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क्रिकेट खेलने के बाद अब पहलवानी करेंगे सुशांत

भारतीय रेसलर दिलीप सिंह राणा यानी महाबली खली के जीवन पर बौलीवुड में फिल्म का निर्माण होगा. एक रिपोर्ट के मुताबिक फौक्स स्टार स्टूडियोज ने इसके लिए द ग्रेट खली के जीवन पर फिल्म बनाने के लिए राइट्स भी खरीद लिए हैं. फिल्म में मामूली आदमी दिलीप सिंह के खली बनने की जर्नी दिखाने की योजना है. जिस बौलीवुड एक्टर को खली की भूमिका के लिए अप्रोच किया गया है उन्होंने इससे पहले एक स्पोर्ट्स पर्सन के जीवन पर बनी फिल्म में दमदार अभिनय कर चुके हैं.

खली की भूमिका के लिए सुशांत सिंह राजपूत को अप्रोच किया गया है. सुशांत इस वक्त अभिषेक कपूर के निर्देशन में ‘केदारनाथ’ के लिए शूटिंग कर रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक खली का रोल करने के लिए अप्रोच किया गया है पर अभी उन्होंने हामी नहीं भरी है. अगर सुशांत ने खली को साइन किया तो यह उनके करियर की दूसरी बायोपिक होगी.

इससे पहले वो महेंद्र सिंह धोनी की बायोपिक में नजर आए थे. ये फिल्म बौक्स औफिस की बड़ी हिट थी. उनके काम को सराहा गया था. हालांकि कद-काठी के लिहाज से सुशांत खली जैसे नहीं दिखते.

इस बारे में कई ट्रेड अनेलिस्ट्स का कहना है कि, ‘धोनी- द अनटोल्ड स्टोरी में सुशांत धोनी जैसे दिखते हैं. उनका चलना उठना बैठना सब धोनी जैसा लगता है. वहीं खली और सुशांत में कोई समानता नजर नहीं आती. चाहे वह वजन को लेकर हो, लंबाई को लेकर हो या बौडी को लेकर. यह मुश्किल होगा क्योंकि बौलीवुड में द ग्रेट खली जैसा कोई नहीं है.’

सुत्रों के अनुसार, ‘खली के बारे में ज्यादातर लोग यही जानते हैं कि वह WWE के पहलवान हैं. इसके अलावा उनका स्ट्रगल, उनकी सक्सेस स्टोरी है जो अनटोल्ड है. वह इस फिल्म के जरिए वह सबके सामने आएगी. वह पंजाब पुलिस के एक औफिसर भी रह चुके हैं. वहीं उन्होंने WWE के लिए काफी स्ट्रगल किया है. इस फिल्म की कहानी उनकी जिंदगी पर आधारित होगी.’

वैसे खली कई फिल्मों और टीवी प्रोग्राम में नजर आ चुके हैं. बौलीवुड की दो फिल्मों कुश्ती और रामा द सेवियर में उन्होंने छोटी भूमिकाएं की हैं. वो बिग बौस जैसे शो में नजर आ चुके हैं.

खली का जन्म हिमाचल प्रदेश के धिराइना में एक साधारण परिवार में हुआ था. उनके पिता का नाम ज्वाला राम और माता का नाम तांडी देवी है. 2002 में उन्होंने हरमिंदर कौर से शादी की थी. उनका शरीर काफी भारी-भरकम है.

खबरों की मानें तो एक दिन की उनकी खुराक एक फैमिली की खुराक के बराबर है. एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि वो नाश्ते में 10 से 15 अंडे, दूध खाते हैं. जबकि दोपहर के खाने में दाल-रोटी के साथ चिकन और चावल खाना पसंद करते हैं. शाम उनके खाने में अनिवार्य रूप से चिकन शामिल रहता है.

इस फिल्म में दिखेगा राम रहीम और हनीप्रीत का पूरा कारनामा

डेरा की तलाशी और यहां से खुले कई राज अभी पूरी तरह साफ भी नहीं हुए थे कि अब इस पूरे प्रकरण पर फिल्‍म बनाने का एलान हो गया है.

जल्‍द ही डेरा सच्चा सौदा चीफ गुरमीत राम-रहीम पर फिल्म बनेगी. फिल्‍म की कास्टिंग के साथ ही इसका टाइटल भी तय हो गया है. ‘अब होगा इंसाफ’ टाइटल की इस फिल्‍म की शूटिंग दिल्‍ली में शुरू हो चुकी है, जिसका निर्देशन आशुतोष मिश्रा कर रहे हैं.

इस फिल्‍म में राखी सावंत हनी प्रीत का किरदार निभाने के साथ पर्दे पर आइटम नंबर भी करती नजर आएंगी जबकि रजा मुराद को राम रहीम के रोल के लिए चुना गया है. फिल्‍म में ‘बिग बास’ कंटेस्‍टेंट यानी एजाज खान इनवेस्टिगेशन आफिसर बने नजर आएंगे.

फिल्म की कहानी राम रहीम के रंगीन जीवन और आपराधिक कहानियों पर आधारित होगी. जिसमें उनके राकस्टार बनने से लेकर जेल जाने तक की कहानी होगी. हनीप्रीत के साथ उसके रिश्तों को भी फिल्म में दिखाया जाएगा. इसका मतलब है कि अब राम रहीम के कारनामों को बड़े पर्दे पर उतारने की पूरी तैयारी हो चुकी है. वैसे भी राम रहीम का जीवन बौलिवुड फिल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं है.

बता दें कि डेरा सच्‍चा सौदा प्रमुख राम रहीम को सीबीआई कोर्ट ने हाल ही में 20 साल की सजा सुनाई है. उन्‍हें डेरा की साध्वियों पर रेप के आरोप में दोषी पाया गया है. वह इस समय हरियाणा की रोहतक जेल में बंद है. वहीं राम रहीम को दोषी करार दिए जाने के बाद हनीप्रीत ने फतेहाबाद जाने की बात एक चिट्ठी में लिखी थी, लेकिन उसके बाद से वह गायब है. पुलिस बिहार, राजस्‍थान, नेपाल समेत कई इलाकों में इसकी तलाश कर रही है. आपको बता दें कि हरियाणा पुलिस की मोस्ट वान्टेड लिस्ट में हनीप्रीत सिंह का नाम सबसे ऊपर है.

दुनिया के महान कप्तानों से आगे निकले कोहली, लौयड और पौंटिंग को पीछे छोड़ा

भले ही भारतीय कप्तान विराट कोहली की आस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज में निजी शुरुआत अच्छी न रही हो, लेकिन हार्दिक पंड्या (83) और महेंद्र सिंह धोनी (79) की बदौलत भारत ने पहले वनडे में जीत हासिल की. चेन्नई के चेपौक स्टेडियम में आस्ट्रेलिया को डकवर्थ लुइस नियम के तहत 26 रनों से मात देने के बाद बतौर कप्तान कोहली के रिकौर्ड में और भी बड़ा सुधार हुआ है.

35 से ज्यादा मैचों में कप्तानी करने वाले कप्तानों जैसे वेस्टइंडीज के क्लाइव लौयड और आस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पौन्टिंग की जीत प्रतिशत देखें तो कोहली इन दोनों से कहीं आगे निकल चुके हैं. चेन्नई वनडे में मिली जीत के साथ कोहली की कप्तान में भारत 36 में से 28 मैच जीत चुका है. 7 में उसे हार मिली है और एक मुकाबला बेनतीजा रहा. इसका मतलब अब कोहली की जीत का प्रतिशत 77.77 है. इसमें वह मैच शामिल नहीं है, जिसका कोई नतीजा नहीं निकला.

इस खेल के महानतम कप्तानों जैसे रिकी पौन्टिंग और क्वाइव लौयड भी विराट कोहली से पिछड़ गए हैं. लौयड की जीत का प्रतिशत 76.19 और रिकी पौन्टिंग का 71.73 है. क्लाइव लौयड ने 1975 से लेकर 1985 के तक वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम की कमान संभाली थी, जिसे उसका स्वर्णकाल कहा जाता है.

इस दौरान उन्होंने 64 मैच जीते, 18 हारे, एक मैच टाई रहा और एक का कोई नतीजा नहीं निकल पाया. वहीं रिकी पौन्टिंग ने 230 मैचों में कप्तानी की है, जिसमें से 165 में टीम को जीत मिली है और 51 में हार. 2 मैचों का कोई नतीजा नहीं निकल पाया और अन्य दो टाई रहे.

यह भी देखना अहम है कि लौयड और पौन्टिंग की तुलना में विराट कोहली ने इतने मैच भी नहीं खेले हैं, जिसका मतलब है कि अगर विराट की कप्तानी में टीम हारती गई तो ये आंकड़े गिर भी सकते हैं. लौयड और पौन्टिंग ने कई वर्षों तक विपक्षी टीमों को हराकर विश्व क्रिकेट में अपनी धाक जमाई. लेकिन फिलहाल कोहली ने लौयड और पौन्टिंग को पीछे छोड़ दिया है.

IPO में कर रहे हैं निवेश की प्लानिंग तो SBI Life है बेहतर विकल्प

अगर आप प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) में निवेश की प्लानिंग कर रहे हैं तो जीवन बीमा क्षेत्र की कंपनी एसबीआई लाइफ (SBI Life) विकल्प के तौर पर आ चुकी है. एसबीआई लाइफ 20 सितंबर यानी आज आईपीओ के साथ पूंजी बाजार में उतर चुकी है.

आईपीओ के जरिए कंपनी को 8,400 करोड़ रुपये जुटाये जाने की उम्मीद है. आईपीओ का प्राइस बैंड 685-700 रुपये प्रति इक्विटी शेयर निर्धारित किया गया है. प्रवर्तकों द्वारा कुल 12 करोड़ शेयरों की ब्रिकी की जाएगी. इसके बाद भारतीय स्टेट बैंक की हिस्सेदारी इसमें 70 प्रतिशत से घटकर 62.1 प्रतिशत, कार्डिफ की हिस्सेदारी 26 से 22 प्रतिशत और केकेआर एंड कंपनी तथा सिंगापुर की टेमसेक होल्डिंग्स की हिस्सेदारी 3.9 प्रतिशत रह जाएगी.

एसबीआई लाइफ के अध्यक्ष (परिचालन, आईटी और अंतर्राष्ट्रीय कारोबार) आनंद पेजवर ने कहा, ‘हमें नये कारोबार के प्रीमियम में मौजूदा 39 प्रतिशत की वृद्धि दर जारी रहने की उम्मीद है.’ देशभर में स्टेट बैंक की 24,000 शाखाएं हैं जो कि एसबीआई लाइफ के उत्पादों का वितरण करतीं हैं. इनमें से 30 प्रतिशत शाखाओं को सक्रिय शाखा के तौर चिन्हित किया गया है. बैंक की ऐसी शाखाएं जो नये बीमा व्यावसाय के मामले में न्यूनतम बेंचमार्क को हासिल कर लेती हैं उन्हें सक्रिय शाखा की श्रेणी में रखा जाता है.

एसबीआई लाइफ, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) तथा बीएनपी परिबा कार्डिक का संयुक्त उद्यम है. आईपीओ में एसबीआई अपनी 8 प्रतिशत हिस्सेदारी और कार्डिफ अपनी 4 प्रतिशत हिस्सेदारी की ब्रिकी करेगा.

वहीं, गैर-जीवन बीमा कंपनी आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी के आईपीओ को बोली के दूसरे दिन 98 प्रतिशत अभिदान मिला. आईपीओ के जरिए बीमा कंपनी को 5,700 करोड़ रुपये जुटाने की उम्मीद है.

नेशनल स्टौक एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, कुल 6,16,66,740 शेयरों के मुकाबले 6,01,7,028 शेयरों के लिए बोली प्राप्त हुयी. योग्य संस्थागत खरीदारों की श्रेणी में 2.37 गुना, गैर संस्थागत निवेशकों की श्रेणी में 10 प्रतिशत, खुदरा श्रेणी में 62 प्रतिशत का अभिदान मिला.

आईओएस 11 में अपने फोन को ऐसे करें अपडेट, ये होंगे खास फीचर्स

दुनिया की सबसे बड़ी फोन कंपनी ऐपल ने WWDC 2017 में आईफोन और आईपैड के लिए अपने नए औपरेटिंग सिस्टम आईओएस 11 की घोषणा की है. ये अपडेट भारत के यूजर्स के लिए भी उपलब्ध करा दिया गया है. हर देश में अलग अलग समय से अपडेट मिलेगा. इस साल के अंत तक लोगों को यह नया औपरेटिंग सिस्टम मिल जाएगा. अपडेट लगभग 2.03GB का है, इसलिए वाई फाई का उपयोग बेहतर होगा.

अगर आपके पास आईफोन या आईपैड है तो आपको यह अपडेट मिलेगा. लेकिन इसके लिए आपको थोड़ी तैयारी कर लेनी चाहिए. क्योंकि आईओएस 11 एक बड़ा अपडेट है और यह आपकी डिवाइस को बदल देगा.

कैसे करें आईओएस 11 में अपडेट

बेहतर तरीका ये है कि आप सेटिंग्स में जाकर जेनरल पर क्लिक करें. यहां से सौफ्टवेयर अपडेट पर टैप करें. आपको अपडेट का औप्शन दिखेगा यहां से अपडेट कर सकते हैं.

दूसरा तरीका ये है कि अपने आईफोन और आईपैड को कंप्यूटर से कनेक्ट करें और iTunes सेटअप करें. यहां आपको औप्शन मिलेगा अपडेट कर लें.

कौन से डिवाइस में आईओएस 11 का अपडेट मिलेगा

आईपैड Air, आईपैड Air 2, आईपैड Pro, आईपैड mini 2, आईपैड mini 3, आईपैड mini 4, iPod touch 6th, आईफोन 5s, आईफोन SE, आईफोन 6/6 Plus, आईफोन 6s/6s Plus, आईफोन 7/7 Plus.

इन डिवाइस में नहीं मिलेगा आईओएस 11 का अपडेट

आईफोन 5, आईफोन 5c और आईपैड 4 में आईओएस 11 का अपडेट नहीं मिलेगा.

बैकअप लेना न भूलें

अपडेट करने से पहले अपनी डिवाइस का बैकअप बना लें. इसे कंप्यूटर या iCloud पर बना सकते हैं. अगर कुछ गलती हुई और डेटा खत्म हो गया तो आपको परेशान नहीं होना होगी. बैकअप लेने के लिए सेटिंग्स में जा कर iCloud पर क्लिक करें यहां बैकअप औप्शन मिलेगा जहां क्लिक कर सकते हैं.

ऐपल ने वर्ल्ड वाइड डेवेलपर कान्फ्रेंस के दौरान आईफोन और आईपैड के लिए नया औपरेटिंग सिस्टम आईओएस 11 पेश किया है. इसमें कई बदलाव हैं जिसमे कुछ आपको पसंद आ सकते हैं और शायद कुछ नहीं भी पसंद आ सकते हैं.

कैमरा और फोटो फीचर

अब लाइव फोटो को पहले से बेहतर किया गया है. अब लाइव फोटो में से बेस्ट शौट को काट कर उसे मुख्य फोटो के तौर पर यूज कर सकते हैं. पोर्टेट मोड इमेज को औप्टिकल इमेज स्टेब्लाइजेशन के साथ और भी बेहतर किया जा सकता है. नया औप्शन लूप और बाउंट इफेक्ट से जुड़ा है जो फोटोज को दिलचस्प बनाएगा. सबसे खास बाद कंपनी ने एक नई टेक्नोलाजी पेश किया है हाई एफिशिएंसी इमेज फार्मेट. इससे आईफोन 7 और आईफोन 7 Plus से क्लिक की गई फोटो का साइज कम किया जा सकेगा.

सिरी अब पहले से बेहतर

सिरी को नई वौइस मिली है जिससे इसका साउंड ज्यादा नैचरल लगता है. कंपनी ने इसके लिए मशीन लर्निंग और आर्टिफिशल इंटेलिजेंस पर काम किया है. इसके चलते आपको नए सिरी में टेंपो, पिच में बदलाव महसूस होगा. इसके अलावा इसमें नया ट्रांसलेशन फीचर जोड़ गया है जिसकी मदद से यूजर इंग्लिश शब्द को दूसरी लैंग्वेज में ट्रांसलेट कर सकता है.

ऐपल पे का दायरा बढ़ा

Apple Pay के जरिए अब यूजर्स एक दूसरे को मैसेज में ही पैसे भेज सकेंगे. मैसेज में एक नया औप्शन होगा जिसे सेल्कट करना होगा. सीरी को बोल कर भी पैसे सेंड किए जा सकते हैं. भेजे गए पैसे को यूजर्स स्टोर्स में खरीदारी करने के लिए यूज कर सकते हैं या चाहें तो उसे अपने बैंक अकाउंट में ट्रांसफर भी कर सकते हैं.

कार चलाते वक्त डू नौट डिस्टर्ब

आईओएस 11 में आपको आईफोन में औटोमेटिक ड्राइविंग मोड मिल जाएगा. जब आप कार में होंगे तो फोन औटोमेटिक इसका पता लगाके ‘डू नौट डिस्टर्ब वाइल ड्राइविंग मोड’ को इनेबल्ड कर देगा. इसके बाद सभी नोटिफिकेशंस औटोमेटिक साइलेंस मोड में चले जाएंगे. यहां तक की स्क्रीन पर भी आपको कोई इनकमिंग नोटिफिकेशन नहीं दिखेगा. अगर आप ड्राइविंग नहीं कर रहे हैं तो आप एक टच से मोड को डिसेबल कर सकते हैं.

नया कंट्रोल सेंटर

आईओएस 11 में यह सबसे महत्वपूर्ण बदलाव है. कंपनी ने कंट्रोल सेंटर को बिल्कुल नए अवतार में पेश करते हुए इसे कस्टमाइज्ड कर दिया है. आप अपने हिसाब से आइकन्स में बदलाव कर सकते हैं. कंट्रोल सेंटर को स्वाइप डाउन करने पर नए नोटिफिकेशंस मिलेंगे और डबल स्वाइप करने पर आप सभी नोटिफिकेशंस देख सकते हैं.

औग्मेंटेड रिएलिटी(AR)

अब डेवेलपर आईफोन और आईपैड के कैमरा में हाई क्वालिटी औग्मेंटेड रिएलिटी एक्सपीरिएंस के लिए नए टूल ला सकेंगे. कंपनी ने इवेंट के दौरान एक दिलचस्प वार डेमोंस्ट्रेशन के जरिए औग्मेंटेड रियलिटी एक्सपीरिएंस के बारे में बताया जिसने काफी तालियां बटोरीं.

इन सब बड़े बदलाव के अलावा ये छोटे बदलाव भी आपको लिए काफी फायदेमंद हो सकते हैं.

– ऐप स्टोर को पूरी तरह से बदल दिया गया है. लुक और फील नया है.

– ऐपल मैप्स में अब मौल्स के फ्लोर प्लान के बारे में भी जानकारी मिलेगी.

– ऐपल म्यूजिक को पहले से बेहतर किय गया है. सब्सक्राइबर्स अब म्यूजिक प्रोफाइल बना कर फ्रेंड्स को फौलो कर सकते हैं.

– ऐपल न्यूज में भी बदलाव किए गए हैं. अब रीडर्स को स्टोरी पर्सनलाइज करने में आसानी होगी.

– वन हैंड कीबोर्ड मोड से आईफोन में टाइपिंग पहले से आसान हो सकती है. नया QuickType keyboard ऐड किया गया है, ये आईपैड के लिए है जो इसे खास बनाने के लिए लाया गया है.

नहीं चलेंगे 32 बिट के ऐप

आईओएस 11 अपडेट करते ही आईफोन 32-बिट के एप्लिकेशंस को सपोर्ट नहीं करेगा. इस में कई जरूरी एप्लीकेशन के साथ-साथ गेम्स भी शामिल हैं. ये सभी ऐप और गेम आईफोन में तब तक काम नहीं करेंगे जब तक यूजर को इनका लेटेस्ट अपडेट नहीं मिल जाता. बताते चलें कि 32-बिट की 1,87,000 एप्स ऐप स्टोर में मौजूद हैं, जो कि आईफोन की सभी एप्स का 8% है. अगर आप 32-बिट एप्स के पैटर्न पर ध्यान दें तो सेंसर टावर के मुताबिक ऐप स्टोर में मौजूद 32-बिट एप्स में से 38,619 गेम्स ऐप हैं.

इस शख्स के लिए बदला था दिव्या भारती ने अपना नाम और धर्म

बौलीवुड एक्ट्रेस दिव्या भारती को तो आप जानते ही होंगे. उन्हे 1992 में दीवाना फिल्म के लिये बेस्ट एक्ट्रेस का पुरस्कार भी मिल चुका है. दिव्या की खूबसूरती  के सभी कायल थे.

दिव्या ने सिर्फ 16 साल की उम्र में ही अपनी फिल्मी करियर की शुरुआत कर दी थी. बताया जाता है कि दिव्या हीरोईन नहीं बनना चाहती थी, लेकिन पढ़ाई से छुटकारा पाने के लिये वे इस फिल्मी दुनिया से जुड़ी थीं.

हालांकि 14 साल की उम्र से ही दिव्या के पास फिल्मों में काम करने के लिए औफर आने लगे थे. वह फिल्मी दुनिया के लिए बिल्कुल नई थी. जितनी भोली भाली दिव्या दिखने में लगती उनका व्यवहार भी उतना ही सादा था. यहां तक कि उन्हें फिल्म बनाने वाले कई डायरेक्टर्स के नाम तक मालूम नहीं थे. दिव्या भारती अपने करियर में 14 बौलीवुड फिल्में कर चुकी थीं.

इस दौरान उनकी नजदीकियां फिल्म मेकर साजिद नाडियाडवाला से बढ़ीं और उन्होंने साल 1992 में उनसे शादी कर ली थी. उस वक्त दिव्या भारती की उम्र सिर्फ 18 साल की थीं. दिव्या और साजिद को सबसे पहले मिलाने का काम गोविंदा ने किया था. उस दौरान गोविंदा और दिव्या भारती अपनी फिल्म ‘शोला और शबनम’ की शूटिंग कर रहे थे. साजिद गोविंदा के अच्छे दोस्त थे जिस वजह से वह उनसे मिलने अक्सर फिल्मी सेट पर आ जाया करते थे. कहा जा सकता है कि गोविंदा ने ही इन दोनों के प्यार की नींव रखी.

धीरे धीरे इन दोनों की मुलाकतें बढ़ने लगी. एक वक्त तो ऐसा आया जब गोविंदा का नाम लेकर साजिद नाडियाडवाला दिव्या भारती से मिलने जाने लगे. उस समय दिव्या की उम्र महज 16 साल की थी और जैसे ही दिव्या 18 साल की हुई उन्होंने साजिद पर शादी के लिए ख्वाब बनाना शुरू कर दिया. हालांकि दिव्या के घरवालों को यह रिश्ता मंजूर नहीं था लेकिन प्यार के खातिर दिव्या ने अपने माता पिता का भी विरोध करना शुरू कर दिया.

20 मई, 1992 को हेयर ड्रेसर संध्या और उनके पति की मौजूदगी में दिव्या साजिद की शादी हुई थी. साजिद के लिए दिव्या ने अपना धर्म भी बदल लिया था. उन्होंने अपना नाम बदल कर दिव्या से सना कर लिया था लेकिन इस बात को उन्होंने कभी मीडिया के सामने नहीं कबूला. साजिद नहीं चाहते थे कि इस बात का दिव्या के फिल्मी करियर पर कोई असर पड़े. जबकि दिव्या चाहती थी कि साजिद सभी को ये बात बता दें लेकिन शादी के ग्यारह महीने बाद दिव्या भारती की मौत हो गई.

किसी ने उसे वाकये को हादसा बताया तो  किसी ने मर्डर का नाम दिया, हालांकि मुंबई पुलिस ने दिव्या की  इस फाइल को बंद कर दिया है और दिव्या कि मौत आज भी राज ही बनी हुई है.

मेरे पति मेरी बहन के साथ खुल कर बातें करने लगे हैं. मैं क्या करूं. अपने रिश्ते के प्रति असुरक्षा महसूस हो रही है.

सवाल
मेरे पति काफी गंभीर और स्वयं में सीमित रहने वाले इंसान हैं. वे मेरे और अपनी बहन के सिवा अन्य महिला या लड़की से बात नहीं करते. मगर कुछ दिनों से देख रही हूं कि वे मेरी मौसेरी बहन के साथ काफी खुल कर बातें करने लगे हैं. उस का नाम सुनते ही उन की आंखों में चमक आ जाती है. मेरी यह बहन 10 दिनों के लिए मेरे घर आई थी. अब वह मोबाइल पर इन के संपर्क में रहती है. मैं क्या करूं? अपने रिश्ते के प्रति असुरक्षा महसूस हो रही है.

जवाब
सब से पहले तो आप मन से यह फितूर निकाल दें कि आप के पति का अपनी मौसेरी बहन से अफेयर चल रहा है. संभव है उन दोनों का स्वभाव एकसा हो या दोनों के बीच बातचीत का कोई कौमन विषय हो.

आप का अपने पति के साथ रिश्ता कैसा है? यदि आप दोनों एकदूसरे को समझते हैं और प्यार करते हैं तो फिर रिश्तों में थोड़ी ढील छोड़ी जा सकती है. पति आप के सिवा किसी से बात करते हैं, सिर्फ इस बात पर चिंता करना मुनासिब नहीं. अपने पति का दिल प्यारप्यार में टटोलिए और समझने की कोशिश कीजिए कि उन के दिल में उस लड़की का स्थान क्या है.

यदि वाकई उन दोनों के बीच कोई रिश्ता पनप रहा है तो उस पर विराम लगाने का प्रयास करना होगा. आप को अपनी मौसेरी बहन से बात करनी होगी. वह न माने तो मौसामौसी से बात कर उस की जल्द से जल्द शादी करवा दें ताकि वह अपनी जिंदगी में व्यस्त हो जाए. इधर, अपने पति के साथ आप अपने रिश्ते को मजबूत बनाने का प्रयास करें.

35 साल पहले आज ही के दिन इस गेंदबाज ने ली थी वनडे की पहली हैट्रिक

आज 20 सितंबर है और क्रिकेट की दुनिया में इस दिन का खासा महत्‍व है क्‍योंकि 35 साल पहले आज ही के दिन अंतरराष्ट्रीय वनडे क्रिकेट में पहली हैट्रिक ली गयी थी.

क्‍या आप जानते हैं कि वो गेंदबाज कौन और कहां का था जिसने ये कमाल कर दिखाया. तो चलिए हम आपको इसके बारे में बताते हैं.

पाकिस्‍तान के गेंदबाज ने रचा इतिहास

20 सितंबर 1982 में पाकिस्‍तान के मीडियम पेसर जलालुद्दीन ने अंतरराष्ट्रीय वनडे क्रिकेट में पहली हैट्रिक ली थी. जलालुद्दीन ने हैदराबाद में आस्ट्रेलिया के खिलाफ इस कारनामे को अंजाम दिया था. सबसे पहले इस मध्यम तेज गेंदबाज ने रौड मार्श (1) को बोल्ड किया, इसके बाद ब्रूस यार्डली (0) को विकेटकीपर वसीम बारी के हाथों आउट करवाया और इसके बाद अपनी अगली गेंद पर ज्यौफ लौसन (0) को बोल्ड कर इतिहास रच दिया. इस तरह उस समय अपना सातवां ओवर फेंक रहे जलालुद्दीन अंतरराष्ट्रीय वनडे क्रिकेट में हैट्रिक लेने वाले पहले गेंदबाज बन गए.

लंबा नहीं चला जलालुद्दीन करियर

जलालुद्दीन की शानदार गेंदबाजी (32/4) की बदौलत पाकिस्तान 59 रनों से यह मैच जीत लिया था. इस मैच के बाद पाकिस्‍तान ने 3 मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त हासिल की. वैसे जलालुद्दीन का करियर ज्यादा लंबा नहीं चला. उन्होंने कुल 6 टेस्ट मैच और 8 वनडे मैचों में पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व किया. जलालुद्दीन ने कुल 25 अंतरराष्ट्रीय विकेट ही लिए थे लेकिन अपनी इस हैटट्रिक की वजह से उनका नाम इतिहास में दर्ज हो गया है.

11 साल में बना यह रिकार्ड

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अंतरराष्ट्रीय वनडे मैचों की शुरुआत साल 1971 में हुई थी, लेकिन इस रिकार्ड को बनने में 11 साल लगे. अब तक 42 बार वनडे में हैट्रिक बनी है जिसमें नौ बार सबसे ज्यादा पाकिस्तानी गेंदबाजों ने इसे अंजाम दिया है. भारत की ओर से पहली बार चेतन चौहान ने यह कारनामा किया जबकि 25 साल पहले तेज गेंदबाज कपिल देव ने ईडन गार्डन कोलकाता में श्रीलंका के खिलाफ हैट्रिक ली थी.

एक दिन बाद इस रिकार्ड को स्वीकारा गया

इस पहले हैट्रिक का रोमांच ही कुछ अलग रहा. यह जानकर आपको हैरानी होगी कि उस पहली हैट्रिक का जश्न उस पल नहीं मना, बल्कि एक दिन बाद मना. जी हां! पाकिस्तान का यह नवोदित गेंदबाज इस हैट्रिक से खुश तो हुआ, लेकिन तब उसे नहीं पता था कि उसने वनडे क्रिकेट में पहली बार यह कारनामा कर दिखाया है. जलालुद्दीन ने बाद में स्वीकार किया कि मैच के अगले दिन रिकार्ड बुक खंगाले गए, तो इस वर्ल्ड रिकार्ड का खुलासा हुआ. जिससे उनकी खुशी दोगुनी हो गई.

अगर खो गया है आपका स्मार्टफोन, तो जल्दी करें ये काम

स्मार्टफोन हमारे जीवन का एक अहम हिस्सा है. इसके जरिए हमारे कई काम आसानी से किए जा सकते हैं. इनमें वौयस कौल से लेकर इंटरनेट ब्राउजिंग तक कई फीचर्स शामिल हैं. फोन में यूजर्स की कई निजी जानकारी भी सेव रहती है जैसे कौन्टैक्ट, पासवर्ड और बैंक डिटेल्स आदि. ऐसे में अगर कभी आपका स्मार्टफोन खो जाए, तब आप क्या करेंगे.

अगर आपके साथ भी ऐसा हुआ है तो हम आपके लिए कुछ टिप्स लेकर आए हैं. जो आपको फोन खोने के बाद की स्थिति में मदद करेंगी. साथ ही स्मार्टफोन यूजर को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए यह भी हम आपको इस पोस्ट में बताने जा रहे हैं.

फोन खोने के बाद अपनाएं ये टिप्स

  • स्मार्टफोन खोने के बाद आप तुरंत अपने मोबाइल औपरेटर को कौन्टैक्ट करें और सिम को ब्लौक करवाएं. जिससे आपकी सिम का कोई दुरुपयोग नहीं कर पाए. अगर आपको अपने फोन का IMEI नंबर पता हो तो आप हैंडसेट को भी ब्लौक करवा सकते हैं. IMEI नंबर हैंडसेट का यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर होता है. IMEI नंबर फोन से *#06# डायल करके पता लगाया जा सकता है.
  • फोन खो जाने पर आपको पुलिस में रिपोर्ट करनी चाहिए. यहां भी आपको फोन का IMEI नंबर देना होगा. अगर आप अपना हैंडसेट या सिम ब्लौक कराना चाहते हैं तो औपरेटर को चोरी हुए फोन की पुलिस एफआईआर कौपी देनी होती है. साथ ही यह कौपी इंश्योरेंस क्लेम में भी काम आती है, अगर आपके हैंडसेट का इंश्योरेंस हुआ हो तो.

स्मार्टफोन के साथ बरतें ये सावधानियां

  • स्मार्टफोन्स का इस्तेमाल कौल्स के अलावा भी कई कामों के लिए किया जाता है जैसे ईमेल पढ़ने के लिए, सोशल मीडिया अकाउंट चेक करने के लिए और शौपिंग समेत बैंकिंग एप्स का इस्तेमाल करने के लिए. ऐसे में आपको हमेशा अपने पासवर्ड्स को चेंज करते रहना चाहिए. साथ ही फोन में कोई भी बैंकिंग और पासवर्ड डिटेल्स सेव नहीं रखनी चाहिए.
  • फोन में हमेशा पासवर्ड लगाकर रखना चाहिए. फोन का पासवर्ड ऐसा होना चाहिए जो आसानी से कोई भी तोड़ न पाए. आजकल फोन्स में कौम्बीनेशन पासवर्ड या फिंगरप्रिंट जैसे कई औप्शन दिए गए होंगे. साथ ही आप फोन में लोकेशन औन कर सकते हैं. इससे फोन खोने के बाद आप इंटरनेट पर जाकर फोन को रिमोटली ब्लौक कर सकते हैं. साथ ही डाटा को भी डिलीट किया जा सकता है.
  • फोन खोने के बाद यूजर्स को सबसे बड़ा नुकसान कौन्टैक्ट और फोटोज का होता है. ऐसे में आप फोन को हमेशा औनलाइन स्टोरेज सर्विस से सिंक करके रखें ताकि बाद में आप दोबारा अपने कौन्टैक्ट को वापस सेव कर पायें.

नशा : विनाश की ओर बढ़ते युवाओं के कदम

कैलिफोर्निया में एक एलएसडी प्रेमी को नशे की झोंक में यह सनक सवार हो गई कि  वह पक्षियों की तरह हवा में उड़ सकता है. अपनी सनक को पूरा करने के लिए वह एक बहुमंजिली इमारत की 10वीं मंजिल पर चढ़ा और वहां से कूद कर मौत का शिकार हो गया.

होस्टल में रह रहे एक विद्यार्थी को नशे में यह भ्रम हो गया कि वह अपने आकार से दोगुना लंबा हो गया है और उस के पैर 6 फुट लंबे हो गए हैं. उस ने अपनी लंबाई के हिसाब से पास वाली मंजिल पर कूदने के लिए छलांग लगाई और वह 8 मंजिल से नीचे जमीन पर गिर पड़ा.

ये 2 उदाहरण मादक द्रव्यों के प्रभाव और उन की विध्वंसता को दर्शाते हैं.

अनुभूतियों और संवेदनाओं का केंद्र मनुष्य का मस्तिष्क है. सुखदुख, कष्टआनंद, सुविधा और अभावों का अनुभव मस्तिष्क को ही होता है तथा मस्तिष्क ही प्रतिकूलताओं को अनुकूलता में बदलने का जोड़तोड़ करता है. कई लोग इन समस्याओं से घबरा कर अपना जीवन ही नष्ट कर लेते हैं.

अधिकांश व्यक्ति जीवन से पलायन करने के लिए अजीब उपाय अपनाते हैं, जैसे शुतुरमुर्ग संकट को देख कर अपना सिर रेत में छिपा लेता है. उसी तरह की पलायनवादी प्रवृत्तियों में मुख्य है, द्रव्यों की शरण में जाना. शराब, गांजा, भांग, चरस, अफीम, ताड़ी आदि नशे वास्तविक जीवन से पलायन करने की इसी मनोवृत्ति के परिचायक हैं. लोग इन का सेवन या तो जीवन की समस्याओं से घबरा कर करते हैं या फिर अपने संगीसाथियों को देख कर इन्हें अपना कर अपना मनोबल चौपट करते हैं.

मादक द्रव्यों के प्रभाव से वे अपनी अनुभूतियों, संवेदनाओं तथा भावनाओं के साथसाथ सामान्य समझबूझ और सोचनेविचारने की क्षमता भी खो देते हैं. मादक द्रव्य इतने उत्तेजक होते हैं कि सेवन करने वाले को तत्काल अपने आसपास की दुनिया से काट देते हैं और उसे विक्षिप्त कर देते हैं.

ऐसी वस्तु जिस की मांग हमारा मस्तिष्क करता है लेकिन उस से शारीरिक नुकसान हो, तो वह नशा कहलाता है. मानसिक स्थिति को उत्तेजित करने वाले रसायन जो नींद, नशे या भ्रम की हालत में शरीर को ले जाते हैं, वे ड्रग्स कहलाते हैं. नशे को 2 भागों में बांटा जा सकता है.

  1. पारंपरिक नशा : इस के अंतर्गत तंबाकू, अफीम, खैनी, सुल्फा और शराब आती हैं.
  2. सिंथैटिक ड्रग्स : इस के अंतर्गत स्मैक, हेरोइन, आइस, कोकीन, क्रेक कोकीन, एलएसडी, मारिजुआना, एक्टेक्सी, सिलोसाइविन मशरूम, फेनसिलेडाइन मोमोटिल, पारवनस्पास, कफसिरप आदि मादक दवाएं आती हैं.

मादक दवाओं के गुण और दुष्प्रभाव

मादक दवाएं ट्रंकोलाइजर ऐंटीसाइकोटिक्स, ऐंटीडिप्रेसैंट और साइकोस्टुमुलैंट आदि हैं. इन के अधिक सेवन से मस्तिष्क विकृत हो जाता है और व्यक्ति इन का आदी हो जाता है, जिस से उसे शारीरिक, मानसिक व आर्थिक हानि उठानी पड़ती है.

कोकीन : यह ट्रोपेन एलकालाइड है. इसे सूंघ कर, धूम्रपान कर नशा किया जाता है. यह मानसिक स्थिति को कमजोर करता है. यह हृदय गति तेज कर उच्च रक्तचाप को बढ़ाता है. इस में नशा लेने वाले को आनंद की अनुभूति होती है. इस के 1 ग्राम के 8वें हिस्से की कीमत 4 हजार रुपए है.

मेथामेप्टामाइन : यह साइकोस्टूमेलैंट है, इसे मैथ या आइस भी कहते हैं. इस को धूम्रपान से या इंजैक्ट कर लिया जाता है. इस से शरीर में उत्तेजना उत्पन्न होती है और आनंद का अनुभव होता है. इस को लेने से अवसाद, उच्च रक्तचाप और नपुंसकता होती है.

क्रेक कोकीन : इस से पूरा स्नायुतंत्र प्रभावित होता है और हृदय को नुकसान पहुंचता है. इस के सेवन से हृदयगति बढ़ जाती है और धमनियां सिकुड़ जाती हैं. इस के नशे का आदी व्यक्ति अपराधी प्रवृत्ति का होता है. इस को लेने से अवसाद, अकेलापन और असुरक्षा की भावना उत्पन्न होती है. क्रेक कोकीन के नशे के आदी व्यक्ति को गलतफहमी होती है कि वह बहुत ताकतवर है.

एलएसडी : यह लाइसर्जिक अम्ल से बनती है जो अरगट में पाया जाता है. यह गोलियों के रूप में मिलती है. इस का नशा करने से व्यक्ति का मस्तिष्क अत्यंत क्रियाशील हो जाता है. करीब 30 से 90 मिनट बाद इस का प्रभाव शुरू होता है. इस मादक द्रव्य को लेने से व्यक्ति के भाव तेजी से बदलने लगते हैं.

अधिक मात्रा में इस का सेवन करने से व्यक्ति के समक्ष काल्पनिक भ्रम पैदा होता है, जिस से उसे आनंद की अनुभूति होती है. इस का नशा करने वाला नशेड़ी अवसादग्रस्त, वस्तुओं के आकार और रंग में भ्रमित तथा मधुमेह व उच्च रक्तचाप का रोगी हो सकता है. एक बार नशा करने पर करीब 10 से 12 घंटे तक इस का असर रहता है.

हेरोइन : यह मादक पदार्थ मौर्फिन से बनता है. इस का नशा शीघ्र होता है. इस का नशा व्यक्ति के श्वसनतंत्र पर प्रभाव डालता है. इस नशे का सेवन करने वाले को निमोनिया की तीव्र आशंका रहती है. इस के प्रभाव से धमनियों में थक्का जमने लगता है और  फेफड़े, लिवर व किडनी खराब हो जाते हैं.

मारिजुआना : यह टेट्रा हाइड्रो कैनाबिनोलिक एसिड है जो केनिबस पौधे से प्राप्त होता है. यह एक खतरनाक नशा है और प्रतिवर्ष करीब 1 करोड़ लोग इस की चपेट में आ रहे हैं. इसे धूम्रपान के रूप में लिया जाता है. इसे हशीश भी कहते हैं. इस नशे को लेने वाले व्यक्ति की आंखें लाल रहती हैं और नींद बहुत आती है. यह नशा भ्रम उत्पन्न करता है, जिस से व्यक्ति निर्णय नहीं ले पाता और अनावश्यक बातें करता है.

एक्टेसी : इसे एमडीएमए भी  कहते हैं. यह उत्तेजना पैदा करने वाली दवा है. इस से शरीर का तापमान इतना बढ़ जाता है कि शरीर के अंग जैसे किडनी और हृदय काम करना बंद कर सकते हैं. इस के प्रभाव से मांसपेशियों में खिंचाव, उत्तेजना और भ्रम पैदा होता है.

नशे के आदी होने के कारण

मादक द्रव्यों के बढ़ते प्रचलन के लिए आधुनिक सभ्यताओं को भी जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, जिस में व्यक्ति यांत्रिक जीवन व्यतीत करता हुआ भीड़ में इस कदर खो गया है कि उसे अपने परिवार के लोगों का भी ध्यान नहीं रहता. नशा एक अभिशाप है. यह एक ऐसी बुराई है जिस से इंसान का अनमोल जीवन मौत की आगोश में चला जाता है और उस का परिवार बिखर जाता है. व्यक्ति के नशे के आदी होने के कई कारण हो सकते हैं, जिन में से निम्न मुख्य हैं :

  • मातापिता की अति व्यस्तता बच्चों में अकेलापन भर देती है. प्यार से वंचित होने के कारण वे नशे की दुनिया का रुख कर लेते हैं.
  • परिवार में कलह का वातावरण व्यक्ति को नशे की ओर ढकेलता है.
  • मानसिकरूप से परेशान व्यक्ति नशे का आदी हो जाता है. यह मानसिक परेशानी पारिवारिक, आर्थिक तथा सामाजिक भी हो सकती है.
  • बेरोजगारी भी नशे की ओर उन्मुख होने का एक प्रमुख कारण है. खाली दिमाग शैतान का घर होता है. दिनभर घर में खाली और बेरोजगार बैठे रहने से व्यक्ति हीनभावना का शिकार होता है और इसे दूर करने के लिए वह नशे का सहारा लेता है.
  • शारीरिक कमजोरी व पढ़ने में कमजोर होने के कारण बच्चे उस कमी को पूरा करने के लिए नशे का सहारा लेने लगते हैं.
  • जो व्यक्ति तनाव, अवसाद और मानसिक बीमारी से पीडि़त है वह नशे का आदी हो जाता है.
  • परिवार के व्यक्ति, दोस्त तथा अपने आदर्श व्यक्ति को नशा लेते देख कर युवा नशे का शिकार होते हैं.
  • कुछ लोग यह सोच कर नशा लेते हैं कि नशा तनाव को दूर करता है.
  • किसी दूसरे की दवा को खुद पर आजमाने से व्यक्ति नशे का आदी हो जाता है. चोट या दर्द की वजह से डाक्टर दवा लिखता है, जिस से आराम मिलता है. जब भी चोट लगे या दर्द हो, वह दवा बारबार लेने लगता है, जिस से वह नशे का आदी हो जाता है.
  • पुरानी, दुखद घटनाओं को भूलने के लिए भी लोग नशे का सहारा लेते हैं.
  • लोग सोचते हैं कि ड्रग्स लेने से वह फिट और तंदुरुस्त रहेंगे, विशेषकर खिलाड़ी किसी कारण मादक द्रव्यों की चपेट में आ जाते हैं.
  • बच्चों में भेदभाव करने पर वे हीनभावना से ग्रसित हो जाते हैं और विद्रोह स्वरूप नशे की ओर मुड़ जाते हैं.

नशा और अपराध

अपराध ब्यूरो रिकौर्ड के अनुसार छोटेबड़े अपराधों, बलात्कार, हत्या, लूट, डकैती, राहजनी आदि तमाम तरह की वारदातों में नशे के सेवन का मामला लगभग साढ़े 73 फीसदी तक है. अपराधजगत पर गहन नजर रखने वाले मनोविज्ञानी बताते हैं कि अपराध करने के लिए जिस उत्तेजना, मानसिक उद्वेग और दिमागी तनाव की जरूरत होती है उस की पूर्ति नशा करता है, जिस का सेवन मस्तिष्क के लिए एक उत्प्रेरक की तरह काम करता है.

पुनर्वास तथा उपचार

नशे की लत वाले व्यक्ति को विभिन्न स्तरों पर उपचार की जरूरत होती है. इस के लिए कुशल चिकित्सक की देखरेख में उपचार जरूरी है. अधिकांश इलाज नशे के सेवन को बंद करने में मदद करने पर केंद्रित होते हैं, जिस के बाद उन्हें नशे के प्रयोग पर फिर लौटने से रोकने में उन की मदद करने के लिए जीवन प्रशिक्षण सामाजिक समर्थन की आवश्यकता होती है. कुछ तरीके इस प्रकार हैं :

डिटौक्सीफिकेशन : यह उपचार का शुरुआती स्तर है. इस में नशे के परिणामों को कम करने के लिए दूसरी दवाओं का प्रयोग किया जाता है. इस का प्रबंधन बहुत सतर्कता से किया जाना चाहिए. दवा उपचार, अनुकूलन और मनोवैज्ञानिक सहायता के बिना संभव नहीं है.

गंभीर नशे के आदी व्यक्ति को लंबे उपचार की जरूरत पड़ती है. इस में रोगी को 24 घंटे चिकित्सक की देखरेख में रखा जाता है. इस में 8 से 12 माह लगातार सामाजिक, पारिवारिक और मानसिक स्तरों पर चिकित्सक उपचार करते हैं. छोटे उपचार में रोगी करीब 3 से 6 सप्ताह तक चिकित्सक की निगरानी में रहता है.

बाह्य रोगी उपचार : यह उपचार रोगी की स्थिति तथा मादक द्रव्य के असर पर निर्भर करता है. यह उपचार ग्रुप या व्यक्तिगत रूप से दिया जाता है. इस में रोगी को आंशिक रूप से अस्पताल में भरती होना पड़ता है.

व्यक्तिगत परामर्श : व्यक्तिगत परामर्श उपचार में रोगी के संपूर्ण इतिहास पर परामर्श दिया जाता है. रोगी की पारिवारिक पृष्ठभूमि, रोजगार, सामाजिक और आर्थिक स्थिति के बारे में गहन अध्ययन पर चिकित्सक उस के योग्य उचित सलाह तथा इलाज का परामर्श देते हैं. परामर्शदाता 12 सप्ताह तक रोगी को नशे से दूर रहने के लिए प्रोत्साहित करते हैं.

अन्य उपचार जोकि व्यक्ति के नशे के आदी के स्तर पर चिकित्सक द्वारा प्रस्तावित किए जाते हैं, ये हैं-

  1. आचरण या व्यवहारवाद उपचार
  2. मानववादी उपचार.
  3. संज्ञानात्मक व्यवहार उपचार
  4. द्वंद्वात्मक व्यवहार उपचार
  5. मानसंगति उपचार
  6. अर्थपूर्ण उपचार
  7. एकीकृत उपचार
  8. हार्म रिडक्शन ट्रीटमैंट
  9. जानवर आधारित उपचार.

नशा रोकने के उपाय

नशे से लड़ने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पारिवारिक, सामाजिक और सामूहिक संकल्प की आवश्यकता है. सिर्फ सरकार या नशामुक्ति संस्थाएं इस के लिए पर्याप्त नहीं हैं. नशा रोकने में सब से बड़ी समस्या है कि हम सिर्फ जागरूकता पर जोर देते हैं, उस की रोकथाम के प्रयास कम करते हैं. जागरूकता सिर्फ बड़ों को नशे की लत से दूर करती है जबकि रोकथाम बचपन से नशे की लत न लगे, इस के लिए जरूरी है. राष्ट्रीय स्तर पर चेतना जरूरी है. नशे को रोकने के लिए निम्न प्रयासों का क्रियान्वयन किया जाना चाहिए.

  1. सामाजिक स्तर पर नशा रोकथाम कार्यक्रम बनना चाहिए.
  2. नशे का व्यापक फैलाव समाज से संबंधित है, सो, ऐसे समाजों को चिह्मित कर के व्यापक जागरूकता अभियान चलाना चाहिए.
  3. स्वस्थ, सफल और सुरक्षित छात्र कैसे बनें, इस थीम पर सभी विद्यालयों में नशामुक्ति अभियान को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाना होगा.
  4. नशा रोकने के लिए कारगर रणनीति राष्ट्रीय स्तर पर क्रियान्वित होनी चाहिए.
  5. राष्ट्रीय युवा नशामुक्ति आंदोलन महाविद्यालयी स्तर पर पाठ्यक्रम में लागू होना चाहिए.
  6. बच्चे नशे से दूर रहें, ऐसे क्षेत्रों में नशा रोकथाम केंद्र होने चाहिए. इस के लिए 3 स्थानों विद्यालय, कालेज और कार्यक्षेत्र पर विशेष ध्यान देना चाहिए.
  7. नशे की रोकथाम वाली संस्थाओं और कानून तथा न्याय संस्थाओं में आपसी समन्वय व सूचनाओं का आदानप्रदान होना चाहिए.
  8. नशे की हालत में गाड़ी चलाने पर रोकथाम के लिए कड़े कानून का प्रावधान होना चाहिए.
  9. मादक दवाओं से जुड़े लोगों पर कठिन दंड का प्रावधान होना चाहिए.
  10. आवासीय उपचार कार्यक्रमों को बढ़ावा मिलना चाहिए.
  11. विद्यालय तथा परिवार में बच्चों और युवाओं का नशे के संकेत पहचानने वाले कार्यक्रमों का आयोजन एवं प्रशिक्षण देना चाहिए.

नशीले पदार्थों के सेवन से विश्व स्तर पर आपातस्थिति बन गई है. नशे के प्रभाव से न केवल एक जीवन बल्कि संपूर्ण परिवार का विनाश हो जाता है. शस्त्र तथा पैट्रोलियम उद्योग के बाद अवैध मादक द्रव्यों का धंधा विश्व का तीसरा सब से बड़ा उद्योग है. नशे के फैलाव से देशों का आर्थिक विकास पिछड़ रहा है और समाज में आपराधिक प्रवृत्तियां पनप रही हैं.

भयावह आंकडे़

ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे औफ इंडिया की रिपोर्ट काफी चौंकाने वाली है. युवा किस तरह से नशे का शिकार हो रहा है इस की बानगी इन आंकड़ों से स्पष्ट झलकती है :

  1. भारत में तंबाकू व मादक द्रव्य का सेवन करने वालों में खैनी का प्रयोग सब से ज्यादा किया जाता है. करीब 13 फीसदी लोग इस का सेवन करते हैं.
  2.  2009-10 के ग्लोबल एडल्ट टोबेको सर्वे के मुताबिक भारत में तब 12 करोड़ लोग तंबाकू का सेवन कर रहे थे.
  3. तंबाकू से होने वाली बीमारियों के इलाज पर 2011 में भारत में 1,04,500 करोड़ रुपए खर्च हुए.
  4. एक सिगरेट आप की जिंदगी के 9 मिनट पी जाती है.
  5. तंबाकू की एक पीक आप की जिंदगी के 3 मिनट कम कर देती है.
  6. हर 7 सैकंड में तंबाकू और अन्य मादक द्रव्यों से एक मौत होती है.
  7. भारत में हर साल साढ़े 10 लाख मौतें तंबाकू के सेवन से होती हैं.
  8. 90 फीसदी  फेफड़े का कैंसर, 50 फीसदी ब्रोंकाइटस एवं 25 फीसदी घातक हृदय रोगों का कारण धूम्रपान है.

राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय दिवस

  1. 31 मई को अंतर्राष्ट्रीय तंबाकू निषेध दिवस.
  2. 26 जून को अंतर्राष्ट्रीय नशा निवारण दिवस.
  3. 2 से 8 अक्तूबर तक मद्यपान निषेध सप्ताह.
  4. 18 दिसंबर को मद्यनिषेध दिवस.
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