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वैटिरिनरी साइंस में बनाएं कैरियर

मनुष्य की तरह पशुपक्षी भी अनेक रोगों के शिकार होते हैं. मनुष्य तो आसानी से अपने दर्द को बयां कर सकता है और डाक्टर भी उस की बीमारी के अनुरूप उस का इलाज करता है, पर जानवर तो बेजबान होते हैं, वे अपनी पीड़ा किसी को नहीं बता सकते इसलिए उन के शारीरिक लक्षणों को देख कर वैटिरिनरी डाक्टर अंदाजा लगा लेते हैं कि पशु की तबीयत खराब है. मनुष्य की तरह पशुओं की बीमारियों को भी डाक्टर टैस्ट करता है और फिर उस का इलाज करता है.

वैटिरिनरी साइंस अपने में एक कंप्लीट साइंस है, इसलिए जिन युवाओं को पशुओं से प्रेम है वे वैटिरिनरी डाक्टर बन कर पशुओं का इलाज कर सकते हैं.

एक वक्त था, जब पशुओं के चुनिंदा अस्पताल और डाक्टर होते थे, इसलिए बहुत से पशु तो बीमारी की वजह से बिना इलाज के मर जाते थे. इसी वजह से कई पक्षियों की तो प्रजातियां ही विलुप्त हो गईं. जानवरों की रक्षा और उन्हें विलुप्त होने से बचाने के लिए ‘वर्ल्ड एनिमल वेलफेयर डे’ 4 अक्तूबर को पूरे विश्व में मनाया जाता है. अब जानवरों की रक्षा के लिए सरकारी और निजी संस्थानों द्वारा अथक प्रयास किए जा रहे हैं. उन की रक्षा के लिए विशेषज्ञों की नियुक्ति से ले कर चिकित्सक तक रखे जा रहे हैं. हाल के वर्षों में बीमारियां फैलने के मामले सामने आ रहे हैं जैसे बर्ड फ्लू व स्वाइन फ्लू. इस कारण इस क्षेत्र में प्रशिक्षित पशु विशेषज्ञों की आवश्यकता और बढ़ गई है. यदि आप साइंस बैकग्राउंड से हैं और पशुओं की रक्षा करना चाहते हैं, तो आप के लिए वैटिरिनरी साइंस में बेहतर कैरियर विकल्प हो सकता है.

क्या है वैटिरिनरी साइंस

पशुपक्षियों में होने वाली बीमारियों का पता लगा कर सही तरीके से इलाज कर उन्हें उन की तकलीफ से छुटकारा दिलाना ही वैटिरिनरी साइंस है. एक अनुमान के मुताबिक भारत में पशुओं की संख्या लगभग 50 करोड़ है जोकि विश्व में सब से अधिक है. लेकिन इन की देखभाल व इलाज के लिए वैटिरिनरी डाक्टर्स की भारी कमी है.

प्रमुख कोर्स

–       बैचलर औफ वैटिरिनरी साइंस ऐंड एनिमल हसबैंड्री -5 वर्ष.

–       वैटिरिनरी ऐंड लाइवस्टौक डैवलपमैंट डिप्लोमा – 2 वर्ष.

–       मास्टर औफ वैटिरिनरी साइंस – 2 वर्ष.

–       पीएचडी इन वैटिरिनरी साइंस – 2 वर्ष.

कैसे मिलेगा प्रवेश

वैटिरिनरी साइंस में ग्रैजुएशन के लिए प्रवेश परीक्षा होती है. इस परीक्षा में आवेदन के लिए फिजिक्स, कैमिस्ट्री व बायोलौजी विषयों में 50% अंकों के साथ 12वीं पास करना अनिवार्य है. यह परीक्षा वैटिरिनरी काउंसिल औफ इंडिया के द्वारा हर वर्ष मई व जून में आयोजित की जाती है. प्रत्येक राज्य के वैटिरिनरी कालेज की 15% सीटें इसी परीक्षा के द्वारा भरी जाती हैं. बाकी सीटें उसी राज्य के प्रतियोगियों के लिए आरक्षित होती हैं जहां वैटिरिनरी कालेज स्थित होता है.

किस तरह के पाठ्यक्रम

इस के पाठ्यक्रम में आप को थ्योरी तथा प्रैक्टिकल दोनों का ज्ञान दिया जाता है. शुरू में आप को एनाटोमी, बायोकैमिस्ट्री, फिजियोलौजी, न्यूट्रीशन, लाइवस्टौक मैनेजमैंट ऐंड प्रोडक्शन पैथोलौजी तथा जैनेटिक्स आदि विषय पढ़ाए जाते हैं. इस के बाद प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के लिए वैटिरिनरी हौस्पिटलों में भेजा जाता है.

कार्यस्वरूप डाक्टर्स का कार्य पशुओं के स्वास्थ्य का खयाल रखना, उन्हें बीमारियों से छुटकारा दिलाना, उन के रहनसहन व खानपान में सुधार तथा उन की उत्पादन तथा प्रजनन क्षमता बढ़ाना होता है.

फ्यूचर प्रौस्पैक्टस

वैटिरिनरी इंडस्ट्री के कमर्शियलाइजेशन तथा भारत सरकार की उदारीकरण नीतियों के कारण यह इंडस्ट्री काफी उन्नति कर रही है. फूड मैन्युफैक्चरिंग, फार्मास्युटिकल्स, वैक्सीन प्रोडक्शन इंडस्ट्री से संबंधित मल्टीनैशनल कंपनियों के आने से वैटिरिनरी क्षेत्र में नौकरी की अपार संभावनाएं पैदा हुई हैं.

पशु चिकित्सक जहां सरकारी तथा गैर सरकारी वैटिरिनरी अस्पतालों, एनिमल हसबैंड्री डिपार्टमैंट, पौल्ट्री फार्म, डेयरी इंडस्ट्री, मिल्क ऐंड मीट प्रोसैसिंग इंडस्ट्री, फार्मास्युटिकल सैक्टर तथा एनिमल बायोटैक्नोलौजी के क्षेत्र में कार्य कर सकते हैं वहीं निजी अस्पताल या क्लीनिक खोल कर भी अच्छी कमई कर सकते हैं. इस के अलावा रिसर्च ऐंड डैवलपमैंट के क्षेत्र तथा शिक्षण संस्थानों में शिक्षक के तौर पर भी काम किया जा सकता है

दूसरों के घोंसलों में अंडे देने वाले पक्षी

पक्षियों की दुनिया निराली है. कई पक्षी ऐसे शातिर होते हैं, जो न तो अपना घोंसला बनाते हैं, न अपने बच्चे पालते हैं. उन के अंडे भी दूसरे पक्षियों द्वारा सेए जाते हैं.

वैज्ञानिकों के अनुसार पक्षी वर्ग के 5 परिवार एनाटिडी, कुकुलिडि़, इंडिकेटोरिडि तथा प्लीसिडि के पक्षी अपने अंडे चोरीछिपे या डराधमका कर दूसरों के घोंसलों में रख देते हैं और दूसरा पक्षी अनजाने में या भयवश उन के अंडों, बच्चों की देखभाल करता है. इस प्रक्रिया को बु्रड परजीवीकरण कहते हैं. ऐसा 80 प्रजातियों के पक्षी करते हैं, जिन में 40 प्रजातियां अकेली कोयल की हैं.

कोयल न तो कभी अपना घोंसला बनाती है और न अपने बच्चे पालती है. जनवरीफरवरी से ले कर मईजून तक नर कोयल, बागों में पेड़ों पर बैठा कुहूकुहू करता गाता रहता है. यह प्रवासी पक्षी मादा को रिझाने के लिए गाता है और मादा चुपचाप श्रोता बन कर सुनती है.

जब जुलाई में मादा कोयल के अंडे देने का समय आता है तो यह अपने अंडे चुपके से कौए के घोंसले में या मैगपाई चिडि़या के घोंसले में रख आती है. अंडों का रंग एक सा होने के कारण मादा कौआ उन्हें पहचान नहीं पाती है. बच्चों का रंग भी कौए के बच्चों से मिलताजुलता होता है, इस कारण जब तक कौए व कोयल के बच्चे बोलने नहीं लगते, अपने को चालाक समझने वाला कौआ उन में भेद नहीं कर पाता.

दूसरी तरफ वैज्ञानिकों का कहना है कि कोयल लड़ाकू पक्षी है वह कौए को डराधमका कर अपनी मादा के अंडे कौए के घोंसले में रखवा देता है और बेचारा कौआ, कोयल के डर से उस के अंडे सेता है व बच्चे पालता है. मादा कोयल एक ऋतु में 16 से 26 अंडे दे सकती है.

फिनलैंड में पाई जाने वाली मादा कोयल अपना अंडा छोटाबड़ा कर सकती है. जब यह मादा कोयल रेड स्टार्ट तथा विनचिट पक्षी के घोंसले में अंडा रखती है तो अंडे को छोटा कर देती है तथा अंडे का रंग नीला होता है. अंडे से निकले अधिकांश पक्षियों के बच्चे पहले अंधे जैसे होते हैं और अपने पोषक पक्षी के बच्चों को घोंसले से गिरा देते हैं.

हनी गाइड नाम का पक्षी बार्वेट या कठफोड़वा जैसे तेजतर्रार पक्षियों के घोंसलों में कब्जा कर के अपने अंडे रखता है. जरमनी में पाया जाने वाला ब्रुड वार्बलर (फाइलोस्कापस सिविलेटरिक्स) पक्षी अपने घोंसले में कोयल के अंडे रखे देख, अपने अंडे भी छोड़ कर भाग जाता है.

यूरोप में पाई जाने वाली कोयल (कुकुलस केनोरस) भी दूसरे पक्षियों के घोंसले में अंडे रख देती है. यह कोयल शाम को पोषक पक्षी के लौटने से पहले ही उस के घोंसले में अपने अंडे रख आती है और उस के अंडे फेंक आती है.

उत्तरी अमेरिका में पाए जाने वाले मेलोथर्स नामक पक्षी की मादा अकसर अपने अंडे ओभन (सी पूरस आरोकैपिलस) चिडि़या के घोंसले में देती है. दक्षिण अमेरिका व अफ्रीका में पाई जाने वाली बतखें भी अपने अंडे दूसरों के घोंसलों में रख आती हैं.

हमारे घरों में रहने वाली सीधीसादी गौरैया भी कभीकभार क्लिफ्स्वैलो (पैटेकैनिडान पायरोनोटा) फुदकी चिडि़या के घोंसले में कब्जा कर अपने अंडे रखती व सेती है. ये पक्षी अपना अंडा रखते समय पोषक पक्षी के अंडे बाहर फेंक देते हैं ताकि गिनती की भूलभुलैया में पोषक पक्षी के अंडे गिनती से ज्यादा न निकलें.

जंगलों में पिहकने वाला पक्षी पपीहा भी अपने अंडे चिलचिल बैवलर पक्षी के घोंसले में रख आता है. बेचारे चिलचिल पक्षी की मादा कई बार तो कईकई पक्षियों के अंडे सेती व बच्चे पालती है.

जेएम हाउसिंग को मिला एसोचैम का अवार्ड

एसोचैम द्वारा हाल ही में आयोजित ‘स्मार्ट सिटीज़ : स्मार्ट इंडिया समिट’ में एनसीआर के जाने माने डेवलपर जेएम हाउसिंग को ‘बेस्ट रेजिडेंशियल हाई राइज इन नोएडा’ अवार्ड से सम्मानित किया गया. यह अवार्ड केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी और प्रकाश जावड़ेकर द्वारा दिया गया.

यह समिट सरकार की 98 स्मार्ट सिटीज़ के विकास के ऊपर आधारित थी. इस मौके पर जेएम हाउसिंग के निदेशक रुपेश गुप्ता ने कहा कि इतने बड़े संस्थान द्वारा सम्मानित होना हमें खासा प्रोत्साहित करता है. इस सम्मान से यह साबित होता है कि अगर आप अच्छा और इमानदारी से काम कर रहे हों, तो उसे सरहाना हमेशा मिलती है.

गुप्ता ने कहा कि यह अवार्ड पूरी जेएम हाउसिंग की टीम को समर्पित है जो मेहनत और लगन से काम करती है, ताकि हम ग्राहकों से किये हुए वादों को पूरा कर सके. साथ ही मैं एसोचैम का शुक्रिया अदा करना चाहूँगा जो उन्होंने हमें इस अवार्ड के काबिल समझा.

 

BCCI ने बिना सबूत लगाया बैन, मुकदमा ठोकूंगा: रउफ

पाकिस्तान के अंपायर असद रउफ ने कहा कि बीसीसीआई ने बिना किसी सबूत के उन्हें दोषी करार देकर उन पर प्रतिबंध लगा दिया. आईसीसी की एलीट पेनल के सदस्य रहे 59 बरस के रउफ पर सटोरियों से महंगे तोहफे लेने और आईपीएल 2013 के मैचों पर सट्टा लगाने का आरोप है.

रउफ ने कहा, ‘आईपीएल और बीसीसीआई को मुझ पर प्रतिबंध लगाने का क्या हक है जब मुंबई की एक अदालत ने पुलिस को बताया है कि उसके पास मेरे खिलाफ कोई सबूत नहीं है.’ उन्होंने कहा, ‘बीसीसीआई और आईपीएल ने एक जांच आयुक्त नियुक्त कर दिया और दावा किया कि मैं आईपीएल में अपना काम पूरा किये बिना भारत से चला आया. यह गलत है. मैं काम पूरा करके भारत से आया.’

रउफ ने कहा, ‘अदालत ने कहा कि रउफ प्रतिमाह 30 लाख रुपये से अधिक कमाता है लिहाजा जींस, टीशर्ट या कैप जैसे छोटे तोहफे लेना बड़ी बात नहीं है.’ उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने वकील के मार्फत बीसीसीआई को लिखा है कि वह मुंबई में बीसीसीआई मुख्यालय जाकर किसी भी आयोग के सामने पेश होने को तैयार है.

उन्होंने कहा कि वह अपने वकील के जरिये बीसीसीआई और आईपीएल को नोटिस भेजेंगे और मानहानि का मुकदमा ठोकेंगे. उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड मेरा साथ दे या नहीं, मैं अपने वकील के जरिये खुद कदम उठाउंगा.’

 

टी-20 में हैट्रिक लेने वाले चौथे गेंदबाज बने थिसारा परेरा

श्रीलंकाई तेज गेंदबाज थिसारा परेरा ने भारत के खिलाफ शुक्रवार को दूसरे अंतरराष्‍ट्रीय टी-20 में हैट्रिक लेने का कमाल किया. वह अंतरराष्‍ट्रीय टी-20 हैट्रिक लेने वाले चौथे गेंदबाज बन गए हैं. उनसे पहले न्‍यूजीलैंड के टिम साउदी और जैकब ओरम व ऑस्‍ट्रेलिया के ब्रेट ली यह कमाल कर चुके हैं.

थिसारा परेरा ने मैच में हार्दिक पंड्या, सुरेश रैना और युवराज सिंह को अपना शिकार बनाया. मजेदार बात यह है कि परेरा की गेंदबाजी तब चमकी जब पिच पर रनों का अंबार लगा हुआ था. श्रीलंका द्वारा पहले बल्‍लेबाजी के निमंत्रण पर भारत 18 ओवर में तीन विकेट पर 179 रन बनाकर खेल रहा था. उस समय लग रहा था कि दो ओवर में भारत अपने स्‍कोर को 215 तक पहुंचा लेगा. मगर परेरा की शानदार हैट्रिक की बदौलत भारतीय टीम निर्धारित 20 ओवर में 6 विकेट पर 196 रन ही बना सकी.

श्रीलंकाई कप्‍तान दिनेश चंदीमल ने पारी का 19वां ओवर पूरा करने के लिए परेरा को गेंद थमाई. उस समय पंड्या 25 और रैना 28 रन बनाकर क्रीज पर जमे हुए थे, परेरा ने शुरुआती तीन गेंदों में सात रन दिए. भारतीय बल्‍लेबाजों ने रन गति बढ़ाने के लिहाज से बड़े शॉट मारने की योजना बनाई.

परेरा की चौथी गेंद पर पंड्या (27 रन) ने हवा में शॉट लगाया जो सीधा लांग ऑन पर मुस्‍तैद गुनाथिलाका के हाथों में गया. अगली ही गेंद पर रैना (30 रन) भी स्‍क्‍वायर लेग पर चमीरा को आसान कैच देकर पैवेलियन लौट गए. ओवर की आखिरी गेंद पर परेरा ने युवराज सिंह को खाता खोलने का मौका भी नहीं दिया और लांग ऑन पर सेनानायके ने हाथों की शोभा बनाकर हैट्रिक पूरी की.

परेरा ने मैच में तीन ओवर किए और 33 रन खर्च करके तीन विकेट चटकाए. ऑस्‍ट्रेलिया के पूर्व महान तेज गेंदबाज ब्रेट ली के नाम टी-20 अंतरराष्‍ट्रीय की हैट्रिक दर्ज है. उन्‍होंने 2007-08 में बांग्‍लादेश के खिलाफ वर्ल्‍ड टी-20 में यह कमाल किया था. पारी के सातवें ओवर में लीग ने शकीब अल हसन, मशरफे मुर्तजा और आलोक कपाली को अपना शिकार बनाया था.

न्‍यूजीलैंड के पूर्व तेज गेंदबाज जैकब ओरम टी-20 अंतरराष्‍ट्रीय में हैट्रिक लेने वाले गेंदबाजों की सूची में दूसरे खिलाड़ी बने. 2009 में श्रीलंका के खिलाफ ओरम की हैट्रिक अनोखे अंदाज में पूरी हुई. ओरम ने 17वें ओवर की आखिरी गेंद पर एंजेलो मैथ्‍यूज को आउट किया. इसके बाद आखिरी ओवर की पहली दो गेंदों पर मलिंगा बंडारा और नुवान कुलसेकरा को आउट करके हैट्रिक पूरी की.

जैकम ओरम के बाद दूसरे कीवी गेंदबाज तथा टी-20 इतिहास में हैट्रिक लेने वाले तीसरे गेंदबाज बने टिम साउदी. 2010 में पाकिस्‍तान के खिलाफ पारी के आठवें ओवर में साउदी ने यूनुस खान, मोहम्‍मद हफीज और उमर अकमल को आउट करके हैट्रिक पूरी की. उन्‍होंने इस मैच में 17 रन देकर पांच विकेट लिए थे.

 

…तो इस कारण ‘नीरजा’ मे अभिनय कर रहे हैं शेखर

सोनम कपूर के अभिनय से सजी आगामी फिल्म 'नीरजा' में गायक-संगीतकार शेखर रवजियानी पहली बार अभिनय करते हुए नजर आएंगे. उन्होंने कहा कि उन्होंने निर्देशक राम माधवानी के साथ दोस्ती के चलते इस फिल्म में काम किया. शेखर ने कहा, "राम कई सालों से मेरे करीबी दोस्त हैं और उन्होंने मुझे फिल्म करने के लिए जोर दिया और मैं दोस्ती के कारण मना नहीं कर सकता था."

वह फिल्म की शूटिंग के समय कैमरे का सामना करते हुए वह चिंतित नहीं थे. उन्होंने कहा, "जहां राम जैसा फिल्म-निर्देशक हो तो चिंता करने की कोई बात ही नहीं है. काम सरल और तनाव-मुक्त है. मैंने बहुत आनंद लिया, यह बहुत खूबसूरत फिल्म थी."

उल्लेखनीय है कि 5 सितंबर, 1986 को आतंकवादियों ने विमान कंपनी पैन एम की उड़ान संख्या 73 को कराची में अगवा किया था. नीरजा भनोट इसमें परिचारिका थीं. विमान में सवार यात्रियों को आतंकवादियों से बचाने की कोशिश में नीरजा की जान चली गई. नीरजा भनोट की बायोपिक 'नीरजा' में सोनम कपूर मुख्य भूमिका में हैं. अभिनेत्री शबाना आजमी फिल्म में नीरजा की मां की भूमिका में नजर आएंगी.

इस बारे में बात करते हुए शेखर ने कहा, "सोनम शानदार हैं और वह 'आई हेट लव स्टोरीज' के बाद से मेरी अच्छी दोस्त हैं. इसमें मैंने संगीत दिया था. फिल्म में सोनम नीरजा भनोट और राम माधवानी फिल्म निर्देशक हैं तो मैं बहुत खुश हुआ." फिल्म की कहानी एवं पटकथा सैविन क्वाड्रास ने लिखी है.

सलमान नहीं, इनके साथ वैलेंटाइंस डे मनाएंगी कैटरीना

रणबीर कपूर और कैटरीना कैफ के ब्रेकअप की खबरें पिछले दिनों काफी मीडिया में छाई हुई थी. इसके अलग होने के बाद कैट का नाम एक बार से उनके एक्स ब्वॉयफ्रेंड सलमान खान के साथ जोड़ा जाने लगा था. लेकिन अब हाल ही में खबर आई है कि कैट सलमान या रणबीर के साथ नहीं बल्कि सिद्धार्थ मल्होत्रा के साथ अपना वेलेंटाइन्स डे मनाने वाली है.

दरअसल हाल ही में अभिनेता सिद्धार्थ मल्होत्रा का कहा है कि वेलेंटाइंस डे पर उनका कोई खास प्लान नहीं है और वह इस दिन को अपनी आने वाली फिल्म 'बार बार देखो' की शूटिंग करते हुए सह-अभिनेत्री कैटरीना कैफ के साथ बिताएंगे. सिद्धार्थ का यह जवाब उस समय आया, जब 'कपूर एंड संस' के ट्रेलर के लांच के मौके पर उनसे यह पूछा गया कि वह यह दिन किसके साथ बिता रहे हैं.

सिद्धार्थ ने कहा, "अब तक तो मेरा 'बार बार देखो' की शूटिंग पर जाने का प्लान है. मैं अपने क्रू मेंम्बर्स साथ रहूंगा." रणबीर से ब्रेकअप होने के बाद कैटरीना ने हालांकि साफ कर दिया कि वह कभी भी वेलेंटाइंस डे नहीं मनातीं.

कैटरीना इन दिनों आदित्य रॉय कपूर के साथ अपनी फिल्म 'फितूर' के प्रमोशन में काफी व्यस्त हैं. गौरतलब है सिद्धार्थ और आलिया इन दिनों एक दूसरे को डेट कर रहे हैं. अब ऐसे में अगर सिद्धार्थ वेलेंटाइंस डे पर कैटरीना के साथ रहेंगे और फिल्म की शूटिंग करेंगे, तो उनकी प्रेमिका आलिया भट्ट का भी ऐसा ही कुछ प्लान है. आलिया ने कहा है कि वह गोवा में अपनी फिल्म की शूटिंग कर रही होंगी. यह फिल्म गौरी शिंदे बना रही हैं. इस फिल्म में आलिया शाहरुख के साथ अभिनय करती हुई नजर आएंगी.

इसके अलावा सिद्धार्थ और आलिया जल्द ही शकुन बत्रा के निर्दशन में बनी आगामी फिल्म 'कपूर एण्ड सन्स' में नजर आने वाले हैं. फिल्म में इन दोनों के अलावा फवाद खान और ऋषि कपूर भी मुख्य भूमिका में नजर आएंगे. फिल्म 18 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज की जाएगी.

VIDEO: कुश्ती के दांव-पेंच सीख रहीं हैं अनुष्का, पर क्यों

फिल्म 'सुल्तान' में सुपरस्टार सलमान खान के साथ मंच साझा कर रहीं अभिनेत्री अनुष्का शर्मा  कुश्ती के दांव-पेंच सीख रही हैं ताकि वो सलमान की इस फिल्म में अपने किरदार के साथ इंसाफ कर पाएं. अनुष्का फिल्म सुल्तान में सलमान की हीरोइन लगने के लिए इन दिन जीतोड़ मेहनत कर रही हैं.

अनुष्का ने ट्विटर पर एक तस्वीर साझा की, जिसमें वह कुश्ती के मैदान में नजर आ रही हैं. इसमे वह नीले रंग की टी-शर्ट और शार्ट्स पहने हुए हैं. गौरतलब है कि सलमान खान फिल्म सुल्तान में पहलवान की भूमिका में हैं.

तस्वीर का शीर्षक अभिनेत्री ने लिखा, "न दर्द, न फायदा सिर्फ 'सुल्तान' के लिए कुश्ती का प्रशिक्षण." फिल्म में अनुष्का पहली बार एक रेसलर की भूमिका निभाती हुई नजर आएंगी. वह अपने इस किरदार को लेकर काफी उत्साहित हैं.

काफी दिनों से फिल्म में सलमान के लुक का खुलासा किया जा रहा था. कुछ दिन पहले आए एक लुक में वह क्लीन शेव दिख रहे थे और इसके बाद जारी किए गए एक लुक में वह कुश्ती के मैदान में दिखाई दे रहे थे. जिसमें उनके नाक से खून निकलता और माथे पर पसीना दिखाई दे रहा था.

अली अब्बास जफर द्वारा निर्देशित फिल्म यशराज फिल्म्स के बैनर तले आदित्य चोपड़ा द्वारा निर्मित है. फिल्म में सलमान खान पहलवान केसरी के किरदार में नजर आएंगे, इस फिल्म के लिए उन्होंने अपना वजन भी बढ़ाया है साथ ही वह काफी मेहनत भी कर रहे हैं. खबरों के अनुसार इस फिल्म में सलमान एक पिता के किरदार में भी नजर आने वाले हैं. और फिल्म के क्लाइमेक्स में वह अपने ही बेटे के साथ लड़ते हुए दिखेंगे.

फिल्म में रणदीप हुड्डा भी प्रमुख भूमिका में नजर आएंगे. फिल्म ईद के मौके पर सिनेमाघरों में रिलीज की जाएगी.

खाद नहीं जैविक खाद, घटेगी लागत बढ़ेगा मुनाफा

चालू मौसम में गेहूं की बोआई के समय एक बार फिर से खाद की बढ़ी कीमतों से किसानों की लागत बढ़ रही है और मुनाफा घट रहा है. ऐसे में अगर किसान रासायनिक खाद की जगह पर जैविक खाद का प्रयोग करें तो न केवल किसानों का मुनाफा बढ़ेगा, बल्कि खेत की सेहत भी ठीक रहेगी. रासायनिक खाद का प्रयोग खेत की मिट्टी की जांच के बाद ही जरूरत के अनुसार करें. अंधाधुंध रासायनिक खाद का प्रयोग करने से पैदावार बढ़ने के बजाय खेत को नुकसान होता है और खेती की लागत भी बढ़ती है. ऐसे में किसान को ही परेशान होना पड़ताहै.

जिस समय किसान अपने खेतों में बोआई कर रहे थे, उस समय खाद की दुकानों से डीएपी खाद गायब हो गई थी, जिस से किसानों को महंगे दामों पर खादें खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ा. जब किसान गेहूं की फसल काटने के लिए तैयार हो रहे थे और गेहूं की फसल में आखिरी बार खाद डालने की बारी आई तो दुकानों से यूरिया खाद गायब हो गई. यूरिया संकट ने किसानों के सामने समस्या खड़ी कर दी. रबी की फसलों विशेषकर गेहूं की फसल में जनवरीफरवरी के दौरान खाद डालने की जरूरत होती है. इस समय तक गेहूं में दूसरी और तीसरी सिंचाई की जरूरत होती है. इस के बाद यूरिया खाद डाली जाती है.

यूरिया खाद दुकानों में भरपूर मात्रा में न होने से किसानों को महंगे दामों पर इसे खरीदना पड़ रहा है. इस के चलते यूरिया के लिए मारामारी मची है. उत्तर प्रदेश के बहुत सारे जिलों में यूरिया खाद की कालाबाजारी शुरू हो गईहै. तमाम किसान कृषि विभाग को इस बारे में शिकायतें भी भेज रहे हैं, लेकिन विभाग इस बात को मान ही नहीं रहा है कि प्रदेश में यूरिया खाद की कोई कमी है. उत्तर प्रदेश में यूरिया खाद का भाव 3 सौ रुपए प्रति बोरी है. खाद की कमी के चलते किसानों को 375 से 400 रुपए प्रति बोरी खाद खरीदनी पड़ रही है. सब से बड़ी परेशानी उन जिलों में है, जहां पर सहकारी संस्थाएं काम नहीं कर रही हैं. मगर अब खाद की कमी से परेशान होने की जरूरत नहीं है. किसानों को इस की जगह पर जैविक खाद का प्रयोग करना चाहिए. इस से पैदावार बढ़ेगी और लागत मूल्य कम होगा.

रासायनिक खाद की जगह जैविक खाद

गेहूं की बोआई के समय प्रदेश में डीएपी खाद की कमी हो गई थी, जिस का प्रभाव गेहूं की फसल पर पड़ रहा है. डीएपी खाद की कमी को पूरा करने के लिए किसान गेहूं में यूरिया ज्यादा डालना चाह रहे थे. अब यूरिया भी नहीं मिल रही है, जिस से गेहूं की पैदावार पर असर पड़ेगा. गेहूं की बोआई के समय ही आलू की बोआई भी होती है, इसलिए आलू किसान भी डीएपी खाद न मिलने से परेशान हुए थे. किसान सेवा केंद्रों पर आधी रात से लाइन लगाए खड़े किसान जब बेकाबू हो जाते थे, तो धरनाप्रदर्शन करने लगते थे, जिसे काबू करने के लिए पुलिस को लाठियां चलानी पड़ती थीं. किसानों को खाद मिलने की जगह पर पुलिस की लाठियां खानी पड़ती थीं.

उस समय भी कृषि विभाग के अधिकारी खाद की कमी को नहीं मानते थे. अफसरों का कहना था कि किसान खाद को खरीद कर जमा कर रहे हैं, जिस से बाजार में खादों के दाम बढ़ गए हैं. किसान जबरदस्ती की हड़बड़ी दिखा कर परेशानी पैदा कर रहे हैं.

किसानों का कहना है कि जब तक गेहूं की बोआई चली तब तक खाद का संकट बना रहा. कृषि विभाग ने रबी फसलों की बोआई के लिए बहुत सारी योजनाएं तो पहले बना ली थीं, पर खाद संकट न हो इस की कोई योजना नहीं बनाई. इसी का नतीजा है कि डीएपी के बाद यूरिया खाद का संकट आ गया है.

कृषि विभाग ने हर जिले में खाद वितरण पर नजर रखने के लिए कंट्रोल रूप भी बनाए थे, जहां पर किसान अपनी शिकायत दर्ज करा सकते थे. यह व्यवस्था की गई कि खाद का वितरण सरकारी कर्मचारी की मौजूदगी में ही किया जाए. इस के लिए ब्लाक, तहसील या फिर विभाग का कर्मचारी वहां पर मौजूद रहे. इस के बाद भी जिलेवार हालात बहुत खराब दिखे.

जब बोआई का समय आता है तभी बाजार से खाद गायब हो जाती है. खाद की कमी से कालाबाजारी होने लगती है. किसानों को महंगे दामों पर खाद खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है.

नए तरीके से बनाएं जैविक खाद

खाद की कमी केवल बड़े शहरों में ही नहीं है. छोटे शहरों का हाल भी बुरा है. जालौन जिले के माधौगढ़, आटा व जोल्हूपुर इलाके के किसान डीएपी और यूरिया खाद के न मिलने से परेशान हैं. जालौन के किसानों का कहना है कि मटर, चना, मसूर, तिलहन और गेहूं की बोआई के समय डीएपी खुले बाजार में मौजूद नहीं थी, जिस के कारण उन्हें बहुत परेशान होना पड़ा.

सरकार ने किसानों को राहत देने के नाम पर सरकारी कीमत पर खाद वितरण का काम पीसीएफ और सहकारी समितियों के द्वारा कराने की योजना भी बनाई, समितियों के जरीए उन किसानों को खाद मिल रही है,जो समितियों के सदस्य हैं. जरूरत इस बात की है कि रासायनिक खाद की जगह पर जैविक खाद का प्रयोग किया जाए. किसानों को नए तरीके से जैविक खाद बनाने के तरीके बताए जाएं, जिस से उन को लाभ हो.

समितियों के कर्मचारियों के द्वारा भी खाद की बिक्री में मनमानी की जा रही है. ये लोग मनचाहे तरीके से खाद बांटते हैं. कुछ समितियां लाइसेंस धारक खाद विक्रेताओं को अधिक पैसे ले कर खाद बेच देती हैं. समितियों द्वारा 1 एकड़ खेत के लिए 1 बोरी खाद दी गई थी, जो जरूरत से काफी कम थी. फतेहपुर और कानपुर जिलों में भी खाद की कमी नजर आती है. साधन सहकारी समितियों में खाद की खेप आते ही दबंग और बड़े किसान उस पर कब्जा कर लेते हैं. इस से छोटे किसानों को खाद का संकट पैदा हो जाता है. बाजार में खाद की कीमत उछाल मारने लगती है. अफरातफरी में किसान खाद को ज्यादा खरीद लेते हैं. खाद की कमी की परेशानी को दूर करने का एकमात्र उपाय है कि जैविक खाद का प्रयोग बढ़ाया जाए. इस से ही किसानों को लाभ होगा.

डिजिटल क्रांति: अंधेरे का धुआं

सच सुबह की सूर्य की किरणों की तरह जरूरी है. जैसे एलईडी लाइट्स सूर्य का मुकाबला नहीं कर सकतीं ठीक वैसे ही सच का मुकाबला भी झूठ नहीं कर सकता. यह जरूर है कि जब से मानव सभ्य हुआ है उस ने झूठ का एक बहुत बड़ा बोझ सिर पर लाद रखा है और यह बोझ अब बढ़ रहा है. रीतिरिवाजों, धार्मिक अंधविश्वासों, काल्पनिक कहानियों, दुनिया के पैदा होने के झूठे तरीकों के बोलबाले का 500 साल पहले पर्दाफाश होना शुरू हुआ और नतीजा रहा औद्योगिक क्रांति, कानून का राज, लोकतंत्र, विज्ञान का विकास, नई तकनीक, मशीनें और अब मोबाइल डिजिटल युग.

मोबाइल और कंप्यूटर का डिजिटल युग अब झूठ का सब से बड़ा निर्माता बन गया है. धर्म के बाद इसी का नंबर आएगा.

धार्मिक पुस्तकों में जितना झूठ भरा है, डिजिटल डिवाइसों ने सब ग्रहण कर लिया है. अब इस झूठ को जम कर फैलाया जा रहा है. सूर्य की तेज रोशनी में अंधेरी काली किरणें कैसे फैलाई जा सकती हैं, डिजिटल क्रांति में ऐसे उदाहरण भरे पड़े हैं.

यह काली स्याही दिमाग को कुंद बना रही है, देखा जा सकता है. आज का युवा डिजिटल नशे में सोचनेपरखने और तर्क करने की कला खो रहा है. जो मैसेज आया, अगर चटपटा है तो आगे 100 लोगों को भेज दो. सच है या काला, जानने की कोशिश भी न करो. किसी का क्लिप बनाया, आगे खिसका दो, वायरल कर दो. बिना जाने कि यह किस तरह नुकसान पहुंचा सकता है. अपनी ओर से जोड़ने की कुछ जरूरत ही नहीं. दूसरे को तो एहसास दिलाना है कि आप मौजूद हैं, बस. क्या कह रहे हैं, सच कह रहे हैं, झूठ कह रहे हैं, यह न आप जानते हैं न दूसरी तरफ वाला.

देश में हताशा है. अर्थव्यवस्था कमजोर हो रही है. कानून ढीला हो रहा है. अभी पश्चिम एशिया सा हाल नहीं हुआ है पर हो सकता है. अमेरिका में डिजिटल क्रांति के पलेफले लोग बंदूकें उठाए निहत्थे निर्दोषों को मारने लगे. यूरोप में मार खाए रिफ्यूजियों के पास मोबाइल जरूर हैं पर उन से वे शरण देने वालों के खिलाफ जहर उगल रहे हैं क्योंकि डिजिटल क्रांति रोशनी की क्रांति नहीं, अंधेरे का धुआं बन गई है.

घरों में बच्चे, युवा, औरतें, मांएं डिजिटल चटरपटर करती रहती हैं. काम की बातें भूल, केवल भ्रम, केवल झूठ, केवल घटाटोप अंधियारा, गलत बात सैकंडों में सैकड़ों के पास. सही बात को लेने वाला कोई नहीं.

वैज्ञानिक खोजों ने जीवन सुगम बनाया था तो बम भी बनाए थे. इसी तर्ज पर डिजिटल क्रांति उजाले के साथ काली आंधी भी ला रही है. कल के लिए क्या तैयार हैं? क्या कोई अरविंद केजरीवाल है जो कह सके कि मोबाइलों पर केवल ईवन बातें होंगी, औड नहीं?

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