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भाजपा को भारी पड़ेगा ‘स्थापित नेताओं’ को दरकिनार करना

दूसरे दलों में तोड़फोड़ करना भाजपा के लिये सरल हो सकता है, पर दलबदल करने वाले नेताओं को संभालना भारी पड़ रहा है. उन्नाव के बहुचर्चित रेप और हत्या कांड में विधायक कुलदीप सेंगर की किरकिरी होने से विपक्ष भाजपा पर भारी पड़ गया है. पिछले कुछ सालों से भाजपा में अपने दल के ‘स्थापित नेताओं’ को दरकिनार किया जा रहा है. अपनी पार्टी के ‘स्थापित नेताओं’ की जगह दूसरे दलों के दलबदलू नेताओं को तरजीह दी जा रही है. यह भाजपा के गले की फांस बन रहे हैं.

उत्तर प्रदेश में भाजपा के 2 उपचुनाव हारने और सपा-बसपा के गठबंधन को देखते हुये इन दलबदल कर आये नेताओं का भी भाजपा से मोह भंग हो रहा है. उपेक्षा का शिकार चल रहे अब भाजपा के स्थापित नेता भी पार्टी के लिये काम करने से कतरा रहे हैं.

राज्यसभा चुनाव में भाजपा ने पार्टी में ‘स्थापित नेताओं’ को महत्व नहीं दिया. राज्यसभा चुनाव के बाद अब विधान परिषद के चुनाव में भी भाजपा अपने दल के ‘स्थापित नेताओं’ की जगह पर दूसरे दलबदलू नेताओं को महत्व दे रही है. भाजपा ने आधे से अधिक विधान परिषद के पदों पर दलबदलू नेताओं को टिकट देने की तैयार कर ली है. ऐसे में पार्टी के स्थापित नेताओं में असंतोष है. इसके बाद भी भाजपा तोड़फोड़ की राजनीति से बाज नहीं आ रही. इस बार भाजपा ने कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी के चुनाव क्षेत्र रायबरेली में उनके करीबी नेताओं को भाजपा में शामिल करने का काम करने जा रही है.

जानकार लोग बताते हैं कि भाजपा में ‘योगीशाह’ की जोड़ी अपनी पार्टी के ‘स्थापित नेताओं’ को दरकिनार करना चाहती है. जिससे सभी उनकी हां में हां मिलाते रहे. दूसरी पार्टी से आने वाले दलबदलू नेता अवसर का लाभ उठाना चाहते हैं. कई बदलबदलू नेता ऐसे हैं जो चुनाव जीतने की हालत में नहीं थे, पर भाजपा की हवा में चुनाव जीत गये. अब भाजपा के खिलाफ माहौल बनता देख यह नेता सबसे पहले पार्टी छोड़ने और विद्रोह पर उतर आये हैं. उत्तर प्रदेश के 2 उपचुनाव में भाजपा विपक्षी एकता से कम अपनी पार्टी के अंतरकलह से अधिक हारी है. अब पार्टी स्तर पर इस बात को स्वीकार किया जा रहा है.

पार्टी के जिन लोगों को जमीनी सच की बात हाई कमान को देनी होती है वह भी नहीं बोलते हैं. जानकार लोग कहते हैं कि पार्टी के नेता तमाम सच को जानते हुये चुप हैं क्योंकि उनकी बात को हाईकमान के विरोध से जोड़ दिया जाता है. उन्नाव के विधायक कुलदीप सिंह के मामले में कुछ लोगों ने मामले की गंभीरता से पार्टी को अवगत कराने की कोशिश हुई थी पर सरकार में शामिल लोगों ने इन बातों को कोई तवज्जों नहीं दी. जिसकी वजह से समय पर विधायक पर अंकुश नहीं लगाया जा सका. ऐसे बहुत से मामले हैं जो गुटबाजी का शिकार हो रहे हैं. इसकी प्रमुख वजह यह है कि पार्टी अपने ‘स्थापित नेताओं’ की जगह पर दूसरे दलों के मौका परस्त लोगों पर भरोसा कर रही है.

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जीरो में ऐसा होगा कैटरीना का ब्राइडल अवतार

शाहरुख खान स्टारर फिल्म जीरो का दर्शक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. इस फिल्म में लीड रोल में नजर आने वाले शाहरुख, कैटरीना और अनुष्का तीनों ही शूटिंग में व्यस्त हैं. हाल ही में फिल्म के सेट से कैटरीना कैफ का लुक लीक हुआ था. अब एक बार फिर इस फिल्म के सेट से कैटरीना कैफ कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं. खास बात ये है कि इन तस्वीरों में वह ब्राइडल अवतार में दिख रही हैं.

इन तस्वीरों में देखा जा सकता है कि कैटरीना कैफ ने फिल्म जीरो के लिए ब्राइडल लुक अपनाया है. उन्होंने औरेंज रेड कौम्बीनेशन वाली साड़ी पहनी हुई है. कैटरीना ने अच्छा श्रृंगार किया हुआ है जो अमूमन एक भारतीय महिला करती है.

आपको बता दें कि, एक बार फिर शाहरुख खान, कैटरीना कैफ और अनुष्का शर्मा एक साथ बिग स्क्रीन पर नजर आने वाले हैं. इससे पहले यश चोपड़ा की फिल्म जब तक है जान में यह तीनों बिग स्क्रीन पर साथ आए थे. फिल्म में शाहरुख खान पहली बार एक बौने शख्स की भूमिका में नजर आएंगे. बात करें दूसरे किरदारों की तो फिल्म में अभय देओल कैटरीना कैफ के ब्वायफ्रेंड की भूमिका में होंगे. अभय का फिल्म में कैमियो रहेगा.

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फिल्म जीरो इस साल 21 दिसंबर को रिलीज होगी. पहले ये फिल्म सारा अली खान की डेब्यू फिल्म के साथ क्लैश करने वाली थी लेकिन अब केदारनाथ की रिलीज डेट आगे खिसक गई है. हालांकि फिल्म की मुसीबतें कम नहीं हुई है क्योंकि फिल्म अब संजय बारू की किताब द एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर पर बन रही फिल्म के साथ क्लैश करेगी.

VIDEO : एविल आई नेल आर्ट

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वीडियो : अमेरिकी सीनेट के इन सवालों पर हकलाने लगे जुकरबर्ग

डाटा लीक मामले सामने आने के बाद से फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं. वह दुनियाभर के निशाने पर हैं. इसी मामले के चलते मंगलवार 11 अप्रैल को जुकरबर्ग अमेरिकी सीनेट के सामने पेश हुए. इस दौरान उन्हें फेसबुक पर लगे आरोपों को लेकर कड़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा. सीनेट के 44 सेनेटर्स ने जुकरबर्ग से एक के बाद एक कई तीखे सवाल पूछे. सीनेट के समक्ष जुकरबर्ग ने डाटा लीक की जिम्मेदारी ली और माफी भी मांगी. उन्होंने कहा, ‘यह मेरी गलती है, मैं इसके लिए शर्मिंदा हूं और माफी मांगता हूं. मैंने फेसबुक शुरू किया, मैं ही इसे चलाता हूं और यहां जो कुछ भी होता है उसके लिए मैं जिम्मेदार हूं.’

सीनेट की सुनवाई के दौरान जुकरबर्ग काफी गंभीर और परेशान दिखे. उन्होंने सांसदों के सवाल सुने और उनके जवाब देते वक्त कई बार घबराते नजर आएं. हालांकि, जुकरबर्ग से पूछे गए सवालों की लिस्ट लंबी है, लेकिन हम आपको वो 10 तीखे सवाल बता रहे हैं जिसपर फेसबुक के सीईओ भी हकलाते और पानी पीते नजर आएं.

मार्क जुकरबर्ग से पूछे गए 10 सवाल

प्रश्न 1: क्या रूस और चीन की सरकार के पास फेसबुक का डेटा है? जैसे कैंब्रिज अनालिटिका के केस में देखने को मिला है?

प्रश्न 2: क्या फेसबुक को यूजर्स की इजाजत की जरूरत नहीं है, जब वो उनका डेटा बेच रहा है?

प्रश्न 3: आप यूजर्स के डेटा से पैसा कमाते हैं और कहते हैं यूजर डेटा के खुद मालिक हैं? ये कैसे संभव है?

प्रश्न 4: किस तरह की जानकारियां फेसबुक एकत्रित कर रहा है और किसे भेज रहा है?

प्रश्न 5: फेसबुक का इतिहास रहा है डेटा लीक का और 14 साल से आप लगातार माफी भी मांग रहे हैं.

प्रश्न 6: क्या आप हेट स्पीच को डिफाइन कर सकते हैं? एक पिता के तौर सोशल मीडिया आपको परेशान करता है?

प्रश्न 7: आप किस तरह का डेटा अपने सर्वर पर इकट्ठा कर रहे हैं? क्या आप टेक्स्ट हिस्ट्री, ऐक्टिविटी और डिवाइस लोकेशन भी स्टोर करते हैं?

प्रश्न 8: यूजर्स को चिंता होती है कि आप उसकी ब्राउजिंग हिस्ट्री ट्रैक करते हैं.

प्रश्न 9: आप यूजर्स को क्‍यों नहीं बताते कि उनका डेटा आप कैसे और किस तरह से प्रयोग करेंगे?

प्रश्न 10: क्या आप लोगों के पौलिटिकल झुकाव के बारे में जानते हैं?

आज भी गवाही के लिए पेश होंगे जुकरबर्ग

गौरतलब है कि कैंब्रिज एनालिटिका द्वारा रहस्योद्घाटन के बाद जुकरबर्ग अमेरिकी संसद में गवाही के लिए तैयार हो गए थे. इसी के चलते 10 और 11 अप्रैल को फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग की अमेरिकी संसदीय समिति के समक्ष दो दिवसीय गवाही शुरू हो गई. सीनेट की वाणिज्य एवं न्यायिक समितियों के समक्ष जुकरबर्ग ने यह कहते हुए अपनी बात शुरू की कि कैंब्रिज एनालिटिका को रोक पाने में वे असफल रहे. इस दौरान मार्क जुकरबर्ग ने लिखित बयान पढ़ते हुए कहा, ‘डाटा का दुरुपयोग मेरी गलती थी और इसके लिए मैं क्षमा मांगता हूं.’

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7वां वेतन आयोग : केंद्रीय कर्मचारियों को कब से मिलेगी बढ़ी हुई सैलरी

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग का इंतजार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा. हालांकि, ताजा जानकारी ये है कि सरकारी कर्मचारियों को इसी वित्त वर्ष से बढ़ी हुई सैलरी मिलेगी. वह भी वेतन आयोग की सिफारिशों से ज्यादा. सूत्रों की माने तो मोदी सरकार अगले साल होने वाले चुनाव से पहले इस मामले को सुलझाना चाहती है. अब खबर है कि सरकार न्यूनतम सैलरी 18 हजार के बजाए 21 हजार करने पर भी विचार कर रही है. उम्मीद है सरकार इसे जल्द से जल्द लागू कर सकती है. हालांकि, इस बीच खबर यह भी है कि सरकार की अगला वेतन आयोग खत्म करने की भी प्लानिंग है.

आएगा ‘औटोमैटिक पे रिवीजन सिस्टम’

सूत्रों के मुताबिक सातवें वेतन आयोग के बाद अगला वेतन आयोग नहीं आएगा. यह बेहद चौंकाने वाली खबर है. सरकार इस दिशा में काम कर रही है कि 68 लाख केंद्रीय कर्मचारी और 52 लाख पेंशन धारकों के लिए एक ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिसमें 50 फीसदी से ज्यादा डीए होने पर सैलरी में औटोमैटिक वृद्धि हो जाए. इस व्यवस्था को ‘औटोमैटिक पे रिविजन सिस्टम’ के नाम से शुरू किया जा सकता है. कर्मचारियों का मानना है कि वेतन वृद्धि की मौजूदा सिफारिशों से उनके लिए सम्मानपूर्वक जीना मुश्किल होगा. अब सवाल यह है कि सातवें वेतन आयोग की यह उलझन कब तक सुलझेगी.

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कब मिलेगी बढ़ी हुई सैलरी

मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि सरकारी कर्मचारियों को यह खुशखबरी इसी साल मिलेगी. हालांकि, अभी इसकी तारीख तय नहीं है. लेकिन, सैलरी अप्रैल 2018 से ही लागू माना जाएगा. दावा यह भी है कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों के मिनिमम पे स्केल में 3000 रुपए की बढ़ोतरी होगी. यानी 18,000 रुपए के बजाय अब मिनिमम बेसिक पे 21,000 रुपए होगी.

फिटमेंट फैक्टर भी बढ़ेगा

फिटमेंट फैक्टर को भी 2.57 गुना से बढ़ाकर 3 गुना किया जा सकता है. हालांकि, केंद्रीय कर्माचरियों की मांग है कि उनकी न्यूनतम सैलरी को 18,000 रुपए महीने बढ़ाने के बजाय 26,000 रुपए महीने की जाए. इसके अलावा फिटमेंट फेक्टर को भी 2.57 गुना से बढ़ाकर 3.68 गुना कर दिया जाए.

निम्न स्तर के कर्मचारियों को होगा फायदा

एक अधिकारी के मुताबिक, मध्य स्तर के कर्मचारियों के लिए वेतन वृद्धि के बजाय निम्न स्तर के कर्मचारियों को चुना पसंद करेंगे. इसके अलावा, रिपोर्ट में कहा गया है कि व्यापक मध्य-स्तरीय कर्मचारियों को ज्यादा वृद्धि नहीं दिखाई देगी, क्योंकि, आय के ध्रुवीकरण के लंबे समय से चलने वाले रुझान और केंद्रीय सरकार के विभागों में सिकुड़ते मध्य स्तर को देखते हुए ऐसा लगता है.

किसे क्या मिलेगा?

  • वो केंद्रीय कर्मचारी जो पे लेवल मैट्रिक्स 1 से 5 के बीच आते हैं
  • न्यूनतम सैलरी 18 हजार के बजाए 21 हजार रुपए दी जा सकती है.
  • सरकार सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों जल्द लागू कर सकती है.
  • सरकारी कर्मचारियों की मानें तो वेतन में करीब तीन गुना वृद्धि होनी चाहिए.
  • कर्मचारी यूनियनों ने 68 गुना इजाफे की मांग की थी, जिससे न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपए होता है.
  • केंद्र सरकार सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों से ज्यादा सैलरी बढ़ाने के पक्ष में नहीं है.
  • कर्मचारी यूनियन के मुताबिक, अब तक आए वेतन आयोग में से सातवें वेतन आयोग ने सबसे कम सैलरी बढ़ाने की सिफारिश की है.

वीडियो : एविल आई नेल आर्ट

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चेन्नई में आईपीएल का विरोध, खिलाड़ियों पर फेका गया जूता

उम्मीदों के मुताबिक इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) को चेन्नई में भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है. मंगलवार को टीवीके के समर्थकों और तमिल निर्देशकों के नए फोरम ने आईपीएल का विरोध करने का फैसला किया. आईपीएल का विरोध करते हुए तमिल समर्थकों ने मैदान पर मौजूद खिलाड़ियों पर जूता फेका.

जडेजा और डु प्लेसिस पर फेंका जूता

एमए चिदंबरम स्टेडियम में मुकाबले के दौरान पुलिस ने रवींद्र जडेजा और फाफ डु प्लेसिस पर जूता फेंकने के मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया. यह घटना नाइटराइडर्स की पारी के आठवें ओवर के दौरान घटी. दर्शकों के बीच से लांगऔन पर फील्डिंग कर रहे जडेजा की ओर जूता उछाला गया जो उनसे दूर गिरा. उसी जगह बाउंड्री के पास डु प्लेसिस और लुंगी नगीदी भी टहल रहे थे. पुलिस ने जूता उछालने वाले दोनों शख्स की पहचान तमिलनाडु के प्रदर्शनकारी ग्रुप के सदस्यों के रूप में की है.

टीवीके के कार्यकर्ताओं ने स्टेडियम का घेराव करने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने उन्हें तत्काल हटा दिया. इस दौरान टीवीके कार्यकर्ताओं ने आईपीएल मैच नहीं कराने के नारे लगाए. आईपीएल मैच का विरोध कर रहे कार्यकर्ता अपने हाथों में बैनर लिए थे जिन पर लिखा था कि हम आईपीएल नहीं चाहते, हम कावेरी मैनेजमेंट बोर्ड चाहते हैं. इसके अलावा वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारे भी लगा रहे थे. इन्होंने आरोप लगाया है कि राज्य में कावेरी जल विवाद से ध्यान भटकाने के लिए मुकाबलों का आयोजन कराया जा रहा है.

तैनात थे 4000 पुलिसकर्मी

इस विरोध प्रदर्शन को ध्यान में रखकर मई 2015 के बाद पहली बार आईपीएल मुकाबले को आयोजित कर रहे एमए चिदंबरम स्टेडियम की सुरक्षा के लिए करीब 4000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था. इसके अलावा कमांडो और रैपिड एक्शन फोर्स के जवान भी मौजूद थे. प्रदर्शनकारियों से मिली धमकी के बाद क्रिकेटरों की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई थी. इसके मद्देनजर होटल से स्टेडियम जाने के लिए भी कड़ी सुरक्षा के इंतजामात किए गए. हालांकि तमाम कोशिशों के बावजूद चेन्नई सुपर किंग्स की टीम थोड़ी देरी से स्टेडियम पहुंची. पुलिस के मुताबिक टीवीके और वीसीके के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने अन्ना सलाइ और टीटीके सलाइ के बीच सड़क को जाम करके ट्रैफिक सेवा को बिगाड़ने का काम किया. कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प भी देखने को मिली.

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यह है मामला

तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच कावेरी नदी के जल बंटवारे को लेकर दोनों राज्यों में तनातनी मची हुई है. करीब एक हफ्ते से कावेरी नदी के जल बंटवारे को लेकर प्रदर्शन कर रहे तमिल संगठनों ने मंगलवार को चेन्नई स्थित एमए चिदंबरम स्टेडियम के बाहर प्रदर्शन करने की धमकी दी थी.

केंद्रीय गृह सचिव से मिले राजीव शुक्ला

कावेरी विवाद से आईपीएल के मुकाबलों की चेन्नई में मेजबानी पर उठे सवालों के साथ आईपीएल के चेयरमैन राजीव शुक्ला ने केंद्रीय गृह सचिव राजीव गाबा से मुलाकात की है. उन्होंने चेन्नई में होने वाले मुकाबलों के लिए सुरक्षा की मांग की, जिस पर केंद्रीय गृह सचिव ने उन्हें पर्याप्त सुरक्षाबल मुहैया कराने का भरोसा दिया. शुक्ला ने बताया कि गृह सचिव ने तमिलनाडु के डीजीपी से बात की है.

वीडियो : एविल आई नेल आर्ट

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प्रीती कर रही हैं कपिल का करियर बर्बाद, फिरंगी के डायरेक्टर ने लगाया आरोप

लगातार डूबते करियर और अवसाद का सामना कर रहे कपिल की परेशानियां खत्म होने का नाम नहीं ले रहीं हैं.  एक के बाद एक उनपर आरोपों का सिलसिला जारी है. मित्र सुनील के साथ हुए विवाद और ट्विटर पर डाले गए अश्लील पोस्ट का मामला हल्का पड़ा ही था की उनका एक और विवाद सामने आ गया.

ये विवाद उनके और एक वेबसाइट के एडिटर  के मध्य हुई वार्ता और उनके करियर को लेकर उनकी पूर्व मैनेजर पर किया गया केस है .

वेबसाइट के एडिटर और कपिल के बीच हुई वार्ता का ऑडियो तेजी से वायरल हो रहा है. फोन पर हुई इस वार्ता के दौरान कपिल लगातार भद्दे कमेंट्स करते सुनाई दे रहे हैं और अश्लील टिप्पणी कर रहे हैं. उधर दूसरी तरफ उन्होंने अपने पूर्व मैनेजर और दोस्त प्रीती पर भी शोषण का केस दर्ज कराया है. उनका कहना है की उनकी इस स्थिति और डूबते करियर की जिम्मेदार प्रीती हैं. इस केस के प्रत्युत्तर में प्रीती सिमोन ने भी उनपर एक केस दर्ज किया है.

प्रीती के अनुसार ये सब कपिल की नयी दोस्त गिन्नी का कराया हुआ है. उनका ये भी कहना है की हो सकता है ट्विटर पर डले सारे पोस्ट गिन्नी ने किये हों.

इन आरोपों और प्रत्यारोपों के बीच कॉमेडी नाइट्स से कपिल के साथ जुड़े रहे उनके मित्र और उनकी आगामी फिल्म फिरंगी के डायरेक्टर राजीव ढींगरा, कपिल के बचाव में सामने आये हैं.  उन्होंने कहा की कपिल इस समय भारी मानसिक अवसाद से गुजर रहे हैं व उनकी मां भी अस्वस्थ हैं जिनसे वो मानसिक तौर पर जुड़े हुए हैं.

उनका कहना है इन सबके पीछे प्रीती और नीति का हाथ है. उन्होंने आरोप लगाया की इससे पहले प्रीती उन्हें भी परेशान कर चुकी हैं. ढींगरा के अनुसार सुनील को इन सबके बीच मोहरा बनाया गया ताकि कपिल पर दबाव डाला जा सके. सच क्या है ये देर सवेर सामने आ ही जायेगा. पर फिलहाल इन आरोपों का दौर क्या नया रंग लाता है ये देखने के लिए शायद थोड़ा इंतजार करना होगा.

VIDEO : एविल आई नेल आर्ट

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भारत में होने वाले चुनाव सुरक्षित, अब कहीं नहीं होगी गड़बड़ी : जुकरबर्ग

फेसबुक डाटा लीक मामले में फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने अमेरिकी सीनेट के सामने माफी मांगी. उन्होंने कहा जो कुछ भी हुआ उसके लिए सिर्फ वो ही जिम्मेदार हैं. मार्क जुकरबर्ग ने सीनेट को यह भी भरोसा दिलाया कि वह और उनकी टीम इस पर काम कर रहे हैं कि भारत और दूसरे देशों में होने वाले चुनाव बिल्कुल निष्पक्ष हों.

जुकरबर्ग के मुताबिक, उनकी कंपनी हर मुमकिन कोशिश कर रही है कि जो गलती हुई वो दोबारा न दोहराई जाए. कैपिटल हिल में सीनेट के सामने मार्क जुकरबर्ग ने कहा 2018 एक बेहद अहम साल है. भारत और पाकिस्तान जैसे कई देशों में चुनाव होने हैं. ”हम हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं चुनाव पूरी तरह सुरक्षित रहें, इस पर काम चल रहा है.”

फेसबुक नहीं निभा पाया जिम्मेदारी

दुनिया की सबसे लोकप्रिय सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक के सीईओ और फाउंडर ने कहा फेसबुक अपनी जिम्मेदारी पूरी तरह से नहीं निभा पाया. उन्होंने माफी मांगते हुए यह माना कि उनके प्लटेफौर्म का इस्तेमाल झूठी खबरों और चुनाव को बिगाड़ने के लिए किया गया.

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जुकरबर्ग ने जताया अफसोस

33 वर्षिय अरबपति जुकरबर्ग ने कहा उन्हें अफसोस है कि उनकी कंपनी ने 2016 में हुए अमेरिकी चुनाव को प्रभावित करने वाली रूस की गड़बड़ी को देर से पकड़ा. जिसका फायदा डोनाल्ड ट्रंप को मिला. आज वह अमेरिका के 45वें राष्ट्रपति हैं.

मजबूत कर रहे हैं सिक्योरिटी फीचर्स

मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि भारत में आगामी चुनावों को देखते हुए वह इसके सिक्योरिटी फीचर्स को और मजबूत कर रहा है. जुकरबर्ग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) टूल का हवाला देते हुए कहा कि इसे फेसबुक पर लाया गया है ताकि चुनावों को प्रभावित करने और न्यूज को मैनुपुलेट करने वाले फेक अकाउंट्स की पहचान हो सके. ऐसा टूल पहली बार फ्रांस के चुनाव में साल 2017 में लाया गया था.

फर्जी अकाउंट की पहचान के लिए एआई टूल

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मार्क जुकरबर्ग ने कहा ‘नए AI टूल को हमने 2016 के चुनाव के बाद बनाया था. मैं ऐसा मानता हूं कि करीब 30 हजार से ज्यादा फेक अकाउंट्स जो रूस से जुड़े थे वो ठीक अमेरिका में 2016 में हुए चुनाव की तरह ही रणनीति अख्तियार करना चाहते थे. लेकिन, हमने उन सभी को डिसएबल कर फ्रांस में बड़े पैमाने पर होनेवाली इस तरह की चीजों से बचा लिया.’ जुकरबर्ग ने कहा ‘पिछले साल 2017 में अलबामा में विशेष चुनाव के दौरान हमने कुछ नए एआई टूल्स फर्जी एकाउंट्स और फेक न्यूज की पहचान के लिए लेकर आए. जिसके बाद हमने ये पाया कि बड़ी तादाद में मोसीडोनियन एकाउंट्स बने थे जो गलत न्यूज फैला रहे थे. जिसे हमने सोशल प्लेटफौर्म से हटा दिया.’

रूस ने लगाई सेंध

जुकरबर्ग ने रूस पर आरोप लगाते हुए कहा, “रूस में लोग हैं जिनका काम हमारे सिस्टम, दूसरे इंटरनेट सिस्टम और अन्य सिस्टम में सेंध लगाकर फायदा उठाना है. ऐसे में यह हथियारों की दौड़ है. जिसे बेहतर बनाए रखने और इसे बेहतर करने के लिए इसमें निवेश करने की जरूरत है.” जुकरबर्ग ने माना कहा, “मैंने फेसबुक के 8.70 करोड़ यूजर्स के निजी डेटा का दुरुपयोग रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए, जबकि यह मेरी जिम्मेदारी थी.”

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नीतीश राणा को बैट गिफ्ट कर कोहली ने जीता दिल

भारतीय क्रिकेट टीम और आरसीबी के कप्तान विराट कोहली ने युवा बल्लेबाज नीतीश राणा को अपना बैट गिफ्ट किया है. आईपीएल के इस सीजन खेले गए तीसरे मुकाबले में राणा ने कोहली को अपनी गेंद पर बोल्ड किया था. राणा के प्रदर्शन के खुश होकर मैच के बाद विराट कोहली ने उन्हें अपना बैट दिया. विराट कोहली को आउट करने के बाद राणा ने कुछ अपशब्द भी कहे थे, लेकिन विराट ने उस बात को नजरअंदाज करते हुए राणा को प्रोत्साहित करने का काम किया है.

दरअसल, तीसरे मैच के दौरान केकेआर के कप्तान दिनेश कार्तिक ने टौस जीतकर आरसीबी को पहले बल्लेबाजी करने के लिए आमंत्रित किया. आरसीबी की टीम विराट कोहली और एबी डी विलियर्स की मदद से एक बड़े स्कोर की ओर बढ़ रही थी.

इसी बीच कार्तिक ने एक हैरान करने वाला फैसला लिया और गेंद पार्ट टाइमर नीतीश राणा के हाथों में सौंप दी. राणा ने एक ही ओवर में पहले डी विलियर्स और फिर कोहली को आउट कर केकेआर को मैच में वापस ला दिया. कोहली के विकेट लेने के बाद उत्साहित राणा ने उन्हें देखते हुए कुछ अभद्र टिप्पणी की. राणा के इस व्यवहार की सोशल मीडिया पर काफी आलोचना भी की गई.

वहीं मैच के बाद विराट कोहली राणा के पास गए और उन्हें बैट गिफ्ट कर भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं. नीतीश राणा ने इंस्टाग्राम अकाउंट पर बैट के साथ एक तस्वीर शेयर कर इस बात की जानकारी दी. राणा ने तस्वीर के साथ लिखा, ”क्रिकेट के दिग्गज खिलाड़ी से जब तारीफ मिलती है तो और बेहतर करने का जोश अंदर आ जाता है. इस बैट के लिए धन्यावाद विराट भैया”.

नीतीश राणा एक विस्फोटक बल्लेबाज हैं, पिछले सीजन मुंबई इंडियंस की तरफ से खेलते हुए उन्होंने कई दमदार पारी खेली थी. इस सीजन की शुरुआत भी उनके लिए अच्छा रहा है. वह कोलकाता की टीम के अहम खिलाड़ी हैं और वह इस सीजन बल्ले से ज्यादा से ज्यादा रन बनाना चाहेंगे.

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ट्रैफिक जाम का अब बस यही है समाधान

रात के लगभग 12 बजे थे. उनींदी सी नीरा की बगल में लेटते हुए पति अजीत बोले, ‘‘मुझे सुबह जल्दी उठा देना.’’

‘‘क्यों?’’

‘‘कल बौस के साथ मीटिंग है. घर से 9 बजे निकलता हूं तो ट्रैफिक में फंस जाने के कारण देर हो जाती है.’’

‘‘तुम्हारी भी क्या जिंदगी है? सुबह जल्दी जाओ और रात में देर से आओ.’’

‘‘क्या करूं? शाम को तो मैं जानबूझ कर देर से निकलता हूं. कम से कम ट्रैफिक से तो बच जाऊं.’’

‘‘ट्रैफिक में ही जिंदगी बीत जाएगी, ऐसा लगता है.’’

शिशिर ट्रैफिक में फंसा झल्ला रहा था. आज उस की बेटी अवनी का बर्थडे जो था. तभी फोन की घंटी बज उठी, ‘‘शिशिर, कहां हो? अवनी की फ्रैंड्स केक काटने के लिए शोर मचा रही हैं. सब तुम्हारा इंतजार कर रहे हैं.’’

‘‘अवनी को फोन दो. सौरी, बेटा मैं ट्रैफिक में फंसा हूं. तुम केक  काट लो. वीडियो बना लेना. मैं आ कर देखूंगा. शिशिर भुनभुना कर बोला, ‘‘यह ट्रैफिक जाम तो जान का दुश्मन बन गया है.’’

नेहा गूगल मैप पर रोड ट्रैफिक देख कर घर से निकली थी, लेकिन स्कूल के पास वाले ट्रैफिक सिगनल के कारण पहुंचने में देर हो गई और आज भी उस की बायोमीट्रिक प्रेजैंट में देर हो चुकी थी. प्रिंसिपल साहब की घूरती आंखों का सामना करना पड़ा वह अलग. यह ट्रैफिक जाम तो जीवन की मुसीबत बन चुका है. सुरेशजी को दिल का दौरा पड़ा. डाक्टर ने हौस्पिटल ले जाने को कहा. ऐंबुलैंस आने में ही 1 घंटा लग गया.

शशांक ने अपनी पत्नी के औफिस के पास फ्लैट इसलिए लिया था ताकि वह, पत्नी श्वेता और बेटा सुयश दोनों आसानी से अपने स्कूल पहुंच सकें. परंतु उस की कीमत शशांक को चुकानी पड़ रही है. अब उस का औफिस 35 किलोमीटर दूर है. रास्ते में मिलने वाला ट्रैफिक उसे सुबह से ही थका और परेशान कर देता है. कभीकभी तो उसे 2 घंटे लग जाते हैं.

आज महानगर हो या छोटे शहर, हर जगह ट्रैफिक जाम में ही बीतती है जिंदगी. दरअसल, इस के पीछे शहरों की बढ़ती आबादी, एकल परिवारों का चलन और बिना किसी योजना के शहरों का विस्तारीकरण है. आज गाड़ी संपन्नता की निशानी नहीं वरन जरूरत बन चुकी है. हमारे शहरों में बढ़ती भीड़, सड़कों के दोनों ओर दुकानदारों का बढ़ता अतिक्रमण, बिना किसी हिचक के यहांवहां गाड़ी रोक कर शौपिंग करना, ये सब ट्रैफिक जाम के मुख्य कारण हैं.

अपने देश में शहरों की आबादी बहुत तेजी से बढ़ रही है, परंतु उस अनुपात में शहरों की आधारभूत संरचना का विकास नहीं हो रहा है. यही कारण है कि शहरों में ट्रैफिक एक बड़ी समस्या बन रही है.

सार्वजनिक परिवहन की कमी और खराब ट्रैफिक व्यवस्था के कारण आज ट्रैफिक जाम ने लोगों का जीना दुश्वार कर दिया है.

दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, बैंगलुरु जैसे महानगरों में मैट्रो ट्रेन के जरीए सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है, परंतु अन्य शहरों की बात करें तो सार्वजनिक परिवहन की स्थिति अच्छी नहीं है.

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मध्यवर्ग की आमदनी बढ़ने के कारण महानगरों में कारों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि हुई है, जिस के कारण पतली गलियों तक में जाम लगा रहता है. छोटे शहरों के लोगों ने बताया कि जाम के कारण रोज 1 घंटा तो निश्चित रूप से बरबाद होता ही है.

आज पूरे विश्व में यह समस्या महामारी की तरह फैल चुकी है. बारबार ट्रैफिक जाम में फंसने के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर इस का बुरा प्रभाव पड़ रहा है.

द न्यूजीलैंड हेराल्ड रिपोर्ट का कहना है कि दिल के दौरे का खतरा अचानक बढ़ने का सब से बड़ा कारण है गाड़ी से निकलने वाला धुआं, शोरशराबा और होने वाला मानसिक तनाव.

हवा में जहर: ज्यादातर गाडि़यों से निकलने वाले धुएं में नाइट्रोजन औक्साइड और कैंसर पैदा करने वाले पदार्थ होते हैं. कई गाडि़यां विशेषरूप से जो डीजल से चलती हैं धुएं के साथ बड़ी तादाद में छोटेछोटे कण छोड़ती हैं. ये लोगों की सेहत के लिए बहुत बड़ा खतरा बने हुए हैं. जिन इलाकों में ट्रैफिक जाम की समस्या अधिक है, वहां फेफड़ों में संक्रमण का प्रतिशत और भी ज्यादा है.

अम्ल वर्षा का कारण: गाडि़यों से निकलने वाले नाइट्रोजन औक्साइड और सल्फर औक्साइड अम्ल वर्षा का एक कारण हैं. अम्ल वर्षा के कारण झीलों और नदियों का पानी दूषित हो जाता है. वह पानी जीवजंतु, पेड़पौधे सभी के लिए हानिकारक है. इस से निकली गैस पृथ्वी के तापमान को बढ़ाने के लिए सब से अधिक जिम्मेदार है.

ड्राइवरों में बढ़ता तनाव और क्रोध: जैसेजैसे गाडि़यों की आवाजाही बढ़ती जा रही है, ट्रैफिक जाम के कारण ड्राइविंग करने वालों का क्रोध बढ़ता जा रहा है. ड्राइवर पलभर में आगबबूला हो कर अपना आपा खो बैठते हैं. गालीगलौज, लड़ाई और मारपीट की नौबत आ जाती है, जिस का परिणाम हर सूरत में नुकसानदेह होता है.

आर्थिक नुकसान: ट्रैफिक जाम से पैसे बदबाद होते हैं. अकेले कैलिफोर्निया के लास एंजिल्स में 4 अरब लिटर ईंधर बरबाद हो जाता है. ट्रैफिक जाम के कारण ईंधन के बरबाद होने वाले नुकसान से देश का आर्थिक ढांचा कमजोर हो जाता है.

आज पूरा विश्व ट्रैफिक जाम की समस्या से पीडि़त है. यूरोपियन कमीशन का सर्वे कहता है कि अगर हम अपने यातायात के तरीकों में भारी बदलाव नहीं करेंगे तो आने वाले वर्षों में पूरे के पूरे शहर सड़क पर खड़ेखड़े बेकार में इंतजार करते नजर आएंगे.

एशियाई देशों का भी यही हाल है. काम पर जाने और घर लौटने के समय के दौरान सड़कों पर ट्रैफिक की जैसे बाढ़ सी आ जाती है.

आज स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाने वाले लोगों की संख्या बढ़ती ही जा रही है. जापानी कंपनी एनईसी के सहयोग से 60 शहरों पर किए गए सर्वेक्षण के मुताबिक 2015 में 12 लाख लोग सड़क दुर्घटनाओं में मारे गए. इस के मुकाबले आतंकी घटनाओं में जान गंवाने या घायल होने वालों की तादाद लगभग 30 हजार है.

अपने देश में ट्रैफिक जाम के कारण हर साल अरबों रुपयों का घाटा होता है और यह घाटा निरंतर बढ़ता जा रहा है.

जनता की भी जिम्मेदारी: कई लोगों की आदत होती है कि वे सो कर देर से उठते हैं और फिर भागदौड़ कर तैयार होते हैं. अब चूंकि पहले ही देर हो चुकी होती है, इसलिए ट्रैफिक जाम उन के तनाव को और बढ़ा देता है. यदि इस तनाव से बचना है तो अगले दिन की शुरुआत की तैयारी पहले दिन से ही करनी होगी. बच्चों के कपड़े, अपना ब्रीफकेस, लंच सब कुछ तैयार कर लीजिए. जाहिर सी बात है, सुबह के काम का तनाव नहीं होगा, तो नींद भी अच्छी आएगी.

सुबह जल्दी उठने के कई और भी फायदे हैं जैसे ट्रैफिक में बहुत देर फंसे रहने से मांसपेशियों में तनाव आ जाता है. सुबह की हुई थोड़ीबहुत कसरत आप को चुस्तदुरुस्त बना सकती है. नाश्ता अच्छी तरह करने से तन और मन दोनों प्रसन्न रहेंगे.

गाड़ी को सही हाल में रखें: गाड़ी को सही हालत में रखें. ऐसा न हो कि ट्रैफिक जाम के समय गाड़ी में कोई समस्या उत्पन्न हो जाए. उस के ब्रेक, टायर, एसी वगैरह सही हालत में हों. सब से आवश्यक है कि आप की गाड़ी में पैट्रोल, डीजल भरपूर मात्रा में हो.

जानकारी रखें: सफर शुरू करने से पहले मौसम, सड़क बंद होने के बारे में टीवी, अखबारों से जानकारी ले कर निकलें. जिस रास्ते पर जाना है, उस का मैप अवश्य साथ रखें.

आराम से बैठें: गाड़ी की खिड़की खोल कर अपनी सीट पर आराम से बैठें. गाड़ी में रेडियो, सीडी प्लेयर से मनपसंद संगीत सुनने से दिल को सुकून और राहत मिलती है.

वक्त का लाभ उठाएं: मन ही मन ट्रैफिक जाम पर कुढ़ने के बजाय अपने जरूरी कामों के विषय में सोचविचार कर के निर्णय ले सकते हैं. गाडि़यों की लंबी कतारें देखने से तनाव बढ़ता है. आप अपने साथ मनपसंद किताब, अखबार रख कर पढ़ सकते हैं. अपने लैपटौप पर मेल चैक कर के उन का उत्तर दे सकते हैं.

सही नजरिया रखें: अगर आप के लिए ट्रैफिक जाम रोज की समस्या है तो निश्चित है कि आज भी आप ट्रैफिक जाम में फंसेंगे. इसलिए मानसिक रूप से तैयार रहें और उस समय के सदुपयोग के विषय पर योजना बना कर ही घर से निकलें.

रोड सैफ्टी का ध्यान रखें: अगर आप खुद गाड़ी चला रहे हैं तो ड्राइव करते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल न करें. लेन में चलें व बारबार हौर्न न बजाएं. गाड़ी तेज रफ्तार में न चलाएं. कभी भी नशे की हालत में ड्राइविंग सीट पर न बैठें.

ट्रैफिक जाम की समस्या से निबटने के लिए शहरों का नवीनीकरण बेहद आवश्यक है. लोगों का विचार है कि आधुनिक ट्रैफिक सिस्टम, सार्वजनिक परिवहन प्रणाली में सुधार, बसों के लिए अलग कौरिडोर और मैट्रो सेवा इस के बेहतर समाधान हो सकते हैं.

आशा है निकट भविष्य में ट्रैफिक जाम से जनता को राहत देने के लिए सरकार भी ओवरब्रिज आदि बना कर सुविधाएं प्रदान करने का प्रयास करेगी. साथ ही हम लोगों का भी कर्तव्य बनता है कि हम सार्वजनिक बस, मैट्रो या लोकल आदि का उपयोग कर के सड़कों पर ट्रैफिक कम करने की कोशिश करें.

हम आपस में बात कर के गाड़ी पूल कर के कई लोग एकसाथ औफिस, स्कूल जा कर ट्रैफिक में कमी ला सकते हैं. अपनी आदतों में बदलाव लाने का प्रयास करें. छोटीछोटी दूरी के लिए साइकिल जैसी सवारी को उपयोग में लाएं. थोड़ाबहुत पैदल भी चलें.

अंधाधुंध बढ़ती गाडि़यों की संख्या के कारण ट्रैफिक जाम से परेशान हो कर यह कहने से कि ‘ट्रैफिक जाम में ही बीत जाएगी जिंदगी’ उस के समाधान का प्रयास करें.

मोबाइल ऐप

मुंबई में ट्रैफिक जाम की समस्या से परेशान हो कर बृजराज और रवि ने एक मोबाइल ऐप बनाया है, जो ट्रैफिक की ताजा जानकारी लोगों के पास उन के फोन द्वारा पहुंचाता है. किसी भी मार्ग दुर्घटना की सूचना 1 मिनट के अंदर उन के ऐप के द्वारा लोगों तक पहुंच जाती है.

इस ऐप का नाम ‘ट्रैफ लाइन’ है. मैट्रिक्स पार्टनर इंडिया का ध्यान भी इस ऐप की उपयोगिता पर गया है. कंपनी ने ट्रैफ लाइन ऐप पर निवेश कर के इसे पूरे देश में ले जाने का इरादा जताया है.

VIDEO : एविल आई नेल आर्ट

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रहस्यों में उलझी पुलिस अधिकारी की मर्डर मिस्ट्री

आखिर महाराष्ट्र हाईकोर्ट और मीडिया के सक्रिय होते ही 18 महीने बाद महाराष्ट्र के नवी मुंबई, कलंबोली पुलिस थाने के अफसरों ने 7 दिसंबर, 2017 की शाम को करीब 8 बजे अपने विभाग के शातिर और ऊंची पहुंच वाले अफसर अभय कुरुंदकर को उस के मीरा रोड स्थित घर से गिरफ्तार कर लिया.

अभय कुरुंदकर जिला ठाणे, पालघर के नवघर पुलिस थाने में बतौर इंचार्ज तैनात था. उस पर अपने ही विभाग की एक महिला अधिकारी अश्विनी बेंद्रे के अपहरण और हत्या जैसे गंभीर आरोप थे. अश्विनी बेंद्रे नवी मुंबई कोमोठे स्थित ह्यूमन राइट्स कमीशन औफिस में असिस्टेंट पुलिस इंसपेक्टर के रूप में तैनात थी.

25 वर्षीय अश्विनी राजू बेंद्रे मूलरूप से कोल्हापुर, तालुका आंधले, गांव हातकणगे की रहने वाली थी. वह 2007 के बैच की पुलिस अधिकारी थी. उस के पिता 1988 में आर्मी से रिटायर होने के बाद काश्तकारी में व्यस्त हो गए थे. परिवार में उन की पत्नी के अलावा 2 बेटियां और एक बेटा था. शिक्षा के साथ अश्विनी बेंद्रे हर काम में अपने छोटे भाई आनंद बेंद्रे और छोटी बहन से होशियार थी. चूंकि पिता आर्मी से थे, इसलिए वह बेटी की रुचि को देखते हुए उसे आर्मी या पुलिस सेवा में भेजना चाहते थे.

10वीं तक की शिक्षा अपने गांव के स्कूल से पूरी करने के बाद अश्विनी आगे की पढ़ाई के लिए अपने मामा के घर कोल्हापुर आ गई थी. उस के मामा कोल्हापुर में पुलिस अधिकारी थे. बीकौम करने के बाद वह एमपीएससी की तैयारी में जुट गई थी, लेकिन परीक्षा में शामिल होने से पहले ही उस के मातापिता ने राजकुमार उर्फ राजू गोरे से उस की शादी तय कर दी. 2005 में अश्विनी बेंद्रे विदा हो कर अपनी ससुराल चली गई.

सीधे और सरल स्वभाव का राजू गोरे अश्विनी बेंद्रे जैसी सुंदर पत्नी को पा कर बहुत खुश था. उसे जब यह मालूम हुआ कि अश्विनी बेंद्रे के मातापिता की इच्छा और अश्विनी की इच्छा पुलिस सेवा जाने की थी तो राजू गोरे ने पत्नी की इस इच्छा को पूरा करने के लिए हरसंभव सहयोग करने को कहा. पति के सहयोग से अश्विनी बेंद्रे ने एमपीएससी की परीक्षा में भाग लिया. यह परीक्षा उस ने अच्छे अंकों से पास की. इसी दौरान वह एक बेटी की मां भी बन गई.

नासिक में 6 माह की ट्रेनिंग पूरी करने के बाद अश्विनी बेंद्रे की पहली नियुक्ति पुणे में सबइंसपेक्टर के पद पर हुई थी. उस के बाद उसे सांगली के पुलिस मुख्यालय में तैनात कर दिया गया था. सांगली मुख्यालय में अश्विनी बेंद्रे को अभी कुछ महीने ही हुए थे कि उस का ट्रांसफर सांगली की लोकल क्राइम ब्रांच में कर दिया गया, जहां उस की मुलाकात पीआई अभय कुरुंदकर से हुई. अभय कुरुंदकर एक शातिरदिमाग अफसर था.

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भले ही अफसर हो, अकेली औरत कई बार शातिर लोगों के जाल में फंस जाती है

अश्विनी बेंद्रे उस वक्त अपनी भावनाओं को दबाए पति से दूर अकेले ही जिंदगी का सफर तय कर रही थी. वैसे तो अश्विनी बेंद्रे एक सशक्त महिला थी. लेकिन पीआई अभय कुरुंदकर के फेंके गए जाल में वह बड़ी आसानी से फंस गई.

पीआई अभय कुरुंदकर मूलरूप से कोल्हापुर जिले के कराड़ गांव का रहने वाला था. उस का बचपन गरीबी और संघर्षों में बीता था. उस के बचपन में ही पिता का निधन हो गया था. परिवार में मां के अलावा 2 भाई और एक बहन थी. पिता के निधन के बाद जब परिवार वालों ने गांव से निकाल दिया तो मां अपने तीनों बच्चों को ले कर आजरा गांव में अपनी बहन के यहां रहने लगी थी. मेहनतमजदूरी कर के उन्होंने अपने तीनों बच्चों की परवरिश की.

दोनों भाई पढ़ाईलिखाई में जितने होशियार थे, उतने ही मेहनती भी थे. वे पूरा मन लगा कर पढ़ाई करते थे और बाकी समय में मां का हाथ बंटाते थे. उन के गांव के सारे दोस्त शराब, जुआ और राहजनी जैसे अपराधों में लिप्त रहते थे लेकिन ये दोनों भाई इन चीजों से दूर रहते थे. आखिरकार दोनों की मेहनत और पढ़ाई रंग लाई और दोनों भाइयों को पुलिस विभाग में नौकरी मिल गई.

पुलिस में नौकरी लग जाने के बाद अभय कुरुंदकर जब अपने पुश्तैनी घर और गांव गया तो पता चला कि उस के चचेरे भाइयों ने उस की पुश्तैनी जमीन पर कब्जा कर लिया है. इतना ही नहीं, उन्होंने उस के पिता की सारी संपत्ति भी अपने नाम करवा ली थी.

यह जान कर अभय कुरुंदकर काफी आहत हुआ, लेकिन उस ने अपने मन ही मन तय कर लिया था कि खूब पैसा कमा कर वह अपना घर अपने पुश्तैनी गांव में ही बनवाएगा. और उस ने ऐसा ही किया भी. उस ने पुलिस विभाग में अपना कद बढ़ाना शुरू किया. इस काम में उसे कामयाबी भी मिली. शीघ्र ही उस की पैठ कुछ बड़े अधिकारियों और राजनीतिज्ञों तक हो गई थी

तत्कालीन मंत्री एकनाथ खड़से के भांजे ज्ञानेश्वर पाटिल उर्फ राजेश पाटिल से अभय कुरुंदकर की गहरी दोस्ती हो गई थी. कानून और राजनीति के बीच दोस्ती होने के कारण अभय कुरुंदकर ने गैरकानूनी काम करने शुरू कर दिए. वह दोनों हाथों से पैसे कमाने लगा. वह अपनी पहुंच का फायदा उठा कर अपना ट्रांसफर उन थानों में कराता रहा, जहां अच्छी कमाई होती थी.

अभय कुरुंदकर ने थोड़े ही दिनों में इतना पैसा कमा लिया कि उस ने अपने गांव में 6 बिस्वा जमीन खरीद कर एक आलीशान घर बनवाया. उस मकान में उस का परिवार रहने लगा. इस के अलावा उस ने आजरा के आंबोली गांव में 7 एकड़ जमीन ले कर अपना फार्महाउस बनवाया. इस बीच उस का प्रमोशन और ट्रांसफर होते रहे.

29 मई, 2006 को उस का प्रमोशन कर के उसे कुछ दिनों के लिए कमिश्नर औफिस के नियंत्रण कक्ष भेज दिया गया. लेकिन अपनी पहुंच के कारण उस ने एक महीने के अंदर ही अपना ट्रांसफर कुपवाड़ा में करवा लिया. यहां पर वह लगभग ढाई साल रहा. यहीं से प्रमोशन पा कर वह मिर्ज के ट्रैफिक विभाग में चला गया.

2 जून, 2010 में अभय कुरुंदकर की बदली स्थानीय आर्थिक अपराध शाखा में पीआई के पद पर कर दी गई. यहीं पर अभय कुरुंदकर की मुलाकात एपीआई अश्विनी बेंद्रे से हुई और वह उस का पहली ही नजर में उस का दीवाना हो गया. कुछ ही दिनों में उसे अश्विनी बेंद्रे की कमजोरी पता लग गई.

वह उन दिनों जिस वियोग की ज्वाला में जल रही थी, उस पर अभय कुरुंदकर ने धीरेधीरे मरहम लगाना शुरू किया. उस का मरहम काम कर गया. दोनों को जब मालूम हुआ कि वह एक ही जिले के रहने वाले हैं तो नजदीकियां और बढ़ गईं. धीरेधीरे उन के बीच गहरी दोस्ती हो गई थी.

भ्रष्ट अफसर की सोच हमेशा गलत ही चलती है

उन दिनों अश्विनी बेंद्रे सांगली से रोजाना अपनी ड्यूटी के लिए अपडाउन किया करती थी, जिस के कारण उन्हें काफी परेशानी होती थी. अभय कुरुंदकर ने सहानुभूति दिखाते हुए क्राइम ब्रांच औफिस के करीब ही यशवंतनगर में अपनी पहचान के एक राजनैतिक कार्यकर्ता की मदद से अश्विनी बेंद्रे को एक मकान किराए पर दिलवा दिया और खुद भी पास के विश्राम बाग में रहने लगा. कुरुंदकर को सरकारी गाड़ी मिली हुई थी, लेकिन वह सरकारी गाड़ी का उपयोग न कर के अपनी खुद की कार से औफिस आताजाता था. वह अश्विनी को भी अपने साथ कार में बिठा कर औफिस ले आता था.

अपने से 14 साल छोटी अश्विनी बेंद्रे को 55 वर्षीय पीआई अभय कुरुंदकर ने बड़ी ही चतुराई से अपने प्रेमजाल में उलझा लिया था. शादी का वादा कर वह उस की भावनाओं से खेलने लगा. जबकि वह स्वयं एक शादीशुदा और 2 बेटोंबेटियों का पिता था. उधर अश्विनी बेंद्रे एक बच्ची की मां होते हुए भी परकटे परिंदे की तरह पीआई अभय कुरुंदकर की बांहों में गिर गई.

धीरेधीरे वह अपने पति राजू गोरे से विमुख होने लगी. कह सकते हैं कि वह अभय कुरुंदकर के साथ जिंदगी के नए ख्वाब देखने लगी थी. इस बात की जानकारी जब राजू गोरे को हुई तो उस के पैरों तले से जमीन खिसक गई. पहले तो राजू गोरे को इस बात का यकीन ही नहीं हुआ, क्योंकि वह अपनी पत्नी को काफी समझदार और सुलझी हुई मानता था, लेकिन जब सच्चाई सामने आई तो राजू गोरे और परिवार वालों के होश उड़ गए थे.

पहले तो राजू गोरे और अश्विनी बेंद्रे के परिवार वालों ने अश्विनी को काफी समझाया, लेकिन वह पीआई अभय कुरुंदकर  के प्यार में डूबी हुई थी. इसलिए उस पर ससुराल वालों की बातों का कोई प्रभाव नहीं पड़ा. वह अभय कुरुंदकर से लवमैरिज करने के लिए तैयार थीं. बेटी पर मां के भटकने का कोई प्रभाव न पड़े, इसलिए राजू गोरे उस के पास से अपनी बेटी को ले गया. बेटी के जाने के बाद अश्विनी पूरी तरह आजाद हो गई.

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वह अपने प्रेमी अभय कुरुंदकर के साथ ही रहने लगी. उस के साथ वह खुश थी लेकिन उस की यह खुशी अधिक दिनों तक कायम नहीं रही. उसे शीघ्र ही इस बात का पता चल गया कि वह चालाक और मक्कार किस्म का व्यक्ति है. उस का प्यार और शादी का वादा केवल एक छलावा था. शादी के नाम से वह चिढ़ जाता था. कभीकभी तो वह अश्विनी बेंद्रे से मारपीट तक कर बैठता था. अश्विनी के विरोध करने पर वह उसे और उस के पति को गायब करवा देने की धमकियां देता था.

अभय कुरुंदकर टौर्चर करता था अश्विनी बेंद्रे को

सन 2013 में अश्विनी बेंद्रे को अभय कुरुंदकर के टौर्चर से थोड़ी राहत तब मिली, जब अश्विनी का ट्रांसफर रत्नागिरि हो गया. अभय कुरुंदकर भी ठाणे जिले के पालघर स्थित नवघर पुलिस थाने में चला गया. इस के बावजूद अभय कुरुंदकर ने अश्विनी का पीछा नहीं छोड़ा. उसे जब भी मौका मिलता, वह उस के पास पहुंच जाता था और उसे परेशान करने में कोई कसर नहीं छोड़ता था.

अपने रसूख के दम पर वह अश्विनी और उस के परिवार के साथ कुछ भी कर सकता था. उस के डर से अश्विनी ने उस के खिलाफ सारे सबूत इकट्ठे करने शुरू कर दिए. अपने घर सीसीटीवी कैमरा भी लगवा लिया, जिस का सारा रिकौर्ड वह अपने लैपटाप में रखने लगी थी.

पालघर के नवधर पुलिस थाने में डेढ़ साल तक रहने के बाद अभय कुरुंदकर ने अपनी बदली क्राइम ब्रांच में करा ली थी. अब वह फिर से अश्विनी बेंद्रे के करीब आ गया था. अश्विनी उस के व्यवहार से तंग थी. वह उस से दूर रहने की कोशिश करने लगी. प्रमोशन होने के बाद वह भी एपीआई बन चुकी थी.

सन 2016 में अश्विनी बेंद्रे ने अपना ट्रांसफर ठाणे के नवी मुंबई कलंबोली स्थित कामोठे के ह्यूमन राइट्स कमीशन में करा लिया था. वह अपने परिवार वालों के बीच लौट आई थी. यह बात पीआई अभय कुरुंदकर को हजम नहीं हुई. वह अश्विनी से चिढ़ गया. इस का नतीजा यह हुआ कि एक दिन अचानक अश्विनी गायब हो गई.

18 अप्रैल, 2016 को अश्विनी बेंद्रे ने अपने परिवार वालों के साथ बाहर खाना खाने का प्रोग्राम बनाया. परिवार वाले उस का इंतजार करते रहे लेकिन वह नहीं आई. इस बीच उस का फोन भी बंद हो गया. लेकिन परिवार वालों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया. उन का मानना था कि वह किसी इमरजेंसी काम में फंस गई होगी. लेकिन 15 दिनों के बाद घर वालों के पास ह्यूमन राइट्स कमीशन के औफिस से फोन आया. उन्होंने बताया कि अश्विनी बेंद्रे अपनी ड्यूटी पर नहीं आ रही है.

औफिस से अश्विनी के गायब होने की जानकारी मिलते ही पूरे परिवार में हड़कंप मच गया. अश्विनी बेंद्रे के पिता ने तुरंत नवी मुंबई कलंबोली पुलिस थाने में फोन कर के अश्विनी बेंद्रे की गुमशुदगी की सूचना दे दी.

उन्होंने कहा कि उन की पत्नी अस्पताल में भरती है और वह खुद थाने आने की स्थिति में नहीं हैं, इसलिए उन की बेटी की गुमशुदगी दर्ज कर के जरूरी काररवाई की जाए. यह जानकारी उन्होंने अपने बेटे आनंद बेंद्रे को भी दे दी. आनंद तुरंत अपनी गुमशुदा बहन की तलाश में जुट गया.

आनंद को उस की बहन अभय कुरुंदकर की ज्यादती के बारे में बताती रहती थी, इसलिए उस ने सीधेसीधे पीआई अभय कुरुंदकर पर बहन का अपहरण कर के उस की हत्या करने की आशंका जाहिर की. वह उस के खिलाफ सबूत भी इकट्ठा करने लगा. उस ने लैपटाप में रिकौर्डिंग और अन्य सबूत पुलिस को मुहैया करा दिए. चूंकि अभय कुरुंदकर पीआई था, इसलिए उस ने अपने प्रभाव से डेढ़ साल तक मामले को लटकवाए रखा.

ऊंची राजनीतिक पहुंच की वजह से अभय कुरुंदकर अपने वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों को भी नहीं मानता था. वह अपने मन की करता था. 2010 से 2013 के बीच पीआई अभय कुरुंदकर आर्थिक अपराध शाखा में रहा था, तब उस ने कई मामलों की गोपनीय जानकारी लीक कर दी थी. इस बात की जानकारी जब तत्कालीन डीसीपी दिलीप सावंत को हुई तो उन्होंने 9 मई, 2013 को अभय के खिलाफ कोल्हापुर के स्पैशल डीजीपी और डीजीपी को जांच के लिए एक रिपोर्ट भेजी. लेकिन उस का कोई असर नहीं हुआ था.

पीआई अभय कुरुंदकर की जांच होने के बजाय उस का ट्रांसफर सांगली के तांसगांव थाने में कर दिया गया. लेकिन वह वहां नहीं गया बल्कि तत्कालीन गृहमंत्री आर.आर. पाटील से मिल कर अपना ट्रांसफर रद्द करवा लिया. डीसीपी दिलीप सावंत के बारबार यह रिपोर्ट देने के बावजूद पीआई अभय कुरुंदकर द्वारा विभाग की महत्त्वपूर्ण जानकारी बाहर जाती रही. उस के खिलाफ कोई काररवाई नहीं हुई.

मामला एक सीनियर पुलिस अफसर का था, अत: कलंबोली के थानाप्रभारी पोकरे ने इसे गंभीरता से लिया. उन्होंने उस की जांच शुरू कर दी. उन्होंने काफी हद तक इस मामले को हल भी कर लिया था, लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों के सहयोग के बिना मामला आगे नहीं बढ़ सका. 3 महीने का समय निकल जाने के बाद जब केस की जांच आगे नहीं बढ़ी तो अश्विनी बेंद्रे के घर वाले परेशान हो गए.

16 सितंबर, 2016 को आनंद बेंद्रे ने बहनोई राजू गोरे के साथ नवी मुंबई के कमिश्नर हेमंत नगराले से मुलाकात की. जरूरी काररवाई करने का आश्वासन देने के बजाय कमिश्नर हेमंत नगराले ने उन्हें यह कह कर डराया कि उन की जान को खतरा है, वे संभल कर रहें.

पुलिस कमिश्नर से उन्हें इस तरह की उम्मीद नहीं थी. उन की बातों से साफ जाहिर हो रहा था कि इस मामले को ले कर पुलिस गंभीर नहीं है. उन के इस रवैए से निराश हो कर अश्विनी बेंद्रे के घर वालों ने 8 अक्तूबर, 2016 को अदालत का दरवाजा खटखटाया.

अदालत का आदेश भी नहीं माना पुलिस ने

28 अक्तूबर, 2016 को अदालत ने पुलिस को आदेश दिया कि मामला काफी संगीन है, इस की जांच डीसीपी रैंक के अधिकारी से करवाई जाए. अदालत की पहल पर मामला डीसीपी पोखरे को सौंप दिया गया. डीसीपी पोखरे ने एसीपी राजकुमार चाफेकर के साथ मामले की जांच तो की, लेकिन उस पर कोई काररवाई नहीं हुई और देखतेदेखते 2 महीने गुजर गए. मामला ज्यों का त्यों रहा.

पहली जनवरी, 2017 को अदालत ने पुलिस प्रशासन को फटकार लगाते हुए मामले की जांच के लिए एसीपी प्रकाश निलेवाड़ की देखरेख में एक स्पैशल टीम गठित करने को कहा और पूछा कि मामले से संबंधित औडियो वीडियो का रिकौर्ड होने के बाद भी काररवाई क्यों नहीं की गई.

अदालत के आदेश पर एसीपी प्रकाश निलेवाड़ ने मामले को गंभीरता से लिया और जांच की जिम्मेदारी पीआई संगीता अलफांसो को सौंप दी. पीआई संगीता अलफांसो ने अपना काम पूरी ईमानदारी से किया. उन्होंने एक महीने की जांच के बाद 31 जनवरी, 2017 को अश्विनी बेंद्रे के अपहरण का मामला दर्ज कर लिया.

इस के पहले कि पीआई संगीता अलफांसो अश्विनी बेंद्रे के अपहर्त्ताओं पर कोई काररवाई करतीं, पीआई अभय कुरुंदकर को अपनी गिरफ्तारी का अहसास हो गया और फरवरी, 2017 में वह अदालत चला गया, जिस की वजह से मामले में रुकावट आ गई. जब तक अदालत का कोई आदेश आता, तब तक पीआई संगीता अलफांसो का ट्रांसफर हो गया. उन के जाने के बाद इस मामले की जांच 9 महीने के लिए फिर अटक गई. अभय कुरुंदकर ने अदालत में यह अरजी लगाई कि उस के ऊपर लगाए गए सारे आरोप झूठे और बेबुनियाद हैं. उसे साजिश के तहत फंसाया जा रहा है.

पीआई संगीता अलफांसो के ट्रांसफर के बाद एक बार फिर अश्विनी बेंद्रे के परिवार वालों का धैर्य टूट गया. 9 महीने के इंतजार के बाद इस बार उन्होंने मीडिया से संपर्क किया. पहले तो 15 दिनों तक मीडिया में कोई हलचल नहीं हुई.

मीडिया ने बदला केस का रुख

16 जनवरी, 2017 को इलैक्ट्रौनिक मीडिया ने अश्विनी बेंद्रे के साथ पीआई अभय कुरुंदकर द्वारा मारपीट का एक वीडियो वायरल कर पूरे देश में सनसनी फैला दी. दूसरे दिन प्रिंट मीडिया ने भी इसे सुर्खियों में छापा. इस के बाद तो यह मामला हाईप्रोफाइल हो गया और प्रशासन में हड़कंप मच गया.

सवालों के जवाबों में नवी मुंबई पुलिस कमिश्नर हेमंत नगराले को झूठ बोलना पड़ा. उन्होंने एक प्रैस नोट जारी कर मामले को झूठा और बेबुनियाद बता दिया. पुलिस कमिश्नर के इस बयान पर अदालत नाराज हो गई, जिस के चलते एसीपी प्रकाश निलेवाड़ ने पीआई संगीता अलफांसो द्वारा तैयार की गई जांच रिपोर्ट के आधार पर पीआई अभय कुरुंदकर को औन ड्यूटी और उस के साथ ज्ञानेश्वर पाटिल को 8 दिसंबर, 2017 को हिरासत में ले लिया.

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पीआई संगीता अलफांसो ने अपनी रिपोर्ट में ज्ञानेश्वर पाटिल उर्फ राजेश पाटिल उर्फ राजू पाटिल को पीआई अभय कुरुंदकर का सहयोगी बताया था. राजू पाटिल अभय कुरुंदकर  के हर अच्छेबुरे काम में उस के साथ रहता था. ज्ञानेश्वर पाटिल तत्कालीन मंत्री एकनाथ खड़से का भांजा था. वह जिला जलगांव, तालुका भुसावल के गांव तलवेल का रहने वाला था. एक बिजनैसमैन के अलावा वह वहां के भाजपा युवामोर्चा का नेता था.

हकीकत आ ही गई सामने

जिस दिन अश्विनी बेंद्रे गायब हुई थी, उस दिन अश्विनी और राजू पाटिल के मोबाइल फोन की लोकेशन साथसाथ मीरा रोड की थी. अभय कुरुंदकर का मकान भी मीरा रोड पर ही था. इस से मामला स्पष्ट था कि घटना मीरा रोड पर अभय के मकान में घटी थी और सबूत भायंदर खाड़ी में ले जा कर नष्ट किया गया था.

पीआई संगीता अलफांसो ने जब थाने में उस से पूछताछ की तो उस ने अपना गुनाह तो स्वीकार नहीं किया, लेकिन उस का बयान भी विश्वसनीय नहीं था. उस ने बताया कि जिस दिन अश्विनी गायब हुई थी, उस दिन वह मुंबई के अंधेरी स्थित एक होटल में अपने दोस्तों के साथ बैठ कर शराब पी रहा था.

इस के बाद वह खाना खाने के लिए बाहर निकला था. लेकिन कोई अच्छा होटल न मिलने के कारण वह अपने दोस्त पीआई अभय कुरुंदकर के घर चला गया था. अभय कुरुंदकर के विषय में पीआई संगीता अलफांसो को जो बात मालूम पड़ी थी, वह सीधे पीआई के खिलाफ जा कर अश्विनी बेंद्रे की हत्या की तरफ इशारा कर रही थी.

भायंदर खाड़ी के मछलीमारों ने पीआई संगीता अलफांसो को बताया था कि पीआई अभय कुरुंदकर लगभग एकडेढ़ साल पहले अकसर सुबहसुबह इधर आते थे. उन से वह किसी महिला के शव के बारे में पूछताछ किया करते थे. उन का कहना था कि वह एक महिला की गुमशुदगी की जांच कर रहे हैं. यदि उस महिला की उन्हें डेडबौडी मिले तो पहले उन से संपर्क करें.

एक बात और यह पता चली कि अश्विनी बेंद्रे के गायब होने के दूसरे दिन ही अभय कुरुंदकर ने अपने मकान की पुताई करवाई थी. अपनी फोक्सवैगन कार को भी उन्होंने अपने मकान से हटवा दिया था. अदालत के आदेश पर जब पीआई संगीता अलफांसो ने अभय कुरुंदकर के मकान की जांच की तो उन्हें दीवारों पर काले रंग के कुछ धब्बे नजर आए, जो पुताई के बाद भी पूरी तरह से दबे नहीं थे. उन्हें खुरचवा कर डीएनए टेस्ट के लिए सांताकु्रज की लैब में भेज दिया गया. उस की रिपोर्ट आने के बाद ही पता लगेगा कि वे खून के छींटे किस के हैं.

पीआई अभय कुरुंदकर की गिरफ्तारी के बाद जांच अधिकारी ने अश्विनी बेंद्रे के मामले से जुड़ी संदिग्ध लाल रंग की फोक्सवैगन कार नंबर एमएच10ए एन5500 भी खोज निकाली. यह कार सांगली घामड़ी रोड के जिम्नेश्वर कालोनी में रहने वाले रमेश चारुदत्त जोशी के नाम रजिस्टर थी. पुलिस टीम को अश्विनी बेंद्रे द्वारा लिखा गया एक नोट भी मिला, जिस में लिखा था, ‘मेरे हाथपैर तोड़ने और मुझे मार कर तुम्हारी मनोकामना पूरी हो जाएगी.’

ऐसे कई सबूत थे, जो अभय कुरुंदकर को अश्विनी बेंद्रे के मामले में दोषी ठहरा रहे थे. लेकिन इस के बाद भी अभय कुरुंदकर अपना अपराध स्वीकार नहीं कर रहा था. उस का कहना था कि वह इस मामले में निर्दोष है. जांच टीम ने परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर उस के और ज्ञानेश्वर पाटिल उर्फ राजू पाटिल के खिलाफ भादंवि की धारा 323, 364, 497, 506(2), 34 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया. धारा 302 डीएनए रिपोर्ट आने के बाद जोड़ दी जाएगी.

लेकिन इस के पहले पीआई अभय कुरुंदकर और ज्ञानेश्वर पाटिल उर्फ राजू पाटिल का इकबालिया बयान जरूरी है. इस के लिए पुलिस टीम ने अदालत से उन के नारको टेस्ट की इजाजत मांगी है, जिस पर उन के वकीलों ने ऐतराज किया है. बहरहाल, मामला अदालत में विचाराधीन है. दोनों आरोपी कथा लिखने तक सलाखों के पीछे थे.

पीआई अभय कुरुंदकर की गिरफ्तारी से एपीआई अश्विनी बेंद्रे के घर वालों को इंसाफ की आशा जागी है लेकिन मामला इतना लंबा खिंचा, इस बात का जिम्मेदार उन्होंने नवी मुंबई पुलिस कमिश्नर हेमंत नगराले को ठहराया है. उन्होंने प्रैस वार्ता कर के उन पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें भी सहअभियुक्त बनाने की मांग की है.

उन का कहना है कि पीआई अभय कुरुंदकर ने अपने पद का दुरुपयोग किया और तफ्तीश में सहयोग नहीं किया. इतना ही नहीं, उन्होंने जांच अधिकारी का ट्रांसफर कर अभियुक्त को बचाने की कोशिश की. यह एक ऐसा प्रश्न है जिस का जवाब उन्हें आने वाले समय में देना पड़ सकता है.

– कथा जनचर्चा और समाचार पर आधारित है

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