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फिल्म समीक्षा

तितली

यह तितली फूलों से पराग इकट्ठा कर शहद बनाने वाली नहीं है, फिर भी अपनी छटपटाहट से दर्शकों को चौंकाती जरूर है. फिल्म का प्रमुख किरदार तितली अपने 2 भाइयों के साथ रहता है और छोटीमोटी चोरियां करता है. उस का सपना है 3 लाख रुपए जुटा कर एक मौल में पार्किंग स्पेस खरीदना. इसीलिए वह अपने भाइयों की हां में हां मिला कर लूटपाट का धंधा करता है. साथ ही, वह हर वक्त छटपटाता भी रहता है कि कब वहां से भाग निकले. उस की यही छटपटाहट दर्शकों को बांधे रखती है कि वह अपने भाइयों के चंगुल से कैसे निकल पाता है. ‘तितली’ कम बजट की नए हीरो-हीरोइन को ले कर बनाई गई फिल्म है. इस फिल्म को दिवाकर बनर्जी और प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक दिवंगत यश चोपड़ा के बेटे आदित्य चोपड़ा ने मिल कर बनाया है. फिल्म देख कर बहुत शर्म महसूस हुई कि जो यश चोपड़ा हमेशा से साफसुथरी, पारिवारिक फिल्में बनाया करते थे, उन के बेटे ने गालियों से भरपूर ऐसी फिल्म बनाई है. इस फिल्म को विदेशी फिल्म समारोहों में भले ही दर्जनों अवार्ड्स मिले हों लेकिन गालियों के दम पर अवार्ड्स जीतना गर्व की बात नहीं कही जा सकती.

‘तितली’ की कहानी 3 भाइयों की है. सब से बड़ा भाई विक्रम (रणवीर शोरी), मंझला बावला (अमित स्याल) और सब से छोटा तितली (शशांक अरोड़ा) है. तीनों भाई मिल कर छोटीमोटी चोरियां करते हैं. घर में कोई महिला नहीं है. विक्रम की बीवी अलग रहती है और उस से तलाक चाहती है. पैसे कमाने की चाह में विक्रम और बावला मिल कर तितली की शादी नीलू (शिवानी रघुवंशी) से करा देते हैं. नीलू दहेज में सामान के अलावा ढाई लाख की एफडी भी साथ में लाती है. शादी के बाद नीलू अपने प्रेमी प्रिंस के पास जाना चाहती है. तितली और नीलू में डील होती है कि तितली उसे उस के प्रेमी से मिलवाएगा और वह उसे ढाई लाख रुपए दे देगी. तितली को ढाई लाख रुपए मिल जाते हैं और वह मौल में पार्किंग स्पेस खरीदने पहुंचता है लेकिन उस के अंदर की छटपटाहट उसे रोक देती है. उधर नीलू अपने प्रेमी से मिलने जाती है तो उसे पता चलता है कि वह शादीशुदा है. वह अपने मायके लौट आती है. तितली थकहार कर नीलू के मायके पहुंच जाता है और उस से अपनी गलती की माफी मांगता है. दोनों फिर से एक हो जाते हैं. फिल्म की विशेषता इस की कहानी और किरदार हैं. फिल्म में किरदारों का रहनसहन निम्न वर्ग का दिखाया गया है जो हर वक्त आपस में झगड़ते हैं और गालीगलौज करते हैं. निर्देशक ने एक बेरोजगार युवा की पैसे पाने की ललक को खूबसूरती से दिखाया है. पैसे पाने के लिए वह अपनी पत्नी का हाथ इंजैक्शन से सुन्न कर उस की कलाई तोड़ देता है ताकि उस का बड़ा भाई उस की पत्नी से एफडी पर साइन न करा सके. फिल्म का माहौल दर्शकों को कुछ हद तक बांधे रखता है. शशांक अरोड़ा की ऐक्ंिटग अच्छी है. रणवीर शोरी कुछ खास नहीं कर सका है. फिल्म कलात्मक टच लिए हुए है. मल्टीप्लैक्स कल्चर की यह फिल्म टिकट खिड़की पर भीड़ जुटा पाएगी, इस में संदेह है. फिल्म में गीतों की गुंजाइश नहीं थी, पार्श्व संगीत ठीकठाक है. छायांकन अच्छा है.

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प्रेम रतन धन पायो

करीब 27 साल पहले बनी राजश्री प्रोडक्शंस की फिल्म ‘मैं ने प्यार किया’ ने कामयाबी के सभी रिकौर्ड तोड़ डाले थे. उस के बाद ‘हम साथसाथ हैं’ और ‘हम आप के हैं कौन’ ने भी खूब धूम मचाई. इन फिल्मों से यह स्पष्ट हो गया कि सूरज बड़जात्या साफसुथरी पारिवारिक फिल्में ही बनाते हैं. लेकिन सचाई यह है कि उन की फिल्मों में अगर नयापन ढूंढ़ा जाए तो वह नदारद मिलेगा. उन की हर फिल्म की स्टाइल लगभग एक जैसी होती है. लंबेलंबे सीन, आदर्शवादी किरदार, गानों की भरमार और एक सुपर स्टार का आकर्षण. उन की नई फिल्म ‘प्रेम रतन धन पायो’ में भी नयापन नहीं दिखा. फिल्म का नायक सलमान खान एक सुपरस्टार है, दर्शकों में उस का आकर्षण है. फिल्म में उस के किरदार को एकदम आदर्शवादी दिखाया गया है. लेकिन फिर भी फिल्म में कुछ कमी दिखाई देती है.

इस बार फिल्म की कहानी भी पारिवारिक कम, राजसी षड्यंत्र की ज्यादा लगती है. इसीलिए फिल्म में रोचकता कम हो गई है. ‘हम आप के हैं कौन’ की चुहलबाजी ‘दीदी तेरा देवर दीवाना.’ इस फिल्म में गायब है. फिल्म की नायिका सोनम कपूर में भी न तो चुलबुलापन दिखा न ही वह खुल कर हंसी है. सूरज बड़जात्या ने हालांकि फिल्म को काफी भव्य बनाया है. खूबसूरत सैट लगाए हैं, शीशमहल का सैट तो देखने लायक है. फिल्म में ग्लौसी लुक है. खूबसूरत दृश्य आंखों को चौंधियाते हैं. फिर भी फिल्म में गंभीरता की कमी खटकती है. फिल्म एक सिनेमाई ड्रामा बन कर रह गई है. फिल्म की कहानी शुरू होती है एक सीधेसादे रामभक्त प्रेम दिलवाले (सलमान खान) की प्रेमलीला (रामलीला नहीं) से. इस प्रेमलीला में कुछ मनचले सीता के किरदार से छेड़छाड़ करते हैं तो प्रेम उन्हें बाहर खदेड़ देता है.

इस प्रेमलीला में कमाई गई धनराशि को वह राजकुमारी मैथिली (सोनम कपूर) के एक एनजीओ को दान कर देता है. वह राजकुमारी मैथिली से एक बार मिलना चाहता है. उधर राजकुमारी मैथिली की शादी प्रीतमपुर के युवराज विजय (सलमान की दूसरी भूमिका) के साथ उस के राजतिलक के बाद होनी तय हुई है. प्रेम दिलवाला अपने दोस्त कन्हैया (दीपक डोबरियाल) के साथ प्रीतमपुर जाने का प्रोग्राम बनाता है. इसी बीच विजय सिंह का सगा भाई अजय (नील नितिन मुकेश) एक षड्यंत्र रच कर विजय सिंह पर जानलेवा हमला कराता है. रियासत के दीवान (अनुपम खेर) को जब महाराज विजय सिंह के हमशक्ल प्रेम दिलवाले के बारे में पता चलता है तो वह प्रेम को विजय सिंह बनने पर मजबूर कर देता है, विजय सिंह को छिपा देता है और उस का गुपचुप इलाज कराता है. अब प्रेम दिलवाला महाराज विजय सिंह बन कर राजकुमारी मैथिली से मिलता है. वह उस से प्यार करने लगता है. महल में रहते हुए प्रेम दिलवाला सारे षड्यंत्र को बेनकाब करता है और महाराज विजय सिंह को उस की अमानत राजकुमारी मैथिली को सौंप देता है. परंतु मैथिली तो प्रेम दिलवाले को पसंद करने लगी थी. अत: महाराजा विजय सिंह मैथिली की शादी प्रेम दिलवाला से करवा देते हैं.

फिल्म की इस कहानी की शुरुआत श्लोक और रामलीला से होती है. यह कहानी एकदम काल्पनिक लगती है. निर्देशक द्वारा राजसी षड्यंत्र की बात करना आज के युग में बेमानी लगता है. मध्यांतर से पहले बना फिल्म का माहौल मध्यांतर के बाद बिखर सा जाता है. फिल्म के अधिकांश सीन लंबे हो गए हैं. इस बार सूरज बड़जात्या सलमान के किरदार को पावरफुल बनाने में असफल साबित हुए हैं. फिल्म में 10 गाने हैं. इन गानों की वजह से फिल्म बेवजह लंबी खिंच गई है. टाइटल सौंग के अलावा कोई गाना याद नहीं रह पाता. फिल्म की पटकथा फीकी बन कर रह गई है. फिल्म में कई अतार्किक बातें भी भरी हुई हैं. महाराजा विजय सिंह की बहनों वाला प्रसंग नाटकीय ज्यादा हो गया है. राजकुमारी मैथिली की भूमिका में सोनम कपूर फिल्म की कमजोर कड़ी है. अनुपम खेर जंचा है. नील नितिन मुकेश का किरदार कमजोर है. छायांकन अच्छा है. फिल्म का क्लाइमैक्स जबरन लंबा खींचा गया है. फिल्म के अंत में एक गाना और डाला गया है, जिस की जरूरत नहीं थी.

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शानदार

‘शानदार’ फिल्म अपने टाइटल के अनुरूप शानदार नहीं है. वैडिंग डैस्टिनेशन पर आधारित इस फिल्म में निर्देशक वह कमाल नहीं दिखा सका है जो वह अपनी पिछली फिल्म ‘क्वीन’ में दिखा चुका है. ‘क्वीन’ फिल्म का गाना ‘सारा लंदन ठुमकता…’ आज भी दर्शकों की जबान पर थिरकता है. फिल्म में शाहिद कपूर और आलिया भट्ट की जोड़ी परदे पर पहली बार आई है. दोनों की कैमिस्ट्री जमी खूब है लेकिन फिल्म की कहानी और पटकथा इतनी ज्यादा कमजोर है कि यह फिल्म शीघ्र ही भूल जाने वाली बन गई है. शाहिद कपूर ने जो उम्दा ऐक्टिंग फिल्म ‘हैदर’ में की थी उस पर उस ने पानी फेर दिया है. आलिया भट्ट की तो क्या कहें, अपनी निजी जिंदगी में हमेशा चुटकुले सुनाती यह छोरी इस फिल्म में भी गूगल गर्ल बनी नजर आती है. दर्शकों को लुभाने के लिए उस ने एक बिकिनी सीन भी किया है, फिर भी वह दर्शकों पर अपना प्रभाव नहीं छोड़ पाई है. फिल्म की शुरुआत कार्टून कैरेक्टरों से होती है. ये ग्राफिक्स और कार्टून दिलचस्प लगते हैं लेकिन शीघ्र ही फिल्म वैडिंग डैस्टिनेशन पर पहुंच जाती है. निर्देशक ने इस वैडिंग को दिखाने के लिए करोड़ों रुपए फूंक डाले हैं.

कहानी की थीम भारीभरकम दुलहन और अमीरों की चोंचलेबाजी है. भारीभरकम दुलहन की त्रासदी को इस फिल्म से पहले ‘दम लगा के हइशा’ फिल्म में देखा जा चुका है. फिल्म की कहानी शुरू होती है वैडिंग से. एक अमीर घर की लड़की ईशा (सना कपूर) की शादी एक सिंधी परिवार के युवक रौबिन (दिलजीत दोसांझ) से हो रही है. यह शादी 2 अमीर घरानों के बीच एक सीक्रेट डील की तरह है. ईशा की दादी (सुषमा सेठ) अपने परिवार को दिवालिया होने से बचाने के लिए यह शादी करा रही है. ईशा मोटी है, इसीलिए रौबिन शादी में ईशा का मजाक उड़ाता है. इस शादी का वैडिंग प्लानर है जोगिंदर (शाहिद कपूर), जिसे पहली नजर में ईशा की बहन आलिया (आलिया भट्ट) से प्यार हो जाता है. उधर ईशा के पिता विपिन अरोड़ा (पंकज कपूर) को लगता है कि इस शादी के बाद उस के दिन फिर जाएंगे. वह हर वक्त सबकुछ छोड़छाड़ कर भागने की बातें करता रहता है. उधर शादी के दौरान जोगिंदर और आलिया छिपछिप कर आपस में मिलते हैं. विपिन अरोड़ा को भी जोगिंदर और आलिया के प्यार की भनक लग जाती है. यहां यह भी क्लीयर हो जाता है कि आलिया विपिन अरोड़ा की सगी बेटी नहीं है. शादी की तैयारियों के बीच जोगिंदर और आलिया ईशा को एहसास कराते हैं कि वह कितनी स्पैशल है. परिस्थितियां इस प्रकार घटती हैं कि ईशा की दादी का देहांत हो जाता है. ईशा अपने पिता को ईशा और जोगिंदर के प्यार के बारे में बताती है. विपिन ईशा की शादी कराने से इनकार कर देता है और आलिया और जोगिंदर का मिलन कराता है. फिल्म की सब से बड़ी खामी इस की पटकथा है. शाहिद कपूर का काम कुछ अच्छा है. सना कपूर ने भी अच्छी ऐक्ंिटग की है. आलिया ग्लैमरस लगी है. पंकज कपूर की ऐक्ंिटग सब से अच्छी है. अधिकांश फिल्म की शूटिंग लंदन में की गई है. संगीत अमित त्रिवेदी का है. एक गीत ‘गुलाबो…’ अच्छा बन पड़ा है. छायांकन अच्छा है.

खेल खिलाड़ी

रूसी करतूतों का परदाफाश

एंटी डोपिंग के स्वतंत्र आयोग ने मांग की है कि रूस पर ओलिंपिक सहित सभी अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धाओं में भागीदारी पर प्रतिबंध लगे. आयोग ने कहा है कि वर्ल्ड एंटी डोपिंग यानी वाडा की हिदायत के बावजूद मास्को प्रयोगशाला में मौजूद डोपिंग के 1400 नमूने नष्ट कर दिए गए.

खेलों में डोपिंग का मामला आएदिन उठता रहता है और समयसमय पर वाडा इस पर कार्यवाही करता रहता है. बावजूद इस के, डोपिंग के मामले कम होने के बजाय बढ़ ही रहे हैं. अगस्त महीने में तुर्की की एथलीट अजल्ह चैकिर अल्पतेकिन से 2012 के ओलिंपिक खेलों में 1500 मीटर दौड़ में जीता गया स्वर्ण पदक छीन लिया गया और उन पर 8 साल का बैन भी लगाया गया है. इसी तरह अंतर्राष्ट्रीय एथलेटिक्स एसोसिएशनों के महासंघ यानी आईएएएफ ने जांच के बाद 28 खिलाडि़यों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही करने का फैसला किया था. ऐसे एक नहीं, कई मामले हैं और सैकड़ों एथलीट सवालों के घेरे में हैं. कइयों के रक्त नमूने लिए जा चुके हैं और जांच चल रही है पर इस का खिलाडि़यों पर असर कम ही दिखाई पड़ रहा है. अगर ऐसा होता तो डोपिंग का एक भी मामला सामने नहीं आता. डोपिंग मामले को ले कर खिलाडि़यों को खुद ही सतर्क रहना होगा. क्योंकि यह मामला ऐसा है कि एक बार आप इस चक्कर में पड़ गए तो समझ लीजिए, कैरियर खत्म. विदेशी खिलाड़ी तो इस के लिए बदनाम हैं ही भारत भी अब इस की चपेट में बदनाम होने लगा है. अधिकारियों का सुस्त रवैया और खिलाड़ी भी कम जिम्मेदार नहीं हैं. शौर्टकट अपनाने के चक्कर में वे ऐसी प्रतिबंधित दवाओं का सेवन कर लेते हैं जिन से कुछ देर के लिए शरीर में चुस्तीफुरती तो आ जाती है पर सेहत पर क्या असर पड़ता है शायद उन्हें मालूम नहीं. खिलाडि़यों को अगर बेहतर भविष्य और लंबे समय तक खेलना है तो इस से बाहर आना होगा. और खासकर उन नए खिलाडि़यों को इस से सबक लेने की जरूरत है जिन को खेल में अभी बहुत आगे बढ़ना है.

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भरोसे को कायम रखने की पहल

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई में इन दिनों स्वच्छता अभियान चल रहा है. बीसीसीआई ने मुंबई में अपनी वार्षिक आम सभा की बैठक में आर्थिक अनियमितता और स्पौट फिक्ंिसग के आरोप झेल रहे एन श्रीनिवासन को अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट बोर्ड यानी आईसीसी के अध्यक्ष पद से हटा दिया. अब वर्ष 2016 तक बीसीसीआई अध्यक्ष शशांक मनोहर आईसीसी का अध्यक्ष पद संभालेंगे. ऐसा तो होना ही था क्योंकि स्पौट फिक्ंिसग के बाद अब क्रिकेट को संदिग्ध नजर से देखा जाने लगा है जो भारतीय क्रिकेट के लिए खतरनाक संकेत है. बीसीसीआई अध्यक्ष बनते ही शशांक मनोहर ने संकेत दे दिए थे कि नया माहौल बनाने के लिए बोर्ड को कुछ कारगर कदम उठाने की जरूरत है.

एजीएम मीटिंग में बोर्ड ने कुछ पदाधिकारियों के हितों के टकराव के मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए रोजर बिन्नी को चयन समिति से हटा दिया क्योंकि रोजर के बेटे स्टुअर्ट बिन्नी भारतीय टीम में हैं और रोजर के रहने से स्टुअर्ट को इस का फायदा मिल सकता था. बिन्नी की जगह एमएसके प्रसाद को नया चयनकर्ता बनाया गया है, वहीं टीम डायरैक्टर रवि शास्त्री की आईपीएल गवर्निंग काउंसिल से छुट्टी कर दी गई. तकनीकी समिति में अनिल कुंबले को हटा कर सौरभ गांगुली को लाया गया. इस के अलावा सुधार के लिए एक रिटायर्ड जज ए पी शाह को बीसीसीआई में बतौर लोकपाल नियुक्त किया गया है. इतना ही नहीं, एक और अच्छी पहल यह हुई है कि अब जो खिलाड़ी जैसा प्रदर्शन करेगा उसी के हिसाब से उस का ग्रेडेशन किया जाएगा. बोर्ड ने अंतर्राष्ट्रीय और घरेलू स्तर पर टैस्ट क्रिकेट खेल चुके क्रिकेटर और अंपायर, जिन की मृत्यु हो चुकी है, उन की पत्नियों के लिए आजीवन तयशुदा राशि मिलते रहने की घोषणा भी की है.

अगर क्रिकेट को बचाना है और क्रिकेट के प्रति कम होते भरोसे को फिर से जगाना है तो बीसीसीआई को एक कुशल प्रशासन देना होगा और बोर्ड को इस तरह के कड़े फैसले आगे भी लेने होंगे. बीसीसीआई में स्वच्छता अभियान चलाना होगा तभी क्रिकेट का भला हो सकेगा. हालांकि जब कोई सिस्टम करप्ट हो जाता है तो उसे सुधारने के लिए बड़े कदम उठाए जाते हैं. तबादलों से ले कर निलंबन तक की कार्यवाही होती है. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि नई शासन प्रणाली और अधिकारी किस हद तक इस सिस्टम को करप्शन से मुक्त करा पाएंगे? खेल हो या राजनीति, भ्रष्टाचार को ले कर हमेशा से ही नईनई कमेटी गठित हुई हैं लेकिन नतीजे वही ढाक के तीन पात वाले साबित हुए.

दिन दहाड़े

मेरे पीहर शाहपुरा (भीलवाड़ा, राजस्थान) में एक दिन दोपहर को एक ट्रक घर के पास वाले चौक पर आ कर रुका. ट्रक वाला कपड़े धोने के साबुन की टिकिया भर कर लाया था. वह बोला, ‘‘मैं ट्रक दिल्ली से लाया हूं और कंपनी ने कम कीमत की धोने की टिकिया बनाई है.’’ वह टिकिया तौल कर बेचने लगा. उस ने बालटी में पानी भर कर टिकिया से कपडे़ धो कर लोगों को दिखाए. इस तरह 50 रुपए किलो के हिसाब से साबुन बेच कर चला गया. शाम को लोगों ने साबुन की टिकिया से कपड़े धोने का प्रयास किया तो टिकिया में से झाग के बजाय रेत सा पाउडर बिखर कर कपड़े पर चिपकने लगा और पूरी टिकिया समाप्त हो गई, पर कपड़ा नहीं धुला.

ज्योति प्रभा शर्मा, अजमेर (राज.)

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एक बार मेरे भतीजे की दुकान पर एक आदमी 3-4 बोरे लपेट कर और 1 बोरा अलग से ले कर आया. लिस्ट में लिखा 50 किलो चावल, दाल, चीनी, आटा आदि सामान निकाल कर परचा बनाने के लिए कहा. एकाएक कुछ याद कर उस ने 50 किलो दाल को तोलने के लिए कहा और यह कह कर कि आप सब सामान निकाल कर तैयार कीजिए, मैं दाल पहुंचा कर आ रहा हूं. भतीजे ने सारा सामान बोरे में, थैले में पैक कर दिन भर इंतजार किया लेकिन वह ग्राहक नहीं लौटा. इस प्रकार वह लगभग 2 हजार रुपए का चूना लगा कर चला गया.

वैशाली श्रीवास्तव, वाराणसी (उ.प्र.)

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बेंगलुरु के एक बगीचे में हम घूमने गए थे. एक आदमी सामने आ कर बोला, ‘‘तुम्ही मराठी बोलता, कोणत्या गावाचे आहात?’’ हम ने कहा कि हम सोलापुर के रहने वाले हैं. वह बोला, ‘‘मैं लातूर से हूं. बीवीबच्चों के साथ बेंगलुरु देखने आया हूं. किसी ने मेरी जेब काट ली. मेरे पास एक भी पैसा नहीं है. आज ही मैं वापस लातूर जाना चाहता हूं. आप लोग दिलवाले नजर आते हैं. आप हमें जाने के लिए 800 रुपए दे दीजिए, मैं लातूर पहुंचने के बाद मनीऔर्डर कर के आप के पैसे लौटा दूंगा. अपना पता हमें दे दो. हमारा पता और फोन नंबर ले लो. 2 छोटे बच्चे और बीवी साथ हैं. मैं अकेला होता तो किसी भी तरह चला जाता. हाथ जोड़ कर मैं विनती करता हूं, मुझ पर दया करो. घर पहुंचने के लिए पैसे दे दो.’’ ‘‘दुनिया में ऐसे बहुत से लफंगे हैं,’’ मैं ने अपने बेटे से कहा. लेकिन बेटे को उस पर बहुत दया आई. थोड़ी पूछताछ कर के और तुरंत पैसे वापस भेजने को कह कर उस ने उसे 800 रुपए दे दिए. पैसे ले कर धन्यवाद देते हुए वह चला गया. आज तक हम पैसे का इंतजार कर रहे हैं. उस का दिया हुआ पता भी झूठा निकला.

उषा धर्मराव लोणी, सोलापुर (महा.)

विज्ञान कोना

लौह तत्त्व और अल्जाइमर्स

वैसे तो लौह तत्त्व स्वस्थ रहने के लिए जरूरी है क्योंकि यह उस तंत्र का हिस्सा है जो शरीर की कोशिकाओं को औक्सीजन पहुंचाता है. मगर हाल में किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि मस्तिष्क में बहुत अधिक लौह तत्त्व हो तो अल्जाइमर्स नामक रोग का खतरा बढ़ जाता है. आस्ट्रेलिया के मेलबोर्न विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने 7 वर्षों तक ऐसे 114 लोगों का अध्ययन किया जिन में स्मृति भ्रंश (याददाश्त कमजोर होने) के हलकेफुलके लक्षण नजर आने लगे थे. उन के मस्तिष्क में लौह का स्तर जानने के लिए उन के सेरेब्रो स्पाइनल लिक्विड (वह तरल पदार्थ जो मस्तिष्क और मेरुरज्जु में भरा होता है) में एक प्रोटीन फेरिटिन का मापन किया गया. फेरिटिन वह प्रोटीन है जो लौह तत्त्व से जुड़ता है. अध्ययन के शुरू में जिन व्यक्तियों के सेरेब्रो स्पाइनल लिक्विड में अधिक फेरिटिन था, उन में अल्जाइमर्स की शुरुआत भी पहले हुई थी.

शोधकर्ता दल ने यह भी पाया कि अल्जाइमर्स रोग का जोखिम पैदा करने में सर्वाधिक भूमिका ्नश्चशश्व४ नामक जीन की होती है और यह जीन अधिक लौह से संबंधित होता है. शोधकर्ताओं का मत है कि लौह एक अत्यंत क्रियाशील तत्त्व है और यह तंत्रिकाओं को तनावग्रस्त कर देता है. इस अध्ययन के आधार पर फौरन यह तो नहीं कहा जा सकता कि शरीर में लौह तत्त्व कम करने से अल्जाइमर्स का खतरा कम हो जाएगा मगर 24 साल पहले एक ऐसी दवा का परीक्षण किया गया था जो शरीर को थोड़े लौह से नजात दिलाती है. इस दवा से अल्जाइमर्स होने वाले संज्ञान की क्षति को आधे से कम करने में सफलता मिली थी मगर फिर अल्जाइमर्स की बीटा एमिलाइड आधारित परिकल्पना आ गई थी और वह दवा धरी रह गई थी. ताजा शोध के बाद शायद उस दवा पर एक बार फिर से ध्यान देने का वक्त आ गया है. वैसे लौह तत्त्व को कम करने का एक अच्छा तरीका है कि आप नियमित रूप से रक्तदान करें. मगर यह तरीका शायद बुजुर्गों के संदर्भ में काम नहीं आएगा क्योंकि अधिक रक्तदान से वे एनीमिया के शिकार हो सकते हैं. अलबत्ता, एक दवा है डीफेरिप्रोन जो मस्तिष्क में लौह की मात्रा को कम करती है जबकि शेष शरीर पर असर नहीं डालती.

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शब्द से व्यक्ति की पहचान

एक ही शब्द के अर्थ अलगअलग व्यक्ति के लिए थोड़े अलगअलग होते हैं इसलिए जब कोई शब्दों को पढ़ता या पढ़ती है तो दिमाग में उत्पन्न तरंगों का पैटर्न भी अलगअलग होता है. स्पेन के बास्क सैंटर औन काग्नीशन, ब्रेन ऐंड लैंग्वेज के ब्लेयर आर्मस्ट्रौंग और उन के साथियों का मानना है कि दिमागी तरंगों के इस पैटर्न से व्यक्ति की पहचान की जा सकती है. उन के विचार से यह फिंगरपिं्रट, आंखों की पुतली के स्कैन के पैटर्न के अलावा एक और विधि साबित हो सकती है. आर्मस्ट्रौंग के दल ने 45 वौलंटियर्स को 75 संक्षिप्ताक्षर पढ़ने को कहा, जैसे एफबीआई, डीवीडी वगैरह. जब वौलंटियर्स उन शब्दों को उच्चारित करने में मशगूल थे तब शोधकर्ताओं ने उन के दिमाग में पैदा हो रहे संकेतों को रिकौर्ड कर के एककंप्यूटर में भेज दिया. कंप्यूटर ने इन संकेतों का विश्लेषण कर के हर वौलंटियर का एक मस्तिष्क तरंग खाका तैयार कर लिया.

इस के बाद इन वौलंटियर्स को वही शब्द एक बार फिर पढ़ने को कहा गया और कंप्यूटर द्वारा उन की पहचान करवाने की कोशिश की गई. कंप्यूटर ने 94 प्रतिशत मामलों में व्यक्ति की सही पहचान कर ली. वैसे तो व्यक्ति के दिमाग ने पैदा होने वाले विद्युतीय संकेतों के आधार पर व्यक्ति की पहचान के प्रयोग पहले भी हो चुके हैं. इन तकनीकों का एक फायदा यह है कि इन में पहचान के लिए पासवर्ड वगैरह से मुक्ति मिल जाती है और यह काम सतत ढंग से किया जा सकता है. समस्या यह है कि इस तरह की पहचान प्रणाली में व्यक्ति की खोपड़ी पर इलैक्ट्रोड वगैरह लगाने पड़ेंगे, ताकि मस्तिष्क की विद्युतीय तरंगों को पकड़ सकें. मजेदार बात यह है कि हर व्यक्ति शब्दों के अर्थ को थोड़ा अलगअलग संजो कर रखता है और यह बात उस के उच्चारण में झलकती है. इस से और कुछ नहीं, इतना पता तो चलता है कि मस्तिष्क में शब्दार्थ की हमारी स्मृति वाला हिस्सा कुछ विशेष ढंग से काम करता है और ये स्मृतियां लगभग स्थायी होती हैं.          

पाठकों की समस्याएं

मैं 29 वर्षीय विवाहित महिला हूं. विवाह को अभी कुछ ही समय हुआ है. मेरी समस्या यह है कि पता नहीं मुझे ऐसा क्यों लगता है कि मेरे पति मुझ से प्यार नहीं करते और न ही अपने दिल की बात मुझ से शेयर करते हैं. वे मुझ से ज्यादा अपनी भाभी से खुले हुए हैं, उन से अपनी हर बात शेयर करते हैं. मुझे उन का ऐसा करना बिलकुल अच्छा नहीं लगता. मैं ऐसा क्या करूं कि वे मुझ से अपनी हर बात शेयर करें और हम दोनों के बीच नजदीकी और प्यार बढ़े?

आप ने बताया कि विवाह को अभी कुछ ही समय हुआ है. किसी भी रिश्ते में नजदीकी और प्यार के लिए समय व धैर्य की जरूरत होती है, आप के पति अपनी भाभी को आप से पहले से जानते हैं इसलिए वे शायद उन से हर बात शेयर करते हैं. आप व्यर्थ ही उन के रिश्ते पर शक न करें. भाभी से बात करें, उन्हें आप दोनों के जुड़ने की कड़ी बनाइए. भाभी से उन की पसंदनापसंद को जानें और पति के दिल को जीतने का प्रयास करें. दूसरा, अभी आप एकदूसरे के लिए अनजान हैं इसलिए शायद वे आप से अपने मन की बात करने में झिझकते हैं. आप अपने प्रयासों से उस झिझक को दूर करने का प्रयास कीजिए. समय के साथ सब ठीक हो जाएगा. अभी किसी की निर्णय पर पहुंचना जल्दबाजी होगी.

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मैं एक विवाहित महिला हूं. पति की आयु 42 वर्ष है. हमारे विवाह को 21 साल हो गए हैं. हमारे 18 व 16 साल के 2 बच्चे हैं. हमारी जिंदगी बहुत अच्छे से चल रही थी. पर पिछले 1 साल से मेरे पति की जिंदगी में एक दूसरी औरत आ गई है. उस से वे घंटों फोन पर बात करते रहते हैं. मैं ने उन्हें समझाने की बहुत कोशिश की, घर के बड़ों ने भी बहुत समझाया पर उन पर किसी की बात का कोई असर नहीं है. वह औरत विधवा है और 3 बच्चों की मां है. मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा, मैं क्या करूं. मानसिक रूप से बहुत आहत और परेशान हूं. मार्गदर्शन कीजिए.

आप ने बताया कि पति उस महिला से फोन पर बात करते हैं. क्या उस महिला से बात करने के अलावा उन का व्यवहार आप के प्रति कुछ बदला है? क्या घर, परिवार, बच्चों की जिम्मेदारियों की वे अवहेलना कर रहे हैं? अगर ऐसा कुछ नहीं है तो व्यर्थ में बात को तूल मत दीजिए. ऐसे रिश्तों का कोई भविष्य नहीं होता. ऐसे रिश्ते ज्यादा देर तक नहीं टिकते. ये क्षणिक होते हैं. आप का व आप के पति का 21 साल पुराना रिश्ता है. 2 बड़े बच्चे हैं. आप के पति ऐसा कुछ नहीं करेंगे जिस से समाज में उन की बदनामी हो. आप थोड़े दिन इस बात को अनदेखा कीजिए. वे खुद रास्ते पर आ जाएंगे. क्योंकि दोनों तरफ से सिर्फ बातचीत है. आप के बारबार इस बात को तूल देने से हो सकता है बात और बिगड़ जाए.

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मैं विवाहित महिला हूं. मेरी समस्या यह है कि मैं ने अपने पति के साथ 3 मार्च को संबंध बनाए थे उस के बाद मेरे पीरियड्स नहीं आए. मैं ने प्रेग्नैंसी टैस्ट के लिए प्रेगा न्यूज का प्रयोग किया तो टैस्ट में नैगेटिव आया. फिर भी अभी तक पीरियड्स न आने का क्या कोई और कारण भी हो सकता है, कृपया शंका का समाधान कीजिए?

जब कोई महिला किसी भी कारण से गर्भवती नहीं होना चाहती, ऐसे में पीरियड्स का मिस होना किसी मुसीबत से कम नहीं लगता. आप के केस में प्रेगनैंसी टैस्ट में  रिजल्ट नैगेटिव आया है और पीरियड्स शुरू नहीं हुए हैं तो इस के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं. कई बार पारिवारिक तनाव, घर में किसी अप्रिय घटना का घट जाना, थायराइड अनियमित होना, पोलिसिस्टिक ओवरी, हार्मोन असंतुलन प्रीमेच्योर मेनोपौज या बर्थ कंट्रोल भी पीरियड्स न आने या अनियमित होने के कारण हो सकते हैं. पीरियड्स के न आने का कारण गाइनोकोलौजिस्ट से मिल कर ही पता चल सकता है. आप अपनी गाइनोकोलौजिस्ट से मिलें. वे कुछ टैस्ट द्वारा ही जान पाएंगी कि पीरियड्स न आने का वास्तविक कारण क्या है?

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मेरी एक लड़के से पिछले 6 वर्षों से दोस्ती है और मुझे लगता है कि उस से सिर्फ मैं ही प्यार करती हूं. मुझे ऐसा क्यों लगता है कि वह मुझ से प्यार नहीं करता. मैं कैसे जानूं कि वह मुझ से प्यार करता है या नहीं?

6 वर्षों की दोस्ती में आप नहीं जान पा रही हैं कि वह आप से प्यार करता है अथवा नहीं. इस का अर्थ कहीं यह तो नहीं कि आप का प्यार एकतरफा हो. हो सकता है वह लड़का आप को प्यार की नजर से न देखता हो और आप को सिर्फ अपना अच्छा दोस्त समझता  हो. शायद इसलिए आप को भी लगता है कि वह आप से प्यार नहीं करता है. आप बातोंबातों में और आप के प्रति उस के व्यवहार से भी जान सकती हैं कि वह आप से प्यार करता है कि नहीं. आप चाहें तो उस से  साफसाफ भी अपने प्रति उस की फीलिंग्स जान सकती हैं. ऐसा कर के आप भी अपने रिश्ते में आगे बढ़ पाएंगी.

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मैं एक विवाहित महिला हूं. हमारी वैवाहिक जिंदगी ठीक चल रही है लेकिन मेरी समस्या यह है कि जब भी मेरे पति किसी अन्य लड़की या महिला की तारीफ करते हैं तो मुझे ईर्ष्या होती है. मैं जानती हूं कि मैं पति को ले कर ओवर पजेसिव हो रही हूं. मैं जब भी उन से इस बारे में बात करती हूं हमारा झगड़ा हो जाता है. दरअसल मैं उन से बहुत प्यार करती हूं और उन्हें खोना नहीं चाहती.

अगर आप पति से प्यार करती हैं तो पति पर विश्वास भी रखें. शक कर के उन्हें अपने से दूर न करें. अपना प्यार जताएं व्यर्थ की दखलंदाजी न करें. जिन की वे तारीफ करते हैं उन जैसा बनने की कोशिश करें और उन का दिल जीतें.     

भारत भूमि युगे युगे

पासपोर्ट व्यवस्था

अपने देश में जिन कामों को करवाने में अच्छेअच्छों के पसीने छूट जाते हैं, पासपोर्ट बनवाना उन में से एक है पर हैरानी की बात इस परेशानी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पत्नी जशोदा बेन का जूझना भी है. अक्तूबर के पहले हफ्ते में जशोदा बेन ने अहमदाबाद के पासपोर्ट कार्यालय में अर्जी दी थी लेकिन पासपोर्ट अधिकारी जेड ए खान ने एक महीने बाद उसे यह कहते खारिज कर दिया कि चूंकि इस में शादी का प्रमाणपत्र नहीं है, इसलिए पासपोर्ट नहीं बन सकता. जशोदा बेन विदेश में रह रहे अपने रिश्तेदारों से मिलने जाना चाहती हैं. 1968 में हुई नरेंद्र मोदी और जशोदा बेन की शादी का कोई कानूनी प्रमाण नहीं है सिवा इस के कि खुद नरेंद्र मोदी ने चुनावी नामांकन में जशोदा को बतौर पत्नी दर्ज किया था. चुनाव आयोग अभी पासपोर्ट विभाग की तरह प्रमाणपत्र या शादी का रजिस्ट्रेशन नहीं मांगता लेकिन जशोदा बेन इस का हवाला दे सकती हैं. अगर पति ससम्मान रखते तो जशोदा का पासपोर्ट थाल में सजा कर पीएम हाउस पहुंचा दिया जाता. बहरहाल, मानवता के नाते तो मोदी को पत्नी की मदद करनी ही चाहिए.

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खेमेबाज बुद्धिजीवी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहीं वैचारिक और बौद्धिक हमलों से घबरा न जाएं, इसलिए उन के बचाव में अभिनेता अनुपम खेर आगे आ गए और इस बाबत उन्होंने बाकायदा 7 नवंबर को दिल्ली में मार्च फौर इंडिया का आयोजन भी कर डाला. बकौल अनुपम खेर, बढ़ती असहिष्णुता जैसे शब्द कुछ लोगों के दिमाग की उपज हैं.भाजपा सांसद किरण खेर के पति द्वारा जुटाए गए इस झुंड में 80 फीसदी कलाकार व बुद्धिजीवी ब्राह्मण समुदाय के क्यों थे, यह बात भी कम महत्त्वपूर्ण नहीं. अनुपम के इस रोड शो में प्रमुख रूप से शामिल थे मालिनी अवस्थी, नरेंद्र कोहली, अच्युतानंद मिश्र, अनूप जलोटा, मनोज जोशी, नितिन देसाई, नीरज बोहरा और मधुर भंडारकर. अपनी बात कहना इन लोगों का भी हक था जिस पर जाने क्यों किसी को राजनीति नजर नहीं आई.

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ज्योतिषी काटजू

बिहार के नतीजे कैसे होंगे, यह 31 अक्तूबर को ही सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस मार्कंडेय काटजू वजहों सहित बता चुके थे कि महागठबंधन को दोतिहाई बहुमत मिलेगा. इसी दौरान देशभर के नामी और बेनामी ज्योतिषी ग्रहनक्षत्रों की गणनाएं कर बता रहे थे कि एनडीए सत्ता में आ रही है क्योंकि लालूनीतीश की जन्मपत्रियों में राजयोग खत्म हो गया है और नरेंद्र मोदी का बरकरार है. ज्योतिषी किस तरह छलावा और ठगी करते हैं, यह तो साबित हुआ ही, साथ ही यह भी जाहिर हुआ कि कभी भी कुछ भी ऊटपटांग बोल देने के लिए कुख्यात हो चले काटजू कभीकभी कायदे की बात भी कर जाते हैं. काटजू चाहें तो अब एक चुनाव परिणाम घोषणा केंद्र खोल सकते हैं.

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गजल नाइट्स में गुलाम

मशहूर पाकिस्तानी गजल गायक गुलाम अली को आखिरकार भारत में गाने का मौका मिल ही गया. वे 3 दिसंबर को लखनऊ महोत्सव में प्रस्तुति देने को तैयार हो गए हैं. इस का श्रेय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को ही जाता है जिन्होंने पहल करते गुलाम अली को न्योता व मौका दिया. कट्टरपंथियों और शिवसेना को हकीकत दिखानी जरूरी भी थी कि गुलाम अली का प्रोग्राम कहीं न कहीं हो, जो खराब सेहत के चलते 8 नवंबर को दिल्ली में होने वाले एक कार्यक्रम में शिरकत नहीं कर पाए थे. 74 साल के हो चले गुलाम अली की आवाज का जादू भारतीयों के सिर बी आर चोपड़ा की ‘निकाह’ फिल्म के प्रदर्शन के बाद चढ़ना शुरू हुआ था जो फिर उतरा नहीं. अगर वे आए तो गजल नाइट्स में चारचांद लगना तय है.

सफर अनजाना

यह घटना तब की है जब मैं छोटी थी और अपने मम्मीपापा के साथ रहती थी. हमारे पापा अस्पताल में सरकारी अधिकारी थे. हम लोग का क्वार्टर अस्पताल कैंपस में ही था. एक दिन पड़ोस की आंटी को देव घूमने का मन किया, तो उन्होंने हम लोगों के सामने देव जाने की योजना बनाई. देव औरंगाबाद जिले में पड़ता है. यह बिहार का एक धार्मिक स्थल है. यहां का सूर्य मंदिर बहुत प्रसिद्ध है. देव में मेरी मौसी की ससुराल भी थी, इसलिए इस शहर से हम लोग अनजान न थे. हम लोगों ने रविवार के दिन देव जाने की योजना बनाई. रविवार की सुबह हम 4 लोग यात्रा पर जीप से निकले. जीप को मंदिर परिसर में लगा कर मंदिर के अंदर चले गए. हम लोग मंदिर परिसर में ही घूम रहे थे कि एक बड़ा सा भैंसा अचानक आया और आंटी के आंचल को अपनी सींग में लपेट लिया. फिर क्या था, आंटी भैंसे के साथ घिसटती चली गईं. अचानक मेरी नजर भैंसे पर पड़ी और झट से दौड़ कर मैं ने भैंसे का सींग पकड़ लिया और आंटी का आंचल उस से अलग कर दिया. इस तरह मैं ने अपनी जान की परवा किए बगैर उन की जान बचाई. वहां पर और भी लोग थे लेकिन किसी ने मदद करने की कोशिश नहीं की. इस तरह मैं ने बहुत बड़ा हादसा होने से बचा लिया. आज भी जब यह बात याद आती है तो मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं.

सुनीता कांत, गया (बिहार)

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मैं, मेरी पत्नी, मेरे दोनों बेटे और मेरे सासससुर पुरी के निकट चिलका झील देखने गए. हम ने एक मोटरबोट किराए पर ली और झील भ्रमण करने लगे. हम ने मोटरबोट वाले को बताया कि हम वह जगह भी देखना चाहते हैं जहां समुद्र का पानी झील में मिलता है. वापसी के समय वह हमें समुद्र के पास ले गया. शायद उस समय समुद्र शांत था, इसलिए वह हमें काफी अंदर तक ले कर गया. अचानक तेज लहरें उठने लगीं और हमारी मोटरबोट डगमगाने लगी. यह देख कर हमारे होश उड़ गए और हम बोट वाले से वापस जाने के लिए कहने लगे. बोट वाले ने हिम्मत दिखाई और मेहनत कर के काफी मुश्किल से हमें लहरों से बाहर निकाल लाया. हम ने देखा हमारे आसपास एक भी मोटरबोट नहीं थी. बाद में वापस पहुंचने पर उस ने हमें बताया कि इस बोट से समुद्र के पास नहीं जाते हैं क्योंकि यह बोट लहरों में नहीं चल सकती और पलट जाती है. आज भी उस दृश्य के बारे में सोच कर हमारे रोंगटे खड़े हो जाते हैं.

डी एन चौबे, रायगढ़ (छ.ग.)

आतंक का पर्याय बनते शिक्षक

आज से 6 वर्ष पहले 15 नवंबर, 2009 को जब राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की एक अदालत ने एक शिक्षक को 1 लाख रुपए मुआवजे की सजा से दंडित किया था, जिस ने फैसले से ठीक 12 वर्ष पहले अपने छात्र को पूरे दिन निर्वस्त्र खड़ा रखा था, तब एक उम्मीद बंधी थी कि सम्माननीय शिक्षक समाज के वे सदस्य जो परिस्थितिवश अपने आचरण के विपरीत कदम उठा लेते हैं, कोई सबक लेंगे. उस समय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रतिभा रानी ने अपने फैसले में उक्त शिक्षक को निर्देश दिया था कि वह बतौर मुआवजा 1 लाख रुपए पीडि़त छात्र को अदा करे.  मार्च, 1997 को दिल्ली के एक राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक पी सी गुप्ता ने उस 13 वर्षीय छात्र को विद्यालय के तालाब में नहाते हुए पकड़ लिया. वे इतने नाराज हुए कि उन्होंने पहले उसे जम कर पीटा, फिर पूरे समय तक विद्यालय में निर्वस्त्र खड़ा रखा. अभिभावकों ने उन के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, मुकदमा चला और 19 मार्च, 2007 को निचली अदालत ने गुप्ता को 1 वर्ष की कैद और ढाई हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई. गुप्ता ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी. उन की उसी अपील के आलोक में अदालत ने यह फैसला दिया. लेकिन हालात सुधरने के बजाय लगातार बिगड़ते चले गए. न जाने हमारे देश के शिक्षकशिक्षिकाओं को आखिर क्या होता जा रहा है कि वे आएदिन अपनी करतूतों से अभिभावकों का विश्वास तारतार कर रहे हैं. कहीं छात्रछात्राओं की पिटाई हो रही है, तो कहीं यौन उत्पीड़न या उस का प्रयास.

बिहार में 15 अक्तूबर को चोरसुआ गांव में नालंदा पब्लिक स्कूल के शिक्षक ने प्रथम वर्ग के छात्र की पिलर से बांध कर बेरहमी से पिटाई की. जिस से बच्चा बुरी तरह से जख्मी हो गया और उस का बायां हाथ टूट गया. इसी तरह 15 सितंबर को उत्तर प्रदेश के कानपुर में क्लासरूम में एक बच्चे को खेलता देख एक शिक्षक ने उस की इतनी पिटाई की कि बच्चे की आंखों की रोशनी चली गई. इस वर्ष अगस्त माह के अंतिम सप्ताह में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शिक्षक समाज उस समय एक बार फिर शर्मसार हुआ जब पुलिस द्वारा चलाए जा रहे औपरेशन सखी के तहत दिल्ली के उत्तरपूर्वी जिले के खजूरी थानांतर्गत एक सरकारी विद्यालय की छात्राओं की काउंसलिंग के दौरान शिकायत मिली कि गणित पढ़ाने वाला शिक्षक आतेजाते समय एवं कक्षा में उन्हें गलत तरीके से छूता है. जांच में शिकायत सही मिली और उक्त शिक्षक को पास्को के तहत गिरफ्तार कर लिया गया.

इस से पहले बीते 5 अगस्त को दिल्ली पुलिस ने शालीमार बाग के बीटी ब्लौक स्थित सरकारी विद्यालय के एक शिक्षक के खिलाफ अपने छात्र के उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज किया. उक्त शिक्षक ने अपने 8 वर्षीय छात्र को इसलिए उठा कर पटक दिया क्योंकि उस ने घर जा कर अभिभावकों व विद्यालय के अन्य कर्मचारियों पर यह राज जाहिर कर दिया था कि उक्त शिक्षक उस से और दूसरे छात्रों से पैर दबवाता है, मालिश कराता है. कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश के कानपुर में नौबस्ता स्थित एक विद्यालय में पहली कक्षा की 6 वर्षीया छात्रा अविका अपनी शिक्षिका के वहशीपन का शिकार बन गई. कानपुर के पूर्णादेवी गर्ल्स इंटर कालेज में कक्षा 6 की छात्रा रूपा को मोबाइल रखने के आरोप में सब के सामने कपड़े उतारने के लिए मजबूर किया गया. नतीजतन, घर आ कर उस ने फांसी लगा ली.

कानपुर के ही विजय नगर स्थित राजकीय इंटर कालेज में कक्षा 6 के छात्र विनीत ने महज इस बात पर फांसी लगा कर जान दे दी क्योंकि उस से स्कूल की एक बैंच असावधानीवश बैठने से टूट गई और उस के लिए उस से 1,500 रुपए हर्जाने की मांग की गई. जब विनीत ने उक्त रकम देने में असमर्थता जताई तो शिक्षकों ने उस की जम कर पिटाई की. अपमान से क्षुब्ध विनीत घर आ कर फांसी पर लटक गया. इस से पहले अप्रैल माह में 5 खबरें आई थीं. पहली अकोला (महाराष्ट्र), दूसरी व तीसरी कांचीपुरम एवं सलेम (तमिलनाडु) और चौथी व 5वीं बाराबंकी एवं मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) से. अकोला में जवाहर नवोदय विद्यालय में 49 छात्राओं के यौन शोषण के आरोप में 3 शिक्षक गिरफ्तार किए गए. आरोपी शिक्षक छात्राओं से अश्लील बातें करते और उन्हें जबरन आलिंगन में लेते थे.

कांचीपुरम स्थित एक सरकारी विद्यालय की 7वीं कक्षा की 13 वर्षीय छात्रा के साथ दुष्कर्म करने वाले शिक्षक को पुलिस ने धरदबोचा. आरोपी शिक्षक ने अपनी मासूम छात्रा के साथ कई बार दुष्कर्म किया, नतीजतन वह गर्भवती हो गई. सलेम में एक सहायक प्रोफैसर अपनी छात्रा को घर पर बुला कर उस का यौन उत्पीड़न करने के आरोप में गिरफ्तार हुआ. उस ने अध्ययन संबंधी दिक्कतें दूर करने के नाम पर अपनी छात्रा की अस्मत लूटी. बाराबंकी के रहलामऊ में 2 रुपए की कलम चोरी के आरोप में प्रधानाचार्य ने 6 वर्षीय छात्र को इतना पीटा कि उस की मौत हो गई. उक्त सभी घटनाएं देशभर के अभिभावकों के लिए किसी सदमे से कम नहीं हैं, जो अपने बेटेबेटियों का भविष्य उज्ज्वल बनाने की खातिर उन्हें स्कूलकालेज भेजते हैं, उन के भविष्य और सुरक्षा के प्रति निश्चिंत रहते हैं. लेकिन जब ऐसी घटनाएं प्रकाश में आती हैं तो उन का सारा विश्वास डगमगा जाता है. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत देश के विभिन्न हिस्सों में आएदिन ऐसी घटनाएं सुननेपढ़ने को मिलती रहती हैं. इस से अभिभावकों के दिल हमेशा आशंकित रहते हैं कि कब, कौन सा शिक्षक या शिक्षिका उन के बच्चे के साथ बदसलूकी कर गुजरे. कई बार तो सुनने में आया कि मामूली सी गलती पर बच्चे को ऐसी सजा दे दी गई कि अभिभावक ने भयवश उसे स्कूल से निकाल लिया.

आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले के एक कौन्वैंट स्कूल की शिक्षिका ने एलकेजी में पढ़ने वाले एक छात्र को मूत्र पीने के लिए मजबूर कर दिया. उस का कुसूर यह था कि उस ने अपनी प्लास्टिक की बोतल में पेशाब कर दिया था. पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के गोपाल नगर स्थित एक स्कूल की शिक्षिका ने कथित रूप से पैसे चोरी करने के आरोप में 8वीं कक्षा की छात्रा के न सिर्फ कपड़े उतरवाए, बल्कि सहपाठियों के सामने उस की तलाशी ली. मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के नौगांव स्थित एक विद्यालय की शिक्षिका ने 2 चोटियां बांध कर न आने के अपराध में 10वीं कक्षा की 3 छात्राओं  के बाल काट दिए. राजस्थान के भीलवाड़ा में बोरडा गांव स्थित एक सरकारी स्कूल की पिं्रसिपल ने 35 छात्राओं के बाल कतर डाले. वजह, उक्त छात्राएं 2 चोटियां बना कर नहीं आई थीं.

मध्य मुंबई स्थित एक स्कूल की पिं्रसिपल एवं एक शिक्षिका के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया कि उन्होंने 3 छात्रों को न केवल चैन से बांध कर उन की परेड कराई, बल्कि उन्हें शौचालय की सफाई करने को मजबूर किया. सूरत (गुजरात) के अडाजण थानांतर्गत एलएनबी स्कूल की 9वीं कक्षा के छात्र हर्ष ने फांसी लगा कर जान दे दी. अपने सुसाइड नोट में हर्ष ने लिखा, ‘पापा, मेरी आखिरी इच्छा है कि आप पीटी वाले सर के गाल पर 10-20 थप्पड़ मारना.’ हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के संतोषगढ़ स्थित एक निजी स्कूल में पाठ न याद करने की सजा के बतौर, छात्रों की टाई और छात्राओं के बालों की चोटियों में जूते बांध दिए गए. उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के थाना हियोरनिया अंतर्गत राठ स्थित एक निजी स्कूल में नर्सरी कक्षा के विद्यार्थी को टीचर ने इस कदर पीटा कि वह हेड इंजरी का शिकार हो गया और अस्पताल पहुंच कर उस ने दम तोड़ दिया. उस का कुसूर यह था कि वह होमवर्क कर के नहीं लाया था.

फरीदाबाद स्थित होली चाइल्ड स्कूल की 8वीं कक्षा के छात्र कौश्तुब पंडित ने स्कूल के बाथरूम में खुद पर पैट्रोल डाल कर आग लगा ली. गंभीरावस्था में उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में दाखिल कराया गया, जहां मौत ने उस से बाजी जीत ली. कौश्तुब होमवर्क वाली कौपी घर पर भूल गया था, जिस के लिए उस की शिक्षिका ने उसे जम कर डांट पिलाई थी. गाजियाबाद के कविनगर स्थित महर्षि दयानंद विद्यापीठ में एक शिक्षिका ने होमवर्क पूरा न करने पर छात्र मोहित को इतना पीटा कि उस के कान के परदे में छेद हो गया. गाजियाबाद के ही टीला शाहबाजपुर स्थित डायमंड सीनियर सैकंडरी स्कूल में 7वीं कक्षा का छात्र सचिन अपनी होमवर्क की फाइल घर पर भूल आया था. इस से नाराज शिक्षक ने उसे जम कर पीटा, जिस से वह बेहोश हो गया.

गलीमहल्ले में खुलने वाले कथित मौंटेसरी, पब्लिक स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षकशिक्षिकाएं अपनी अल्प, अपर्याप्त और सीमित आमदनी के चलते अकसर अनेक दिक्कतों से दोचार रहते हैं. उन्हें अपनी काबिलीयत का सही मोल न मिल पाने की कुंठा वक्त-बेवक्त सताती रहती है. लेकिन इस का मतलब यह तो कतई नहीं है कि नियोजकों के प्रति उपजा गुस्सा किसी मासूम पर उतारा जाए. सरकारी स्कूलों के शिक्षक तो इस के अपवाद हैं. उन्हें पर्याप्त वेतन और सुविधाएं हासिल हैं, बावजूद इस के वे भी संवेदनशून्य होते जा रहे हैं. असल चिंता तो यह है कि शिक्षकों में हिंसा घुसपैठ करती जा रही है क्योंकि प्रशिक्षण में कोई कमी रह जाती है. बाल मनोविज्ञान न समझ पाने की खीझ उन्हें हिंसक और अमानवीय बनने को मजबूर कर रही है. हालात बहुत गंभीर हैं. बच्चों के मन में स्कूल और शिक्षकों के प्रति भय घर करता जा रहा है. इस का इलाज कानूनी कार्यवाही, निलंबन या बदले में मारपिटाई से संभव नहीं.

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