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इस ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर को लग रहा है टीम इंडिया से डर…!

इंडियन प्रीमियर लीग के 9वें सीजन के लिए सबसे महंगे बिके क्रिकेटर और ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर शेन वाटसन का मानना है कि अगले महीने 9 मार्च से शुरू होने वाले आईसीसी वर्ल्ड ट्वेंटी20 में ऑस्ट्रेलिया को मेजबान भारत से कड़ी टक्कर मिलेगी.

ऑस्ट्रेलिया को 27 मार्च को मोहाली में मेजबान भारत से भिड़ना है. वाटसन ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया को भारत से सतर्क रहने की जरूरत है. भारत ने हाल ही में ऑस्ट्रेलिया को उसी की धरती पर तीन मैचों की टी-20 सीरीज में 3-0 से हराकर क्लीन स्वीप किया था.

घरेलू परिस्थिति का मिलेगा भारत को फायदा
वाटसन ने कहा, 'मेरा मानना है कि घरेलू परिस्थितियों के कारण टीम इंडिया एक मजबूत टीम बनकर उभरेगी. इसलिए वर्ल्ड कप में भारत से कड़ी टक्कर मिलेगी. भारतीय टीम अपनी परिस्थितियों से अच्छी तरह से वाकिफ है और घरेलू मैदान पर बड़े टूर्नामेंटों में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया है.'

आईपीएल में सबसे अधिक कीमत 9.50 करोड़ रुपये में बिके वाटसन ने कहा कि महेंद्र सिंह धौनी की अगुवाई वाली टीम इंडिया के पास कई अच्छे खिलाड़ी जिन्होंने अब तक हर क्षेत्र में शानदार प्रदर्शन किया है.

भारत के खिलाफ तीसरे टी-20 मैच में सेंचुरी जमाने वाले वाटसन ने कहा, 'भारत के पास कई अच्छे हरफनमौला खिलाड़ी हैं. इसके अलावा उनके पास कई विस्फोटक बल्लेबाज और वर्ल्ड क्लास अच्छे अनुभवी स्पिन गेंदबाज भी हैं जो जल्दी-जल्दी विकेट निकालते हैं.'

नेहरा-बुमराह की जोड़ी खतरनाक
वाटसन ने कहा, 'काफी समय के बाद इंटरनेशनल क्रिकेट में वापसी करने वाले तेज गेंदबाज आशीष नेहरा ने शानदार गेंदबाजी की है और तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह भारत के लिए एक अच्छी खोज है. उन्होंने टी-20 सीरीज में कमाल का प्रदर्शन किया है, इसलिए मुझे लगता है कि मेजबान टीम विरोधी टीमों के लिए बड़ी चुनौती पेश करेगी.'

राइमा सेन को है स्क्रीन टेस्ट का फोबिया

गैर फिल्मी माहौल से बौलीवुड में प्रवेश करने वाली लड़कियों को यदि स्क्रीन टेस्ट फोबिया हो, तो बात समझ में आती है. मगर फिल्मी माहौल में परवरिश पायी अभिनेत्रियों को भी ‘‘स्क्रीन टेस्ट’या ‘ऑडीशन’ का फोबिया हो सकता है, बात सुनने में अजीब सी लगती है. पर यह कटु सत्य है. राइमा सेन बौलीवुड के साथ साथ बंगला फिल्मों की अतिव्यस्ततम और चर्चित अदाकारा हैं. मगर उन्हे स्क्रीन टेस्ट का फोबिया शुरू से ही रहा है. इसी के चलते उन्हे कई बड़े बजट की फिल्मों से हाथ भी धोना पड़ा. राइमा सेन जितनी बंगला फिल्में करती हैं, उससे बहुत कम हिंदी फिल्में करती हैं.

हिंदी फिल्में कम मिलने और अपने फोबिया की चर्चा करते हुए राइमा सेन कहती हैं-‘‘वास्तव में शुरुआत में मुझे स्क्रीन टेस्ट का फोबिया था. जब कोई फिल्मकार मुझे स्क्रीन टेस्ट के लिए बुलाता था, तो मैं स्क्रीन टेस्ट देने नहीं जाती थी. स्क्रीन टेस्ट के नाम से मुझे इतना डर लगता था कि मैं जाती ही नहीं थी. जिसके चलते मेरे हाथ से कई बड़ी फिल्में चली गयीं. मेरे इस कदम की वजह से लोगो ने मेरे बारे में अनप्रोफेशनल कलाकार होने की अफवाह फैला दी. लेकिन स्क्रीन टेस्ट न देने के कारण मैंने कई बड़ी फिल्में खोयी. पर आज मुझे इस बात का ‘रिग्रेट’ है. आज मुझे लगता है कि मुझे स्क्रीन टेस्ट देने के लिए जाना चाहिए था. पर मैं गयी ही नहीं, इसलिए स्वीकृत या रिजेक्शन का मसला ही नहीं आया. तो आज मुझे स्क्रीन टेस्ट के लिए मना करने को लेकर अफसोस है.’’

स्क्रीन टेस्ट देने से इंकार करने की वजह से राइमा सेन के हाथ से कई बेहतरीन हिंदी फिल्में चली गयी थी. जिनके लिए अब राइमा सेन को बहुत अफसोस है. वह खुद कहती हैं-‘‘मुझे ‘दिल्ली बेले’ में आडीशन देने के लिए बुलाया था. मणि रत्नम ने एक फिल्म के लिए स्क्रीन टेस्ट देने के लिए बुलाया था. ‘मोहब्बते’ के लिए भी बुलाया गया था. अनुराग कश्यप के आफिस में आडीशन देने गयी थी, पर कुछ देर बाद मैं भाग आयी थी. इसी तरह से कई बड़ी बड़ी फिल्मों के लिए मैने स्क्रीन टेस्ट महज डर की वजह से नहीं दिया.’’

इस साल राइमा सेन की चार फिल्में रिलीज होने वाली हैं. और यह सभी फिल्में राइमा सेन को बिना स्क्रीन टेस्ट दिए ही मिली हैं. इस बात को स्वीकार करते हुए राइमा सेन कहती हैं-‘‘2015 में मैने चार हिंदी फिल्मों की शूटिंग पूरी की. जो कि अब 2016 में रिलीज होंगी. इनमें से किसी भी फिल्म के लिए मैंने स्क्रीन टेस्ट नहीं दिया. यह चारों फिल्में मुझे ‘लक’ से मिली. प्रतीक बब्बर वाली फिल्म के निर्देशक मेरे पास आए, वह कम उम्र की अभिनेत्री चाहते थे. मुझसे मिले और मेरा चयन हो गया.‘ ‘बालीवुड डायरीज’’ के लिए कोलकाता में ऑडीशन हो रहे थे. उस वक्त मैं मुंबई में थी, तो मैं आडीशन देने नहीं गयी. कुछ दिन बाद फिल्म के निर्देशक के डी सत्यम मुंई में मेरे घर पर आए. उन्होने कहा कि वह मुझे अपनी फिल्म का हिस्सा बनाना चाहते हैं. उसके बाद उन्होने मुझे फिल्म की स्क्रिप्ट सुनायी,मुझे स्क्रिप्ट व मेरा किरदार पसंद आया.’’

लेकिन राइमा सेन ने फिल्म ‘‘एकलव्य’’ के लिए आडीशन दिया था. यह बात याद दिलाए जाने पर राइमा सेन कहती हैं-‘‘मशहूर फिल्म निर्देशक प्रदीप सरकार के निर्देशन में मैं फिल्म ‘परिणीता’ कर चुकी थी. तो प्रदीप सरकार को पता था कि मुझे स्क्रीन टेस्ट का फोबिया है. इसलिए जब विधू विनोद चोपड़ा ने मुझे फिल्म ‘एकलव्य’ के लिए स्क्रीन टेस्ट देने बुलाया, तो मैंने मना कर दिया. मैने कहा कि मैं तो ‘परिणीता’ कर चुकी हूं, तो आप लोगों को नहीं पता कि मैं कैसा काम करती हूं. मैं आडीशन नहीं दूंगी. दो दिन बाद मुझे बुलाया गया कि फिल्म ‘एकलव्य’ की शूटिंग कल से शुरू हो रही है और कल पहला सीन फिल्माया जाएगा. इसके लिए मुझे स्टूडियो पहुंचना है. मैं स्टूडियो पहुंच गयी. सेट लगा हुआ था. मुझे पूरा घाघरा पहनने के लिए कहा गया. शूटिंग पूरी करके जब में वैनिटी वैन के अंदर पहुंची, तो वहां पर दो तीन दूसरी अभिनेत्रियां वैसा ही घाघरा पहने हुए मौजूद थी. मैने उनसे पूछा कि वह क्या कर रही हैं? तो पता चला कि वह आडीशन/स्क्रीन टेस्ट देने आयी थी. मैने प्रदीप सरकार दा से पूछा कि यह क्या है? तो उन्होने कहा कि,‘तुम स्क्रीन टेस्ट के नाम से डरती हो, इसलिए हमने तुमसे कहा कि सीन फिल्माया जाना है और मुझे फिल्म ‘एकलव्य’ मिल गयी थी.’’

राइमा सेन के मन में ‘‘स्क्रीन टेस्ट’’ का फोबिया कब पैदा हुआ? इस सवाल पर राइमा सेन ने कहा-‘‘यह उस वक्त की बात है,जब मैं बहुत छोटी थी. तब एक नाटक के आडीशन में गयी थी और मैं कर नहीं पायी थी. बीच में ही स्टेज छोड़कर भाग आयी थी. तभी से मेरे अंदर एक डर समा गया. मैं सभी के सामने चलते नाटक में भाग गयी थी. उसके बाद मैने सोच लिया था कि मैं ऑडीशन या स्क्रीन टेस्ट देने नहीं जाउंगी. मैंने उसके बाद कभी भी स्टेज नहीं किया. मेरे पास कई नाटकों में अभिनय करने के आफर आए, पर मैंने मना कर दिया. अब तो सिनेमा और फिल्म इंडस्ट्री की कार्यपद्धति काफी बदल चुकी है. अब कोई मुझे स्क्रीन टेस्ट के लिए बुलाए, तो मैं निश्चित रूप से जाउंगी. अब मुझे अहसास हो चुका है कि स्क्रीन टेस्ट का अर्थ फिल्म की स्क्रिप्ट के अनुसार किरदार के लुक, उसके मैनेरिज्म, सह कलाकार के साथ केमिट्री वगैरह को जज करना जरुरी होता है. लेकिन मेरे अंदर स्क्रीन टेस्ट का फोबिया खत्म हुआ या नहीं, इसका अहसास मुझे नहीं है. मै अभी सोच रही हूं कि  अब मैं स्क्रीन टेस्ट के लिए जाउंगी. पर अभी तक गयी नहीं.’’

 

निकिता दत्ता को भी चढ़ा प्यार का बुखार

इन दिनों टीवी सीरियल में एक साथ काम करते हुए कलाकारों का एक दूसरे के प्रति आकर्षित होना और फिर प्यार में पड़ जाना आम बात होती जा रही है. यह एक सच्चाई है. इन दिनों टीवी की एक जोड़ी की चर्चा उनकी अभिनय क्षमता को लेकर नहीं, बल्कि उनके रोमांस के कारण हो रही है. टीवी इंडस्ट्री में चर्चाएं गर्म हैं कि सीरियल ‘‘ड्रीम गर्ल’’ में अभिनय कर रही अभिनेत्री निकिता दत्ता इसी सीरियल में मानव का किरदार निभा रहे अभिनेता खालिद सिद्दिकी के बीच रोमांस की खिचड़ी पक रही है.

नेवी में कार्यरत पिता की बेटी निकिता दत्ता ने असफल फिल्म ‘‘लेकर हम दीवाना दिल’’ से की थी. इस फिल्म की असफलता के बाद उनका संघर्ष शुरू हो गया, तभी उन्हें सीरियल ‘‘ड्रीमगर्ल’’ में मुख्य भूमिका निभाने का अवसर मिला, जिसे निकिता दत्ता ने तुरंत स्वीकार कर लिया. इस सीरियल की शूटिंग शुरू होने के एक माह के अंदर ही खालिद सिद्दिकी के साथ उनके रोमांस की खबरें गर्मा गयी.

यूं तो सूत्रों के अनुसार खालिद सिद्दिकी और निकिता दत्ता ने अपनी इस प्रेम कहानी को काफी गुप्त रखा हुआ है. लेकिन सीरियल ‘‘ड्रीमगर्ल’’ में ही अभिनय कर रहे कुछ कलाकारों को इनके रोमांस की ऐसी भनक लगी कि उन्होने इसकी चर्चा करनी शुरू कर दी. वैसे इस प्रेम कहानी के उजागर होने से कुछ कलाकार आश्चर्यचकित भी हैं. क्योकि सूत्रों के अनुसार खालिद सिद्दिकी न सिर्फ तलाकशुदा बल्कि दो बच्चों के पिता भी हैं. टीवी इंडसट्री में जो खबरें गर्म हैं, उनके विपरीत निकिता दत्ता और खालिद सिद्दिकी दोनों ही एक दूसरे को अपना खास व अच्छा दोस्त ही बताते हैं.

व्हाट्सऐप कौलिंग की शिकार लड़कियां

रीता दिल्ली से सटे गाजियाबाद के एक पब्लिक स्कूल में 9वीं कक्षा की छात्रा थी. 9वीं में अच्छे अंक आने पर उस ने पिता से जिद कर के एक नया ऐंड्रौयड मोबाइल फोन ले लिया. मोबाइल में इंटरनैट पैक न लिया जाए आजकल ऐसा नहीं होता, क्योंकि स्मार्टफोन के अधिकांश फीचर्स इंटरनैट बेस ही होते हैं.

रीता ने बहुचर्चित सोशल मैसेंजर व्हाट्सऐप भी अपने फोन में डाउनलोड कर लिया. कुछ दिन बाद ही उसे व्हाट्सऐप के जरिए एक कौल आई. रीता ने कौल अटैंड की, तो दूसरी तरफ कोई युवक  था, ‘‘हाय, आप की प्रोफाइल पिक्चर बहुत प्यारी है.’’

रीता सकपका गई, ‘‘आप कौन?’’

‘‘एक ऐसा साथी जो आप को चाहता है और हां, एक बात तो कहना भूल ही गया आप की आवाज भी बहुत प्यारी है.’’

रीता कोई जवाब देती उस से पहले ही कौल डिस्कनैक्ट हो गई. रीता को पता नहीं था कि वह कौन था. उस ने कोई बदतमीजी भी नहीं की थी. उस की बातों से उस के मन में गुदगुदी पैदा हो गई. जिज्ञासावश उस ने कौलिंग नंबर को सेव कर के व्हाट्सऐप पर उस का प्रोफाइल फोटो देखा तो वह एक मौडल की तरह दिखने वाला खूबसूरत युवक था.

नाजुक उम्र के दौर में रीता को यह अच्छा लगा. इस के बाद वह रीता को गुडमौर्निंग मैसेज के साथ खूबसूरत ग्रीटिंग पिक्चर्स भेजने लगा. शुरू में तो रीता ने इस का जवाब नहीं दिया, लेकिन उसे लगा कि जो भी हो वह उस की तारीफ करता है. नए मोबाइल के साथ उसे यह बात भी अच्छी लग रही थी कि अन्य यूथ की तरह वह भी व्हाट्सऐप का इस्तेमाल कर रही है.

रीता ने जब जवाब देने शुरू किए तो वह धीरेधीरे उस में इतना डूब गई कि उस ने एक रैस्टोरैंट में उस से मिलने का प्रोग्राम भी बना लिया. रीता विश्वास कर के उस से मिलने भी चली गई. युवक उसे घुमाने के बहाने कार में बैठा कर दिल्ली ले गया. उस के जाल में फंस कर रीता को एहसास हुआ कि वह किसी गैंग के चंगुल में फंस गई है. टौयलेट जाने के बहाने रीता ड्राइंगरूम से निकली और फ्लैट का दरवाजा खोल कर वहां से भाग निकली और अपने परिजनों को फोन कर सूचित किया.

सूचना मिलने पर परिजन वहां पहुंचे और उसे वहां से वापस ले कर आए. परिजनों को जब पूरा किस्सा पता चला तो उन्हें बेटी को मोबाइल दिलाने के अपने निर्णय पर पछतावा हुआ.

मामला पुलिस तक पहुंचा, लेकिन बदनामी के डर से परिजन खामोश रह गए. पुलिस ने उन से कहा कि अगर कोई उन्हें परेशान करे तो चुप न रहें. पुलिस ने गोपनीय ढंग से गैंग की पड़ताल शुरू कर दी. रीता के परिवार को खुशी थी कि उन की बेटी सुरक्षित बच गई थी, लेकिन सभी ऐसे खुशनसीब हों यह जरूरी नहीं.

रश्मि 7वीं क्लास की छात्रा थी. उस के परिजनों ने उसे ऐंड्रौयड मोबाइल दिला दिया. एक लड़के ने व्हाट्सऐप के जरिए उस से दोस्ती कर ली. उस ने दोस्ती की आड़ में उस की मासूमियत का फायदा उठा कर उस से मुलाकातें शुरू कर दीं. रश्मि नाजुक उम्र के दौर में थी और वह युवक की चाल को समझ नहीं पाई. एक दिन मौका पा कर उस ने रश्मि का शारीरिक शोषण किया. इस के बाद तो उस का लगातार शोषण किया जाने लगा. जब रश्मि के परिजनों को शक हुआ, तब जा कर मामला खुला. उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने युवक को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया.

उत्तर प्रदेश के एक गांव की रहने वाली किशोरी को व्हाट्सऐप के जरिए एक युवक ने अपने प्रेमजाल में फंसा लिया. किशोरी जब उस के जाल में फंस गई, तो उस युवक ने उस के साथ दुराचार किया. साथ ही उस ने इस दुराचार की वीडियो फिल्म भी बना ली. इस के बाद उसे ब्लैकमेल किया जाने लगा. युवक ने वीडियो के बल पर किशोरी के संबंध अपने दोस्तों के साथ भी बनवाए. जब मामला खुला तो हर कोई दंग रह गया.

कुछ समय पहले ही व्हाट्सऐप मैसेंजर ने नया फीचर जोड़ते हुए मुफ्त कौलिंग की सुविधा भी प्रदान की. इस में इंटरनैट के जरिए ही बात हो जाती है. लाखों यूजर्स इस का फायदा उठा रहे हैं. खासकर इस का जादू यूथ के तो सिर चढ़ कर बोल रहा है, क्योंकि वहाट्सऐप ही एक ऐसा मैसेंजर है जिस के जरिए मैसेज, औडियो, वीडियो व फोटो फाइलें सैकंडों में एकदूसरे के मोबाइल में पहुंच जाती हैं.

लड़कियों को शिकार बनाने वाला गैंग अनजान नंबरों को पहले अपने मोबाइल या कंप्यूटर पर सेव करता है, फिर व्हाट्सऐप पर उन का प्रोफाइल देखता है. यदि लड़की या महिला का फोटो होता है, तो उस से व्हाट्सऐप कौलिंग की जाती है. दूसरी तरफ से यदि किसी लड़की या महिला की आवाज आती है तो उस से लच्छेदार बातें करना शुरू कर देते हैं. यदि कोई पुरुष हुआ तो सौरी कह कर कौल कट कर देते हैं.

शिकार यदि उन के जाल में फंसने लगता है तो धीरेधीरे उस से रोमांचक चैटिंग शुरू करते हैं. फिर कौलिंग करते हैं और बातोंबातों में उस का फैमिली प्रोफाइल भी पता करते हैं? इस के बाद उसे अपना टारगेट बनाते हैं. जो लड़कियां इन के जाल में फंस जाती हैं उन का जम कर शारीरिक शोषण किया जाता है. चोरीछिपे उन की वीडियो क्लिपिंग बनाई जाती हैं और फिर ब्लैकमेलिंग का सिलसिला शुरू हो जाता है. इस तरह ये गैंग लड़कियों को देह व्यापार के धंधे में धकेलने से भी नहीं हिचकते.

अधिकतर ग्रामीण लड़कियां ही उन का शिकार होती हैं. शहरों में वे छात्राएं इन के निशाने पर होती हैं जो अकसर इंटरनैट के जरिए मैसेंजर आदि पर ऐक्टिव रहती हैं. व्हाट्सऐप कौलिंग में गैंग के पकड़े जाने का खतरा न के बराबर रहता है. अभी तक ऐसी कोई सुविधा नहीं है जिस से इंटरनैट कौल को रिकौर्ड किया जा सके या यह पता लगाया जा सके कि वह किस स्थान से की जा रही है. नंबर की जांच की जाए तो वह फर्जी पतों पर आधारित होते हैं. केवल नंबर से यह साबित करना मुश्किल हो जाता है कि कौन किस से क्या बात कर रहा है.

पेरैंट्स रहें सावधान

यदि पेरैंट्स बच्चों को ऐंड्रौयड मोबाइल देते हैं तो उन्हें सावधान रहने की जरूरत है. मोबाइल दे कर यह न सोचें कि लड़कियां सेफ हैं. इंटरनैट के जरिए मोबाइल पर पूरी दुनिया मौजूद है. बेटी कब किस का शिकार बन जाए, कोई नहीं जानता. ऐसे गैंग घात लगा कर सक्रिय रहते हैं जो लड़कियों को फेसबुक और व्हाट्सऐप के जरिए फंसाने का काम करते हैं. उन का मकसद लड़कियों को अपने जाल में उलझा कर उन का इस्तेमाल कर ब्लैकमेल करना व कभीकभी देह व्यापार के धंधे में उतारना भी होता है, क्योंकि यूथ के सिर पर मोबाइल इंटरनैट का जादू सिर चढ़ कर बोल रहा है, वे इसी का फायदा उठाते हैं.

–       पेरैंट्स देखें कि बच्चे मोबाइल की जिद क्यों कर रहे हैं.

–       यह ध्यान दें कि क्या बच्चे को वास्तव में मोबाइल की जरूरत है.

–       व्हाट्सऐप कितना इस्तेमाल होता है इस पर भी नजर रखें.

–       बच्चा यदि छिप कर बात या चैटिंग करता है तो भी ध्यान दें.

–       बच्चे को आजादी की सीमा के दायरे में रखें.

–       बच्चों से उन के दोस्तों के बारे में भी पूछताछ करें.

–       बच्चों को समझाएं कि अनजान लोगों से बात न करें.

–       उन्हें समझाएं कि अपना फैमिली प्रोफाइल किसी को न दें.

–       बच्चों से पूछें कि कोई उन्हें परेशान तो नहीं कर रहा है.

–       यदि कोई परेशान करता है तो उस की सूचना पुलिस को दें.

व्हाट्सऐप कौलिंग : पुलिस के लिए चुनौती

व्हाट्सऐप द्वारा शुरू की गई मुफ्त कौलिंग की सुविधा पुलिस के होश उड़ा रही है. टैक्नोलौजी के दौर में पुलिस व अपराधियों के बीच शहमात का खेल चलता रहता है. इस तकनीक का इस्तेमाल यदि अपराधियों ने किया, तो पुलिस के लिए यह बहुत बड़ी मुसीबत होगा. इस नई तकनीक पर पुलिस किसी तरह अंकुश लगा पाएगी यह भी समझ से परे है. इस को ले कर पुलिस अधिकारी चिंतित हैं. ऐसी कोई तकनीक नहीं निकली तो भारत में इस तरह की सुविधा को सुरक्षा कारणों से बंद भी किया जा सकता है.

व्हाट्सऐप कौलिंग सभी स्मार्टफोन पर उपलब्ध है. इंटरनैट के जरिए यूजर्स एकदूसरे से बात कर सकते हैं. इंटरनैट इस्तेमाल करने वालों का सिर्फ आईपी एड्रैस होता है. ऐसी बातचीत को किसी भी सूरत में नहीं सुना जा सकता. अब यदि कोई अपराध होता है, तो पुलिस सर्विलांस व कौल रिकौर्ड के जरिए ही अपराधों का खुलासा करती है. बड़ेछोटे मामलों में यह तकनीक बेहद कारगर साबित होती है. इतना ही नहीं पुलिस लोकेशन को ट्रेस करने के साथ ही बातचीत भी सुन लेती है. परंतु व्हाट्सऐप में ऐसा कुछ नहीं है. पुलिस सीडीआर से पता नहीं लगा सकती कि अपराधी ने किसकिस को कौल की. सिर्फ यह पता चल सकता है कि नंबर कहां इस्तेमाल हो रहा है और किस के नाम रजिस्टर्ड है? इस से भी बड़ी मुसीबत यह है कि व्हाट्सऐप का सर्वर भारत में नहीं है? न सिर्फ आईपी एड्रैस ट्रेस करना मुश्किल है बल्कि डिटेल भी आसानी से उपलब्ध नहीं होगी.

अमीरजादे भी होते हैं शिकार

व्हाट्सऐप के माध्यम से कुछ गिरोह अमीरजादों को फंसा कर उन्हें ब्लैकमेल करने का भी काम कर रहे हैं. प्रोफाइल पर आकर्षक फोटो लगाया जाता है. मजेदार चैटिंग की जाती है. जब शिकार जाल में फंस जाता है, तो उस से वूसली की जाती है. हरियाणा के यमुना नगर निवासी एक व्यापारी का बेटा राहुल ऐसे ही गिरोह का शिकार हो गया. उसे व्हाट्सऐप के जरिए एक युवती ने अपने प्रेमजाल में फंसा लिया. लड़की ने उसे मिलने के लिए बुलाया और फिर अपने साथियों के साथ उस का अपहरण कर के एक कमरे में बंद कर दिया? राहुल के साथ मारपीट की गई और फिर उस के परिजनों से 10 लाख रुपए की फिरौती मांगी गई. मामला पुलिस में पहुंचा तो पुलिस ने राहुल को सकुशल बरामद कर लिया.

पिछले दिनों हरियाणा की रोहतक पुलिस ने ऐसे ही एक गिरोह का भंडाफोड़ किया था जो अमीर लड़कों को युवतियों के जरिए फंसाता था. जनता कालोनी निवासी शिवम ने व्हाट्सऐप पर मैसेज के आने के बाद एक युवती से दोस्ती कर ली. बाद में वह युवती से मिलने होटल भी चला गया. इस के बाद युवती उस से रुपए की मांग करने लगी. शिवम ने रुपए नहीं दिए तो युवती ने केस दर्ज कराया कि शिवम नामक युवक ने उसे झांसा दे कर उस के साथ दुराचार किया. पुलिस ने मामले की जांच की तो चौंक गई, क्योंकि लड़की की चैटिंग और उस के भेजे गए फोटो कुछ दूसरी कहानी बता रहे थे. लड़की समझौते के नाम पर 2 करोड़ रुपए मांगने लगी. इस पर पुलिस ने लड़की व उस के साथियों को गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस जांच में सामने आया कि वह 5 लोगों का गिरोह था, जिस में 3 युवक और 2 युवतियां थीं. गिरोह ने फर्जी पते के आधार पर सिमकार्ड ले रखे थे. वे अमीरजादों की सूची बनाते थे और युवतियां व्हाट्सऐप के जरिए उन्हें फंसा कर ब्लैकमेल करती थीं

महिलाएं संभाल रही यूपी का उन्नाव जिला

उत्तर प्रदेश का उन्नाव जिला देश का पहला ऐसा जिला बन गया है जहां सभी प्रमुख प्रशासनिक पदों पर महिलाओ की नियुक्ति हुई है. प्रदेश की राजधानी लखनऊ से 60 किलोमीटर दूर उन्नाव जिला 35 लाख जनसंख्या वाला जिला है. करीब 4558 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाले इस जिले में 16 विकास खंड है. करीब 68 फीसदी जनसंख्या वाले 5 तहसील हैं. कानपुर और लखनऊ जैसे 2 बडे शहरों के बीच स्थित यह जिला कानपुर के पडोस में गंगा किनारे बसा है. 6 विधानसभा बंगरमऊ, सफीपुर, मोहान, उन्नाव, भगवंतनगर और पुरवा है. उन्नाव लोकसभा क्षेत्र भी है. कानपुर के करीब होने से यहां चमडा उद्योग से जुडी कई फैक्ट्री हैं. रोजगार की नजर से उन्नाव बहुत पिछडा जिला है. यहां अपराध के मामले भी अधिक प्रकाश में आते है. पिछले कुछ सालों से अपराध के मामलों में कमी देखी जा रही है. उन्नाव कुछ समय पहले डौंडियाखेडा को लेकर चर्चा में आया था. जहां सोने की खजाना गडा होने की अफवाह फैली थी.

उन्नाव जिले की पूरी प्रशासनिक व्यवस्था इस समय पूरी तरह से महिलाओं के हाथ में है. यहां जिला अधिकारी डीएम के रूप में सौम्या अग्रवाल, मुख्य विकास अधिकारी सीडीओ संदीप कौर, पुलिस अधीक्षक एसपी नेहा पांडेय, एसडीएम जसजीत कौर, एआरटीओ माला वाजपेई, उपजिलाधिकारी अर्पणा द्विवेदी, सीएमओ गीता यादव, नगरपालिका अधिकारी रोली गुप्ता, जिला कार्यक्रम अधिकारी के रूप में शिरीं मसूद और जिला पंचायत अध्यक्ष के रूप में संगीता सिंह सेंगर यहां काम कर रही हैं.

इस तरह से उन्नाव जिले की पूरी व्यवस्था महिला अधिकारियों के हाथ में है. डीएम सौम्या अग्रवाल यहां लंबे समय से कार्यरत है. कई बार मुश्किल भरे हालात यहां आये पर अपने कौशल से सौम्या अग्रवाल ने संभाल लिया. बिना किसी विवाद के सौम्या अग्रवाल ने जिले की कमान संभाल रखी है. अब दूसरी महिला अधिकारियों का भी उनको पूरा सहयोग मिल रहा है.

वीडियो: ‘6 पैक’ बैंड के लिए सोनू निगम ने गाया गाना

जाने-माने सिंगर सोनू निगम ने ट्रांसजेंडर बैंड '6 पैक' के एक गाने के लिए अपनी आवाज दी है, जो इन दिनों काफी चर्चा में है. इस गाने को लेकर सोनू ने कहा कि अब भारत में भी ट्रांसजेंडर समुदाय के प्रति लोगों की सोच बदल रही है. आपको बता दें कि सोनू के गाए गाने 'सब रब दे बंदे' को यूट्यूब पर अब तक 19 लाख से ज्यादा लोगों ने देखा है. इस एलबम में कुल छह गाने हैं.

सोनू ने बताया कि लोग इस एलबम के गानों को पसंद कर रहे हैं, जिससे ये साबित होता है कि भारत के लोग अब बदलाव के लिए तैयार हैं. अभी तक किसी ने इस गाने का विरोध नहीं किया है. सभी लोग चाहते हैं कि ट्रांसजेंडर्स के साथ अच्छा बर्ताव किया जाए.

जब 6 पैक बैंड ने अपना पहला गाना 'हम हैं हैप्पी' लॉन्च किया था तब सोनू निगम ने उन्हें पूरा सहयोग दिया था. एलबम का दूसरा गाना 'सब रब दे बंदे' सोनू ने गाया है. ये गाना ज्यादा गंभीर है जो इस समाज से हो रहे भेदभाव के बारे में है.

6 पैक बैंड बनाने की योजना यशराज फिल्म्स के आशीष पाटिल और म्यूजिक कम्पोजर शमीर टंडन की थी. इन दोनों ने काफी जद्दोजहद के बाद 6 ट्रांसजेंडर गायक ढूंढ़ निकाले. इस बैंड को यशराज फिल्म्स की यूथ विंग वाई फिल्म्स ने ब्रुक बॉन्ड रेड लेबल के साथ मिलकर लॉन्च किया है.

ये है 6 पैक बैंड के मेंबर्स…
आशा जगताप, भाविका पाटिल, चांदनी सुवर्णकर, फ़िदा खान, कोमल जगताप और रवीना जगताप, बैंड के ये मेंबर्स खुद को 6 पैक बुलाते हैं.

तो आप भी देखिए ये वीडियो… 

सिंगल पेरैंटिंग में ज्यादा समझदारी की जरूरत

आज के समय में सिंगल पेरैंटिंग समाज के लिए अजूबा मुद्दा नहीं रह गया है. समाज भी सिंगल पेरैंट को सम्मान की नजर से देखता है. सिंगल पेरैंट में ज्यादातर महिलाएं ही होती हैं. यह बात जरूर है कि अब सिंगल पेरैंट को नई चुनौतियों से गुजरना पड़ रहा है. बच्चों के पालनपोषण से ले कर उन के कैरियर, शादी और बाद के जीवन का भी ध्यान रखना पड़ता है.

वैष्णवी को उन की मां ने सिंगल पेरैंट की तरह ही पाला था. 30-40 साल पहले सिंगल पेरैंट के सामने बहुत चुनौतियां थीं. वैष्णवी को सब याद है. अपनी मां के संघर्ष को देखते हुए आज वे उन का बहुत सम्मान करती हैं. वैष्णवी की अपनी 12 साल की बेटी माग्रेट है. उस के पिता लिसले मैकडोनाल्ड अपनी बेटी को बहुत प्यार करते हैं. वैष्णवी को लगता है कि आज के दौर में बच्चों को संभालना ज्यादा मुश्किल काम हो गया है.

वैष्णवी को लोग ‘शक्तिमान’ की गीता विश्वास के रूप में पहचानते हैं. ‘वीराना’, ‘सपने सुहाने लड़कपन के’ और ‘मिले जब हमतुम’ वैष्णवी के चर्चित सीरियल हैं. वैष्णवी ने ‘बंबई का बाबू’, ‘लाडला’ और ‘बाबुल’ जैसी तमाम फिल्में भी कीं. इन दिनों वे जी टीवी के शो ‘टशन ए इश्क’ में लीला तनेजा का किरदार निभा रही हैं. वैष्णवी से घर, परिवार और कैरियर पर लंबी बातचीत हुई. पेश हैं, उस के कुछ खास अंश:

24 साल के करीब आप का फिल्मी कैरियर हो गया है. अब टीवी शो में मां का किरदार निभाना कैसा लग रहा है?

देखिए, उम्र का अपना असर होता है. अब मुझे मां वाले रोल ही मिलेंगे. इन्हें स्वीकार करने में कोई हरज नहीं है. ‘टशन ए इश्क’ में लीला तनेजा का रोल करने से पहले जब मैं ने इस की कहानी सुनी तो मुझे अपना बचपन और अपनी मां के संघर्ष के दिन याद आ गए. मेरी मां जौब करती थीं. जब सिंगल पेरैंट के रूप में मेरे पालनपोषण की जिम्मेदारी उन पर आई तो उन्होंने जौब छोड़ दी. मुझे उस समय की याद आई और मैं ने यह किरदार करने का फैसला कर लिया. मैं अपनी मां से बहुत प्यार करती हूं. वे आज भी मेरे साथ रहती हैं. मुझे लगता है कि नए दौर में सिंगल पेरैंटिंग में जो परेशानियां आ रही हैं उन का समाधान लोगों को समझा कर किया जा सकता है.

जब आप छोटी थीं और आप की मां आप का पालनपोषण कर रही थीं और अब जब आप अपनी बेटी का पालनपोषण कर रही हैं, तो दोनों में क्या अंतर देखती हैं?

मेरी मां ने मुझे सिंगल पेरैंट की तरह पाला था जबकि मेरे साथ मेरे पति भी बेटी की देखभाल करते हैं. मेरे से ज्यादा वे बेटी की केयर करते हैं. ऐसे में मुझे मां जैसे हालात का सामना नहीं करना पड़ रहा. इस के बाद भी मुझे लगता है कि पहले के मुकाबले बच्चों को अब पालना मुश्किल हो गया है. आज बच्चों को बड़ी ही समझदारी से समझाना पड़ता है. वे पहले के बच्चों से अधिक जागरूक हैं. सवाल ज्यादा करते हैं. कई बार मनमानी भी ज्यादा करने की कोशिश करते हैं. अगर पेरैंट्स ने बहुत चालाकी से उन्हें हैंडल नहीं किया तो बच्चे दूर हो जाते हैं. आज के बच्चों के शौक भी बदल गए हैं.

आप का बचपन कैसा था?

मैं पढ़ाई में काफी होशियार थी. मुझे साइंस पसंद थी. मनोविज्ञान मेरा पसंदीदा विषय था. मेरा सपना था कि मैं मनोविज्ञानी बनूं. 10वीं कक्षा के बाद मैं पढ़ाई जारी नहीं रख सकी. बाद में कई बार सोचा कि पढ़ाई पूरी कर लूं पर नहीं कर पाई. मुझे पढ़ने का बचपन में बहुत शौक था. मैं जहां भी किताब देखती थी पढ़ने लगती थी.

बचपन में ‘चंपक’ पत्रिका बहुत पढ़ी. हमारे घर के पास एक दुकान होती थी, जिस में किताबें पढ़ने के लिए किराए पर मिलती थीं. हमें जो जेबखर्च मिलता था उस से हम ‘चंपक’ खरीद कर पढ़ते थे. बाद में ‘गृहशोभा’ भी पढ़ी. गृहशोभा के लेख मुझे बहुत पसंद आते हैं. इस पत्रिका ने हमेशा ही महिलाओं को नई राह दिखाने का काम किया है. सच, किताबों से अच्छा कोई दोस्त नहीं होता.

आप ने क्रिश्चियन धर्म अपनाया. कोई परेशानी नहीं आई?

मेरा पहले का नाम वैष्णवी महंत था. जब मेरे नाम के साथ मैकडोनाल्ड लगा तो लोगों को लगा कि मैकडोनाल्ड कंपनी मेरी है. यह भ्रम हर जगह दूर करना पड़ता है. क्रिश्चियन धर्म स्वीकार करने के बाद कोई परेशानी नहीं हुई. पतिपत्नी के बीच रिश्ता हमेशा आपसी सहयोग और प्यार पर निर्भर करता है. इस का जाति और धर्म से कोई लेनादेना नहीं होता. अब समाज का बड़ा हिस्सा ऐसी बातों को महत्त्व नहीं देता. अब लोगों की दूसरों के जीवन में ताकझांक करने की आदत कम हो गई है.

पहले और अब के कलाकारों में क्या फर्क देखती हैं?

हम लोग जब फिल्मी दुनिया में आए थे तो किसी तरह का कोई ज्ञान नहीं था. रोल करते समय डायरैक्टर के समझाने पर सीखते गए. अब के युवा फिल्मी लाइन में आने से पहले पूरी तैयारी कर के आते हैं. इसे फिल्मी बोली में गू्रमिंग कहते हैं.

कहानी की सफलता में क्या बातें माने रखती हैं?

हर कहानी की सफलता में 5 तत्त्व ही होते हैं- लव, लव ट्राइऐंगल, जैलसी, ऐक्शन और सस्पैंस. हर कहानी इन्हीं के आसपास घूमती है.

जानिए आखिर कैसे बनता है पोर्सिलेन

पोर्सिलेन एक पारभासक (ट्रांसल्यूसेंट) रंघ्रहीन (नानपोरस) पदार्थ है जिस का उपयोग मृत्तिका शिल्प में होता है. पोर्सिलेन यानी चीनीमिट्टी से बनी चीजें घरों, प्रयोगशालाओं और उद्योगों (ज्यादातर बिजली के उद्योग) में खूब काम आती हैं. पोर्सिलेन के बरतन तरल व गैसीय पदार्थों के लिए अभेद्य व अपारगम्य हैं तथा परिवर्तित होने वाले तापमान से काफी हद तक अप्रभावी रहते हैं.

पोर्सिलेन को काओलिन (पोर्सिलेन मिट्टी), क्वार्ट्ज (स्फटिक) व फेलस्पार के मिश्रण को आग में जला कर बनाया जाता है. सख्त पोर्सिलेन ज्यादातर 50% काओलिनाइट, 25% क्वार्ट्ज व 25% फेलस्पार के मिश्रण से बनाया जाता है. नर्म पोर्सिलेन में इन का अनुपात क्रमश: 25% 45%, तथा 30% होता है. नर्म पोर्सिलेन को कम ताप पर जलाया जा सकता है, अत: इस से चीजें बनाना सस्ता पड़ता है.

निर्माण की प्रक्रिया : चीनीमिट्टी के बरतन व अन्य चीजें बनाने की प्रक्रिया बहुत लंबी व जटिल है. काओलिनाइट एक तरह का मिट्टी खनिज (क्ले मिनरल) है, जो काओलिन में मौजूद होता है. काओलिन को धोने के बाद छाना जाता है और अच्छी तरह बारीक किए स्फटिक व फेलस्पार में पानी के साथ पूरी तरह मिलाया जाता है. इस मिश्रण में सोडा व अन्य चीजें भी मिलाई जाती हैं.

इस प्लास्टिक पोर्सिलेन के मिश्रण को अच्छी तरह साना व गूंधा जाता है और प्लास्टर के सांचों में ढाला जाता है. जब यह सूख जाता है तो इसे करीब 900 डिगरी सेंटिग्रेड ताप पर भट्ठी में पकाया जाता है. तब यह पोर्सिलेन सख्त व जलरोधी हो जाता है.

इस अवस्था में यह दिखने में चिकना व सुंदर नहीं होता. इसे चमकदार बनाने के लिए इस की ‘ग्लेजिंग‘ की जाती है.

पोर्सिलेन से बनी इन चीजों को फिर एक ऐसे तरल में डुबोया जाता है जिस में ये सब पदार्थ तो होते हैं पर स्फटिक व फेलस्पार की प्रधानता रहती है. तब इन्हें करीब 1400 डिगरी सेंटिग्रेड ताप पर पकाया जाता है. इस से इस की चमक पक्की हो जाती है. पकाने की यह प्रक्रिया 20 से 30 घंटे तक चलती है. इस से पोर्सिलेन के कण आपस में मिल कर एक हो जाते हैं या अच्छी तरह जुड़ जाते हैं.

चमकदार पोर्सिलेन पर रंगों के द्वारा पेंटिंग कर के सुंदरसुंदर रंगीन नमूने बनाए जा सकते हैं. ग्लेजिंग के साथ इन्हें पिघला कर टिकाऊ बनाने के लिए पेंटिंग की हुई चीजों को ‘इनेमलिंग फरनेस’ में 800 डिगरी सेंटिग्रेड पर पकाया जाता है. आधुनिक तकनीक में कभीकभी ग्लेजिंग के पहले ही पेंटिंग कर दी जाती है. इस लंबी प्रक्रिया के बाद पोर्सिलेन की चीजें बाजार में बिकने के लिए तैयार हो जाती हैं.   

परिवर्तन

टीचर सुनील कुमार सभी विद्यार्थियों के चहेते थे. अपनी पढ़ाने की रोचक शैली के साथसाथ वे समयसमय पर पाठ्यक्रम के अलावा अन्य उपयोगी बातों से भी छात्रों को अवगत कराते रहते थे जिस कारण सभी विद्यार्थी उन का खूब सम्मान करते थे. 10वीं कक्षा में उन का पीरियड चल रहा था. वे छात्रों से उन की भविष्य की योजनाओं के बारे में पूछ रहे थे.

‘‘मोहन, तुम पढ़लिख कर क्या बनना चाहते हो?’’ उन्होंने पूछा.

मोहन खड़ा हो कर बोला, ‘‘सर, मैं डाक्टर बनना चाहता हूं.’’

इस पर सुनील कुमार मुसकरा कर बोले, ‘‘बहुत अच्छे.’’

फिर उन्होंने राजेश की ओर रुख किया, ‘‘तुम?’’

‘‘सर, मेरे पिताजी उद्योगपति हैं, पढ़लिख कर मैं उन के काम में हाथ बंटाऊंगा.’’

‘‘उत्तम विचार है तुम्हारा.’’

अब उन की निगाह अश्वनी पर जा टिकी.

वह खड़ा हो कर कुछ बताने जा ही रहा था कि पीछे से महेश की आवाज आई, ‘‘सर, इस के पिता मोची हैं. अपने पिता के साथ हाथ बंटाने में इसे भला पढ़ाई करने की क्या जरूरत है?’’ इस पर सारे लड़के ठहाका लगा कर हंस पड़े परंतु सुनील कुमार के जोर से डांटने पर सब लड़के एकदम चुप हो गए.

‘‘महेश, खड़े हो जाओ,’’ सुनील सर ने गुस्से से कहा.

आदेश पा कर महेश खड़ा हो गया. उस के चेहरे पर अब भी मुसकराहट तैर रही थी.

‘‘बड़ी खुशी मिलती है तुम्हें इस तरह किसी का मजाक उड़ाने में,’‘ सुनील सर गंभीर थे, ‘‘तुम नहीं जानते कि तुम्हारे बाबा ने किन परिस्थितियों में संघर्ष कर के तुम्हारे पिता को पढ़ाया. तब जा कर वे इतने प्रसिद्ध डाक्टर बने.’’ महेश को टीचर की यह बात चुभ गई. वह अपने पिताजी से अपने बाबा के बारे में जानने के लिए बेचैन हो उठा. उस ने निश्चय किया कि वह घर जा कर अपने पिता से अपने बाबा के बारे में अवश्य पूछेगा.

रात के समय खाने की मेज पर महेश अपने पिताजी से पूछ बैठा, ‘‘पिताजी, मेरे बाबा क्या काम करते थे?’’

अचानक महेश के मुंह से बाबा का नाम सुन कर रवि बाबू चौंक गए. फिर कुछ देर के लिए वे अतीत की गहराइयों में डूबते चले गए.

पिता को मौन देख कर महेश ने अपना प्रश्न दोहराया, ‘‘बताइए न बाबा के बारे में?’’

रवि बाबू का मन अपने पिता के प्रति श्रद्धा से भर आया. वे बोले, ‘‘बेटा, वे महान थे. कठोर मेहनत कर के उन्होंने मुझे डाक्टरी की पढ़ाई करवाई. तुम जानना चाहते हो कि वे क्या थे?’’

महेश की उत्सुकता बढ़ती जा रही थी.

उस के पिता बोले, ‘‘तुम्हारे बाबा रिकशा चलाया करते थे. अपने शरीर को तपा कर उन्होंने मेरे जीवन को शीतलता प्रदान की. उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि हर काम महान होता है. मुझे याद है, मेरे साथ अखिल नाम का एक लड़का भी पढ़ा करता था. उस के पिता धन्ना सेठ थे. वह लड़का हमेशा मेरा मजाक उड़ाया करता था. पढ़ने में तो उस की जरा भी रुचि नहीं थी.

‘‘मैं घर जा कर पिताजी से जब यह बात कहता तो वे जवाब देते कि क्या हुआ, अगर उस ने तुम्हेें रिकशा वाले का बेटा कह दिया? अपनी वास्तविकता से इंसान को कभी नहीं भागना चाहिए. झूठी शान में रहने वाले जिंदगी में कुछ नहीं कर पाते. कोई भी काम कभी छोटा नहीं होता.

‘‘पिताजी की यह बात मैं ने गांठ बांध ली. इस का परिणाम यह हुआ कि मुझे सफलता मिलती गई, लेकिन अखिल अपनी मौजमस्ती की आदतों में डूबा रहने के कारण बरबाद हो गया. जानते हो, आज वह कहां है?’’

महेश उत्सुकता से बोला, ‘‘कहां है पिताजी?’’

‘‘पिता की दौलत से आराम की जिंदगी गुजारने वाला अखिल आज बड़ी तंगहाली में जी रहा है. पिता के मरने के बाद उस ने उन की दौलत को मौजमस्ती व ऐयाशी में खर्च किया. आजकल वह पैसेपैसे को मुहताज है. अपनी बहन के यहां पड़ा हुआ उस की रहम की रोटी खा रहा है और उस का बहनोई उस के साथ नौकरों जैसा व्यवहार करता है.‘‘ महेश ने पिता की बातों को गौर से सुना. अब उसे एहसास हो रहा था कि अश्वनी के पिता उसे वैसा बना सकते हैं, जैसे वे स्वयं हैं लेकिन वे उसे पढ़ालिखा रहे हैं ताकि वह कुछ अच्छा बन सके. फिर यह सोच कर वह कांप उठा कि कहीं उसे अखिल कीतरह मुसीबतों भरी जिंदगी न गुजारनी पड़े.

दूसरे दिन जब वह स्कूल गया तो सब से पहले अश्वनी से ही मिला और बोला, ‘‘कल मैं ने तुम्हारा मजाक उड़ाया था, मैं बहुत शर्मिंदा हूं… मुझे माफ कर दो,’’ महेश का स्वर पश्चात्ताप में डूबा हुआ था.

अश्वनी हंस पड़ा, ‘‘अरे यार, ऐसा मत कहो. वह बात तो मैं ने उसी समय दिमाग से निकाल दी थी.’’

‘‘यह तो तुम्हारी महानता है अश्वनी… क्या तुम मुझे अपना मित्र बनाओगे?’’

यह सुन कर अश्वनी जोर से हंसा और उस ने अपना हाथ महेश की तरफ बढ़ा दिया. अश्वनी के हाथ में अपना हाथ दे कर महेश बहुत राहत महसूस कर रहा था. 

समझिए होंठों की भाषा

एक अबोध सी युवती ने हाल ही में एक समस्या भेजी कि उसे एक सहेली के साथ चुंबन करने में आनंद मिलता है. इस से कुछ होगा तो नहीं?

वैज्ञानिक कहते हैं कि चुंबन से बहुत कुछ होता है. चुंबन असल में रिश्तों को पक्का करते हैं और अगर पहला चुंबन अच्छा न रहे तो 60% पुरुष और 59% महिलाएं रिश्तों को आगे नहीं बढ़ातीं.

इस की वजह यह है कि शरीर के संवेदनशील हिस्सों में होंठ सब से ज्यादा संवेदन पाने के लिए सक्षम होते हैं. चुंबन से ही पता चल जाता है कि दूसरा मित्र है या दुश्मन. चुंबन होते ही शरीर के कैमिकल काम करना शुरू कर देते हैं. चुंबन होते ही होंठों में मौजूद स्पर्श ग्रंथियां संदेश देने लगती हैं और प्रेम के औक्सीटौसिन हारमोन कैमिकल को बनाना शुरू कर देती हैं. दिल की धड़कन बढ़ जाती है, तनाव कम हो जाता है, शरीर सुरक्षित महसूस करने लगता है, खून की नसें आराम से काम करना शुरू कर देती हैं, गाल लाल हो जाते हैं और नसें फड़फड़ाने लगती हैं.

इसी को तो प्रेम कहते हैं, जो 2 लड़कियों में हो सकता है, 2 लड़कों में हो सकता है, मांबच्चों में हो सकता है और प्रेमीप्रेमिका में तो होता ही है. इस पर न तो किसी तरह का ऐतराज होना चाहिए और न ही बंदिशें. कई समाज इस प्रकार के चुंबन को खुले में करने में हिचकिचाते हैं, जो गलत है. चुंबन प्रेम और सैक्स की शुरुआत हो सकता है पर यह शुभ शुरुआत है और इस पर किसी भी तरह की रोकटोक है, तो इस का अर्थ है कि समाज खुद पर ही भरोसा नहीं करता और उसे नागरिकों के विवेक पर संदेह है.

जो समाज खुद पर भरोसा नहीं करता वह कमजोर होता है, जानवरों की तरह होता है. वह एक हो कर शत्रुओं से रक्षा नहीं कर सकता, न ही वह प्रकृति से जूझ सकता. उस के लिए प्रेम, सैक्स, बच्चे सुख नहीं, शारीरिक जरूरत के कारण मिला दंड हैं. ऐसा असंतुष्ट समाज हमेशा तनाव में रहता है और सदा खुद से लड़ता रहता है. पतिपत्नी में, बच्चों में, मित्रोंसहेलियों में, अनजानों में अपनापन व विश्वास घोलना हो, आत्मविश्वास जगाना हो, आनंद की अनुभूति का लाभ उठाना हो तो होंठों की भाषा समझिए, जो बिना शब्दों के बहुत कुछ कहने की कला जानते हैं.

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