Download App

सीखें सिलाई, बनाएं एक नई पहचान

गांव हो या शहर पढ़ाई लिखाई के बावजूद कई महिलाएं किसी प्रोफैशनल कोर्स के अभाव में जिंदगी भर चौके चूल्हे तक ही सीमित रह जाती हैं. जिस से उन्हें तमाम तरह की दिक्कतों से जूझना पड़ता है. इन्हीं मुसीबतों की एक कड़ी रोजगार से जुड़ी हुई है. जिस का प्रमुख कारण रोजगार के अवसरों पर पुरुषों का वर्चस्व भी रहा है.

लेकिन महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए  रोजगार के भरपूर अवसर हैं. इन में से एक है सिलाई का काम. सिलाई एक कला है. हर महिला में यह कला थोड़ी बहुत होती ही है. बस, जरूरत होती है इसे निखारने की और यह काम आसान कर देती है सिंगर स्विंग मशीन.

सिलाई एक ऐसी कला है जिसे महिलाएं अपने घर पर रह कर भी कर सकती हैं. इस से अच्छी आमदनी के साथसाथ घरपरिवार की देखभाल और उन का साथ भी लगातार बना रहता है. यही कारण है कि महिलाओं में सिलाई सीखने की लगन सब से अधिक देखी गई है. भारत में रोजगार के क्षेत्र में महिलाएं सर्वाधिक सिलाई के काम से जुड़ी हुई हैं.

इस कार्य में महिलाओं की कई एनजीओ भी मदद कर रहे हैं. जिन महिलाओं को सिलाई नहीं आती या थोड़ी बहुत आती है उन्हें सिलाई का  काम सिखा कर रोजगार दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं. इसी मुहिम में सिंगर स्विंग मशीन का नाम भी जुड़ गया है. महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए सिंगर स्विंग मशीन ने दिल्ली एनसीआर और अन्य राज्यों के कई स्कूलों में अपनी मशीनें लगाई हैं और 3 से 6 माह की अवधि का सिलाई कोर्स आरंभ किया है. यह कोर्स महिलाओं की सिलाई की कला को तो निखारता ही साथ ही उन्हें प्रोफैशनल सर्टिफिकेट भी उपलब्ध कराता है, जिस से की वे भविष्य में इस कला के जरिए रोजगार हासिल कर सकें. साथ ही स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता का जीवन जी सकें. इस के अतिरिक्त सिंगर स्विंग मशीन कोर्स करने वाली छात्राओं को कोर्स के पूरा होने पर विशेष छूट पर सिलाई मशीने खरीदने का अवसर भी देती है ताकि छात्राएं जल्द से जल्द अपना काम शुरू कर सकें और अपने पैरों पर खड़ी हो सकें. सिंगर स्विंग मशीन ने कुछ एनजीओ को भी अपने इस कार्य में शामिल किया है. जहां ट्रैंड सिलाई टीचरों द्वारा महिलाओं को सिलाई का काम सिखाया जाता है. इस कोर्र्स को चला रहे एक सैंटर में पंजीकृत छात्रा की माने तो, ‘‘मुझे इस सैंटर में आ कर सिलाई सीखना बहुत पसंद है. यहां बिताए पल मेरे दिन के सब से खुशनुमा पल होते हैं, क्योंकि सिलाई के अलावा मैं ने यहां कुछ अच्छे दोस्त भी बनाए हैं जिन से सिलाई के अलावा भी मुझे बहुत कुछ सीखने को मिल रहा है. मैं यहां हर रोज आना चाहती हूं.’’

यह कोर्स महिलाओं को न केवल आत्मनिर्भर बनाएगा, बल्कि उन्हें आत्मसम्मान की जिंदगी और आत्मविश्वास के साथ जीना भी सिखाएगा

याद्दाश्त बढ़ाने के ये हैं कारगर उपाय

अमूमन किशोर यह कहते मिलते हैं कि वे कितना भी याद कर लें कुछ याद ही नहीं होता, लेकिन विडंबना यह है कि यही किशोर अगर फिल्म देख कर आएं तो फिल्म के संवाद, गाने और दृश्य तक को हूबहू सुनाने में उन्हें मुश्किल नहीं होती आखिर उन्हें पढ़ाई ही क्यों नहीं याद होती? इस का एक तो सीधा सा कारण है सटीक पढ़ने का तरीका न होना और दूसरा याद्दाश्त कमजोर होना. अगर इन दोनों को दुरुस्त कर लिया जाए तो याद्दाश्त आश्चर्यजनक रूप से बढ़ सकती है.

याद्दाश्त का कमजोर होना एक व्यापक और गंभीर समस्या है. विद्यार्थियों को अपना पाठ अधिक दिन तक याद नहीं रहता है जिस से वे काफी परेशान रहते हैं. कुछ लोग अपनी वस्तुएं कहीं रख कर भूल जाते हैं तो कई लोग अपने मित्रों व पड़ोसियों इत्यादि को पहचानने में भी धोखा खा जाते हैं. यों तो मस्तिष्कीय क्षमताएं प्रकृति प्रदत्त होती हैं लेकिन फिर भी सतत प्रयासों द्वारा इन में आश्चर्यजनक वृद्धि की जा सकती है. याद्दाश्त का सीधा संबंध मस्तिष्क से है. इसलिए प्राय: हम उन चीजों को नहीं भूलते हैं जिन से हमारा सीधा संबंध होता है. लेकिन वे सारे कार्य, जिन्हें हम भारस्वरूप समझ कर करते हैं, मस्तिष्क पर अपनी अमिट छाप छोड़ने में समर्थ नहीं होते और हम उन्हें शीघ्र ही भूल जाते हैं.

फ्रांस के प्रधानमंत्री लियान मेंब्रेज विलक्षण याद्दाश्त के धनी थे. वे संसद में दिए गए विपक्षी नेताओं के भाषण तथा पिछले 10 वर्ष के संपूर्ण बजट को आंकड़ों सहित सुना सकते थे. यही नहीं सालोमन वेनियामिनोव नामक रूसी पत्रकार वर्षों पहले सरसरी तौर पर पढ़ी गई रेलवे समयसारिणी को बिना किसी असुविधा के दोहरा सकते थे. सच पूछिए तो ऐसी याद्दाश्त के धनी लोग विरले ही होते हैं.

जानिए, याद्दाश्त बढ़ाने के कुछ महत्त्वपूर्ण और कारगर उपाय :

बारबार दोहराएं

याद्दाश्त बढ़ाने तथा भूलने की क्रिया कम करने में याद की जाने वाली सामग्री की अधिकाधिक पुनरावृत्ति उपयोगी सिद्ध होती है. यदि कोई पाठ्यवस्तु केवल 3 या 4 बार पढ़ने से ही याद हो जाती है तो उस सामग्री को ग्रहण करने की शक्ति अपेक्षाकृत अधिक समय तक बनी रहती है. लेकिन यहां यह बता देना उपयुक्त होगा कि एक सीमा से अधिक बार याद करने से ग्रहण करने की शक्ति पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता है. निष्क्रिय पुनरावृत्ति के स्थान पर सक्रिय एवं सार्थक पुनरावृत्ति अधिक प्रभावशाली होती है.

धीरेधीरे याद करें

यदि याद की जाने वाली विषय सामग्री लंबी हो, तब उसे कई प्रयासों में धीरेधीरे ही याद करना चाहिए. परंतु यदि सामग्री छोटी हो, तो उसे एक ही बार में याद करना अधिक फायदेमंद होता है. शायद बहुत कम लोगों को यह पता है कि याद करने के बाद विश्राम करने से याद्दाश्त काफी सुदृढ़ होती है. अत: याद करने वाली सामग्री रात्रि में विशेषकर सोने से कुछ समय पूर्व पढ़ी जाए तो अच्छा होता है. कुछ विख्यात मनोवैज्ञानिकों ने भी अपने प्रयोगों द्वारा इस बात की पुष्टि की है.

उपयोगी तथ्यों पर ध्यान दें व टुकड़ों में याद करें

उपयोगी तथ्यों को सावधानीपूर्वक पढ़ना, समझना, दोहराना और आवश्यक होने पर नोट करना याद्दाश्त की वृद्धि में सहायक सिद्ध होते हैं. विषय के संक्षिप्तीकरण का तरीका भी तथ्यों को आसानी से याद रखने में सहायक होता है. पूरे विषय को संपूर्ण रूप से याद रखने के स्थान पर उसे छोटेछोटे शीर्षकों व उपशीर्षकों में बांट कर स्मरण करना आसान होता है. विद्यार्थियों को इस बात की भी जानकारी होनी चाहिए कि याद की जाने वाली सामग्री को भविष्य में पुन: स्मरण करना होगा. इस प्रकार सामग्री के प्रति मानसिक झुकाव उत्पन्न होता है जो निसंदेह बहुत फायदेमंद साबित होता है.

स्वास्थ्य दुरुस्त तो याद्दाश्त दुरुस्त

याद्दाश्त को ठीक रखने तथा उस में वृद्धि करने के लिए शरीर को स्वस्थ रखना भी अत्यंत आवश्यक है. नियमित रूप से व्यायाम करना व प्रात:कालीन भ्रमण करना न केवल चुस्तदुरुस्त रखता है बल्कि इस से याद्दाश्त में आश्चर्यजनक वृद्धि भी होती है. संतुलित आहार लेना, अधिक गरम और तेज मसालेदार खाद्य पदार्थों का सेवन न करना, सात्विक वातावरण में रहना इत्यादि तथ्य भी याद्दाश्त के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.                                

   इन बातों का भी रखें ध्यान याद्दाश्त बढ़ाने के लिए निम्न बातों को भी ध्यान में रखना आवश्यक है :

–       याद करने के पश्चात खाली समय में महत्त्वपूर्ण तथ्यों को मन में दोहरा लेना चाहिए तथा बाद में भूले बिंदुओं का पुन: स्मरण करना चाहिए.

–       विद्यार्थियों को अपने विषय के अध्ययन में पूरी अभिरुचि व एकाग्रता के साथ ही जुटना चाहिए.

–       दूषित विचारों से बचना चाहिए.

–       समयसमय पर पूर्व कंठस्थ सामग्री का भी अध्ययन करना चाहिए.

–       स्मरण के बाद कुछ देर तक विश्राम अवश्य करना चाहिए.

–       याद की जाने वाली सामग्री की अधिक से अधिक पुनरावृत्ति की जानी चाहिए.

आज तक कोई ऐसी चमत्कारिक औषधि नहीं बनी है जिसे खा कर विलक्षण याद्दाश्त प्राप्त की जा सके. वास्तविकता यह है कि यदि व्यक्ति में आत्मविश्वास तथा सच्ची लगन हो तो विलक्षण याद्दाश्त प्राप्त करना बिलकुल असंभव नहीं

आमतौर पर भूलने के 3 मुख्य कारण होते हैं :

1. किसी बात को स्मरण रखने की पूर्व इच्छा का अभाव होना.

2. प्रस्तुत विषय को पूरे मनोयोग से समझने का प्रयास न करना.

3. प्रसंग में अरुचि तथा उपेक्षा का भाव होना तथा उस के महत्त्व को स्वीकार न करना.

परीक्षा में अधिक अंक हासिल करने के नुसखे

आज का दौर प्रतियोगिता का दौर है. 10वीं के बाद अपना मनपसंद विषय लेने की बात हो या 12वीं के बाद कालेज में ऐडमिशन की या फिर इंजीनियरिंग आदि के लिए प्रतियोगिता परीक्षा की, अच्छे अंक और प्रतियोगिता में अच्छी रैंक लाना लाजिमी हो गया है. ऐसे में विद्यार्थियों को परीक्षा के विषयों की तैयारी के साथसाथ यह भी समझना चाहिए कि परीक्षा में उत्तर देने का तरीका क्या हो? अकसर छात्र सोचते हैं कि हम तो खूब पढ़ते हैं, लंबेलंबे उत्तर रटते हैं फिर भी हमारे नंबर अच्छे नहीं आते. दरअसल, अच्छे नंबर लाने के लिए रटने की नहीं बल्कि समझ कर प्रश्नों के उत्तर देने की आवश्यकता होती है.

विद्यार्थी अकसर यहीं गलती कर जाते हैं. परीक्षा में जो पूछा जाता है उस का सटीक उत्तर नहीं देते बल्कि विस्तार से देने के लिए अनापशनाप लिख देते हैं. उन्हें लगता है अगर हम ने 2 ही पंक्तियों में उत्तर दे दिया तो शायद परीक्षक पूरे अंक नहीं देगा और वे 2 पंक्तियों के उत्तर को भी घुमाफिरा कर बड़ा कर देते हैं. आखिर कैसे दें परीक्षा में प्रश्नों के उत्तर कि मेहनत का सकारात्मक परिणाम देखने को मिले. जानिए कुछ नुसखे जिन्हें अपना कर आप परीक्षा में अधिकतम अंक हासिल कर सकते हैं.

विस्तृत के बजाय सटीक उत्तर लिखें

विद्यार्थियों को स्पष्ट रूप से समझ लेना चाहिए कि यदि उत्तर 2 पंक्तियों में ही समाप्त हो रहा है तो उस का विस्तार बेकार है. ऐसा कर के छात्र कम अंक प्राप्त करेंगे जबकि 2 पंक्तियों का उत्तर लिखने वाले अन्य छात्र अधिक अंक प्राप्त कर सकते हैं. उदाहरण के लिए यदि प्रश्नपत्र में प्रजातंत्र पर अब्राहम लिंकन की परिभाषा पूछी जाए, तब उस का सटीक उत्तर, ‘प्रजातंत्र वह शासन तंत्र है जो जनता का, जनता के लिए, जनता के द्वारा शासन है,’ होगा. हो सकता है कि आप ने अब्राहम लिंकन की ही परिभाषा लिखने के बाद उसे और अधिक स्पष्ट करने के लिए कुछ और पंक्तियां जोड़ दीं लेकिन अगर आप ने केवल लिंकन की उक्त परिभाषा ही लिख दी तो भी आप का उत्तर पूर्ण होगा और परीक्षक को पूरे नंबर देने पड़ेंगे.

अधिकांश विद्यार्थियों की धारणा है कि उत्तरपुस्तिका में कुछ न कुछ लिख देने पर परीक्षक नंबर देगा ही, इसलिए वे उत्तर नहीं आने पर भी मन से उत्तर बना कर लिख देते हैं. परंतु यह धारणा गलत है. परीक्षक को गुमराह करने पर हो सकता है कि वह लंबे उत्तर वाले प्रश्नों की दोचार पंक्तियां पढ़ कर, पूछे गए प्रश्न से असंबद्धता होने के कारण काट दे जबकि अंत में उसी प्रश्न का उत्तर लिखा हो. यह ध्यान रखें कि उन्हीं उत्तरों पर अधिक नंबर दिए जाते हैं जो सटीक और सारगर्भित हों. प्रश्नों के ऐसे उत्तर पढ़ कर परीक्षक प्रभावित होता है कि विद्यार्थी को विषय का सही ज्ञान है. यह आकलन परीक्षक को प्रभावित करता है. फिर सटीक सारगर्भित उत्तर पढ़ने में कम समय लगता है और ऐसे उत्तरों पर शीघ्रता से पूरे नंबर दिए जाते हैं जबकि प्रश्नों के विस्तार से लिखे उत्तर पढ़ने में समय अधिक लगता है व उत्तर का विस्तार उत्तर की संबद्धता पर भी प्रश्नचिह्न लगा देता है.

इसलिए जहां तक हो, उत्तर सटीक लिखें और पुनरावृत्ति तथा विस्तार से बचें. पुनरावृत्ति अच्छा प्रभाव नहीं डालती है. बेकार का विस्तार जहां एक ओर परीक्षार्थी का समय बरबाद करता है, वहीं परीक्षक भी झुंझला जाता है. अत: जो भी लिखें, सटीक लिखें.

स्पष्ट व सुंदर लिखावट में लिखें उत्तर

लिखावट अस्पष्ट और उत्तर सटीक लिखने की आदत न होने पर इस का अभ्यास करना अधिक अंक प्राप्ति में सहायक होता है. परीक्षार्थी को चाहिए कि वह अपनी लिखावट सुंदर बनाने का प्रयास करे.

प्रश्नों को समझें और उत्तर दें

अमूमन विद्यार्थी प्रश्नों को समझे बिना ही उत्तर देने शुरू कर देते हैं. ऐसे में जो पूछा गया है वह छूट जाता है और बिना पूछी बात उत्तर में आ जाती है. अत: ध्यान रखें कि प्रश्नों के अनुसार उत्तर दें और पेपर की तैयारी करते समय छोटी से छोटी बात को भी माइंड में बैठा लें, क्योंकि हो सकता है कि परीक्षक उसी छोटी बात को प्रश्न के रूप में पेश कर दे. वह ऐसे प्रश्नों को भी प्राथमिकता के आधार पर प्रश्नपत्र में सम्मिलित करता है जिन से परीक्षार्थी की संपूर्ण पढ़ाई का मूल्यांकन हो. कभीकभी साधारण से लगने वाले प्रश्न भी पूछे जाते हैं. ये प्रश्न ऐसे होते हैं जो अन्य प्रश्नों का प्रतिनिधित्व करते हैं. किसी बड़े प्रश्न के प्रति प्रश्न पूरक प्रश्न होते हैं.

भूगोल में पृथ्वी की गतियों वाले अध्याय से अनेक प्रश्न हो सकते हैं. पृथ्वी की पत्तियां कौनकौन सी हैं? पृथ्वी अपने अक्ष पर कितनी झुकी है? परीक्षक इस के आधार पर प्रति प्रश्न बना कर पूछ सकता है. मौसम में परिवर्तन किस कारण होता है? उपरोक्त प्रश्नों में दूसरा प्रश्न, मौसम परिवर्तन का कारण, पृथ्वी के अपने अक्ष पर झुके होने से संबद्ध है. यदि परीक्षार्थी ने पृथ्वी के अक्ष पर झुके होने का कारण व उस पर से होने वाले परिणाम का सूक्ष्म अध्ययन किया है तो वह इस प्रश्न का उत्तर आसानी से दे सकता है.

परीक्षा के स्वरूप को समझें

परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों की संख्या और उन के विभाजन का स्वरूप मालूम कर, उसी के अनुरूप सूक्ष्म तैयारी करें. पहले ज्ञात कर लें कि परीक्षा में कितने प्रश्न पूछे जाते हैं, उन में से कितने लघु उत्तरीय आते हैं, वस्तुनिष्ठ और रिक्त स्थान का स्वरूप कैसा होता है व किस तरह के लघु उत्तरीय और निबंधात्मक प्रश्न पूछे जाते हैं, इस के अनुरूप अपना संतुलित और नियमित अभ्यास करें.

हर विषय का संतुलित अध्ययन करें

विद्यार्थियों को चाहिए हर विषय को उस के अनुसार समझ कर, याद कर के व उस की मुख्य बातें जान कर अध्ययन करें.

गणित : गणित और भौतिकी की तैयारी करते वक्त सूत्र रूप, विधि, स्वरूप आदि को ठीक तरह से समझ कर उन का सही उपयोग करना सीखें. गणित के सूत्र सवाल को हल करने में प्रयुक्त होते हैं. त्रिकोणमिति के सवाल सूत्रों के बिना सिद्ध ही नहीं होते हैं. सूत्र का उपयोग तभी बेहतर किया जा सकता है जब उस का स्वरूप हमें अच्छी तरह याद हो. इस के लिए सूत्र की उत्पति को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए कि कैसे और किस तरह से वह सूत्र उत्पन्न हुआ है? सवाल को विधि के अनुसार ही हल करना चाहिए. रमेश की आदत है कि जब सवाल नहीं आता है तो वह मनमाने ढंग से सवाल हल कर के जैसेतैसे उत्तर निकाल लेता है. यह तरीका गलत है. गणित की तरह वाणिज्य, लेखा कर्म, अर्थशास्त्र की अपनी विधि होती है. विधि के अनुसार ही अनुसरण करना चाहिए.

भूगोल : भूगोल पढ़ते वक्त उसे समझ कर पढ़ें, बीचबीच में आने वाले जिज्ञासु स्थल को अच्छी तरह समझ कर उन के लघु उत्तरीय प्रश्न बना लें.  इस से भूगोल को समझने में सहूलत रहती है.

इतिहास : इतिहास में आंकड़े और नाम बहुत होते हैं. ऐसे स्थानों के आंकड़े कंठस्थ करने के साथसाथ छोटेछोटे प्रश्न बना लेने चाहिए. वैसे इतिहास में लंबे प्रश्न होते हैं मगर सूझबूझ से उन्हें छोटेछोटे प्रश्नों में बदल कर के याद किया जा सकता है.

अंगरेजी : अंगरेजी एक सरल विषय हे, बशर्ते आप को अंगरेजी के शब्दार्थ अच्छी तरह याद हों. इस की तैयारी करने से पहले आप जिस किसी प्रश्न, निबंध, वाक्य, पंक्ति को याद करना चाहें, उसे पहले शब्दकोश की सहायता से शब्दश: हिंदी में बदल लें. प्रत्येक शब्द का हिंदी अर्थ आप को याद हो जाना चाहिए. इस से आप को अंगरेजी व्याकरण समझने में व याद करने में कठिनाई नहीं होगी. अधिकांश छात्र अंगरेजी को रटने की कोशिश करते हैं. फलत: वे अंगरेजी को कठिन विषय मान लेते हैं.

अंगरेजी का हिंदी से संबंध जोड़ कर, उस के अर्थ को समझ कर याद किया जाए तो अंगरेजी याद करना सरल होता है.

हिंदी : हिंदी की तैयारी करते समय इस बात का ध्यान रखें कि हम क्या पढ़ रहे हैं व किस विषय के बारे में पूछा जा रहा है? तथ्यों आदि को याद कर लें. वैसे अधिकांश विद्यार्थियों का हिंदी में कम अंक प्राप्त करने का सब से बड़ा कारण, हिंदी को सरलतम समझना व उस की उपेक्षा करना है. इस कारण बहुत से विद्यार्थी ठीक तरह से हिंदी नहीं लिख पाते हैं.

विज्ञान : विज्ञान विषय के विद्यार्थियों को प्रयोग कार्य पर विशेष ध्यान देना चाहिए. रसायनशास्त्र विषय की अपनी विशिष्ट विधि होती है. इस विषय को समझ कर याद करने से सूत्र, समीकरण, विधि, सचित्र परिचय आदि को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है. वैसे रसायनशास्त्र में प्रयोगशाला में एवं कारखानों में तरहतरह की वस्तुओं के उत्पा न और उन के भौतिक व रासायनिक गुण, उपयोग, प्राप्ति स्थान आदि का वर्णन विशेष रूप से होता है. अत: इस विषय के प्रश्न भी तरहतरह  के तत्त्वों, यौगिकों आदि के उत्पादन की विधियों, नामांकित चित्रों, भौतिक, रासायनिक गुणों के उपयोग पर केंद्रित होते हैं. अधिकांश विद्यार्थी नामांकित चित्र नहीं बनाते हैं जबकि रसायनशास्त्र व जीवविज्ञान में अधिकांश नामांकित चित्र पूछे जाते हैं जिन पर ज्यादातर विद्यार्थी ध्यान नहीं देते हैं. इस प्रकार अगर विद्यार्थी विषय अनुसार तैयारी करें व प्रश्न में पूछे गए स्वरूप को समझ कर उस के अनुसार प्रश्न का उत्तर लिखें तो परीक्षा में अधिकतम अंक लाने में सफल रहेंगे. विद्यार्थी परीक्षा में उत्तरपुस्तिका में लापरवाही से लिखते हैं, यह आम बात है. हाशिया ठीक से नहीं छोड़ते हैं. निर्देशों का पालन करना चाहिए या नहीं, इस की वे परवा ही नहीं करते हैं.

इस के अलावा भी परीक्षा में कम अंक प्राप्त होने के अनेक कारण होते हैेें जो इस प्रकार से हैं :

–   पूछे गए प्रश्नों का सही उत्तर न देना.

–   सवाल को विधि अनुसार हल न करना.

–   प्रश्न का आशय समझे बिना ही उत्तर देना.

–   विषय का अस्पष्ट ज्ञान होने के कारण सही उत्तर न दे पाना.

–   उत्तर सही ढंग से व्यक्त न करना.

–   जितना पूछा गया हो, उसे बेतरतीब लिखना.

–   सटीक व संक्षेप में न लिखना.

–  लिखावट अस्पष्ट होना, जिसे समझने व पढ़ने में कठिनाई का सामना करना पड़े.

–  प्रश्न में पूछी गई बात का उचित उत्तर व चित्र बना कर उसे सही से चिह्नित भी करें.

उपरोक्त बातों को ध्यान में रख कर परीक्षा की तैयारी करने व उत्तर लिखने से अधिकतम अंक प्राप्त किए जा सकते हैं.

पंकज पुरोहितः छत्तीसगढ़ से मुंबई वाया वाराणसी-अमेरिका

अघोरियों पर बनायी गयी डाक्यूमेंट्री फिल्म ‘‘बेली आफ द तंत्र’’ से अंतरराष्ट्रीय ख्याति बटोरने वाले तथा कोलंबिया विश्वविद्यालय के गेस्ट लेक्चरर फिल्मकार पंकज पुरोहित ने आज जो पहचान हासिल की है, उसके पीछे अनूठी कहानी है.

खुद पंकज पुरोहित बताते हैं-‘‘बचपन में राज कपूर की फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ देखकर मेरे बालमन में सिनेमा का भाव जागृत हुआ था. युवावस्था में पहॅुचते ही शाहरुख खान की रोमांटिक अंदाज ने मुझे ऐसा दीवाना बनाया कि मैं छत्तीसगढ़ के कोरबा शहर को छोड़कर मुंबई पहुंच गया. मुंबई में मुझे अपने अंदर कमियां नजर आयी. तब 2001 में खैरागढ़ और बनारस जाकर शास्त्रीय संगीत की तालीम हासिल की. फिर मुंबई आकर तनूजा चंद्रा के साथ बतौर सहायक निर्देशक काम करना शुरू किया, लेकिन यह फिल्म बनी ही नहीं. निराश होकर 2003 में मैं अमेरिका चला गया. अमेराका में कई इंस्टीट्यूट से शिक्षा हासिल कर फिल्म मेकिंग की हर विधा में खुद को पारंगत किया. हालीवुड फिल्मों में बतौर सहायक निर्माण अधिकारी के रूप में काम किया.

2006 में अपने मित्र जेरमी वीवर के साथ मिलकर ‘‘आनवर्ड इंटरटेनमेंट’’ कंपनी स्थापित कर ‘‘ट्वाईलट ग्रेस’’ और ‘‘न्यू मियांक’’ जैसी फिल्मों का निर्माण किया. पर मुझे अपने वतन की याद आ रही थी. इसलिए 2010 में भारत वापस आकर मैंने अघोरियों पर एक डाक्यूमेंट्री फिल्म ‘बेली आफ द तंत्र’ का निर्माण व निर्देशन किया, जिसने मुझे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जबरदस्त शोहरत दिलायी. इस डाक्यूमेंट्री का निर्माण करने के लिए मैं साल भर तक बनारस, काठमांडू, कामाख्या, असम, महेश्वर, तारापीठ कोलकाता भटकता रहा. इस फिल्म की वजह से मिली शोहरत ने ही मुझे कोलंबिया यूनिवर्सिटी में ‘गेस्ट लेक्चरर’ के रूप में नियुक्ति मिल गयी. अब मैं अपनी नई चर्चित फिल्म ‘सडन क्राय’ को अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में भेजने की तैयारी में लगा हुआ हॅूं.’’ फिल्म ‘‘सडन क्राय’’ में बाल वेश्यावृत्ति से जुड़े अपराधों का चित्रण है. इतना ही नहीं पकज पुरोहित इन दिनों बड़े कलाकारो को लेकर होमो सेक्सुआलिटी पर भी एक फिल्म बनाने की तैयारी कर रहे हैं.

जानिए फवाद खान को क्यों है किसिंग सीन से परहेज…?

34 वर्षीय पाकिस्तानी कलाकार फवाद खान अपने अभिनय करियर की पहली पाकिस्तानी फिल्म ‘‘खुदा के लिए’’ व पाकिस्तानी सीरियल ‘‘जिंदगी गुलजार है’’ की वजह से एक अलग पहचान रखते हैं. वह ना सिर्फ चार्मिंग कलाकार हैं, बल्कि बहुत ही तहजीबदार हैं. वह बहुत ही इमोशनल और संजीदा इंसान हैं. पर वह अपने इमोशंस को सिर्फ अपने करीबों के बीच ही जाहीर करते हैं. वह अपने परिवार और कमिटमेंट के लिए कुछ भी कर सकते हैं. फवाद खान ने सोनम कपूर के साथ बौलीवुड फिल्म ‘‘खूबसूरत’’ से करियर शुरू किया था. अब उनकी दूसरी बौलीवुड फिल्म ‘‘कपूर एंड संस’’ अठारह मार्च को रिलीज हो रही है. करण जोहर निर्मित तथा शकुन बत्रा निर्देशित फिल्म ‘‘कपूर एंड संस’’ में सिद्धार्थ मल्होत्रा व आलिया भट्ट के साथ अभिनय किया है. मगर इस फिल्म में फवाद खान ने आलिया भट्ट के साथ किसिंग व इंटीमसी के सीन करने से इंकार कर दिया. क्योंकि वह किसी भी सूरत में अपने मूल पाकिस्तानी दर्शकों को आहत नहीं करना चाहते.

जी हां! यह कड़ा सच है. जब कुछ दिन पहले हमने मुंबई के नोवाटेल होटल में फवाद खान से एक्सक्लूसिब बातचीत की, तो उन्होने इस बात का खुलासा करते हुए कहा-‘‘यह सच है कि मैं फिल्मों में  किंसिंग सीन करने से परहेज करता हूं. देखिए, हम अपनी शर्ट को एक खास नाप से सीते हैं, जिससे वह हमारे शरीर पर फिट आ सके. मैने भी अपने काम को दर्शकों को ध्यान में रखकर ही तय किया. मगर मैं काम के कुछ पहलुओं को लेकर अलग सोच रखता हूं. मेरी यह सोच मेरे अपने वतन पाकिस्तान के दर्शकों की रूचि का ध्यान रखकर बनी है. मसलन-इंटीमसी के सीन हैं. मैं इस तरह के सीन परदे पर अंजाम नहीं दे सकता. मेरे जो मूल दर्शक हैं, उन्हे जो चीजें या सीन सहज नहीं करती हैं, उनसे बचने का मेरा प्रयास रहता है. पाकिस्तान में सिनेमा की स्थिति बहुत अलग रही है. कुछ समय पहले तक वहां का सिनेमा मृत प्राय था. अब धीरे धीरे अलग तरह का सिनेमा बनने लगा है. अब पाकिस्तान में ‘खुदा के लिए’ जैसी बोल्ड फिल्म बनने लगी है, जिसमें मैंने स्वयं अभिनय किया था. जैसे जैसे वहां सिनेमा की संख्या बढ़ेगी, वैसे वैसे चीजें ज्यादा खुलेंगी. दर्शकों की रूचि भी बदलेगी. पर जब तक ऐसा नहीं होता है, मैं उन्हे अपमानित या ग्लानि का अहसास नहीं कराना चाहता. फिलहाल,मेरी कोशिश यह है कि मैं जिस तरह की कहानियां बताना चाहता हूं,वह उन तक पहुंच जाएं. पर आप यह कहे कि मैं डरकर काम कर रहा हूं. तो ऐसा नहीं है. कलाकार के तौर पर हम डरकर काम नहीं कर सकते. डर मुझे भी होता है, मगर मैं उस डर को नजरंदाज कर देता हॅूं.’’

यानी कि पाकिस्तानी दर्शकों के साथ तारतम्य बनाए रखने के मकसद से ही आपने फिल्म ‘कपूर एंड संस’ में आलिया भट्ट के साथ किसिंग सीन व इंटीमसी के सीन करने से परहेज किया? इस सवाल के जवाब में फवाद खान ने कहा-‘‘जी हां! मैं खुद इस तरह के सीन करने में कम्फर्टेबल नहीं हूं. पर मैं ऐसा करने के लिए दूसरों पर दबाव नहीं डाल सकता. फिल्म का अनुबंध करने से पहले ही मैं अपने निर्माता व निर्देशक को बता देता हूं कि फिल्म में मैं क्या कर सकता हूं और क्या नहीं. यदि निर्माता या निर्देशक को उस वक्त लगता है कि उनकी फिल्म में उन दृश्यों का होना जरुरी है, जिन्हें मैं नहीं करना चाहता, तो वह किसी अन्य कलाकार के बारे में सोचने के लिए स्वतंत्र होता है. बालीवुड में अब तक कुछ फिल्मकारों ने मेरी बात को महत्व देते हुए सीन में बदलाव भी किया है. मैं ऐसे फिल्मकारों का आभारी हूं.’’

जब हमने फवाद खान से पूछा कि किसिंग सीन न करने का आपका निर्णय निजी पसंद का मसला है या पाकिस्तान में किसिंग सीन के बैन होने की वजह से आपने निर्णय कर रखा है? तो फवाद खान ने बड़ी बेबाकी से कहा-‘‘यह मेरी सबसे बड़ी बेवकूफी होगी यदि में यह कहूंगा कि मैं इस तरह की फिल्में देख सकता हूं, इस तरह के काम की प्रशंसा कर सकता हूं, पर मैं खुद इस तरह की फिल्म या इस तरह का काम नहीं करूंगा. मैं खुद किसी चीज को गलत नहीं मानता. किसी चीज को गलत न मानते हुए भी हमें कुछ चीजों का ख्याल रखना जरुरी होता है और किसिंग सीन उन्ही में से है. अगर हमारी पाकिस्तान के दर्शकों को इस तरह के दृश्यों पर आपत्ति न होती, तो मैं इंकार न करता. देखिए, अमरीका में बहुत सारा काम हो रहा है. वहां पर लोग पूरी तरह से न्यूड सीन भी कर रहे हैं. बैक न्यूड सीन भी देते हैं. पर वही सीन भारतीय कलाकार से करने के लिए कहेंगे, तो वह मना कर देंगे. भारतीय कलाकार कहेगा कि हमारे भारतीय दर्शक इसे स्वीकार नहीं करेगे.

जब हमने उनसे कहा कि वह यह मानते हैं कि दर्शकों ख्याल रखने की वजह से कलाकार सीमाओं में कैद होकर रह जाता है? तो इस बात को स्वीकार करते हुए फवाद खान ने कहा-‘‘बिलकुल! मैं कलाकार की अपनी पसंद और दर्शकों की रूचि के बीच एक सामंजस्य बैठाने का प्रयास करता रहता हूं. यदि फिल्म की कहानी में वह बातें हैं, जो कि हर इंसान की जिंदगी में होती हैं, जिसे दर्शकों में से किसी को तकलीफ नहीं होगी, तो वह करने से मैं परहेज नहीं करता. फिल्म भी दर्शक को शिक्षा देने का एक माध्यम होता है. बशर्ते फिल्म बेवजह लोगों को तंग करने के लिए न बनायी जा रही हो. देखिए, सच भी कड़वा होता है. तो कभी कभी इस सच के कड़वे घूंट को भी पीना चाहिए. इसका स्वाद लेना चाहिए. मैने पाकिस्तानी फिल्म ‘‘खुदा के लिए’’ की, जिसे दर्शकों ने पसंद भी किया. इसलिए मैं धीरे धीरे उस लाइन को क्रास करते हुए डार्क किरदार भी निभाना चाहता हूं. लोगो की सोच के अनुरूप वह किरदार अजीब कहे जा सकते हैं. कहने का अर्थ यह है कि हर किरदार को करते समय मैं यह नहीं सोच सकता कि लोग क्या कहेंगे? यदि मैं ऐसा सोचने लगा,तो फिर मैं कलाकार नहीं रह पाउंगा. कोशि करता हॅू कि बेवजह के विवादों को जन्म देने की बजाय कंटेंट पर ध्यान देते हुए काम करता रहूं. कोई ऐसी कहानी होनी चाहिए, जो दिल को छू कर चली जाए.’’

नया बजट किसानों और खेती के लिए

नए बजट ने दूसरे लोगों को भले ही नाखुश किया हो, पर खेती और किसानों का पूरा खयाल रखा है. किसानों के लिए वाकई यह बहुत खुशी की बात है. पिछले कुछ अरसे से लगातार मुसीबतों से घिरे किसानों के लिए यह बजट किसी सौगात से कम नहीं है. इस बार सरकार ने कृषि क्षेत्र के लिए बजट आवंटन करीब दोगुना करते हुए 44485 करोड़ रुपए कर दिया है. इस के अलावा कृषि क्षेत्र के लिए ऋण का लक्ष्य  पिछले साल के 8.5 लाख करोड़ रुपए से बढ़ा कर 9 लाख करोड़ रुपए कर दिया है. सरकार ने किसानों की आमदनी बढ़ाने पर बल देते हुए साल 2022 तक इसे दोगुना करने की बात कही है. किसानों पर ऋण अदायगी के बोझ को कम करने के लिए बजट में 15 हजार करोड़ रुपए रखे गए हैं. आम बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने खेती को पहले नंबर पर रखा है. उन्होंने सिंचाई का इंतजाम सुधारने पर काफी जोर दिया है. देश की 46 फीसदी खेती को ही सिंचाई की सुविधा मिली हुई है. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के जरीए मिशन मोड में 28.5 लाख हेक्टेयर जमीन को सिंचित इलाके में शामिल किया जाएगा. नाबार्ड के जरीए 20 हजार करोड़ रुपए की सिंचाई कार्पस निधि बनाई जाएगी. इसी तरह बारिश सिंचित इलाकों में मनरेगा के जरीए 5 लाख फर्म तालाब, कुएं और कंपोस्ट खाद के लिए 10 लाख गड्ढे बनवाए जाएंगे.

पारंपरिक कृषि विकास योजना के जरीए अगले 5 सालों में 5 लाख एकड़ जमीन पर जैविक खेती की जाएगी. पूर्वोत्तर व पहाड़ी राज्यों में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए जेटली ने बजट में 412 करोड़ रुपए की राशि तय की है. किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए उन से आम फसलों की खेती के अलावा तमाम कमर्शियल उत्पादों की खेती करने की अपील की गई?है. किसानों से खेती के साथसाथ पशुपालन, मधुमक्खीपालन व डेरी कारोबार करने को भी कहा गया है. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के कारगर नतीजों के लिए साल 2016-17 के इस बजट में 5500 करोड़ रुपए की राशि रखी गई है. इस बार रसोईगैस सब्सिडी के अंदाज में खाद सब्सिडी की रकम भी सीधे किसानों के खातों में भेजे जाने की तैयारी की जा रही है. शुरू में इस योजना को कुछ खास जिलों में आजमाया जाएगा और नतीजे अच्छे रहने पर इसे सभी जगह लागू कर दिया जाएगा. काबिलेगौर है कि सरकार सालाना 73 हजार करोड़ रुपए की खाद सब्सिडी किसानों को देती?है.

मार्च 2017 तक 14 करोड़ कृषि जोनों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिए जाएंगे. मिट्टी (मृदा) व बीज की जांच की सुविधाओं के साथ उर्वरक कंपनियों के 2 हजार आदर्श खुदरा केंद्र अगले 3 सालों के दौरान खोले जाएंगे. कृषि क्षेत्र में धान की कमी खत्म करने के लिए सरकार ने 0.5 फीसदी का सरचार्ज लगाया है. मंडी कानून में तब्दीली कर के राष्ट्रीय बाजार प्लेटफार्म शुरू किया जाएगा. विदेशी निवेश के जरीए खाद्य प्रसंस्करण उत्पादों के लिए बाजार तय किए जाएंगे. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत दालों का उत्पादन बढ़ाने के लिए बजट में 5 सौ करोड़ रुपए रखे गए हैं. इस मिशन में जिलों की संख्या बढ़ा कर 622 कर दी गई है. 674 कृषि विज्ञान केंद्रों के बीच 50 लाख रुपए की इनामी रकम के साथ राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिता कराई जाएगी.

अब स्टेशन पर मिलेंगे बेबी फूड और दूध

आमतौर पर रेलवे स्टेशनों पर बड़े लोगों के खाने लायक तमाम तरह की चीजें आसानी से मिल जाती हैं, मगर मासूम बच्चों के मतलब की चीजें कतई नहीं मिलतीं. अब भारतीय मम्मियों की यह दिक्कत दूर होने वाली है. रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने इस दफे औरतों और मासूम शिशुओं की जरूरतों का भी अपने बजट में पूरापूरा खयाल रखा है. इस बार रेल मंत्री ने महिलाओं को सीटों में आरक्षण दिया, तो नन्हे बच्चों के लिए ट्रेनों और स्टेशनों पर बेबीफूड और दूध का बंदोबस्त करने का वादा भी किया है. यह योजना भले ही मुख्य रूप से छोटे बच्चों के लिए है, लेकिन इस से चेहरे तो तमाम मम्मियों के ही खिले हैं, क्योंकि बच्चों की खातिर परेशान तो उन्हीं को होना पड़ता है. शिशु मुसीबत को क्या जानें, उन्हें तो बस खुराक चाहिए. सिरदर्दी तो मम्मियों की होती है.आमतौर पर ट्रेनों की पैंट्री कार में तमाम तरह के पकवान मौजूद रहते हैं, लेकिन उन में शिशुओं के लायक कुछ नहीं होता. लेकिन अब हालात बदल जाएंगे और शिशुओं के खाने लायक चीजों के साथ कुनकुना दूध भी ट्रेनों व स्टेशनों पर मौजूद होगा

जैविक खेती से भंवर ने कमाया नाम

राजस्थान के जोधपुर जिले के गांव उचियाड़ा के 74 साल के किसान भंवरलाल ने जैविक खेती में नए प्रयोगों से बहुत नाम कमाया है और फसलों का उत्पादन बढ़ा कर कमाई भी की है. भंवरलाल के पास 125 बीघे जमीन है, जिस में 75 बीघे सिंचाई वाली है. साल 1962 में मैट्रिक पास करने के बाद भंवरलाल मास्टर बन गए. 3 साल तक नौकरी करने के बाद वे नौकरी छोड़ कर खेती के काम में लग गए.

भंवरलाल खरीफ में बाजरा, तिल व मूंग की फसल उगाते हैं और रबी में जीरा, सौंफ, मेथी, धनिया, राई व चारा फसलें (रिजका) उगाते हैं. उन के घर में 12 गायें हैं, जिन से खेती के लिए जैविक खाद गोबर के रूप में मिल जाती है. वे गायों को इस तरह रखते हैं कि उन का मूत्र भी एक नाली में बह कर इकट्ठा हो जाए.

जैविक खेती के तहत उन्होंने गौमूत्र इकट्ठा कर के एक ड्रम में भर कर उसे सिंचाई के पानी के साथ मिला कर देना शुरू किया. इस से फसलों के कीटरोग के अंश खत्म हो गए और फसल की पैदावार भी बढ़ी. जैविक खाद के साथ गौमूत्र देने से फसल की गुणवत्ता भी अच्छी रही और अनाज स्वादिष्ठ भी होने लगा. गोबर की खाद व गौमूत्र जमीन में देने से फसलों में सिंचाई भी कम करनी पड़ी. इस से पानी की बचत हुई और गैरजरूरी रासायनिक खाद व दवाओं का खर्च भी बचा. इस के साथ दीमक से बचाव भी हो गया.

जैविक खेती में नवाचारों में छाछ इकट्ठा कर के खट्टा होने पर नीबू की फसल व अन्य फसलों पर छिड़कने से पत्तों का सिकुड़न रोग खत्म हो गया और पत्तों में पीलेपन की बीमारी नहीं रही. नीबू, आक व धतूरे के पत्तों और निंबोली को ड्रम में भर कर उस की 10 किलोग्राम मात्रा में 100 लीटर पानी डाल कर उस से छिड़काव करने से सौंफ, जीरा व धनिया में कीटों व दूसरे रोगों से छुटकारा पाया. भंवरलाल बताते हैं कि जैविक खेती में गोबर की जैविक खाद का बहुत महत्त्व है. इस में घर के पशुओं का गोबर काम आ जाता है. कभीकभी बाहर से भी गोबर खरीदना पड़ता है, जिसे वे गड्ढे में सड़ा देते हैं और फिर जरूरत के मुताबिक फसलों में इस्तेमाल करते हैं. भंवरलाल का कहना है कि यूरिया से बढ़वार तो जरूर होती है, परंतु फसलों में ताकत नहीं होती और खेती टिकाऊ नहीं रहती है.

भंवरलाल के मुताबिक निंबौली को इकट्ठा कर के पीस कर व छान कर फसल पर छिड़काव करने से कीटों व रोगों में कमी होती है. इस से हवा भी साफ रहती है. भंवरलाल लगातार जैविक खेती में आगे बढ़ रहे हैं. उन्हें जहां भी नई जानकारी मिलती है, वे उसे समझ कर अपनाते हैं. पिछले साल भंवरलाल को पशुपालन में जिला स्तर पर प्रगतिशील किसान के नाते 25 हजार रुपए का इनाम दिया गया था. उन्हें उद्यानविभाग से उन्नत बागबानी में जिलास्तर पर 10 हजार रुपए और उन्नतकृषि में 10 हजार रुपए के इनाम भी मिले हैं. उन्होंने किसानों की कई जैविकप्रतियोगिताओं में भाग लिया और उन्हें कई प्रमाणपत्र मिले. इस प्रकार जैविक खेती से भंवरलाल आगे बढ़ रहे हैं. उन्होंने नाम तो कमाया ही है, साथ ही उन की आमदनी भी बढ़ी है. पड़ोसी किसान उन के खेत पर जैविक खेती देखने आते हैं.

भंवरलाल बताते हैं कि जैविक खेती में देशी खाद की करामात होती है. सभी किसान भाई जैविक खेती की तरफ बढ़ें, तो फसल में जहर कम हो सकता है. इस से खर्चा कम होगा, स्वास्थ्य सुधरेगा व खेती में सिंचाई कम होगी. जैविक खेती ही टिकाऊ खेती है. भंवरलाल ने जैविक खेती में तमाम प्रयोग किए हैं.

कुंठा और कानून

हरेक की जिंदगी में एक दौर ऐसा आ ही जाता है जब वह इस देश में पैदा होने पर कोसने से खुद को रोक नहीं पाता. ऐसा ही कुछ मद्रास हाईकोर्ट के जज सी एस करनन के साथ हुआ जिन्होंने खुद अपने तबादले पर स्थगन आदेश लगा कर हैरानी फैला दी थी. तबादला करने वाले जजों के खिलाफ आग उगलते करनन का कहना था कि चूंकि वे पिछड़ी जाति के हैं, इसलिए उन्हें तंग किया जा रहा है. इतना ही नहीं, उन्होंने अपने साथ हुई ज्यादती के खिलाफ एससीएसटी ऐक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कराने की भी धौंस दी थी.

लेकिन हफ्ता पूरा भी नहीं गुजरा था कि इन जज साहब को ज्ञान प्राप्त हो गया कि कैसे वे ओबीसी के हो कर एससीएसटी ऐक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कराएंगे. इसलिए उन की शर्मिंदगी दूर हो गई और वे मान बैठे कि चूंकि वे हफ्तेभर के लिए कुंठित हो गए थे, इसलिए ऐसा कुछ बोल गए थे. अच्छा है कि शर्मिंदगी के ये दोनों अध्याय जल्द और बिना किसी बड़े विवाद के समाप्त हो गए.

तेजाबी होली

सोनी सोरी एक जुझारू और दुस्साहसी आदिवासी युवती हैं जो लंबे वक्त से आदिवासियों के हक की लड़ाई लड़ रही हैं. उन्हें बस्तर में खासा समर्थन भी हासिल है. पिछले साल एक रैली में 10 हजार आदिवासी महिलाएं उन की आवाज पर इकट्ठा हुई थीं तो हर कोई हैरत में पड़ गया था. अब आम आदमी पार्टी में शामिल हो गईं सोनी बीते दिनों जब छत्तीसगढ़ पहुंचीं तो हमलावरों ने उन के चेहरे पर तेजाब फेंक दिया. उल्लेखनीय बात यह है कि सोनी नक्सलियों की तरह हिंसा में भरोसा नहीं करतीं. इस के बाद भी छत्तीसगढ़ राज्य की पुलिस जाने क्यों उन पर कहर ढाती रहती है. एक बार उन पर झूठे आरोप लगा कर हिरासत में ले कर पुलिस ने उन के गुप्तांगों में पत्थर भर दिए थे. तब सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें इलाज के लिए कोलकाता भेजा था. अब तेजाब किस ने फेंका, इस पर कोई गंभीर नहीं. मानो, आदिवासी हितों की बात और उन के लिए काम करना कोई गुनाह हो.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें