21 जून, उत्तरी गोलार्द्ध (Northern Hemispher) के लोगों के लिए साल का सबसे बड़ा दिन. एक ऐसा दिन जिस दिन सूरज की किरणें सबसे ज्यादा समय तक पृथ्वी को रौशन करती हैं और ऐसी ही रोशनी में चमकी थी तीन टीमें. 21 जून की तारीख विश्व क्रिकेट का ऐसा दिन है जिन दिन एक नहीं तीन-तीन विश्व कप जीते गए. तीन अलग-अलग देशों ने पहली बार विश्व कप अपने नाम किया था. तीनों विश्व कप में एक खास समानता रही कि तीनों विश्व कप क्रिकेट का मक्का कहे जाने वाले होम औफ क्रिकेट यानी लौर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर खेला गया था.

1975, वेस्टइंडीज

क्रिकेट का पहला विश्व कप जिसमें कुल 8 टीमों ने हिस्सा लिया था. भारत के साथ छह टेस्ट प्लेइंग नेशन थी जबकि श्रीलंका और सिर्फ एक बार खेलने वाली पूर्वी अफ्रीका दो एसोसिएट कंट्री थी. भारत का सफर ग्रुप स्टेज में ही खत्म हो गया था.

ग्रुप बी की दो मजबूत टीम वेस्टइंडीज और ऑस्ट्रेलिया नौक आउट को पार करते हुए फाइनल में पहुंची थी. 60 ओवर के इस मुकाबले को सबसे लंबा वनडे मुकाबला भी कहा जाता है.

सुबह 10.30 बजे शुरू हुआ फाइनल शाम के 8.45 पर खत्म हुआ था. औस्ट्रेलिया को 17 रनों से हराकर क्लायव लौयड ने विश्व क्रिकेट में वेस्टइंडीज की बादशाहत साबित की. इस मैच में औस्ट्रेलिया के पांच खिलाड़ी रन आउट हुए थे.

2009, पाकिस्तान

लाहौर स्टेडियम में श्रीलंकाई खिलाड़ियों पर हुए हमले के तीन महीने बाद एक बार फिर पाकिस्तान और श्रीलंका की टीम आमने सामने थी. मौका था दूसरे टी 20 विश्व कप का. पाकिस्तान लगातार दूसरी बार टी 20 विश्व कप के फाइनल में पहुंची थी. मोहम्मद आमिर और अब्दुर रज्जाक ने श्रीलंकाई बल्लेबाजों को लौर्ड्स के मैदान पर खुल कर खेलने का मौका नहीं दिया और अंत में टीम 6 विकेट पर 138 रन ही बना सकी.

जवाब में पाकिस्तान ने बहुत आसानी से लक्ष्य को हासिल कर विश्व कप अपने नाम कर लिया. इस विश्व कप को या यूं कहें तो फाइनल को सिर्फ और सिर्फ शाहिद अफरीदी के लिए याद किया जाएगा. उन्होंनें एक विकेट लेने के बाद नाबाद अर्द्धशतकीय पारी खेल विश्व कप उठाया था.

2009, इंग्लैंड

पुरुष टी 20 विश्व कप के बाद बारी थी महिलाओं की. लौर्ड्स के मैदान पर ही महिला टी 20 विश्व कप का फाइनल खेला गया. ग्रुप ए की टौप की टीम न्यूजीलैंड और ग्रुप बी में टौप पर रहने वाली मेजबान इंग्लैंड की टीम फाइनल में पहुंची थी. लेकिन न्यूजीलैंड की महिला टीम टूर्नामेंट के करिश्मा फाइनल में नहीं दोहरा पाई और महज 85 रनों पर ढेर हो गई. इंग्लैंड ने बहुत ही आसानी के साथ 6 विकेट से मुकाबला जीतकर पहली बार खिताब अपने नाम किया था.

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