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वीडियो : इस एक्ट्रेस ने अपने सेक्सी डांस मूव्स से मचाया सोशल मीडिया पर धमाल

बिग बौस में अपनी अदाओं के जलवे दिखा चुकीं नोरा फतेही इन दिनों अपने जबरदस्त मूव्स को लेकर चर्चा में हैं. वैसे तो नोरा पहले भी पहले भी अपने डांस से धमाका कर चुकीं हैं.

पर इसबार सोशल मीडिया पर उनके जो वीडियो सामने आए हैं उन्हें देखकर कोई भी खुद को उनके डांस मूव्स पर थिरकने से रोक नहीं पाएगा. बता दें कि कुछ दिन पहले उन्होंने अपने इंस्टाग्राम एकाउंट पर बैले डांस का वीडियो डाला था. जो जमकर वायरल हो रहा है.

इस गाने में नोरा फतेही बहुत ही शानदार ढंग से डांस कर रही हैं, उनकी कमर बीट्स पर चल रही हैं. इस वीडियो के जरिये उन्होंने दिखा दिया है कि बैले डांस में वे कितनी माहिर हैं.

आइये देखें उनका बैले डांस वीडियो

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नोरा अपने बेहतरीन डांस के लिए पहचानी जाती हैं . वे कमाल का बैले डांस करती हैं. बता दें कि नोरा फतेही ने ‘बाहुबली’ में ‘मनोहारी’ गाने पर जबरदस्त डांस किया था. प्रभास के साथ इस गाने में उनकी कैमेस्ट्री काफी जमी भी थी. उन्होंने इस गाने से काफी चर्चा बटोरी और लोगों ने नोरा को काफी पसंद भी किया. यही नहीं, बिग बौस के घर में भी नोरा ने अपनी सेक्सी अदाओं के साथ बेहतरीन डांस मूव्ज दिखाए थे.

वैसे कुछ दिन पहले ही नोरा फतेही हार्डी संधू के नए पंजाबी सान्ग में भी नजर आई थीं. हार्डी के नए गाने ‘नाह’ में वे उनकी महबूबा के रोल में दिखी थीं. नोरा फतेही इंडो-कैनेडियन हैं. 25 वर्षीया नोरा ने बौलीवुड फिल्म ‘रोरः टाइगर्स औफ द सुंदरबंस’ से अपने करियर की शुरुआत की थी. उसके बाद वे ‘क्रेजी कुक्कड़ फैमिली’ में भी नजर आईं लेकिन उनकी ये फिल्में बौक्स औफिस पर कुछ खास कमाल न दिखा सकीं. भले ही नोरा ने फिल्मों से नाम न कमाया हो पर उन्होंने अपने आइटम सान्ग से काफी सुर्खियां बटोरी है.

तेलुगु फिल्म ‘टेंपर’, ‘बाहुबली’ और ‘किक-2’ में उनके गानों ने उन्हें पौपुलर बनाने का काम किया. वे मलयालम फिल्म ‘डबल बैरल’ में भी नजर आ चुकी हैं. फतेही इंग्लिश, हिंदी, फ्रेंच और अरेबिक भाषाएं बोल लेती हैं.

स्मार्टफोन यूजर्स सावधान, खतरे में है आपका बैंक अकाउंट

आज हममे से ज्यादातर लोग आपना आधे से ज्यादा काम अपने स्मार्ट फोन पर ही कर लेते हैं. आपको तो पता ही होगा कि स्मार्टफोन में रोजाना नए-नए अपडेट तो आते रहते हैं. रोज नए ऐप्स भी आ रहे हैं और स्मार्टफोन यूजर बिना सोचे-समझे इन्हें डाउनलोड भी कर लेते हैं. लेकिन बिना सोचे समझे ऐप्स या सौफ्टवेयर को अपडेट कर लेना आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है. ऐसे में आपको कुछ भी डाउनलोड करते समय या सौफ्टवेयर अपडेट करते समय थोड़ी सावधानी बरतने की जरूरत है. हम आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हाल ही में एक नया एंड्रौयड मालवेयर ढूंढा गया है जो 232 बैंकिंग ऐप्स को निशाना बना रहा है. दावा किया जा रहा है कि मालवेयर को यूजर्स के लौगिन से जुड़ी जानकारियां चोरी करने के लिए डिजाइन किया गया है.

क्या होता है मालवेयर

मालवेयर एक तरह का सौफ्टवेयर है, जिसे कंप्यूटर या स्मार्टफोन में बिना यूजर की जानकारी के सेंध मारने के लिए बनाया जाता है. इसके जरिए हैकर्स स्मार्टफोन डिवाइस को टारगेट करते हैं और आपका डिवाइस हैक कर उसमें से जरूरी जानकारी चोरी कर लेते हैं.

इन बैंकिंग ऐप्स पर है खतरा

रिपोर्ट्स के मुताबिक, नया मालवेयर भारतीय बैंकों के ऐप्स को निशाना बना रहा है. इनमें HDFC मोबाइल बैंकिंग, एक्सिस मोबाइल, SBI पर्सनल, ICICI बैंक, IDBI बैंक, बड़ौदा एमपासबुक और यूनियन बैंक के ऐप्स शामिल हैं. क्विकहील सिक्योरिटी लैब्स के मुताबिक इस एंड्रौयड बैंकिंग मालवेयर को Android.banker.A2f8a बताया जा रहा है.

क्यों किया गया है डिजाइन

क्विकहील सिक्योरिटी लैब्स का दावा है कि इस मालवेयर को यूजर्स के लौगिन से जुड़ी जानकारियां चोरी करने के लिए डिजाइन किया गया है. यह मालवेयर मोबाइल के एसएमएस हाइजैक करने से लेकर खतरनाक सर्वर पर फोन के कौन्टैक्ट्स और एसएमएस अपलोड कर सकता है. मालवेयर आपके स्मार्टफोन के मैसेज को हाइजैक करने के साथ ही पोन पर आने वाले OTP को भी रीड कर लेता है. यह आपके फोन की सभी जरूरी जानकारी को चोरी कर आपके बैंक अकाउंट से पैसे आदि आसानी से निकाल सकता है.

फोन में कैसे भेजा जाता है मालवेयर

क्विकहील के ब्लौग के मुताबिक, Android.banker.A2f8a फर्जी फ्लैश प्लेयर ऐप के जरिए फैलाया जा रहा है. इसे आम तौर पर थर्ड पार्टी ऐप स्टोर में भेजा जा रहा है. ऐडोब फ्लैशप्लेयर इंटरनेट पर काफी पौपुलर है. फ्लैश प्लेयर की लोकप्रियता दुनिया भर में काफी है, इसलिए इसे हैकर्स टारगेट पर पहुंचने के लिए इस्तेमाल करते हैं.

कैसे काम करता है ये मालवेयर

यह मालवेयर फ्लैश के जरिए आपके स्मार्टफोन में इंस्टौल होता है. हालांकि, इंस्टौल होने पर इसका आइकौन नहीं दिखाई देता. दरअसल, मालवेयर बैकग्राउंड में काम करता है और इन 232 बैंकिंग ऐप्स में से किसी एक को चेक करता है. टारगेट ऐप मिलते ही स्मार्टफोन यूजर को नोटिफिकेशन भेजता है, जो दिखने में बैंकिंग ऐप जैसा ही होता है. यूजर इन भेजे गए नोटिफिकेशन से आसानी से धोखा खा जाते हैं. नोटिफिकेशन को ओपन करते की एक फर्जी लौग इन विंडो दिखाई देती है, यहीं से आपकी संवेदनशील जानकारियां हैकर्स के पास जानी शुरू हो जाती है. इसलिए सावधान रहकर ही किसी नोटिफिकेशन को औन करें.

बिहार के बैंकों में मुनाफाखोरी का खेल, सिक्के जमा करवा रहा है ‘सिक्का गिरोह’

बिहार में अचानक से बड़ी संख्या में सिक्का गिरोह पैदा हो गये हैं. वे सुनियोजित तरीके से बैंकों में सिक्का जमा करा रहे हैं. खबरें हैं कि दर्जनों लोग बिहार शहर के अलग-अलग बैंकों में अपने खाते में औसतन दो हजार रुपये के सिक्के जमा करने के लिए पहुंच रहे हैं. इसके पीछे का कारण मुनाफाखोरी बताया जा रहा है.

नोट एक्सचेंज में मुनाफाखोरी का खेल : जानकारों के मुताबिक नोट के बदले पैसा बदलने वालों की संख्या भी अच्छी खासी बढ़ गयी है. ये दलाल दुकानदारों को 100 रुपये के सिक्के के बदले 80-90 रुपये दे रहे हैं. दुकानदार अपने दुकान से सिक्के हटाने के चक्कर में ऐसा कर रहे हैं. वे दुकानदारों से सिक्के जमा कर हर दिन अपने बैंक खाते में जमा कर रहे हैं.

मुनाफाखोरी करने वाले लोगों अथवा दलालों ने अपने अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर प्रमुख बैंकों में खाता खुलवा रखा है और इन्ही खातों का इस्तेमाल वे मुनाफाखोरी के लिए कर रहे हैं. खाता होने के कारण बैंक प्रबंधक सिक्के लेने से मना नहीं कर पा रहे हैं. बैंक प्रबंधकों की मानें, तो जिस तरह से पिछले कुछ दिनों से बैंक में सिक्के जमा करने वाले लोगों की संख्या अप्रत्याशित तौर पर बढ़ रही है, वह चिंताजनक है.

सिक्के जमा करने बड़ी संख्या में चैन बनाकर पहुंच रहे हैं लोग : स्टेट बैंक, सेंट्रल बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, यूनियन बैंक, कौर्पोरेशन बैंक, केनरा बैंक, बैंक औफ बड़ौदा आदि बैंकों में हर दिन बड़ी संख्या में लोग चेन बना कर अपने-अपने खाते में रुपये के साथ एक हजार-दो हजार रुपये के सिक्के लेकर पहुंच रहे हैं.

बैंक अफसरों के मुताबिक नोटबंदी के दौरान जिस तरीके से बड़े लोगों का पैसा जमा कराने कई लोग लाइन लगा कर आ रहे थे, ठिक उसी प्रकार से अब बड़े कारोबारियों का पैसा जमा कराने दलालों की एक पूरी फौज खड़ी हो गयी है.

बैंक सिक्के लेने से कतरा रहे हैं

बैंकों में लगातार थोक में सिक्का जमा करने की वजह से बैंकों के सामने उन्हें स्टोर करने की समस्या आ रही है. ऐसे में बैंक अब सिक्के लेने में कतरा रहे हैं.

बैंक शाखा मजबूर : ज्ञात हो कि भारतीय रिजर्व बैंक ने कोई भी खाताधारक से एक दिन में एक हजार रुपये के सिक्के स्वीकार करने के निर्देश सार्वजनिक और निजी बैंक को दे रखे हैं. जबकि भारतीय रिजर्व बैंक बैंकों में जमा सिक्के नहीं लेता है. ऐसे में जमा कराए जा रहे सिक्को का बैंक शाखा क्या करें, उनकी समझ में नहीं आ रहा है.

आम लोगों की परेशानी बढ़ी : दुकानदार एक रुपये के छोटे सिक्के स्वीकार नहीं कर रहे हैं. इस कारण आम लोगों को काफी परेशानी दिन पर दिन बढ़ रही है. लगातार देखा जा रहा है कि आम आदमी से लेकर औटो चालक, ठेला चालक, चाय दुकानदार तथा होटल संचालक हर कोई एक रुपये के छोटे सिक्के लेने से कतरा रहा है.

एक दूसरा भी पहलू : नोटबंदी के दौरान बैंकों द्वारा भारी मात्रा में बड़े नोट के बदले सिक्के दिये गये थे. वही सिक्के आम जनता और दुकानदारों के लिए भारी परेशानी का कारण बने हुए हैं. बैंकों द्वारा सिक्के नहीं लिये जाने के कारण बड़ी संख्या में सिक्के जमा हैं. लोगों ने बैंकों द्वारा सिक्के नहीं लेने के संबंध में वित्त मंत्री और रिजर्व बैंक को पत्र लिख कर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है.

बंद करें स्मार्टफोन की ये सेटिंग्स, हो सकता है भारी नुकसान

अक्सर जब हम नया स्मार्टफोन खरीदते हैं तो उसमें तरह-तरह की सेटिंग्स को औन रखते हैं. कुछ लोगों को इन सेटिंग्स पूरी तरह से जानकारी होती है पर वहीं ज्यादातर लोग अपने फोन की इस सेटिंग्स से बिल्कुल अनजान होते हैं. आपके फोन पर की गई पर सेटिंग्स की जानकारी होना आपको बेहद जरूरी है. क्योंकि आपके फोन पर की गई की सेटिंग्स ऐसी होती है जो आपके फोन पर बुरा असर डालती है. ये फोन के डाटा, बैटरी और सेफ्टी को भारी नुकसान पहुंचाती है. कभी-कभी तो इस तरह की सेटिंग आपके फोन पर पहले से ही औन रहती हैं तो कभी कभी ये गलती से औन हो जाती है और आपको पता भी नहीं चल पाता.

फोन की कुछ सेटिंग्स ऐसी होती है जिनको औफ ही रखना चाहिए. आज हम आपको ऐसी ही 3 सेटिंग के बारे में बताने जा रहे हैं.  इनको अपने फोन पर औफ रखना बेहद जरूरी है.

साइन इन टू गेम्स औटोमैटिकली और यूज दिस अकाउंट टू साइन इन को हमेशा रखें औफ

साइन इन टू गेम्स औटोमैटिकली और यूज दिस अकाउंट टू साइन इन को औफ करने के लिए फोन की सेटिंग में जाकर गूगल में जाएं. गूगल का विकल्प हर स्मार्टफोन में अलग होता है. हालांकि, ये फोन की कौमन सेटिंग्स हैं जो सेटिंग के विकल्प में ही मिलती हैं. इसमें जाने के बाद आपको प्ले गेम्स का विकल्प दिखाई देगा. इस पर टैप करने के बाद दो सेटिंग्स दिखाई देंगी. साइन इन टू गेम्स औटोमैटिकली और यूज दिस अकाउंट टू साइन इन दोनों सेटिंग्स को हमेशा औफ ही रखना चाहिए.

लगातार खर्च होती है बैटरी

इन दोनों सेटिंग्स को औन रखने से कोई भी गेम डाउनलोड करने से उसमें औटोमैटिकली आप साइन इन हो जाते हैं. फोन का डाटा और बैटरी लगातार खर्च होती है. इससे बचने के लिए इन सेटिंग्स को औफ रखनाही बेहतर है. इन सेटिंग्स की वजह से स्मार्टफोन के बैटरी की लाइफ आधी रह जाती है.

नोटिफिकेशन सेटिंग को बंद करें

ऊपर की दोनों सेटिंग्स को बंद करने के बाद नीचे जाने पर आपको रिक्वेस्ट नोटिफिकेशन का विकल्प दिखाई देगा. इस सेटिंग को भी औफ रखना बेहद ही जरूरी है. इनके औन रहने पर लगातार गेम्स से जुड़े नोटिफिकेशन आपके फोन पर आते रहते हैं. इससे भी फोन का डाटा और बैटरी खर्च होती है.

अगर आप भी चाहते हैं कि आपका डाटा और फोन की बैटरी लंबी चले या फिर आपका फोन हैंग न हो और उसकी स्पीड स्लो न हो तो इन सेटिंग्स को बंद रखना बेहद जरूरी है.

हार्दिक पंड्या की गलती माफी लायक नहीं : सुनील गावस्कर

दक्षिण अफ्रीका के साथ खेले जा रहे सेंचुरियन टेस्ट के तीसरे दिन जहां विराट कोहली की शानदार 153 रनों की पारी सुर्खियों में रही वहीं हार्दिक पंड्या के रन आउट होने के तरीके पर भी क्रिकेट दिग्गजों के बीच चर्चा का विषय बना रहा.

हुआ ये कि बल्लेबाजी के दौरान 68वें ओवर में हार्दिक पंड्या बेहद लापरवाह तरीके से रन आउट हो गए. टीम का स्कोर उस समय 209 रन था और एक सम्मानजनक स्कोर के लिए कप्तान विराट कोहली को दूसरे छोर पर उनकी जरुरत थी. लेकिन पंड्या ने लापरवाही से रन आउट होते हुए कप्तान का साथ छोड़ पवेलियन का रुख कर लिया. पंड्या की इस लापरवाही से लिटिल मास्टर के नाम से जाने जाने वाले पूर्व दिग्गज बल्लेबाज सुनील गावस्कर कीफी नाराज हो गए हैं. सुनील गावस्कर ने कहा है कि उनकी ‘यह हरकत माफ करने लायक नहीं है.’

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दरअसल 68वें ओवर में हार्दिक पंड्या ने एक रन लेने की कोशिश की, लेकिन विराट कोहली के वापस भेजने पर वह क्रीज पर आराम से टहलते हुए पहुंचे और उनका पैर व बैट दोनों ही हवा में था. पंड्या को आराम से लौटता देख फील्डर ने कोई गलती नहीं की और उनके क्रीज में पहुंचने से पहले ही गिल्लियां बिखेर दीं.

सिर्फ सुनील गावस्कर ही नहीं पूर्व क्रिकेटर और कमेंटेटर संजय मांजरेकर ने भी पंड्या के इस गैरजिम्मेदाराना व्यवहार पर उनकी क्लास ली है. मांजरेकर ने कहा, ‘आत्मविश्वास और अहंकार के बीच एक महीन रेखा होती है. यह पंड्या का अहंकार हो सकता है.’ आपको बता दें कि अगर पंड्या इस तरह आउट नहीं होते तो हो सकता था कि टीम इंडिया साउथ अफ्रीका पर बढ़त हासिल कर लेती. लेकिन भारत उल्टा अफ्रीका को 28 रनों की बढ़त दे बैठी.

पीएफ निकालना हुआ आसान, ऐसे करें औनलाइन क्लेम

ईपीएफ यानी इम्प्लौय प्रोविडेंट फंड का पैसा आपकी सैलरी से कटता है. हर महीने आपकी बेसिक सैलरी से 12% पीएफ काटा जाता है. यह हिस्सा आपके और संस्थान दोनों की तरफ से जमा होता है. एक तीसरा हिस्सा पेंशन फंड के रूप में जमा किया जाता है. यह एम्प्लौयर के खाते से जाने वाले पीएफ में से कटता है.

एक ही जगह नौकरी करने पर अक्सर लागों के पीएफ खाते में अच्छी खासी रकम जमा हो जाती है. लेकिन, नौकरी बदलने वाले अक्सर पीएफ का पैसा निकाल लेते हैं. हालांकि, पीएफ निकालने में उन्हें काफी लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. आज हम इस पैकेज के माध्यम से बता रहे हैं कि औनलाइन पीएफ निकालने के लिए कैसे अप्लाई करें कि आसानी से आपका पैसा निकल सके. हालांकि, रिटायरमेंट से पहले पीएफ का पैसा निकालने सरकार टीडीएस काटती है.

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औनलाइन करें आवेदन

अब आप घर बैठे ईपीएफ निकासी के लिए क्लेम कर सकते हैं. दरअसल, ईपीएफओ ने 4 करोड़ से ज्यादा पेंशन धारकों को औनलाइन पीएफ क्लेम की सुविधा दी है. औनलाइन पीएफ निकासी के चलते अब आपको ईपीएफ औफिस के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और दो हफ्ते के अंदर ही आपके अकाउंट में पैसा आ जाएगा.

ऐसे करें आवेदन

पीएफ निकासी के लिए ईपीएफओ की वेबसाइट पर जाना होगा. ईपीएफओ की साइट पर जाने के बाद आप फौर्म 31,19 और 10 सी का औप्शन मिलेगा. इनमें से अपनी आवश्यकता अनुसार फौर्म भरकर सब्मिट करना होगा. हालांकि, फौर्म भरने से पहले आपको अपनी डिटेल्स पूरी तरह से चेक करनी होंगी और केवाईसी अपडेट करना होगा.

ऐप से भी कर सकते हैं आवेदन

पीएफ निकासी की प्रकिया आप उमंग ऐप से भी पूरी कर सकते हैं. इस दौरान अगर आपको फौर्म सब्मिट करने में दिक्कत आ रही है तो सबसे पहले आपको अपना केवाइसी अपडेट करना होगा. केवाइसी पूरा ना होने के कारण आप फौर्म सब्मिट नहीं कर पाएंगे.

दो हफ्ते में आएगा पैसा

KYC पूरा करने के बाद आप को अपना अकाउंट नंबर देना होगा. इसके साथ ही आपको अपना पैन, आधार, यूएएन नंबर भी दर्ज करना होगा. फौर्म सब्मिट करने के दो हफ्ते भर के भीतर आपका पैसा आपके खाते में जमा हो जाएगा.

अफगानिस्तान के पहले टेस्ट मैच का गवाह बनेगा ये स्टेडियम

अफगानिस्तान क्रिकेट टीम टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू करने के लिए पूरी तरह से तैयार है. अफगानिस्तान की टीम अपना पहला टेस्ट मैच भारत के खिलाफ खेलेगी. खबरे हैं कि दोनों टीमों के बीच पहला टेस्ट मैच बेंगलुरू में हो सकता है. बीसीसीआई और अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड आज 16 जनवरी को यहां बैठक के बाद संयुक्त बयान जारी कर सकते हैं.

भारत और अफगानिस्तान के बीच यह ऐतिहासिक मैच इस साल जून में खेले जाने की संभावना है. बीसीसीआई ने पिछले महीने घोषणा की थी कि वह अफगानिस्तान के पदार्पण टेस्ट मैच की मेजबानी करेगा.

पिछले साल मिला टेस्ट टीम का दर्जा

अफगानिस्तान ने पिछले साल जून में आयरलैंड के साथ टेस्ट दर्जा हासिल किया था. इन दोनों के क्रिकेट बोर्ड इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के पूर्णकालिक सदस्य भी बने. अफगानिस्तान ने अच्छा प्रदर्शन किया है और उसके मुख्य लेग स्पिनर राशिद खान ने टी-20 फ्रेंचाइजी लीग जैसे आईपीएल में शानदार खेल दिखाया.

आईसीसी रैंकिंग में भी अफगानिस्तान की टीम ने टौप के 10 टीमों में शामिल है. टी-20 में अफगानिस्तान की टीम 9वें नंबर पर हैं जबकि वनडे में 11वें स्थान पर कायम है.

बता दें कि अफगानिस्तान अपने सभी घरेलू मैच नोएडा के शहीद विजय सिंह पथिक स्पोर्ट्स कौम्पलेक्स में खेलता है. इस लिहाज से परिस्थितियों के हिसाब से अफगानिस्तान की टीम के लिए भारत में खेलने में कोई मुश्किल नहीं होनी चाहिए.

फिल सिमंस बने अफगानिस्तान के मुख्य कोच

वेस्टइंडीज के फिल सिमंस अफगानिस्तान क्रिकेट टीम के मुख्य कोच हैं. सिमंस के मार्गदर्शन में टीम फरवरी में शारजाह में जिम्बाब्वे के खिलाफ होने वाली सीरीज में हिस्सा लेगी. सिमंस इस सीरीज से पहले टीम के साथ काम करना शुरू कर देंगे. सिमंस का करार 2019 विश्व कप तक का है.

वेबसाइट-क्रिकइंफो ने एसीबी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शाफिक स्टानिकजाई के हवाले से लिखा है, “हमने फिल सिमंस को इसलिए चुना क्योंकि वह हमारी टीम को समझते हैं. वह वेस्टइंडीज, जिम्बाब्वे और आयरलैंड की टीमों के कोच रह चुके हैं. यह सभी वही टीमें हैं जो अफगानिस्तान से विश्व कप क्वालीफायर में खेलेंगी.

अब आपके चेहरे से होगा आधार कार्ड का सत्यापन, जानें कैसे

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आधार औथेंटिकेशन के लिए फेस रिकौग्निशन को अनुमति दे दी है. फिलहाल फिंगरप्रिंट और आईरिस स्कैनर के जरिये आधार का प्रमाणीकरण किया जाता है. अब इसमें फेस रिकौग्निशन को भी जोड़ दिया गया है. इस कदम से प्रमाणीकरण और भी आसान हो जाएगा. यह खासतौर से उन लोगों के लिए फायदेमंद रहेगा जिन्हें आइरिस या फिंगरप्रिंट के जरिए बायोमेट्रिक औथेंटिकेशन कराने में मुश्किल आती है.

कबसे शुरू होगी यह सुविधा?

इस सुविधा को 1 जुलाई 2018 से शुरू कर दिया जाएगा. फेस रिकौग्निशन के साथ-साथ अन्य तरीके भी उपलब्ध रहेंगे. UIDAI के अनुसार- ”इस तरीके से उन लोगों को बायोमेट्रिक डिटेल्स देने में आसानी होगी जिनकी फिंगरप्रिंट खराब हो चुकी है या जो अधिक काम या ज्यादा उम्र होने के कारण प्रमाणीकरण नहीं कर पाते.”

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फ्यूजन मोड में ही होगा इस्तेमाल

अभी तक आधार बायोमेट्रिक औथेंटिकेशन के दो तरीके थे. एक फिंगरप्रिंट और दूसरा आइरिस औथेंटिकेशन.

UIDAI ने बताया- ”फेस औथेंटिकेशन सभी निवासियों को अतिरिक्त विकल्प प्रदान करता है. इस तरह के औथेंटिकेशन को फ्यूजन मोड में ही स्वीकार किया जाएगा. इसका मतलब यह की फेस रिकौग्निशन के साथ-साथ आपको फिंगरप्रिंट या आईरिस या ओटीपी में से किसी एक साथ आधार नंबर को सफलतापूर्वक औथेंटिकेट करना होगा.”

औथेंटिकेशन के इस नए तरीके को ‘जरुरत के आधार पर’ अनुमति दी जाएगी. पिछले हफ्ते ही आधार की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वर्चुअल आईडी का विकल्प लाया गया था.

हर आधार कार्ड की होगी वर्चुअल आईडी

UIDAI जुलाई 2016 से इस सुरक्षा तंत्र पर काम कर रहा है और अब इसकी घोषणा भी की जा चुकी है. अब हर आधार कार्ड के लिए नई वर्चुअल आईडी बनाई जा सकती है. इसका इस्तेमाल तब किया जा सकेगा, जब थर्ड पार्टी को किसी भी तरह की वेरिफिकेशन या KYC प्रोसेस के लिए आधार नंबर की जरुरत पड़ेगी.

इसकी घोषणा करते हुए UIDAI ने कहा- ” आधार नंबर स्थायी रूप से पहचान का प्रमाण है. इसकी सुरक्षा और इसके लगातार उपयोग को बनाए रखने के लिए एक तंत्र प्रदान करना आवश्यक था.”

वर्चुअल आधार आईडी कैसे करेगा काम?

  • जब यूजर को अपने आधार नंबर की जरुरत होगी तो वह UIDAI की औफिशियल वेबसाइट पर जाकर या फोन पर mAadhaar ऐप का इस्तेमाल कर उसी समय 16 डिजिट का वर्चुअल आईडी जनरेट कर सकता है. यह नंबर 12 डिजिट के असली आधार नंबर के लिए मास्क की तरह काम करेगा.
  • वर्चुअल आईडी से सिर्फ नाम, पता और व्यक्ति की फोटो को एक्सेस किया जा सकेगा.
  • UIDAI के अनुसार यह वर्चुअल आईडी अस्थायी होगी और इसे किसी भी समय वापस लिया जा सकेगा. हर आईडी की वैलिडिटी की समय सीमा होगी. इस समय सीमा को यूजर खुद निश्चित कर पाएंगे.
  • अगर कोई भी व्यक्ति वर्चुअल आईडी जनरेट करता है तो पुरानी वाली आईडी अपने आप एक्सपायर हो जाएगी. इसका मतलब यह की एक व्यक्ति के लिए एक समय पर एक ही वर्चुअल आईडी का इस्तेमाल किया जा सकेगा.

देश में 119 करोड़ आधार कार्ड

UIDAI ने कहा है कि हाल के दिनों में आधार की निजता को लेकर कई सवाल उठे हैं. इसे ध्यान में रखते हुए आधार को और मजबूत करने के लिए नई प्रक्रियाएं शुरू की गई हैं. उल्लेखनीय है कि अब तक देश में 119 करोड़ आधार कार्ड बनाए जा चुके हैं. बैंक, टेलिकौम, सार्वजनिक वितरण और आयकर जैसे विभागों में इसका उपयोग किया जा रहा है.

एक मार्च से मिलेगी सुविधा

UIDAI के अनुसार, यह सुविधा एक मार्च से आ जाएगी और एक जून से सभी एजेंसियों को इसे लागू करना अनिवार्य होगा. यदि कोई एजेंसी इसके बाद वर्चुअल आइडी स्वीकार करने से इनकार करती है, तो उस पर आर्थिक जुर्माना भी लगाया जाएगा.

सोनम कपूर की किस मांग पर सरकार ने साधी है चुप्पी?

रविवार, 14जनवरी को पूरे देश भर में मकर संक्रांति का त्योहार बड़े धूमधाम से मनाया गया. लोगों ने इस त्यौहार को मनाते हुए पतंगबाजी का भरपूर आनंद लिया. लोग दिन भर चाइनीज और शीशा युक्त व आयरन युक्त मांझे से दूसरों की पतंग काटते हुए खुशियां मनाते रहे. मगर किसी ने भी इस बात की परवाह नही की कि उनके द्वारा उपयोग किए जा रहे चाइनीज व शीशायुक्त मांझा के चलते पूरे देश में कितने पक्षियों की जान गयी, कितने पक्षी घायल हुए, इस पर किसी का ध्यान नहीं गया.

सिर्फ मुंबई के परेल स्थित ‘‘द बांबे सोसायटी फार प्रिवेंसन आफ क्रूएलिटी टू एनीमल’’ के अस्पताल में 14 जनवरी को 62 कबूतर, तोता, चिड़िया सहित 80 पक्षी बुरी तरह से घायल अवस्था में पहुंचाए गए. इस अस्पताल के लेफ्टीनेंट कर्नल डा. जे सी खन्ना ने कहा-‘‘हम हर बार सलाह देते हैं कि लोग शीशा युक्त मांझे का उपयोग करने की बजाय काटन/धागे वाले मांझे का उपयोग करे, पर कोई ध्यान नहीं देता. सिर्फ हमारे यहां अस्सी पक्षी आए, पूरे देश में इनकी संख्या कितनी हुई होगी, उसकी जानकारी नही. हमें तो यह भी नहीं पता कि शीशा युक्त मांझे से घायल कितने पक्षियों को डाक्टरी मदद नही मिली और उनकी मौत हुई.’’

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उधर पक्षियों की इस दुर्दशा से अभिनेत्री सोनम कपूर भी काफी व्यथिति हैं. अपनी फिल्म ‘‘पैडमैन’’ का प्रमोशन करते हुए भी सोनम कपूर ने निजी हैसियत से कुछ पक्षियों को बचाया. सोनम कपूर उन अभिनेत्रियों में से हैं, जिन्होंने सबसे पहले छह वर्ष पहले ‘‘शीशायुक्त मांझे’’ को प्रतिबंधित करने की मांग करते हुए महाराष्ट्र राज्य के गृहमंत्री को पत्र लिखा था. मगर उन्हें उनके पत्र का जवाब नही मिला. जबकि वह हर वर्ष अपनी इस मांग के साथ महाराष्ट्र सरकार के पास पत्र भेजती रहती हैं.

शीशायुक्त मांझा पर प्रतिबंध की चर्चा करते हुए खुद सोनम कपूर ने हमसे एक्सक्लूसिव बात करते हुए कहा-‘‘मैं हर वर्ष पत्र लिखती रहती हूं. मगर आज तक मेरे किसी भी पत्र का जवाब मुझे नहीं मिला. शीशा युक्त मांझे से ना सिर्फ पक्षी मरते हैं, बल्कि इस मांझे का उपयोग कर पतंग उड़ाने वाले इंसान भी घायल होते हैं.

कई बार शीशा युक्त मांझा से गला कटने के कारण लोगों के मरने की भी खबर आयी है. इसलिए सरकार को पूरी तरह से इस तरह के मांझे पर बैन लगाना चाहिए. इससे पतंग उड़ाने पर असर नहीं पड़ेगा. क्योंकि पतंग उड़ाने के लिए कई तरह के दूसरे मांझे बाजार में हैं. पर पता नहीं क्यों सरकार कुछ कर नही रही है. मुझे भी पतंग उड़ाना पसंद है, मैं खुद इस तरह के मांझे से घायल हुई हूं.

मैं मानती हूं कि लोगों को हवा में उड़ती दूसरी पतंग को काटना बहुत पसंद है, पर उन्हें यह भी याद रखना चाहिए कि यह मांझा पक्षियों को मौत दे रहा है. आम इंसान भी मर रहे हैं. ऐसे में हर इंसान को उस पतंग उड़ाने के लिए उस मांझे का उपयोग करना चाहिए, जिससे पक्षी भी ना मरें और आम लोग भी. फिर किसी भी तरह के मांझे से पतंग उड़ाकर आनंद लिया जा सकता है. ’’

गांव की हर महिला को 8 सैनेटरी पैड मुफ्त में दिए जाने चाहिए : अक्षय कुमार

खिलाड़ी कुमार के रूप में मशहूर अभिनेता अक्षय कुमार ने अपने करियर में कई तरह की फिल्में की हैं. वह बेहतरीन एक्शन स्टार रहे हैं. पर कुछ वर्षों से वह सामाजिक सारोकारों, देशभक्ति व महिलाओ के मुद्दों पर आधारित फिल्मों को प्रधानता दे रहे हैं. घर के अंदर शौचालय बनवाने की बात करने के बाद अब अक्षय कुमार माहवारी के दौरान औरतों के सैनेटरी नैपकीन के उपयोग की बात करने वाली फिल्म ‘‘पैडमैन’’ लेकर आ रहे हैं. 25 जनवरी को प्रदर्शित होने वाली यह फिल्म सैनेटरी नेपकीन के क्षेत्र में क्रांति लाने का काम करने वाले अरूणाचलम मुरूगनाथन के जीवन की कहानी से प्रेरित है.

पिछली फिल्म ‘‘टौयलेट एक प्रेम कथा’’के प्रदर्शन के बाद किस तरह की प्रतिक्रिया मिली?

-इस फिल्म को लेकर सबसे खास बात सरकार की तरफ से सुनायी पड़ी. जिन अफसरों को गांव गांव जाकर लोगों को शौचालय बनवाने के लिए प्रेरित करने का काम दिया गया है, अब वह अफसर गांव में मेरी फिल्म ‘टौयलेट एक प्रेम कथा’ जाकर दिखाते हैं. लोग फिल्म देखकर समझ जाते हैं कि उन्हें शौचालय बनाना चाहिए. सोशल मीडिया पर अभी अभी आपके सामने किसी ने मेरे मोबाइल पर मैसेज भेजा है- ‘‘नो टौयलेट, नो मैरिज..कोयंबतूर में इस मांग के साथ 50 महिलाओं ने अपनी सास का घर छोड़ दिया. यह संदेश अभी आपके सामने ही आया है.

सैनेटरी नैपकीन को केंद्र में रखकर फिल्म‘‘पैडमैन’’बनाने की बात आपने कब सोची ?

-यह फिल्म मेरी पत्नी ट्विंकल खन्ना की सोच का परिणाम है. उन्होंने सबसे पहले एक किताब लिखी थी, जिसमें एक कहानी लिखी थी. उसके बाद उन्होंने इस विषय पर एक छोटी फिल्म बनाने का निर्णय लिया. पर जब मुझे इसकी जानकारी मिली, तो मैंने उनसे कहा कि यह विषय मुझे भी उत्साहित कर रहा है. इस फिल्म में मैं खुद भी अभिनय करना चाहूंगा. मुझे इसकी कहानी कमाल की लगी. जब मैं इस फिल्म से जुड़ गया, तो कई चीजें बदल गयीं. फिर मैने अपनी तरफ से कुछ शोध किया.

शोध के दौरान आपको पता चला होगा कि धर्म के आधार पर नियम कैसे बने?

-यह तो कुछ लोगों ने अपने घर के अंदर बना लिए हैं. जबकि किसी भी धर्म ग्रंथ में ऐसा कुछ नहीं लिखा है, जैसा कि हमारे घरों में औरतों की माहवारी के दौरान उनके साथ व्यवहार किया जाता है. मैंने खुद पढ़ा है कि जब लड़की के पीरियड  शुरू हों, तो उसे किचन/रसेाईघर में जाने से मना करें, क्योंकि उन दिनों उसे कमजोरी आती है, वह थकावट महसूस करती है. ऐसे में उसे आराम की जरुरत होती है. पर चीजों को गलत ढंग से पेश किया गया.

‘‘पैडमैन’’के आने के बाद क्या होगा?

-लोगों में जागरूकता आएगी. मुझे खुद नही पता कि मेरी फिल्म कितना व्यापार करेगी. पर मेरी आंखों में मेरी फिल्म हिट हो चुकी है. क्योंकि आज मैं एक कलाकार और आप एक बड़े पत्रकार इस मुद्दे को लेकर बात कर रहे हैं. सोशल मीडिया पर तमाम पुरुष इसी मुद्दे पर ट्वीट कर रहे हैं. अब तक लोग इसे छिपाकर रखते थे, बात करना पसंद नहीं करते थे. अब चर्चा तो हो रही है. मैं कहीं पढ़ रहा था कि एक लड़की स्कूल में थी. उसका पीरियड  शुरू हो गया, तो उसके कपड़ों में दाग लग गया. उसके शिक्षक ने सभी बच्चों के सामने कहा, ‘देखिए इसके कपड़ों में किस तरह का दाग लगा हुआ है.’ इससे शर्मसार होकर उस लड़की ने आत्महत्या कर ली. यह कितना गलत है. सच तो यह है कि इस फिल्म के निर्माण के पिछले दो वर्ष के दौरान मैने काफी कुछ सीखा.

सैनेटरी पैड पर जो जीएसटी हैं उसको हटाने की मांग नहीं की जानी चाहिए?

-मैं तो कुछ और ही चाहता हूं. मैं जीएसटी हटाने या टैक्स फ्री की बात नहीं करता. मैं तो कहता हूं कि गांवों में सैनेटरी पैड मुफ्त में दिया जाना चाहिए. यही होना चाहिए. हर गांव के सरपंच के माध्यम से हर महिला को हर माह कम से कम 8 सैनेटरी पैड मुफ्त में दिए जाने चाहिए.

आपने कहा कि पिछले दो साल के दौरान आपने बहुत कुछ सीखा है. तो आपके दिमाग में नही आता कि आपने जो कुछ सीखा है, उसे लिखें?

-लिखने से अच्छा तो मैं फिल्म ना बना दूं. मेरे लिए लिखने की बजाए फिल्म बनाना ज्यादा आसान है.

आप पढ़ते क्या हैं?

-मुझे पढ़ने की आदत नहीं है. मैं फिल्में देखता हूं. मैं लोगों की लिखी चीजों को सुनता हूं. मैं अपनी स्क्रिप्ट भी पढ़ता नहीं हूं, बल्कि लेखक से कहता हूं कि पढ़कर सुनाए. इसे आप मेरा आलस्यपना कह सकते हैं.

आप हर साल कम से कम चार फिल्में करते हैं. जबकि कुछ कलाकारों का मानना हैं कि वह अभिनय में परफैक्शन के लिए साल में एक फिल्म करते हैं. आप किसे सही मानते हैं?

-मुझे नही पता क्या सही है, क्या गलत है? लेकिन मैं पिछले 28 वर्षो से हर साल चार फिल्में करता आ रहा हूं. मैंने कभी भी किसी भी वर्ष अपने आपको काम करने से रोका नहीं. आज मेरी 130 फिल्में हो चुकी हैं. पर मैं यह नही कह सकता हूं कि मैं सहीं हूं या वह लोग सही हैं, जो साल में एक फिल्म करते हैं. मैं सिर्फ अपने काम पर यकीन रखता हूं.

130 फिल्में यानी कि 130 किरदार कर लिए. कोई ऐसा किरदार रहा, जिसने आपकी निजी जिंदगी पर प्रभाव डाला हो?

-मुझे अपनी हर फिल्म का हर किरदार बहुत ही अच्छी तरह से आज भी याद है. हर किसी किरदार से मैंने क्या सीखा है, मुझे पता है. लेकन फिल्म ‘ओह माय गौड’ने मुझे बहुत कुछ बदला. मैं भी धार्मिक इंसान हूं. भगवान में बहुत यकीन करता हूं. हम सभी भगवान की जिस तरह से पूजा करते हैं, भगवान के ऊपर तेल चढ़ाते हैं या उस पर दूध चढ़ाते हैं. यह दूध व तेल सीधे गटर में चला जाता है, किसी के उपयोग नहीं आता. पर यही दूध यदि मंदिर के बाहर बैठे भिखारी को दे दिया जाए, तो उसके परिवार के सदस्यों का पेट भर सकता है. यही तेल यदि  भिखारी को दे दिया जाए, तो उसके घर में कई दिन की सब्जी बन सकती है. फिल्म ‘ओह माय गौड’के बाद मुझे समझ में आया कि क्या सही है क्या गलत. सच कहूं तो मैं भी यही करता था, फिर अपने अंदर का जो विश्वास था, उसे मैंने बदला.

पहले मैं मंदिरों में बहुत जाता था. पर फिल्म देखने के बाद मैंने सोचा कि यदि मैं वैष्णो देवी मंदिर जाता हूं तो हवाई जहाज से आने जाने, होटल में रूकने, साथ में बौडीगार्ड का खर्च आदि मिलाकर करीबन डेढ़ लाख खर्च होते हैं. फिर तीन दिन में वापस आना होता है. तो मैंने सोचा कि क्यों ना यह पैसा इकट्ठा करके मैं किसी जरूरत मंद को दे दूं. तो अब जब मेरे दिल में किसी मंदिर में जाने का ख्याल आता है, मैं वहां जाने पर होने वाला खर्च जरूरतमंद को दे देता हूं. वह जरूरतमंद जब मेरा हाथ पकड़कर मुझे आशीर्वाद देता है, वह कहता है कि भगवान मेरा भला करे, तो मुझे बहुत अच्छा लगता है. कसम से कहता हूं, उस वक्त मुझे आंखें बंद करते ही वैष्णों देवी के दर्शन हो जाते हैं. आप खुद बताएं कि ऐसा आशीर्वाद वैष्णोदेवी मंदिर जाने पर मिलेगा या किसी की मदद करने पर. यह मेरे अंदर बहुत बड़ा बदलाव आया है.

अब आप किस मुद्दे पर फिल्म बनाना चाहेंगे?

-कुछ कह नही सकता, पर कुछ दिन पहले मुझे एक लड़की मिली. उसने मुझसे निवेदन किया है कि मैं दहेज पर एक फिल्म बनाऊं. तो यदि कोई अच्छी कहानी मिल गयी, तो बना लेंगे. कहानी मिलना आसान नहीं है. देखिए, स्क्रिप्ट चुनना आसान काम नहीं है. अच्छी स्क्रिप्ट आसानी से नहीं मिलती. वास्तव में फिल्म की पटकथा सुनते वक्त दिमाग में घंटी बजनी चाहिए, तभी मैं करता हूं. मेरे लिए यह महत्वपूर्ण नहीं है कि लेखक नया है या निर्देशक नया है.

आप सारागढ़ी की लड़ाई पर फिल्म ‘‘केसरी’’ की शूटिंग कर रहे हैं. पर 12 फरवरी से डिस्कवरी जीत चैनल पर इसी विषय पर सीरियल शुरू हो रहा है?

-देखिए, मैंने शूटिंग  शुरू कर दी है. क्योंकि मुझे अपनी कहानी, अपने चरित्र पर यकीन है. जो सीरियल आ रहा है, मुझे उससे फर्क नहीं पड़ता. वह अपने तरीके से बना रहें हैं और हम अपने तरीके से.

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