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चमकदार त्वचा चाहिए तो लगाइये कुकुम्बर मास्क

कुकुम्बर (खीरा) या उससे बना फेस पैक चेहरे के लिए बहुत लाभदायक होता है. इसमें बहुत सारे पोषक तत्‍व पाए जाते हैं जो त्‍वचा को प्राकृतिक रूप से जवान और खूबसूरत बनाता है. अगर खीरे से बना स्‍क्रबर प्रयोग किया जाए तो चेहरे पर पड़े ब्‍लैकहेड, आंखों के नीचे डार्क सर्कल और अंडर आई पफ भी दूर किया जा सकता है. इतना ही नहीं खीरा लगाने से आपका चेहरा खूबसूरत होने के साथ-साथ हाइड्रेट भी रहेगा. जानिए तरह-तरह के कुकुम्‍बर फेस मास्‍क के बारे में–

गुलाबजल और मुल्‍तानी मिट्टी के साथ

3 चम्‍मच खीरे के रस में 12 बूंदे गुलाबजल की मिलाए और मुल्‍तानी मिट्टी भी डालें. इस पेस्‍ट को चेहरे और गर्दन पर 10-15 मिनट तक के लिये लगाएं और पानी से धो लें. इस पेस्‍ट से चेहरे के पिंपल कम हो जाते हैं.

शहद, नींबू और मिन्‍ट के साथ

यह मिश्रण स्‍किन को अंदर से हाइड्रेट कर के ग्‍लो लाता है. इस पेस्‍ट को बनाने के लिये 4-5 चम्‍मच गाढा खीरे का पेस्‍ट लें और उसमें शहद और नींबू की कुछ बूंदे मिक्‍स कर दें. साथ ही पुदीने की कुछ पत्‍तियां लेकर उसे क्रश करें और उसके रस को भी इस पेस्‍ट में मिला दें. इस पेस्‍ट को अपने चेहरे पर 15-20 मिनट तक के लिये लगाए.

एवोकाडो, टमाटर और शहद

इस फ्रूट फेस पैक से अपने चेहरे की थोड़ी देर के लिये मसाज करें. खीरा, एवोकाडो और टमाटर को अच्‍छे से चौप करें और इसमें शहद की कुछ बूंदे मिलाएं. इस फ्रूट फेस मास्‍क को चेहरे पर लगा कर 20 मिनट तक के लिये छोड दें. जब यह फ्रूट मास्‍क चेहरे पर सूख जाए तब इसे रगड़ कर छुड़ा लीजिये. इससे चेहरे के दाग-धब्‍बे हटेगे और स्‍किन कोमल हो जाएगी.

ओट, दही और शहद के साथ

आधे खीरे को ले कर मिक्‍सी में अच्‍छे से पीस लें और उसमें एक चम्‍मच ओट, दही और शहद मिलाएं. इस पैक को अपने चेहरे और गर्दन पर 20 मिनट तक लगाएं रखें और फिर ठंडे पानी से धो लें.

नींबू और अंडे के साथ

खीरे का पेस्‍ट लें और उसमें नींबू का रस और अंडे का सफेद भाग मिला कर ड्राई स्‍किन पर लगाने से त्‍वचा मुलायम हो जाती है और पिंपल भी खतम हो जाते हैं. इस मिश्रण को त्‍वचा पर 20 से 25 मिनट तक के लिये रखें.

तो अब क्रैक हील से क्यों डरना…

अगर आप तरह-तरह की स्‍टाइलिश सैंडल्‍स सिर्फ इसलिए नहीं पहन पाती क्‍योंकि आपकी ऐडियां फटी हुई हैं, तो परेशान मत होइये. अगर देखा जाए तो यह समस्‍या हर महिला में आम हो चुकी है और जिन लोगो की त्‍वचा रूखी होती है उन्‍हें यह समस्‍या झेलनी ही पड़ती है. इसके अलावा ज्‍यादा समय तक खड़े रहने पर भी एडियां फट जाती हैं. अगर आपके भी पैर फट गए हैं तो गौर कीजिए इन आसान सुझावों पर.

– एक बाल्‍टी हल्‍का गरम पानी लें और उसमें हल्‍का शैंपू डाल कर अपने पैरों को कुछ देर के‍ लिये डुबोएं. इसके बाद एड़ियों को प्‍यूमिक स्‍टोन से रगड़ कर साफ करें. जब डेड स्‍किन साफ होगी तभी आपके पैर मुलायम और साफ लगेगे. इसके बाद एडियों पर तेल या मौस्‍चराइजर लगाना न भूलें.

– हल्‍का गरम पानी लें और उसमें नींबू की कुछ बूंदे डालें. उसमें अपने पैरों को 5-6 मिनट तक के लिये डुबोएं और पैरों को निकाल कर सुखा लें. सोने से पहले उन पर क्रीम या मौस्‍चराइजर लगाएं.

– पांव को ठीक करने में शहद का भी बड़ा योगदान होता है. हल्‍के गरम पानी में दो-तीन बूंदे शहद की डाल कर नींबू की कुछ बूंदे भी डालें. उसके बाद अपने पैरों को उस गरम पानी में 8-10 मिनट तक के लिये डुबोएं. इसके बाद साफ पानी से पैरों को धो कर उस पर आलिव आयल या फिर बादाम तेल लगाएं.

– अपने पैरों को हल्‍के गरम पानी और बेकिंग सोडा वाले पानी में डुबोएं. बेकिंग सोडा पैरों से गंदगी और डेड सेल को निकालेगा. इसके अलावा यह एक प्राकृतिक सामग्री भी है जो आपको फुट इंफेक्‍शन से भी बचाएगी. इस विधि को हफ्ते में दो या तीन बार जरुर आजमाएं, जिससे आपको साफ, कोमल और सफेद पैर मिल सके.

– इसके अलावा जब आप रोज नहाती हैं तो भी पत्‍थर ले कर अपनी फटी एडि़यों को रगड़ सकती हैं. इसके बाद पैरों पर हल्‍का सा तेल या मौस्‍चरइजर भी लगाएं.

अब हफ्ते भर बरकरार रहेगा गाजर के हलवे का टेस्ट

अगर आपको भी गाजर का हलवा बहुत पसंद है और आप भी हफ्ते भर के लिए इसे बनाकर रखना चाहती हैं तो ये लेख आपके लिए है. वैसे भी सर्दी का मौसम शुरु हो चुका है और इस मौसम में  गाजर का हलवा आपके खाने में शामिल न हो तो खाने का स्वाद फीका-फीका सा लगता है. और ऐसे में अगर आप गाजर के हलवे को कुछ दिनों के लिए स्टोर करना चाहती हैं तो इसके लिए आपको टिप्स बताने जा रहे हैं जो गाजर के हलवे को स्टोर करने में काफी मददगार हो सकते है.

ड्राय फ्रूट्स खाते वक्त डालें

आप कभी भी हल्वे को बनाते समय उसमें ड्राय फ्रूट्स न डालें. क्योंकि हल्वे को बनाते समय डाले गये ड्राय फ्रूट्स उस समय तो अच्छा स्वाद देते हैं, लेकिन अगर आप इसे लंबे समय तक रखने के लिए बना रही हैं तो आपको बता दें दो से तीन दिन बाद इसका स्वाद बिल्कुल बदल जाता है. आप चाहे तो ऐसा कर सकती हैं जिस समय हलवा खाए तभी उपर से ड्राय फ्रूट्स डालें.

ज्यादा मात्रा में खोवा मत डालें

अगर आप हल्वे को लंबे समय तक फ्रेश रखना चाहती हैं तो उसमें ज्यादा मात्रा में खोवा का इस्तेमाल न करें, क्योंकि खोवा भी दूध से ही बनता है. अगर आप इसे हलवे में ज्यादा मात्रा में डालेंगे तो कुछ ही दिन में हलवे का स्वाद खराब हो सकता है. ऐसा भी हो सकता है कि हलवे के स्वाद में खट्टापन आ जाए. हां, अगर आपको ज्यादा मात्रा में खोवा पसंद है तो जिस समय आप हलवे को  गर्म करें उस समय अपने मुताबिक खोवा को उपर से डाल सकती हैं.

दूध का इस्तेमाल न करें

बहुत सारी महिलाएं हल्वा बनाते समय उसमें दूध डाल देती हैं. ऐसा न करें. आप बिना दूध के भी हलवा बना सकती हैं. इसके लिए आपको गाजर को उसके पानी में तब तक पकाना है जब तक उसका पानी न खत्म हो जाए. इसके अलावा गाजर अच्छे से पक भी जानी चाहिए. बता दें, ऐसा करने से इसका स्वाद लंबे समय तक फ्रेश रहेगा, लेकिन अगर आप उसमें दूध डाल देंगी तो उसका स्वाद जल्दी  ही बदल जाएगा.

चोरी हो जाए डेबिट-क्रेडिट कार्ड तो तुरंत करें ये काम

आजकल डेबिट और क्रेडिट कार्ड के जरिए हम लोगों की रोजमर्रा की आर्थिक जरुरतों को पूरा करना बेहद आसान हो गया है. बस कार्ड की डिटेल्स भरें और कोई भी ट्रांजेक्शन कर लें. लेकिन आपकी यही सहूलियत आपके लिए तब मुसीबत बन जाती है जब आपका कार्ड चोरी हो जाता है या खो जाता है. ऐसे समय में आप कुछ टिप्स की मदद से आप तुरंत अपने बैंक खाते के पैसे को सिक्योर कर सकते हैं.

एटीएम कार्ड खो जाए तो सबसे पहले आप अपने बैंक को इसकी जानकारी दें और क्रेडिट और डेबिट कार्ड को ब्लौक करा दें ताकि कोई भी इसका मिसयूज ना कर सके. इसके बाद बैंक में जाकर नए एटीएम कार्ड के पिन के लिए अप्लाई कर दें. एहतियात के तौर पर कार्ड खोने की एफआईआर भी दर्ज करा सकते हैं क्योंकि कई बैंक इसकी मांग कर लेते हैं. अगर आप नेट बैकिंग का इस्तेमाल करते हैं तो अपने अकाउंट का पासवर्ड भी बदल दें.

कार्ड ब्लौक कराने के बाद 2 तरीके से आप नए कार्ड मंगा सकते हैं.

– आपके बैंक में आपके रजिस्टर्ड एड्रेस पर बैंक 5-7 वर्किंग दिनों के अंदर आपको नया कार्ड और पिन भेज देगा.

– बैंक में जाकर आप खुद भी नया कार्ड ले सकते हैं. इसके लिए आपको एक आईडी प्रूफ और एक उसी बैंक का कैंसेल्ड चेक देना होगा और बैंक तुरंत आपको नया कार्ड इश्यू कर देगा.

पेमेंट ऐप्स पर कोई भी बैंकिंग ट्रांजेक्शन करते वक्त सेव डिटेल्स के औप्शन को अनचेक ही रखें. कई बार ऐसा होता है कि आपके कार्ड की डिटेल्स औनलाइन सेव हो जाते हैं जिसके जरिए आपके कार्ड का सिर्फ सीवीवी डालकर ट्रांजेक्शन पूरा किया जा सकता है. तो इस औप्शन को कभी भी टिक ना करें. थोड़ी सी सहूलियत के बदले आपके बैंक खाते के पूरे पैसे के साफ होने का रिस्क कतई ना लें.

अपने बैंकिंग एसएसएस अलर्ट को चालू रखें ताकि आपके कार्ड से होने वाले लेन-देन की जानकारी आपको मिलती रहे. ध्यान रखें कि आपके उस अकाउंट में किसी भी तरह का कोई क्रेडिट-डेबिट होने का मैसेज आपको मिलता है जो आपने ना किया हो तो तुरंत बैंक को इसकी जानकारी दें.

औरतों ने क्यों दिया ट्विटर को ‘ब्राह्मणवादी पितृसत्ता नष्ट करो’ का नारा

ट्विटर के सीईओ माइकल जैक डोरसी द्वारा ‘स्मैश ब्राह्नीकल पैट्रिआर्की’ पोस्टर को पकड़े जिस ट्वीट पर बवाल मचा है असल में उसके पीछे बदलाव की पक्षधर महिलाएं हैं. जैक के साथ फोटो में कई महिलाएं खड़ी हैं. ये महिलाएं देश दुनिया की उस आधी आबादी की नुमाइंदगी की प्रतीक हैं जो जो ब्राह्मणवादी पितृसत्ता से पीड़ित रही हैं और अब इस शोषणकारी, भेदभाव वाली सत्ता से छुटकारा पाना चाहती हैं.

जैक ने सोचा भी नहीं होगा कि भारत में वह महिलाओं के साथ ‘ब्राह्मणवादी पितृसत्ता का नाश हो’ पोस्टर पकड़े फोटो खिंचवा कर ट्वीट कर रहे हैं, उस से भारत भर में ब्राह्मणवादी ताकतें उन के खिलाफ जहर उगलते हुए उन्हें निगलने पर उतावली हो उठेंगी.

ब्राह्मणवादी पितृसत्ता किस कदर ताकतवर है, यह जैक द्वारा माफी मांग कर उन्हें खामोश कर देने की घटना से स्पष्ट हो गया है. इस भेदकारी शक्ति से जैक पर हमला कर उन्हें भयभीत कर चुप करा दिया था. सदियों पुरानी गैर बराबरी पर टिकी व्यवस्था जैक पर एक साथ टूट पड़ी और उस आवाज के दमन पर उतर आई जो महज एक पोस्टर के जरिए अनजाने में ही उजागर कर दी गई थी.

जैक की आवाज दबाने के पीछे ब्राह्मणवादी ताकतें ही नहीं, राजनीतिक सत्ता भी शामिल नजर आ रही है. देश में प्राचीन हिंदूवादी व्यवस्था कायम रखने के प्रयास में जुटी केंद्र सरकार के गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने मामला तूल पकड़ते ही कह दिया था कि ब्राह्मणवादी विरोधी पोस्टर पर सरकार सख्त कदम उठाएगी.

यह सही हो सकता है कि जैक द्वारा माफी मांगने के पीछे उन का कारोबारी मकसद रहा हो पर विरोध करने वाली ब्राह्मणवादी पितृसत्ता के सामने भी अहम सवाल उस के धंधे का है.

असल में धर्म के धंधेबाज जरा सी आहट होते ही चिल्लाने लगते हैं. जैक के ट्वीट का विरोध करने वाले ब्राह्मणवादी विचारधारा के लोग हैं जिन का इस व्यवस्था से स्वार्थ जुड़ा हुआ है.

क्या है ब्राह्मणवादी पितृसत्ता?

ब्राह्मणवादी पितृसत्ता सदियों पुरानी गैरबराबरी वाली सामाजिक व्यवस्था है जो आज तक कायम है. इस में जातीय शुद्घता व ऊंचनीच के भेदभाव के साथसाथ स्त्रियों पर पुरुष के नियंत्रण का अधिकार भी खासतौर से शामिल है. इस पुरुष शासित समाज व्यवस्था में औरतें दोयम दर्जे की नागरिक मानी जाती हैं. उसे पाप की गठरी, पैर की जूती समझा जाता रहा है.

ब्राह्मणवादी सत्ता से स्त्रियों के साथसाथ दलित भी पीड़ित रहे हैं. अब यही वर्ग इस के खिलाफ ज्यादा मुखर हो रहे हैं. इन वर्गों के साथ कदम कदम पर भेदभाव बरता गया. इन्हें व्यक्तिगत आजादी नहीं दी गई. सारे अधिकार सामाजिक सत्ता ने अपने पास रखें.

जैक का पोस्टर इस व्यवस्था की पोल खोलने वाला नजर आता है, इसीलिए इस के खिलाफ आवाज उठाने, बदलाव की कोशिश करने या छेड़छाड़ करने वालों पर हमले किए जाते रहे हैं.

ब्राह्मणवादी पितृसत्ता का विरोध करने वाली स्वयं ऊंची जाति की महिलाएं शामिल हैं और वे खुद इस सत्ता की शिकार हैं. अब यही महिलाएं इस सत्ता के खिलाफ खुल कर सामने आ रही हैं. मीटू अभियान इसी व्यवस्था की खिलाफत का प्रमाण है.

हिंदू धर्मग्रंथों ने स्त्रियों के लिए अलग से स्त्रीधर्म बना दिया. उसे एक निर्धारित दायरे में कैद कर दिया गया. खुद के शरीर के अंगों पर अधिकार स्त्री को नहीं, पुरुष ने अपने पास रखे. औैरत को पर्दे में रखा गया. उसे पढ़ने लिखने के अधिकार नहीं दिए गए. खाने पीने, पहनने ओढने, मर्जी से प्रेम विवाह का हक नहीं दिया गया. औरत को पुत्र ही पैदा करना है, उसे कितने बच्चे जन्मने हैं, सारे फैसले पितृसत्ता ने अपने पास रखे. पति को परमेश्वर मानना जैसी बातें ही उस का धर्म करार दिया गया.

सदियों से थोपी गईं इन सब बातों का औरतों की तरक्की से कोई मतलब नहीं रहा. औरत अब इस सत्ता में घुटन महसूस करने लगी और उस ने इस के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया है. मीटू अभियान इसी सत्ता के खिलाफ महिलाओं का विरोध है. इस पितृसत्ता का विरोध दुनिया भर में हो रहा है.

इस ब्राह्मनीकल पैट्रिआर्की के पीछे धर्म का विशाल कारोबारी साम्राज्य खड़ा है जो औरत को दबाए रख कर पंडेपुजारियों, पादरियों, मुल्ला मौलवियों को ऐश और ऐय्याशी का हक प्रदान करता आया है. ब्राह्मणवादी पितृसत्ता किसी भी परिवर्तन की विरोधी है. इस के खिलाफ आवाज उठाने वालों को आजकल सोशल मीडिया के जमाने में ट्रोल करना शुरू कर दिया जाता है.

यह स्त्रियों पर अब भी अपना नियंत्रण रखना चाहती है. वह क्या खाए पीए, क्या पहने ओढ़े, क्या पढ़े लिखे, किस से शादी करे, इन सब बातों पर अपना अधिकार कायम रखना चाहती है. अब यही पितृसत्ता उन बगावती औरतों से आतंकित है और यह जैक ही नहीं, हर उस संस्था, बुद्घिजीवी, लेखक के विरोध में उतरी दिखाई देती है जो इस के खिलाफ बोल रहा या लिख रहा है.

प्रगति में बाधक ब्राह्मणवादी पितृसत्ता की दीमक लगीं दीवारें ढहाने पर अब औरतें खुद ही तुल पड़ी हैं. मीटू जैसे अभियान अब सामाजिक जागरण आंदोलन बन रहे हैं जो महिलाओं के लिए पितृसत्ता से मुक्ति के रास्ते खोल रहे हैं.

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अयोध्या के साधुओं ने किया वीएचपी की धर्म सभा का बहिष्कार

25 नवंबर को अयोध्या में विश्व हिंदू परिषद की बहुप्रचारित “धर्म सभा” का उन्माद जैसे ही थमने लगा है, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और वीएचपी को एक कटु सत्य का सामना करना पड़ रहा है. धर्म सभा का उद्देश्य राम मंदिर के निर्माण के लिए लाखों लोगों का समर्थन हासिल करना था – लेकिन अयोध्या के प्रमुख साधुओं और मठों ने ही इस समारोह का बहिष्कार कर दिया. साधुओं के बहिष्कार से राम जन्मभूमि आंदोलन में महत्वपूर्ण पैठ बनाने की वीएचपी की उम्मीद को झटका लगा है.

अयोध्या के तीन प्रमुख अथवा उग्र रामानंदी अखाड़ों में से दो निर्वाणी और निर्मोही आखाड़ों ने वीएचपी के इस आयोजन से खुद को दूर रखा. इन तीन में से सबसे कम प्रभाव रखने वाला दिगंबर अखाड़ा ही कार्यक्रम में शामिल हुआ.

धर्म सभा के मुख्य वक्ताओं में दिगंबर अखाड़ा के प्रमुख साधू, नृत्य गोपाल दास, जो वीएचपी के ट्रस्ट श्री राम जन्मभूमि न्यास के प्रमुख भी हैं. इस कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लेने वाले एक अन्य स्थानीय साधू कन्हैया दास, वीएचपी के जिला स्तर के पदाधिकारी और अयोध्या के एक मंदिर के महंत हैं. सभा में बोलने वाले सभी अन्य प्रमुख साधू मुख्यतः हरिद्वार और चित्रकूट से आए बाहरी साधू थे.

निर्मोही अखाड़ा के प्रमुख दिनेन्द्र दास ने मुझे फोन पर बताया, “संघ की बैठक में भाग लेने और मूर्खों की तरह तालियां बजाने का क्या मतलब है?” उन्होंने आगे कहा, “उन लोगों के लिए यह अच्छा होता कि सर्वोच्च अदालत में चल रहे राम जन्माभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में तेजी लाने के लिए कुछ करते. इनके नाटक को लोग अच्छी तरह समझ चुके हैं.”

निर्मोही अखाड़ा उन दावेदारों में से एक है जिनके बीच 2010 के फैसले में इलाहाबाद उच्च अदालत ने उस विवादित भूमि को तीन हिस्सों में बांटा था – जिस पर बनी बाबरी मस्जिद को 1992 में कार सेवकों की भीड़ ने शहीद कर दिया था. धर्म सभा में भाग लेने वालों में एक थे राम दास. राम दास पहले निर्मोही अखाड़े के साधू थे. मैंने उनके बारे में जब दिनेंद्र दास से पूछा तो उनका कहना था, “पिछले साल जब उन्हें अखाड़े के नेतृत्व से बाहर कर दिया गया था तभी से वे वीएचपी से समर्थन हासिल करना चाह रहे हैं. अखाड़े ने पहले से ही खुद को उनसे अलग कर लिया है.”

अयोध्या के सबसे ताकतवर रामानंदी निर्वाणी अखाड़ा के प्रमुख धरम दास अपनी आलोचना में ज्यादा कटु हैं. “साधू लोग सरल स्वभाव के होते हैं लेकिन आपको उनका समर्थन यूं ही मिल जाएगा ऐसा नहीं मान लेना चाहिए, खासकर तब जब वो लोग जानते हैं कि धर्म सभा के आयोजक सिवाए राजनीति के कुछ नहीं कर रहे.”

गौरतलब है कि धरम दास वीएचपी की केन्द्रीय समिति-मार्गदर्शक मंडल-के प्रमुख सदस्य हैं. उन्होंने बताया, “मैंने वीएचपी के आयोजन का बहिष्कार इसलिए किया क्योंकि मैं अयोध्या के साधुओं की भावना का सम्मान करता हूं जो केंद्र में बीजेपी सरकार की धोखाधड़ी को महसूस कर रहे हैं.”

निर्वाणी अखाड़ा का मुख्यालय हनुमानगढ़ी में है. यह अयोध्या का सबसे बड़ा मठ भी है. इसके साधू वीएचपी के इस शक्ति प्रर्दशन से इतने नाराज थे कि इसके अधिकांश साधू आयोजन की बात तक नहीं करना चाहते थे. हनुमानगढ़ी के एक प्रमुख साधू संजय दास का कहना था, “ऐसा इसलिए है क्योंकि हनुमानगढ़ी के निवासी वीएचपी के हाथों का खिलौना बनते बनते थक गए हैं.” उन्होंने आगे बताया, “वे राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मुद्दे का जल्द से जल्द समाधान चाहते हैं लेकिन वीएचपी ने ऐसा कोई संकेत नहीं दिया है कि वह इस बारे में गंभीर है. केवल चुनाव के समय वह दिखाता है कि वह गंभीर है. उनकी यह चाल अब और काम नहीं कर सकती.”

चार पट्टियों- सगारिया पट्टी, बसंतिया पट्टी, हरिद्वारी पट्टी और उज्जैनिया पट्टी- के प्रमुखों ने एक सप्ताह पहले मुलाकात की और वीएचपी के कार्यक्रम से दूर रहने का निर्णय लिया. इसके बाद हनुमानगढ़ी में बहिष्कार का निर्णय मुखर हो गया. संजय ने बताया, “एक बार यह निर्णय हो गया तो जाहिर सी बात थी कि हनुमानगढ़ी से कोई भी भाग नहीं लेने वाला था.”

बहिष्कार के प्रभावों को अतिरंजित किए बिना कहा जा सकता है कि तमाम कोशिशों के बावजूद वीएचपी अयोध्या में उस तरक का प्रभाव पुनः स्थापित नहीं कर सका है जैसा प्रभाव 1990 के दशक में-बाबरी मस्जिद के विध्वंस और उसके बाद- उसका यहां था. पिछले लोकसभा चुनावों से पहले बीजेपी ने जब नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश किया था तब उसका समर्थन जरूर बड़ा था लेकिन अब लगता है मानो कि वह समय भी गुजर गया.

आरएसएस के इस संगठन ने 1984 में राम जन्मभूमि को अपना केंद्रीय मुद्दा बनाया था. उसके बाद से वीएचपी का साधुओं के साथ जिस तरह का संबंध रहा है उसमें दिखाई दे रही तल्खी आने वाले दिनों में अधिक बढ़ने की संभावना है. शायद यह तल्खी ही वह वजह है जिसके चलते स्थानीय प्रशासन ने एक अन्य प्रमुख साधू परमहंस दास को आयोजन की अवधि तक अघोषित नजरबंदी में रखा हुआ था. परमहंस दास ने अक्टूबर के आरंभ में एक हफ्ते की भूखहड़ताल कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मंदिर का निर्माण करने के लिए, कानून पारित करने की मांग की थी.

परमहंस दास ने फोन पर मुझे बताया, “सुरक्षा बलों ने मेरे आश्रम के सभी द्वारों को बंद कर दिया है और मैं बाहर ही नहीं जा सकता. उन्हें डर है कि अगर मैं धर्म सभा के आयोजन स्थल पर पहुंच गया तो कुछ ऐसा कर दूंगा जिससे उनके नाटक का पर्दाफाश हो जाएगा.”

हालांकि मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने उपवास तोड़ने के बाद उन्हें मनाने के प्रयास किए थे तो भी वे स्थानीय साधुओं के आक्रोश का प्रतिनिधित्व करते हैं. वीएचपी अब उन पर संदेह करती है. परमहंस ने हाल ही में राज्य सरकार को एक अल्टीमेटम जारी किया है कि यदि राम मंदिर के निर्माण के लिए कोई ठोस कदम 5 दिसंबर तक नहीं उठाया गया तो वे अगले दिन आत्मदाह कर लेंगे.

पहले अयोध्या के बहुत से खेमों ने उनकी इस धमकी को गंभीरता से नहीं लिया लेकिन, कल के आयोजन के बाद उनका अल्टीमेटम फिर से चर्चा का विषय बन गया है और साथ ही वीएचपी के ऊपर लटकी तलवार भी.

मैं ने सुना है स्क्रबिंग सही तरीके से न करने पर इस का स्किन पर विपरीत असर भी पड़ सकता है. स्क्रबिंग की सही विधि क्या है.

सवाल
मैं घर में नियमित स्क्रबिंग करना चाहती हूं, लेकिन सुना है इसे सही तरीके से न करने पर इस का स्किन पर विपरीत असर भी पड़ सकता है. स्क्रबिंग की सही विधि क्या है?

जवाब
आप ने सही सुना है. स्क्रब करने का सही तरीका यह है कि अपनी त्वचा पर सहजता से दबाव डालते हुए स्क्रबिंग की जाए. खासकर फेशियल त्वचा पर यह ज्यादा जरूरी है, क्योंकि यह ज्यादा संवेदनशील होती है, इसलिए इसे स्क्रब करते समय अतिरिक्त सावधानी बरनी चाहिए. स्किन के ड्राई होने पर इसे स्पैशल केयर के साथ ऐक्सफौलिएटेड किए जाने की जरूरत होती है.

कभी अपने चेहरे पर सीधे स्क्रब का इस्तेमाल न करें. पहले अपने चेहरे को नम करें, फिर स्क्रब की थोड़ी मात्रा ले कर चेहरे पर लगाने से पहले इस में थोड़ा पानी मिलाएं. इस से स्क्रब सौम्य हो जाता है और इसे चेहरे पर आसानी से लगाया जा सकता है.

हाथों को गोलाई में चेहरे पर घुमाएं. आंखों और होंठों के आसपास के हिस्से पर हाथों से जोर से प्रैशर लगाने से बचें, क्योंकि ये हिस्से संवेदनशील होते हैं. समस्याग्रस्त हिस्सों पर ज्यादा जोर दें. स्क्रब आप की स्किन टोन और बनावट सुधारने में मदद करता है.

 

अभी तो पार्टी शुरू हुई है, लेकिन…

सिडनी में खेले गए तीसरे और आखिरी ट्वेंटी-20 मैच के शुरू होने से पहले हर भारतीय दर्शक इस बात से डरा हुआ था कि कहीं इस मैच में भी बारिश विलेन बन कर भारत के हाथ से यह सीरीज न छीन ले. लेकिन वहां के बादल इतना पानी न जुटा पाए और भारतीय टीम ने रविवार, 25 नवंबर को आखिरी मुकाबले में औस्ट्रेलिया को 6 विकेट से हरा दिया.

इस मैच में औस्ट्रेलियाई टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए तय 20 ओवरों में 6 विकेट पर 164 रन बनाए. इस के जवाब में भारतीय टीम ने 19.4 ओवरों में 4 विकेट खो कर जरूरी टारगेट हासिल करते हुए शानदार जीत दर्ज की.

औस्ट्रेलिया के 4 बल्लेबाजों को आउट करने वाले कुणाल पांड्या को ‘प्लेयर औफ द मैच’, जबकि शिखर धवन को ‘प्लेयर औफ द सीरीज’ चुना गया.

लेकिन अभी भारत को औस्ट्रेलिया में 4 टेस्ट मैच और 3 वनडे मैच खेलने हैं. पहला टेस्ट मैच 6 दिसंबर को एडिलेड में खेला जाएगा जबकि इस सीरीज का आखिरी मैच वनडे होगा जो 18 जनवरी को मेलबोर्न में होगा.

कागजों पर भले ही कंगारुओं की मौजूदा टीम हल्की लग रही है पर ट्वेंटी-20 मैचों में जैसे उस ने सीरीज 1-1 से बराबर रखी, इस बात से उस का हौसला बढ़ गया है.

लेंगे इनकी मदद

हालांकि इंटरनेशनल क्रिकेट से फिलहाल बाहर चल रहे औस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान स्टीव स्मिथ और उपकप्तान डेविड वौर्नर भारत के खिलाफ होने वाले 4 टेस्ट मैचों की सीरीज में नहीं खेल पाएंगे लेकिन ये दोनों बाहर से अपने तेज गेंदबाजों को विराट कोहली और उन की टीम से निबटने के लिए तैयार कर रहे हैं.
एक औस्ट्रेलियाई अखबार के मुताबिक उन्हें किसी खास मकसद से भारत के खिलाफ आखिरी ट्वेंटी-20 मैच से पहले सिडनी क्रिकेट ग्राउंड के ड्रेसिंग रूम में भी बुलाया गया था.

भारत के कप्तान विराट कोहली चूंकि अपनी बेहतरीन फौर्म में हैं और स्टीव स्मिथ व डेविड वार्नर उम्दा बल्लेबाज हैं तो वे दोनों औस्ट्रेलियाई गेंदबाजों के सामने बल्लेबाजी करने को तैयार हो गए हैं ताकि उन को सधी हुई गेंदबाजी करने में मदद मिल सके और वे भारतीय बल्लेबाजों पर अपनी गेंदबाजी से पूरी तरह से हमला कर सकें.

याद रहे कि स्टीव स्मिथ और डेविड वौर्नर के अलावा कैमरून बैनक्राफ्ट पर दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन में इसी साल मार्च महीने में खेले गए एक टेस्ट मैच में गेंद से छेड़छाड़ के चलते बैन लगा था.

स्टीव स्मिथ और डेविड वौर्नर पर औस्ट्रेलिया के क्रिकेट बोर्ड ने 1-1 साल का बैन लगाया था जबकि कैमरून बैनक्राफ्ट पर 9 महीने का बैन लगा था. उन्होंने बीच में ही अपने बोर्ड से यह बैन हटाने की गुहार लगाई थी पर उसे माना नहीं गया.

अब अगर हमारे विरोधियों की यह चाल काम कर गई तो भारत की टेस्ट सीरीज जीतने की उम्मीदों पर बिना बारिश हुए पानी पड़ सकता है.

45 की मलाइका का 33 के अर्जुन पर ऐसे आया दिल कि कर लिया ये काम

‘मुन्नी बदनाम हुई…’ से मशहूर हुई, हौट और ग्लैमरस मलाइका अरोड़ा और अर्जुन कपूर ने यों तो कभी नहीं माना कि वे दोनों एकदूसरे को डेट करते हैं पर खबरचियों की मानें तो ये दोनों जल्द ही शादी करने जा रहे हैं.

गरम है अफवाहों का बाजार

खबरचियों की बात सही हुई तो मलाइका और अर्जुन कपूर ने लोखंडवाला कौंप्लैक्स के करीब एक शानदार घर भी खरीद लिया है.

मीडिया से बचते रहे हैं

मलाइका के साथ लंबे समय तक गुटरगूं करने के बाद अर्जुन कपूर शादी की घोषणा कर सकते हैं. हालांकि, इन दोनों ने अपने रिश्ते को न तो मीडिया के सामने कभी खुलासा किया और न ही औरों के पास, मगर शादी जल्दी होगी अफवाह का बाजार गरम जरूर है.

खान परिवार की नाराजगी

खबरों के मुताबिक अरबाज खान और मलाइका की जिंदगी में जहर घोलने वाले अर्जुन कपूर ही हैं, जिन की वजह से मलाइकाअरबाज की जोङी टूट गई थी. इस वजह से खान परिवार की आंखों की किरकिरी रहे हैं अर्जुन कपूर.

क्यों चुप रही है मलाइका

अर्जुन कपूर को डेट करने को ले कर मलाइका ने हमेशा चुप्पी लगाए रखी पर अर्जुन कपूर ने पहली बार ‘काफी विद करण-6’ में करण कपूर द्वारा पूछे गए सवाल कि क्या आप सिंगल हैं? के जवाब में कहा था,”नहीं… अब मैं सिंगल नहीं हूं.”

यानी अर्जुन मलाइका का ईलूईलू सिर्फ डेटिंग तक ही सीमित नहीं था और शायद तभी दीनों ने शादी से पहले ही फ्लैट भी खरीद लिया.

चेहरा क्यों छिपा रहे अर्जुन

गोवा में इंटरनैशनल फिल्म फैस्टिवल से भी अर्जुन कपूर नदारत रहे, जबकि एक सैशन में उन्हें पहुंचना था.

मीडिया से बातचीत में पिता बोनी कपूर ने बताया,”दरअसल, अर्जुन अपनी एक नई फिल्म में बिजी हैं और फिल्म के नए लुक में खुद को जगजाहिर नहीं कर सकते. वे तबतक इस लुक को जगजाहिर नहीं कर सकते जब तक कि निर्माता न चाहे.”

यानी, खिचड़ी पकने वाली है…

जानिए कितनी रकम का होना चाहिए आप का बीमा

वैश्विक पुनर्बीमा कंपनी स्विस रे की 2015 की एक रिपोर्ट के मुताबिक जितनी बीमा सुरक्षा हमारे पास होती है व जितनी होनी चाहिए उसमें बहुत फर्क होता है. रिपोर्ट में बोला गया कि यह फर्क 92 प्रतिशत तक होता है जिसका अर्थ है कि बीमा 10 प्रतिशत से भी कम इंडियन जनता की वित्तीय सुरक्षा की जरूरतें पूरी करता है.

दूसरे शब्दों में हिंदुस्तान में जिंदगी बीमा सुरक्षा पर यदि 100 रुपये खर्च किये जाने हैं तो उसमें से सिर्फ 7.8 रुपया ही खर्च हो रहा है जिससे जिंदगी की अनिश्चितताओं के प्रति हमारे परिवार की वित्तीय सुरक्षा में 92.2 प्रतिशत का फर्क हो जाता है.

परिवार का जिंदगी स्तर बरकरार रखने के लिए कितने का बीमा महत्वपूर्ण है, इसे समझने के लिए एक उदाहरण पर गौर करते हैं. 50 लाख रुपये की बीमा सुरक्षा छह प्रतिशत की दीर्घकालिक ब्याज दर के आधार पर 25,000 रुपये की मासिक आय प्रदान करेगी. इसमें यह माना जा रहा है कि परिवार जिंदगी बीमा की राशि को सावधि जमा जैसी सुरक्षित योजनाओं में रखेगा जिस पर दीर्घकालिक स्तर पर छह प्रतिशत का ब्याज मिलेगा. अब देखते हैं कि क्या आज यह 25,000 रुपये प्रतिमाह किसी शहरी मध्य वर्गीय परिवार के खर्चे के लिए बहुत ज्यादा होगा?

हममें से कई जिंदगी बीमा का महत्व समझते हैं लेकिन अक्सर हमें पता नहीं होता है कि हमें वित्तीय तौर पर सुरक्षित रहने के लिए कितनी बीमा सुरक्षा की आवश्यकता है. इसका पता हम निम्नांकित चार चरणों की प्रक्रिया के जरिए लगा सकते हैं.

पहला चरण : अपने कुल मासिक घरेलू खर्च (विभिन्न किस्म के ईएमआई) में से ऋण का मासिक तौर पर देय ईएमआई घटायें. इससे आपको अपने हर माह होने वाले खर्च का पता चलता है जिसकी व्यवस्था आपको करनी है. अब अपने इस मासिक घरेलू खर्च को 12 से गुणा करें तो आपको अपने सालाना खर्च का पता चलेगा.

दूसरा चरण : यह तय करें कि आपको अपनी कुल राशि पर कितनी दीर्घ कालिक सावधि जमा दर चाहिए. इस दीर्घकालिक सावधि जमा दर के आधार पर अपने कुल सालाना खर्च को विभाजित करें. आपको इतने ही राशि के ज़िंदगी बीमा की आवश्यकता होगी ताकि आपकी आय सुरक्षित रहे.

तीसरा चरण : हमेशा याद रखें कि आपकी ज़िंदगी बीमा सुरक्षा तब तक पूरी नहीं होगी जब तक इसमें आपने अपना ऋण शामिल न किया हो. दूसरे चरण में जितनी राशि का आकलन किया हो उसमें अपने सारे ऋण का कुल बकाया मूलधन जोड़ दें. आपको इस राशि के बराबर ज़िंदगी बीमा सुरक्षा की जरुरत होगी.

चौथा चरण : हो सकता है आपके पास पहले से ज़िंदगी बीमा पालिसी हो. आपके पास कुल जितने की ज़िंदगी बीमा सुरक्षा है उसे सकल ज़िंदगी बीमा सुरक्षा राशि में घटाएं तो आपको उस ज़िंदगी बीमा सुरक्षा की राशि का पता चलेगा जितनी राशि की बीमा सुरक्षा की आवश्यकता आपके परिवार की ज़िंदगी स्तर को बनाए रखने के लिए होगी.

वित्तीय योजना में अन्य कमियां भी हो सकती हैं जिसके लिए ज़िंदगी बीमा सुरक्षा की आवश्यकता होगी, मसलन बच्चों की शिक्षा, शादी आदि. मिसाल के लिए यदि आपको आने वाले दिनों में अपने बच्चे की एजुकेशन के लिए आज के मूल्य के अनुसार 10 लाख रुपये की आवश्यकता है व आपने इसके लिए दो लाख रुपये बचा रखे हैं तो बच्चे की एजुकेशन के लक्ष्य के मुकाबले आठ लाख रुपये कम पड़ेंगे.

अपनी जरूरत के अनुसार कुल जिंदगी बीमा सुरक्षा प्राप्त करने के लिए आपको बच्चों की एजुकेशन से जुड़ी इस कमी को पूरा करने के लिए इस राशि को आपको चौथे चरण में आकलित राशि को जोड़ना पड़ेगा. इसलिए अपनी सुरक्षा योजना की इस अंतराल के बारे में सजग रहे व इससे विधिवत तरीके से निपटें.

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