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विराट कोहली और मीराबाई चानू को मिला राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली और वेटलिफ्टर मीराबाई चानू को संयुक्त रूप से देश के सबसे बड़े खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. राष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इन दोनों खिलाड़ियों को सम्मानित किया है.

बता दें कि खेल रत्न पुरस्कार के लिए चुने गये खिलाड़ियों को साढे सात लाख और अर्जुन पुरस्कार के विजेताओं को पांच लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी जाती है. पिछले साल पूर्व हाकी खिलाड़ी सरदार सिंह और पैरा एथलीट देवेन्द्र झझारिया को यह पुरस्कार दिया गया था. समारोह में कोहली अपनी मां और पत्नी- अनुष्का शर्मा के साथ मौजूद थे.

ये सम्मान पाने वाले तीसरे क्रिकेटर बने विराट कोहली

विराट कोहली तीसरे ऐसे क्रिकेटर बने हैं जिन्हें खेल रत्न से सम्मानित किया गया है. इससे पहले यह खिताब दिग्गज बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर (1997) और दो बार विश्व कप जीतने वाले पूर्व कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी (2007) को मिला है.

कोहली के प्रदर्शन पर एक नजर

कोहली फिलहाल आईसीसी टेस्ट रैंकिंग में शीर्ष बल्लेबाज हैं और पिछले तीन साल से शानदार फार्म में चल रहे हैं. 29 साल के कोहली के नाम की 2016 और 2017 में भी सिफारिश की गयी थी लेकिन उस समय चयन समिति में उनके नाम पर सहमति नहीं बनी थी. कोहली के नाम 71 टेस्ट मैचों में 23 शतकों के साथ 6147 रन हैं जबकि 211 एकदिवसीय में उन्होंने 9779 रन बनाये हैं जिसमें 35 शतक शामिल हैं. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शतकों के मामले में कुल 58 शतकों के साथ वह भारतीय बल्लेबाजों की सूची में सिर्फ तेंदुलकर (100) से पीछे हैं. बीसीसीआई ने 2016 और 2017 में भी उनके नाम की सिफारिश की थी लेकिन 2016 में साक्षी मलिक, पीवी सिंधू और दीपा करमाकर के रियो ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन के कारण वह इस खिताब के लिए नहीं चुने गये.

कोहली ने हासिल किए ये कीर्तिमान

विराट कोहली उन चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन्होंने खेल रत्न पुरस्कार से पहले पद्म श्री पुरस्कार (2017) हासिल किया है. इस साल कोहली के नेतृत्व में टीम ने घरेलू श्रृंखलाओं में इंग्लैंड और औस्ट्रेलिया को शिकस्त दी और वेस्टइंडीज और श्रीलंका को उनकी सरजमीं पर हराया. उनकी कप्तानी में भारतीय टीम ने दक्षिण अफ्रीका में एकदिवसीय श्रृंखला में जीत दर्ज की. वह 2011 में आईसीसी विश्व कप और 2013 में आईसीसी चैम्पियंस ट्राफी जीतने वाली भारतीय टीम में शामिल थे. उनकी कप्तानी में टीम 2017 में आईसीसी चैम्पियंस ट्राफी के फाइनल में पहुंची थी. कोहली 2012 और 2017 में क्रमश: आईसीसी के सर्वश्रेष्ठ एकदिवसीय खिलाड़ी और सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का पुरस्कार जीत चुके हैं. उन्होंने पांच बार सर्वश्रेष्ठ भारतीय क्रिकेटर का पुरस्कार भी जीता है.

अर्जुन पुरस्कार : अजुर्न पुरस्कार मिलने वाले खिलाड़ियों में महिला क्रिकेट खिलाड़ी स्मृति मंधाना, धावक हिमा दास, भालाफेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा, टेबल टेनिस खिलाड़ी मनिका बत्रा के नाम शामिल हैं. इसके अलावा, राष्ट्रपति कोविंद ने भारतीय हौकी खिलाड़ी मनप्रीत सिंह, सविता पुनिया, धावक जिनसन जॉनसन, महिला बैडमिंटन खिलाड़ी एन.सिक्की रेड्डी, मुक्केबाज सतीश कुमार, गोल्फ खिलाड़ी शुभांकर शर्मा, पोलो खिलाड़ी रवि राठौर, निशानेबाज राही सरनोबत, अंकुर मित्तल, श्रेयसी सिंह, टेबल टेनिस खिलाड़ी जी. साथियान, मनिका बत्रा, टेनिस स्टार रोहन बोपन्ना, पहलवान सुमित और वुशु खिलाड़ी पूजा कादयान को भी अर्जुन पुरस्कार से नवाजा. पैरा एथलीट अंकुर धामा और पैरा-बैडमिंटन खिलाड़ी मनोज सरकार को भी अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

द्रोणाचार्य पुरस्कार : कोविंद द्वारा द्रोणाचार्य पुरस्कार पाने वालों में मुक्केबाजी कोच चेनंदा एचिया कुटप्पा, विजय शर्मा, ए.श्रीनिवास राव (टेटे) और सुखदेव सिंह (एथलेटिक्स), विजय शर्मा (भारत्तोलक), वी.आर.बीडू (एथलेटिक्स), तारक सिन्हा (क्रिकेट), क्लारेंस लोबो (हौकी), जीवन कुमार शर्मा (जूडो) रहे. इस समारोह में राष्ट्रपति ने सत्यदेव प्रसाद (तीरंदाजी), पूर्व भारतीय कप्तान भारत कुमार छेत्री (हौकी), बौबी एलयोसियस (एथलेटिक्स), पूर्व पहलवान चाउगले दातु दत्तात्रे, को ध्यानचंद पुरस्कार से सम्मानित किया. इसके अलावा, भारतीय पर्वतारोही डा. अंशु जमसेनपा को तेनजिंग नार्गे नेशनल एडवेंचर पुरस्कार से नवाजा गया.

ध्यान चंद पुरस्कार: सत्यदेव प्रसाद (तीरंदाजी); भरत कुमार छेत्री (हौकी); बौबी अलायसियस (एथलेटिक्स); चौगले दादू दत्तात्रेय (कुश्ती).

‘बाजार’ का ट्रेलर हुआ रिलीज, नए अंदाज में दिखे सैफ अली खान

बौलीवुड अभिनेता सैफ अली खान की अपकमिंग फिल्म ‘बाजार’ का ट्रेलर रिलीज कर दिया गया है. लंबे समय से एक हिट फिल्म की तलाश में बैठे सैफ अली खान के लिए ये फिल्म जरूर कोई अच्छी खबर ला सकती है. फिल्म में सैफ का लुक और किरदार दोनों ही खास नजर आ रहा है. फिल्म में सैफ अली खान एक ऐसे बिजनेसमैन के किरदार में नजर आ रहे हैं जो बाजार का सिकंदर बनना चाहता है. फिल्म में सैफ (शकुन कोठारी) चाहते हैं कि देश में सिर्फ अंबानी और टाटा का ही सिक्का न चले बल्कि एक नया नाम बाजार में आए और वो नाम हो ‘शकुन कोठारी’ का.

फिल्म में सैफ अली खान के साथ राधिका आप्टे, चित्रांगदा सिंह और रोहन मेहरा अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे. दम मारो दम और कुछ न कहो जैसी फिल्म को निर्देशन कर चुके फिल्म निर्देशक गौरव चावला ने फिल्म का निर्देशन का किया है.

अगर बात करें फिल्म की तो यह फिल्म दो ऐसे लोगों की कहानी है जिसमें एक सफल तो है लेकिन वो अपने सपनों को अभी और उंची उड़ान देना चाहता है और उसके लिए पैसा ही भगवान है. वहीं, एक कहानी ऐसे शख्स की है जो छोटे शहर से आया है और वो बड़े शहर के शकुन कोठारी जैसा बनना चाहता है.

दोनों का ही सपना पैसा है और दोनों ही अपने सपने को पूरा करने के लिए किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार हैं. अब ये देखना मजेदार होगा कि फिल्म में क्या ट्विस्ट्स एंड टर्न्स रखे गए हैं. बता दें कि ये फिल्म इसी साल 26 अक्टूबर को रिलीज की जाएगी.

‘तुम्बाड’ का ट्रेलर रिलीज, ये फिल्म वाकई में एक चमत्कार है

फिल्म ‘तुम्बाड’ में हौरर, फैंटेसी, थ्रिल, रहस्य जैसे तत्व हैं. ये इंसानी चाह, ज़रूरत और खतरनाक लालच की कहानी है. फिल्म की टैगलाइन है – ‘आओ, अपने अंदर के डर से मिलें’.

कहानी 1920 के दौर से शुरू होती है. पुणे के एक गांव तुम्बाड में घटती है. एक प्रतिष्ठित ब्राह्मण परिवार की तीन पीढ़ियों के इर्द-गिर्द. तुम्बाड में उनका प्रतिष्ठित वाड़ा (विशाल घर/जमींदारी) था. उसका मुखिया था शायद – सरकार. जो पूरी जिंदगी कोई खजाना ढूंढ़ता रहा. वो मर जाता है. उसके बाद फिर से वाड़े का कोई वारिस उसखजाने को ढूंढ़ने लौटता है और कहर बरपता है.

डायरेक्टर राजकुमार हीरानी (पीके, 3 इडियट्स, संजू, मुन्नाभाई) ने मई में जब ये फिल्म देखी तो उनका कहना था – “मैंने लंबे समय से visually इतनी हैरतअंगेज फिल्म नहीं देखी है जितनी ‘तुम्बाड’ है. इस फिल्म में कैमरावर्क, आर्ट, कॉस्ट्यूम बहुत अच्छे हैं. सोहम शाह (एक्टर) का काम बेहतरीन है.”

चार महीने पहले डायरेक्टर आनंद राय (जीरो, तनु वेड्स मनु रिटर्न्स) ने भी ‘तुम्बाड’ देखी और चकित रह गए. उनका कहना था – “ये (भय से) रोएं खड़े कर देने वाली,विस्मयकारी फिल्म है जो आपको एकदम नोंक पर रखती है. ‘तुम्बाड’ ऐसा चमत्कार है जिसे चूकना नहीं चाहिए. जिस पल से मैंने ये फिल्म देखी, मैं इससे जुड़ना चाहता था.” आनंद को ये फिल्म इतनी पसंद आई कि वे ही इसे प्रस्तुत कर रहे हैं. उनकी कंपनी ‘कलर यैलो प्रोडक्शंस’ और ‘इरोस नाओ’ इसकी रिलीज अनाउंस कर चुके हैं.

आनंद गांधी भी इससे जुड़े हैं. वे ‘तुम्बाड’ के क्रिएटिव प्रोड्यूसर और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं. 2013 में उनकी फिल्म ‘शिप ऑफ थीसियस’ ने लोगों को भौचक्का कर दिया था. हालांकि तब से अब तक के पांच साल में इसके कई रीशूट हुए हैं. पोस्ट-प्रोडक्शन में काफी काम हुआ है. हाल ही में बतौर प्रोड्यूसर आनंद ने चर्चित डॉक्यूमेंट्री‘एन इनसिग्निफिकेंट मैन’ भी रिलीज की थी.

फिल्म में विनायक का केंद्रीय किरदार पहले नवाजुद्दीन सिद्दीकी कर रहे थे. उन्होंने दो महीने इस कैरेक्टर की रिहर्सल में भी हिस्सा लिया. ये 2007-08 की बात है. 2012 के करीब सोहम शाह विनायक के लीड रोल में फाइनल हुए जो फिल्म के पोस्टरों और तस्वीरों में दिखने लगे थे. सोहम इस फिल्म के निर्माता भी हैं. वे सबसे पहले बतौर एक्टर ‘शिप ऑफ थीसियस’ से चर्चा में आए थे. फिर उन्होंने ‘तलवार’ और ‘सिमरन’ में भी एक्टिंग की.

‘तुम्बाड’ के डायरेक्टर हैं राही अनिल बर्वे. ये उनकी पहली फीचर फिल्म है. राही इससे पहले 41 मिनट की फिल्म ‘मांजा’ बना चुके हैं. इसे देखने के बाद डायरेक्टर डैनी बोयेल ने अपनी फिल्म ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ (2008) की डीवीडी में विशेष फीचर के तौर पर रखा था. ‘मांझा’ एक गरीब लड़के की कहानी है जिसकी 6-7 साल की बहन को एक पुलिसवाला रेप कर देता है. अब वो लड़का बदला लेने को व्यग्र है, लेकिन उम्र में बहुत छोटा है.

राही बर्वे में ‘तुम्बाड’ के सृजन के बीज 90 के दशक में ही पड़ गए थे. वे छोटे थे और 1993 में अपने दोस्त के साथ महाराष्ट्र में नागजीरा के जंगल गए थे. दोस्त ने वहां रात को उनको नारायण धारप की लिखी एक डरावनी कहानी सुनाई जिसे सुनकर वो बुरी तरह डर गए थे. 2016 तक वे उस कहानी के वशीभूत रहे. बर्वे ने उस कहानी का मूल संस्करण भी ढूंढ़ा और पढ़ा. लेकिन वो पढ़ते हुए उन्हें बहुत सपाट और भूल जाने लायक लगा. दरअसल जंगल के बीच अलाव जलाकर उसके किनारे बैठकर ये उनके दोस्त का कहानी सुनाने का तरीका था जिसने उनके दिमाग पर अमिट छाप छोड़ी थी. फिर उन्हें एक दूसरी कहानी सूझी. ये ‘तुम्बाड’ थी इसका पहला ड्राफ्ट और स्टोरीबोर्ड 1996-97 में उन्होंने तैयार कर लिया था. लेकिन फिर रख दिया. बरसों बाद जब उन्हें अपना लाल बैग मिला तो उसमें शुरुआती राइटिंग के साथ ये मटीरियल फिर से सामने आ गया.

अब 12 अक्टूबर को ‘तुम्बाड’ की रिलीज पक्की हो गई है. इसे हिंदी, तमिल, तेलुगु, मराठी भाषाओं में लाया जा रहा है. इस फिल्म के बाद बर्वे दो दूसरे प्रोजेक्ट आगे बढ़ाएंगे जिन पर काम चालू हो चुका है. इन्हीं में एक है ‘रक्त ब्रम्हांड’. ये प्राचीन भारत में स्थित एक पौराणिक थ्रिलर है.

ट्रेलर देखें:

(साभार : लल्लनटौप)

धड़िया प्रथा : यहां किराए पर मिलती हैं पत्नियां

समाज में ऐसे कई लोग हैं जिन्हें लगता है कि आज समाज को लड़कियों की जरूरत नहीं है. तभी तो मां के गर्भ में लड़की है यह बात पता चलते ही उसको मां के गर्भ में ही मार दिया जाता है. क्या महिला ना रहे तो पुरुषों की जिंदगी अच्छी खासी चलते रहेगी? तो आइए जानते हैं.

मध्यप्रदेश में एक गांव है शिवपुर. जहां पर विनय नामक व्यक्ति रहता था.विनय के पास ढेर सारी संपत्ति थी. उसके पास जमीन जायदाद की कमी नहीं थी.घर का बड़ा बेटा होने के कारण विनय के ऊपर कई सारी जिम्मेदारियां थी. इसलिए उसने कभी शादी करने के बारे में नहीं सोचा. लेकिन 40 पार करते ही विनय को एक पत्नी की कमी महसूस होने लगी. उम्र ज्यादा बढ़ जाने के कारण विनय को कोई लड़की नहीं मिली. जिससे वह शादी कर पाता.

थका हारा विनय को फिर एक दिन उसके दोस्तों ने धड़िया प्रथा के बारे में बताया. उन्होंने शिवपुर गांव के इस प्रथा के बारे में बताते हुए कहा कि वह एक स्टांप पेपर पर साइन करके अपनी मनपसंद लड़की को अपनी पत्नी बना सकता है.

यह बात सुनते ही विनय उस गांव में गया.वहां पर उसने एक लड़की पसंद की फिर एक रकम तय किया. रकम तय करते ही उसने 10 रुपए के स्टांप पेपर पर साइन किया. फिर उस लड़की को कुछ समय के लिए अपनी पत्नी बना कर ले गया.

दरअसल धड़िया प्रथा एक ऐसी प्रथा है जहां पर कोई भी पुरुष अमीर हो या गरीब अपनी मनपसंद लड़की को पसंद करके एक रकम तय करता है. फिर एक स्टांप पेपर पर साइन करके उससे कुछ समय के लिए अपने साथ उसे पत्नी बनाकर अपने घर ले जाता है. वह लड़की पत्नी बन कर हर कर्तव्य निभाती है.लेकिन जरूरी बात यह है कि दोनों एक दूसरे से शादी नहीं करते. यानी बिना शादी किए दोनों एक दूसरे के साथ पति पत्नी की तरह रहते हैं.

फिर अगर उस व्यक्ति को लगे कि उसे और ज्यादा समय उस लड़की के साथ बितानी है. तो और ज्यादा पैसे देकर उस लड़की को अपने साथ रख सकता है. या फिर किसी दूसरी लड़की को खरीद सकता है. यह प्रथा सचमुच अपने आप में बहुत अजीब है. लेकिन लड़कियों की कमी होने के वजह से लोगों ने इस प्रथा को बनाया है.

यह प्रथा सिर्फ मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं है बल्कि गुजरात के भी कुछ गांव में या प्रथा निभाई जा रही है. गुजरात की बात हमने की है तो बता दें कि गुजरात का एक किसान है अटा प्रजापति. जिसने अपनी ही पत्नी को किराए में किसी और मर्द को सौंप दिया है. जिसके लिए उसे 8 हजार रुपए प्रति महीना मिलता है.

इससे आप समझ सकते हैं कि आज समाज में लड़कियों की कमी कितनी बढ़ती जा रही है.अब तक इतनी भूर्ण हत्या हो चुकी है जिससे लड़कियां धीरे-धीरे कम होती जा रही है.इसके अलावा लड़कियों से जुड़े अपराध इतने बढ़ गए हैं. जो आने वाले दिनों में खुद पुरुषों के लिए मुसीबत बनने वाला है.

अजय देवगन ने टि्वटर पर ये क्या कर डाला

सोमवार की शाम अजय देवगन और काजोल के फैंस के बीच उस वक्त हंगामा मच गया, जब अजय ने अपनी स्टार बीवी काजोल का नंबर टि्वटर जैसे प्लेटफॉर्म पर शेयर कर दिया. अजय के इस ट्वीट, ‘काजोल देश में नहीं है… उनसे वॉट्सअप के इस नंबर पर को-ऑर्डिनेट करें..’ को चंद घंटों में हजारों की तादाद पर शेयर कर लिया गया. अजय के इस ट्वीट के बाद ट्विटर पर चटपटे और अजीबो-गरीब ट्वीट्स की बौछार सी हो गई और कुछ समय में अजय-काजोल टि्वटर पर ट्रेंड करने लगे. टि्वटर पर चली कुछ घंटों की इस नोक-झोंक के बाद अजय देवगन ने मजाकिया अंदाज में खुलासा किया कि यह उनका प्रैंक था.

काजोल अपने पति की क्लास लो..!

अजय के ट्वीट के बाद सोशल मीडिया पर ट्वीट्स की बाढ़ -सी आ गई. अजय की वॉल पर मौजूद सभी फैंस ने काजोल को मैसेज, कॉल और वीडियो कॉल कर डाले. फैंस यहां तक ही नहीं रुके, वे अजय की उस ट्वीट पर काजोल को किए गए मैसेज के स्क्रीन शॉट्स तक शेयर करने लगे. हैरानी की बात तो तब हुई, जब काजोल ने एकाध फैंस को जवाब भी दे दिया.

सागर पटेल नामक टि्वटर यूजर द्वारा शेयर किए गए स्क्रीन शॉट में वे काजोल को नसीहत देते नजर आ रहे थें कि ‘अजय सर ने आपका नंबर टि्वटर पर शेयर दिया है तो कृपया कर अपना अकाउंट डिलीट कर लें और फोन बंद कर दें. वरना हम जैसे लोग आपको मेसेज कर तंग कर देंगे.’ किकि नाम के यूजर ने लिखा, ‘फोन बंद कर दो..आपके पति ने नंबर लीक कर दिया है, उसकी क्लास लो.’ अजय के बेहद फेमस डायलॉग को संगीता ने काजोल को लिखकर भेजा, ‘हमें तो अपनो ने लूटा गैरों में कहां दम था.’

जब फजलौर ने काजोल को मेसेज कर कहा कि हाय! तो काजोल ने तुंरत जवाब देते हुए लिखा हैलो.. फजलौर ने आगे लिखा, मेरा पीएम चोर है… इसके जवाब में काजोल ने लिखा, ‘मेरा पति भी’.

वहीं वैभव काजोल से दरख्वास्त कर बोले,’मैंने दिलवाले फिल्म 500 रुपये लगा कर देखी है. कृपया इस नंबर पर मेरे पैसे पेटीएम कर दें.’ इसी बीच डेडपुल नामक यूजर काजोल को मेसेज करते हुए ट्वीट किया, ‘मैम, अजय सर ने गुटखा खाकर कांड कर दिया है.’ कुछ लोगों ने काजोल को अपने ग्रुप तक में ऐड कर लिया. किसी ने उन्हें फैमिली ग्रुप में ऐड कर अपने मम्मी-पापा को सरप्राइज दिया, तो किसी ने फ्रेंड्स ग्रुप पर ऐड कर उनका स्वागत किया.

अजय को दी गुटखा कम खाने की सलाह

अजय द्वारा काजोल का नंबर अचानक शेयर किए जाने से कई फैंस यह अनुमान लगा रहे हैं कि अजय ने जरूर नशे में आकर यह हरकत की होगी. ऐसे में कई लोगों ने काजोल को मेसेज कर अजय को रिहैब सेंटर तक ले जाने की नसीहत दे डाली. कौशिक विश्वास नामक यूजर ने लिखा,’ मैम आपकी डीपी बेहद खूबसूरत है. अजय सर को कहो गुटखा कम खाया करें.’

अरे ये तो अजय का प्रैंक निकला

फैंस व ट्रोल्स अभी इन ट्वीट्स और वॉट्सऐप चैट के मजे ले ही रहे थे और तरह-तरह के कयास लगा रहे थे कि अजय देवगन ने मजाकिया अंदाज में बम फोड़ा और ट्वीट करते हुए इसे प्रैंक का नाम दिया. अजय ने ट्वीट किया, ‘फिल्म के सेट पर प्रैंक्स तो आम बात होती है, तो आज यह मजाक मैंने आप पर आजमा लिया.’

यह पब्लिसिटी स्टंट तो नहीं

कुछ ऐसे भी लोग हैं, जिन्हें अजय के इस ट्वीट पर शक है. उनका कहना है कि जरूर अजय और काजोल कोई पब्लिसिटी स्टंट कर रहे हैं. ओसियन नामक यूजर लिखते हैं, ‘वाट्सऐप स्टेटस अपडेट दो दिन पहले किया गया है. ऐसा लग रहा है यह प्लान किया गया हो. मुझे लगता है कि दो दिन पहले ही यह नंबर भी ऐक्टिवेट किया गया.’ यूजर रानी का कहना था, ‘मुझे हैरानी हो रही है कि स्टेट्स इतने लंबे समय तक कैसे है. अगर गलती हुई होती तो तुंरत डिलीट कर दी जाती. जरूर कोई फिल्म आने वाली है इनकी.’ खबर लिखे जाने तक उनके प्रवक्ता की ओर से कोई बयान नहीं आया था.

खुशखबरी : मुंबई, पुणे, बेंगलुरु से भी साफ हुई दिल्ली की हवा

बारिश के मामले में दिल्ली और मुंबई की तुलना हो ही नहीं सकती. लेकिन सितंबर में बारिश के मामले में दिल्ली ने मुंबई को पछाड़ दिया है. सितंबर में दिल्ली में जहां 233.3एमएम बारिश हो चुकी है, वहीं मुंबई में सिर्फ 62.9 एमएम बारिश हुई है. इस झमाझम बारिश ने हवा को इतना साफ कर दिया है कि मुंबई, पुणे, अहमदाबाद और बेंगलुरु जैसे शहर की तुलना में दिल्ली की हवा कहीं अधिक साफ है.

दिल्ली में पूरे सितंबर के दौरान 125.1 एमएम बारिश सामान्य है. लेकिन सोमवार शाम 5.30 बजे तक दिल्ली में 233.3 एमएम बारिश हो चुकी है. जबकि मुंबई में इस माह की सामान्य बारिश 341.4 एमएम है, लेकिन अब तक सिर्फ 62.9 एमएम बारिश हुई है. दिल्ली में सितंबर के दौरान इतनी अधिक बारिश साल 2010 में हुई थी.

सितंबर की इस रिकॉर्ड तोड़ बारिश की वजह से दिल्ली को साफ हवा में सांस लेने का मौका मिला है. बल्कि दिल्ली की हवा इस समय सबसे साफ शहरों में गिने जाने वाले मुंबई,अहमदाबाद, पुणे, बेंगलुरु आदि से साफ चल रही है. सीपीसीबी के एयर इंडेक्स के अनुसार, दिल्ली का एयर इंडेक्स महज 52 है. जबकि मुंबई का 79, बेंगलुरु का 80, पुणे का76 और अहमदाबाद का 79 दर्ज हुआ. सितंबर में आमतौर पर इतनी साफ हवा दिल्ली में नहीं होती.

स्काईमेट के चीफ मेट्रोलॉजिस्ट महेश पलावत ने कहा कि दिल्ली में मॉनसून के दौरान सबसे अधिक बारिश अगस्त में होती है. सितंबर में इस तरह की बारिश नहीं होती.

पिछले 24 घंटे के दौरान ही दिल्ली में 25.1 एमएम बारिश हुई है. जिसकी वजह से अधिकतम तापमान 27.8 डिग्री पर पहुंच गया है. यह सामान्य से 6 डिग्री कम है. दिल्ली के लगभग हर हिस्से में सोमवार को बारिश हुई. मौसम विभाग के अनुसार, मंगलवार को हल्की बारिश की संभावना है. अधिकतम तापमान 30 से 31 डिग्री के आसपास रह सकता है.

बसे बनेंगी ‘पल्यूशन मीटर’

दिल्ली की सबसे प्रदूषित सड़कों की लिस्ट तैयार की जाएगी. इसके लिए बसों में सेंसर लगाए जाएंगे. 5 बसों से इसी साल नवंबर से डेटा मिलने लगेंगे. सेंसर प्रदूषक तत्वों की जानकारी अधिकारियों तक पहुंचाएंगे. इससे यह पता लगेगा कि सड़क के किस पॉइंट या किस चौराहे पर कितना प्रदूषण है. इसी हिसाब से सड़कों के लिए एक्शन प्लान तैयार होगा. यह पायलट प्रोजेक्ट नवंबर 2018 से फरवरी 2019 तक चलेगा.

इस योजना के तहत 300 मोबाइल सेंसर लगाए जाएंगे. इन कम कीमत वाले प्रदूषण सेंसर को आईआईटी दिल्ली और इंद्रप्रस्थ इंस्टिट्यूट ऑफ इन्फर्मेशन टेक्नॉलजी के साइंटिस्ट्स की टीम ने तैयार किया है. बसों में सेंसर लगाने के लिए दिल्ली इंटिग्रेडेट मॉडल ट्रांजिट सिस्टम लिमिटेड (डिम्ट्स) से करार किया गया है. इस प्रोजेक्ट में प्रदूषण से मिलने वाले डेटा के विश्लेषण का काम आईआईटी कानपुर करेगी. इसमें पता लगाया जाएगा कि किस सड़क पर गाड़ियों की वजह से सबसे अधिक प्रदूषण हो रहा है. पहले फेज में 5 बसों में सेंसर लगेंगे. इसके बाद इनकी संख्या बढ़ाकर 300 तक की जाएगी. बस रूट इस महीने के अंत तक फाइनल कर लिए जाएंगे.

यह सेंसर हथेली में आसानी से आ सकता है. इस सेंसर से पार्टिक्युलेट मैटर के बारे में पता चलेगा. सेंसर में एक कैमरा भी लगा होगा, जिससे टीम को यह पता चलेगा कि सेंसर के आसपास किस तरह की गाड़ियां हैं. इसमें जीपीएस भी होगा ताकि प्रदूषण डेटा की लोकेशन को ट्रैक किया जा सके और इससे पता चल सकेगा कि कहां पर सबसे अधिक प्रदूषण है.

प्रोजेक्ट को साइंस एंड टेक्नॉलजी मंत्रालय की ओर से फंड मिलेगा. पांचों सेंसर अक्टूबर तक लगा दिए जाएंगे, ताकि नवंबर से काम शुरू हो सके.

समानता की मांग को गलत नहीं मानती कुबरा सैट

‘‘नेटफ्लिक्स’’ पर प्रसारित वेब सीरीज ‘‘सेक्रेड गेम्स’’ में नवाजुद्दीन सिद्दिकी के सामने फ्रंट न्यूडिटी के दृश्य को बिंदासपन के साथ अंजाम देकर गौरवान्वित महसूस कर रहीं अभिनेत्री खुद को औरतपन की पक्षधर मानती हैं.

हाल ही में एक खास मुलाकात के दौरान फेमीनिजम और वुमन इंपावरमेंट की चर्चा चलने पर कुबरा सैट ने हमसे कहा- ‘‘मैं तो फेमीनिजम की पक्षधर हूं. फेमीनिजम मेरे घर में हुआ. जब मेरी मां को मेरे पिता का सहयोग नहीं मिला, तो उन्होंने समानता के आधार पर घर चलाया. तो फेमीनिजम मेरे घर से चालू होता है. इसलिए तो मैं कहती हूं कि मुझे समानता चाहिए.

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समानता की मांग करने में गलत क्या है? हां! वुमन इंपावरमेंट की बात इसलिए करते हैं क्योंकि हमारी बात दबी रह जाती है. हम औरतों की कहीं कोई सुनवायी नहीं होती. हम किसी बात को जोर से कहते हैं,तो लोग कहते हैं कि जोर से क्यों कह दिया. ’’

कुबरा सैट आगे कहती हैं- ‘‘देखिए, सिनेमा में भी वुमन इंपावरमेंट आ गया है. ‘कहानी’ व ‘राजी’ जैसी फिल्में बन रही हैं. यानी कि बातचीत शुरू हुई है. बातचीत से ही बदलाव आएगा. सिनेमा एक ऐसा माध्यम है, जहां आप अपनी बात कहकर लोगों तक पहुंच सकते हैं.’’

यात्रा करते हुए रिश्ते बनाती कुबरा सैट

वेब सीरीज ‘‘सेक्रेड गेम्स’’ में ट्रांसजेंडर कुकू का किरदार निभाते हुए फ्रंट न्यूडिटी का दृश्य कर जबरदस्त शोहरत बटोर रही अभिनेत्री कुबरा सैट को यात्राएं करने, नई नई जगहों व नए नए देशों में घूमने का बेहद शौक है. इस दौरान आदतन लोगों से कई तरह की बातें भी करती रहती हैं और नए नए रिश्ते बनाती रहती हैं.

हाल ही में जब कुबरा से हमारी उनके घर पर मुलाकात हुई, उस वक्त वह दो दिन पहले ही मालद्वीप घूमकर वापस लौटी थीं. तो हमने उनसे उनकी यात्रा के दौरान के कुछ रोचक प्रसंगों के बारे में पूछा, तो उनहोंने कहा- ‘‘कई वर्ष पहले मैं जापान घूमने गयी थी. मैं अपने होटल से चहलकदमी करते हुए बहुत दूर तक चली गयी थी. काफी समय बीत गया. फिर जब मैंने वापस होटल पहुंचना चाहा, तो रास्ता भूल गयी. मुझे जापानी आती नहीं थी. वहां लोग सिर्फ अपनी मातृभाषा जापानी में ही बात करते हैं.

थकहार कर मैंने एक शख्स से इशारों इशारों में रास्ता पूछा, तो वह शख्स मुझे मेरे होटल तक छोड़ने आया. उसने मुझे सिखाया कि हर इंसान की मदद करनी चाहिए. उसके बाद मैं जब भी अपने शौक को पूरा करने के लिए घूमने निकलती हूं तो लोगों की मदद करने का प्रयास करती हूं.’’

bollywood Sacred Games' Kubra Sait aka 'Cuckoo' reveals that how much she loves travelling

कुबरा ने अपनी यात्रा वृत्तांत को जारी रखते हुए आगे कहा -‘‘हम अक्सर यात्रा के दौरान लोगों के मूंह से उनकी कहानियां सुनते हैं. चार पांच वर्ष पहले उदयपुर से मुंबई आ रहे एक पुरूष व उनकी प्रेमिका से मेरी मुलाकात हुई थी. वह पिछले एक साल से एक साथ यात्राएं कर रहे थे, पर वह दोनों तय नहीं कर पा रहे थे कि उन्हें शादी करनी है या नहीं. दो घंटे प्लेन में एक साथ यात्रा करने के बाद मैं उन्हें अपने घर ले आयी. मैंने उन्हें अपने घर की चाभी दी और कहा कि आप यहां रहकर सोचिए, क्या करना है और मैं दिल्ली चली गयी. जब मैं वापस लौटी तो मुझे पत्र मिला, जिसमें वह लोग लिख कर गए थे कि उन्होंने शादी करने का निर्णय ले लिया. दो साल बाद मैंने इंस्टाग्राम पर उनके बच्चे की तस्वीर देखी. लोगों से रिश्ते मेरे इसी तरह से बनते हैं.’’

राफेल डील पर जंग का कारण है ये खूबसूरत चेहरा

2016 में 36 राफेल विमानों की खरीद को लेकर खींचतान आज भी जारी है. सरकार और विपक्ष दोनों एक दूसरे पर वार कर रहे हैं. हालांकि, इस बीच रिलायंस डिफेंस चुप है. वहीं, फ्रांसीसी अखबार मीडियापार्ट में छपी एक खबर के बाद भारतीय राजनीति में भूचाल आ गया है. फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने मीडियापार्ट को दिए इंटरव्यू में कहा कि राफेल सौदे में रिलायंस का नाम खुद भारत सरकार ने सुझाया था. फ्रांस्वा ओलांद के बयान के बाद सरकार कांग्रेस के निशाने पर आ गई और उन्होंने सरकार पर हमले और तेज कर दिए.

खास बात यह है कि इस डील में नए-नए नाम शामिल हो रहे हैं. पहले सिर्फ अनिल अंबानी और सराकर तक यह सीमित थी. लेकिन, उसके बाद फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति का नाम शामिल हुआ. वहीं, अब फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद की प्रेमिका का नाम भी इस डील से जुड़ गया है. यही नहीं पूरी राफेल डील प्रेमिका के नाम के इर्द-गिर्द ही घूम रही है. लेकिन, सवाल यह है कि यह लड़की है कौन? इसका डील से क्या कनेक्शन.

दरअसल, पूर्व राष्ट्रपति ओलांद ने अपने बयान में दावा किया कि राफेल विमान बनाने के 58 हजार करोड रुपए के समझौते के लिए अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप की कंपनी रिलायंस डिफेंस का नाम भारत सरकार ने ही सुझाया था. फ्रांस के पास उस वक्त कोई विकल्प नहीं था. हालांकि, इससे पहले सरकार बिल्कुल उलट बयान देती रही है.

राफेल डील विवाद पर फ्रांस्वा ओलांद के बयान के बाद खूब हंगामा हो रहा है. हालांकि, कुछ दिन पहले ही कांग्रेस ने ओलांद को भी निशाने पर लिया था. कांग्रेस का आरोप है कि राफेल डील साइन होने से पहले ओलांद की प्रेमिका जूली गायेट को फायदा पहुंचाया गया. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रांस्वा ओलांद की भारत यात्रा (जब राफेल डील पर समझौता हुआ) से दो दिन पहले अनिल अंबानी की रिलायंस एंटरटेनमेंट ने ओलांद की प्रेमिका जूली गायेट के साथ एक फिल्म प्रोड्यूस करने के लिए डील साइन की थी.

फिल्म के पैसों के प्रबंध के लिए जूली गायेट, फ्रांस्वा ओलांद और फिल्म ‘माई फैमिली’ के निर्माता सभी ने यह घोषणा की कि फिल्म में रिलायंस की भागीदारी का राफेल डील से कोई लेना-देना नहीं है. लेकिन, फिल्म में पैसा उसी वक्त लगाया गया.

अब सवाल उठता है कि 25 जनवरी 2016 को जब राफेल डील के लिए फ्रांस्वा ओलांद भारत पहुंचे तभी अनिल अंबानी ने फिल्म फाइनेंसिंग की घोषणा क्यों की? वहीं, रिलायंस एंटरटेनमेंट ने उस फ्रांसीसी फिल्म में पैसा क्यों लगाया, जिसमें न तो भारत का कोई संदर्भ था और ना ही भारत में इस रिलीज किया जाना था.

फ्रांस की खूबसूरत अभिनेत्रियों में जूली गायेट का नाम शुमार है. वह ‘राइजिंग फीमेल ऑफ फ्रांसीसी प्रोड्यूसर’ की सूची में भी शामिल हैं. हालांकि, जूली को ज्यादा लोगों ने तब पहचाना जब उनका नाम पूर्व फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद से जुड़ा. वह ओलांद की प्रेमिका के रूप में काफी फेमस हुईं. हालांकि, इससे पहले वह एक कामयाब एक्ट्रेस और प्रोड्यूसर भी हैं. जूली ने अपने करियर की शुरुआत को-प्रोड्यूसर के तौर पर की थी. जूली की दो फिल्में ऑस्कर के लिए नोमिनेट भी हो चुकी हैं.

45 वर्षीय जूली गायेट की सफल फिल्मों में ‘क्वाई डी ऑर्से’ रही. यह फिल्म फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय पर केंद्रित थी. इसके अलावा ‘शेल वी चुंबन’ जैसी फिल्में भी उनकी लिस्ट में शामिल हैं. साथ ही, जूली की ‘माई बेस्ट फ्रेंड’ फिल्म भी काफी चर्चित है. यही वह फिल्म है, जिसमें रिलायंस एंटरटेनमेंट ने राफेल डील से पहले पैसा लगाने का ऐलान किया था.

औस्कर में इस भारतीय फिल्म से होगी इरफान खान की फिल्म की टक्कर

24 फरवरी 2019 को संपन्न होने वाले ‘‘91वें औस्कर अवार्ड’’ में विदेशी भाषा की सर्वश्रेष्ठ फिल्म के अंतर्गत इस बार भारतीय अभिनेता इरफान खान के अभिनय से सजी व उनके द्वारा सहनिर्मित बंगलादेशी फिल्म ‘‘नो बेड नो रोजेस’’ (इसका दूसरा नाम ‘‘दूब’’भी है) के साथ ही भारतीय फिल्मकार रीमा दास की असमिया भाषा की फिल्म ‘‘विलेज राॅकस्टार्स’’ की टक्कर होने वाली है. इन दोनों ही फिल्मों के साथ भारतीय कलाकार जुड़े हुए हैं, मगर इन फिल्मों का निर्माण अलग अलग देश में हुआ है.

इरफान खान की फिल्म ‘‘नो बेड नो रोजेस’’ को बांग्लादेश ने अपने देश की तरफ से ‘औस्कर अवार्ड’ में  भेजा है. जबकि भारतीय प्रविष्टि के रूप में रीमा दास की फिल्म ‘‘विलेज रौक स्टार्स’’ को भेजा गया है. इन दोनों ही फिल्मों के बीच जबरदस्त टक्कर होनी तय है. क्योंकि यह दोनों फिल्में लगभग साठ से अधिक अंतरराष्ट्रीय फिल्मोत्सवों में प्रदर्शित होकर अपना डंका बजाने के साथ ही तमाम पुरस्कार भी हासिल कर चुकी हैं. यह दोनों फिल्में कथानक के स्तर पर एक दूसरे से काफी भिन्न हैं. फिल्म ‘‘नो बेड नो रोजेस’’ एक ऐसे मशहूर निर्देशक पर आधारित है, जो कि अपनी पहली पत्नी को छोड़कर अपनी बेटी की बचपन दोस्त व उम्र में 33 वर्ष छोटी लड़की से विवाह कर विवादों से घिरे थे.

जबकि रीमा दास की फिल्म ‘‘विलेज रौक स्टार्स’’ आसाम के एक गांव की छोटी लड़की की कहानी है, जो कि गिटार पर अभ्यास कर रौक स्टार बनती है. ‘‘नो बेड नो रोजेस’’ में बांगला देश की औरतों की स्थिति का चित्रण है, तो वहीं ‘‘विलेज रौक स्टार्स’’ में एक बच्ची के द्वारा अपने सपने को पूरा करने के जद्दोजहद का चित्रण है.

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‘‘91वें औस्कर अवार्ड’’ के लिए भारतीय प्रविष्टि फिल्म का चयन करना ‘‘फिल्म फेडरेशन आफ इंडिया’’ द्वारा गठित 12 सदस्यीय चयन समिति के अध्यक्ष व प्रख्यात फिल्मकार एस वी राजेंद्र सिंह बाबू के लिए आसान नहीं था. क्योँकि ‘पद्मावत’, ‘संजू’, ‘मंटो’, ‘राजी’, ‘पैडमैन’, ‘हिचकी’, ‘102 नौट आउट’, ‘लव सोनिया’ सहित 17 हिंदी, ‘न्यूड’ सहित तीन मराठी, ‘बेस्ट आफ लक लालू’ सहित दो गुजराती , दो तमिल, दो तेलगू, एक कन्नड़, एक असमिया, एक मलयालम फिल्म ने दावेदारी पेश की थी. पर निर्णायक समिति ने सर्वसम्मति से रीमा दास की असमिया फिल्म ‘‘विलेज रौक स्टार्स’’ को भारतीय प्रविष्टि के रूप में ‘‘औस्कर अवार्ड’’ में ‘सर्वेश्रेष्ठ विदेशी भाषा की फिल्म के अंतगर्त भेजने का निर्णय लिया.

रीमा दास की फिल्म‘‘विलेज रौकस्टार्स’’ को इसी वर्ष सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म के राष्ट्रीय पुरस्कार के स्वर्ण कमल से नवाजा जा चुका है. इसके अलावा इस फिल्म में अभिनय करने के लिए बाल कलाकार भनिता दास को सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है. रीमा दास को सर्वश्रेष्ठ फिल्म संपादन का भी पुरस्कार मिला. रीमा दास ही इस फिल्म की कैमरामैन भी हैं.

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रीमा दास व जया दास निर्मित तथा रीमा दास द्वारा लिखित व निर्देशित फिल्म ‘‘विलेज रौक स्टार्स’’ का विश्व प्रीमियर 2017 में ‘‘टोरंटों अंतरराष्ट्रीय फिल्मोत्सव’’ में हुआ था. यह फिल्म अब तक 30 अंतरराष्ट्रीय फिल्मोत्सवों का हिस्सा बन 70 से अधिक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार हासिल कर चुकी है.

‘‘औस्कर अवार्ड’’ के लिए भारतीय प्रविष्टि के रूप में अपनी फिल्म के चुने जाने पर ख़ुशी व्यक्त करते हुए रीमा दास कहती हैं- ‘‘मेरे पास कहने को शब्द नहीं हैं. आज मेरे लिए स्वर्णिम दिन है. फिल्म के निर्माण से लेकर औस्कर के लिए चुने जाने तक की एक लंबी यात्रा एक परी कथा सी लग रही है. यह पहली फिल्म है, जिसका चयन किया गया है. यह पूर्वोत्तर भारत का सम्मान है.’’

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‘‘विलेज रौक स्टार्स’, रीमा दास की दूसरी फिल्म है. इससे पहले उन्होने 2016 में फिल्म ‘‘अंर्तदृष्टि’’ का निर्माण व निर्देशन किया था. रीमा दास की तीसरी फिल्म ‘‘बुलबुल कैन सिंग’’ है जो कि ‘टोरंटो अंतरराष्ट्रीय फिल्मोत्सव’ के लिए चुनी गयी है.

फिल्म की कहानीः

फिल्म की कहानी रीमा दास के आसाम स्थित अपने पैतृक गांव छायगांव की पृष्ठभूमि पर दस वर्षीय बालिका धुनू (भनिता दास) के रौक स्टार बनने की कथा है. जो अपना म्यूजिक बैंड बनाने का सपना देखती है. धुनू छायगांव में अपनी विधवा मां (बसंती दास) और बड़े भाई मनवेंद्र (मनवेंद्र दास) के साथ रहती है. आखिरकार वह किस तरह तमाम प्राकृतिक आपदाओं व अन्य मुश्किलों का सामना कर अपने मकसद में कामयाब होती है. यह फिल्म में दिखाया गया है.

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इरफान खान की बंगाली व अंग्रेजी भाषा की फिल्म ‘‘नो बेड नो रोजेस’’:

इरफान खान के मुख्य अभिनय से सजी और इरफान खान द्वारा सहनिर्मित बांग्लादेश की प्रविष्टि फिल्म ‘‘नो बेड नो रोजेस’’ एक ऐसी फिल्म है, जिस पर पहले वहां के मशहूर फिल्मकार व लेखक हुमायूं अहमद की बायोपिक होने का आरोप लगाकर प्रतिबंध लगा दिया गया था. हुमायूं अहमद ने भी अपनी 28 वर्षीय पत्नी को तलाक देकर अपनी उम्र से 33 वर्ष छोटी अभिनेत्री के साथ निकाह किया था. बहरहाल, फिल्म ‘‘नो बेड नो रोजेस’’ के निर्देशक मोस्तफा सरवर फारूकी ने काफी लड़ाई लड़कर यह साबित किया कि उनकी फिल्म किसी भी इंसान की बायोपिक नहीं है, तब इस फिल्म पर से प्रतिबंध हटा था. अंततः यह फिल्म 27 अक्टूबर 2017 में बांग्लादेश में प्रदर्शीत हुई थी. इस फिल्म में निर्देशक मोस्तफा सरवर फारूकी की पत्नी नुसरत इमरोज तिषा ने ही इरफान खान के किरदार जावेद हसन की बेटी साबरी का किरदार निभाया है.

फिल्म के निर्देशक मोस्तफा सरवर फारूकी ने उस वक्त मीडियासे कहा था- ‘‘हमारी फिल्म ‘नो बेड नो रोजेस’ सत्य घटनाक्रमों पर आधारित है, जिसने बंगलादेश के न्यायिक मुस्लिम समाज की नींव हिलाकर रख दी. इसमें इस बात का चित्रण है कि हमारे समाज में औरतें किस तरह संघर्ष करते हुए निराशा में भी ताकत पाती हैं.’’

फिल्म को औस्कर के लिए चुने जाने पर वह कहते हैं- ‘‘मुझे उम्मीद है कि औस्कर में हमारी फिल्म को लोगों का प्यार मिलेगा.’’

फिल्म ‘‘नो बेड नो रोजेस’’ के निर्देशक मोस्तफा सरवर फारूकी अब तक ‘बैचलर’, ‘मेड इन बंगलादेश’, ‘थर्ड पर्सन सिंगुलर नंबर’, ‘टेलीवीजन’, ‘एंट स्टोरी’, ‘नो लैंड्स मैन’ सहित सात फिल्मों का निर्देशन कर चुके हैं.

‘‘नो बेड नो रोजेस’’ के निर्देशक मोस्तफा सरवर फारूकी की यह तीसरी फिल्म है, जिसे बांग्लादेश की तरफ से औस्कर में भेजा गया है. इससे पहले 2009 में उनकी फिल्म ‘‘थर्ड पर्सन सिंगुलर नंबर’’ और 2012 में ‘‘टेलीवीजन’’ को भेजा गया था.

‘‘नो बेड नो रोजेस’’ पहली बार ‘शंघाई अंतरराष्ट्रीय फिल्मोत्सव’ में 25 जून 2017 को दिखायी गयी थी. उसके बाद यह फिल्म ‘‘बुसान अंतरराष्ट्रीय फिल्मोत्सव’, कलकत्ता अंतरराष्ट्रीय फिल्मोत्सव’ सहित बीस से अधिक फिल्मोत्सवों में प्रदर्शित हुई. ‘‘मास्को अंतरराष्ट्रीय फिल्मोत्सव’’ में इस फिल्म को ‘‘कोमेरसंत वीकेंड पुरस्कार’’ से नवाजा गया.

कहानीः

अब्दुल अजीज, इफरान खान, अशोक धानुका और हिमांशु धानुका निर्मित तथा मोस्तफा सरवर फारूकी लिखित व निर्देशित फिल्म ‘‘नो बेड नो रोजेस’’ की कहानी बांग्लादेश के मशहूर फिल्म निर्देशक जावेद हसन (इरफान खान) के इर्द गिर्द घूमती है. जावेद हसन अपनी पत्नी माया (रोकिया प्राची) को तलाक देकर अपनी बेटी साबरी (नुसरत इरमोज तिषा) की सहपाठी नीतू (पमो मित्रा) के पिता की मौत के बाद नीतू के संग विवाह कर लेते हैं.उसके बाद कई विवाद उठते हैं.

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