साल 2016 में डेंगू से हुई एक व्यक्ति की मौत पर कोर्ट ने एतिहासिक फैसला सुनाया है.

यह मामला साल 2016 की है जब एडवोकेट बीपी मिश्रा के बेटे को अस्पताल में भरती कराया गया पर उसे डेंगू है, यह डाक्टरों की टीम नहीं जान सकी. लापरवाही का घोर आलम तो यह रहा कि जिस व्यक्ति को डेंगू था उसे इस से संबंधित दवा न दे कर ऐसी दवाएं दी गईं जो इस बीमारी के लिए घातक होती हैं.

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