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नाकामी छिपाने को मंदिर मुद्दा

जीएसटी, कालेधन को रोकने में असफलता, नोटबंदी, रुपए की गिरती कीमत, बढ़ते दामों, किसानों की बढ़ती आत्महत्याओं, बढ़ती बेरोजगारी आदि से ध्यान भटकाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने मंदिरमसजिद मामला फिर से उछाल दिया है. 9 दिसंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में हजारों लोग जमा हुए, मानो यहीं देश की समस्याओं का हल हो जाएगा.

पर इस भीड़ में थे कौन? ज्यादातर खाली बैठेठाले लफंगे, निकम्मे जिन्हें साधुसंत कहा जाता है जो मंदिरों, अंधविश्वासों, झूठी कहानियों, मनगढ़ंत उपचारों, तावीजों, अंगूठियों, यज्ञों, हवनों, रातदिन की पूजाओं, आरतियों जैसे ढकोसलों के बलबूते पागल मेहनतकश लोगों को रातदिन लूटने में लगे रहते हैं. उन के साथ उन के अंधभक्त थे जिन्होंने तर्क को ताक पर रख रखा है.

मंदिर का मामला जिंदा रखा जा रहा है, क्योंकि इसी बहाने सारे देश में लगातार चंदा जमा हो रहा है. मुगलों के 700 सालों के राज का बदला लेने के नाम पर हिंदुओं को उकसाया जा रहा है. पर याद रखिए इन हिंदुओं में पहले सिर्फ ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य थे. अब इन में शूद्रों के संपन्न वर्ग, जिन के पास भूमिसुधारों के कारण जमीनें आ गई हैं, भी शामिल कर लिए गए हैं. कुछ दलित पंडे भी पैदा कर दिए गए हैं, जो सवर्णों की बराबरी पाने के लालच में ‘मंदिर वहीं बनाएंगे, आज ही बनाएंगे’ के नारे भी लगाने लगे हैं.

इस भीड़ में कोई हनुमान बना था, कोई शिव, कोई मंदिर का फोटो लिए घूम रहा था तो कोई कपड़े उतार तपस्वी होने का स्वांग रच रहा था. क्या इन के बलबूते हिंदुओं की इज्जत लौटेगी? क्या इन की बदौलत और मंदिर बना कर, हिंदू उस कलंक को धो पाएंगे जो उन के माथे पर लगा है कि उन्हें विदेशियों ने हर बार मुट्ठीभर लड़ाकों के बलबूते हराया है.

न महमूद गजनवी, न अब्दाली, न हुमायूं, न नादिरशाह, न बाबर, न मोहम्मद गौरी, न मोहम्मद तुगलक और न ही अंगरेज लाखों की फौज ले कर भारत आए थे. वे सब मुट्ठीभर थे. ज्यादातर आक्रमणकारियों ने यहीं के लोगों की सेना बनाई और फिर उन्हीं के जरिए यहां के राजाओं को हराया. यह बात मंदिर के बनाने पर नहीं भुलाई जा सकेगी. 1950-55 में सोमनाथ का मंदिर बनाने के बाद हिंदुस्तान कोई अमेरिका नहीं बन गया था. सोमनाथ के मंदिर बनवाने वाले सरदार वल्लभभाई पटेल की सब से ऊंची मूर्ति बनवा दिए जाने से विदेशियों की वहां कतारें नहीं लग गई हैं.

मंदिर का मुद्दा, दरअसल, मंदिर से होने वाली आमदनी का मुद्दा है. ये लोग मंदिर के नाम पर होने वाली आमदनी में रुचि रखते हैं, भारत के विकास में नहीं. ये देश के लोगों का 3 बित्ते का कपड़ा छीन कर उस का भगवा झंडा बनाना चाहते हैं. ये ठाटबाट बनाए रखना चाहते हैं. भक्तों को मरनेमारने का उपदेश देते हैं, कर्मठ बन कर देश को ऊंचाइयों पर ले जाने का नहीं.

मौसमी फूलों के पौधे : क्यों, कब, कैसे लगाएं

मौसमी फूलों के पौधों का जीवन अल्पकालिक होता है. अंकुरण से फूलने तक की उन की सभी क्रियाएं 3 माह से ले कर एक वर्ष के बीच पूरी हो जाती हैं. कुछ मौसमी पौधे बहुत बड़े होते हैं तो कुछ झाड़ीनुमा. लेकिन अधिकतर पौधे छोटे या बौने होते हैं. इन की रंगबिरंगी छटा मनभावन होती है. ये पौधे उद्यान को सुंदरता प्रदान करते हैं. इन को क्यारियों, गमलों, बरामदों, छतों, दीवारों, खिड़कियों आदि स्थानों पर आराम से उगा सकते हैं, क्योंकि इन की जड़ें कम गहरी होती हैं.

उद्यान

बगीचे में मौसमी पौधों का विशेष स्थान होना चाहिए. ध्यान रहे कि ये गुलाब वाटिका या दूसरे किसी ऐसे फूलों के समीप न हों जहां पर उन फूलों की छटा फीकी पड़ जाए. मौसमी पौधों की क्यारियां ज्यामितीय (स्क्वायर, ट्रैंगल, एल) आकार में बनाई जाती हैं. अनौपचारिक तरीके में क्यारियां घुमावदार होती हैं जिन में कोई कोण नहीं होता है.

मौसमी फूलों के पौधों को लगाने का सब से अच्छा तरीका है उन्हें किनारों पर बौर्डर के रूप में लगाया जाए.

ध्यान रहे कि बौर्डर पर किसी झाड़ी या वृक्ष की छाया न पड़ती हो. बड़े पौधे पीछे की तरफ, मध्यम बीच में व छोटे पौधे आगे की तरफ होने चाहिए.

गमलों में उगाएं

बढ़ते शहरीकरण व जनसंख्या वृद्धि के साथ घरों में क्यारियां बनाने की जगह नहीं होती है. लेकिन मौसमी

फूलों के पौधों, जैसे एंटीराइनम, कोचिया, कैलेंडुला, कैंडीटफ्ट, सिनरेरिया, बालसम आदि को गमलों में भी आसानी से उगा सकते हैं.

टोकरियों में लटकाना : इन पौधों को टोकरियों में लगा कर बरामदों, पोर्च आदि में लटकाते हैं. ये पौधे लताओं की तरह होते हैं, जैसे पिटूनिया, नास्टर्शियम, स्वीट एलाइसम, फ्लाक्स, पोर्चुलाका आदि.

स्तंभों पर उगाना : इन पौधों की लंबाई ज्यादा होती है जिन का दीवारों और स्तंभों पर चढ़ाने में प्रयोग करते हैं, जैसे स्वीट पी, मौर्निंग ग्लोरी, कैनरी क्रीपर आदि.

पत्तियों की सुंदरता : कोचिया, एमरेंथस, कैबेज (काले), नास्टर्शियम (चितकबरा) आदि पौधों की पत्तियां काफी सुंदर व आकर्षक होती हैं. सो, इन्हें घर में उगाने से घर की शोभा बढ़?ती है.

बाड़ के रूप में : अधिक लंबाई के कारण इन्हें बाड़ के रूप में उगाते हैं,

जैसे सूरजमुखी, हौलीहौक, लार्कस्पर, कौसमौस आदि.

पत्थरों के बीच लगाना : इन पौधों को चट्टानीय उद्यान में लगाया जाता है, जैसे जीनिया, कैंडीटफ्ट, कैलिफोर्निया पौमी, स्वीट विलियम, अजरेटम, पोर्चुलाका, गजानियां, गोडेशिया, एंटीराइनम, एक्कोलौजिया आदि.

मौसमी फूलों को मौसम के अनुसार बांट सकते हैं :

ग्रीष्मकालीन फूल : इन पौधों के बीजों की मध्य जनवरी से मध्य फरवरी तक पौधशाला में बुआई कर फरवरी अंत तक रोपाई करते हैं. इन पर फूल आने का समय अप्रैलजून होता है.

वर्षाकालीन फूल : इन पौधों के बीजों की मध्य अप्रैल से मध्य मई तक पौधशाला में बुआई कर मईजून के अंत में रोपाई करते हैं. इन में फूल वर्षाकाल (यानी जुलाई से सितंबर) तक आते हैं.

शीतकालीन फूल : इन पौधों के बीज को मध्य सितंबर से मध्य अक्तूबर तक पौधशाला में बुआई कर अक्तूबर अंत व नवंबर तक रोप देते हैं. इन के फूलने का समय जनवरी से मार्च तक है.

नर्सरी की तैयारी : नर्सरी तैयार करने के लिए मिट्टी को अच्छी तरह भुरभुरी बनाते हैं ताकि उस में वायु का संचार हो सके. पौधशाला में किसी कीड़े व बीमारी का असर न हो, इसलिए बुआई करने से पहले मिट्टी को 2 प्रतिशत फौर्मलीन से निर्जीवीकृत कर लेते हैं. इस के बाद अच्छी तरह तैयार की गई गोबर की खाद की 5 से 10 किलोग्राम मात्रा प्रतिवर्ग मीटर की दर से मिट्टी में मिलाएं

ताकि मिट्टी की उर्वराशक्ति बनी रहे. क्यारियां 2-3 मीटर लंबी, जमीन से 10-15 सैंटीमीटर ऊंची बनाएं ताकि उन से अतिरिक्त पानी निकल कर नालियों में इकट्ठा हो जाए.

बीजों की बुआई : बीजों को क्यारियों में या तो छिटक कर बोएं या फिर लाइनों में 5-6 सैंटीमीटर की दूरी पर आधा सैंटीमीटर गहराई में बोएं. बीज को बोने के बाद उसे बारीक गोबर की खाद व मिट्टी के मिश्रण से ढक देते हैं. फिर क्यारियों की सिंचाई करें. सींचते समय ध्यान रहे कि पानी बहुत हलका लगना चाहिए. इस के लिए हजारे द्वारा सिंचाई करना ज्यादा फायदेमंद रहता है. आमतौर पर पानी एक दिन में 2-3 बार छिड़काव विधि से दिया जाता है. बुआई के 2-3 दिनों बाद बीजों में जमाव शुरू हो जाता है.

भूमि की तैयारी : फूल उगाने के लिए ऐसी भूमि का चयन करें जिस में पर्याप्त मात्रा में जीवांश हो, सिंचाई और जलनिकास की समुचित सुविधा हो और मिट्टी का पीएच मान 6.5-7.5 के बीच हो. वैसे तो बलुई दोमट मिट्टी इस के लिए सब से अच्छी रहती है लेकिन कंपोस्ट खाद पर्याप्त मात्रा में मिला कर उस की गुणवत्ता को सुधारा जा सकता है. अम्लीय भूमि में चूना व खारी भूमि में जिप्सम डाल कर खेती योग्य बनाया जा सकता है.

खाद व उर्वरक : गोबर की खाद, फास्फोरस व पोटाश की पूरी मात्रा खेत तैयार करते समय मिट्टी में मिलाई जाती है. लेकिन नाइट्रोजन की आधी मात्रा खेती की तैयारी के समय व आधी मात्रा रोपाई के बाद खड़ी फसल में 2 बार टौप डै्रसिंग द्वारा देने पर पौधों का विकास अच्छा होता है. खाद की मात्रा भूमि की उर्वराशक्ति पर निर्भर करती है, जैसे गोबर की खाद 5 किलोग्राम/वर्गमीटर की दर से, यूरिया 25 ग्राम/वर्गमीटर, सुपर फास्फेट 100 ग्राम/वर्गमीटर तथा म्यूरेट औफ पोटाश 50 ग्राम/वर्गमीटर की दर से डालें.

पौधों की रोपाई : पौध 30-40 दिन बाद रोपाई के लिए तैयार हो जाती है. इस समय तक पौधों में 2 से 5 पत्तियां आ जाती हैं और वे 12 से 15 सैंटीमीटर बड़े हो जाते हैं. पौध लगाने से पहले नर्सरी में पानी लगाना बंद कर देना चाहिए ताकि पौधे सख्त हो जाएं. शाम को क्यारियों में रोपाई कर देनी चाहिए ताकि उन्हें रात को ठंडा वातावरण मिल सके और पौधे सूर्य की रोशनी से बच सकें. इस से पौधों के स्थायी होने में सहायता मिलती है. लंबे, मध्यम व बौने पौधे क्रमश: 30-40 सैंटीमीटर, 15-20 सैंटीमीटर व 10-12 सैंटीमीटर की दूरी पर रोपे जाते हैं.

देखभाल : पौधे लगाने के बाद क्यारियों में नियमित रूप से आवश्यकतानुसार सिंचाई व निराईगुड़ाई करनी चाहिए. जब तक पौधे बड़े न हो जाएं तब तक क्यारियों को घासफूस से मुक्त रखना चाहिए. चूंकि इन पौधों की जड़ें ज्यादा नीचे नहीं होतीं, इसलिए उथली गुड़ाई करनी चाहिए.

स्टेकिंग : कुछ मौसमी पौधों, जैसे स्वीटपी को सहारे की जरूरत पड़ती है. क्योंकि इन की अधिक ऊंचाई और इन के तने कमजोर होने के कारण ये खड़े नहीं रह पाते और जमीन पर पड़े हुए ही बढ़ते रहते हैं. इस से अच्छी गुणवत्ता के फूल व बीज प्राप्त नहीं हो पाते. इसलिए इन को सहारा देने के लिए बांस की खपच्चियों को इस्तेमाल में लाया जाता है.

पिंचिंग व डिसबडिंग : कुछ फसलों, जैसे गेंदा, कारनेशन आदि में पिंचिंग की आवश्यकता पड़ती है. इस से पौधों में शाखाओं की संख्या बढ़ जाती है और पौधा अधिक पैदावार देता है. डिसबडिंग उस दशा में की जाती है जब पौधों को पुष्प प्रदर्शनी के लिए तैयार किया जाता है. इस के लिए पौधे की शीर्ष कली को छोड़ कर बाकी पार्श्व कलियों को तोड़ दिया जाता है. कलियों को उस समय तोड़ना चाहिए जब कली का आकार मटर के दाने के बराबर हो जाए.

बीमारी व कीट नियंत्रण

पत्तियों पर काले धब्बे नामक बीमारी सैप्टोरिया कवक से फैलती है. पत्तियों में ग्रीसी भूरे रंग के धब्बे दिखाई देते हैं, जो बाद में काले पड़ जाते हैं. इस की रोकथाम के लिए 0.2 प्रतिशत जिनेव या डाइथेन एम-45 का छिड़काव करना चाहिए.

चूर्णित असिता रोग ओडियम कवक द्वारा फैलता है. सफेद पाउडर के रूप में यह पत्तियों और पौधों के तनों में फैलता है. इस की रोकथाम के लिए 0.5 प्रतिशत कैराथेन का छिड़काव करना आवश्यक है.

फूलों का गलन रोग बोट्राइटिस कवक द्वारा फैलता है. फूल पर भूरे रंग की पानी की बूंदों जैसे धब्बों के रूप में इस के लक्षण दिखाई देते हैं. ज्यादा प्रकोप होने पर पूरा फूल गल जाता है. इस की रोकथाम के लिए 0.2 प्रतिशत जिनेव या डाइथेन एम-45 का छिड़काव करना चाहिए.

चेंपा रोग काले व हरे कीट द्वारा कली, फूल व पत्तियों के रस को चूसने के चलते फैलता है. इन के प्रकोप से फूल और बीज की उपज कम हो जाती है. इन का प्रकोप रोकने के लिए रोगोर 30 ईसी या मेटासिस्टौक्स 25 ईसी की 1.5-2 मिलीलिटर प्रतिलिटर पानी में मिला कर छिड़काव करना उपयुक्त रहता है.

रैड हेयरी कैटरपिलर पत्तियों को खाने वाला कीड़ा है, जो पत्तियों को ऊपरी सिरे से खाता हुआ नीचे की तरफ चलता रहता है. इस प्रकार वह सारी पत्तियों को खा जाता है और पौधा बिना पत्तियों के हो जाता है. इन्हें रोकने के लिए थायोडौन या नुवान 2 मिलीलिटर प्रतिलिटर पानी में मिला कर छिड़काव करना चाहिए.

फूलों से प्यार करने वाले लोग ऊपर बताए नियम के मुताबिक फूलों को उगाएं तो वे न सिर्फ अपनी बगिया व घर को सुंदर व सुगंधित बना सकेंगे बल्कि पासपड़ोस को भी महकाएंगे. साथ ही, वातावरण में खुशबू फैलेगी. ऐसे में हर मन खुद ही प्रसन्न हो उठेगा.

घर पर ऐसे बनाएं ब्रेड से स्वीट डिश

सामग्री :

– ब्रेड की 6 स्लाइस

– डेढ़ कप चीनी

– आधा कप रबड़ी

– औरेंज कलर की कुछ बूंदें

– बारीक कटे हुए काजू

– बादाम व पिस्ता

– घी(आवश्यकतानुसार)

बनाने की विधि :

– ब्रेड के किनारों को काट कर उन्हें तिकोने आकार में काट लें.

– एक फ्राइंग पैन में घी गर्म कर उसमें ब्रेड के टुकड़ों को तल लें.

– अब इनके ऊपर रबड़ी की एक मोटी परत लगाएं.

– पैन में एक कप पानी डालें.

– उसमें चीनी और रंग डालकर पकाएं.

– जब चीनी का शीरा ठीक से पक जाए तो उसे आंच से उतार लें.

– ध्यान रखें कि वह ज़्यादा गाढ़ा न हो जाए.

– अब ब्रेड पीसेज़ को एक प्लेट में रख कर उन पर शीरा डालें.

– शीरा इतना डालें कि उसमें ब्रेड के टुकड़े अच्छी तरह से डूब जाएं.

– थोड़ी देर बाद ब्रेड शीरे को सोख लेगी.

– अब इनके ऊपर रबड़ी की एक लेयर लगाएं.

–  फिर बारीक कटे ड्राई फ्रूट्स डालकर सर्व करें.

छोड़नी है स्मोकिंग तो अजमाएं ये नया तरीका

स्मोकिंग स्वास्थ के लिए कितना खतरनाक है इस बारे में कई शोध हुए हैं. इसका स्वास्थ पर कितना बुरा असर होता है इसके बारे में लोगों को पूरी जानकारी है. जानकारी के बाद भी लोग इस लत से दूर नहीं हो पाते. ये बुरी आदत छूट सके, इसके लिए लोग तरह तरह के उपायों की ओर रुख करते हैं. कई बार उन्हें सफलता मिलती है, तो कई बार नहीं. कुल मिला कर धूम्रपान करने वाले व्यक्ति की नीयत पर निर्भर करता है कि वो इस जानलेवा आदत से दूर होता है या नहीं.

हाल ही में हुई एक शोध के मुताबिक जो लोग स्मोकिंग छोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, अगर वो खुद निकोटीन इनटेक पर नजर रखने को कहा जाए वो अपनी इस आदत को छोड़ने में कामयाब हो सकते हैं. इस स्टडी को क्वीन्स मैरी यूनिवर्सिटी औफ लंदन के शोधकर्ताओं ने एक जर्नल में प्रकाशित किया. इसमें कहा गया है कि निकोटीन की डोज तय करने का फैसला स्मोकर्स पर ही छोड़ देना चाहिए. इससे उनकी स्मोकिंग की आदत के छूटने की संभावना बढ़ जाती है.

इस शोध से ये बात सामने आई कि लोग निकोटीन इनटेक का फैसला खुद करते हैं. जबकि जब वे छोड़ना चाहते हैं तो उन्हें डाक्टर के निर्देश के अनुसार डोज तय कर दिया जाता है. कुछ लोगों के लिए ये पैमाना कम होता है, तो किसी के लिए ज्यादा. ऐसे में इस बात की संभावना ज्यादा होती है कि वो फिर से स्मोकिंग की आदत पकड़ लेंगे.

जानकारों का मानना है कि मेडिसिनल निकोटीन प्रोडक्ट की कम मात्रा की वजह से ट्रीटमेंट में बहुत कम सफलता मिलती है. अब इसमें सुधार की जरूरत है. स्मोकिंग छोड़ने की कोशिश कर रहे लोगों को यह छूट देनी चाहिए कि वे कितनी निकोटीन डोज ले सकते हैं. लोग अपनी जरूरत के हिसाब से धीरे-धीरे निकोटीन की डोज कम कर सकते हैं.

प्रेग्नेंसी के स्ट्रेच मार्क्स हटाना चाहती हैं तो ये खबर आपके लिए है

प्रेग्नेंसी के दौरान वजन बढ़ना आम है. इससे आपके पेट की त्वचा में खिंचावट आती है. ज्यादातर महिलाओं के शरीर पर स्ट्रेच मार्क्स भी आ जाते हैं. ये निशान पेट के निचले हिस्से, कमर, बाजू, पैर आदि पर पड़ जाते है. अगर समय रहते इन मार्क्स पर ध्यान ना दिया जाए तो इनको हटाना बहुत मुश्किल होता है.

इस खबर में हम आपको कुछ ऐसे उपाय बताने वाले हैं जिससे इन मार्क्स से आप आसानी से छुटकारा पा सकती हैं.

  • प्रोटीन की मदद से भी आप स्ट्रेच के निशान को दूर कर सकती हैं. अंडे में प्रोटीन की मात्रा प्रचूर होती है. स्ट्रेच मार्क्स पर रोजाना 20 मिनट तक अंडे की सफेदी लगाएं. फिर आप उसे धो लें. इसके बाद आप उसपर जैतून के तेल से मालिश करें. कुछ समय में आपको इस निशान से छुटकारा मिल जाएगा.
  • इस निशान को हटाने में आलू काफी लाभकारी होता है. इसका रस या पेस्ट रोज निशान पर लगाएं. सूखने के बाद हिस्से को धों लें. थोड़े दिनों में आपको अंतर दिखेगा.
  • स्ट्रेच मार्क्स से छुटकारा पाने के लिए शरीर को ज्यादा पानी की जरूरत होती है. अगर आप जल्दी इन परेशानियों से निजात पाना चाहती हैं तो खूब पानी पिएं.
  • स्ट्रेच के निशान को हटाने में एलोवेरा जेल काफी लाभकारी होता है. इसमें विटामिन ई का तेल मिलाकर स्ट्रेच मार्क्स पर लगाएं. आपको काफी फायदा मिलेगा.
  • इन समस्याओं में विटामिन ई काफी अच्छा होता है. विटामिन ई में एंटीऔक्सिडेंट तत्व होता है. रोजाना 15 से 20 मिनट तक अपने स्ट्रेच मार्क्स पर विटामिन ई के तेल से मालिश करने से स्ट्रेच मार्क्स कम होते हैं. नींबू के रस के साथ खीरे का रस मिलाकर भी स्ट्रेच मार्क्स पर लगा सकती हैं. नियमित रूप से इसके इस्तेमाल से धीरे-धीरे मार्क्स दूर हो जाएंगे.

ईकौमर्स कंपनियों को मंजूर नहीं सरकार की डेडलाइन

पिछले वर्ष 26 दिसंबर को ईकौमर्स में एफडीआई से जुड़ी सरकार की घोषणा से अमेरिकी ईकौमर्स कंपनी अमेजन और अमेरिका की वौलमार्ट के स्वामित्व वाली फ्लिपकार्ट ज्यादा ही टेंशन में हैं. हालांकि, इन के आलावा दूसरी सभी ईकौमर्स कंपनिया भी टेंशन में हैं.

दरअसल, इस वर्ष के चौथे महीने यानी अप्रैल में देश की सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी को आम चुनाव का सामना करना है. ऐसे में उसे वोटबैंक की चिंता सताने लगी है, क्योंकि वह अपने कार्यकाल में जनहित के कार्यों को लागू नहीं कर पाई है. उलटे, उस के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी नेशनल डेमोक्रेटिक अलायन्स (एनडीए) सरकार ने जो कदम उठाए, वे जनहित नहीं बल्कि जनअहित के रहे. नतीजतन, देश के मतदाता एनडीए व उस की सरकार से नाराज हैं. इस की एक बानगी हालिया हुए 5 राज्यों की विधानसभाओं के चुनावों में देखने को मिली, जब भाजपा कहीं भी सरकार न बना सकी. उसे हर जगह हार का स्वाद चखना पड़ा.

वर्ष 2014  में खुदरा कारोबारियों को ईकौमर्स मैदान में खेल कर रहीं देशी विदेशी कंपनियों से नजात दिलाने का वादा कर नरेंद्र मोदी सत्ता पर काबिज हुए, लेकिन सत्ता के नशे में वे इस सेक्टर की अनदेखी करते रहे. अब जब चुनाव सर पर हैं तो उन्हें इन की चिंता हुई. सो, इन्हें खुश करने के लिए ईकौमर्स कंपनियों पर नकेल लगाने का फैसला किया और एफडीआई के नियम बदल डाले.

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी फौरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (एफडीआई) प्राप्त करने वाली कंपनियों अमेजन और फ्लिपकार्ट ज्यादा ही टेंशन में आ गई हैं. हालांकि, सरकार के कदम से दूसरी कंपनियां भी टेंशन में हैं. सरकार के घोषित नए नियमों में 2 क्लौज ऐसे हैं, जिन के कारण अमेजन और फ्लिपकार्ट को अपने काम करने के तरीकों में बड़े बदलाव करने होंगे. पहला यह है कि किसी भी वेंडर में मार्केटप्लेस या उस की ग्रुप कंपनियों का इक्विटी स्टेक नहीं हो सकता है. दूसरा यह है कि वेंडर अपनी 25 फीसदी से ज्यादा खरीदारी मार्केटप्लेस की होलसेल यूनिट सहित किसी इकाई से करे तो यह माना जाएगा कि वेंडर की इनवेंटरी पर उन की मार्केटप्लेस का कंट्रोल है.

एफडीआई के नए नियमों के अनुसार, मार्केटप्लेस एंटिटी या उस की ग्रुप कंपनियां इन्वेंटरी पर नियंत्रण नहीं रख सकती हैं. अमेजन और फ्लिपकार्ट प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इंवेंटरी पर कंट्रोल रखती हैं. वे अपनी होलसेल इकाईयों यानी अमेजन होलसेल और फ्लिपकार्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के जरिए सस्ती दरों पर मैन्युफैक्चरर्स से थोक खरीदारी करती हैं और यह माल प्रेफर्ड सेलर्स के जरिए अपने मार्केटप्लेस पर बेचती हैं. इन सेलर्स में वे कंपनियां भी होती हैं जिन में हो सकता है कि ईकौमर्स कंपनी या उस की ग्रुप एंटिटी का स्टेक हो.

सरकार के कदम से चिंता में आईं अमेजन, फ्लिपकार्ट और दूसरे औनलाइन मार्केटप्लेस अब सरकार से यह गुहार लगाने की सोच रहे हैं कि ईकौमर्स के लिए एफडीआई नियमों में हालिया बदलाव पहली फरवरी से न लागू किए जाएं. कंपनियों की ऐसी प्लानिंग के बारे में एक ईकौमर्स कंपनी से जुड़े एग्जीक्यूटिव का कहना है कि इतने कम समय में बिजनेस मौडल को बदलना आसान नहीं है, लिहाजा डेडलाइन खिसकाई जाए.

दरअसल, कंपनियों को सरकार के बदले नियमों का विस्तार से अध्यन करना है. नियमों के मुताबिक़, कंपनियों के अपने बिजनेस तरीके में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं, जिस के लिए सिर्फ एक महीने का समय काफी कम है.

इस बीच, फ्लिपकार्ट ने कहा है कि वह भारतीय बाजार के लिए प्रतिबद्ध है कि मार्केट आधारित फ्रेमवर्क बनाना महत्त्वपूर्ण है. उस ने उम्मीद यह भी जाहिर की कि वह निष्पक्ष और ग्रोथ बढ़ाने वाली ऐसी नीतियों को बढ़ावा देने के लिए सरकार के साथ मिल कर काम करने को तैयार है जिन से यह नया सेक्टर यानी ईकौमर्स विकास करता रहे.

इन 7 टिप्स के जरिए बढ़ाएं अपना प्यार

जी हां जब मौसम सुहाना हो तो ऐसे में आपको अपने पार्टनर के साथ समय बीताने का मन तो करता ही होगा. आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अपने पार्टनर को उतना समय नहीं दे पाते क्योंकि हर किसी को पैसे कमाने हैं और ये तो आप बेहतर समझ सकते हैं कि बिना पैसे के जिंदगी में कुछ भी नहीं हो सकता.

ये जीवन की सच्चाई है लेकिन इसके कारण हम भूल जाते हैं कि हमारी लाइफ में कोई और भी है जो बहुत खास है और हम उसको समय देना भूल जाते है. चाहे वो आपकी लाइफ फार्टनर हो या आपकी गर्लफ्रेंड आ ब्वायफ्रेंड. इनकी जिंदगी में बहुत ही खास जगह होती है इसलिए इन्हें समय देना चाहिए. क्योंकि बहुत मुश्किल से आपको कोई मिलता है जो आपको खुद से ज्यादा प्यार देता है खुद से पहले आपके बारे में सोचता है. इसलिए उनके लिए वक्त निकालिए. तो आइए बताते हैं पार्टनर के साथ खूबसूरत पल कैसे बिताएं.

ये भी पढ़ें- 5 टिप्स: रिश्तों में ऐसे कम करें तनाव

1.इस वक्त बारिश का मौसम है आप चाहे तो अपने पार्टनर के साथ कहीं घूमने जा सकती हैं. उसके साथ वक्त बिता सकती है. साथ में भुट्टे खाइए बारिश के मौसम का लुत्फ उठाइए.

2.यदि आप घर पर हैं तो वाइफ से कहिए कि वो पकौड़े बनाए और आप चाय बनाइए और अपनी वाइफ के साथ बैठकर पकौड़े और चाय के साथ मौसम का लुत्फ उठाए.

3.अपनी गर्लफ्रेंड या पत्नी के साथ मूवी देखने जा सकते हैं कोई भी अच्छी सी रोमांटिक मूवी… ये आपके बीच नजदीकियों को बढ़ाएगी और साथ में समय बिताने का भी अच्छा मौका मिलता है.

4. पत्नी को लेकर लौन्ग ड्राइव पर जा सकते हैं. एक अच्छा सा सौन्ग बजा दिजिए…ये एक बहुत अच्छा तरीका है साथ में समय बिताने का.

5. ऐसा नहीं है कि ये सारे काम की पहल एक पति ही करे पत्नी भी कर सकती है अगर आपका पति इतना रोमांटिक नहीं है तो ये सब कुछ आप भी कर सकती हैं इससे आपके पति को भी अच्छा लगेगा. वो भी अपनी औफिस की थकान को भूल कर आपके साथ एक अच्छा समय गुजारेंगे, उन्हें भी थोड़ी सी बोरियत से राहत मिलेगी..और वो आपके और करीब आएंगे.

6. अच्छे मौसम में कहीं दूर कुछ दिन की छुट्टियां लेकर आप जा सकते हैं .  वहां पर आपको प्राइवेसी भी मिलेगी और साथ में अच्छा वक्त भी बिता पाएंगे.

7. अगर आप चाहें तो वाइफ के साथ घर में ही मूवी देखकर  अच्छा वक्त बिता सकते हैं.

इन सारे तरीकों से आप अपने रिश्ते को मजबूत बना सकते हैं और साथ ही अपने बीच की दूरियों को कम कर सकते हैं. तो पकोड़े खाइए और बारिश और सुहावने मौसम का लुत्फ उठाते हुए प्यार को बढ़ाइए.

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आप भी जानिए रिबौंडिंग और स्मूदनिंग का तरीका

अपने लुक को बदलने में बाल महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. ये सौंदर्य तो बढ़ाते ही हैं, साथ ही व्यक्तित्व को भी आकर्षक बनाते हैं. दिल्ली प्रैस भवन में आयोजित फैब मीटिंग के दौरान मैट्रिक्स की तकनीकी विभाग की इंद्रजीत ने बालों को कैसे सुरक्षित रखें और उन की सुंदरता कैसे बढ़ाई जाए, इस बाबत तो जानकारी दी ही, साथ ही रिबौंडिंग और स्मूदनिंग के तरीकों से भी अवगत कराया.

रिबौंडिंग

सब से पहले बालों की क्वालिटी के बारे में जानकारी होनी चाहिए यानी बाल मोटे, पतले, मीडियम, रफ या फिर डैमेज हैं, क्योंकि जो स्ट्रेट थेरैपी क्रीम इस्तेमाल की जाती है वह बालों की क्वालिटी पर निर्भर करती है. यह जान लेने के बाद बालों में अच्छी तरह शैंपू करें और फिर ड्रायर से सुखा लें. जब बाल सूख जाएं तो आयरनिंग करें. इस के बाद स्ट्रेट थेरैपी क्रीम सैक्शन बाई सैक्शन ऊपरी बालों की लटों से ले कर नीचे की लटों तक लगाएं. 15 से 20 मिनट बाद एक बाल को खींच कर देखें. यदि बाल स्प्रिंग की तरह घूम रहा हो तो समझ लें कि सल्फर बन्स टूट गए और अगर ऐसा नहीं हुआ तो 5-10 मिनट रुकें. इस के बाद बालों को अच्छी तरह धो लें और मीडियम हीट पर ड्रायर कर लेयर बाई लेयर आयरनिंग करें. इस के तुरंत बाद न्यूट्रलाइजर सैक्शन बाई सैक्शन उसी प्रकार करें जिस प्रकार स्ट्रेट थेरैपीक्रीम अप्लाई की गई थी. इस दौरान बिलकुल भी न हिलें. 15-20 मिनट बाद बालों को अच्छी तरह धो लें. ठंडा ड्रायर करें. बाल सूख जाएं तो सीरम लगाएं और फिर मास्क.

स्मूदनिंग

पहले बालों को अच्छी तरह शैंपू से धो कर क्रीम अप्लाई करें. जब क्रीम सूख जाए तो बालों को धोए बिना ड्रायर करें. इस के बाद प्रैसिंग करें. इस के 3 दिन बाद अपनी हेयरड्रैसर की सलाह से सिर धो कर ड्रायर करें. अंत में सीरम लगा लें.

ध्यान रहे कि ऐक्चुअल स्मूदनिंग में आयरनिंग नहीं होती है. केवल बालों का टैक्सचर इंपू्रव होता है वैव 50-60% बना रहता है. कुछ लड़कियां स्मूदनिंग करवाती हैं. वे चाहती हैं कि बाल सीधे रहें, तो इस के लिए एक बार आयरनिंग करनी पड़ती है.

सावधानियां

रिबौंडिंग या स्मूदनिंग में इन बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है:

– स्कूटी न चलाएं.

– बाइक के पीछे न बैठें.

– बालों को दबाएं या मोड़ें नहीं.

– जूड़ा न बनाएं.

– रबड़बैंड न लगाएं.

– मसाज न करें.

– बालों को टाइट न बांधें.

– बालों को धोने के बाद रगड़ें नहीं.

– कलर न करवाएं. अगर करवाना ही हो तो कम से कम 20 दिन बाद करवाएं.

प्राकृतिक तरीके से कैसे करें देखभाल

– खानेपीने का ध्यान रखें.

– प्रोटीनयुक्त चीजों का सेवन करें.

– पानी अधिक पीएं.

– हरी सब्जियां और मौसमी फल ज्यादा से ज्यादा खाएं.

– बालों में हफ्ते में 3 बार तेल लगाएं.

– बालों को धोने के बाद रगड़ें या झाड़ें नहीं.

– टैंशन से बचें.

– स्टीम करें (गरम पानी में तौलिया भिगो कर सिर में लपेट लें).

– बालों को हमेशा साफ रखें.

बिना बंधन वाले लिव इन रिश्ते का भयावह सच

भारतीय संस्कृति में विवाह को एक संस्कार यानी जीवन जीने का तरीका माना गया है. लेकिन बदलते समय के साथ जीवन जीने का यह तरीका बदल रहा है और वे लोग जो बिना किसी रिश्ते में बंधे जिंदगी जीने का मजा लेना चाहते हैं वे विवाह का विकल्प लिव इन रिलेशनशिप में तलाश रहे हैं.

लिव इन रिलेशनशिप की वकालत करने वाले कहते है कि इसमें जिम्मेदारियों के अभाव में लाइफ टेंशन फ्री होती है, लिव इन पार्टनर अपना-अपना खर्च खुद उठाते है, कमरे के बेड से लेकर खाने-पीने की चीजों तक में दोनों फिफ्टी-फिफ्टी के भागीदार होते हैं. ज़िन्दगी भर किसी एक के साथ बंधे रहने की मजबूरी नहीं होती.

जब आपको लगे कि आप एक दुसरे के साथ खुश नहीं है आप एक दुसरे को टाटा बाय-बाय कह सकते हैं यानी आप बिना किसी झंझट के पार्टनर बदल सकते हैं. इस रिश्ते में कोई बंदिशें नहीं होती है. आप जब मर्ज़ी घर आइये, जिसके साथ मर्ज़ी घूमिये कोई रोकटोक नहीं, कोई पूछने वाला नहीं.

लिव इन उन लोगों को खासा आकर्षित करता है जो वैवाहिक जीवन तो पसंद करते हैं लेकिन उससे जुड़ी जिम्मेदारियों से मुक्त रहना चाहते हैं. जिम्मेदारियों के बिना ‘शेयरिंग और केयरिंग’ के रिश्ते का यह नया कॉन्सेप्ट युवाओं को बेहद रास आ रहा है. काम या पढ़ाई के लिए घर से दूर रह रहे युवाओं के बीच लिव इन रिलेशन खासा लोकप्रिय हो रहा है क्योंकि घर से दूर अनजाने शहर में यह रिश्ता युवाओं को भावनात्मक सपोर्ट देता है.

बढ़ती मंहगाई की चलते ऐसे जोड़ों को बड़े शहरों में लिव इन में रहने के कई फायदे होते हैं. खर्चे शेयर होने के साथ एक दुसरे का साथ भी मिल जाता है. अब तो सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर अपनी मोहर लगा दी है. सुप्रीम कोर्ट ने लिव इन रिश्ते को पाप या अपराध मानने की बजाय पुरुषों के साथ रह रही महिलाओं और उनके बच्चों को कानूनी संरक्षण देने का रास्ता निकाले जाने की पहल भी की है.

यह तो हुआ इस रिश्ते का खुशनुमा पहलू लेकिन बिना बंधन के इस रिश्ते का एक दर्दनाक पहलू भी है जिससे अधिकांश युवा अनजान हैं जो पत्रकार पूजा तिवारी और प्रत्यूषा के मौत के मामले में साफतौर पर सामने आया है.

जहाँ प्यार, सेक्स,  शक और धोखे ने किसी को जान देने पर मजबूर कर दिया. माना कि इस रिश्ते में कोई दायित्व नहीं होता. आप बिना किसी बंधन के एक दुसरे के साथ रहते हैं लेकिन जब दो लोग एक दुसरे के साथ रहने लगते है तो वे एक दुसरे के साथ भावनात्मक रूप से भी जुड़ते है और इस जुड़ाव में वे एक दुसरे से अपेक्षाएं भी रखने लगते है लेकिन जब दोनों पार्टनर्स में से कोई भी एक सामने वाली की फीलिंग्स की अनदेखी करता है तो भावनात्मक रूप से कमजोर साथी इसे धोखा समझता है और कुछ न कर पाने की स्थिति में तनाव और डिप्रेशन का शिकार हो जाता है और बिना बंधन का यह रिश्ता  दर्दनाक बन जाता है.

इस रिश्ते का सबसे नकारात्मक पहलू यह होता है कि लिव इन में रहने वाले इन जोड़ों का अपने परिवार या दोस्तों से कोई कनेक्शन नहीं होता जिसके चलते उनके बीच अनबन या लड़ाई होने पर सुलह समझौता कराने वाला कोई अपना नहीं होता.

जैसा कि प्रत्युषा के मामले में भी सामने आया. हाल में ही हुआ पत्रकार पूजा तिवारी आत्महत्या प्रकरण भी इसी बिना बंधन के रिश्ते का एक भयावह परिणाम है. हाल के दिनों में लिव इन के साथ यौन शोषण, धोखाधड़ी और घरेलू हिंसा के मामलों में काफी इजाफा हुआ है ऐसे में आज़ादी की चाह रखने वाले युवाओं को लिव इन रिश्ता थोड़े समय के लिए भले ही मौज मस्ती और खुलेपन का एहसास देता हो लेकिन पूजा हो या प्रत्यूषा,  इनकी डेथ मिस्ट्री से जुड़ा लिव-इन का सच खतरनाक संकेत दे रहा है जिस से युवाओं को सबक लेने की ज़रुरत है.

सैक्सी लुक चाहिए तो आप भी अपनाइये ये खास टिप्स

अगर आप यह सोचती हैं कि सब आप की तारीफ करें, पलटपलट कर आप को देखें, सीटी बजाएं और बोलें ‘वाउ’ क्या पटाखा है, क्या खूबसूरती है, तो आप को अपना लुक चेंज करना होगा और इसे सैक्सुअली अट्रैक्टिव बनाना होगा. जी हां, आप के सैक्सी लुक से अट्रैक्ट हो सब आप को न केवल मुड़मुड़ कर देखेंगे, बल्कि देख कर दिल थाम लेंगे. आप जहां भी जाएंगी आप की पर्सनैलिटी को देख कर सब यही कह उठेंगे कि क्या लुक है, क्या चाल है, क्या ब्यूटी है. तो अपने लुक को बिंदास बनाइए और बन जाइए औफिस की जान, महफिल की शान.

कैसे पाएं सैक्सी लुक

ड्रैस सैंस हो मौडर्न

डै्रस सैंस मौडर्न होने का मतलब छोटे कपड़ों से नहीं बल्कि स्मार्ट कपड़ों से है, जो आप की पर्सनैलिटी में चारचांद लगा दें. कहा भी जाता है कि कपड़ों से कौन्फिडैंस बढ़ता है, तो फिर देर किस बात की, जब भी शौपिंग पर जाएं तब ऐसे कपड़े खरीदें जो आप के कौंप्लैक्शन और फिगर पर सूट करें.

आजकल जहां फ्रौक स्टाइल व म्यूलेट ड्रैसेज, जैगिंग के साथ शौर्ट कुरती कैरी करने का फैशन है वहीं प्लाजो विद कुरती, जींस पर शौर्ट कुरती डिमांड में हैं. ये न सिर्फ कंफर्टेबल होती हैं बल्कि आप को कूल लुक भी देती हैं.

ऐक्सैसरीज बढ़ाएं रौनक

घर में भले ही आप सिंपल रहें लेकिन जब भी बाहर जाएं हर बार खुद के लुक में थोड़ा चेंज कर लें. जैसे अगर आप ने सिंपल सूट पहना है और सोच रही हैं कि इस में मैं सैक्सी और ग्लैमरस नहीं लग सकती तो ऐसा नहीं है, बस, इस के लिए आप को देना होगा ऐक्सैसरीज का टच. जैसे कानों में हैंगिंग ईयररिंग्स, हाथ में घड़ी या फिर ब्रैसलेट. इसी तरह जींसटौप के साथ फंकी ऐक्सैसरीज काफी सूट करेंगी. लेकिन ध्यान रहे ऐक्सैसरीज का सलैक्शन ड्रैस के हिसाब से हो वरना आप की सारी मेहनत पर पानी फिर जाएगा.

बालों में हो बला का आकर्षण

सैक्सी आप सिर्फ फिगर से ही नहीं बल्कि हेयरस्टाइल में बदलाव ला कर भी लग सकती हैं. अभी तक आप चाहे कालेज जाएं या फिर किसी पार्टीफंक्शन में, हमेशा सीधेसपाट या फिर घुंघराले बालों में ही जाती हैं तो इसे बदलें. आप बालों में बन, कर्ल्स, पफ, नौट्स व रिंग्स दे कर अपनी सुंदरता निखार सकती हैं और फ्रैंड्स को वाउ कहने पर मजबूर कर सकती हैं.

ऊंची हील से बढ़ाएं कौन्फिडैंस

प्रैजेंटेबल और ग्लैमरस दिखने में हील्स का बहुत महत्त्वपूर्ण स्थान होता है, क्योंकि इस से हाइट तो लंबी लगती ही है, साथ ही चाल भी आत्मविश्वास से भरी दिखाई देती है. अब यह आप पर निर्भर करता है कि आप किस तरह की हील पहन कर जाना पसंद करेंगी, क्योंकि हील्स में भी कई वैरायटी हैं जैसे, किटन हील्स, ऐंकल स्ट्रैप हील्स, कोन हील्स, हाईहील सैंडिल्स, ऐंकल बूट्स, फ्रैंच हील्स, पंपस, प्लेटफौर्म हील्स आदि. ये कंफर्टेबल के साथसाथ फैशन में भी जबरदस्त तड़का लगाती हैं.

बौडी पार्ट्स की नीटनैस भी जरूरी

स्लीवलैस कुरती व कैपरी पहनने से सैक्सी लुक तभी आएगा जब हाथपैर नीट दिखेंगे वरना कपड़ों से ज्यादा लोगों का ध्यान आप के हाथपैरों पर उगे बालों पर ही जाएगा. आप को भी अच्छा नहीं लगेगा कि आप बस या मैट्रो में हाथ ऊपर करें और आप की अंडरआर्म्स को देख लोग कमैंट्स मारें. भद्दे कमैंट्स सुन कर आप का मूड औफ तो होगा ही साथ ही आप का आत्मविश्वास भी घटेगा. इसलिए बौडी पार्ट्स की वैक्सिंग के साथसाथ आइब्रो, अपरलिप्स भी रैगुलर करवाती रहें. इस से आप खुद को परफैक्ट लुक दे पाएंगी.

चाल भी हो सैक्सी

अटै्रक्टिव फिगर और सौंदर्य ही अपनेआप में काफी नहीं है बल्कि आप का पोश्चर भी सैक्सुअली अट्रैक्शन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है खासकर आप की चाल. रैंप पर मौडल को चलते हुए देख कौन नहीं दिल थाम लेता, उसी तरह का आकर्षण और अट्रैक्शन आप भी अपनी चाल में पैदा करें ताकि देखने वाला कह उठे, ‘तेरी चाल भी सैक्सी…’

फेशियल ऐक्सप्रैशंस हों लाजवाब

कपड़े तो पहन लिए मौडर्न लेकिन जब मुंह खोला तो सारी सुंदरता पर पानी फेर दिया. इसलिए कपड़ों के साथसाथ अपने फेशियल ऐक्सप्रैशंस पर भी ध्यान दें. जब भी किसी से बात करें तो धीमी आवाज में करें. साथ ही अपना हाई कौन्फिडैंस दिखाने के लिए उस की आंखों में आंखें डाल कर बात करें इस से आप की पर्सनैलिटी दूसरों पर गजब का प्रभाव छोड़ेगी.

आर्टिफिशियल ब्यूटी से उभारें फिगर

कुछ युवतियों की ब्रैस्ट या तो बहुत बड़ी होती हैं या फिर छोटी, जिस से उन्हें काफी शेम फील होती है, क्योंकि इस से फिगर सैक्सी लुक नहीं दे पाती, जबकि इसे महिला का ऐसा आकर्षण माना जाता है जिसे देख पहली नजर में ही युवक उस का कायल हो जाता है. अगर आप छोटी ब्रैस्ट से परेशान हैं तो ट्राई कीजिए पैडेड और ऐसी ब्रा जो ब्रैस्ट  को उभारे और अगर बड़ी बैस्ट है तो नौर्मल ब्रा पहनें. तभी तो आप कहलाएंगी हुस्न की मलिका. आप फेस वाइज तो काफी क्यूट दिखती हैं, लेकिन आप का हिप एरिया बिलकुल सपाट है जिस के कारण कोई भी युवक आप की तरफ अट्रैक्ट नहीं होता.   यदि यह बात आप को मन ही मन दुखी कर रही है तो आप अपने सपाट हिस्से को उभार सकती हैं पैडेड पैंटीज, शेपवियर अंडरवियर्स से. भले ही ये आर्टिफिशियल हैं लेकिन सैक्सी लुक तो देते ही हैं. इस तरह आप खुद को सैक्सी लुक दे पाएंगी.

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