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शिल्पा शेट्टी ने बताया सुखी वैवाहिक जीवन का राज

स्वयं को मध्यमवर्गीय सोच की महिला बताने वाली अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी का कहना है कि किसी भी वैवाहिक जीवन में 'चर्चा और बहस' होना एक आम बात है. अभिनेत्री ने व्यवसायी राज कुंद्रा से शादी की है. शिल्पा ने कहा, मेरा मानना है कि किसी भी शादी में चर्चा और बहस आम बात है, लेकिन आप इसका समाधान कैसे निकालते हैं यह बहुत महत्वपूर्ण है.

उल्लेखनीय है कि हाल में करिश्मा कपूर-संजय कपूर, ऋतिक रोशन-सुजैन खान तथा अरबाज खान-मलाइका अरोड़ा खान ने अपने वैवाहिक जीवन की खटपट से तंग आकर अलग होने का फैसला किया है.

शिल्पा ने कहा, आप अपने मसलों को कैसे भी निपटाएं, लेकिन एक बात ध्यान में रखना चाहिए कि आप उन्हें अपने शादीशुदा जीवन के दायरे में रहकर ही निपटाएं. इसीलिए मुझे लगता है कि मेरी सोच मध्यमवर्गीय है. एक सफल वैवाहिक जीवन के लिए भरोसा व एक-दूसरे के प्रति सम्मान बहुत जरूरी है. शिल्पा और राज की शादी 2009 में हुई थी. उनका एक बेटा है, जिसका नाम वियान है.

सौर ऊर्जा से लहलहा रही फसलें

सौर ऊर्जा की अहमियत को अब पढ़ेलिखे लोगों के साथसाथ छोटे किसान व तमाम आम लोग भी समझने लगे हैं. राजस्थान में हजारों किसान सौर ऊर्जा का भरपूर फायदा ले रहे हैं. ऐसे किसानों का मानना है कि वाकई यह पैट्रोलडीजल वगैरह का बेहतर उपाय है. सरकार द्वारा सब्सिडी दिए जाने से किसानों के लिए सोलर ऊर्जा पैनल व पंपसेट लगाना और भी आसान हो गया है.

सौर ऊर्जा प्लांट लगाने के इस काम में सैकड़ों कंपनियां व एजेंसियां लगी हुई हैं. जो किसान सब्सिडी पाना चाहते हैं, वे अपने प्रदेश व जिले के कृषि व उद्यानिकी विभाग में आवेदन कर के सब्सिडी के साथ सौर ऊर्जा प्लांट लगवा सकते हैं. इस के अलावा घरों की छतों पर भी सौर ऊर्जा प्लांट लगवा कर पूरे घर को रोशन किया जा सकता है.

सोलर प्लांट से मिली कामयाबी

जयपुर जिले की चाकसू तहसील के रहने वाले किसान रामकेश को जब कृषि सुपरवाइजर कैलाश जाट ने सौर ऊर्जा प्लांट के बारे में जानकारी दी, तो वह खुश हो गया.

रामकेश ने अपने खेत पर खेततलाई तो बनवा रखी थी, लेकिन बिजली विभाग में 3 साल पहले आवेदन लगाने के बावजूद बिजली कनेक्शन नहीं मिल रहा था. ऐसे में कृषि सुपरवाइजर के बताए अनुसार उसे सौर ऊर्जा प्लांट लगवाने में फायदा नजर आया, तो उस ने सौर ऊर्जा प्लांट लगवाने की ठानी.

कृषि सुपरवाइजर ने उसे सोलर प्लांट पर मिलने वाली तमाम जानकारी मुहैया कराई, तो रामकेश ने सोलर प्लांट के लिए कृषि व उद्यानिकी विभाग में औनलाइन फार्म जमा करा दिया. कुछ ही समय बाद रामकेश का चयन सोलर प्लांट लगाने के लिए हो गया. उस ने 3 हजार वाट व 3 हार्सपावर के सोलर पंपसेट के लिए सोलर कंपनी के नाम 85 हजार रुपए का बैंक ड्राफ्ट जमा करा दिया.

3 साल पहले लगाए गए सोलर पंपसेट से आज रामकेश की इलाके में जागरूक व कामयाब किसान के तौर पर पहचान है. रामकेश के हरेभरे खेतों में लहलहाती फसल को देख कर आज हर कोई सोलर पंपसेट लगाने की तमन्ना रखता है. रामकेश ऐसे लोगों को भरपूर मदद भी करता है. अब तो रामकेश ने अपने खेत में बोरिंग भी करवा ली है, जिस से सोलर पंपसेट का वह भरपूर फायदा ले रहा है.

मौजूद सोलर प्लांट

सरकार किसानों के खेतों में सौर ऊर्जा प्लांट लगाने के लिए हर साल अपना टारगेट तय करती है. वह इस के लिए कंपनियों का चुनाव करती है. ये कंपनियां अनुदान के आधार पर सोलर प्लांट लगाती हैं. वहीं सैकड़ों कंपनियां खुले में भी इस काम में लगी हुई हैं. कंपनियां व उन के प्रतिनिधियों से कोई भी व्यक्ति सोलर प्लांट लगवा सकता है. ये कंपनियां भी सरकार से अनुदानित कंपनियों के बराबर ही सोलर प्लांट लगाने की कीमत वसूल करती हैं.

यहां सोलर प्लांट लगाने के काम में लगी कंपनियों की जानकारी दी जा रही है. कोई भी किसान सीधे कंपनियों से संपर्क कर के घर या खेतों पर सोलर प्लांट लगवा सकता हैं.

राजस्थान में सौर ऊर्जा पंप सेट के लिए टारगेट तय

सौर ऊर्जा पर आधारित पंप परियोजना में साल 2015-16 के जिलेवार टारगेट भी तय किए जा चुके हैं. सरकार ने पात्रता रखने वाले किसानों को तुरंत इस योजना का फायदा दिलाने के लिए कहा है.

उद्यानिकी विभाग द्वारा जारी गाइडलाइन में साल 2014-15 में लाटरी से चुने गए किसानों को प्राथमिकता के आधार पर फायदा पहुंचाने की बात कही गई है. समूचे प्रदेश में 4,702 पंपसेट लगाने का टारगेट तय किया गया है.

ऐसे मिलेगा अनुदान का फायदा

नए निर्देश के अनुसार, विद्युत कनेक्शन लौटाने वाले किसानों को पूरा अनुदान देय होगा. साथ ही जिन किसानों के विद्युत कनेक्शन नहीं हैं और डिस्कौम की वरीयता सूची में भी नहीं हैं, इस के लिए उन को 60 फीसदी अनुदान मिलेगा.

गौरतलब है कि पूर्व में इस तरह का नियम नहीं था. हकदार किसानों को 75 फीसदी अनुदान दिया जाता था. लेकिन अब सरकार ने सभी किसानों को सोलर पंप योजना के लाभ से जोड़ने के लिए यह फैसला लिया है.

उद्यानिकी विभाग द्वारा जारी सोलर पंप के टारगेट में इस साल नहरी किसानों का भी खास खयाल रखा गया है. इंदिरा गांधी नहर परियोजना लाभान्वित बीकानेर जिले के लिए 600, जैसलमेर के लिए 205, श्रीगंगानगर के लिए 538 और हनुमानगढ़ के लिए 173 सौर ऊर्जा पंपसेटों का टारगेट रखा गया है. इस के अलावा जयपुर, भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ जिलों में बागबानी फसल के बढ़ते दायरे को देखते हुए सोलर पंप के टारगेट पहले से बढ़ा कर रखे गए हैं.

सेटेलाइट से भी जुड़ेंगे सौर ऊर्जा प्लांट

सोलर ऊर्जा का डाटा संग्रहित करने व संयंत्र की मौनिटरिंग के लिए उद्यानिकी विभाग अब प्रदेश में नई व्यवस्था लागू करने जा रहा है. इस के तहत किसान के खेत में लगे संयंत्र को अब सेटेलाइट से जोड़ा जाएगा. इस से सौर ऊर्जा संयंत्र पंप की निगरानी भी हो सकेगी, साथ ही संयंत्र से जुड़ी किसान की समस्या का शिकायत से पहले ही समाधान संभव हो सकेगा.

गौरतलब है कि प्रदेश में सोलर सिंचाई पंप योजना को ले कर किसानों का रुझान साल दर साल बढ़ता ही जा रहा है. सोलर पंप को सेटेलाइन से जोड़ने के लिए रिमोट सेंसिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा. इस से संयंत्र से जुड़ी हर पल की जानकारी विभाग और संयंत्र लगाने वाली कंपनी के पास मुहैया हो सकेगी. गौरतलब है कि सौर ऊर्जा के मेगा प्रोजेक्ट में रिमोट सेंसिंग तकनीक का उपयोग किया जा रहा है. किसान के खेत में लगने वाले सोलर पंपसेट में इस तकनीक का प्रयोग प्रदेश में पहली बार होगा.

ऐसे होगी सिस्टम की मौनिटरिंग

सोलर ऊर्जा संयंत्र के माहिरों के अनुसार संयंत्र के मौड्यूल व कंट्रोलर में एक चिप लगाई जाएगी. इस से सेटेलाइट हर पंप से जुड़ सकेगा. यह चिप आरएफआईडी यानी रेडियो फ्रीक्वेंसी आईडेंटीफिकेशन तकनीक से लैस होगी. इस से संयंत्र से जुड़ी तमाम जानकारी कंपनी को उपलब्ध होती रहेगी. इस से संयंत्र की ट्रेकिंग भी संभव है.

सेटेलाइट से सेंसर संयंत्र की निगरानी कंपनी और विभागीय स्तर पर होगी. इस के लिए जिला स्तर पर डाटा सेंटर बनाए जाएंगे. डाटा संग्रहण के लिए मोबाइल नेटवर्क होना बेहद जरूरी होगा. डाटा एक्सिस करने के लिए पासवर्ड का इस्तेमाल किया जाएगा और संग्रहित डाटा के आधार पर ही भविष्य की योजना बनाई जाएगी.

रिमोट सेंसिंग तकनीक पर आधारित होंगे सोलर प्लांट

नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय से रिमोट सेंसिंग तकनीक आधारित सोलर सिंचाई पंप लगाने के निर्देश मिले हैं. साल 2015-16 में स्थापित होने वाले तमाम संयंत्र इस तकनीक से लैस होंगे. प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया अभियान के तहत यह कवायद शुरू की गई है. इस के तहत जवाहरलाल नेहरू सोलर मिशन के तहत वित्तीय वर्ष 2015-16 के लिए जारी गाइडलाइन में सोलर पंप संयंत्र को रिमोट सेंसिंग तकनीक से जोड़ने का प्रावधान किया गया है. इस के तहत उद्यान विभाग इस वित्तीय वर्ष में उन्हीं कंपनियों को अहमियत देगा, जो रिमोट सेंसिंग तकनीक आधारित संयंत्र की आपूर्ति किसान को कर सकें.

– एसपी सिंह, उद्यानिकी आयुक्त, जयपुर

सोलर प्लांट लगाने वाली जयपुर में स्थित कंपनियां व संपर्क नंबर :

श्री राधेश्याम सौर सेवा :08048016637.

न्यू जर्सी निगम :07053137627.

जैनटेक प्राइवेट लिमिटेड :09643206106.

न्यू लाइट आफ इंजीनियर्स : 08046050766.

नीधीशवार्म पावर कारपोरेशन : 9873148460.

गीता इलेक्ट्रोनिक्स : 09643007989.

चरम सीमा संचार : 08048105644.

एम पावर ग्रीन प्रा. लिमिटेड : 08045317354.

ग्रीन मोर ऊर्जा उत्पाद प्रा. लिमिटेड : 09643338086.

राजस्थान इलेक्ट्रोनिक्स उपकरण प्रा. लिमिटेड : 08043051759.

कांपैक्ट व्यापार सेवाएं :08042984205.

खूबियों से भरपूर सोलर सिस्टम स्प्रे मशीन

सरकार व वैज्ञानिक किसानों की खुशहाली के लिए मशीनों से खेती करने की बात करते हैं. मगर छोटी या मध्यम जोत के किसान यदि मशीनी खेती करना भी चाहें, तो ज्यादातर मशीनों के बिजली या ईंधन चालित होने की वजह से लागत बढ़ जाती है.

इतना सब होने के बावजूद अगर मशीन बिजली चालित है, तो ग्रामीण इलाकों में बिजली की कटौती एक बड़ी समस्या बन कर उभरती है. ऐसे में किसानों द्वारा सूर्य की रोशनी से चलने वाले कृषि यंत्रों को अपनाना बेहतर साबित होगा. इस से न सिर्फ बिजली या ईंधन पर आने वाली लागत शून्य होगी, बल्कि पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा.

हाल ही में मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित एक फर्म ने सूरज की रोशनी से चलने वाली एक स्प्रे पंप मशीन ईजाद की है, जो बिक्री के लिए बाजार में आ चुकी है. फर्म ने इसे ‘धूप सोलर स्प्रे पंप 999’ के नाम से बाजार में उतारा है. यह मशीन इनबिल्ट बैटरी से लैस होने के कारण डीसी पावर से चलती है और जरूरत पड़ने पर छोटे इन्वर्टर के रूप में भी इस्तेमाल की जा सकती है.

खूबियां : फर्म के दावों के मुताबिक इस सोलर सिस्टम स्प्रे मशीन की निम्न खूबियां हैं:

* खेतों व बागों में पोशक तत्त्वों व दवाओं के छिड़काव के लिए ज्यादातर किराए पर मशीन ली जाती है या बिजली और ईंधन द्वारा चालित मशीनें इस्तेमाल होती हैं, जिन पर काफी लागत आती है. यह सोलर सिस्टम स्प्रे पंप मशीन पूरी तरह से सूरज की रोशनी से चलती है. लिहाजा शुरुआती लागत के बाद कोई खर्च नहीं होता है.

* इसे किसान पीठ पर लाद कर या किसी जगह रख कर इस्तेमाल कर सकते हैं.

* एकसाथ 2 फव्वारा प्रेशर की कूवत.

* 100 पीएसआई की प्रेशर मोटर.

* 16 लीटर स्प्रेयर पंप का टैंक.

* उच्च गुणवत्ता वाला स्प्रे पाइप.

* उच्च गुणवत्ता का बैटरी बैकअप सिस्टम.

* पंप सेट का कुल वजन 7 किलोग्राम से कम.

* अच्छी गुणवत्ता वाली सिलिकान सोलर प्लेट.

* रात में छिड़काव के लिए लेड लाइट का इंतजाम.

* मशीन में मोबाइल चार्जिंग की भी सुविधा.

* बैटरी चार्जिंग सुविधा होने के कारण छिड़काव के साथसाथ चार्जिंग होने और 1 बार चार्ज कर लेने पर दिन भर छिड़काव करने की सुविधा.

* सौ फीसदी ईंधन या बिजली की बचत.

कीमत : बाजार में इस की कीमत 6 हजार रुपए है. सोलर प्लेट और पंप की कुछ सालों की गारंटी भी है.

मौजूदगी : कंपनी के लखन पाटीहार का दावा है कि यह मशीन मध्य प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र, गुजरात व राजस्थान सूबों के खास शहरों में भी मिलती है.

ज्यादा जानकारी के लिए कंपनी के मोबाइल नंबरों 07316999950, 09165416309 व 09009354050 पर संपर्क किया जा सकता है.

कंपनी के दफ्तर का पता है : 7, पटेल विहार कालोनी, कनाडिया रोड, बंगाली चौराहा, इंदौर, मध्य प्रदेश.    

बजट: किसानों को राहत या लुभाने का नया अंदाज

साल 2015-16 का बजट गांव, गरीब व किसानों के लिए है, ऐसा कहा जा रहा है. वित्तमंत्री अरुण जेटली के बजट भाषण व की गई घोषणाओं से हट कर कुछ नया करने की झलक मिलती है. उदाहरण के तौर पर पिछले साल खेती के लिए कुल तय रकम 25 हजार करोड़ रुपए को इस बार बढ़ा कर 44 हजार करोड़ रुपए कर दिया गया है.

अपना इंतजाम पक्का

बजट के अनुसार इस साल सरकारी खर्च में होने वाली बढ़ोतरी के मद्देनजर सेवा कर में कृषि सेस का उपकर लगा कर सरकार ने अपनी आमदनी बढ़ाने का तो पक्का इंतजाम कर लिया है, लेकिन किसानों की आमदनी अगले 5 सालों में बढ़ कर दोगुनी होने की बात की गई है. ऐसी बातें तो पहले भी कही जा चुकी हैं.

गौरतलब है कि सरकारी कर्मचारियों की तनख्वाह हर साल महंगाई भत्ते व सालाना बढ़ोतरी के जरीए करीब 15 से 20 फीसदी तक बढ़ जाती है. बेशक गांव व गरीबों के नाम पर चली बहुत सी स्कीमों में पानी की तरह पैसा बहाया जाता रहा है, लेकिन किसानों की आमदनी बढ़ाने का ऐसा कोई तरीका अभी तक नहीं निकाला गया है.

यह बात आज किसी से छिपी नहीं है कि ऊपर से चला पैसा, घपले, घोटालों  गड़बड़ी के कारण नीचे गांवगरीब तक पूरा नहीं पहुंचता. ज्यादातर सरकारी कर्मचारी निकम्मे हैं व भ्रष्ट हैं. वे गांव, गरीब व किसानों के फायदे की ज्यादातर बातों की जानकारी छिपा कर रखते हैं.

लिहाजा ज्यादातर विकास योजनाओं की किसानों को खबर तक नहीं दी जाती. अकसर मक्कार, असरदार, दबंग नेता आपस में बंदरबांट कर लेते हैं और गरीब किसानों को मिलने वाली छूट, कर्ज व दूसरी सुविधाएं हड़प जाते हैं. यही वजह है कि सरकार की तरफ से चल रही कोशिशों के बावजूद छोटे किसान परेशान हैं.

हाल में की गई आर्थिक समीक्षा के मुताबिक राशन, रसोई गैस, रेल व बिजली आदि में गरीबों को सालाना 1 लाख करोड़ रुपए की भारी छूट दी जा रही है, लेकिन इस का बड़ा हिस्सा आज भी अमीरों के खाते में जा रहा है. काफी हद तक गरीबों के हक छीने जा रहे हैं. लिहाजा इस पर सख्ती से नकेल कसना बेहद जरूरी है.

बदलाव जरूरी

गांवों में खुशहाली लाने के लिए सिर्फ बजट में अरबोंखरबों की रकम खर्च के लिए रख देना ही काफी नहीं है. खेती, बागबानी व उस से जुड़े दूसरे विभागों के बुनियादी ढांचे और काम करने के तरीकों में सुधार करना भी जरूरी है. इस के लिए कड़े व सही कदम उठाना भी लाजिम है, वरना कोई नतीजा नहीं निकलेगा.

बजट से पहले की आर्थिक समीक्षा में साफ कहा गया है कि पिछले साल यूरिया पर दी गई कुल छूट 50,300 करोड़ रुपए थी, लेकिन इस में से सिर्फ 35 फीसदी 17,500 करोड़ रुपए की छूट ही छोटे किसानों के हिस्से में आई, जबकि कुल छूट का करीब 2 तिहाई हिस्सा दूसरे ले गए. छोटे किसानों की लूट का यह सिलसिला बंद होना बेहद जरूरी है.

कड़े कदम

यूरिया पर दी जा रही सारी छूट सीधे किसानों को उन के बैंक खातों में दी जानी चाहिए. साथ ही साथ यूरिया की बिक्री को खुला कर दिया जाए तो खास बोआई के वक्त होने वाली यूरिया की कमी व कालाबाजारी खत्म हो सकती है और किसानों को बेवजह होने वाली परेशानी से राहत मिल सकती है.

अब यह भी तय किया जाना चाहिए कि अपनी जोत के मुताबिक एक किसान कितनी बोरी छूट वाली यूरिया खरीद सकता है. साथ ही खरीदार की पहचान के लिए बायोमैट्रिक पहचान प्रणाली लागू होनी चाहिए. इस के अलावा मसला सिर्फ यूरिया में छूट की लूट का ही नहीं, न्यूनतम समर्थन मूल्य नीति में झोल का भी है.

कई खास फसलों की सरकारी खरीद नीति पर भी नए सिरे से गौर किया जाना चाहिए, क्योंकि कम से कम दाम तय करने का फायदा भी छोटे किसानों को पूरा नहीं मिल रहा है. यदि किसी उपज का बाजार भाव नीचे गिर कर उस के न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम रहे तो सरकार को उस की कम से कम 50 फीसदी भरपाई करनी चाहिए.

नई तकनीक

आजकल स्मार्ट फोन का जमाना है. अमीर देशों में किसान मोबाइल फोन से ट्यूबवैल चलाने व बंद करने और कीड़ेमार दवा के छिड़काव व दूसरे कामों में औटोमैटिक उड़ने वाले ड्रोन का इस्तेमाल बखूबी कर रहे हैं, लेकिन हमारे देश में अभी ये सारी तकनीकें व मशीनें महंगी होने से हर किसान के बस की नहीं हैं. इन पर कोई छूट नहीं दी गई है.

दूसरी सब से बड़ी व जरूरी बात यह है कि तेल, गैस, सोने व विमानईंधन आदि पर अमीरों को बंट रही गैर जरूरी सब्सिडी का बोझ घटा कर किसानों को सस्ते ब्याज पर कर्ज मुहैया कराया जाए, ताकि वे खुदकुशी करने पर मजबूर न हों. यदि गुरबत की वजह से किसानों की जमीनें बिकने की नौबत आती रही तो वे खेती कैसे करेंगे

सरकार की नीयत वाकई किसानों को राहत पहुंचाने व उन की आमदनी बढ़ाने की है तो कम से कम  इतना जरूर किया जाना चाहिए कि गांव और खेती के नाम पर बंट रही सरकारी सब्सिडी का फायदा गरीब व जरूरतमंद किसानों को ही मिले, अमीरों को नहीं. मंडी में लगने वाले टैक्स कम व बिचौलिए कम से कम हों ताकि किसानों की उपज सीधे उपभोक्ताओं को मिले. तभी किसानों की आमदनी बढ़ेगी.

खेती को बढ़ावा देने और किसानों के भले की बहुत सी बातें इस से पहले भी बजट के दौरान बढ़ाचढ़ा कर की जाती रही हैं. बात तो तब है जबकि किसानों को माली हिफाजत मिले. खेती में उन का जोखिम घटे और उन की जानकारी व आमदनी बढ़े. इस के लिए रिसर्च स्टेशनों में हो रही खोजबीन व तकनीकी जानकारी का कारगर प्रचारप्रसार मुफ्त व्हाटसऐप वगैरह के जरीए चालू करना होगा.

खेतीकिसानी से जुड़ी सारी सहूलियतें किसानों को एक ही छत के नीचे मुहैया कराई जानी चाहिए, ताकि उन्हें बेवजह इधरउधर धक्के न खाने पड़ें. छोटी व किफायती मशीनों के इस्तेमाल पर खास जोर दिया जाना चाहिए, ताकि कम जोत वाले किसानों का समय, धन व मेहनत बचे और वे भी ज्यादा पैदावार ले कर अपनी माली हालत सुधार सकें.

फूड प्रोसेसिंग

खेती से ज्यादा कमाई करना आज भी ज्यादातर किसानों के लिए एक चुनौती है. इस के लिए खास मुहिम चला कर गांवों में ही मौके बढ़ाए जाने चाहिए, ताकि किसान खुद तकनीक सीख कर फूड प्रोसेसिंग की अपनी इकाई लगा सकें और अपनी उपज से तैयार माल बना कर उस की कीमत बढ़ा सकें. ऐसा करना मुश्किल नहीं है.

मसले सुलझें

हर साल चीनीमिलों पर गन्ने की कीमतों का अरबोंखरबों रुपए का बकाया, दलहन व तिलहन की पैदावार में पिछड़ापन, पूरा प्रसंस्करण न होने से करीब 40 फीसदी अनाजों, फलों व सब्जियों की बरबादी और अधिक पैदावार होने पर किसानों को उन की उपज की वाजिब कीमत न मिलने जैसे मसले हल होने जरूरी हैं. तभी किसान कर्ज के जाल व सूद की मार से उबर कर चैन की सांस ले सकते हैं और उन के सपने सच हो सकते हैं.

जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए खासतौर पर तकनीकी जानकारी, सस्ती मशीनें, औजार, बेहतर बीज व आर्थिक मदद दी जाए, ताकि किसानों को उन की उपज की कीमत ज्यादा मिले. इस के लिए सभी राज्य सरकारों को भी अब बिना देर किए आगे आना चाहिए, वरना केंद्र सरकार का बजट किसानों का हो कर भी कारगर सुधार नहीं कर पाएगा.

असर दिखना जरूरी है

गांवों व खेती की दशा सुधारने के लिए केंद्र व राज्यों की सरकारों द्वारा चलाई जा रही योजनाओं व धन की कमी नहीं है. आजकल देश में प्रधानमंत्री सिंचाई योजना, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, मनरेगा, डिजिटल साक्षरता, डेरी योजना, मिट्टी की जांच व बीजों की परख, फसल बीमा योजना व कृषि उन्नति योजना आदि चल रही हैं, लेकिन इन के फायदों के साथसाथ तमाम अनसुलझे सवाल भी मौजूद हैं.

भोलेभाले किसान भारीभरकम बजट का हिसाब भले ही न जानते हों, लेकिन सरकारी दावों की जमीनी हकीकत बहुत अच्छी तरह से समझते हैं. लिहाजा उन के मसलों पर ध्यान देना जरूरी है. खेती में बढ़ती लागत पर काबू पाना जरूरी है. किसानों के कर्ज पर गौर करना भी जरूरी है. साथ ही सरकारी योजनाओं का असर दिखना भी बेहद जरूरी है, ताकि गांवों, गरीबों व किसानों के हालात सुधर सकें और उन की तसवीर बदल कर बेहतर हो सके.   

खेती जगत से जुड़े ये हैं अप्रैल के जरूरी काम

गरमी से भरपूर अप्रैल का महीना भी खेती किसानी के लिहाज से अन्य महीनों की तरह ही खास होता है. अप्रैलफूल से शुरू होने वाले इस महीने के मूर्ख बनाने वाले मकसद में ज्यादा किसानों की दिलचस्पी नहीं होती, मगर इस महीने का बैसाखी का त्योहार उन के लिए खास होता है. वैसे भी कुछ ही अरसा पहले आई होली को भी वे इतनी जल्दी नहीं भूलते और उसी नशे में अपने कामों में जुटे रहते हैं.

जश्न और मौजमजे से हट कर अप्रैल में रबी की तमाम फसलों की कटाई चालू हो जाती है और जायद की फसलें खेतों में शबाब पर पहुंच रही होती हैं. पेश है एक ब्योरा अप्रैल के दौरान होने वाले खेती से जुड़े खासखास कामों का :

* शुरुआत रोटी की फसल यानी गेहूं से करें तो अप्रैल तक गेहूं की फसल पक कर तैयार हो चुकी होती है. ऐसे में अप्रैल में गेहूं की कटाई का काम ही सब से ज्यादा जरूरी माना जा सकता है. गेहूं की कटाई खत्म करने के बाद जो सुकून किसानों को मिलता है, वह अनोखा होता है.

* बात गेहूं की कटाई पर ही नहीं थम जाती. गेहूं की फसल को बाकायदा सुखा कर उस की गहाई करना भी बेहद अहम होता है.

* आमतौर पर अपने गेहूं को किसान जल्दी से जल्दी बेच कर पैसे खड़े करने में यकीन करते हैं. सरकार भी बड़े पैमाने पर गेहूं की खरीद करती है. मगर दाम कम होने या किसी दूसरी वजह से गेहूं को फौरन न बेच कर उस का भंडारण करना पड़े तो उस के लिए नवीनतम तकनीक को अपनाना चाहिए.

* एक जमाने में भले ही चने की इज्जत नहीं थी और उसे नौकरचाकरों व गरीबों का अन्न माना जाता था, मगर अब चने के दिन फिर चुके हैं और उस की हैसियत किसी सुपर स्टार अनाज जैसी है. यह स्टार अनाज भी अप्रैल तक पक कर कटाई के लिए तैयार हो जाता है, लिहाजा इस की कटाई भी फटाफट निबटा लेनी चाहिए. आजकल कमाई के लिहाज से चने की फसल का गेहूं से कहीं ज्यादा रुतबा है.

*  चने की समय से बोई गई फसल तो अप्रैल में कटाई लायक हो जाती है, पर देरी से बोई गई फसल काटने लायक होने में कुछ और वक्त लगता है. अप्रैल के आसपास इस में दाने तो पड़ने लगते हैं, मगर कटाई की नौबत अगले महीने तक आती है.

* चने की देरी से बोई जाने वाली फसल की कटाई तो देरी से ही होगी, लेकिन इस की देखभाल में कोताही न बरतें. इस दौरान इस में फलीछेदक कीट के हमले का डर रहता है. अगर ऐसा अंदेशा लगे तो कृषि वैज्ञानिकों से राय ले कर मुनासिब दवा का इस्तेमाल करें.

* वैसे तो आजकल मौसम का कोई दीनईमान नहीं रह गया है यानी कभी भी जाड़ा, गरमी या बरसात का नजारा देखने को मिल सकता है, लेकिन मोटे तौर पर अप्रैल में बारिश नहीं होती है. अकसर अप्रैल के दौरान खेत सूखने लगते हैं, ऐसी हालत में गन्ने के खेतों में सिंचाई करते रहना चाहिए.

* सिंचाई के अलावा अपने गन्ने के खेत में सही तरीके से निराईगुड़ाई करें और खरपतवारों के प्रति सजग रहें, क्योंकि खरपतवार गन्ने की खुराक में हिस्सा बंटा लेते हैं.

* गन्ने के खेत की निराईगुड़ाई से पहले खेत में अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद व कंपोस्ट खाद डालें. केंचुआ खाद का इस्तेमाल भी कर सकते हैं. खाद डालने के बाद कायदे से निराईगुड़ाई करने से तमाम किस्म की खादें खेत की मिट्टी में अच्छी तरह मिल जाती हैं. इस से मिट्टी की पानी सोखने की कूवत में खासा इजाफा होता है. नतीजतन गन्ने ज्यादा बेहतर और रसीले होते हैं और उपज में भी इजाफा होता है.

* अप्रैल के दौरान ही बैसाखी की मूंग बोने का भी माकूल समय होता है. बोआई का यह काम मध्य अप्रैल तक निबटा लेना मुनासिब होता है.

* पिछले महीने बोई गई मूंग की भी खोजखबर लेते रहना चाहिए. आमतौर पर इस दौरान इसे सिंचाई की जरूरत पड़ सकती है. अगर मूंग के खेत सूखे होते नजर आएं तो बगैर वक्त बरबाद किए सिंचाई करें.

* गेहूंचना, दालचावल वगैरह इनसानों के लिए जरूरी होते हैं, तो जानवरों यानी मवेशियों को भी हमेशा चारे की दरकार रहती है. मवेशियों के चारे के लिए अप्रैल में बाजरा, मक्का व लोबिया वगैरह की बोआई की जा सकती है.

* 2 महीने पहले बोई गई चारे की फसलों को नाइट्रोजन की खुराक मुहैया कराएं. इस के लिए खेत में यूरिया खाद का इस्तेमाल करें और खेत में नमी बराबर बरकरार रखें.

* सूरजमुखी की फसल में अप्रैल तक फूल आने लगते हैं. इस दौरान खेत की निराईगुड़ाई करना बेहद जरूरी होता है. निराईगुड़ाई करने से फूलों की तादाद व क्वालिटी पर काफी असर पड़ता है.

* सूरजमुखी के खेत अगर सूख रहे हों, तो फौरन सिंचाई करें. पौधों की बढ़वार में कोई कसर नजर आए, तो यूरिया खाद का छिड़काव करें.

* अप्रैल के पहले हफ्ते के दौरान तुरई की नर्सरी डालें, ताकि सही वक्त पर पौध तैयार हो सकें. पिछले महीनों के दौरान डाली गई नर्सरी की पौध तैयार हो चुकी होगी, लिहाजा रोपाई का काम निबटाएं. रोपाई 50×100 सेंटीमीटर के फासले पर करें. रोपाई के बाद हलकी सिंचाई जरूर करें.

* अप्रैल में अरवी की अगेती किस्मों की बोआई का काम निबटा दें, ताकि समय पर फसल हाथ आ सके.

* अप्रैल में फूलगोभी की बीज वाली फसल कटाई लायक हो जाती है, लिहाजा इस की कटाई का काम खत्म करें. काटने के बाद फसल को सुखा कर बीज निकालें. बीजों को बाकायदा पैक कर के उन का भंडारण करें.

* साल की शुरुआत में नर्सरी में तैयार किए गए लौकी व करेले के पौधों की रोपाई करें. लौकी के पौधों की रोपाई 2×1 मीटर दूरी पर और करेले के पौधों की रोपाई 150×60 सेंटीमीटर के फासले पर करें.

* पिछले महीने रोपी गई बैगन की क्यारियों में निराईगुड़ाई करें. नमी कम लगे तो सिंचाई भी जरूर करें. बेहतर फसल के लिए यूरिया खाद का इस्तेमाल करें.

* अप्रैल तक गाजर व मूली की बीज वाली फसल कटाई के लिए तैयार हो जाती है, लिहाजा उस की कटाई करें. फिर फसल को सुखा कर बीज निकालें. बीजों को सही तरीके से सुखा कर पैक करें और फिर भंडारण करें.

* शिमला मिर्च के खेतों में निराईगुड़ाई कर के जरूरत के मुताबिक सिंचाई करें. नाइट्रोजन की कमी दूर करने के लिए यूरिया खाद का इस्तेमाल करें. इस से फसल उम्दा होगी.

* इसी महीने अदरक की बोआई का काम भी निबटाएं. बोआई के लिए करीब 20 ग्राम वजन के कंदों का इस्तेमाल करें. अदरक की बोआई 30-40 सेंटीमीटर की दूरी पर मेड़ें बना कर करें. 2 कंदों के बीच करीब 20 सेंटीमीटर का फासला रखें.

* अप्रैल के दौरान ही लहसुन की फसल की खुदाई का काम भी निबटाएं. खोदने के बाद फसल को 3 दिनों के लिए खेत में ही छोड़ दें. चौथे दिन फसल को छायादार जगह पर रखें और ठीक से सुखाएं. पूरी तरह सूखने के बाद ही लहसुन का भंडारण करें.

* आमखोर लोग अप्रैल से ही आमों की बाट जोहने लगते हैं. अपने आम के बागों की सिंचाई करें, ताकि नमी कायम रहे. पेड़ों पर बीमारियों या कीड़ों के लक्षण दिखाई दें तो फौरन कृषि वैज्ञानिक की राय से बचाव का इंतजाम करें.

* अपने अमरूद के बागों  की भी सफाई करें और जरूरत के हिसाब  से निराईगुड़ाई व सिंचाई करें. कीटबीमारियों के हमले नजर आएं तो उन का भी इलाज करें.

* ठंड का दौर थमने से मवेशियों को बेहद राहत मिलती है, मगर उन के प्रति लापरवाही न बरतें. कोई भी मौसम पशुओं को अपनी चपेट में ले सकता है, लिहाजा मौका निकाल कर माहिर डाक्टर से अपने मवेशियों की जांच कराएं.

* पशुओं का डाक्टर कोई दवा वगैरह बताए, तो उस के इस्तेमाल में लापरवाही न बरतें. पशुओं को जरूरी टीके वगैरह लगवाने में कोताही नहीं बरतनी चाहिए.

* भारीभरकम मवेशियों के साथसाथ छोटेमोटे मुरगामुरगी व चूजों का भी पूरा खयाल रखना लाजिम है, लिहाजा पशुओं के डाक्टर से उन की भी जांच कराएं.

शिक्षा और परीक्षा

मैरिट पर ही शिक्षा संस्थानों में दाखिला मिलने और सरकारी नौकरी मिलने की मांग आरक्षण विरोधियों द्वारा की जा रही है पर परीक्षाओं में धड़ाधड़ नकल, पेपर लीक होना और कोचिंग कक्षाओं में परीक्षा का प्रश्नपत्र ही खोल देना मैरिट के तर्क की धज्जियां उड़ा देता है. देशभर के परीक्षा केंद्र छावनियां बन जाते हैं पर फिर भी नकल इस बुरी तरह होती है कि लगता ही नहीं कि परीक्षा देने वाले कुछ तैयारी कर के आते हैं. परीक्षा देने के दिनों में पहले से अगर प्रश्नपत्र लीक हो जाए तो भी ज्यादातर छात्रों को चिटें साथ ले जानी पड़ेंगी क्योंकि प्रश्न मालूम होने पर भी वे उत्तर याद नहीं रख पाएंगे. अगर प्रश्नपत्र परीक्षा हाल में ही मिले तो उसे पहले स्मगल कर के बाहर लाना और फिर उस के उत्तर परीक्षार्थी तक पहुंचाना खासा टेढ़ा काम है मगर इस में अब विशेषज्ञ तक उतर आए हैं. वे मोटी रकम ले कर यह करतूत करते हैं.

मैरिट की मांग की प्रतिष्ठा उस समय ही समाप्त हो जाती है जब पता चलता है कि परीक्षाओं में मैरिट का मूल्य तो बहुत कम है. पहली बात तो यह है कि जो पढ़ाया जा रहा है और उस पढ़ाई पर जो प्रश्न पूछे जा रहे हैं, वे असल में हैं किस काम के. हमारी शिक्षा व परीक्षा प्रणाली आज भी बेहद दकियानूसी, अंधविश्वासी लकीर की फकीर है. आधुनिकीकरण के नाम पर हाल के दशकों में जो किया गया है वह शिक्षा और परीक्षा को कठिन बनाने के लिए षड्यंत्र के रूप में किया गया है ताकि पहली, दूसरी पीढ़ी के साधारण घरों के बच्चे उसे समझ ही न पाएं और कम पढ़े मातापिताओं के बच्चे शिक्षा परीक्षा छोड़ कर छोटीमोटी नौकरियां ही करते रहें.परीक्षाओं में धांधलियां होती ही इसलिए हैं कि जो पूछा जाता है वह इतना क्लिष्ट व अव्यावहारिक होता कि साधारण छात्र उसे हल कर ही नहीं सकते और इसलिए परीक्षाएं नकल के कारण निरर्थक हो गई हैं. यह स्थिति सुधरने वाली नहीं है. शिक्षा का  व्यावसायीकरण इस तरह हो गया है कि परीक्षा में अच्छे अंक पाने वालों को तो सिर्फ कोचिंग कक्षाओं वाले हार पहनाते हैं ताकि उन के बहाने नए छात्रों को आकर्षित किया जा सके.ऐसे माहौल में आरक्षण विरोधियों की मैरिट की मांग का क्या अर्थ रह जाता है. परीक्षाएं तो जुआ या पहुंच वालों के लिए बैरियर हैं, मेधावी युवाओं का चयन करने का काम तो बस अनायास हो जाता है. 

इंग्लैंड के इस क्रिकेटर को वेस्टइंडीज से मांगनी पड़ी माफ़ी

वेस्टइंडीज के खिलाड़ियों को दिमाग से पैदल कहने वाले इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेटर मार्क निकोलस ने आज वेस्टइंडीज के कप्तान डेरेन सैमी और उनके खिलाडियों से अपने इस बयान के लिए बिना शर्त माफी मांगी है. बता दे की वर्ल्ड टी20 में फाइनल मुकाबले से पहले नाराज और भावुक सैमी ने इस बयान के बारे में उल्लेख भी किया था. और खिताबी मुकाबले में इंग्लैंड को हराकर वेस्टइंडीज टीम ने निकोलस को करारा जवाब दिया है.

इसके बाद निकोलस ने अपने बचाव में सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने वेस्टइंडीज को ‘बिना दिगाम वाला' नहीं कहा था जैसा कि समझा गया लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने कुछ ऐसा लिखा जो खेल के लायक नहीं था और शानदार क्रिकेट विरासत का अपमान था. निकोलस ने अपने कालम में लिखा, मैं डेरेन सैमी से माफी मांगता हूं, ऐसा व्यक्ति जिसका मैं काफी सम्मान करता हूं.

दो जासूस और अनोखा रहस्य- भाग 1 और 2

‘’साहिल, उठो, आज सोते ही रहोगे क्या ’’

अनीता की आवाज सुन कर साहिल उनींदा सा बोला, ‘‘क्या मां, तुम भी न, आज छुट्टियों का पहला दिन है. आज तो चैन से सोने दो.’’

‘‘ठीक है, सोते रहो, मैं तो इसलिए उठा रही थी कि फैजल तुम से मिलने आया था. चलो, कोई बात नहीं, उसे वापस भेज देती हूं.’’ फैजल का नाम सुनते ही साहिल झटके से उठा, ‘‘फैजल आया है  इतनी सुबहसुबह, जरूर कोई खास बात है. मैं देखता हूं,’’ वह उठा और दौड़ता हुआ बाहर के कमरे में पहुंच गया.

‘‘क्या बात है, फैजल, कोई केस आ गया क्या ’’

‘‘अरे भाई, केस से भी ज्यादा धांसू बात है मेरे पास,’’ हाथ में पकड़ी चिट्ठी को लहराते हुए फैजल बोला, ‘‘देखो, अनवर मामूजान का लैटर आया है, वही जो रामगढ़ में रहते हैं. उन्होंने छुट्टियां बिताने के लिए हम दोनों को वहां बुलाया है. बोलो, चलोगे ’’

‘‘नेकी और पूछपूछ  यह भी कोई मना करने वाली बात है भला. वैसे भी अगर हम ने मना किया, तो मामू का दिल टूट जाएगा न,’’ कहतेकहते साहिल ने ऐसी शक्ल बनाई कि फैजल की हंसी छूट गई.

‘‘अच्छा, जाना कब है  तैयारी भी तो करनी होगी न ’’ साहिल ने पूछा.

‘‘चार दिन बाद मामू के एक दोस्त अब्बू की दुकान से कपड़ा लेने यहां आ रहे हैं. 2 दिन वे यहां रुकेंगे और वापसी में हमें अपने साथ लेते जाएंगे,’’ फैजल ने बताया.

‘‘हुर्रे…’’ साहिल जोर से चिल्लाया, ‘‘कितना सुंदर है पूरा रामगढ़. वहां नदी में मछलियां पकड़ना और स्विमिंग करना, सारा दिन गलियों में मटरगश्ती करना, मामू की खुली गाड़ी में खेतों के बीच घूमना और सब से बढ़ कर मामी के बनाए स्वादिष्ठ व्यंजन खाना. इस बार तो छुट्टियों का मजा आ जाएगा.’’

साहिल और फैजल दोनों बचपन के दोस्त थे. दिल्ली के मौडल टाउन इलाके में वे दादादादी के समय से बिलकुल साथसाथ वाली कोठियों में दोनों परिवार रहते आ रहे थे. दोस्ती की यह गांठ तीसरी पीढ़ी तक आतेआते और मजबूत हो गई थी. दोनों को एकदूसरे के बिना पलभर भी चैन नहीं आता था. लगभग एक ही उम्र के, एक ही स्कूल में 10वीं क्लास में पढ़ते थे दोनों. साहिल एकदम गोराचिट्टा और थोड़ा भारी बदन का था. उस की गहरी, काली आंखें और सपाट बाल उस के अंडाकार चेहरे पर खूब फबते थे. ऊपर से वह चौकोर फ्रेम का मोटे शीशे वाला चश्मा पहनता था जो उस की पर्सनैलिटी में चार चांद लगा देता था.

दूसरी तरफ फैजल एकदम दुबलापतला था और उस के गाल अंदर पिचके हुए थे. उस के घुंघराले ब्राउन बाल थे और आंखें गहरी नीली. सांवला रंग होने के बावजूद उस के चेहरे में ऐसी कशिश थी कि देखने वाला देखता ही रह जाता था.

दोनों को बचपन से ही जासूसी का बड़ा शौक था. दोनों का एक ही सपना था कि बड़े हो कर उन्हें स्मार्ट और जीनियस जासूस बनना है इसीलिए हर छोटीबड़ी बात को बारीकी से देखना उन की आदत बन गई थी. एक बार पड़ोस के घर से कुछ सामान चोरी हो जाने पर दोनों ने खेलखेल में जासूस बन कर चोरी की तहकीकात कर कुछ ही घंटे में जब घर के माली को सुबूतों सहित चोर साबित कर दिया था, तोे सब हैरान रह गए थे. घर वालोें के साथसाथ पुलिस इंस्पैक्टर आलोक जो उस केस पर काम कर रहे थे, ने भी उन की बड़ी तारीफ की थी. फिर तो छोटेमोटे केसों के लिए इंस्पैक्टर उन्हें बुला कर सलाह भी लेने लगे थे.

साहिल के घर के पिछवाड़े एक छोटा सा कमरा था जिसे उन्होंने अपनी वर्कशौप बना लिया था. एक आधुनिक कंप्यूटर में अपराधियों की पहचान करने से संबंधित कई सौफ्टवेयर उन्होंने डाल रखे थे, जो केसों को सौल्व करने में उन के काम आते थे.

कंप्यूटर के अलावा उन के पास स्पाई कैमरे, नाइट विजन ग्लासेज, मैग्नीफाइंग ग्लास, स्पाई पैन, पावरफुल लैंस वाली दूरबीन और लेटैस्ट मौडल के मोबाइल भी थे जो समयसमय पर उन के काम आते थे. उन के जासूसी के शौक को देखते हुए साहिल के बैंक मैनेजर पिता ने बचपन से ही उन्हें कराटे की ट्रेनिंग दिलवानी शुरू कर दी थी और 8वीं क्लास तक आतेआते दोनों ब्लैक बैल्ट हासिल कर चुके थे.

अनवर मामूजान के यहां वे दोनों पहले भी एक बार जा चुके थे और दोनों को वहां बड़ा मजा आया था. सो इस बार भी वे वहां जाने के लिए बड़े उत्साहित थे. सोमवार की सुबह खुशीखुशी घर वालों से विदा ले कर दोनों गाड़ी में बैठे व रामगढ़ के लिए रवाना हो गए.

जब वे रामगढ़ पहुंचे तो उस समय शाम के 4 बज रहे थे. हौर्न की आवाज सुनते ही उन के मामूजान अनवर और मामी सकीना अपने दोनों बच्चों जुनैद और जोया के साथ गेट पर आ खड़े हुए. दोनों बच्चे दौड़ कर उन से लिपट गए, ‘‘भाईजान, आप हमारे लिए क्या गिफ्ट लाए हैं ’’ 9 साल की जोया ने पूछा.

‘‘आप अपने वे जादू वाले पैन और कैमरे लाए हैं कि नहीं  मैं ने आप को फोन कर के याद दिलाया था,’’ 11 साल का जुनैद अधीरता से बोला.

‘‘अरे भई, लाए हैं, सबकुछ लाए हैं, पहले घर के अंदर तो घुसने दो,’’ फैजल हंसते हुए बोला, ‘‘आदाब मामू, आदाब मामीजान.’’

‘‘अरे मामू, आप आज क्लिनिक नहीं गए ’’ अनवर मामू के पैर छूने को झुकता हुआ साहिल बोला.

‘‘नहीं, तुम दोनों के आने की खुशी में जनाब क्लिनिक से छुट्टी ले कर घर में ही बैठे हैं,’’ मुसकराते हुए सकीना मामी बोलीं, ‘‘चलो, अंदर चल कर थोड़ा फ्रैश हो लो तुम लोग, फिर गरमागरम चायनाश्ते के साथ बैठ कर बातें करेंगे.’’

अनवर मामू का घर पूरी हवेली थी. वे फैजल की अम्मी सायरा के चचेरे भाई थे. रामगढ़ में उन की बहुत सी पुश्तैनी जमीनजायदाद और खेत वगैरा थे सो वे यहीं रह कर अपनी डाक्टरी की प्रैक्टिस करते थे.

अगले दिन सब लोगों ने खूब सैरसपाटा और मौजमस्ती की. दिनभर के थकेमांदे साहिल और फैजल घर आते ही सो गए. अगले दिन उन की आंख काफी देर से खुली. वे उठ कर ड्राइंगरूम में आए तो सकीना मामी दोनों बच्चों को नाश्ता करा रही थीं.

‘‘उठ गए तुम लोग, चलो, मुंहहाथ धो कर आ जाओ. तुम्हारा भी नाश्ता लगा देती हूं.’’

‘‘मामू, कहां हैं मामी  आज जल्दी क्लिनिक चले गए क्या ’’ उबासी लेते हुए फैजल ने पूछा.

‘‘अरे नहीं, सुबहसुबह एक फोन आया और उसे सुन कर बड़ी हड़बड़ी में बिना कुछ बताए चले गए, लेकिन अब तो उस बात को काफी देर हो गई. बस, आते ही होंगे.’’

‘‘अरे, तो आप ने पूछा नहीं कि कहां जा रहे हैं ’’

‘‘चिंता की कोई बात नहीं है साहिल, अकसर मरीजों के ऐसे फोन आते रहते हैं. किसी की तबीयत ज्यादा खराब हो गई होगी, तो उस ने बुलाया होगा…’’ उन की बात अभी पूरी भी नहीं हुई थी कि अनवर मामा आते दिखाई दिए. उन के चेहरे की हवाइयां उड़ी हुई थीं, वे काफी परेशान दिखाई दे रहे थे. आते ही वे धम्म से सोफे पर गिर पड़े.

‘‘क्या बात है अनवर, क्या हुआ ’’ सकीना ने घबरा कर उन से पूछा.

टेबल पर रखा पानी का गिलास उठा कर एक ही सांस में खाली करने के बाद अनवर बोले, ‘‘पुरानी कोठी वाले अजय का किसी ने कत्ल कर दिया है, मैं अभी वहीं से आ रहा हूं.’’

‘‘क्या…’’ सब के मुंह से एकसाथ निकला.

‘‘पुरानी कोठी  लेकिन पिछली बार जब हम आए थे तो वह खाली थी शायद, वहां कोई नहीं रहता था,’’ साहिल ने कुछ सोचते हुए पूछा.

‘‘हां, हम लोग उस के बाहर काफी देर घूमते भी रहे थे. मुझे अच्छी तरह याद है,’’ फैजल बोला.

‘‘तुम ठीक कह रहे हो फैजल. दरअसल, ये लोग यहां 2 साल पहले ही आए हैं. बस, मियांबीवी 2 लोग ही तो थे. दोनों अपनेआप में ही मगन रहते थे, किसी से ज्यादा मिलतेजुलते भी नहीं थे.’’

‘‘लेकिन कत्ल हुआ था, तो वे पुलिस को बुलाते. आप को क्यों बुलाया ’’ सकीना की हैरत अभी भी कम नहीं हो रही थी.

‘‘मुझे उन लोगों ने नहीं, पुलिस ने ही बुलाया था. वैसे तो लाश की हालत से ही साफ पता चल रहा था कि खून हुए कुछ घंटे बीत चुके हैं, लेकिन फिर भी फौर्मैंलिटी पूरी करने के लिए डाक्टरी सर्टिफिकेट की जरूरत होती है. मैं तो यह सोच कर हैरान हूं कि हमारे रामगढ़ में जहां सब लोग इतनी शांति और प्यार से रहते हैं, ऐसा काम कोई कैसे कर सकता है,’’ कहते हुए अनवर की आवाज से हैरानी साफ जाहिर हो रही थी.

उन की बातें सुन कर साहिल और फैजल की आंखों में एक अजीब सी चमक उभर आई. उन्होंने आंखों ही आंखों में एकदूसरे को इशारा किया और उठ कर अनवर मामूजान के पास आ कर बैठ गए. फैजल ने बोलना शुरू किया, ‘‘मामूजान, क्या हम भी आप के साथ वहां एक बार चल सकते हैं प्लीज  आप को तो पता ही है न कि हमें ऐसे केस सौल्व करने का कितना शौक है.’’

काफी देर नानुकर करने के बाद आखिर अनवर को उन की जिद के आगे हथियार डालने ही पड़े, ‘‘ठीक है, मैं अपने दोस्त पुलिस कमिश्नर से बात करता हूं. तुम जल्दी से तैयार हो जाओ.’’

आधे घंटे बाद जब वे घर से निकले तो साहिल और फैजल के दिलोदिमाग में एक अजीब सा रोमांच था. गाड़ी रानी चौक के चौराहे से दाईं ओर मुड़ी तो फैजल चौंकते हुए बोला, ‘‘लेकिन मामू, पुरानी कोठी तो दूसरी तरफ है ’’

‘‘मर्डर उन के घर में नहीं, कहीं और हुआ है. अजय पिछले एक हफ्ते से लापता थे. पिछले मंगलवार को अजय की पत्नी यास्मिन ने थाने में रिपोर्ट लिखवाई थी और पुलिस उन्हें तलाश कर रही थी. आज सुबहसुबह 2-3 लोग राम बाजार के पीछे वाली गली से गुजर रहे थे. गली के आखिरी कोने पर एक अस्तबल है जो बरसों से खाली पड़ा है और जहां कभीकभार भिखारी या नशेड़ी आ कर डेरा जमा लेते हैं. उसी अस्तबल में उन्हें अजय की लाश पड़ी दिखाई दी. डरेसहमे उन लोगों ने तुरंत पुलिस को खबर की. यहां के थाना इंचार्ज इंस्पैक्टर राजेश इस केस को देख रहे हैं. सब से अजीब बात यह है कि मरतेमरते अजय एक संदेश भी छोड़ गए हैं.

आमतौर पर ऐसी स्थिति में मरने वाला खूनी का नाम लिखने की कोशिश करता है, पर अजय ने जो लिखा है वह तो किसी कोड जैसा लग रहा है. न जाने किस के लिए यह अजीब और गुप्त संदेश छोड़ा है अजय ने.’’

‘‘क्या संदेश है वह मामू ’’ दोनों ने उत्सुकता से पूछा.

‘‘तुम खुद ही पहुंच कर देख लेना,’’ मामू ने कहा.

गाड़ी घटनास्थल की ओर बढ़ रही थी.

(क्रमश:)    

शादी से पहले जडेजा को ससुर ने गिफ्ट में दी 1 करोड़ की कार

टीम इंडिया के ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा इसी महीने शादी के बंधन में बंधने वाले हैं. ऐसे में उनके होने वाले सुसर ने उन्‍हें 1 करोड़ रुपये की कीमत वाली ऑडी क्यू-745 उपहार में दी है. इस दौरान जडेजा की मंगेतर भी उनके साथ ऑडी के शोरूम में मौजूद रहीं.

भारतीय टीम के ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा के ससुर हरदेव सिंह ने उन्‍हें एक शानदार उपहार दिया. राजकोट के बड़े बिजऩेसमैन हरदेव सिंह ने जडेजा और अपनी बेटी रिवाबा को 1 करोड़ रुपये की कीमत वाली ऑडी क्यू-745 तोहफे में दी. इस दौरान शोरूम में मंगेतर रिवाबा के साथ रवींद्र जडेजा काफी खुश नजर आ रहे थे.

ससुर हरदेव सिंह से तोहफा मिलने के बाद रवींद्र जडेजा ने अपने हंसने हंसाने वाले व्यवहार का परिचय दिया. जडेजा का कहना था ऐसे ससुर सबको मिले. वह अपनी ए-फोर मॉडल की ऑडी को बदलने के मूड में थे, लेकिन अच्‍छा हुआ की अब उन्‍हें ससुर जी की ओर से बेहतर मॉडल की गाड़ी मिल गई. जो होता है सब अच्‍छे के लिए ही होता है.

रवींद्र जडेजा की इसी महीने 17 तारीख को मंगेतर रिवाबा के साथ शादी होने वाली है. जिससे दोनो के परिवार शादी की तैयारियों में व्‍यस्‍त हैं. रवींद्र जडेजा की रीवाबा के साथ दो महीने पहले ही इंगेजमेंट हुई है. रीवाबा ने अभी हाल ही में आत्मीय इंस्टीट्यूट से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है. इन दिनों वह दिल्ली में आईएएस परीक्षा की तैयारी कर रही हैं. वह और रवींद्र जडेजा काफी समय से एक दूसरे को जानते हैं.

गौरतलब है कि अभी रवींद्र जडेजा से पहले क्रकेटर युवराज सिंह ने मॉडल-अभिनेत्री हेजल कीच से सगाई रचाई है. सबसे खास बात तो यह है कि रिवाबा को क्रिकेट खेलना नहीं पसंद हैं. वह इसे समय की बर्बादी मानती हैं.

वकार युनूस ने पाकिस्तान के मुख्य कोच का पद छोड़ा

वकार युनूस ने पाकिस्तान क्रिकेट टीम के मुख्य कोच के पद से इस्तीफा दे दिया और कहा कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने उनकी सिफारिशों पर ध्यान नहीं दिया जिससे टीम आगे नहीं बढ़ सकी. शाहिद अफरीदी ने टी-20 वर्ल्ड कप में टीम के खराब प्रदर्शन के कारण कप्तानी छोड़ दी थी. पाकिस्तान ग्रुप चरण में सिर्फ एक मैच जीत सका.

वकार ने कहा कि मैं भारी मन से अपने पद से इस्तीफा दे रहा हूं. मैंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि बोर्ड ने 2015 वर्ल्ड कप के बाद मेरी सिफारिशों को संजीदगी से नहीं लिया. दो साल पहले दूसरी बार कोच बने वकार ने कहा था कि वह खलनायक बनकर विदा नहीं लेना चाहते. वह पहले 2010-11 में कोच थे. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को उनकी सिफारिशों पर अमल करना चाहिए. वकार के करार के अभी तीन महीने बाकी थे.

उन्होंने कहा कि मैं चाहता हूं कि मेरी सिफारिशों पर अमल हो. मैंने 2015 में जब सिफारिशें दी थी, तब उन पर अमल नहीं किया गया. उनकी रिपोर्ट का एक हिस्सा मीडिया को लीक हो गया. उन्होंने चयन प्रक्रिया में उन्हें शामिल नहीं करने के पीसीबी के फैसले की आलोचना की थी और अफरीदी की कप्तानी पर भी सवाल उठाए थे.

उन्होंने कहा कि हम न्यूजीलैंड से हारे, एशिया कप और टी20 वर्ल्ड कप भी खराब कप्तानी के कारण हारे. मैंने कई बार कहा है कि शाहिद अफरीदी बल्ले, गेंद से या बतौर कप्तान कोई योगदान नहीं दे पा रहे लेकिन मेरी किसी ने नहीं सुनी.

पीसीबी वकार के विकल्प की तलाश कर रही है लेकिन एक सूत्र ने बताया कि नए कोच के चयन के लिए उचित प्रक्रिया अपनाई जाएगी क्योंकि अब पाकिस्तानी टीम को सीधे जुलाई में इंग्लैंड का दौरा करना है. अधिकारी ने कहा कि इस बार कोई जल्दी नहीं है. हम पूरा समय लेकर फैसला लेंगे. पद के लिए विज्ञापन दिया जाएगा ताकि विदेशी और देशी उम्मीदवार आवेदन भेज सकें.

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