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इस वेडिंग सीजन ट्रेंड में हैं फ्लोरल बन

हर दुल्हन का सपना होता है कि वो अपनी वेडिंग में परियों सी खूबसूरत दिखे. उसकी वेडिंग-डे पर हर चीज चाहे वो लहंगा हो या हेयरस्‍टाइल सब कुछ बिल्कुल परफेक्‍ट हो. आजकल लड़किया मेकअप, ज्वैलरी और ड्रेस के साथ अपने हेयरस्‍टाइल को लेकर भी काफी कौन्शियस हो गई हैं. अगर आप भी जल्‍द दुल्‍हन बनने वाली है और अपने हेयरस्‍टाइल को लेकर कंफ्यूज्‍ड हैं तो हम आपके लिए एक से बढ़कर एक फ्लोरल बन (फूलों से सजा हुआ जूड़ा) हेयस्‍टाइल लेकर आएं हैं जो आपके वेडिंग लुक पर चार चांद लगा देंगे.

रेड गुलाब फ्लोरल बन

अगर आप अपनी शादी में एकदम रौयल और क्‍लासी लुक चाहती हैं तो लाल रंग के गुलाब का इस्‍तेमाल कर फ्लोरल बन हेयरस्‍टाइल ट्राय कर सकती हैं. ये आपके ब्राइडल लुक में चार चांद लगा देगा.

फ्लोरल बन

इन दिनों फ्लोरल बन काफी ट्रेंड में है. आप अपने ब्राइडल बन को टस्‍कन हाइड्रेंजिया फूलों या गुलाब के फूलों से सजा सकती है. आप चाहें तो आर्टिफिशल फूलों का भी प्रयोग कर सकती हैं.

साइड फ्लोरल बन

आप इंगेजमेंट या कौकटेल पार्टी के लिए तैयार हो रही हैं और आप चाहती हैं कि इस मौके पर आप बहुत ही ज्‍यादा खूबसूरत दिखें तो आप साइड फ्लोरल बन भी ट्राय कर सकती है. इस मौके पर आप स्‍टाइलिश और कुछ डिफरेंट लुक पा सकती हैं.

लाइट फ्लोरल बन

अगर आपको लगता है कि आपको अपने ब्राइडल बन में फूलों को जगह देनी है. लेकिन आप इसे भारीभरकम लुक नहीं देना चाहती, तो आप लाइट फ्लावर जैसे मोगरा का इस्तेमाल कर कुछ यूनिक लुक ट्राय कर सकती हैं.

आउटलाइंड फ्लोरल बन

आपको फ्लोरल बन पसंद है लेकिन आप अपने बालों को पूरी तरह से फूलों का बगिया नहीं बनाना चाहती हैं तो, आप अपने ब्राइडल बन को फ्लावर से आउटलाइन देकर खूबसूरत बना सकती हैं.

पुरुष ही नहीं महिलाएं भी हैं पोर्न एडिक्ट

ऐसा नहीं है कि सिर्फ पुरुष ही पोर्न फिल्में देखते हैं. महिलाएं भी पोर्न  फिल्में देखना पसंद करती हैं. एक सर्वे के मुताबिक, भारत में तकरीबन 30 फीसदी महिलाएं पोर्न फिल्में देखती हैं. विश्व की प्रमुख एडल्ट वैबसाइट्स पोर्नहब और रैड्ट्यूब ने एकसाथ मिल कर भारतीय महिलाओं पर सर्वे किया और पाया कि पोर्न देखने वाली भारतीय महिलाओं की संख्या बढ़ रही है. पोर्न देखने के मामले में भारतीय महिलाएं पहले 7वें स्थान पर थीं, अब तीसरे स्थान पर आ गई हैं.

इन दोनों पोर्न साइट्स पर हर महीने करीब 4 करोड़ नए विजिटर आते हैं जिन में पुरुष विजिटर 76 फीसदी हैं और महिलाएं 24 फीसदी.

पोर्न देखने के मामले में भारतीय महिलाओं ने अमेरिकी महिलाओं को भी पीछे छोड़ दिया है. वहीं ब्राजील और फिलीपींस की महिलाएं तो भारतीय महिलाओं से भी आगे हैं. इस सर्वे में एक और कैटेगरी है जिस से पता चला है कि पुरुषों के मुकाबले महिलाएं पोर्न देखने में ज्यादा समय बिताती हैं.

वहीं, एक अन्य संस्था ने आधुनिक महिलाओं और पोर्न से उन के जुड़ाव के बारे में एक सर्वे किया, जिस में उस ने पाया कि 3 में से 1 महिला पोर्न देखती है और ज्यादातर अपने पार्टनर के साथ नहीं बल्कि अकेले पोर्न देखना पसंद करती हैं. उन्होंने बताया कि महिलाओं का कहना है कि पोर्न वे अपनी खुशी के लिए देखती हैं और इसे देखने से उन की सैक्सलाइफ बेहतर होती है.

पोर्न देख कर वे सैक्सुएलिटी के बारे में नईनई तरकीबें सीखती हैं. सर्वे में हिस्सा लेने वाली 70 फीसदी महिलाओं की उम्र 18 से 34 साल के बीच थी.

स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह

आज युवाओं में भी पोर्न वीडियोज या तसवीरें देखना आम बात हो गई है, लेकिन कहीं न कहीं इसे रोकना जरूरी है, क्योंकि जानकारों की मानें तो ज्यादा पोर्न देखने की लत से दिमाग का आकार कम होता है. यही नहीं, इस से मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है. लोगों के स्वभाव पर दुष्प्रभाव पड़ता है. इतना ही नहीं, पोर्न देखने की लत आप की रिलेशनशिप और आप के क्रियात्मकता को नष्ट कर देती है. इस के कारण लोग अपने जरूरी कामों की भी अनदेखी करने लगते हैं. इस के अलावा बारबार एक ही तरह की साइट खोलने से समय और ऊर्जा दोनों व्यर्थ होते हैं.

पोर्न की अत्यधिक लत सैक्सुअल लाइफ को भी बरबाद कर देती है. इस लत की वजह से इंसान एग्रेसिव हो जाता है. उन की भावनाओं में कमी दिखाई देने लगती है. बहुत ज्यादा सैक्सुअल इच्छा आप के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है. अगर वक्त रहते इस लत से छुटकारा न पाया जाए तो इंसान की जिंदगी तबाह हो सकती है.

लड़का लड़की पर बुरा असर

हाल ही में ऐसी ही एक घटना घटी जहां 12वीं के एक छात्र ने अपने बोर्ड के पेपर में अपनी सैक्सुअल फैंटेसी के बारे में ही लिख डाला, जिसे पढ़ने के बाद महिला शिक्षिका ने खुद को अपमानित महसूस किया और फिर उस लड़के की शिकायत परीक्षा केंद्र के संचालक से जा कर कर दी. जिस के बाद उस की शिकायत पुलिस में कर दी गई. उस की इस हरकत से गुजरात शिक्षा बोर्ड ने उसे परीक्षा देने से वंचित कर दिया.

पोर्न फिल्में देखने का असर न केवल पुरुषों और लड़कों पर पड़ता है, बल्कि महिलाओं और लड़कियों पर भी इस का बुरा असर हो रहा है. लड़कियों पर पोर्न फिल्मों का असर तकरीबन स्थायी होता है.

ज्यादा पोर्न देखने से न सिर्फ दिमाग पर नकारात्मक असर पड़ता है बल्कि इंसान की मानसिक स्थिति भी खराब होने लगती है.

शोधकर्ताओं के मुताबिक, पुरुष या महिलाएं जब बहुत ज्यादा पोर्न वीडियो देखते हैं तो उन के दिमाग की रचनात्मकता धीरेधीरे कमजोर पड़ने लगती है. एक सर्वे की मानें तो, ज्यादा पोर्न फिल्में देखने से याददाश्त में भी कमी आने लगती है, क्योंकि हमेशा पोर्न देखने से दिमाग की मांसपेशियां शिथिल हो जाती हैं और सिकुड़ सी जाती हैं, जोकि अच्छी बात नहीं है.

ट्विटर व इंस्टा पर भी पोर्न

आजकल एक ट्रैंड चल पड़ा है जिस के तहत लोग वैब ब्राउजर और ऐप्स के बजाय सोशल नैटवर्किंग साइट्स जैसे ट्विटर व इंस्टा पर भी पोर्न देखना पसंद करने लगे हैं. लोग सोचते हैं कि ऐसे देखने से वे ट्रैक नहीं किए जाएंगे कि सैक्सुअल पोर्न एक्टिविटी में शामिल हैं या नहीं. लेकिन ऐसा नहीं है, क्योंकि सैक्स थेरैपिस्ट कहते हैं कि आमतौर पर लोग ट्विटर जैसी सोशल साइट्स पर इसलिए पोर्न देखते हैं ताकि लोगों को पता न चले, लेकिन अगर लोगों की आदत पर गौर किया जाए तो आसानी से ऐसे लोगों को ट्रैक किया जा सकता है जो पोर्न एक्टिविटी में लिप्त होते हैं.

उन का यह भी कहना है कि बहुत से पोर्न ऐप्स यह भी वादा करती हैं कि पोर्न देखने वालों की जानकारी गुप्त रखी जाएगी, लेकिन यह सच नहीं है. इंटरनैट की दुनिया में आज के समय में कुछ भी गुप्त नहीं रह गया है.

सैक्स थेरैपिस्ट कहते हैं कि लोग इसलिए सोशल मीडिया पर पोर्न देखते हैं, क्योंकि वह सब से ज्यादा आसान रास्ता लगता है.

ऐसे लोग नहीं देखते पोर्न

सैक्स थेरैपिस्ट का कहना है कि जो लोग कौमन रिलेशनशिप में होते हैं वे पोर्न देखना पसंद नहीं करते, खासतौर पर वे जिन का पोर्नोग्राफी के कारण पहले झगड़ा हो चुका हो. इस के अलावा जिन लोगों की सैक्सुअल लाइफ ऐक्टिव नहीं होती वे भी पोर्न नहीं देखते.

कैलिफोर्निया की सैक्स थेरैपिस्ट किबंरलन एंडरसन का कहना है, ‘‘जिन रिश्तों में आपसी विश्वास होता है वहां लोग अपने पार्टनर की ब्राउजिंग हिस्ट्री चैक नहीं करते हैं, जबकि जिन कपल्स में आपसी विश्वास कम होता है वे पोर्नोग्राफी देखने के लिए अपने वैब ब्राउजर को हाइड मोड में रखते हैं ताकि ब्राउजिंग हिस्ट्री में उन की कारगुजारियां पकड़ में न आएं.

जब महिलाएं देखती हैं पोर्न

एंडरसन कहती हैं, ‘‘आमतौर पर महिलाएं पोर्न देखने के मामले में झूठ बोलती हैं और छिप कर पोर्न देखती हैं. ऐसे में उन के व्यवहार में आक्रामकता दिखाई पड़ती है. बाद में यही चीजें उन के रिश्तों पर असर डालती हैं. इतना ही नहीं, वे अपने पार्टनर से पोर्नोग्राफी में दिखाए गए ऐक्शन की उम्मीद करने लगती हैं और जब वह हो नहीं पाता है तब रिश्तों में कड़वाहट आने लगती है.

ऐसे लोग होते हैं पोर्न एडिक्ट

कुछ लोग ऐसा सोचते हैं कि पोर्न सैक्स किसी दूसरे व्यक्ति से करने की चीज है न कि प्यार करने के लिए और बच्चा पैदा करने के लिए. ऐसे लोगों के लिए पोर्न सैक्स आउटलेट बन जाता है. उन का यह भी कहना है कि बहुत से लोग पोर्न देखने के लिए सीक्रेट मैथड्स का इस्तेमाल करते हैं. बाद में उन्हें महसूस होता है कि वे कहीं फंस गए.

पोर्न पर प्रतिबंध के लिए सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका के बाद देशभर में इस बात पर बहस चली थी. कहा जा रहा था कि महिलाओं के प्रति रेप और हिंसा के मामलों के पीछे पोर्न एक बड़ी वजह है. लिहाजा, लोग इस पर प्रतिबंध लगाने की वकालत कर रहे थे, क्योंकि बलात्कार कांड के कई अभियुक्तों ने स्वीकारा कि उन्होंने पोर्न देखने के बाद ही ऐसी वारदातों को अंजाम दिया था.

लेकिन कुछ फिल्मी हस्तियों ने भी इस बात का विरोध किया था. उन का कहना था कि पोर्न पर बैन लगाने से बदलाव नहीं होगा, बल्कि सोच बदलने से बदलाव होगा. प्रतिबंध को ले कर एक वकील ने 2013 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. उसी याचिका को ले कर पोर्न से जुड़े 10 महत्त्वपूर्ण पौइंट से आप भी रूबरू होइए :

पोर्नोग्राफी पर प्रतिबंध लगाने को ले कर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया कि 2005 के बाद प्रति सैकंड 5 हजार साइट्स पर पोर्न देखा जा सकता है.

भारतीय बाजार में तकरीबन 20 करोड़ पोर्न वीडियो/पोर्न क्लिपिंग्स/चाइल्ड पोर्नोग्राफी मुफ्त में उपलब्ध हैं.

अमेरिका में हर 39 मिनट पर पोर्नोग्राफी का वीडियो बनता है.

पश्चिम के ज्यादातर देशों ने पोर्न पर प्रतिबंध नहीं लगाया है, बल्कि चाइल्ड पोर्न पर प्रतिबंध लगाया है.

35 फीसदी इंटरनैट डाउनलोड का संबंध सीधे पोर्नोग्राफी से है और प्रति सैकंड 28,258 यूजर इंटरनैट पर पोर्न देखते हैं.

हर सैकंड इंटरनैट पर पोर्न देखने के लिए 3,075.64 डौलर खर्च किए जाते हैं.

हर सैकंड 372 लोग सर्च इंजन में एडल्ट टाइप करते हैं.

40 करोड़ अमेरिकी हर रोज पोर्न साइट पर विजिट करते हैं.

इंटरनैट पर पोर्न देखने वालों में एकतिहाई संख्या महिलाओं की है.

पोर्न कंटैंट वाले 2.5 बिलियन ईमेल हर रोज सैंड या रिसीव किए जाते हैं.

पोर्नोग्राफी देखने की आदत थोड़ीबहुत तो ठीक है, लेकिन जब यह लत में बदल जाए तो इंसान की जिंदगी तबाह हो जाती है. कहा भी गया है, अति हर चीज की बुरी होती है. इस से पहले कि देर हो जाए, इस आदत को छोड़ने में ही समझदारी है.

संत महिमा

माया हटाते

माया हड़प जाते

संत के नाते.

मांगते भिक्षा

करे धर्म की रक्षा

संत दे शिक्षा.

फंसा माया में

संत कचहरी में

जिंदा नर्क में.

धर्म न करें

धर्म प्रचार करें

पुण्य क्या करें.

मुख में राम

तनमन हराम

यूं रोता राम.

पापी वैरागी

मठ ममता जागी

नाम का त्यागी.

  -शफी श्याम

चौटाला परिवार में दरार

आया रामों और गया रामों के लिए मशहूर हरियाणा में ओम प्रकाश चौटाला की पार्टी इंडियन नैशनल लोकदल दो फाड़ हो गई है और एक तरफ पिता, जो जेल में हैं और अभय चौटाला हैं तो दूसरी ओर ओम प्रकाश चौटाला के ही दूसरे बेटे अजय चौटाला. दोनों ही पार्टियां लगता है दादा देवीलाल और पिता ओम प्रकाश चौटाला के नाम पर चुनाव में उतरेंगी और अपने पिट्ठुओं को कुछ न कुछ दिलाने की कोशिश करेंगी.

इस देश की राजनीति में टुकड़ेटुकड़े होने की आदत हमारी जाति और गोत्र व्यवस्था और संयुक्त परिवार की साझी मिल्कीयत की देन है. हर जना अपनी डेढ़ ईंट की मसजिद बना कर रहना चाहता?है और मजे की बात है कि महल के बजाय अपने दड़बे में ज्यादा खुश रहता है.

हमारी पार्टियों में फूट होती रहती है. किसी के पास राज करने के अलावा तो कुछ काम है नहीं. जनता को तो इस्तेमाल करते हैं. सब मिल कर जनता की मुसीबतों को कम करें या दूर करें यह गलतफहमी भी हमारे नेता नहीं पालते. जनता तो उन के लिए गुलाम है और हर कोई अपने गुलाम चाहता है, गुलामों के लिए कुछ करने की जरूरत नहीं.

देवीलाल ने जाटोंयादवों को एक करने की कोशिश की थी पर अपने भले के लिए, उन्हें पट्टी पढ़ा काम करने लायक बना कर, उन की हैसियत बढ़ा कर, उन्हें खुशहाल बनाने के लिए नहीं. ओम प्रकाश चौटाला ने उन के बाद गद्दी संभाली और वही किया और अब ओम प्रकाश चौटाला के दोनों बेटे यही कर रहे हैं. अजय चौटाला और अभय चौटाला का झगड़ा गुलामों को बांटने पर है, गुलाम जनता की खुशहाली को ले कर नहीं है.

ऐसा ही कुछ नीतीश कुमार के राज्य बिहार में हो रहा है जहां बागी आवाजें उठ रही हैं. मायावती मुंह फुलाए घूम रही हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि वे अपने गुलाम दलितों की अकेली मालकिन हैं और ये गुलाम उन्हीं के बने रहें किसी और पार्टी के निशान पर ठप्पा लगाने की आदत न हो उन में.

इन नेताओं को हारजीत से कोई मतलब नहीं होता. विधानसभा या लोकसभा के चुनावों में हारने के बाद भी उन की नेताजी वाली छवि बनी रहती है, इसीलिए शिवपाल यादव और मुलायम सिंह यादव अलग हो गए हैं क्योंकि अखिलेश यादव अपनी चलाना चाहते हैं.

यह न सोचें कि भाजपा इस से मुक्त है. फर्क यह है कि भाजपा में नागपुर के अलावा सब गुलाम हैं नरेंद्र मोदी भी, अमित शाह भी. इन्होंने हिंदुत्व को मालिक मान लिया और सर संघ संचालक को प्रथम पुजारी, बाकी हाल यहां भी यही है. हिंदू गुलामी करते रहें, हिंदू गुलामों की हैसियत सुधरे या न सुधरे, कोई मतलब नहीं. इन सब दलों के लिए सत्ता जनता के लिए कुछ अपनी मरजी का करने का जरीया नहीं है, जनता से अपना काम करवाने के लिए है. जय चौटाला, जय यादव, जय हिंदुत्व न बोलो, जयजय पावर बोलो.

देश में पढ़े लिखे भिखारी

भीख मांगते लोगों के बारे में अगर आप की भी यही धारणा है कि वे अशिक्षित और लाचार होने की वजह से मांग कर अपनी जिंदगी गुजरबसर करते हैं, तो गलत है. एक रिपोर्ट के अनुसार देश में बड़ी संख्या में डिगरीडिप्लोमाधारी भिखारी हैं.

देश में सड़कों पर भीख मांगने वाले लगभग 78 हजार भिखारी शिक्षित हैं और उन में से कुछ के पास तो प्रोफैशनल डिगरियां हैं. यह चौंकाने वाली बात सरकारी आंकड़ों में सामने आई है.

2011 की जनगणना रिपोर्ट में ‘कोई रोजगार न करने वाले और उन के शैक्षिक स्तर’ का आंकड़ा हाल ही में जारी किया गया है. इस के अनुसार, देश में कुल 3.72 लाख भिखारी हैं. इन में से लगभग 79 हजार यानी 21 फीसदी साक्षर हैं.

हाईस्कूल या उस से अधिक पढ़ेलिखे भिखारियों की संख्या भी कम नहीं है. यही नहीं, इन में से करीब 30 हजार ऐसे हैं जिन के पास कोई न कोई टैक्निकल या प्रोफैशनल कोर्स का डिप्लोमा है. इन में से कुछ के पास डिगरी है और कुछ भिखारी पोस्ट ग्रेजुएट भी हैं.

भिखारियों की बड़ी संख्या में मौजूदगी के चलते भारत के शहर बदनाम हैं. लेकिन इस रिपोर्ट के मुताबिक शहरों में सिर्फ 1 लाख 35 हजार लोग ही भीख मांग कर अपना गुजारा करते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में भीख मांग कर जिंदगी गुजरबसर करने वालों की संख्या लगभग 2 लाख 37 हजार है. भारत की विशाल आबादी को देखते हुए भिखारियों की यह संख्या कम ही कही जाएगी. एक अन्य सरकारी आंकड़े के अनुसार, भीख मांगने वालों में 40 हजार से ज्यादा बच्चे शामिल हैं, वैसे देश के कई राज्यों में भीख मांगने पर प्रतिबंध है.

क्यों मांगते हैं भीख

आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के रहने वाले 27 साल के अयप्पा एक शिक्षित भिखारी हैं. परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के कारण उन्हें हाईस्कूल की पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी. काम की तलाश में मुंबई आने पर काम तो मिला, लेकिन वहां शोषण ज्यादा हुआ. बंधुआ मजदूर जैसी स्थिति से छुटकारा पा कर वे भीख मांग कर काम चलाते हैं. अपनी कमाई के बारे में कुछ भी बताने से इनकार करने वाले अयप्पा अपने घर वालों की आर्थिक मदद भी करते हैं.

जिस देश में दान की एक बड़ी गौरवशाली व अद्वितीय परंपरा रही हो, उस देश में अगर लाखों लोग सुबहसुबह सड़कों पर भीख मांगने के लिए निकल पड़ें तो आप खुद ही अंदाजा लगा सकते हैं कि परिदृश्य कैसा होगा. एक ऐसा दृश्य जिसे न तो किसी भी देश से आने वाला सैलानी देखना पसंद करेगा और न ही कोई भारतवासी.

भीख का धंधा

भिखारी दिन में कमाता है और रात  मस्ती कर सारे पैसे उड़ा देता है. बिना मेहनत किए ही जब मौजमस्ती के लिए आसानी से पैसा मिल रहा है तो कामचोर लोगों में इस के प्रति रुझान भी बढ़ रहा है. यही वजह है कि भीख मांगना आज एक प्रकार का धंधा बन गया है.

धंधा बनने से इस में कुछ गिरोह भी सक्रिय हो गए हैं, जो इस को संगठितरूप दे कर लोगों से भीख मंगवाने का कार्य कर रहे हैं. इस गिरोह में अपंग लोगों और बच्चों का भी खूब इस्तेमाल किया जाता है. गिरोह में शामिल लोग बच्चे का अपहरण कर उन से भीख मंगवाते हैं. यदि बच्चे भीख नहीं मांगते हैं तो उन्हें मारापीटा जाता है. बच्चों का अपहरण कर उन्हें विकलांग बना कर उन से भीख मंगवाई जाती है. दरअसल, यह एक बिना पूंजी का धंधा है, जिस में बिना कोई पूंजी लगाए, पैसा कमाया जाता है.

इन तमाम बातों के अलावा भिक्षावृत्ति भारत के माथे पर ऐसा कलंक है जो हमारे आर्थिक तरक्की के दावों पर सवाल खड़ा करता है. भीख मांगना सम्मानजनक नहीं, बल्कि अनैतिक कार्य और सामाजिक अपराध है. जब किसी गैंग या माफिया द्वारा जबरन बच्चों, महिलाओं या अन्य किसी से भी भीख मंगवाई जाती है तब यह संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आ जाता है.

लिहाजा, अब समय आ गया है कि भीख मांगने को जिस प्रकार गिरोह बना कर संगठित रूप से अंजाम दिया जा रहा है उस को देखते हुए अब इन भिखारियों पर सख्ती की जाए. निकम्मे और कामचोर बने बैठे इन भिखारियों को किसी न किसी काम में लगाए बिना देश का कल्याण संभव नहीं है. सामािजक चेतना को बढ़ावा देने के साथसाथ बेरोजगारी, गरीबी आदि के उन्मूलन के अलावा भीख के निवारण के लिए सरकार को भिखारियों के गिरोहों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करनी चाहिए.

यूं सजाएं सेंटर टेबल से अपना घर

सेंटर टेबल आपके घर को सजाने में एक अलग सा ही लुक देता है. एक सजा हुआ सेंटर टेबल ना केवल खाली जगहों को भरता है बल्कि सोफा सेट को भी एक अलग सा लुक प्रदान करने में मदद करता है.

अपके घर में सेंटर टेबल का उपयोग अक्‍सर टीवी रिमोट, किताबें और समाचार पत्र रखने के लिए ही होता है, पर अगर आप इसे खूबसूरती के साथ सजाएगीं तो यह आपके घर को एक नया लुक देगा. चलिए जानते हैं, सेंटर टेबल को सजाने के टिप्‍स-

  • खूबसूरत फूल, बोंसाई, मोमबत्तियां,  क्रिस्‍टल आदि आपकी टेबल का रुप रंग दोनों ही निखार सकती हैं. इनका इस्तेमाल टेबल सजाने में जरुर करना चाहिए.
  • अगर आप सेंटर टेबल को सजाने के लिए ज्‍यादा कुछ नहीं कर सकतीं तो उसपर फूलों के पत्‍तों से भरा हुआ एक बड़ा सा कटोरा पानी डाल कर रख दें. साथ ही बीच में तैरती हुई मोमबत्‍तियां डालना न भूलें.
  • सेंटर टेबल केवल देखने भर के लिए ही नहीं होता पर आप चाहें तो उसको महका भी सकती हैं। आप केवल खूब सारी सुगंधित मोमबत्तियों को एक साथ बांध कर रख दें और जब शाम हो तो उन्‍हें जला दें. आपका कमरा महक उठेगा.
  • आप चाहें तो सेंटर में कोई भी शो पीस या फिर केंडर स्‍टैंड सजा सकती हैं. इससे टेबल थोडी भरी हुई दिखेगी.

आप डैमीसैक्सुअल तो नहीं, यह जानकारी आप ही के लिए है

आप ने अब तक सैक्सुअलिटी को ले कर कई शब्द सुने होंगे जैसे बाईसैक्सुअल, पैनसैक्सुअल, पौलिसैक्सुअल, असैक्सुअल, सेपोसैक्सुअल और भी कई तरह के शब्द. पर अब एक और नया शब्द सैक्सुअलिटी को ले कर एक नए रूप में आ रहा है और वह है डैमीसैक्सुअल. ये वे लोग हैं जो असैक्सुअलिटी के कगार पर हो सकते हैं पर पूरी तरह से अलैंगिक नहीं हैं. यदि आप किसी से सैक्सुअली आकर्षित होने से पहले अच्छे दोस्त होना पसंद करते हैं तो आप निश्चित रूप से डैमीसैक्सुअल हैं.

सैक्सुअलिटी की पहचान

यह जानने के कई तरीके हैं कि आप डैमीसैक्सुअल हैं या नहीं. सब से मुख्य तरीका यह है कि जब तक आप किसी से भावनात्मक रूप से नहीं जुड़ते, आप सैक्सुअल फीलिंग्स महसूस नहीं करते. आप के लिए भावनाएं महत्त्वपूर्ण हैं. आप सारी उम्र एक ही व्यक्ति से संबंध बना कर रह सकते हैं. आप प्रयोग से डरते हैं.

आप सैक्सुअल इंसान नहीं हैं, इस में कोई बुराई नहीं है. सैक्स के पीछे भागने से ज्यादा आप को जीवंत, वास्तविक बातचीत करना ज्यादा अच्छा लगता है. यदि आप किसी से रिलेशनशिप में हैं और उस से इमोशनली जुड़ हुए हैं तभी आप अपने पार्टनर के प्रति सैक्सुअली आकर्षित होते हैं. यदि आप सिंगल हैं, तो आप निश्चित रूप से सैक्स से ज्यादा पार्क में एक अच्छी सैर या अपनी पसंद की कोई चीज खाना पसंद करेंगे.

जिसे आप पसंद करती हैं, उस से मिलने के बाद आप उस के व्यक्तित्व से प्रभावित होंगी, उस के लुक्स से नहीं, इसलिए किसी भी चीज से पहले आप की उस से दोस्ती होगी. आप किसी से मिलने पर सैक्सुअल होने या फ्लर्टिंग में विश्वास नहीं रखते. यदि एक व्यक्ति ने आप को अपने व्यक्तित्व से प्रभावित किया है तो आप पहले दोस्ती में अपना हाथ बढ़ाएंगे. घंटों, हफ्तों, महीनों में ही डेटिंग शुरू करने की आप सोच भी नहीं सकते, फ्लर्टिंग आप के दिमाग में आती ही नहीं है.

आकर्षण के प्रकार

आकर्षण 2 तरह का होता है-प्राइमरी और सैकेंडरी. प्राइमरी आकर्षण में आप किसी के लुक्स से आकर्षित होते हैं और सैकेंडरी आकर्षण में आप किसी के व्यक्तित्व से प्रभावित होते हैं. यदि आप डैमीसैक्सुअल हैं तो आप निश्चित रूप से सैकेंडरी पर्सनैलिटी टाइप में फिट बैठते हैं. अब इस का मतलब यह नहीं है कि आप को कोई आकर्षित नहीं करता. बहुत लोग आप को आकर्षक लगे होंगे पर आप लुक्स पर ही संबंध नहीं बना सकते. आप तभी आगे बढ़ते हैं जब किसी का व्यक्तित्व आप को प्रभावित करता है.

जब आप के दिल में किसी के लिए फीलिंग्स पैदा होने लगती हैं, विशेषरूप से सैक्सुअल फीलिंग, तो आप दुविधा में पड़ जाते हैं, क्योंकि आप उतने सैक्सुअल पर्सन नहीं हैं. आप नहीं जानते कि इन फीलिंग्स पर क्या प्रतिक्रिया दें या उस व्यक्ति से कैसे शारीरिक कनैक्शन बनाएं. एक बार आप घबराहट और दुविधा की स्थिति से बाहर निकल गए, तो आप अपने पार्टनर से ही सैक्स करना चाहेंगे और किसी से भी नहीं. किसी से सैक्सुअली खुलने के लिए उसे बताएं कि आप उसे कितना प्यार करते हैं, क्योंकि आप बहुत भावुक हैं और फिर सैक्स आप दोनों के लिए बहुत कंफर्टेबल हो जाएगा.

लोगों का आप के प्रति नजरिया

क्योंकि आप सैक्स को ले कर ज्यादा नहीं सोचते, लोग सोच सकते हैं कि आप विवाह होने का इंतजार कर रहे हैं. वे आप को घमंडी और पुराने विचारों का समझ सकते हैं पर इस से आप विचलित न हों. जैसे हैं वैसे ही रहें. आप किसी स्विच को औनऔफ करने की तरह किसी से भी सैक्स नहीं कर सकते. लोगों को अपने मनोभावों पर स्पष्टीकरण देने की चिंता में पड़ें ही नहीं. आप को अपने आसपास हाइली सैक्सुअल लोगों से कोई समस्या भी नहीं होती है. बस आप स्वयं इस स्थिति से खुद को दूर रखते हैं, क्योंकि आप वैसे नहीं हैं. आप सही इंसान का इंतजार कर रहे हैं और अपना जीवन उस के साथ ही सैक्स कर के बिताना चाहते हैं. इस में कुछ भी गलत नहीं है.

डैमीसैक्सुअल होने का मतलब यह नहीं है कि आप को सैक्स पसंद नहीं है. आप को सैक्स पसंद है, सब को सैक्स पसंद होता है पर आप उसी के साथ सैक्स करना चाहते हैं जिस से आप का भावनात्मक जुड़ाव हो. जब सही इंसान आप को मिलता है, आप सैक्सुअली उस से जुड़ जाते हैं. बातचीत और बौंडिंग दोनों आप के लिए ज्यादा महत्त्व रखते हैं.

आप डैमीसैक्सुअल हैं तो आप को यह नहीं सोचना है कि यह कुछ गलत है. आप भावुक हैं, मन के मिले बिना तन से न जुड़ पाएं, तो इस में बुरा क्या है और मन मिलने पर तो आप खुल कर जीते ही हैं. यह बहुत अच्छा है. तो अपनी पसंद का व्यक्ति मिलने पर जीवन का आनंद उठाएं, प्रसन्न रहें.

सज्जन कुमार को हुई सजा: राजनीतिक रसूख बना इंसाफ में देरी की वजह

राजनीतिक रसूख के चलते गंभीर अपराध के मामले कितने लंबे खींचे जा सकते हैं, 34 साल बाद कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को मिली सजा के फैसले से बड़ी और क्या मिसाल हो सकती है. इतने लंबे चले मामले के बाद अब जा कर सज्जन कुमार को उम्र कैद की सजा सुनाई गई है.

1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली में भड़के दंगों में सज्जन कुमार मुख्य आरोपी थे. उन पर सिखों के खिलाफ दंगों को उकसाने और दंगाइयों को राजनीतिक संरक्षण देने का आरोप था.

दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने अप्रैल 2013 में सज्जन कुमार को बरी कर दिया था. फिर मामला हाई कोर्ट में लाया गया. सीबीआई ने सज्जन कुमार और 4 अन्य लोगों पर 5 लोगों की हत्या करने का आरोप लगाया गया था. यह हत्याएं दिल्ली के राजनगर इलाके में हुई थीं.

सज्जन कुमार का नाम सिख दंगों में पहले दिन से ही आ रहा था लेकिन राजनीतिक रसूख और सत्ता के सहयोग के चलते पहले तो उन्हें आरोपी ही नहीं बनने दिया गया. बाद में इस मामले की जांच के लिए बने नानावती आयोग की सिफारिश के बाद उसके के खिलाफ मामला दर्ज हुआ.

दिल्ली हाईकोर्ट ने सज्जन के अलावा 3 अन्य दोषियों, कैप्टन भागमल, गिरधारी लाल और कांग्रेस के बलवान खोखर को उम्र कैद की सजा को बरकरार रखा है. बाकी दो दोषियों, पूर्व विधायक महेंद्र यादव और किशन खोखर की सजा 3 साज से बढा कर 10 साल कर दी. 1984 के सिख विरोधी दंगों में करीब 3000 लोगों को जानें गई थीं.

असल में सजा में देरी की प्रमुख वजह मुख्य आरोपियों का राजनीतिक रुतबा और सत्ता का भरपूर सहयोग है. मामले को लटकाया जाता रहा. गवाहों को डराया धमकाया जाता रहा. अदालत को प्रभावित करने के प्रयास किए गए. जांच में अड़चनें पैदा की जाती रहीं.

इस की वजह थी, सज्जन कुमार का दिल्ली की राजनीति में बड़ा नाम था. वो संजय गांधी के बेहद करीबी थे. उन दिनों संजय गांधी की तूती बोलती थी. संजय की नजदीकी के कारण सज्जन को दिल्ली के मादीपुर से पार्षद और फिर सीधे लोकसभा में भेज दिया गया.

1977 में वह मादीपुर से पार्षद का चुनाव जीते थे और फिर 1980 में उन्हें लोकसभा का टिकट दिया गया और वह जीत कर संसद पहुंचे थे. उस समय उन की उम्र 35 साल थी.

इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए चुनावों में भारी विरोध के चलते सज्जन कुमार को टिकट नहीं दिया गया. बाद में 1989 में भी वह टिकट से वंचित रहे पर 1991 में उन्हें बाहरी दिल्ली से चुन लिया गया. वह भाजपा के प्रत्याशी साहिब सिंह वर्मा को हरा कर संसद पहुंचे थे. पहले चुनाव में उन्होंने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी ब्रह्मप्रकाश को हराया था.

इतने सालों बाद सज्जन कुमार को मिली सजा से दिल्ली का सिख समुदाय और आम इंसाफ पसंद नागरिक खुश है. अभियोजन पक्ष के वकील एचएस फुलका और अकाली नेता मानजिंदर सिंह सिरसा ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया पर वह इस से ज्यादा खुश नहीं हैं. उन्होंने कहा कि सज्जन और जगदीश टाइटलर को मौत की सजा दिलाने तक उन की जंग जारी रहेगी. वह गांधी परिवार को भी जेल पहुंचा कर रहेंगे.

लोन लेने के लिए करें इस तरीके का इस्तेमाल, होंगे ये फायदे

अगर आपको अचानक पैसों की जरूरत पड़ती है और आपको न तो दोस्त से मदद मिल पा रही है और ना बैंक लोन दे रहे हैं तो आपके पास एक औप्शन और है. जहां से आपको एक से दो दिन के भीतर पैसा मिल सकता है.

इसके लिए आपको बहुत कम औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं. यह नई तरह का मौडल है, जिसके बारे में ज्यादातर लोग नहीं जानते. इसे पी2पी लैंडिंग प्लेटफौर्म कहा जाता है. आइए, जानते हैं कि क्या है पी2पी लैंडिंग प्लेटफौर्म और इसके फायदे क्या हैं?

क्या है पी2पी प्लेटफौर्म

पी2पी यानी पीयर-टू-पीयर लेंडिंग क्राउड फंडिंग का तरीका है. इसका इस्तेमाल कर्ज लेने के लिए किया जाता है. यहां एक व्यक्ति दूसरे से लोन लेता है. यानी जिन लोगों को कर्ज की जरूरत होती है, वे उन लोगों से लोन ले लेते हैं, जो कर्ज देकर उस रकम पर ब्याज कमाना चाहते हैं.

1 से 2 दिन में मिलता है लोन

बैंकों के मुकाबले न केवल लोन की प्रोसेसिंग, बल्कि इसे देने में भी तेजी दिखार्इ जाती है. कर्ज लेने वालों के वेरिफिकेशन के बाद 24-48 घंटे में लोन की प्रक्रिया पूरी कर दी जाती है. बैंक के लोन अमूमन 5-7 दिनों में ग्राहक तक पहुंचते हैं.

कम से कम समय में लौटा सकते हैं पैसा

पी2पी पर कर्ज लेने वालों के आकर्षण का सबसे बड़ा केंद्र है लोन अदा करने की अवधि. ये लोन 3 से 36 महीनों के बीच की अवधि के होते हैं. वहीं, बैंकों के पर्सनल लोन एक से पांच साल की अवधि के होते हैं

प्रीपेमेंट चार्ज नहीं

बैंक के पर्सनल लोन को समय से पहले बंद करने पर आप से 2-4 फीसदी की प्री-क्लोजर फीस ली जा सकती है. वहीं, पी2पी लोन को चुकाने पर तीन महीने के बाद इस तरह का कोर्इ चार्ज नहीं लगता है. इसके अलावा केवल कुछ ही बैंक आपको पार्ट-पेमेंट की सुविधा देते हैं. पी2पी लोन के मामले में यह बात लागू नहीं होती है. आप पार्ट-पेमेंट करने के लिए आजाद होते हैं.

हर तरह का लोन

पी2पी प्लेटफॉर्म पर किसी भी जरूरत के लिए अनसिक्योर्ड लोन लिए जा सकते हैं. कर्ज को चुकाने से लेकर शादी-ब्याह और छुट्टी मनाने के लिए पैसों की जरूरत तक को ये पूरा करते हैं. आप अपने हिसाब से ब्याज दर, लोन की रकम और अवधि को चुन सकते हैं. 50,000 रुपये से नीचे के छोटे लोन भी पी2पी लेंडिंग प्लेटफौर्म पर उपलब्ध हैं.

क्रेडिट स्कोर कम हो तो भी मिल जाता है पैसा

बैंक ब्रांच मौडल पर आपरेट करते हैं. उनके लिए छोटी राशि के लोन देना मुफीद नहीं होता है. बैंक लोन के मुकाबले पी2पी लोन के साथ ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी होती है. क्रेडिट स्कोर 750 के नीचे होने के बावजूद पी2पी पर ज्यादा लोन मिल सकता है. कर्ज लेने वाले का आकलन उसकी क्षमता और लोन वापस करने के इरादे के आधार पर किया जाता है.

औनलाइन करें अप्लाई

बताए गए पते के फिजिकल वेरिफिकेशन के अलावा पी2पी लेंडिंग की पूरी प्रक्रिया आनलाइन होती है. यहां तक कि आप अपने मोबाइल फोन से दस्तावेजों को स्कैन और साझा कर सकते हैं.

मैदान पर ये क्या कर बैठे विराट कोहली, वीडियो हुआ वायरल

भारत और औस्ट्रेलिया के बीच दूसरा टेस्ट मैच पर्थ में खेला जा रहा है. मैच के तीसरे दिन टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली काफी आक्रामक अंदाज में दिखाई दिए.

विराट कोहली ने पहली पारी में अपना 25वां टेस्ट शतक जड़ा और कई दिग्गजों को पीछे छोड़ते हुए रिकौर्ड अपने नाम किए. इसके बाद औस्ट्रेलिया की दूसरी पारी के दौरान भी विराट काफी आक्रामक अंदाज में नजर आए.

पर्थ में दूसरे टेस्ट के तीसरे दिन टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली टी के बाद के सेशन में काफी आक्रामक दिखाई दिए. उन्हें इस बात का आभास हो गया कि औस्ट्रेलिया को रन बनाने से रोकना होगा वरना टेस्ट मैच हाथ से निकल जाएगा.

विराट कोहली ने इसके लिए हर संभव प्रयास किया. मोहम्मद शमी की गेंद पर शौन मार्श के आउट होने पर कोहली एक फैन को भी अपने जेस्चर से स्लेजिंग करते दिखाई दिए.

हालांकि, यह जेस्चर किसके लिए था. इस बात की पुष्टि नहीं की जा सकती है, लेकिन सोशल मीडिया पर फैन्स विराट कोहली के इस जेस्चर के वीडियो शेयर कर रहे हैं.

बता दें कि मैच का तीसरा दिन काफी रोमाचंक रहा. इससे पहले कोहली ने अपना 25वां शतक लगाकर कई रिकौर्ड तोड़े. कोहली ने 127 पारियों में, सचिन ने 130 में और सुनील गावस्कर ने 138 पारियों में 25वां शतक पूरा किया था.

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