Download App

पहली ही रात भागी दुल्हन

26 साल के छत्रपति शर्मा की आंखों में नींद नहीं थी. वह लगातार अपनी नईनवेली बीवी प्रिया को निहार रहा था. जैसे ही प्रिया की नजरें उस से टकराती थीं, वह शरमा कर सिर झुका लेती थी. 20 साल की प्रिया वाकई खूबसूरती की मिसाल थी. लंबी, छरहरी और गोरे रंग की प्रिया से उस की शादी हुए अभी 2 दिन ही गुजरे थे, लेकिन शादी के रस्मोरिवाज की वजह से छत्रपति को उस से ढंग से बात करने तक का मौका नहीं मिला था.

छत्रपति मुंबई में स्कूल टीचर था. उस की शादी मध्य प्रदेश के सिंगरौली शहर के एक खातेपीते घर में तय हुई थी और शादी मुहूर्त 23 नवंबर, 2017 का निकला था. इस दिन वह मुंबई से बारात ले कर सिंगरौली पहुंचा और 24 नवंबर को प्रिया को विदा करा कर वापस मुंबई जा रहा था. सिंगरौली से जबलपुर तक बारात बस से आई थी. जबलपुर में थोड़ाबहुत वक्त उसे प्रिया से बतियाने का मिला था, लेकिन इतना भी नहीं कि वह अपने दिल की बातों का हजारवां हिस्सा भी उस के सामने बयां कर पाता.

बारात जबलपुर से ट्रेन द्वारा वापस मुंबई जानी थी, जिस के लिए छत्रपति ने पहले से ही सभी के रिजर्वेशन करा रखे थे. उस ने अपना, प्रिया और अपनी बहन का रिजर्वेशन पाटलिपुत्र एक्सप्रैस के एसी कोच में और बाकी बारातियों का स्लीपर कोच में कराया था. ट्रेन रात 2 बजे के करीब जब जबलपुर स्टेशन पर रुकी तो छत्रपति ने लंबी सांस ली कि अब वह प्रिया से खूब बतियाएगा. वजह एसी कोच में भीड़ कम रहती है और आमतौर पर मुसाफिर एकदूसरे से ज्यादा मतलब नहीं रखते.

ट्रेन रुकने पर बाराती अपने स्लीपर कोच में चले गए और छत्रपति, उस की बहन और प्रिया एसी कोच में चढ़ गए. छत्रपति की बहन भी खुश थी कि उस की नई भाभी सचमुच लाखों में एक थी. उस के घर वालों ने शादी भी शान से की थी.

जब नींद टूटी तो…

कोच में पहुंचते ही छत्रपति ने तीनों के बिस्तर लगाए और सोने की तैयारी करने लगा. उस समय रात के 2 बजे थे, इसलिए डिब्बे के सारे मुसाफिर नींद में थे. जो थोड़ेबहुत लोग जाग रहे थे, वे भी जबलपुर में शोरशराबा सुन कर यहांवहां देखने के बाद फिर से कंबल ओढ़ कर सो गए थे. छत्रपति और प्रिया को 29 और 30 नंबर की बर्थ मिली थी.

जबलपुर से जैसे ही ट्रेन रवाना हुई, छत्रपति फिर प्रिया की तरफ मुखातिब हुआ. इस पर प्रिया ने आंखों ही आंखों में उसे अपनी बर्थ पर जा कर सोने का इशारा किया तो वह उस पर और निहाल हो उठा. दुलहन के शृंगार ने प्रिया की खूबसूरती में और चार चांद लगा दिए थे. थके हुए छत्रपति को कब नींद आ गई, यह उसे भी पता नहीं चला. पर सोने के पहले वह आने वाली जिंदगी के ख्वाब देखता रहा, जिस में उस के और प्रिया के अलावा कोई तीसरा नहीं था.

जबलपुर के बाद ट्रेन का अगला स्टौप इटारसी और फिर उस के बाद भुसावल जंक्शन था, इसलिए छत्रपति ने एक नींद लेना बेहतर समझा, जिस से सुबह उठ कर फ्रैश मूड में प्रिया से बातें कर सके.

सुबह कोई 6 बजे ट्रेन इटारसी पहुंची तो प्लैटफार्म की रोशनी और गहमागहमी से छत्रपति की नींद टूट गई. आंखें खुलते ही कुदरती तौर पर उस ने प्रिया की तरफ देखा तो बर्थ खाली थी. छत्रपति ने सोचा कि शायद वह टायलेट गई होगी. वह उस के वापस आने का इंतजार करने लगा.

ट्रेन चलने के काफी देर बाद तक प्रिया नहीं आई तो उस ने बहन को जगाया और टायलेट जा कर प्रिया को देखने को कहा. बहन ने डिब्बे के चारों टायलेट देख डाले, पर प्रिया उन में नहीं थी. ट्रेन अब पूरी रफ्तार से चल रही थी और छत्रपति हैरानपरेशान टायलेट और दूसरे डिब्बों में प्रिया को ढूंढ रहा था.

सुबह हो चुकी थी, दूसरे मुसाफिर भी उठ चुके थे. छत्रपति और उस की बहन को परेशान देख कर कुछ यात्रियों ने इस की वजह पूछी तो उन्होंने प्रिया के गायब होने की बात बताई. इस पर कुछ याद करते हुए एक मुसाफिर ने बताया कि उस ने इटारसी में एक दुलहन को उतरते देखा था.

इतना सुनते ही छत्रपति के हाथों से जैसे तोते उड़ गए. क्योंकि प्रिया के बदन पर लाखों रुपए के जेवर थे, इसलिए किसी अनहोनी की बात सोचने से भी वह खुद को नहीं रोक पा रहा था. दूसरे कई खयाल भी उस के दिमाग में आजा रहे थे. लेकिन यह बात उस की समझ में नहीं आ रही थी कि आखिरकार प्रिया बगैर बताए इटारसी में क्यों उतर गई? उस का मोबाइल फोन बर्थ पर ही पड़ा था, इसलिए उस से बात करने का कोई और जरिया भी नहीं रह गया था.

एक उम्मीद उसे इस बात की तसल्ली दे रही थी कि हो सकता है, वह इटारसी में कुछ खरीदने के लिए उतरी हो और ट्रेन चल दी हो, जिस से वह पीछे के किसी डिब्बे में चढ़ गई हो. लिहाजा उस ने अपनी बहन को स्लीपर कोच में देखने के लिए भेजा. इस के बाद वह खुद भी प्रिया को ढूंढने में लग गया.

भुसावल आने पर बहन प्रिया को ढूंढती हुई उस कोच में पहुंची, जहां बाराती बैठे थे. बहू के गायब होने की बात उस ने बारातियों को बताई तो बारातियों ने स्लीपर क्लास के सारे डिब्बे छान मारे. मुसाफिरों से भी पूछताछ की, लेकिन प्रिया वहां भी नहीं मिली. प्रिया नहीं मिली तो सब ने तय किया कि वापस इटारसी जा कर देखेंगे. इस के बाद आगे के लिए कुछ तय किया जाएगा. बात हर लिहाज से चिंता और हैरानी की थी, इसलिए सभी लोगों के चेहरे उतर गए थे. शादी की उन की खुशी काफूर हो गई थी.

प्रिया मिली इलाहाबाद में, पर…

इत्तफाक से उस दिन पाटलिपुत्र एक्सप्रैस खंडवा स्टेशन पर रुक गई तो एक बार फिर सारे बारातियों ने पूरी ट्रेन छान मारी, लेकिन प्रिया नहीं मिली.

इस पर छत्रपति अपने बड़े भाई और कुछ दोस्तों के साथ ट्रेन से इटारसी आया और वहां भी पूछताछ की, पर हर जगह मायूसी ही हाथ लगी. अब पुलिस के पास जाने के अलावा कोई और रास्ता नहीं था. इसी दौरान छत्रपति ने प्रिया के घर वालों और अपने कुछ रिश्तेदारों से भी मोबाइल पर प्रिया के गुम हो जाने की बात बता दी थी.

पुलिस वालों ने उस की बात सुनी और सीसीटीवी के फुटेज देखी, लेकिन उन में कहीं भी प्रिया नहीं दिखी तो उस की गुमशुदगी की सूचना दर्ज कर ली. इधर छत्रपति और उस के घर वालों का सोचसोच कर बुरा हाल था कि प्रिया नहीं मिली तो वे घर जा कर क्या बताएंगे. ऐसे में तो उन की मोहल्ले में खासी बदनामी होगी.

कुछ लोगों के जेहन में यह बात बारबार आ रही थी कि कहीं ऐसा तो नहीं कि प्रिया का चक्कर किसी और से चल रहा हो और मांबाप के दबाव में आ कर उस ने शादी कर ली हो. फिर प्रेमी के साथ भाग गई हो. यह खयाल हालांकि बेहूदा था, जिसे किसी ने कहा भले नहीं, पर सच भी यही निकला.

पुलिस वालों ने वाट्सऐप पर प्रिया का फोटो उस की गुमशुदगी के मैसेज के साथ वायरल किया तो दूसरे ही दिन पता चल गया कि वह इलाहाबाद के एक होटल में अपने प्रेमी के साथ है. दरअसल, प्रिया का फोटो वायरल हुआ तो उसे वाट्सऐप पर इलाहाबाद स्टेशन के बाहर के एक होटल के उस मैनेजर ने देख लिया था, जिस में वह ठहरी हुई थी. मामला गंभीर था, इसलिए मैनेजर ने तुरंत प्रिया के अपने होटल में ठहरे होने की खबर पुलिस को दे दी.

एक कहानी कई सबक

छत्रपति एक ऐसी बाजी हार चुका था, जिस में शह और मात का खेल प्रिया और उस के घर वालों के बीच चल रहा था, पर हार उस के हिस्से में आई थी.

इलाहाबाद जा कर जब पुलिस वालों ने उस के सामने प्रिया से पूछताछ की तो उस ने दिलेरी से मान लिया कि हां वह अपने प्रेमी राज सिंह के साथ अपनी मरजी से भाग कर आई है. और इतना ही नहीं, इलाहाबाद की कोर्ट में वह उस से शादी भी कर चुकी है.

बकौल प्रिया, वह और राज सिंह एकदूसरे से बेइंतहा प्यार करते हैं, यह बात उस के घर वालों से छिपी नहीं थी. इस के बावजूद उन्होंने उस की शादी छत्रपति से तय कर दी थी. मांबाप ने सख्ती दिखाते हुए उसे घर में कैद कर लिया था और उस का मोबाइल फोन भी छीन लिया था, जिस से वह राज सिंह से बात न कर पाए.

4 महीने पहले उस की शादी छत्रपति से तय हुई तो घर वालों ने तभी से उस का घर से बाहर निकलना बंद कर दिया था. लेकिन छत्रपति से बात करने के लिए उसे मोबाइल दे दिया जाता था. तभी मौका मिलने पर वह राज सिंह से भी बातें कर लिया करती थी. उसी दौरान उन्होंने भाग जाने की योजना बना ली थी.

प्रिया के मुताबिक राज सिंह विदाई वाले दिन ही जबलपुर पहुंच गया था. इन दोनों का इरादा पहले जबलपुर स्टेशन से ही भाग जाने का था, लेकिन बारातियों और छत्रपति के जागते रहने के चलते ऐसा नहीं हो सका. राज सिंह पाटलिपुत्र एक्सप्रैस ही दूसरे डिब्बे में बैठ कर इटारसी तक आया और यहीं प्रिया उतर कर उस के साथ इलाहाबाद आ गई थी.

पूछने पर प्रिया ने साफ कह दिया कि वह अब राज सिंह के साथ ही रहना चाहती है. राज सिंह सिंगरौली के कालेज में उस का सीनियर है और वह उसे बहुत चाहती है. घर वालों ने उस की शादी जबरदस्ती की थी. प्रिया ने बताया कि अपनी मरजी के मुताबिक शादी कर के उस ने कोई गुनाह नहीं किया है, लेकिन उस ने एक बड़ी गलती यह की कि जब ऐसी बात थी तो उसे छत्रपति को फोन पर अपने और राज सिंह के प्यार की बात बता देनी चाहिए थी.

छत्रपति ने अपनी नईनवेली बीवी की इस मोहब्बत पर कोई ऐतराज नहीं जताया और मुंहजुबानी उसे शादी के बंधन से आजाद कर दिया, जो उस की समझदारी और मजबूरी दोनों हो गए थे.

जिस ने भी यह बात सुनी, उसी ने हैरानी से कहा कि अगर उसे भागना ही था तो शादी के पहले ही भाग जाती. कम से कम छत्रपति की जिंदगी पर तो ग्रहण नहीं लगता. इस में प्रिया से बड़ी गलती उस के मांबाप की है, जो जबरन बेटी की शादी अपनी मरजी से करने पर उतारू थे. तमाम बंदिशों के बाद भी प्रिया भाग गई तो उन्हें भी कुछ हासिल नहीं हुआ. उलटे 8-10 लाख रुपए जो शादी में खर्च हुए, अब किसी के काम के नहीं रहे.

मांबाप को चाहिए कि वे बेटी के अरमानों का खयाल रखें. अब वह जमाना नहीं रहा कि जिस के पल्लू से बांध दो, बेटी गाय की तरह बंधी चली जाएगी. अगर वह किसी से प्यार करती है और उसी से शादी करने की जिद पाले बैठी है तो जबरदस्ती करने से कोई फायदा नहीं, उलटा नुकसान ज्यादा है. यदि प्रिया इटारसी से नहीं भाग पाती तो तय था कि मुंबई जा कर ससुराल से जरूर भागती. फिर तो छत्रपति की और भी ज्यादा बदनामी और जगहंसाई होती.

अब जल्द ही कानूनी तौर पर भी मसला सुलझ जाएगा, लेकिन इसे उलझाने के असली गुनहगार प्रिया के मांबाप हैं, जिन्होंने अपनी झूठी शान और दिखावे के लिए बेटी को किसी और से शादी करने के लिए मजबूर किया. इस का पछतावा उन्हें अब हो रहा है.

जरूरत इस बात की है कि मांबाप जमाने के साथ चलें और जातिपांत, ऊंचनीच, गरीबअमीर का फर्क और खयाल न करें, नहीं तो अंजाम क्या होता है, यह प्रिया के मामले से समझा जा सकता है. – कथा में प्रिया परिवर्तित नाम है.

राजनीति का छपाक

लेखक-  पुखराज सोलंकी

एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल पर बनी मेघना गुलजार की फिल्म है ‘छपाक’, जिस में दीपिका पादुकोण ने न सिर्फ लीड रोल किया है बल्कि संवेदनशील हृदय का परिचय देते हुए दिल दहला देने वाले उस दर्द को भी महसूस किया है. इस फिल्म पर काम शुरू होने से पहले दीपिका पादुकोण और मेघना गुलजार ने लक्ष्मी अग्रवाल से मिल कर इस दर्दनाक घटना के बारे में जानकारी ली और उस के बाद यह महसूस किया कि समाज में इस तरह के हादसे के बाद जिंदा रहना कितना मुश्किल है. महज 15 साल की उम्र में एक मासूम सी स्कूली छात्रा के साथ रोंगटे खड़े कर देने वाला हादसा होने के बावजूद जिंदगी के प्रति जो जज्बा है वह वाकई काबिलेतारीफ है.

सिर्फ लक्ष्मी अग्रवाल का ही नहीं, एसिड अटैक के और भी कई मामले देश के सामने आ चुके हैं, जिन में किसी की खूबसूरती एसिड अटैक की वजह बनी तो किसी सिरफिरे की एकतरफा मोहब्बत. अधिकतर मामलों में एसिड अटैक की शिकार युवतियां ही हुई हैं, क्योंकि या तो उन्होंने किसी लड़के का प्रेम प्रस्ताव ठुकरा दिया था या अपने घरपरिवार व समाज के डर से अपना मुंह न खोल कर हकीकत पर वे परदा डालती रहीं. एकतरफा मोहब्बत के मारे सिरफिरे ऐसे दर्दनाक कृत्य को अंजाम देने का खयाल मन में इसलिए ले आते हैं क्योंकि वे सोचते हैं कि जो मेरी न हो सकी वह किसी और की भी न हो पाए.

देखा जाए तो एसिड अटैक की मूल मानसिकता यही है और लक्ष्मी अग्रवाल भी इसी मानसिकता की शिकार हुई हैं. हालांकि एसिड अटैक को ले कर गांवदेहात से कुछ ऐसे मामले भी सामने आ चुके हैं जिन में औरत का बां झपन या एक के बाद एक लड़की को जन्म देने की वजह से उन पर एसिड अटैक कर के उन से छुटकारा पाने की कोशिश की गई, तो कहीं आपसी रंजिश को ले कर भी इस तरह की घटना को अंजाम दिया गया.

ये भी पढ़ें- Budget 2020 : विपक्ष को भी नहीं आया समझ, आम-आदमी तो दूर की  बात

जेएनयू मामला

इस तरह की सत्य घटनाओं पर बनी फिल्में सत्य की तह तक पहुंचे बिना नहीं बन सकतीं. लक्ष्मी से मुलाकात के दौरान दीपिका ने महसूस किया कि अधिकांश मामलों में एसिड अटैक को अंजाम युवाओं ने ही दिया. बस, यही कारण है कि अभिनेत्री दीपिका पादुकोण ने  अपनी फिल्म ‘छपाक’ की रिलीज से पहले युवावर्ग से मिलने की सोची और उन के जरिए समाज तक यह संदेश पहुंचा कर जागरूक करने की कोशिश करने की ठानी.

यही धारणा ले कर दीपिका दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी पहुंची. जहां पहले से ही जेएनयू में हिंसा को ले कर हो रहे आंदोलन में शामिल हुईं. हालांकि, छात्र आंदोलन के चलते दीपिका वहां अपनी कोई बात नहीं रख पाईं. उन के जेएनयू पहुंचने से छात्रों को तो एक नई ताकत मिल गई और सोशल मीडिया को मिला इस बहाने एक नया मुद्दा. फिर शुरू हुआ दीपिका पर राजनीति का छपाक. ट्विटर पर टर्रटर्र शुरू हो चुकी थी. अखबारों की हैडलाइंस तय हो चुकी थीं, और इसे ले कर हर चैनल पर टीवी डिबेट भी शुरू हो चुकी थी.

ये भी पढ़ें- हिन्दूवादी नेताओं के कत्ल की जमीन

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के छात्रों से मिलने पहुंचीं दीपिका को क्या कुछ नहीं  झेलना पड़ा. किसी ने उन्हें देशद्रोही ठहराया, तो किसी ने टुकड़ेटुकड़े गैंग का सदस्य बताया, कोई फिल्म के प्रमोशन हेतु आना सम झ रहा है, कोई इस हिम्मती कदम की दाद दे रहा है तो कोई खामियां निकालते हुए फिल्म का बहिष्कार करने को बोल रहा है.

छात्रों के बीच पहुंच कर दीपिका कुछ बोली नहीं. सिर्फ अपनी मौन अभिव्यक्ति दी. अच्छा होता कि वे राजनीतिक बयानबाजी को दरकिनार कर खुल कर बोलतीं. वैसे भी एसिड अटैक सर्वाइवर का दर्द महसूस कर चुकीं दीपिका पादुकोण जैसी अभिनेत्री के लिए इस दलगत राजनीति का छपाक बरदाश्त करना कोई बड़ी बात नहीं.

न्यूयार्क के स्टूडेंट्स के लिए Anupam Kher ने होस्ट की स्पेशल एक्टिंग क्लास

Anupam Kher एक ग्लोबल आइकन हैं जिनकी स्टारडम के बारे में सभी जानते हैं. ना सिर्फ बौलीवुड में बल्कि वेस्ट में भी उनका बहुत नाम है. बहु-प्रतिभाशाली अभिनेता ने 500 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया है और Entertainment Industry के सबसे प्रसिद्ध नामों में से एक हैं.

अनुपम खेर हाल में ही न्यूयार्क विश्वविद्यालय में मौजूद थे, जहां उन्होंने टिस्क स्कूल औफ आर्ट्स के अंडरग्रेजुएट ड्रामा विभाग में मीसनेर स्टूडियो में तीसरी वर्ष की क्लास से बात की. यह पहली बार नहीं है जब अभिनेता ने एक विश्वविद्यालय में छात्रों के साथ बातचीत की है, पहले भी वह अन्य लोगों के बीच औक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और कोलंबिया विश्वविद्यालय जैसे सम्मानित विश्वविद्यालयों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुके हैं. अनुपम खेर ने अक्सर व्यक्त किया है कि वह अपने जीवन और करियर के अनुभवों को अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों के साथ शेयर करना पसंद करते हैं.

ये भी पढ़ें- Bigg Boss 13 : सलमान ने सिडनाज को दिया ये खास टैग

उन्होंने बताया कि वो फिल्में कैसे कर पाए और आज यह उन्हें कहां ले आया है. खेर ने खुलासा किया कि छात्रों को उनके द्वारा दिए गए कई आईडिया उनके दादा द्वारा उन्हें दिए गए थे. एक अलग पीढ़ी से आने के बावजूद, अनुपम खेर को वहां मौजूद लोगों के साथ जुड़ने में ज्यादा समय नहीं लगा और साथ ही साथ उन्होंने स्टूडेंट्स को प्रेरित भी किया. एनवाईयू में छात्रों के साथ बातचीत करने के अपने अनुभव के बारे में बात करते हुए, अभिनेता ने कहा, “न्यूयार्क विश्वविद्यालय में ऐसे प्रतिभाशाली छात्रों से बात करना शानदार अनुभव था. वे सभी इतने उज्ज्वल और प्रतिभाशाली हैं; उनके साथ अपने क्राफ़्ट और फिल्मों में मेरे अनुभव को शेयर करके ख़ुशी मिली. मुझे उम्मीद है कि आगे चलकर ये उनकी मदद करेगा.

न्यूयार्क विश्वविद्यालय के आर्ट्स स्कूल के अंडर ग्रेजुएट ड्रामा के प्रोफेसर शांगा पार्कर, एसोक ने वहां के स्टार की उपस्थिति के बारे में बात की और कहा, “अनुपम खेर ने अपने जीवन और करियर के बारे में भावुकता से बात की, कि वह एक्टिंग में कैसे शामिल हुए, और यह उन्हें कहां ले आया. उन्होंने छात्रों के इस ग्रुप से इतने व्यक्तिगत और मार्मिक तरीके से बात की कि वे हमेशा के लिए प्रेरित होंगे. मैं श्री खेर का आभारी हूं कि उन्होंने आज छात्रों से बात करने का समय दिया.”

ये भी पढ़ें- बिग बौस 13 : शहनाज और सिद्धार्थ की दोस्ती में आई दरार

Bigg Boss 13 : सलमान ने सिडनाज को दिया ये खास टैग

कलर्स पर प्रसारित होने वाला शो Bigg Boss 13 में दर्शकों के धमाकेदार ट्विस्ट देखने को मिल रहे हैं. जी हां और इस शो में Weekend Ka Vaar का फैन्स को बेसब्री से इंतजार रहता है.  क्योंकि Salman Khan कंटेस्टेंट्स के साथ मस्ती करते हैं और उनकी क्लास भी लगाते हैं. तो चलिए आपको बताते हैं इस Weekend Ka Vaar में क्या हुआ.

इस शो के आज के एपिसोड में आप देखेंगे कि Salman Khan शहनाज को Siddharth Shukla की मिमिक्री करने के लिए कहेंगे. शहनाज बहुत ही शानदार तरीके से सिद्धार्थ की मिमिक्री करेंगी. सिद्धार्थ  कैसे  चलते है, कैसे बोलते है, कैसे बैठते है, यहां तक की उनके स्टाइल से लेकर एटिट्यूड की भी बेहतरीन तरीके से मिमिक्री करेंगी. शहनाज के इस एक्टिंग पर सिद्धार्थ और सभी घरवाले हंसते-हंसते लोट पोट हो जाएंगे.

ये भी पढ़ें- Valentine’s Special : बौलीवुड की मस्तानी अपने प्यार के साथ  वेलेंटाइन डे मनाने पहुंची विदेश

https://www.instagram.com/p/B8WttKzB8-d/?utm_source=ig_web_copy_link

शहनाज की एक्टिंग देखकर सलमान खान दोनों के एक खास टैग देंगे. सलमान ये कहेंगे कि आप दोनों को कोई अलग नहीं कर सकता है. आप दोनों ‘दो जिस्म एक जान हो’.  और फिर सलमान खान शहनाज और सिद्धार्थ से एक दूसरे की एक्टिंग करने के लिए कहेंगे.

पिछले एपिसोड में आपने देखा कि घर में शहनाज से सिद्धार्थ शुक्ला से दोस्ती को लेकर पूछा जाता है तो वह दावा करती हैं कि वह सिद्धार्थ से भावुक तौर पर जुड़ी हैं, लेकिन फिर बाद में वह सिद्धार्थ के दुश्मन ग्रुप के साथ जाकर बैठती हैं. वहीं उनकी और सिद्धार्थ की दोस्ती पर जब सवाल उठाया गया और पूछा गया कि क्या यह सिर्फ गेम के लिए हैं, जिसे वह मान लेती हैं. इसके बाद सिद्धार्थ उनसे बहस करने लगते हैं.

ये भी पढ़ें- Bigg Boss13 : फिनाले के बाद सिद्धार्थ शुक्ला और रश्मि देसाई इस शो में एक

अब आज के एपिसोड में ये देखना दिलचस्प होगा कि सिद्धार्थ किस तरह शहनाज गिल की मिमक्री करेंगे. तो वहीं इस हफ्ते बिग बौस का ग्रैंड फिनाले भी है.

तीज 2022: ग्लैमर बढ़ा दे ग्लैमरस मेकअप

एक साधारण चेहरे को खूबसूरत और आकर्षक दिखाने में मेकअप की भूमिका बेहद महत्त्वपूर्ण होती है. ऐसे में जब पार्टियों व शादियों का सीजन हो तो हर लड़की ग्लैमरस दिखना चाहती है. वैसे भी ग्लैमरस लुक फैशनेबल होने का पर्याय है. आइए जानें ग्लैमरस लुक के लिए मेकअप तकनीक व हेयरस्टाइल की जानकारी नवरंग प्रोफैशनल सैलून ऐंड इंटरनैशनल ब्यूटी ऐकैडमी की मेकअप आर्टिस्ट डा. कंचन मेहरा से.

फेस मेकअप

ग्लैमरस मेकअप किसी भी चेहरे को यंग लुक देने के साथसाथ पार्टी लुक भी देता है. ग्लैमरस मेकअप में स्किनटोन से ऊपर काम किया जाता है. चेहरे पर ग्लो लाने के लिए मेकअप की शुरुआत प्राइमर लगाने से की जाती है. अगर प्राइमर न हो तो मौइश्चराइजर का भी प्रयोग किया जा सकता है.

प्राइमर त्वचा की फाइन लाइंस व झुर्रियों को कम करने का काम करता है. इस से त्वचा स्मूथ व चिकनी दिखती है और फाउंडेशन ज्यादा देर तक टिका रहता है. अंडरआई सर्कल्स को छिपाने के लिए यैलो कंसीलर लगाएं. मेकअप बेस कम से कम लगाएं. फाउंडेशन का चुनाव करने से पहले स्किनटोन देखें.

फेस कंटूरिंग

चेहरे पर मेकअप खूबसूरत दिखे, इस के लिए फेस कंटूरिंग करें. इस से चेहरे को आकर्षक आकार मिलता है, चेहरा शार्प दिखता है. फेस पर पाउडर पफिंग करने के बाद बेस कलर ले कर कंटूरिंग करें. पहले नाक को शार्प लुक दें. इस तकनीक से छोटी या चौड़ी नाक को पतला दिखाया जा सकता है. अगर माथा चौड़ा है तो उस की भी कंटूरिंग करें.

ये भी पढ़ें- एयर ब्रश मेकअप से पाएं नेचुरल खूबसूरती

फाउंडेशन

बेस मेकअप के लिए त्वचा की रंगत के अनुसार फाउंडेशन चुनें. फाउंडेशन चुनने के लिए जौ लाइन के पास बेस लगा कर देखें. जो शेड त्वचा में अच्छी तरह मिल जाए वही सही बेस है. बेस ब्रश, स्पंज या उंगलियों की सहायता से लगाया जा सकता है. अगर चेहरे पर ओपन पोर्स हैं तो ट्रांसलूसैंट पाउडर से चेहरे को कवर करें. अगर डबल चिन हो तो जौ लाइन व चिन पर सामान्य फाउंडेशन से 2 शेड गहरा बेस लगाएं और उसे नीचे यानी गले की ओर ब्लैंड करें. इसे 2 शेड गहरे कौंपैक्ट या मैट ब्रोंजर की मदद से सैट करें. करैक्शन को बैलेंस करने के लिए वही ब्रोंजर टैंपल या चीकबोंस के नीचे लगाएं.

आई मेकअप

आंखों को शेप देने के लिए उन की भी कंटूरिंग करें. उस के बाद आई बेस लगाएं. फिर पाउडर लगाएं. आंखों के सौकेट एरिया को फ्रेम दें. आंखों को ग्लैमरस लुक देने के लिए ब्लैक और फीरोजी आईशैडो को आंखों की अपर लिड पर लगाएं. नाक को शार्प लुक देने के लिए आंखों पर हाईलाइटर लगाएं. अंत में ब्लैक आईलाइनर लगाएं. लोअर आईलिड पर काजल लगाएं, साथ ही, स्लिम लाइनर भी लगाएं ताकि आंखों को ग्लैमरस लुक मिले. अंत में आईलैशेज पर मसकारा लगाएं.

ब्लशर

चेहरे के कंटूरिंग एरिया पर डार्क ब्लशर लगाएं. हाईलाइटर लगाएं. उस के बाद फिर ब्लशर लगाएं.

लिप मेकअप

होंठों पर लिपस्टिक अधिक देर तक टिके, इस के लिए लौंगलास्टिंग बेस लगाएं. अगर होंठ मोटे हैं तो हलके रंग की लिपस्टिक का प्रयोग करें, अगर पतले हैं तो डार्क शेड लगाएं. यदि होंठों को हलकी चमक प्रदान करना चाहती हैं तो लिपग्लौस का प्रयोग करें.

ग्लैमरस हेयरस्टाइल

ग्लैमरस मेकअप को संपूर्ण लुक देने के लिए ग्लैमरस हेयरस्टाइल भी जरूरी है. ग्लैमरस हेयरस्टाइल के लिए टोंग्स, कर्ल्स, या जूड़ा भी बनाया जा सकता है. ग्लैमरस लुक के इस हेयरस्टाइल में सैंटर के बालों से कर्ल्स बनाए गए हैं और पीछे के बालों से टोंग्स बनाए गए हैं.

बचे बालों से पोनीटेल बना कर डोनर लगाया गया है. जूड़े के साइज के अनुसार चारों तरफ से पिनों द्वारा लौक किया गया है. चारों तरफ से स्टफिंग को लौक कर दिया गया है. यह लुक किसी भी पार्टी या विवाह में आप को ग्लैमरस लुक देगा.

ये भी पढ़ें- 5 टिप्स : सर्दियों में ऐसे करें अपनी खूबसूरती की देखभाल

 ताकि मिले बेहतर लुक

हेयरस्टाइल के लिए केश साफ होने चाहिए. हेयरस्टाइलिंग करते समय स्टाइलिंग प्रोडक्ट्स का प्रयोग कम करें. गरमी में ज्यादा मूज लगाने से केश औयली दिखते हैं. बैककौंबिंग सही तरीके से करें.

परफैक्ट मेकअप के लिए क्लींजिंग व टोनिंग के बाद स्किन को मौइश्चराइज करना न भूलें ताकि मेकअप पैची न दिखे.

ज्यादा गहरे डार्कसर्कल्स को यलो और पीच टिंटेड कंसीलर से और लाइट सर्कल्स को स्किनटोन से लाइट शेड से ब्रश या उंगली की सहायता से कंसील करें.

चेहरे पर बेस लगाते समय उसे अच्छी तरह मर्ज करें ताकि चेहरा पैची नजर न आए.

ग्लैमरस लुक के लिए टोमैटो रैड, शाइनी औरेंज, ब्राइट ब्रोंज, ब्राइट ऐक्वाग्रीन व रैड जैसे शेड्स की लिपस्टिक का इस्तेमाल करें. लिप्स को हाईलाइट करने के लिए उन्हें लिपग्लौस का टच जरूर दें. इस के लिए नैचुरल या शाइनी लिपग्लौस चुनें.

ग्लैमरस लुक के लिए आंखों को स्मोकी लुक दें. इस के लिए 3 रंगों का चयन करें. रंगों का चुनाव ड्रैस, पार्टी थीम व स्किनटोन के अनुसार करें. आप चाहें तो ब्लैक ग्रे या ब्राउन और ब्रोंज का कौंबिनेशन भी चुन सकती हैं.

Valentines’ Special : प्यार के इकलौते युवा त्यौहार पर धर्म का डंडा- भाग 1

जब त्योहारों का नाम आता है तो हमारे दिमाग में आती है दीवाली, दशहरा, होली या रक्षाबंधन. इन त्योहारों की हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार मान्यता होने के साथसाथ इन्हें सांस्कृतिक होने का दर्जा प्राप्त है. लेकिन, वैलेंटाइन डे ऐसा दिन है जिसे सालों से अश्लीलता फैलाने का जरिया बता कर बदनाम किया जाता रहा है. वैलेंटाइन डे वह दिन है जिसे असांस्कृतिक व असभ्य घोषित करने की जद्दोजेहद भगवाधारी, ब्राह्मण वर्ग, दक्षिणपंथी यानी राइट विंग और धर्म की पैरवी करने वाले सालों से करते आ रहे हैं.

कुछ लोगों का कहना है कि यह दिन भारतीय संस्कृति के खिलाफ है. यदि कपल्स सार्वजनिक जगह पर हाथ पकड़े बैठे हैं, एकदूसरे को गले लगा रहे हैं तो लोग उन्हें अश्लील बोलते हैं. लेकिन, उन लोगों से कोई यह क्यों नहीं पूछता कि हिंदू धर्म के अनुसार विष्णु, इंद्र, व्यास द्वारा जब दूसरे की पत्नियों से उन की मरजी के बिना संबंध बनाया जा रहा था, तो क्या उस में अश्लीलता नहीं थी? उन्हें सिरमाथे लगाना और जब वही काम मानुष करे तो लातघूंसे बरसाना कहां की रवायत है?

ये भी पढ़ें- प्रतिभा के सदुपयोग से जीवन सार्थक

वैलेंटाइन डे को प्यार का दिन कहा जाता है. इस दिन प्रेमी एकदूसरे से मिल कर अपने प्यार का इजहार करते हैं, तोहफे देते हैं, साथ घूमतेफिरते हैं और वक्त बिताते हैं. यह साल का एकलौता ऐसा दिन है जो प्रेमियों के लिए खास होता है. वे इस दिन का महीनों पहले से इंतजार करते हैं. परंतु सिर्फ वे ही नहीं हैं जिन्हें इस दिन का बेसब्री से इंतजार होता है, बजरंग दल, आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद, श्रीराम सेना, कर्णी सेना और शिवसेना जैसे कितने ही दल हैं जो इस दिन इंतजार करते हैं लेकिन ये प्रेम के दीवानों को मारनेपीटने, डरानेधमकाने, राखी बंधवाने आदि का काम करते हैं. इन संगठनों से जुडे़ लोग वैलेंटाइन डे पर बैन लगाने का नारा लगाते हैं, इस दिन किसी भी लड़केलड़की को वे हाथ पकड़े भी देख लें तो उस की पिटाई कर देते हैं.

कृष्ण को भी तो प्रेम करते दिखाया गया है, वे राधा ही नहीं अन्य गोपियों के साथ भी खिलवाड़ करते थे. यह कैसी संस्कृति थी कि प्रेम राधा से जबकि रासलीला गोपियों से. लेकिन, आज उन्हीं कृष्ण के भक्त दूसरे भक्तों यानी प्रेमियों से मारपीट करते हैं. प्रेमियों का प्रेम करना संस्कृति के खिलाफ भला कैसे हुआ? क्या भारतीय संस्कृति में प्रेम करना अपराध है या किसी भी संस्कृति में प्रेम गलत है? प्रेम गलत कैसे हो सकता है? प्रेम तो किसी से भी हो सकता है. पर यह इस देश की और इन संस्कृति रक्षकों की हिपोके्रसी या कहें दोगलापन ही है जिस के चलते शादी के बाद तो प्रेम, बच्चे सब करो पर शादी से पहले प्रेम सोच भी लिया तो तुम चरित्रहीन से कम कुछ नहीं.

यदि प्रेम करना संस्कृति के खिलाफ है तो क्यों मंदिरों में राधाकृष्ण के प्रेम का बखान किया जाता है? भारतीय संस्कृति पर इस का असर हो या न हो लेकिन धर्म के कुछ चरमपंथियों पर इस का असर जरूर पड़ता है, तभी तो हर साल 14 फरवरी को ये अपनी सेना ले कर वैलेंटाइन डे के विरोध में निकल पड़ते हैं, जैसे कोई और कामधाम न हो, बस, यही एक मकसद है जीवन में जो उन्हें पूरा करना है.

ये भी पढ़ें- समाचारपत्र व पत्रिकाओं के नाम : न काम, न धाम, न दाम

दलों की दखलंदाजी

दो प्रेमी यदि साल में किसी एक दिन बैठ कर अपने प्यार की पतंगें उड़ा रहे हों तो उन की डोर काटने के लिए आखिर ये दल इतने तत्पर क्यों रहते हैं? इन्हें प्रेमीप्रेमियों से इतनी चिढ़ क्यों है? पिछले वर्ष हैदराबाद में बजरंग दल के कुछ कार्यकर्ताओं ने एक लड़केलड़की को पार्क में देख लड़के से लड़की को मंगलसूत्र पहनवाया. इन कार्यकर्ताओं ने उन दोनों के साथ न सिर्फ इस तरह का गैरकानूनी व्यवहार किया बल्कि उन की वीडियो भी बनाई. इन लोगों के अनुसार, लड़केलड़की को शादी से पहले प्यार करने का कोई हक नहीं है, सैक्स करने का हक नहीं है, साथ घूमने का हक नहीं है, सार्वजनिक स्थान पर हाथ पकड़ने का या गले लगाने का हक नहीं है. हक क्यों नहीं है, क्योंकि इन के अनुसार, यह संस्कृति के खिलाफ है और पश्चिमी सभ्यता की देन है.

2009 में मैंगलोर में वैलेंटाइन वीक के दौरान श्रीराम सेना के सदस्यों द्वारा एक क्लब से लड़कियों को घसीटते हुए बाहर निकाला गया, उन से मारपीट की गई. कारण था कि वे जरूरत से ज्यादा आजाद हैं, अश्लीलता फैला रही हैं और यह सब भारतीय संस्कृति के खिलाफ है. इस के खिलाफ ‘पिंक चड्डी’ के नाम से कैम्पेन भी चलाया गया जिस में हजारों की तादाद में महिलाओं ने श्रीराम सेना के औफिसों में पिंक पैंटीज मेल कीं. यह कैम्पेन उन दलों के मुंह पर तमाचा था जिन के अनुसार लड़कियों को उन की सैक्सुअल चौइसैस का अधिकार नहीं है.

ऐसे बनाएं स्पाइसी कौर्न

आज हम आपको स्पाइसी  कौर्न की रेसिपी बतातेे हैं, जो खाने में बहुट टेस्टी है और इसे आसानी से आप स्नैक्स के लिए बना भी सकते हैं. तो देर किस बात की, चलिए जानते हैं स्पाइसी कौर्न  की  रेसिपी.

सामग्री

लाल शिमला मिर्च (20 ग्राम)

हरी मिर्च (आधा चम्मच)

चम्मच लहसुन (तीन चौथाई)

मक्के का आटा (ढाई चम्मच)

सफेद मिर्च का पाउडर (आधा चम्मच)

चिली औइल (आधा चम्मच)

कौर्न (150 ग्राम)

सोया सौस (आधा चम्मच)

आधा चम्मच ब्राथ पाउडर

थोड़ी सी चीनी

रिफाइन्ड औइल आवश्यकतानुसार

2 चम्मच कटा प्याज

तीन चौथाई चम्मच अदरक

1 चम्मच मैदा

नमक स्वादानुसार

ये भी पढ़ें- Valentine’s Special : इस मौके पर कुकिंग से जीतें उन का दिल

 बनाने की वि​धि

सबसे पहले कौर्न को गर्म पानी में कुछ देर के लिए उबाल लें और फिर ठंडा होने के लिए एक तरफ रख दें.

फिर उसमें मैदा, मक्के का आटा, नमक और सफेद मिर्च पाउडर डालें व अच्छी तरह से मिलाएं.

अब एक गहरे तले वाला फ्राइंग पैन लें और उसमें थोड़ा सा रिफाइन्ड औइल मध्यम आंच पर गर्म करें.

कौर्न को फ्राई कर लें और फिर उन्हें अब्जौर्बेंट पेपर पर निकालकर अतिरिक्त तेल सोखने दें.

दूसरा बर्तन लें, उसमें अदरक, लहसुन,  हरी शिमला मिर्च डालें और कुछ देर पकाएं.

अब इसमें क्रिस्पी फ्राइड कौर्न डालें. 1-2 मिनट तक चलाएं और अपनी पसंद अनुसार गार्निश कर सर्व करें.

ये भी पढ़ें- ब्रेकफास्ट रेसिपी: ओट्स आमलेट

कमल मीणा परिवार ने खेती में अपनाए प्राकृतिक तौर तरीके

भरतपुर जिले की भरतपुरबयाना सड़क पर गांव पना के पास कमल मीणा परिवार ने अपने 16 बीघा खेत यानी फार्महाउस में विभिन्न प्रकार के फल व फूलदार पौधे, औषधीय व सब्जियों और खाद्यान्नों की फसलें लगा कर किसानों के लिए समन्वित खेती का बेहतरीन उदाहरण सामने रखा है.

उन्होंने अपने खेत में कैमिकल खाद व कीटनाशक दवाओं के बजाय प्राकृतिक विधि को अपनाया है, ताकि खाद्य पदार्थों में जहरीले तत्त्व न हों.

गांव पना में कमल मीणा के इस फार्महाउस को लोग मिनी कृषि विश्वविद्यालय के नाम से अधिक जानते हैं. इस मिनी कृषि विश्वविद्यालय को रोजना दर्जनों लोग देखने आते हैं, ताकि वे इन विधियों को अपने खेतों पर अपना कर आमदनी बढ़ा सकें.

वैसे तो कमल मीणा सरकारी सेवा में हैं. जब उन्होंने सेवा के दौरान पंजाब, हरियाणा और दक्षिणी राज्यों का दौरा किया तो वहां देखा कि किसान परंपरागत खेती के स्थान पर अधिक आमदनी देने वाली औषधीय, फलफूलों व सब्जियों की खेती कर के अधिक मुनाफा कमा रहे हैं.

इसी तर्ज पर उन्होंने अपने खेतों में अधिक आमदनी देने वाली फसलें उगाने का मन बनाया, जिसे भरतपुर की लुपिन फाउंडेशन नामक स्वयंसेवी संगठन ने तकनीकी जानकारी दी और उन्नत किस्म के फल व फूलदार पौधे और खाद्यान्नों के बीज मुहैया कराए. उन्होंने अपने फार्महाउस के चारों तरफ की तकरीबन

8 फुंट ऊची दीवार बनाई, ताकि फार्महाउस में लगाई जाने वाली फसलें महफूज रह सकें.

फल व फूलदार पौधे बने अधिक आमदनी का जरीया

गांव पना के सड़क के किनारे बने कृषि फार्महाउस में कमल मीणा ने मलिहाबाद लखनऊ से ललित, कोलकाता से थाई 7, सवाई माधोपुर से बर्फखान व धवन किस्मों के अमरूद के पौधे ला कर लगाए. ये पौधे अभी डेढ़ साल के हैं. जब वे फल देने लगेंगे, तो निश्चय ही तकरीबन 5 लाख रुपए की आमदनी शुरू हो जाएगी.

इसी प्रकार उन्होंने पुष्कर से जामुन, सऊदी अरब से खजूर के पौधे मंगा कर लगाए और काजरी से बेर के रैड कश्मीरी एपल किस्मों के और नीबू के सीडलैस व कागजी किस्मों के पौधे मंगवा कर अपने फार्महाउस में लगाए.

ये भी पढ़ें- पाले से कैसे करें फसलों की सुरक्षा

इस के अलावा कमल मीणा ने अपने फार्महाउस में आंवला, अनार, चीकू, शहतूत, सहजन, कचनार, अमलतास के अलावा इमारती लकड़ी व सजावटी किस्मों के सागवान, नीम, फाइकस, मछलीपाम, पाम, अर्जुन, शीशम, बांस वगैरह के पौधे लगाए हैं.

फूलदार पौधों से महका फार्महाउस

कृषि फार्महाउस में गुलाब, गेंदा, मोरपंखी, बारहमासी समेत विभिन्न किस्मों के फूलदार पौधे लगाए हैं, जिस से पूरा फार्महाउस महक रहा है. इन फूलों की बिक्री से कमल मीणा के परिवार को हर महीने तकरीबन 8,000 से 10,000 रुपए की आमदनी अलग से  हो जाती है.

जैविक सब्जियां व खाद्यान्न बिक रहे हैं अधिक दामों पर

कमल मीणा ने अपने फार्महाउस पर गेहूं की देशी किस्म के बंशी, काली मूंछ वाला, बोधका व काला प्रजाति के गेहूं और देशी किस्म के चना व मसूर की बोआई की है, वहीं सब्जियों में मिर्च, बैगन, टमाटर, गाजर, मेथी, मटर, पालक, धनिया, बथुआ, पत्तागोभी, फूलगोभी, लहसुन व प्याज के साथ गन्ना भी लगा रखा है.

इन सभी फसलों में कैमिकल खादों और कीटनाशक दवाओं के स्थान पर जैविक खाद व डाक्टर सुभाष पालेकर द्वारा विकसित की गई प्राकृतिक कृषि विधि को अपनाया है. सब्जियों और खाद्यान्न की बिक्री से उन्हें हर साल 3 लाख से 4 लाख रुपए की आमदनी हासिल हो रही है.

औषधीय सतावर की खेती से 6 लाख की हुई आमदनी

गांव पना के कमल मीणा ने अपने फार्महाउस में तकरीबन आधा एकड़ खेत में औषधीय फसल सतावर लगाई, जिन की जड़ों की बिक्री से उन्हें आसानी से 6 लाख रुपए की आमदनी हासिल हो गई. वे अपने फार्महाउस में दूसरे औषधीय पौधे भी इस साल लगाएंगे, जिस के लिए जमीन तैयार कर ली गई है.

खुद बनाते हैं प्राकृतिक कीटनाशक व जैविक खाद

‘पद्मश्री’ अवार्ड से नवाजे गए डाक्टर सुभाष पालेकर के टे्रनिंग कैंप में कमल मीणा ने प्राकृतिक खेती की तकनीकी जानकारी हासिल की. लुपिन फाउंडेशन के कृषि वैज्ञानिकों की देखरेख में कमल मीणा ने प्राकृतिक कीटनाशक जीवामृत, नीमास्त्र, अग्नि अस्त्र, दशापणी अर्क, ब्रहा्रास्त्र वगैरह तैयार किया और खुद की फसलों, फल व फूलदार पौधों पर छिड़काव करते हैं, ताकि कीटनाशक दवाओं से उत्पाद जहरीले नहीं हो सकें. कैमिकलखादों के स्थान पर उन्होंने वर्मी कंपोस्ट का प्रयोग करने के लिए अपने फार्महाउस पर वर्मी कंपोस्ट यूनिट लगा रखी है.

खेती में आधुनिक उपकरणों का कर रहे हैं इस्तेमाल

कमल मीणा ने अपने फार्महाउस पर सिंचाई के लिए सोलर पंप सैट लगा रखा है और बूंदबूंद व फव्वारा सिंचाई पद्धति का उपयोग करते हैं, ताकि सिंचाई में पानी की बचत हो और उत्पादन बढ़ सके. इस के अलावा वे जुताई के लिए पावर टिलर, गुड़ाई के लिए हैंड हो साइकिल, ट्रिबलर वगैरह का उपयोग कर रहे हैं.

ये भी पढ़ें- मेंथा उगाएं आमदनी बढ़ाएं

दुधारू पशु भी आमदनी में बन रहे हैं मददगार

कमल मीणा ने अपने फार्महाउस में गिर नस्ल की गाय और मुर्रा नस्ल की भैंसें पाल रखी हैं, जिन्हें हरा चारा मुहैया कराने के लिए बरसीम व कांचनी भी अपने फार्महाउस में लगा रखी है. दूध बेचने से उन्हें हर दिन 800 से 1,000 रुपए की खालिस आमदनी हासिल हो रही है.

आउटलेट बनाएंगे फार्महाउस के बाहर

गांव पना के कमल मीणा अपने फार्महाउस के बाहर जल्दी ही आउटलेट बनाएंगे और फार्महाउस में उत्पादित सागसब्जियां, फल, फूल व दूध वगैरह को बेच सकें, ताकि लोगों को कीटनाशक व कैमिकल खाद से रहित शुद्ध उत्पाद मिल सकें.

प्यार में पर्सनल स्पेस है जरूरी

हर कोई चाहता है कि उस का पार्टनर उस की केयर करे, जिंदगी के हर मोड़ पर उस का साथ दे, उस से हरेक बात शेयर करे. पर क्या आप जानते हैं प्यार के साथसाथ पार्टनर को पर्सनल स्पेस देना भी जरूरी होता है, तभी पार्टनर के साथ आप की अच्छी बौंडिंग होती है.

आकाश और सौम्या की लव मैरिज हुई. सौम्या जौब करती थी जबकि आकाश का अपना बिजनैस था. आकाश ज्यादा से ज्यादा समय सौम्या के साथ बिताना चाहता था. सौम्या औफिस के कामों की वजह से फोन पर ज्यादा बिजी रहती थी. ऐसे में आकाश को बुरा लगता था. आखिरकार, वह सौम्या पर शक करने लगा. आकाश उस के मैसेजेस, कौल्स की डिटेल्स जानने की हर वक्त कोशिश करता. जब भी सौम्या का फोन उस के हाथ लगता, वह कौल्स और मैसेज चैक करने लगता. एक दिन सौम्या ने आकाश को फोन चैक करते हुए देख लिया. सौम्या को यह बात बहुत बुरी. लगी पर उस ने कुछ नहीं कहा.

धीरेधीरे सौम्या को महसूस हुआ कि आकाश उस के कलीग्स और बौस के बारे में काफी पूछताछ करता है. किस का कौल था, किस से बात की… वगैरहवगैरह पूछता रहता है. वह औफिस में क्या काम करती है, किसकिस से मिलती है, आकाश उस के बारे में ये सारी डिटेल्स जानने के लिए कुछ ज्यादा ही उत्सुक रहने लगा.

ये भी पढ़ें- ब्रेकअप तेरे कितने रूप

सौम्या आकाश के इस व्यवहार से बहुत दुखी हुई. उस ने आकाश को सम झाना चाहा कि औफिस में रह कर वह हर वक्त आकाश के साथ बातचीत नहीं कर सकती. वहां उस की अलग रिस्पौंसिबिलिटीज हैं, शादी से बाहर भी उस की दुनिया है. प्यार का मतलब यह नहीं होता कि पर्सनल स्पेस ही खत्म हो जाए. लेकिन आकाश नहीं सम झा. नतीजा यह हुआ कि 3 महीने के अंदर ही उन के बीच लड़ाई झगड़ा शुरू हो गया और उन की शादी टूट गई.

आकाश और सौम्या की तरह ऐसे कई पार्टनर्स होंगे जिन में आपस में ‘पर्सनल स्पेस’ को ले कर तूतू, मैंमैं होती होगी. लेकिन, अगर आप इस बात को समय के साथ सम झ जाते हैं कि आप के पार्टनर को प्यार के साथसाथ स्पेस भी चाहिए तो आप का रिश्ता और भी ज्यादा मजबूत होगा. इसलिए अपने पार्टनर को पर्सनल स्पेस जरूर दें.

पार्टनर को ले कर न हों पजैसिव

कई बार आप को लगता है कि पार्टनर के बारे में सारी बातें जानने का आप को अधिकार है. अगर वह कुछ बातें आप से शेयर नहीं करना चाहता है तो आप उस के पीछे पड़ जाते हैं, उस की जासूसी करने लगते हैं. कहीं न कहीं आप उसे ले कर पजैसिव हो जाते हैं. आप को लगता है कि आप का पार्टनर धोखा दे रहा है. यह सब सोच कर आप खुद को ही परेशान करते हैं. ऐसे में आप के बीच दूरियां बढ़ेंगी और आप का रिश्ता कमजोर होगा.

किसी भी काम के लिए न करें जबरदस्ती

अगर आप अपने पार्टनर से सच्चा प्यार करते हैं तो किसी भी काम के लिए उस से जबरदस्ती न करें. उस के समय और उस पर काम के बो झ को देखतेसम झते हुए अपनी फरमाइशें रखें. सच्चे प्यार की यही निशानी होती है कि पार्टनर को आगे बढ़ने में मदद करें. उस के काम के लिए भी समय दें. इस से आप का रिश्ता मजबूत होगा.

हर समय न करें जासूसी

दोस्तों के साथ आज बाहर खाने गए थे? कहां गए थे? क्या खाया? औफिस में बौस से बात होती है? औफिस में तुम्हारा सब से अच्छा दोस्त कौन है? शाम को जब आप दोनों साथ होते हैं तो इस तरह की बातें आप के बीच भी जरूरी होती होंगी. ऐसी बातें आप की मैरिड लाइफ का हिस्सा होती हैं. लेकिन, इन बातों की भी एक सीमा होती है. उस सीमा का खयाल रखना बहुत जरूरी है. आप की बातों से आप के पार्टनर को यह न महसूस होने लगे कि आप उस के प्यार और विश्वास को शक की निगाह से देख रहे हैं. उसे ऐसा न लगे कि आप उस की जासूसी कर रहे हैं, क्योंकि ऐसी भावना पनपने पर रिश्ते टूटने की ज्यादा संभावना होती है.

ये भी पढ़ें- डबल डेटिंग का डबल मजा

असहजता का शिकार न बनें, न बनाएं

कई बार आप अपने पार्टनर की जिंदगी में इतना ज्यादा दखल देने लगते हैं कि वह परेशान हो जाता है और यह रिश्ता उसे बो झ लगने लगता है. पार्टनर की जिंदगी में इतनी ताक झांक करना भी जायज नहीं है. कभीकभी आप स्वयं बहुत असहज होते हैं. असहजता अपने पार्टनर पर बेकार के शक या उस के प्रति बहुत ज्यादा पजैसिव होने से पैदा होती है और इस कारण से आप अपने पार्टनर की लाइफ में ताक झांक करने लगते हैं और सवाल पर सवाल पूछने लगते हैं. अगर आप ऐसा करते हैं तो यह आप के रिश्ते को खत्म कर देगी. इसलिए इस बात का जरूर ध्यान रखें कि अपनी असहजता के चलते अपने पार्टनर से ज्यादा सवाल न करें.

आप अपने पार्टनर पर भरोसा रखें और उस को पर्सनल स्पेस दें. रिश्तों में स्पेस देने से प्यार और ज्यादा बढ़ता है. स्पेस देने से एकदूसरे पर विश्वास भी बढ़ता है. प्यार और सपोर्ट से ही आप के रिश्ते की नींव मजबूत होगी. याद रखिए विश्वास ऐसा धागा है जो रिश्तों को लंबे समय तक बांधे रखता है. अगर आप अपने पार्टनर पर विश्वास करते हैं तो वह खुद आप से कुछ नहीं छिपाएगा, बल्कि सहज हो कर घरऔफिस की सारी बातें आप से शेयर करेगा. लेकिन जब आप उस पर शक करने लगेंगे, उस की जासूसी करने लगेंगे, हर वक्त उस पर नजर रखने लगेंगे, उस का फोन और मेल चैक करते रहेंगे, तो वह यह सोच कर तमाम बातें छिपाने लगेगा कि पता नहीं उस की किस बात को आप किस रूप में लें. धीरेधीरे आप पर उस का विश्वास और प्यार भी कम होता जाएगा और आप दोनों के बीच खामोशी व तनाव व्याप्त हो जाएगा, जो आप की अच्छीभली जिंदगी और खुशी को खत्म कर देगा.

ये भी पढ़ें- तलाकशुदा माता-पिता बच्चे को कैसे दें खुशहाल जीवन

पौजिटिव  हो कर देखें तो थोड़े समय के लिए अलग हो कर बिलकुल एकांत में अपने काम करना न केवल आप के पार्टनर के लिए, बल्कि आप के लिए भी अच्छा है. इस से आप की निजी जिंदगी और एक कपल की जिंदगी दोनों में संतुलन बनता है. आप अपनी लाइफ के हर पहलू को जी सकते हैं.

दब गया ममता का सुर

18 जनवरी, 2016 को थाना कलानौर पुलिस को हरियाणा पुलिस कंट्रोल रूम से सूचना मिली कि बनियानी गांव के पास एक खेत में महिला की लाश पड़ी है. खबर मिलते ही कलानौर के थानाप्रभारी पुलिस टीम के साथ बनियानी गांव पहुंच गए. जहां लाश पड़ी थी, वहां काफी लोग जमा थे. जिस खेत में लाश पड़ी थी, वह बनियानी गांव के ही लाला का था.

गांव वालों ने पुलिस को बताया कि मरने वाली महिला का नाम ममता शर्मा है और वह हरियाणवी भजन और लोकगीत गाती हैं. पुलिस ने लाश का मुआयना किया तो पता चला कि उस का गला कटा हुआ है. इस के अलावा उस के सीने पर भी कई घाव थे.

जिस बनियानी गांव में यह लाश मिली थी, वह गांव प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर का था. इस के अलावा मरने वाली महिला एक जानीमानी लोकगायिका थी. मामला तूल न पकड़ ले, यह सोच कर थानाप्रभारी ने इस बात की जानकारी तुरंत अधिकारियों के अलावा फोरैंसिक टीम को दे दी. मृतका ममता शर्मा को सभी जानते थे. वह रोहतक के कलानौर कस्बे के डीएवी चौक की रहने वाली थीं. पुलिस ने ममता शर्मा के घर वालों को भी घटना की सूचना दे दी थी.

सूचना पा कर एसपी पंकज नैन, डीएसपी रोहताश सिंह भी घटनास्थल पर पहुंच गए थे. फोरैंसिक टीम ने भी पहुंच कर अपना काम शुरू कर दिया था. कुछ देर में मृतका का बेटा भारत शर्मा और पति कुछ लोगों के साथ वहां पहुंच गए थे. लाश देख कर वे फफकफफक कर रोने लगे थे. एसपी पंकज नैन ने मृतक के घर वालों को सांत्वना दे कर बातचीत शुरू की.

इस बातचीत में 20 वर्षीय मृतका के बेटे भारत शर्मा ने बताया कि उस की मां को गोहाना की गऊशाला में मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम में जाना था. वह 14 जनवरी, रविवार को सुबह साढ़े 8 बजे के करीब मोहित के साथ घर से निकली थीं. मोहित रोहतक की कैलाश कालोनी में रहता है. वह उन का साथी कलाकार था. पिछले 2 सालों से वह उन के साथ काम कर रहा था.

मां के घर से निकलने के 2 घंटे बाद मोहित ने फोन कर के उसे बताया था कि उस की मां रास्ते में ब्रेजा गाड़ी में बैठ कर 2 लोगों के साथ चली गई हैं. उन्होंने जाते समय उस से कहा था कि वह सीधे गोहाना के प्रोग्राम में पहुंच जाएंगी.

पूछताछ में भारत ने पुलिस को बताया कि मोहित उस की मां का साथी कलाकार था, इसलिए उस ने उस की बातों पर विश्वास कर लिया. यह भी सोचा कि मां को कहीं और जाना होगा, इसलिए वह अपने किसी परिचित की ब्रेजा कार से चली गई होंगी.

मोहित गोहाना की उस गऊशाला पहुंच गया था, जहां ममता शर्मा के साथ उस का कार्यक्रम था. ममता को न देख कर उस ने कार्यक्रम के आयोजकों से पूछा. आयोजकों ने बताया कि वह अभी तक नहीं आई हैं. भारत शर्मा ने पुलिस को बताया कि जब मोहित ने उसे बताया कि ममता शर्मा गोहाना प्रोग्राम में नहीं पहुंची हैं तो वह परेशान हुआ. उस ने मां को फोन किया तो उन के फोन की घंटी तो बज रही थी, पर वह फोन नहीं उठा रही थीं.

घर वालों ने अपनी रिश्तेदारियों और अन्य संभावित जगहों पर फोन कर के उन के बारे में पूछा, पर कहीं भी उन का पता नहीं चला. तब थाना कलानौर में उन की गुमशुदगी दर्ज करा दी थी. भारत ने एसपी को बताया कि वह 4 दिनों से थाने के चक्कर लगा रहा था, लेकिन थाने वालों ने कुछ नहीं किया. उन्होंने उन्हें ढूंढने की बिलकुल कोशिश नहीं की.

अगले दिन भी मां के मोबाइल फोन की घंटी बजती रही. यह बात उस ने पुलिस को भी बताई, लेकिन पुलिस ने उन के फोन की भी जांच करने की जरूरत नहीं समझी. अगर पुलिस उन के फोन की जांच करते हुए काररवाई करती तो उस की मां की शायद यह हालत न होती.

एसपी के पास में थाना कलानौर के थानाप्रभारी भी खड़े थे. अपनी लापरवाही सामने आने पर वह सकपका गए. उन के चेहरे का रंग उड़ गया. चूंकि एसपी ने उस समय थानाप्रभारी से कुछ नहीं पूछा, इसलिए एसपी के सामने उन्होंने चुप रहना ही उचित समझा. थानाप्रभारी को मामले का खुलासा करने से संबंधित जरूरी निर्देश दे कर एसपी साहब रोहतक लौट गए.

लाश की शिनाख्त हो चुकी थी, इसलिए थानाप्रभारी ने मौके की जरूरी काररवाई निपटा कर लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया.

अखबारों ने ममता शर्मा की हत्या की खबर को महत्त्व दे कर छापा. इस की वजह यह थी कि एक तो मृतका जानीमानी हरियाणवी लोकगायिका थीं और दूसरे उन की लाश मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर के गांव में मिली थी. बहरहाल, लोकगायिका ममता शर्मा की हत्या की खबर से लोगों में हड़कंप मच गया. लोग कानूनव्यवस्था पर अंगुली उठाने लगे.

कई कलाकारों की हो चुकी है हत्या

एक वजह यह भी थी कि करीब 3 महीने पहले हरियाणवी सिंगर हर्षिता दहिया की पानीपत में गोली मार कर हत्या हुई थी. भले ही उस की हत्या उस के जीजा ने की थी, पर किसी कलाकार की हत्या होना कानूनव्यवस्था पर तो प्रश्नचिह्न उठाता ही है.

हरियाणा में बढ़ती रेप की घटनाओं से वैसे भी वहां की महिलाएं खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं. पिछले साल हरियाणवी डांसर आरती भौरिया को भी जान से मारने और रेप की धमकी दी गई थी. सोचने वाली बात यह है कि हरियाणा की जो सरकार बेटियों को बचाने की बात करती है, वहीं पर सब से ज्यादा दुष्कर्म की घटनाएं हो रही हैं.

पुलिस के लिए यह मामला एक तरह से चुनौती था. पुलिस ने एक बार फिर मृतका के घर वालों से बात की. उन से पूछताछ के बाद मोहित कुमार से बात की. कार्यक्रम में जाने के लिए मोहित भी उन के साथ घर से निकला था. मोहित ने बताया कि गोहाना जाते हुए रास्ते में उन्हें लाहली गांव के पास ब्रेजा कार सवार 2 युवक मिले थे, जो शायद ममता की जानपहचान वाले थे. वह उन्हीं युवकों के साथ उन की कार में बैठ कर चली गई थीं. उन्होंने कहा था कि वह सीधे गोहाना के प्रोग्राम में पहुंच जाएंगी.

पुलिस ने मोहित से उस ब्रेजा कार का नंबर पूछा तो वह नंबर नहीं बता सका. इस का मतलब लाहली गांव तक ममता शर्मा को देखा गया था. उस के बाद वह कहां गईं, पता नहीं था. कोई क्लू न मिलने पर पुलिस ने मोहित को हिदायत दे कर घर भेज दिया.

पुलिस ने मृतका के फोन की काल डिटेल्स निकलवाई तो पता चला कि 14 जनवरी को लापता होने के बाद उन का मोबाइल फोन 58 घंटे तक औन रहा. पुलिस को संदेह होने लगा कि क्या लापता होने के 3 दिनों बाद तक ममता शर्मा जीवित थीं या फिर उन का फोन 3 दिनों तक किसी के पास था, जिस पर फोन आते रहे.

रोहतक के कस्बा कलानौर की रहने वाली 40 वर्षीया ममता शर्मा के परिवार में 20 साल का बेटा भारत शर्मा और एक बेटी है. पति एक निजी कंपनी में नौकरी करते हैं. संगीत से एमए ममता शर्मा को हरियाणवी भजन और लोकगायकी का पहले से ही शौक था. लेकिन पहले वह व्यावसायिक रूप से नहीं गाती थीं. पर करीब 6 साल पहले उन्होंने स्टेज कार्यक्रम करने शुरू कर दिए. लोगों ने उन के भजन और फोक सौंग बहुत पसंद किए.

धीरेधीरे उन की आवाज और प्रस्तुति लोगों को भाने लगी तो उन्हें कार्यक्रमों में भी बुलाया जाने लगा. वह स्थानीय भाषा में जिस अंदाज में भजन और लोकगीत गातीं तो लोग झूमने लगते थे. धीरेधीरे प्रदेश में उन की पहचान बनती गई और उन के फैंस की संख्या बढ़ती गई.

ममता शर्मा के साथ पहले गोरड़ का एक युवक रहता था. उस ने उन के साथ करीब 4 सालों तक काम किया, पर उस की शादी हो गई तो दोनों में दूरियां बन गईं. इस के बाद ममता ने मोहित शर्मा के साथ काम करना शुरू किया. जब भी दोनों किसी कार्यक्रम में जाते, मोहित ही गाड़ी चलाता था.

ममता के पहले साथी से भी की गई पूछताछ

पुलिस ने गोरड़ के उस युवक से भी पूछताछ की, जो ममता के साथ 4 साल काम करने के बाद किनारा कर गया था. अलगअलग तरीके से की गई पूछताछ के बाद भी उस युवक से हत्या के संबंध में कोई जानकारी नहीं मिल सकी तो पुलिस ने उसे भी घर भेज दिया.

काफी कोशिशों के बावजूद भी पुलिस की जांच आगे नहीं बढ़ रही थी. न ही ऐसा कोई क्लू मिल रहा था, जिस से जांच कर के केस का खुलासा हो सके. आला अधिकारियों का थानाप्रभारी पर काफी दबाव था.

थानाप्रभारी एक बार फिर बनियानी के उस खेत पर उसी जगह पहुंचे, जहां ममता शर्मा की लाश मिली थी. जहां लाश मिली थी, वह रास्ता रोहतक भिवानी रोड से करीब 500 मीटर अंदर की तरफ पड़ता है. जहां लाश मिली थी, वह जगह एकदम सुनसान सी रहती है. पर भाली और बनियानी गांव जाने का यह मुख्य रास्ता है. पुलिस ने इन दोनों गांवों के कुछ संदिग्ध लोगों से भी पूछताछ की, पर नतीजा वही ढाक के तीन पात रहा.

मोहित ने पुलिस को ब्रेजा कार में ममता शर्मा के जाने की बात बताई थी. उस का नंबर नहीं मिला था, इसलिए पुलिस ने सड़कों के किनारे लगे सीसीटीवी कैमरे तलाशने शुरू किए, ताकि उधर से गुजरने वाली ब्रेजा कारों को जांच के दायरे में लाया जा सके. काफी भागदौड़ के बाद भी पुलिस को कोई सफलता नहीं मिल सकी.

अब तक की जांच से पुलिस इस नतीजे पर पहुंची थी कि ममता शर्मा की हत्या किसी नजदीकी ने ही की है. इसलिए थानाप्रभारी ने मृतका के पति और बेटे से एक बार फिर पूछताछ की. उन से यह भी पूछा कि उन की किसी से कोई दुश्मनी तो नहीं है. घर वालों ने ऐसी बात होने से इनकार कर दिया.

इस के बाद पुलिस ने गोपनीय तरीके से ममता शर्मा के पति की जांच कराई कि कहीं उस का किसी महिला से कोई चक्कर तो नहीं है. क्योंकि ऐसे मामलों में भी लोग पत्नी की हत्या करा देते हैं या खुद कर देते हैं. जांच में पता चला कि ममता का पति बेहद सीधा और सरल स्वभाव का है. वह ममता को बेहद प्यार करता था.

पुलिस जिस भी हिसाब से जांच करती, वह फेल हो जाता. घुमाफिरा कर थानाप्रभारी की नजरों में मोहित कुमार ही आ रहा था. उन्होंने उसे एक बार फिर पूछताछ के लिए थाने बुलवा लिया. मोहित ने इस बार भी पुलिस को वही कहानी सुना दी, जो पहले सुना चुका था. वह रटीरटाई कहानी सुनाने के अलावा आगे कुछ नहीं बता रहा था.

थानाप्रभारी को मोहित की इस कहानी पर कुछ शक हुआ तो उन्होंने एसपी पंकज नैन से बात की. उन के निर्देश पर थानाप्रभारी ने मोहित से सख्ती से पूछताछ की तो वह टूट गया. आखिर उस ने स्वीकार कर लिया कि उसी ने ममता शर्मा की हत्या अपने दोस्त संदीप के साथ मिल कर की थी.

उस ने बताया कि बातचीत के दौरान उस की ममता शर्मा से कहासुनी हो गई. 14 जनवरी को वह ममता के साथ गोहाना के कार्यक्रम में जाने के लिए निकला था. रास्ते में उन से उस की कहासुनी हो गई. इसी कहासुनी के बीच कलानौर में स्कूल मोड़ के पास उस ने चाकू से वार कर के उन की हत्या कर दी थी. इस के बाद दोस्त संदीप की मदद से लाश को बनियानी गांव के पास खेत में फेंक आया था.

लाश ठिकाने लगाने के बाद उस ने ममता शर्मा के घर वालों और पुलिस को ब्रेजा कार वाली कहानी सुना दी. पुलिस ने मोहित की निशानदेही पर उस के दोस्त संदीप को भी गिरफ्तार कर लिया था.

दोनों अभियुक्तों को 20 जनवरी, 2018 को अदालत में पेश कर के 24 घंटे के पुलिस रिमांड पर लिया. रिमांड अवधि में पूछताछ में पुलिस को और भी कुछ तथ्य मिलने की उम्मीद है. कथा लिखने तक दोनों अभियुक्त पुलिस हिरासत में थे. – कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें