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कभी इस तरह से ‘बैंगन का भरता’ खाया है आप ने

सामग्री :

बैंगन- 1,

प्याज – 2,

हरी मिर्च 3,

अदरक- 1½ इंच का टुकड़ा,

टमाटर- 2,

तेल – 4 बड़ा चम्मच,

जीरा – ½ छोटा चम्मच,

हींग- 2 चुटकी,

लाल मिर्च पाउडर – ½ चम्मच,

हल्दी पाउडर- ¼ चम्मच,

धनिया पाउडर- 2 चम्मच,

मेथी पाउडर- ½ छोटा चम्मच,

नमक- स्वादानुसार,

गरम मसाला- ½ छोटा चम्मच,

कटी हरा धनिया- 2-3 बड़ा चम्मच

सामग्री :

पिसा मटन – 200 ग्राम

प्‍याज – 1 बारीक कटा हुआ

आलू – 2 उबले हुए

कार्न फ्लोर – 1 कप

सिरका – 1 चम्‍मच

हरी मिर्च – 2

अदरक-लहसुन पेस्‍ट – 1 चम्‍मच

गरम मसाला – 1/2 चम्‍मच

मिर्च – 1/2 चम्‍मच

हरा धनिया – 2 चम्मच महीन कटा

चाट मसाला – 1/2 चम्‍मच

तेल – 1 कप

नमक – स्‍वादानुसार

विधि : 

– सबसे पहले पैन में एक चम्‍मच तेल गरम करें और उसमें प्‍याज डाल कर सुनहरा होने तक भूनें.

– अब उसमें कीमा डाल कर कुछ देर पकाएं और अदरक लहसुन पेस्‍ट और हरी मिर्च डाल कर फ्राई करें.

– हल्का भुनने के बाद लाल मिर्च, चाट मसाला, नमक और गरम मसाला मिला कर हल्‍की आंच पर पकाएं.

– इसके बाद कटी धनिया और आधा कप पानी डाल कर मटन को 10 मिनट के लिए ढंक कर पकाएं.

– जब मटन अच्‍छी तरह पक जाए तो गैस बंद करके इसे ठंडा होने के लिए अलग रख दें.

– ठंडा होने पर उबले हुए आलू को अच्‍छी तरह मसल कर इस मिश्रण में अच्‍छी तरह मिला लें.

– तैयार कीमा मिश्रण में स्‍वादानुसार नमक और कार्न फ्लोर को 2 चम्‍मच पानी के साथ घोल कर मिलाइए और इसे आटे की तरह गूंथ लीजिए.

– अब की छोटी छोटी लोई काट लें और हाथ से दबा कर कटलेट तैयार कर लें.

– कड़ाही में तेल गरम करने के लिए गैस पर चढ़ायें. अच्‍छी तरह गर्म होने पर उसमें कटलेट को सुनहरा होने तक तल लें.

– आपके मटन कटलेट तैयार हैं गर्मा गर्म सौस या चटनी के साथ सर्व करें.

इन 4 तरीकों से अपने बौयफ्रैंड को परखती हैं लड़कियां

हर रिलेशनशिप एक विश्वास और भरोसे पर टिकी हुई होती हैं, खासतौर से एक गर्लफ्रेंड और बौयफ्रेंड की. क्योंकि दोनों को यह शंका रहती है कि कहीं वह उसका फायदा तो नहीं उठा रहा हैं.

ऐसे में अपने बौयफ्रेंड को परखने के लिए लडकियां कुछ तरीके अपनाती हैं और जानना चाहती है कि बौयफ्रेंड उसके काबिल है या नहीं. तो आप बौयफ्रेंड भी इन संकेतों को जानकर खुद को उनके काबिल साबित कर सकते हैं.

तो आइये जानते हैं लड़कियों के परखने के इन तरीकों के बारे में.

दायरों को बढ़ाने की कोशिश

अगर वह आपको बेहतर तरीके से जानने के लिए दायरे बढ़ाती है तो समझ जाए कि वह आपका इम्तिहान ले रही है. असल में वह दायरे बढ़ाकर यह जानना चाहती है कि आप दबाव को कैसे हैंडल करते हैं.

अपने दोस्तों से मिलाना

रिलेशनशिप के मामले में लड़कियां अपने दोस्तों की सलाह जरूर लेती है. अगर वह आपको अपने दोस्तो से मिलाएं तो आप समझ जाएं कि वह आपका इम्तिहान ले रही है. ऐसे में आपको अपनी पार्टनर के दोस्तों के सवालों के लिए तैयार रहना चाहिए.

आपके कामों पर गौर करना

वैसे तो लड़कियां अपने बौयफ्रैंड के हर काम पर ध्यान रखती है. मगर टेस्ट लेते समय वह आपके शिष्टाचार, बात करने के तरीके से लेकर ड्रैसिंग सेंस पर भी गौर करती है इसलिए आप सावधान रहें.

फ्यूचर प्लानिंग करना

आपका इम्तिहान लेने के लिए गर्लफ्रैंड आपके साथ फ्यूचर प्लानिंग भी जरूर करती है. दरअसल, वह जानना चाहती है कि आप रिलेशनशिप को लेकर क्या सोच रहे हैं.

प्यार का व्यापार

जिंदगी के इस गणित में

दो और दो ना चार हैं,

अब तक समझ पाया न मैं

ये प्यार है, व्यापार है.

अश्क आंखों में नजर आते ही

ना समझो है गम.

दिल्लगी से भी बिगड़ जाए,

रहे ना अब वो हम.

ठूंठ हो कर रह चुका

गम आए इतनी बार हैं.

अब तक समझ पाया न मैं,

ये प्यार है, व्यापार है.

रूप सब के थे

मिलन के रंग से निखरे हुए.

अंजुमन में हर तरफ थे

फूल ही बिखरे हुए.

फिर भी पांवों के तले

अब क्यों जफा के खार हैं?

अब तक समझ पाया न मैं

ये प्यार है, व्यापार है.

इश्क की परछाइयों को

अब न पकड़ेंगे कभी.

हाथ आया था सिफर

और लुट गया मेरा सभी.

नुकसान का सौदा किया,

अपनी तो सब से हार है.

अब तक समझ पाया न मैं

ये प्यार है, व्यापार है.

       -अतुल जैन

बोर्डिंग स्कूल : ताक पर सुरक्षा और पढ़ाई

एक अच्छा महंगा वाला बोर्डिंग स्कूल लड़कियों की सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है. पैसे वाले बहुत से मातापिता यह सोच कर निश्चिंत हो जाते हैं कि उन्होंने जिस बोर्डिंग स्कूल में अपनी बेटी को भेजा है वह उसे पढ़ालिखा कर सक्षम भी बनाएगा और सुरक्षित भी रखेगा. वे ये दोनों चीजें पैसे से खरीदने की कोशिश करते हैं पर अफसोस यह है कि ये बोर्डिंग स्कूल एक साफ गटर से ज्यादा कुछ हो ही नहीं सकते.

जहां सिर्फ बहुत सी लड़कियां एकसाथ रहती हों वहां भी सुरक्षित और पढ़ने का माहौल होगा इस की कोई गारंटी नहीं है. उलटे वहां यही गारंटी है कि उद्दंड, टूटे हुए घरों की, मातापिता से दूर, प्यार की भूखी लड़कियां अपने बदन की जरूरतों को पूरा करने के लिए और ज्यादा खुली व निर्भय हो कर हर तरह के प्रयोग कर सकती हैं.

देहरादून के एक स्कूल में एक लड़की के साथ गैंगरेप और फिर स्कूल प्रबंधकों द्वारा घरेलू तरीकों से गर्भपात की कोशिश यह जताती है कि ये स्कूल कितने पिछड़े हैं. अच्छी बिल्डिंग, खेल का मैदान, बड़ा सारा मैस, हर हाथ में

मोबाइल, कंप्यूटर, स्ट्रिक्ट डिसिप्लिन इस बात की गारंटी नहीं है कि लड़कियां साफसुथरी होंगी. वे तो ऐसी गंगा में हैं जो सीवर से भी ज्यादा गंदी है.

इस लड़की के साथ स्कूल के 4 लड़कों ने ही गैंगरेप किया और पिता की शिकायत पर मामला दर्ज हुआ है. लड़की का गर्भपात कराने की कोशिश हो रही है. लड़कों की गिरफ्तारी हो गई है. पर क्या इस से कुछ सुधरेगा? यह मामला तो रोशनी में आ गया है पर ऐसा तो

हर बोर्डिंग स्कूल में होगा, क्योंकि वहां लड़कियां हों या लड़के, उद्दंडों की ही चलती है. सीधे सहमे रहते हैं और ब्लैकमेल होते  रहते हैं. उद्दंड हर तरकीब सीख जाते हैं. लड़कियों में भी गैंग बन जाते हैं, लड़कों में भी. ड्रग्स, शराब, सिगरेट, सैक्स, शैतानी, परपीड़न स्कूली जीवन का हिस्सा बन जाता है. बोर्डिंग स्कूल का कोई स्टूडैंट इन से भाग भी नहीं सकता.

घरों में रहने वाले बच्चे ज्यादा सुरक्षित हैं, नौकरों और आयाओं के सहारे पलने वाले भी. अकेले पिता के साथ बेटियां बोर्डिंगों से ज्यादा सुरक्षित रहेंगी. उन्हें हर समय मानसिक सुरक्षा मिलती रहेगी. दिन की परेशानी शाम को

तो हल हो सकती है. बोर्डिंग स्कूल में तो शिकायत करने वाले को हकारत से देखा जाता है. वहां स्कूल हर तरह की शिकायत दूर कर ही नहीं सकते चाहे कितना पैसा हो. वार्डन या संगीसाथी अपनापन नहीं दे सकते.

महंगे बोर्डिंग स्कूलों का धंधा प्रचार के बल पर चल रहा है पर इस प्रचार में कुछ बच्चों के अच्छे अंक, आधुनिक उपकरणों से सजी लैब्स, बढि़या जिम, भव्य औडिटोरियम हैं. पर इन सब के पीछे स्टूडैंट्स की घुटन, मानसिक परेशानियां, भीड़ में अकेलापन, रातदिन के कमैंट्स को कैसे देखेंगे. प्रचार सही है पर उसी पर निर्भर न रहें.

देशभर में बोर्डिंग स्कूल जम कर खुल रहे हैं. यह बहुत ही गलत तरीका है. इस का पर्याय ढूंढ़ना होगा. शायद घरों के आसपास किसी अंकलआंटी के पास 8-10 लड़कों को दिनभर या कभीकभार रातभर या कुछ दिनों के लिए कुछ पैसा दे कर छोड़ना ज्यादा आसान होगा. बोर्डिंग स्कूल तो घरों के पलते साफ बच्चों को और टूटे, बीमार घरों से आने वालों को एकसाथ ही रखेंगे.

बच्चे किए हैं तो जिम्मेदारी निभाएं, यह बोझ नहीं इनवैस्टमैंट है जो जीवनभर काम आएगी.

सूरत की ब्यूटी लेडी डौन : अस्मिता ने मचाया आतंक

गुजरात के सिल्क और डायमंड सिटी सूरत की गलियों में जिस समय खतरनाक हथियारों के साथ लेडी डौन अस्मिता गोहिल उर्फ भूरी निकलती थी, उस समय लोग थर्रा उठते थे. शहर के कारोबारियों और दुकानदारों की रूह कांप जाती थी. वे यह सोच कर डर जाते थे कि अब पता नहीं किस का नंबर आने वाला है. यह लेडी डौन सिर्फ गुंडागर्दी कर के रंगदारी ही नहीं वसूलती बल्कि फेसबुक और यूट्यूब पर भी काफी एक्टिव रहती थी.

सोशल मीडिया पर उस के 13 हजार से अधिक फालोअर्स हैं और ढाई हजार के करीब दोस्त हैं. आए दिन वह अपने फेसबुक एकाउंट पर नईनई वीडियो पोस्ट करती रहती है. कई वीडियो में वह अपने हाथों में नंगी तलवार और रिवौल्वर ले कर लोगों से रंगदारी वसूलती दिखी.

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अपराध की दुनिया में अस्मिता उर्फ डीकू उर्फ भूरी अपने आप को बीते जमाने की लेडी डौन उर्फ गौड मदर संतोषबेन जाडेजा के रूप में देखना चाहती थी. यह प्रेरणा उसे संतोषबेन जाडेजा के जीवन पर बनी फिल्म ‘गौड मदर’ से मिली थी. यह फिल्म अस्मिता ने कई बार देखी थी. इस फिल्म का अस्मिता गोहिल पर गहरा असर पड़ा था.

जिस धमाके के साथ अस्मिता गोहिल उर्फ डीकू उर्फ भूरी ने सूरत की जमीन पर कदम रखा था, उसे देख कर सूरत के अधिकांश लोगों को लेडी डौन गौड मदर संतोषबेन जाडेजा की याद ताजा हो गई थी.

सारा शहर उस के कारनामों से भयभीत हो गया था. उस का खौफ सूरत शहर के लोगों के बीच कुछ इस प्रकार घर कर गया था कि कोई भी उस के खिलाफ पुलिस के पास जाने और बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था. मजबूरन पुलिस को उस के वायरल हुए वीडियो को सबूत के तौर पर मान कर उस के खिलाफ काररवाई करनी पड़ी थी.

13 मार्च, 2017 के इस वीडियो में जहां सूरत के वराछा इलाके में लोग होली का त्यौहार मनाने में मस्त थे तो वहीं अस्मिता गोहिल अपने कारनामों में व्यस्त थी. वह अपने प्रेमी संजय हिम्मतभाई वाघेला और गोपाल विट्ठल जाधव के साथ हाथों में नंगी तलवार और चाकू लिए उन के बीच पहुंची थी. फिर उस ने भागीरथी मार्केट की गलियों में वहां के लोगों को डरातेधमकाते हुए वहां भय का माहौल बना दिया था. उस के डर से लोग सहम गए थे.

इस वीडियो के वायरल होते ही सूरत के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के कान खड़े हो गए थे. वे पता लगाने लगे कि ये कौन सी डौन थी, जिस के आतंक से वहां के लोग इतने सहमे हुए थे. मामले की गंभीरता को देखते हुए सीनियर पुलिस अधिकारियों ने वराछा के थानाप्रभारी मयूर पटेल से उस वीडियो की सच्चाई जानने के निर्देश दिए. सीनियर अधिकारियों के निर्देश पर थानाप्रभारी मामले की जांच में जुट गए.

जांच में थानाप्रभारी को पता लग गया कि वह लेडी और कोई नहीं, बल्कि अस्मिता गोहिल उर्फ डीकू उर्फ भूरी है. पुलिस को यह जानकारी मिल गई कि इस लेडी डौन का प्रेमी संजय हिम्मतभाई वाघेला उर्फ भूरा तो सूरत शहर का कुख्यात अपराधी है.

वह शहर के एक ट्रिपल मर्डर केस में वांछित है, जिस की काफी दिनों से पुलिस को तलाश है. इस के पहले कि वह पुलिस के हत्थे चढ़ता अस्मिता गोहिल उर्फ भूरी ने उस के साथ मिल कर वराछा की भागीरथी सोसायटी और मार्केट में कुछ इस तरह से अपना आतंक फैलाया कि मजबूरन लोगों की सुरक्षा के लिए पुलिस को वहां अपनी एक चौकी स्थापित करनी पड़ी थी.

उच्चाधिकारियों के आदेश पर थानाप्रभारी के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने अस्मिता और उस के प्रेमी की तलाश शुरू कर दी. उन के कई ठिकानों पर छापा मारने के बाद आखिरकार पुलिस को कामयाबी मिली और अस्मिता गोहिल पुलिस के हत्थे चढ़ गई. उस से पूछताछ करने के बाद उसे जेल भेज दिया गया. पुलिस ने अस्मिता के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया. लेकिन सबूतों के अभाव में उसे जमानत मिल गई थी. यानी 3 महीने बाद वह जेल से बाहर आ गई थी.

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3 महीने जेल में रहने के बाद भी अस्मिता उर्फ भूरी में कोई बदलाव नहीं आया था, बल्कि जेल जाने के बाद वह पूरी तरह निडर हो गई और पहले से ज्यादा आपराधिक मामलों में शामिल हो गई थी. वह संजय भूरा के जिगरी दोस्त राहुल उर्फ गोदो बामनिया और उस के दोस्तों को साथ ले कर सरेआम लोगों से रंगदारी वसूलती. इतना ही नहीं, वह लोगों के पैसे भी छीनने लगी.

20 वर्षीय सुंदरी अस्मिता गोहिल उर्फ डीकू उर्फ भूरी गुजरात के सौराष्ट्र काठियावाड़ के उसी इलाके की रहने वाली थी, जिस इलाके की लेडी डौन संतोषबेन जाडेजा थी. काले साम्राज्य की दुनिया में वह भी संतोषबेन जाडेजा की तरह अपना दबदबा बना कर सूरत शहर के लोगों पर गौड मदर बन कर राज कायम करना चाहती थी.

गरीब परिवार की थी लेडी डौन अस्मिता

अस्मिता गोहिल काठियावाड़ के जिला सोमनाथ तालुका ऊना के गांगडा गांव के रहने वाले एक गरीब किसान जीमुआभाई गोहिल की बेटी थी. गांव में उन की थोड़ी सी जमीन थी, जिस पर वह काश्तकारी करते थे. परिवार बड़ा होने के नाते उन्हें बाहर भी मेहनतमजदूरी करनी पड़ती थी. तब कहीं जा कर उन के परिवार की गाड़ी आगे सरकती थी.

उन के परिवार में पत्नी जसुबेन के अलावा एक बेटा और 6 बेटियां थीं. बेटा सब से छोटा था. अस्मिता गोहिल बड़ी बेटी होने के नाते पूरे परिवार की प्यारी और दुलारी थी. पिता ने तो अस्मिता को बेटे का स्थान दिया था.

चंचल स्वभाव की अस्मिता गोहिल का बचपन गरीबी में बीता था. यही कारण था कि वह अपनी उम्र के साथ तेजतर्रार और उग्र स्वभाव की महत्त्वाकांक्षी युवती बन गई थी. जिन चीजों का उस के पास अभाव था, वह उन्हें पाने के सपने देखा करती थी. उन सपनों को पूरा करने का आइडिया उसे लेडी डौन संतोष बेन जाडेजा की जिंदगी पर बनी फिल्म ‘गौड मदर’ देख कर मिल चुका था.

अस्मिता के पिता गरीब जरूर थे, लेकिन गांव में उन का मानसम्मान था. अन्य बच्चों की तरह वह अस्मिता को भी पढ़ाना चाहते थे लेकिन अस्मिता का मन स्कूल की पढ़ाई में कम और ग्लैमरस व आपराधिक गतिविधियों की तरफ अधिक रहता था.

किसी भी बात को ले कर वह अकसर अपने सहपाठियों से उलझ जाया करती थी. वह लड़कियों के बजाय लड़कों के साथ दिखना पसंद करती थी. यही वजह थी कि उस के दोस्तों में लड़कों की संख्या अधिक थी. उस की यह आदत घर वालों को पसंद नहीं थी.

सन 2015 के दौरान वह अपने ही गांव के एक बिगड़े हुए लड़के के साथ घर से गायब हो गई. थाने में उस के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई गई. लेकिन उस का कोई पता नहीं चला था. करीब एक साल तक गायब रहने के बाद एक दिन अस्मिता अपने प्रेमी के साथ खुद पुलिस थाने में हाजिर हो गई. दोनों से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने प्रेमी को जेल भेज दिया और अस्मिता को उस के मांबाप के हवाले कर दिया था.

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अस्मिता गोहिल के घर वालों ने उस के सारे गुनाह माफ कर के उसे अपने गले लगा लिया था, लेकिन एक साल तक बिगड़े हुए रईसजादे के साथ रहने के बाद अस्मिता को अपने घर का माहौल रास नहीं आया तो वह एक रात चुपके से घर से भाग कर सूरत में रहने वाले अपने मामा और मामी के पास चली गई थी. यहीं पर उस की मुलाकात भावनगर के रहने वाले कुख्यात अपराधी संजय हिम्मतभाई वाघेला उर्फ भूरा से हुई थी, जिस पर लूटपाट, मारपीट और मर्डर आदि के दरजनों मामले चल रहे थे.

संजय हिम्मतभाई वाघेला उर्फ भूरा और अस्मिता गोहिल की दोस्ती का पता जब उस के मामामामी को चला तो उन के पैरों तले से जमीन खिसक गई. उन्होंने अस्मिता को समझानेबुझाने की काफी कोशिश की, लेकिन उन की कोई भी बात अस्मिता गोहिल के गले से नीचे नहीं उतरी थी.

प्रेमी के साथ रखा अपराध में कदम

मामामामी की बातों पर ध्यान देने के बजाय अस्मिता उन का घर छोड़ कर संजय उर्फ भूरा के साथ रहने के लिए चली गई और उस के साथ लिवइन में रहने लगी. संजय के साथ रहने और उस के साथ आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के कारण लोग अस्मिता को भूरी डौन के नाम से पुकारने लगे थे.

ब्यूटी डौन बनी अस्मिता गोहिल उर्फ डीकू उर्फ भूरी का इलाके में खासा नाम हो गया था. जब उस के पास पैसा आया तो वह अच्छे रहनसहन के साथ अपने शौक पूरे करने में लग गई. क्रूजर मोटरसाइकिल, लग्जरी कार उस की पसंद बन गई थी, जिस के साथ फोटो खिंचवा कर वह फेसबुक और इंस्टाग्राम पर डालती रहती थी.

लोग उस की सुंदरता और अदाओं पर जम कर कमेंट करते थे. लेकिन जब वह उस का अपराधों से भरा प्रोफाइल देखते तो उन का सिर चकरा जाता था. अस्मिता गोहिल उर्फ डीकू उर्फ भूरी अपने इन्हीं वाहनों पर सवार हो कर के लोगों से रंगदारी वसूलती थी.

आतंक का पर्याय बन चुकी लेडी डौन अस्मिता गोहिल के अपराधों की जानकारी तो समयसमय पर पुलिस को मिलती रहती थी, लेकिन किसी शिकायतकर्ता के सामने न आने के कारण पुलिस बेबस रहती थी. वह चाह कर भी उस के खिलाफ काररवाई नहीं कर पाती थी.

मगर पुलिस भी हाथों पर हाथ रख कर नहीं बैठी थी. वह उस की हर हरकत पर नजर रख रही थी और इस में उसे सफलता भी मिली. पुलिस के हाथ अस्मिता गोहिल का एक और वीडियो लग गया, जिस से अस्मिता गोहिल और उस के साथियों के कारनामों का परदा हट गया था.

21 मई, 2018 को वायरल हुए इस वीडियो में अस्मिता गोहिल और उस के साथियों का चेहरा सामने आ गया था. उस दिन सुबह के साढ़े 6 बजे ही भागीरथी सोसायटी की मार्केट के एक एंब्रायडरी कारखाने में तोड़फोड़ करते हुए व उस के मालिक को डरातेधमकाते हुए अस्मिता उर्फ भूरी और उस के साथी कैमरे में कैद हो गए.

इस के एक घंटे बाद ही वह अपने एक और साथी राहुल उर्फ गोदो बामनिया के साथ अपनी क्रूजर मोटरसाइकिल पर सवार हो कर वर्षा सोसायटी की एक पान की दुकान पर पहुंची. दुकानदार को डरा कर उस ने उस के गल्ले का सारा पैसा ले लिया. इतना ही नहीं, उस ने उसे भद्दी गालियां भी दीं.

आतंक बढ़ने पर कस गया शिकंजा

वह अपने हाथों में जिस समय नंगी तलवार ले कर पान की दुकान पर आई थी, उसी समय दुकान पर इक्केदुक्के ग्राहक चुपचाप वहां से खिसक गए. पान वाले के साथ ही साथ वहां से गुजरने वाला एक दूध वाला भी उस का शिकार बन गया था. राहुल और भूरी ने उसे रोक कर उस के पास से सारे पैसे छीन लिए थे.

एक ही दिन में अस्मिता गोहिल के अपराधों के 2 वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया था. सूरत पुलिस कमिश्नर सतीश शर्मा ने वराछा और शहर के अन्य थानों के थानाप्रभारियों को आड़े हाथों लिया और उन्हें सख्त काररवाई के आदेश दिए थे. पुलिस कमिश्नर के सख्त आदेश पर पुलिस और क्राइम ब्रांच ने अस्मिता गोहिल उर्फ भूरी को घटना के 5 दिनों बाद ही उस के साथियों के साथ गिरफ्तार कर लिया.

अस्मिता गोहिल उर्फ डीकू उर्फ भूरी के खिलाफ सूरत शहर के विभिन्न थानों में एक दरजन से अधिक मामले दर्ज हैं. लेडी डौन से विस्तृत पूछताछ कर पुलिस ने इस बार उस पान वाले और एंब्रायडरी कारखाने के मालिक को भी ढूंढ कर उन की शिकायत ली फिर सीसीटीवी के फुटेज भी जब्त कर लिए.

इस के आधार पर भूरी के खिलाफ मामला दर्ज कर उस के साथी राहुल उर्फ गोदो बामनिया, भावेशभाई, रणछोड़ देसाई, संजय मनुभाई को 26 मई, 2018 को कोर्ट में पेश कर लाजपोर जेल भेज दिया.

लेडी डौन अस्मिता गोहिल उर्फ भूरी और उस के साथियों के जेल जाने के बाद सूरत शहर के कारखाना मालिकों और दुकानदारों के साथ ही साथ आम जनता ने भी राहत की सांस ली. लेकिन उस के डर से वे पूरी तरह मुक्त नहीं हुए हैं.

उन का मानना है कि आज नहीं तो कल वह जेल से बाहर आएगी, मगर पुलिस का यह दावा है कि इस बार लेडी डौन अस्मिता गोहिल उर्फ भूरी के जेल से बाहर आने की संभावना न के बराबर है. क्योंकि इस बार उन के पास अस्मिता गोहिल के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं. पुलिस के दावों में कितना दम है, यह तो वक्त ही बताएगा.

कथा लिखे जाने तक अस्मिता गोहिल अपने साथियों के साथ जेल की सलाखों में बंद अपनी रिहाई के दिन गिन रही थी.

ऐसे करें टमाटर का इस्तेमाल, खिल उठेगी त्वचा

टमाटर खाने का एक महत्वपूर्ण अंग है. खाने की ग्रेवी में, सलाद में इसका उपयोग प्रमुख है. टमाटर में स्वाद के अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण गुण भी हैं. इस खबर में हम इससे सेहत पर पड़ने वाले असर के बारे में जानेंगे.

टमाटर स्वस्थ त्वचा के लिए काफी लाभकारी है. इसके अलावा ये एक प्रभावशाली एंटीऔक्सिडेंट है. इसके रोजाना सेवन से ब्लड प्रेशर की समस्या में भी काफी राहत मिलती है. टमाटर विटामिन सी, विटामिन के, लोहा, फोलेट, पोटेशियम और अन्य पोषक तत्वों का महान स्रोत हैं.

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टमाटर से मिलती है बेदाग खूबसूरती

टमाटर एक बेहद प्रभावशाली एंटीऔक्सिडेंट होता है, इसे लाइकोपीन भी कहते हैं, इससे ना केवल लाल रंग प्रदान करता है, बल्कि कोलेस्ट्रौल की कमी, दृष्टि सुधार और त्वचा के सुधार में सुधार के लिए काफी लाभप्रद है.

हटाए त्वचा की काली परत

चेहरे की सुंदरता बनाने के लिए टमाटर काफी कामगर है. इसको चेहरे पर पड़ी काली परत को हटाने में भी इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए आप टमाटर को दो या चार हिस्सों में काट लें, इसके बाद इसे त्वचा के प्रभावित हिस्सों में रगड़ें.

health benefits of tomatoes

त्वचा की ये परेशानियां भी होंगी खत्म

इसके अलावा आप टमाटर का प्रयोग सनबर्न, डलनेस हटाने त्वचा में टोन लाने के लिए भी कर सकते हैं. इसके लिए आपको टमाटर और दही का पैक बना के चेहरे पर लगाना होगा. इस पैक को त्वचा पर 15 मिनट के लिए लगाएं फिर ठंडे पानी से धो लें. इससे आपकी त्वचा के टोन में काफी सुधार आएगा और आपको ताजगी महसूस होगी. इसका प्रयोग आपको कुछ दिनों तक करना होगा. जिसके बाद खुद आपको इसका असर दिखेगा.

मुंहासो में लाभकारी

मुंहासों को हटाने में भी टमाटर काफी असरदार हैं. टमाटर के विटामिन ए, सी, के और अम्लीय गुण आपके चेहरे से मुंहासे को कम करने और साफ करने में सहायता करते हैं. बस अपने चेहरे पर पल्प लगाएं और परिणाम को देखने के लिए 10 मिनट के बाद इसे धो लें.

पत्नी की प्रेम लहर में सिमट गया पति का वजूद 

इसी साल 19 सितंबर की बात है. रोशनलाल यादव को बैंक में काम करते-करते काफी देर हो गई थी. रोशनलाल जयपुर में गवर्नमेंट हौस्टलचौराहे के पास स्थित सिटी बैंक की शाखा में मैनेजर थे. वैसे तो उन्हें आमतौर पर रोजाना ही शाम के 7-8 बज जाते थे. इस की वजह यह थी कि निजी बैंकों में सरकारी बैंकों की तरह सुबह 10 से शाम 5 बजे तक की ड्यूटी नहीं होती है. हालांकि निजी बैंकों में भी ड्यूटी आवर्स होते हैं, लेकिन सारी जिम्मेदारियां मैनेजर की होती हैं. इसीलिए उन्हें बैंक से निकलने में रात के साढ़े 8 बज गए थे.

दिन भर कामकाज करने और उच्चाधिकारियों के ईमेल, वाट्सऐप के जवाब देतेदेते रोशनलाल भी थक गए थे. काम की व्यस्तता में वह शाम की चाय भी नहीं पी सके थे. जोरों की भूख भी लग रही थी. वे जल्द घर पहुंच कर फ्रैश होने के बाद भोजन करना चाह रहे थे.

रोशनलाल ने बैंक के बाहर खड़ी अपनी कार निकाली और घर की ओर चल दिए. उन के साथ बैंक का एक कर्मचारी उन की कार में पानीपेच चौराहे तक साथ आया, वह पानीपेच चौराहे पर उतर गया.

रोशनलाल जयपुर के करधनी इलाके में गणेश नगर विस्तार कालोनी में पत्नी और बच्चों के साथ रहते थे. कोई पुराना गीत गुनगुनाते हुए रोशनलाल अपनी कार मध्यम रफ्तार से चला रहे थे. रास्ते में उन्हें सिगरेट पीने की तलब लगी तो अपने घर से करीब एक किलोमीटर पहले रास्ते में कार रोक दी. कार से उतर कर वह दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर के पास एक थड़ी पर सिगरेट लेने चले गए. सिगरेट ले कर वह अपनी कार में आ कर बैठे ही थे कि सामने से अचानक एक स्कूटी पर सवार 2 युवक तेजी से उन की कार के सामने आ गए.

स्कूटी से उतर कर एक युवक उन के पास आया और नजदीक से 2 फायर कर दिए. दोनों गोलियां रोशनलाल के सीने में लगीं यह रात करीब 9 बजे की घटना है. गोली चलते ही उस इलाके में अफरातफरी मच गई. यह इलाका रोशनलाल के घर के पास था, इसलिए कुछ लोग उन्हें जानते पहचानते थे.

आसपास के लोग रोशनलाल को उन की ही कार से नजदीकी निजी अस्पताल ले गए. निजी अस्पताल के डाक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उन की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें सवाई मानसिंह अस्पताल ले जाने को कहा.

रोशनलाल को निजी अस्पताल ले जाने वाले लोग जब उन्हें सवाई मानसिंह अस्पताल ले जा रहे थे तो उन्होंने रास्ते में करधनी पुलिस थाने पर रुक कर पुलिस को इस घटना के बारे में बता दिया. थाने में ही खड़ी सरकारी एंबुलेंस से एक पुलिसकर्मी के साथ रोशनलाल को सवाई मानसिंह अस्पताल भेजा गया. साथ ही उन के परिजनों को भी सूचना दे दी गई.

सूचना मिलने पर रोशनलाल की पत्नी निर्मला यादव और कुछ सगेसंबंधी सीधे अस्पताल पहुंच गए. अस्पताल में डाक्टरों ने रोशनलाल की जिंदगी बचाने का हरसंभव प्रयास किया, लेकिन रात करीब सवा 11 बजे उन की मृत्यु हो गई.

बैंक मैनेजर रोशनलाल पर हुई फायरिंग की जानकारी मिलने पर पुलिस ने घटनास्थल पर जा कर जांचपड़ताल की. पुलिस ने फायरिंग करने वाले बदमाशों का पता लगाने के लिए घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले, लेकिन पुलिस को रात भर की भागदौड़ के बाद भी बदमाशों का कुछ पता नहीं चला. केवल इतना ही पता चल पाया कि बदमाश पहले से ही घात लगा कर बैठे थे. वे लोग रोशनलाल का बैंक से लौटने का इंतजार कर रहे थे.

दूसरे दिन रोशनलाल के बड़े भाई कोटपुतली निवासी रत्तीराम यादव की रिपोर्ट पर थाना करधनी में रोशनलाल की हत्या का मामला आईपीसी की धारा 302 व 34 में दर्ज कर लिया गया. पोस्टमार्टम कराने के बाद पुलिस ने रोशनलाल का शव उन के घर वालों को सौंप दिया.

मुकदमा दर्ज होते ही पुलिस जांच में जुट गई. पुलिस ने मृतक की पत्नी निर्मला सहित परिवार के लोगों और बैंककर्मियों से पूछताछ कर के पता लगाने का प्रयास किया कि क्या उन की किसी से दुश्मनी थी. पुलिस ने बैंक के उस कर्मचारी से भी पूछताछ की, जो रोशनलाल के साथ पानीपेच चौराहे तक आया था.

उस ने बताया कि रास्ते में चिंकारा कैंटीन के पास रोशनलाल के मोबाइल पर एक फोन आया था, जिस पर वे कुछ देर तक बात करते रहे थे. फोन किस का था, यह उसे पता नहीं. वह पूरा दिन करीब सौ लोगों से पूछताछ, मौकामुआयना और कैमरों की फुटेज की जांच में निकल गया. रात तक हत्यारों के बारे में कुछ पता नहीं चला.

रोशनलाल मूलरूप से जयपुर जिले के कोटपुतली के रहने वाले थे. उन की मौत की सूचना मिलने पर उन के गांव से भी कुछ लोग जयपुर आ गए थे. पुलिस ने उन से भी पूछताछ कर के रोशनलाल के हत्यारों का पता लगाने की कोशिश की, लेकिन इस से कोई खास मदद नहीं मिल सकी.

पुलिस की जांच में 2-3 बातें मुख्यरूप से सामने आईं. एक तो यह कि रोशनलाल बैंक में कामर्शियल वाहनों के लोन मंजूर करते थे. बैंक से लोन देने के अलावा वह निजी रूप से भी ब्याज पर लोगों को पैसा उधार देते थे. रोशनलाल ने कुछ लोगों को मोटी रकम भी उधार दे रखी थी. एक महत्त्वपूर्ण बात यह भी पता चली कि पत्नी निर्मला से उन का अकसर झगड़ा होता रहता था. निर्मला ने करीब 4 महीने पहले मारपीट की शिकायत पुलिस को दी थी.

पुलिस इन तीनों कोणों से जांच करने में जुट गई. इस के लिए जयपुर के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (प्रथम) नितिन दीप ब्लग्गन के निर्देश पर पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) अशोक कुमार गुप्ता ने अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (प्रथम) रतन सिंह और झोटवाड़ा के सहायक पुलिस आयुक्त आस मोहम्मद के सुपरविजन में करधनी थानाप्रभारी मानवेंद्र सिंह चौहान, मुरलीपुरा, झोटवाड़ा व कालवाड़ के थानाप्रभारियों और इंसपेक्टर जहीर अब्बास के नेतृत्व में अलगअलग स्पैशल टीमें गठित कीं.

इस बीच पुलिस ने रोशनलाल के मकान के आसपास के लोगों से पूछताछ की तो लोगों ने उमेश शर्मा पर शक करते हुए उस के मोबाइल नंबर भी दे दिए. उमेश पहले रोशनलाल के पड़ोस में ही रहता था. पारिवारिक बातों को ले कर रोशनलाल, उन की पत्नी निर्मला और उमेश के बीच कई बार झगड़े होते थे.

बाद में उमेश वहां से अपना खुद का मकान खाली कर के जयपुर में ही मानसरोवर कालोनी में रहने लगा था. उस ने गणेश नगर विस्तार के अपने मकान के 2 कमरे किराए पर दे दिए थे. अपने मकान की देखभाल के बहाने उमेश आए दिन इस कालोनी में आता रहता था.

पुलिस ने उमेश के मोबाइल नंबरों की लोकेशन खंगाली तो उत्तराखंड की आई. पुलिस ने उत्तराखंड पुलिस की मदद से 21 सितंबर को उमेश और उस के 3 साथियों को अल्मोड़ा से पकड़ लिया.

मृतक की पत्नी भी थी शामिल

पुलिस इन सब को जयपुर ले आई. उमेश ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि उस ने बैंक मैनेजर रोशनलाल की हत्या अपने भाई की मार्फत उत्तर प्रदेश के शूटरों को सुपारी दे कर करवाई थी.

उमेश ठेकेदारी करता था. इसी काम के बहाने वह रोशनलाल की हत्या से करीब 10 दिन पहले उत्तराखंड चला गया था. उत्तराखंड से ही वह मोबाइल के जरिए रोशनलाल की गतिविधियों पर नजर रखे हुए था. उस ने यह काम शातिराना तरीके से इसलिए किया था, ताकि उस की लोकेशन जयपुर में न आए.

उमेश ने पुलिस को बताया कि रोशनलाल की हत्या की साजिश में उन की पत्नी निर्मला भी शामिल थी. इस पर पुलिस ने निर्मला को थाने बुला कर पूछताछ की. निर्मला और उमेश से अलगअलग और आमनेसामने बैठा कर की गई पूछताछ में रोशनलाल की हत्या का राज खुल कर सामने आ गया.

इस से यह बात भी साफ हो गई कि निर्मला ने ही उमेश के साथ मिल कर अपने बैंक मैनेजर पति की हत्या करवाई थी. निर्मला को प्रेमी के साथ पति की संपत्ति भी चाहिए थी, इसलिए उस ने रोशनलाल को तलाक देने के बजाय उन की हत्या करवा दी.

यह रोशनलाल का दुर्भाग्य था कि निर्मला की बेवफाई का पता होने के बावजूद वह अपनी जान नहीं बचा सके. उन्हें यह बात अच्छी तरह पता थी कि उन की पत्नी एक दिन उस की हत्या करा देगी. फिर भी वह इतने दरियादिल थे कि अपनी पत्नी की उस के प्रेमी से शादी कराने को भी तैयार हो गए थे. लेकिन निर्मला का प्रेमी उमेश समय पर अदालत नहीं पहुंचा, जिस से दोनों की शादी नहीं हो सकी.

निर्मला यादव और उमेश शर्मा से पूछताछ के आधार पर पुलिस के सामने जो कहानी आई, वह इस तरह थी—

रोशनलाल यादव जयपुर जिले के कोटपुतली के पवाना गांव के रहने वाले थे. सन 2004 में रोशन का विवाह निर्मला से हो गया. वह उन से उम्र में 6 साल छोटी थी. जब निर्मला की शादी हुई, तब वह 11वीं कक्षा में पढ़ती थी. उन्होंने शादी के बाद निर्मला को एमए तक पढ़ाया. साथ ही फैशन डिजाइनिंग का कोर्स भी कराया.

नौकरी के दौरान रोशनलाल की जहां भी पोस्टिंग हुई, उन्होंने निर्मला को अपने साथ रखा. बैंक में बड़े पद पर होने के कारण रोशन की तनख्वाह भी अच्छी थी. घर में कभी किसी चीज की कमी नहीं रही.

8 साल पहले सन 2010 में जयपुर में पोस्टिंग होने पर रोशनलाल ने करधनी में एक प्लौट ले कर अपना मकान बनवा लिया. उसी दौरान उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के नई आबादी रैना गांव के रहने वाले उमेश शर्मा ने भी रोशनलाल के पड़ोस में मकान बनवाया. दोनों ने एक ही दिन अपनेअपने मकान में गृह प्रवेश किया.

रोशनलाल और उमेश के बीच बन गए पारिवारिक संबंध

उमेश शर्मा 2003 के आसपास जयपुर आया था. उस समय जयपुर में प्रौपर्टी बाजार में बूम आया हुआ था. उमेश ने प्रौपर्टी में रकम लगा कर काफी पैसा कमाया. वह अमीरों की तरह जिंदगी जीता था. फिलहाल उस के पास करधनी इलाके में 2 मकान और अजमेर रोड पर बिचून में 15 बीघा जमीन थी. कई प्रौपर्टीज में उस ने मोटा पैसा लगा रखा था. अब वह ठेकेदारी का काम भी करने लगा था.

पड़ोसी होने के नाते उमेश व रोशनलाल के परिवार के बीच अच्छे संबंध थे. एकदूसरे के घर आनाजाना लगा रहता था. दोनों परिवार एकदूसरे के सुखदुख में भी काम आते थे. सन 2016 में उमेश और रोशनलाल सहित कालोनी के कई परिवार शिमला घूमने गए.

शिमला में उमेश की निर्मला से नजदीकियां बढ़ गईं. शिमला से जयपुर लौटने के कुछ दिन बाद ही निर्मला के भाई की मौत हो गई. उस समय सांत्वना देने के लिए उमेश का पूरा परिवार कई बार निर्मला के घर गया.

जनवरी 2017 में उमेश और निर्मला के बीच मोबाइल पर एसएमएस और वाट्सऐप के माध्यम से चैटिंग होने लगी. कभीकभी दोनों मोबाइल पर भी बातें कर लेते थे. बाद में दोनों के बीच शारीरिक संबंध बन गए. पहले दोनों छिप कर मिलते थे. बाद में जब उन के संबंधों की चर्चा पासपड़ोस में होने लगी तो रोशनलाल को इस बात का पता चल गया.

उन्होंने निर्मला को काफी भलाबुरा कहा और समझाया भी. इस के बाद दोनों परिवारों में झगड़े होने लगे. निर्मला से अवैध संबंधों को ले कर कई बार उमेश और रोशनलाल के बीच मारपीट की नौबत भी आ गई थी.

बाद में नवंबर 2017 में उमेश शर्मा गणेश नगर विस्तार करधनी का अपना मकान खाली कर के मानसरोवर कालोनी में रजतपथ पर किराए के मकान में रहने लगा. उमेश ने रोशनलाल के पड़ोस का अपना मकान किराए पर दे दिया था.

उमेश भले ही रोशनलाल के मकान से 20 किलोमीटर दूर रहने लगा था, लेकिन निर्मला से उस की बातचीत होती रहती थी. इतना जरूर हुआ था कि अब निर्मला और उमेश का मिलनाजुलना कम हो गया था. फिर भी जैसे ही मौका मिलता, तब दोनों एकदूसरे से मिल लेते थे.

निर्मला करती थी पति को निपटाने की बात

निर्मला जब भी उमेश से मिलती, तो उस से अपने पति रोशनलाल को रास्ते से हटाने की बात कहती थी, ताकि दोनों बिना किसी डर के एकदूसरे के साथ रह सकें.

उमेश तो पहले से ही निर्मला के प्यार में अंधा हो चुका था. निर्मला के बारबार कहने पर उस ने इसी साल अप्रैल में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले अपने सगे भाई राहुल शर्मा को रोशन की हत्या की जिम्मेदारी सौंप दी. राहुल ने रोशन की हत्या करवाने के लिए अपने भाई से 4 लाख रुपए लिए.

राहुल के खिलाफ उत्तर प्रदेश में मारपीट, लूट और वाहन चोरी के कई मामले दर्ज थे. राहुल ने जयपुर के जगतपुरा में टीएस टेक्सटाइल्स नाम से बैडशीट बनाने की फैक्ट्री लगा रखी थी, जिस में उसे काफी नुकसान हुआ था. वह कर्ज में डूबा हुआ था. राहुल भी पहले गणेश नगर विस्तार में ही रहता था. बाद में वह जगतपुरा में रहने लगा था.

राहुल ने रोशनलाल की हत्या के लिए उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद के शूटर शिवकांत उर्फ लालू, पप्पू कश्यप और विष्णु कश्यप नाम के बदमाशों से संपर्क किया. संपर्क होने के बाद राहुल ने इन बदमाशों को जयपुर बुलाया. बदमाश हथियार ले कर जयपुर पहुंचे. राहुल ने 29 मई से 1 जून तक तीनों बदमाशों को जयपुर के एक होटल में ठहराया. राहुल ने रोशल की हत्या के लिए एडवांस के तौर पर शूटर शिवकांत को 30 हजार रुपए, विष्णु को 15 हजार और पप्पू कश्यप को 10 हजार रुपए दिए थे. राहुल ने भाई उमेश से लिए 4 लाख रुपए में से बाकी पैसे अपना कर्ज चुकाने में खर्च कर दिए थे.

इस दौरान राहुल ने इन बदमाशों से रोशनलाल की उन के मकान, सिटी बैंक और कोटपुतली के पास स्थित गांव के आसपास की रैकी करवाई. उमेश शर्मा इन शूटरों से फिरोजाबाद और जयपुर में तो मिला ही, रोशनलाल की रैकी में कई बार उन के साथ भी रहा.

रैकी के दौरान निर्मला अपने पति रोशन के आनेजाने की पूरी सूचना उमेश को देती रही. कई बार कोशिशों के बावजूद उत्तर प्रदेश से आए शूटरों को रोशनलाल की हत्या का मौका नहीं मिला. बाद में तीनों शूटर जयपुर से वापस चले गए.

2 सप्ताह बाद ही राहुल ने फिरोजाबाद से तीनों शूटरों को फिर जयपुर बुलाया. उन्हें 15 और 16 जून को गोपालपुरा के एक होटल में ठहराया गया. इस बार भी राहुल और उमेश ने रोशनलाल की रैकी करवाई, लेकिन शूटर अपने मकसद में कामयाब नहीं हो सके.

इस बीच उमेश शर्मा से मुलाकात होने और कई जगह रैकी में साथ रहने के दौरान फिरोजाबाद से आए शूटरों को पता चला कि राहुल तो केवल मोहरा है. रोशनलाल की जान तो उमेश शर्मा लेना चाहता है और उमेश काफी मोटी आसामी है, इसलिए शूटरों ने राहुल से रोशनलाल को मारने के एवज में अपनी डिमांड बढ़ा कर 15 लाख रुपए कर दी.

राहुल उन दिनों कर्ज में डूबा हुआ था. रोशनलाल की हत्या की सुपारी के नाम पर वह अपने भाई उमेश से 4 लाख रुपए पहले ही ले चुका था. दूसरी ओर एकएक दिन गिन रही निर्मला लगातार उमेश पर रोशन को मरवाने के लिए दबाव बना रही थी. इस पर उमेश ने अपने भाई राहुल पर रोशनलाल की जल्द से जल्द हत्या करवाने या 4 लाख रुपए वापस लौटाने का दबाव बनाया.

भाई पर दबाव बना कर उमेश उत्तराखंड चला गया. उसे उम्मीद थी कि जल्दी ही रोशनलाल का खेल खत्म हो जाएगा. इसलिए अपने बचाव के लिए वह अपने साथी महेंद्र प्रताप उर्फ टीटू के साथ अल्मोड़ा में कार्यरत अपने साले आकाश रावत के पास चला गया.

महेंद्र प्रताप उर्फ टीटू को रोशनलाल की हत्या की साजिश और पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी. वह उमेश के गांव के पास का ही रहने वाला था और दोनों भाइयों उमेश व राहुल का खास दोस्त था. उमेश ने महेंद्र प्रताप को काफी पैसा भी दे रखा था.

निर्मला ने प्रेमी को दिया था उलाहना

18 सितंबर को निर्मला ने मोबाइल पर उमेश से बात कर के अभी तक काम न होने का उलाहना दिया. इस पर उमेश ने अपने भाई राहुल को रोशन की हत्या या पैसे वापस करने का अल्टीमेटम दे दिया. उन दिनों राहुल का भांजा फरीदाबाद निवासी मनीष उर्फ सनी जयपुर आया हुआ था. आखिरकार राहुल ने अपने भांजे के साथ मिल कर रोशनलाल की हत्या करने का फैसला किया.

राहुल ने मनीष के साथ मिल कर 19 सितंबर की रात करीब 9 बजे फायरिंग कर के रोशनलाल की हत्या कर दी. रोशन को गोलियां मारने के तुरंत बाद राहुल ने उमेश को फोन कर के बता दिया कि रोशन को मार दिया. रोशनलाल की मौत की सूचना मिलने के बाद उमेश के साले आकाश रावत ने राहुल के बैंक खाते में 20 हजार रुपए ट्रांसफर कर दिए.

पुलिस ने रोशनलाल की हत्या के मामले में उस की पत्नी निर्मला यादव और उस के प्रेमी उमेश शर्मा के अलावा जयपुर के करधनी इलाके में गणेश नगर विस्तार के रहने वाले महेंद्र प्रताप ओझा उर्फ टीटू, उमेश के साले आकाश रावत और फिरोजाबाद के शूटर शिवकांत उर्फ लालू को गिरफ्तार कर लिया.

इन में आकाश रावत मूलत: आगरा के सिकंदरा थानांतर्गत शास्त्रीपुरम का रहने वाला था. वह आजकल उत्तराखंड में जिला ऊधमसिंह नगर के रुद्रपुर में रह रहा था. पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल की गई राहुल की स्कूटी उस के घर से बरामद कर ली.

पूछताछ में यह बात भी सामने आई कि रोशनलाल ने लोगों को करीब 50 लाख रुपए ब्याज पर दे रखे थे. निर्मला इस रकम के साथसाथ रोशनलाल की सारी संपत्तियां लेना चाहती थी. इसलिए वह रोशन से तलाक लेने के बजाय उस की हत्या करवाना चाहती थी.

उमेश ने भी रोशनलाल से मोटी रकम ब्याज पर ले रखी थी. उमेश चाहता था कि रोशनलाल मारा जाए तो पैसे नहीं चुकाने पड़ेंगे. इसलिए उस ने रोशन की मौत का सौदा किया. वह निर्मला के सामने यह दिखावा करता रहा कि वह यह सब उस के प्रेम की वजह से कर रहा है.

पत्नी के प्रेमी से शादी कराने को राजी हो गए थे रोशनलाल

उमेश और निर्मला के अवैध संबंधों के बारे में रोशनलाल को सब से पहले उमेश की पत्नी ने ही बताया था. इस के दूसरे ही दिन रोशन ने घर में नया मोबाइल चार्जिंग के लिए लगा देखा तो निर्मला से पूछा. उस ने बताया कि यह मोबाइल उमेश ने दिया है.

रोशन ने पत्नी से मोबाइल का लौक खुलवाया. मोबाइल में निर्मला और उमेश के बीच हुई वाट्सऐप चैटिंग देख कर रोशनलाल अपनी 2 बेटियों और 3 साल के बेटे के भविष्य और अपनी प्रतिष्ठा के कारण खून का घूंट पी कर रह गए.

निर्मला का उमेश के प्रति लगातार बढ़ा झुकाव देख कर रोशनलाल अपने बच्चों का भविष्य बचाने के लिए उस की शादी उमेश से कराने को भी तैयार हो गए थे. पतिपत्नी कोर्ट में पहुंच भी गए, लेकिन वहां पर उमेश नहीं आया.

इस के कुछ दिन बाद तक रोशन के घर में शांति रही. निर्मला उमेश से नहीं मिली लेकिन कुछ दिन बाद ही वह फिर उस से मिलने लगी. एक दिन रोशन ने दोनों को देख लिया तो निर्मला ने कहा कि उमेश ने उस के साथ जबरदस्ती की है.

तब रोशन ने उस से कहा कि अगर जबरदस्ती की है तो उमेश के खिलाफ बलात्कार का केस दर्ज कराने चलो. निर्मला थाने पहुंच भी गई, लेकिन उमेश के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने से पहले ही वह बदल गई. वह आगे से उमेश से न मिलने का वादा कर के रोशनलाल को मना कर बिना रिपोर्ट दर्ज कराए घर वापस लौट आई.

इस के कुछ दिन बाद करीब एक साल पहले निर्मला अपने ढाईतीन साल के बेटे को गोद में ले कर प्रेमी उमेश के साथ भागने के लिए घर से निकल गई. निवारू रोड पर वह उमेश से मिलने के बाद अपने रिश्तेदार के घर चली गई. बाद में रोशन उसे समझाबुझा कर घर ले आए.

निर्मला प्रेमी के प्यार में इतनी अंधी हो गई थी कि वह अपने प्रेमी और उस के रिश्तेदारों के जरिए पति को धमकी भरे फोन करवाती, फिर खुद ही पड़ोसियों से जा कर कहती कि पति को कोई जान से मारने की धमकी दे रहा है. हत्या से करीब एक सप्ताह पहले निर्मला और रोशनलाल के बीच झगड़ा हुआ. मामला पुलिस तक पहुंच गया.

रोशन ने मिल रही धमकियों के बारे में पुलिस को बताया. लेकिन पुलिस ने मामले को गंभीरता से न ले कर दोनों को समझा कर घर भेज दिया. पुलिस ने यह जानने की भी कोशिश नहीं की कि धमकियां कहां से मिल रही हैं. अगर पुलिस जांच करती तो शायद रोशनलाल आज जीवित होते.

बाद में पुलिस ने इस मामले में उत्तर प्रदेश के शूटर पप्पू कश्यप को भी गिरफ्तार कर लिया. पप्पू ने पुलिस को बताया कि शिवकांत के साथ उस ने और विष्णु कश्यप ने जयपुर व कोटपुतली में रोशनलाल की रैकी की थी.

उन्हें लगा कि अगर रोशन की हत्या के बाद पुलिस उन तक पहुंच गई तो वे फंस जाएंगे. इसलिए पप्पू और विष्णु कश्यप उत्तर प्रदेश में पहले से दर्ज आपराधिक मामलों में जारी वारंट की वजह से खुद ही गिरफ्तार हो गए और जमानत नहीं करवाई

कथा लिखे जाने तक इस मामले में राहुल शर्मा और उस के भांजे मनीष उर्फ सनी के अलावा एक शूटर फरार था. पुलिस इन की तलाश में जुटी थी. पुलिस ने गिरफ्तार सभी 6 आरोपियों को 30 सितंबर को अदालत में पेश कर के जेल भिजवा दिया.

यह विडंबना रही कि निर्मला को अपने बैंक मैनेजर पति के खून से हाथ रंगने के बाद भी प्रेमी नहीं मिल सका. अभी 6वीं और 7वीं कक्षा में पढ़ने वाली निर्मला की 2 बेटियां बड़ी होने के बाद भी अपनी मां को कभी माफ नहीं कर सकेंगी. और तो और निर्मला के 3 साल के अबोध बेटे से भी मां का आंचल छिन गया है.

यूरिनल ट्रैक्ट इन्फैक्शन और डायबिटीज

यूटीआई यानी यूरिनल ट्रैकर इन्फैक्शन महिलाओं में पाया जाने वाला सामान्य संक्रमण भले हो, लेकिन इस के इलाज में लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए वरना इस के सामान्य से असामान्य होते देर नहीं लगती.

यूरिनल ट्रैक्ट इन्फैक्शन यानी यूटीआई मूत्रपथ यानी यूरिनरी ट्रैक्ट में होने वाला एक संक्रमण है. यूरिनरी ट्रैक्ट में किडनी, ब्लैडर्स, यूट्रस और यूरेथ्रा शामिल हैं लेकिन सामान्यतौर पर यह संक्रमण सिर्फ ब्लैडर में होता है. अगर हम महिलाओं में होने वाली इस बीमारी की तुलना करें तो यूटीआई और डायबिटीज के बीच सीधा संबंध है.

अगर आप को डायबिटीज है तो यूटीआई होने का जोखिम बढ़ जाता है और यूटीआई होने पर डायबिटीज होने का खतरा भी बढ़ जाता है. इस के अलावा, दोनों बीमारियों के कारण हरेक बीमारी के ठीक होने में समय भी ज्यादा लगता है. उदाहरण के लिए, अगर आप को डायबिटीज हो और आप यूटीआई से प्रभावित हो जाते हैं तो ठीक होने का समय और संक्रमण की दर बढ़ जाएगी.

क्यों होता है यह संक्रमण

यूटीआई महिलाओं में पाया जाना वाला दूसरा सब से सामान्य प्रकार का संक्रमण है और शारीरिक बनावट की वजह से यह पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में 10 गुना अधिक होता है.

यूटीआई के कारण निम्न हैं :

ग्लूकोज का स्तर उच्च होना.

डायबिटीज से पीडि़त लोगों में रक्त संचरण कम हो सकता है, जिस से संक्रमण से शरीर की लड़ने की क्षमता कम हो जाती है.

कुछ लोगों में ऐसा ब्लैडर होता है जो पूरी तरह खाली नहीं होता. परिणामस्वरूप यूरिन लंबे समय तक ब्लैडर में रहता है, जो बैक्टीरिया के लिए पलनेबढ़ने का महत्वपूर्ण कारण है.

इन पर रखें नजर

यूटीआई के वे लक्षण जिन पर डायबिटीज से बचने के लिए आप को नजर रखनी चाहिए:

पेशाब करने पर जलन.

पेशाब करते हुए दर्द होना.

बुखार आना या सर्दी लगना.

पेशाब का रंग पीला या गाढ़ा होना.

बारबार यूटीआई होना.

क्या करें

डाक्टर की सलाह पर एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल करें.

यूरिन संक्रमण का उपचार न कराने पर किडनी संक्रमण हो सकता है, जिस से किडनी को नुकसान हो सकता है.

यूटीआई की स्थिति के मुताबिक दवाओं का सेवन करें.

कुछ मामलों में जहां पहले से डायबिटीज हो, वहां यूटीआई का उपचार मुश्किल होता है.

कई महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान यूटीआई और डायबिटीज का सामना करना पड़ता है, जो बहुत ही खतरनाक स्थिति है. ऐसे मामलों में समय से प्रयास और उपचार आवश्यक हैं. जेस्टेशनल डायबिटीज लंबे समय तक या गर्भावस्था के दौरान बनी रह सकती है और ऐसे मामलों में लोगों को यूटीआई के प्रति सावधान रहना चाहिए. इस के अलावा गर्भावस्था के बाद कुछ मामलों में भारी रक्तस्राव होता है, जिस की वजह से यूटीआई को दूर करने के लिए सफाई रखना बहुत महत्त्वपूर्ण है.

डायबिटीज या यूटीआई की पारिवारिक पृष्ठभूमि वाली महिलाओं को नियमित परीक्षण कराना चाहिए. डायबिटीज से बचने के लिए ग्लूकोज के स्तर को दायरे में रखें. यूटीआई और डायबिटीज को दूर रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना सब से अच्छा तरीका है. यूटीआई से प्रभावित हैं तो दही खाएं.

यूटीआई के दौरान सामूहिक शौचालय का इस्तेमाल करने से बचें. अगर आप यूटीआई से संक्रमित हैं तो आप को डायबिटीज के लिए अपना ग्लूकोज स्तर भी जांचना चाहिए. कुछ मामलों में अस्पताल में भरती होना जरूरी हो सकता है. इसलिए अगर आप यूटीआई से प्रभावित हैं तो डायबिटीज की जांच करानी चाहिए.

घातक है दोनों का मिश्रण

हर महिला अपने जीवन में कम से कम एक बार यूटीआई से प्रभावित होती है और बीते कुछ वर्षों के दौरान डायबिटीज भी बहुत ही सामान्य हो गई है. इन दोनों का मिश्रण घातक है. उम्र के साथ जटिलताओं की वजह से परिस्थिति और भी जटिल हो सकती है. हाल में सामने आए अस्पताल में भरती होने के मामलों में यह देखा गया है कि एंटीबायोटिक्स की डोज बढ़ानी पड़ी, क्योंकि ग्लूकोज का स्तर काफी अधिक होता है और बैक्टीरिया को मारने के लिए मरीज को उस डोज की जरूरत पड़ती है.

अगर ब्लड ग्लूकोज का स्तर उच्च हो तो यूटीआई और भी परेशानी भरा हो सकता है. यूटीआई से बचने के लिए सभी को सक्रिय बने रहना चाहिए और सुरक्षित बने रहने के लिए सफाई से रहना चाहिए. अपने प्रसूति रोग विशेषज्ञ के संपर्क में रहें और यूटीआई व डायबिटीज के मामले में एंडोक्राइनोलौजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए.

(लेखिका फोर्टिस मैमोरियल रिसर्च इंस्टिट्यूट में औब्सटेट्रिक्स व गायनोकोलौजिस्ट है.)

क्या जल्दी रजोनिवृत्ति होने और डायबिटीज में संबंध है?

शरीर के हार्मोंस में होने वाले बदलाव से डायबिटीज काफी प्रभावित होती है और यह मेटाबौलिक सिंड्रोम व टाइप 2 डायबिटीज होने के प्रमुख कारकों में से एक है.

शरीर में ब्लड ग्लूकोज का स्तर घटाने की जिम्मेदारी एस्ट्रोजन की होती है जबकि प्रोजेस्ट्रोन शरीर में ब्लड ग्लूकोज का स्तर बढ़ाता है. मासिकधर्म के दौरान जैसेजैसे इन दोनों हार्मोंस के स्तर में बदलाव आता है, वैसेवैसे ही शरीर का ब्लड ग्लूकोज स्तर भी घटताबढ़ता है.

चूंकि ये दोनों हार्मोंस इंसुलिन हार्मोन के साथ सक्रिय संपर्क में होते हैं इसलिए ये इंसुलिन के प्रति शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए जिम्मेदार होते हैं. परिणामस्वरूप, हर महीने मासिकधर्म शुरू और बंद होने के 3 से 5 दिनों तक महिलाओं को अपना ब्लड ग्लूकोज स्तर बढ़ा हुआ महसूस हो सकता है.

एक अध्ययन में सामने आया है कि किसी महिला में रजोनिवृत्ति जितनी जल्दी होगी उतना ही उस में डायबिटीज होने का जोखिम बढ़ेगा. जैसेजैसे रजोनिवृत्ति होने की उम्र बढ़ती है वैसेवैसे डायबिटीज होने की आशंका घटती है और 4 फीसदी तक घट जाती है. हालांकि, जल्दी रजोनिवृत्ति और डायबिटीज के बीच सीधे कारक और प्रभाव जैसा कोई संबंध नहीं है.

अध्ययन के अनुसार, 55 वर्ष की उम्र के बाद रजोनिवृत्ति होने के मुकाबले 45 वर्ष से 50 वर्ष की उम्र के बीच रजोनिवृत्ति होने से डायबिटीज की आशंका 60 फीसदी अधिक बढ़ जाती है. 50 वर्ष से 54 वर्ष के बीच रजोनिवृत्ति होने से हृदय संबंधी बीमारियों और मृत्यु का जोखिम घट जाता है.

यों तो शोध में खुलासा हुआ है कि हार्मोन थेरैपी से डायबिटीज होने का जोखिम घट सकता है, लेकिन आप को प्राथमिक वजह के तौर पर इस का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. इस से आप को डायबिटीज और ओस्टियोपोरोसिस होने का जोखिम शायद घट जाए लेकिन आप को कार्डियोवैस्कुलर डिजीज, स्तन कैंसर, स्ट्रोक, फेफड़ों में खून के थक्के जमना, माइग्रेन, मूड में जल्दीजल्दी बदलाव आने, अवसाद, उबकाई और वैजाइनल ब्लीडिंग होने की आशंका बढ़ जाएगी.

डा. राकेश कुमार प्रसाद, सीनियर कंसल्टैंट, एंडोक्राइनोलौजी विभाग, फोर्टिस अस्पताल, नोएडा

तमाचे का दंश : बस एक तमाचे की थी उन दोनों की दुश्मनी

राजस्थान के जिला बीकानेर की सेंट्रल जेल में 3500 कैदियों के रखने की क्षमता है, लेकिन यहां फिलहाल 1500 कैदी ही हैं. सरकार भले ही जेलों को सुधार गृह की उपमा दे, पर अंदर की सच्चाई इस से इतर है. विभिन्न आरोपों में जितने लोग जेल भेजे जाते हैं, उन में से अधिकांश लोग सुधरने के बजाय और ज्यादा कुख्यात हो कर आते हैं.

बीकानेर जेल में कम से कम 10 ऐसे हार्डकोर अपराधी चिह्नित किए जा सकते हैं, जिन के एक धमकी भरे फोन से सामने वाला बिना किसी नानुकुर के लाख-2 लाख रुपए उस के गुर्गे के पास पहुंचा देता है. यह भी एक कटु सत्य है कि जेल के अंदर जेल प्रशासन की जगह इन हार्डकोर अपराधियों का ही राज चलता है. नए आने वाले कैदियों को डराधमका कर उन के परिजनों से चौथ वसूली मामूली सी बात है.

बीकानेर जेल में एक ऐसा ही कैदी था अजीत यादव. अजीत यादव झुंझुनू जिले का हार्डकोर क्रिमिनल था. हत्या के एक मामले में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे अजीत के खिलाफ विभिन्न अदालतों में लगभग एक दरजन मुकदमे विचाराधीन हैं. एक तरह से अजीत यादव जेल में बौस था.

सन 2017 की एक घटना है. रावतसर के चाइया निवासी रामनिवास जाट ने रंजिश के चलते एक टोलनाका कर्मी से मारपीट कर के टोलनाका पर लगे बैरियर को तोड़ दिया था. बाद में महाजन थाने की पुलिस ने रामनिवास को गिरफ्तार कर बीकानेर जेल में भिजवा दिया था.

रामनिवास जब जेल में पहुंचा तो उसे अन्य कैदियों से कुख्यात अपराधी अजीत यादव के बारे में जानकारी मिली. पता चला कि जेल में उस का ही राज चलता है, इसलिए पुराने कैदियों की सलाह पर रामनिवास अजीत यादव की बैरक में पहुंचा और जाते ही उस ने उस के पैर छुए.

अजीत ने उस की बांहें पकड़ कर उठाते हुए पूछा, ‘‘अरे जवान, कहां से आए हो?’’

‘‘जी, रावतसर थानाक्षेत्र का रहने वाला हूं. महाजन पुलिस ने गिरफ्तार किया था.’’ रामनिवास ने जवाब दिया.

‘‘तूने किस का कत्ल किया था?’’ अजीत ने अपने चिरपरिचित अंदाज में रामनिवास से पूछा.

‘‘भैया, कत्ल नहीं, मारपीट के आरोप में जेल आया हूं.’’ कहते हुए रामनिवास हीनभावना से ग्रसित हो गया. उस का जवाब सुन कर अजीत खिलखिला कर हंस पड़ा, ‘‘तेरी कदकाठी व डीलडौल देख कर मैं ने कत्ल की बात कही थी. मारपीट, छेड़छाड़, चोरीचकारी वगैरह सैकेंडहैंड गुंडों को शोभा देती हैं. तेरे जैसे को तो कातिल की उपमा ही शोभा देती है.’’

न जाने क्यों अजीत को रामनिवास भा गया. दूसरी ओर रामनिवास ने भी अपराध की दुनिया के बादशाह अजीत को मन ही मन अपना गुरु मान लिया.

ऐसे बनते हैं क्रिमिनल

रामनिवास ने धीरेधीरे सभी कैदियों से संपर्क बना लिए. 1-2 घंटे अजीत की बैरक में बिताना उस का नित्यक्रम बन गया था. अजीत भी रामनिवास को छोटे भाई की तरह चाहने लगा था. एक दिन रामनिवास ने अजीत का मूड सही देख कर कहा, ‘‘भैया, एक मसले पर आप से मार्गदर्शन लेना है. आप नाराज न हों तो जिक्र करूं?’’

‘‘अरे छोटे भाई से कैसी नाराजगी, तू खुल कर बता.’’ अजीत ने कहा.

‘‘भैया, एक आदमी को सुलटाना है.’’ रामनिवास ने कहा.

‘‘कौन है निशाने पर?’’ अजीत ने पूछा.

‘‘रावतसर नगर पालिका की चेयरपरसन का पति है, खुद भी पार्षद है और इस बार नोहर विधानसभा क्षेत्र से एमएलए का चुनाव भी लड़ रहा है. आप शार्पशूटर की व्यवस्था कर दें तो मेरा काम आसानी से हो जाएगा. और हां, 4-5 लाख की सुपारी भी मिल जाएगी, मुझे प्रस्ताव मिल चुका है.’’ रामनिवास ने कहा.

‘‘अरे पगले, लगता है तू निरा बुद्धू है. भावी विधायक की कीमत केवल 5 लाख रुपए. इतने रुपयों में तो कोई सड़कछाप शख्स को भी ठिकाने नहीं लगाएगा. तू एक करोड़ की मांग कर. 50 लाख तक सैटिंग बिठा ले. मैं तुझे शार्पशूटर उपलब्ध करवा दूंगा. याद रखना, मिलने वाली आधी रकम मेरी होगी.’’ अजीत ने कहा.

करीब एक साल बाद जमानत मिलने पर रामनिवास जेल से बाहर आ गया. जेल में बिताया हर पल उस के दिलोदिमाग पर हावी था. अजीत द्वारा ‘कत्ली’ की उपमा ले कर जेल जाने का ताना गाहेबगाहे उस के दिलोदिमाग में घूम रहा था. कभीकभी वह अजीत से फोन पर बतिया भी लेता था.

उस दिन 23 सितंबर, 2018 का दिन था. बड़े भैया अजीत ने वादे के अनुसार शार्पशूटर के रूप में हरियाणा निवासी मंजीत सिंह व 2 अन्य को रामनिवास के पास भेज दिया. रामनिवास अपने लक्ष्य को साधने में किसी तरह की खामी नहीं छोड़ना चाहता था. वह शूटर मंजीत व अन्य को साथ ले कर अपने दोस्त अमनदीप के खेत में बनी ढाणी पर चला गया.

योजना को अंजाम देने के लिए 24 सितंबर का दिन चुना गया था. रामनिवास ने पार्षद व चेयरपरसन के पति हरवीर सिंह की रैकी करने और एकएक पल की सूचना देने के लिए अपने दोस्तों अशोक रैगर और फोटोग्राफर रमेश सुथार के साथ अमनदीप को तैनात कर दिया था.

रैकी की सूचना कोड वर्ड में दी जानी थी. हरवीर के घर के आगे सीसीटीवी कैमरे लगे हुए थे. वहां वारदात को अंजाम देना खतरे से खाली नहीं था. करीब 11 बजे पार्षद हरवीर अपने बेटे हनुमंत व राजू सैनी के साथ एसडीएम कोर्ट पहुंचे. रैकी करने वालों ने अविलंब यह सूचना शूटरों तक पहुंचा दी. एसडीएम कोर्ट पुलिस थाने से मात्र 300 मीटर की दूरी पर है.

लगातार 2-3 दिनों की छुट्टियां होने के कारण उस दिन भीड़ अपेक्षाकृत ज्यादा थी. एसडीएम डा. अवि गर्ग से मिलने के बाद हरवीर सहारण कोर्ट की तरफ चल दिए. वहीं पर उन की कार खड़ी थी. तभी अचानक एक सफेद रंग की कार गेट के सामने आ कर रुकी. कार से 3-4 लोग बड़ी फुरती से उतरे और कोर्ट परिसर में जा पहुंचे.

गोलियों से भून दिया पार्षद हरवीर को

2 लोगों ने सामने आ रहे हरवीर सहारण को अपने हाथों में थामे तमंचों के निशाने पर ले लिया. अगले ही पल दोनों हमलावरों ने हरवीर पर 2-2 फायर झोंक दिए.

अचानक गोलियों की आवाज से कोर्ट परिसर दहल उठा. कचहरी में सैकड़ों की संख्या में मौजूद लोग समझ नहीं सके कि गोलियां की आवाज कहां से आ रही है. अचानक हुए हमले से हरवीर भी सकते में आ गए थे.

जान बचाने के लिए वह फिर से एसडीएम के चैंबर की तरफ भागे पर एक शख्स ने टांग अड़ा कर उन्हें जमीन पर गिरा दिया. तभी एक अन्य शख्स उन के पास आ कर बोला, ‘‘तूने मेरे आदमी को थप्पड़ मारा था. आज मैं तेरा खेल ही खत्म कर देता हूं.’’

कहने के साथ ही उस ने हरवीर के सिर पर पिस्तौल की नाल सटा कर एक और फायर झोंक दिया. इस के बाद हमलावर फुरती से वहां से भाग कर गेट के सामने स्टार्ट खड़ी अपनी कार में सवार हो गए. कार तेज गति से वहां से चली गई. इन में से एक हमलावर, जिस ने हरवीर के सिर में गोली मारी थी, वह पहचान लिया गया था. वह और कोई नहीं बल्कि रामनिवास जाट था, जो रावतसर पुलिस थाने का हिस्ट्रीशीटर था.

कोर्ट परिसर में दिनदहाड़े हुए इस हत्याकांड को ले कर सभी हतप्रभ थे. कोर्ट परिसर में सन्नाटा पसर गया था. वकीलों ने अपने चैंबर्स के शटर डाल दिए थे. गंभीर रूप से घायल हरवीर सिंह को जिला चिकित्सालय हनुमानगढ़ ले जाया गया.

सूचना मिलने पर प्रदेश के सिंचाई मंत्री डा. रामप्रताप जो हनुमानगढ़ वासी हैं, अस्पताल पहुंच गए. डाक्टरों के अथक प्रयासों के बाद भी हरवीर सिंह को नहीं बचाया जा सका.

हरवीर के मारे जाने की घटना जंगल की आग की तरह कुछ ही देर में पूरे क्षेत्र में फैल गई. व्यापारी वर्ग इस घटना के विरोध में अपनी दुकानें बंद कर सड़क पर उतर आया. कुछ घंटों में देहात क्षेत्र के लोग भी रावतसर पहुंचने शुरू हो गए.

आम लोगों के बढ़ते आक्रोश व दबाव को देख कर प्रशासन के हाथपांव फूल गए. आपसी रंजिश या राजनैतिक प्रतिद्वंदिता को ले कर यह हत्याकांड हाईप्रोफाइल बन गया था. क्षेत्र की स्थिति कभी भी विस्फोटक हो सकती थी.

इस घटना की सूचना राजस्थान के तेजतर्रार निर्दलीय विधायक हनुमान बेनीवाल तक पहुंच चुकी थी. हनुमान बेनीवाल तीसरे मोर्चे के संस्थापक व मृतक हरवीर के राजनीतिक आका थे. सूचना मिलते ही वह भी रावतसर के लिए निकल पड़े.

हरवीर की हत्या, हनुमान बेनीवाल का आगमन व क्षेत्र के हालात की जानकारी बीकानेर संभाग के आईजी दिनेश एम.एन. तक भी पहुंच गई. आईजी जानते थे कि सत्र के दौरान सरकार को घेरने वाले विधायक बेनीवाल आक्रोशित आमजन को कहीं भी झोंकने का माद्दा रखते हैं.

दूध का धुला नहीं था हरवीर सहारण

पार्षद हरवीर का नाम आईजी दिनेश एम.एन. के जेहन में था, क्योंकि कुछ महीने पहले ही एसओजी के प्रमुख होने के नाते उन्होंने इसी हरवीर को रावतसर क्षेत्र में घटित एक हत्याकांड में प्रमुख आरोपी मानते हुए गिरफ्तार करवाया था. गिरफ्तारी के लगभग महीने भर बाद ही हरवीर को राजस्थान उच्च न्यायालय ने जमानत पर रिहा कर दिया था.

बता दें कि आईजी दिनेश एम.एन. राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित रहे सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में न्यायिक अभिरक्षा में रहे थे. बाद में ऊपरी अदालत ने उन्हें बाइज्जत बरी कर दिया था. उन का नाम प्रदेश ही नहीं, राष्ट्रीय स्तर के ईमानदार व कर्तव्यनिष्ठ आईपीएस अफसरों की पहली पंक्ति में शुमार है.

दिनेश एम.एन. को पहले भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो का प्रमुख, बाद में एसओजी प्रमुख और हाल ही में बीकानेर का आईजी बनाया था. हनुमान बेनीवाल के आगमन को देखते हुए आईजी खुद कनिष्ठ अधिकारियों के साथ रावतसर पहुंच गए. शहर में अतिरिक्त पुलिस फोर्स के साथ आरएसी (राजस्थान आर्म्ड कंपनी) के जवान भी तैनात कर दिए गए थे.

माना जा रहा था कि मृतक का शव आते ही हालात बेकाबू हो सकते हैं. नियत समय तक मृतक का पोस्टमार्टम न हो पाने के कारण शव हनुमानगढ़ के जिला अस्पताल में रखा रहा.

शाम घिरते ही हनुमान बेनीवाल रावतसर पहुंच गए. परिजनों को ढांढस बंधा कर विधायक बेनीवाल जिला मुख्यालय पहुंचे. वहां बेनीवाल ने पत्रकार वार्ता आयोजित कर मामले की सीबीआई जांच, हत्यारों की अविलंब गिरफ्तारी व रावतसर के जिम्मेदार अधिकारियों का तुरंत ट्रांसफर किए जाने की मांग उठा दीं. बेनीवाल ने यह आरोप भी लगाया कि हरवीर की हत्या के पीछे असली चेहरे कुछ सफेदपोशों के हैं.

वारदात के बाद पुलिस ने नाकाबंदी करवा दी थी पर हमलावर कच्चे रास्तों से किसी तरह हरियाणा में घुस गए थे. सभी आरोपी हरियाणा में तितरबितर हो गए थे. मुख्य आरोपी रामनिवास प्राइवेट गाड़ी से राजस्थान के झुंझुनूजिले में घुस गया था.

25 सितंबर को थाने में आईजी के साथ पुलिस अधिकारियों की एक हाईलेवल मीटिंग चल रही थी. बैठक में एसपी अनिल कयाल, एएसपी नरेंद्र, सीआई अरविंद बरेड़, डीएसपी दिनेश राजौरा मौजूद थे.

मामले का सुपरविजन आईजी खुद कर रहे थे. अब तक की जांच में पुलिस को यह पता चल चुका था कि इस मामले में हिस्ट्रीशीटर रामनिवास का हाथ है. अधिकारियों का मानना था कि मुख्य आरोपी की जल्द गिरफ्तारी न होने पर इलाके में हालात बेकाबू हो सकते हैं.

रामनिवास का फोन बंद था, उस के फोन नंबरों के ट्रैसआउट नहीं होने की सूरत में उस की गिरफ्तारी मुश्किल थी. तेजतर्रार आईजी के निर्देश पर अधिकारियों ने रामनिवास की एक प्रेमिका तमन्ना (परिवर्तित नाम) को ढूंढ निकाला. एसआई अनीता लाखर तमन्ना को हिरासत में थाने ले आई थीं.

पुलिस ने प्रेमिका पर साधा निशाना

थाने में आईजी ने तमन्ना से पूछताछ करनी शुरू कर दी, ‘‘देखो मैडम, कत्ल का मामला है. झूठ बोलना आप पर भारी पड़ सकता है. पुलिस को रामनिवास का वह नंबर चाहिए, जिस से आप उस से बात करती हैं.’’

आईजी ने कहा तो तमन्ना ने अगले ही पल अपने मोबाइल में सहेली के नाम से फीड किए गए नंबर बता दिए. तमन्ना से मिले मोबाइल नंबर जिला मुख्यालय में स्थित साइबर सेल ने सर्विलांस पर लगा दिए.

स्वयं आईजी दिनेश एम.एन. वीडियो कौन्फ्रैंसिंग में जुड़ चुके थे. आईजी के निर्देश पर तमन्ना ने रामनिवास को फोन किया तो रामनिवास ने फोन उठा लिया.

‘‘कोई आ गया है, 10 मिनट बाद फिर फोन करूंगी.’’ कह कर तमन्ना ने फोन डिसकनेक्ट कर दिया.

उसी समय साइबर सेल ने रामनिवास की लोकेशन पता कर ली. वह फतेहपुर-रतनगढ़ के नजदीक सांखू फांटा में था. यानी वह वहां के एक ढाबे में था. आईजी के निर्देश पर क्षेत्र के सभी थानों की पुलिस गाडि़यों में भर कर सांखू फांटा पहुंच गई. पुलिस ने उसे चारों तरफ से घेर लिया.

अब तमन्ना के फोन से आईजी ने रामनिवास को काल कराई. फोन रिसीव होते ही आईजी बोले, ‘‘देखो रामनिवास, मैं आईजी बोल रहा हूं. तुम चारों ओर से पुलिस से घिर चुके हो. भागने या गोली चलाने की कोशिश की तो तुम्हें गोली मार दी जाएगी. मैं ने सभी अधिकारियों को शूटआउट का आदेश दे दिया है. भलाई इसी में है कि तुम सरेंडर कर दो और हाथ ऊपर उठाए ढाबे से बाहर आ जाओ.’’

अगले ही पल दोनों हाथ ऊपर उठाए रामनिवास ढाबे से बाहर आ गया. नोहर थाने के कांस्टेबल दुनीराम गोदारा ने रामनिवास की पुख्ता पहचान कर दी थी. पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. रामनिवास की गिरफ्तारी की सूचना अविलंब फ्लैश कर दी गई. उस के गिरफ्तार होने पर जिला व पुलिस प्रशासन ने राहत की सांस ली. 25 सितंबर की शाम पोस्टमार्टम के बाद हरवीर का शव रावतसर आ गया. हरवीर की शवयात्रा में रिकौर्ड भीड़ एकत्र हुई.

पुलिस अमला रामनिवास जाट को ले कर रावतसर आ गया था. आईजी की मौजूदगी में रामनिवास ने पूछताछ में जो बताया, उसे सुन कर हर कोई हतप्रभ रह गया.

रामनिवास के बताए अनुसार, हनुमानगढ़ के केंद्रीय सहकारी बैंक के चेयरमैन महेंद्र पूनिया ने हरवीर की हत्या की 20 लाख की सुपारी दी थी. इस में से 5 लाख रुपए रामनिवास को अग्रिम दे दिए गए थे. यह खुलासा होते ही पुलिस ने महेंद्र पूनिया की मौजूदगी को ट्रैस आउट कर के उसे सूरतगढ़ क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया.

हरवीर की आपराधिक पृष्ठभूमि

कौन थे हरवीर व महेंद्र पूनिया और रामनिवास ने हरवीर को क्यों मौत की नींद सुला दिया था? जानने के लिए हमें अतीत में जाना पड़ेगा.

राजस्थान पुलिस के रिटायर्ड एसआई रामजस सहारण व शांति देवी सहारण (पूर्व अध्यक्षा कृषि उपज मंडी समिति, रावतसर) का इकलौता बेटा था हरवीर. एक बेटी व एक बेटे का पिता हरवीर ज्यादा पढ़ालिखा तो नहीं था, पर राजनीति में उस का अच्छा दखल था. इसी के चलते हरवीर अपनी मां को कृषि उपज मंडी समिति की अध्यक्ष बनाने में सफल रहा था. खुद भी वह नगर पालिका का पार्षद बन गया था.

हरवीर भले ही पार्षद व उस की पत्नी नीलम सहारण चेयरपरसन निर्वाचित हुए थे, पर उस का दामन भी कथित रूप से दागदार था. आरोप है कि सन 2001 में हरवीर ने एक युवक प्रेम कुमार की गरदन मरोड़ कर इसलिए कत्ल कर दिया था कि वह उस की मां को चुनाव में हरवाना चाहता था.

प्रेम के शव को कहीं दूर जंगल में जला कर सबूत नष्ट कर दिए थे. इसी तरह रुपयों के लेनदेन के चक्कर में हरवीर ने लीलाधर सोनी नामक शख्स की कथित हत्या कर दी थी. लीलाधर का शव भी नहीं मिला था.

मृतकों के परिजनों ने पुलिस व अदालत की मार्फत मुकदमे दर्ज करवाए थे, पर दोनों मामलों की जांच में पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी थी. इसी साल हरवीर के विरोधी इन मामलों को हाई लेवल की सिफारिश के दम पर एसओजी तक ले जाने में सफल हो गए थे.

एसओजी के तत्कालीन प्रमुख दिनेश एम.एन. ने 13 मई, 2018 को हरवीर को गिरफ्तार करवा कर जेल भिजवा दिया था. 20-25 दिनों बाद हरवीर जमानत पर रिहा हुआ तो उस के समर्थक करीब 400 गाडि़यां ले कर बीकानेर जेल तक पहुंचे थे.

हरवीर विधायक हनुमान बेनीवाल का चहेता था. वह इस चुनाव में नोहर विधानसभा क्षेत्र, जहां से भाजपा के युवा विधायक अभिषेक मटोरिया लगातार 2 बार जीतते रहे हैं, अपनी पत्नी को चुनाव लड़वाना चाहता था. इस 30 सितंबर को हरवीर नोहर में एक विशाल रैली करने वाले थे, पर 24 सितंबर को ही उन की हत्या कर दी गई.

एक अन्य घटनाक्रम भी काबिलेगौर है. सन 2015 में एक भाजपा नेता व एक पूर्व विधायक ने मिल कर नगरपालिका चुनाव में नागरिक मोर्चा का गठन किया था. इस चुनाव में हरवीर व उस की पत्नी नीलम पार्षद चुने गए थे. नागरिक मोर्चा ने 25 वार्डों में 13 वार्डों पर विजय हासिल की थी. महिला हेतु आरक्षित चेयरपरसन पद पर नीलम सहारण चुनी गई थी.

सन 2016 में नगर पालिका प्रशासन ने अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया था. कहा जाता है कि इस अभियान में हनुमानगढ़ केंद्रीय सहकारी बैंक के जिलाध्यक्ष महेंद्र पूनिया व रामनिवास जाट को कथित अतिक्रमणकारी चिह्नित कर उन के प्लौट्स पर पालिका प्रशासन ने ‘नगर पालिका संपत्ति’ के बोर्ड लगा दिए थे.

इस अभियान से घबरा कर शहर के कथित अतिक्रमणकारियों ने ‘रावतसर बचाओ’ अभियान चला कर एक दिन रावतसर बंद का आह्वान किया था. इसी बंद के दौरान रावतसर धान मंडी में जबरदस्ती दुकानें बंद करवाने की बात सुन कर हरवीर भी धान मंडी पहुंच गए थे.

महेंद्र पूनिया ने रची थी हरवीर की हत्या की साजिश

कहा जाता है कि जबरन दुकानें बंद करवा रहे महेंद्र पूनिया को देख कर चेयरपरसन के पति हरवीर ताव खा गए थे और उन्होंने भरे बाजार में सहकारी बैंक के जिलाध्यक्ष को

2-3 चांटें रसीद कर दिए थे. इस प्रकरण में महेंद्र पूनिया ने पुलिस में हरवीर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाई थी. उसी दिन महेंद्र पूनिया ने हरवीर को सबक सिखाने की ठान ली थी.

फर्श से अर्श पर पहुंचने वाले महेंद्र पूनिया का अतीत भी रोचक रहा है. नोहर क्षेत्र के गांव पदमपुरा का मूल निवासी है महेंद्र पूनिया. वह सन 1996-97 में रावतसर आया था. एक जानकार ठेकेदार के सहयोग से वह सार्वजनिक निर्माण विभाग के छिटपुट निर्माण कार्यों के ठेके लेने लगा था. इसी दौर में वह एक भाजपाई विधायक का खास बन गया था.

आर्थिक हालत पटरी पर आई तो महेंद्र पूनिया ने हरियाणा में एंट्री मार दी. राजनैतिक पहुंच के बल पर महेंद्र पूनिया हरियाणा में करोड़ों में खेलने लगा तो फिर से रावतसर लौट आया. बड़े व्यवसाय में दखल के साथसाथ महेंद्र ने राजनीति में भाग लेना शुरू कर दिया था. विधायकजी की शह पर पूनिया सहकारी बैंक का जिलाध्यक्ष बन गया था.

मृतक के बेटे हनुमंत सहारण की तहरीर पर पुलिस ने रामनिवास, महेंद्र पूनिया व 4-5 अन्य के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 व अन्य धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया. नामजद दोनों हत्यारोपी गिरफ्त में आ चुके थे. अदालत में पेश कर दोनों को 8 दिन के रिमांड पर ले लिया गया.

रिमांड अवधि में दोनों आरोपियों के खुलासे के बाद पुलिस ने रेकी करने वाले रमेश सुथार, अशोक रैगर, अमनदीप जाट, सहकारी बैंक के संचालक मंडल सदस्य रामचंद्र भील, जो महेंद्र पूनिया का खास है को भी गिरफ्तार कर लिया. आरोप है कि रामचंद्र भील षडयंत्र रचने का सूत्रधार था.

शूटर मंजीत सिंह की निगरानी के बाद पुलिस ने बीकानेर जेल में बंद अजीत यादव को भी गिरफ्तार कर लिया. मंजीत सिंह ने खुलासा किया कि हमले के दिन उस के और रामनिवास के अलावा 2 और शूटर जोगेंद्र सिंह उर्फ धोलिया निवासी महेंद्रगढ़ व मोहित उर्फ जैलदार निवासी लुहारू कोर्ट में हथियारों सहित घुसे थे.

हरवीर की हत्या किए जाने का विरोध होने पर चारों हमलावर कोर्ट में गोलियां बरसाने को तत्पर थे. दोनों शार्पशूटरों को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. व्यापक पूछताछ व अपेक्षित बरामदगी के बाद पुलिस ने सभी 10 आरोपियों को अदालत में पेश किया. अदालत ने उन्हें जेल भिजवा दिया.

इस हाईप्रोफाइल हत्याकांड में यह अफवाह भी उड़ी कि सुपारी की एक नहीं बल्कि 2 डील हुई थीं. दूसरी सुपारी हरवीर को गोली मारने वाले रामनिवास की हत्या की सुपारी अन्य शार्पशूटरों को दी गई थी. अगर रामनिवास की हत्या हो जाती तो यह मामला ब्लाइंड मर्डर बन कर रह जाता और षडयंत्रकर्ता बेनकाब नहीं होते.

कहा जाता है कि रामनिवास को शक हो गया था और फरारी के कुछ देर बाद ही वह चालाकी से शूटरों से अलग हो गया था. हालांकि जांच अधिकारी ने इस तथ्य का खंडन किया है. पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टि से मृतक हरवीर सहारण के परिवार को सशस्त्र गार्ड उपलब्ध करवा दिए थे.

अपेक्षाकृत अमनचैन व शांत रहने वाले रावतसर क्षेत्र में रंजिशन हुआ यह हत्याकांड भविष्य में क्या गुल खिलाएगा, कहा नहीं जा सकता.

-कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

घर सजाते वक्त रखें इन खास बातों का ख्याल

आप अपने घर को सजाते समय में अक्सर कुछ-न-कुछ बदलाव करती रहती हैं. पर अगर आप आर्थराइटिस की रोगी हैं तो आपके लिए घर सजाने का काम किसी झंझट से कम नही होता. गठिया की स्थिति में रोगी के लिए चलना, झुकना, भार उठाना, जोड़ों को बार-बार मोड़ना  बहुत मुश्किल होता है. ऐसे में किचन, स्टोररूम, बाथरूम आदि की सेटिंग अगर ध्यान में रखकर की जाए, तो घर के काम को सरल बनाया जा सकता है. बता दें, ऐसे में  आप घर के काम को कैसे आसान बना सकती हैं.

–  घर के हैंगर में कुछ खास वजन नहीं होता, लेकिन पुराने तार के भारी हैंगर को पकड़ना और उन पर कपड़े सुखाना रोगी के लिए मुश्किल हो जाता है, क्योंकि तार के हैंगर पर कपड़े आसानी से टिकते नहीं और ग्रिप बनाने के लिए जोड़ों पर दबाव डालना पड़ता है.

–  गठिया के दर्द में रोगी के लिए जोड़ों पर दबाव डालना पीड़ादायी होता है. इसलिए जरूरत की जो भी दवाइयां हों, उन्हें एक ऐसे बौक्स में रखें, जो आसानी से खुल जाता हो.

–  घर में किए गए छोटे-छोटे बदलाव, रोगी के दर्द पर बड़ा असर डालते हैं. मसलन, घर में लगे दरवाजों की गोल लौक को बार-बार घुमाना रोगी के लिए मुश्किल होता है, क्योंकि इससे रोगी के हाथों के जोड़ों पर दबाव पड़ता है. ऐसे में आप घर में प्लास्टिक और लकड़ी के हैंगर रख सकती है, क्योंकि इन पर कपड़े आसानी से रुक जाते हैं.

–  आपके रोजमर्रा में काम आने वाली चीजें, जैसे कपड़े, जूते, एक्सेसरीज को अलमारी के ऊपर वाली शेल्फ में ही रखना चाहिए, ताकि बार-बार सामान निकालने के लिए झुकना न पड़े. थोड़ी-थोड़ी मात्रा में घर का सामान इस्तेमाल करें. जैसे किचन में एक किलो दाल के डिब्बे को रोज उठाने और रखने से अच्छा है कि आप हफ्ते भर की दाल एक छोटे से डिब्बे में निकाल लें. टाइट ढक्कन वाले जार यूज करने के बजाय पुश करने वाले डिब्बे प्रयोग में लाएं.

–   बर्तन धोने वाले डिटर्जेंट निकालने के लिए बार-बार सिंक के नीचे झुकने की जगह, आसानी से खुलने वाले जार में डाल कर सिंक के पास ही रख लें. रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले जरूरी सामान को अपनी पहुंच में ही रखें, ताकि उन्हें रोज उठाने और रखने में किसी तरह की दिक्कत न आए.साथ ही, किचन में इस्तेमाल होने वाले डिब्बों पर लेबल लगा लें, ताकि उन्हें ढूंढने के लिए आपको जोड़ों पर जोर न डालना पड़े.

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