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फोन से हटाए गए नोटिफिकेशन को इस तरह दोबारा देखें

एंड्रौयड फोन में ई-मेल आईडी, व्हाट्सएप, ट्विटर और अन्य जरूरतों को पूरा करने वाली एप्लीकेशन रहती हैं. इन ऐप से आने वाले नोटिफिकेशन की संख्या को गिनना बहुत मुश्किल है. इतने सारे नोटिफिकेशन से परेशान होकर कई बार यूजर इन्हें डिस्प्ले से स्वाइप कर देते हैं और सोचते हैं कि बाद में समय मिलने पर जवाब देंगे.

मगर समय मिलने पर सभी नोटिफिकेशन को याद रखना मुश्किल है. इसके बावजूद आप फोन से हटाए गए सभी नोटिफिकेशन को दोबारा देख सकते हैं.

ऐसे देखें पुराने नोटिफिकेशन

इसके लिए आपको फोन के विजेट्स पर जाना होगा जिसके दो तरीके हैं. कुछ देर स्क्रीन पर टच करके रखें इसमें डिस्प्ले पर विजेट्स और सेटिंग का विकल्प खुलकर सामने आ जाएगा. जबकि विजेट्स में जाने का दूसरा विकल्प मेन्यू को खोलकर उसकी डिस्प्ले को दाईं तरफ से बाईं ओर स्वाइप करें.

डिस्प्ले पर दिख रहे सेटिंग के विजेट्स पर जाएं. सेटिंग विजेट्स को कुछ देर दबा कर रखें. जब सेटिंग का विजेट्स मेन्यू स्क्रीन पर आ जाएगा तो उसे वहां छोड़ दें. जैसे ही आप सेटिंग के विजेट्स को छोड़ेंगे तो सेटिंग का शॉर्टकट डिस्प्ले पर खुलकर आ जाएगा. इसे आप नीचे की ओर स्क्रॉल करेंगे तो यहां नोटिफिकेशन लॉग का विकल्प दिखेगा. इस पर क्लिक कर सभी पुरानी नोटिफिकेशन देखी जा सकती हैं.

पढ़े हुए नोटिफिकेशन का बदला होगा रंग

आपने जिन नोटिफिकेशन को पढ़ लिया है उनका रंग स्लेटी (ग्रे) हो जाएगा और जिन नोटिफिकेशन को अब तक नहीं देखा गया है वे गहरे रंग में दिखाई देंगे. इस सूची में ट्विटर, हैंगआउट और व्हाट्सएप के नोटिफिकेशन भी होंगे. नोटिफिकेशन हटाने के लिए नोटिफिकेशन औटो क्लियर एप का भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

सर्दियों में इन बातों का रखें ख्याल और रहें स्वस्थ

सर्दियों में सेहत का ख्याल रखना बेहद जरूरी होता है. इस दौरान जरूरी है कि आप कुछ खास सावधानियां बरतें और चिकित्सकों की सलाह पर अमल कर सेहतमंद रहें. इस खबर में हम आपको कुछ ऐसी ही टिप्स बताएंगे जो सर्दियों में खुद की देखभाल करने में आपकी मदद करेंगी.

  • आप हमेशा खुद को गर्म कपड़ों से ढक कर रखें. ठंड में कुछ अंग काफी संवेदनशील होते हैं जैसे पैर, सिर और कान. इनको खासकर के ढक कर रखें. ऐसा करने से आपको ठंड लगने की संभावना काफी कम हो जाती है.
  • साबुत अनाज, दलिया आदि दिल की सेहत के लिए अच्छे होते हैं. इससे वजन भी संतुलित रहता है. कोशिश करें कि तले हुए अनाज ना खाएं. फलों और हरी सब्जियों का सेवन भरपूर मात्रा में करें. इस मौसम में इस तरह की डाइट जरूरी है.
  • सर्दियों में हमें ज्यादा प्यास नहीं लगती, पर समय समय पर पानी का शरीर में जाना जरूरी होता है. स्वस्थ रहने के लिए जरूरी है कि आप पानी खूब पिएं. इसके अलावा हर्बल टी भी लें. इससे शरीर में एलडीएल कौलेस्ट्रौल और ट्राइग्लिसराइड का स्तर कम रहता है और हमारे शरीर स्वस्थ रहता है.
  • वजन कम रखें. इसके लिए आपको नियमित रूप से व्यायाम करना होगा. हर रोज वौक करना होगा. शरीर थकेगा तो गर्मी होगी. इसके साथ ही आपके शरीर में खून भी बढ़ता है.

टोमेटो कैचप से चमकाएं बर्तन और ज्वेलरी

टोमेटो कैचप,  इसमे सिरका मिले होने के कारण यह और भी अम्लीय हो जाते हैं. सौस की मदद से दाग हटाना सबसे सस्ता तरीका है. इसके अलावा, बाज़ार में कई ऐसे ब्लीचिंग एजेंट उपलब्ध हैं, जिनकी तुलना में ये अधिक कारगर है.

यह दागों से निपटने के लिये एक जैविक तरीका भी है. अकसर चीज़ों में जब गंदगी लग जाती है तो इन्हें साफ करने के लिये कड़ी मेहनत करनी पड़ती है. इसलिये अपने घर और बगीचे में टमाटर के कैचप का उपयोग करने के कुछ और तरीकों को जानें.

तांबे के ज़िद्दी दाग को खत्म करने के लिए तांबा से बनी हुई चीज़ें काफी डेकोरेटिव और पुराने ज़माने की लगती हैं. तांबे के बर्तनों में खाना बनाना स्वास्थ्य के लिये अच्छा है, लेकिन आप रखरखाव के बारे में सोचने के लिए मजबूर हो सकती हैं. यदि आप इन बर्तनों को टमाटर कैचप से साफ करते हैं तो ये चमकने लगते हैं.

बस आपको उसके लिये तांबे के बर्तन पर कैचप लगाकर 15 से 20 मिनट तक छोड़ देना है. फिर मुलायम सूती कपड़े के साथ पौलिश और चमक लाने के लिये गर्म पानी से उसको साफ करना होगा. ज़िद्दी दाग के लिए, कैचप में थोड़ा सा नमक और डाल लें और वही प्रक्रिया दोहराएं. यह तांबे के आभूषणों के लिये भी कारगर उपाय है. पीतल को काला पड़ने से बचाने के लिए आप पीतल के डोरहैंडल, शोपीस और यहां तक कि कुकवेयर में भी इसका इस्तेमाल कर सकती हैं.

जब केचप को पीतल के सामान पर लगाया जाता है तो ये उनकी गंदगी को हटाता है. आप चाहें तो एक कटोरे में कैचप ले लें और उसमें पीतल की छोटी चीजों को डुबो दें और उसे 15 से 20 मिनट तक रहने दें. बाद में उन्हें मुलायम कपड़े से पोंछें और फिर अच्छी तरह से धो लें.

चांदी की चमक वापस लाने के लिए यदि आपके पास चांदी का सामान है और आप उसे सही से नहीं रखती हैं तो वे हवा के संपर्क में आने पर काले पड़ जाते हैं क्योंकि ये हवा से संपर्क करके कौपर औक्साइड बनाते हैं, जो इसकी चमक को फीका कर देता है. आप 5 से 10 मिनट तक सिल्वर औब्जेक्ट को कैचप के बर्तन में डुबो दें और बाद में आप देखेंगे कि उनकी चमक वापस आ जाती है.

एक बात ध्यान रखें कि इन्हें ज़्यादा वक्त के लिये केचप में न रहने दें क्योंकि एसिड चांदी के बने सामान को नुकसान पहुंचा सकता है.

बगीचे में दालचीनी लगाने के फायदे

हममें से कई ऐसे लोग जो दालचीनी के बिना अपने जीवन की कल्‍पना भीं नहीं कर सकते हैं. इसकी महक बहुत तेज होती है. पर पिछले कुछ सालों में दालचीनी के स्‍वाद में थोड़ा बदलाव आया है. अब ना तो इसकी महक पहले जैसी रही है और ना ही स्‍वाद.

दरअसल अब दालचीनी में वो गुण नहीं रह गए हैं जो पहले मिला करते थे. पहले के लोग खुद अपने बगीचे में दालचीनी उगाते थे और फिर इसका इस्‍तेमाल करते थे. आज हम आपको इस लेख के ज़रिए बताने जा रहे हैं कि दालचीनी को आपको अपने गार्डन में क्‍यों शामिल करना चाहिए और इसके क्‍या फायदे हैं. आइए जानते हैं.

चींटियां पौधों को खा जाती हैं और इसलिए गार्डन से इन्‍हें हटाना बहुत जरूरी होता है. ये ना केवल पत्तियों को नुकसान पहुंचाकर पौधे को खराब करती हैं. अगर आपके बगीचे में भी चींटियां हो गई हैं तो इससे बचने के लिए आपको दालचीनी का पौधा लगाना चाहिए. इससे चीटियों का झुंड नहीं बन पाता है और आपके पौधे सुरक्षित रहते हैं.

भारत में जंगल मशरूम में वृद्धि भी चिंता का एक कारण है. ऐसे में इस काम के लिए आप दालचीनी का इस्‍तेमाल कर सकती हैं. दालचीनी का पाउडर बना लें और इसके बाद जहां भी फंगी हो वहां पर इसके पाउडर को छिड़क दें. इससे फंगस जल्‍दी खत्‍म हो जाएगी. अंकुरों को बचाए पौधों के अंकुर भी बहुत नाजुक होते हैं. इसे मौसम में बदलाव, फंगस और कई तरह के रोगों से बचाना होता है. यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि अत्यधिक नमी के कारण अंकुर सड़ ना जाएं.

दालचीनी में एंटीफंगल और एंटीबैक्‍टीरियल गुण होते हैं जो इन सब समस्‍याओं से बचाकर रखते हैं. इसके अलावा बीज वहीं रखना चाहिए जहां पर इसके विकास के लिए अनुकूल वातावरण हो. तब आपको दालचीनी की जरूरत नहीं पड़ेगी. ग्राफ्टिंग में मदद बागवानी करने वाले लोग ग्राफ्टिंग से परिचित होंगें.सामान्‍य सी बात है कि जब किसी पौधे का कोई हिस्‍सा उससे टूटकर गिर जाता है तो वो कमजोर हो जाता है. ऐसे में उसे दोबारा उगने के लिए दालचीनी से शक्‍ति मिलती है. इससे पौधो मजबूती से बढ़ता है. पौधे पर रोज़ दालचीनी पाउडर छिड़कने से वो फिर से तरोताजा और जिंदा हो जाता है. यह अधिकतम मात्रा में प्रतिधारण सुनिश्चित करने के लिए पौधे को पानी देने के बाद उस पर दालचीनी पाउडर छिडकें.

आपको नहीं पता होगा सुबह जागते ही पानी पीने के ये फायदे

शरीर को फिट रखने में पानी का अहम योगदान होता है. मानव शरीर में करीब 50 से 60 फीसदी हिस्सा पानी का होता है. पानी शरीर के अंगों की रक्षा करता है. पानी की मदद से ही आपके शरीर के अंगों तक पोषक तत्व और औक्सीजन पहुंचते हैं. इसके साथ ही पानी शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है.

सुबह जागने के बाद सबसे जरूरी होता है कि शरीर में तुरंत पानी जाए. रात में सोने और सुबह में जागने तक काफी वक्त बीत जाता है . इस बीच शरीर को पानी की जरूरत होती है. सुबह में जागते ही पानी पीने के अपने कई फायदे हैं. इस खबर में हम आपको सुबह जागते ही पानी पीने के फायदे बताएंगे.

सुबह उठकर पानी पीने से शरीर में मौजूद विषैले पदार्थ निकल जाते हैं, जिससे खून साफ हो जाता है. खून साफ हो जाने से त्वचा पर भी चमक आती है.

पानी शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र के लिए काफी अहम होता है. इससे शरीर के इन्फेक्शन से लड़ने की क्षमता और मजबूत होती है. कई जानकारों का मानना है कि सुबह खाली पेट पानी पीने से आपको सिर दर्द, शरीर दर्द, ह्रदय की बीमारियों, तेज ह्रदय गति, एपिलेप्सी, अत्यधिक मोटापे, अस्थमा, टीबी, किडनी व यूरीन की बीमारियां, उल्टी, गैस, डायबिटीज, डायरिया, पाइल्स, कब्ज, कैंसर, आंख, नाक, कान और गले संबंधी परेशानियां नहीं होती.

सुबह जागते ही पानी पीने से शरीर की मेटाबौलिक एक्टिविटीज तेज होती हैं. अगर तड़के पानी पीने की आदत है तो आपका वजन संतुलित रहेगा. इसके अलावा इससे नई कोशिकाओं का निर्माण होता है, मांसपेशियां मजबूत होती हैं, मासिक धर्म, आंखों, पेशाब और किडनी संबंधी कई समस्याएं शरीर से दूर रहती हैं.

मानव सोहल आखिर क्यों बेच रहे हैं अंडरगार्मेंट?

लगभग पांच छह वर्ष पहले एक खास मुलाकात के दौरान मशहूर फिल्मकार राज कुमार संतोषी ने कहा था कि एक वक्त वह आएगा, जब फिल्म कलाकार अपनी फिल्म को सफल बनाने के लिए अपनी फिल्म की टिकटें घर घर जाकर बेचेंगे. राज कुमार संतोषी की यह बात धीरे धीरे सच होती नजर आ रही है.

समय के साथ धीरे धीरे हर कलाकार अब टीवी के हर रियलिटी शो के साथ साथ देश के तमाम शहरों में जाकर अपनी फिल्म को प्रमोट करने लगा है. इतना ही नहीं शुक्रवार, 14 दिसंबर को प्रदर्शित हुई फिल्म ‘‘पी के लेले ए सेल्समैन’’ में ब्रजेंद्र काला के साथ मुख्य भूमिका निभाने वाले कलाकार मानव सोहल ने अपनी फिल्म को बाक्स आफिस पर सफल बनाने के लिए अनूठा प्रयोग किया.

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फिल्म ‘‘पीके लेले ए सेल्समैन’’ में मानव सोहल और ब्रजेंद्र काला ने सेल्समैन का किरदार निभाया है, जो कि अंडरगार्मेंट बेचते हैं. फिल्म के अपने किरदार के ही अनुरुप रविवार को मानव सोहल फिल्म के ही किरदार के गेटअप में मुंबई के अंधेरी पश्चिम में स्थित ‘‘सिनेपोलिस’ मल्टीप्लैक्स के टिकट घर के सामने खड़े होकर अंडरगार्मेंट बेचते हुए नजर आए.

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अंडरगार्मेंट खरीदने वाले हर ग्राहक को मानव सोहल फिल्म ‘‘पीके लेले ए सेल्समैन’’ की टिकट मुफ्त में दे रहे थे. तमाम दर्शकों ने अंडरगार्मेंट खरीदकर फिल्म की टिकट मुफ्त में लेकर मानव के साथ सेल्फी भी खिंचाई.

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मानव सोहल ने कहा-‘‘मै हर दिन कम से कम तीन चार मल्टीप्लैक्स के सामने अलग अलग समय पर खड़े होकर इसी तरह से अपनी फिल्म का प्रचार कर रहा हूं.’’

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फिल्म ‘‘पीके लेले ए सेल्समैन’’ के लेखक व निर्देशक  मानव सोहल ने ब्रजेंद्र काला के साथ ही फिल्म में मुख्य भूमिका निभायी है. शैलेष मोसरानी निर्मित इस फिल्म के अन्य कलाकार हैं- श्रावणी गोस्वामी, वैष्णवी धनराज, संदीप खुराना, फाल्गुनी रजनी, जितेन मुखी, गुलशन राणा, राज सिंह, जयशंकर त्रिपाठी, सोनम अरोड़ा व अन्य.

सिर्फ बैन या ब्लौक से बात नहीं बनेगी

रूस ने गूगल को खुलेआम चेताया है कि अगर उसने कुछ वेबसाइट्स को ब्लौक नहीं किया तो वह अपने देश से गूगल को हमेशा के लिए ही बैन कर देगा. रूस ने एक कानून के तहत कुछ वेबसाइट्स को सर्च से प्रतिबंधित विषयवस्तु हटाने की योजना बनाई थी. इनमें से कुछ में जातीय घृणा का प्रचार करता कंटेंट है तो कुछ वेबसाइट्स रूस को शुद्ध राजनीतिक कारणों पसंद नहीं हैं. मसलन यूक्रेन की न्यूज वेबसाइट. अब जब ये वेबसाइट अब भी गूगल पर सर्च हो रही हैं तो रूस को वार्निंग देनी पड़ी. इससे पहले रूस ने सुरक्षा के नाम पर LinkedIn और Telegram जैसे ऐप्स को बंद कर दिया है. लेकिन गूगल को रूसी कानूनों के अनुरूप रहने के लिए कुछ रियायतें दी गई हैं. चीन में भी गूगल बैन तो नहीं लेकिन वहां के लोकल सर्च इंजन से रिप्लेस्ड है.

कितनी कारगर है बैन-बाजी

लेकिन सवाल यह है कि क्या बैन लगा देने से बात बन जाती है? बिलकुल नहीं. दरअसल तकनीकी दुनिया में हर कोड को डीकोड करने का प्रोग्राम पहले ही बना लिया जाता है. आप किसी खास वेब लिंक या साइट को ब्लौक करते हैं तो उन्हें क्रैक करने के लिए turbo vpn जैसे तोड़ आ जाते हैं जो हर ब्लौक साइट को पल भर में अन्ब्लौक कर देते हैं.

अभी ज्यादा दिन नहीं हुए जब जिओ ने 800 से ज्यादा पोर्न वेबसाइट्स ब्लौक कर दी थीं. इस पर कई यूजर्स जिओ के खिलाफ शिकायती तंज मारते दिखे. सोशल मीडिया पर मीम्स भी बने लेकिन बैन नहीं हटा. मालूम हो कि यह बैन तब लगा था जब डिपार्टमेंट औफ टेलीकौम ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के एक आदेश के बाद सभी इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स को ये निर्देश दिया है कि वे पोर्नोग्राफिक कंटेंट वाले 827 वेबसाइट्स को ब्लौक कर दें. 28 सितंबर को आए इस आदेश के बाद ऐसा नहीं कि इंटरनेट या जिओ जैसे इंटरनेट प्रोवाइडर के सर्च इंजन से पोर्न गायब हो गया जबकि अभी भी लाखों पोर्न साइट जिओ से ही सर्फ़ की जा रही हैं.

रोक सको तो रोक लो

दरअसल इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स से वेबसाइट्स बैन करने का तुगलकी फरमान देने भर से काम नहीं चलेगा. और न ही उनके लाइसेंस रद्द किए जाने की धमकी से बात बनेगी. जब तक लोग जिस वेबसाईट पर विजिट करना चाहेंगे तब तक उन्हें कोई ब्लौक नहीं कर सकता. उदाहरण के तौर पर तमिल रौकर्स को ही देख लीजिए. फिल्म पायरेसी के बाजार में कुख्यात तमिल रौकर्स डंके की चोट पर फिल्मों को रिलीज के दिन लीक करने का दावा करता है और दुनिया भर की साइबर सिक्योरिटी उसे रोक नहीं पाती. हाल में तमिल फिल्म सरकार और 2.0 भी उसने कह कर लीक की लेकिन कोई रोक नहीं पाया.

हालांकि एक्टिव पायरेसी वेबसाइट तमिल रौकर्स की धमकी के बाद लीक को रोकने के लिए निर्माताओं की ओर से काफी तैयारी की गई थी. मेकर्स इस तरह की पायरेसी वेबसाइट की एक लिस्ट लेकर मद्रास हाई कोर्ट भी गए. जहां हाईकोर्ट ने 37 इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स (ISPs) को 12,000 वेबासाइट को ब्लौक करने के आदेश दे दिए. लेकिन इसके बावजूद आप आज भी 2.0 free movie download सर्च इंजन में टाइप कीजिये, सैकड़ों वेब लिंक्स खुल जाएंगे. तो फिर कहां कारगर हुआ वेबसाइट को ब्लौक करने का दावा. अब इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स के लाइसेंस भी रद्द कर के देख लीजिये, कुछ नहीं होगा.

चोर-पुलिस का एक ठिकाना

इंटरनेट पर How to Block a Website के नाम से ढेरों ट्यूटोरियल्स खुल जाते हैं लेकिन असल में ब्लौक करना इतना भी आसान नहीं होता. तकनीक के बहुत ज्यादा जानकार नहीं हैं तो सेटिंग्स में ही उलझ कर रह जाएंगे. अगर आपने अपनी डिवाइस सेटिंग में जाकर ब्लौक भी कर दीं तो सर्फिंग के दौरान जरूर किसी वेबसाइट के वायरस में उलझ कर उसे रि-एक्सेस करने की परमिशन दे चुके होंगे. और अगर साइबर सिक्योरिटी की टिप्स देती पुलिस मौजूद है तो महज एक क्लिक पर साइबर क्राइम की पाठशाला खोले चोर भी है. और इस वर्चुअल दुनिया में साइबर चोर (हैकर) साइबर पुलिस से हमेशा दो कदम आगे रहता है. देश की पुलिस भी तकनीकी तौर पर अपडेटेड नहीं है.

जैसे फिशिंग के जरिए जीमेल, फेसबुक, अमेजन, फ्लिपकार्ट आदि निजी और व्‍यावसायिक वेबसाइटों को टार्गेट कर लोगों के पर्सनल डाटा पर सेंध मारी की जाती है. अब आप इन वेबसाईट को ब्लौक तो करने से रहे. और फिशिंग की जानकारी देने के लिए इंटरनेट पर न जाने कितने ट्यूटोरियल्‍स और ब्लौग्‍स चल रहे हैं. जहां स्‍टेप बाय स्‍टेप हैकिंग की जानकारी दी जाती है. इसी तरह लोगों के डेबिट या क्रेडिट कार्ड नंबर हैक कर अकाउंट में से ट्रांजेक्‍शन किया गया है. यू-ट्यूब पर इसका पुराण ज्ञान देते यूट्यूबर्स मजूद हैं. भद्दे और अश्‍लील वीडियो व्हाट्सएप से लेकर इन्स्टाग्राम और फेसबुक में तैरते हुए सबके बेडरूम तक जा पहुंचे हैं. औनलाइन फ्री सौफ्टवेयर्स की भरमार है जो वीडियो और फोटो मौर्फिंग का दिव्यज्ञान देते हैं. और इनके लिंक सोशल मीडिया में वायरल होते रहते हैं. तो क्या आप इन्स्टाग्राम और फेसबुक और व्हाट्सएप पर भी बैन लगा देंगे. हो ही नहीं सकता.

क्या है सोल्यूशन

वैसे तो इंटरनेट के असीमित संसार में प्रतिबन्ध या पैबंद लगाना अब किसी के बस में नहीं है, क्योंकि इस तकनीकी शैतान को हमने इतना विकराल रूप दे दिया है कि यह हम पर ही हावी हो गया है. न चाहते हुए भी हम इसके गुलाम बन गए हैं. सुबह का अखबार नहीं पढ़ना चाहते क्योंकि आंखें मोबाइल की आदि हो गयी हैं. परिवार में पत्रिकाएं नहीं शेयर करना चाहते क्योकि लैपटाप और टैबलेट हर हाथ में कब्ज़ा जमाये हैं. छोटे छोटे बच्चे किताबें और कहानियां छोड़ कर वीडियो गेम्स की दुनिया में बंदूके और चाकू चला रहे हैं. जब हमने सबकी पढ़ने लिखने की आदत ही छुड़वा दी है तो कौन यहां की फैली गंदगी या चोरी से बचे.

ऐसे में जब किसी को नशे की लत लग जाती है तो वह अपनी नशे की खुराक पूरी करने के लिए कोई न कोई रास्ता निकाल ही लेता है. शराब और ड्रग्स नहीं मिलेगा तो सेनेटरी पैड्स उबाल लेगा, विक्स या आयोडेक्स सूंघ लेगा. और सरकार प्रतिबंध के नाम पर सिगरेट, शराब के लेबल पर फलां चीज जानलेवा है या फलां से कर्क रोग होता है, का भोंपू बजाती रहती है. और लोग इफरात से लेबल फाड़कर अपनी खुराक लेते रहते हैं.

यही स्थिति इंटरनेट की दुनिया के साथ भी है. पहले लोगों को अनलिमिटेड डाटा का दान देकर फ्री में अफवाहों, पोर्न, फिल्म, गानों की लत लगाई गयी. और जब दुनिया भर के लोग इसकी चपेट में आकर घर तोड़ने लगे, डिप्रेस होने लगे, आर्थिक और सामजिक अपराध करने लगे तो सरकार और साइबर मामलों के एक्‍सपर्ट नींद से जागे.

हालांकि अब बहुत देर हो चुकी है. आज खुलेआम ऐसी सामग्री वेबसाइटों पर मौजूद है जो क्राइम के एक से एक तरीके बता रही हैं. किस किस को बैन करेंगे. अरबों खरबों से भी ज्यादा टीवी के कंटेंट पर सेंसर संभव नहीं है. सिर्फ एक मौनीटरिंग बौडी, साइबर कानून, ट्रेंड आईटी और साइबर एक्‍सपर्ट बनाने भर से बात नहीं बनेगी. अगर लोगों को ही अहसास हो जाए कि वो अपनी जिन्दगी और रिश्तों का एक बड़ा हिस्सा तकनीक की खुराक में जाया कर रहे हैं तो शायद बात बने. लोग पढने, लिखने और सोचने की ओर लौटें तो बात बने. लोग अनुशासन और कर्मण्यता का मतलब समझें तो बात बने.

बिना अखाड़े ही हुए चित

इस साल तो मानो शादियों की होड़ सी लग गई है. फिल्मी सितारे हों या खिलाड़ी, सब शादी कर के घरेलू पारी खेलने को उतारू हैं. बैडमिंटन की सनसनी साइना नेहवाल पी. कश्यप की हो गईं तो तीरंदाज दीपिका कुमारी ने भी अपना जीवनसाथी चुन लिया.

तो फिर हमारे पहलवान भला क्यों पीछे रहते. 11 दिसंबर को भूरा नाम से पहचाने जाने वाले पहेलवान अमित कुमार दहिया ने दिल्ली में शादी कर ली. ‘अर्जुन अवार्ड’ विजेता अमित ने 2013 में बुडापेस्ट में हुई कुश्ती की वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत के लिए सिल्वर और 2014 के ग्लासगो कौमनवेल्थ खेलों में गोल्ड मैडल जीता था.

amit marriageइतना ही नहीं, वे महज 19 साल की उम्र में भारत की ओर से 2012 के लंदन ओलिंपिक में जा चुके हैं. दिल्ली बौर्डर से सटे हरियाणा के नाहरी गांव के अमित मंगलवार को दिल्ली की हिमांशी के साथ परिणय सूत्र में बंध गए.

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इस के बाद भारत की तेजतर्रार पहलवान विनेश फोगाट के विवाह की खुशखबरी मिली. पहलवान और ‘दंगल’ फिल्म की असली हीरो गीता और बबीता फोगाट की कजिन और एशियन और कौमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली देश की पहली महिला पहलवान विनेश फोगाट की शादी गुरुवार, 13 दिसंबर को पहलवान सोमबीर राठी के साथ हुई. इस जोड़े ने 8वां फेरा लेते हुए ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, बेटी खिलाओ’ का वचन लिया. विनेश और सोमवीर दोनों रेलवे में नौकरी करते हैं. सोमवीर नैशनल चैंपियनशिप में ब्रौंज मैडल जीत चुके हैं.

धर्म के ठेकेदारों का नया प्रपंच : मोरारी बापू करेंगे कमाठीपुरा की वेश्याओं का उद्धार!

बीती 13 दिसम्बर को मशहूर रामकथा वाचक मोरारी बापू हैरतअंगेज तरीके से देश और दुनियाभर में देह व्यापार के लिए बदनाम इलाके कमाठीपुरा पहुंचे तो वहां की वेश्याएं हैरान हो उठीं क्योंकि उनमें से अधिकांश उनके नाम और प्रसिद्धि से वाकिफ हैं. हालांकि उनके पहुंचने से पहले ही मोरारी बापू के शिष्य ढिंढोरा पीट चुके थे कि भगवान का एक दूत आ रहा है.

वेश्याओं के घर घर जाकर मोरारी बापू उनसे मिले और उन्हें 22 दिसम्बर से शुरू हो रहे रामकथा समागम में आने का न्यौता दिया. कोई अन्यथा न ले और उल्टा सीधा न सोचे इसलिए उनहोंने बहुत जल्द ही अपनी मंशा जाहिर कर दी कि उनके यहां आने का राम मंदिर निर्माण से कोई संबंध नहीं है. वे तो सिर्फ अयोध्या में तुलसीदास की मानस गणिका का वाचन करेंगे जो तुलसीदास और एक गणिका यानि वेश्या और आज की भाषा में सेक्स वर्कर वासंती की बातचीत पर आधारित है.

गौरतलब है कि गणिका वासंती की व्यथा और पीड़ा आज की सेक्स वर्कर्स से भिन्न नहीं है जिसने तुलसीदास को अपने घर आकर रामकथा सुनाने का आग्रह किया था जिसे तुलसीदास टाल नहीं पाये थे. वासंती ने उनके सामने दुखड़ा यह रोया था कि समाज ने उसे अलग थलग कर दिया है.

कमाठीपुरा की वेश्याओं का दुखड़ा वासंती जैसा ही बल्कि उससे भी बदतर है जिसे उन्होंने मोरारी बापू के सामने रोया भी कि पुलिस आए दिन उन्हें प्रताड़ित करती है और उनके पास न तो रहने के लिए अच्छा घर है और न ही साफ सफाई के इंतजाम हैं. इस पर मोरारी बापू तुलसीदास की ही तरह खामोश रहे तो इसके अपने अलग माने भी हैं कि समाज और धर्म की नजर में वेश्याएं पापिन हैं और समाज को दूषित करती हैं इसलिए उन्हें दूर रख उनके साथ शूद्रों सरीखा बरताव किया जाता है.

मोरारी बापू जाने क्यों वेश्याओं को रामकथा का रसस्वादन अयोध्या में ही करवाना चाहते हैं इसलिए कोई 60 वेश्याओं के मुंबई से अयोध्या आने जाने बाबत इंतजाम करने का उन्होंने अपनी मंडली को आदेश दिया कि उनके आने जाने का किराया और अयोध्या में ठहरने और खाने पीने का खर्च वे ही उठाएंगे.

कौन हैं मोरारी बापू

धर्म के धंधे में मोरारी बापू का अपना एक अलग नाम और मुकाम है. देश भर में उनके करोड़ों शिष्य और अनुयायी हैं जो उन्हें राम का दूत मानते हैं. करोड़ों घरों में ही उनका नियमित विधि विधान से देवताओं की तरह पूजा पाठ होता है और उनके प्रवचनों व रोज हर कहीं होने वाली रामकथा को सुना जाता है .

मोरारी बापू अक्सर अपनी कथा में पुराने हिट सूफिया गानों की पेरोडी बनाकर रामकथा का श्रवण भक्तों को करवाते हैं. गानों में पिरोई रामकथा सुनकर भक्त पागलों की तरह पांडाल में ही नाचने गाने लगते हैं और एवज में अपना सब कुछ लुटाने तैयार हो जाते हैं.

मोरारी बापू के दादा त्रिभुवनदास उनके गुरु थे जो उन्हें रामायण रटाया करते थे. धीरे धीरे उन्हें यह ग्रंथ कंठस्थ हो गया और उन्होने रामकथा वांचने को ही धंधा यानि आजीविका का साधन बना लिया जो स्कूल की मास्टरी की पगार के मुक़ाबले ज्यादा पैसा बरसाने वाला साबित हुआ.

देखते ही देखते वे इतने रईस हो गए कि उन्होने दक्षिणा लेना बंद कर दिया. बढ़ती शोहरत उन्हें धीरुभाई अंबानी के नजदीक ले आई और वे एक तरह से अंबानी परिवार के कुलगुरु बन बैठे. धीरुभाई अंबानी कोई भी नया व्यवसाय शुरू करने से पहले उनसे ही पूजा पाठ करवाते थे उनकी मौत के बाद बेटे अनिल और मुकेश भी इस रिवाज को निभाते रहे हैं. कहा जाता है जब उनके दोनों बेटों में प्रापर्टी को लेकर विवाद और मतभेद हुये थे तो उन्होंने मोरारी बापू को ही सुलह और मध्यस्था के लिए कहा था.

अब मोरारी बापू देश के सबसे बड़े और ब्रांडेड रामकथा वाचक हैं. उनकी महत्ता बढ़ने को यह भी कहा जाता है कि तुलसीदास की तरह हनुमान ने उन्हें भी दर्शन दिये थे और उनके कंधे पर हमेशा लटकता शाल हनुमान ने उन्हें गिफ्ट किया था. वे जहां भी जाते हैं वहां के नेता, अधिकारी, व्यापारी और आम लोग हाथ बांधे उनकी आगवानी के लिए खड़े नजर आते हैं. इससे समझा सकता है कि धर्म की अंधी जनता पर उनका कितना गहरा असर है.

दान या उद्धार

अपनी पत्नी और चारों बच्चों के साथ एशोआराम की ज़िंदगी जी रहे मोरारी बापू को वेश्याओं के इलाके में जाकर उन्हे रामकथा सुनाने अयोध्या ले जाने के इंतजाम क्यों करने पड़े? इस सवाल का पहला जवाब सच के बेहद नजदीक है कि उनकी मंशा समाज के इस अनिवार्य और महत्वपूर्ण वर्ग को धर्म का ग्राहक बनाने की है जिससे उनसे भी दान दक्षिणा के नाम पर पैसा झटका जा सके. जाहिर है रामकथा का बाजार भी दूसरे बाज़ारों की तरह मंदी की चपेट में है जिससे उबरने वे इस बदनाम मंडी में जाने मजबूर हुये .
और अगर उनकी मंशा इन पतिताओं के उद्धार की है तो वह कैसे रामकथा से दूर होगी यह वह शायद ही बता पाएं.  कमाठीपुरा के सेक्स वर्कर्स जिस नर्क को रोज भुगतती हैं वह गरुड़ पुराण में वर्णित नरकों से भी ज्यादा वीभत्स और यंत्रणदायक है जिस पर आए दिन बुद्धिजीवी समाजसेवी और मानवाधिकार कार्यकर्ता बहसें करते रहते हैं लेकिन आज तक कोई ठोस समाधान नहीं सुझा पाये जिससे लगता है कि कमाठीपुरा जैसे इलाके नर्क थे और नर्क ही रहेंगे.

मोरारी बापू अगर वाकई इनका भला रामकथा में देखते हैं तो वहीं क्यों रामकथा आयोजित नहीं कर डालते इससे वेश्यागामियों को भी इस कथा का रस्सावदन करने मिलेगा और वे भी पाप मुक्त हो जाएंगे और मुमकिन है यह बदनाम इलाका भी अयोध्या की तरह पवित्र हो जाये.

लगता नहीं कि मोरारी बापू जैसे धर्मगुरु इस सच से नावाकिफ होंगे की वेश्याएं आदिकाल से हैं और राजाश्रय भी उन्हें मिलता रहा है. धर्म के नाम पर देवदासियां बनाई जाने वाली कमसिन युवतियां वेश्याएं नहीं तो क्या होती हैं .

मोरारी बापू पहले भी दलितों यानि हरिजनों के लिए रामकथा का आयोजन कर विवादों में रह चुके हैं. लेकिन यह नहीं कह सकते कि शूद्रों के लिए आयोजित रामकथा से समाज में उन्हें सम्मानजनक स्थान मिल गया है और ऊंची जाति वाले उन्हें रामभक्त कहते गले से लगाने लगे हैं.

रामकथा से दलितों का दलितपन दूर होने का दावा वे कर सकें तो बात खुशी की ही होगी. लेकिन एक कड़वा सच यह भी है कि रामकथा जैसे दूसरे कई धार्मिक आयोजनों के नाम पर दलितों की जेब भी काटी जाती है.

28 दिसम्बर के बाद अयोध्या में रामकथा सुनकर कमाठीपुरा वापस आने वाली सेक्स वर्कर्स की नारकीय ज़िंदगी में कौन सा बदलाव या क्रांति आ जाएगी यह मोरारी बापू नहीं बता पाएंगे. हां इतना जरूर उन्हें मालूम है कि वे देह बेचकर कमाए पैसे मंदिरों में चढ़ायेंगी ताकि धर्म के ढोंगियों की दुकान चल सके.

कंपनियों का हैवी डिस्काउंट : नई गाड़ी से करें नए साल का स्वागत

2019 यानी नए साल में प्रवेश करने से पहले 2018 आप को कारों के तोहफे से नवाज रहा है. जिनके पास कारें हैं, वे कार के साथ नए साल का स्वागत करेंगे. जिनके पास कार है ही नहीं, इस बार वह भी नई कार के साथ नए वर्ष का स्वागत करेंगे.

दरअसल, मौजूदा साल के आखिरी दिनों में कार कम्पनियां कार के खरीदारों को भारी डिस्काउंट औफर कर रही हैं. कार के शौकीनों या पहली बार कार खरीदने की सोचने वालों को नए साल का इंतजार नहीं करना चाहिए, वरना वे घाटे में रहेंगे. क्योंकि जनवरी में कार की कीमतों में इजाफा होने जा रहा है.

कार वालों और बे-कार वालों दोनों के लिए मनपसंद कार खरीदने का यह सही मौका है यानी दिसम्बर 2018 के चल रहे ये आखिरी दिन. दरअसल, अभी गुज़रे फेस्टिव सीजन में कमज़ोर बिक्री के चलते कार कम्पनियां अब अपनी कारें सेल करने के लिए छूट दे रही हैं. पिछले साल के दिसम्बर माह के मुकाबले इस साल 20 से 25 फीसदी ज्यादा डिस्काउंट औफर किया जा रहा है.

कार इंडस्ट्री के एक अधिकारी ने बताया कि मौजूदा डिस्काउंट औफर हर बार से ज्यादा है. औटो कम्पनियों ने फेस्टिव सीजन में भारी मांग की उम्मीद के चलते काफी स्टौक तैयार कर लिया था. हालांकि, बिक्री कमजोर रही. इसलिए वे नया साल शुरू होने से पहले पुराना स्टौक निकालने की जल्दी में हैं.

गौरतलब है कि फेडरेशन औफ़ औटोमोटिव डीलर्स एसोसिएशन के मुताबिक, नवरात्र से शुरू हुए 42 दिनों के फेस्टिव सीजन में पैसेंजर गाड़ियों की फुटकर बिक्री में 14 फीसदी की गिरावट आई.  औटो कंपनियों के पास 6 से 10 हफ़्तों का स्टौक है, जो 4-6 हफ़्तों का रहता था.

एक बड़ी कार कंपनी के डीलर बताते हैं कि नए साल में गाड़ियों की रिसेल वैल्यू में गिरावट आती है. कार कम्पनियां बिक्री में गिरावट आने पर प्रमोशन औफर्स शुरू करती हैं. इस साल स्टौक काफी ज्यादा है, इसलिए डिस्काउंट भी अधिक है.

भारी डिस्काउंट औफर से औटो कंपनियों को उम्मीद है कि उनकी कारों की बिक्री बढ़ेगी. देश की सब से बड़ी कार कंपनी मारुती सुजुकी औल्टो 800, सेलेरियो और वैगन आर जैसी छोटी कारों पर 60,000 से 80,000 रुपए तक की छूट दे रही है. यह कंपनी नए सियाज मौडल पर 90,000 रुपए का डिस्काउंट, एक्सचेंज बोनस और कौर्पोरेट बेनिफिट दे रही है.

कोरियाई कंपनी हुंडई भी ईऔन, ग्रैंड आई 10, एलीट आई 20, एक्सेंट और वरना मौडल पर 65,000 से 95,000 रुपए तक का डिस्काउंट दे रही है. टाटा मोटर्स ने टिगोर, टिआगो, हेक्सा सहित दूसरे मौडल्स पर 39,000 से 93,000 रुपए तक के औफर दे रही है. वहीं, महिंद्रा, बोलेरो पर 40,000 रुपए और स्कार्पियो पर 84,000 रुपए के फायदे ग्राहकों को दे रही है.

यही नहीं, फिएट कंपनी जीप कम्पस की बुकिंग पर ग्राहक को बिना एक्स्ट्रा कीमत के ऊंचे वैरिएंट वाले मौडल में अपग्रेड करने का औफर दे रही है. हौंडा कौर्प्स इंडिया सिर्फ 1 रुपए में इंश्योरेंस, डब्लूआर-वी और सेडान सिटी खरीदने पर 20,000 रुपए के एक्सचेंज बोनस दे रही है. टोयोटा किर्लोस्कर इटियोस लिवा मौडल पर 23,000 रुपए और एलटिस पर 1,10,000 रुपए के डिस्काउंट औफर कर रही है.  जेएलआर, औडी जैसी लक्ज़री कार कम्पनियां भी चुनिन्दा मौडल्स पर 7.5 लाख रुपए तक की छूट दे रही हैं.

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