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वकार युनूस ने पाकिस्तान के मुख्य कोच का पद छोड़ा

वकार युनूस ने पाकिस्तान क्रिकेट टीम के मुख्य कोच के पद से इस्तीफा दे दिया और कहा कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने उनकी सिफारिशों पर ध्यान नहीं दिया जिससे टीम आगे नहीं बढ़ सकी. शाहिद अफरीदी ने टी-20 वर्ल्ड कप में टीम के खराब प्रदर्शन के कारण कप्तानी छोड़ दी थी. पाकिस्तान ग्रुप चरण में सिर्फ एक मैच जीत सका.

वकार ने कहा कि मैं भारी मन से अपने पद से इस्तीफा दे रहा हूं. मैंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि बोर्ड ने 2015 वर्ल्ड कप के बाद मेरी सिफारिशों को संजीदगी से नहीं लिया. दो साल पहले दूसरी बार कोच बने वकार ने कहा था कि वह खलनायक बनकर विदा नहीं लेना चाहते. वह पहले 2010-11 में कोच थे. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को उनकी सिफारिशों पर अमल करना चाहिए. वकार के करार के अभी तीन महीने बाकी थे.

उन्होंने कहा कि मैं चाहता हूं कि मेरी सिफारिशों पर अमल हो. मैंने 2015 में जब सिफारिशें दी थी, तब उन पर अमल नहीं किया गया. उनकी रिपोर्ट का एक हिस्सा मीडिया को लीक हो गया. उन्होंने चयन प्रक्रिया में उन्हें शामिल नहीं करने के पीसीबी के फैसले की आलोचना की थी और अफरीदी की कप्तानी पर भी सवाल उठाए थे.

उन्होंने कहा कि हम न्यूजीलैंड से हारे, एशिया कप और टी20 वर्ल्ड कप भी खराब कप्तानी के कारण हारे. मैंने कई बार कहा है कि शाहिद अफरीदी बल्ले, गेंद से या बतौर कप्तान कोई योगदान नहीं दे पा रहे लेकिन मेरी किसी ने नहीं सुनी.

पीसीबी वकार के विकल्प की तलाश कर रही है लेकिन एक सूत्र ने बताया कि नए कोच के चयन के लिए उचित प्रक्रिया अपनाई जाएगी क्योंकि अब पाकिस्तानी टीम को सीधे जुलाई में इंग्लैंड का दौरा करना है. अधिकारी ने कहा कि इस बार कोई जल्दी नहीं है. हम पूरा समय लेकर फैसला लेंगे. पद के लिए विज्ञापन दिया जाएगा ताकि विदेशी और देशी उम्मीदवार आवेदन भेज सकें.

फैशन में कर दे बड़े बड़ों को मात

अगर आपको लगता है आप को  फैशन  की बहुत समझ है और आप इस मामले में बहुत आगे हैं तो जरा संभल जाइए क्योंकि आपको कॉम्पिटिशन देने के लिए आ गयी हैं मात्र दो साल की दो बच्चियां एवरलेह स्टाउस और अवा फौली. इन नन्हीं फैशंनिस्ता को देख कर आप भी दांतों तले  उंगलिया दबा लेंगे क्योंकि इनका स्टाइल कुछ है ही इतना खास.

2 वर्ष की  उम्र में ही इन बच्चियों ने फैशन और स्टाइल के मामले में  सबको पीछे छोड़ दिया है. ये दोनों बच्चियां बेस्ट फ्रेंड्स हैं और इंस्टाग्राम पर 'बेस्ट ड्रेस्ड किड्स' का ख़िताब भी हासिल कर चुकी हैं. इन दोनों बच्चियों की माएं सवाना स्टाउस और मिशेल फौले भी आपस में पक्की सहेलियां हैं और वो दोनों भी काफी फैशनेबल हैं. शायद यहीं वजह है कि इन बच्चियों में भी फैशन के गुण बचपन से ही दिख रहे हैं.

इनकी क्यूट तस्वीरों के कारण कई बड़े ब्रांड की तरफ से मौडलिंग  के ऑफर आ रहे हैं. इन ब्रांड में 'गेस्स' और 'कार्देशिएन किड्स कलेक्शन' भी शामिल हैं. इन  बच्चियों पर सब जंचता  है और इनकी मासूमियत उसमें चार चांद लगा देती है.

रैंप पर ‘मौम टू बी’

समय के साथ साथ पुराने रीतिरिवाज नये फैशनेबल रंग में नजर आने लगे है. मां बनना हर औरत के लिये बडी खुशी का मौका होता है. गर्भावस्था के दौरान उसमें तमाम तरह के शारीरिक और मानसिक बदलाव होते है. गर्भावस्था के हर पल की खुशियों को जीवन भर समेट कर रखना चाहती है. गर्भावस्था के 8वें माह में गोद भराई की रस्म बहुत पहले से होती है. इसमें नाते रिश्तेदार एक जगह आकर होने वाली मां को ढेर सारी खुशियां और उपहार देते है.

नये ट्रेंड में यह बदलने लगा है. अब गोद भराई की जगह ‘बेबी शावर’ पार्टी का आयोजन होने लगा है. यह पूरी तरह से गोदभराई से अलग होता है. इसमें होने वाली मां के करीबी दोस्त और रिश्तेदार एक जगह एकत्र होकर फैशनलेबल अंदाज में ‘मौम टू बी’ का स्वागत करते है. पार्टी में आये हुये लोगों के मनोरंजन के लिये तरह तरह के गेम्स खेले जाते है.

होने वाली मां सहित पार्टी में आई दूसरी मां रैंप शो भी करती है. जहां पर वह किसी प्रोफेशनल मौडल की तरह कैटवाक करती है. लखनऊ की रहने वाली नम्रता मदन ने इसी तरह की पार्टी का आयोजन इसेंस लाउंज में किया. इसमें नम्रता के साथ उनकी सहेलियों ने भी रैंप पर चल कर दिखाया. खुद नम्रता ने जिस तरह से रैंप पर कैटवाक किया उसे देखकर यह नही कहा जा सकता कि वह जल्द ही बच्चे की मां बनने वाली है.

नम्रता मदन ने बताया कि ‘बेबी शावर पार्टी’ का आयोजन अब तेजी से होने लगा है. इससे होने वाली मां को जहां बहुत सारी खुशियां मिलती है वहीं वह एक्टिव भी रहती है. वह अपने दोस्तों के बीच बच्चों वाले गेम्स खेलती है. वह अपने बचपन का अनुभव करते अपने पेट में पल रहे बच्चे की खुशी को भी अनुभव करती है. अब फैशन का ट्रेंड बदल गया है.

पहले गर्भावस्था में पहनने के लिये डिजाइनर ड्रेस नहीं होती थी. जिससे एक ही तरह की ढीली डीली पोशाक पहननी पडती थी. महिलायें अपने को छिपाकर रखने की कोशिश करती थी. अब हर तरह की फैशनेबल ड्रेस बाजार में मिलने लगी है. इनको गर्भावस्था के दौरान पहना जा सकता है.

अब ‘बेबी शावर पार्टी’ के दौरान होने वाली मां भी दूसरे लोगों की तरह खुद का दिखा सकती है. गोद भराई की रस्म की जगह ‘बेबी शावर पार्टी’ का आयोजन बडे शहरों से होते हुये छोटे शहरों तक भी पहुंच गया है. नये ट्रेड से पुरानी परंपराओं को नई उर्जा मिल रही है. नई पीढी पूरे उत्साह के साथ इस बदलाव का स्वागत कर रही है. प्रसव के दौरान महिलाओं की मानसिक और शारीरिक बदलावों को महसूस वाली डाक्टर सुनीता चन्द्रा कहती है ‘प्रसव के दौरान कई तरह के दौरान तनाव हावी हो जाते है. ऐसे आयोजन से उन तनाव को दूर करने में मदद मिलती है’  

आत्महत्या के ख्याल को ऐसे करें दूर

आत्महत्या! यह शब्द अपनेआपमें आतंक पैदा करने वाला है. प्रत्युषा बनर्जी की असामयिक मौत निसंदेह बड़ी दुखद है. आखिर क्यों होती है आत्महत्या की घटनाएं  कोलकाता की जानीमानी मनोचिकित्सक प्रथमा चौधुरी कहती हैं कि किसी-किसी इंसान में आत्महत्या की प्रवृति होती है. ऐसे लोग बार-बार आत्महत्या की कोशिश करते हैं. किसी कमजोर पल में जीवन से वितृष्णा का एहसास हो सकता है और तब मन में आत्महत्या का ख्याल भी आ सकता है. तब वे ये नहीं सोचते कि उनके इस फैसले से उनके करीबी परिजनों पर क्या-कुछ गुजरेगी!

आत्महत्या को रोकने के सिलसिले प्रथमा चौधुरी निम्न सुझाव दे रही हैं:

·       अगर किसी के मन में ऐसा ख्याल आए तो उसे तुरंत मनोचिकित्सक की सलाह लेना चाहिए.

·       जीवन के प्रति जब कभी वितृष्णा या निराशा महसूस हो तो सबसे पहले एक ‘सेफ्टी प्लान’ तैयार कर लेना बहुत जरूरी है. जिनको शरीर में हमेशा क्रोनिक पेन की शिकायत रहती है, ऐसे कुछ लोगों में कभी-कभी आत्महत्या की प्रवृति को हावी होते पाया गया है. इसीलिए शरीर का किसी भी हिस्से में अक्सर दर्द रहता है तो उसका इलाज करवाना चाहिए

·       करीबी परिजनों और मित्रों से दिल की बात करके मन को हल्का कर लेना चाहिए. अपनी दुविधा को शेयर करना चाहिए. हो सकता है वह आपके लिए मदद साबित हो. किसी कठिन परिस्थिति से बाहर निकलने में सहायक हो.

·       जहां तक संभव हो अकेले रहने से बचना चाहिए. किसी भरोसेमंद मित्र या करीबी परिजन के साथ ज्यादा से ज्यादा समय गुजारना चाहिए.

·       परिजनों को भी चाहिए कि जब कभी इस बात का एहसास हो कि उनके परिवार का कोई सदस्य मन से कमजोर पड़ रहा है, निराशा से घिरा है, गहरी उदासी में है तो उसे भरसक कोशिश करके अकेला न छोड़े.

·       जब कभी दिल में कोई ‘बुरा’ ख्याल आए तो सबसे पहले आंखों को बंद करें और एक लंबी सांस लें. काफी बेहतर महसूस होगा. दिल और दिमाग दोनों शांत होगा.

·       कभी-कभी घर में कुछ समान मसलन; पुराने बोतल, कबाड़ से भरा कोना, कुछ कपड़े या ड्रेसेज, कोई बेडशीट- जिन पर नजर पड़ने पर मन दुखी हो जाता है, कभी-कभी डिप्रेशन-सा महसूस होता है; ऐसी हर चीज से पीछा छुड़ा लें. घर की सफाई कर लें. कबाड़ घर से बाहर निकल दें.

·       इसके अलावा आजकल तो औनलाइन बहुत सारे स्पोर्ट ग्रुप हैं. इन ग्रुप से बात करने पर मन हल्का होता है.

मन खराब हो तो अपने आपको हर वक्त किसी-न‍-किसी काम में व्यस्त रखना चाहिए. खासतौर पर रचनात्मक कामों में. रचनात्मक काम मानसिक तनाव या अवसाद को भुलाने में बहुत मददगार साबित  होता है.

बदले की भावना का भयावह रूप

‘बदले की भावना में इंसान अंधा हो जाता है’ पुराने समय की यह कहावत आज की दुनिया में पूरी तरह से फिट बैठती है. इंसानी बदले की भावना का कुछ ऐसा ही भयानक रूप रांची के लापुंग थाना क्षेत्र में देखने को मिला जिसकी कल्पना मात्र से किसी की भी रूह कांप जाए. बदले की आग में जल रहे एक प्रेमी बहुरण लोहरा ने शनिवार को पहले सात साल की बच्ची के साथ हैवानियत दिखायी, फिर पीट-पीट कर उसकी हत्या दी.

ये सब उसने सिर्फ इसलिए किया, क्योंकि बच्ची के पिता की चचेरी बहन से वो बेइंतहा प्यार करता था और उससे शादी करना चाह रहा था. लेकिन  एक साल पहले लड़की के घर वाले ने उसकी शादी दूसरी जगह कर दी थी. उसी समय से बहुरण लोहरा  मौके की ताक में था और  बच्ची के पिता करमू महतो से दुश्मनी का बदला लेना चाहता था. शनिवार को जब करमू  महतो की बच्ची स्कूल से घर लौटी, तो उसे साइकिल चलाने के लिए सिखाने के बहाने उसे घर से दूर ले गयाऔर  उसके साथ दुर्व्यवहार की कोशिश करने लगा लेकिन  बच्ची  द्वारा  विरोध करने पर उसने बच्ची की पीट-पीट कर हत्या कर दी.

मामले का खुलासा तब हुआ जब पुलिस ने बहुरण को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू की. पूछताछ में उसने सारी बात बतायी और यह भी बताया कि उसने बच्ची की हत्या कर एक कुएं में फेक दिया है. देर रात पुलिस ने शव को कुएं से बरामद किया और रविवार को शव को पोस्टमार्टम के लिए रिम्स भेज गया. बच्ची की हत्या से पहले उसके साथ दुष्कर्म हुआ या नहीं, इस बात की पुष्टि के लिए पुलिस मेडिकल रिपोर्ट आने का इंतजार कर रही है. पुलिस के अनुसार आरोपी बच्ची के  पड़ोस में ही रहनेवाला है. 

सैक्स: बिस्तर पर औरत का ठंडापन

रात के 9 बजे थे. कमला बिस्तर पर लेटी हुई थी, तभी उस का पति आया. उस ने अपने कपड़े उतारे और बिस्तर में घुस कर सोने की तैयारी करने लगा. कमला कुछ नहीं बोली, जबकि आज उस का मन यह काम करने को नहीं था. सीमा की हालत दूसरी है. वह पति की जल्दबाजी को उस की लालसा समझती रही, मगर जब उस ने बिस्तर पर आते ही सीमा पर झपटना नहीं छोड़ा, तो उस ने पति से कहा, ‘‘तुम मुझे समझते क्या हो ’’

‘‘क्यों, क्या हुआ तुम्हें ’’ पति ने जानना चाहा.

‘‘यही कि तुम बिस्तर पर आते ही बाज की तरह झपट पड़ते हो.’’

‘‘तो क्या हुआ ’’

पति के इतना कहते ही सीमा भड़क गई, ‘‘क्या मुझ में जान नहीं है  क्या तुम ने मुझे जानवर समझ रखा है ’’सीमा के आंसू निकल पड़े, ‘‘मैं भी हाड़मांस की जीतीजागती इनसान हूं. मेरी भी कुछ इच्छाएं, पसंदनापसंद और भावनाएं हैं. कभी आप ने यह जानने की कोशिश की है  आप को तो अपने काम से मतलब है. बिस्तर पर आए और झपट पड़े, जैसे मैं कहीं भागी जा रही हूं.’’ सीमा बोलती रही और उस का पति चुपचाप सुनता रहा. मगर ऐसा सभी के साथ नहीं होता है. कुछ औरतें सीमा की तरह कह नहीं पाती हैं. बस, वे हालात को जैसेतैसे कबूल कर लेती हैं. नीला का पति रोज ही उस के साथ सोने की जिद करता था, इसलिए उस ने पति की इच्छा से समझौता कर लिया. जब भी उस का पति आता, वह उस के सामने बिछ जाती. उस का पति अपनी मनमानी करता रहता.

आखिर एक दिन पति खीज उठा, ‘‘यह क्या है  तुम तो जिंदा लाश जैसी पड़ी रहती हो. मैं ही सबकुछ करता रहता हूं.’’

‘‘हुं…,’’ नीला ने टालने की गरज से कहा, तो उस के पति ने पूछा, ‘‘आखिर तुम साथ क्यों नहीं देती हो ’’

तब नीला ने बताया, ‘‘आप ने कभी यह जानने की कोशिश ही नहीं की कि मैं ऐसा क्यों करती हूं  शुरूशुरू में मेरी भी कुछ इच्छाएं और उमंगें थीं, जिन्हें मैं पूरा करना चाहती थी. मगर मैं कह नहीं पाती थी. सोचती थी कि आप प्यार से पूछेंगे.

‘‘मगर आप ने कभी यह जानने की कोशिश ही नहीं की कि मैं क्या चाहती हूं  मेरी इच्छा क्या है  बस, आप तो आते ही शुरू हो जाते थे.

‘‘कई दिनों तक मैं यह देखती रही. आखिर मैं ने ही अपनी इच्छा का दम घोंट लिया. जैसा आप चाहते थे, वैसा ही होने लगा. मैं ने कभी इस बात का विरोध नहीं किया.’’ आखिर औरतें बिस्तर पर अपनी इच्छाअनिच्छा क्यों नहीं कह पाती हैं, जबकि पति की इच्छा का सम्मान करते हुए वे बिस्तर पर पड़ी रहती हैं शुरूशुरू में तो पति को पत्नी की इस आदत पर हैरानी नहीं होती है, मगर जब उस की यौन जिंदगी सामान्य और सही ढर्रे पर आती है, तो पत्नी का साथ उसे अखरने लगता है. इस के मूल में पत्नी को मिले संस्कार होते हैं. इसी वजह से वह इच्छा न होते हुए भी पति के लिए बिस्तर पर तैयार रहती है. यह इस की एक वजह है, मगर सचाई कुछ और ही है.

औरत के दिमाग में आदमी की सोच का डर बैठा रहता है, जो बिस्तर पर उसे चुप रखता है. इसी सोच के चलते वह बिस्तर पर चुप ही रहती है. वह आदमी की दोहरी दिमागी सोच से वाकिफ होती है. वह जानती है कि अगर उस ने बिस्तर पर अपनी इच्छा या भावना जाहिर की, तो उसे दूसरे मतलब में लिया जाएगा. उसे कुलटा और बदचलन समझ कर शक की निगाह से देखा जाएगा. अगर वह चुप रही, तो उसे शर्मीली समझ लिया जाएगा. ज्यादा हुआ, तो गंवार कह दिया जाएगा. यही वजह है कि कई पत्नियां पति की इच्छा को ही देख कर अपना वैसा बरताव बना लेती हैं. अगर यौन जिंदगी में पति अपनी पत्नी का दखल नहीं चाहता है, तो पत्नी अपनी इच्छा को दबा कर के पति की मरजी के मुताबिक चलने लगती है. पति जैसा चाहता है, वैसा ही करने देती है. वह खुद कुछ नहीं करती और कहती है.

ऐसे में एक समय ऐसा आता है, जब पति अपनी पत्नी से ऊब जाता है. ऐसी दशा में पत्नी से उस का झगड़ा हो जाता है. अकसर वह पत्नी को ठंडी मान कर दूसरी जगह संबंध बना लेता है. अगर पति समझदार होता है, तो पत्नी से बातचीत करता है. उसे अपने भरोसे में ले कर प्यार व मनुहार से उस के दिल की बात जान लेता है. तब पत्नी के मुताबिक काम कर के अपनी यौन जिंदगी सुख से भरी बना लेता है. औरतमर्द की जरूरत समझने वाले मर्द कभी औरत के ठंडेपन की शिकायत नहीं करते हैं. वे जानते हैं कि औरत व मर्द की जिस्मानी बनावट में बहुत फर्क होता है. औरत एक नदी की तरह होती है, जो धीरेधीरे उफान पर आती है और धीरेधीरे ही शांत होती है, जबकि मर्द तूफान की तरह होता है, जो जल्दी आ कर जल्दी ही चला जाता है.

हिन्दुत्व के ‘अंडर करंट’ पर टिकी भाजपा

असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल के विधनसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी हिदुत्व कार्ड पर ही यकीन कर रही है. उसने देश के विकास और दूसरी समस्याओं से बचने के लिये अपने पुराने हिन्दुत्व कार्ड का प्रयोग किया है. असम में बंगलादेश से आने वाली मुसलिम शरणार्थियों को भाजपा ने मुद्दा बना लिया है. असम में मुसलिमों की आबादी 35 फीसदी है. असम में रहने वाले मूल मुसलिम आबादी बहुत कम है. ज्यादातर मुसलिम आबादी बंगलादेश से आई हुई है. असम के चुनाव में इस शरणार्थी आबादी का अहम रोल होता है. भाजपा इस बार इस मुद्दे को हवा देने में के लिये हिन्दुत्व का सहारा ले रही है. असम के लोगों में हिन्दुत्व का जो अंडर करंट चल रहा है वह कांग्रेस को परेशान कर रहा है. भाजपा ने 2 साल में मोदी सरकार की आलोचना के प्रभाव को कम करने के लिये हिन्दुत्व का सहारा लिया है.

केरल में भी भाजपा हिन्दुत्व का सहारा ले रही है. यहां के मुख्यमंत्री ओमन चांडी को भरोसा है कि शराबबंदी की उनकी पहल से महिला वोटरों पार्टी को वोट देगी. केरल में महिला वोटरों की संख्या सबसे ज्यादा है. ऐसे में ओमान चांडी को अपने पर भरोसा है. हिन्दुत्व को हवा देने के लिये भाजपा हिन्दुत्ववादी नेता लालकृष्ण आडवाणी के दौरे को बढाने का प्रयास कर रही है. 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को केरल में 10.33 फीसदी वोट मिले थे. यहां राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ यानि आरएसएस भाजपा के लिये खुल कर काम कर रहा है. केरल में करीब 45 फीसदी इसाई और मुसलिम है. हिन्दू करीब 55 फीसदी है. हिन्दुओं ने कभी एकजुट होकर वोट नहीं दिया है. भाजपा को उम्मीद है कि यह हिन्दू वोटर इस बार उसका साथ देगा.

भाजपा पश्चिम बंगाल में भी बंगलादेशी शरणार्थियों को मुद्दा बना कर भाजपा दूसरे दलों को हाशिये पर लाने का काम कर रही है. ममता बनर्जी से नाराज हिन्दुओं को भाजपा अपने पक्ष में करने में लगी है. पश्चिम बंगाल में वामपंथी सरकारों से नाराज लोगों ने ममता बनर्जी को वोट देकर तृणमूल सरकार बनाई थी. ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ भाजपा हिन्दुत्व का कार्ड खेल रही है. इसको हवा देने के लिये भाजपा ने हिन्दुत्व के फायर ब्रांड नेताओं को पश्चिम बंगाल चुनावों में प्रचार की कमान दी है. तमिलनाडु में भाजपा ने हिन्दुत्व को मुद्दा देने के साथ ही जयललिता के भ्रष्टाचार को अपना चुनावी अस्त्र बनाया है. भाजपा के रणनीतिकार मानकर चल रहे है कि मोदी सरकार की नाराजगी को दूर करने का एक ही उपाय है कि हिन्दुत्व को आगे बढाया जाये. भाजपा को केरल और असम में हिन्दुत्व के ‘अंडर करंट’ का पक्का यकीन है. देखने वाली बात यह है कि इस ‘अंडर करंट’ से वोट का कितना लाभ होगा. इन चुनावों के बाद भाजपा उत्तर प्रदेश विधनसभा चुनावों में भी हिन्दुत्व के मौडल कर कदम आगे बढायेगी.

PHOTO: जब भांजे आहिल संग खेलते दिखे मामू सलमान

सलमान खान ने अपने नवजात भांजे आहिल के साथ सोशल मीडिया पर एक बहुत प्यारी तस्वीर पोस्ट की है. आहिल बालीवुड सुपरस्टार की बहन अर्पिता और उनके पति आयुष शर्मा का बेटे हैं.

अर्पिता ने 30 मार्च को अपने पहले बेटे को जन्म दिया है. इस तस्वीर में सलमान खान अपने भांजे की आरे मुस्कुराते हुये दिख रहे हैं, जबकि उनका भांजा गहरी नींद सो रहा है.

अर्पिता ने 2014 में कारोबारी आयुष के साथ शादी की थी. उन्होंने ट्विटर पर अपने दोस्तों एवं शुभचिंतकों को उनके प्यार और बधाई संदेशों के लिए धन्यवाद दिया.

अर्पिता ने लिखा, हमारे छोटे राजकुमार का खुली बांहों और प्यार भरे दिल से स्वागत करने के लिए शुक्रिया. आयुष ने सोशल नेटवर्किंग साइट इंस्टाग्राम पर बच्चे के जन्म की जानकारी दी थी. उन्होंने लिखा, हमारा इंतजार खत्म हुआ. हमारा छोटा राजकुमार आहिल आ चुका है. जच्चा बच्चा स्वस्थ हैं.

और सनी लियोनी का ये सपना हो अब हो गया पूरा

बॉलीवुड में आने के बाद शाहरुख खान के साथ काम करना सनी लियोनी का सपना था और अब यह पूरा हो गया. हाल ही में फिल्म 'रईस' के एक गाने के लिए उन्होंने शाहरुख के साथ शूटिंग की.

शाहरुख के साथ काम करके सनी गौरवान्वित महसूस कर रही है. लियोनी ने एक साक्षात्कार में बताया, शाहरुख के साथ काम करना अविश्वसनीय था, यह एक सपना था जो कि सच हुआ.

जिस चीज के लिए आप हरेक दिन कामना करते है, और जब आपको मौका मिलता है, जिसे आप पसंद करते हैं उसके साथ काम करने का मौका, यह सच में मेरे लिए गौरवान्वित महसूस करने का मौका था.

बिल्‍डिंग से कूदकर जान देने जा रहीं थीं प्रियंका चोपड़ा

एक तरफ जहां टीवी एक्ट्रेस प्रत्यूषा बनर्जी के सुसाइड से पूरा फिल्म व टीवी इंडस्ट्री सकते में है, वहीं दूसरी तरफ बॉलीवुड एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा को लेकर भी चौंकाने वाला खुलासा हुआ है और किया उनके मैनेजर रह चुके प्रकाश जाजू ने. जी हां, उनके मुताबिक, प्रियंका चोपड़ा ने भी अपने संषर्ष के दिनों में सुसाइड करने की कोशिश की थी, वो भी एक नहीं बल्कि दो-तीन बार. प्रकाश जाजू ने एक के बाद कई ट्वीट कर इस बारे में खुलासा किया है.

आज भले ही बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक छाईं प्रियंका एक इंटरनेशनल स्टार बन चुकी हैं और दुनिया भर में उनके लाखों-करोड़ों फैंस हैं, मगर प्रकाश जाजू के मुताबिक, किसी समय में वो अंदर से बेहद कमजोर थीं. कई ट्वीट के जरिए उन्होंने बताया, 'प्रियंका आज भले ही बहुत मजबूत दिखती हों, मगर संघर्ष के दिनों में वो बेहद कमजोर थीं. उन्होंने दो-तीन बार सुसाइड करने की भी कोशिश की थी, मगर मैंने उन्हें हर बार जैसे-तैसे रोका.'

प्रकाश जाजू ने प्रियंका के कथित ब्वॉयफ्रेंड असीम मर्चेंट का भी जिक्र किया और दोनों के रिश्ते के बारे में कहा कि उनकी आपस में बहुत लड़ाइयां हुआ करती थीं और प्रियंका परेशान होकर उन्हें आधी रात को भी फोन किया करती थीं. प्रकाश जाजू के मुताबिक, एक बार असीम से लड़ाई के बाद प्रियंका सुसाइड करने के लिए मुंबई के वसई इलाके में पहुंच गईं और उन्होंने किसी तरह ऐसा नहीं करने के लिए प्रियंका को मनाया. वैसे प्रियंका की मां ने इन बातों को बकवास बताया है. उनका कहना है कि प्रकाश झूठ बोल रहे हैं.

प्रकाश जाजू ने एक ट्वीट में बताया कि प्रियंका, असीम की मां के बेहद करीब थीं और 2002 में उनकी मां की मौत के बाद इतनी टूट गईं कि एक अपार्टमेंट से कूद कर जान देने की कोशिश की. इसके बाद प्रियंका को तब तक कुर्सी से बांधकर रखा गया, जब तक उनके फ्लैट की खिड़कियों पर लोहे के ग्रिल नहीं लगाए गए. प्रकाश जाजू के एक अन्य ट्वीट के मुताबिक, फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ी ज्यादातर लड़कियों में आत्महत्या की प्रवृति होती है.

आपको बता दें कि प्रियंका और प्रकाश जाजू के बीच अच्छे संबंध नहीं रहे हैं. किसी मतभेद को लेकर प्रियंका ने उनका कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर दिया था. 2008 में प्रियंका के पिता ने उनके खिलाफ अपनी बेटी की निजता का हनन करने के लिए केस भी दर्ज कराया था. इस पर प्रकाश जाजू को 67 दिन जेल में भी बिताने पड़े थे. वो पहले भी प्रियंका से जुड़े कई खुलासे कर चुके हैं.

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