‘एक पल’,‘रूदाली’, ‘दमन’, ‘दरमियां’ व ‘चिंगारी’जैसी बहुचर्चित नारी प्रधान फिल्मों की फिल्मकार व पटकथा लेखक कल्पना लाजमी का 64 वर्ष की उम्र में रविवार, सुबह साढ़े चार बजे मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में निधन हो गया. वह लंबे समय से किडनी के कैंसर के अलावा लीवर की बीमारी से पीड़ित थीं.
अपने समय के मशहूर अभिनेता व फिल्मकार स्व.गुरूदत्त की भांजी और चित्रकार स्व.ललिता आजमी की बेटी कल्पना लाजमी ने फिल्मकार श्याम बेनेगल के साथ बतौर सहायक काम करते हुए करियर शुरू किया था. वह श्याम बेनेगल के साथ पूरे तीस वर्ष तक जुड़ी रहीं. ज्ञातव्य है कि श्याम बेनेगल उनके दूर के रिश्तेदार हैं.

स्वतंत्र निर्देशक के तौर पर उन्होने सबसे पहले 1978 में डाक्यूमेंटरी फिल्म ‘‘डी जी मूवी पॉयनियर’’ बनायी थी. स्वतंत्र निर्देशक के तौर पर 1986  में उन्होने पहली फीचर फिल्म ‘एक पल’’ बनायी थी, जिसमें नसिरूद्दीन शाह और शबाना आजमी की मुख्य भूमिका थी. इस फिल्म का निर्माण व निर्देशन करने के साथ ही गुलजार के साथ मिलकर पटकथा भी लिखी थी. कथानक के स्तर पर यह अति बोल्ड फिल्म थी.
फिर 1988 में कल्पना लाजमी ने पहला टीवी सीरियल ‘‘लोहित किनारे’’ का निर्देशन किया, जिसमें तन्वी आजमी की मुख्य भूमिका थी.

उसके बाद उन्होने 1993 में डिंपल कापड़िया को हीरोइन लेकर महाश्वेता देवी की कहानी पर फिल्म ‘‘रूदाली’’ बनायी, जिसके लिए डिंपल कपाड़िया को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया था. इस फिल्म को ‘‘ऑस्कर’’ अवार्ड के लिए भारतीय प्रविष्टि के रूप में भेजा गया था, पर इसका नोमीनेशन स्वीकृत नहीं हुआ था.

1997 में कल्पना लाजमी ने बतौर निर्देशक किरण खेर व तब्बू को लेकर फिल्म‘‘दरमियां : इन बिटवीन’’ बनायी. फिर 2001 में रवीना टंडन को लेकर फिल्म ‘‘दमनःए विक्टिम आफ मैरेटियल वायलेंस’’ का निर्माण किया. इस फिल्म के लिए रवीना टंडन को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. 2006 में उन्होने मिथुन चक्रवर्ती और सुष्मिता सेन को लेकर फिल्म ‘‘चिंगारी’ बनायी थी. जो कि उनके करियर की अंतिम फिल्म रही. इस फिल्म को बाक्स आफिस पर सफलता नही मिली, जिससे निराश होकर कल्पना लाजमी ने फिल्में बनाना बंद कर दिया था. इतना ही नही इसके बाद मिथुन चकवर्ती और सुष्मिता सेन का करियर भी ठप्प हो गया.

वास्तव में 2007 में कल्पना लाजमी ने एक फिल्म ‘‘मुझे रंग दे’’ बनाने का असफल प्रयास किया था. इस फिल्म में ईषा कोप्पीकर, राहुल देव व रितुपर्णा सेन गुप्ता अभिनय करने वाले थे. मगर ईषा कोप्पीकर के अनप्रोफेशनल रवैए के चलते यह फिल्म कभी नहीं बन पायी. खुद कल्पना लाजमी ने हमें जो कुछ बताया था, उसके अनुसार अचानक ईषा कोप्पीकर ने उनकी इस फिल्म को छोड़ दिया. उसके बाद उन्होने उर्मिला मांतोडकर से बात की थी. पहले उर्मिला यह फिल्म करने को तैयार हुयीं, पर कुछ दिन बाद उन्होंने भी मना कर दिया था.

कल्पना लाजमी और मूलतः आसामी भाषी संगीतकार, गीतकार, गा यक व लेखक भूपेन हजारिका का 40 वर्ष तक साथ रहा है. उनका यह साथ लगभग सात वर्ष पहले भूपेन हजारिका के निधन के साथ ही टूटा था. कल्पना लाजमी ने मरने से पहले भूपेन हजारिका के साथ अपने 40 वर्ष के संबंधो को लेकर एक किताब ‘‘भूपेन हजारिका-एज आई न्यू हिम’’ लिखी,जिसका लोकार्पण श्याम बेनेगल के हाथों कल्पना लाजमी के निधन से महज पंद्रह दिन पहले 8 सितंबर को हुआ था. इस किताब के लोकार्पण के समय खुद कल्पना लाजमी मौजूद नहीं थी, क्योंकि वह उस वक्त भी अस्पताल में ही थीं.

आज कल्पना लाजमी इस संसार में नहीं है. मगर उन्हें इस बात का गम हमेशा रहा कि जब उन्हें दो मीठे बोल की, सहारे की जरुरत थी, जब वह अकेले अस्पताल में मौत से लड़ रहीं थीं, तब भूपेन हजारिका के परिवार के किसी भी सदस्य ने उनकी सुध नहीं ली, जिस परिवार के साथ उनका चालिस वर्ष तक संबंध रहा.

 

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