शामली के कुदाना गांव की मीना राणा की शादी 1981 में हुई थी. शादी के 10 साल बाद भी दोनों मातापिता नहीं बन सके. डाक्टरों को दिखाने पर पता चला कि मीना कभी मां नहीं बन सकती. निराश हो कर पतिपत्नी ने 1990 में एक दिव्यांग बच्चे को गोद लिया. उस का नाम रखा मांगेराम. लेकिन यहां भी उन के हाथ निराशा ही लगी, 5 साल बाद मांगेराम चल बसा.
आखिर दुखी हो कर वीरेंद्र राणा और मीना शामली छोड़ कर शुक्रताल आ कर रहने लगे और अनाथ बच्चों को गोद ले कर पालने पढ़ाने लगे. जल्द ही लोगों का ध्यान उन की ओर गया, जिस की वजह से उन्हें डोनेशन में 8 बीघा जमीन मिल गई.
इस जमीन पर उन्होंने अनाथाश्रम चलाना शुरू किया, जिस में स्कूल भी स्थापित किया गया. इस वक्त इस दंपति के 46 बच्चे हैं. कई बच्चे ऐसे रहे जो बड़े हो कर नौकरी करने बाहर चले गए. कइयों की शादी हो गई. यह सब संभव हुआ डोनेशन की मदद से.
मीना कहती हैं कि उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि बच्चे हिंदू हैं या मुसलमान. मुझे सिर्फ इतना पता है कि ये सब मेरे बच्चे हैं. इस वक्त इस आश्रम में जो बच्चे रह रहे हैं, उन में 19 लड़कियां हैं और 27 लड़के. इन में से कई दिव्यांग हैं. अनाथाश्रम में एक अच्छी रसोई है, बड़े कमरे और एक बड़ा सा खेल का मैदान है.
वीरेंद्र राणा के अनुसार शुक्रताल ग्राम पंचायत ने उन्हें एक बड़ा प्लौट दिया है. गांव के लोग उन्हें गेहूं वगैरह देते हैं. बाकी जरूरतों के लिए डोनेशन पर निर्भर रहना पड़ता है. इस अनाथाश्रम में पलीबढ़ी ममता ने मुजफ्फरनगर के कालेज से पोस्ट ग्रैजुएशन किया है. वह कहती है, ‘अगर मीनाजी और वीरेंद्रजी का ध्यान उन पर न गया होता तो न जाने उस का क्या भविष्य होता.’
ममता अब अनाथाश्रम का ही काम संभालती हैं और बच्चों को पढ़ाती भी हैं. शुक्रताल के प्रधान सुशील शर्मा का कहना है कि मीना और वीरेंद्र जो कर रहे हैं, वह हर किसी के वश की बात नहीं है.
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अरेंज्ड या लव, शादी कैसे भी हो, ससुराल में आपसी अनबन, विचारों में मतभेद जैसी शिकायतें घरघर की कहानी है, क्योंकि हमारे समाज में शादी केवल 2 व्यक्तियों की नहीं, बल्कि 2 परिवारों की होती है, जहां लोग एकदूसरे के विचारों और स्वभाव से अनजान होते हैं. आजकल लड़कालड़की शादी से पहले मिल कर एकदूसरे को समझ लेते हैं, लेकिन परिवार के बाकी सदस्यों को समझने का मौका शादी के बाद ही मिलता है. जिस तरह से बहू असमंजस में रहती है कि ससुराल के लोग कैसे होंगे, उसी तरह ससुराल वाले भी बहू के व्यवहार से अनजान रहते हैं. ससुराल में पति के अलावा सासससुर, ननद, देवर, जेठजेठानी सहित कई महत्त्वपूर्ण रिश्ते होते हैं.
एक छत के नीचे 4 लोग रहेंगे तो विचारों में टकराव होना स्वाभाविक है, लेकिन जब यह जरूरत से ज्यादा बढ़ जाए तो रिश्तों में कड़वाहट आ जाती है.
आपसी मनमुटाव की वजहें
जैनरेशन गैप, विचारों को थोपना, अधिकार जमाने की मानसिकता, बढ़ती उम्मीदें, पूर्वाग्रह, फाइनैंशियल इशू, बहकावे में आना, प्यार में बंटवारे का डर इत्यादि रिश्तों में मनमुटाव की वजहें होती हैं. कभीकभी तो स्वयं पति भी सासबहू में मनमुटाव का कारण बन जाता है. इन सब के अलावा आजकल सासबहू के रिश्तों पर आधारित टीवी सीरियल भी आग में घी का काम कर रहे हैं.
शादीशुदा अंजलि बताती है, ‘‘घर में पति और 2 बच्चों के अलावा सास, ननद, देवर, जेठजेठानी एवं उन के बच्चे हैं. घर में अकसर एकदूसरे के बीच झगड़े व मनमुटाव का माहौल बना रहता है, क्योंकि सासननद को लगता है कि हम बहुएं केवल काम करने की मशीनें हैं. हमारा हंसनाबोलना उन को कांटे की तरह चुभता है. स्थिति ऐसी है कि परिवार के सदस्य आपस में बात तक नहीं करते हैं.’’
मुंबई की सोनम कहती हैं, ‘‘मेरी शादी को 1 साल हो गया है. मैं ने देखा है कि मेरे पति या तो अपनी मां की बात सुनते हैं या फिर पूरी तरह से हमारे बीच के मतभेद को नजरअंदाज करते हैं, जोकि मुझे सही नहीं लगता. पति पत्नी और घर के अन्य सदस्यों के बीच एक कड़ी होता है, जो दोनों पक्षों को जोड़ती है. वह भले किसी एक पक्ष का साथ न दे, परंतु सहीगलत के बारे में एक बार जरूर सोचना चाहिए.’’
इसी तरह 50 वर्षीय निर्मला बताती हैं, ‘‘घर में बहू तो है लेकिन वह सिर्फ मेरे बेटे की पत्नी है. उसे अपने पति और बच्चों के अलावा घर में कोई और दिखाई ही नहीं देता है. उन लोगों में इतनी बिजी रहती है कि एकाध घंटा भी हमारे पास आ कर बैठती तक नहीं है, न ही हालचाल पूछती है. उस के व्यवहार या रहनसहन से कभी भी हम खुश नहीं होते, जिस का उस पर कोई असर नहीं होता. बेटियों का हवाला दे कर अकसर उलटा जवाब देती है. ऐसे में उस के होने न होने से हमें कोई फर्क नहीं पड़ता है.’’
नवी मुंबई की आशा कहती हैं, ‘‘मेरे पति हर साल करवाचौथ पर अपनी मां के लिए साड़ी लाते थे. इस साल किसी वजह से नहीं ला पाए तो ‘मैं ने उन्हें अपने वश में कर लिया है,’ कहते हुए सास ने पूरे घर में हंगामा मचा दिया. ससुराल वालों को लगता है कि मैं पैसे कमा कर मायके में देती हूं. शादी के बाद उन का बेटा कम पैसा देता है तो उस के लिए भी मुझे ही जिम्मेदार ठहराया जाता है.’’
शादी के बाद रिश्तों में आई कुछ ऐसी ही कड़वाहट को कैसे दूर करें कि विवाह बाद भी सदैव खुशहाल रहें, पेश हैं कुछ सुझाव:
कैसे मिटाएं दूरियां: मनोचिकित्सक डा. वृषाली तारे बताती हैं कि संयुक्त परिवार में आपस में मधुरता होनी बहुत जरूरी है. रिश्तों में मिठास बनाए रखने की जिम्मेदारी किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि घर के सभी सदस्यों की होती है. इसलिए परिवार के हर सदस्य को एक समान प्रयास करना चाहिए.
विचारों में पारदर्शिता लाएं: डा. वृषाली के अनुसार, परिवार में एकदूसरे के बीच ज्यादा से ज्यादा कम्यूनिकेशन होना चाहिए, जो डिजिटल न हो कर आमनेसामने हो. दूसरी बात एकदूसरे के विचारों में पारदर्शिता हो, जो किसी भी मजबूत रिश्ते की बुनियाद होती है. उदाहरण के लिए, यदि आप शादी के बाद भी नौकरी करती हैं या कहीं बाहर जाती हैं, तो घर पहुंच कर जल्दी या देर से आने का कारण, औफिस में दिन कैसा रहा जैसी छोटीछोटी बातें घर वालों से शेयर करें. इस से घर का माहौल हलका होने के साथसाथ एकदूसरे पर विश्वास बढ़ेगा. जितना ज्यादा आप इन्फौर्म करेंगी, उतना ही ज्यादा खुद को स्वतंत्र महसूस कर पाएंगी. इस के लिए फेसबुक, व्हाट्सऐप जैसे डिजिटल साधनों का कम से कम इस्तेमाल करें ताकि रिश्तों में गलतफहमी न आए. ऐसा बहू को ही नहीं, बल्कि घर के बाकी सदस्यों को भी करना चाहिए.
मैंटल प्रोटैस्ट से बचें: आजकल सब से बड़ी समस्या यह है कि हम पहले से ही अपने दिमाग में एक धारणा बना चुके होते हैं कि बहू कभी बेटी नहीं बन सकती, सास कभी मां नहीं बन सकतीं. ऐसी नकारात्मक सोच को मैंटल प्रोटैस्ट कहते हैं. अकसर देखा जाता है कि बहुओं की मानसिकता ऐसी होती है कि घर पर उस के हिस्से का काम पड़ा होगा. सास, ननद जरूर कुछ बोलेंगी. ऐसी सोच रिश्तों पर बुरा असर डालती है और इसी सोच के साथ लोग रिश्तों में सुधार की कोशिश भी नहीं करते हैं. इसलिए जरूरी है कि इस तरह की नकारात्मक सोच के घेरे से बाहर निकलें और एकदूसरे के बीच बढ़ती दूरियों को कम करें.
काउंसलर की मदद लें: डा. वृषाली तारे कहती हैं कि संयुक्त परिवार में छोटीमोटी नोकझोंक, विचारों में मतभेद आम बात है, जिसे बातचीत, प्यार और धैर्य से सुलझाया जा सकता है और यह तभी संभव है जब आप का शरीर और मन स्वस्थ हो. लेकिन मामला गंभीर है तो घर के सभी लोगों को बिना संकोच काउंसलर की मदद लेनी चाहिए. ज्यादातर रिश्तों में कड़वाहट का कारण मानसिक अस्वस्थता होती है, जिसे लोग नहीं समझ पाते हैं. ऐसे में जिस तरह से कोई बीमारी होने पर हम डाक्टर की मदद लेते हैं, उसी तरह रिश्तों में आई कड़वाहट और उलझनों को सुलझाने के लिए किसी ऐक्सपर्ट की सलाह लेने में शर्म या संकोच न करें, क्योंकि रिश्तों में स्थिरता और मधुरता लाने की जिम्मेदारी किसी एक सदस्य की नहीं होती है, बल्कि इस के लिए संयुक्त प्रयास होना चाहिए.
रूढि़वादी मानसिकता से बाहर निकलें: विज्ञान और आधुनिकता के समय में रूढि़वादी रीतिरिवाजों से बाहर निकलने की कोशिश करें. घर के सदस्यों के रहनसहन और जीवनशैली में हुए बदलाव को स्वीकार करें, क्योंकि एकदूसरे पर विचारों को थोपने से रिश्तों में कभी मिठास नहीं आ सकती है. सहनशीलता और मानसम्मान देना केवल कम उम्र के लोगों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि बड़े लोगों में भी यह भावना होनी चाहिए. अधिकार जमाने या विचार थोपने से हट कर रिश्तों से ज्यादा व्यक्ति को महत्त्व देंगे तो संबंध अपनेआप खूबसूरत बन जाएंगे.
जाहिर सी बात है कि रिश्तों में खुलापन और अपनापन आने में वक्त लगता है, परंतु रिश्ते यों ही नहीं बनते हैं. इस के लिए संस्कार और परवरिश तो माने रखते ही है, कभीकभी सही वक्त पर सही सोच भी बहुत जरूरी होती है.
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अपनी त्वचा को दें गरमियों में अतिरिक्त सुरक्षा, कुछ इस तरह. इस सीजन में ऐक्सफोलिएशन अनिवार्य है, क्योंकि दिन भर में चेहरे पर जो अशुद्धता जम जाती है उसे निकालना जरूरी है. इसलिए हफ्ते में कम से कम 2 बार त्वचा को ऐक्सफोलिएट जरूर करें.
अपनी त्वचा को नुकसान से बचाने और तरोताजा रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए. इस के अलावा नारियल पानी भी लें. यह त्वचा की चमक बनाए रखने में सहायक है.
त्वचा के अनुरूप सनस्क्रीन ढूंढ़ पाना भले ही मुश्किल काम है, लेकिन इस के फायदे हैं. भारतीय त्वचा के लिए 30 से 50 एसपीएफ का सनस्क्रीन उपयुक्त रहता है. तैलीय त्वचा वालों के लिए जैलयुक्त सनस्क्रीन भी उपलब्ध है. धूप में निकलने से कम से कम 20 मिनट पहले त्वचा पर सनस्क्रीन लोशन या जैल जरूर लगाएं.
ऐक्सरसाइज करने से शरीर में रक्तसंचार ठीक बना रहता है और शरीर को पर्याप्त औक्सीजन मिलता है, जिस से त्वचा भी स्वस्थ रहती है.
धूप में आंखों को सुरक्षित रखने के लिए सनग्लास पहनें.
गुलाबजल, बेसन और दही जैसी प्राकृतिक चीजों की मदद से त्वचा साफ करें. इस के बाद त्वचा को टोन जरूर करें. इस से रोमछिद्र बंद हो जाते हैं और त्वचा को ठंडक पहुंचती है. यदि मौश्चराइजर लगाने से आप की त्वचा तैलीय हो जाती है, तो गरमियों में आप नमीयुक्त मौइश्चराइजर का इस्तेमाल कर सकती हैं.
त्वचा से टैन को हटाने के लिए आप चेहरे पर दही लगा सकती हैं. इस में शहद, ओटमील, ककड़ी, खीरा या नीबू भी मिला सकती हैं.
इस सीजन में ऐक्सफोलिएशन अनिवार्य है, क्योंकि दिन भर में चेहरे पर जो अशुद्धता जम जाती है उसे निकालना जरूरी है. इसलिए हफ्ते में कम से कम 2 बार त्वचा को ऐक्सफोलिएट जरूर करें.
– डा. करुणा मलहोत्रा, कौस्मैटिक स्किन ऐंड होम्योक्लिनिक
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धर्म की खातिर किस तरह झूठ बोला जा सकता है इस का एक चौंकाने वाला उदाहरण पेश किया विज्ञान एवं तकनीकी मंत्री डा. हर्षवर्धन ने. ये जनाब महान वैज्ञानिक व भौतिकी विद्वान स्टीफन हाकिंग को श्रद्धांजलि देते समय कहने लगे कि इन वैज्ञानिक ने भी माना था कि वेदों का ज्ञान उन के और अल्बर्ट आइंस्टीइन के ज्ञान से कहीं अधिक है.
जब मंत्री से पूछा गया कि इस का संदर्भ क्या है तो उन्होंने बड़ी ही ढिठाई से उत्तर दिया कि ढूंढ़ लो खुद. ऐसा ही हमारे पंडेपुजारी रोज करते हैं. अब औरतों के टीका लगाने को ही ले लीजिए. यह धार्मिक रिवाज बेसिरपैर का है पर इस की वैज्ञानिकता सिद्ध करने के लिए कह डाला गया है कि जहां यह टीका लगता है वहां नसों का केंद्र है. इस से ऊर्जा नष्ट नहीं होती है. उस से खून का दौरा मुंह की पेशियों तक चालू रहता है. यह किस तरह के शोध से पता चला, यह बताने की जरूरत तो है ही नहीं.
नदियों के ऊपर से गुजरते हुए सैकड़ों लोग बसों, गाडि़यों और खिड़कियां खुली हों तो ट्रेनों से पानी में पैसे फेंकते हैं. वैज्ञानिकता सिद्ध करने के लिए मनगढं़त कह दिया गया है कि इस से कौपर को पानी में डाला जाता है ताकि पानी के विभिन्न गुणों का संतुलन बना रहे.
मंदिर जाने के लिए भी वैज्ञानिकता की खोज कर ली गई, जो शायद नासा के वैज्ञानिकों को भी शर्मसार कर दे. कह डाला गया है कि जहां मंदिर में मूर्ति स्थापित होती है, वहां गोपुरम होता है जो पृथ्वी की चुंबकीय शक्ति को एकत्रित कर लेता है और मूर्ति के माध्यम से मंदिर में जाने वालों को ऊर्जा देता है.
इस प्रकार के बहुत से झूठ रोज गढ़े जाते हैं ताकि इस वैज्ञानिक युग में भी धार्मिक पागलपन को बनाए रखा जा सके. ये मंत्री ही ऐसे नहीं हैं, जो इस तरह की मूर्खतापूर्ण बातें कहते हैं, हमारे प्रधानमंत्री
नरेंद्र मोदी तक कह चुके हैं कि गणेश तो प्लास्टिक व ट्रांसप्लांट सर्जरी का कमाल है, जो हमारे पुराणों में पहले से ही मौजूद है.
यह जानने के लिए कोई तैयार नहीं कि इस सब ज्ञानविज्ञान को हम पहले से ही जानते हैं तो आज दुनिया के सब से पीछे वाले देशों में क्यों हैं? हमारी अर्थव्यवस्था बड़ी है पर अपनी अधिक भूमि और अधिक जनसंख्या के कारण वरना करोड़ों लोग यहां आज भी जानवरों की तरह रहने को मजबूर हैं.
असल में इस प्रकार का धार्मिक दुष्प्रचार औरतों पर भारी पड़ता है, जो इन अंधविश्वासों को मान कर शारीरिक, मानसिक गुलामी झेलने को मजबूर कर दी जाती हैं. कभी उन्हें भूखा रहना पड़ता है, कभी नंगे पांव चलना पड़ता है, कभी रात भर गला फाड़ कर चिल्लाना पड़ता है, तो कभी घंटों बैठ कर ध्यान लगाने या प्रवचन सुनने के नाम पर समय बरबाद करना पड़ता है. उन्हें डा. हर्षवर्धन जैसे लोगों के बेसिरपैर के बोल सुनने पड़ते हैं.
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भोजपुरी फिल्मों के सुपरस्टार पवन सिंह की फिल्में उत्तर प्रदेश, बिहार के अलावा देश के तमाम हिस्सों के साथसाथ विदेशों में भी पसंद की जाती हैं.
इस साल पवन सिंह डायैक्टर सुजीत कुमार सिंह की फिल्म ‘वांटेड’ में नजर आएंगे. यह भोजपुरी की सब से बड़े बजट वाली फिल्म होगी. इस फिल्म के ज्यादातर हिस्सों की शूटिंग पूर्वी उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में हुई है.
फिल्म ‘वांटेड’ की शूटिंग के सैट पर पवन सिंह से लंबी बातचीत की गई. पेश हैं, उस के खास अंश:
यह माना जाता है कि भोजपुरी फिल्मों के हिट होने के पीछे कहानी के अलावा गानों का भी अहम रोल होता है. आप ने अपने कैरियर की शुरुआत बतौर भोजपुरी गायक की थी. इस बारे में आप क्या कहेंगे?
भोजपुरी ही नहीं बल्कि दूसरी किसी भारतीय भाषा में बनने वाली फिल्मों के हिट होने में गानों का अहम रोल होता है. अगर फिल्म की कहानी में थोड़ीबहुत कमी भी हो तो अच्छे गाने और म्यूजिक वाली फिल्में हिट साबित होती हैं. अगर भोजपुरी फिल्मों के गानों के बारे में कहें तो ये इन की जान होते हैं.
भोजपुरी फिल्मों पर साफसुथरी, पारिवारिक न होने के आरोप लगते रहे हैं. इस पर आप क्या कहेंगे?
ऐसा बिलकुल नहीं है. भोजपुरी में एक कहावत है नामी बनिया, बदनामी चोर यानी भोजपुरी को जानबूझ कर बदनाम किया जा रहा है. सच तो यह है कि भारत में बन रही दूसरी भाषाओं की फिल्मों से भोजपुरी फिल्में ज्यादा साफसुथरी बन रही हैं. यही वजह है कि दूसरी भाषाओं की तरह भोजपुरी में बनने वाली फिल्मों को आज तक ‘ए सर्टिफिकेट’ नहीं मिला है. बात अगर भोजपुरी फिल्मों के दो मतलब वाले डायलौग की है तो इन में भोजपुरी की मिठास छिपी हुई है. हां, कुछ कमियां हैं, जिन्हें दूर किए जाने की जरूरत है.
भोजपुरी फिल्मों में किस तरह के बदलाव आ रहे हैं?
अब भोजपुरी फिल्मों के फाइट सीन ऐक्सपर्ट फाइट मास्टर के डायरैक्शन में फिल्माए जा रहे हैं. इन में हाई टैक्नोलौजी, लाइटिंग, कैमरा, ग्राफिक वगैरह का इस्तेमाल होने लगा है.
आजकल ज्यादातर हिंदी फिल्में मुंबई की फिल्म सिटी के महंगे सैटों के साथसाथ विदेशों तक में फिल्माई जा रही हैं जबकि भोजपुरी की फिल्में गांवों, कसबों और छोटे शहरों में फिल्माए जाने की ओर रुख कर रही हैं. ऐसा क्यों?
भोजपुरी फिल्मों की आत्मा गांवों में बसती है, जिसे मुंबई की महंगी फिल्म सिटी और विदेशों में फिल्माना मुमकिन नहीं है. भोजपुरी इंडस्ट्री अपनी संस्कृति और सभ्यता को ध्यान में रख कर ही फिल्में बना रही है.
मैं यहां एक बात और कहना चाहूंगा कि इस से फिल्मों के बनाने के ऊपर आने वाले फालतू खर्चों में कमी आती है. बचे पैसों से फिल्मों की तकनीक बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है.
सुना है कि फिल्म ‘वांटेड’ में आप के साथ 2-2 हीरोइनें काम कर रही हैं?
जी हां. मेरे साथ पश्चिम बंगाल की मणि भट्टाचार्य और मध्य प्रदेश राज्य की अमृता आचार्य ने काम किया है. ये दोनों ही पहले भी भोजपुरी फिल्में कर चुकी हैं.
क्या वजह है कि भोजपुरी फिल्में 100 करोड़ के क्लब में शामिल रहने में नाकाम रही हैं?
भोजपुरी कलाकारों का टकराव खत्म हो जाए और लोग आपस में दिल से मिल कर काम करना शुरू कर दें तो वह दिन दूर नहीं जब भोजपुरी फिल्में भी 100 करोड़ के क्लब में शामिल होने लगेंगी.
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सवाल मैं 21 साल का लड़का हूं और एक 18 साल की लड़की से पिछले 2 साल से प्यार करता हूं. वह लड़की मेरे साथ जिस्मानी संबंध बनाना चाहती है. पर चूंकि हम दोनों की जातियां अलग हैं, इसलिए हमारी शादी नहीं हो सकती. ऐसे में मैं क्या करूं?
जवाब
जाति के अलग होने से जिस्मानी ताल्लुक का कोई लेनादेना नहीं है और न ही शादी होने या न होने से है. 2 बालिग अपनी मरजी से संबंध बना सकते हैं. पर यह ध्यान रखें कि बाद के पचड़े लड़की को ही भुगतने पड़ते हैं इसलिए जिस्मानी ताल्लुक बनाने से पहले खूब सोचसमझ लें और उसी लड़की से शादी करने की कोशिश करें. जातपांत की कोई खास अहमियत अब नहीं रही, कुछ अड़चनें आएंगी, उन से लड़ें.
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विवाह सैक्स के बाद नहीं पैसों के बाद
विवाह को ले कर युवाओं की धारणा अब बदल रही है. पहले जहां सैक्स संबंध कायम होने के बाद शादी करने की मांग जोर पकड़ लेती थी वहीं अब सैक्स के बाद भी ऐसी मांग नहीं उठती. कई बार तो लिव इन रिलेशनशिप लंबी चलती रहती है. फिल्मों में ही नहीं सामान्यतौर पर भी कई दोस्त आपस में एकसाथ रहते हैं. अब सैक्स कोई मुद्दा नहीं रह गया है. जब कभी शादी की बात चलती है तो युवकयुवती दोनों की एक ही सोच होती है कि पहले आत्मनिर्भर हो जाएं व अच्छा कमाने लगें, जिस से जिंदगी अच्छी कटे, फिर शादी की सोचें.
केवल युवा ही नहीं, उन के पेरैंट्स भी शादी की जल्दी नहीं करते. वे भी सोचते हैं कि पहले बच्चे कुछ कमाने लगें उस के बाद ही विवाह की सोचें. जो बच्चे कमाने लगते हैं वे बाकी फैसलों की तरह शादी के फैसले भी खुद लेने लगे हैं.
सैक्स अब पहले की तरह समाज में टैबू नहीं रह गया है. युवा इस को ले कर सजग और जागरूक हो गए हैं, उन्हें घरपरिवार से दूर अकेले रहने के अवसर ज्यादा मिलने लगे हैं. जहां वे अपनी सैक्स जरूरतों को पूरा कर सकते हैं. सैक्स को ले कर वे इतने सजग हो गए हैं कि अब उन को अनचाहे गर्भ या गर्भपात जैसी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता. आज उन्हें गर्भ से बचने के उपाय पता हैं. पहले सैक्स एक ऐसा विषय था जिस पर लोग चर्चा करने से बचते थे. युवा जब इस विषय पर चर्चा करनी शुरू करते थे तब परिवार के लोग उन की शादी के बारे में सोचना शुरू कर देते थे. अब केवल युवक ही नहीं युवतियां तक अपने घर से दूर पढ़ाई, कंपीटिशन और जौब को ले कर शहरों में होस्टल या पीजी में अकेली रहने लगी हैं. ऐसे में सैक्स उन के लिए कोई मुद्दा नहीं रह गया है. अब युवाओं की प्राथमिकता है कि शादी की बात तब सोचो जब पैसे कमाने लगो.
फैशन और जरूरतें बनीं वजह
‘विवाह सैक्स के बाद नहीं पैसे के बाद’ इस बदलती सोच के पीछे सब से बड़ी वजह आज के समय में बढ़ती महंगाई है. पहले विवाह के बाद जहां 20 से 40 हजार में हनीमून ट्रिप पूरा हो जाता था वहीं अब यह खर्च बढ़ कर 90 हजार से 1 लाख रुपए के ऊपर पहुंच गया है. शादी के बाद पतिपत्नी के बीच इतना सामंजस्य नहीं होता कि बिना कहे वे इस आर्थिक परेशानी को समझ सकें. एक नए शादीशुदा जोड़े की हनीमून कल्पना पूरी तरह से फिल्मी होती है. जहां पत्नी किसी राजकुमारी सा अनुभव करना चाहती है. अब इस अनुभव और फीलिंग्स के लिए पैसों की जरूरत होती है. ज्यादातर युवा प्राइवेट जौब में होते हैं, जहां पैसा भले होता है पर समय नहीं होता. ऐसे में युवाओं को ऐसी नौकरी की प्रतीक्षा रहती है जिस में पैसा हो, जिस के सहारे वे शादी के बाद सभी सुखों का आनंद ले सकें.
शादी के समय ही नहीं उस के बाद भी अब नई स्टाइलिश ड्रैस रेंज बाजार में आने लगी हैं. अब तो शौपिंग के लिए बाजार जाने की जरूरत भी नहीं होती. औनलाइन शौपिंग का दौर है, जहां आप को बिना बाजार गए ही सबकुछ मिल सकता है. जरूरत होती है पैसों की. इसलिए अब युवा शादी तब करना चाहते हैं जब शादी के मजे लेने के लिए उन के पास पैसे हों. फेसबुक, व्हाट्सऐप और सोशल मीडिया के इस दौर में जीवन के किसी पल को दोस्तों व नातेरिश्तेदारों से छिपाया नहीं जा सकता. ऐसे में अपनी खुशियों को पूरा करने के लिए पैसों की अहमियत अब सभी को समझ आने लगी है.
‘विवाह सैक्स के बाद नहीं पैसे के बाद’ यह सोच अब दिनोदिन और मजबूत होती जा रही है. पहले की तरह यह नहीं होता कि शादी हुई उस के बाद सबकुछ घरपरिवार की जिम्मेदारी पर होता था. अब अपना बोझ खुद उठाना पड़ता है. ऐसे में ‘पहले कमाई फिर शादी’ की सोच बढ़ रही है.
बच्चों की प्लानिंग
‘विवाह सैक्स के बाद नहीं पैसे के बाद’ की धारणा में कई बार आलोचक कहते हैं कि जब शादी से पहले ही सैक्स हो गया तो शादी के बाद क्या बचता है? इस सवाल के जवाब में युवा कहते हैं कि शादी के पहले वाले और शादी के बाद वाले सैक्स में फर्क होता है. शादी के बाद हमारी प्राथमिकता परिवार की होती है. हम अपने हिसाब से बच्चे का जन्म प्लान करते हैं. आज के समय में बच्चे के जन्म से ले कर स्कूल जाने तक बहुत सारे खर्चे होने लगे हैं. इन को सही तरह से संभालने के लिए अच्छे बजट की जरूरत होती है. एक बच्चे की प्राइवेट अस्पताल में डिलीवरी का खर्च ही लाख से ऊपर पहुंच जाता है. उस के बाद तमाम तरह के खर्च और फिर बच्चे के प्ले स्कूल जाने का खर्च महंगा पड़ने लगा है. अस्पताल हो या प्ले स्कूल उस में किसी तरह का कोई समझौता नहीं किया जा सकता.
3 साल की उम्र में ही बच्चे का स्कूल जाना शुरू हो जाता है. इस में अच्छे स्कूल में प्रवेश से ले कर पढ़ाई के खर्च तक बड़े बजट की जरूरत होती है, जो यह सिखाता है कि शादी के लिए सैक्स की नहीं पैसे की ज्यादा जरूरत है. बच्चा जैसेजैसे एक के बाद एक क्लास आगे बढ़ता है उस का खर्च भी बढ़ता है, जिसे वहन करना सरल नहीं होता. कई बार युवा ऐसे लोगों को देखते हैं जो इस तरह के हालात से गुजर रहे होते हैं. ऐसे में वे अपना हौसला नहीं बना पाते.
शादी के लिए पहले मातापिता व घरपरिवार का हस्तक्षेप ज्यादा होता था लेकिन अब ऐसा नहीं है. अब ज्यादातर फैसले या तो युवा खुद लेते हैं या फिर फैसला लेते समय उस की सहमति ली जाती है. शादी की उम्र बढ़ गई है, जिस में सैक्स से ज्यादा पैसे का फैसला प्रमुख हो गया है.
सैक्स का सरल होना
सैक्स अब ऐंजौयमैंट का साधन बन गया है. युवकयुवतियां भी खुद को अलगअलग तरह की सैक्स क्रियाओं के साथ जोड़ना चाहते हैं. इंटरनैट के जरिए सैक्स की फैंटेसीज अब चुपचाप बैडरूम तक पहुंच गई हैं, जहां केवल युवकयुवतियां आपस में तमाम तरह की सैक्स फैंटेसीज करने का प्रयास करते हैं. इंटरनैट के जरिए सैक्स की हसरतें चुपचाप पूरी होती रहती हैं. सोशल मीडिया ग्रुप फेसबुक और व्हाट्सऐप इस में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं. फेसबुक पर युवकयुवतियां दोनों ही अपने निकनेम से फेसबुक अकाउंट खोलते हैं और मनचाही चैटिंग करते हैं. इस में कई बार युवतियां अपना नाम युवकों की तरह रखती हैं, जिस से उन की पहचान न हो सके. चैटिंग करते समय वे इस बात का खास खयाल रखती हैं कि उन की सचाई किसी को पता न चले. यह बातचीत चैटिंग तक ही सीमित रहती है. बोर होने पर फ्रैंड को अनफ्रैंड कर नए फ्रैंड को जोड़ने का विकल्प हमेशा खुला रहता है.
इस तरह की सैक्स चैटिंग बिना किसी दबाव के होती है. ऐसी ही एक सैक्स चैटिंग से जुड़ी महिला ने बातचीत में बताया कि वह दिन में खाली रहती है. पहले बोर होती रहती थी, जब से फेसबुक के जरिए सैक्स की बातचीत शुरू की तब से वह बहुत अच्छा महसूस करने लगी है. कई बार वह इस बातचीत के बाद खुद को सैक्स के लिए बहुत सहज पाती है. पत्रिकाओं में आने वाली सैक्स समस्याओं में इस तरह के बहुत सारे सवाल आते हैं, जिन को देख कर लगता है कि सैक्स की फैंटेसी अब फैंटेसी नहीं रह गई है. इस को लोग अब अपने जीवन का अंग बनाने लगे हैं.
शादी के पहले सैक्स का अनुभव जहां पहले बहुत कम लोगों को होता था, अब यह अनुपात बढ़ गया है. अब ऐसे कम ही लोग होंगे, जिन को सैक्स का अनुभव शादी के बाद होता है. ऐसे में सैक्स के लिए शादी की जरूरत खत्म हो गई है. शादी के बाद जिम्मेदारियों का बोझ उठाने के लिए पैसों की जरूरत बढ़ गई है. यही वजह है कि शादी सैक्स के बाद नहीं शादी पैसों के बाद का चलन बढ़ गया है.
आज इन विषयों को ले कर कई पुस्तकें, सिनेमा और टीवी सीरियल्स भी बनने लगे हैं, जो इस बात का समर्थन करने लगे हैं कि शादी से पहले सैक्स की नहीं पैसों की जरूरत होती है.
तेलुगु अभिनेत्री श्री रेड्डी कास्टिंग काउच का विरोध करने के लिए सड़क पर टौपलेस हो गईं. यह तेलुगु अदाकारा सड़क पर उतरी तो विरोध करने के लिए थीं, लेकिन उनके तरीकों ने ही उन्हें मुश्किल में फंसा दिया. सूत्रों के मुताबिक विरोध प्रदर्शन के बाद श्री रेड्डी को उसके मकान मालिक ने घर खाली करने को कह दिया. इस बात की जानकारी खुद श्री रेड्डी ने अपने फेसबुक पेज पर दी है. रेड्डी ने कहा कि उसके मकान मालिक जो पेशे से आईएएस अधिकारी हैं उनकी सोच बेहद छोटी है. उन्होंने मुझे घर खाली करने का फरमान दिया है.
रेड्डी को न केवल मकान खाली करने को कहा गया बल्कि मूवी आर्टिस्ट एसोसिएशन (MAA) ने भी रेड्डी के कदम को गलत बताते हुए उन्हें मेंबरशिप न देने का फैसला किया है. मूवी आर्टिस्ट एसोसिएशन ने उनके खिलाफ सख्त एक्शन लेने की बात भी कही है. इतना ही नहीं एसोसिएशन से जुड़े 900 लोगों ने उनके साथ काम करने से मना कर दिया हैं. वहीं अभिनेत्री के इस प्रदर्शन को MAA के प्रेसिडेंट शिवाजी राजा ने ड्रामा बताया है. एसोसिएशन ने यह भी कहा कि अगर कोई अभिनेत्री की मदद करेगा तो एसोसिएशन उसे भी बैन कर देगा.
बता दें कि श्री रेड्डी ने शनिवार (7 अप्रैल) को कास्टिंग काउच के विरोध में मीडिया की मौजूदगी में हैदराबाद फिल्म चैंबर के बाहर टौपलेस होकर सड़क पर बैठ गईं. एक्ट्रेस रेड्डी को ऐसे देख भारी भीड़ जमा हो गई. प्रदर्शन की सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने अभिनेत्री को हिरासत में ले लिया. पुलिस ने श्री रेड्डी के इस तरह सार्वजनिक तौर पर कपड़े उतारने के बाद भारतीय दंड संहिता की धारा 294 (किसी भी सार्वजनिक स्थल पर अश्लील कृत्यों) के तहत मामला दर्ज कर लिया था.
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तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच चल रहे कावेरी नदी जल विवाद की छाया आईपीएल पर पड़ती नजर आ रही है. कहा जा रहा है कि इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के 11वें संस्करण के कुछ मैचों को केरल स्थानांतरित किया जा सकता है. कावेरी विवाद के कारण अगर केरल आईपीएल के कुछ मैचों की मेजबानी करता है तो इसमें चेन्नई और बेंगलोर के मैच शामिल होंगे. चेन्नई सुपर किग्स और रायल चैलेंजर्स बेंगलोर के मैच चेन्नई और बेंगलोर में आयोजित होने हैं.
केरल क्रिकेट संघ के प्रमुख जयेश जौर्ज ने रविवार को मीडिया से कहा कि मैचों के इन बदलावों को लेकर पहले ही बातचीत शुरू हो चुकी है. जौर्ज ने कहा, “चेन्नई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के.एस. विश्वनाथन ने इस बारे में मुझसे बात की थी और आज बीसीसीआई और आईपीएल के वरिष्ठ अधिकारियों अमिताभ चौधरी और राजीव शुक्ला ने भी मुझसे बात की है.” जौर्ज ने कहा, “हमने आईपीएल के मैचों को तिरुवनंतपुरम और कोच्चि में आयोजित कराने की इच्छा जताई है. अगले कुछ दिन में वे हमें इस बारे में बताएंगे.”अगर केरल को आईपीएल मैचों की मेजबानी सौंपी जाती है तो कोच्चि मैचों की मेजबानी के लिए सही स्थान हो सकता है. कोच्चि 2011 में कोच्चि टस्कर्स का घरेलू मैदान था.
#IPL2018 matches in Chennai will be held as per the schedule. Adequate security measures have been taken. IPL should not be dragged into political controversies: Rajeev Shukla, IPL Chairman #CauveryWaterManagementpic.twitter.com/uQZZyDlLzC
अब इस मामले में आईपीएल कमिश्नर राजीव शुक्ला ने बयान जारी कर तमाम अटकलों पर विराम लगाया है. राजीव शुक्ला ने कहा कि चेन्नई में होने वाले सभी मैच तय कार्यक्रम के अनुसार ही होंगे. जो भी सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम होंगे वह किए जाएंगे. आईपीएल को वैसे भी राजनीतिक विवादों में नहीं फंसना चाहिए.
इससे पहले तिरुवनंतपुरम में मैचों को कराने के पक्ष में एक बात कही जा रही थी कि तमिलनाडु से 8 घंटे से भी कम समय में तिरुवनंतपुरम पहुंचा जा सकता है. तिरुपवनंतपुरम में पिछले साल भारत और न्यूजीलैंड के बीच टी-20 मैच खेला गया था. गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय ने कावेरी नदी के जल के बंटवारे में तमिलनाडु के हिस्से का पानी घटा दिया और कर्नाटक का हिस्सा बढ़ा दिया था. इसके अलावा कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड का अभी गठन नहीं हुआ. इन बातों को लेकर तमिलनाडु में विरोध प्रदर्शन जारी है.
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डाटा लीक होने की खबरें लगातार अपना पैर पसार रही है. इन खबरों ने मार्क जुकरबर्ग को एक बड़ी मुसीबत में डाल दिया है. डाटा लीक के बाद फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने माफी भी मांगी और प्राइवसी पौलिसी भी बदली. लेकिन लगता है कि उसका लोगों पर कोई असर नहीं हो रहा है तभी तो एक के बाद एक कई जानी मानी हस्ती अपना फेसबुक अकाउंट डिलीट करते जा रहे हैं.
पहले स्पेसएक्स के फाउंडर ऐलन मस्क ने टेस्ला और स्पेसएक्स के फेसबुक पेज डिलीट कर दिया. इसके बाद पौपुलर लाइफस्टाइल और एंटरटेनमेंट मैगजीन प्ले ब्वाय और बौलीवुड अभिनेता फरहान अख्तर ने भी फेसबुक से विदा ले लिया. वहीं अब एप्पल के को-फाउंडर स्टीव वोज्निएक ने भी अपना फेसबुक अकाउंट डिऐक्टिवेट कर दिया है. उनका कहना है कि प्राइवसी को लेकर उन्होंने यह फैसला लिया है.
स्टीव वोज्निएक ने एक ई-मेल के जरिए कहा है कि यूजर्स फेसबुक को अपनी जिंदगी की सारी जानकारियां दे रहे हैं. फेसबुक हमारी सूचनाओं को बेचकर काफी पैसा कमा रहा है, जबकि बदले में यूजर्स को इससे कोई फायदा नहीं मिल रहा है. उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी एप्पल अच्छे प्रोडक्ट्स के जरिए पैसे कमाती है और फेसबुक अपने यूजर्स का डाटा बेचकर पैसे कमाता है.
सूत्रों के मुताबिक एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा है, ‘मैं फेसबुक छोड़ने के प्रोसेस में हूं. यह मेरे लिए सकारात्मक से ज्यादा नकारात्मक रहा है. एप्पल के पास आपकी चीजें शेयर करने के लिए सिक्योर तरीके हैं. मैं अभी भी पुराने ईमेल और टेक्स्ट मैसेज पर निर्भर रह सकता हूं’ मैंने अभी अकाउंट डिलीट नहीं बल्कि डिऐक्टिवेट किया है, क्योंकि मैं अपने SteveWoz यूजरनेम को अपने पास ही रखना चाहते हैं. उन्होंने कहा है, ‘मैं नहीं चाहता कि मेरा यूजरनेम किसी दूसरे व्यक्ति के पास हो, चाहे वो कोई दूसरा स्टीव वोज्निएक ही क्यों न हो’
हाल ही में एप्पल के सीईओ टिम कुक ने फेसबुक के बिजनेस मौडल की जम कर आलोचना की और कहा कि फेसबुक अपने ही यूजर्स को प्रोडक्ट समझ कर मोटे पैसे कमाता है. स्टीव वोज्निएक और एलान मस्क के अलावा फेसबुक की ही कंपनी व्हाट्सऐप के को फाउंडर ब्रायन ऐक्टन ने लोगों से फेसबुक डिलीट करने को कहा था.
गौरतलब है कि फेसबुक के खिलाफ इस तरह की आवाज उठनी तब से शुरू हुई जब कैंब्रिज अनालिटिका डेटा लीक सामने आया. इस एजेंसी ने करोड़ों यूजर्स का डेटा फेसबुक से ही लेकर गलत तरीके से लीक किया जिसके बाद प्राइवसी को लेकर सवाल उठने लगे. यह धीरे धीरे इस कदर कंपनी के सीईओ मार्क जुकरबर्ग के सिए सिरदर्द बन गया कि उन्हें इसके लिए माफी तक मांगनी पड़ गई. समय समय पर आ रही खबरों सो ऐसा प्रतीत होता है कि फेसबुक अब तक इस सिरदर्द से निकलने का रास्ता नहीं तलाश पाया है. इसी के साथ लगातार जिसतरह से लोग फेसबुक अकाउंट डिलीट कर रहें हैं उसे देखकर लगता भी नहीं है कि वो इतना जल्दी इससे निजात पा सकेगा.
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होम लोन देने वाली कंपनी HDFC ने ब्याज दर में 0.20 प्रतिशत की वृद्धि की है. इससे आपका होम लोन महंगा हो जाएगा. यह अन्य कमर्शियल बैंकों के कदम के अनुरूप है. बैंक ने बताया है कि उसने अपनी कर्ज की ब्याज दरों (आरपीएलआर) में 0.20 फीसदी का इजाफा किया है. हाल ही ज्यादातर बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने अपनी कर्ज की दरों में बढ़ोत्तरी की है. बैंक ने बताया है कि कर्ज की नई दरें 1 अप्रैल से प्रभावी हो गई है.
कई तरह से बढ़ाईं ब्याज दरें
कंपनी के प्रवक्ता ने बताया है कि इन कर्ज की दरों को 0.05 फीसदी से लेकर 0.20 फीसदी तक बढ़ाया गया है. इसके अनुसार कंपनी ने छोटे लोन पर सबसे कम ब्याज दरों को बढ़ाया है. जो लोन 30 लाख रुपए तक हैं और महिलाओं के नाम हैं उनका ब्याज सबसे कम बढ़ाया गया है. अभी ऐसे लोन पर ब्याज की दरें 8.40 फीसदी थीं, जबकि इनको बढ़ा कर 8.45 फीसदी कर दिया गया है.
30 से 75 लाख रुपए के बीच के लोन की ब्याज दरें
प्रवक्ता के अनुसार 30 लाख रुपए से लेकर 75 लाख रुपए तक के कर्ज पर महिलाओं के लिए ब्याज दर 8.55 फीसदी और अन्य के लिए 8.60 प्रतिशत होंगी. वहीं, 75 लाख रुपए से अधिक के कर्ज पर महिलाओं के लिए ब्याज दर 8.65 फीसदी और अन्य के लिए 8.70 फीसदी होगी.
लगातार महंगा हो रहा कर्ज
भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी मौनीटरी पौलिसी और पौलिसी रेट में कोई बदलाव नहीं किया है, लेकिन फिर भी बैंक और वित्तीय संस्थान लगातार अपनी लोन की ब्याज दरों में इजाफा कर रहे हैं. लोन महंगा करने की यह प्रक्रिया 2017 के अंत से देखी जा रही है. इसकी शुरुआत निजी क्षेत्र के बैंकों एक्सिस बैंक, यस बैंक, कोटक महिन्द्र बैंक ने की थी. इसमें बाद सरकारी बैंक भी शामिल हो गए. एसबीआई भी अपनी कर्ज की दरें बढ़ा चुका है.
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