Download App

यहां मिल रही है 2 लाख में स्कोर्पियो और 40 हजार में वैगनार

आप कार खरीदना चाहते हैं, लेकिन बजट किसी बाइक की कीमत के बराबर भी नहीं है, तब भी इसे खरीद सकते हैं. दरअसल, इंडिया में कई जगहों पर सेकंड हैंड कार के मार्केट हैं. जहां पर लाखों की कार हजारों में मिल जाती है. ऐसा ही एक मार्केट दिल्ली के करोल बाग पर है.

यहां से सेकंड हैंड मारुति वैगनआर को सिर्फ 40 हजार में खरीद सकते हैं. बता दें, कि वैगनआर के टॉप मॉडल की ओनरोड प्राइस 5 लाख 6 हजार रुपए है. दिल्ली में सेकंड हैंड बाइक का सबसे बड़ा मार्केट करोल बाग पर हैं. जो जल बोर्ड के पास है.

यहां पर मारुति से लेकर महिंद्रा, फोर्ड, हुंडई, वोक्सवैगन समेत कई ब्रांड की कार मौजूद हैं. देखने में इन कार की कंडीशन बेहतर होती है. यानी इन पर किसी तरह का डेंट नहीं होता और ये चमचमाती नजर आती हैं. कार का मॉडल जितना पुराना होगा, उतनी ज्यादा उसकी प्राइस कम होगी. यानी 2005 मॉडल वाली वैगनआर को 40 हजार में खरीदा जा सकता है.

सेकंड हैंड कार के इस मार्केट में एक डीलर ने बताया कि यहां पर सेकंड हैंड कार 40 हजार से मिलना शुरू हो जाती हैं. वहीं, इस अमाउंट को फाइनेंस भी कराया जा सकता है. कार के साथ उसका रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट भी दिया जाता है. यानी इन कार में किसी तरह के फ्रॉड होने की संभावना नहीं होती. वैसे, कार की प्राइस पर आप बारगेनिंग भी कर सकते हैं. इसके अलावा आप DROOM CARS, CAR DEKHO से भी कार खरीद सकते हैं यहां आपको लग्जरी कार 2-3 लाख में मिल जाएगी. जैसे कि महिंद्रा स्कोर्पियो कार यहां सिर्फ 2 लाख में मिल जाएगी.

यदि आप इस मार्केट में कार खरीदने जाने वाले हैं तब इस बात का ध्यान रखें की आपको कार के सभी पार्ट्स की नॉलेज हो. खासकर, कार के इंजन में खराबी हो सकती है. साथ ही, कोई पार्ट नकली भी हो सकता है. ऐसे में जरूरी है कि आप किसी कार एक्सपर्ट या मैकेनिक को साथ लेकर जाएं.

अगर धोनी न लेते यह फैसला, तो कल पाकिस्तान बना देता 350 रन

भारत और पाकिस्तान के बीच एशिया कप के दूसरे मैच में पाकिस्तान ने पाकिस्तान ने टॉस जीता और बल्लेबाजी का फैसला किया. शुरू में पाकिस्तानी बल्लेबाज संभल कर चले. पहले 7 ओवर तक पाकिस्तान के अगर रन नहीं बने तो विकेट भी नहीं गिरे थे. यहां पर पार्टनरशिप ब्रेक करने के लिए यूज़वेंद्र चहल को लाया गया.

चहल की एक बॉल इमाम उल हक के पैड पर लगी और एलबीडब्ल्यू अपील हुई. कप्तान रोहित शर्मा रिव्यू लेने में ज्यादा इंटरेस्टेड नहीं थे, लेकिन तभी धोनी ने कहा कि इस पर रिव्यू कर लेना चाहिए. रिव्यू लेने की बात अगर धोनी कहें तो कप्तान टाल नहीं सकते और हुआ भी यही. इमाम उल हक बिल्कुल विकेट के बीचों बीच पाए गए और थर्ड अंपायर ने उन्हें आउट दिया.

पारी के 8वें ओवर में 24 रन पर पाकिस्तान का पहला विकेट गिरा. इसके बाद विकेट और भी गिरे और 15 ओवर होते होते तीन विकेट पर पाकिस्तान का स्कोर 58 रन था. यहां से शोएब मलिक और सरफराज़ के बीच साझेदारी हुई.

इमाम उल हक इन फॉर्म बैट्समैन हैं. उन्होंने पिछले मैच में भी बढ़िया बल्लेबाजी की और अगर वह रिवयू के मार्फत आउट नहीं होते तो बड़ी पारी खेलते. अगर इमाम 10 रन बनाकर यूं आउट न होते तो संभवत पाकिस्तान इस मैच में 350 रन भी बना सकता था. लेकिन महेंद्र सिंह धोनी बहुत चतुर और चालाक हैं. उन्होंने भांप लिया कि यहां रिव्यू बनता है और बल्लेबाज आउट है.

बाद में जब अंपायर ने आउट दिया तो साथी खिलाड़ियों ने धोनी की इस दूरदर्शिता की खूब तारीफ की. सभी साथी खिलाड़ी पहुंचे और धोनी को विकेट की बधाई देने को देने लगे.

एटीएम फ्रौड के समय याद रखें आरबीआई के ये नियम

अगर आप एटीएम कार्ड से पैसा निकालते हैं या ऑनलाइन बैंकिंग करते हैं तो आपको फ्रॉड या अनाधिकृत ट्रांजैक्‍शन को लेकर 3 से 7 दिन का नियम जरूर याद रखना चाहिए. भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंक अकाउंट होल्‍डर्स या कस्‍टमर के हितों की रक्षा के लिए इस बारे में 6 जुलाई, 2017 को सर्कुलर जारी किया था.

सर्कुलर में कहा गया है कि अकाउंट से अनाधिकृत ट्रांजैक्‍शन या फ्रॉड होने पर कस्‍टमर को क्‍या करना चाहिए जिससे उसका नुकसान न हो और बैंक उसके पैसे की भरपाई कर दे.

बैंक को 3 दिन में दें फ्रॉड की जानकारी

रिजर्व बैंक के सर्कुलर के मुताबिक अगर आपके बैंक अकाउंट से अनाधिकृत ट्रांजैक्‍शन या फ्रॉड हुआ है तो आपको बैंक से किसी भी माध्‍यम से इसकी सूचना मिलने के तीन दिन के अंदर बैंक को इसके बारे में जानकारी देनी होगी. अगर आप ऐसा करते हैं तो इस मामले में आपकी जीरो लायबिलिटी होगी. अगर अनाधिकृत ट्रांजैक्‍शन या फ्रॉड आपकी गलती या लापरवाही से नहीं हुआ है तो बैंक आपके नुकसान की पूरी भरपाई करेगा.

अगर आपके अकाउंट में अनाधिकृत ट्रांजैक्‍शन या फ्रॉड हुआ है और आपने बैंक को 4 से 7 दिन के बीच जानकारी दी तो इस मामले में आपकी लिमि‍टेड लायबिलिटी होगी. यानी आपको अनाधिकृत ट्रांजैक्‍शन की वैल्‍यू का एक हिस्‍सा वहन करना होगा.

अगर बैंक अकाउंट बेसिक सेविंग बैंकिंग डिपॉजिट अकाउंट यानी जीरो बैलेंस अकाउंट है तो आपकी लायबिलिटी 5,000 रुपए होगी. यानी अगर आपके बैंक अकाउंट से 10,000 रुपए का अनाधिकृत ट्रांजैक्‍शन हुआ है तो आपको बैंक से 5,000 रुपए ही वापस मिलेंगे. बाकी 5,000 रुपए का नुकसान आपको वहन करना होगा.

अगर आपका सेविंग अकाउंट है और आपके अकाउंट से अनाधिकृत ट्रांजैक्‍शन हुआ है तो आपकी लायबिलिटी 10,000 रुपए होगी. यानी अगर आपके अकाउंट से 20,000 रुपए का अनाधिकृत ट्रांजैक्‍शन हुआ है तो बैंक से आपको 10,000 रुपए ही वापस मिलेंगे. बाकी 10,000 रुपए का नुकसान आपको उठाना होगा.

दिनेश सोई : बौलीवुड के व्यस्तम कास्टिंग डायरेक्टर

बौलीवुड में बतौर अभिनेता करियर शुरू करने वाले दिनेश सुदर्शन सोई अब बौलीवुड के सर्वाधिक व्यस्त कास्टिंग डायरेक्टर बन चुके हैं. कास्टिंग डायरेक्टर के तौर पर वह अब तक 4500 से अधिक टीवी सीरियल, फिल्म और विज्ञापन फिल्मों के लिए कास्टिंग कर एक रिकार्ड बना चुके हैं, जो कि ‘इंडिया बुक आफ रिकार्ड्स’में अंकित है.

‘इंडिया बुक आफ रिकार्ड्स’ की चर्चा चलने पर दिनेश सुदर्शन सोई कहते हैं- ‘‘सच तो यह है कि मैंने कभी गणना नहीं की. मैं अपना काम करता रहा. मुझे तो खुद यह तब पता चला, जब मुझे इस काम के लिए सम्मानित किया गया. ‘इंडिया बुक आफ रिकार्ड्स’ में अपना नाम देखकर मैं स्वयं चौंका.’’

 bollywood director dinesh soi get rewarded by india book of records

वह आगे कहते हैं- ‘‘मैं कास्टिंग का काम कर रहा था. पर पीछे मुड़कर नहीं देख रहा था कि मैंने कितना काम किया है. पर ‘इंडिया बुक आफ रिकार्ड्स’ में नाम आने के बाद जब मैंने पीछे मुड़कर देखा, तो पता चला कि मैंने अब तक एक हजार फिल्मों के लिए कास्टिंग की है. मैंने हौलीवुड और अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टीवल की फिल्मों के अलावा ‘लघु फिल्मों’, पंजाबी,  गुजराती और हिंदी के साथ साथ कुछ दक्षिण भारतीय फिल्मों के लिए भी कास्टिंग की है. इतना ही नहीं तमाम विज्ञापन फिल्मों के साथ ही दो हजार से अधिक म्यूजिक वीडियो के लिए भी कास्टिंग की है. पर यह महज शुरूआत है. इस तरह के पुरस्कार व प्रशंसा मुझे और बेहतर काम करने के लिए प्रेरित करते हैं. फिलहाल मैं अपने कुछ नए प्रोजेक्ट व फिल्मों को लेकर उत्साहित हूं, जो कि बहुत जल्द सामने आएंगी. सच तो यह है कि मैं स्क्रीन पर अपना काम देखना चाहता हूं.’’

दिनेश सुदर्शन सोई ने इन दिनों मल्टी स्टारर फिल्म ‘‘फैमिली औफ़ ठाकुरगंज’’  के लिए कास्टिंग की है. इसमें 116 कलाकार हैं. इनमें से 14 मुख्य कलाकारों को छोड़कर शेष 102 कलाकारों का चयन किया है. यह सभी कलाकार उत्तर प्रदेश से हैं.

लेखक व निर्देशक कल्पना लाजमी का निधन

‘एक पल’,‘रूदाली’, ‘दमन’, ‘दरमियां’ व ‘चिंगारी’जैसी बहुचर्चित नारी प्रधान फिल्मों की फिल्मकार व पटकथा लेखक कल्पना लाजमी का 64 वर्ष की उम्र में रविवार, सुबह साढ़े चार बजे मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में निधन हो गया. वह लंबे समय से किडनी के कैंसर के अलावा लीवर की बीमारी से पीड़ित थीं.
अपने समय के मशहूर अभिनेता व फिल्मकार स्व.गुरूदत्त की भांजी और चित्रकार स्व.ललिता आजमी की बेटी कल्पना लाजमी ने फिल्मकार श्याम बेनेगल के साथ बतौर सहायक काम करते हुए करियर शुरू किया था. वह श्याम बेनेगल के साथ पूरे तीस वर्ष तक जुड़ी रहीं. ज्ञातव्य है कि श्याम बेनेगल उनके दूर के रिश्तेदार हैं.

स्वतंत्र निर्देशक के तौर पर उन्होने सबसे पहले 1978 में डाक्यूमेंटरी फिल्म ‘‘डी जी मूवी पॉयनियर’’ बनायी थी. स्वतंत्र निर्देशक के तौर पर 1986  में उन्होने पहली फीचर फिल्म ‘एक पल’’ बनायी थी, जिसमें नसिरूद्दीन शाह और शबाना आजमी की मुख्य भूमिका थी. इस फिल्म का निर्माण व निर्देशन करने के साथ ही गुलजार के साथ मिलकर पटकथा भी लिखी थी. कथानक के स्तर पर यह अति बोल्ड फिल्म थी.
फिर 1988 में कल्पना लाजमी ने पहला टीवी सीरियल ‘‘लोहित किनारे’’ का निर्देशन किया, जिसमें तन्वी आजमी की मुख्य भूमिका थी.

उसके बाद उन्होने 1993 में डिंपल कापड़िया को हीरोइन लेकर महाश्वेता देवी की कहानी पर फिल्म ‘‘रूदाली’’ बनायी, जिसके लिए डिंपल कपाड़िया को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया था. इस फिल्म को ‘‘ऑस्कर’’ अवार्ड के लिए भारतीय प्रविष्टि के रूप में भेजा गया था, पर इसका नोमीनेशन स्वीकृत नहीं हुआ था.

1997 में कल्पना लाजमी ने बतौर निर्देशक किरण खेर व तब्बू को लेकर फिल्म‘‘दरमियां : इन बिटवीन’’ बनायी. फिर 2001 में रवीना टंडन को लेकर फिल्म ‘‘दमनःए विक्टिम आफ मैरेटियल वायलेंस’’ का निर्माण किया. इस फिल्म के लिए रवीना टंडन को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. 2006 में उन्होने मिथुन चक्रवर्ती और सुष्मिता सेन को लेकर फिल्म ‘‘चिंगारी’ बनायी थी. जो कि उनके करियर की अंतिम फिल्म रही. इस फिल्म को बाक्स आफिस पर सफलता नही मिली, जिससे निराश होकर कल्पना लाजमी ने फिल्में बनाना बंद कर दिया था. इतना ही नही इसके बाद मिथुन चकवर्ती और सुष्मिता सेन का करियर भी ठप्प हो गया.

वास्तव में 2007 में कल्पना लाजमी ने एक फिल्म ‘‘मुझे रंग दे’’ बनाने का असफल प्रयास किया था. इस फिल्म में ईषा कोप्पीकर, राहुल देव व रितुपर्णा सेन गुप्ता अभिनय करने वाले थे. मगर ईषा कोप्पीकर के अनप्रोफेशनल रवैए के चलते यह फिल्म कभी नहीं बन पायी. खुद कल्पना लाजमी ने हमें जो कुछ बताया था, उसके अनुसार अचानक ईषा कोप्पीकर ने उनकी इस फिल्म को छोड़ दिया. उसके बाद उन्होने उर्मिला मांतोडकर से बात की थी. पहले उर्मिला यह फिल्म करने को तैयार हुयीं, पर कुछ दिन बाद उन्होंने भी मना कर दिया था.

कल्पना लाजमी और मूलतः आसामी भाषी संगीतकार, गीतकार, गा यक व लेखक भूपेन हजारिका का 40 वर्ष तक साथ रहा है. उनका यह साथ लगभग सात वर्ष पहले भूपेन हजारिका के निधन के साथ ही टूटा था. कल्पना लाजमी ने मरने से पहले भूपेन हजारिका के साथ अपने 40 वर्ष के संबंधो को लेकर एक किताब ‘‘भूपेन हजारिका-एज आई न्यू हिम’’ लिखी,जिसका लोकार्पण श्याम बेनेगल के हाथों कल्पना लाजमी के निधन से महज पंद्रह दिन पहले 8 सितंबर को हुआ था. इस किताब के लोकार्पण के समय खुद कल्पना लाजमी मौजूद नहीं थी, क्योंकि वह उस वक्त भी अस्पताल में ही थीं.

आज कल्पना लाजमी इस संसार में नहीं है. मगर उन्हें इस बात का गम हमेशा रहा कि जब उन्हें दो मीठे बोल की, सहारे की जरुरत थी, जब वह अकेले अस्पताल में मौत से लड़ रहीं थीं, तब भूपेन हजारिका के परिवार के किसी भी सदस्य ने उनकी सुध नहीं ली, जिस परिवार के साथ उनका चालिस वर्ष तक संबंध रहा.

 

फेसबुक की ‘डेटिंग ऐप’ लौन्च, जानें इससे जुड़ी खास बातें

फेसबुक की मदद से अब आप न सिर्फ अपने दोस्तों को ढूंढ पाएंगे, बल्कि अपने लाइफ पार्टनर को भी ढूंढ सकेंगे. फेसबुक ने इसी साल अपनी ‘डेटिंग ऐप’ शुरू करने की घोषणा की थी और फिलहाल इसे कोलंबिया में ट्रायल के तौर पर शुरू कर दिया गया है. इस फीचर को फिलहाल फेसबुक में ही जोड़ा गया है. इसकी मदद से फेसबुक टिंडर जैसी डेटिंग ऐप को टक्कर देने की कोशिश करेगा.

18 साल से ज्यादा उम्र के ही कर सकते हैं इस्तेमाल : फेसबुक की इस डेटिंग ऐप का इस्तेमाल सिर्फ वही लोग कर सकेंगे, जिनकी उम्र 18 साल से ज्यादा होगी. इसके साथ ही ये सर्विस सिर्फ मोबाइल ऐप पर ही मिलेगी और डेस्कटौप यूजर्स इसका इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे. फेसबुक की ये सर्विस फिलहाल पूरी तरह फ्री है.

फेसबुक डेटिंग ऐप से जुड़ी खास बातें

अलग होगी डेटिंग प्रोफाइल

इस ऐप का इस्तेमाल करने पर यूजर्स को अलग से डेटिंग प्रोफाइल क्रिएट करना होगी, जिसमें अपने बारे में जानकारी देनी होगी. अलग प्रोफाइल होने से फेसबुक फ्रेंड लिस्ट एड दोस्तों और रिश्तेदारों को नहीं पता चलेगा कि आप डेटिंग ऐप यूज कर रहे हैं.

प्राइवेसी का भी रखा जाएगा ध्यान

इस ऐप में यूजर्स की प्राइवेसी का भी ध्यान रखा जाएगा. इसमें यूजर्स के पास विकल्प होगा कि वे क्या शेयर करना चाहते हैं? जैसे- हाईट, रिलीजन, जॉब टाइटल आदि.

100 किलोमीटर की दूरी होगी सेट

डेटिंग सर्विस का इस्तेमाल करने के लिए यूजर्स को अपनी लोकेशन डिटेल्स देनी होगी और लोकेशन वेरिफाइ करनी होगी. उसके बाद 100 किलोमीटर तक की दूरी सेट कर सकते हैं.

नहीं कर सकेगा कोई फ्रौड

टेक क्रंच की रिपोर्ट के मुताबिक, इस डेटिंग ऐप में यूजर्स को लोगों की असली उम्र और लोकेशन का पता चल सकेगा, ताकि कोई किसी के साथ फ्रौड न कर सके.

अपनी पसंद का चुन सकेंगे पार्टनर

इस ऐप में यूजर्स को अपना इंटरेस्ट देने का विकल्प मिलेगा और उसी के आधार पर फिर फेसबुक सजेशन देगा.

सीधे सिलेक्ट करने का मिलेगा विकल्प

फेसबुक में जिस तरह से फ्रेंड सजेशन की लिस्ट आती है, ठीक उसी तरह से डेटिंग ऐप में मैच के सजेशन मिलेंगे. टिंडर जैसी ऐप में यूजर्स को मैच स्वाइप करने रहते हैं, लेकिन इसमें यूजर्स के पास विकल्प होगा कि वे किसे सिलेक्ट करना चाहते हैं?

इंटरेस्टेड पर क्लिक करना होगा

पार्टनर ढूंढने के लिए किसी की डेटिंग प्रोफाइल में जाकर ‘इंटरेस्टेड’ पर क्लिक करना होगा, साथ ही कोई मैसेज भी भेज सकेंगे. अगर इसके बाद वो भी आपके मैसेज का रिप्लाय करता है और ‘इंटरेस्टेड’ पर क्लिक करता है, तो फिर दोनों के बीच चैटिंग शुरू हो जाएगी.

मिलेगा अलग से इनबौक्स

डेटिंग ऐप फेसबुक से ही जुड़ी रहेगी, लेकिन इसमें अलग से ‘इनबौक्स’ मिलेगा. जिसकी मदद से फेसबुक के पर्सनल मैसेज और डेटिंग मैसेज को अलग-अलग किया जा सकेगा.

खुद डिसाइड कर सकेंगे- कौन देखेगा प्रोफाइल

इस ऐप में यूजर्स को अपनी डेटिंग प्रोफाइल किसे दिखानी है? इस बात को तय करने का भी विकल्प मिलेगा. अगर कोई यूजर चाहता है कि उसकी प्रोफाइल उसके फेसबुक फ्रेंड को न दिखे, तो इसका विकल्प भी इस ऐप में मिलता है.

ब्लौक करने का भी मिलेगा विकल्प

इसके अलावा अगर डेटिंग ऐप में किसी को ब्लौक करना चाहते हैं, तो उसका विकल्प भी इसमें मिलेगा. इसके साथ ही किसी दोस्त को ‘एड’ और ‘हाइड’ भी कर सकते हैं.

बैंक मैनेजर ने पहले ट्रेनिंग दी, फिर एटीएम लुटवाया

फिल्म आंखें की तर्ज पर बैंक मैनेजर ने ही एक युवक को चार दिन की ट्रेनिंग देकर बैंक के एटीएम से करीब साढ़े 18 लाख रुपए पार करवा दिए. इस काम के लिए युवक को 50 हजार रुपये दिए गए. आठ माह पूर्व शामली के इंडियन ओवरसीज बैंक शाखा के एटीएम में हुई इस वारदात का पुलिस ने शुक्रवार को खुलासा कर दिया. पुलिस ने आरोपी युवक को गिरफ्तार कर घटना के मास्टर माइंड बैंक प्रबंधक की तलाश शुरू कर दी है.

एसपी दिनेश कुमार ने प्रेसवार्ता में बताया, चार मार्च 2018 को धीमानपुरा रोड पर स्थित इंडियन ओवरसीज बैंक के पास के एटीएम से 18 लाख 37 हजार 300 रुपये चोरी किए गए थे. चोरी का खुलासा बैंक खुलने पर उस समय हुआ, जब एटीएम से पैसे निकालने आए लोगों ने एटीएम में पैसे नहीं होने की शिकायत की थी. इसके बाद शामली शाखा प्रबंधक नितेश कुमार ने पुलिस को तहरीर दे केस दर्ज कराया.

करीब आठ माह पूर्व 12 फरवरी को एटीएम में लगी दो कैश केसिट खराब हो गई. इस संबंध में बैंक द्वारा मेरठ स्थित एनसीआर कंपनी को शिकायत दी गई थी. 3 मार्च2018 को बैंक कर्मचारी राजीव कुमार व धर्मेन्द्र गिरी द्वारा एटीएम में 28 लाख रुपये डाले गए थे. एटीएम की सुरक्षा बैंक का जनरेटर ऑपरेटर यशपाल करता है. चार मार्च को छुट्टी के दिन एक हेलमेंट पहना युवक खुद को बैंककर्मी बताते हुए एटीएम में घुसा और गेट बंद कर 18 लाख 37 हजार 300 रुपये की रकम निकाल ली.

जांच-पड़ताल में चेतन का नाम सामने आया. पूछताछ में लगा कि इस पूरी घटना का मास्टर माइंड बंतीखेड़ा बैंक शाखा का मैनेजर रोबिन बंसल है. आरोपी ने बताया वह एक लाख का लोन कराने के लिए मैनेजर से मिला तो उन्होंने बिना लोन के ही पचास लाख देने की बात कही. बदले में उसने शामली एटीएम बैंक से रुपये निकाल कर लाने के लिए कहा था.

बंसल ने जांच से बचने को कई तरीके अपनाए

शामली निवासी बैंक मैनेजर रोबिन बंसल ने जांच से बचने के लिए तरह तरह के यत्न किए. एसपी ने बताया कि अभी कुछ दिन पहले ही वह पत्नी से झगड़ा कर 151 में जेल गया था. हालांकि उसे जमानत मिल जाती लेकिन उसने जमानत नहीं ली. उस समय वह जांच एजेंसी के समक्ष नहीं आना चाहता था.

चार दिन तक ट्रेनिंग दी

इसके बाद बैंक मैनेजर ने चेतन को चार दिन तक बंतीखेडा बैंक शाखा की एटीएम में ट्रेनिंग दी. इसमें पासवर्ड के द्वारा एटीएम के कैश बाक्स को खोलने से लेकर उसे बंद करने आदि सबकुछ सिखाया गया. खुद मैनेजर ने उसे एटीएम खोलकर दिखाया और उसे बंद करके भी दिखाया.

बैंक मैनेजर की तलाश

बैंक मैनेजर रोबिन बंतीखेड़ा से पहले शामली बैंक शाखा में ही मैनेजर के पद पर तैनात था. इस दौरान उसे एटीएम का पासवर्ड आदि पता था. पुलिस ने रुपये निकालने के आरोपी चेतन पुत्र सहेन्द्र निवासी बंतीखेड़ा को विजय चौक से गिरफ्तार कर लिया, बैंक मैनेजर की तलाश जारी है.

लिफ्ट लेकर पहुंचा था चेतन

पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी चेतन समेत दो युवकों को पकड़ा था. दूसरा वह युवक बताया जा रहा है, जिससे आरोपी चेतन ने लिफ्ट मांगी थी. वह उसे बाइक पर बैठाकर शामली लाया था.

18 लाख रुपये लेकर शहर में 6 घंटे घूमता रहा युवक

घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी युवक रकम लेकर इधर-उधर घूमता रहा. इस दौरान मैनेजर ने भी उससे संपर्क नहीं किया. बाद में उसने बंतीखेडा में ही एक ट्यूबवैल पर मैनेजर को रुपये से भरा थैला पकड़ा दिया. उसने पचास हजार रुपये मांगे तो उसे अगले दिन पचास हजार रुपये दिए गए.

भारत को हराने के लिए शोएब ने दी पाकिस्तानी टीम को सलाह

एशिया कप में भारत और पाकिस्तान के बीच मुकाबले से पहले सभी दिग्गज पाकिस्तान को भारत से ज्यादा ताकतवर मान रहे थे. हालांकि मैच के बाद कुछ और ही देखने को मिला. भारतीय टीम ने बड़ी आसानी से पाकिस्तान को 8 विकेट से रौंद दिया. पाकिस्तान के खराब प्रदर्शन के बाद अब सरफराज अहमद की टीम को कई सलाहें मिल रही हैं.

पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर ने भी भारत के खिलाफ अगले मुकाबले से पहले अपनी टीम को सलाह दी है. शोएब अख्तर ने एक न्यूज चैनल को बयान देते हुए कहा, ‘टीम भारत के खिलाफ अगले मैच में पाकिस्तानी टीम वापसी कर सकती है. पिछले मैच में पाकिस्तान के खिलाड़ी जल्दबाजी में दिखे. मुझे नहीं लगता कि टीम को जल्दबाजी करने की जरूरत थी. खिलाड़ियों को हार से हतोत्साहित नहीं होना चाहिए. हमें अपने बल्लेबाजों को क्रीज पर टिक 50 ओवर खेलने की सलाह देनी चाहिए.’

शोएब अख्तर ने पाकिस्तान के कप्तान सरफराज अहमद को भी समझदारी से कप्तानी करने की सलाह दी. शोएब अख्तर के मुताबिक पाकिस्तानी गेंदबाजी ज्यादा असरदार नहीं दिखी. शोएब ने अच्छी गेंदबाजी के लिए सरफराज को अच्छी कप्तानी करने की बात कही.

आपको बता दें एशिया कप के लीग दौर के बाद अब सुपर फोर राउंड शुरू होगा, जिसमें रविवार, 23 सितंबर को भारत और पाकिस्तान की टीमें एक बार फिर आमने-सामने होंगी. ये मुकाबला भी दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में खेला जाएगा.

द्रोणाचार्य अवौर्ड नहीं मिलने पर जीवनजोत सिंह तेजा का इस्तीफा

खेल मंत्रालय की तरफ से द्रोणाचार्य अवॉर्ड के लिए जारी कोचों की सूची में नाम न होने के कारण भारतीय तीरंदाजी कोच जीवनजोत सिंह तेजा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने कहा कि जब सरकार व खेल मंत्रालय की ओर से अच्छे कोच को अवॉर्ड न देकर दूसरे कोच को अवॉर्ड दिया जा रहा है, तो काबिल कोच क्यों अपमान सहन करें. इसी वजह से वह भारतीय आर्चरी कंपाउंड टीम के कोच पद छोड़ रहे हैं. उन्होंने कहा कि कमेटी के ओर से गठित टीम कोचों के अंक के आधार पर अवॉर्ड को तय करती है और इस बार मेरे अंक 80 से अधिक हैं, बावजूद मेरे से कम अंक वाले कोच को द्रोणाचार्य अवॉर्ड दिया जा रहा है. इसका विरोध करते हुए कोच तेजा ने पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका भी दायर कर दी है, जिसकी सुनवाई सोमवार को होगी. उन्होंने इसकी लिखित शिकायत प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को भी भेज दी है.

तीरंदाजी कोच जीवनजोत सिंह तेजा ने कहा कि वह वह अपने खिलाड़ियों को अलग से कोचिंग देते रहेंगे, लेकिन टीम के साथ अब कभी नहीं करेंगे. इसके साथ ही उनके पिता ने कहा कि बेटे टीम को बेहतरीन ट्रेनिंग देने के लिए घर परिवार तक का त्याग कर दिया है, लेकिन सराहना की बारी आती है तो सरकार व मंत्रालय दूसरों को चुन लेता है. जीवनजोत ने बताया कि भारत की महिला टीम कभी नंबर-1 रैंकिंग पर नहीं आई थी, लेकिन जब से मैंने कोचिंग का पदभार संभाला है, टीम ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए कई खिताब जीते.

अभी महिला टीम ओवरऑल विश्व रैंकिंग में नंबर-1 है. एशियन गेम्स 2018 में भारतीय तीरंदाजी टीम ने कई पदक जीते और मुझे देश का सीनियर कोच नियुक्त किया गया. मेरे खिलाड़ी अभी तक 20 से अधिक नेशनल रिकार्ड तोड चुके हैं और 200 से ज्यादा पदक जीत चुके हैं.

अब अदालत नहीं जाएंगे बजरंग

मेंटर योगेश्वर दत्त की सलाह के बाद स्टार पहलवान बजरंग पूनिया के राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार के लिए उनकी अनदेखी किए जाने के खेल मंत्रालय के फैसले के खिलाफ जाने की अब उम्मीद नहीं है. योगेश्वर ने बजरंग को सलाह दी है कि इस मामले में पड़ने के बजाय वह विश्व चैंपियनशिप पर ध्यान लगाएं.

देश के सबसे बड़े खेल सम्मान के लिए अपनी अनदेखी के बाद बजरंग ने गुरुवार को खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर से मुलाकात की थी, जिन्होंने उन्हें आश्वासन दिया था कि वह उनके मामले पर विचार करेंगे. 24 साल के पहलवान बजरंग ने कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीते थे. उन्होंने कहा था कि अगर उन्हें शुक्रवार शाम तक अनुकूल जवाब नहीं मिलता है तो उन्हें न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए बाध्य होना पड़ेगा. लेकिन, खेल मंत्रालय के उनके दबाव के आगे झुकने की संभावना नहीं है. ऐसे में योगेश्वर ने बजरंग को आगे बढ़ने की सलाह दी और विश्व चैंपियनशिप की तैयारियों पर अपना ध्यान लगाने को कहा.

योगेश्वर ने कहा कि यह बजरंग के साथ अन्याय है. वह इस साल खेल रत्न का हकदार है. हम गुरुवार को खेल मंत्री से मिले थे और उन्होंने कहा था कि वह चयन समिति से बात करेंगे. लेकिन, मैंने बजरंग को सलाह दी कि कोर्ट में जाना उनके विश्व चैंपियनशिप की तैयारियों के लिए नुकसान पहुंचा सकता है. ओलंपिक पदक विजेता योगेश्वर खेल मंत्री के साथ गुरुवार को हुई बजरंग की मुलाकात के दौरान मौजूद थे.

गोल्ड कोस्ट और जकार्ता में स्वर्ण पदकों के अलावा बजरंग ने 2014 कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स में भी रजत पदक जीते थे. उन्होंने 2013 विश्व चैंपियनशिप में भी कांस्य पदक जीता था, लेकिन इस प्रदर्शन को अंक प्रणाली में शामिल नहीं किया गया, क्योंकि अंक प्रणाली 2014 में ही शुरू हुई थी. खेल मंत्रालय के एक सूत्र ने कहा कि अंतिम समय में इस सूची में नाम शामिल करने की संभावना नहीं है. सूत्र ने कहा, ‘मंत्री ने बजरंग से मुलाकात की और वह उनकी शिकायत सुनना चाहते थे. उन्होंने बजरंग को बताया कि उनके नाम पर विचार क्यों नहीं किया गया. हालांकि, उन्होंने बजरंग से वादा किया कि है वह इस मामले को देखेंगे, लेकिन पुरस्कार सूची में किसी बदलाव की संभावना कम है.

अमेजन के संस्थापक समझ नहीं पा रहे इतने पैसों का क्या करें? मांगी राय

दुनिया के सबसे धनी व्यक्ति और औनलाइन मार्केटप्लेस अमेजन के संस्थापक जेफ बेजास पैसो को लेकर काफी परेशान हैं. दरअसल, वह समझ ही नहीं पा रहे हैं कि इतने पैसे का क्या करें?  उन्होंने कई बार अपनी समस्या सार्वजनिक भी की है. एक साल पहले उन्होंने ट्विटर पर अपने फौलोअर्स से पूछा था कि वह किस तरह के परोपकार पर पैसे खर्च करें? और अब पिछले सप्ताह जेफ बेजास और उनकी पत्नी मेकेंजी ने दान करने की शुरुआती योजना का ऐलान किया.

उन्होंने कहा कि वे बेघरों को बसाने और स्कूल से पहले की शिक्षा में सुधार लाने के लिए एक नया फाउंडेशन बेजास डे वन फंड बनाकर 2 अरब डालर (करीब 140 अरब रुपये) दान करेंगे. यह रकम बेजास की कुल संपत्ति का बहुत ही छोटा हिस्सा है. फोर्ब्स मैगजीन के मुताबिक उनकी संपत्ति अभी 162 अरब डालर है. हालांकि, नए फाउंडेशन का नाम बताता है कि अभी कई और ऐलान होने बाकी हैं. अप्रैल में बेजास ने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘मेरी नजर में इतने बड़े वित्तीय संसाधन के वितरण का एक ही तरीका है और वह यह है कि कि मैं अपने अमेजन की कमाई को अंतरिक्ष यात्रा में लगा दूं.’

बेजास अपनी अकूत संपत्ति को कैसे और कहां खर्च करें? यह सवाल तो वाकई बहुत बड़ा है, लेकिन ये सवाल भी कम महत्वपूर्ण नहीं हैं कि आखिर उनके पास इतना पैसा क्यों आया? उनकी इतनी बड़ी संपत्ति हमें आर्थिक ढांचे और उन्हें खरबपति बनानेवाली टेक इंडस्ट्री के प्रभाव के बारे में क्या कहती है? और, सबसे बड़ा सवाल कि इतनी बड़ी संपत्ति के लिहाज से उनके दायित्व क्या हैं और वह इन पैसों का क्या करेंगे, क्या इससे हमारा कोई लेनादेना है? इसका जवाब है- हां, इससे हमारा लेनादेना है.

बेजास की अकूत संपत्ति सिर्फ उनके कौशल की देन नहीं है. इसके पीछे वैश्विक अर्थव्यवस्था को आकार दे रही कुछ बड़ी ताकतें भी हैं. इनमें एक है- डिजिटल टेक्नालजी का असमान असर जिसने कई लोगों के लिए लागत घटाई और आसानी बढ़ा दी. लेकिन, ऐसा उन्हीं के साथ हुआ जिनका प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मुट्ठीभर सुपरस्टार कंपनियों और उनके सबसे बड़े शेयरधारकों तक सिमट कर रह गया. पैसे का पहाड़ खड़ा होने के पीछे लेबर और इकनौमिक पालिसी का भी असर है जिसका अमेरिका मे कड़ाई से पालन नहीं हुआ और जिसने टेक आधारित बिजनस से पैदा होनेवाली अकूत संपत्ति की समस्या को बढ़ावा ही दिया.

अमेजन का कहना है कि उसके वेयरहाउस में काम करनेवाले श्रमिकों को हर घंटे औसतन 15 डालर (करीब 1000 रुपये) मिलते हैं जिनमें वेतन और अन्य मुआवजे शामिल हैं. कंपनी ने यह भी बताया कि वह वर्करों को करियर से जुड़े कौशल के लिए ट्यूशन भी देती है. 15 डालर प्रति घंटा वेतन कुछ अन्य रिटेलरों की तुलना में ज्यादा है, लेकिन अमेरिका में एक परिवार को मूलभूत जरूरतें पूरी करने के लिहाज से कम है.

अब सवाल उठता है कि बेजास इस समस्या को परोपकारिता के जरिए कैसे सुलझांगे? विनर्स टेक औल (विजेता सबकुछ हथिया लेते हैं) नाम की अपनी पुस्तक में संपत्ति अर्जित करने के असीमित अवसर पर आपत्ति दर्ज करनेवाले लेखक आनंद गिरिधर दास ने कुछ लचीली आर्थिक नीतियों का सुझाव दिया है. इनमें यूनियनों की मजबूती, शिक्षा के लिए समान भुगतान, न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि और ज्यादा प्रगतिशील टैक्स सिस्टम पर जोर जैसे उपाय शामिल हैं. दुनिया के दूसरे और तीसरे सबसे धनवान शख्स क्रमशः बिल गेट्स और वारन बफेट मान चुके हैं कि उन्हें और ज्यादा टैक्स देना चाहिए.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें