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तीज 2022: स्नैक्स में बनाएं मसूर दाल मसाला पूरी और ओट्स ऐंड फ्लैक्स इडली

घर में कोई खास अवसर है और कुछ विशेष बनाना चाहते हैं तो चिंता मत कीजिए. हम आप के लिए लाए हैं लजीज स्नैक्स, जिन्हें छोटेबड़े सभी खाना पसंद करेंगे.

  1. ओट्स ऐंड फ्लैक्स इडली

सामग्री

– 1 कप ओट्स रेडी टु कुक

– 25 ग्राम अलसी के बीज

– 1 कप अधपके चावल

– 1/2 कप पके चावल

– 1/2 कप उरद दाल

– 1 छोटा चम्मच मेथीदाना

– 2 बड़े चम्मच तेल

– 2 छोटे चम्मच नमक.

वैकल्पिक सामग्री

– 50 ग्राम पालक कटा

– 10 ग्राम अदरक कटा.

विधि

एक बरतन में उरद दाल और दूसरे बरतन में अधपके चावलों को मेथीदाने के साथ भिगो कर 4 घंटों के लिए रख दें. अब उरद दाल को अलग ग्र्राइंड करें और अधपके चावलों को पूरे पके चावलों के साथ अलग ग्र्राइंड करें. पेस्ट हलका और झागदार हो. फिर दोनों पेस्टों को मिला लें. अब ओट्स को 10 मिनट के लिए भिगो दें और फिर आधी मात्रा में अलसी के बीजों के साथ ओट्स को ग्र्राइंड कर के चावल व उरद दाल के मिश्रण के साथ मिला दें. इडली बनाने से पूर्व बैटर में नमक मिलाएं. तेल से इडली ट्रे को चिकना करें. घोल को ट्रे में डाल कर ऊपर से बचे अलसी के बीज बुरकें. 10 मिनट तक पकाने के बाद सांबर के साथ परोसें. वैरिएशन के लिए इडली को पालक और अदरक के साथ भी परोसा जा सकता है.

2. पास्ता इन स्पिनेच ग्रेवी

सामग्री : 1 कप उबला पास्ता, 1 कप पालक प्यूरी, 1/4 कप उबले कौर्न, 2 बड़े चम्मच प्याज बारीक कटा, 1 छोटा चम्मच कौर्नफ्लोर, 3 बड़े चम्मच दूध, नमक व मिर्च स्वादानुसार और 2 बडे़ चम्मच औलिव औयल.

विधि : एक नौनस्टिक पैन में प्याज पारदर्शी होने तक भूनें. उस में पालक प्यूरी डालें. दूध में कौर्नफ्लोर डालें. 1/2 कप पानी भी डालें. उबला पास्ता, नमक, मिर्च डालें. ऊपर से उबले कौर्न से सजा कर सर्व करें.

3. मसूर दाल मसाला पूरी

सामग्री : 1/2 कप धुली मसूर दाल भीगी व दरदरी पिसी, 1 कप आटा, 2 छोटे चम्मच हींग पाउडर, चुटकीभर धनिया, जीरा पाउडर मोटा कुटा, 2 छोटे चम्मच सौंफ पाउडर, नमक व मिर्च स्वादानुसार और पूरी तलने के लिए तेल.

विधि : मसूर दाल मिश्रण में सारी सामग्री मिला कर पूरी लायक आटा गूंध कर 15 मिनट ढक कर रखें. फिर छोटीछोटी लोइयां बेल कर सुनहरा होने तक तल लें. सब्जी अथवा अचार के साथ खाएं व खिलाएं.

तीज 2022: 9 टिप्स- पतिपत्नी के रिश्ते को ऐसे बनाएं मजबूत

पतिपत्नी और वो के बजाय पतिपत्नी और जीवन की खुशियों के लिए रिश्ते को प्यार, विश्वास और समझदारी के धागों से मजबूत बनाना पड़ता है. छोटीछोटी बातें इग्नोर करनी होती हैं. मुश्किल समय में एकदूसरे का सहारा बनना पड़ता है. कुछ बातों का खयाल रखना पड़ता है:

  1. मैसेज पर नहीं बातचीत पर निर्भर रहें

ब्रीघम यूनिवर्सिटी में किए गए एक अध्ययन के मुताबिक जो दंपती जीवन के छोटेबड़े पलों में मैसेज भेज कर दायित्व निभाते हैं जैसे बहस करनी हो तो मैसेज, माफी मांगनी हो तो मैसेज, कोई फैसला लेना हो तो मैसेज ऐसी आदत रिश्तों में खुशी और प्यार को कम करती है. जब कोई बड़ी बात हो तो जीवनसाथी से कहने के लिए वास्तविक चेहरे के बजाय इमोजी का सहारा न लें.

2. ऐसे दोस्तों का साथ जिन की वैवाहिक जिंदगी खुशहाल है

ब्राउन यूनिवर्सिटी में किए गए एक अध्ययन के मुताबिक यदि आप के निकट संबंधी या दोस्त ने डिवोर्स लिया है तो आप के द्वारा भी यही कदम उठाए जाने की संभावना 75% तक बढ़ जाती है. इस के विपरीत यदि आप के प्रियजन सफल वैवाहिक जीवन बिता रहे हैं तो यह बात आप के रिश्ते में भी मजबूती का कारण बनती है.

3. पतिपत्नी बनें बैस्ट फ्रैंड्स

‘द नैशनल ब्यूरो औफ इकोनौमिक’ द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि जो दंपती एकदूसरे को बैस्ट फ्रैंड मानते हैं वे दूसरों के मुकाबले अपना वैवाहिक जीवन दोगुना अधिक संतुष्ट जीते हैं.

4. छोटीछोटी बातें भी होती हैं महत्त्वपूर्ण

मजबूत रिश्ते के लिए समयसमय पर अपने जीवनसाथी को स्पैशल महसूस कराना जरूरी है. यह जताना भी जरूरी है कि आप उन की केयर करते हैं और उन्हें प्यार करते हैं. इस से तलाक की नौबत नहीं आती. आप भले ही ज्यादा कुछ नहीं पर इतना तो कर ही सकते हैं कि प्यारभरा एक छोटा सा नोट जीवनसाथी के पर्स में डाल दें या दिनभर के काम के बाद उन के कंधों को प्यार से सहला दें. उन के बर्थडे या अपनी ऐनिवर्सरी को खास बनाएं. कभीकभी उन्हें सरप्राइज दें. ऐसी छोटीछोटी गतिविधियां आप को उन के करीब लाती हैं.

वैसे पुरुष जिन्हें अपनी बीवी से इस तरह की सपोर्ट नहीं मिलती उन के द्वारा तलाक दिए जाने की संभावना दोगुनी ज्यादा होती है, जबकि स्त्रियों के मामले में ऐसा नहीं देखा गया है. इस की वजह यह है कि स्त्रियों का स्वभाव अलग होता है. वे अपने दोस्तों के क्लोज होती हैं. ज्यादा बातें करती हैं. छोटीछोटी बातों पर उन्हें हग करती हैं. अनजान लोग भी महिलाओं को कौंप्लिमैंट देते रहते हैं, जबकि पुरुष स्वयं में सीमित रहते हैं. उन्हें फीमेल पार्टनर या पत्नी से सपोर्ट की जरूरत पड़ती है.

5. आपसी विवादों को करें बेहतर ढंग से हैंडल

पतिपत्नी के बीच विवाद होना बहुत स्वाभाविक है और इस से बचा नहीं जा सकता. मगर रिश्ते की मजबूती इस बात पर निर्भर करती है कि आप इसे किस तरह हैंडल करते हैं. अपने जीवनसाथी के प्रति हमेशा सौम्य और शिष्ट व्यवहार करने वालों के रिश्ते जल्दी नहीं टूटते. झगड़े या विवाद के दौरान चिल्लाना, अपशब्द बोलना या मारपीट पर उतारू हो जाना रिश्ते में जहर घोलने जैसा है. ऐसी बातें इंसान कभी भूल नहीं पाता और वैवाहिक जिंदगी पर बहुत बुरा असर पड़ता है.

एक अध्ययन में इस बात का खुलासा किया गया है कि कैसे फाइटिंग स्टाइल आप की मैरिज को प्रभावित करती है. शादी के 10 साल बाद वैसे कपल्स जिन्होंने तलाक ले लिया और वैसे कपल्स जो अपने जीवनसाथी के साथ खुशहाल जिंदगी जी रहे थे, के बीच जो सब से महत्त्वपूर्ण अंतर पाया गया वह था शादी के 1 साल के अंदर उन के आपसी विवाद और झगड़ों को निबटाने का तरीका.वे कपल्स जिन्होंने शादी के प्रारंभिक वर्षों में ही अपने जीवनसाथी के साथ समयसमय पर क्रोध और नकारात्मक लहजे के साथ व्यवहार किया उन का तलाक 10 सालों के अंदर हो गया. ‘अर्ली इयर्स औफ मैरिज प्रोजैक्ट’ में भी अमेरिकी शोधकर्ता ओरबुच ने यही पाया कि अच्छा, जिंदादिल रवैया और मधुर व्यवहार रहे तो परेशानियों के बीच भी कपल्स खुश रह सकते हैं. इस के विपरीत मारपीट और उदासीनता भरा व्यवहार रिश्ते को कमजोर बनाता है.

6. बातचीत का विषय हो विस्तृत

पतिपत्नी के बीच बातचीत का विषय घरेलू मामलों के अलावा भी कुछ होना चाहिए. अकसर कपल्स कहते हैं कि हम तो आपस में बातें करते ही रहते हैं संवाद की कोई कमी नहीं. पर जरा गौर करें कि आप बातें क्या करते हैं. हमेशा घर और बच्चों के काम की बातें करना ही पर्याप्त नहीं होता. खुशहाल दंपती वे होते हैं जो आपस में अपने सपने, उम्मीद, डर, खुशी और सफलता सबकुछ बांटते हैं. एकदूसरे को जाननेसमझने का प्रयास करते हैं. किसी भी उम्र में और कभी भी रोमांटिक होना जानते हैं.

7. अच्छे समय को करें सैलिब्रेट

‘जनरल औफ पर्सनैलिटी ऐंड सोशल साइकोलौजी’ में प्रकाशित एक रिसर्च के मुताबिक अच्छे समय में पार्टनर का साथ देना तो अच्छा है पर उस से भी जरूरी है कि दुख, परेशानी और कठिन समय में अपने जीवनसाथी के साथ खड़ा होना. पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन पर मोनिका लेविंस्की ने जब यौनशोषण का आरोप लगाया तो उस वक्त भी हिलेरी क्लिंटन ने अपने पति का साथ नहीं छोड़ा. उन दिनों के साथ ने दोनों के रिश्ते को और मजबूत बना दिया.

8. रिस्क लेने से न घबराएं

पतिपत्नी के बीच यदि नोवैल्टी, वैराइटी और सरप्राइज का दौर चलता रहता है तो रिश्ते में भी ताजगी और मजबूती बनी रहती है. साथ मिल कर नईनई ऐक्साइटमैंट्स से भरी ऐक्टिविटीज में इन्वौल्व हों, नईनई जगह घूमने जाएं, रोमांचक सफर का मजा ले, लौंग ड्राइव पर जाएं, एकदूसरे को खानेपीने, घूमने, हंसने, मस्ती करने और समझने के नएनए औप्शन दें. कभी रिश्ते में नीरसता और उदासीनता को न झांकने दें. जिंदगी को नएनए सरप्राइज से सजा कर रखें.

9. केवल प्यार काफी नहीं

हम जिंदगी में अपने हर तरह के कमिटमैंट के लिए पूरा समय देते हैं, ट्रेनिंग्स लेते हैं ताकि हम उसे बेहतर तरीके से आगे ले जा सकें . जिस तरह  खिलाड़ी खेल के टिप्स सीखते हैं, लौयर किताबें पढ़ते हैं, आर्टिस्ट वर्कशौप्स करते हैं ठीक उसी तरह शादी को सफल बनाने के लिए हमें कुछ न कुछ नया सीखने और करने को तैयार रहना चाहिए. सिर्फ अपने साथी को प्यार करना ही काफी नहीं, उस प्यार का एहसास कराना और उस की वजह से मिलने वाली खुशी को सैलिब्रेट करना भी जरूरी है.

साइंटिफिक दृष्टि से देखें तो इस तरह के नएनए अनुभव शरीर में डोपामिन सिस्टम को ऐक्टिवेट करते हैं जिस से आप का दिमाग शादी के प्रारंभिक वर्षों में महसूस होने वाले रोमांटिक पलों को जीने का प्रयास करता है. एकदूसरे को सकारात्मक बातें कहना, तारीफ करना और साथ रहना रिश्ते में मजबूती लाता है.

तीज 2022: मुझे कबूल नहीं- रेशमा से उस के मंगेतर की क्या ख्वाहिश थी

अब्बाजान की प्राइवेट नौकरी के कारण 3 बड़े भाईबहनों की पढ़ाई प्राइमरी तक ही पूरी हो सकी थी. लेकिन मैं ने बचपन से ही ठान लिया था कि उच्चशिक्षा हासिल कर के रहूंगी.

‘‘रेशमा, हमारी कौम और बिरादरी में पढ़ेलिखे लड़के कहां मिलते हैं? तुम पढ़ाई की जिद छोड़ कर कढ़ाईबुनाई सीख लो,’’ अब्बू ने समझाया था.

मेरी देखादेखी छोटी बहन भी ट्यूशन पढ़ा कर पढ़ाई का खर्च खुद पूरा करने लगी. 12वीं कक्षा की मेरी मेहनत रंग लाई और मुझे वजीफा मिलने लगा. इस दरमियान दोनों बड़ी बहनों की शादी मामूली आय वाले लड़कों से कर दी गई और भाई एक दुकान में काम करने लगा. मैं ने प्राइवेट कालेजों में लैक्चरर की नौकरी करते हुए पीएचडी शुरू कर दी. अंत में नामचीन यूनिवर्सिटी में हिंदी अधिकारी के पद पर कार्यरत हो गई. छोटी बहन भी लैक्चरर के साथसाथ डाक्टरेट के लिए प्रयासरत हो गई.

मेरी पोस्टिंग दूसरे शहर में होने के कारण अब मैं ईदबकरीद में ही घर जाती थी. इस बीच मैं ने जरूरत कीचीजें खुद खरीद कर जिंदगी को कमोबेश आसान बनाने की कोशिश की. लेकिन जब भी अपने घर जाती अम्मीअब्बू के ज्वलंत प्रश्न मेरी मुश्किलें बढ़ा देते.

‘‘इतनी डिगरियां ले ली हैं रेशमा तुम ने कि तुम्हारे बराबर का लड़का ढूंढ़ने की हमारी सारी कवायद नाकाम हो गई है.’’

‘‘अब्बू अब लोग पढ़ाई की कीमत समझने लगे हैं. देखना आप की बेटियों के लिए घर बैठे रिश्ता आएगा. तब आप फख्र करेंगे अपनी पढ़ीलिखी बेटियों पर,’’ मैं कहती.

‘‘पता नहीं वह दिन कब आएगा,’’ अम्मी गहरी सांस लेतीं, ‘‘खानदान की तुम से छोटी लड़कियों की शादियां हो गईं. वे बालबच्चेदार भी हो गईं. सब टोकते हैं, कब कर रहे हो रेशमा और नसीमा की शादी? तुम्हारी शादी न होने की वजह से हम हज करने भी नहीं जा सकते हैं,’’ अम्मी ने अवसाद उड़ेला तो मैं वहां से चुपचाप उठ कर चली गई.

यों तो मेरे लिए रिश्ते आ रहे थे, लेकिन बिरादरी से बाहर शादी न करने की जिद अम्मीअब्बू को कोई फैसला नहीं लेने दे रही थी.

शिक्षा हर भारतीय का मूल अधिकार है, लेकिन हमारा आर्थिक रूप से कमजोर समाज युवाओं को शीघ्र ही कमाऊपूत बनाने की दौड़ में शिक्षित नहीं होने देता. नतीजतन पीढ़ी दर पीढ़ी हमारी कौम आर्थिक तंगी, सीमित आय में ही गुजारा करने के लिए विवश होती है. यह युवा पीढ़ी की विडंबना ही है कि आगे बढ़ने के अवसर होने पर भी उस की मालीहालत उसे उच्च शिक्षा, ऊंची नौकरियों से महरूम कर देती है.

उस दिन अब्बू ने फोन किया. आवाज में उत्साह था, ‘‘तुम्हारे छोटे चाचा एक रिश्ता लाए हैं. लड़का पोस्ट ग्रैजुएट है. प्राइवेट स्कूल में नौकरी करता है तनख्वाह क्व8 हजार है… खातेपीते घर के लोग हैं… फोटो भेज रहा हूं.’’

‘‘दहेज की कोई मांग नहीं है. सादगी से निकाह कर के ले जाएंगे,’’ भाईजान ने भी फोन कर बताया.

अब्बू और भाईजान को तो मुंहमांगी मुराद मिल गई. मैंने फोटो देखा. सामान्य चेहरा. बायोडाटा में मेरी डिगरियों के साथ कोई मैच नहीं था, लेकिन मैं क्या करती. अम्मीअब्बू की फिक्र… बहन की शादी की उम्र… मैं भी 34 पार कर रही थी… भारी सामाजिक एवं पारिवारिक दबाव के तहत अब्बू ने मेरी सहमति जाने बगैर रिश्ते के लिए हां कर दी.

सगाई के बाद मैं वापस यूनिवर्सिटी आ गई. लेकिन जेहन में अनगिनत सवाल कुलबुलाते रहे कि पता नहीं उस का मिजाज कैसा होगा… उस का रवैया ठीक तो होगा न… मुझे घरेलू हिंसा से बहुत डर लगता है… यही तो देख रही हूं सालों से अपने आसपास. क्या वह मेरे एहसास, मेरे जज्बात की गहराई को समझ पाएगा?

तीसरे ही दिन मंगेतर का फोन आ गया. पहली बार बातचीत, लेकिन शिष्टाचार, सलीका नजर नहीं आया. अब तो रोज का ही दस्तूर बन गया. मैं थकीहारी औफिस से लौटती और उस का फोन आ जाता. घंटों बातें करता… अपनी आत्मस्तुति, शाबाशी के किस्से सुनाता. मैं मितभाषी बातों के जवाब में बस जी… जी… करती रहती. वह अगर कुछ पूछता भी तो बगैर मेरा जवाब सुने पुन: बोलने लगता.

चौथे महीने के बाद वह कुछ ज्यादा बेबाक हो गया. मेरे पुरुष मित्रों के बारे में, रिश्ते की सीमाओं के बारे में पूछने लगा. कुछ दिन बाद एक धार्मिक पर्व के अवसर पर बात करते हुए मैं ने महसूस किया कि वह और उस का परिवार पुरानी निरर्थक परंपराओं एवं रीतिरिवाजों के प्रति बहुत ही कट्टर और अडिग हैं. मैं आधुनिक प्रगतिशील विचारधारा वाली ये सब सुन कर बहुत चिंतित हो गई.

यह सच है कि बढ़ती उम्र की शादी महज मर्द और औरत को एक छत के नीचे रख कर सामाजिक कायदों को मानने एवं वंश बढ़ाने की प्रक्रिया के तहत एक समझौता होती है, फिर भी नारी का कोमल मन हमेशा पुरुष को हमसफर, प्रियतम, दोस्त, गमगुजार के रूप में पाने की ख्वाहिश रखता है… मैं ऐसे कैसे किसी संवेदनहीन व्यक्ति को जीवनसाथी बना कर खुश रह सकती हूं?

एक दिन उस ने फोन पर बताया कि वह पोस्ट ग्रैजुएशन का अंतिम सेमैस्टर देने के लिए छुट्टी ले रहा है… मुझे तो बतलाया गया था कि वह पोस्ट ग्रैजुएशन कर चुका है… मैं ने उस के सर्टिफिकेट को पुन: देखा तो आखिरी सेमैस्टर की मार्कशीट नहीं थी… मेरा माथा ठनका कि इस का मतलब मुझे झूठ बताया गया. मैं पहले भी महसूस कर चुकी थी कि उस की बातों में सचाई और साफगोई नहीं है.

उस ने फोन पर बताया कि वह प्राइवेट नौकरी की शोषण नीति से त्रस्त हो चुका है. अब घर में रह कर अर्थशास्त्र पर किताब लिखना चाहता है.

‘‘किताब लिखने के लिए नौकरी छोड़ कर घर में रहना जरूरी नहीं है. मैं ने 2 किताबें नौकरी करते हुए लिखी हैं.’’

मेरे जवाब पर प्रतिक्रिया दिए बगैर उस ने बात बदल दी. अनुभवों और परिस्थितियों ने मुझे ठोस, गंभीर और मेरी सोच को परिपक्व बना दिया था. उस का यह बचकाना निर्णय मुझे उस की चंचल, अपरिपक्व मानसिकता का परिचय दे गया.

एक दिन मुझे औफिस का काम निबटाना था, तभी उस का फोन आ गया. हमेशा की तरह बिना कौमा, पूर्णविराम के बोलने लगा, ‘‘यह बहुत अच्छा हो गया… आप मुझे मिल गईं. अब मेरी मम्मी को मेरी चिंता नहीं रहेगी.’’

‘‘वह कैसे?’’

‘‘क्योंकि मेरी तमाम बेसिक नीड्स पूरी हो जाएंगी.’’

सुन कर मैं स्तब्ध रह गई. मैं ने संयम जुटा कर पूछा.

‘‘बेसिक नीड्स से क्या मतलब है आप को?’’

उस ने ठहाका लगा कर जवाब दिया, ‘‘रोटी, कपड़ा और मकान.’’

मैं सुन कर अवाक रह गई. भारतीय समाज में पुरुष परिवार की हर जरूरत पूरा करने का दायित्व उठाते हैं. यह मर्द तो औरत पर आश्रित हो कर मुझे बैसाखियों की तरह इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है. इस से पहले भी उस ने मेरी तनख्वाह और बैंकबैलेंस के बारे में पूछा था जिसे मैं ने सहज वार्त्ता समझ कर टाल दिया था.

अपने निकम्मेपन, अपने हितों को साधने के लिए ही शायद उस ने पढ़ीलिखी नौकरीपेशा लड़की से शादी करने की योजना बनाई थी. आज मेरे जीवन का यह अध्याय चरमसीमा पर आ गया. मैं ने चाचा, अब्बू व भाईजान को अपनी सगाई तोड़ देने की सूचना दे कर दूसरे ही दिन मंगनी में दिया सारा सामान उस के पते पर भिजवा दिया. मेरा परिवार काठ बन गया.

मुझे खुदगर्जी के चेहरे पर मुहब्बत का फरेबी नकाब पहनने वाले के साथ रिश्ता कबूल नहीं था. छलकपट, स्वार्थ, दंभ से भरे पुरुष के साथ जीवन व्यतीत करने से बेहतर है मैं अकेली अनब्याही ही रहूं.

तीज 2022: हर पति-पत्नी के रिश्ते में पनपती हैं ये 5 शिकायतें

पति-पत्नी का रिश्ता विश्वास और भरोसे का रिश्ता होता है. जिसमें जितना प्यार है उतनी ही नोक-झोंक भी. यह रिश्ता एक मजबूत बारीक डोर पर टिका होता है, जिसके टूटने का डर हमेशा बना रहता है. इसलिए इस रिश्ते में भरोसा होना बहुत जरूरी है.

हर पति-पत्नी के रिश्ते में कई पहलू होते हैं, लेकिन कुछ शिकायतें ऐसी होती हैं जो हर पति-पत्नी को एक-दूसरे से होती हैं. तो आइये जानते हैं इस रिश्ते की उन शिकायतों के बारे में.

तुम अब पहले जैसे नहीं रहे

शादी की शरुआत में बेइंतहा प्यार मिलने के बाद जब कुछ समय बीतने लगता है तो इन एक या दो सालों में ही प्यार की डोर कमजोर पड़ने लगती है. दूसरे शब्दों में कहें -तो ‘तुम्हारे दीदार से सुबह की शुरुआत हो, तुम्हारे पहलू में ही हर शाम ढले’ जैसे दावे धीरे-धीरे दम तोड़ते हुए दिखाई देने लगते हैं. क्योकि शादी के बाद धीरे धीरे घर-परिवार की जिम्मेदारियां बढ़ने लगती है और एक दूसरे को पूरा समय ना देने के कारण उनके बीच नोकझोक का सिलसिला चालू होने लगता है.

तुम अब मुझे पहले जैसा प्यार नहीं करते

शादी के कुछ साल बीत जाने के बाद अक्सर दोनों के प्यार में कमी आने लगती है. जिससे एक दूसरे से शिकायत रहती है कि वो अब अपने पार्टनर को पहले जैसा प्यार नहीं करते. ऐसा क्यों होता है, इसका भी कारण है, रौबर्ट फ्रेयर के द्वारा किये गए शोध के अनुसार यह पाया गया है कि जब पति पत्नि एक दूसरे के करीब आते हैं तो उस दौरान शरीर में रासायनिक द्रव्य तेजी से विकसित होते हैं, जिसके कारण उनके बीच सिर्फ प्यार ही बना रहता है एक दूसरे के प्रति कोई भी खामियां नजर नहीं आती है. लेकिन यह रसायन हमेशा एक ही स्तर पर नहीं रहता.

कुछ समय के बाद शरीर में इसका स्तर कम होने लगता है और करीब 2 से 3 साल में इसका प्रभाव शरीर पर बिल्कुल खत्म हो जाता है. अतः इसके उतार-चढ़ाव का प्रभाव प्रेमियों के स्वभाव में भी साफ नजर आने लगता है. यानी जब प्रेम का उफान कम होने लगता है तो एक-दूसरे की खामियां सामने आने लगती हैं.

तुम से कुछ उम्मीद करना ही बेकार है

हर पति-पत्नी के बीच की शिकायतों में ये एक आम शिकायत है. इसका सबसे बड़ा कारण है कि पति-पत्नी की एक-दूसरे से जरूरत से ज्यादा उम्मीदें बनाये रखना. इसमें महिलाएं पुरुषों से कहीं अधिक आगे होती हैं. हर पुरुष अपनी पत्नी के साथ वैसा ही व्यवहार करता है, जैसा उसने अपने पिता का मां के प्रति देखा था, लेकिन पत्नी उसे एक अच्छे प्रेमी,अच्छे दोस्त के साथ एक जिम्मेदार पिता के रूप में देखना चाहती है. पत्नि चाहती है कि उसका पति भी उसे औफिस जाने से पहले किस करे, बार-बार फोन करके हाल चाल पूछे, मेसेज करे लेकिन पति की सोच होती है कि जब घर ही जाना है तो फोन करने की जरूरत ही क्या है.

तुम्हें तो मुझमें सिर्फ कमियां नजर आती हैं

अक्सर देखा जाता है कि शादी के कुछ समय बाद ही पति-पत्नी के बीच की नोक झोक काफी बढ़ने लगती है. क्योंकि आज के समय में महिलायें घर, बाहर औफिस, फायनांस से लेकर सारा कुछ एक साथ संभाल लेती हैं, और हर पति भी यही चाहता है कि मेरी बीबी बाहर के काम में फरफेक्ट और मार्डन रहे. लेकिन जब घर की बात आती है तो वो वैसी ही पारंपरिक पत्नी होने की बात करते हैं जैसी उनकी मां या दादी थीं.

तुम मुझे चैन से जीने क्यों नहीं देती?

शादी के बाद लगभग हर पुरुष की यही शिकायत होती है कि उनकी बीवी हर बात पर उन्हें टोकती है, शादी के बाद हर पति यही चाहता है कि मै पहले जैसा आजाद रहूं किसी की कोई दखलांदजी ना हो. जिसके कारण उन्हें बीबी के टोकने की बात बुरी सगने लगती है जो लड़ाई झगड़े का कारण बनती है.

किंजल को छोड़ अनुपमा की जेठानी का दीवाना बना तोषू, देखें Video

रूपाली गांगुली (Rupali Ganguly) और गौरव खन्ना (Gaurav Khanna) स्टारर ‘अनुपमा’ में इन दिनों  बड़ा ट्विस्ट देखने को मिल रहा है. ‘अनुपमा’ में इन दिनों दिखाया जा रहा है कि अनुज के कारण बरखा और अंकुश ने अनुपमा और वनराज से माफी मांगी. लेकिन इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है, जिसमें अनुपमा का बेटा तोषु बरखा के साथ नैन मटक्का कर रहा है.

दरअसल, तोषू यानी आशीष मेहरोत्रा ने अपने इंस्टाग्राम एकाउंट से एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें वह अश्लेषा सावंत (बरखा) के साथ डांस करते नजर आ रहे हैं. इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि आशीष मेहरोत्रा और अश्लेषा के डांस स्टेप के साथ-साथ उनके एक्सप्रेशंस भी कमाल के है. आशीष मेहरोत्रा और अश्लेशा सावंत के इस वीडियो को फैंस खूब पसंद कर रहे हैं.

 

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टीवी सीरियल ‘अनुपमा’ में  के आने वाले एपिसोड में आप देखेंगे कि छोटी अनु शाह परिवार को गणेश उत्सव में आने के लिए न्योता भेजेगी. वनराज बिना देर किए अनुज के घर जाने के लिए हामी भर देगा. वनराज के बदले व्यवहार को देखकर बा चौंक जाएगी.

 

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शो में आप ये भी देखेंगे कि अनुज अपने हाथ से गणेश की मूर्ति बनाएगा. अनुपमा इस काम में अनुज की मदद करेगी. दूसरी तरफ बरखा अनुपमा को सबक सिखाने के लिए एक नया प्लान बनाएगी. बरखा और अधिक मिलकर पाखी को अपने जाल में फंसाएंगे. गणेश पूजा के दैरान किंजल को लेबर पेन होना शुरू हो जाएगा.

 

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GHKKPM: सई के खिलाफ जहर उगलेगी अश्वनी तो विराट होगा इमोशनल

टीवी सीरियल ‘गुम है किसी के प्यार में’ (Ghum Hai Kisikey Pyaar Meiin) की कहानी का ट्रैक इन दिनों दर्शकों को कॉफी पसंद आ रहा है. लीप के बाद सई, विराट और पाखी की जिंदगी में बड़ा बदलाव आ चुका है. एक तरफ विराट और पाखी मिलकर एक बेटे को पाल रहे है तो दूसरी तरफ सई अकेले अपनी बेटी के साथ जिंदगी में आगे बढ़ रही है. शो के अपकमिंग एपिसोड में बड़ा ट्विस्ट आने वाला है. आइए बताते हैं, शो के नए एपिसोड के बारे में…

शो में आपने देखा कि सई और विराट अलग-अलग अपने बच्चों के साथ गणपति का स्वागत करने में लगे हुए हैं. इस दौरान सावी बप्पा से अपने पिता को मांगती है. शो के लेटेस्ट एपिसोड में दिखाया गया कि पूजा के दौरान सई को याद करके विराट इमोशनल हो जाता है.

 

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‘गुम है किसी के प्यार में’ आने वाले एपिसोड में आप देखेंगे, अश्विनी विराट को देखकर इमोशनल हो जाएगी. अश्विनी बार बार विराट को याद दिलाएगी कि किस तरह से पाखी ने सई के जाने के बाद घर को संभाला है.

 

अश्विनी ये भी कहेगी कि अब वह सई से नफरत करने लगी है. वह विराट के कान में सई के खिलाफ जहर भरेगी. तो दूसरी तरफ सई भी विराट को लेकर अपनी नफरत का इजहार करेगी. सई कहेगी कि विराट ने एक्सीडेंट के बाद एक बार भी उसे खोजने की कोशिश नहीं की.

 

शो में आप ये भी देखेंगे कि विराट अश्विनी से बात करते हुए इमोशनल हो जाएगा. विराट कहेगा कि वह चाहता तो सई को रोक सकता था. अगर सई को रुक गई होती ते उसका एक्सीडेंट नहीं होता.

 

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शो के आने वाले एपिसोड में विनायक की तबियत खराब हो जाएगी. विनायक पाखी से अपना फोन लाने के लिए कहेगा. तभी विनायक के बैग में सई की तस्वीर दिखेगी. सई की तस्वीर देखकर पाखी घबरा जाएगी. उसे समझ आ जाएगा कि सई अब भी जिंदा है.

तृप्त मन- भाग 1: राजन ने कैसे बचाया बहन का घर

कल रात से ही वह अपनी सास से हुई बहस को ले कर परेशान थी. उस पर सोते वक्त पति के सामने अपना दुखड़ा रो कर मन हलका करना चाहा तो उस के मुंह से रमा सहाय का नाम सुन कर पति का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया. सारी रात आंखों में ही कुछ समझते हुए और कुछ न समझ आने पर उस पर गहन विचार करते हुए उस ने गुजार दी.

सुबह उठी तो आंखें बोझिल हो रही थीं और सिर भारी हुआ जा रहा था. रात को सास और फिर पति के संग हुई बहस की वजह से आज उस का मन किसी से भी बात करने को न हो रहा था. न चाहते हुए भी भारी मन से पति के लिए टिफिन बना कर उन्हें नौकरी के लिए विदा किया और फिर आंखें बंद कर बैठ गई. वैसे भी इंसान को अपनी समस्याओं का कोई हल नहीं मिलता तो अंतिम सहारे के रूप में वह आंख बंद कर प्रकृति के बारे में सोचने लगता है.

“अब बंद भी कर यह नाटक और रसोई की तैयारी कर.” तभी उस के कानों में तीखा स्वर गूंजा.

अपनी सास की बात का कोई जवाब न दे कर वह हाथ जोड़ कर अपनी जगह से खड़ी हो गई. सास से उस की नजरें मिलीं. एक क्षण वह वहां रुकी और फिर चुपचाप रसोई में आ गई. उस के वहां से उठते ही उस की सास अपनी रोज की क्रिया में मग्न हो गई.

अभी भी कल वाली ही बात पर विचार कर वह अनमनी सी रसोई के प्लेटफौर्म के पास खड़ी हुई थी. तभी रसोई के प्लेटफौर्म की बगल वाली खिड़की से उस की नजर बाहर जा कर टिक गई. रसोईघर के बाहर खाली पड़ी जगह में पड़े अनुपयोगी सामान के ढेर पर कुछ दिनों से कबूतर का एक जोड़ा तिनकातिनका जोड़ कर घोंसला बनाने की कोशिश कर रहा था लेकिन थोड़े से तिनके इकट्ठे करने के बाद दोनों में न जाने किस बात को ले कर जोरजोर से अपने पंख फड़फड़ाते व सारे तिनके बिखर कर जमीन पर आ गिरते. जैसेतैसे आपस में लड़तेझगड़ते और फिर एक हो कर आखिरकार घोंसला तो उन्होंने तैयार कर ही लिया था और कबूतरी घोंसले में अपने अंडों को सेती हुई कई दिनों से तपस्यारत इत्मीनान से बैठी हुई थी. उसे आज घोंसले में कुछ हलचल नजर आई. अपनी जिज्ञासा मिटाने के लिए वह खिड़की के पास के दरवाजे से बाहर गई और अपने पैरों के पंजों को ऊंचा कर घोंसले में नजर डालने लगी. उस की इस हरकत पर घोंसले में बैठी हुई कबूतरी सहम कर अपनी जगह से थोड़ी सी हिली. 2 अंडों में से एक फूट चुका था और एक नन्हा सा बच्चा मांस के पिंड के रूप में कबूतरी से चिपका हुआ बैठा था. सहसा उस के चेहरे पर छाई उदासी की लकीरों ने खुदबखुद मुड़ कर मुसकराहट का रूप ले लिया. उस ने अपना हाथ बढ़ा कर कबूतरी को सहलाना चाहा लेकिन कबूतरी उस के इस प्रयास को अपने और अपने बच्चे के लिए घातक जान कर गला फुला कर अपनी छोटी सी चोंच से उसे दूर खदेड़ने का यत्न करने लगी.

एक छोटा सा नजारा उस के मन को अपार खुशी से भर गया. वह वापस अंदर रसोई में आने को मुड़ी और उस के होंठों से अनायस ही उस का पसंदीदा गाना, मधुर आवाज के साथ, निकल कर उस के मन के तारों को झंकृत करने लगा.

“न समय देखती है न बड़ों का लिहाज करती है. यह कोई समय है फिल्मी गाना गाने का? गाना ही है तो भजन गा तो मेरी पूजा भी सफल हो जाए,” सास का यह नाराजगीभरा स्वर सुन कर उस की आवाज बंद होंठों के अंदर सिमट गई और चेहरे पर कुछ देर पहले छाई हुई मुसकराहट को उदासी ने वापस अपनी आगोश में समा लिया. हाथ धो कर उस ने फ्रिज खोला और उस में रखा पत्तागोभी निकाल कर अनमने भाव से उसे काटने लगी.

तभी डोरबैल बजने पर उस ने जा कर दरवाजा खोला तो अपने सामने एक अपरिचित व्यक्ति को खड़ा पा कर अचरज से उस से कुछ पूछने जा ही रही थी कि तभी पीछे से आ कर उस की सास ने उस व्यक्ति को नमस्ते करते हुए अंदर आने को कहा. उस ने भगवा धोतीकुरता पहने उस व्यक्ति को गौर से देखा. उस के माथे पर लंबा तिलक लगा हुआ था और उस ने गले में रुद्राक्ष की माला पहन रखी हुई थी. उस की सास उस पंडितवेशधारी व्यक्ति से कुछ दूरी बना कर उस के साथ सोफे पर बैठ गई और उसे पानी लाने के लिए कहा.

पानी देने के बाद खाली गिलास ले कर वह अंदर जाने को हुई तो सास ने उसे टोका, “यहां पंडितजी के पास बैठ. ये बहुत बड़े ज्ञानी है और हाथ देख कर सारी समस्याओं का हल बता देते हैं.”

तीज 2022: त्यौहारों को मौसम में अमरूद से बनाएं ये 5 हेल्दी आइटम

डाक्टर साधना वैश, वैज्ञानिक, गृह विज्ञान, डाक्टर जितेंद्र सिंह, केवीके, खरियांव, फतेहपुर, उत्तर प्रदेश

अमरूद विटामिन ए का एक बहुत अच्छा स्रोत है, इसलिए आंखों के लिए भी फायदेमंद है. यह शरीर को स्वस्थ रखने में भी सहायक है और रक्तचाप को भी कम करता है. साथ ही खून की तरलता को बनाए रखता है. यह विटामिन सी की कमी के कारण होने वाले रोग स्कर्वी के इलाज के लिए भी सब से अच्छा उपाय माना जाता है. अमरूद खनिज, लवण, विटामिन और आहार फाइबर का यह एक अच्छा स्रोत है, जो वजन घटाने के लिए भी अच्छा माना जाता है. इसलिए अमरूद खाने से हम कई तरह के रोगों से बचे रह सकते हैं.

अमरूद का फल विटामिन बी कांलैक्स जैसे पैंटोथैनिक एसिड, विटामिन बी सिक्स या पाइडौक सीन, विटामिन ई, नियासिन के साथसाथ मैग्नीशियम, कौपर और मैगनीज जैसे खनिजों का भी एक मध्यम स्रोत है.

अमरूद से निम्नलिखित खाद्य पदार्थ बनाए जा सकते हैं :

  1. अमरूद की जैली

अमरूद की जैली बनाने के लिए निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता होती है :

  • सामग्री :      मात्रा
  • अमरूद :      1 किलोग्राम
  • चीनी  :      750 गाम
  • साइट्रिक एसिड :      4 ग्राम
  • जैली बनाने की विधि

* ताजे पके फल को ले कर पानी से साफ कर लें और गोलाई में पतलेपतले काट लें.

* कटे हुए अमरूद के टुकड़ों को एलुमीनियम के बरतन में डाल कर उस में इतना पानी डालें कि टुकड़े अच्छी तरह डूब जाएं.

* गैस पर रखें और इस में 2 ग्राम साइट्रिक एसिड मिला दें.

* अब टुकड़े मुलायम होने पर मलमल के कपड़े से छान कर किसी बरतन में रस निकाल लें.

* उस रस में चीनी मिला कर गरम करें और उबाल आने पर बाकी 2 ग्राम साइट्रिक एसिड मिला दें.

* अब इसे इतना पकाएं कि वह गाढ़ा हो जाए. और जांच करने के लिए तैयार पदार्थ को एक चम्मच में ले कर थोड़े ठंडे पानी से भरे कांच के गिलास में एकएक बूंद कर के गिराएं. यदि बूंद पानी में गिर कर जम जाए, तो समझें कि जैली तैयार है.

ठंडा हो जाने पर जैली को कांच के जार में भर कर ढक्कन लगा कर सूखी जगह पर रखें.

2. अमरूद की टौफी

अमरूद की टौफी बनाने के लिए निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता होती है :

  • सामग्री :      मात्रा
  • अमरूद का गूदा      :      1 किलोग्राम
  • चीनी  :      1 किलोग्राम
  • मक्खन या
  • वनस्पति घी   :      100 ग्राम
  • साइट्रिक एसिड :      5 ग्राम
  • नमक  :      5 ग्राम
  • खाने का औरेंज
  • रंग    :      जरूरत के मुताबिक

टौफी बनाने की विधि

* अमरूद से गूदा निकाल कर उसे इतना पकाएं कि एकतिहाई मात्रा रह जाए.

* अब इस में चीनी, मक्खन या घी, नमक व साइट्रिक एसिड को अच्छी तरह से मिला कर इतना पकाएं कि यह बरतन के किनारे को छोड़ने लगे. इसी समय रंग को भी मिला दें.

* एक थाली या ट्रे में घी लगा कर गरम पदार्थ को जमा दीजिए. आधे इंच की मोटाई के बराबर जम जाएं.

* जब पदार्थ ठंडा हो जाए, तो टौफी के आकार के टुकड़े चाकू की मदद से काट लीजिए और बटर पेपर में लपेट कर किसी कांच के जार में रख लीजिए.

3. अमरूद से चीज

चीज बनाने में निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता होती है :

  • सामग्री :      मात्रा
  • अमरूद का गूदा      :      1 किलोग्राम
  • चीनी  :      1.25 किलोग्राम
  • साइट्रिक एसिड :      5 ग्राम
  • मक्खन :      1 किलोग्राम
  • नमक  :      स्वादानुसार

चीज बनाने की विधि

* पके हुए फल को पानी से अच्छी तरहसाफ कर के छोटेछोटे टुकड़ों में काट लें और इस में बराबर का पानी मिला कर गरम करें, जिस से कि टुकड़े बिलकुल गल जाएं.

* छलनी की सहायता से बीज को अलग कर लें.

* गूदे में चीनी और साइट्रिक एसिड को मिला कर अच्छी तरह पकाएं. इस के बाद मक्खन और नमक को इस में मिलाएं और उस के बाद उसे इतना पकाएं कि पदार्थ हलवा की तरह गाढ़ा हो जाए और बरतन का किनारा छोड़ने लगे.

* एक थाली या ट्रे में थोड़ा मक्खन लगा कर चीज को चम्मच की मदद से समान रूप से फैला दें और जमने के लिए 56 घंटे के लिए छोड़ दें.

* जब चीज जम जाए, तो चोकोर टुकड़ों में काट कर बटर पेपर में लपेट कर रख दें.

4. अमरूद का स्क्वैश

अमरूद का स्क्वैश बनाने के लिए निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता होती है :

  • सामग्री : मात्रा
  • अमरूद का रस :1 लिटर
  • चीनी  : 1.5 किलोग्राम
  • पानी   : 500 मिलीलिटर
  • साइट्रिक एसिड : 3 ग्राम
  • सोडियम या पोटैशियम मेटाबाईसल्फाइट : 2 ग्राम

स्क्वैश बनाने की विधि

* अच्छी तरह से पके हुए फल को ले कर कद्दूकस कर लें और इस के बाद आधी मात्रा पानी मिला कर गरम करें और रस को मलमल के कपड़े से छान लें.

* चीनी, पानी और साइट्रिक एसिड को मिला कर इतना गरम करें कि चीनी अच्छी तरह घुल जाए. इस के बाद इसे मलमल के कपड़े से छान लें.

* अमरूद के रस में छने हुए चीनी के घोल को मिला दे. इसी में सोडियम मैटाबाईसल्फाइट को थोड़े से रस में घोल कर छान ले.

* इस घोल बोतलों में भर कर ढक्कन लगा कर बंद कर लें और इसे किसी ठंडे स्थान पर रखे.

5. अमरूद का नैक्टर

नैक्टर बनाने में निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता होती है :

  • सामग्री :      मात्रा
  • अमरूद का रस :      1 लिटर
  • साइट्रिक एसिड :      10 ग्राम
  • पानी   :      3 लिटर

नैक्टर बनाने की विधि

* खूब पके फल को ले कर स्क्वैश की तरह रस निकालें.

* चीनी, पानी और साइट्रिक एसिड को एकसाथ मिला कर गरम करें और चीनी घुल जाने पर मलमल के कपड़े से छान लें.

* अमरूद के रस में चीनी के घोल को अच्छी तरह से मिला दें.

* अब इसे कांच की बोतलों में भर कर ठंडे स्थान पर रखें.

बड़बोलापन

जैसे भक्ति की लहर की सफलता में भारतीय जनता पार्टी के नूपुर शर्मा और नवीन जिंदल ने अपने बड़बोलेपन से भारत को एक कौर्नर में खड़ा कर दिया, वैसे ही व्लादिमीर पुतिन के बड़बोलेपन और डोमैस्टिक सफलताओं ने उन्हें यूक्रेन पर हमला करने को उकसा दिया. दोनों मामलों में सफलता गरम जलेबी का एक निवाला सी बन गई जिसे निगलना अब मुश्किल हो गया है.

व्लादिमीर पुतिन ने पूरे यूरोप, पैसिफिक देशों, अमेरिका और कनाडा को एकजुट कर दिया और उन के अपने आपसी मतभेद अब मिट गए हैं. स्वीडन व नौर्वे, जो अब तक नाटो के सदस्य नहीं थे, दौड़े चले आए हैं नाटो की शरण में. नौर्थ एटलांटिक ट्रीटी और्गेनाइजेशन कभी इतना मजबूत नहीं था जितना आज है.

यूक्रेन अगर रूस के दांत खट्टे कर पा रहा है तो इसलिए कि पश्चिमी देश लगातार उसे सैनिक सामग्री दे रहे हैं और नए से नए मिसाइल, ड्रोन, मशीनगनें, टैंकभेदी तोपें यूक्रेन पहुंच रही हैं. रूस के गरूर में डूबी जनता और फौज जो सम झती थी कि पुतिन हैं तो सब मुमकिन है, अब परेशान हैं. युवा फौज ने युद्ध देखा नहीं, कोई अनुभव नहीं उसे, सैनिक सामग्री जंग लगी हुई है.

व्लादिमीर पुतिन ने सोचा था कि यूक्रेन को हराना 3 दिन का काम है जबकि जंग होते हुए 150 दिन हो गए. ठीक वैसे, जैसे महाराष्ट्र में सरकार बनाने में भाजपा को पहले भान था कि ढाई दिन लगेंगे पर ढाई साल लग गए और वह भी तब जब मुख्यमंत्री पद शिवसेना घटक के नेता को देना पड़ा, उस नेता को जिस की जमीनी हकीकत किसी को नहीं मालूम.

पुतिन के खिलाफ नाटो और पश्चिमी यूरोप की एकजुटता लोकतंत्र के लिए अच्छी बात है. वरना लगने लगा था कि तुर्की के रजब तैयब एर्दोगान की तरह पश्चिमी यूरोप में कट्टरवादी हावी हो जाएंगे क्योंकि उदार लोगों को मालूम नहीं कि कट्टरपंथी शासन का मतलब क्या है. अमेरिका में आज भी अगर डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति होते तो रूस यूक्रेन पर ही

नहीं, मालदोवा, लताविया, एस्टोनिया, लिथूनिया, कजाकिस्तान आदि पूर्व सोवियत संघ के देशों पर कब्जा कर चुका होता और ट्रंप तालियां बजा रहे होते.

रूसी हमले को आसानी से सम झा जा सकता है. अपने देश पर एकछत्र राज का मतलब यह नहीं कि आप दूसरों को भी धमका सकते हैं. नूपुर शर्मा के बयान से नाराज हुए मुसलिम देशों की घुड़की के बाद भारत में हिंदूमुसलिम स्वर ढीले पड़ गए. लेकिन सोच नहीं बदली, जोश कम हो गया. वैसे ही, पुतिन की अकड़ कम नहीं हुई. लेकिन पश्चिमी देशों के आर्थिक प्रतिबंधों व यूक्रेन के सैनिकों द्वारा जम कर रूसी सैनिकों को मारना अब रूसी जनता को महंगा पड़ रहा है. एक विशाल, प्रभावशाली रूस ने सोच के बलबूते पर नहीं, लोगों की उत्पादकता के बल पर सैकड़ों अडानी व अंबानी बना डाले जबकि आज जनता गरीबी में डरीसहमी जी रही है. न सफलता मिली, न इज्जत, न सुरक्षा. केजीबी जब चाहे जिसे पकड़ कर जेल में ठूंस दे. ऐसी जनता का एक गुट ‘वाह पुतिन, वाह पुतिन’ कर सकता है पर मन लगा कर सैनिक खेलों, जिन में जान पर बन आए, में वह आगे नहीं आएगा.

रूस के इस एडवैंचर से दुनिया के कई तानाशाहों को सबक मिलेगा जिन में चीन, भारत, उत्तर कोरिया के शासक शामिल हैं. हां, जो इतिहास या हाल की घटनाओं को अपने लाल या भगवाई रंगों से देखते हैं, वे मार खाते हैं.

रामदेव के ढोल की पोल बरक्स “नकली पतंजलि घी”

लाला रामदेव  योग को व्यापार बनाने के साथ आज देश के एक बड़े उद्योगपति के रूप में स्थापित हो चुके हैं. और करोड़ों रुपए के विज्ञापन के माध्यम से देश की जनता को उसी तरह नकली  वस्तुएं बेच रहे हैं जैसे देश के अन्य  कुछ घटिया उत्पादक कंपनियां कर रही हैं. इनमें बिस्किट के बाद अब पतंजलि घी आज सुर्खियों में है .

सेठ रामदेव ने गेरूआ वस्त्र पहन कर के देश की सामान्य जनता को अपने प्रभाव में ले लिया और यह संदेश दिया कि वह एक संत है. मगर उनके व्यापारी बनने के बाद यह सच सामने आ गया कि वह भी एक सामान्य व्यक्ति हैं जो मोह माया में फंसा हुआ है. और इससे यह उम्मीद नहीं की जा सकती की यह किसी आम आदमी का भला चाहता हैं.

दरअसल, राम बाबा चाहते यह है कि देश की जनता उनके पतंजलि स्टोर्स में आए और उनके उत्पाद ले जाए ताकि वे भरपूर कमाई कर सकें एक उद्योगपति की सोच रखने वाले रामदेव अब एक बार फिर बुरी तरह फंस गए हैं उनका बनाया हुआ ब्रांडेड पतंजलि घी नकली पाया गया है, इसके साथ ही रामदेव बाबा और उसकी कंपनी की बोलती बंद कर हो गई  है.

जो सच्चाई सामने आई है उसके मुताबिक रामदेव की नामी-गिरामी कंपनी पतंजलि ब्रांड गाय के घी का सैंपल फेल पाया गया है.

यह सैंपल उत्तराखंड राज्य की प्रयोगशाला के बाद केंद्रीय प्रयोगशाला में भी फेल पाया गया. जिसके बाद टिहरी जनपद के खाद्य सरंक्षा और औषधि विभाग के द्वारा पतंजलि कंपनी के खिलाफ एडीएम कोर्ट में वाद दायर करने जा रहा है.

बाबा रामदेव की नामी-गिरामी कंपनी पतंजलि ब्रांड गाय के घी का सैंपल खाद्य संरक्षा और औषधि विभाग के द्वारा साल 2021 में दीपावली के पर्व पर टिहरी जनपद के घनसाली में एक दुकान से सैंपल भरा गया था.

जिसके बाद सैंपल को  नियमानुसार राज्य की प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया तो, सैंपल फेल पाया गया. जिसके बाद खाद्य संरक्षा विभाग के द्वारा कंपनी को नोटिस जारी किया तो, कंपनी ने राज्य की लैबोरेट्री को रिपोर्ट को गलत साबित किया.

जिसके बाद फिर से खाद्य सरंक्षा विभाग के द्वारा केंद्रीय प्रयोगशाला में सैंपल भेजा गया तो केंद्रीय प्रयोगशाला में भी बाबा रामदेव की पतंजलि ब्रांड गाय के घी का सैंपल फेल पाया गया.

खाद्य सरंक्षा अभिहित अधिकारी एमएन जोशी के मुताबिक  प्रयोगशाला की रिपोर्ट के अनुसार पतंजलि घी में मिलावट और घी मानकों के अनुरूप ना मिलने और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताया गया है.

यह आश्चर्यजनक  है कि खाद्य सरक्षा और औषधि विभाग ने घी का सैंपल एक बार फिर जांच में दिया लेकिन इस बार विभाग ने केंद्र की प्रयोगशाला में सैंपल भेजा और नतीजा वही निकला.

इसके बाद अब कोई शक नहीं जा गया कि पतंजलि का ब्रांडेड घी मिलावटी है.

 रामदेव की गैर जिम्मेदारियां

कथित रूप से अपने आपको बाबा कहलाने  वाले रामदेव की हकीकत सामने आने के बाद देशभर में उनकी आलोचना का दौर जारी है. उनके चाहने वाले भी इस बात से चकित हैं कि  रामदेव जैसा व्यक्ति जो बड़ी-बड़ी बातें करता है जिसके सामने बड़े बड़े नेता नतमस्तक हैं वह भी नकली सिद्ध हुआ है.

सामाजिक कार्यकर्ता सनंददास दीवान, एल्डरमैन के मुताबिक बाबा रामदेव ने सिर्फ झूठ की मायावी दुनिया रची है अन्यथा इस मामले पर उन्हें सामने आकर के अपना पक्ष रखना चाहिए था मगर ऐसा लगता है उनकी अब बोलती बंद हो गई है .

व्यवसायी संजय जैन के मुताबिक रामदेव बाबा की हकीकत सामने आ गई है आज देश में कांग्रेस की सरकार होती तो बाबा कहते कि उन्हें फंसाया गया है मगर अब  वह यह भी नहीं कह सकते.

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