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लता मंगेशकर की जगह मधुश्री

समय के साथ बदलाव आना स्वाभाविक है. 1966 में एफ सी मेहरा निर्मित तथा लेख टंडन निर्देशित सफलतम फिल्म ‘‘आम्रपाली’’ के सभी गीतों को संगीतकार शंकर जयकिशन के निर्देशन में लता मंगेशकर ने गाया था. अब पूरे 50 साल बाद उसी फिल्म ‘‘आम्रपाली’’ का रीमेक ‘‘श्री लाजलक्ष्मी प्रोडक्शन’’ के बैनर तले बलदेव सिंह बेदी करने जा रहे हैं. यह नए जमाने की ऐतिहासिक फिल्म होगी. जिसमें संगीतकार राबी बादल के निर्देशन में सभी गीत मधुश्री गा रही हैं.

हाल ही में महबूब लिखित दो गानों को मधुश्री ने अपनी आवाज में रिकार्ड भी किया, जिसमें से एक गाना मधुश्री ने उस्ताद राशिद खान के साथ स्वरबद्ध किया है. इस शास्त्रीय गीत में आम्रपाली के बचपन से एक खूबसूरत औरत बनने तक की यात्रा का चित्रण है. जबकि दूसरा गाना हल्दी सेरेमनी के समय का है.

मूलतः बंगाली मधुश्री क्लासिकल संगीत की ट्रेनिंग लेने के बाद संगीतकार ए आर रहमान से प्रेरित होकर मुंबई आयी थी. मधुश्री ने पहली बार 2001 में संगीतकार राजेष रोशन के निर्देशन में फिल्म ‘‘मोक्ष’’ का गीत ‘‘मोहब्बत जिंदगी है’’ गाया था. उसके बाद से उन्हे पीछे मुड़कर देखने की जरुरत नहीं पड़ी. पंद्रह साल के अपने गायन करियर में मधुश्री ने ‘साथिया’, ‘कुछ न कहो’, ‘कल हो ना हो’, ‘स्वदेश’, ‘युवा’, ‘रंग दे बसंती’, व ‘रांझणा’ जैसी कई सफलतम फिल्मों में अपनी आवाज व अपनी गायन शैली का जादू बिखेर चुकी हैं.

अब मधुश्री फिल्म ‘‘आम्रपाली’’ के सभी गीतो को स्वरबद्ध करते हुए काफी उत्साहित हैं. वह कहती हैं-‘‘मशहूर ऐतिहासिक पात्र व राजशाही वेश्या आम्रपाली की आवाज बनकर में काफी उत्साहित हूं. मैंने 1966 में बनी फिल्म भी देखी है और इस फिल्म में लता मंगेशकर द्वारा स्वरबद्ध सभी गाने मैने बडे़ ध्यान से सुने हैं. मैं तो लता जी की बहुत बड़ी प्रशंसक हं. उन्होने इस फिल्म के गीतों को बहुत बेहतरीन ढंग से गाया था. यदि मैं उनके गायन के कुछ करीब भी पहुंच गयी, तो यह मेरे लिए आशीर्वाद ही होगा. इसलिए इस फिल्म के गीतों को अपनी आवाज देना मेरे लिए बहुत बड़ी जिम्मेदारी है. इस फिल्म की नृत्य निर्देशक सरोज खान जी ने तो मेरे द्वारा अब तक स्वरबद्ध किए गए दोनो गानों की काफी तारीफ की है.’’

खुश हुए दिलजीत दोसांज

फिल्म ‘‘उड़ता पंजाब’’ देखकर निकलने वाले दर्शक पंजाबी स्टार कलाकार दिलजीत दोसांज के अभिनय की तारीफ कर रहे हैं. सिर्फ पंजाबी ही नहीं बल्कि हर भाषा का दर्शक फिल्म ‘‘उड़ता पंजाब’’ में सिर्फ दिलजीत दोसांज की ही परफार्मेंस की तारीफ कर रहे हैं. दिलजीत दोसांज की यह पहली हिंदी फिल्म है. अपनी पहली ही हिंदी फिल्म के लिए मिल रही प्रशंसा से वह खुश व अति उत्साहित हैं.

दिलजीत कहते हैं-‘‘सच कहूं तो जब मैंने इस फिल्म में अभिनय  करना स्वीकार किया था, तो मेरे दिमाग में था कि यह फिल्म पंजाब की पृष्ठभूमि पर बन रही है, जिसमें हमें पंजाबी भाषा ही बोलना है. तो मेरे दिमाग में यही बात आयी थी कि मेरे पंजाबी फैन ही मुझे देखने के लिए ‘उड़ता पंजाब’ देखेंगे.

मैं यही चाहता था कि मेरे फैन मुझे हिंदी फिल्म में देखकर शर्मिंदा न हों. मेरी चाहत सिर्फ इतनी थी कि वह मुझे इस फिल्म में भी देखना पसंद करें. लेकिन मेरे लिए खुशी की बात है कि हिंदी भाषी दर्शक भी मेरी तारीफ कर रहे हैं और अब मेरे फैन बड़ी तेजी से बढ़ने वाले हैं. मैं तो इस बात से उत्साहित हूं कि अब इसका मुझे फायदा 24 जून को रिलीज होने वाली मेरी पंजाबी फिल्म ‘‘सरदारजी 2’’ को मिलेगा. जो कि मेरी सफलतम फिल्म ‘सरदारजी’ का सिक्वअल है. इस बार मैने इसमें दोहरी भूमिका निभायी है. इसी के साथ अब दूसरे पंजाबी कलाकारों के लिए हिंदी फिल्मों से जुड़ने के रास्ते भी खुल गए.’’

वास्तविक शिक्षकों के साथ फिल्माई गई ‘रफ बुक’

कभी फिल्म पत्रकार रहे फिल्म निर्देशक अनंत महादेवन अब शिक्षा जगत और एज्यूकेशन सिस्टम पर आधारित एक फिल्म ‘‘रफ बुक’’ लेकर आ रहे हैं. जिसमें तनिष्ठा चटर्जी ने फिजिक्स विषय की टीचर का किरदार निभाया है. अनंत महादेवन ने इस फिल्म को पूर्णरूपेण यथार्थ परक बनाने के लिए इस फिल्म को वास्तविक लाककेशन पर वास्तविक विद्यार्थियों व वास्तविक टीचरों के साथ फिल्माया है. खुद अनंत महादेवन कहते हैं-‘‘हमने फिल्म को पूरी तरह से वास्तविकता का माहौल देने के लिए महाराष्ट्र में पुणे षहर के एक स्कूल कैंपस में ही फिल्माया है. फिल्म के अंदर लोगों को पृष्ठभूमि में वास्तविक स्कूल, वास्तविक क्लासरूम, विद्यार्थी व टीचर नजर आएंगे.’’

आखिर क्यों चिंतित हैं ऋषि कपूर

फिल्म ‘‘उड़ता पंजाब’’ का ‘‘केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड’’ के संग जो विवाद हुआ और जिस तरह से यह फिल्म ‘‘मुंबई उच्च न्यायालय’’ के आदेश के बाद पारित होकर रिलीज हुई है, उससे तमाम फिल्मकार और वह कलाकार जो कि अभिनेता होने के साथ साथ निर्माता भी हैं, काफी खुश हैं. सभी अदालत के निर्णय का स्वागत कर रहे हैं. मगर हर मसले पर अपनी दो टूक स्पष्ट राय रखने वाले अभिनेता ऋषि कपूर अदालत के निर्णय का स्वागत करने के साथ साथ अपनी चिंता भी व्यक्त कर रहे हैं.

अभिनेता ऋषि कपूर ने इस मसले पर अपनी राय देते हुए कहा है-‘‘मैं अपनी फिल्म इंडस्ट्री के साथ ही रहना चाहूंगा. मुझे लगता है कि व्यापक परिदृश्य में न्याय मिला है. हमें याद रखना होगा कि अब 60 का दशक नहीं रहा, जब अनपढ़ लोगों की संख्या काफी थी. अब लोग बुद्धिमान हो गए हैं. समाज काफी बदल चुका है. पहलाज निहलानी को इस बात का ख्याल रखना चाहिए.’’

मगर अपनी चिंता जाहिर करते हुए ऋषि कपूर ने आगे कहा है-‘‘पर मैं चिंतित हूं. निर्मातागण इस आजादी का दुरूपयोग न करने लगे. मुझे यकीन है कि वह ऐसा जरुर करेंगे. क्योंकि यह भेड़चाल वाली इंडस्ट्री है. अब सभी इसी तरह के दृश्यों से भरपूर फिल्म बनाकर स्थिति का फायदा उठाना चाहेंगे. अब वह फिल्म की विषवस्तु से परे जाकर भी गलत चीजे फिल्म में पेश करेंगे.’’

अब स्लीवलैस पहनने में नो टेंशन

खूबसूरत दिखने के लिए महिलाएं अपने चेहरे और बालों पर विशेष ध्यान देती है पर अक्सर बाहें उपेक्षित नजर आती हैं. खासतौर पर गरमियों के मौसम में स्लीवलैस पहनने पर कोहनियों का रूखापन और कालापन अक्सर नजर आ ही जाता है. शरीर के इस भाग को जरूरत होती है नियमित देखभाल की. इस के लिए कुछ उपाय अजामाएं और ये उपाय बता रही हैं मेकअप ऐक्सपर्ट रेनू महेश्वरी.

उपाय

·       तेज धूप में जब भी बाहर निकलें लंबी स्लीव्स वाले कपडे़ पहन कर ही निकलें.

·       तेज धूप में निकलने से पहले सनस्क्रीन लोशन अच्छी तरह से पूरी बांहों में लगाएं.

·       तेज धूप में निकलना है भी तो आप स्लीवलैस के साथ स्किन कलर के ग्लव्स का इस्तेमाल करें. यह फुल और हाफ दोनों साइज में मार्केट में उपलब्ध हैं.

·       हाथों की वैक्सिंग नियमित रूप से कराएं, वैक्सिंग में आप नौर्मल वैक्सिंग न करा कर चौकलेट वैक्सिंग कराएं. इस वैक्सिंग के साथ स्क्रबिंग भी मौजूद होती है.

·       अगर नौर्मल वैक्सिंग करा भी रही हैं तो बाहों की नियमित स्क्रबिंग बहुत जरूरी है. बाजार में कई अच्छे स्क्रब मौजूद हैं. उन्हें गीले हाथों पर लगा कर हल्के हाथों से लगातार मसाज करें. मसाज करते समय स्क्रब को रगड़ें नहीं. इस से त्वचा रूखी हो जाती है और उस में रिंकल्स भी समय से पहले पड़ने लगती हैं.

·       नियमित रूप से रात को कोल्ड क्रीम या मौइश्चराइजर से बाहों की मसाज करना कभी न भूलें. इस से पूरे दिन की थकी हुई, प्रदूषण की मार झेल चुकी बांहों को न सिर्फ आराम पहुंचता है बल्कि वे कोमल भी बनती है.

·       बेडौल हाथ या अतिरिक्त चर्बी भी कम बदसूरती पैदा करती है. इसलिए हाथों की कुछ आसान सी एक्सरसाइज नियमित रूप से करना न भूलें.

घरेलू उपाय

·       अगर हाथों में टैनिंग हो गई है तो पूरी बाहों पर समयसमय पर ब्लीच करती रहें जरूरी नहीं कि आप पार्लर में जा कर ही ब्लीच करवाएं. यह आप घर पर भी बड़े आराम से कर सकती हैं.

·       नीबू प्राकृतिक ब्लीच का काम करता है. नीबू के रस में चीनी डाल कर पूरी बाहों की मालिश तब तक लगातार करें जब तक चीनी के दाने पूरी तरह से घुल न जाएं.

बच्चों की शख्सियत पर हावी ना हो सोशल मीडिया

पिछले दिनों चेन्नई के एक स्कूल ने एक फरमान निकला कि जिस बच्चे का सोशल मीडिया पर अकाउंट होगा, उस बच्चे का स्कूल में एडमिशन नहीं होगा. स्कूल मे एडमिशन  लेते समय एडमिशन फॉर्म पर आपके इस विषय की जानकारी देनी होगी. स्कूल ने बच्चों से सोशल नेटवर्किंग साइट पर प्रोफाइल ना बनने की हिदायत दी है साथ ही जब तक बच्चे स्कूल में हैं उनके प्रोफाइल बनने पर रोक भी लगा दी गई है .दरअसल इन दिनों किशोरवय बच्चों के बीच फेसबुक ,इन्स्टाग्राम  जैसी सोशल साइट्स की लोकप्रियता में काफी वृद्धि दर्ज की गई है. लेकिन इन मीडिया मंचों पर 7-8 साल के बच्चों की यूजर प्रोफाइल मिलना और अधिक चौंकाने वाली बात है.

इन सोशल साइट्स पर उनकी व्यस्तता देख कर ऐसा लगने लगा है कि ये लोग इसके बिना  बिलकुल रह ही नहीं सकते, बच्चे जोकि सोशल मीडिया का काफी उपयोग करते हैं, उनमें सुबह उठते ही और रात को सोने जाने से पहले इन वेबसाइटों को एक्सेस करने की आदत पड़ जाती है. घंटों तक औनलाइन रहने के इस आदत के कारण बच्चों को अपने शौक को पूरा करने अथवा खुद का आत्मविश्लेषण करने का समय नहीं मिल पाता. बच्चों के तनावग्रस्त होने का यह भी एक प्रमुख कारण है. इसके अतिरिक्त, यह भी माना जाता है जो बच्चे आमने-सामने बात करने में शर्माते हैं, वे सोशल मीडिया के जरिये लोगों के साथ आसानी से बात कर सकते हैं. हालांकि, वास्तविकता में वे निजी तौर पर लोगों से बात करने में और अधिक असहजता महसूस करने लगते हैं और फिर इसे पूरी तरह से नजअंदाज करना शुरू कर देते हैं.

इसके अतिरिक्त सोशल मीडिया बच्चों के आत्मसम्मान पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है. जब बच्चे सोशल मीडिया पर अपने दोस्तों द्वारा शेयर किये गये पिक्चर अथवा स्टेटस मैसेजेज देखते हैं, वे अपनी उपलब्धियों की तुलना उनके दोस्तों की उपलब्धियों से करने लग जाते हैं. इससे उनकी जिंदगी में नकारात्मकता का भाव पैदा होता है और वे सुस्त रहने लगते हैं.

उदाहरण के लिए, यदि एक बच्चा किसी स्थान पर छुट्टी मनाने के लिए जाना चाहता है, पर किसी कारण वहां नहीं जा सकता और उसका एक दोस्त उसी जगह पर ली गई अपनी खुद की तस्वीरें अपलोड कर देता है तो वह बच्चा काफी निराश महसूस करने लगता है. बच्चों की पिक्चर अथवा प्रोफाइल पर मिलने वाले लाइक्स और कमेंट्स की संख्या कम होने से उनका आत्मविश्वास कमजोर पड़ने लगता है. क्योंकि वे इन लाइक्स और कमेंट्स को अपनी शख्सियत की अहमियत से जोड़ लेते हैं.सोशल नेटवर्किंग पर एक्टिव ये बच्चे अपनी असल जिंदगी से कट जाते हैं और कोई भी ऐसी बात जो उनके मन मुताबिक न हो उनके दिल को ठेस पहुंचाती है और उन्हे दिली और दिमागी तौर पर डिस्टर्ब कर देती है.

एक शोध में भी पाया गया है कि 12 से 15 साल के हर तीन में से एक से ज़्यादा बच्चों की नींद हफ़्ते में कम से कम एक बार टूट जाती है. शोध के मुताबिक बच्चों की नींद टूटने की वजह सोशल मीडिया का इस्तेमाल है. कार्डिफ़ विश्वविद्यालय की  शोध टीम ने पाया कि हर पांच बच्चों में से एक से ज़्यादा ने रात में उठ कर सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया और इसके चलते अगले दिन स्कूल में उन पर थकान हावी रही.

हालांकि, इसका एकमात्र समाधान यह नहीं है कि बच्चों को पूरी तरह से सोशल मीडिया से दूर कर दिया जाये, लेकिन पैरेंट्स होने के नाते आपको उनके यूसेज टाइम को सीमित करने और सोशल मीडिया पर उनकी गतिविधियों पर नजर रखने की जरूरत है. मीनल अरोड़ा (एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर ऑफ़ शेमरोक प्रीस्कूल्स एंड डी फाउंडर डायरेक्टर ऑफ़ शेमफोर्ड स्कूल्स) के अनुसार सोशल मीडिया बच्चों के कॉन्फिडेंस और पर्सनेलिटी को नकारात्मक रूप से प्रभावित न करे इसके लिए  पेरेंट्स अपने बच्चों को यह समझायें कि सोशल मीडिया वेबसाइइट्स पर मिलने वाले कमेंट्स अथवा लाइक्स से कोई फर्क नहीं पड़ता, असली जिंदगी में उनके द्वारा की गई कड़ी मेहनत ही उन्हें भविष्य में कामयाबी अथवा नाकामी की राह पर ले जाती है.

बच्चों को समझाएं कि  अपनी पर्सनल फोटो आदि को अपलोड न करें. अकसर नाबालिग बच्चे अपनी गलत जानकारी देकर इन अकाउंट्स को खोल लेते हैं. बच्‍चे  को फेक अकाउंट बनाने से रोंके. उन्हें सोशल साइट्स की सही अहमियत बताएं कि सोशल नेटवर्किंग साइट्स लोगों से मिलने और जुड़ने का माध्‍यम है लेकिन इसे जिंदगी का हिस्‍सा न बनायें. उन्हें बताएं कि वे इन साइट्स का प्रयोग केवल नए लोगों से जुड़ने या अपनी नेटवर्किंग के दायरे को बढ़ाने के लिए न  करें .बच्‍चे के साथ दोस्‍ती कीजिए, उनकी फ्रेंडलिस्‍ट में खुद को शामिल कीजिए, और उनके हर वक्‍त के अपडेट से अवगत होते रहिए.

रियो ओलंपिक: प्रमोशन के लिए सचिन का नया फंडा

रियो ओलंपिक का काउंट डाउन शुरू हो चुका है. 5 अगस्त से शुरू होने वाले रियो ओलंपिक के लिए भारतीय खेमे के गुडविल एम्बैसडर बने बॉलीवुड सलमान खान सोशल मीडिया के जरिए एथलीटों का परिचय करा रहे हैं. मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर को भी गुडविल एम्बैसडर बनाया गया है और वो अपनी तरीके से एथलीटों का परिचय करा रहे हैं.

सलमान एथलीटों का एक कार्ड शेयर कर रहे हैं, जिसपर उनकी उपलब्धियां लिखी हैं और साथ ही उनकी तस्वीरें हैं लेकिन तेंदुलकर बिल्कुल अलग फंडे के साथ मैदान में उतरे हैं. रियो ओलंपिक के कैंपेन के लिए तेंदुलकर अपने फेसबुक पेज पर एक वीडियो शेयर करके एथलीटों का परिचय करा रहे हैं.

इस वीडियो की खास बात है कि इसमें उस एथलीट की एक खास कहानी छुपी है. अभी तक विनेश फोगट और मनिका बत्रा का वीडियो शेयर किया जा चुका है.

स्टूडेंट्स के लिए मददगार है ड्रेगन डिक्टेशन

परीक्षा के लिए नोट्स बनाने में ड्रेगन डिक्टेशन एप्प स्टूडेंट्स की काफी मदद कर सकता है. इस इस्तेमाल करना भी काफी आसान है. ड्रेगन डिक्टेशन एप्प वर्ड को ट्रांसक्राइब्ड करता है. अगर स्टूडेंट्स सोचते हैं कि वे तेजी से टाइप कर सकते हैं, तो यह एप्प आपको सपोर्ट करता है.

इसके अलावा, कई बार ऐसा भी होता है कि क्लास में प्रोफेसर या फिर टीचर काफी तेजी से लेक्चर देते हैं और आप उसे नोट नहीं कर पाते. ऐसी स्थिति में भी यह एप्प आपके लिए उपयोगी साबित हो सकता है.

इसमें वॉयस रेकग्निशन सॉफ्टवेयर है, जो स्पीच को टेक्स्ट में कनवर्ट कर देता है. इस एप्प को आइओएस यूजर फ्री में डाउनलोड कर सकते हैं. ड्रेगन डिक्टेशन एप्प की मदद से आप नोट्स की कॉपी कर उन्हें दूसरों के साथ भी शेयर कर सकते हैं.

अब हर घर होगा रोशन

अब बिजली को लेकर कोई भी परेशानी हो तो आपके लिए शिकायत करना आसान होने जा रहा है. पॉवर मिनिस्ट्री ने इसके लिए 4 डिजिट का हेल्पलाइन नंबर 1912 जारी किया है. पूरे देश में कहीं से भी इस नंबर पर शिकायत की जा सकेगी. सरकार का दावा है कि शिकायत मिलने के बाद जल्द से जल्द इसका निपटारा किया जाएगा.

एक कॉल पर एक ही शिकायत

1912 पर एक कॉल से एक ही शिकायत दर्ज कराई जा सकती है. इस नंबर को स्टेट कंट्रोल रूम से जोड़ा गया है. सभी शिकायतों को रिकॉर्ड किया जाएगा. इसके बाद शिकायत दूर करने के कदम उठाए जाएंगे. किसी भी तरह की गड़बड़ी को ठीक करने के लिए जल्द से जल्द रिपेयर करने वालों की टीम आपके एरिया में पहुंच जाएगी. शुरू में बिजली के ट्रांसफार्मर जलने, बिजली के तार टूटने या इस तरह की अन्य समस्याओं की शिकायत दर्ज करा सकेंगे.

मार्च 2019 तक मिलेगी 24 घंटे बिजली

ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल का कहना है कि मार्च 2019 तक देश में रहने वाले सभी लोगों को 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराई जाएगी. इस मसले पर 2 दिन सभी राज्यों के साथ मीटिंग हुई है और नक्सल प्रभावित राज्यों को छोड़कर सभी राज्य इसके लिए तैयार हो गए हैं.

31 अगस्त 2016 तक सभी गांवों में बिजली

पीयूष गोयल ने कहा है कि गांवों के विद्युतीकरण का काम तेजी से चल रहा है. 31 मार्च 2016 तक उन सभी गांवों में बिजली पहुंचाने का काम पूरा कर लिया जाएगा, जहां अब तक बिजली नहीं पहुंची है. अलग-अलग राज्य इसके लिए अगले 30 दिनों के अंदर कॉन्ट्रैक्ट देने का काम पूरा कर लेंगे. वहीं 1 मई 2017 तक देश के 18,452 गांवों में 100 फीसदी बिजली की सप्लाई शुरू हो जाएगी.

मीटर से नहीं हो सकेगी छेड़छाड़

गोयल ने आगे बताया कि आने वाले दिनों में सारे मीटरों को स्मार्टमीटर में बदल दिया जाएगा. इसके लिए भी सभी राज्य तैयार हो गए हैं. इन मीटर से किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है. उन्होंने जानकारी दी कि स्मार्ट मीटर के दाम सरकार ने 60 फीसदी तक कम किए हैं और अब इसकी कीमत 8 हजार रुपए की बजाय 3,223 रुपए तक आग गए हैं.

…तो ओलंपिक में नहीं खेलेगी रूसी एथलेटिक्स टीम

रूस की एथलेटिक्स टीम रियो ओलंपिक में भाग नहीं ले सकेगी. आईएएएफ ने रूस की ट्रैक और फील्ड टीम पर रियो डि जिनेरियो ओलंपिक खेलों के लिए अपने प्रतिबंध को कायम रखा है.

रूस के खेल मंत्री ने कहा कि उन्हें ट्रैक एवं फील्ड की संचालन संस्था का फैसला मिल चुका है, जिसमें कहा गया है कि देश ने प्रतिबंध हटाने के लिए कुछ नहीं किया. रूसी मंत्री ने कहा कि वह ओलंपिक खेलों से पूरी टीम के प्रतिबंध के इस फैसले से काफी निराश हैं.

उन पर यह निलंबन पिछले साल नवंबर में लगा था. विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी आयोग की रिपोर्ट आने के बाद यह प्रतिबंध लगाया गया था, जिसमें रूस की ट्रैक एवं फील्ड टीम पर राज्य द्वारा प्रायोजित भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया था.

दरअसल डोपिंग मामलों की जांच करने वाली एजेंसी वाडा की रिपोर्ट के बाद से ओलंपिक में रूसी टीम की भागीदारी पर संशय के बादल मंडराने लगे थे. विश्व डोपिंग निरोधक एजेंसी (वाडा) ने खुलासा किया था कि इस साल रूसी खिलाड़ियों के डोप टेस्ट करने के सैकड़ों प्रयास नाकाम रहे. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, डोप टेस्ट करने वाले अधिकारियों को रूसी सुरक्षाबलों से धमकियां भी मिली थी, जबकि खिलाड़ी विभिन्न तकनीकों के सहारे डोपिंग टेस्ट से बचते रहे.

डोप टेस्ट से बचते रहे थे कई एथलीट

वाडा की रिपोर्ट में कहा गया था कि 15 फरवरी से 29 मई तक 736 से अधिक टेस्ट विभिन्न कारणों से रद्द करने पड़े. रिपोर्ट में साथ ही कहा गया कि सैन्य शहरों में डोप टेस्ट करने के उनके प्रयास नाकाम रहे, क्योंकि उन्हें देश से बाहर निकालने की धमकियां भी दी गई.

रिपोर्ट में कहा गया कि 27 फरवरी को राष्ट्रीय पैदलचाल चैम्पियनशिप के दौरान 15 खिलाड़ियों ने या तो भाग नहीं लिया, या नाम वापिस ले लिया या अयोग्य करार दिये गए. वहीं एक अन्य खिलाड़ी रेस के दौरान स्टेडियम से रफूचक्कर हो गया और फिर नहीं मिला.

एक अन्य घटना में आइस हॉकी विश्व चैम्पियनशिप के दौरान रूस की पूरी अंडर 18 टीम को अंडर 17 टीम से बदल दिया गया, जिसकी वजह प्रतिबंधित दवा मेल्डोनियम का इस्तेमाल है.

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