एक्सिस बैंक की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रहीं. बैंक की सीईओ शिखा शर्मा के कार्यकाल घटाने का अनुरोध के बाद एक तरफ उनके उत्तराधिकारी की खोज हो रही है. वहीं, दूसरी तरफ बैंक के बिकने की खबरें भी तेज हैं. एशिया के सबसे अमीर बैंकर एक्सिस बैंक को खरीदने के लिए बोली लगा सकते हैं. इसका जिक्र जापान की ब्रोकरेज फर्म नोमुरा ने एक रिपोर्ट में किया है. नोमुरा का दावा है कि एशिया के सबसे अमीर बैंकर उदय कोटक बैंक को खरीदने के लिए बोली लगा सकते हैं. यह उनके लिए शानदार मौका है. आपको बता दें, एक्सिस बैंक देश का तीसरा सबसे बड़ा प्राइवेट सेक्टर बैंक है.
एक्सिस की लोन बुक कोटक से दोगुनी
जापान की ब्रोकरेज फर्म नोमुरा का दावा है कि एक्सिस बैंक के पास कोटक महिंद्रा बैंक की तुलना में दोगुनी लोन बुक है. अगर दोनों बैंकों को मिला दिया जाए मतलब मर्जर कर दिया जाए तो लोक बुक काफी बड़ी हो जाएगी. साथ ही दोनों के पास इतनी ब्रांच होंगी जितनी अभी तक किसी बैंक के पास नहीं हैं. नोमुरा की यह रिपोर्ट एक्सिस बैंक के इस बयान के एक दिन के बाद आई है, जिसमें उसने कहा था कि शिखा शर्मा दिसंबर 2018 में पद छोड़ देंगी. उनका चौथा कार्यकाल जून से शुरू हो रहा है और सामान्य परिस्थिति में इसे मई 2021 में खत्म होना था, लेकिन अब वह 31 दिसंबर को खत्म हो जाएगा.
मर्जर की स्थिति में क्या?
अगर दोनों बैंकों का मर्जर होता है तो उसके बाद बनने वाले बैंक के पास 5,760 ब्रांच होंगी. इतनी ब्रांच देश के किसी प्राइवेट सेक्टर बैंक के पास नहीं है. ICICI बैंक के पास 4,860 ब्रांच हैं. मर्जर के बाद बैंक की लोन बुक 6.16 लाख करोड़ रुपये हो जाएगी, जो HDFC बैंक की 6.31 लाख करोड़ की लोन बुक से कुछ ही कम होगी.
रिजर्व बैंक का भी दबाव
नोमुरा की रिपोर्ट में बताया गया है कि कोटक के लिए एक्सिस बैंक को खरीदने का शानदार मौका है. क्योंकि, शिखा 9 महीने तक ही इसकी सीईओ रहेंगी. रिजर्व बैंक भी एक्सिस के बोर्ड पर दबाव बना रहा है. इसके साथ वह बैंकिंग इंडस्ट्री की बैलेंस शीट क्लीन करने की भी मुहिम चला रहा है. नोमुरा का कहना है कि मौजूदा शेयर प्राइस पर 2.15 का स्वाईप रेशियो ठीक होगा.
हिस्सेदारी कम करने में मिलेगी मदद
अगर दोनों बैंकों के बीच डील होती है तो इसका मतलब यह है कि एक्सिस बैंक के 2.15 शेयरों के लिए कोटक महिंद्रा बैंक का एक शेयर मिलना चाहिए. इस डील के बाद कोटक की हिस्सेदारी बैंक में अभी के 30 फीसदी से घटकर 17.6 फीसदी रह जाएगी. इससे दिसंबर 2018 तक बैंक में उन्हें अपनी हिस्सेदारी कम करने की शर्त को भी पूरा करने में मदद मिलेगी.
पहले भी हो चुकी है मर्जर पर बात
नोमुरा का कहना है कि एक्सिस बैंक ने ज्यादातर बैड लोन की पहचान पहले ही कर ली है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पिछली बार जब दोनों बैंकों के बीच मर्जर की बात हुई थी, उसके बाद से कोटक महिंद्रा बैंक के शेयर ने एक्सिस बैंक को 30 फीसदी से आउटपरफौर्म किया. इसलिए उस समय की तुलना में डील अभी कहीं ज्यादा आकर्षक है
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आंद्रे रसेल द्वारा 36 गेंदों में 11 छक्के और महज एक चौके की मदद से खेली गई 88 रनों की पारी भी कोलकाता को हार से बचा नहीं पाई. चेन्नई ने मंगलवार (10 अप्रैल) को एम.ए. चिदम्बरम स्टेडियम में खेले गए इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के 11वें संस्करण के मैच में कोलकाता को पांच विकेट से हरा कर अपने घर में दो साल बाद विजयी वापसी की है. कोलकाता ने चेन्नई के सामने 203 रनों की विशाल चुनौती रखी थी, जिसे मेजबान टीम ने आखिरी ओवर में एक गेंद बाकी रहते हुए पांच विकेट खोकर हासिल कर लिया.
दिनेश कार्तिक की कोलकाता और महेंद्र सिंह धोनी की चेन्नई के बीच हुआ यह मैच काफी रोमांचक रहा. रसेल की पारी पर सैम बिलिंग्स की 23 गेंदों में दो चौके और पांच छक्कों की मदद से खेली गई 53 रनों की पारी भारी पड़ गई. बिलिंग्स के अलावा चेन्नई के लिए शेन वाटसन ने 19 गेंदों पर 42 रनों की पारी खेली जिसमें तीन चौके और इतने ही छक्के शामिल थे. कोलकाता के खिलाड़ी रसेल की 36 गेंद में 11 छक्कों और एक चौके की मदद से नाबाद 88 रन की पारी की बदौलत छह विकेट पर 202 रन का बड़ा स्कोर खड़ा किया.
भले ही शाहरुख खान की टीम ने यह मैच हार लिया हो, लेकिन किंग खान खिलाड़ियों की हौसला अफजाई में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. मैदान पर महेंद्र सिंह धोनी की बेटी जीवा के साथ मस्ती करने के बाद अब शाहरुख का एक और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.
इस वीडियो में शाहरुख खान कोलकाता के खिलाड़ियों के साथ डांस करते नजर आ रहे हैं. इस वीडियो को आंद्रे रसेल ने अपने औफिशियल इंस्टाग्राम से शेयर किया है. इस वीडियो में शाहरुख खान, आंद्रे रसेल, शिवम मावी और कमलेश नागरकोटी को अपनी फिल्म रावन के गाने ‘छम्मक छल्लो’ पर डांस करना सिखा रहे हैं. इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा है- बौस के साथ फन टाइम.
बता दें कि टौस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी कोलकाता ने एक समय अपने पांच विकेट 10 ओवरों में 89 रनों पर ही खो दिए थे, लेकिन रसेल ने जैसे ही क्रीज पर कदम रखा, रनों का सैलाब उमड़ पड़ा. कोलकाता ने आखिरी के 10 ओवरों में 113 रन बटोरे और इसी कारण टीम 20 ओवरों में छह विकेट के नुकसान पर 202 रन बनाने में सफल रही. यह रसेल का आईपीएल में सर्वोच्च स्कोर भी है.
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रविवार 21 जनवरी, 2018 का अलसाया हुआ दिन था. बसंत ऋतु ने दस्तक दे दी थी, लेकिन सूरज की किरणों में फिर भी तेजी नहीं आई थी. सिहराती सर्द हवाओं के बीच आसमान दिन भर मटमैले बादलों से ही अटा रहा. लेकिन मौसम की बदमिजाजी से लोगों की आमदरफ्त में कोई तब्दीली नहीं आई थी.
कोटा स्टेशन की बाहरी हदों से शुरू होने वाले बाजार में रोजमर्रा की रौनक जस की तस कायम थी. अगर कोई फर्क था तो इतना कि लोगों के चेहरों पर कशमकश के भाव थे और शौपिंग की बजाय उन की उत्सुकता चोपड़ा फार्म जाने वाली गली नंबर-2 की तरफ थी, जिसे पूरी तरह पुलिसकर्मियों ने घेर रखा था.
तेज होती खुसुरफुसुर से ही पता चला कि किसी ने एक महिला और उस के बेटे की हत्या कर दी है. यह वारदात वहां रहने वाले चर्चित भाजपा नेता नीरज पाराशर के परिवार में हुई थी. बदमाशों ने घर में घुस कर नीरज पाराशर की पत्नी सोहनी और 12 साल के बेटे पीयूष को गोली मार दी थी.
बेटी तान्या वारदात का शिकार होने से बच गई थी. दरअसल, गोली लगने से पहले ही सोहनी ने उसे घर से बाहर फेंक दिया था. शोर मचा तो आसपास के रहने वाले लोग फौरन मौके पर पहुंच गए, लेकिन बदमाश तब तक भाग चुके थे.
खबर मिलने पर भीममंडी के थानाप्रभारी रामखिलाड़ी पुलिस बल के साथ वहां पहुंच गए थे. इस दोहरे हत्याकांड की खबर जब उन्होंने आला अधिकारियों को दी तो एएसपी समीर कुमार, डीएसपी शिवभगवान गोदारा, राजेश मेश्राम भी वहां आ गए. 10 मिनट बाद आईजी विशाल बंसल और एसपी अंशुमान भोमिया भी वहां पहुंच गए.
पुलिस अधिकारियों के सामने जो चुनौती मुंह बाए खड़ी थी, उस से निपटना आसान नहीं था. क्योंकि कुछ ही दिनों पहले स्टेशन क्षेत्र में एक और भाजपा नेता की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी. इस के अलावा शहर में हत्या की और भी कई वारदातें अनसुलझी पड़ी थीं. इस सब को ले कर एसपी साहब के चेहरे पर तनाव साफ दिखाई दे रहा था.
केस बड़ा पेचीदा था. पुलिस इस बात पर भी हैरान थी कि इस चहलपहल वाले इलाके में नीरज पाराशर के मकान में बदमाश बेखौफ हो कर आए और मांबेटे को गोलियों से भून कर चले गए.
सोहनी की करपटी और उस के बेटे पीयूष के सीने में गोलियां लगी थीं. लग रहा था जैसे उन्हें गोली बहुत करीब से मारी गई थी. एक गोली कमरे की दीवार पर भी लगी थी, दीवार पर गोली टकराने का निशान बन गया था. पुलिस ने मौके से गोली का खोल भी बरामद कर लिया.
सूचना मिलने पर पुलिस फोटोग्राफर, क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम, डौग स्क्वायड और एफएसएल की टीमें भी वहां पहुंच गई थीं. सभी टीमें अपनेअपने ढंग से काम कर के लौट गईं. थानाप्रभारी रामखिलाड़ी मीणा ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया और आगे की जांच में जुट गए.
उन्होंने नीरज पाराशर से बात की तो उस ने बताया कि घटना के वक्त वह सब्जी लेने के लिए बाजार गया हुआ था. सरेआम हुई इस वारदात ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी. गोली चलाने वाले कौन थे, किस तरफ भागे थे, किसी को कुछ पता नहीं था. पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज भी खंगाले, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला.
पुलिस ने पड़ोसियों से बात की तो उन्होंने बताया कि हम ने गोलियां चलने की आवाज तो नहीं सुनी अलबत्ता मार दिया…मार दिया… की चीखपुकार जरूर सुनी थी. जिस के बाद वे लोग पाराशर के मकान की तरफ दौड़े. हालांकि कुछ लोगों ने पाराशर के मकान से एक आदमी को भागते देखा, लेकिन वह कौन था, कैसे आया और कहां गया, इस बाबत कुछ नहीं बता पाए.
पुलिस पूछताछ में रोताबिलखता नीरज ठीक से कुछ नहीं बता पा रहा था. टुकड़ों में जो कुछ वह कह रहा था, उस से पुलिस सिर्फ इतना समझ पाई कि उस की पत्नी सोहनी मुरैना की रहने वाली थी, जहां पड़ोस में रहने वाले चंद्रकांत पाठक उर्फ दिलीप से उस का अफेयर था. 2 महीने पहले सोहनी उस के साथ भाग गई थी, जिस की गुमशुदगी की सूचना उस ने थाना भीममंडी में दर्ज करा रखी थी.
पिछले दिनों उसे सोहनी के मुरैना में होने का पता चला तो वह मुरैना जा कर उसे ले आया. नीरज ने पुलिस को बताया कि वारदात करने वाला चंद्रकांत पाठक के अलावा कोई नहीं हो सकता. थानाप्रभारी ने यह सारी जानकारी एसपी अंशुमान भोमिया को दे दी.
इन सब बातों से अंशुमान भोमिया को लगा कि पूरे घटनाक्रम में सोहनी की कोई महत्त्वपूर्ण भूमिका रही होगी. इसलिए उन का पूरा ध्यान उस के अतीत और उस के प्रेमी चंद्रकांत पाठक पर अटक गया.
नीरज ने एसपी साहब से मुलाकात की. उस ने उन्हें एक नई जानकारी यह दी कि चंद्रकांत पाठक ने चेतन शर्मा के नाम से एक फरजी फेसबुक आईडी बना रखी थी. चंद्रकांत एक उच्चशिक्षित युवक था, साथ ही अच्छा शूटर भी. मध्य प्रदेश में उसे शार्पशूटर का अवार्ड मिल चुका था.
पुलिस ने नीरज से इस बारे में विस्तार से जानकारी मांगी कि सोहनी कब और कैसे गायब हुई थी? इस पर नीरज ने बताया, ‘‘नवंबर, 2017 में मैं अपनी पत्नी और बच्चों के साथ अपनी ससुराल मुरैना गया था. वहां से 20 नवंबर को हम कोटा लौट आए थे. 22 नवंबर को मैं गोवर्धन परिक्रमा के लिए वृंदावन चला गया था.
मेरी गैरमौजूदगी में चंद्रकांत पाठक आया और जबरन पत्नी को ले कर चला गया. उस समय दोनों बच्चे भी घर पर थे, जो सो रहे थे. बाद में जब बेटा पीयूष सो कर उठा और उस ने मां को नहीं देखा तो उस ने मुझे फोन किया. तब मैं ने पत्नी की गुमशुदगी की सूचना दर्ज कराई और अपने स्तर पर भी उस की तलाश करता रहा, लेकिन निराशा ही हाथ लगी.’’
उस ने आगे बताया, ‘‘सर, जनवरी, 2018 में अचानक मेरे पास पत्नी का फोन आया. उस ने किसी और के मोबाइल से फोन किया था. पत्नी ने मुझे बताया कि चंद्रकांत ने उसे कैद कर रखा है, आ कर उसे छुड़ा लें. यह जानने के बाद मैं मुरैना गया और पत्नी को साथ ले कर कोटा आ गया. चंद्रकांत पत्नी से कोई संपर्क न कर सके, इसलिए मैं ने पत्नी का फोन नंबर भी बदल दिया था. इस से खीझ कर एक दिन चंद्रकांत ने मुझे फोन पर ही धमकी दी कि सोहनी से बात करवा दो वरना पूरे परिवार को जान से मार देगा.’’
नीरज से पूछताछ के समय एसपी अंशुमान भोमिया भी वहीं मौजूद थे. उन्होंने नीरज को तीखी नजरों से देखा, वह उन से आंखें नहीं मिला सका. नीरज के हावभाव और बातों से उन्हें उसी पर शक होने लगा था. लेकिन उन्होंने जानबूझ कर उसे ज्यादा कुरेदना उचित नहीं समझा. इसी बीच एक नई जानकारी ने पुलिस की तहकीकात का रुख मोड़ दिया.
पता चला कि चंद्रकांत पाठक शनिवार 20 जनवरी, 2018 की देर रात कोटा पहुंचा था और स्टेशन क्षेत्र के ही एक होटल में ठहरा था. पुलिस का मानना था कि निश्चित रूप से उस ने अगले रोज 21 जनवरी को दिन भर नीरज के घर के आसपास रेकी की होगी और जैसे ही उसे मौका मिला, वह वारदात को अंजाम दे कर भाग गया.
पुलिस ने नीरज और सोहनी की फेसबुक देखी तो इस प्रेम कहानी का काफी कुछ खुलासा हो गया. फेसबुक पर मोहब्बत और नफरत के जज्बात साथसाथ मौजूद थे. पत्नी के इस तरह छोड़ कर चले जाने से नीरज पाराशर इस हद तक परेशान था कि उस की यादें सहेजने के लिए पुराने फोटो शेयर करने के साथ मोहब्बत और हिकारत दोनों उगल रहा था.
15 दिसंबर, 2017 को नीरज ने अपनी फेसबुक पर लिखा, ‘आई हेट सोहनी पाराशर एंड माई लाइफ…’ 28 दिसंबर को सुर बदला तो उस के मन में सोहनी के लिए तड़प पैदा हुई. उस ने लिखा, ‘आप कहां हो सोहनी, कम बैक प्लीज…’
31 दिसंबर को मोहब्बत ने जोर मारा तो नए साल की मुबारकबाद देते हुए लिखा, ‘विश यू ए हैप्पी न्यू ईयर सोहनी पाराशर’. 5 जनवरी को वैराग्य का भाव जागा तो कुछ अलग ही असलियत उजागर हुई, ‘सोहनी पैसे की दीवानी थी’. नीरज ने आगे लिखा, ‘इस दुनिया में कोई रिश्ता इंपोर्टेंट नहीं है, सब कुछ केवल पैसा है.’
पुलिस ने चंद्रकांत पाठक के फरजी नाम चेतन शर्मा की फेसबुक सर्च की तो चंद्रकांत और सोहनी की तूफानी मोहब्बत खुल कर सामने आ गई. 15 जनवरी को चंद्रकांत ने सोहनी के साथ करीब डेढ़ सौ फोटो शेयर किए थे, जो होटलों में मौजमस्ती और घूमनेफिरने की तस्दीक कर रहे थे.
17 जनवरी, 2018 को चंद्रकांत ने जो कुछ फेसबुक पर लिखा, उस ने उस के इरादों पर मुहर लगा दी. चंद्रकांत ने लिखा था, ‘इस दुनिया को अलविदा, मेरी जिंदगी यहीं तक थी. माफ कर देना, सभी का दिल दुखाया, बट गलत मैं था. माफ कर देना… लव यू आल…सौरी.’
टूटे हुए दिल से निकले अल्फाज चंद्रकांत की उस मनोदशा की तसदीक कर रहे थे, जब कोई शख्स खुदकुशी का फैसला करता है जबकि सोहनी का कत्ल तो कुछ और ही कहानी की तरफ इशारा कर रहा था.
मामला काफी संदिग्ध था. नीरज अपनी बात पर अडिग था कि उस की पत्नी सोहनी की हत्या चंद्रकांत पाठक ने की है. लेकिन एसपी अंशुमान भोमिया के इस सवाल का उस के पास कोई जवाब नहीं था कि अगर तुम्हारी पत्नी से उस का अफेयर था तो आखिर ऐसा क्या हुआ कि वह उस की हत्या करने पर आमादा हुआ और मासूम बच्चे से चंद्रकांत की क्या दुश्मनी थी जो उस ने उसे भी गोली मार दी?
नीरज इस बाबत भी चुप्पी साधे रहा. एसपी अंशुमान भोमिया ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक समीर कुमार की अगुवाई में तेजतर्रार अफसरों डीएसपी शिवभगवान गोदारा, राजेश मेश्राम और भीमंडी नयापुरा और रेलवे कालोनी के थानाप्रभारियों को शामिल कर के एक पुलिस टीम बनाई और चंद्रकांत की तलाश में भेज दी. इस टीम ने उसे बिलासपुर, श्योपुर और देहरादून में तलाशा.
पुलिस की यह कोशिश रंग लाई. चंद्रकांत को मध्य प्रदेश के श्योपुर से गिरफ्तार कर लिया गया. थाने ला कर जब उस से पूछताछ की गई तो पता चला कि वह उच्चशिक्षित था. उस ने मैथ्स, कैमिस्ट्री और कंप्यूटर साइंस में मास्टर डिग्री प्राप्त की थी. पीजीडीए किए चंद्रकांत पाठक के पास मास्टर औफ फाइन आर्ट्स की भी डिग्री थी.
इतना ही नहीं, वह सटीक निशानेबाज भी था. उसे बेस्ट शूटर का प्रोसीडेंट अवार्ड भी मिल चुका था. वह एनसीसी का सी सर्टिफिकेट होल्डर भी था.
एसपी भोमिया ने उस से पूछा कि इतना क्वालीफाइड हो कर भी उस ने इतनी संगीन वारदात को अंजाम कैसे दिया. इस बारे में उस ने जो कुछ बताया, उस से पूरी कहानी मोहब्बत पर आ कर सिमट गई.
चंद्रकांत पाठक उर्फ दिलीप उर्फ चेतन शर्मा मूलरूप से मुरैना के दत्तपुरा का रहने वाला था. सोहनी का परिवार उस के घर के ठीक सामने ही रहता था. दोनों का बचपन एक साथ खेलतेपढ़ते बतियाते बीता था. बचपन की यह दोस्ती कब प्यार में बदल गई, दोनों ही नहीं समझ सके. अलबत्ता दोनों मोहब्बत में इस कदर डूबे थे कि एकदूसरे के बिना रहने की कल्पना करना भी उन्हें गवारा नहीं था.
लेकिन पारिवारिक बंदिशों के कारण यह मोहब्बत जीवनसाथी की डोर में नहीं बंध पाई. कालांतर में सोहनी का विवाह कोटा के नीरज पाराशर से हो गया और चंद्रकांत ने भी परिवार की जिद के आगे सिर झुका कर कहीं दूसरी जगह शादी कर ली.
दोनों अलगअलग रिश्तों की डोर में बंध तो गए, लेकिन आशिकी खत्म नहीं हुई. चंद्रकांत के पिता का मुरैना में डीजे का काम था. वह पिता के काम में ही हाथ बंटाने लगा. बाद में चंद्रकांत के भी एक बेटा हो गया और सोहनी भी 2 बच्चों की मां बन गई.
इस के बावजूद सोहनी और चंद्रकांत के संबंध बने रहे. सोहनी अपने मायके मुरैना आती तो वह चंद्रकांत से जरूर मिलती. किसी तरह नीरज को इस बात की भनक लग गई. इस के बाद दोनों ने मिलने में ऐहतियात बरतनी शुरू कर दी. चंद्रकांत का कहना था, ‘कोई 2 महीने पहले मैं बिलासपुर में था. सोहनी वहीं आ गई थी. सोहनी अपनी ससुराल वालों को बिना बताए आई थी. इस के बाद चंद्रकांत ने सोहनी के साथ रहना शुरू कर दिया था.
‘इसी दौरान चंद्रकांत ने 20 लाख रुपए में अपनी दुकान बेची थी. वह रकम उस के पास मौजूद थी. इस बीच सोहनी उस की गैरहाजिरी में अपने पति के साथ कोटा चली गई. जाते समय वह मेरे 2 लाख रुपए और गहने अपने साथ ले गई थी. सोहनी ने मेरे साथ फरेब किया था.’
‘‘सोहनी के कत्ल की नौबत क्यों आई? अगर फरेब की कोई वजह थी तो उस मासूम बच्चे को क्यों मारा?’’ एसपी भोमिया ने पूछा.
‘‘नहीं सर, मेरा इरादा ऐसा नहीं था. मैं नीरज की गैरमौजूदगी में ही सोहना से मिलना चाहता था. ऐसा मैं ने किया भी.’’ एक पल रुकते हुए चंद्रकांत ने कहना शुरू किया, ‘‘मैं ने अपनी रकम और जेवरात सोहनी से मांगे तो वह उल्टे मुझ पर ही बरस पड़ी. मैं ने उसे डराने के लिए पिस्टल दिखाई, लेकिन अचानक बच्चा मेरे ऊपर झपट पड़ा और पिस्टल छीनने की कोशिश करने लगा. इस छीनाझपटी में ही ट्रिगर दब गया और बच्चे को गोली लग गई.
‘‘सोहनी को तो मुझे मजबूरी में मारना पड़ा. उसे नहीं मारता तो वह बेटे की हत्या की गवाह बन जाती. बेटे की मौत से सोहनी को अपनी बेटी की जान भी खतरे में नजर आई तो उस ने बच्ची को दरवाजे की तरफ फेंक दिया. सोहनी पर मैं ने 2 गोलियां चलाईं. अफरातफरी में निशाना चूक गया और एक गोली दीवार में धंस गई. एक गोली उस की कनपटी पर लगी थी. उस के बाद मैं बुरी तरह दहशत में आ गया था. इस के बाद मैं पहले दिल्ली चला गया फिर श्योपुर आ गया.’’
पुलिस ने उस से पूछताछ करने के बाद उसे भादंसं की धारा 302 के तहत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. 2 लाख की रकम और जेवरात अभी पुलिस बरामद नहीं कर पाई. कथा लिखे जाने तक चंद्रकांत जेल में बंद था.
– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित
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बिहार के जिला भागलपुर स्थित कजरैली इलाके का एक गांव है गौराचक्क. वैसे तो इस गांव में सभी जातियों के लोग रहते हैं. लेकिन यहां बहुतायत यादवों की है. यहां के यादव साधनसंपन्न हैं. उन में एकता भी है. उन की एकजुटता की वजह से पासपड़ोस के गांवों के लोग उन से टकराने से बचते हैं.
इसी गांव में परमानंद यादव अपने परिवार के साथ रहता था. उस के परिवार में पत्नी के अलावा 1 बेटी और 2 बेटे थे. बेटी बड़ी थी, जिस का नाम सोनी था. साधारण शक्लसूरत और भरेपूरे बदन की सोनी काफी मिलनसार और महत्त्वाकांक्षी थी. उस के अंदर काफी कुछ कर गुजरने की जिजीविषा थी.
2 बेटों के बीच एकलौती बेटी होने की वजह से सोनी को घर में सभी प्यार करते थे. उस की हर एक फरमाइश वह पूरी करते थे. सोनी के पड़ोस में हिमांशु यादव रहता था. रिश्ते में सोनी उस की बुआ लगती थी. यानी दोनों में बुआभतीजे का रिश्ता था. दोनों हमउम्र थे और साथसाथ पलेबढे़ पढ़े भी थे.
वह बचपन से एकदूसरे के करीब रहतेरहते जवानी में पहुंच कर और ज्यादा करीब आ गए. यानी बचपन के रिश्ते जवानी में आ कर सभी मर्यादाओं को तोड़ते हुए प्यार के रिश्ते की माला में गुथ गए.
सोनी और हिमांशु एकदूसरे से प्यार करते थे. इतना प्यार कि एकदूसरे के बिना जीने की सोच भी नहीं सकते थे. वे जानते थे कि उन के बीच बुआभतीजे का रिश्ता है. इस के बावजूद अंजाम की परवाह किए बगैर प्यार की पींग बढ़ाने लगे. बुआभतीजे का रिश्ता होने की वजह से घर वालों ने भी उन की तरफ कोई खास ध्यान नहीं दिया.
एक दिन दोपहर का वक्त था. सोनी से मिलने हिमांशु उस के घर गया. कमरे का दरवाजा खुला हुआ था. सोनी सोफे पर अकेली बैठी कुछ सोच रही थी. हिमांशु को देखते ही मारे खुशी के उस का चेहरा खिल उठा. हिमांशु के भी चेहरे पर रौनक आ गई. वह भी मुसकरा दिया. तभी सोनी ने उसे पास बैठने का इशारा किया तो वह उस के करीब बैठ गया.
‘‘क्या बात है सोनी, घर में इतना सन्नाटा क्यों है?’’ हिमांशु चारों तरफ नजर दौड़ाते हुए बोला, ‘‘चाचाचाची कहीं बाहर गए हैं क्या?’’
‘‘हां, आज सुबह ही मम्मीपापा किसी काम से बाहर चले गए. वे शाम तक ही घर लौटेंगे और दोनों भाई भी स्कूल गए हैं.’’ वह बोली.
‘‘इस एकांत में बैठी तुम क्या सोच रही थी?’’ हिमांशु ने पूछा.
‘‘यही कि सामाजिक मानमर्यादाओं को तोड़ कर जिस रास्ते पर हम ने कदम बढ़ाए हैं, क्या समाज हमारे इस रिश्ते को स्वीकार करेगा?’’ सोनी बोली.
‘‘शायद समाज हमारे इस रिश्ते को कभी स्वीकार नहीं करेगा.’’ हिमांशु ने तुरंत कहा.
‘‘फिर क्या होगा हमारे प्यार का? मुझे तो उस दिन की सोच कर डर लगता है, जिस दिन हमारे इस रिश्ते के बारे में मांबाप को पता चलेगा तो पता नहीं क्या होगा?’’ सोनी ने लंबी सांस लेते हुए कहा.
‘‘ज्यादा से ज्यादा क्या होगा, वे हमें जुदा करने की कोशिश करेंगे.’’ सोनी की आंखों में आंखें डाले हिमांशु आगे बोला, ‘‘इस से भी जब उन का जी नहीं भरेगा तो हमें सूली पर चढ़ा देंगे. अरे हम ने प्यार किया है तो डरना क्या? सोनी, मेरे जीते जी तुम्हें किसी से भी डरने की जरूरत नहीं है.’’
‘‘सच में इतना प्यार करते हो मुझ से?’’ वह बोली.
‘‘चाहो तो आजमा लो, पता चल जाएगा.’’ हिमांशु ने तैश में कहा.
‘‘ना बाबा ना. मैं ने तो ऐसे ही तुम्हें तंग करने के लिए पूछ लिया.’’
‘‘अच्छा, अभी बताता हूं, रुक.’’ कहते हुए हिमांशु ने सोनी को बांहों में भींच लिया. वह कसमसाती हुई उस में समाती चली गई. एकदूसरे के स्पर्श से उन के तनबदन की आग भड़क उठी. कुछ देर तक वे एकदूसरे में समाए रहे, जब होश आया तो वे नजरें मिला कर मुसकरा पड़े. फिर हिमांशु वहां से चला गया.
लेकिन उन का यह प्यार और ज्यादा दिनों तक घर वालों की आंखों से छिपा हुआ नहीं रह सका. सोनी के पिता को जब जानकारी मिली तो उन के पैरों तले जमीन खिसक गई. परमानंद यादव बेटी को ले कर गंभीर हुए तो दूसरी ओर उन्होंने हिमांशु से साफतौर पर मना कर दिया कि आइंदा वह न तो सोनी से बातचीत करेगा और न ही उन के घर की ओर मुड़ कर देखने की कोशिश करेगा. अगर उस ने दोबारा ऐसी ओछी हरकत करने की कोशिश की तो इस का अंजाम बहुत बुरा होगा.
प्रेम प्रसंग की बातें गांवमोहल्ले में बहुत तेजी से फैलती हैं. परमानंद ने बहुत कोशिश की कि यह बात वह किसी और के कानों तक न पहुंचे पर ऐसा हो नहीं सका. लाख छिपाने के बावजूद पूरे मोहल्ले में सोनी और हिमांशु की प्रेम कहानी के चर्चे होने लगे. इस से परमानंद का मोहल्ले में निकलना दूभर हो गया.
परमानंद ने सोनी पर कड़ा पहरा बिछा दिया. सोनी के घर से बाहर अकेला जाने पर पाबंदी लगा दी. पत्नी से भी उन्होंने कह दिया कि सेनी को अगर घर से बाहर जाना भी पड़ेगा तो उस के साथ घर का कोई एक सदस्य जरूर जाएगा.
पिता द्वारा पहरा बिठा देने से हिमांशु और सोनी की मुलाकात नहीं हो पा रही थी. सोनी की हालत जल बिन मछली की तरह हो गई थी. उसे न तो खानापीना अच्छा लगता था और न ही किसी से मिलनाजुलना. उस के लिए एकएक पल काटना पहाड़ जैसा लगता था.
सोनी की एक झलक पाने के लिए वह बेताब था. पागलदीवानों की तरह वह यहांवहां भटकता फिरता था. उस की हालत देख कर मां जेलस देवी काफी परेशान रहती थी. मां ने भी बेटे को काफी समझाया कि उस ने जो किया, उसे समाजबिरादरी कभी मान्यता नहीं दे सकती. रिश्ते के बुआभतीजे की शादी को कोई स्वीकार नहीं करेगा. बेहतर है, तुम इसे बुरा सपना समझ कर भूल जाओ.
मगर हिमांशु मां की बात को मानने को तैयार नहीं था. उधर सोनी ने भी अपनी मां से कह दिया कि वह हिमांशु के अलावा किसी और लड़के से शादीनहीं करेगी. मां ने बहुत समझाया लेकिन प्रेम में अंधी सोनी की समझ में नहीं आया. वह अपनी जिद पर अड़ी रही.
मां भी क्या करती, जब समझातेसमझाते वह थक गई तो उस ने कुछ भी कहना छोड़ दिया. काफी देर बाद सोनी की समझ में आया कि उसे आजादी पानी है तो पहले घर वालों को विश्वास दिलाना होगा कि वह हिमांशु को पूरी तरह भूल चुकी है. घर वालों को जब उस पर विश्वास हो जाएगा तब वह इस का फायदा उठा कर हिमांशु तक पहुंच सकती है. अगर एक बार वह उस के पास पहुंच गई तो उसे कोई रोक नहीं पाएगा.
ये दिमाग में विचार आते ही सोनी का चेहरा खिल उठा और वह घडि़याली आंसू बहाते हुए मां की गोद में जा कर समा गई, ‘‘मां मुझे माफ कर दो. वाकई मुझ से बड़ी भूल हो गई थी. मैं ने आप की बात नहीं मानी, इसलिए आप के मानसम्मान को ठेस पहुंची. मेरी ही वजह से आप को और पापा को बेइज्जती का सामना करना पड़ा. पता नहीं ये सब कैसे हो गया. बताओ अब मैं क्या करूं.’’
‘‘देख बेटी, सुबह का भूला शाम को घर लौट आए तो उसे भूला नहीं कहते. फिर तू तो मेरा अपना खून है.’’ मां ने सोनी को समझाया, ‘‘मैं तो कहती हूं बेटी कि जो हुआ उसे बुरा सपना समझ कर भूल जा. तेरी शादी मैं अच्छे से अच्छे खानदान में करूंगी.’’
उस के बाद मांबेटी एकदूसरे के गले मिल कर पश्चाताप के आंसू पोंछती रहीं. मां को विश्वास में ले कर सोनी मन ही मन खुश थी. उस के होंठों पर एक अजीब सी कुटिल मुसकान थिरक उठी थी.
मांबाप को भी जब पक्का यकीन हो गया कि सोनी ने हिमांशु से बात तक करनी बंद कर दी है तो उन्होंने धीरेधीरे उस के ऊपर की पाबंदी हटा ली. पिता परमानंद अब उस के लिए लड़का ढूंढने लगे ताकि वह अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो सकें.
परमानंद को इस बात की जरा भी भनक नहीं थी, उन की बेटी मांबाप की आंखों में धूल झोंक रही है. जबकि उस की योजना प्रेमी के साथ फुर्र हो जाने की है.
योजना मुताबिक, सोनी ने मां के सामने ननिहाल जाने की इच्छा प्रकट की तो मां उसे मना नहीं कर सकी. सोचा कि बेटी ननिहाल घूम आएगी तो मन भी बदल जाएगा. यही सोच कर सितंबर, 2016 में उसे बेटे के साथ ननिहाल भेजवा दिया.
ननिहाल पहुंचते ही सोनी आजाद पंछी की तरह हो गई. उस ने हिमांशु को फोन कर दिया कि वह ननिहाल में आ गई है. यहां उस पर किसी तरह की कोई पाबंदी या बंदिश नहीं है. इसलिए वह यहां आ कर उस से मिल सकता है. यह खबर मिलते ही हिमांशु उस की ननिहाल पहुंच गया.
महीनों बाद दोनों एकदूसरे से मिले थे. उन्होंने पहले जी भर कर एकदूसरे को प्यार किया. उसी वक्त सोनी ने हिमांशु से कह दिया कि वह उस के बिना जी नहीं सकती. वो उसे यहां से कहीं दूर ऐसी जगह ले चले, जहां उन के अलावा कोई तीसरा न हो. हिमांशु भी यही चाहता था कि सोनी को ले कर वह इतनी दूर चला जाए, जहां अपनों का साया तक न पहुंच सके.
सोनी घर से भागने के लिए हिमांशु पर दबाव बनाने लगी. प्यार के सामने विवश हिमांशु यार दोस्तों से कुछ रुपयों का बंदोबस्त कर के उसे ले कर दिल्ली भाग गया. परमानंद को जब पता चला तो वह आगबबूला हो उठा. उस ने हिमांशु और उस के घर वालों के खिलाफ कजरैली थाने में बेटी के अपहरण का मुकदमा दर्ज करा दिया.
अपहरण का मुकदमा दर्ज होते ही कजरैली थाने की पुलिस सक्रिय हुई. पुलिस ने हिमांशु के घर पर दबिश दी. हिमांशु घर से गायब मिला तो पुलिस हिमांशु की मां जेलस देवी को थाने ले आई. उस से सख्ती से पूछताछ की लेकिन वह कुछ नहीं बता पाई. तब पुलिस ने जेलस देवी को घर भेज दिया.
कई महीने बाद भी जब सोनी का पता नहीं चला तो पुलिस हिमांशु और सोनी को हाजिर कराने के लिए जेलस देवी पर बारबार दबाव बनाती रही. कहीं से यह बात हिमांशु को पता चल गई कि पुलिस उस की मां को बारबार परेशान कर रही है. तब 8 महीने बाद हिमांशु सोनी को ले कर घर लौट आया.
सोनी ने अदालत में हाजिर हो कर न्यायाधीश के सामने यह बयान दिया कि वह बालिग हो चुकी है. अपनी मनमरजी से कहीं आजा सकती है. उसे अच्छेबुरे का ज्ञान है. अब रही बात मेरे अपहरण करने की तो मैं अपने मरजी से ननिहाल गई थी. वहीं रह रही थी, हिमांशु ने मेरा अपहरण नहीं किया था. बल्कि मैं अपनी मरजी से कहीं गई थी. हिमांशु निर्दोष है.
भरी अदालत में सोनी के बयान सुन कर परमानंद और उन के साथ आए लोग दंग रह गए, क्योंकि उस ने हिमांशु के पक्ष में बयान दिया था. सोनी के बयान के आधार पर अदालत ने उसे मुक्त दिया.
यह सब सोनी की वजह से ही हुआ था. इसलिए परमानंद भीतर ही भीतर जलभुन कर रह गया. उस समय तो उस ने समझदारी से काम लिया. वह सोनी को ले कर घर आ गया और हिमांशु अपने घर चला गया. घर ला कर परमानंद ने सोनी को बंद कमरे में खूब मारापीटा. फिर उसे उसी कमरे में बंद कर के बाहर से ताला लगा दिया.
इस के बाद परमानंद ने ठान लिया कि हिमांशु की वजह से ही पूरे समाज में उस के परिवार की नाक कटी है, इसलिए वह उसे ऐसा सबक सिखाएगा कि सब देखते रह जाएंगे. वह धीरेधीरे गांव के लोगों को भी हिमांशु के खिलाफ भड़काने लगा कि उस की वजह से ही पूरे गांव की बदनामी हुई है.
योजना को अंजाम देने के लिए परमानंद ने एक योजना बनाई. योजना के अनुसार, वह और उस का परिवार एकदम शांति से रहने लगा ताकि हिमांशु को रास्ते से हटाने के बाद सभी को यही लगे कि इस में उस का कोई हाथ नहीं है. परमानंद अभी यह तानाबाना बुन ही रहा था कि एक नई घटना घट गई.
20 अप्रैन, 2017 को सोनी फिर हिमांशु के साथ भाग गई. इस बार हिमांशु के साथ हिमांशु का परिवार भी खड़ा था. दोनों का प्यार देख कर घर वालों ने दोनों की सहमति से मंदिर में शादी करा दी थी. शादी के 15 दिनों बाद हिमांशु और सोनी फिर गांव लौट आए. इस बार सोनी अपने घर के बजाय हिमांशु के घर गई.
हिमांशु और सोनी के लौटने की खबर पूरे गांव में जंगल की आग की तरह फैल गई. गांव वाले दोनों की हिम्मत देख कर हतप्रभ थे कि हिम्मत तो देखिए रिश्तों को कलंकित करते कलेजे को ठंडक नहीं पहुंची जो गांव को बदनाम करने फिर से यहां आ गए. खैर, जैसे ही ये खबर परमानंद को मिली तो उस का खून खौल उठा. वह आपे से बाहर हो गया.
अगले दिन यानी 5 जून, 2017 को सुबह के करीब 10 बजे गांव में पंचायत बुलाई गई. पंचायत परमानंद के दरवाजे के सामने रखी गई. उस में सैकड़ों की तादाद में गांव वालों के अलावा 21 पंच जुटे. सभी पंच परमानंद के पक्ष में खड़े उस की हां में हां मिला रहे थे. पंचायत में हिमांशु के परिवार का कोई भी सदस्य शामिल नहीं था.
पंचायत की अगुवाई गांव का गणेश यादव कर रहा था. एक दिन पहले ही गणेश यादव जेल से जमानत पर रिहा हुआ था. पंचायत में प्रताप यादव सिपाही भी था. वह बक्सर में तैनात था और कुछ दिनों की छुट्टी पर घर आया था. इसी की मध्यस्थता में पंचायत शुरू हुई थी.
10 बजे शुरू हुई पंचायत शाम 5 बजे तक चली. अंत में पंचों ने एकमत हो कर हिमांशु के खिलाफ तुगलकी फरमान सुना दिया कि हिमांशु ने जो किया वह बहुत गलत किया. उस की करतूतों से गांव की भारी बदनामी हुई है. उसे उस की गलती की सजा तो मिलनी ही चाहिए ताकि आइंदा गांव का कोई दूसरा युवक ऐसी जुर्रत करने के बारे में सोच भी न सके.
सभी पंचों ने कहा कि हिमांशु की गलती की सजा मौत है. उसे जान से मार देना चाहिए. इस पर पंचायत के सभी लोग सहमत हो गए. सभी ने लाठी, डंडा, तलवार, पिस्टल, ईंट आदि ले कर उस के घर पर एकाएक हमला बोल दिया.
हिमांशु यादव घर पर ही था. उस के घर का दरवाजा बंद था. दरवाजे को तोड़ कर लोग उसे घर के भीतर से खींच लाए और उस का शरीर गोलियों से छलनी कर के पूरी भड़ास निकाल दी. इस के बाद महिलाएं उस की गर्भवती पत्नी सोनी को भी कमरे से खींच कर कहीं ले गईं. उस दिन के बाद से आज तक उस का कहीं पता नहीं चला कि वह जिंदा भी है या उस के साथ कोई अनहोनी हो चुकी है.
बेटे और बहू को बचाने गई हिमांशु की मां जेलस देवी भी पंचों के कोप का शिकार बन गई. उसे भी मारमार कर अधमरा कर दिया गया. पंच बने आतताइयों का जब इस से भी जी नहीं भरा तो उन्होंने उस के घर को आग लगा दी और फरार हो गए.
दिल दहला देने वाली घटना की सूचना जैसे ही थाना कजरैली के थानाप्रभारी विजय कुमार को मिली तो उन के हाथपांव फूल गए. वह तत्काल मयफोर्स के घटनास्थल के लिए रवाना हो गए. मौके पर पहुंचते ही सूचना उच्चाधिकारियों को दे दी गई. सूचना मिलते ही एसएसपी मनोज कुमार, एसपी (सिटी) और सीओ गौराचक्क गांव पहुंच गए. पीडि़त परिवार के लोगों से मिलने के बाद पुलिस ने आतताइयों के घर दबिश दी लेकिन वे सभी अपनेअपने घरों से फरार मिले.
पुलिस ने हिमांशु की घायल मां जेलस देवी को इलाज के लिए मायागंज अस्पताल पहुंचवा दिया. हिमांशु की लाश कब्जे में ले कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दी गई. मौके से कई खाली खोखे बरामद हुए. गांव का तनावपूर्ण माहौल देखते हुए एसएसपी ने वहां पीएसी की 2 टुकडि़यां तैनात कर दीं ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे.
पुलिस ने अस्पताल में जेलस देवी के बयान लिए तो उस ने पूरी घटना सिलसिलेवार बता दी. उस के बयान के आधार पर कजरैली थाने में हत्या, हत्या का प्रयास और बलवा करने की विभिन्न धाराओं में 21 आरोपियों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज हुआ.
मामले में बहू सोनी के पिता और मुख्य आरोपी परमानंद यादव सहित सुनील यादव, भितो यादव, सुमन यादव, सीताराम यादव, विवेक यादव, प्रकाश यादव उर्फ विक्की, पूसो यादव, राजा यादव, पंकज यादव, प्रकाश यादव, अधिक यादव, प्रताप यादव (सिपाही), विजय यादव, अजब लाल यादव, गणेश यादव, वरुण यादव, सुमन यादव, अरुण यादव, कुशी यादव और गोपाल यादव को नामजद आरोपी बनाया गया.
हिमांशु यादव की पत्नी सोनी यादव के अपहरण का अलग से मुकदमा दर्ज किया गया. इस मुकदमे में आरोपी आशा देवी, राधा देवी, रुक्मिणी देवी, मनीषा देवी, अंजू देवी, अन्नू देवी, नागो यादव और अब्बो देवी को नामजद दिया गया. यह सब भी अपनेअपने घर से फरार मिलीं. पर 2 हमलावर प्रकाश यादव और राजा यादव पुलिस के हत्थे चढ़ गए. पुलिस ने उन से पूछताछ कर उन्हें जेल भेज दिया. घटना के बाद गांव के लोग 2 खेमों में बंट गए.
धीरेधीरे 10-12 दिन बीत गए. हिमांशु हत्याकांड और सोनी अपहरण के आरोपियों का पुलिस पता तक नहीं लगा सकी. समाचार पत्र इस लोमहर्षक घटना की खबरें छापछाप कर पुलिस की नाक में दम कर रहे थे. दबाव बनाने के लिए पुलिस ने 20 जून, 2017 को न्यायालय से आरोपियों की संपत्ति के कुर्कीजब्ती के आदेश ले लिए.
आरोपियों को जब पता चला कि पुलिस ने न्यायालय से उन की संपत्ति के कुर्कीजब्ती के आदेश ले लिए हैं तो सीताराम यादव, सुनील यादव, विवेक यादव, अरुण यादव, कुशो यादव और सुमन यादव ने 14 जुलाई, 2017 को अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी रंजन कुमार मिश्रा की कोर्ट में सरेंडर कर दिया. कोर्ट से सभी आरोपियों को जेल भेज दिया.
इस के पहले भी 2 आरोपियों ने कोर्ट में सरेंडर किया था और 3 को पुलिस पहले गिरफ्तार कर चुकी थी. बाकी अभियुक्तों को भी पुलिस तलाशती रही. 30 जुलाई, 2017 को मुख्य आरोपी परमानंद यादव को पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर बांका जिले से गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने उस से सोनी के बारे में पूछताछ की तो उस ने अनभिज्ञता जताई.
इस केस में अजब लाल यादव भी आरोपी था. जबकि उस के घर वालों का कहना है कि उस का इस मामले से कोई लेनादेना नहीं है. उस की बेटी अनुष्ठा ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयेग को पत्र लिख कर कहा कि उस के पिता को गलत फंसाया गया है. मानवाधिकार आयोग ने 8 जनवरी, 2018 को एसएसपी मनोज कुमार से हिमांशु हत्याकांड की ताजा रिपोर्ट देने को कहा.
आयोग के सवालों के जवाब देने के लिए एसएसपी ने डीएसपी (सिटी) को अधिकृत कर दिया. कथा लिखे जाने तक जवाब तैयार नहीं हुआ था. अपहृत सोनी का कुछ पता नहीं चल सका था. हिमांशु के घर वालों ने अपहरण कर के सोनी की हत्या की आशंका जताई है.
– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित
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हरियाणा के जिला सोनीपत के खरखौदा स्थित दिल्ली चौक पर अकसर गहमागहमी रहती है, लेकिन 27 दिसंबर को वहां कुछ अलग ही माहौल था. 40 से ज्यादा युवा और अधेड़ सजेधजे वहां इधरउधर टहल रहे थे. इन में किसी के हाथों पर मेंहदी लगी थी तो किसी के सिर पर सेहरा था. इन में से कुछ ऐसे लड़के भी थे, जिन्होंने ब्यूटीपार्लर जा कर फेशियल भी करवाया था, ताकि उन का चेहरा खूबसूरत लगे.
ज्यादातर क्लीनशेव्ड थे, वे चाहे अधेड़ थे या युवा. सभी के चेहरे खुशी से दमक रहे थे. उन के हावभाव और हरकतें देख कर यही लगता था कि इन्हें किसी का बेसब्री से इंतजार है. इन के साथ उन के एक या दो रिश्तेदार भी थे. सभी लोग दिल्ली की ओर से आने वाले वाहनों को टकटकी लगाए देख रहे थे.
दरअसल, ये सभी दूल्हे थे, जिन की शादी होनी थी. इन दूल्हों और उन के घर वालों से कहा गया था कि सुबह 9 बजे तक दिल्ली से एक बस आएगी, जिस में बैठ कर दूल्हों और उन के एकएक रिश्तेदार को दिल्ली स्थित तीसहजारी अदालत के पास पहुंचना है. वहीं बगल में स्थित अनाथ आश्रम में इन सब की एक साथ शादी कराई जाएगी.
ये सभी दूल्हे और उन के रिश्तेदार खरखौदा के दिल्ली चौक पर खड़े हो कर दिल्ली से आने वाली बस का इंतजार कर रहे थे. बस के आने का समय 9 बजे बताया गया था, इसलिए ये सभी दूल्हे 9 बजे से पहले ही वहां आ गए थे. क्योंकि उन्हें डर था कि अगर बस चली गई तो वे रह जाएंगे.
वहां आए ये सभी दूल्हे सोनीपत, जींद, रोहतक, झज्जर आदि जिलों के रहने वाले थे. बस को 9 बजे तक आ जाना था, लेकिन 10 बज गए. दिल्ली से बस नहीं आई. इस बीच दूल्हों के घरों से कभी भाई तो कभी मां तो कभी दोस्त का फोन कर के पूछता कि वे दिल्ली के लिए चल पडे़ या खरखौदा में ही खड़े हैं.
दूल्हे क्या जवाब देते. कुछ देर तो कहते रहे कि अभी बस नहीं आई है, थोड़ी देर में आ जाएगी. जैसे ही वे यहां से निकलेंगे, बता देंगे. लेकिन जब बस का इंतजार करतेकरते 11 बज गए और बस का कोई अतापता नहीं था. तो दूल्हों और उन के साथ आए रिश्तेदारों को बेचैनी होने लगी. घर वालों के फोन बारबार आ ही रहे थे, जिस से वे झुंझलाने लगे.
उन दूल्हों में से कुछ के रिश्तेदारों ने सुशीला को फोन किया. लेकिन उस का मोबाइल फोन बंद था. इस के बाद तो सब ने सुशीला को फोन करने शुरू कर दिए, लेकिन उस से बात नहीं हो सकी. ये सभी सुशीला को इसलिए फोन कर रहे थे, क्योंकि शादी कराने की जिम्मेदारी उसी ने ले रखी थी.
शादी की बातचीत करने के लिए उस के साथ मोनू भी आया था. कुछ लोगों के पास मोनू का भी फोन नंबर था. उसे भी फोन किया गया. उस का भी फोन बंद था, इसलिए उस से भी बात नहीं हो सकी. मोनू थाना कलां का रहने वाला था.
शादी कराने के लिए सुशीला ने उन दूल्हों के घर वालों से अच्छेखासे पैसे लिए थे. किसी से 45 हजार रुपए तो किसी से 60 हजार रुपए तो किसी से 90 हजार रुपए. सुशीला ने ही सब से दिल्ली से बस आने और वहां जा कर अनाथालय में सभी की सामूहिक शादी कराने की बात कही थी. उसी के कहने पर ये सभी लोग खरखौदा में इकट्ठे हुए थे.
लेकिन अब सुशीला से बात नहीं हो पा रही थी. मोनू का भी कुछ अतापता नहीं था. सुशीला और मोनू के मोबाइल फोन बंद बता रहे थे. इन के पास सुशीला और मोनू के अलावा किसी अन्य का मोबाइल नंबर नहीं था. इसी तरह दोपहर के 12 बज गए. वहां एकत्र दूल्हे और उन के रिश्तेदार तरहतरह की चर्चाएं करने के साथ धोखा खाने यानी शादी के नाम पर ठगे जाने की आशंका जाहिर करने लगे.
सभी दूल्हे पहुंच गए सुशीला के घर
इंतजार करतेकरते थक चुके लोगों ने कहा कि सुशीला खरखौदा में ही तो रहती है, चलो उस के घर चलते हैं. उसी से पूछते हैं कि अभी तक बस क्यों नहीं आई? सभी सुशीला के घर पहुंचे तो वह घर पर ही मिल गई. मोनू भी सुशीला के ही घर पर था.
सभी ने सुशीला और मोनू से बस न आने के बारे में पूछा तो सुशीला ने कहा, ‘‘देखो मैं पता करती हूं. शादी कराने की बात दिल्ली में रहने वाली मेरी भाभी अनीता ने कही थी. उन्हीं के कहने पर मैं ने दिल्ली से बस आने की बात बताई थी.’’
इस के बाद सुशीला ने सब के सामने अनीता को फोन किया. पता चला कि उस का भी फोन बंद है. कई बार कोशिश करने के बाद भी जब अनीता से भी बात नहीं हो सकी तो दूल्हों और उन के रिश्तेदारों को गुस्सा आ गया. उन्हें यकीन हो गया कि शादी के नाम पर वे ठगे गए हैं.
कुछ लोग सुशीला से अपने पैसे वापस मांगने लगे. उन का कहना था कि उन्होंने कर्ज ले कर उसे पैसे दिए हैं. अब वह शादी नहीं करा रही है तो उन के पैसे वापस करे. कुछ दूल्हों का कहना था कि अब वे बिना दुलहन के कौन सा मुंह ले कर अपने घर जाएंगे. कुछ दूल्हे ऐसे भी थे, जिन के घर वालों ने बेटे की शादी की खुशी में बहूभोज के लिए मैरिज होम तक बुक करा लिया था. डीजे वगैरह का भी इंतजाम किया था.
कुछ दूल्हे ऐसे भी थे, जिन के घर वालों ने शादी की सारी रस्में करा का उन्हें यहां तक पहुंचाया था. जो खातेपीते घर के दूल्हे थे, उन्होंने अपने रिश्तेदारों से बताया था कि लड़की के घर वाले गरीब हैं. इसलिए शादी करने के बाद बहू के साथ घर आएंगे तो उन सब की खातिरदारी घर पर करेंगे.
पैसे मांगने पर सुशीला ने कहा कि पैसे तो वह अनीता को दे चुकी है. इसलिए पैसे नहीं दे सकती. 2-3 घंटे तक सुशीला के घर पर हंगामा होता रहा. जब लोगों को ना तो पैसे वापस मिले और ना ही शादी होने की कोई सूरत नजर आई तो वे सुशीला और मोनू को पकड़ कर थाना खरखौदा ले गए. शादी के नाम पर हुई ठगी को एक दूल्हे का पिता बरदाश्त नहीं कर सका और वह थाने में ही बेहोश हो कर गिर पड़ा. लोगों ने उसे संभाला.
दूल्हों और उन के रिश्तेदारों ने पुलिस को सारी बात बताई. कुछ ने लिखित शिकायत कर दी. थाना खरखौदा पुलिस ने अनीता, सुशीला और मोनू के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया. थानाप्रभारी वजीर सिंह ने इस मामले की जांच एसआई नरेश कुमार को सौंपी. पुलिस ने सुशीला और मोनू को हिरासत में ले कर पूछताछ की. बाद में दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया.
गेम की मास्टरमाइंड निकली अनीता
28 दिसंबर को पुलिस ने खरखौदा के वार्ड नंबर 2 निवासी सुशीला और गांव थाना कलां निवासी मोनू को मजिस्ट्रैट के सामने पेश कर पूछताछ के लिए 2 दिनों के रिमांड पर लिया. पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में सुशीला और मोनू ने बताया कि उन्हें पता नहीं था कि शादी के नाम पर अनीता लोगों को ठग रही है.
अनीता ने उन्हें इस काम के लिए एक से 2 हजार रुपए ही दिए थे. बाकी रुपए उस ने खुद ही रख लिए थे. सुशीला के बताए अनुसार, अनीता दिल्ली के नरेला के लामपुर बौर्डर की रहने वाली थी. दिल्ली के अलावा झज्जर और अन्य जगहों पर भी उस के ठिकाने बताए.
थाना खरखौदा पुलिस ने अनीता की तलाश में दिल्ली और जहांजहां उस के मिलने की संभावना थी, छापे मारे, लेकिन वह नहीं मिली. इस के बाद पुलिस ने 3 टीमें बना कर उस की तलाश शुरू की.
सुशीला और मोनू से पूछताछ के आधार पर पुलिस ने कई अन्य लोगों से पूछताछ की, लेकिन अनीता के बारे में कुछ पता नहीं चला. रिमांड अवधि समाप्त होने पर पुलिस ने सुशीला और मोनू को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.
पुलिस की लगातार छापेमारी से घबरा कर अनीता ने 7 जनवरी, 2018 को सोनीपत की अदालत में आत्मसमर्पण किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. पुलिस ने पूछताछ के लिए अदालत से उस का रिमांड मांगा तो उसे 5 दिनों की रिमांड पर सौंप दिया गया. 5 दिनों के बाद एक बार फिर 3 दिनों के रिमांड पर लिया गया.
अनीता से पूछताछ में पता चला कि कुंवारों से शादी के नाम पर ठगे गए पैसों का उपयोग अनीता के बेटे रोहित ने भी किया था. पुलिस ने 9 जनवरी को दिल्ली से रोहित को भी गिरफ्तार कर लिया. रोहित को 3 दिनों के रिमांड पर लिया गया. पुलिस द्वारा की गई पूछताछ और शादी के नाम पर ठगे गए लोगों से मिली जानकारी के आधार पर जो कहानी सामने आई है, वह इस प्रकार थी—
कुंवारों को ठगने की बनाई योजना
दिल्ली के नरेला के गांव लामपुर की रहने वाली अनीता के पति की मौत हो चुकी थी. उस के 2 बच्चे हैं, जिन की शादियां हो चुकी हैं. अनीता की हरियाणा में कई रिश्तेदारियां हैं. उसे पता था कि लड़कियों की कमी की वजह से हरियाणा के तमाम लड़कों की शादियां नहीं हो पाती हैं. शादी की उम्मीद में तमाम लड़के अधेड़ हो चुके हैं. इस तरह के लोग किसी भी तरह शादी करना चाहते हैं. इस के लिए वे पैसा दे कर दुलहन खरीदने को भी तैयार रहते हैं.
अनीता ने इसी बात का फायदा उठाया. उस ने शादी कराने के नाम पर कुंवारों को ठगने की योजना बनाई. इस काम में उस ने अपनी जानकार खरखौदा की रहने वाली सुशीला की मदद ली. हालांकि उस ने सुशीला को अपनी पूरी योजना नहीं बताई थी. उसे केवल आसपास के गांवों में कुंवारों के बारे में पता करने और उन की शादी कराने की बात करने की जिम्मेदारी सौंपी थी.
इस के बाद अपने परिचित मोनू को मदद के लिए ले लिया. दोनों ने आसपास के गांवों और रिश्तेदारों में ऐसे लड़कों के बारे में पता किया, जिन की शादी नहीं हुई थी. सुशीला ने ऐसे लड़कों की शादी कराने की बात चलाई. हर गांव में एकदो परिवार ऐसे मिल गए, जिन के यहां लड़कों की शादी नहीं हुई थी. वे चाहते थे कि उन के लड़के की शादी हो जाए और घर में बहू आ जाए. इस के लिए वे पैसे भी खर्च करने को तैयार थे.
एक शादी के लिए 45 से 90 हजार रुपए
सुशीला के कहने पर तमाम लोग शादी के लिए तैयार हो गए. एकदूसरे के माध्यम से शादी करने वालों की संख्या बढ़ती गई. सुशीला ने यह बात अनीता को बताई. वह खरखौदा आ गई और सुशीला के साथ कुछ ऐसे लोगों के यहां गई भी, जो शादी के इच्छुक थे. उस ने कहा कि जिन लड़कियों से उन की शादी कराएंगी, वे लड़कियां अनाथ हैं और दिल्ली के अनाथालय में रहती हैं. इस के लिए उन्हें अनाथालय को चंदा देना होगा.
चंदे की राशि कम से कम 45 हजार होगी. उम्र के हिसाब से चंदे की यह रकम बढ़ती जाएगी. जब कई लोग शादी के लिए तैयार हो जाएंगे तो वह एकसाथ सब की शादियां करा देगी.
शादी कब और कहां होगी, यह वह बाद में बता देगी. उस ने यह भी कहा कि शादी से कुछ दिनों पहले दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट के पास स्थित आश्रम में पहले लड़कियां दिखाई जाएंगी, उन में वे जिस लड़की को पसंद करेंगे, उसी से उन की शादी कराई जाएगी. जिन के लड़कों की शादी नहीं हुई थी, उन्हें यह सौदा बुरा नहीं लगा.
वे चंदा देने के लिए तैयार हो गए. इस के बाद अनीता तो चली गई, सुशीला और मोनू शादी कराने वाले लड़कों के घर वालों से चंदा वसूल करने लगे.
कुछ जगह चंदा लेने के लिए सुशीला और मोनू के साथ अनीता भी गई थी. इन में कुछ लोग ऐसे भी थे, जो किसी तरह गुजरबसर कर रहे थे. ऐसे लोगों ने बेटे की शादी के लिए कर्जा ले कर सुशीला को पैसे दिए.
रोहतक के राजबीर और मोहन के गांव बोहर में सुशीला की रिश्तेदारी थी. सुशीला ने उन के गांव जा कर ऐसे लोगों के बारे में पता किया, जो शादी करना चाहते थे. गांव में रिश्तेदारी होने की वजह से सुशीला पर विश्वास कर के मोहन ने 45 हजार तो राजबीर ने 50 हजार रुपए उसे दे दिए. इसी तरह खरखौदा के संदीप ने शादी के लिए सुशीला को 45 हजार रुपए दिए थे. उस के पास पैसे नहीं थे तो घर वालों ने उधार ले कर उसे 45 हजार रुपए दिए थे.
खरखौदा के ही सुरेश, अंशरूप, पवन, राजेंद्र, मुनेश, जौनी, राकेश और साबू, सोनीपत के अमित, रोहतक के गांव हुमायूंपुर के संतोष और लक्ष्मी, निलौठी के असीक और रामवीर, मोहाना के राजू, बोहर के सत्यनारायण, कृष्ण, मोहन, राजवीर और कुलदीप, रोहतक के गांव निडाना के रमेश, अनिल, धनाना के शिवकुमार, जींद के अमरजीत, संजीव, झज्जर के बहराना गांव के जगवीर सहित कई लोगों ने शादी के लिए सुशीला को पैसे दिए.
ठगी के शिकार सब से ज्यादा खरखौदा के ही हुए हैं. इन की संख्या 25 से भी ज्यादा है. खरखौदा का रहने वाला सुरेश कुमार खेती करता था. उस का दूध का भी धंधा था. घर में बुजुर्ग विधवा मां थी.
आखिर बूढी मां पर वह कब तक बोझ बना रहता. सुशीला ने उस की मां से कहा कि वह सुरेश की शादी अनाथाश्रम की लड़की से करा देगी. इस के लिए 45 हजार रुपए दान देने पड़ेंगे. घर में 10 हजार रुपए ही थे. बाकी के 35 हजार रुपए उस ने ब्याज पर ले कर दिए.
खरखौदा का संदीप सब्जीमंडी में सब्जी बेचता था. बूढ़ी मां की इच्छा थी कि संदीप की शादी हो जाए. कई लोगों ने सुशीला को अनाथाश्रम की लड़की से शादी कराने के लिए पैसे दिए थे, इसलिए संदीप की मां भी उस के झांसे में आ गई. कुछ पैसे घर में थे और कुछ पैसे उधार ले कर सुशीला को दे दिए थे.
इसी तरह खरखौदा के वार्ड नंबर 3 निवासी स्कूटर रिपेयरिंग का काम करने वाले जौनी की दादी ने उस की दुलहन के लिए दान के रूप में पैसे दिए थे. दादी ने सोचा था कि पोते की बहू आ जाएगी तो दो जून की रोटी मिलने लगेगी.
सुशीला और अनीता ने सभी से 27 दिसंबर को शादी कराने के लिए कहा था. कुछ लोगों से यह भी कहा था कि शादी से 10-11 दिन पहले उन्हें दिल्ली में लड़कियां दिखा दी जाएंगी. उन में से शादी के लिए लड़की पसंद कर लेना.
कुंवारों को टालती रही अनीता
लड़की दिखाने के लिए मोहाना गांव के रोहताश ने 16 दिसंबर को अनीता को फोन किया तो उस ने कहा कि अनाथाश्रम की लड़कियों की शादी में मदद करने के लिए कुछ विदेशी आने वाले थे, लेकिन बर्फबारी होने की वजह से वे नहीं आए. इसलिए अब लड़की दिखाने का प्रोग्राम कैंसिल हो गया है. अब 27 दिसंबर को सीधे सामूहिक विवाह ही होगा.
जिन लोगों ने अनीता और सुशीला को लड़की दिखाने के लिए फोन किया था, सभी से यही कह दिया गया. लड़कों ने सोचा कि लड़की नहीं दिखाई जा रही, कोई बात नहीं शादी तो हो जाएगी.
इस के बाद सभी को फोन कर के बता दिया गया कि 27 दिसंबर को दिल्ली में शादी होगी. इस के लिए दिल्ली से खरखौदा बस आएगी. उस बस से सभी लोग दिल्ली पहुंच जाना, जहां तीसहजारी कोर्ट के पास स्थित एक अनाथाश्रम में सभी की शादी होगी. 27 दिसंबर को जो हुआ, वह बताया ही जा चुका है.
यह सारी योजना अनीता की थी. सुशीला और मोनू एजेंट के रूप में काम कर रहे थे. शादी के नाम पर चंदे के रूप में वसूली गई रकम अनीता लेती थी. उस में से कुछ पैसे सुशीला और मोनू को मिलते थे.
पुलिस ने हिसाब लगाया तो इन लोगों ने शादी के नाम पर 40 से ज्यादा लड़कों से 25 से 30 लाख रुपए वसूले थे. पुलिस यह भी पता कर रही है कि इन लोगों के साथ और लोग तो नहीं थे. थानाप्रभारी वजीर सिंह ने ठगे गए युवकों को आश्वासन दिया है कि उन लोगों से पैसे वसूल कर उन के पैसे वापस कराने की कोशिश की जाएगी.
दरअसल, सोनीपत के खरखौदा में लड़कों के हिसाब से लड़कियां बहुत कम हैं. इसी वजह से यहां सभी लड़कों की शादियां नहीं हो रही हैं.
मजे की बात यह है कि चुनाव के दौरान जींद जिले में कुंवारा संगठन बना था. उन्होंने शादी की उम्र पार करने वाले लड़कों की शादियां कराने की मांग उठाई थी. तब एक नेता ने बिहार से लड़कियां ला कर उन की शादी करवाने का आश्वासन दिया था.
दुलहन के नाम पर अनोखी ठगी
उत्तराखंड के बनबसा में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू) की प्रभारी एसआई मंजू पांडेय को एक दिन एक व्यक्ति ने खास सूचना दी. उस ने बताया कि ऊधमसिंह नगर के खटीमा इलाके में कुछ लोग विवाह की चाह रखने वाले युवकों की शादी कराने के लिए लड़कियां उपलब्ध कराते हैं.
इस के एवज में वह उन से मोटी रकम वसूलते हैं. बाद में लड़कियां मौका मिलने के बाद वहां से लौट जाती हैं या फिर ठग गिरोह द्वारा अन्यत्र भेज दी जाती हैं.
एसआई मंजू पांडे ने यह जानकारी सीओ (टनकपुर) आर.एस. रौतेला को दी. सीओ आर.एस. रौतेला ने मंजू पांडेय के नेतृत्व में एक टीम बनाई, जिस में हैडकांस्टेबल लक्ष्मणचंद, रवि जोशी, कांस्टेबल गणेश सिंह के अलावा स्थानीय लोग और एनजीओ के लोग शामिल थे.
साथ ही उन्होंने योजना बना कर उन्हें अपने हस्ताक्षरयुक्त कुछ नोट व चैक दे दिए. इस के बाद एसआई मंजू पांडेय ने ठग गिरोह से किसी लड़के की शादी कराने के बारे में बात की.
निश्चित तारीख को चकरपुर मंदिर परिसर में शादी कराने की तैयारियों का नाटक करते हुए सीओ के हस्ताक्षर वाले चैक और नोट ठग गैंग के सदस्य को दे दिए. कुछ देर बाद खटीमा की ओर से 2 महिलाएं एक बाइक से वहां पहुंचीं. फिर एक महिला बस में सवार हो कर आई.
वह टनकपुर से आई थी. उन के पहुंचते ही विवाह की तैयारियां शुरू हो गईं. उसी दौरान एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट की दूसरी टीम वहां पहुंच गई. टीम ने पुरुष और तीनों महिलाओं को हिरासत में ले कर उन के पास से हस्ताक्षरयुक्त चैक और नोट अपने कब्जे में ले लिए.
पूछताछ में पता चला कि गिरोह में कलक्टर फार्म खटीमा की रहने वाली रजवंत कौर अपने बेटे सतनाम के साथ ठगी का यह धंधा कर रही थी. अन्य 2 महिलाओं में थाना नानकमता के गांव दहला निवासी गुरमीत कौर और टनकपुर की विष्णुपुरी कालोनी निवासी आरती कपूर थी. इन सभी के खिलाफ भादंवि की धारा 420, 120बी, 34 के तहत मुकदमा दर्ज कर कोर्ट में पेश किया, जहां से इन चारों को जेल भेज दिया गया.
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दैनिक आहार में कुछ महत्त्वपूर्ण खाद्यपदार्थ शामिल कर आप अपने उन खास पलों के रोमांच को किस तरह बढ़ा सकते हैं, जरूर जानिए:
सामन:
सामन ओमेगा-3 फैटी ऐसिड डीएचए और ईपीए का एक ज्ञात प्राकृतिक स्रोत है. इस से मस्तिष्क में डोपामाइन स्तर बढ़ने में मदद मिलती है, जिस से उत्तेजना पैदा होती है. ओमेगा-3 डोपामाइन की उत्पादन क्षमता बढ़ाता है. यह मस्तिष्क के लिए एक महत्त्वपूर्ण रसायन है, जो व्यक्ति के चरमसुख की भावना को ट्रिगर करता है.
कद्दू के बीज:
कद्दू के बीज जस्ता (जिंक) का एक बड़ा स्रोत हैं, जो टेस्टोस्टेरौन को बढ़ा देते हैं. इन में आवश्यक मोनोअनसैचुरेटेड वसा भी होती है, जिस से शरीर में कोलैस्ट्रौल बनता है. यौन हारमोन को ठीक से काम करने के लिए कोलैस्ट्रौल की जरूरत पड़ती है.
बैरीज:
स्ट्राबैरी, ब्लैकबैरी, नीले जामुन ये सभी प्राकृतिक मूड बूस्टर हैं. स्ट्राबैरी में पर्याप्त विटामिन सी और बी होता है. ब्लैकबैरी और नीले जामुन फाइटोकैमिकल युक्त होते हैं, जो व्यक्ति के मूड को रामांटिक बनाते हैं.
केला:
केला पोटैशियम का प्राकृतिक स्रोत है. पोटैशियम एक महत्त्वपूर्ण पोषक तत्त्व है, जो मांसपेशी संकुचन को बढ़ाता है और उन खास पलों में बहुत अहम होता है. साथ ही केला ब्रोमेलैन से समृद्ध होता है, जो टेस्टोस्टेरौन उत्पन्न करने के लिए जिम्मेदार होता है.
तरबूज:
तरबूज में 92% पानी है, लेकिन बाकी 8% पोषक तत्त्वों से भरा होता है. तरबूज का शांत प्रभाव रक्तवाहिकाओं को शांत करता है. यह स्त्री और पुरुष दोनों के अंगों में रक्तप्रवाह सुधारता है.
लहसुन:
रोजमर्रा के जीवन में इस्तेमाल किए जाने वाला खास आहार लहसुन ऐलिकिन समृद्ध होता है, जो पुरुषों और महिलाओं दोनों के यौन अंगों में रक्तप्रवाह को बढ़ाता है. रात में शहद में भिगो कर रखा गया कच्चा लहसुन खाना लाभप्रद होता है.
केसर:
केसर एक प्राकृतिक कामोद्दीपक है, जो स्त्रीपुरुष दोनों के लिए उन पलों का आनंद बढ़ाने में मददगार होता है. सब से महंगे मसालों में से एक माने जाने वाले केसर में क्रोकटोन नामक मिश्रण होता है, जो मस्तिष्क में उत्तेजना वाले हारमोन को ट्रिगर करते हुए इच्छा बढ़ाता है. केसर में पिको क्रोकिन रसायन होता है, जो स्पर्श के प्रति संवेदना बढ़ाता है.
लौंग:
सदियों से पुरुष यौन रोग का इलाज करने के लिए हमारे देश में लौंग का उपयोग किया जाता है. यदि नियमितरूप से लौंग खाई जाए तो यौन गतिविधि में वृद्धि होती है. इस के अलावा लौंग सांस की गंध से छुटकारा दिलाने में भी मददगार है. लौंग के साथ जीरा एवं दालचीनी का सेवन और अधिक कामोद्दीपक है.
डार्क चौकलेट:
डार्क चौकलेट ऐंटीऔक्सीडैंट से भरपूर होती है, जिस के चलते अधिक अनुभूति के लिए यह एक स्वादिष्ठ तरीका है. ऐंटीऔक्सीडैंट उम्र बढ़ने के संकेतों को कम करते हैं और यौन आनंद बढ़ाते हैं.
पालक:
पालक जैसी पत्तेदार हरी सब्जियों में जबरदस्त फौलिक ऐसिड होते हैं, जो उर्वरता और कामेच्छा बढ़ाने में मदद करते हैं.
अंडे:
अंडे उच्च स्तर के प्रोटीन से भरपूर होते हैं ये स्टैमिना का स्रोत हैं. इस से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि आप इन्हें कैसे खाते हैं. इन का किसी भी तरह खाना ऊर्जा प्रदान करता है.
मात्र 7 साल की उम्र में बरेली की गलियों से निकल कर छोटे परदे पर छा जाने का जो सपना बरेली की बरफी यानी 21 साल की हिबा ने देखा था, वह पूरा होता दिख रहा है. वह 7 साल की उम्र से ऐक्टिंग कर रही हैं. हिबा को यह चांस भी बिना किसी तैयारी के मिला. वह बताती हैं कि एक बार पापा के साथ मुंबई घूमने गई थी. वहां किसी टीवी शो का औडिशन चल रहा था. मैं ने औडिशन दिया और जब घर आई तो पता चला कि मेरा सिलैक्शन हो गया है. 2008 में आए एक टीवी शो ‘फिर कोई है’ से ऐक्टिंग की शुरुआत करने वाली हिबा ने ‘यह रिश्ता क्या कहलाता है,’ ‘तेरे शहर में,’ ‘भाग बकूल भाग’ के बाद अब वह सब टीवी के नए कौमेडी शो ‘जीजा जी छत पर हैं’ में चुलबुली इलायची की भूमिका निभा रही हैं, शो के प्रमोशन के मौके पर दिल्ली आई हिबा से उस की पर्सनल लाइफ और कैरियर पर बातचीत हुई. पेश हैं, मुख्य अंश :
ऐक्टिंग करने से पढ़ाई पर तो कोई फर्क नहीं पड़ा?
ऐक्टिंग और पढ़ाई दोनों साथसाथ करने में कुछ मुश्किलें तो सामने आई हैं. ऐक्टिंग की वजह से मेरी पढ़ाई पूरी तरह से डिस्टर्ब हुई है, लेकिन ऐक्टिंग का जो कीड़ा दिमाग में घुस चुका था उसे बाहर निकालना काफी मुश्किल था. जब मैं हाईस्कूल में थी, तभी चैनल ‘वी’ के एक शो के लिए मुझे कौल आई, यह शो पूरी तरह टीनएजर्स पर बेस्ड था. इस बारे में घर पर जब पापा को बताया तो उन्होंने मुझे पढ़ाई पर ध्यान देने को कहा, लेकिन मैं ने शो में काम करने की जिद पकड़ ली, जिस के लिए उन्हें आखिर हां करनी पड़ी. शो की शूटिंग के दौरान जब मेरा हाईस्कूल का रिजल्ट आया, तो सैट पर सब मुझे चिढ़ाते थे कि देखो, टैंथ पास आ गई.
आप बड़ी स्लिमट्रिम हैं, खुद को कैसे मेंटेन रखती हैं?
मैं हमेशा बौडी के लिए सूटेबल डाइट लेती हूं. रैगुलर वर्कआउट करती हूं, काम से चाहे कितनी भी थक जाऊं, लेकिन ऐक्सरसाइज करना कभी नहीं छोड़ती. पिछले दिनों डेंगू होने से मैं हौस्पिटल में एडमिट रही जिस की वजह से कुछ ज्यादा ही स्लिम हो गई हूं.
शौपिंग का शौक है?
बहुत ज्यादा, जब भी फ्री होती हूं शौपिंग के लिए निकल जाती हूं. मुझे विंडो शौपिंग पसंद है.
आप लोगों को कुछ फैशन टिप्स देना चाहेंगी, क्योंकि समर का मौसम आ रहा है?
इस मौसम में पिंक, लाइट ब्लू, यलो, गोल्डन कलर ट्राई कर सकती हैं. हां, पेस्टल कलर हमेशा हौट रहते हैं. इन कलर्स का उपयोग आप वैडिंग पर भी कर सकती हैं. अगर फेयर कौंप्लैक्शन है तो ब्राइट कलर बहुत सूट करेगा.
बरेली जाने पर अब कैसा लगता है?
मुंबई मैं 10 साल की उम्र में ही आ गई थी, लेकिन जब टीवी पर आने के बाद पहली बार मैं अपने शहर बरेली अपने स्कूल गई तो वहां के सभी स्टूडैंट्स और टीचर मुझे वीवीआईपी की तरह ट्रीट कर रहे थे. यह सब देख मुझे अजीब लगा, क्योंकि मैं चाइल्ड आर्टिस्ट थी और बरेली में मुझे इतना स्पैशली ट्रीट किया जाना कुछ हजम नहीं हो रहा था. यही हाल मुंबई के एक स्कूल में भी मेरे साथ हुआ. मैं आज भी अपने शहर को नहीं भूल पाई हूं, जब भी फ्री होती हूं तो वहां जाने की कोशिश करती हूं.
अधिकतर कैरेक्टर में हिबा बड़ी नौटी और चुलबुली हैं, क्या पर्सनल लाइफ में भी ऐसी ही हैं?
बिलकुल नहीं, जो भी मुझे करीब से जानता है उसे पता है कि मैं कितनी संजीदा हूं. मुझे जोर से बोलना बिलकुल पसंद नहीं है. मैं बड़ी शांत हूं. कैरेक्टर के अनुसार खुद को ढालना पड़ता है. इस शो के कैरेक्टर में बहुत से रंग हैं, इस में एक कलाकार के लिए बहुतकुछ करने को है, क्योंकि शो की कैरेक्टर में जो चुलबुलापन है वह मेरे अंदर कहीं भी नहीं है. एक बात तो यह है कि मुझे वह सब करने को मिल रहा है जो रियल लाइफ में कभी नहीं कर सकती.
शो ‘जीजा जी छत पर हैं’ कि इलायची खांटी दिल्ली के चांदनी चौक की रहने वाली है इसलिए इस कैरेक्टर के लिए पहले मैं नर्वस थी, लेकिन दिल्ली के दोस्तों ने मेरी भाषा सुधारने में मेरी मदद की और आज मैं भी दिल्ली की और मेरी टोन भी दिल्ली वाली हो गई है.
किस तरह के रोल पसंद हैं?
मैं ने बचपन में ही ऐक्टिंग करना शुरू कर दिया था. मैं हमेशा ही नएनए तरह के रोल करना पसंद करती रही हूं. शो ‘भाग बकुल भाग’ में मुझे टीना का रोल मिला था यह मेरे लिए एक चैलेंजिंग रोल था, क्योंकि इस में मुझे दर्शकों को हंसाना था.
एक ऐक्टर के लिए दर्शकों को हंसाना काफी चैलेंजिंग होता है. लेकिन मैं ने हर मुश्किल रोल को एक चैलेंज मान कर स्वीकार किया और शो का पौपुलर होना इस बात का संकेत है कि मैं अब कौमेडी भी कर सकती हूं.
शाहरुख के साथ डेट
हिबा कहती हैं कि शाहरुख खान मेरे फेवरिट स्टार हैं. मैं उन के साथ लद्दाख जाना चाहती हूं. अगर कोई मुझ से पूछे कि आप किस के साथ डेट पर जाना चाहती हैं, तो मैं पहला नाम उन्हीं का लूंगी. उन की फिल्म ‘दिलवाले दुलहनिया ले जाएंगे’ मेरी फेवरिट मूवी है.
फेवरिट ऐक्ट्रैस
जब उन से उन की पसंदीदा टीवी ऐक्ट्रैस के बारे में पूछा जिसे वह फौलो करती है, तो हिबा ने जैनिफर विंगेट का नाम लिया. उस ने कहा कि जैनिफर बहुत अच्छी आर्टिस्ट हैं और उन के पास कुछ ऐसा है जो दर्शकों को आसानी से अपनी ओर आकर्षित करता है. हिबा ने बताया, ‘‘मैं उन के टैलीविजन शोज देखना पसंद करती हूं. मैं ने उन का शो ‘दिल मिल गए’ का लगभग हर एपिसोड देखा है और यह मुझे बहुत अच्छा लगता है.’’
फुजूलखर्ची
जब लगता है कि ज्यादा खर्च हो रहा है तब मैं मार्केट जा कर सिर्फ मम्मी को फोन कर के बताती हूं कि मम्मी, मैं यह खरीद रही हूं. इस के बाद क्या होता है, यह सभी को पता है. मेरी मम्मी फुजूलखर्ची के सख्त खिलाफ हैं.
पर्ल के साथ गुटरगूं
हिबा और ऐक्टर पर्ल वी पुरी को अकसर साथ देखा जाता था. खबरें यह भी आई थीं कि हिबा और पर्ल आपस में डेटिंग कर रहे हैं. पर कुछ दिनों के पर्ल के साथ उपेन पटेल की पूर्व गर्लफ्रैंड करिश्मा तन्ना नजर आने लगी थी, लेकिन कुछ समय बाद करिश्मा से भी रिश्ता टूटने के बाद पर्ल अपनी पुरानी गर्लफ्रैंड हिबा के साथ फिर नजर आने लगे हैं.
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औरतों को सम्मान देते हुए भी पुरुष क्या क्या बोल जाते हैं इस का नमूना 2012 में दिल्ली में रात निर्भया के बलात्कार, जो बीभत्स व क्रूर था और जिस से पूरा देश उबल पड़ा था, को बैंगलुरु में दिए जाने वाले एक सम्मान समारोह के समय मिला. उस समय कर्नाटक के पूर्व डाइरैक्टर जनरल पुलिस एचटी संगलिना ने कहा कि निर्भया कितनी सुंदर और आकर्षक रही होगी यह उस की मां को देख कर अंदाजा लगाया जा सकता है. निर्भया की मां अवार्ड लेने आई थीं.
संगलिना ने बाद में इसी बात की सफाई देते हुए यह भी कह डाला कि बदमाश तो खूबसूरत औरतों की ताक में रहते हैं और यदि उन के साथ कुछ गलत हो जाए तो उन्हें चुप रह कर सह लेना चाहिए ताकि पुलिस में शिकायत की जा सके. हालांकि निर्भया की मां ने उस फंक्शन के तुरंत बाद संगलिना के बयान पर रोष जता दिया था कि इस कांड की देश भर में हुई भर्त्सना के बाद कुछ नहीं बदला. फिर भी संगलिना का दिमाग इस प्रकार पुरुषवादी बना है कि वे सफाई देते हुए भी गुनाह कर गए.
असल में औरतों के प्रति समाज में पगपग पर एक जहर सा उगला जाता है. बेटियों पर घरों में जब छोटीछोटी बातों पर बंधन लगाए जाते हैं जो बेटों पर नहीं लगाए जाते, तो यह बात साफ कर दी जाती है कि बेटों में केवल लिंग के कारण कुछ विशेषता है. यह बात लड़कियों के मन में बैठ जाती है कि वे हीन हैं.
निर्भया जैसे कांड और उन पर आए उबाल से केवल लड़कियों को चेतावनी दी गई कि उन्हें घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए. उन में लड़कों को शिक्षा देने की कोई बात नहीं थी कि उन्हें सामाजिक सीमाओं के दायरे में रहना चाहिए. बलात्कारों के विरोध में दुनिया भर में औरतें जो विद्रोह कर रही हैं, जो मी टू आंदोलन कर रही हैं उन में सजा की मांग की जा रही है, सामाजिक दृष्टिकोण बदलने की नहीं. पुरुषों से अपरोक्ष रूप से कहा जा रहा है कि औरतों के साथ चाहे जो मरजी करो पर पकड़े गए तो जेल जाओगे.
होना यह चाहिए कि लड़कियों के साथ अभद्र व्यवहार है ही गलत, पकड़े जाओ या न पकड़े जाओ, यह दुनिया नहीं सिखा रही. तभी औरतों पर सैक्सी चुटकुले बन रहे हैं, इंटरनैट का भरपूर दुरुपयोग पोर्न के लिए किया जा रहा है, जिस में औरतों को सैक्स डौल बना कर प्रस्तुत किया जा रहा है.
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पर्यावरण और प्रदूषण जैसे अहम व अति ज्वलंत मुद्दे पर बनी मूक रोमांचक फिल्म ‘‘मरक्यूरी’’ की प्रस्तुतिकरण की खामियों के चलते एक बेहतरीन विषय वाली अच्छी फिल्म आम दर्शकों तक नहीं पहुंच सकती. यह पूरी तरह से पटकथा लेखक व निर्देशक की विफलता ही कही जाएगी कि वह वर्तमान समय के ज्वलंत मुद्दे पर बनी अपनी फिल्म को आम दर्शकों तक पहुंचाकर जागरुकता नहीं ला पाए. और न ही जहर उगलती रासायनिक व धातु की फैक्टरियों के खिलाफ लोगो में रोष ही पैदा हो पाता है.
मूक फिल्म ‘मरक्यूरी’ की कहानी की पृष्ठभूमि में एक केमिकल फैक्टरी के अंदर मरक्यूरी एक्सपोर के चलते धातु की विषैली गैस की वजह से फैक्टरी के आस पास के कई गांवों के इंसान, जानवर, पक्षी आदि मारे जाते हैं. उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद फैक्टरी हमेशा के लिए बंद हो जाती है. उसके बाद भी उस क्षेत्र में जन्म लेने वाला हर बच्चा अंधा बहरा या गूंगा पैदा होता है. इन बच्चों की परवरिश के लिए एक सेवा भावी संस्था ‘होप स्कूल’ चलाती है. इसी होप स्कूल में अंधे व गूंगे प्रभू देवा बच्चों को संगीत सिखाते हैं, संगीत के कार्यक्रम करके लोगों का मनोरंजन करते हैं.
इसी होप स्कूल के छात्र रहे पांच युवक व युवती सनथ रेड्डी, दीपक परमेश, शशांक पुरूषोत्तम, अनीष पद्मनाभन, इंदुजा व गजराज इसी फैक्टरी वाले भुतहा शहर में आ जाते हैं. और एक मकान में रहते हुए शराब व सिगरेट पीते हैं और ऊंचा संगीत सुनते हैं. यह सभी छह साथीगूंगे हैं. इशारों में ही एक दूसरे से बात करते हैं. रात के अंधेरे में पार्टी के बाद पांच साथी कार से बाहर जंगल में घूमने निकलते हैं और बंद पड़ी फैक्टरी के पास भी जाते हैं. वापसी मे कार इंदुजा चला रही होती है ओर अपने प्रेमी के कहने पर काफी तेज गति से कार चलाती है.
उधर रात के अंधेरे में अचानक प्रभू देवा की नींद टूटती है तो वह अपनी पत्नी को सोता छोड़कर जंजीर में बंधे अपने कुत्ते को लेकर बाहर निकलते हैं. उसी वक्त यह पांचों साथी उधर से कार से गुजरते हैं, कार देखकर कुत्ता भौंकता है, इनकी कार का बैलेंस बिगड़ता है और लोहे की चैन से टकरा जाती है. जिससे कुत्ता उस जंजीर से अलग हो जाता है, पर जंजीर का एकसिरा कार के पहिए में फंस जाता है, दूसरा सिरा प्रभू देवा के हाथ में बंधा हुआ है.
यह लोग कुत्ते के डर से कार को और तेज गति से भगाते है, जंजीर के साथ ही प्रभु देवा भी जमीन पर घिसते रहते हैं और उनकी मौत हो जाती है. कुछ देर बाद वह कार रोक कर जंजीर को कार से अलग करना चाहते हैं. पर सफलता नहीं मिलती. तो वह प्रभू देवा के मृत शरीर को अपनी कार की डिक्की में डालकर आगे बढ़ते हैं और फिर फैक्टरी के पास पहुंचकर नदी के किनारे पहाड़ी पर पत्थर आदि की मदद से जंजीर को तोड़ने के बाद प्रभू देवा के मृत शरीर को दफना देते है, पर एक साथी का मोबाइल छूट जाता है.
यह सभी दूसरी रात में मोबाइल ढूढ़ने उसी स्थान पर जाते हैं, मोबाइल मिल जाता है, पर अब प्रभू देवा का भूत उनके पीछे पड़ जाता है. उसे अपनी मौत का बदला लेना है. वहां से यह सभी किसी तरह भागकर फैक्टरी के अंदर पहुंच जाते हैं, जहां प्रभू देवा का भूत एक एक कर सभी की हत्या कर देता है. जब वह इंदुजा के प्रेमी को मार रहा होता है, तब इंदुजा उसका हाथ पकड़कर बताती है कि जो कुछ हुआ अनजाने में हुआ. क्योंकि वह लोग बहरे व गूंगे हैं. होप स्कूल के साथी हैं. और यह युवक उसका प्रेमी है. तब वह भूत रुक जाता है.
भूत को अहसास होता है कि यह लोग भी उसी दर्द के मारे हुए हैं, जिस दर्द को वह सहता रहा है. यानी कि यह सभी इसी फैक्टरी की धातु के जहर के मारे हुए हैं. फिर वह भूत अपनी कहानी सुनाता है कि वह होप स्कूल में संगीत सिखाते हैं. तो इंदुजा को भी याद आ जाता है. फिर वह बताता है कि उसकी पत्नी ने उसकी आंखों का आपरेशन करवाने के लिए पैसा इकट्ठे कर लिए थे, आपरेशन होने वाले दिन से पहले की रात उसे कार चालकों ने सड़क पर घसीटते हुए मार डाला. पर प्रभू देवा के भूत को फैक्टरी की वजह से मारे गए लोग और उसके बाद पैदा हुई पीढ़ी के दर्द का ऐसा अहसास होता है कि वह इंदुजा को जिंदा छोड़ देता है.
पर उसके शरीर में प्रवेश कर अपने घर जाता है. देखता है कि उसकी पत्नी गुमुसम बैठी है. उसका कुत्ता उसे देखकर भौंकता भी है. पुलिस अपनी जांच पड़ताल में लगी हुई है. वह वापस कार के पास आती है और प्रभू देवा का भूत उसका शरीर छोड़ देता है. इसी के साथ इंदुजा बोलने व सुनने भी लगती है.
जहां तक अभिनय का सवाल है तो नृत्य करने वाले प्रभू देवा ने बहुत ही अच्छी परफार्मेंस दी है. इंदुजा भी अपनी परफार्मेंस से छाप छोड़ती हैं. बाकी कलाकार भी ठीक ठाक हैं.
पटकथा लेखक ने जिस अंदाज में इस मूक फिल्म की पटकथा लिखी है, उसके चलते यह फिल्म आम दर्शक की समझ से परे है. जब दर्शक बहुत ज्यादा दिमाग लगाएगा और इशारों की भाषा को समझना शुरू करेगा, तभी यह फिल्म उसकी समझ में आएगी. फैक्टरी से पैदा हुए जहर के चलते पूरे शहर/कई गांव के इंसानों, जानवर आदि के मारे जाने की कहानी तो सिर्फ अखबार की कतरनों को दिखाकर ही पेश किया गया है. बाकी पूरी फिल्म मूक है.
संवाद नहीं है, इसलिए भी दर्शक बोर होने लगता है. आज की पीढ़ी का दर्शक तेज गति से भागती फिल्म देखने का आदी है, जहां उसका ध्यान परदे पर कम, संवादों पर ही ज्यादा रहता है. आज का दर्शक टकटकी लगाकर फिल्म कम ही देखता है. दूसरी बात इंटरवल से पहले फिल्म बहुत ही शुष्क और धीमी गति से चलती है. लेकिन इंटरवल के बाद फिल्म गति पकड़ती है और रोमांचक भी हो जाती है.
इंटरवल के बाद कुछ दृश्य कमाल के बन पड़े हैं, जिसके लिए निर्देशक बधाई के पात्र हैं. मगर फिल्म का मूल मुद्दा जहर उगलती फैक्टरियों से फैलते प्रदूषण और लोगों की तबाह होती जिंदगी का दर्द व मुद्दा भी उभर नहीं पाता है. लेखक व निर्देशक ने थोड़ी और संजीदगी के पटकथा पर काम किया होता तो एक बेहतर फिल्म बन सकती थी.
लगभग दो घंटे की अवधि वाली फिल्म ‘मरक्यूरी’ का निर्माण कार्तिक सुब्बाराज और पेन कंपनी ने जयंतीलाल गाड़ा ने किया है. फिल्म के लेखक व निर्देशक कार्तिक सुब्बाराज, पार्श्वसंगीतकार संतोष नारायनन, कैमरामैन एस तिरू तथा कलाकार हैं-प्रभु देवा, सनथ रेड्डी, दीपक परमेश, शशांक पुरूषोत्तम, अनीष पद्मनाभन, इंदुजा व गजराज.
हर मौसम में फैशनेबल नजर आने के लिए मौसम के अनुसार न सिर्फ आउटफिट का सलैक्शन, बल्कि ऐक्सैसरीज का कलैक्शन रखना भी जरूरी है. आउटफिट और ऐक्सैसरीज के बैस्ट कौंबिनेशन से ही तो पर्सनैलिटी को मिलता है परफैक्ट लुक. हौट समर सीजन में कौन से कूल ऐक्सैसरीज से करें अपने लुक को कंप्लीट, जानने के लिए हम ने बात की फैशन डिजाइनर एवं स्टाइलिस्ट सोनल जैन से:
फ्लोरल स्कार्फ: हौट समर में फ्रैश लुक के लिए अपने वौर्डरोब में स्कार्फ का कलैक्शन जरूर रखें. इन दिनों फ्लोरल प्रिंटेड कलरफुल स्कार्फ फैशन में इन है. इसे आप शौर्ट ड्रैस के साथ ही टौप या टीशर्ट के साथ कैरी कर सकती हैं. स्कार्फ को रोजाना अलगअलग स्टाइल से पहनें. इस से आप ज्यादा स्टाइलिश दिखेंगी.
ऐवीऐटर सनग्लास: कड़ी धूप में आंखों की सुरक्षा करने के साथसाथ स्टाइलिश भी नजर आना चाहती हैं तो सनग्लास से बढ़िया औप्शन और कोई नहीं. लेकिन राउंड, स्क्वैयर या बौक्स शेप के बजाय मैटल फ्रेम वाला ऐवीऐटर सनग्लास सलैक्ट करें. इसे पहनने के बाद आप को हैवी आई मेकअप करने की जरूरत भी नहीं होगी.
क्लासिक वाच: इस समर बोल्ड और बिंदास अंदाज के लिए अपने हाथों की खूबसूरती बढ़ाइए क्लासिक वाच से. ये किसी भी आउटफिट के साथ आसानी से मैच हो जाती है और लैदर बेल्ट होने की वजह से कभी आउट औफ फैशन नहीं होती.
सुपरसाइज्ड बैग: कंपलीट लुक के लिए समर सुपरसाइज्ड बैग को अपनी पहली पसंद बनाइए. इस में न सिर्फ आप की जरूरत की चीजें आसानी से ऐडजस्ट हो जाएंगी, बल्कि यह आप को सुपर स्टाइलिश लुक भी देगा. सैंटर औफ अटै्रक्शन बनने के लिए नियौन शेड्स के हैंड बैग खरीदें. ट्रांसपेरैंट बैग भी ट्राई कर सकती हैं. यह आप को बोल्ड लुक देगा.
पौप कलर्स नैकपीस: गोल्ड, डायमंड और रैग्युलर नैकपीस से अगर आप ऊब चुकी हैं, तो पौप कलर्स के हौट नैकपीस को अपना स्टाइल स्टेटमैंट बनाइए. अपने ज्वैलरी बौक्स में लाइम ग्रीन, पिंक, औरेंज जैसे पौप शेड्स, स्टोन, पर्ल और क्रिस्टल से बने नैकपीस को जगह दें.
सिंगल शेड या प्लेन आउटफिट के साथ पौप कलर का नैकपीस आप को सुपर स्टाइलिश लुक देगा.
स्टेटमैंट ईयररिंग: समर सीजन में कूल लुक के लिए अपने ज्वैलरी बौक्स की रैग्युलर ईयररिंग्स को लौंग स्टेटमेंट ईयररिंग्स से रिप्लैस करें. शौर्ट्स के साथ लौंग ईयररिंग का कौबिंनेशन आप को सुंदर हौट लुक देगा. किसी भी शेप और साइज की स्टेटमैंट ईयररिंग का सलैक्शन आप कर सकती हैं.
ऐंकल ब्रैसलेट फुटवियर: चूंकि सर्दी का मौसम खत्म हो चुका है इसलिए फुल पैक फुटवियर की जगह अपने शू रैक में ऐंकल ब्रैसलेट फुटवियर रखिए. यह फुटवियर चारों तरफ से खुला होता है. इसे पहनने के बाद पसीना भी नहीं होता है. यह दिखने में भी काफी स्टाइलिश नजर आता है. शौर्ट्स के साथ इस का लुक हौट लगता है.
ग्लिटर मोबाइल कवर: फुटवियर और हैंड बैंग की तरह मोबाइल की गिनती भी अब ऐक्सैसरीज में की जाने लगी है. लेकिन फुटवियर और बैग की तरह रोजाना मोबाइल बदलना आसान नहीं है, तो क्यों न मोबाइल कवर को ही चेंज कर मोबाइल को न्यू लुक दिया जाए. अत: समर में कूल लुक के लिए ग्लिटर मोबाइल कवर खरीदें.
थंब रिंग्स: फैशनेबल नजर आने के लिए इंडैक्स फिंगर में कौकटेल या डबल फिंगर रिंग पहनने के बजाय अंगूठे में थंब रिंग ट्राई करें. कूल लुक के लिए ऐनिमल प्रिंटेड या फिर चंकी थंब रिंग खरीदें, इन दिनों ये ट्रेड में हैं. आप चाहें तो दोनों हाथों के अंगूठों में या फिर सिर्फ एक हाथ के अंगूठे और बाकी उंगलियों में भी अलगअलग शेप और स्टाइल की रिंग पहन सकती हैं.
हौट हैट्स: अगर आप हौलिडे मूड में हैं और बीच पर छुट्टियां मनाने जा रही हैं तो अपने लुक को कंप्लीट करने के लिए आउटफिट से मैच करता हौट हैट लगाना न भूलें. धूप से बचाने के साथसाथ यह आप को फैशनेबल लुक भी देगा. ओवरसाइज्ड हैट ज्यादा अट्रैक्टिव नजर आता है. इसे आप अपनी पहली पसंद बना सकती हैं.
VIDEO : एमरेल्ड ग्रीन नेल आर्ट
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