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जौब और चुनौतियां : परेशानी से बचना चाहते हैं तो इन सुझावों पर अमल करें

जौब चाहे छोटी हो या बड़ी, चुनौतियों का सामना तो करना ही पड़ता है, क्योंकि हर औफिस का काम का तरीका अलग होता है, जिस को समझने व उस के साथ सामंजस्य बैठाने में नए कर्मचारी को काफी मेहनत व समझदारी से काम लेना पड़ता है. जरा सी चूक नौकरी के लिए खतरा बन जाती है, साथ ही कर्मचारी को आर्थिक परेशानियों में भी डाल देती है.

जौब हर व्यक्ति के लिए ऐसे अनुभव की तरह है, जिसे वह हमेशा याद रखता है. एक फ्रैशर का फर्स्ट जौब में चुनौतियों से सामना होना आम बात है, क्योंकि औफिस कल्चर से वह पहली बार मुखातिब होता है. काम के दौरान अकसर विपरीत परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है.

आप यदि परेशानी से बचना चाहते हैं और औफिस में अपनी अलग पहचान बनाना चाहते हैं, तो आप को कुछ सुझावों पर अमल करना होगा :

  1. समय के पाबंद बनें
  2. समय पर औफिस पहुंचें. जौब
  3. में तरक्की पाने के लिए समय का
  4. पाबंद होना बहुत जरूरी है.

औफिस समय से 10 मिनट पहले पहुंचें. इस से आप हड़बड़ी से बच सकेंगे और अपनी मेज, कंप्यूटर व जरूरी फाइलें ठीक से देख कर अपना काम सुचारु ढंग से कर सकेंगे. आप का समय पर औफिस पहुंचना आप की तरक्की के द्वार खोलेगा.

सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाएं

सकारात्मक सोच के साथ जौब की शुरुआत करें. यह आप को ऊर्जावान के साथसाथ प्रगतिशील भी बनाती है. याद रखें, कोई भी कार्य संपन्न करने के लिए व्यक्ति को सकारात्मक दृष्टिकोण रखना चाहिए. सकारात्मक सोच हमेशा व्यक्ति को उत्साहित करती है और टीमभावना को बढ़ावा भी देती है.

मालिनी श्रीवास्तव एक पब्लिकेशन हाउस में मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं. मालिनी को उन की व्यवहारकुशलता व सकारात्मक सोच ने समय से पहले पदोन्नति दिलाई. वे किसी भी कठिन से कठिन काम को अपनी सकारात्मक सोच से आसानी से कर लेती हैं.

सुव्यवस्थित रहें

यदि आप निरंतर तरक्की का मार्ग प्रशस्त करना चाहते हैं तो इस के लिए आप को अपना काम सुव्यवस्थित तरीके से करना होगा. अपने काम को प्राथमिकता दें. बौस से प्रतिदिन मिलने का प्रयास करें तथा नएनए विषयों पर विचारविमर्श करें. काम की सूची अवश्य बनाएं. प्रमुख कार्यों को पहले करें. सूचीबद्ध तरीके से काम करना आसान होता है.

निरीक्षण करें

हर औफिस व कंपनी की अपनी एक खास कार्यप्रणाली होती है. आप पहले जहां काम करते थे, वहां की और वर्तमान औफिस की कार्यशैली में काफी अंतर दिखेगा. इसलिए वर्तमान औफिस के क्रियाकलापों और नियमकायदों का गहराई से निरीक्षण करें. औफिस मीटिंग्स पर खास ध्यान दें. उन में कार्यक्षमता व कार्यकुशलता बढ़ाने के सुझाव अवश्य दें.

बौस मीटिंग में क्या कह रहा है, उस पर ध्यान दें. सहकर्मियों के साथ वार्त्तालाप कैसा होना चाहिए, इस पर मनन करें. कंपनी की उन्नति के साथसाथ अपनी उन्नति के कार्यकलापों में भी विशेष रुचि दिखाएं.

हिचकिचाएं नहीं

औफिस में कुछ ऐसे काम भी करने पड़ते हैं, जिन की आप को पूरी तरह से जानकारी नहीं होती. इस स्थिति में अपने सहकर्मियों व सहयोगियों से जानकारी लें. जानकारी लेने में हिचकिचाएं नहीं. याद रखें, सहकर्मियों से छोटीछोटी जानकारियां लेना जिज्ञासा को जगाता है व काम में निपुणता लाता है .

अच्छा आचरण रखें

आप का आचरण आप की कमियों व अच्छाइयों को उजागर करता है. आप की चालढाल और बौडी लैंग्वेज से आप के स्वभाव का पता चल जाता है. धीरगंभीर चाल और चेहरे पर मुसकराहट आप को नए माहौल में ढालने में मददगार हो सकती है. आप की बौडी लैंग्वेज व आचरण ऐसा होना चाहिए कि सहकर्मी आप के साथ असहज महसूस न करें.

उदास और थके चेहरे का दूसरे व्यक्ति पर गलत प्र्रभाव पड़ता है. आप के चेहरे पर हर पल उत्साह और ऊर्जा झलकनी चाहिए. खुद को हमेशा ऐक्टिव रखें. अच्छा आचरण जहां आप को व्यवहारकुशल बनाता है, वहीं आप की तरक्की में काम भी आता है.

आत्मविश्वास

कोई भी कार्य संपन्न करने के लिए आत्मविश्वासी होना जरूरी है. यदि आप में आत्मविश्वास नहीं है तो फिर आप किसी भी काम को आसानी से नहीं कर सकते. इसलिए खुद में आत्मविश्वास जगाएं. ‘हां, मुझ में है दम’ इसी विश्वास के साथ अपने काम की शुरुआत करें.

माहौल समझें

औफिस में आजकल काफी राजनीति होती है. एकदूसरे से लड़ाईझगड़ा चलता रहता है. ऐसे माहौल में आप अपने काम पर खास ध्यान देने के साथसाथ अपने अगलबगल भी पैनी निगाह रखें. कौन आप का विश्वासपात्र है और कौन नहीं, इस पर विशेष ध्यान दें, क्योंकि कुछ कलीग्स आप के साथ राजनीति कर सकते हैं. आप ऐसे लोगों से बच कर रहें, जो काम करने के बजाय अपने व्यर्थ के काम करते हों. ऐसे में अपने को नौर्मल रखें, बहस में पड़ने के बजाय काम से मतलब रखें.

उपर्युक्त सुझावों को ध्यान में रखने पर आप की जौब अच्छी तो चलेगी ही, साथ ही आप तरक्की की सीढि़यां भी चढ़ते जाएंगे.

समाज में फैले हुए इन रावणों का नाश कौन करेगा

हमारी रगरग में यह सोच भरी है कि अगर किसी के साथ कुछ  बुरा हुआ है, तो बुरा करने वाले से ज्यादा दोषी पीड़ित है. यह या तो उस के कर्मों का फल माना जाता है या फिर यह समझा जाता है कि ईश्वर, अल्लाह, भगवान को यही मंजूर था. आमतौर पर पीडि़त से कहा जाता है कि नुकसान से जितना जो बच गया उस के लिए ऊपर वाले को धन्यवाद करे और चुप बैठ जाओ.

चंडीगढ़ में एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की बेटी को रात 12 बजे गाड़ी में अकेले आते देख खुद को साक्षात ईश्वर सम्मत पार्टी के नुमाइंदे मानने वाले 2 युवाओं ने उस की गाड़ी रोकनी चाही. अब इन ‘निर्दोष’ बच्चों में से चूंकि एक भारतीय जनता पार्टी के हरियाणा अध्यक्ष का बेटा था, तो दोष तो पीडि़ता का ही होना चाहिए.

जिस देश का वातावरण ऐसा हो गया है कि आज की हर खराबी के लिए 67 साल के कांग्रेसी राज को दोष दे कर मुक्त हो जाओ, वहां मामला सामने आते ही भाजपाइयों की फौज पीडि़ता से सवाल करने लगी है.

सुरक्षा व्यवस्था में कमजोरी की जिम्मेदारी लेने की जगह पीडि़ता का इतिहास खंगाला जा रहा है. देश भर के भाजपाई कार्यकर्ता पार्टी की आबरू बचाने के लिए लड़की के मनमरजी के समय घूमने की आजादी पर सवाल उठाने लग गए हैं और उस की आबरू को सरेआम तारतार करने लगे.

यह मानसिकता कोई नई नहीं है और न ही भाजपा की देन है. यह पुरानी है जिसे कांग्रेसियों ने खूब पालापोसा पर उसी का नतीजा भाजपा सरकार है. यह मानसिकता समाजवादी पार्टी के शोहदों में भी भरपूर है. देश का शायद ही कोई कोना ऐसा होगा, जहां पार्टी चाहे कोई हो, कानून की रक्षा सही ढंग से हो रही हो.

चोर, डाकू, बलात्कारी हर युग में, हर समाज में होंगे. फर्क यहां यह है कि उन्हें सरकारी तौर पर बचाया जा रहा है. तुरतफुरत जमानत दी जा रही है. मुख्यमंत्री मामले को टाल रहे हैं, उसे मामूली घटना बताया जा रहा है.

औरतों को गुलाम मानने और पूजापाठ में बंद रख कर गुलामी के फूलों की जंजीरों से बांध कर रखने वालों का विचार है कि उन्हें जो जनसमर्थन मिला है वह उन के हर काम को सही सिद्ध करता है. ठीक वैसे ही जैसे जब इंद्र ने अहिल्या का बलात्कार किया था, तो दोषी बन कर अहिल्या पत्थर की शिला बन गई. चंडीगढ़ की लड़की से कहा जा रहा है कि वह दोषी है, शिला बन कर सड़क पर पड़ी रहे और सरकारी ओहदे पर बैठे ‘इंद्र’ को कुछ न कहे.

बुरा हो आज के छोटे से तार्किक, सभ्य, उदार समाज का कि वह बेबात का हल्ला मचा रहा है. भक्तों को पूरा विश्वास है कि एक दिन राम इन व्यक्ति अधिकारों के हक रक्षक रावणों का संपूर्ण नाश करेंगे, याद रखिए.

फैशनेबल हेयरस्टाइल्स : जानिए युवाओं को आखिर क्या पसंद आता है

आज फैशन से अपडेट रहना समय की मांग है. हर कोई फैशनेबल दिखना चाहता है. आजकल की यंग जैनरेशन अपने अलग अंदाज और पर्सनैलिटी को ले कर काफी सहज है. युवा कपड़ों से ले कर मेकअप और हेयरस्टाइल के साथ कुछ नया ऐक्सपेरिमैंट करते रहते हैं. अपने अलग स्टाइल के लिए वे बालों की एक लट कलरफुल कर हाईलाइट करने के साथ और भी बहुतकुछ करते हैं.

आइए जानें, कौन से हेयरस्टाइल उन्हें पसंद आते हैं :

मेसी टौप नौट हेयरस्टाइल : इस हेयरस्टाइल में हरेक की पर्सनैलिटी एकदम अलग लगती है. साथ ही, इस हेयरस्टाइल में लंबाई भी काफी ज्यादा लगती है और आप छोटी होने पर भी लंबी लगती हैं. इसे बनाना भी बहुत आसान है, सारे बालों को एकसाथ समेट कर ऊंचा बांधना होता है.

बौफफंट हेयरस्टाइल : यह हेयरस्टाइल भी आजकल गरमी के मौसम में कालेज गर्ल्स में काफी लोकप्रिय है. वैसे यह हेयरस्टाइल 70 के दशक की सदाबहार फिल्म अभिनेत्रियों की याद दिलाता है. आज की युवापीढ़ी भी शौक के साथ इस हेयरस्टाइल को फौलो कर रही है.

अभी हाल ही में इस हेयरस्टाइल को ऐश्वर्या राय बच्चन से ले कर आलिया भट्ट और दीपिका पादुकोण ने भी ट्राई किया. इस स्टाइल में पीछे की तरफ लो जूड़ा बनाया जाता है और आगे से बालों की साइड पार्टिंग कर के उन को भी जूड़े से अटैच कर दिया जाता है.

स्टे्रट हेयरस्टाइल : सीधे बालों का चलन क्लासिक लुक में से एक है और यह है भी बहुत आसान. इस में बालों को खुला छोड़ा जाता है या फिर हाफ कर के पिन लगा ली जाती है. यह स्टाइल हर ड्रैस के साथ खूब फबती है.

टेडिशन लुक : यह स्टाइल भी युवतियों द्वारा खूब पसंद किया जाता है. इस में आगे से बालों के 2 सैक्शन किए जाते हैं. फिर दोनों सैक्शन के बालों की एक साइडेड फ्रैंच चोटी बनाई जाती है. पीछे के बचे बालों का बन बनाया जाता है.

दोनों फ्रैंच चोटियों को बन पर लपेट कर पिन की सहायता से कवर कर लिया जाता है. इसे बनाने में समय ज्यादा लगता है, इसलिए युवतियां इसे कभीकभार पार्टी आदि में बनाना ज्यादा पसंद करती हैं.

युवकों के पसंदीदा हेयरस्टाइल

योगी स्टाइल हेयरकट : दरअसल, योगी स्टाइल के कुरते के बाद अब योगी जैसा हेयरकट युवाओं की पहली पसंद बनने लगा है. हेयरस्टाइल ट्रैंड्स और फैशन स्टेटमैंट के लिए फिल्मस्टार्स को जाना जाता है, लेकिन अब लोग इस मामले में राजनेताओं को भी फौलो करने लगे हैं.

अनिल कपूर का ‘मुबारकां’ लुक : अनिल कपूर ने फिल्म ‘मुबारकां’ में डिफरैंट हेयरस्टाइल बनाया है. फिल्म में अनिल कपूर ने अपने बालों को दोनों साइड से बिलकुल छोटा कर दिया है, जबकि शेष बालों को एक नया लुक दिया है. यह शेप भी युवाओं में काफी प्रचलित हो रहा है.

स्पाइक्स कट : युवाओं में स्पाइक कट का फैशन हाइट पर है. इस से बालों के साथ चेहरे का लुक भी पूरी तरह से चेंज हो जाता है, जिस से युवा ग्लैमरस और बिंदास दिखने लगते हैं.

अंडरकट : जैसे कि इस के नाम से पता चलता है कि इस हेयरकट में आगे से बड़े और लैफ्ट ऐंड राइट दोनों साइड से न के बराबर बाल रखना ही अंडरकट है. इस हेयरकट को युवक ही पसंद नहीं करते बल्कि युवतियां भी इस कट वाले युवकों को स्टाइलिश मानती हैं.

गजनी कट : आमिर खान का गजनी हेयरकट लोगों में ऐसा छाया कि इतने सालों बाद आज भी वह युवाओं में काफी लोकप्रिय है. जिम जाने वाले अधिकांश युवा बहुत छोटे बाल रखते हैं.

स्मार्ट वेबस कट : युवकों पर छोटे बाल काफी फबते हैं. बालों को छोटाछोटा कटा कर उन्हें हेयर जेल से फंकी लुक देना स्पोर्ट्समैन ज्यादा पसंद करते हैं. वे गरमी से बचने और स्टाइल में रहने के लिए इस हेयरकट को अपनाते हैं.

स्ट्रेट हेयरकट : ऐसा नहीं है कि सिल्की हेयर के लिए युवतियां ही मशहूर हैं, युवकों के बाल भी सिल्की होते हैं. ऐसे में वे अपने बालों को शोल्डर लैंथ स्टेट हेयरकट देते हैं. इस में वे बालों को खुला रखने के साथसाथ पोनीटेल भी बांधते हैं. यह भी फैशन में है.

कर्ली हेयर : जिन युवकों के बाल कर्ली हैं वे अकसर इस हेयरस्टाइल को फौलो करते हैं. वैसे बालों को कर्ली कराया भी जा सकता है, लेकिन युवक ऐसा कम ही करते हैं. ऐसे बालों वाले युवा कर्ली मोप टौप स्टाइल में कटिंग करवाते हैं.

हेयर टैटू

हेयर टैटूइंग वैसे तो चलन में बहुत है लेकिन इन दिनों अस्थायी स्टिकर काफी पसंद किए जा रहे हैं. बालों के लिए यह नुकसानदायक भी नहीं होता, क्योंकि इसे पानी लगा कर चिपकाया जाता है. इसे हटाना भी बहुत आसान है. यह स्टाइल बहुत लोकप्रिय हो रहा है.

कालेज के फैशनेबल कपड़ों के निराले अंदाज कभी देखें हैं आपने

कालेज गोइंग युवतियों में फैशन को ले कर खासा क्रेज होता है. वे अपने लुक और स्टाइल को ले कर नएनए ऐक्सपैरिमैंट्स करती रहती हैं. एक ही ड्रैस को अलगअलग तरीकों से मिक्स ऐंड मैच कर लुक में वैराइटी पा सकती हैं. कालेज में डेली में पहने जाने वाले फैशनेबल कपड़े हों, या फिर कालेज की पार्टी हो, युवतियों को तो सजने का बहाना चाहिए. तो आइए जानें वे कैसे अलगअलग मौकों पर फैशनेबल दिखने के साथसाथ डिसैंट भी लगेंगी.

नी लैंथ स्कर्ट : नी लैंथ स्कर्ट इन दिनों कालेज गोइंग गर्ल्स में काफी पौपुलर है. इसे आप क्रौप या लूज टौप के साथ पहन सकती हैं. इस के साथ सनग्लासेज और कंफर्टेबल हील फैशनेबल लगती हैं.

डैनिम्स आउटफिट है हिट : डैनिम शर्ट, ट्यूनिक, स्कर्ट अपनेआप में ही एक स्टाइल है और आजकल तो डैनिम के जंपसूट भी चल रहे हैं जो पतली युवतियों पर खूब फबते हैं. डैनिम के साथ नैकपीस और ड्रैस से मैच करती हुई बैल्ट लगाने पर डैनिम की रंगत और भी बढ़ जाती है.

प्लाजो सूट : प्लाजो पैंट लंबी और स्ट्रेट टाउजर होती है जोकि ऊपर से टाइट और बौटम से लूज होती है. यह बैलबौटम, गूचो टाउजर, हैरम पैंट्स और पैरलर्स से थोड़ा अलग होती है. इस के साथ ऊपर इस से मिलताजुलता कोई टौप या सूट जरूर होता है, वैसे यह पाकिस्तान की काफी फैमस ड्रैस है जो कि अब इंडिया में भी काफी पसंद की जा रही है और ट्रैंड में है. स्पैशली युवतियों में यह ड्रैस काफी पौपुलर हो चुकी है. इसे आप लौंग शर्ट, फ्रौक, सूट के साथ पहन सकती हैं. प्लाजो पैंट स्पैगिटी के साथ भी अच्छी लगती है.

प्लाजो सूट कैसेकैसे

  • जौर्जट प्लाजो सूट के साथ शिफान के दुपट्टे का फैशन काफी चल रहा है.
  • ये प्लाजो राजस्थानी प्रिंट के भी आते हैं. इन में कई कलर और प्रिंट मिलते हैं. इन्हें आप लूज शर्ट टौप के साथ पहन सकती हैं.
  • इस के अलावा लौंग शर्ट को नीचे से अंब्रेला कट के साथ डिजाइन कर के ज्यादा खुले प्लाजो के साथ पहनने पर भी अच्छा लुक आता है.
  • बाटिक प्रिंट की लौंग कुरती के साथ प्लेन कलर का प्लाजो भी जंचता है.
  • स्लोगन टीशर्ट का है जमाना

समर सीजन में टीशर्ट सब से कूल फैशन स्टाइल होता है और इस में यदि स्लोगन टीशर्ट पहनी जाए तो कहना ही क्या. इन दिनों गर्ल्स में खूब पौपुलर हो रही है स्लोगन टीशर्ट. इन टीशर्ट्स पर कोई न कोई संदेश लिखा होता है जिसे इन टीशर्ट का डिजाइन भी कह सकते हैं. इन पर लिखी ये इबारतें इतनी रुचिकर होती हैं कि जब तक हम इन्हें पूरा न पढ़ लें, हमें चैन ही नहीं आता है. अटपटीचटपटी लिखी ये बातें किसी न किसी तरह हमें आकर्षित करती हैं. यही कारण है कि टीशर्ट यंगिस्तान का फेवरेट फैशन बन गया है. इन में कई तरह की शेप होती हैं, जैसे वी शेप गला, राउंड नेक, बोट नैक आदि. इस के अलावा ये टीशर्ट्स कई स्टाइल्स में भी आती हैं.

डबल डैकर टीशर्ट

ये टीशर्ट्स स्पैगिटी के साथ अटैच्ड होती हैं इसलिए इन में 2 टीशर्ट होने की वजह से इन्हें डबल डैकर टीशर्ट कहते हैं. ये टीशर्ट्स कटस्लीव्स में भी मिलती हैं और यही उन का डिजाइन भी होता है. साथ ही, ये टौपनुमा भी होती हैं जिन पर एक कट स्लीव्स स्पैगिटी के साथ ऊपर एक ओर टौप जुड़ा होता है, जिस पर मैसेज लिखा होता है. यह स्टाइल इन टीशर्ट्स को फंकी लुक भी देता है.

औफ डाउन शोल्डर टीशर्ट

इन टीशर्ट्स में शोल्डर नीचे गिरा होता है और यही इस टीशर्ट का स्टाइल स्टेटमैंट होता है.

ओवरसाइज टीशर्ट

इस तरह की टीशर्ट नीचे से थोड़ी लैंथ में बड़ी होती है. यह बौडी का काफी बड़ा पार्ट कवर करती है, इसलिए इसे ओवरसाइज टीशर्ट कहते हैं.

स्टाइप ओवरसाइज टीशर्ट

इस में भी स्लोगन लिखे होते हैं लेकिन स्टाइप के बीच में स्लोगन होते हैं. ये अधिकतर व्हाइट कलर में आती हैं और इन पर ब्लैक या रैड स्टाइप्स होते हैं.

आउटशोल्डर टौप टीशर्ट

इस तरह की टीशर्ट में शोल्डर ऊपर से तो कटे हुए होते हैं लेकिन शोल्डर के नीचे बाजू होती है, जो इस टीशर्ट को एक अलग फंकी लुक देती है.

आर्म टीशर्ट

यह टीशर्ट साइड से बिलकुल कटी हुई होती है और सिर्फ ऊपर व नीचे का हिस्सा जुड़ा हुआ होता है, पर बीच में से कटी होती है. इस में नीचे स्पैगिटी आदि पहननी पड़ती है.

ओपन फ्रंट ट्यूरटल नैक लौंग

इस तरह की टीशर्ट में गले से नीचे और चैस्ट से ऊपर एक कट वाला डिजाइन होता है जिस से गले और चैस्ट के बीच की जगह दिखाई देती है. इस में स्लीव्स फुल होती है. लेकिन यह टौप काफी सैक्सी लगता है. इस पर स्लोगन कुछ इस तरह के होते हैं, ‘आई एम सैक्सी’ आदि.

यह टौप टीशर्ट बोल्ड लड़कियां कैरी करती हैं.

फैशन में है कलरफुल जींस

यह सीजन कलरफुल रंगों के लिए परफैक्ट है, तो फिर ऐसे में हम जींस में यही पुराने ब्लू, ब्लैक कलर ही क्यों पहनें. दरअसल, इन दिनों कलर्ड जींस में कई वैराइटियां आ रही हैं, जिन में कई तरह के कंट्रास्ट व डिफरैंट कलर्स यूज किए जा रहे हैं. आइए जानें ये जींस किस तरह की हैं :

कलर्ड जींस में प्रिंट भी है : कलर्ड जींस अब सिर्फ प्लेन नहीं है बल्कि उस में कई तरह के प्रिंट भी हैं, जो उसे खास बनाते हैं. कई जींस को रिप्ड लुक भी दिया जा रहा है जिस में नीचे की तरफ से धागे निकले होते हैं जो इसे एक अलग ही फंकी लुक देते हैं.

इस के साथ ही एक डिजाइन में डिफरैंट तरह के स्टड्स और स्पाइक्स भी लगे होते हैं.

नौर्मल जींस को रगड़ कर हलका सा स्किनी टच देने की कोशिश भी की गई है.

इस तरह की कलर्ड जींस को नीचे से पजामी लुक दिया गया है जो पहनने में स्लैक्स जैसी कंफर्टेबल है और देखने में जींस का लुक भी देती है.

यह जींस नीचे से थोड़ी खुली होती है जिसे चेन की सहायता से बंद किया गया होता है. यह स्टाइल जींस में एक डिजाइन का काम भी करता है और साथ ही, इसे पहनने में आसानी भी होती है.

कई कलर्ड जींस में ऊपर पट्टी दूसरे कलर की होती है जो उसे एक अलग लुक देती है.

ऐक्सैसरीज भी हों खास : इस जींस के साथ ऐक्सैसरीज में लकड़ी के कड़ों से ले कर शौर्ट जैकेट, ईयररिंग, ट्राइबल स्टाइल के गहने, फंकी ईयररिंग्स और बड़ी सी वौच फैशन में हैं.

जींस के साथ टौप कैसा हो

अगर जींस किसी डार्क कलर की हो तो उस के साथ स्ट्रिप नौट शर्ट पहनना अच्छा लगता है.

यह जींस अधिकतर लो वैस्ट होती है. शौर्ट टौप के साथ इस में फिगर काफी अच्छी लगती है.

स्पैगिटी टौप भी अच्छा लगता है, यह जींस को एक अलग ही लुक देता है.

कलर भी हो कूल : गरमी में हमेशा ड्रैस के मैटीरियल के साथ उस के कलर पर भी ध्यान देना पड़ता है. गरमी में कलर ऐसे पहनने चाहिए जो हलके, कूल और आंखों को ठंडक देने वाले हों. गरमी में ग्रीन कलर ठंडक देता है, इसलिए ग्रीन जरूर कैरी करें, चाहें तो आप ग्रीन कलर की टीशर्ट या जींस पहनें या फिर ग्रीन पर्स या सैंडिल भी पहन सकती हैं.

पिंक कलर भी युवतियों में काफी पसंद किया जाता है और बेबी पिंक की तो युवतियां वैसे ही दीवानी होती हैं और इस मौसम में वह अच्छा भी लगता है. अगर इन कलर्स से बोर हो चुकी हैं तो औरेंज कलर भी ट्राई कर सकती हैं.

फैब्रिक भी हो कुछ ऐसा : कौटन मिक्स सिल्क, शिफौन, लिनन, जौर्जेट व हैंडलूम और खादी से बने वस्त्रों को पहनें जो पसीना सोखने वाले हों.

फेयरवैल पार्टी ड्रैस

कट वर्क ड्रैस : यह ड्रैस पहनने में काफी स्टाइलिश लुक देती है. यह वन पीस ड्रैस है, जिस में अंदर एक ड्रैस घुटनों तक होती है और ऊपर से जौर्जेट का कपड़ा लौंग लैंथ का होता है जो इसे स्टाइलिश बनाता है.

प्लेटेड ड्रैस : पार्टी के लिए यह अच्छी ड्रैस है. इस ड्रैस का प्लेन बेस और डिजाइनर स्लीव्स इसे स्मार्ट बनाता है. इस तरह की फ्रौक समर्स में ज्यादा अच्छी लगती है. यह एक लौंग ड्रैस है जिस में घुटने तक एक स्पैगिटी होती है और नीचे तक एक ट्रांसपेरैंट कपड़ा होता है.

बोट नैक ड्रैस : इस ड्रैस में बोट नैक होता है. यह ड्रैस स्लीव वाली भी होती है और विदाउट स्लीव्स भी. यह घुटने तक की शौर्ट ड्रैस होती है. कालेज पार्टी के लिए यह परफैक्ट ड्रैस है.

लौंग शौर्ट स्टाइल ड्रैस : यह ड्रैस पहनने में काफी ट्रैंडी लुक देती है और कालेज पार्टी के लिए बैस्ट है. इस में कई मिक्स ऐंड मैच कलर्स होते हैं.

पार्टी गाउन : लौंग गाउन हमेशा से ही पार्टी गाउन रहे हैं फिर वह पार्टी चाहे घर की हो, औफिस की हो या फिर कालेज की. ये जौर्जेट, शिफौन, नैट आदि कई फैब्रिक में आते हैं. इन पर एंब्रौयडरी, सीक्वैंस, मोती, जरी आदि का काम होता है. वैसे, अगर इसे सोबर लुक देना हो तो इस के लिए फ्लोरल प्रिंट के गाउन भी लिए जा सकते हैं.

मुख्य कोच की जिम्मेदारी संभालने को तैयार हैं शेन बान्ड

आपको बता दें कि पिछले सत्र में मुंबई इंडियन्स के गेंदबाजी कोच रहे न्यूजीलैंड के पूर्व तेज गेंदबाज शेन बान्ड की निगाह आईपीएल में किसी टीम का मुख्य कोच बनने पर लगी है. खबर के मुताबिक आस्ट्रेलिया में होने वाली एशेज सीरीज के पहले तीन टेस्ट मैचों के लिये बान्ड का इंग्लैंड का गेंदबाजी कोच बनना तय है, लेकिन आधिकारिक पुष्टि होने से पहले वह इस मुद्दे पर बात नहीं करना चाहते. न्यूजीलैंड के गेंदबाजी कोच रह चुके बान्ड ने कहा, ‘‘मैं आईपीएल में मुख्य कोच के तौर पर जाना पसंद करूंगा. मुझे न्यूजीलैंड टीम के साथ काम करना पसंद आएगा, हालांकि मुझे नहीं पता कि यह कब संभव होगा.’

उन्होने यह भी कहा कि वे इसकी तैयारी फिलहाल इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की किसी फ्रेंचाइजी के साथ करना चाहते हैं. इसके बाद ही वे मौका मिलने पर राष्‍ट्रीय टीम के लिए यह जिम्‍मेदारी निभाएंगे.

इंग्लैंड के गेंदबाजी कोच ओटिस गिब्सन के दक्षिण अफ्रीका के मुख्य कोच बनने के बाद ऐसी खबरें थी कि कुछ समय के लिए बान्ड को यह जिम्मेदारी मिल सकती है, हालांकि इन खबरों से बान्ड ने साफ इनकार किया है. उन्होंने कहा, ‘मेरे बच्चे उस उम्र में हैं, जब मुझे उनके साथ वक्त बिताना जरूरी है. इसलिये जो भी मौका मिलेगा उसे देखना होगा कि क्या वह मुझसे जुड़े लोगों (परिवार) के लिहाज से सही है.’

बान्ड अभी न्यूजीलैंड ‘ए’ टीम के कोच हैं जो भारत दौरे पर आएगी. इससे पहले वे न्यूजीलैंड की पुरुष और महिला टीम के गेंदबाजी कोच भी रहे हैं. गौरतलब हैं कि बान्‍ड 145 किमी प्रति घंटा की गति से गेंदबाजी करते थे लेकिन चोटों के कारण उनका करियर बहुत लंबा नहीं चल सका.

इस भूमिका के लिए रजनीकांत हैं विशाल भारद्वाज की पहली पसंद

मशहूर फिल्मकार विशाल भारद्वाज ने कहा कि अगर वह शेक्सपियर की कृति पर चौथी फिल्म बनाते हैं तो उसमें किंग लियर की भूमिका के लिए रजनीकांत उनकी पहली पसंद होंगे. भारद्वाज ने कहा, ‘हैदर’ बनाने से पहले मैंने ‘किंग लियर’ की पटकथा पर काम किया था और मुख्य भूमिका के लिए रजनीकांत की कल्पना की थी. मैं अगर कभी भी इस फिल्म को बनाने का फैसला करता हू्ं तो वह मेरी पहली पसंद होंगे.’

भारद्वाज से पूछा गया कि वे शेक्सपियर की कालजयी रचनाओं को फिल्मों के लिए क्यों चुनते हैं? इसपर उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि जहां ‘मकबूल’ संयोग से हो गयी वहीं मैनें बाकी दोनों फिल्में उपन्यास ‘त्रय’ पर फिल्मों का त्रय पूरा करने की कोशिश करते हुए बनायी.

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर भारत के फिल्मकारों को कहानियां बयां करने और एक फिल्म आंदोलन का निर्माण सुनिश्चित करने के लिए आगे आना चाहिए. अगर आप अपनी कहानियां बयां नहीं करेंगे तो कोई और आपके लिए यह काम नहीं करेगा. पूर्वोत्तर के फिल्मकार ही क्षेत्र के साहित्य, स्वभाव एवं परंपराओं को पर्दे पर सर्वश्रेष्ठ तरीके से पेश कर सकते हैं.

आपको बता दें कि भारद्वाज की आखिरी फिल्म ‘रंगून’ का अधिकतर हिस्सा पूर्वोत्तर के राज्यों – असम एवं अरूणाचल प्रदेश में फिल्माया गया था. भारद्वाज शेक्सपियर की कृतियों ‘मैकबेथ’, ‘ओथेलो’ और ‘हेमलेट’ पर क्रमश: ‘मकबूल’, ‘ओमकारा’ और ‘हैदर’ फिल्म बना चुके हैं.

जब सुनील गावस्कर के कारण इस क्रिकेटर की पैंट हो गई गीली

आपने क्रिकेट से जुड़े कई रोचक किस्से तो सुने होंगे मगर आज हम आपको ऐसे वाकये के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे जानकर आप शायद एक पल यकीन तक ना करें, मगर ये सच है. बात 1982 की है जब पाकिस्तान के खिलाफ फैसलाबाद टेस्ट में सुनील गावस्कर 90 रन बनाकर खेल रहे थे.

इसी बीच संदीप पाटिल बाथरूम जाने के लिए अपनी कुर्सी से उठे मगर टीम मैनेजर फतेहसिंह राव गायकवाड़ ने उन्हें रोक लिया. इसके पीछे की वजह ये थी कि उस वक्त जब कोई खिलाड़ी शतक के करीब होता था तो कोई भी खिलाड़ी ड्रेसिंग रूम छोड़कर नहीं जाता था.

संदीप पाटिल कुर्सी पर वापस बैठ तो गए मगर उन्हें इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि गावस्कर अगले 10 रन कितनी देर में बना पाएंगे. गावस्कर ने तो हद ही कर दी. उन्हें 92 से 100 के बीच पहुंचने में पूरे 1 घंटे लग गए लेकिन जब तक गावस्कर ने अपना शतक पूरा किया तब तक संदीप पाटिल अपनी पैंट गीली कर चुके थे.

बता दें कि 10 जुलाई 1949 को जन्में सुनील गावस्कर ने 125 टेस्ट मैचों में 16 बार नाबाद रहते हुए 34 शतक और 45 अर्धशतक की मदद से 10,122 रन बनाए. इस दौरान उन्होंने नाबाद 236 रन की भी पारी खेली थी. वहीं बात अगर वनडे की करें तो इस खिलाड़ी ने 108 मैचों में 62.26 की स्ट्राइक के साथ 3,092 रन बनाए. गावस्कर को 1975 में अर्जुन पुरस्कार, 1980 में विस्डन और उसी वर्ष पद्म भूषण से भी सम्मानित किया जा चुका है.

गावस्कर अपने समय काल में विश्व क्रिकेट में 3 बार, एक वर्ष में एक हज़ार रन, सर्वाधिक शतक (34), सर्वाधिक रन (नौ हजार से अधिक), सर्वाधिक शतकीय भागेदारियां एवं प्रथम श्रृंखला में सर्वाधिक रन बनाने वाले एकमात्र बल्लेबाज रहे हैं.

क्या आपका स्मार्टफोन भी हो गया है स्लो..!

ज्यादातर लोग ऐंड्रायड स्मार्टफोन इस्तेमाल करते हैं. ऐंड्रायड स्मार्टफोन के हैंग होने या फिर धीरे काम करने की वजह हमेशा ही बनी रहती है. जाहिर है कि आपके साथ भी यह परेशानी आई होगी. कुछ टिप्स अपनाकर आप इस परेशानी से निजात पा सकते हैं. जी हां, इन टिप्स के जरिए आपका ऐंड्रायड स्मार्टफोन सुपरफास्ट बन जाएगा.

ब्राउजर बदलें

ऐंड्रायड स्मार्टफोन में गूगल क्रोम ब्राउजर डिफाल्ट होता है. ये काफी हेवी ब्राउजर होता है. इस वजह से फोन की बैटरी और परफार्मेंस पर असर पड़ता है. इसके लिए आप ओपेरा ब्राउजर का इस्तेमाल कर सकते हैं.

होम स्क्रीन क्लीन रखें

अगर आपका फोन धीरे काम कर रहा है, तो इसके लिए पहला स्टेप ये हो सकता है कि आप अपनी होम स्क्रीन को क्लीयर कर दें. इससे फोन की परफार्मेंस बढ़ जाएगी. होम स्क्रीन से लाइव वालपेपर और विजेट्स हटा दें.

बेकार एप्स हटा दें

हमारे फोन में कई ऐसी एप्स होती हैं, जो आपके फोन की परफॉर्मेंस पर असर डालती हैं. इन एप्स का आपके फोन में कोई काम नहीं होता और शायद न ही आप इन्हें इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में इन्हें फोन से डिलीट करना बेहतर औप्शन है. इससे आपके फोन की स्पीड 15 फीसदी तक बढ़ जाएगी.

एंटी वायरस साफ्टवेयर हटा दें

अगर आपके फोन में कोई एंटीवायरस प्रोग्राम है तो इनसे आपका फोन स्लो हो सकता है. ऐसे में इस एप को डिलीट कर दें.

एप्स की औटो सीकिंग को बंद कर दें

सोशल मीडिया एप्स, वेदर एप्स तथा कई ऐसे एप्सी जो रिमोट सर्वर से कनेक्ट होकर औटो सिंक होते हैं. उनसे भी फोन की परफार्मेंस कम होती है. ऐसे एप्स हर 15 मिनट में अपडेट होते हैं.

नियमित रूप से रिबूट करते रहिए

फोन को कुछ दिनों के भीतर रीबूट करता रहना चाहिए. इससे फोन की परफार्मेंस ठीक रहती है.

ब्लू व्हेल के खिलाफ अभियान चलाएंगे फेसबुक, ट्विटर और गूगल..!

सूचना तकनीक मंत्रालय ने आत्महत्या के लिए उकसाने वाले गेम ब्लू व्हेल के खिलाफ फेसबुक, ट्विटर और गूगल जैसे सर्च इंजन को जागरुकता अभियान चलाने की सलाह दी है. यह अभियान कैसे चलाया जाएगा, यह उन कंपनियों पर निर्भर करता है. लेकिन कोशिश यही है कि इन साइट्स पर लोगों को ब्लू व्हेल के दुष्परिणामों के बारे में आगाह किया जाए. हालांकि एक आशंका यह भी जताई जा रही है कि इस अभियान की वजह से उनमें इस खेल के चैलेंज के बारे में जानने की इच्छा जगे और शायद वे विभिन्न माध्यमों पर उसे ढ़ुंढ़ने की कोशिश भी करेंगे.

फिलहाल, ऐसी आशंका को खारिज करते हुए अधिकारियों ने कहा कि सरकार पहले ही गूगल इंडिया, याहू इंडिया, फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप्प व इंस्टाग्राम को अपने प्लेटफार्म से इस गेम की लिंक को ब्लाक करने का निर्देश दे चुकी हैं. यही नहीं यहां वह इस बात पर भी जोर दे रही हैं कि मिलते जुलते नाम वाले वेबसाइट पर नजर रखी जाए.

देश में इस खेल के कई मामले सामने आए है. जुलाई में तिरुवनंतपुरम और मुंबई में दो बालको ने ऊंची इमारत से कूद कर आत्महत्या कर ली वहीं अगस्त में पश्चिम बंगाल में दसवीं कक्षा के छात्र ने प्लास्टिक बैग में मुंह फंसा कर और केरल में 22 साल के युवक ने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी. इस महीने की शुरुआत में मध्य प्रदेश के इंदौर में तेज रफ्तार से आ रही ट्रेन के सामने कूद कर एक छात्र ने आत्महत्या की.

इस बीच, जांच अधिकारियो को आत्महत्या के कम से कम दो मामले में मोबाइल डाटा पूरी तरह से साफ मिला. आशंका है कि आत्महत्या के पहले एडमिन ने सब कुछ मिटा देने को निर्देश दिया हो. अधिकारियों की माने तो ऐसे में आत्महत्या की वजह ब्लू व्हेल चैलेंज साबित करने में खासी दिक्कत होगी. वैसे कुछ मामलो में मृतकों की परिजनों ने खुद ही जांच अधिकरियों को ब्लू व्हेल चैलेंज के बारे में बताया.

अधिकारियों ने अभिभावकों को सलाह दी है कि वो अपने बच्चों और खास तौर पर तनावग्रस्त बच्चों पर नजर रखें. किसी भी तरह की अस्वाभाविक हरकतों जैसे अकेले-अकेले ज्यादा वक्त गुजारना, देर रात बिना बताए कहीं जाना, शरीर पर जख्म उकेरने का पता चलने पर उचित कदम उठाएं.

आपको बता दें कि ब्लू व्हेल गेम एक तरह का इंटरनेट चैलेंज है जो रुस से शुरु होकर अब कई देशो में फैल चुका है. चैलेंज के तहत एडमिन खेल में भाग लेने वालों को 50 दिन की अवधि में तरह-तरह के टास्क सौंपता है. इन टास्क में विचित्र-विचित्र किस्म के काम करना जैसे सबसे प्रिये दोस्त को गाली सुनाना, रात में कब्रगाह जाना, हाथ पर ब्लेड से व्हेल की आकृति बनाना, ऊंची जगह पर एक पांव पर खड़ा होना, डरावनी फिल्में देखना आदि शामिल है. खेल का अंत भाग लेने वाले की आत्महत्या के साथ होता है.

चीन की ‘मनमानी’ पर साथ आए भारत, अमेरिका और जापान

चीन की ‘मनमानी’ पर भारत को अमेरिका और जापान का साथ मिला है. तीनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के वार्षिक सत्र से इतर त्रिपक्षीय वार्ता में अप्रत्यक्ष तौर पर बीजिंग पर निशाना साधा. सोमवार को न्यूयॉर्क पहुंचने के बाद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अमेरिका और जापान के विदेश मंत्रियों के साथ वार्ता की. उच्च स्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहीं सुषमा एक हफ्ते तक यहीं रुकेंगी.

तीनों देशों ने चीन के विस्तारवादी रवैये व क्षेत्रीय विवादों में उलझे रहने और उत्तर कोरिया के प्रति नरम रवैया रखने की अप्रत्यक्ष तौर पर आलोचना की. सुषमा स्वराज, अमेरिकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन और जापानी विदेश मंत्री तारो कोनो के बीच समुद्री सुरक्षा (दक्षिण चीन सागर), संपर्क (वन बेल्ट वन रोड) और परमाणु अप्रसार (उत्तर कोरिया) के मुद्दों पर चर्चा हुई.

बातचीत के दौरान तीनों देश के मंत्रियों ने इस बात पर जोर दिया कि समुद्र में आवाजाही की आजादी सुनिश्चित की जानी चाहिए, अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान किया जाना चाहिए और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान तलाशे जाने चाहिए.

क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान जरूरी

संपर्क के मुद्दे पर यह कहा गया कि यह अंतरराष्ट्रीय तौर पर मान्यता प्राप्त नियमों के तहत होना चाहिए. साथ ही संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए. चीन दुनिया के बड़े हिस्से में संपर्क बढ़ाने के लिए अपने वन बेल्ट वन रोड प्रोजेक्ट पर जोर दे रहा है. मगर इसका एक हिस्सा पाक के कब्जे वाले गिलगित बाल्टिस्तान से गुजरेगा, जिसे भारत अपना मानता है.

पाक के साथ द्विपक्षीय वार्ता नहीं : अकबरूद्दीन

अमेरिका में भारत के राजदूत नवतेज सरना और संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरूद्दीन ने हवाई अड्डे पर सुषमा का स्वागत किया. अकबरुद्दीन ने यह भी बताया कि सुषमा और उनके पाकिस्तानी समकक्ष के बीच द्विपक्षीय बैठक नहीं होगी. सुषमा की अमेरिकी यात्र के दौरान उनके कार्यक्रम की जानकारी देते हुए सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद, पलायन और शांतिरक्षण जैसे मुद्दे इस साल भारत के लिए अन्य महत्वपूर्ण केंद्रित क्षेत्र हैं. उन्होंने बताया कि सुषमा यहां जलवायु परिवर्तन संबंधी कदमों को लेकर संयुक्त राष्ट्र महासचिव द्वारा चयनित देशों के विशेष पैनल में हिस्सा लेंगी.

सुषमा स्वराज 20 द्विपक्षीय और त्रिपक्षीय बैठक करेंगी

सुषमा स्वराज 23 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र को संबोधित करेंगी. अपने एक हफ्ते के कार्यक्रम में वह करीब 20 द्विपक्षीय और त्रिपक्षीय बैठक करेंगी. अपने व्यस्त कार्यक्रम के बीच सुषमा स्वराज संयुक्त राष्ट्र के सुधारों पर एक उच्चस्तरीय बैठक में भी शिरकत करेंगी, जिसकी अध्यक्षता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप करेंगे.

सुधार प्रयासों के पक्ष में भारत

भारत उन 120 देशों में शामिल है, जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासचिव के सुधार संबंधी प्रयासों का समर्थन किया था. भारत कह चुका है कि संयुक्त राष्ट्र सुधारों को विस्तृत एवं व्यापक होने की आवश्यकता है. बदलाव केवल सचिवालय तक ही सीमित नहीं होने चाहिए.

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