता के स्रोत हैं. जो लोग अपना पूरा पोषण इन्हीं उत्पादों से लेते हैं उन की पोषक तत्त्वों की प्रतिदिन की आवश्यक खुराक उन्हें मिल नहीं पाती, जिन में विटामिन डी की कमी भी शामिल है.

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अज्ञानता व उपेक्षा

यह बीमारी जांच के दायरे में बहुत कम आ पाई है. इस की वजहें हैं :

लोगों को विटामिन डी की कमी से होने वाले खतरों के बारे में पता ही नहीं है.

डाक्टर मरीजों को विटामिन डी के महत्त्व के बारे में जागरूक ही नहीं करते हैं.

लोग छोटीमोटी थकावट और दर्द को बहुत गंभीरता से नहीं लेते और उन का इलाज आम दुकानों पर उपलब्ध दर्दनिवारक गोलियों से कर लेते हैं. लेकिन जो बात उन्हें नहीं पता, वह यह है कि मामूली थकान और दर्द विटामिन डी की कमी की वजह से होते हैं.

इस बीमारी के स्पष्ट लक्षण पता न होने की वजह से इस की जांच नहीं हो पाती. लोगों में इस बात की जानकारी की भी कमी है कि विटामिन डी की कमी से सिर्फ हड्डियों पर ही नहीं, संपूर्ण सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ता है. नतीजतन, विटामिन डी की कमी को हलके में नहीं लेना चाहिए. इस के कई तुरंत प्रभाव और कई दूरगामी प्रतिकूल प्रभाव सेहत पर पड़ते हैं. इस के चलते कई जानलेवा बीमारियां जैसे कैंसर, दिल की बीमारियां और डायबिटीज के होने की संभावना बढ़ जाती है. इस कमी को जागरूकता फैलाने व सेहतमंद जीवनशैली अपनाने, फोर्टिफिकेशन की राष्ट्रीय नीति बनाने और सप्लीमैंटेशन के जरिए काबू में किया जा सकता है.

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(लेखक मुंबई के सैफी अस्पताल में एंडोक्राइनोलौजिस्ट, डायबिटोलौजिस्ट और मैटाबोलिक स्पैशलिस्ट हैं.)

नवादा का फ्लाई गीजर

दुनिया में प्राकृतिक रूप से बनी ऐसी तमाम जगह हैं, जिन्हें देख कर इंसान सोचने को मजबूर हो जाता है कि इसका रहस्य क्या है. यहां जो तसवीर आप देख रहे हैं, वह है फ्लाई गीजर यानी गर्म पानी का फव्वारा.

5 फीट ऊंचा और 12 फीट चौड़ा यह फव्वारा हर समय गर्म पानी फेंकता रहता है, जिस का सामान्य तापमान 93 डिग्री सेल्सियस रहता है. माना जाता है कि धरती की सतह के नीचे ज्वालामुखीय चट्टानों में होने वाले नियमित विस्फोट और टेक्टोनिक मूवमेंट की वजह से ही यह फव्वारा फूटता है.

यही वजह है कि इस के पानी का तापमान इतना अधिक है. इस के अलावा यहां पर एक विशेष तरह का शैवाल थर्मोफिलिक पाया जाता है, जो नम और गर्म वातावरण में खिल उठता है. इस शैवाल की वजह से चट्टानों का रंग लाल और हरा हो जाता है.

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अमेठी: किसके इशारे पर हुई हत्या

उत्तर प्रदेश का अमेठी हाल ही में पूरे देश में चर्चा का विषय रहा है. इस का कारण यह था कि अमेठी सीट पर अधिकांशत: कांग्रेस के गांधी परिवार का कब्जा रहा. पहले स्व. राजीव गांधी, फिर उन की पत्नी सोनिया गांधी और इस के बाद उन के बेटे राहुल गांधी अमेठी से सांसद चुने गए थे.

राहुल लगातार 3 बार अमेठी से सांसद चुने गए. लेकिन इस बार भाजपा की स्मृति ईरानी ने राहुल को शिकस्त दे कर अमेठी लोकसभा सीट पर कब्जा कर लिया. गनीमत यह रही कि राहुल गांधी केरल में वायनाड लोकसभा सीट पर चुनाव जीत गए, वरना कांग्रेस पार्टी को बहुत बड़ा झटका लगता. कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने वाले राहुल की अमेठी से पराजय को राजनीतिक नजरिए से करारा झटका माना गया.

लोकसभा चुनाव की मतगणना 23 मई, 2019 को हुई थी. शाम तक चुनाव परिणाम घोषित हो गया था. पूरे अमेठी इलाके में भाजपा की ओर से स्मृति ईरानी की जीत की खुशी का जश्न मनाया जा रहा था. दूसरी ओर कांग्रेस प्रत्याशी राहुल गांधी की पराजय से कांग्रेसियों के चेहरे पर मायूसी छाई हुई थी.

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चुनाव परिणाम आने के 2 दिन बाद ही 25 मई की रात करीब साढ़े 11 बजे अमेठी इलाके के बरौलिया गांव में पूर्व प्रधान भाजपा नेता सुरेंद्र सिंह की गोली मार कर हत्या कर दी गई. उन की हत्या सोते समय की गई थी. गरमी का मौसम होने के कारण सुरेंद्र सिंह अपने घर के बाहर अर्द्धनारीश्वर मंदिर के पास चारपाई पर सो रहे थे. हमलावर 2 बाइकों पर सवार हो कर आए थे.

सिर में गोली लगने से सुरेंद्र गंभीर रूप से घायल हो गए थे. उन्हें इलाज के लिए तुरंत जायस स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया. डाक्टरों ने वहां से उन्हें रायबरेली जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया.

परिजनों को लगा कि सुरेंद्र सिंह का इलाज रायबरेली के बजाए लखनऊ मैडिकल कालेज में अच्छा हो सकता है, इसलिए वे उन्हें रात को ही लखनऊ ले जा रहे थे, तभी रास्ते में उन्होंने दम तोड़ दिया. बाद में लखनऊ में ही सुरेंद्र सिंह के शव का पोस्टमार्टम किया गया.

भाजपा नेता सुरेंद्र सिंह अमेठी से नवनिर्वाचित सांसद स्मृति ईरानी के काफी नजदीकी थे. उन्होंने स्मृति को लोकसभा चुनाव जिताने के लिए काफी मेहनत की थी. इस के चलते चर्चा यह होने लगी कि सुरेंद्र सिंह की हत्या राजनीतिक कारणों से चुनावी रंजिश को ले कर की गई.

भाजपा नेता सुरेंद्र सिंह की मौत की जानकारी मिलने पर बरौलिया ही नहीं, पूरे अमेठी में रोष छा गया. लोगों ने सांसद स्मृति ईरानी और पुलिस को घटना की सूचना दी. हाईप्रोफाइल मामला होने और हत्या राजनीतिक रंजिश में किए जाने के कारण पुलिस ने पूरे इलाके में नाकेबंदी कर हत्यारों की तलाश शुरू कर दी. दिवंगत भाजपा नेता सुरेंद्र सिंह के बड़े भाई नरेंद्र सिंह की तहरीर पर 26 मई, 2019 को जामो थाने में पुलिस ने 2 सगे भाइयों नसीम और वसीम के अलावा गोलू, धर्मनाथ गुप्ता और रामचंद्र के खिलाफ षडयंत्र रच कर हत्या करने का मामला दर्ज कर लिया.

पुलिस को दी तहरीर में नरेंद्र सिंह ने बताया कि 25 मई की रात मेरे छोटे भाई सुरेंद्र और भतीजा अभय घर के बाहर सोए हुए थे. फायर की आवाज सुन कर हम लोग जागे तो देखा कि वसीम, नसीम और गोलू मेरे भाई सुरेंद्र सिंह को गोली मार कर भाग रहे थे.

सड़क पर रामचंद्र खड़ा था. पुरानी राजनीतिक रंजिश होने के कारण धर्मनाथ गुप्ता भी इस षडयंत्र में शामिल है. रामचंद्र से मेरे भतीजे अभय का पहले भी विवाद हुआ था. भाई की हत्या में अन्य लोगों का भी हाथ हो सकता है.

इन में रामचंद्र ब्लौक डेवलपमेंट काउंसिल यानी बीडीसी सदस्य है. धर्मनाथ गुप्ता ग्रामप्रधान का पूर्व प्रत्याशी है. ये सभी आरोपी कांग्रेस से जुड़े हैं. वसीम को झोलाछाप डाक्टर बताया गया था.

दूसरी ओर भाजपा के कर्मठ नेता सुरेंद्र सिंह की हत्या की जानकारी मिलने पर स्मृति ईरानी 26 मई को बरौलिया गांव पहुंच गईं. उन्होंने दिवंगत सुरेंद्र सिंह की मां, बड़े भाई, पत्नी, दोनों बेटियों और बेटे से मुलाकात कर ढांढस बंधाया और उन्हें हरसंभव मदद का वादा किया. उन्होंने कहा कि भाई सुरेंद्र सिंह के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए वह सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगी.

भाजपा जिलाध्यक्ष दुर्गेश त्रिपाठी ने सुरेंद्र सिंह की हत्या को ले कर यह फैसला किया कि 13 दिन तक जिले में पार्टी की जीत का किसी भी तरह का कोई जश्न नहीं मनाया जाएगा.

सुरेंद्र सिंह की हत्या को उत्तर प्रदेश सरकार ने गंभीरता से लिया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि हत्या के आरोपियों को 24 घंटे में गिरफ्तार करें. मामला सत्तापक्ष से जुड़ा हुआ था, इसलिए पुलिस जांच में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती थी. पुलिस के कई उच्चाधिकारियों ने बरौलिया गांव में कैंप डाल लिया. अफसरों के निर्देशन में पुलिस ने सुरेंद्र सिंह की हत्या के आरोपियों की तलाश में लगातार कई जगह छापे मारे.

27 मई को पुलिस ने 3 आरोपियों नसीम, रामचंद्र और धर्मनाथ गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने इन से .315 बोर का देशी तमंचा, मोबाइल फोन और एक तौलिया बरामद किया. तौलिए पर खून के निशान लगे हुए थे.

29 मई को एक अन्य आरोपी अतुल सिंह उर्फ गोलू को भी गिरफ्तार कर लिया गया. गोलू से भी एक तमंचा बरामद किया गया. बाद में पुलिस ने 30 मई की रात को पांचवें आरोपी वसीम को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया. मुठभेड़ में जामो कोतवाली प्रभारी राजीव सिंह भी घायल हुए.

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वसीम उस रात जामो से बाइक पर जगदीशपुर की ओर जा रहा था. रास्ते में सलाहापुर तिराहे पर पुलिस ने उसे रोकने की कोशिश की तो उस ने फायरिंग कर दी. मुठभेड़ में वसीम के पैर और जामो थानाप्रभारी के बाएं हाथ में गोली लगी. पुलिस ने वसीम से बाइक के अलावा तमंचा और कारतूस बरामद किए. कहा जाता है कि सुरेंद्र सिंह ने किसी मामले में सन 2013 में वसीम को जेल भिजवाया था. हत्या का एक कारण यह भी रहा.

पुलिस ने सुरेंद्र सिंह हत्याकांड में गलत ट्वीट करने के मामले में एक युवक गौरव पांधी पर 1 जून को अमेठी जिले के गौरीगंज थाने में मुकदमा दर्ज किया. इस युवक ने अपने ट्विटर एकाउंट पर लिखा था, ‘डीजीपी महोदय ने लखनऊ में प्रैस कौन्फ्रैंस में बताया कि पूर्वप्रधान सुरेंद्र सिंह की हत्या बीजेपी के नेताओं ने कराई है.’

सोशल मीडिया पर इस तरह के गलत ट्वीट से समाज में वैमनस्यता और भ्रम फैलने की आशंका में उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक ने मामले में संज्ञान लेते हुए अमेठी के एसपी को संबंधित व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए.

कहा जाता है कि सियासत में सुरेंद्र सिंह का बढ़ा कद ही उन की जान का दुश्मन बन गया. सुरेंद्र के बढ़ते राजनीतिक वर्चस्व को खत्म करने के लिए विरोधियों ने उन की जान ले ली.

बरौलिया गांव के साथ जामो ब्लौक की सियासत में पिछले 4 दशक से सक्रिय सुरेंद्र सिंह को पहला राजनीतिक मुकाम सन 2005 में तब मिला, जब वह बरौलिया गांव की सामान्य सीट से ग्रामप्रधान चुने गए. पिछड़ी और दलित जाति की बहुलता वाली ग्राम पंचायत के मुखिया का पद मिलने के बाद सुरेंद्र सिंह का प्रभाव जल्द ही बढ़ गया. इस से पहले वह भाजपा संगठन में जामो मंडल अध्यक्ष थे.

इस बीच सन 2010 में हुए पंचायत चुनाव में बरौलिया में प्रधान पद की सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई. इस से विरोधियों को लगा कि अब सुरेंद्र सिंह की राजनीति खत्म हो जाएगी. लेकिन जब चुनाव हुए तो सुरेंद्र सिंह के खास आदमी शोभन की पत्नी सूर्यसती रिकौर्ड वोटों से प्रधान बन गई.

बाद में 2015 के चुनाव में प्रधान पद की सीट पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित हुई तो एक बार सुरेंद्र सिंह का करीबी रामप्रकाश गांव का प्रधान बन गया.

इन 15 सालों में सुरेंद्र सिंह भी गांव की सियासत से निकल कर अमेठी की राजनीति का जानापहचाना चेहरा बन गए. इस दौरान वह भाजपा के जिला उपाध्यक्ष के पद पर भी रहे. जामो ब्लौक में पैतृत गांव अमर बोझा से 2 किलोमीटर दूर कमालनगर में अर्द्धनारीश्वर मंदिर के पास बना उन का आशियाना राजनीति का अड्डा बन गया. यहां हर आम और खास लोग बैठने लगे. यह बात उन के विरोधियों को हजम नहीं हो रही थी.

इस बार हुए लोकसभा चुनाव में सुरेंद्र सिंह भाजपा प्रत्याशी स्मृति ईरानी के प्रचार में जीजान से जुट गए. सुरेंद्र ने अपनी मेहनत से बरौलिया के अलावा आसपास के इलाके के वोट स्मृति ईरानी को दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. सुरेंद्र सिंह चुनाव प्रचार के दौरान लगातार स्मृति ईरानी के संपर्क में रहे. वैसे स्मृति के संपर्क में वह कई साल से थे.

सन 2014 के लोकसभा चुनाव में स्मृति ईरानी ने भाजपा प्रत्याशी के रूप में अमेठी से ही चुनाव लड़ा था, तब वह जीत नहीं सकी थीं. उस समय भी सुरेंद्र सिंह ने उन का पूरा साथ दिया था. सुरेंद्र की मेहनत से स्मृति ईरानी ने इन चुनावों में बरौलिया गांव से सर्वाधिक वोट हासिल किए थे.

इस का परिणाम यह रहा कि बाद में स्मृति ईरानी ने केंद्र सरकार में मंत्री बनने पर राज्यसभा सांसद मनोहर पर्रिकर को बरौलिया गांव को गोद लेने का आग्रह किया. पर्रिकर ने प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत इस गांव को गोद लिया और 5 साल में सुरेंद्र सिंह के मार्फत 16 करोड़ से ज्यादा के विकास कार्य करवाए थे. अब स्मृति ईरानी के जीतने पर यह तय था कि वह केंद्र सरकार में फिर से मंत्री बनाई जाएंगी. इस से सुरेंद्र सिंह के विरोधियों को अपनी राजनीति खत्म होती नजर आई.

इस बीच चुनाव परिणाम घोषित होने के दूसरे दिन 24 मई को भाजपा की जीत पर बरौलिया गांव में स्मृति ईरानी की जीत पर सुरेंद्र सिंह के नेतृत्व में भाजपा की ओर से बड़े जश्न का आयोजन किया गया. इस दौरान निकाले गए विजय जुलूस को देख कर सुरेंद्र सिंह के विरोधियों के सीने पर सांप लोट गया और उन्होंने सुरेंद्र को खत्म करने का निर्णय लिया.

कहा जाता है कि वारदात से पहले पांचों आरोपियों ने गांव में एक जगह बैठ कर शराब पी. इस के बाद वे सुरेंद्र सिंह की हत्या के लिए कमालनगर पहुंचे. सुरेंद्र को गोली मारे जाने की घटना से कुछ देर पहले ही गांव की बिजली गुल हो गई थी, जो वारदात के कुछ देर बाद ही आ गई.

इस तरह अचानक बिजली गुल हो जाने की बात को भी लोगों ने इस घटना से जोड़ कर देखा. हालांकि प्रशासन या बिजली विभाग की ओर से इस बारे में कुछ नहीं बताया गया, लेकिन लोगों का मानना था कि इस मामले में मिलीभगत कर बिजलीघर से कुछ देर के लिए सप्लाई बंद कराई गई.

सुरेंद्र सिंह के 90 साल के पिता शिवभवन सिंह और बूढ़ी मां कमला अभी जीवित हैं. बूढ़े शिवभवन सिंह के लिए बेटे सुरेंद्र सिंह की मौत किसी वज्रपात से कम नहीं थी.

इस से पहले उन के छोटे बेटे जितेंद्र सिंह की मौत हो गई थी. अब शिवभवन सिंह का केवल एक बड़ा बेटा नरेंद्र सिंह ही रह गया है. 2 बेटों को खो देने वाले शिवभवन सिंह चारपाई पर बेसुध पड़े रहते हैं.

दिवंगत सुरेंद्र के परिवार में उन की पत्नी रुक्मणि सिंह के अलावा 2 विवाहित बेटियां पूजा और प्रतिभा हैं. एक बेटा अभय प्रताप सिंह अभी अविवाहित है. पैतृक गांव अमरबोझा वाले मकान में सुरेंद्र के मातापिता और भाइयों का परिवार रहता है. सुरेंद्र का परिवार अमरबोझा के पास ही बरौलिया गांव के कमालनगर में रहता है.

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उत्तर प्रदेश सरकार ने सुरेंद्र सिंह की मौत के बाद उन के बेटे अभय प्रताप सिंह को पुलिस सुरक्षा मुहैया करा दी है. उन के घर पर भी सुरक्षा के लिहाज से पुलिस तैनात की गई है. सांसद स्मृति ईरानी ने घोषणा की है कि जिस जगह सुरेंद्र सिंह की हत्या की गई थी, वहां उन की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी ताकि उन की याद बनी रहे.

पुलिस ने हालांकि सुरेंद्र सिंह की हत्या के आरोप में सभी मुलजिमों को गिरफ्तार कर लिया है. लेकिन इस मामले में   पुरानी राजनीतिक रंजिश की बात भी सामने आई है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं हुआ कि सुरेंद्र सिंह की हत्या किस के इशारे पर की गई. पुलिस इस की जांच कर रही है.

(कहानी सौजन्य- मनोहर कहानियां)

बस एक अफेयर

‘‘अब आ भी जाओ सुनी, इतनी देर से कंप्यूटर पर क्या कर रही है?’’

सुनील अधीर हो रहा था सुनयना को अपनी बांहों में लेने के लिए, पर सुनयना को उसे तड़पाने में मजा आ रहा था. उस ने एक नजर सुनील को देखा, फिर शरारत से मुसकरा कर वापस कंप्यूटर पर अपना काम करने लगी.

‘‘आ रही हूं, बस अपनी प्रोफाइल पिक्चर लगा दूं.’’

‘‘अरे नहीं, ऐसा मत करना. तुम्हारा यह दीवाना क्या कम है जो अब फेसबुक पर भी अपने दीवानों की फौज खड़ी करना चाहती हो,’’ सुनील परेशान होने का नाटक करता हुआ बोला.

सुनयना ने उस की बात पर ध्यान न देते हुए फोटोगैलरी से एक खूबसूरत सी फोटो ढूंढ़ निकाली, जिस में उस ने पीले रंग की सिल्क की साड़ी पहनी हुई थी और अपने सुंदर, लंबे, कालेघने बालों को आगे की ओर फैला रखा था. अपनी प्रोफाइल पिक्चर लगाते हुए वह गुनगुनाने लगी, ‘‘ऐ काश, किसी दीवाने को हम से भी मोहब्बत हो जाए…’’

‘‘है वक्त अभी तौबा कर लो अल्लाह मुसीबत हो जाए,’’ सुनील ने गाने की आगे की लाइन को जोड़ा और उसे कंप्यूटर टेबल से अपनी गोद में उठा कर बैड पर ले आया. सुनील की बांहों में सिमटी सुनयना के चेहरे पर आज अजब सी मुसकराहट थी.

‘‘अब पता चलेगा बच्चू को, हर वक्त मुझे चिढ़ाता रहता है.’’

सुदर्शन व्यक्तिव और हंसमुख स्वभाव का धनी सुनील कालेज में सभी लड़कियों के आकर्षण का केंद्र था. उस के पास गर्लफ्रैंड्स की लंबी लिस्ट थी जिन्हें ले कर वह अकसर सुनयना को चिढ़ाया करता था और सुनयना चिढ़ कर रह जाती थी. कभीकभी सोचती कि काश, शादी से पहले उस का भी कम से एक अफेयर तो होता, तो वह भी सुनील को करारा जवाब दे पाती.

सुनील के मोबाइल की फोटोगैलरी में न जाने कितनी लड़कियों की फोटोज होतीं जिन्हें दिखादिखा कर वह सुनयना को चिढ़ाता और उस की आंखों में जलन व चेहरे पर कुढ़न देख कर मजे लेता रहता. पर उसे यह कह कर मना भी लेता, ‘‘ये सब तुम्हारे आगे पानी भरती हैं सुनी, कहां ये सब लड़कियां और कहां तुम, तभी तो मैं ने तुम्हें चुना है. लाखों में एक है मेरी सुनी,’’ कहतेकहते सुनील उसे बांहों में भर लेता और सुनयना भी उस की आगोश में आ कर समंदर में गोते लगाती. थोड़ी देर के लिए सारी जलन और कुढ़न भूल जाती. पर एक अफेयर तो उस का भी होना चाहिए था, यह बात अकसर उसे परेशान कर जाती.

‘‘मैं मान ही नहीं सकता कि शादी से पहले तुम्हारा कोई बौयफ्रैंड नहीं रहा होगा. अरे, इतनी सुंदर लड़की के पीछे तो लड़कों की भीड़ चलती होगी.’’

कभीकभी सुनील छेड़ता तो सुनयना को वह लड़का याद आ जाता जिस ने उसे तब देखा था जब वह अपनी सहेली रमा के साथ उन के समाज के एक विवाह सम्मेलन में शामिल होने गई थी. रमा ने बताया था कि उस लड़के की शादी उस की बूआ की बेटी के साथ होने वाली है. बाद में पता चला कि उस लड़के ने वहां रिश्ता करने से मना कर दिया था क्योंकि उसे पहली नजर में ही सुनयना भा गई थी. उस के बाद वह जहां भी जाती, उस लड़के, जिस का नाम मनोज था, को अपने पीछे पाती. पर बड़ी चतुराई से वह उसे नजरअंदाज कर जाती थी. वैसे देखने में मनोज किसी हीरो से कम नहीं लगता था पर बात यहां दिल की थी. सुनयना का दिल तो कभी किसी पर आया ही नहीं. आया तो आया बस सुनील पर ही जब वह उसे देखने अपने मम्मीपापा के साथ आया था. पहली नजर का प्यार बस उसी पल जागा था और आंखें मौन स्वीकृति दे चुकी थीं.

पहले पगफेरे के लिए जब मायके आई और सुनील के साथ साड़ी मार्केट गई थी तब एक दुकान पर टंगी साड़ी सुनील को पसंद आ रही थी. दुकानदार से मुखातिब हुए तो मनोज सामने आ गया. सुनयना ने झेंप कर उसे भैया कह कर संबोधित किया तो मनोज के चेहरे का रंग उड़ गया.

अगले दिन अपनी फेसबुक प्रोफाइल देखी तो 20 फ्रैंड रिक्वैस्ट आ चुकी थीं. सुनयना मुसकरा कर सब की प्रोफाइल का मुआयना करने लगी. मैसेंजर पर भी ढेरों मैसेज आए थे. सारे मैसेज उस की तारीफों के पुल से अटे पड़े थे. एक मैसेज पढ़ कर उस के चेहरे पर मुसकान आ गई जिस में लिखा था-

‘आप बहुत खूबसूरत हैं. काश, आप मुझे पहले मिल जातीं, तो मैं आप से शादी कर लेता.’

‘पर आप मुझ से बहुत छोटे हैं, फिर यह कैसे संभव होता,’ सुनयना ने लिखा तो वहां से भी जवाब आ गया.

‘प्यार उम्र नहीं देखता मैम, प्यार तो हर सीमा से परे अपनी मंजिल ढूंढ़ लेता है.’ वहां से जवाब आया तो सुनयना ने स्माइल करता इमोजी डाल दिया. उस का नाम सौरभ था और वह दिल्ली में रहता था.

अब तो जब भी सुनयना फेसबुक पर आती, सौरभ से चैटिंग होती. उस की बातों से लगता था कि वह सुनयना का दीवाना हो चुका था. इन दिनों सुनील को भी सुनयना कुछ ज्यादा ही खूबसूरत और रोमांटिक लगने लगी थी. अब उस ने सुनील की सहेलियों से चिढ़ना भी बंद कर दिया था. जब भी सुनील उसे किसी लड़की की फोटो दिखा कर चिढ़ाता, तो वह चिढ़ने के बजाय मंदमंद मुसकराने लगती.

‘‘आजकल तुम बहुत बदल गई हो, पहले से ज्यादा खूबसूरत हो गई हो, ज्यादा संवर कर रहने लगी हो. क्या बात है, कहीं सचमुच मेरा कोई रकीब तो पैदा नहीं हो गया.’’ सुनील कभीकभी हैरानी से कहता तो सुनयना भी आंखें मटका कर जवाब देती.

‘‘हो सकता है.’’

‘‘पर जरा, संभल कर, इन मनचलों का कोई भरोसा नहीं, खुद को किसी मुसीबत में न फंसा लेना.’’

‘‘डौंट वरी सुनील, ऐसा कुछ नहीं होगा,’’ सुनयना लापरवाही से कहती.

आजकल वह जल्दी काम से फ्री हो कर औनलाइन आ जाती. रोजाना चैट करते हुए सौरभ उस से काफी खुल चुका था. मैम से सुनयना और तुम संबोधन तक बात पहुंच गई थी.

‘‘सुनयना मैं तुम से प्यार करने लगा हूं.’’

‘‘सौरभ, तुम नहीं जानते मैं, शादीशुदा हूं.’’

‘‘इस से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता. मैं सिर्फ इतना जानता हूं कि अब मेरा तुम्हारे बिना रहना मुश्किल होता जा रहा है. तुम अब मेरी जान बन चुकी हो और मुझे तुम से मिलना है, बस.’’

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‘‘मैं तुम से नहीं मिल सकती सौरभ और वैसे भी तुम अपनी हद पार कर रहे हो.’’

‘‘हद तो पार हो ही चुकी है सुनयना. बस, तुम जल्दी से अपना पता बता दो. मैं आ जाऊंगा.’’

बहुत समझाने पर भी सौरभ एक ही बात पर अड़ गया तो सुनयना को झुंझलाहट होने लगी. उस ने कुढ़ते हुए सौरभ को ब्लौक किया और बुदबुदाने लगी, ‘ये सारे लड़के एकजैसे होते हैं. सिर्फ चैटिंग काफी नहीं थी, जो मिलना चाहता है. मैं बिना अफेयर के ही भली थी.’

शाम को जब सुनील घर आया तो उस का उखड़ा हुआ मूड देख कर तुरंत माजरा समझ गया.

‘‘क्यों, कर दिया उसे ब्लौक?’’ सुनील ने कहा. सुनयना देखती रह गई. ‘इसे यह कैसे पता चल गया.’ सुनील सुनयना को देख कर हंसे जा रहा था.

‘‘यहां मेरी जान पर बन आई है और तुम्हें हंसी सूझ रही है,’’ सुनयना ने खिसियाते हुए कहा.

‘‘हंसूं नहीं तो और क्या करूं सुनी, यह अफेयरवफेयर तुम्हारे बस की बात नहीं. और उस लड़के से डरने की जरूरत नहीं. मैं इस तरह के लड़कों को अच्छी तरह जानता हूं. इन लोगों की सोच ही घटिया होती है.’’

सुनील की बात सुन कर सुनयना की फिक्र कुछ कम हुई और सुनील ने उस के सामने अपने मोबाइल से सारी लड़कियों की फोटोज डिलीट कर दीं. सौरभ को ब्लौक करने के बाद भी कुछ दिनों तक सुनयना का मूड थोड़ा उखड़ाउखड़ा रहा. इसलिए उस ने फेसबुक पर लौगइन नहीं किया था. पर एक दिन बोरियत से परेशान हो कर उस ने सोचा, आज फेसबुक पर सहेलियों से कुछ चैटिंग करती हूं और उस ने लौगइन किया तो यह देख कर अवाक रह गई कि सौरभ ने अपनी दूसरी आईडी बना कर उसे वापस न सिर्फ फ्रैंड रिक्वैस्ट भेजी, बल्कि इनबौक्स में उस के लिए ढेर सारे मैसेज भी छोड़ रखे थे.

‘‘यों मुझे ब्लौक कर के मुझ से पीछा नहीं छूटेगा जानेमन. मेरी फ्रैंड रिक्वैस्ट एक्सैप्ट कर लेना. अब तुम्हारे बिना जिया नहीं जाता.’’

‘‘क्या हुआ फेसबुक छोड़ कर भाग गईं क्या?’’

‘‘अपना पता दे दो, प्लीज.’’

इस तरह के मैसेज पढ़ कर सुनयना का सिर घूम गया.

‘यह क्या मुसीबत पाल ली मैं ने. अब क्या होगा, यह तो पीछे ही पड़ गया.’

सोचसोच कर सुनयना परेशान हो रही थी. उस ने गुस्से में फेसबुक बंद किया और सिर पकड़ कर बैठ गई. पर इस मुसीबत की हद उतनी नहीं थी जितनी उस ने सोची थी. सौरभ उस की सोच से बढ़ कर मक्कार निकला, उस ने सुनयना की फेसबुक आईडी हैक कर ली और उस की सहेलियों को उलटेसीधे मैसेज भेजने शुरू कर दिए. सुनयना को तब पता चला जब उस की सहेलियों के फोन आने शुरू हुए. आखिर उस ने सार्वजनिक मैसेज कर सब से माफी मांगी और सब को बताया कि उस की फेसबुक आईडी हैक हो चुकी है. हार कर उसे अपनी फेसबुक आईडी डिऐक्टिवेट करनी पड़ी. पर सौरभ कहां पीछा छोड़ने वाला था. उस रोज सुबह घर के काम से फ्री हो कर अपने बैड पर बैठी मैगजीन पढ़ रही थी कि तभी दरवाजे की घंटी बजी. दरवाजा खोला तो सौरभ को सामने पा कर वापस दरवाजा बंद करने लगी पर सौरभ उसे ढकेल कर अंदर आ गया.

‘‘तुम, तुम यहां कैसे? घर का पता कहां से मिला?’’

सुनयना के शब्द उस के मुंह में ही अटक रहे थे.

‘‘हम प्यार करने वाले हैं जानेमन, फिर आजकल किसी का भी पता ढूंढ़ना मुश्किल थोड़े ही है. वोटर आईडी से किसी का भी पता मालूम चल जाता है. बस, हम ने तुम्हारा पता ढूंढ़ा और पहुंच गए अपनी जान से मिलने.’’

जानेमन, यह शब्द सुन कर सुनयना को खुद से ही घिन आ रही थी और सौरभ सोफे पर धंसा बोलता रहा.

‘‘यार, तुम ने तो एक ही झटके में हम से पीछा छुड़ा लिया और हम हैं कि तुम से प्यार कर बैठे.’’

गुस्से और डर से सुनयना का चेहरा लाल हुआ जा रहा था. पर किसी तरह खुद को संभालते हुए उस ने कहा, ‘‘अब आ ही गए हो तो बैठो, तुम्हारे लिए पानी लाती हूं.’’

उस ने रसोई में जा कर लंबीलंबी सांसें लीं और कुछ सोचने लगी.

‘‘ये लो पानी.’’

कह कर सुनयना सौरभ के सामने बैठ गई और बोली, ‘‘देखो सौरभ, सुनील के घर आने का वक्त हो रहा है, इसलिए अभी तुम जाओ. मैं तुम से वादा करती हूं, तुम से मिलने जरूर आऊंगी.’’

‘‘कब, कहां मिलोगी, जल्दी बताओ,’’ सौरभ के चेहरे पर कुटिल मुसकान आ गई.

‘‘जल्द ही मिलूंगी. यह तुम से वादा रहा.’’

‘‘पहले बताओ, कहां मिलोगी? तभी मैं यहां से जाऊंगा.’’

‘‘फोन पर बता दूंगी. अब जाओ.’’

सौरभ आश्वस्त हो कर चला गया तो सुनयना निढाल सी सोफे पर धंस गई. उस ने कभी सोचा भी नहीं था कि जरा सी दिल्लगी उसे मुसीबत में डाल देगी.

‘‘मैं ने तुम से कहा था मुसीबत में मत पड़ जाना. अब पड़ गया न वह पीछे.’’

सुनील को सारी बात पता चली तो वो झल्लाने लगा और सुनयना बस रोए जा रही थी.

‘‘अब रोओ मत, चलो, आंसू पोंछ लो. इस सौरभ को तो मैं ऐसा सबक सिखाउंगा कि याद रखेगा.’’

‘‘क्या करोगे तुम?’’ सुनयना ने अपनी साड़ी के पल्लू से आंसू पोंछते हुए कहा.

‘‘उसे फोन करो और लोधी गार्डन बुलाओ, कहना वहीं मिलोगी.’’

सुनयना लोधी गार्डन में एक बैंच पर बैठी थी. सौरभ सही समय पर आ गया था. वह अपनी जीत पर बड़ी कुटिलता से मुसकरा रहा था पर उस की यह मुसकान ज्यादा देर न रही. सुनील और उस के दोस्त, जो झाडि़यों के पीछे छिपे थे, बाहर आए और सौरभ को घेर लिया.

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‘‘क्यों बे, ज्यादा आशिकी सवार हुई है क्या? शादीशुदा औरतों को फंसाता है?’’

ुकह कर सुनील ने उस की पिटाई शुरू कर दी. इतने सारे लोगों को एकसाथ देख कर उस की सारी आशिकी हवा हो गई और वह भागने लगा. पर उन सब ने उसे पकड़ लिया और पुलिस में देने की बात करने लगे तो सौरभ गिड़गिड़ाने लगा. माफी मांगने और आइंदा कभी ऐसी हरकत न करने का वादा ले कर ही उसे छोड़ा गया. इस तरह एक अफेयर का अंत हुआ.

बर्थडे स्पेशल: ‘कपिल देव’ बने रणवीर सिंह

बौलीवुड सुपरस्टार रणवीर सिंह ने अपनी आने वाली फिल्म 83 का फर्स्ट लुक जारी कर दिया है. इस लुक को जारी करने के लिए फिल्म की टीम ने खास दिन चुना है. आपको बता दें, आज रणवीर सिह का बर्थडे है. इसलिए आज के इस फिल्म का फर्स्ट लुक रिलीज किया गया है. इस लुक में रणवीर सिंह पूर्व भारतीय क्रिकेटर कपलि देव की तरह की दिखाई दे रहे हैं.

 

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रणवीर सिंह ने अपने इंस्ट्राग्राम अकाउंट में कपिल देव के किरदार में तस्वीर शेयर की. इस तस्वीर को शेयर करते हुए रणवीर सिंह ने लिखा, ‘मेरे स्पेशल डे में मैं पेजेंट कर रहा हूं हरियाणा के हरिकेन कपिल देव को.

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इस लुक के रिलीज होते ही ये तस्वीर सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहाी है. फैंस रणवीर के इस लुक के दीवाने हो गए हैं. शादी के बाद रणवीर सिंह का पहला बर्थडे है. ऐसे में इस फिल्म का लुक रणवीर ने शेयर कर अपने इस जन्मदिन को और भी ज्यादा खास बना दिया है. फैंस को रणवीर सिंह का ये तोहफा काफी पसंद आ रहा है.

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बता दें, रणवीर सिंह इन दिनों फिल्म 83 की शूटिंग के लिए लंदन में ही है. इस फिल्म में कपिल देव की पत्नी का किरदार रणवीर सिंह की पत्नी दीपिका पादुकोण निभा रही हैं. जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया में खूब वायरल हो रही थीं. रणवीर सिंह इस फिल्म में कपिल देव की जर्नी के बारें में बताएंगे जिसने सन 1983 में लंदन से भारत को वर्ल्ड कप जिताया था.

तापसी पन्नू ने ‘रंगोली’ को दिया करारा जवाब

बौलिवुड एक्टर कंगना रनौत की फिल्म ‘मेंटल है क्या’ का ट्रेलर रिलीज हुआ. ट्रेलर रिलीज होने के बाद बौलीवुड सेलेब्स ने जमकर तारीफ करनी शुरू कर दी. आपको बता दें, सोशल मीडिया पर तापसी पन्नू और वरुण धवन और ने इस ट्रेलर को देख काफी तारिफ किए. और फिल्म की स्टारकास्ट को शुभकामनाएं भी दी. लेकिन इसी बीच कंगना रनौत की बहन रंगोली चंदेल ने इस सेलेब्स की खिंचाई करनी शुरू कर दी. रंगोली ने ट्रेलर की तारीफ में कंगना का नाम न लिए जाने पर हंगामा किया.

जब तापसी पन्नू ने ‘मेंटल है क्या’ की  ट्रेलर के तारीफ में ट्वीट किया तो कंगना की बहन ने तापसी पर बरसते हुए उन्हें कंगना की सस्ती कापी तक कह डाला. उन्होंने कहा, ‘कुछ लोग कंगना को कापी करके अपनी दुकान चलाते हैं. मगर नोट करिए वो कभी उनका नाम नहीं लेते. यहां तक कि उसकी फिल्म के ट्रेलर की तारीफ करते वक्त भी नहीं. पिछली दफा मैंने तापसी जी को सुना था कि वो कंगना को डबल फिल्टर की सलाह दे रही थ. और तापसी जी आपको कंगना की सस्ती कापी बनने से बचने की जरुरत है.

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रंगोली के इस बयान के बाद तापसी के दोस्त और निर्देशक अनुराग कश्यप ने ‘रंगोली’ को संभल कर बात करने की हिदायत दे डाली. इसके बाद रंगोली ने एक के बाद एक कई ट्वीट किए. लेकिन अब इस पूरे मामले पर एक्ट्रेस तापसी का भी बयान सामने आ गया है.

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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार तापसी ने कहा, ‘मैं इस मुद्दे पर बात नहीं कर रही हूं. मैं एक ऐसी जगह पर हूं जहां लोगों से अपनी निजी जिंदगी में और अपने आसपास की चीजों से सकारात्मक चीज लेती हूं. सही में मेरे पास इन बातों पर जाया करने के लिए वक्त नहीं है.

इस बजट में महिलाओं के लिए क्या है खास?

जैसा कि सभी को पता है कि इस बार मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का ये पहला बजट है और इस बात में कोई दोराय नहीं है कि इस बार एक महिला वित्त मंत्री ने बजट पेश किया है, तो महिलाओं को तो उम्मीद होगी ही कि क्या सस्ता होगा और क्या मंहगा? निर्मला सीतारमण देश की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री हैं और महिलाओं को उम्मीद भी उनसे काफा ज्यादा है.

महिलाओं को सबसे ज्यादा चिंता इसी बात की होती है कि कहीं घरेलू सामान जैसे आटा,दाल,सब्जी जो रोजमर्रा की चीजें हैं वो न महंगी हो क्योंकि घर को चलाना आसान नहीं होता है और महिलाओं को अच्छी तरह पता है कि अगर चीजें महगी हुई तो घर चालाना मुश्किल हो जाएगा. कुछ महिलाओं से बात की हमनें उनका कहना था कि पतियों का क्या है वो तो बस पैसे लाकर दे जाते हैं.

लेकिन जितना देते हैं उतने में एक गृहिणी होने के नाते मुझे सबकुछ मैनेज करना होता है और अगर महंगाई बढ़ेगी बजट हमारे अनुकुल नहीं हुआ तो फिर काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है. वहीं एक दूसरी महिला ने कहा कि मैं वर्किंग वुमन हूं और डेली जाती हूं बाहर मेरी गाड़ी है तो मैं तो यही चाहूंगी कि पेट्रोल महंगा न हो. कभी-कभी हम बाहर खाना खाने जाते हैं तो ऐसे में रेस्टोरेंट्स महंगे न हो. वहीं एक बुजुर्ग मिडिल क्लास की महिला से पूछने पर ये जवाब मिला कि हम तो एकदम नार्मल जिंदगी जीते हैं और ऐसे मैं वित्त मंत्री से यही उम्मीद है कि हमारे रोजमर्रा की चीजें महंगी न हो. हमारे घर में बेटियां है उनकी शादी करनी है. गहने न महंगे हो हम इतना पैसा कहां से ला पाएंगे और शादी भी जरूरी होती है. हालांकि सिर्फ महिलाएं ही नहीं बल्कि पुरुष भी इन चीजों को लेकर काफी परेशान रहते हैं कि आखिर सरकार बजट में क्या सौगात देगी. आइए अब जरा जानते हैं कि इस बार ऐसी कौन सी वस्तुएं महंगी और सस्ती हुईं है जिनसे महिलाओं पर फर्क पड़ेगा.

1.वित्त मंत्री ने अपने पहले ही बजट में महिलाओं को बड़ी सौगात दी है और महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की कोशिश की हैं, अब खाताधारक महिलाओं को 5,000 रुपये ओवरड्राफ्ट की सुविधाएं दी जाएंगी और ‘नारी तू नारायणी’ की घोषणा करते हुए का कि मुद्रा योजना के तहत महिलाओं को 1 लाख का लोन दिया जाएगा.

2. गहनों को लेकर महिलाओं को थोड़ी निराशा हो सकती है क्योंकि सोना और चांदी महंगा हो गया है.

3. अतिरिक्त टैक्स में कामकाजी महिलाओं को कोई राहत नहीं है.

4. वित्त मंत्री ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिला की भागीदीरी एकदम सुनहरी कहानी है …इस सरकार ने महिलाओं की भूमिका को बढ़ाया है और महिला केंद्रित पौलिसी के तहत महिला लीडरशीप को आगे लाने की कोशिश की जा रही हैं.

5.वित्त मंत्री ने कहा इस चुनाव में महिलओं ने रिकौर्ड तोड़ मतदान किए हैं. 78 महिला सांसद चुनी गई हैं, जो महिलाओं के लिए एक अच्छी बात है और महिलाओं को इससे काफी मजबूती मिलेगी.

6. वित्त मंत्री ने ये भी कहा की उज्जवला योजना की वजह से देश की महिलाओं को धुंए से छुटकारा मिला है,हमने महिलाओं के सम्मान के लिए शौचालय बनवाएं हैं और आगे भी इस पर ध्यान दिया जाएगा. क्योंकि देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है.

7. घरेलू वस्तुएं सस्ती हो गई हैं इससे महिलाओं को काफी राहत होगी. बरतन भी सस्ते हो गए हैं.

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