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बनाएं अपनी बौडी को खूबसूरत

अक्सर हम खूबसूरत दिखने के लिए अपने चेहरे को चमकाने में ही ज्यादा ध्यान देते हैं. लेकिन परफेक्‍ट सुंदरता पाने के लिये चेहरे के साथ ही आपको अपने शरीर के एक एक अंग पर ध्‍यान देने की जरुरत है. अगर आप भी खूबसूरत बौडी पाना चाहती हैं तो नीचे दिये गए इन टिप्‍स को जरुर आजमांए और लोगो से तारीफें बटोरे-

पैर

अगर आप स्‍कर्ट, कैप्री या शौर्ट्स पहनती हैं तो पैरों की सफाई करना बहुत जरुरी है. क्‍योंकि काले घुटने आपकी खूबसूरती पर दाग लगा सकते हैं. अगर आपके घुटने काले हैं तो उस पर वाइटनिंग क्रीम लगाएं. साथ ही प्‍यूमिक स्‍टोन की मदद से अपनी ऐड़ियों को भी साफ करें और उस पर क्रीम लगाएं.

पेट

इस पार्ट को हमेशा साफ और नम रखें. एक गीली रूई की सहायता से आप अपनी नाभि को साफ कर सकती हैं. साथ ही एक माइल्‍ड क्रीम लेकर अपने पेट पर लगाएं जिससे उस पार्ट की नमी बनी रहे.

हाथ

आपको देखने वालों में से ज्‍यादातर लोंगो का ध्‍यान आपके हाथों पर ही जाता है. इसलिये आपको अपने हाथों को हमेशा साफ और मौइस्‍चराइज रखना होगा. काली हो चुकी कुहनियों पर भी वाइटनिंग क्रीम लगाएं.

गर्दन

गर्दन के ऊपर की त्‍वचा चेहरे की त्‍वचा के ही भांती कोमल और नाजुक होती है. इसके लिये आपको वही क्रीम लगानी चाहिये जो आप अपने चेहरे पर प्रतिदिन लगाती हैं. हफ्ते में एक बार इस जगह को मुलायम स्क्रबर से स्‍क्रब कीजिये और मौइस्‍चराइजर लगाइये. ऐसा कुछ दिन करने से आपकी गर्दन बिल्‍कुल आपके चेहरे से मेल खाने लगेगी.

पीठ

हफ्ते में एक या दो बार पीठ पर तेल की मालिश करवाएं. इससे त्‍वचा में नमी बनी रहेगी और वह दमकने लगेगी. इसके अलावा नहाने के बाद भी अपनी पीठ पर माइस्‍चराइजर लगाना कभी ना भूलें.

इन बीमारियों को न करें नजरअंदाज

हम अकसर छोटीछोटी बीमारियों को नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि कई बार देखने में  छोटी ये बीमारियां जानलेवा हो जाती हैं. अस्वस्थ व असुरक्षित खानपान तथा नियमित व्यायाम न कर पाने की वजह से हमारी दिनचर्या गड़बड़ा जाती है, जिस की वजह से बीमारियां हमें अपनी गिरफ्त में ले लेती हैं. बढ़ते प्रदूषण और दूषित हवा के कारण हमारी रोगप्रतिरोधक क्षमता भी दिनोदिन कमजोर हो रही है और हमें कोई न कोई बीमारी अपनी गिरफ्त में ले लेती है.

इन छोटेछोटे लक्षणों को अनदेखा करने की आदत हमें कई बार गंभीर बीमारी का शिकार बना देती है. यदि आप को स्वास्थ्य संबंधी कुछ निम्न लक्षण दिखाई दें तो उन्हें नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत अपने फैमिली डाक्टर को दिखाएं ताकि समय पर इलाज होने से आप गंभीर खतरे से बच सकें :

थकान होना

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काम ज्यादा करने और शरीर में ऊर्जा की कमी के कारण अकसर हम थकान महसूस करते हैं. कई बार तो इतनी मेहनत करनी पड़ती है कि हम थकान से पस्त हो जाते हैं. यदि सामान्य थकान हो तो उसे नजरअंदाज किया जा सकता है लेकिन अगर लगातार कई हफ्ते से आप थकान महसूस कर रहे हैं तो इसे नजरअंदाज न करें बल्कि तुरंत डाक्टर से परामर्श करें, क्योंकि यह कई प्रकार की गंभीर बीमारियों की तरफ इशारा करता है.

खांसी आना

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लगातार खांसी आना भी एक गंभीर समस्या है, यदि आप को हफ्तेभर से अधिक समय से खांसी आ रही है तो टीबी का लक्षण हो सकता है. अगर आप धूम्रपान करते हैं और काफी समय से खांसी की शिकायत है तो यह निश्चित रूप से टीबी की तरफ इशारा करती है.

सीने में दर्द

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सीने में दर्द की शिकायत स्त्रीपुरुष किसी को भी हो इसे बिलकुल भी नजरअंदाज न करें. ज्यादातर लोग इस समस्या की अनदेखी कर डाक्टर को नहीं दिखाते. ऐसा करना बिलकुल गलत है. यह गंभीर बीमारी का संकेत है. कैंसर, थायराइड, अल्सर और पेट की समस्या का भी कारण हो सकता है सीने का दर्द.

नाक से खून निकलना

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गरमी के मौसम में कुछ लोगों की नाक से ज्यादा गरमी लगने के कारण खून निकलता है, जिसे नकसीर कहते हैं. लेकिन यदि नाक, कान, आंख, जबड़े, पेशाब, शौच आदि के जरिए खून निकलता है तो लापरवाही न बरतें, तुरंत चिकित्सक को दिखाएं. हाईब्लड प्रैशर, एस्पिरिन के प्रति प्रतिरोधक क्षमता कम होने व कैंसर जैसी समस्या के कारण इन जगहों से खून निकल सकता है.

शरीर में किसी तरह की गांठ बनना

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अगर आप की बौडी के किसी भी हिस्से में कोई गांठ जैसी बन रही है तो तुरंत अपने फैमिली डाक्टर को दिखाएं बिलकुल भी लापरवाही न बरतें. एक सप्ताह से अधिक समय तक बनी गांठ कैंसर या ट्यूमर हो सकती है तथा यह कैंसर का भी कारण बन सकती है.

वजन घटना

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यदि बिना किसी कारण के आप का वजन कम हो रहा है तो बजाय खुश होने कि आप का वजन घट रहा है यह चिंता की बात है. वजन कम होना कई बीमारियों का सूचक है.

तेज सिरदर्द

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कई बार अधूरी नींद, काम की अधिकता के कारण सिरदर्द होने लगता है, लेकिन अगर आप के सिर में एक हफ्ते से अधिक समय से दर्द है तो डाक्टर को दिखाएं. लगातार हो रहे सिर दर्द से दिमाग की कोशिकाएं प्रभावित होती हैं जिस से ब्रैन ट्यूमर का खतरा बढ़ जाता है दिमाग की क्षमता भी इस से प्रभावित होती है.

इन छोटीमोटी बीमारियों को नजरअंदाज न करें तुरंत डाक्टर को दिखा कर उन्हें बड़ी और घातक बीमारी बनने से बचें.

कठपुतली- भाग 1: शादी के बाद मीता से क्यों दूर होने लगा निखिल

जैसे ही मीता के विवाह की बात निखिल से चली वह लजाई सी मुसकरा उठी. निखिल उस के पिताजी के दोस्त का इकलौता बेटा था. दोनों ही बचपन से एकदूसरे को जानते थे. घरपरिवार सब तो देखाभाला था, सो जैसे ही निखिल ने इस रिश्ते के लिए रजामंदी दी, दोनों को सगाई की रस्म के साथ एक रिश्ते में बांध दिया गया.

मीता एक सौफ्टवेयर कंपनी में काम करती थी और निखिल अपने पिताजी के व्यापार को आगे बढ़ा रहा था.

2 महीने बाद दोनों परिणयसूत्र में बंध कर पतिपत्नी बन गए. निखिल के घर में खुशियों का सावन बरस रहा था और मीता उस की फुहारों में भीग रही थी.

वैसे तो वे भलीभांति एकदूसरे के व्यवहार से परिचित थे, कोई मुश्किल नहीं थी, फिर भी विवाह सिर्फ 2 जिस्मों का ही नहीं 2 मनों का मिलन भी तो होता है.

विवाह को 1 महीना पूरा हुआ. उन का हनीमून भी पूरा हुआ. अब निखिल ने फिर काम पर जाना शुरू कर दिया. मीता की भी छुट्टियां समाप्त हो गईं.

‘‘निखिल पूरा 1 महीना हो गया दफ्तर से छुट्टी किए. आज जाना है पर तुम्हें छोड़ कर जाने को मन नहीं कर रहा,’’ मीता ने बिस्तर पर लेटे अंगड़ाई लेते हुए कहा.

‘‘हां, दिल तो मेरा भी नहीं, पर मजबूरी है. काम तो करना है न,’’ निखिल ने जवाब दिया. तो मीता मुसकरा दी.

अब रोज यही रूटीन रहता. दोनों सुबह उठते, नहाधो कर साथ नाश्ता कर अपनेअपने दफ्तर रवाना हो जाते. शाम को मीता थकीमांदी लौट कर निखिल का इंतजार करती रहती कि कब निखिल दफ्तर से आए और कब दो मीठे बोल उस के मुंह से सुनने को मिलें.

एक दिन वह निखिल से पूछ ही बैठी, ‘‘निखिल, मैं देख रही हूं जब से हमारी शादी हुई है तुम्हारे पास मेरे लिए वक्त ही नहीं.’’

‘‘मीता शादी करनी थी हो गई… अब काम भी तो करना है.’’

निखिल का जवाब सुन मीता मुसकरा दी और फिर मन ही मन सोचने लगी कि निखिल कितना जिम्मेदार है. वह अपने वैवाहिक जीवन से बहुत खुश थी. वही करती जो निखिल कहता, वैसे ही रहती जैसे निखिल चाहता. और तो और खाना भी निखिल की पसंदनापसंद पूछ कर ही बनाती. उस का स्वयं का तो कोई रूटीन, कोई इच्छा रही ही नहीं. लेकिन वह खुद को निखिल को समर्पित कर खुश थी. इसलिए उस ने निखिल से कभी इन बातों की शिकायत नहीं की. वह तो उस के प्यार में एक अनजानी डोर से बंध कर उस की तरफ खिंची जा रही थी. सो उसे भलाबुरा कुछ महसूस ही नहीं हो रहा था.

वह कहते हैं न कि सावन के अंधे को सब हरा ही हरा दिखाई देता है. बस वैसा ही हाल था निखिल के प्रेम में डूबी मीता का. निखिल रात को देर से आता. तब तक वह आधी नींद पूरी भी कर चुकी होती.

एक बार मीता को जम्हाइयां लेते देख निखिल बोला, ‘‘क्यों जागती हो मेरे लिए रात को? मैं बाहर ही खा लिया करूंगा.’’

‘‘कैसी बात करते हो निखिल… तुम मेरे पति हो, तुम्हारे लिए न जागूं तो फिर कैसा जीवन? वैसे भी हमें कहां एकदूसरे के साथ बैठने के लिए वक्त मिलता है.’’ मीता ने कहा.

विवाह को 2 वर्ष बीत गए, किंतु इन 2 वर्षों में दोनों रात और दिन की तरह हो गए. एक आता तो दूसरा जाता.

एक दिन निखिल ने कहा, ‘‘मीता तुम नौकरी क्यों नहीं छोड़ देतीं… हमें कोई पैसों की कमी तो नहीं. यदि तुम घर पर रहो तो शायद हम एकदूसरे के साथ कुछ वक्त बिता सकें.’’

जैसे ही मीता ने अपनी दफ्तर की कुलीग नेहा को इस बारे में बताया, वह कहने लगी, ‘‘मीता, नौकरी मत छोड़ो. सारा दिन घर बैठ कर क्या करोगी?’’

मगर मीता कहां किसी की सुनने वाली थी, उसे तो जो निखिल बोले बस वही ठीक लगता था. सो आव देखा न ताव इस्तीफा लिख कर अपनी बौस के पास ले गई. वे भी एक महिला थीं, सो पूछने लगीं, ‘‘मीता, नौकरी क्यों छोड़ रही हो?’’

 

‘‘मैम, वैवाहिक जीवन में पतिपत्नी को मिल कर चलना होता है, निखिल तो अपना कारोबार दिन दूना रात चौगुना बढ़ा रहा है, यदि पतिपत्नी के पास एकदूसरे के लिए समय ही नहीं तो फिर कैसी गृहस्थी? फिर निखिल तो अपना कारोबार बंद करने से रहा. सो मैं ही नौकरी छोड़ दूं तो शायद हमें एकदूसरे के लिए कुछ समय मिले.’’

बौस को लगा जैसे मीता नौकरी छोड़ कर गलती कर रही है, किंतु वे दोनों के प्यार में दीवार नहीं बनाना चाहती थीं, सो उस ने मीता का इस्तीफा स्वीकार कर लिया.

अब मीता घर में रहने लगी. जैसे आसपास की अन्य महिलाएं घर की साफसफाई, साजसज्जा, खाना बनाना आदि में वक्त व्यतीत करतीं वैसे ही वह भी अपना सारा दिन घर के कामों में बिताने लगी. कभी निखिल अपने बाहर के कामों की जिम्मेदारी उसे सौंप देता तो वह कर आती, सोचती उस का थोड़ा काम हलका होगा तो दोनों को आपस में बतियाने के लिए वक्त मिलेगा.

उस की दफ्तर की सहेलियां कभीकभी फोन पर पूछतीं, ‘‘मीता, घर पर रह कर कैसा लग रहा है?’’

‘‘बहुत अच्छा, सब से अलग,’’ वह जवाब में कहती.

दीवानी जो ठहरी अपने निखिल की. दिन बीते, महीने बीते और पूरा साल बीत गया. मीता तो अपने निखिल की मीरा बन गई समझो. निखिल के इंतजार में खाने की मेज पर ही बैठ कर ऊंघना, आधी रात जाग कर खाना परोसना तो समझो उस के जीवन का हिस्सा हो गया था.

अब वह चाहती थी कि परिवार में 2 से बढ़ कर 3 सदस्य हो जाएं, एक बच्चा हो जाए तो वह मातृत्व का सुख ले सके. वैसे तो वह संयुक्त परिवार में थी, निखिल के मातापिता भी साथ में ही रहते थे, किंतु निखिल के पिता को तो स्वयं कारोबार से फुरसत नहीं मिलती और उस की मां अलगअलग गु्रप में अपने घूमनेफिरने में व्यस्त रहतीं.

‘‘निखिल कितना अच्छा हो हमारा भी एक बच्चा हो. आप सब तो पूरा दिन मुझे अकेले छोड़ कर बाहर चले जाते हो… मुझे भी तो मन लगाने के लिए कोई चाहिए न,’’ एक दिन मीता ने निखिल के करीब आते हुए कहा.

जैसे ही निखिल ने यह सुना वह उस के छिटकते हुए कहने लगा, ‘‘मीता, अभी मुझे अपने कारोबार को और बढ़ाना है. बच्चा हो गया तो जिम्मेदारियां बढ़ जाएंगी और फिर अभी हमारी उम्र ही क्या है.’’

मीता ने उसे बहुत समझाया कि वह बच्चे के लिए हां कह दे, किंतु निखिल बड़ी सफाई से टाल गया, बोला, ‘‘क्यों मेरा हनीमून पीरियड खत्म कर देना चाहती हो?’’

उस की बात सुन मीता एक बार फिर मुसकरा दी. बोली, ‘‘निखिल तुम बहुत चालाक हो.’’

मगर मीता अकेले घर में कैसे वक्त बिताए हर इंसान की अपनी दुनिया होती है. वह भी अपनी दुनिया बसाना चाहती थी, किंतु निखिल की न सुन कर चुप हो गई और निखिल अपनी दुनिया में मस्त.

एक दिन मीता बोली, ‘‘निखिल, मैं सोचती थी कि मैं नौकरी छोड़ दूंगी तो हमें एकसाथ समय बिताने को मिलेगा, किंतु तुम तो हर समय घर पर भी अपना लैपटौप ले कर बैठे रहते हो या फिर फोन पर बातों में लगे रहते हो.’’

पतझड़ में वसंत- भाग 1: सुषमा और राधा के बनते बिगड़ते हालात

‘प्रिय राधा,

‘स्नेह, मैं सुषमा, तेरी सहेली, तेरी पड़ोसिन, तेरी कलीग. शायद तू मुझे भूल गई होगी पर इन

10 बरसों में कोई दिन ऐसा न था जब तेरा हंसताखिलखिलाता चेहरा जेहन में न उभरा हो. बहुत याद आती है इंडिया की, इंडिया के लोगों की. मुझे तुझ से एक फेवर चाहिए. मैं यूएस से इंडिया आना चाहती हूं. क्या मैं कुछ दिन तेरे पास रह सकती हूं? मेरा आना न आना, तेरी हां या न पर है. ईमेल का जवाब फौरन देना. मैं अगले महीने की 20 तारीख तक चलने का प्रोग्राम बना रही हूं. मेरी बात हो सकता है तुझे अजीब लगे, उस के लिए माफी चाहती हूं. सबकुछ आ कर बताऊंगी.

‘तेरी सुषमा.’

ईमेल सुषमा का था. 10 बरस पहले यूएस में अपने बेटों के पास जा बसी थी. आज इतने लंबे समय के बाद वापस आ रही है. पर क्यों? लोग तो वहां जा कर वापस आना ही नहीं चाहते. फिर यह

तो बेटों के बुलाने पर ही गई थी. सोचतेसोचते बरामदे में पड़ी कुरसी पर आ बैठी. अतीत सामने आ कर खड़ा हो गया.

सामने वाली दीवार के पीछे सुषमा का परिवार रहता था. लंबीचौड़ी कोठी थी, 10-15 लोग रहते थे. ठीक, राधा के परिवार की तरह. दोनों की छतें इस तरह जुड़ी थीं कि गरमी में रात को जब परिवार के बच्चेबूढ़े सोने आते तो पता ही नहीं लगता कि घरों का आदि कहां, अंत कहां है. वैसे भी दोनों परिवार में बहुत अपनापन था. बच्चे भी बहुत हिलमिल कर रहते थे. उसे आज भी याद है, जब भी दोनों घरों में कोई खुशी आती, सब मिलजुल कर बांटते. चाहे किसी बच्चे का जन्मदिन हो या किसी को कंपीटिशन में जबरदस्त कामयाबी मिली हो.

राधा और सुषमा एक ही स्कूल में नौकरी करती थीं. दोनों ने अपने और बच्चों से जुड़े किसी भी फैसले को कभी अकेला नहीं लिया. स्कूल से रिटायर होने के बाद भी वे एकदूसरे की सलाह लेने में कोताही नहीं करती थीं.

राधा के 2 बेटे हैं तो सुषमा 3 बच्चों की मां है. कोईर् वक्त था जब पढ़ाई में दोनों के बच्चों में होड़ सी लगी होती. जिन्हें देख कर दोनों परिवारों के दूसरे बच्चे भी इस होड़ में शामिल हो जाते. दोनों सहेलियों ने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के सपने देखे थे. वक्त के साथ सपनों में रंग भरने लगे. वैसे भी टीचर्स के बच्चों की सोच में सिर्फ और सिर्फ कैरियर होता है.

राधा के दोनों बेटों ने इंजीनियरिंग की और बाहर का रुख किया. सुषमा के तीनों बेटे भी मैडिकल की पढ़ाई कर के अमेरिका चले गए. कुछ वर्षों बाद तीनों भाइयों ने मिल कर एक हौस्पिटल का शुभारंभ किया. बेटों की तरक्की से दोनों माएं खुश थीं. यही नहीं, दोनों के परिवारों के बाकी बच्चे भी अच्छी नौकरी ले कर दूसरे शहरों में जा बसे थे. इतने बड़े घर में केवल राधा व राधा के पति कमलेश्वर थे. उधर, सुषमा व उस के पति रमेश रह गए थे. दोनों को रिटायर होने में समय था. सब के दिमाग में यही प्रश्न था, रिटायर हो कर वे कहां, क्या करेंगे?

बच्चों ने नए देश व माहौल में अपने को ढालने में देर न लगाई. दोनों दंपती जानते थे कि अब बच्चे वहीं बसेंगे, कोईर् यहां बसने नहीं आएगा.

राधा के बेटों ने मम्मीपापा को अमेरिका आ कर बसने का प्रस्ताव रखा. उन्होंने पहले तो इस प्रस्ताव पर ध्यान नहीं दिया पर जब बेटों ने बारबार कहा तो कमलेश्वर ने पत्नी से कहा, ‘बच्चों की भावनाओं को मैं समझता हूं, पर यह समझ लो, हम कहीं नहीं जाएंगे. जहां हम रह रहे हैं वही ठिकाना ही हमारा सम्मान है. साधु अपनी कुटिया में रहता है, तो चार लोग उस से मिलने आते हैं. कुटिया छोड़ कर घरघर भीख मांगने जाएगा तो लोग दुत्कार भी सकते हैं.

‘सो, हम अपनी इस कुटिया में ही भले. जिस को मिलना है, यहां आ कर मिल जाए. और फिर हम बूढ़े पेड़ की तरह हैं, एक जगह से उखड़ कर दूसरी जगह की मिट्टी में नहीं जम सकते. चिडि़या अपने बच्चों को उड़ना सिखाती है, सदा उन के साथ नहीं उड़ती. यह देख कर कि उन्होंने उड़ना सीख लिया है, वह उन्हें आजाद छोड़ देती है. हम ने भी बच्चों को अच्छी शिक्षा व संस्कारों के मजबूत पंख दिए हैं. उन्हें अब हमारी जरूरत नहीं है. हम दोनों ही अपने तरीके से जीने के लिए आजाद हैं.’

बच्चे इस बात को नहीं मानते. उन का कहना था, ‘आप दोनों का शरीर इस उम्र में आने वाली तकलीफोें को कैसे झेलेगा? कोई तो साथ होना चाहिए. यहां हमारे पास होगे तो किसी अनहोनी का डर तो न होगा.’

बच्चों की मजबूरी और कमलेश्वर का स्वाभिमानी तर्क, दोनों अपनी जगह ठीक थे. पतिपत्नी के हठ के आगे बच्चों को घुटने टेकने पड़े.

सुषमा व उस के पति रमेश की सोच इन से अलग है. उन के बच्चों ने दोनों को जब अमेरिका आने का निमंत्रण दिया, तो वे मना न कर सके. ‘राधा, मेरे तीनों बेटों ने एक हौस्पिटल खोला है. बड़े हौस्पिटल के मालिक होने के साथ एक होटल भी खरीदा है. होटल का उद्घाटन हमारे हाथ से कराना चाहते हैं. हम दोनों के न जाने पर बच्चे नाराज हो जाएंगे. सो, हम ने भी सोचा है कि हम सबकुछ बेच कर वहीं बच्चों के पास क्यों न रहें.’

जाने से पहले सुषमा, सहेली से मिलने आईर् थी. बहुत खुश थी. अमेरिका जाने की खुशी से चमकती आंखों में न जाने कितने ही सपने थे.

तंदूरी सोया चाप

सामग्री

– 250 ग्राम सोया चाप

– थोड़ा सा प्याज कटा हुआ

– थोड़ी सी टोमैटो प्यूरी

– थोड़ा सा अदरक व लहसुन का पेस्ट

– थोड़ा सा धनिया पाउडर

– थोड़ा सा जीरा पाउडर

– 1 हरीमिर्च कटी

– 10 ग्राम गाढ़ा दही

– थोड़ा सा गरममसाला

– लगाने के लिए तेल

– थोड़ी सी कसूरी मेथी

– थोड़ा सा लालमिर्च पाउडर

– चुटकीभर औरेंज कलर

– थोड़ा सा दालचीनी पाउडर

– चुटकीभर हलदी

– 15 ग्राम पनीर

– 10 ग्राम चीज

– गार्निशिंग के लिए नीबू के टुकड़े

– नमक स्वादानुसार.

विधि

– चाप को कुछ देर तक पानी में भिगोए रखें.

– फिर उसे पानी में 1/2 छोटा चम्मच नमक डाल कर उबालें. अब ध्यान से स्टिक से चाप को निकाल कर एक तरफ रख दें.

– उस पर दालचीनी पाउडर डाल कर अच्छी तरह मिक्स करें.

– इस के बाद प्याज, अदरकलहसुन, हरीमिर्च व दही को मिला कर पेस्ट तैयार करें.

– इस में टोमैटो प्यूरी व मसाला डाल कर अच्छी तरह मिक्स कर के इस तैयार पेस्ट को चाप पर कोट करें. –

– फिर पनीर, चीज और नमक को मिला कर इस से चाप को स्टफ करें और 1 घंटे के लिए मैरिनेट होने के लिए रख दें.

– फिर तंदूर में तब तक पकाएं जब तक दोनों तरफ से सुनहरी न हो जाएं. चटनी व नीबू के टुकड़ों से सजा कर सर्व करें.

मुल्तानी मिट्टी से निखारें रूप

अगर आप भी अपना रंगरूप निखार कर सुंदर व बेदाग चेहरा पाना चाहती हैं तो मुल्‍तानी मिट्टी का फेस पैक लगाएं. ये पिंपल या ब्‍लैकहेड से छुटकारा दिलाने में बेहद कारगर है. इसके अलावा मुल्‍तानी मिट्टी चेहरे से डेड स्‍किन को हटाती है और चेहरे को गोरा बना कर उसमें जान डालती है. आइये जाने मुल्‍तानी मिट्टी के और भी फायदे.

त्‍वचा की रंगत निखारे

अगर चेहरे पर दाग-धब्‍बे और पिंपल आदि हैं तो वह इस पैक को लगाने से कम हो जाते हैं. रोजाना मुल्‍तानी मिट्टी के प्रयोग से पिंपल के दाग पूरी तरह से चले जाते हैं. इसके अलावा ब्‍लैकहेड, वाइट हेड भी साफ हो जाता है.

एक्‍ने और दाग-धब्‍बों से पाएं छुटकारा

कई लड़कियां पिंपल के गहरे दाग धब्बों को स्‍किन पीलिंग और लेजर ट्रीटमेंट करवा कर साफ करवाती हैं, जो कि काफी दर्द भरा होता है. लेकिन जब मुल्‍तानी मिट्टी लगा कर ही आप इन दाग-धब्‍बों से छुटकारा पा सकती हैं तो डाक्‍टर पर इतना पैसा क्‍यूं बरबाद करें. चेहरे की लालिमा और सूजन को आप इसके प्रयोग से दूर कर सकती हैं.

बालों का झड़ना कम करे

स्‍ट्रेस, हार्मोनल समस्‍याएं और डिलेवरी आदि के बाद बाल झड़ने की समस्‍या पैदा हो जाती है. साथ ही अगर शरीर में जिंक, आयरन और प्रोटीन की कमी हो तो भी बाल झड़ते हैं. रोजाना मुल्‍तानी मिट्टी से बाल धोने पर ना सिर्फ बालों का झड़ना कम होता है बल्कि उनमें नई जान भी आती है.

कम या ज्यादा, शराब पीना है जानलेवा

शराब का सेवन सभी तरह से सेहत के लिए हानिकारक होता है. बहुत से लोगों को लगता है कि कम मात्रा में शराब का सेवन करने से सेहत पर बुरा असर नहीं होता है. हाल में हुई एक रिसर्च के मुताबिक कम मात्रा में में शराब का सेवन भी सेहत के लिए काफी हानिकारक होता है.

इस नई स्टडी के मुताबिक कम मात्रा में शराब रीने से आपको हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत हो सकती है. इस स्टडी में करीब 17,000 लोगों को शामिल किया गया. इसने बड़े सैंपल को तीन हिस्सों में बांटा गया. एक श्रेणी में उन लोगों को रखा गया जो लोग बिल्कुल भी शराब नहीं पीते. दूसरे में उन्हें रखा गया जो हफ्ते में 7 से 13 बार शराब पीते हैं और तीसरी श्रेणी में हफ्ते में 14 बार से अधिक शराब पीने वाले लोगों को शामिल किया गया. इसके परिणाम हैरान करने वाले रहे. स्टडी के मुताबिर हफ्ते में 7 से 13 बार शराब पीने वाले लोगों में अधिक तनाव का खतरा 53 प्रतिशत था और उन लोगों का ब्लड प्रेशर 128/79 mm नोट किया गया. वहीं जो लोग हफ्ते में 14 बार से अधिक शराब पीते हैं उनकी स्थिति और अधिक खराब पाई गई. इन लोगों में तनाव का खतरा 69 फीसदी पाया गया और ब्लड प्रेशर 153/82 mm Hg पाया गया.

आपको बता दें कि शराब और हाई ब्लड प्रेशर एक दूसरे से जुड़े हुए हैं. शराब एक हाई एनर्जी ड्रींक है, इसमें कैलोरी काफी अधिक मात्रा में पाई जाती है. इसके अलावा लिवर और दिल पर इसका असर काफी खराब होता है. यही कारण है कि शराब पीने से ब्लड प्रेशर अधिक हो जाता है.

जानिए गर्म पानी पीने के फायदे

अच्छी सेहत के लिए खाने से जयादा जरूरी है पानी. अगर आप स्वस्थ रहना चाहते हैं तो जरूरी है कि दिन में 8 से 10 ग्लास पानी पीया जाए. इस खबर में हम आपको गुनगुने पानी के फायदों के बारे में बताएंगे. तो आइए जाने गुनगुने पानी से होने वाले फायदे.

थम जाती है बढ़ती उम्र

गर्म पानी त्वचा के लिए काफी लाभकारी होता है. चेहरे की झुर्रियों के लिए ये काफी असरदार होता है. गर्मा पानी पीने से त्वचा में कसाव और चमक आ जाता है.

कम होता है वजन

अगर आप अपने बढ़ते हुए वजन से परेशान हैं और अपनी लाख कोशिशों के बाद भी इसे कम नहीं कर पा रही तो गर्म पानी में शहद और नींबू मिलाकर लगातार तीन महीने तक पिएं. कुछ ही दिनों में आपक फर्क महसूस होगा.

अच्छा रहता है पाचन

पाचन क्रिया के लिए गर्म पानी काफी अच्छा होता है. पाचन और गैस की परेशानियों में गर्म पानी काफी राहत देता है. खाने के कुछ देर बाद गर्म पानी पीने से हमारा खाना जल्दी पचता है और रेट हल्का रहता है.

जोड़ों के दर्द में भी देता है राहत

जोड़ों के दर्द में भी गर्म पानी का सेवन लाभप्रद होता है. हमारी मांसपेशियों का करीब 80 फीसदी हिस्सा पानी से बना होता है. ऐसे में गर्म पानी का सेवन मांसपेशियों के ऐंठन को दूर करने में काफी लाभकारी होता है.

डिटौक्स होती है बौडी

गर्म पानी पीने से बौडी डिटौक्स होती है. शरीर की बहुत सी अशुद्धियां बाहर होती हैं. गर्म पानी से शरीर का तापमाना बढ़ जाता है और जिससे पसीना आता है और इसके माध्यम से शरीर की सारी अशुद्धियां बाहर निकल आती हैं.

बालों के लिए भी है अच्छा

गर्म पानी पीना बालों के लिए काफी अच्छा होता है. इससे बाल चमकदार बनते हैं और इनकी ग्रोथ के लिए भी पानी काफी लाभकारी होता है.

इन तरीकों से रखें फूड फ्रैश

बचपन में आप ने अपनी मां, पिता या दादाजी को फल और सब्जियां खरीदते हुए देखा होगा. वे फलों और सब्जियों को छू कर, उलट पलट कर देखते ताकि उन में ताजगी भरी कोमलता का पता चले. कई अन्य प्रयासों से भी यह जानने की कोशिश करते कि ये फ्रैश हैं या नहीं.

यह जान लें कि बेहतरीन सामग्रियां चुनने के साथ साथ उन्हें सही व सुरक्षित रखना भी बेहद जरूरी है ताकि उन का कुदरती तेल, खुशबू और असली स्वाद बरकरार रहे. किसी सामग्री की नमी पर यह निर्भर करता है कि कितने लंबे समय तक उस के सभी गुण कायम रहेंगे. सामग्रियां सुरक्षित रहें तो न केवल उन की गुणवत्ता बनी रहेगी, बल्कि खाने की बरबादी भी कम होगी.

आप इनसुझावों पर ध्यान दें ताकि आप के लिए ताजा चीजें चुनना, उन्हें सुरक्षित रखना और उन्हें लंबे समय तक उपयोगी बनाए रखना आसान हो:

कैसे चुनें ताजा फल और सब्जियां

फलों और सब्जियों की ऊपरी परत आमतौर पर कोमल और एक समान होती है. यदि यह परत धसी हुई और पिचकी महसूस हो तो समझ लें कि फल का गूदा क्षतिग्रस्त हो गया है. साइट्रस फल जो काफी कसे होते हैं अंदर शुष्क हो सकते हैं. रसीले फलों के सही होने का अनुमान उन के वजन और भारीपन से भी लगा सकते हैं. ताजा उत्पादों में हलकी महक होती है. इन में दाग और धब्बे नहीं होते हैं. आलू, लहसुन, और प्याज का कसा हुआ और ठोस होना भी जरूरी है. पत्तीदार सब्जियों के मामले में इन का हरा, कोमल होना और टूटा नहीं होना आवश्यक है.

ज्यादा नमी वाली सामग्रियां कैसे सुरक्षित रखें

हम आमतौर पर एक सप्ताह या फिर 15 दिनों के लिए भी ताजा चीजें जमा कर लेते हैं. अपने रैफ्रिजरेटर के सब्जियों वाले बास्केट में तरहतरह की सब्जियां और फल रख देते है. आप को यह ध्यान रखना चाहिए कि फल और सब्जियां भी एक नियमितता के साथ सांस लेती हैं और जिस तापमान एवं परिस्थिति में उन्हें रखा जाता है उन का फलों और सब्जियों के उपयोगी रहने की अवधि और गुणवत्ता दोनों पर असर पड़ता है.

सूखी सामग्रियों को ऐसे सुरक्षित रखें

सूखी सामग्रियों की बात हो तो हमारा ध्यान मसालों पर जाता है. साथ ही कई हर्ब्स, दालें और अनाज भी हैं. इन सब में नमी कम होती है और इन में हवा या नमी लग जाए तो खराब होने का खतरा रहता है. इसलिए इन्हें एयरटाइट कंटेनर में रखना जरूरी है. खास कर मसालों को दोहरे ढक्कन (डुअल लिड) वाले कंटेनर में रखना चाहिए ताकि आप केवल जरूरत के हिसाब से सही मात्रा में इन्हें निकाल लें.

दालों और अनाजों के कंटेनर के लिए एयरटाइट होने के साथ यह भी जरूरी है कि रखने की जगह सही हो, क्योंकि लंबे समय तक नमी के बीच रहने से इन की गुणवत्ता में भी गिरावट आ जाती है.

कैसे ज्यादा दिनों तक उपयोगी बनाए रखें

टमाटर, अंडा, मटर आदि ज्यादा समय नहीं टिकते. लेकिन यदि आप उन्हें सही से फ्रीज करें और फ्रीजर सेफ कंटेनर में रखें तो ज्यादा समय तक उपयोगी रहेंगे. मटर जो एक सीजनल सब्जी है उस के दानों को हलका उबाल कर और फ्रीज कर आप 3 से 4 महीनों तक बखूबी रख सकते हैं.

ज्यादा खरीदना और जमा करना सही नहीं

हालांकि ऊपर दिए गए सुझावों से आप खाद्य सामग्रियों को लंबे समय तक सुरक्षित रख लेंगे पर एक निर्धारित समय सीमा के अंदर आवश्यक खपत का ध्यान रख कर खरीदारी की योजना बनाएं. मांस, डेयरी उत्पाद, हरी पत्तेदार सब्जियां आदि ज्यादा खरीद कर न रखें. हमेशा ध्यान रखें कि जो खाना ताजा सामग्रियों से बनेगा उस का स्वाद और गुणवत्ता लाजवाब होगी.

-मास्टर शैफ कुणाल कपूर के सुझावों पर आधारित लेख 

ऐसे बनाएं जायकेदार चटनी

अगर आप चटनी बनाने जा रही हैं तो करें कुछ ऐसा कि स्वाद भी मजेदार हो और तारीफें भी ढेरों मिलें…

अगर आप चटनी बनाने जा रही हैं, तो क्या आप को मालूम है कि किस चटनी में क्या डालना है ताकि चटनी का स्वाद दोगुना हो जाए? अगर नहीं तो हम आप को बता रहे हैं:

– अगर आप धनियापत्ती की चटनी बना रही हैं तो उस में दही या नीबू का रस और मूंगफली के दाने       अथवा काजू का पेस्ट जरूर डालें. इस से चटनी ज्यादा स्वादिष्ठ बनेगी.

– अगर पुदीनापत्ती की चटनी बना रही हैं, तो उस में अमचूर पाउडर या गुड़ जरूर डालें. इस से चटनी का      स्वाद कई गुना बढ़ जाएगा.

– अगर टमाटर की चटनी बना रही हैं, तो उस में लहसुन की कलियां जरूर डालें. इस से स्वाद बेहतरीन   आएगा.

– प्याज की चटनी बना रही हैं, तो थोड़ी हरे प्याज की पत्तियां भी डालें. स्वाद बढ़ जाएगा.

– फ्रैश नारियल की चटनी बनाते समय उस में भुनी चने की दाल, मूंगफली और करीपत्ता डालें. लहसुन   भी  डालें. अलग ही स्वाद आएगा.

– अगर सूखी चटनी बना रही हैं तो सूखा नारियल कद्दूकस किया, मूंगफली के दाने, जीरा पाउडर, लहसुन,    नमक, लालमिर्च साबूत अवश्य डालें. इस से बहुत बढि़या स्वाद आता है.

– दही की चटनी बना रही हैं, तो मूंगफली का चूरा, कालीमिर्च, नमक व चाटमसाला डालें. गजब का स्वाद   आएगा.

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