मुसकुराता चेहरा हर किसी को अच्छा लगता है और मुसकराहट का आकर्षण बढ़ाते हैं इंसान के साफ, सेहतमंद दांत. चेहरे को खूबसूरती सिर्फ आंखें व आप के होंठ ही नहीं बयां करते बल्कि मोती जैसे चमचमाते दांत भी चेहरे और मुसकान को सुंदर बनाते हैं. ऐसे में चेहरे और मुसकान को तरोताजा रखने के लिए दांतों की सेहत के बारे में हरेक को जानकारी होनी जरूरी है.

दांतों में दिक्कतें कैसीकैसी और क्यों हो सकती हैं, साथ ही उन का हल क्या है, इन सब व इन के अलावा दांतों की सेहत से जुड़ी और भी बहुत सी जानकारी से आप भी रूबरू हों.

दांत क्यों होते हैं खराब

जब दांत पर अम्ल का हमला होता है तो दांत की ऊपरी परत यानी एनेमल समय के साथसाथ हटनी शुरू हो जाती है. इस के बाद दूसरी पूरत यानी डैंटीन भी हटनी शुरू हो जाती है. फिर नस यानी पल्प अम्ल के संपर्क में आ सकती है. तब रूट कैनाल के उपचार की जरूरत पड़ती है.

बीमारी पनपने के क्या हैं संकेत

ठंडे या गरम पदार्थ से दांतों में तकलीफ महसूस होना, दांत का दर्द जो आता व जाता है, ऐसा दर्द जो रात को जगाए रखता है और जबड़े में या चारों ओर सूजन होना आदि दांतों में रोग के पनपने के इशारे हैं.

किन कारणों से होता है नुकसान

तंबाकू चबाने से दांत घिस जाते हैं. चोट लगने की वजह से दांत टूट सकते हैं. खानपान की गलत आदतें, जैसे मीठा खाने के बाद दांत साफ न करने से दांतों को नुकसान पहुंचता है. ब्रश न करना या ब्रश करने का गलत तरीका अपनाने से भी दांतों को नुकसान पहुंचता है. स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों, जैसे डायबीटिज, सूखा मुंह, कई दवाओं का सेवन करने आदि से भी दांतों को क्षति पहुंचती है.

कैसे रोकें

हर 6 महीने में बीडीएस या एमडीएस डाक्टर से दांतों की जांच कराई जानी चाहिए. सुबह व शाम का खाना खाने के बाद ब्रश करना चाहिए. ब्रश करने का तरीका सही होना चाहिए, इस के लिए डाक्टर से जानकारी ली जा सकती है. दांत अगर खराब हो गए हैं तो जल्द ही उन में फिलिंग करवा लेनी चाहिए.

खाने में अधिक अम्ल वाले पदार्थ, कोला व अधिक मीठे पदार्थ का सेवन कम करना चाहिए. मसूढ़े छोड़ने की स्थिति में या सर्जरी के बाद इंटरडैंटल ब्रश का प्रयोग करना चाहिए आदि.

रूट कैनाल का उपचार

रूट कैनाल के उपचार में संक्रमित नसों को निकाल कर कैनाल को साफ किया जाता है, फिर कैनाल को निष्क्रिय पदार्थ से भर दिया जाता है और उस के बाद मसाला भर दिया जाता है. पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद कि दांत पूरी तरह संक्रमण रहित हो गया है व दांत के आसपास दर्द व सूजन नहीं है, दांत के ऊपर कैप लगाई जाती है. कभीकभी एंटीबायोटिक्स और दर्दनिवारक दवाओं की जरूरत पड़ सकती है.

रूट कैनाल का उपचार लगभग 1 से 5 सिटिंग में पूरा होता है. इस के बारे में दांत की स्थिति देख कर दांतों का डाक्टर ही बता सकता है.

कब तक चलेगा रूट कैनाल द्वारा उपचारित दांत

आमतौर पर रूट कैनाल द्वारा उपचारित दांत 8-10 वर्ष तक चल सकता है. यदि दांत में कोई समस्या आती है तो कैप को निकाल कर फिर रूट कैनाल का उपचार कर कैप लगाई जा सकती है. इस में दांत को नुकसान नहीं पहुंचता है.

क्या है दांतों की ब्लीचिंग

ब्लीचिंग दांतों को साफ, सफेद व चमकदार बनाने का तरीका है. जिन लोगों के दांत पीले या पीलेभूरे की तरह हैं, उन के लिए यह तरीका काफी फायदेमंद है. धब्बे जो सौफ्टड्रिंक या तंबाकू पीने से या दवाओं के सेवन से होते हैं, उन का इस तरीके से उपचार किया जा सकता है?

कैसे की जाती है ब्लीचिंग

इस के 3 तरीके हैं – इनऔफिस ब्लीचिंग, होम ब्लीचिंग और सफेद करने वाले टूथपेस्ट.

इनऔफिस ब्लीचिंग : यह एक घंटे की प्रक्रिया है. इस में ब्लीचिंग का पदार्थ सामने के ऊपर व नीचे वाले दांतों से बाहरी भाग पर लगाया जाता है. ब्लीचिंग के प्रभाव को गहराई से व जल्दी करने के लिए लेजर लाइट या ब्लीचिंग और्क का इस्तेमाल किया जाता है. इस प्रक्रिया में 20 मिनट लगते हैं. 2-3 बार ऐसा करने के बाद असर दिखाई देने लगता है. इस से कुछ देर के लिए मसूढ़ों पर खुजली हो सकती है.

होम ब्लीचिंग : इस में डैंटिस्ट एक ट्रे देता है जिस में ब्लीचिंग पदार्थ (10 से 12 फीसदी कार्बेमाइड परऔक्साइड) डाल कर प्रयोग किया जाता है. 7 से 14 दिनों के लिए इस का प्रयोग किया जाता है. इस में खर्चा कम होता है. लेकिन डाक्टर की देखरेख में न होने के चलते इस में परेशानी आ सकती है.

दांत सफेद करने वाले टूथपेस्ट : इन का प्रभाव थोड़ा व कुछ समय के लिए होता है. इनऔफिस ब्लीच के बाद इन टूथपेस्ट का प्रयोग किया जा सकता है, ताकि दांतों को सफेद व चमकदार रखा जा सके.

दांतों का रंग 2 तरह से खराब हो सकता है-

  • बाहरी तौर पर, जैसे कौफी, चाय, शराब या भोजन में केसर के सेवन से.
  • अंदरूनी तौर पर, जैसे पानी में अधिक फ्लोराइड होने से, एंटीबायोटिक्स जैसे ट्रैट्रासाइक्लीन अधिक लेने से, दांतों पर चोट लगने से (यदि नस को नुकसान पहुंचता है), आनुवंशिकता जो एनेमल को प्रभावित करती है. दांतों का रंग बदलना उम्र से भी संबंधित हो सकता है.

उपचार के लिए क्या करें

बाहरी तौर पर खराब हुए दांतों की सफाई की जा सकती है. अंदरूनी तौर पर खराब दांतों का उपचार डैंटिस्ट से कराएं. यदि जरूरी होता है तो आप के दांत की ऊपरी परत (एनेमल) की 0.5-1.5 एमएम परत हटा कर पोर्सलेन विनियर या कंपोजिट विनियर लगाया जा सकता है.

पोर्सलेन व कंपोजिट विनियर में से अच्छा कौन

कंपोजिट विनियर में दांत को कम घिसना पड़ता है, लेकिन यह कम समय चलता है और रंग भी बदल सकता है. पोर्सलेन विनियर का रंग जल्दी नहीं बदलता और यह अधिक समय चलता है. लेकिन यह महंगा पड़ता है और दांतों को अधिक घिसना पड़ता है.

बहरहाल, हर उम्र के इंसान को अपने दांतों को सेहतमंद रखने के लिए जरूरी यह है कि वह सुबह व रात को सोने से पहले ब्रश करे. इस से दांत साफ रहेंगे. बच्चों में तो बचपन से ही यह आदत डाल देनी चाहिए.

:प्रोफैसर डा. महेश वर्मा

(पद्मश्री अवार्ड से सम्मानित लेखक मौलाना आजाद इंस्ट्टियूट औफ डैंटल साइंसेज, दिल्ली में डायरैक्टर व प्रिंसिपल हैं)   

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