जो मिल जाए उस से संतुष्ट हो लो और जो न मिले उस के प्रति असंतुष्टि मत जताओ यानी स्थितप्रज्ञ हो जाओ. भगवान की तरह सरकार से सवाल मत करो और न ही असहमति प्रकट करो, इसी में सार है. क्या ऐसा हो सकता है कि कोई सुख में खुश और दुख में व्यथित न हो? प्रजहाति यदा कामान्सर्वान्पार्थ मनोगतान। आत्मन्येंयेंवात्मना तुष्ट स्थित्प्रग्यस्त्दोच्य्त ।।(श्रीमद्भागवद्गीता, अध्याय 2, श्लोक 55) श्रीभगवान बोले, हे अर्जुन, जिस काल में यह पुरुष मन में स्थित संपूर्ण कामनाओं को भलीभांति त्याग देता है और आत्मा से आत्मा में ही संतुष्ट रहता है, उस काल में स्थितप्रज्ञ होता है.
जिंदगी से निराशहताश और चारों तरफ से दुखी लोगों के लिए यह श्लोक बशर्ते वे अर्थ सम झ पाएं तो, रामबाण औषधि है. और मतलब बहुत सीधा है कि बस, इच्छाएं त्याग दो और आत्मा में लीन हो जाओ. श्रीमदभगवतगीता वाकई चमत्कारिक और अद्भुत ग्रंथ है जिसे आम लोग पढ़ते और रटते तो बहुत हैं लेकिन न तो सम झ पाते और न उस पर अमल कर पाते हैं. इस के एक ही नहीं, बल्कि एकएक श्लोक में ज्ञान भरा पड़ा है. उक्त श्लोक को कोई अगर सम झने की कोशिश करता है तो वह बिना शराब पिए या भांग अफीम या धतूरा चाटे बगैर आधाएक घंटे में स्थितप्रज्ञ हो जाता है और जब कुछ न सम झ आने पर इस नश्वर संसार में वापस आता है तो फिर घबरा कर बारबार स्थितप्रज्ञ होने की कोशिश करता है. झं झट बहुत साधारण है और इस श्लोक के सेवन के साथ ही शुरू हो जाती है कि भगवान तो खुद कह रहे हैं कि कामनाएं त्याग दो और पढ़ने वाला स्थितप्रज्ञ होने की कामना पाल बैठता है.
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दार्शनिक भाषा में कहें तो आदमी इच्छा त्यागता नहीं, बल्कि उसे ग्रहण कर लेता है. यही अवस्था उस के दुखों का मूल कारण है. यानी जड़ में इच्छाएं हैं जो न जाने क्यों जिंदगीभर और धर्मग्रंथों की मानें तो जिंदगी के बाद भी पीछा नहीं छोड़तीं.बिना किसी बहस के माना जा सकता है कि इच्छारहित होना ही स्थितप्रज्ञ होना है. चूंकि कोई भी इच्छारहित नहीं हो सकता, इसलिए स्थितप्रज्ञ होने पर इच्छाओं से सम झौता करना मुनाफे का सौदा सम झता है. इस से फायदा यह है कि वह आत्मा में लीन होने के झं झट से बच जाता है जिस का मतलब मौत यानी इस खूबसूरत दुनिया व तमाम भौतिकअभौतिक सुखों को छोड़ना होता है जो शरीर से ही मिलते हैं. अब चूंकि हर कोई आत्महत्या नहीं कर सकता और स्थितप्रज्ञ जैसी अवस्था को अनुभव या प्राप्त करने की सलाह भी किसी को नहीं दी जा सकती, इसलिए बेहतर यही लगता है कि इच्छाओं से सम झौता कर लिया जाए.ऐसे होते हैं लोग स्थितप्रज्ञहम में सभी कभी न कभी तात्कालिक रूप से स्थितप्रज्ञ होते हैं लेकिन बड़े और सामूहिक पैमाने पर साल 2016 की तारीख 8 नवंबर को हुए थे जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रात 8 बजे कहा था कि आज से बड़े नोटों का चलन बंद यानी नोटबंदी शुरू. कालाधन वापस आने, भ्रष्टाचार और आतंकवाद खत्म होने जैसी असंभव व लोकलुभावनी बातों पर लोग स्थितप्रज्ञ हो गए थे क्योंकि उन के पास दूसरा कोई रास्ता भी नहीं था. कुछ लोगों ने इस तरह स्थितप्रज्ञ होने से असहमति जताई थी, तो प्रधानमंत्री रो पड़े थे.
निरी भावुकता कह लें या बेबसी कि लोग उन के आंसू देख यह सोचते पिघल गए थे कि अभी 2 साल ही तो हुए हैं और हम ने उन को ऊपर शासन करने को नहीं, बल्कि पूजा करने को बैठाया है. लिहाजा, विरोध उन के साथ अन्याय होगा और मुमकिन है यह उन की दूरदर्शिता या नातजरबेकारी हो, पर जो भी हो भगवान की आंखों से बहते आंसू तबाही ला सकते हैं, इसलिए चुपचाप स्थितप्रज्ञ होने में ही भलाई है. नोटों का क्या है, वे तो आतेजाते रहते हैं.130 करोड़ लोगों का यों एकसाथ स्थितप्रज्ञ हो जाना एक गैरमामूली घटना थी. इसीलिए, वह इतिहास में भी दर्ज हो गई है. अब यह और बात है कि नोट बदलने के चक्कर में लाइन में लगे कई लोगों की आत्माएं आत्मा में तो नहीं, बल्कि परमात्मा में विलीन हो गईं. जिन के कमजोर दिलों ने नोटों से मोह के चलते स्थितप्रज्ञ होने से इनकार कर दिया, उन के दिलों ने धड़कना ही बंद कर दिया. चिकित्सकीय भाषा में इसे हार्टअटैक से मौत और धार्मिक भाषा में दिव्य या परलोक गमन कहते हैं.इस नजारे को भी लोगों ने लोकतांत्रिक नहीं, बल्कि धार्मिक दृष्टि से देखा और बेहद गंभीरता से सम झ भी लिया कि जो लोग हाथ में नोट लिए टैं बोल गए,
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वे वाकई ऊपर कुछ नहीं ले गए. भगवान ने तो इसी गीता में पहले ही कह दिया है कि तेरा इस संसार में क्या है, तू क्या ले कर आया था और क्या ले कर जाएगा जो तू व्यर्थ ही शोक करता है. इस ज्ञान को महसूस करते ही लोगों ने ऊपर जाने से बचने के लिए लाइन में लगे रहना मुनासिब सम झा. यही अवस्था स्थितप्रज्ञ अवस्था थी.फिर तो हर कभी स्थितप्रज्ञ होने का मौका हर किसी को मिलने लगा क्योंकि नोटबंदी का विरोध न होने से एक नया इतिहास लिखा जाने लगा था.युवाओं को भी मिला सौभाग्य नोटबंदी की सब से बड़ी मार युवाओं पर पड़ी थी जो थोक में बेरोजगार हो चले थे. असल में यह उन के पापों की सजा थी क्योंकि देश में अनास्था और नास्तिकता बढ़ रही थी. जब सब के पास खानेपीने को होगा, सिर पर छत होगी, नौकरी भी होगी तो वे भला भगवान को क्यों मानेंगे. भगवान को लोग खासतौर से युवा, तभी मानते हैं जब उन के पास कोई काम नहीं होता. उन का पहला इकलौता काम सुबहशाम धर्मस्थलों पर माथा टेकना रह जाता है कि हे नीली छतरी वाले, हम ने ऐसे कौन से पाप किएहैं जो हमें एक अदद नौकरी भी नहीं मिल रही.नौकरी या रोजगार को इच्छा कहा जाए या जरूरत, इस पर बहस की लंबीचौड़ी गुंजाइशें हैं और दोनों में कोई फर्क न किया जाए,
तो लगता है कि युवा सीधेसीधे स्थितप्रज्ञ हो गए थे क्योंकि उन्होंने नौकरी मिलने को हक या मौका नहीं, बल्कि ईश्वरीय वरदान सम झ लिया था और अनिच्छापूर्वक यह इच्छा धारण किए हुए थे या उसे त्याग ही दिया था. इन में फर्क कर पाना मुश्किल है.इस मनोदशा को लिखने वालों ने अलगअलग तरीके से विश्लेषित किया है. हरिवंश राय बच्चन ने अपने काव्य ‘मधुशाला’ में एक जगह कहा है, ‘दर्द नशा है इस मदिरा की विगत स्मृतियां साकी हैं, पीड़ा में आनंद जिसे हो आए मेरी मधुशाला…’इसी बात को कृष्ण ने स्थितप्रज्ञ संदर्भ में कुछ यों कहा है-दु:खेष्वनुद्विग्नमना: सुखेषु विगतस्पृह:।वीतरागभयक्त्रोध: स्थितधीर्मुनिरुच्यते।।(श्रीमद्भागवद्गीता, अध्याय 2, श्लोक 56)अर्थात, दुखों की प्राप्ति होने पर जिस के मन में उद्वेग नहीं होता. सुखों की प्राप्ति में जो सर्वथा निस्पृह है तथा जिस के राग, भय और क्रोध नष्ट हो गए हैं, ऐसा मुनि स्थिर बुद्धि वाला कहा जाता है.अब युवाओं को नौकरी न मिलने पर दुख नहीं होता और न ही उस के मिलने पर खुशी होती है. चूंकि वे गिरती जीडीपी और दम तोड़ती अर्थव्यवस्था का विरोध करना तो दूर की बात है, उस पर सवाल भी नहीं करते, इसलिए कहा जा सकता है कि उन के राग, भय और क्रोध सहित न जाने क्याक्या खत्म हो गया है, इसलिए वे स्थितप्रज्ञ हैं.
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इस अवस्था को और बढ़ाने के लिए सरकार लगातार निजीकरण के जरिए पीएसयू बेचबेच कोशिशें कर रही है जिस से आरक्षित और अनारक्षित दोनों वर्गों के युवा और भी ज्यादा स्थितप्रज्ञ हों और उन के मन व बुद्धि ईश्वर के ध्यान में लगे, तभी वे तर पाएंगे.सरकार चाहती है कि युवा दुख और सुख में एक से रहें तो जिंदगी में कभी उन्हें तकलीफ नहीं उठानी पड़ेगी यानी महसूस ही नहीं होगी. इस के लिए हरिवंश राय बच्चन ठेके या बार में जाने की सलाह देते हैं तो सरकार चाहती है कि युवा धर्मस्थलों में जाएं. नशा दोनों जगह बराबरी से है. शराब सुबह तक उतर जाती है, धर्म का नशा जिंदगीभर सिर चढ़ कर बोलता रहता है. स्थितप्रज्ञ युवाओं की तादाद यों ही बढ़ती रही, तो कोई भी देश को विश्वगुरु बनने से रोक नहीं सकता क्योंकि ज्यादा नहीं, 2024 तक हमारे यहां सब से ज्यादा स्थितप्रज्ञ युवा होंगे जो गेरुआ अधोवस्त्र लपेटे किसी मंदिर के अहाते में चिलम फूंकते ‘‘रामकृष्ण… हरेहरे…’’ गा रहे होंगे और सनातनी संन्यासियों या बुद्ध की तरह भिक्षा ले कर दाताओं के पुण्य बढ़ा रहे होंगे.महिलाएं भी हुईं स्थितप्रज्ञ बातबात में महिलाओं से भेदभाव करने वाला धर्म, जिस ने उन की भूमिका कलशयात्रा तक समेट कर रख दी है, उन्हें भी स्थितप्रज्ञ होने की इजाजत देता है. इधर महंगाई डायन गजब ढा रही है जिस से महिलाओं का पुराने जमाने का प्रिय मिट्टी का चूल्हा जो लाल सिलैंडर में तबदील हो चुका है, अब 825 रुपए का हो गया है. गृहिणियां इस पर जश्न नहीं मना रहीं.
लेकिन वे कोई विरोध भी प्रदर्शित नहीं कर रहीं. जाहिर है, वे ‘सुखदुख राग द्वेष’ आदि से परे हो कर स्थिर बुद्धि की हो गई हैं.देश में महिला अपराधों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है. इस की महिलाओं को ही चिंता नहीं. उन का आहत न होना बताता है कि वे भी स्थितप्रज्ञ हो चुकी हैं. हाथरस, उन्नाव, आगरा या बुलंदशहर जैसे बर्बर बलात्कार कांडों से भी उन्हें कोई लेनादेना नहीं, आखिर स्थितप्रज्ञ जो हो चुकी हैं. उन्हें सहज ज्ञान प्राप्त हो गया है कि ऊपर वाला कुछ और करे न करे, देखता जरूर होगा, इसलिए उन के खुद के दुखी होने या बेकार खून जलाने से कोई फायदा नहीं.सर्वे भवन्तु …देखा जाए तो सभी स्थितप्रज्ञ हो गए हैं. व्यापारी तो जीएसटी लागू होते ही हो गए थे बेचारे.अब महंगाई के चलते कम होती ग्राहकी और घाटे के लिए सरकार को नहीं कोस रहे. वे वाकई निस्पृह भाव से काउंटर यानी गल्ले पर बैठे हैं. ग्राहक भी कोई शिकायत नहीं कर रहा.
खाने का तेल 75 से 150 रुपए प्रतिलिटर हुआ जा रहा है, पैट्रोल और डीजल के भाव सैंचुरी मार रहे हैं लेकिन किसी के कान पर जूं नहीं रेंग रही, दरअसल सभी स्थितप्रज्ञ जो हो चुके हैं.अधिकांश पत्रकार, संपादक और कलाकार वगैरह वही लिखते व बोलते हैं जो सरकार को प्रिय लगता है और जो अप्रिय यानी सच बोलते हैं वे राजद्रोह की धारा के तहत गिरफ्तार कर लिए जाते हैं. इस से उन की सच बोलने की इच्छा दम तोड़ने लगती है. कुछ बेशर्म हैं जो इस से भी नहीं मानते. लेकिन सरकार उन से बेफिक्र रहती है क्योंकि इन अस्थितप्रज्ञों से उसे कोई खतरा नहीं. जब तक भक्ति शबाब पर है तब तक उसे मनमानी करने से कोई नहीं रोक सकता.आंदोलन कर रहे किसान जाने क्यों गीता का मर्म न सम झते स्थितप्रज्ञ नहीं हो रहे. सरकार ने उन की तरफ ध्यान देना ही छोड़ दिया है.
उसे 5 राज्यों के चुनाव दिख रहे हैं जहां उस की मंशा स्थितप्रज्ञों की संख्या बढ़ाने की है. किसान वहां भी उस का पीछा नहीं छोड़ रहे, तो सरकार ने भी जिद पकड़ ली है कि जो बने सो कर लो, तुम्हें भी हम स्थितप्रज्ञ बना कर ही दम लेंगे.तो आज सरकार और भगवान में कोई फर्क नहीं रह गया है. इन दोनों को कोई नाराज नहीं करना चाहता. कामनारहित होना लोगों को मंजूर है पर विरोध करना नहीं. दोनों से कोई यह नहीं पूछता कि अच्छा करो तो श्रेय तुम्हारा सही लेकिन हमारा बुरा करो तो उस की जिम्मेदारी क्यों नहीं लेते. हम कर्म करें तो फल की इच्छा क्यों न रखें. ‘मीठामीठा गप कड़वाकड़वा थू’ की पौलिसी क्यों? इस सवाल का जवाब जब तक नहीं मिलेगा तब तक लोग अन्याय व शोषण का शिकार होते रहेंगे. इस से बचना है और स्वाभिमान से जिंदा रहना है, तो वास्तविकता सम झते हुए स्थितप्रज्ञ होने से तो मना करना ही पड़ेगा.
उन्हें भरती किए हुए 18 घंटे हो चुके थे. पर सुधार की अभी कोई सूचना नहीं आई थी. जब अतुल का घर में फोन आया था तब वे होशहवास में थे. गंभीर दुर्घटना की बात कह रहे थे. याचनाभरे शब्दों में बोल रहे थे, ‘मुझे बचा लो. मैं मरना नहीं चाहता. मैं मसूरी से करीब 17 मिलोमीटर दूर देहरादून वाली रोड पर बड़े मोड़ पर पड़ा हूं. मेरे साथी गजेंद्र बाबू मर चुके हैं. किसी जीप ने हमारी बाइक को टक्कर मार दी. लोग आजा रहे हैं, पर हमें कोई उठा नहीं रहा है. मेरा खून बहुत बह चुका है. शायद मैं बच न सकूं. दिव्या का खयाल रखना.’ फिर फोन बंद हो गया था. शायद अतुल बेहोश हो गए थे.
शहर के एक बड़े अस्पताल जीवनदायिनी हौस्पिटल में भारी उम्मीदों के साथ मेरे ससुर दिगंबरजी ने अतुल को अस्पताल में भरती कराया था. वे रोड के बीच में बेसुध अवस्था में पड़े थे. गाड़ी का एक पहिया उन की जांघ के बीचोंबीच से निकल गया था. हाथपैरों में कई जगह फै्रक्चर थे. हैलमेट के कारण सिर तो बच गया पर चेहरा बुरी तरह जख्मी था. पास ही गजेंद्र बाबू की लाश पड़ी थी. सिर फटा था. गुद्दी बाहर फैली थी. बाइक का भी कचूमर निकल गया था.
ये सब देखने की मुझ में हिम्मत ही कहां थी. यह तो साथ में गए मेरे देवर दिवाकर व गांववालों ने ही बतलाया था. मैं तो सासूमां और बिरादरी की अन्य औरतों के साथ अस्पताल सीधी पहुंची थी. वहीं सुना, गजेंद्र बाबू की बौडी को पोस्टमार्टम के लिए मौरचरी में ले जाया जा रहा था.
अस्पताल के वेटिंगरूम में तमाम ग्रामीण व रिश्तेदार जमा थे. वे आपस में चर्चा कर रहे थे. मेरे कान उन की बातें सुनने में लगे थे. व्याकुल दशा में मेरा दिल धकधक कर मुझे ही सुनाई दे रहा था. अपने तनमन को संतुलित करने का प्रयास कर रही थी. सासूमां का रुदन थम नहीं रहा था. आंसुओं की मानो बाढ़ आ गई थी. पड़ोसी महिलाएं उन्हें शांत करने का प्रयास कर रही थीं. मेरा ध्यान उन लड़कों की बातों में लगा था जो कुछ दूर धीमेधीमे बतिया रहे थे. मेरा चचेरा देवर बता रहा था, ‘यार, गाड़ी का पहिया उस के कमर व जांघ से हो कर निकल गया था. जिस का निशान साफ दिखाई पड़ रहा था. हम ने जायजा लिया था कि कितनी चोट लगी है. कमर व जांघ की हड्डी चूरचूर हो गई थी. हालत बड़ी गंभीर लगती है…’
मैं ने सुना तो जैसे मुझे बेहोशी सी छाने लगी. मेरे मुंह से घुटीघुटी चीख निकल पड़ी. औरतों ने सुना, वे मेरी ओर लपकीं. मुझे पास ही बिछी चटाई पर लिटा दिया गया. मेरी ननद तनुजा मुझे अखबार से पंखा झलने लगी, हालांकि अस्पताल के पंखे भी चल रहे थे. मैं कुछ देर बाद तनिक सामान्य हालत में आ गई थी. मैं घुटने सिकोड़ कर लेटी रही. औरतें धीरेधीरे फुसफुसा रही थीं. दूर से आदमियों की हलकीहलकी आवाजें आ रही थीं. कुछ ही क्षणों बाद कोई नर्स आईसीयू से बाहर आई. हमारे तीमारदारों ने उसे घेर लिया. हालात के बारे में पूछने लगे. ‘‘अभी कुछ कहा नहीं जा सकता. डाक्टर लगातार देख रहे हैं,’’ कह कर वह तेजी से दूसरे वार्ड में चली गई.
अस्पताल वाले हमारे लोगों को आईसीयू में घुसने नहीं दे रहे थे. उन का कहना था कि घरवालों को देख कर मरीज को दिल का दौरा पड़ सकता है. अभी 10 मिनट भी नहीं हुए थे कि एक वार्डबौय आईसीयू से बाहर निकला. उस की चाल में धीमापन था. चेहरे में हताशा की कालिमा पुती हुई थी. श्मशान सी उदासी. वह बिना इधरउधर देखे मंथर गति से बाहर की ओर बढ़ा जा रहा था. दोएक ने उसे रोक कर कुछ पूछना चाहा. पर वह रुका नहीं, चलता ही गया. चलतेचलते हाथ इस प्रकार हिला रहा था मानो कह रहा हो ‘मुझे पता नहीं.’ हाथ हिलाने से यह भी अर्थ निकलता था कि, ‘मुश्किल है.’ यह भी समझा जा सकता था कि ‘अब कुछ नहीं बचा.’
लगभग सभी नजरें उसी पर थीं. उस के हाथ हिलाने का सब मन ही मन अपनेअपने ढंग से अर्थ निकाल रहे थे. दिवाकर ने मेरी ओर देखा. आंखों में प्रश्नचिह्न थे. मैं ने इशारे से वार्डबौय का पीछा करने को कहा. वे समझ गए और धीरेधीरे अपने कदम बाहर की ओर बढ़ा दिए. जब लौटे तो मुरझाए हुए थे. डूबते कदमों से मेरे पास आए और बोले, ‘‘मांजी ने कहा है अपनी भाभी को घर पर पहुंचा आ. चलो, घर चलते हैं.’’ वे नजर उठा कर मेरी ओर नहीं देख रहे थे. मैं सशंकित होते हुए उठी, पूछा, ‘‘क्या कहा उस ने?’’
‘‘2-4 घंटे बाद डाक्टर ही बतलाएंगे,’’ दिवाकर ने फिर मांजी से कहा, ‘‘मैं भाभी को घर पहुंचाने जा रहा हूं.’’ मांजी ने सहमति में सिर हिलाया.
मुझे लगा किसी को भी मेरा यहां रुकना अच्छा नहीं लग रहा था. एक तो यहां स्थिति नाजुक थी, दूसरा मैं गर्भवती थी. पांचवां महीना चल रहा था. ऐसे में मुझे वहां रोकना कौन पसंद करेगा. मैं घर चली आई. खाली घर भायभाय सा खाने को दौड़ रहा था. मैं ने पलंग पर सिरहाने रखे उन के स्वेटर को उठा लिया. पलंग पर गिर कर जोरजोर से रोने लगी. बड़े जतन से मैं ने उन का स्वेटर बुना था. जब पूर्ण होने को आया तो…? दिवाकर को मेरा रुदन बरदाश्त नहीं हो रहा था. उन का खुद भी गला भर आया था. यह कह कर कि, ‘‘भाभी, अपना खयाल रखना. मैं अस्पताल जा रहा हूं.’’ और बिना पानी पिए ही वे लौट गए. कल रात्रि से परिवार वालों के गले में अन्न का एक दाना भी नहीं गया था.
हाॅरर और सुपर नेच्युरल पाॅवर की कहानियों को अपनी फिल्मों व वेबसीरीज में पेश करने के बाद अब दिग्गज फिल्म निर्देशक विक्रम भट्ट अप्रत्याशित मोड़, लंबे रहस्यों और रोमांचक संदेह के साथ बुनी हुई जासूसी की कहानियां पेश करने में भी महारथ हासिल कर ली है. अब विक्रम भट्ट एमएक्स ओरीजिन ल वेब सीरीज ‘‘बिसात’’ लेकर आ रहे हैं,जो कि ओटीटी प्लेटफार्म ‘एम एक्स’पर 15 अप्रैल सेस्ट्म होने वाली है.इस रोचक मर्डर मिस्ट्री में संदीपा धर और ओमकार कपूर की मुख्य भूमिकाएं हैं.
खतरनाक रहस्यों की खोज करती, 8 एपीसोड की इस वेबसीरीज में डॉ. कियानावर्मा (संदीपा धर) की जिंदगी का चित्रण है.डाॅं.कियाना वर्मा पेशे से मनोचिकित्सक हैं, जो अपने मरीज की समस्याओं को दूर करने के लिए हमेशा पूरी कोशिश करती हैं.राधिका कपूर (लीना जुमानी) नामक एक नई महिला उनके पास परामर्श लेने के लिए आती है, जिसका अपने पति और बिजनेस टाइकून यश कपूर (खालिद सिद्दीकी) के साथ अच्घ्छा रिश्ता नहीं चल रहा है.मरीजों की पूरी मदद करने की अपनी आदत के मुताबिक कियाना अपने अस्पताल और पति डॉ.अभिजीत जोशी (ओमकार कपूर) की सलाह को भी नजर अंदाज करते हुए यश की जिंदगी में रूचि लेने लगती है.
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ज्यादा समय नहीं बीतता हैऔर यश कपूर की उनके बीच हाउस में क्रूरता से हत्या हो जाती हैऔर डॉ.कियाना वर्मा शक के घेरे में आ जाती हैं.इसके बाद कुछ खुलासे, ब्लैकमेलिंग और यश कपूर के हत्यारे की तलाश का सिलसिला शुरू होता है.
वेबसीरीज‘‘बिसात’’के संदर्भ में विक्रमभट्ट कहते हैं-‘’एक जोनर के तौर पर थ्रिलर ने मुझे बतौर दर्शक हमेशा आकर्षित किया है और इसलिए मैं अक्सर उसे स्क्रीन पर लाता हूं.एक स्टोरी टेलर होने के नाते मुझे टेंशन को उसकी पूरी ऊंचाई पर पहुंचाने में मजा आता है और दर्शकों को मेरे किरदारों की यात्रा में शामिल करना मुझे अच्छा लगता है.बिसात एक चतुराई भरा खेल है, जिसमें खुलासे, गहरेदांव-पेंच और भावनाओं का टूटना आपको अनापेक्षित की अपेक्षा करने का वादा करता है.
सभी कलाकारों ने बेहतरीन काम किया है .मैं उम्मीद करता हूं कि उन सभी के साथ दोबारा काम करूंगा.‘’
संदीपा धर कहती हैं-‘‘ विक्रम सर के साथ काम करने से मना करने का सवाल ही नहीं उठता. कहानी कहने की उनकी स्टाइल में बहुत आया म होते हैं और उनके नैरेटिव्स में झूठ, धोखे औ रहौंसले का घुमा वदार जाल स्क्रीन पर चमक बिखेरता है.इस किरदार के लिए हमें काफी तैयारी करने की जरूरत थी और हमेशा फुर्तीले और काम करने के लिये तैयार रहने वाले विक्रम सर के लिए, मुझे डॉ. कियाना की भूमिका के लिए बेहदकूल रहने की जरूरत थी.शूटिंग शुरू होने के एक महीने पहले से मैंने अपनी चाल-ढाल पर काम किया और बहुत कुछ सीखा.‘’
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ओमकार कपूर कहते हैं- ‘’यह सीरीज निश्चित रूप से मेरे लिए बहुत खास है.सबसे पहले तो इसकी स्क्रिप्ट के लिए और दूसरा विक्रम भट्ट के साथ काम करने का मौका मिलना, जो एक बेहतरीन नैरेटर और निर्देषक हैं.उन्हें अपने कलाकारों का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन लाने के लिए जाना जाता है.मैं इस वेबसीरीज का हिस्सा बनकर बहुत खुश हूं.‘’
वेबसीरीज ‘‘बिसात’’मेंजियामुस्तफा, कोरलभामरा, अश्मिताबक्शी, त्रिशानमैनी और तन्वीठक्कर की भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं हैं.
भारतीय बैडमिंनट स्टार ज्वाला गुट्टा जल्द ही अपने मंगेतर विष्णु विशाल के साथ शादी करने वाली हैं. इसकी खबर ज्वाला ने अपने फैंस को दी है. ज्वाला ने अपने 37वें जन्मदिन पर विष्णु के साथ सगाईकी थी और अब वह दोनों जल्द शादी करने जा रहे हैं.
बता दें कि ज्वाला ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शादी के कार्ड को पोस्ट करते हुए इमोजी बनाई है तो वहीं उसके मंगेतर विष्णु ने कमेंट करते हुए लिखा है कि जिंदगी एक सफर है. जिसके बाद इन दोनों के फैंस ने इनकी खूब तारीफ की है और शादी के लिए बधाई भी दी है.
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LIFE IS A JOURNEY….
EMBRACE IT…HAVE FAITH AND TAKE THE LEAP….
Need all your love and support as always…@Guttajwala#JWALAVISHED pic.twitter.com/eSFTvmPSE2
— VISHNU VISHAL – V V (@TheVishnuVishal) April 13, 2021
बता दें कि ज्वाला और विष्णु की शादी 22 अप्रैल को है. ज्वाला बिष्णु के संग दूसरी शादी कर रही हैं. इससे पहले वह बैंडमिटन खिलाड़ी चेतन आनंद के साथ शादी के बंधन में बंधी थी. उस वक्त भी लोगों ने इनकी जोड़ी को खूब सराहा था लेकिन कुछ सालों के बाद इन दोनों का तलाक हो गया . साल 2011 में ये दोनों एक- दूसरे से अलग हो गए.
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N dis happened last nite n what a beautiful surprise it was!
Today when I think of my life what a journey it has been n 2day I realise there is so much more to luk forward to!Towards our family,Aryan,friends and work!its gonna be another great journey am sure ❤️?? pic.twitter.com/qjqVkK6CWo— Gutta Jwala (@Guttajwala) September 7, 2020
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जिसके बाद से ज्वाला और विष्णु लंबे समय से एक दूसरे को डेट कर रहे थे और अब दोनों ने शादी करने का फैसला ले लिया है. विष्णु कई मशहूर फिल्मों में काम कर चुके हैं. जहां लोगों ने इनके काम की खूब तारीफें भी कि हैं. जिस वजह से ये काफी ज्यादा मशूहर हैं. फिल्म ‘हाथी मेरे साथी’ के तमिल वर्जन में भी यह नजर आ चुके हैं. इसके अलावा इन्होंने कुछ वक्त तक क्रिकेट भी खेला है.
महाराष्ट्र में बढ़ते कोरोना को देखते हुए उद्धव ठाकरे ने सभी को ध्यान में रखते हुए 15 दिन का लॉकडाउन फिर से लगा दिया है. यह लॉक़ाउन 14 अप्रैल रात 12 से 30 अप्रैल रात 12 बजे तक लागू रहेगा. जिस दौरान राज्य में अतिआवश्यक सेवाओं के अलावा सभी कुछ बंद रहेगा.
इस कारण अब राज्य में फिल्म स्टूडियों और टीवी सीरियल्स की शूटिंग पर भी पाबंदी लगा दी जाएगी. सरकार ने 15 दिन तक किसी तरह की शूटिंग एक्टिविटी न करने का आदेश दिया है.यानि अगले 15दिनों तक महाराष्ट्र में किसी भी तरह कि कोई फिल्म और वेबसीरीज की शूटिंग नहीं होगी.
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मुख्यमंत्री उद्धव बाळासाहेब ठाकरे यांचा जनतेशी संवाद – LIVE https://t.co/17DD8ZWV5K
— Office of Uddhav Thackeray (@OfficeofUT) April 13, 2021
फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया के अध्यक्ष ने एक रिपोर्ट में बातचीत करते हुए कहा है कि यह फैसला लोगों के हित के लिए लिया गया है, लेकिन यह फिल्म इंडस्ट्री के लोगों के लिए बहुत ज्यादा नुकसानदायक साबित होने वाला है.
बता दें बीते साल भी फिल्म की शूटिंग न होने से एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के बहुत ज्यादा नुकसान हुआ था. और एक बार फिर से देश में कोरोना ने बुरा हाल कर दिया है. जिस वजह से सभी लोगों को नुकसान हो रहा है. इसके साथ ही बड़ी फिल्मों की रिलीज डेट बार-बार आगे बढ़ाई जा रही है.
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जिनके नाम है, सूर्यवंशी, थलाइवी , हाथी मेरे साथी जैसी तमाम बड़ी फिल्मों के रिलीज डेट को आगे बढ़ाया जा रहा है. जिससे हमारे इंडस्ट्री को काफी ज्यादा नुकसान होने वाला है.
अभी कोरोना लोगों को और कितना ज्यादा परेशान करेगा ये किसी को पता नहीं है. इसलिए कोरोना को ध्यान में रखते हुए समय- समय पर सरकार अपना फैसला सुनाती रहती है. कोरोना अपने आप में बहुत ज्यादा खतरनाक है.
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इस वक्त हर किसी को अपना ख्याल रखने की जरुरत है. वरना कब किसे कितना नुकसान पहुंचा दे मालूम नहीं है.
हर साल मोटरिंग वर्ल्ड की टीम पिछले साल लॉन्च हुए सभी टू-व्हीलर्स पर नजर डालती है और देखती है कि कौन सा टू-व्हीलर्स किस कैटेगरी में टॉप पर है. देखा जाए तो ये काम जिनता महत्वपूर्ण है इसे करने में हमें उनता ही मज़ा आता है. हर टू-व्हीलर को लेकर एक पूरी लिस्ट तैयार होती है जिसमें सबसे बेहतर को ढूंढने के लिए खूब बातचीत होती है, लड़ाईयां होती हैं, खूब ठिठोली भी होती है और एक पूरे एक्सामिनेशन के बाद ही एक शोर्टलिस्ट जूरी तक पहुंचती है. क्योंकि ओटोमोटिव सेक्टर में जो प्रोडक्ट्स बेस्ट साबित होते हैं सिर्फ वही पाते हैं मोटरिंग वर्ल्ड अवार्ड. साल 2021 में कौन से टू-व्हीलर्स इस लिस्ट में शामिल हुए यहां देखिए-
Commuter of the Year
Hero MotoCorp Passion Pro
इस कैटेगरी में Hero MotoCorp Passion Pro के इर्द-गिर्द भी कोई दूसरा टू-व्हीलर नहीं पहुंच पाया. आरामदायक, कुशल और स्टायलिश. अपनी कीमत में Hero MotoCorp Passion Pro कमाल का सौदा है.
Premium Commuter of the Year
Hero MotoCorpXtreme 160R
वैसे पहली बार में ही सभी नए प्लेटफोर्म पर पहुंच आसान नहीं है लेकिन ये कर दिखाया हैHero MotoCorpXtreme 160R ने. इसकी शानदार मोटर और आसान हैंडलिंग ये सुनिश्चित करती है कि जब भी आप इसे चलाएं तो आपके चेहरे पर मुस्कान बिखरी हो.
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Electric Scooter of the Year
Bajaj Chetak
सुप्रसिद्घ नाम बजाज चेतक ने पूरे इलेक्ट्रीफाइड फोर्मेट में आकरnew-age mobility की जो लहर पैदा की है वो काबिले तारीफहै, वैसे आश्चर्य की बात है कि Bajaj Chetak ने ये ट्रॉफी केवल अपनी राइड क्वालिटी के दम पर जीती है.
Premium Motorcycle of the Year
Husqvarna Svartpilen 250
मोटर साइकिल की दुनिया में काफी पुराना नाम जोकि इंडिया के लिए फिलहाल नया है. ऐसा फंकी डिजाइन जो आपने कभी नहीं देखा होगा. अपने अलग अंदाज के चलते ही Husqvarna Svartpilen 250 ने Premium Motorcycle of the Year अवोर्ड अपने नाम किया है.
Design of the Year
Bajaj Chetak
सिर्फ लुक की नहीं बल्कि सौंदर्य और सुविधा की बारिक डिटेल की बात करें तो पहले डिजाइन की सोच और फिर उसको हकीकत बनाने में बजाज ने चेतक में शानदार काम किया है. इस साल की बात करें तो अपने आकर्षक लुक के मामले में चेतक ने किसी को अपने करीब तक नहीं आने दिया.
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Adventure Motorcycle of the Year
KTM 390 Adventure
इलेक्ट्रॉनिक्स पैकेज और उपकरण जो हमने कभी बड़ी बाइक के बाहर नहीं देखे. जानदार मोटर और इसकी शानदार कीमत ने हमें इसका कायल बना दिया.
Performance Motorcycle of the Year
Triumph Tiger 900
हम भारतीय टाइगर को अच्छे
हम भारतीय जानते हैं कि बाघ कैसे हो सकते हैं और अब हम यह भी जानते हैं कि जब एक टाइगर खुद को एक नए अंदाज़ मेंपेश करता है तो वो अपनी बुलंदियों को फिर पा लेता है. Triumph Tiger 900 ने ठीक ऐसे ही ऑल-अराउंड, ऑल सिज़न मोटरसाइकिल की कैटेगरी में किसी को अपनी करीब नहीं आने दिया.
Cruiser of the Year
Harley-Davidson Low Rider S
लुक्स की बात हो या साउंड की या फिर सड़क पर धूम मचाने की Milwaukee’s V-twins का इस सब में कोई जवाब नहीं है. घूमने में सभी की पहली पसंद Harley-Davidson Low Rider S है तभी तो मिला है इसे Cruiser of the Yearका अवोर्ड.
Motorcycle of the Year
Royal Enfield Meteor 350
एक दिल जो नई शांति के साथ पुराने ही अंदाज में धड़कता है. इसको पहले से भी बेहतरीन ढंग से बनाया गया है, इसे चलाना जितना एडिक्टिव है उतना ही मेडिटिव भी है. तभी तो टू-व्हीलर्स में सबसे सम्मानजनक Motorcycle of the Yearअवोर्डRoyal Enfield Meteor 350 ने अपने नाम किया है.
A heart that beats like the days of yore, but with modern peace of mind. Its manners are as addictive as they’re meditative. And it’s put together better than ever before, too. A worthy winner of our outright two-wheeled honour — the Royal Enfield Meteor 350.
लेखक-आर.के. राजू
सौजन्या-सत्यकथा
8फरवरी, 2021 की बात है सुबह के करीब 10 बजे थे. नासिर नाम का एक कबाड़ी जोया रोड के
किनारे हिल्टन कौन्वेंट स्कूल के पास से गुजर रहा था, तभी उस की नजर स्कूल के पास पड़े खाली प्लौट में चली गई.
प्लौट में एक युवती की लाश पड़ी थी. लाश देखते ही नासिर ने शोर मचा दिया. उस की आवाज सुन कर तमाम लोग जमा हो गए. नासिर ने फोन कर के इस की सूचना अमरोहा देहात थाने में दे दी.
युवती की लाश की सूचना मिलते ही थानाप्रभारी सुरेशचंद्र गौतम अपनी टीम के साथ घटनास्थल की ओर रवाना हो गए. वह जोया रोड स्थित हिल्टन कौन्वेंट स्कूल के पास पहुंचे तो वहां एक प्लौट में काफी लोग जमा थे. वहीं पर युवती की लाश पड़ी थी, जो खून से लथपथ थी. उस का सिर और मुंह कुचला हुआ था. लाश के पास ही खून से सनी एक ईंट पड़ी थी. पुलिस ने अनुमान लगाया कि हत्यारे ने इसी ईंट से युवती की हत्या की होगी.
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मृतका की उम्र लगभग 25 साल थी. काले रंग की जींस, नारंगी टौप और सफेद जूते पहने वह युवती किसी अच्छे परिवार की लग रही थी. उस के गले पर भी चोट के निशान थे. लाश के पास 2 मोबाइल फोन और 2 पर्स भी पड़े थे. पुलिस ने उस के पर्स की तलाशी ली तो उस में एक आधार कार्ड मिला. आधार कार्ड पर नाम नेहा चौधरी लिखा था. आधार कार्ड के फोटो से इस बात की पुष्टि हो गई कि लाश नेहा चौधरी की ही है. कार्ड पर लिखे एड्रैस के अनुसार, नेहा अमरोहा देहात थाने के पचोखरा गांव निवासी दिनेश चौधरी की बेटी थी.
थानाप्रभारी ने एक कांस्टेबल को भेज कर यह खबर मृतका के घर तक पहुंचवा दी. सूचना पा कर एसपी सुनीति, एएसपी अजय प्रताप सिंह और सीओ विजय कुमार राणा भी घटनास्थल पर पहुंच गए. उन्होंने भी लाश और घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद वहां मौजूद लोगों से पूछताछ की. उधर खबर मिलते ही मृतका नेहा चौधरी की मां वीना चौधरी, छोटा भाई अंकित और चाचा कमल सिंह गांव के कुछ लोगों के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. लाश देखते ही वीना चौधरी ने उस की शिनाख्त अपनी बेटी नेहा के रूप में कर दी. घर के सभी लोगों का रोरो कर बुरा हाल था. गांव वाले उन्हें सांत्वना दे कर चुप कराने की कोशिश कर रहे थे.
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पुलिस ने मृतका के घर वालों से पूछा कि उन की किसी से कोई रंजिश वगैरह तो नहीं है. इस पर वीना चौधरी ने कहा कि हमारी गांव में क्या कहीं भी किसी से कोई रंजिश नहीं है. मौके पर पहुंची फोरैंसिक टीम ने भी घटनास्थल से सुबूत जुटाए. इस के बाद पुलिस ने जरूरी लिखापढ़ी के बाद उस का शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. एसपी सुनीति ने इस हत्याकांड को सुलझाने के लिए 3 पुलिस टीमों का गठन किया.
पुलिस ने वीना चौधरी से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि नेहा मेरठ की सुभारती यूनिवर्सिटी से एमबीए कर रही थी. इस साल वह फाइनल की छात्रा थी. इस के अलावा वह पिछले 4 साल से नोएडा स्थित एक निजी बैंक में नौकरी भी कर रही थी और दिल्ली के लक्ष्मी नगर में किराए के मकान में रहती थी.
7 फरवरी यानी कल वह घर अमरोहा लौटने वाली थी. उस ने नोएडा से चलने के बाद अपने चाचा कमल सिंह को फोन कर के बता दिया था कि वह शाम तक अमरोहा पहुंच जाएगी. लेकिन वह घर नहीं पहुंची.
पुलिस ने मृतका के चाचा कमल सिंह की तरफ से अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया. पोस्टमार्टम के बाद घर वाले लाश ले कर चले गए.
पुलिस की सभी टीमें जांच में जुट गईं. जिस जगह पर नेहा चौधरी की लाश मिली थी, पुलिस ने उस के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली. एक फुटेज में 7 फरवरी को रात करीब 8 बजे नेहा चौधरी के साथ एक युवक भी दिखाई दिया. दूसरे दिन पुलिस ने वह फुटेज नेहा के घर वालों को दिखाई तो वीना चौधरी और देवर कमल सिंह ने युवक को पहचानते हुए बताया कि यह तो नेहा का छोटा भाई अंकित है. यह सुन कर पुलिस हतप्रभ रह गई. वीना चौधरी के साथ अंकित भी घटनास्थल पर आया था और फूटफूट कर रो रहा था, जबकि उस की हत्या से कुछ घंटे पहले तक वह उस के साथ था. सोचने वाली बात यह थी कि हत्या से पहले आखिर वह उस के साथ क्या कर रहा था.
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अब पुलिस का मकसद अंकित से पूछताछ करना था, लेकिन वह घर से गायब था. पुलिस उस की तलाश में जुट गई. अगले दिन यानी 9 फरवरी की रात 9 बजे अंकित को पुलिस ने उस समय गिरफ्तार कर लिया, जब वह दिल्ली भागने की फिराक में था. थाने में पुलिस ने अंकित से सख्ती से पूछताछ की तो वह टूट गया. अंकित ने स्वीकार कर लिया कि उस ने ही अपनी बड़ी बहन नेहा की हत्या की थी. आखिर छोटे भाई ने अपनी सगी बहन की हत्या क्यों की, इस बारे में पुलिस ने जब अंकित से पूछा तो नेहा चौधरी की हत्या की जो कहानी सामने आई, वह चौंकाने वाली थी—
25 वर्षीय नेहा चौधरी उत्तर प्रदेश के जिला अमरोहा के गांव पचोखरा के रहने वाले दिनेश चौधरी की बेटी थी. पत्नी वीना चौधरी के अलावा दिनेश चौधरी के 2 बच्चे थे, बड़ी बेटी नेहा और छोटा अंकित चौधरी.
करीब 20 साल पहले दिनेश चौधरी अचानक गायब हो गए थे. उन्हें बहुत तलाशा गया, लेकिन कहीं पता नहीं चला. उस समय नेहा की उम्र 5 साल और अंकित की 3 साल थी. पति के गायब हो जाने पर वीना चौधरी पर जैसे दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. दुख की इस घड़ी में उन का साथ दिया उन के देवर कमल सिंह ने. वह अमरोहा शहर के मोहल्ला पीरगढ़ में रहते थे.
भाई के गायब हो जाने के बाद वह अपनी भाभी और दोनों बच्चों को अपने साथ ले आए और अपने घर पर ही रख कर न सिर्फ उन की परवरिश की, बल्कि पढ़ाईलिखाई भी पूरी कराई. अंकित चौधरी की ननिहाल अमरोहा जिले के ही गांव सलामतपुर में थी. वह अकसर अपनी ननिहाल जाता रहता था. बताया जाता है कि उस ने अपने ममेरे भाई अक्षय के साथ मिल कर अपनी ननिहाल के गांव की रहने वाली एक नाबालिग लड़की का अपहरण कर उस के साथ बलात्कार किया था.
लड़की के पिता ने 18 जनवरी, 2021 को थाना डिडौली में अंकित और अक्षय के खिलाफ भारतीय दंड विधान की धारा 363 376डी, 342, 516 पोक्सो ऐक्ट तथा एससी/एसटी ऐक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई.
अमरोहा की अदालत में नाबालिग लड़की के बयान भी दर्ज कराए गए. जिस में उस ने साफ कहा कि अंकित और अक्षय ने उस का अपहरण करने के बाद उस के साथ दुष्कर्म किया था. इस केस से बचने के लिए अंकित चौधरी ने अमरोहा के कई बड़े वकीलों से राय ली. उन्होंने अंकित को बताया कि मामला बहुत गंभीर है. इस में तुम बच नहीं सकते, जेल तो जाना ही पड़ेगा. तब शातिर दिमाग अंकित चौधरी ने अपने आप को बचाने के लिए एक खौफनाक योजना तैयार की.
योजना यह थी कि वह अपनी बड़ी बहन नेहा चौधरी की हत्या करने के बाद इस का आरोप उस लड़की के पिता पर लगा देगा, जिस ने उस के खिलाफ बेटी के अपहरण व बलात्कार की रिपोर्ट दर्ज कराई थी.
ऐसा करने से क्रौस केस बन जाएगा. इस के बाद केस को रफादफा करने के लिए समझौते की बात चलेगी. समझौता हो जाने पर वह जेल जाने से बच जाएगा. उसे बहन की हत्या कैसे करनी है, इस की भी उस ने पूरी योजना बना ली थी. योजना के अनुसार 7 फरवरी, 2021 को अंकित चौधरी ने अपनी बहन नेहा चौधरी को किसी परिचित के मोबाइल से फोन किया. उस समय नेहा नोएडा में अपनी ड्यूटी पर थी.
अंकित ने उस से कहा कि बहन मेरे ऊपर जो मुकदमा चल रहा है उस में नाबालिग लड़की के पिता से बात हो गई है. वह फैसला करने को राजी है. लेकिन फैसले के समय तुम्हारा वहां रहना जरूरी है. इसलिए मैं अमरोहा से टैक्सी ले कर तुम्हें लेने के लिए नोएडा आ रहा हूं. नेहा ने सोचा कि एकलौता भाई है, फैसला हो जाए तो अच्छा है. यही सोच कर उस ने अमरोहा आने की हामी भर दी. योजना के अनुसार 7 फरवरी, 2021 को अमरोहा के गांधी मूर्ति चौराहे के पास स्थित टैक्सी स्टैंड से एक गाड़ी बुक करा कर अंकित नोएडा के लिए रवाना हो गया. वह उस जगह पहुंच गया, जहां उस की बहन नेहा नौकरी करती थी. नेहा अंकित के साथ नोएडा से अमरोहा के लिए चल दी.
रास्ते में नेहा ने अपने चाचा कमल सिंह को फोन कर के बता दिया था कि वह अमरोहा आ रही है और शाम 6 बजे तक घर पहुंच जाएगी. वापसी में अंकित टैक्सी ले कर अमरोहा से थोड़ा पहले स्थित जोया रोड पर पहुंचा तो उस ने अमरोहा ग्रीन से थोड़ा पहले टैक्सी रुकवा ली. नेहा ने टैक्सी रोकने की वजह पूछी तो अंकित ने बताया कि पुलिस मेरे पीछे पड़ी है. ऐसे में टैक्सी से घर जाना सही नहीं है. हम लोग यहां से किसी दूसरे रास्ते से चलेंगे. उस ने टैक्सी वाले को पैसे दे कर वहां से भेज दिया.
इस के बाद वह नेहा को हिल्टन कौन्वेंट स्कूल के पास खाली पड़े प्लौट की तरफ ले गया. नेहा ने उस से पूछा भी कि मुझे इस अनजान, सुनसान जगह से कहां ले जा रहे हो. तब अंकित ने कहा कि इधर से शौर्टकट रास्ता है. मेनरोड पर पुलिस मुझे पकड़ सकती है इसलिए मैं शौर्टकट से जा रहा हूं. नेहा ने भाई की बात पर विश्वास कर लिया और उस के साथ चलने लगी. नेहा को क्या पता था कि जिस भाई की कलाई पर वह हर साल अपनी रक्षा के लिए राखी बांधती है, वही भाई उस की हत्या करने वाला है.
वह कुछ ही दूर चली थी कि अंकित रुक गया. वह नेहा से बोला कि मैं बाथरूम कर लूं, तुम पीछे मुंह कर के खड़ी हो जाओ.
जैसे ही नेहा पीछे मुंह कर के खड़ी हुई, अंकित ने अपनी जेब से एक फीता निकाला और बड़ी फुरती से नेहा के गले में डाल कर कस दिया. नेहा बस इतना ही कह पाई कि भाई यह तुम क्या कर रहे हो? इस के बाद वह मूर्छित हो कर जमीन पर गिर गई. तभी अंकित ने पास पड़ी ईंट से बहन के सिर व चेहरे पर तमाम वार किए और वह उसे ईंट से तब तक कूटता रहा, जब तक कि उस की मौत न हो गई.
अपनी सगी बहन की हत्या के बाद वह वहां से चला गया. वह सीधा अमरोहा की आवास विकास कालोनी में रहने वाले अपने एक रिश्तेदार के घर गया. फिर वहां से अगली सुबह 5 बजे उठ कर चला गया.
उस के कपड़ों, जूतों आदि पर खून लगा था. इसलिए उस ने अपने कपड़े, जैकेट, जूते, टोपा और गला घोंटने वाला फीता कल्याणपुर बाईपास के पास हमीदपुरा गांव के जंगल की झाडि़यों में छिपा दिए. इस के बाद वह अपने घर चला गया. सुबह होने पर एक सिपाही जब नेहा की हत्या की खबर देने उस के घर गया, तब वह अपनी मां और चाचा के साथ घटनास्थल पर पहुंचा और वहां फूटफूट कर रोने का नाटक करने लगा.
अंकित से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उस की निशानदेही पर हमीदपुरा गांव के जंगल की झाडि़यों में छिपा कर रखे गए कपड़े, जैकेट, जूते, टोपा और फीता बरामद कर लिया.
अंकित चौधरी की गिरफ्तारी के बाद सारे सबूत पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिए. 10 फरवरी, 2021 को अमरोहा की एसपी सुनीति ने प्रैस कौन्फ्रैंस कर इस हत्याकांड का खुलासा कर दिया.इस पूरे मामले में एसपी सुनीति को डिडौली थाने के दरोगा मुजम्मिल की लापरवाही नजर आई.मुजम्मिल ने नाबालिग लड़की के अपहरण और बलात्कार के आरोपी अंकित और उस के ममेरे भाई
अक्षय को गिरफ्तार करने में लापरवाही दिखाई थी.
यदि वह इन दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लेते तो शायद नेहा की हत्या नहीं होती. इसलिए एसपी सुनीति ने लापरवाही के आरोप में एसआई मुजम्मिल को लाइन हाजिर कर दिया.
अंकित चौधरी से विस्तार से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उसे न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.
धर्म का नशा इतना बड़ा है कि लोग अपनी जान की परवाह किए बिना हरिद्वार में हो रहे कुंभ में बिना कोविड टैस्ट करा पहुंच रहे हैं. वे खुद को भी बिमारी का निमंत्रण दे रहे हैं और अगर उन्हें नहीं है तो दूसरों से ले रहे हैं. भाजपा सरकार ने इस कुंभ को बंद करने का कोई आदेश नहीं दिया है.
यह धर्मांधता भारत में ही नहीं दुनिया भर में है. कितने ही देशों में चर्चों ने अपने दरवाजे पिछले फरवरी-मार्च से लगातार खुले रखे. जहां भी धर्म समर्थक सरकार थी वहां उन्होंने अनदेखा किया. कितने ही ईसाई पुजारी जो कहते रहे कि कोविड केवल पापियों को होगा, जीसस ईश्वर को भारत में आने वालों को नहीं होगा कोविड के चपेट में आकर अपनी मान्यता के अनुसार जीसस से मिलने पहुंच गए.
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भारत में सभी मंदिरों के अघोषित मालिक राष्ट्रीय स्वयं सेवा संघ के सरसंघ चालक मोहन भागवत भी कोविड ग्रस्त हो चुके हैं. कितने ही भाजपा के मंत्री, मुख्यमंत्री कोविड से छटपटाते रहे पर फैसले लेते समय धर्म का धंधा उन पर छाया रहा. उन्होंने मंदिरा में भी जाना चालू रखा, घरों में हवन पूजाएं कराईं, चुनाव सभाओं में भाग लिया, अफसरों से मिले, कमाई के अवसर चालू रखे. हां भूल कर भी वे उन मजदूरों की ओर नहीं गए जो कोविड के डर के कारण पिछले साल पैदल चल कर घर पहुंचे और फिर वापस आए और अब दूसरी नहर में फिर लौट रहे हैं.
हरिद्वार के कुंभ के लिए पुलिस ने एतिहात के तौर पर जगहजगह पोस्ट लगा कर आरटी-पीसीओर रिपोर्ट चैक करना चालू रख रखा है पर तीर्थ यादि मुख्य मार्ग छोड़ कर खेतों, जंगलों, गांवों से उबडख़ाबड़ सडक़ों से जाने लगे हैं. वे गांवों की सडक़ों को तो नष्ट कर ही रहे हैं, बिना टैस्ट के जाने की वजह जहां रखेंगे वहां वायरस छोड़ सकते हैं. जो गांव किसी तरह से बच रहे थे वे गंगा मैया की कृपा से कोरोना ग्रस्त हो जाएं तो बड़ी बात नहीं.