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रणबीर-दीपिका की जोड़ी पर ये क्या बोल गए रणवीर सिंह

रणबीर कपूर, दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह के त्रिकोण ने बौलीवुड में अजीब सी हलचल मचा दी है. बौलीवुड में लोग रणबीर कपूर और दीपिका पादुकोण की जोड़ी को शाहरुख खान की जोड़ी से भी ज्यादा बेहतरीन मानते हैं. पर यह बात रणवीर सिंह को पसंद नहीं है. रणवीर सिंह खुलकर कहते हैं-‘‘ऐसा मानने वालों की संख्या बहुत कम है. मैं आज भी अपने इस बयान पर कायम हूं कि मेरी और दीपिका की जोड़ी ज्यादा सेक्सी और ज्यादा हॉट है. मैं यह सब ऑन स्क्रीन की बात कर रहा हूं. देखिए, हर जोड़ी का अपना एक चार्म होता है. हर जोड़ी की अपनी एक अलग अपील होती है. हर जोड़ी की अपनी एक यात्रा होती है. हर जोड़ी के अपने प्रशंसक होते हैं.

शाहरूख और काजोल तथा रणबीर और दीपिका अलग अलग हैं. उसी तरह रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण की जोड़ी भी अलग है. जोडि़यों की आपस में तुलना की ही नहीं जा सकती. रणबीर कपूर और दीपिका की जोड़ी को ‘यह जवानी है दीवानी’ और ‘तमाशा’ में पसंद किया गया. मगर इनकी जोड़ी बड़ी क्वीट मानी गयी. जबकि हम जिस तरह की फिल्में करते हैं,वह अलग हैं. ‘‘गोलियों की रासलीलाः रामलीला’ और ‘बाजीराव मस्तानी’ तो बहुत ही ज्यादा सेंसुअल और संजीदा प्रेम कहानी वाली फिल्में हैं. इनमें बहुत ही ज्यादा सेंसुअल और संजीदा रोमांस है. ऐसे में आप रणवीर सिंह और दीपिका की जोड़ी को हॉट नहीं कहेंगे,तो कैसे चलेगा?’’ 

एक उपन्यास, चार फिल्में: दो भारत में, दो हालीवुड में

मशहूर अंग्रेजी लेखक ग्रिम ब्रदर्स (GRIMM BROTHERS)  के क्लासिक फेरी टेल ‘‘स्नो व्हाइट्स एंड सेवन द्वार्फ्स’’ ( Snow White and the Seven Dwarfs)  पर भारत के दो फिल्मकार आषुतोष गोवारीकर और विनय सप्रू व राधिक राव फिल्में बनाने जा रहे हैं. जबकि हालीवुड में भी इसी क्लासिक फेरी टेल पर दो फिल्में बन रही हैं. यह कहानी उस सुंदर राजकुमारी की है, जिसे उसकी सौतेली मां मारना चाहती है

प्रदर्शन के लिए तैयार फिल्म ‘‘सनम तेरी कसम’’ की निर्देशक जोड़ी विनय सप्रू और राधिका राव तकरीबन सात सौ म्यूजिक वीडियो और ‘लक्की’ सहित कई फिल्मों के गाने निर्देशित कर चुकी हैं. विनय सप्रू और राधिका राव को बड़े स्तर पर फेरी टेल कहने में महारत हासिल है. अब विनय सप्रू व राधिका राव अब ग्रिम ब्रदर्स के क्लासिक फेरी टेल ‘‘स्नो व्हाइट्स एंड सेवन द्वार्फ्स’’ पर ‘‘स्नो व्हाइट’’ नामक फिल्म का निर्माण व निर्देशन कर रहे हैं, जो कि 2016 में ही रिलीज होगी.

सूत्रों के अनुसार विनय सप्रू व राधिका राव अपनी इस फिल्म की शूटिंग  मार्च माह तक शुरू कर देंगे. यह फिल्म उत्तर भारत की पृष्ठभूमि पर होगी. राधिका राव कहती हैं- ‘‘हमारी फिल्म में स्नो व्हाइट एक भारतीय लड़की है. वह आम लड़कियों की तरह सुंदर नही है, बल्कि सांवली रंगत की बादामी आंखों वाली, शांत व डरपोक किस्म की है. सात बौने उसे जंगल में मार देना चाहते हैं, पर फिर वह उसे छोड़ देते हैं. और वह राज कुमार की तरह हीरो बनकर उभरती हैं. पर यह बौने आम बौनों से कुछ ज्यादा लंबे कद के हैं.’

सूत्रों के अनुसार ग्रिम ब्रदर्स के ही क्लासिक फेरी टेल पर आशुतोष गोवारीकर आधुनिक नजरिए के साथ फिल्म बना रहे है. सूत्रों की माने तो आशुतोष गोवारीकर की फिल्म की शुरूआत 2016 के अंत तक हो पाएगी. शायद उससे पहले विनय सप्रू व राधिका राव की फिल्म रिलीज हो चुकी होगी.

इस बारे में राधिका राव कहती हैं-‘‘यह ऐसी क्लासिक फेरी टेल कहानी है,जिस पर कई लोग काम कर सकते हैं. हर फिल्मकार अपने नजरिए से इस पर फिल्म बना सकता है. कोई भी फिल्मकार इस पर अपना एकाधिकार नहीं जता सकता. वैसे भी इस पर 1937 में हालीवुड में  डेविड हंड के निर्देशन में वाल्ट डिज्नी संगीत प्रधान एनीमेशन फिल्म बना चुकी है. इतना ही नही इस वक्त हालीवुड के दो अन्य फिल्मकार इस पर फिल्म बना रहे हैं. हर फिल्मकार एक ही कहानी को अपने अपने विजन के अनुसार प्रस्तुत कर सकता है.’’

‘भोजपुरी दबंग’ ने 1 करोड़ 65 लाख जुटाकर रचा इतिहास

भारतीयों के बीच खेल और सिनेमा दो पसंदीदा मनोरंजन के साधन है. इसी के चलते अब इन दोनो का मिश्रण भी हो रहा है. एक तरफ खेलों पर आधारित फिल्में बन रही हैं, तो दूसरी तरफ कई फिल्म स्टार अब कबड्डी, फुटबाल या क्रिकेट टीमें खरीदकर खेलते हुए भी धन कमा रहे हैं. इतना ही नहीं अब तो यह अभिनेता अपनी टीम के लिए स्पांसर्स जुटाने के लिए ‘बिडिंग’ यानी कि बोली तक लगवाने लगे हैं.

जी हां! 23 जनवरी से शुरू हो रहे छठे ‘‘सेलीब्रिटी क्रिकेट लीग’’ के मैच में आठ टीमें है, लेकिन इसकी एक टीम ‘‘भोजपुरी दबंग’’ने पहली बार अपनी टीम के लिए स्पांसर्स जुटाने के लिए स्पांसर्स के बीच बोली लगवाकर एक करोड़ पैंसठ लाख रूपए जुटाकर एक नया रिकार्ड बना डाला. यह पहला मौका है, जब ‘आईपीएल’ या सरकारी क्रिकेट संस्थाओं से अलग किसी फिल्म कलाकार की टीम ने अपनी टीम के लिए स्पांसर्स जुटाने के लिए बोली लगवायी हो.

‘‘भोजपुरी दबंग’’टीम ने बोली लगवाकर स्पांर्सस जुटाने का काम भले ही किया हो, मगर इस बोली को लेकर बालीवुड में कई तरह की चर्चाएं गर्म हैं. वास्तव में‘‘भोजपुरी दबंग’’टीम के मालिक भोजपुरी फिल्मों के सुपर स्टार अभिनेता व गायक मनोज तिवारी तथा सोहेल खान हैं. इतना ही नहीं मनोज तिवारी इन दिनों भारतीय जनता पार्टी के दिल्ली से सांसद भी है.‘‘भोजपुरी दबंग’’ के कैप्टन मनोज तिवारी तथा उप कैप्टन भोजपुरी फिल्मों के चर्चित अभिनेता दिनेशलाल यादव निरहुआ हैं.

बालीवुड में चर्चाएं गर्म है कि मनोज तिवारी ने सांसद होने का फायदा उठाते हुए अपनी ‘‘भोजपुरी  दबंग’’टीम के लिए बोली लगाकर स्पांसर्स जुटाकर नया इतिहास रचने का कारमाना कर दिखाया है. अन्यथा बालीवुड के स्टारों की टीम या चेन्नई की दक्षिण भारतीय कलाकारों की  टीम भी पिछले छह साल के दौरान बोली लगवाकर स्पांसर्स जुटाने का साहस नहीं जुटा सकी. मनोज तिवारी दिल्ली से सांसद हैं और ‘‘भोजपुरिया दबंग’’की टाइटल स्पांसर्सशिप 88 लाख रूपए देकर दिल्ली की भवन निर्माण  कंपनी ‘‘रेवांता ग्रुप’ ’ने खरीदा है.

बालीवुड की इन चर्चाओं को लेकर जब मनोज तिवारी से बात हुई,तो मनोज तिवारी ने कहा-‘‘हमने एक नया इतिहास रचा है. पहली बार ऐसा हुआ है, जब ‘सेलीब्रिटी क्रिकेट लीग’’की किसी टीम ने पूरी पारदर्शिता के साथ बोली लगाकर अपनी टीम के लिए स्पांसर्स जुटाए हैं. इसलिए लोग तरह तरह की बातें कर रहे हैं. मै सांसद होने का फायदा लेना चाहता, तो बोली लगाने का कार्यक्रम दिल्ली में रखता न कि मुंबई में. हमने अपनी टीम के लिए स्पांसर्स जुटाने के लिए बोली लगाने का कार्यक्रम मुंबई में रखा और इस कार्यकम में हमने मुंबई के कई पत्रकारों व भोजपुरी इंडस्ट्री की बड़ी बड़ी हस्तियों को भी बुलाया था. सब कुछ सभी के सामने हुआ. हां! मैं यह मान सकता हूं कि मेरे फिल्म अभिनेता होने की वजह से हमारी टीम को फायदा मिला होगा. सांसद के रूप में हम कोई फायदा उठाने का प्रयास नहीं करते.’’

वाका की पिच पर आस्ट्रेलिया को नचाने के लिए तैयार भारत

आस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम भले ही वाका की उछाल भरी पिच का फायदा उठाकर मंगलवार को होने वाले पहले वनडे से ही भारतीय टीम पर दबाव का लक्ष्य लेकर चल रही हो लेकिन अनुभवी भारतीय टीम मेजबान टीम के युवा और कमोबेश गैर अनुभवी खिलाडिय़ों को अपनी धुन पर नचाने के लिए कमर कस चुकी है. अपने पहले ट्वंटी और दूसरे वनडे अभ्यास मैच में भारत ने 74 रन और क्रमश: 64 रन से जीत दर्ज की थी और अपनी तैयारियों को पुख्ता किया.

ओपनर रोहित शर्मा ने वनडे अभ्यास मैच में अर्धशतक ठोककर फार्म में वापसी का संकेत दिया जबकि रहाणे, शिखर धवन, विराट कोहली की मौजूदगी से भी अनुभवी टीम इंडिया बराबरी की टक्कर देने के लिए तैयार दिख रही है. दूसरी ओर घरेलू परिस्थितियों में खेल रही विश्व चैंपियन आस्ट्रेलिया भले ही बड़े बड़े दावे कर रही हो और खुद को सीरीज जीतने की प्रबल दावेदार मानती हो, लेकिन फिलहाल उसके पास अनुभवी चेहरों की भारी कमी दिखती है जिसके शीर्ष खिलाड़ी या तो रिटायर हो चुके हैं और या फिर चोटिल हैं.

भारत और आस्ट्रेलिया आखिरी बार वनडे विश्वकप कप फाइनल में जगह बनाने के इरादे से एक दूसरे से भिड़े थे और उस समय टूर्नामेंट की सह मेजबान टीम ने टीम इंडिया को उसके खिताब बचाओ अभियान से रोक दिया था लेकिन लगभग 10 महीने के इस समय में आस्ट्रेलिया के लिए स्थिति काफी बदल चुकी है. मेजबान टीम के पास अब माइकल क्लार्क, मिशेल जानसन, ब्रैड हैडिन जैसे चेहरे नहीं हैं तो तेज गेंदबाज मिशेल स्टार्क चोटिल हैं. वहीं चयनकर्ताओं ने अनुभवी आलराउंडर शेन वाटसन को टीम में चुना ही नहीं है. ऐसे में युवा कप्तान स्टीवन स्मिथ के नेतृत्वमें जोएल पेरिस जैसे पदार्पण खिलाड़ी अनुभवी भारतीय टीम के सामने फिलहाल दमदार नहीं दिख रहे हैं.

विराट की फार्म निश्चित ही भारत के लिये अहम है जिसका लक्ष्य सीरीज की शुरूआत विजयी अंदाज में करना है. पहले टी 20 अभ्यास मैच में जहां विराट ने अर्धशतक ठोका था तो वहीं वनडे अभ्यास में उन्होंने केवल सात रन बनाए जबकि शिखर भी चार रन ही बना सके. लेकिन इस मैच में रोहित ने 67 रन की पारी से फार्म में वापसी का संकेत दिया. रोहित की फार्म दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भी कुछ खास नहीं थी. वहीं भरोसेमंद खिलाड़ी रहाणे भी अहम होंगे जबकि कप्तान धोनी की निजी फार्म भी पिछले काफी समय से आलोचनाओं के घेरे में है.

भारत को आस्ट्रेलिया दौरे पर आने से पहले सीमित ओवर सीरीज के लिए अभ्यास का बहुत समय नहीं मिला है क्योंकि वह यहां दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज संपन्न होने के कुछ दिनों के अंतर पर आई है. इसलिए अभ्यास की कमी भी टीम इंडिया के लिए कुछ परेशानी कर सकती है. इसके अलावा घरेलू क्रिकेट में कमाल का प्रदर्शन करने वाले जडेजा और नंबर एक टेस्ट गेंदबाज और आलराउंडर रविचंद्रन अश्विन टीम की ढाल बन सकते हैं.

आस्ट्रेलियाई टीम लगातार मान रहा है कि उसे वाका की उछाल भरी पिच का फायदा मिलेगा लेकिन दोनों ही टीमों के पास बराबरी का मौका होगा. यहां पिच पर उछाल और तेजी की उम्मीद है. लेकिन देखना दिलचस्प होगा कि कौन सी टीम इन परिस्थितियों का फायदा उठा पाएगी. वैसे आस्ट्रेलिया में आस्ट्रेलिया के खिलाफ भारतीय टीम का वनडे में कोई खास रिकार्ड नहीं रहा है और वर्ष 2008 के बाद से कुल छह वनडे में उसने एक ही जीता है.

पर्थ में होने वाला मुकाबला भारत के लिये रैंकिंग के लिहाज से भी खास होगा क्योंकि आईसीसी के अनुसार यदि भारत पांच मैचों में एक भी जीत जाता है तो वह वनडे में रैंकिंग में अपने दूसरे स्थान पर बना रहेगा. वैसे टीम इंडिया के पास विराट, शिखर और धोनी के रूप में तीन ऐसे खिलाड़ी हैं जो वनडे रैंकिंग में शीर्ष 10 में हैं जबकि आस्ट्रेलिया से केवल ग्लेन मैक्सवेल ही हैं. लेकिन भारत के लिए यह याद रखना अहम होगा कि मैदान पर समीकरण बदलते देर नहीं लगती है और आस्ट्रेलिया को किसी भी वक्स हल्के में लेना उसकी भारी भूल साबित हो सकती है.

मुनरो ने बनाया टी-20 का दूसरा सबसे तेज अर्धशतक

न्यूजीलैंड के कॉलिन मुनरो टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपने देश के लिए सबसे तेज अर्धशतक लगाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं. वैश्विक सूची में युवराज सिंह के बाद मनरो का दूसरा स्थान है. मुनरो ने रविवार को श्रीलंका के खिलाफ 14 गेंदों पर 50 रन पूरे किए. उनकी पारी में एक चौका और सात छक्के शामिल हैं. इससे पहले न्यूजीलैंड की ओर से सबसे तेज अर्धशतक का रिकॉर्ड मार्टिन गुपटिल के नाम था, जो उन्होंने रविवार को ही 19 गेंदों में बनाया था.

मुनरो से अधिक तेजी से सिर्फ युवराज सिंह ने अर्धशतक लगाया है. युवराज ने 2007 में डरबन में इंग्लैंड के खिलाफ 12 गेंदों पर अर्धशतक पूरा किया था. उस मैच में युवराज ने इंग्लिश गेंदबाज स्टुअर्ट ब्रॉड के एक ओवर में छह छक्के लगाए थे. टी-20 अंतर्राष्ट्रीय मैचों में तीसरा सबसे तेज अर्धशतक आयरलैंड के पॉल स्टर्लिंग के नाम है. स्टर्लिंग ने साल 2012 में अफगानिस्तान के खिलाफ दुबई में 17 गेंदों पर अर्धशतक लगाया था.

युवराज ने टी-20 क्रिकेट के इतिहास में सबसे तेज अर्धशतक लगाया है. इस क्रम में मुनरो सातवें स्थान पर खिसक जाते हैं. दूसरे स्थान पर इंग्लैंड के मार्कस ट्रेस्कोथिक हैं, जिन्होंने 2010 में सोमरसेट के लिए खेलते हुए हैम्पशायर के खिलाफ 13 गेंदों पर अर्धशतक लगाया था. इसके बाद इमरान नजीर, जीएल ब्रोफी, के. नोएमा बार्नेट और केरन पोलार्ड ने अपनी-अपनी टीमों के लिए घरेलू मैचों में 14 गेंदों पर अर्धशतक लगाए हैं. ये अंतर्राष्ट्रीय शतक नहीं हैं.

पठानकोट अटैक के बाद अब कहां होगी ‘ज़ुबान’ की शूटिंग

मसान फिल्म से फिल्म जगत में पदार्पण कर चुके अभिनेता विक्की कौशल फिल्म ज़ुबान में अहम किरदार निभाते हुए नजर आयेंगे. ज़ुबान फिल्म के कुछ पैच दृश्यों की शूटिंग इस ठंड के मौसम में पठानकोट में की जानी थी, पर पठानकोट अटैक के चलते फिल्म जुबान के निर्माता अब दूजे लोकेशन की तलाश में है.

फिल्म की 70 प्रतिशत शूटिंग पठानकोट में ही हुई है, फिल्म के निर्माता चाहते थे की फिल्म का कुछ पेच वर्क जनवरी की ठंड में किया जाए. ​यूनिट के सूत्रों के अनुसार " फिल्म जुबान की शूटिंग ज्यादातर पठानकोट में मई में हुई है, पर  कुछ सीन की शूटिंग बाकी थी, क्यूंकि वह जनवरी में ठंड के महीने में फिल्माना था.

यह फिल्म एक म्यूजिकल ड्रामा से भरपूर है. फिल्म की टीम फिल्म की शूटिंग जनवरी के शुरुआत में ही करना चाहती थी पर दुर्भाग्यवश पठानकोट में अटैक हो गया , इसके चलते दूसरे लोकेशन की तलाश है. ज़ुबान फिल्म के निर्देशक मोज़ेज़ सिंह कहते है "​ फिल्म ने पहले ही अंतराष्ट्रीय फिल्म महोत्सवों में अपनी एक खास जगह बनायीं है, मुझे दिल से बुरा लग रहा है की देश के बहादुर जवानो को अपनी जान देनी पड़ी. मुझे पता है पठानकोट धरती पर स्वर्ग है , में चाहता हूं की फिर से वहां शूटिंग करूं , पर कड़ी सुरक्षा और हालात  देखते हुए वह शूटिंग नहीं होगी, इसी लिए फिल्म का जो पैच वर्क पठानकोट में करना था, अब उस के लिए हम दूसरे लोकेशन के तलाश मे है.

टी20 रैंकिंग: वेस्टइंडीज टॉप पर, भारत आठवें स्थान पर

न्यूजीलैंड के हाथों ट्वेंटी-20 सीरीज में 0-2 की शिकस्त झेलने वाली श्रीलंकाई टीम को ट्वेंटी-20 अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में भी नुकसान उठाना पड़ा है और वेस्टइंडीज ने उसकी जगह ले ली है.

आईसीसी की ओर से रविवार को जारी ताजा ट्वेंटी-20 अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में वेस्टइंडीज नंबर वन टीम बन गयी है जबकि श्रीलंका दो स्थान खिसककर तीसरे स्थान पर गिर गयी है. न्यूजीलैंड ने श्रीलंका को दो मैचों की ट्वेंटी-20 सीरीज में 2-0 से क्लीन स्वीप कर जीत हासिल की जिसका नुकसान श्रीलंका को रैंकिंग में भी हुआ. ऑस्ट्रेलिया दूसरे नंबर पर पहुंच गयी है.

वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड (डब्ल्यूआईसीबी) और खिलाड़ियों के बीच चल रहे विवाद के बीच वेस्टइंडीज के लिए काफी समय बाद अच्छी खबर यह आयी कि उसे नंबर वन ट्वेंटी-20 टीम बनने का मौका मिला. हालांकि ट्वेंटी-20 फॉर्मेट में वेस्टइंडीज का प्रदर्शन बेहतर रहा है और उसने वर्ष 2012 का ट्वेंटी-20 विश्वकप जीता था. इसके अलावा वह 2014 ट्वेंटी-20 विश्वकप के सेमीफाइनल में पहुंचने में भी कामयाब हुई थी.

वर्ष 2014 का ट्वेंटी-20 विश्वकप जीतने वाली टीम श्रीलंका तीसरे जबकि ऑस्ट्रेलिया दूसरे स्थान पर है. इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड क्रमश: चौथे, पांचवे और छठे स्थान पर है. पाकिस्तान सातवें जबकि इस वर्ष ट्वेंटी-20 विश्वकप का मेजबान भारत आठवें स्थान पर है.

कुछ इस तरह बनेगा अब हर घर डिजाइनर

घर ही एक ऐसी जगह होती है जहां हर व्यक्ति अपनी सारी चिंताओं, परेशानियों को भूल कर कुछ पल सुकून के गुजारता है. पर घर में सुकून के पल तभी मिलेंगे जब आप का घर सुविधाजनक और डिजाइनर होगा. काली कट के डिजाइनर और वास्तुकार सिंधु कृष्णा कुमार कहते हैं, ‘‘आज हर घर डिजाइनर घर है. घर में डिजाइनर फैक्टर असली हीरो है.’’

ईकोफ्रैंडली घर का क्रेज

केरल हमेशा ईकोफ्रैंडली आर्किटैक्चर के लिए आगे रहा है पर कुछ समय से ईकोफ्रैंडली आर्किटैक्चर को पीछे रख कर वैस्टर्न स्टाइल के आर्किटैक्चर की नकल की जाने लगी है. साथ ही इस बात पर भी ध्यान दिया जाता है कि ऐसी संरचनाओं का निर्माण करने से जमीन पर असर न पड़े. बहुत से लोग तो आजकल पुराने व नए जमाने के स्टाइल के फ्यूजन वाले घर बनवा रहे हैं. मगर सब से जरूरी और महत्त्वपूर्ण बात यह है कि आजकल बहुत से लोग विशेषरूप से ऐसे घरों में पैसा लगाना चाहते हैं, जो पर्यावरण की दृष्टि से भी सुरक्षित हों.

कोचीन के वास्तुकार शिंटो वर्गीस कहते हैं कि अब समकालीन शैली केरल पहुंच गई है. यह शैली समय और पैसा बचाने में काफी प्रभावी है. अब यूरोपियन निर्माण शैली में भी केरल एनआरआई संख्या की वजह से काफी आगे है.

जिन डिजाइनों में अधिक ऊर्जा की बचत का विकल्प होता है और जो ईकोफ्रैंडली सामग्री से बने होते हैं, उन का चलन अधिक है. इस बात को मानना होगा कि किसी भी सोसाइटी का आर्किटैक्चर वहां के सांस्कृतिक, राजनीतिक व आर्थिक प्रभावों को दर्शाता है. केरल में एनआरआई का पैसा ही वहां स्टाइल्स का निर्धारण कर रहा है.

अंधविश्वासमुक्त घर

आजकल कुछ लोग 100 वर्गफुट में भी रह कर खुश हैं, क्योंकि उन्हें उसी में मौडर्न समय की सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं. ऐसे घर भी भारत में बहुत लोकप्रिय होते जा रहे हैं.

शिंटो वर्गीस कहते हैं कि आजकल कुछ लोग घर बनवाते समय वास्तु पर भी ध्यान देने लगे हैं. वास्तु का पागलपन इतना अधिक बढ़ गया है कि धर्म के पागलपन से भी आगे निकल गया है. लोग इस पर आंख मूंद कर विश्वास कर रहे हैं. अब यह भी एक तरह से अंधविश्वास बनता जा रहा है. इस तरह के खोखले अंधविश्वासों पर यकीन करने की बजाय घर को सुंदर व सुविधाजनक बनाने में ही समझदारी है. आजकल ईकोफ्रैंडली व ऐनर्जी फ्रैंडली घरों की लोकप्रियता दोबारा बढ़ने लगी है. रेनवाटर, हार्वैस्ट स्ट्रक्चर, सोलर, वाटर हीटर सिस्टम व ऐसी खिड़कियां जिन से अधिक से अधिक सूर्य की रोशनी अंदर आ सके, ऐसी तकनीकों पर आजकल के डिजाइनर जोर दे रहे हैं.

लिव इन पार्टनर संपत्ति का हकदार हो या नहीं

हाल ही में अदालतों में लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे लोगों द्वारा कानूनन संपत्ति का अधिकार पाने की वकालत शुरू हुई है तथा कुछ को इस में सफलता भी मिली है. अदालतों का रुख इस पर नर्म होने लगा है. ऐसा लगता है कि कुछ परिस्थितियों में यह मांग सही रही होगी तभी अदालतों ने ऐसे फैसले दिए. पर इस के कुछ और पहलू भी विचारणीय हैं. पूरे समाज के परिपे्रक्ष्य में कानून में आने वाला यह बदलाव समाज में अलग प्रकार की उलझनें खड़ी कर सकता है.

शादी और सहजीवन में अंतर

शादी और सहजीवन में प्रमुख अंतर कर्तव्यों को स्वीकार या अस्वीकार करना है. शादी स्वयं के लिए कर्तव्य निश्चित करने का ही दूसरा नाम है और अधिकार कर्तव्य निर्वहन के बाद ही मिलते हैं. शायद इसीलिए हिंदी में ‘कर्तव्य और अधिकार एक ही सिक्के के 2 पहलू हैं’ और अंगरेजी में ‘ड्यूटीज ऐंड राइट्स गोज टुगैदर’ प्रसिद्ध कहावतें हैं.

विवाह की कानूनी परिभाषा भले ही एक स्त्री तथा एक पुरुष के दैहिक संबंधों तक सीमित हो, लेकिन धर्म तथा समाज के अनुसार एकदूसरे को दैहिक सुख प्रदान करना ही वैवाहिक दायित्व की इतिश्री नहीं है. शादी का अर्थ ही है कमिटमैंट या वादा. इस से जुड़े कानूनी अधिकार धर्म द्वारा इस रिश्ते को दिए गए अधिकारों के ही रूप हैं जो इस वादे के कारण ही वजूद में लाए गए हैं और यह वादा पूरे परिवार को भावनात्मक सुरक्षा प्रदान करने का होता है. प्राय: एक के जीवित न रहने के बाद दूसरा उस के दायित्वों का वहन भी करता है और संपत्ति का अधिकारी भी होता है.

भारतीय संस्कृति में विवाह को एक पुनीत आश्रम में प्रवेश इसलिए माना गया है, क्योंकि यहां 2 परिवारों का मिलन होता है. विवाह के जरीए पतिपत्नी एकदूसरे के परिवार से जुड़ते हैं. हालांकि उन में आरंभ में कुछ वैचारिक या अहंजनित टकराव होते हैं, पर कुछ समय उपरांत रस्मोरिवाज के माध्यम से या एकदूसरे का मान रखने के लिए ऊपरी मन से अपने पति या पत्नी के संबंधियों से निभाते हुए अधिकतर लोगों में लगाव पनप ही जाता है. कर्तव्य को ऊपरी मन से निभाते हुए धीरेधीरे स्नेह पनपने की यह प्रक्रिया ही हमारी संस्कृति की आधारशिला है, जिसे नकारना ही सहजीवन का विकल्प चुनने का प्रमुख उद्देश्य है. प्यार का अर्थ है इनसान को उस की अच्छाइयों और कमजोरियों के साथ अपनाना और शादी का अर्थ है इनसान को उस के संबंधियों के साथ अपनाना. इसीलिए वैदिक समाज में पत्नी को पति की अर्धांगिनी कहा गया तथा उस का पति के दायित्वों के साथ उस की संपत्ति पर भी समान रूप से अधिकार सुनिश्चित किया गया.

समय के साथ जब धर्म का स्थान कानून ने लिया तथा पंचायतों का अदालतों ने तो वैदिक समाज के यही नियमकानून आधारशिला बने. समय का चक्र गतिमान रहा तथा मानव क्रमश: चतुर तथा आत्मकेंद्रित होता गया. इस से जन्म हुआ उन विकल्पों का जिन में कर्तव्य तथा समझौतेरूपी बंधन न्यूनतम हों. इस के कारण पहले संयुक्त परिवार का परंपरागत ढांचा टूटा, फिर दांपत्य जीवन का जिस से सहजीवन नाम का विकल्प सामने आया. लेकिन देखा गया है कि कर्तव्यविहीन तथा बंधनमुक्त जीवन को रसपूर्वक जीने वाले उम्र के अवसान में स्वयं को एकाकी तथा असुरक्षित पाते हैं. ऐसे में कुछ ने जीविकोपार्जन के लिए अदालतों के दरवाजे खटखटाए होंगे. कुछ का सिर्फ लंबे अरसे तक एक व्यक्ति से एकनिष्ठता के साथ जुड़े रहने से अधिकार भाव पनप गया होगा. पर मुख्य तथ्य यह है कि भारतीय समाज में केवल दैहिक सुख वैवाहिक व्यवस्था का आधार नहीं है. ऐसे में  लंबे अरसे तक केवल दैहिक एकनिष्ठता के कारण संपत्ति का अधिकार मिल जाना क्या वैवाहिक कर्तव्यों में बंधने की सोच को हतोत्साहित नहीं करेगा?

सिक्के का दूसरा पहलू

किंतु इस सिक्के का एक और पहलू विचारणीय है. समय के साथ स्त्रियों ने भी हर प्रकार के व्यवसाय में अपनी पहुंच बनाई है. उन्हें इस का अधिकार भी है और यह पूरे समाज के लिए गौरव का विषय भी है. कुछ व्यवसाय या जीवन ऐसे होते हैं जहां गृहस्थी के बंधन की कोई गुंजाइश नहीं होती, तो कुछ जनून ऐसे होते हैं, जिन के लिए रिश्तों की तरफ से बंधनमुक्त या दायित्वहीन जीवन आवश्यक है. तो क्या इस प्रकार का जीवन चुनने वालों को विपरीत लिंग के साहचर्य की नैसर्गिक चाह रखने का अधिकार नहीं है? बिलकुल है. सामाजिक संरचना एवं विचारधाराएं सतत परिवर्तनशील हैं. युवाओं का बंधनहीन जीवन के प्रति आकर्षण युग परिवर्तन का एक लक्षण है, जिसे प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता. इसलिए समाज में इस का स्वागत आवश्यक होना चाहिए.

किंतु इसे कानूनी अधिकार दे देना इनसान को कर्तव्यहीन जीवन के लिए प्रेरित कर सकता है. यदि कोई जोड़ा स्वेच्छा से बंधनमुक्त जीवन जीता है तो आज नहीं तो कल हमारे समाज को भी पाश्चात्य समाज की तरह उसे सम्मान और अपनी शर्तों पर जीवन जीने का अधिकार देना ही होगा. लेकिन ऐसा जीवन जीने वालों को यह समझना आवश्यक है कि कर्तव्य से मुंह मोड़ने का मतलब अधिकार से वंचित होना भी है.

करोड़ों के कटारे: जनता के पैसे लुटाते नेता

जनता के पैसों का नेता कैसे कैसे बेजा इस्तेमाल करते हैं, इस की ताजा मिसाल मध्य प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता सत्यदेव कटारे हैं, जिन के विदेश जा कर इलाज कराने के लिए पहले 55 लाख रुपए देने के बाद राज्य सरकार ने दोबारा 2 करोड़ रुपए मंजूर किए, तो राज्य में खासा बवाल मचा.

इस से यह भी साबित हुआ कि जनता का पैसा कल्याणकारी योजनाओं में कम और नेताओं के इलाज पर ज्यादा लुटाया जा रहा है. सत्तारूढ़ दल के नेता तो बड़ी बेरहमी से सरकारी खजाने को खाली करते ही हैं, पर अब कांग्रेसी भी इस दौड़ में शामिल हो गए हैं. हैरानी की बात यह है कि खुद सत्यदेव कटारे का करोड़ों का कारोबार है, फिर भी उन्होंने सरकार से पैसे क्यों मांगे और सरकार ने यह भारीभरकम रकम मंजूर क्यों कर दी?

इस सवाल को बदनाम व्यापम घोटाले से जोड़ कर भी देखा जा रहा है. कभी इन्हीं सत्यदेव कटारे ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर इलजाम लगाया था कि उन्होंने अपनी एक नजदीकी रिश्तेदार को व्यापम के जरीए फायदा पहुंचाया, पर एकाएक ही वे चुप हो गए, तो एक कयास यह भी लगाया गया कि कहीं यह मुंह बंद रखने की कीमत तो नहीं थी?

बवंडर मचा, तो सत्यदेव कटारे ने एक करोड़, 46 लाख रुपए चैक के जरीए सरकार को लौटा दिए, पर बचे हुए तकरीबन एक करोड़ रुपए तो खर्च कर ही डाले.

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