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सेविंग के साथ करेंगे ये 5 काम, तो बन जाएंगे अमीर

आम तौर पर सब लोग अपनी इनकम का कुछ हिस्सा बचाते हैं और उसे सही जगह पर निवेश करते हैं जिससे वे लंबी अवधि में बड़ा अमाउंट बना सकें. लेकिन आप सिर्फ सेविंग और निवेश से ही अमीर नहीं बन सकते हैं. अमीर बनने के लिए आपको कुछ दूसरी बातों का ध्यान रखना भी जरूरी है. BankBazaar.com के सीईओ आदिल शेट्टी के अनुसार आप अमीर बनना चाहते हैं तो आपको 5 प्वाइंट टिप्स पर अमल करना होगा.

  1. पैसा बनाने के लिए इक्विटी में करें निवेश

दुनिया के सबसे अमीर लोगों की संपत्ति उनकी इक्विटी में हिस्‍सेदारी से आती है. ऐसा वे या तो कंपनियां खड़ी कर करते हैं या कंपनियों में निवेश करके करते हैं. आपको ऐसे असेट क्‍लास में निवेश करना चाहिए जो बिना जोखिम वाले विकल्‍पों जैसे बैंक डिपॉजिट और पब्लिक प्रॉविडेंट फंड से ज्‍याद रिटर्न दें.

पैसा बनाने के लिए आपको जोखिम लेने के लिए तैयार रहना होगा और आपको इक्विटी सेक्‍युरिटीज जैसे शेयरों, इक्विटी म्‍यचुअल फंडों, ईएलएसएस फंडों आदि में निवेश करना चाहिए. इन इंस्‍ट्रूमेंट में निवेश करने से संभव है कि आपका पैसा कम समय में कई गुना बढ़ जाए. इक्विटी में निवेश करने में जोखिम होता है. ऐसे में आपको बाजार के झटकों को बर्दाश्‍त करने के लिए तैयार रहना चाहिए.

  1. अच्‍छा कर्ज लें और वैल्‍यू बढ़ने वाली असेट में निवेश करें

आपको अच्‍छा कर्ज लेना चाहिए. इसका मतलब है कि आप असेट बनाने के लिए कर्ज लें जिसकी कीमत समय के साथ बढ़ेगी. उदाहरण के लिए होम लोन आपकी प्रौपर्टी खरीदने में मदद कर सकता है कि जिसकी कीमत समय के साथ बढ़ेगी. इसके अलावा आप इसे किराए पर देकर आय भी हासिल कर सकते हैं.

लेकिन अगर टीवी खरीदने के लिए क्रेडिट कार्ड लोन लेते हैं तो यह आपकी फाइनेंशियल सेहत के खराब है. क्‍योंकि आप ऐसी चीज के लिए अधिक ब्‍याज चुका रहे हो जिसकी कीमत समय के साथ कम होगी.

  1. खरीदें लाइफ और हेल्‍थ इन्‍श्‍योरेंस

आप पैसों के लिहाज से भले ही बेहतर स्थिति में हों लेकिन अगर आपने पर्याप्‍त जीवन बीमा या हेल्‍थ इन्‍श्‍योरेंस कवर नहीं लिया है तो आपको दिक्‍कत हो सकती है. ऐसा किसी बीमारी या परिवार के लिए कमाने वाले शख्‍श की असमय मौत होने की वजह से हो सकता है.

ऐसे में लाइफ इन्‍श्‍योरेंस कवर और हेल्‍थ इन्‍श्‍योरेंस कवर बहुत जरूरी हो जाता है. इसमें निवेश किया गया पैसा भले ही आपको कोई रिटर्न नहीं देगा लेकिन इससे लेकिन किसी अनिश्चितता की स्थिति में आपको और आपके परिवार को आर्थिक तौर पर मुसीबत का सामना नहीं करना पड़ेगा.

  1. बनाएं इमरजेंसी फंड

कन्‍फ्यूशियस का कहना है कि सफलता आपकी पहले की तैयारियों पर निर्भर है और ऐसी तैयारी के बिना असफलता निश्चित है. पैसों के मामले में भी यह काफी हद तक सही है. ऐसे में मुसीबत के लिए तैयारी करें. क्‍योंकि मुसीबत अचानक आती है.

लाइफ इन्‍श्‍योरेंस और हेल्‍थ इंन्‍श्‍योरेंस से आप आर्थिक दिक्‍कतों का मुकाबला कर सकते हैं. ऐसी स्थितियों में जब इन्‍श्‍योरेंस आपकी मदद नहीं कर सकता जैसे नौकरी चली जाने पर. इसके लिए आपको इमरजेंसी फंड बनाना चाहिए.

इमरजेंसी फंड होने पर आप ऐसी स्थिति में अपनी सेविंग को बचाए रख सकते हैं. जिससे आप की फाइनेंशियल प्‍लानिंग बरबार नहीं होगी. आपको 6 महीने से 12 महीने के मासिक खर्च को पूरा करने के लायक इमरजेंसी फंड बनाना चाहिए.

  1. समय पर चुकाएं अपना कर्ज

अगर आपने लोन लिया है तो यह आपकी समय पर कर्ज चुकाने की आपकी वित्‍तीय, नैतिक और कानूनी जिम्‍मेदारी है. इसमें आपके क्रेडिट कार्ड का बिल भी शामिल है. कर्ज का समय पर पेमेंट करके न सिर्फ आप पेनल्‍टी से बचते हैं बल्कि आपका क्रेडिट स्‍कोर भी सुधरता है. इससे भविष्य में आपके लिए लोन लेना आसान होता है. मौजूदा लोन को चुकाने के लिए और लोन लेने से बचें.

एक ही दिन, एक ही मैदान, और जीते गए तीन विश्व कप

21 जून, उत्तरी गोलार्द्ध (Northern Hemispher) के लोगों के लिए साल का सबसे बड़ा दिन. एक ऐसा दिन जिस दिन सूरज की किरणें सबसे ज्यादा समय तक पृथ्वी को रौशन करती हैं और ऐसी ही रोशनी में चमकी थी तीन टीमें. 21 जून की तारीख विश्व क्रिकेट का ऐसा दिन है जिन दिन एक नहीं तीन-तीन विश्व कप जीते गए. तीन अलग-अलग देशों ने पहली बार विश्व कप अपने नाम किया था. तीनों विश्व कप में एक खास समानता रही कि तीनों विश्व कप क्रिकेट का मक्का कहे जाने वाले होम औफ क्रिकेट यानी लौर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर खेला गया था.

1975, वेस्टइंडीज

क्रिकेट का पहला विश्व कप जिसमें कुल 8 टीमों ने हिस्सा लिया था. भारत के साथ छह टेस्ट प्लेइंग नेशन थी जबकि श्रीलंका और सिर्फ एक बार खेलने वाली पूर्वी अफ्रीका दो एसोसिएट कंट्री थी. भारत का सफर ग्रुप स्टेज में ही खत्म हो गया था.

ग्रुप बी की दो मजबूत टीम वेस्टइंडीज और ऑस्ट्रेलिया नौक आउट को पार करते हुए फाइनल में पहुंची थी. 60 ओवर के इस मुकाबले को सबसे लंबा वनडे मुकाबला भी कहा जाता है.

सुबह 10.30 बजे शुरू हुआ फाइनल शाम के 8.45 पर खत्म हुआ था. औस्ट्रेलिया को 17 रनों से हराकर क्लायव लौयड ने विश्व क्रिकेट में वेस्टइंडीज की बादशाहत साबित की. इस मैच में औस्ट्रेलिया के पांच खिलाड़ी रन आउट हुए थे.

2009, पाकिस्तान

लाहौर स्टेडियम में श्रीलंकाई खिलाड़ियों पर हुए हमले के तीन महीने बाद एक बार फिर पाकिस्तान और श्रीलंका की टीम आमने सामने थी. मौका था दूसरे टी 20 विश्व कप का. पाकिस्तान लगातार दूसरी बार टी 20 विश्व कप के फाइनल में पहुंची थी. मोहम्मद आमिर और अब्दुर रज्जाक ने श्रीलंकाई बल्लेबाजों को लौर्ड्स के मैदान पर खुल कर खेलने का मौका नहीं दिया और अंत में टीम 6 विकेट पर 138 रन ही बना सकी.

जवाब में पाकिस्तान ने बहुत आसानी से लक्ष्य को हासिल कर विश्व कप अपने नाम कर लिया. इस विश्व कप को या यूं कहें तो फाइनल को सिर्फ और सिर्फ शाहिद अफरीदी के लिए याद किया जाएगा. उन्होंनें एक विकेट लेने के बाद नाबाद अर्द्धशतकीय पारी खेल विश्व कप उठाया था.

2009, इंग्लैंड

पुरुष टी 20 विश्व कप के बाद बारी थी महिलाओं की. लौर्ड्स के मैदान पर ही महिला टी 20 विश्व कप का फाइनल खेला गया. ग्रुप ए की टौप की टीम न्यूजीलैंड और ग्रुप बी में टौप पर रहने वाली मेजबान इंग्लैंड की टीम फाइनल में पहुंची थी. लेकिन न्यूजीलैंड की महिला टीम टूर्नामेंट के करिश्मा फाइनल में नहीं दोहरा पाई और महज 85 रनों पर ढेर हो गई. इंग्लैंड ने बहुत ही आसानी के साथ 6 विकेट से मुकाबला जीतकर पहली बार खिताब अपने नाम किया था.

पनीर कालीमिर्च

सामग्री

– 400 ग्राम पनीर

– थोड़ा सा प्याज भुना हुआ

– थोड़ा सा अदरक व लहसुन

– थोड़े से किशमिश भीगे हुए

– 50 ग्राम दही

– 5 ग्राम घी

– 1 बड़ा चम्मच औयल

– थोड़ा सा कालीमिर्च पाउडर

– थोड़ा सा धनिया पाउडर

– थोड़ा सा जीरा पाउडर

– थोड़ा सा गरममसाला

– 2 तेज पत्ते

– थोड़ी सी क्रीम

– थोड़ा सा दूध

– थोड़ा सा कौर्नफ्लोर

– 2 लौंग

– 1 दालचीनी स्टिक

– 2 छोटी इलायची

– 5 ग्राम ब्लैक पैपर कोल्स

– गार्निश करने के लिए धनियापत्ती कटी व कालीमिर्च

– नमक स्वादानुसार.

विधि

– सब से पहले प्याज, काजू, अदरक व लहसुन को थोड़ा सा पानी ले कर पीसें.

– फिर घी व तेल को साथ गरम कर तेजपत्ते, लौंग, दालचीनी व इलायची डाल कर चलाएं.

– अब इस में पेस्ट के साथ नमक डाल कर फ्राई करें. फ्राई होने के बाद दही, धनिया, जीरा व कालीमिर्च पाउडर डाल कर तब तक फ्राई करें जब तक वह घी न छोड़ने लगे.

– फिर पनीर को फ्राई करें.

– एक बाउल में दूध में कौर्नफ्लोर व थोड़ा सा पानी मिला कर उसे पनीर में डाल कर अच्छी तरह चलाएं. ऊपर से क्रीम डाल कर थोड़ा पकाएं.

– पकने पर धनियापत्ती व कालीमिर्च से सजा कर सर्व करें.

कैसा हो सर्दियों का डाइटचार्ट

सर्दियों के मौसम में आप खूब खाना खा कर सेहत बना सकते हैं. इस दौरान डाइजेशन सिस्टम भी अच्छी तरह काम करता है. इन दिनों सभी हैवी डाइट खाना पसंद करते हैं. ड्राइफ्रूट्स और नट्स अपने डाइट चार्ट में शामिल कर सकते हैं. हैवी डाइट लेने की वजह से इन दिनों खूब कसरत करें. मौसम बदलते ही शरीर को चुस्तदुरुस्त बनाए रखने के लिए अपने खानपान में कुछ फेरबदल करना चाहिए.

हम जैसा भोजन करते हैं, हमारे तनमन पर उस का असर होता है. हैल्थ कौंशियस युवाओं के लिए यह मौसम चुनौती भरा होता है. ठंडे मौसम में एक्सरसाइज कर शरीर को ऊर्जावान बनाए रखना जरूरी है साथ ही ऐसा आहार जिस की कम मात्रा लेने से शरीर को पूरी कैलोरी मिले. अधिकतर युवा सर्दियों में अपनी डाइट को ले कर कर कन्फ्यूज रहते हैं. इसलिए इस सर्दी में लो फैट विद हाई कैलोरी से भरपूर डाइटचार्ट पर आप ध्यान देंगे तो अपने शरीर के बढ़ते वजन को नियंत्रित रख पाएंगे और स्वस्थ रहेंगे.

सर्दियों की डाइट : इस मौसम में शरीर से थकान व आलस्य दूर भगाने के साथ ही दिन भर स्फूर्ति और ऊर्जा से भरपूर रहने के लिए युवाओं को डाइट चार्ट पर ध्यान देना चाहिए. अपने खानपान में उन सब चीजों को शामिल करें, जिस से शरीर को एनर्जी मिले और आप चुस्तदुरस्त बने रहें.

ब्रेकफास्ट : सुबह का नाश्ता ऊर्जावान होना चाहिए. नाश्ते में अंडे के साथ ब्रेड, उपमा सैंडविच, डोसा आदि का सेवन करें. रोजाना नाश्ते के बाद मलाई निकला एक गिलास गरम दूध पीना न भूलें. इस सब के साथ एक प्लेट फ्रूट या वेजीटेबल सलाद आप के नाश्ते को कंप्लीट करता है. नाश्ता हैवी होना चाहिए.

लंच स्पैशल :  दोपहर के भोजन में हरी सब्जी, चपाती, ताजा दही या छाछ, छिलके वाली दाल के साथ चावल, गरमगरम सूप लेना अच्छा रहता है. लंच में हरी चटनी भोजन में मल्टीविटामिन्स की कमी को पूरा करती है.

डिलीशियस डिनर : सर्दियों में रात को जल्दी भोजन करें. रात का भोजन दोपहर के भोजन की अपेक्षा हलका होना चाहिए. रात के भोजन में हमेशा हलका व साधारण खाना खिचड़ी या दलिया ले सकते हैं. सोने से कम से कम 4 घंटे पहले भोजन करने से शरीर में भोजन का पाचन ठीक तरह से होता है. सोने से पहले हलदी, खारेक या अदरक मिला एक गिलास गरम दूध जरूर पिएं.

स्वस्थ और निरोगी रहने के टिप्स :  कुछ आसान से घरेलू उपाय अपना कर हम इस मौसम में स्वस्थ व निरोगी रह सकते हैं. सर्दियों का मौसम शुरू होते ही सर्दी, खांसी और जुकाम का हमला तेज हो जाता है. अकसर लोग बीमार होने के बाद अपने खानपान में बदलाव के बारे में सोचते हैं जबकि बीमार होने से पहले ही यदि हम मौसम के अनुसार उचित आहार लेना शुरू कर दें तो शरीर को सर्दियों में स्वस्थ और निरोगी रखा जा सकता है.

शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के नुस्खे काफी आसान हैं. पर्याप्त नींद लें और अपना खानपान सही रखें. सर्दी के मौसम में विभिन्न प्रकार के पोषक पदार्थ और जड़ीबूटियों का सेवन कर आप खुद को स्वस्थ और कई तरह के वायरल संक्रमण से बचा सकते हैं. इस मौसम में स्वस्थ रहने के लिए ऐसे आहार की जरूरत होती है जो शरीर को गरम रखें. आप को अस्थमा, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर जैसा कोई रोग है तो सर्दी में अपने खानपान पर विशेष ध्यान दें.

सर्दियों में स्वस्थ रहने के लिए अपने खानपान में खास फलों और सब्जियों का इस्तेमाल कर बीमारियों से छुटकारा पाया जा सकता.

आइए, जानते हैं उन चीजों के बारे में जिन्हें अपना कर हम सर्दियों में स्वस्थ रह सकते हैं :

सब्जियों का सेवन करें :  सर्दी में हरी सब्जियों को अपने भोजन में अवश्य शामिल करें, क्योंकि इन में प्रचुर मात्रा में विटामिन्स होते हैं, जो शरीर को गरम रखने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होते हैं. सर्दियों में पालक की सब्जी, बीटरूट, लहसुन, बथुआ, ब्रोकली, पत्तागोभी, गाजर का सेवन अवश्य करें.

मूंगफली का सेवन कर सर्दियों में रहें फिट :  सर्दी के दिनों में मूंगफली का सेवन अवश्य करें, क्योंकि मूंगफली में प्रोटीन, फाइबर, मिनरल, आयरन, विटामिन प्रचुर मात्रा में होते हैं. इसीलिए तो इसे गरीबों का बादाम कहा जाता है. सर्दी के मौसम में शरीर को गरम रखने और खून की मात्रा बढ़ाने के लिए मूंगफली और देशी गुड़ खाएं. इस का सेवन करने से आप स्वस्थ रहेंगे.

लहसुन का सेवन बचाएगा जुकाम से :  सर्दियों में लहसुन का इस्तेमाल आयुर्वेदिक औषधि और किचन में किया जाता है. आज विज्ञान भी इस के औषधीय गुणों को मान रहा है. सर्दी के मौसम में लहसुन का नियमित सेवन सर्दी, जुकाम और खांसी से छुटकारा दिला सकता है.

स्वस्थ रहने के लिए करें तिल का सेवन :  सर्दियों में तिल खाने से ऊर्जा मिलती है. तिल के तेल से मालिश करने से त्वचा मुलायम रहती है और ठंड से भी बचाव होता है. तिल और गुड़ का एकसाथ खाने से शरीर को जरूरी पोषक तत्त्व मिलते हैं. इम्युनिटी बढ़ती है और खांसीकफ से राहत मिलती है.

गाजर का सेवन फायदेमंद : गाजर में विटामिन प्रचुर मात्रा में होने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और आंखें भी स्वस्थ रहती हैं. सर्दी के मौसम में गाजर खाने से शरीर में गर्माहट बनी रहती है.

स्वस्थ रहने के लिए बाजरा का सेवन करें :  देश के कई हिस्सों में सर्दियों में बाजरा अधिक खाया जाता है. बाजरे में मैग्नीशियम, कैल्शियम, फाइबर, विटामिन और एंटी औक्सीडैंट प्रचुर मात्रा में होते हैं. खास कर छोटे बच्चों को बाजरा अवश्य खिलाना चाहिए.

सर्दियों में हलदी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है :  सर्दियों में हलदी मिला गरम दूध रोजाना रात को पीने से व्यक्ति स्वस्थ रहता है. इस में एंटीबायोटिक गुणों के साथ एंटीएलर्जिक और एंटी इंफ्लेमेटरी गुण भी हैं. रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ने के लिए यह श्रेष्ठ आयुर्वेदिक औषधि है.

स्वस्थ रहने के लिए मेथी का करें सेवन :  मेथी में विटामिन के, आयरन और फोलिक एसिड होता है. शरीर को गरम रखने के साथ ही यह खून की मात्रा बढ़ाने में भी मददगार है.

बादाम का सेवन लाभदायक :  बादाम में प्रोटीन, फाइबर मिनरल होते हैं, जो सर्दी में मौसमी बीमारियों से बचाव करते हैं. सर्दी के मौसम में बादाम रोजाना खाने से दिमाग तो तेज होता ही है साथ ही कब्ज की समस्या से भी नजात मिलती है और डायबिटीज को नियंत्रित करने में भी यह मदद करता है.

स्वस्थ रहने के लिए सर्दियों में फल देंगे पोषण और ऊर्जा :  सर्दियों में मौसमी फल जैसे संतरा, सेब, अनार, आंवला आदि खाना चाहिए, शरीर को पोषण, और ऊर्जा और गर्माहट देते हैं. फलों का जूस बना कर पीने से अच्छा है, आप सीधे स्वच्छ फल खाएं. इस से पाचन भी ठीक रहता है और पर्याप्त मात्रा में शरीर को फाइबर भी मिलता है.

च्यवनप्राश का सेवन है स्वास्थ्यवर्द्धक :  सर्दियों में च्यवनप्राश का सेवन जरूर करें सुबहशाम एक चम्मच च्यवनप्राश के साथ एक ग्लास गरम दूध पीने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य लाभ मिलता है. यह बुढ़ापे दूर करने के लिए सब से अच्छा तरीका है.

एक नहीं, 1 लाख पुरुषों के साथ सेक्स करना चाहती है ये लड़की

आम तौर पर धारणा है कि महिलाओं से ज्‍याद पुरुषों में सेक्‍स की भूख होती है. लेकिन अगर आप पोलैंड की एनिया लिसेसका से मिलेंगे, तो शायद हमेशा के लिये यह बात मन में नहीं लायेंगे. क्‍योंकि 21 साल की यह लड़की एक लाख पुरुषों के साथ यौन संबंध स्‍थापित करना चाहती है.

आपको हैरत यह जानकर भी होगी कि अब तक यह लड़की 284 पुरुषों संग सेक्‍स कर चुकी है. यह खबर एक विदेशी अखबार ने ब्रेक की जब खुद लड़की ने अपनी इच्‍छा को फेसबुक पेज पर बयां किया.

पोलैंड की इस लड़की ने खुद फेसबुक पर लिखा कि वो अब तक 284 पुरुषों के संग सेक्‍स कर चुकी है. उसने सबका रिकौर्ड एक डायरी में रखा है. वो अपनी डायरी में हर उस व्‍यक्ति का नाम, पता व टेलीफोन नंबर लिखती है, जिसके साथ उसने संबंध स्‍थापित किये हैं.

14,591 फेसबुक फैन्‍स रखने वाली पोलिश लड़की ने अपनी इच्‍छा व्‍यक्‍त की है कि अब तक जितने भी लड़कों के साथ उसने संभोग किया है, उनमें से किसी के साथ भी उसे वो सुख नहीं मिला, जो वह चाहती है.

उसने कहा कि सबके साथ सेक्‍स करने में मजा तो आया, लेकिन वो बात नहीं आयी, जो मैं चाहती हूं. उसने यह भी कहा कि वह अपने जीवन में एक लाख लोगों के साथ सेक्‍स करेगी, इसके लिये उसने पूरी प्‍लानिंग कर ली है. उस प्‍लानिंग के अंतर्गत वह एक व्‍यक्ति को 20 मिनट देगी.

खास बात यह है कि पोलैंड सरकार ने लड़की के मिशन पर कोई ऑबजेक्‍शन नहीं किया है, हालांकि पोलैंड में खुलेआम प्रौस्टिट्यूशन वर्जित है.

पोलैंड की एनिया लिसेसका

उसने कहा कि वह दुनिया के हर बड़े शहर में जाकर वहां के पुरुषों के साथ सेक्‍स करना चाहती है. अपने इस पोस्‍ट के बाद से यह लड़की दुनिया भर की वेबसाइटों पर चर्चा का विषय बनी हुई है.

सबसे पहले कहां पड़ती है नज़र

जब दो अपोजिट सेक्स के लोग आपस में पहली बार मिलते हैं तो उनकी नजर एक-दूसरे के यौन अंगों की ओर होती है, लेकिन एक अंतराष्ट्रीय सर्वे ने इस बात को झुठला दिया है. सर्वे के अनुसार पुरुष सबसे पहले आंखें, फिर मुस्‍कुराहट और उसके बाद स्‍तनों पर गौर करते हैं.

370 अंजान मर्दों के साथ सेक्‍स

ब्रिटेन की सेयी कोलाड नाम की एक महिला को 17 साल की कच्‍ची उम्र में ही सेक्‍स की ऐसी लत लगी कि उसने 370 अंजान मर्दों के साथ संबंध बनाया.

बिल्‍ले के साथ सेक्‍स

यह अमेरिका में देखने को मिला. यहां एक 23 वर्षीय युवती यौन संतुष्टि के लिये अपने बिल्‍ले के साथ सेक्‍स करती थी. जब उस पता चला कि ये बात अब पूरे इलाके में फैल गई है और उसे शक हुआ कि बात फैलाने वाली हरकत 72 वर्षीय उसके पड़ोसी ने की है तो वो चाकू लेकर उसे मारने पहुंच गई.

सेक्‍स पर हुआ सर्वे, निकली 40 बातें

अमेरिका की राष्‍ट्रीय सर्वे कंपनी ने एक लोगों के यौन संबंधों पर एक बड़ा सर्वेक्षण करवाया, जिसमें कई प्रकार की बातें सामने आयीं. यही नहीं कई तथ्‍य चौंकाने वाले आये, जो लोगों के अंदर यौन क्रियाओं व यौन इच्‍छाओं के प्रति भ्रांतियों को दूर करने वाले हैं.

रक्तदान से कतराते हैं तो शर्म किजिए, यहां तो एक कुत्ते तक ने दे दिया खून

अगर आप से कोई अचानक कहे कि मेरा एक दोस्‍त बीमार है, उसकी जिंदगी बचाने के लिए रक्‍त की जरूरत है तो क्‍या आप सहर्ष तैयार हो जायेंगे, ऐसे में ज्‍यादातर लोग तो तैयार नहीं होंगे. लेकिन हम इंसान एक कुत्ते से तो सीख ही सकते हैं.

न्‍यूजीलैंड के टारंगा में एक लैब्रोडोर नस्‍ल के कुत्ते ने बिल्‍ली को बचाने के लिए रक्‍त दिया. आमतौर पर कुत्ते और बिल्‍ली के बीच कभी सामान्‍य रिश्‍ते नहीं देखे जाते हैं पर कुत्ते ने ऐसे समय में बिल्‍ली को खून दिया जब वो लगभग मरने ही वाली थी.

पशु चिकित्‍सक का कहना है कि बिल्‍ली ने गलती से ‘चूहे मारने की दवा’ खा ली थी, जिससे उसकी हालत एकदम खराब हो गयी थी.

बिल्‍ली की ओनर किम एडवर्ड ने बताया कि रोरी (बिल्‍ली) की तबियत बिल्‍कुल बिगड़ती ही जा रही थी, हमारे पास बिल्‍कुल भी वक्‍त नहीं था कि हम एक बिल्‍ली का खून लें और उसे लैब में मैच करवाकर रोरी को दें] तभी मैनें अपने दोस्‍त मिशेल व्‍हाइटमोर को कौल किया जिनके पास लैब्रोडोर प्रजाति का कुत्ता है, जिसका नाम ‘मेसी’ है.

व्हाइटमोर का कहना है कि मैंने इस तरह की घटना को पहले कभी नहीं सुना था, मुझे लगा कि किम मुझसे मजाक कर रही हैं लेकिन जो भी यहां हुआ वह आपने आप में अद्भुत था क्‍योंकि इस तरह की घटना मैंने अपने जीवन में कभी भी नहीं देखी या सुनी थी. मुझे लगता है कि इससे हम इंसानों को भी सीखना चाहिए जो कि रक्‍तदान करने के नाम से ही कतराते हैं.

मेरी ब्रेस्ट काफी छोटे हैं जिस वजह से मुझे ब्लाउज की सही फिटिंग नहीं आती है. उपाय बताएं.

सवाल
मेरी ब्रेस्ट काफी छोटे हैं जिस वजह से मुझे ब्लाउज की सही फिटिंग नहीं आती है. उपाय बताएं?

जवाब
अगर छाती बिलकुल नहीं है, तो इस के 2 उपाय हो सकते हैं. पहला, आप ब्रैस्ट सर्जरी करा लें. इस में सिलिकौन के पैड लगा कर आप के शरीर में ब्रैस्ट बना देंगे. दूसरा, आप पैड वाली ब्रा का इस्तेमाल करें. अब बाजार में अच्छे किस्म के ऐसे पैड्स भी आते हैं, जिन को पहनने से आप को असली ब्रैस्ट का अहसास होगा.

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जैसी काया चाहिए वैसी पाइए

हर महिला की चाहत होती है कमनीय काया. एक समय था जब यह चाहत कल्पना ही रह जाती थी और अकसर थुलथुल, गदराए बदन वाली स्त्रियां बस एक आह भर कर ही रह जाती थीं. पर अब वक्त बदल चुका है, वक्त की मांग भी बदल चुकी है. अब तो आप जैसी चाहिए वैसी काया पाइए. एक अच्छे कौस्मैटिक सर्जन से एक मुलाकात निश्चित तौर पर आप के सपनों में रंग भर देगी. शारीरिक संरचना में कहीं न कहीं कोई कमी तो रहती ही है. कहीं कमर मोटी, कहीं लटके स्तन तो कहीं अत्यंत छोटे स्तन. पर समस्या कोई भी हो क्यों झेला जाए उसे जब सब का निदान हो सकता है. यह कैसे हो सकता है इस के बारे में बताया कौस्मैटिक सर्जन डा. अजय कश्यप और डा. जे.बी. रती ने.

उन से कौस्मैटिक सर्जरी के बारे में जो बात हुई पेश हैं यहां उस के खास अंश:

कलात्मक अभिरुचियों के कारण डा. अजय कश्यप का रुझान कौस्मैटिक सर्जरी की ओर गया और फिर शुरू हुआ शारीरिक कमियों को ठीक करने का दौर. डा. अजय कश्यप बताते हैं कि जब भी कोई शारीरिक सौंदर्य को बढ़ाने के लिए केस आता है, तो उसे सौंदर्य में ढालने के लिए ही हम सर्जरी करते हैं.

आमतौर पर स्तनों से संबंधित कौन से केस आते हैं, जिन्हें आप औपरेट करते हैं? 

स्तनों से संबंधित हर प्रकार के केस आते हैं. जैसे छोटे स्तनों को बड़ा करना, लटके व बड़े स्तनों को छोटा करना, निप्पल को उठाना या उस का ब्राउनिश हिस्सा जो फैला होता है उसे कम करना. निप्पल बड़े हों तो छोटे हो सकते हैं. निप्पल के ब्राउन भाग को कम करने यानी एरियोला रिडक्शन के केस भी आते रहते हैं. दरअसल, हर महिला की चाहत होती है कि उस के अंग सुंदर लगें. हम अंगों को सुंदर बनाते हैं.

आमतौर पर किस आयु की स्त्रियां ज्यादा आती हैं?

यों तो 20 से 40 के बीच की महिलाएं ज्यादा आती हैं. पर कुछ 50 के आसपास भी आती हैं. इन के बच्चे बड़े हो जाते हैं और इस आयु में वे अपने विषय में सोचती हैं.

अगर कौस्मैटिक सर्जरी की निगाह से देखें तो शारीरिक सौंदर्य कैसे बदलते रहे हैं?

1980 के दौर में ऐथलैटिक शरीर का ज्यादा चलन था. पर अब समय बदल चुका है, लड़कियां जीरो फिगर के चक्कर में रहने लगी हैं. शादी से पहले भी वे जीरो फिगर के लिए औपरेशन कराती हैं. और वे फिगर तो थिन चाहती हैं पर स्तन थोड़े भारी ही चाहती हैं.

जब बदन जीरो फिगर की हो तो स्तनों का क्या अनुपात रहता है? बहुत पतली कमर पर भारी स्तन कैसे लगेंगे?

ब्रैस्ट के भी रेशियो होते हैं. कमर के हिसाब से ब्रैस्ट का साइज होता है. जैसे कमर 24 इंच हो तो ब्रैस्ट 36 इंच होनी चाहिए. ब्रैस्ट कप सी साइज का होना चाहिए.

छोटे स्तनों को आप बड़ा तो सिलिकौन इंप्लांट से करते हैं पर कई बार औपरेशन के बाद ब्रैस्ट सख्त सी हो जाती है. क्या कहेंगे आप?

जी हां, कई बार इंप्लांट से हार्डनैस हो जाती है. इसलिए हम कभीकभी कस्टमर के फैट से ही ब्रैस्ट बना देते हैं, जिसे औटोलोगस फैट ब्रैस्ट औगमैंटेशन कहते हैं. शरीर में जिस जगह भी फैट हो जैसे, जांघ, पेट, कूल्हे या कमर में, वहीं से निकाल कर उस से स्तन बना देते हैं. इस प्रकार अपने ही फैट से ब्रैस्ट बिना इंप्लांट के बनती है.

क्या आप के पास अविवाहिताएं भी आती हैं?

जी हां, अविवाहिताएं भी आती हैं. बेशक कम आती हैं पर आती हैं.

बड़े स्तनों को छोटा कराना कैसा रहता है?

बड़े और लटके स्तनों की तो कई समस्याएं हैं. इस में स्तनों के नीचे खुजली व फंगल इन्फैक्शन हो जाता है, कंधों में दर्द रहता है और देखने में फिगर अजीब लगता है. कई बार एक ब्रैस्ट बड़ी व एक छोटी होती है. वह तब भी बुरी लगती है. समस्या कोई भी हो, औपरेशन से सब ठीक हो जाता है.

आप के अनुसार सर्वोत्तम फिगर कौन सी होती है? आजकल किस प्रकार के स्तनों का चलन है और कौन सा वर्ग आप के पास ज्यादा आता है?

हमारे पास ग्लैमर वर्ल्ड के ही लोग ज्यादा आते हैं. देखिए, अच्छी फिगर तो वही होती है जिस में पतली कमर हो. यानी साइज 36-24-36 हो. यही महिलाएं चाहती भी हैं और हम औपरेशन कर के ऐसा शारीरिक सौंदर्य देते भी हैं. रहा सवाल ब्रैस्ट के लेटैस्ट फैशन का, तो हर महिला यह चाहती है कि पतली कमर हो और ब्रैस्ट सुदढ़ और उठी हुई हो. उन के इन्हीं सपनों में तो हम रंग भरते हैं.

इन औपरेशंस में खर्च कितना आता है?

यह औपरेशन पर निर्भर करता है. आमतौर पर 1 लाख से 2 लाख के बीच खर्च आता है.

डा. जे.बी. रती ने बताया कि हमारा काम बहुत चुनौती भरा होता है. यहां बीमार लोग नहीं आते. यहां तो सुंदर लगने के लिए औपरेशन करवाने लोग आते हैं और उन के पैमाने पर हमें खरा उतरना पड़ता है. फिर सौंदर्य के सब के अपने मापदंड होते हैं. कई महिलाएं चाहती हैं कि कमर बेहद पतली हो और ब्रैस्ट बेहद भारी हों, तो कुछ महिलाएं कुछ और चाहती हैं.

किस वर्ग के लोग आप के पास ज्यादा आते हैं?

आमतौर पर मौडल्स, फिल्म और टीवी के लोग ज्यादा आते हैं, क्योंकि वे अच्छी बौडी शेप चाहते हैं. वैसे आम लोग भी आते हैं.

शरीर के किसकिस भाग का औपरेशन करते हैं?

लगभग हर भाग का पर सब से ज्यादा स्तनों से संबंधित औपरेशन होते हैं. उन के अलावा पेट को कम करना, कमर पतली करना, नाक को सुंदर बनाना, होंठ ज्यादा पतले हों तो उन्हें मोटा करना (आजकल थोड़े मोटे होंठ फैशन में हैं) वगैरह के औपरेशन करते हैं.

स्तनों के औपरेशंस के विषय में बताइए?

बड़े व लटके स्तनों को तो हम छोटा कर ही देते हैं, छोटे स्तनों को इंप्लांट द्वारा बड़ा कर देते हैं. इस के अलावा निप्पलों को भी औपरेट कर देते हैं. पर निप्पल छोटे किए जाते हैं. हम छोटों को बड़ा नहीं कर सकते. यह औपरेशन महिलाओं का तो हम करते ही हैं पर स्तनों की समस्या कई पुरुषों में भी पाई जाती है. कई पुरुषों का एक या दोनों ही स्तन महिलाओं जैसे हो जाते हैं. उन्हें हम औपरेट कर के नौर्मल बनाते हैं. ऐसा हारमोनल असंतुलन के कारण होता है.

आजकल किस प्रकार के स्तन चलन में हैं जिन्हें महिलाएं पसंद करती हैं?

पतली कमर हो और ब्रैस्ट भारी और एकदम उठी हुई होनी चाहिए. इसीलिए लटकी ब्रैस्ट को महिलाएं औपरेशन से ठीक कराती हैं. कहने का मतलब यह है कि वे अच्छी फिगर की लगना चाहती हैं. हम औपरेशन से यही सब कर देते हैं. लटकी ब्रैस्ट को उठा देते हैं, सर्जरी से उसे टाइट कर देते हैं. आमतौर पर मौडल्स न तो छोटी ब्रैस्ट चाहती हैं, न ही बहुत बड़ी, बीच का साइज उन्हें ठीक लगता है, पर नोटिसेबल साइज हो. कई महिलाओं की बहुत छोटी ब्रैस्ट होती हैं तब हम सिलिकौन ब्रैस्ट इंप्लांट से उन्हें बड़ा बना देते हैं.

इस का खर्चा कितना आता है?

देखिए, इंप्लांट बाहर से आते हैं जो 35,000 से 45,000 तक के होते हैं. लेकिन सारा खर्च क्व1 लाख से ऊपर ही आता है.

इस में समय कितना लगता है?

ब्रैस्ट इंप्लांट में 2 से 3 घंटे लगते हैं पर ब्रैस्ट कम करने या ब्रैस्ट उठाने में 5 घंटे से कुछ ज्यादा ही समय लग जाता है.

मैं अपने बालों को ले कर बहुत फिक्रमंद रहती हूं. मैं जानना चाहती हूं कि बालों को धोने के कितने घंटे पहले औयलिंग करनी चाहिए.

सवाल
मैं अपने बालों को ले कर बहुत फिक्रमंद रहती हूं. इसलिए उन की नियमित तेल मालिश करना चहती हूं. लेकिन वर्किंग होने के कारण यह रोज संभव नहीं हो पाता है. मैं जानना चाहती हूं कि बालों को धोने के कितने घंटे पहले औयलिंग करनी चाहिए?

जवाब
अगर आप बालों को स्वस्थ व आकर्षक बनाना चाहती हैं तो इन की औयलिंग वास्तव में जरूरी है. इस के लिए तेल को सिर धोने से पहले लगाएं न कि बाद में. तेल लगाने से धूलमिट्टी के कण बालों में चिपक जाते हैं. इसलिए अच्छा तरीका है आधा घंटा पहले बालों में औयलिंग करते हुए धीरेधीरे हैड मसाज करें. सप्ताह में 2-3 दिन तेल मालिश करें. इस से बालों को पोषण मिलता है.

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कैसे चुनें सही हेयर कंडीशनर

बालों की सुरक्षा के लिए आप समय समय पर इन्हें जरूरी ट्रीटमैंट देती रहती हैं. इन्हीं ट्रीटमैंट्स में एक है- हेयर कंडीशनिंग. घरेलू नुसखों के साथसाथ बाजार में कई कंडीशनर भी उपलब्ध हैं, जो हर प्रकार के बालों के लिए बनाए गए हैं. मगर इन का चुनाव सावधानी के साथ करना चाहिए वरना इन का विपरीत प्रभाव बालों की सेहत को बिगाड़ भी सकता है.

अकसर महिलाएं इस बात को नजरअंदाज कर शैंपू और कंडीशनर की आकर्षक पैकिंग और उन के विज्ञापनों पर ही गौर करती हैं. कंडीशनर में मौजूद इनग्रीडिएंट्स उन के लिए महत्त्व नहीं रखते. जबकि सब से पहले किसी भी प्रोडक्ट पर दिए गए निर्देशों को ध्यानपूर्वक पढ़ लेना बहुत जरूरी होता है. एक अध्ययन के मुताबिक 70% महिलाओं को पता ही नहीं होता कि कंडीशनर का इस्तेमाल क्यों किया जाता है. वे तो बस इसे एक प्रक्रिया के तौर पर बालों में लगा लेती हैं, तो कुछ महिलाएं ऐसी भी हैं, जो हर बार शैंपू और कंडीशनर बदल लेती हैं. ऐसे में बालों का खराब होना तय होता है. इन में से कुछ महिलाएं ऐसी भी हैं, जिन्हें कंडीशनर के इस्तेमाल करने का ढंग और उस के फायदों के बारे में तो पता होता है, लेकिन यह पता नहीं होता है कि उन के बालों के टैक्स्चर पर कौन सा हेयर कंडीशनर फायदेमंद साबित होगा. आइए, जानें कि किस तरह बालों के टैक्स्चर को समझ कर उन पर कौन सा कंडीशनर लगाना चाहिए:

पतले और महीन बाल

बालों के पतले होने के 2 कारण हो सकते हैं- या तो बालों को सही ट्रीटमैंट नहीं दिया जा रहा है या फिर आनुवंशिकता की वजह से भी बालों का टैक्स्चर महीन हो सकता है. लेकिन इन्हें सही ट्रीटमैंट के जरीए कुछ हद तक दुरुस्त किया जा सकता है. खासतौर पर हलके और वौल्यूमाइजिंग फौर्मूला बेस्ड कंडीशनर ऐसे बालों के लिए सब से अच्छा विकल्प साबित होते हैं. दरअसल, ऐसे बालों को भारीपन के साथ ही चमक की भी जरूरत होती है और इस के लिए जरूरी है कि बालों में नमी रहे. लेकिन ऐसे बालों के लिए कंडीशनर चुनते वक्त यह जरूर देख लें कि उस में बायोटिन, कैफीन, पैंथेनोल और अमोनिया ऐसिड जैसे तत्त्वों का इस्तेमाल न किया गया हो. साथ ही, ऐसे बालों पर कंडीशनर को क्राउन एरिया पर लगने से बचाना चाहिए और जड़ों से लगभग 2 इंच बाल छोड़ कर कंडीशनर लगाना चाहिए.

नौर्मल एवं मीडियम बाल

ऐसे बालों को मैंटेन रखने के लिए हाईड्रेशन लैवल में संतुलन बनाए रखना जरूरी है. अच्छी बात है कि आप के बाल शाइनी और हैल्दी हैं, लेकिन उन की इस खूबी को बनाए रखने के लिए जरूरी है कि उन्हें जरूरी ट्रीटमैंट मिलता रहे. ऐसे बालों के लिए विटामिन ए, सी और ई युक्त कंडीशनर का इस्तेमाल किया जा सकता है. साथ ही यूकलिप्टस और व्हीट प्रोटीन वाले कंडीशनर भी ऐसे बालों में नमी बनाए रखते हैं.

घुंघराले बाल

घुंघराले बालों में मौइश्चराइजिंग कंडीशनर ही लगाना चाहिए. ऐसे कंडीशनर बालों को शाइनिंग देते हैं और पोषण भी. ऐसे बालों के लिए कंडीशनर का चुनाव करते वक्त यह जरूर देख लें कि उस में शामिल सामग्री में प्रोटीन जरूर हो. इस के अतिरिक्त ऐसे बालों में शीया बटर, औलिव औयल और ग्लिसरीन युक्त कंडीशनर भी फायदेमंद साबित होते हैं. ये बालों में हाईड्रेशन और इलास्टिसिटी को भी बनाए रखते हैं.

मोटे बाल

यदि बाल मोटे और कड़े टैक्स्चर वाले हैं तो सब से पहले उन्हें मुलायम बनाया जाए, जिस के लिए कंडीशनर में ऐवोकाडो का तेल और सोया मिल्क जैसे इनग्रीडिएंट्स का शामिल होना बेहद जरूरी है. यह ऐसे बालों को भारी और सिल्की बनाएगा और साथ ही वौल्यूम को भी स्मूद करेगा.

औयली बाल

वैज्ञानिक तौर पर जिन की स्कैल्प ड्राई होती है उन के बाल औयली होते हैं. दरअसल, ड्राईनैस की वजह से स्कैल्प पर मौजूद औयल ग्लैंड तेल निकालना शुरू कर देती है, जिस से बाल ग्रीसी दिखने लगते हैं. कई महिलाएं बाल औयली होने की वजह से कंडीशनर को नजरअंदाज करने लगती हैं. लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए. ऐसे बालों में कंडीशनर को बालों के निचले हिस्से में लगाना चाहिए और वह भी स्प्रिंग की तरह बालों को घुमाघुमा कर कंडीशनर लगाने से फायदा होता है.

नादिया निगहत : कश्मीर की पहली महिला फुटबौल कोच

नादिया निगहत के लिए पहली महिला फुटबौल कोच बनना कोई आसान काम नहीं था. जम्मू कश्मीर में किसी महिला के लिए ऐसा करना वास्तव में लोगों के माइंडसेट को बदलना था. उन्हें यह बताना था कि लड़कियां किसी भी फील्ड में आगे बढ़ सकती हैं.

कश्मीर के श्रीनगर में रहने वाली 20 वर्षीय निगहत को यह करियर चुनने के लिए बहुत सी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा. अपने इस सफर के बारे में नादिया कहती हैं कि 40-50 लड़कों के बीच मैं अकेली लड़की थी, जिसने स्थानीय कालेज में प्रैक्टिस सेशन में भाग लिया. मुझे और मेरे परिवार को इसके लिए कड़ी आलोचना झेलनी पड़ी.

उन्होंने आगे कहा, ‘शुरू में मेरा परिवार भी इसके खिलाफ था कि मैं लड़कों के साथ फुटबौल खेलूं. लेकिन बाद में मेरे परिवार ने मुझे सपोर्ट किया खासतौर पर पिता ने. बाद में मेरा पूरा परिवार ही मेरा साथ खड़ा रहा.’

पुर्तगाल के फुटबौल स्टार क्रिस्टियानो रोनाल्डो और अर्जेंटीना के लियोनल मेसी की जबरदस्त फैन नादिया की फुटबौल में स्कूल के समय से ही गहरी रुचि रही. नादिया अमर सिंह कालेज अकादमी में फुटबौल की बारीकियां सीखने गईं. बाद में जम्मू कश्मीर फुटबौल एसोसिएशन ने नादिया की इस बात के लिए मदद की कि वह फुटबौल में अपना करियर बना सकें.

घाटी में खराब हालात पर बात करते हुए नादिया कहती हैं, ‘जब भी हमारे क्षेत्र में कर्फ्यू लगता है, तब भी मैं अपना ट्रेनिंग सेशन किसी तरह पूरा करती हूं. इस तरह की परिस्थितियों में अपने सपने को पूरा करना आसान नहीं है. लेकिन यदि आपके भीतर समर्पण है तो रास्ते बनते चले जाते हैं.’

नादिया फिलहाल महाराष्ट्र, ठाणे के एक स्कूल में बच्चों को फुटबौल का प्रशिक्षण देती हैं. उन्होंने अभिभावकों से यह अपील की है कि वे अपनी बेटियों को फुटबौल सीखने के लिए भेजें. वह नहीं मानतीं कि फुटबौल लड़कों का खेल है.

नादिया कहती हैं, ‘मैं चाहती हूं कि हर व्यक्ति अपने सपने को पूरा करे और अपना लक्ष्य हासिल करे. अभिभावकों को अपने बच्चों को उसी क्षेत्र में अपना करियर बनाने देना चाहिए जिसमें वे बनाना चाहते है.’

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